Erotica मोहे रंग दे - Page 46 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Erotica मोहे रंग दे

बहुत बहुत धन्यवाद आपका यहाँ आने का, आप शुरू से ही इस कथा यात्रा के नियमित सहयात्री रहे हैं, पर दो तीन बातें

अगर कहानी रुकेगी भी तो हो सकता है , एक थोड़े से बदले कलेवर में दूसरे भाग में आये,

दूसरा पिछले कई महीने से , जैसे मैं पिछले पांच पेज यानी १९१ से १९५ यानी पचास पोस्ट का उदाहरण दूँ , तो उसमें मात्र १०-१२ कमेंट्स हैं पढ़ने वालों के यानी करीब ८० % पोस्ट्स मेरी, कहानी की , जवाब की और मात्र २० % पाठकों के, ... बार बार मैंने कहा है की किसी भी कहानी कहने वाले को

चाहे वो सर्दी की रात में जलते अलाव के किनारे, कहानी सुनाने वाला हो,

कोई पुराने जमाने का दास्तान गो हो

और, या ये नाचीज़ बंदी हो,...

हुंकारी भरने वाला चाहिए,... जब हुंकारी आनी बंद हो जाये,... अलाव की आग ठंडी पड़ने लगे, लगे की सब सुनने वाले सो गए हैं , निन्दासे हो गए हैं , जम्हाई ले रहे हैं तो बस किस्सा सुनाने वाला वहीँ कहानी रोक देता है, और अगर कोई सुनने वाला न भी बचा हो तो खुद से बोलता है,

बाकी कहानी कल, और अलाव की आग ठंडी कर, कंबल ओढ़ वहीँ सो जाता है,...

बस मैं यही कहूँगी,...

एक न एक शम्मा जलाये रखिये, सुब्ह होने को है , माहौल बनाये रखिये,

कितने दिए थक कर बुझ जाएंगे, ... कितनों की लौ बस टिमटीमाती रहेगी, और कितने नए दिए भी जलेंगे, कहानियों की यह दिवाली जलती रहेगी, चलती रहेगी।
 
आक्रोश नहीं, बस अवसाद और अहसास, अकेलेपन का अहसास,...

और हाँ कहानी के बारे में जो आपने कहा, मैं सिर्फ इसे आपका रस सिद्ध होना मानती हूँ ,

यह कहानी थोड़ी अलग थी. घटना प्रधान होने की जगह विवरण प्रधान, एक नक्शा खींचने पर जहाँ ज्यादा जोर था,

रोमांस भी शादी के बस पहले और ज्यादा प्यार शादी के बाद, एक परपंरागत परिवार, और नए दम्पति की कहानी,

उन दोनों के एक दूसरे के रंग में रंगने की कहानी, सिर्फ पति ही पत्नी के प्यार में उसके रंग में नहीं रंगा बल्कि पत्नी भी और सिर्फ पति ही नहीं बल्कि पूरे ससुराल के रंग में रंग गयी,

कहानी का कलेवर भी परिवार के दायरे में सिमित, इसलिए घटनाएं और घटना स्थल का दायरा भी सीमित था , ( हाँ बाद में होली और होली से जुड़े दृश्यों पर होली का असर जरूर पड़ गया ), अभी कहानी आलरेडी एक हजार पृष्ठों के ऊपर पहुँच चुकी है एक उपन्यास के कलेवर की तरह,...

तो इसे और आगे, यह कहानी जिस रूप में है, ' मोहे रंग दे ', के रूप में, साजन के सजनी के रंग में , सजनी के साजन के रंग में रंगने के, उस रूप में आगे बढ़ाना असम्भव नहीं तो दुरूह अवश्य है।

आपने हरदम साथ दिया इस कथा यात्रा में और बाकी कहानियों में भी, न आपसे न बाकी पाठकों से मुझे कोई गिला शिकवा है, यह कहानी का कलेवर और रूप ऐसा है, और आप जानते हैं मैं कहानी के पात्रों से भी समझौता नहीं करती,

