Erotica मोहे रंग दे - Page 43 - SexBaba
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Erotica मोहे रंग दे

बहुत बहुत धन्यवाद, सच में वो कहानी एक अलग जॉनर की है , आप को अच्छी लगी बहुत बहुत धन्यवाद, हिंदी फेम डॉम कहानियां भी बहुत कम है, और यह लगभ उसी थीम के आसपास पर थोड़ा सा हट के, ... और पति पत्नी के रिश्तों को एक अलग ढंग से देखती,... लेकिन मैं अपनी कहानी को खुद बोलने देती हूँ , इसलिए उसके बारे में बात करने की बात नहीं बनती,... आप को अच्छी लग रही है मेरी कहानियां ये जान कर अच्छा लगा।
 
ननद की ट्रेनिंग

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थोड़ी देर बाद फिर मेरा ध्यान कम्मो की बातों की ओर गया , अब वो सीधे , कैसे चुम्मा लेना चाहिए , पहले थोड़ा झिझको शर्माओ, फिर बाद में जीभ मुंह के अंदर डाल , जीभ से जीभ लड़ाओ , वो जीभ डाल दे तो हलके हलके , फिर कस के चूसो , और हाँ साथ में नीचे सहलाओ ,

फिर पकड़ा कैसे जाता है , सीधे लंड के बेस पर हलके हलके दबाओ सिर्फ दो ऊँगली से फिर पूरी मुट्ठी में हलके हलके , फिर दबाना सहलाना और हलके हलके मुठियाना , हाँ लेकिन याद रहे बीच बीच में आँख सीधे लौंडे की आँख में , मुस्कराते हुए उसे देख कर थोड़ा हलके हलके , जैसे उसे लगे की तुझे भी उसका पकड़ने में दबाने में मजा आ रहा है.

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किचेन में मेरा काम चालू था, ऊपर इनकी कांफ्रेंस चालू थी और बाहर कम्मो का स्कूल।

तभी इनका मेसेज आया, ' बस आधे घण्टे में कांफ्रेस ख़तम हो जायेगी , पांच दस मिनट समेटने में और वो खाली सूप पिएंगे ',

बाहर से कम्मो की आवाज आ रही थी , बीच बीच में मेरी ननदिया की खिलखिलाहट कभी हलकी सी चीख, और भौजी अपनी ननद को मुख मैथुन में दक्ष कर रही थीं,

" देख पहली चीज, चूसने के पहले, ये होंठ से दांत एकदम अच्छी तरह ढंके रहने चाहिए, छूते समय होंठों से , चूमते चाटते चूसते सिर्फ होंठ लगना चाहिए, होंठ, जीभ और नाचती मुस्कराती खुश खुश आँखे इन तीनो का इस्तेमाल। हाथ, नहीं हाथ नहीं , सिर्फ होंठ , हाँ हाथ का इस्तेमाल और कामों के लिए वो भी कभी कभी , तो सबसे पहले होंठों से हल्के से दबा के सुपाड़े को थोड़ा चूसो, चुभलाओ, फिर होंठों के जोर से सुपाड़ा खोल दो , उसके बाद जीभ, बल्कि बस जीभ की टिप, उससे वो जो छेद होता है , जिससे रबड़ी मलाई निकलती है , गाभिन करती है , बस उसी में सुरसुरी करो, मर्द एकदम पागल हो जाएगा,

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कुछ देर ऐसे तंग करने के बाद , जीभ से ही सुपाड़े को सहलाओ, साथ में आंख में आँख मिला के चिढ़ाओ छेड़ो , और फिर एक झटके में पूरा सुपाड़ा गप्प, ...

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उधर कम्मो उसे चूसने चाटने के गुर सिखा रही थी , और इधर मैं सूप की तैयारी कर रही थी , साथ में बखीर की भी , आखिर आज मेरी ननद की फटी है वो भी अपने सीधे साधे भैया से , और आज की रात उसकी सुहाग रात होगी, गन्ने का रस, गुड़ , पुराना चावल और खूब धीमी आंच में, ... बखीर इंटरवल में खिलाने का प्लान था मेरा,

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बीच बीच में कम्मो की आवाज आ रही थी ,

चूसते हुए थक जाओ तो जब बाहर निकालो तो बिना रुके लंड को साइड से चाटना, होंठ से नहीं सिर्फ जीभ से और साथ में उँगलियों से बॉल्स सहला सकती हो , धीमे धीमे मुठिया सकती हो और कम्मो की आवाज आनी बंद हो गयी , वो खुद किचेन में आ गयी,



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" अरे तो दस सांड़ के बराबर ताकत आ जाएगी आज