और हाँ अभी कुछ और पोस्ट्स बाकी है, साथ बनाये रखिये ,

आखिरी शब के हमसफ़र फैज न जाने क्या हुए सबा कहां रह गयी सुबह किधर निकल गयी।
 
गुड्डी से जुडी हुयी जोरू का गुलाम और सोलहवां सावन भी हैं , मेरी कहानियां जो अभी चल रही हैं और चलती रहेंगी, इस थ्रेड के साथ उन दोनों थ्रेडों पर भी आप का स्वागत है, जोरू का गुलाम और सोलहवा सावन में आपके कमेंट की प्रतीक्षा रहेगी, एक बार फिर से स्वागत और इस बात के लिए आभार की अपने पहला कमेंट इस थ्रेड पर दिया,
 
रीत

download.png


ये तो घोड़े बेचकर सो गए थे, मैं सोच सोच कर मुस्करा रही थी बीती रात इनकी इनके बहन के साथ कुश्ती लड़ने में बीती, कल की रात मेरी बहन के साथ कुश्ती लड़ने में बीतेगी, ... कल शाम तक हम का घर पहुँच जाएंगे,... मंझली का तो हाईस्कूल का पेपर चल रहा है, परसो आखिरी पेपर है, ... और सेंटर बनारस में है तो वो तो वहीँ रहेगी, परसों शाम को आ जाएगी, ... होली के पहले,... लेकिन छोटी साली, छुटकी तो कल रहेगी ही इनकी रगड़ाई के लिए , फिर इनकी सलहज, सास. ...

इन्होने जो पेपर, बल्कि कांसेप्ट पेपर भेजा था, मैं उसी को पढ़ रही थी, एक बार तो पहले भी पढ़ चुकी थी, बस दूसरी बार, अबकी थोड़ा ज्यादा ध्यान से देख रही थी, वही कन्वर्जेंस का, आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस, बिग डाटा, क्वांटम कम्प्यूटिंग, नैनो टेक्नोलोजी , और भी बहुत कुछ था,... तभी मेरा फोन घनघनाया, ... फिर दुबारा, जैसे कट जा रहा फिर दुबारा लग रहा हो, ... और जब तीसरी बार यही हुआ तो मैं समझ गयी, और कागज पटक कर, मोबाइल अपना खोल लिया,...

मैं समझ गयी ये आकशवाणी कहाँ से हो रही है, ...

रीत का मेसेज था, और वो बात करना चाहती थी, ...

बताया तो था आपको रीत के बारे में , अरे जब ये फॉरेन गए थे अपनी ट्रेनिंग में, कांफ्रेंस में एमस्टर्डम में, इन्होने फोन पर पहले तो इतना ही वहां से बताया था,

" " नाम उसका , ... हाँ , नवरीत देवल , ...एक पक्की पंजाबी जट्टन , लेकिन उसकी आवाज में एकबार मुझे बनारसी बोली की झलक मिल रही थी , ... हम लोग एक कांफ्रेंस में थे बस मैंने पूछ दिया , ... बस , एक जोर की किक , ...टेबल के नीचे से मुझे लगी ,... मेरे कुछ समझ में नहीं आया , ... मीटिंग के बाद , जब हम उठे तो मैं पैर सहला रहा था , ...

वो बोली , " ज्यादा जोर से तो नहीं लगी ,... "

मैं क्या बोलता , वो बोले लगी तो उन्हें जोर से थी , ..ऊपर से हंसती वो लड़की बोली , ... शाम को घर आना , उसने अपना ऐड्र्स दे दिया ,

उनके कुछ समझ में नहीं आया और पूछा तो जोर से डांट पड़ी ,

,

" तुम बहुत हैंडसम हो , स्मार्ट समझते हो , ज्यादा कन्फ्यूजन में मत रहो ,..सात बजे आ जाना , यहाँ तुम्हे जल्दी इंडियन फूड नहीं मिलेगा ,... "

जितने दिन वहां एम्स्टर्डम में रात का खाना उसी के यहां , ...हाँ डांट भी बहुत पड़ती थी , ... और उसने कारण भी बता दिया , ... उसका बनारस से कनेक्शन था

बस वही रिश्ता , मैं भी तो बनारस के पास के गांव की , बस उसी रिश्ते से छोटी बहन , ... और उस रिश्ते से सिर्फ उन्हें नहीं उनकी बहनों को भी खूब गाली मिलती थी लेकिन जाते थे वो क्योंकि खाना अच्छा बनाती थी और उसने ये भी बोल दिया था की आगे से कहीं उसके बनारस के कनेक्शन की बात न करे , वरना वो किक सिर्फ नमूने वाली थी , ...

एक बात और ,... उसने बोल दिया था ,...जब वो लोग उसके घर हों तो उसे सिर्फ रीत कहें वो , नवरीत देवल नहीं। हाँ बाहर सिर्फ नवरीत।

बाद में तो बहुत कुछ पता चला मेरी एक भाभी हैं बनारस की वहीँ सिगरा की, दुबे भाभी उनकी बड़ी बहन सी थीं और वो दूबे भाभी रीत की,... लेकिन अब बात को शार्ट करती हैं बस ये समझ लीजिये बनारस के रिश्ते से मैं उसकी छोटी बहन हो गयी थी और ये बस बिना गाली वो भी असली गन्दी वाली गाली के इनसे बात नहीं करती थी, ... भले ही छोटे सही, लगे तो उसके जिज्जा ही, ...

लेकिन असली बात थी उसकी दिमाग की, लोग कहते हैं की चाचा चौधरी का दिमाग कम्यूटर से भी तेज चलता है,

और रीत का हर जानने वाला कहता है , की रीत का दिमाग चाचा चौधरी से भी तेज चलता है, ...
 
रीत की रीत

बाद में तो बहुत कुछ पता चला मेरी एक भाभी हैं बनारस की वहीँ सिगरा की, दुबे भाभी उनकी बड़ी बहन सी थीं और वो दूबे भाभी रीत की,... लेकिन अब बात को शार्ट करती हैं बस ये समझ लीजिये बनारस के रिश्ते से मैं उसकी छोटी बहन हो गयी थी और ये बस बिना गाली वो भी असली गन्दी वाली गाली के इनसे बात नहीं करती थी, ... भले ही छोटे सही, लगे तो उसके जिज्जा ही, ...

लेकिन असली बात थी उसकी दिमाग की, लोग कहते हैं की चाचा चौधरी का दिमाग कम्यूटर से भी तेज चलता है,

और रीत का हर जानने वाला कहता है , की रीत का दिमाग चाचा चौधरी से भी तेज चलता है, ...

साइबर सिक्योरटी, हैकिंग, ब्लैक हैट व्हाइट हैट से बहुत ऊपर, वो कहती थी साइबर वर्ड की मैं अघोरी हूँ, ... और सच में उसका नाम लेते ही,...

मैं भी न कहाँ,... बात कहाँ की कहाँ पहुँच जाती है,...

तो ये घण्टियाँ रीत का सिग्नेचर ट्यून थीं , और उससे बात करने के लिए मुझे वीपीन, डार्क वेब और ढेर सारी बातें इस्तेमाल करनी पड़ती थीं तो सब से पहले मैंने वर्चुअल की बोर्ड खोला, वरना सबसे पहले फिंगर प्रिंट्स तो की बोर्ड के ही हो जाते हैं,... और ये वर्चुअल की बोर्ड भी एक क्लाउड सर्वर पर आपरेट होता था , यानी डिवाइस को आप लाख उलट पलट लें न तो भी कुछ पता नहीं चलने वाला, उसके बाद बायोमेट्रिक्स और प्रेशर पेड यानी एक किसी ऊँगली का प्रेशर बाकी से कम ज्यादा होने पर अंदाज लगा जाता था की आप अपनी मर्जी से नहीं खोल रहे हो बस , ताला बंद तो बंद.

और डार्क वेब का दरवाजा खुलने पर भी उसने अच्छे खासे तगड़े पहरेदार बैठा रखे थे,... लेकिन जिसे रास्ता पता हो,... साढ़े चार मिनट बाद उसकी आवाज सुनाई पड़ी,

जैसा की परंपरा है , पहले उसने इनको दस गालियां सुनाई और मुझे दस नुस्खे बताये की ससुराल में इनके साथ क्या सलूक किया जाय, असली बात ये थी उसे मालूम था की हम लोग एक दिन बनारस भी जाएंगे और दूबे भाभी से भी मिलेंगे। बस उसने ये बोला की हम लोग दूबे भाभी के यहाँ ज्यादा समय गुजारें, उन्हें रीत के बारे में बस इतना बताएं की वो ठीक है, खुश है और तगड़ी है. और उस से भी बढ़ कर उस के बारे में दूबे भाभी से, उस के बनारस के समय के बारे में ज्यादा न पूछें।

थोड़ी देर हम चुप बैठे रहे, मैं रीत से कभी मिली नहीं थी, लेकिन लगता था हम लोग कितने जन्मों की सहेली हैं,

फिर वो चालू हो गयी, वो पेपर पढ़ा.

अच्छी बच्ची की तरह मैं बोली, हाँ वही पढ़ रह थी।

फोन उसने उसके लिए भी किया था लेकिन मैंने एक सवाल कर दिया , और उस का जवाब उसने खिलखिलाते हुए दिया ,

मैंने अपनी तेरी ननदों के लिए जो खेल खिलौने भेजे थे वो ज़रा ले आओ.

( जब ये एम्स्टर्डम गए थे तो वहां ढेर सारे सेक्स ट्वायज ले आये थे)

डबल डिल्डो, सुपर डिल्डो १२ इंच का, कई साइज के स्ट्रैप आन डिल्डो,...
 
खेल खिलौने

butt-toy.jpg


dildo-huge-ac222-bulk-new-1.webp


थोड़ी देर हम चुप बैठे रहे, मैं रीत से कभी मिली नहीं थी, लेकिन लगता था हम लोग कितने जन्मों की सहेली हैं,

फिर वो चालू हो गयी, वो पेपर पढ़ा.

अच्छी बच्ची की तरह मैं बोली, हाँ वही पढ़ रह थी।

फोन उसने उसके लिए भी किया था लेकिन मैंने एक सवाल कर दिया , और उस का जवाब उसने खिलखिलाते हुए दिया ,

मैंने अपनी तेरी ननदों के लिए जो खेल खिलौने भेजे थे वो ज़रा ले आओ.

( जब ये एम्स्टर्डम गए थे तो वहां ढेर सारे सेक्स ट्वायज ले आये थे)

डबल डिल्डो, सुपर डिल्डो १२ इंच का, कई साइज के स्ट्रैप आन डिल्डो,...

strap-on-tumblr-ngzss75-C0-L1tx2xl9o1-500.jpg


रीत ने बोला वो दस इंच वाला स्ट्रैप ऑन डिल्डो कमर में बाँध ले, और वो डबल डिल्डो हाथ में ले ले, ... अरे यार मैंने होती न तो तेरी सारी ननदों की और तेरे उस बहनचोद मर्द, अपने भंड़ुवे जीजा की गाँड़ भी जरूर मारती, इन डिल्डो से,

मुझे जोर की हंसी छूटी और मैं खिलखिलाने लगी, रीत दी न एकदम मेरी असली बड़ी बहन, मेरी वैसे तो कई बड़ी बहन नहीं थी पर ये एकदम और असली बनारसी, ससुराल वालों और वालियों दोनों के अगवाड़े पिछवाड़े,

मेरी हंसी रुकती नहीं थी जल्दी, और मैं खिलखिलाती रही, जब तक रीत की डांट ने मुझे चुप नहीं कराया, और फिर मेरा बोलना चालू, और वो भी जल्दी बंद नहीं होता था

" दी आप नहीं थी, पर आप की छोटी बहने तो थीं न, कोई नहीं बचीं, मम्मी रीतू भौजी और मेरी सहेलियों की परफेक्ट प्लानिंग, मेरे गाँव को तो छोड़िए अगल बगल के गाँव जवार के लौंडों मरदों का कल्याण हो गया, मम्मी ने मेरी सास से ख़ास तौर से कहा था , तीन दिन की बरात और हमारी आम की बगिया में और बरात में जितने मरद लड़के उससे ज्यादा लड़कियां औरतें, सब का ख़ास इंतजाम,

और मेरी सास मान गयी. वो तो नहीं आयी, न बुआ सास न चचिया सास उनको लोगों को खोइया का मजा लेना था, रतजगा करना था, लेकिन बाकी सब, मेरी जेठानी भी हाँक कर, एक एक को, सिर्फ ननदें नहीं उनकी सहेलियां भी ,... मर्दों लड़कों का इंतजाम अलग था थोड़ी दूर के एक बाग़ में जहाँ दो दो आर्केस्ट्रा, सब उसी में मगन,

" और लड़कियों औरतों का,... " रीत से नहीं रहा गया,

" अरे हम लोगन क ढाई बिगहा में आम क बाग़ है खूब गझिन

mango-grove.jpg


और दोनों ओर गन्ने के खेत,

sixteen-Sugar-Cane-Field-GA-1.jpg


त उहे अमवा क बगिया में और ओहमें भी औरतों क छोलदारी अलग और लड़कियन क अलग,... भौजी ने साफ़ साफ़ बोला था, जेतन शादी शुदा है कउनो बिना गाभिन हुए न जाएँ और लौंडियाँ कउनो क झिल्ली सलामत न रहे , और वही हुआ , `एक एक पे दो दो तीन तीन, ... आम क बगिया में,अगले दिन दिन दहाड़े गन्ने क खेत में,... और हाँ एक बची थी संगीता उर्फ़ गुड्डी रानी बहुत छटक रही थीं , तो कल रात, उनके भैया से अच्छी तरह फड़वाया,... " मैंने हाल खुलासा अपनी ससुराल वालियों का बयान किया।

अब रीत के हंसने की बारी थी और उनकी हंसी भी एकदम मेरी हंसी की तरह, जल्दी रुकती नहीं थी, वो हंसती रही खिलखिलाती रहीं फिर रुकी तो बोलीं

" सच में कोमलिया तू मेरी असली छोटी बहन है, अरे ननदों के भैया से हम लोग रोज बिना नागा मज़े लेते हैं और वो बेचारियाँ कभी ऊँगली कभी मोमबत्ती तो कभी बैंगन, उनके लिए लम्बू मोटू का इंतजाम कराने का काम तो हम भाभियों का ही है, ... और हमारे भाइयों से ज्यादा कौन अच्छा होगा उन बेचारियों के लिए , उनके भैया हमारे साथ तो हमारे भैया उनके साथ "

तबतक मैंने वो दस इंच वाला स्ट्रैप ऑन बाँध लिया था , और डबल डिल्डो मेरे हाथ में था, मेरे कुछ बोलने के पहले ही रीतू दी ने कुछ और इंस्ट्रकशन दिया, और वो मैंने जस का तस,...

strap-on-13.png


कमरे में जितने मोबाइल फोन थे, सबकी पहले तो बैटरी निकाल ली, फिर उन्हें आलमारी में कपड़ों के अंदर अच्छी तरह रख दिया, बाथरूम शावर तेजी से चला दिया और मेटल म्यूजिक तेजी से लगा दी, और एक हेडफोन लगा लिया,... और उस डबल डिलडो को ध्यान से देखती रही, कुछ नहीं दिखा,
 
रीत दी प्रकट- सुपर सीक्रेट कम्युनिकेशन डिवाइस

और उस डबल डिलडो को ध्यान से देखती रही, कुछ नहीं दिखा,

फिर जैसे दी ने कहा था आँख बंद कर के मैं उसे ऊँगली से सहला रही थी , एक जगह बहुत हल्का सा उभरा लगा, मुश्किल से एक सूत रहा होगा, वहां तीन बार दाएं दो बार बाएं घुमाया और आँख खोल दी, एक वर्चुअल की बोर्ड जैसा वहां प्रकट हो गया, ... लेकिन उस पर हिंदी में अक्षर उभरे थे बजाय नंबरों के ,

उसे मैं आँखों के पास ले गयी और घडी देखकर पूरे तीस सेकेण्ड उसे घूरती रही, फिर अपनी ननद का नाम ले ले कर तीन बार गलियां दी,

गुड्डी स्साली, तेरी गाँड़ बनारस के लौंडे मारें, गुड्डी भाईचोद तेरी बुर का भोसड़ा बना दें. मेरे भाई, गुड्डी छिनार, तेरे मुंह में सब बनारस वालों का लंड,... "

और उस वर्चुअल की बोर्ड पर पहले तो गुड्डी फिर उस की उमर और क्लास लिखा, ... और वो वर्चुअल की बोर्ड गायब अब वहां एक छोटा सा स्क्रीन आ गया, अंगूठे के निशान जैसा, उसमें दी लग रही थीं, लेकिन आवाज आयी की मैं उस डबल डिल्डो को मेज पर रख दूँ और स्क्रीन को दीवाल की ओर फेस कर के

बस मैंने वही किया, और दीवाल पर एक बड़ी सी स्क्रीन ५१ इंच के टीवी की तरह उभर आयी और रीत दी प्रकट हो गयीं,

' चल कोमलिया अब हम तुम मिल के गप्प मारते हैं " दी की आवाज दीवाल पर से आयी.

अब मैं समझ गयी थी ये एकदम सुपर सीक्रेट कम्युनिकेशन डिवाइस थी, अगर इनको किसी ने सस्पेक्ट भी किया एम्सटर्डम से सेक्स खिलौने तो लोग आते ही हैं , मोबाइल इनका ये खुद बता ही रहे थे कितनी बार चेक हो गया, पर मान गयी मैं रीत को असल बनारस वाली, दूसरे ये बात सिर्फ मेरी और रीत के बीच थी,

उनके पेपर और उसके बाद जो वो रिसर्च करने वाले थे, मैं जानती थी उसका असर , लेकिन रीत ने ये तरीका सही ढूंढा इनके उस पेपर के बारे में बात करने के लिये ,... और आगे इनकी पोस्ट पर भी मैं और रीत , जहाँ कोई 'ऐसी वैसी ' बात करनी हो , जहाँ स्नूपिंग का ख़तरा हो ये तरीका सबसे अच्छा था सेफ था,

रीत दी सचमुच में रीत दी थीं मेरी असली वाली बड़ी बहन, मेरे मन में उमड़ घुमड़ रहे सवालों का जवाब उन्होंने खुद दे दिया और पहला सवाल था मोबाइल फोन्स को लेकर, ... बैटरी निकालना, कपडे के अंदर तीन तह के रखना, शावर और मेटल म्यूजिक,

" देख मोबाइल से सबसे ज्यादा हैकिंग होती है,... " वो बोलीं और मेरी आदत मैं बीच में ज्ञान बघारने कूद पड़ी, ...

"एकदम दी, इसलिए मैं विज्ञापन वाले और खास तौर से जिसमें कोई लिंक विंक हो, मेसेज या व्हाट्सऐप या मेल एकदम नहीं खोलती जिसमें लिखा हो ५,००० रुपये का इनाम, सुना है खोलते ही कोई वायरस निकलता है और पूरा मोबाइल खंगाल कर,.... मैं तो अननोन नंबर उठाती भी नहीं,... "

लेकिन अब दी की बारी थी बीच में बात काटने की और वो मुस्कराते हुए बोली,

" अरे ध्यान से सुन कोमलिया तेरे फोन में रिकार्ड करने का, और कैमरा तो होगा न,... "

" एकदम दी, आपके बहनोई ने लाकर दिया है , तीन कैमरा वाला फोन एकदम रात के अँधेरे में भी, कल उनकी बहिनिया की उसी से तो खींच खींच कर इनकी सास , सलहज, साली सब के पास भेजी हूँ " मैंने गर्व से बताया, पर जवाब में जो उन्होंने बोला तो मेरे तोते उड़ गए।
 
मोबाइल के खतरे

" एकदम दी, आपके बहनोई ने लाकर दिया है , तीन कैमरा वाला फोन एकदम रात के अँधेरे में भी, कल उनकी बहिनिया की उसी से तो खींच खींच कर इनकी सास , सलहज, साली सब के पास भेजी हूँ " मैंने गर्व से बताया, पर जवाब में जो उन्होंने बोला तो मेरे तोते उड़ गए।

" तो सुन जो बोल रही है न वो अब पुरानी बात हो गयी, आज कल तो एक मिस्ड काल आएगी, बस. तुम फोन उठाओ न उठाओ। और आखिर तेरे फोन के कैमरे माइक को तो तुम कमांड देती हों न स्क्रीन पर जा के तो बस वो कमांड दे देगा और उसे वॉयस एक्टिवेटेड बना देगा। फिर तुम उस फोन से बात करो न करो , उस का माइक आफ कर के रखों कैमरा बंद कर के रखो, पर वो अपने आप आन कर देगा, फिर तुम जो भी बात करोगी वो सब फोन में रिकार्ड हो जाएगा , पिक्चर्स भी और ट्रांसमिट भी जाएगा। आज कल मोबाइल के रिसीवर और कैमरे बहुत पावरफुल होते हैं तो तकिये के अंदर, रजाई के नीचे, फुसफुसा के , वो सिग्नल को एम्पलीफाय कर सकता है या वर्ड प्रॉसेसर से उसे लिखे वर्ड में बदल सकता है , तो अगर तेरा मोबायल फोन हैक्ड है या सरवायलेंस पर है भले तो लैंड लाइन पर बात कर रही है , घर में बात कर रही है तो , और आज कल तो ,... इसलिए बैटरी बाहर से किसी भी डिवाइस को एक्टिवेट करना मुश्किल होगा और अगर तब भी कुछ है. तो कपड़ों की तह में उसका सुनना मुश्किल है, और शावर की आवाज मेटल म्यूजिक से जो भी वॉयस सिग्नल होंगे वो इतने कांफ्लिटिंग होंगे ,

रीत दी चुप हो गयी थीं और मैं भी चुप थी, फिर वही बोलीं बल्कि मुझसे जी के टाइप एक सवाल पूछ लिया,

" अच्छा बोल, ये आज कल के जो मॉडर्न फाइटर प्लेन होते हैं अटैकिंग मिसाइल से कैसे डिफेंड करते हैं."

मैं बड़ी जोर से मुस्करायी और पूरा ज्ञान उड़ेल दिया, ...

" दी फाइटर प्लेन, बॉम्ब या मिसाइल छोड़ने के साथ कई फ्लेयर छोड़ते हैं, बस जो उन पर अटैक करने के लिए जो हीट सीकिंग मिसाइल छोड़ते हैं बस वो उन हीट फ्लेयर्स से कन्फ्यूज हो कर,... "

और एक बार फिर दी ने मेरी बात काट के मुझे समझाना शुरू कर दिया,

"एक्जैक्टली,... तो जैसे वो स्क्रीन अपीयर हुयी तेरी स्क्रीन पर न उसी के साथ उसने फाल्स साउंड के सिग्नल भेजने शुरू कर दिए और उसके दो मीटर के दायरे में वही सिग्नल मिलेंगे, हम लोगों की बातचीत स्क्रैंबल हो कर आ रही है. "

लेकिन मेरी अभी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था, स्ट्रैप आन और ये डबल डिलडो दोनों का इस्तेमाल, ...

और उन्होंने समझा दिया,
 
रीत दी चुप हो गयी थीं और मैं भी चुप थी, फिर वही बोलीं बल्कि मुझसे जी के टाइप एक सवाल पूछ लिया,

" अच्छा बोल, ये आज कल के जो मॉडर्न फाइटर प्लेन होते हैं अटैकिंग मिसाइल से कैसे डिफेंड करते हैं."

मैं बड़ी जोर से मुस्करायी और पूरा ज्ञान उड़ेल दिया, ...

" दी फाइटर प्लेन, बॉम्ब या मिसाइल छोड़ने के साथ कई फ्लेयर छोड़ते हैं, बस जो उन पर अटैक करने के लिए जो हीट सीकिंग मिसाइल छोड़ते हैं बस वो उन हीट फ्लेयर्स से कन्फ्यूज हो कर,... "

और एक बार फिर दी ने मेरी बात काट के मुझे समझाना शुरू कर दिया,

"एक्जैक्टली,... तो जैसे वो स्क्रीन अपीयर हुयी तेरी स्क्रीन पर न उसी के साथ उसने फाल्स साउंड के सिग्नल भेजने शुरू कर दिए और उसके दो मीटर के दायरे में वही सिग्नल मिलेंगे, हम लोगों की बातचीत स्क्रैंबल हो कर आ रही है. "

लेकिन मेरी अभी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था, स्ट्रैप आन और ये डबल डिलडो दोनों का इस्तेमाल, ...

और उन्होंने समझा दिया,

" देख स्ट्रैप आन तेरी बॉडी से टच कर रहा है, और डिल्डो को तुमने अपनी ऊँगली से सहलाया दोनों के बीच कम्युनिकेशन है, दोनों ने तेरी बॉडी डीनए को रीड किया जब दोनों डीनए सेम हुए तभी वो बटन एक्टिवेट हुआ, अगली बार बिना उस स्ट्रैप आन के भी और ये दोनों नैनो पार्टिकल से बने हैं जिसमे कोई भी मेकेनिकल डिवाइस नहीं है इसलिए इन्हे कोई तोड़कर भी देखेगा तो कुछ नहीं मिलेगा, फिर ये कम्युनिकेशन तुम्ही कर रही थी इस के चेक के लिए भी फोर लेवल चेक था, ... अपने बहनोई से मैंने तेरा आधार नंबर,..

" लेकिन दी , आजकल तो सुलभ शौचालय वाले भी आधार कार्ड मांगते हैं तो उससे क्या,... " मैंने फिर बात काटी और वो जोर से हंसी,

" अरे मेरी बहना, उसी नंबर से तो तेरे सारे फिंगरप्रिंट, पुतली के निशान उस ने मैच करा लिया , पहले डीएनए, फिर फिंगर प्रिंट फिर पुतली और फिर वॉयस प्रिंट जो तूने सारे बनारस वालों की रखैल को जो बोला, अगर मैं एक दो शब्द का कोड बताती तो कोई भी समझ सकता था अभी तो कोई भी और उसमें पहले दो शब्द नाम, गाली और चौथा शब्द, शरीर का एक अंग, फिर वर्चुअल की बोर्ड पर तुमने जो नाम लिया था वही लिखा और उसके डिटेल जो मुझे मालूम थे, तो उसके बाद कनेक्शन सिक्योर हुआ है और वो भी पन्दरह मिनट के लिए। "

मैं मान गयी रीत दी

तभी तो बनारस में अभी सभी सब कहते हैं की चाचा चौधरी का दिमाग कम्यूटर से भी तेज चलता है और रीत का दिमाग चाचा चौधरी से भी तेज।

फिर पूरे दस मिनट हम लोगों ने बात की, क्या की , ये बताने की नहीं दी ने कसम धरायी है।

एकदम प्राइवेट और सीक्रेट ,

हाँ ये बता सकती हूँ , बातचीत एकदम सीरियस थी, इनके पेपर से जुडी चीजों के बारे में, थोड़ा बहुत मैं जानती थी लेकिन बाकी कुछ उन्होंने समझाया,... एकदम सीरयस और इसलिए उन्होंने इतना एक्स्ट्रा प्रीकॉशंस बरती थीं
 
Back
Top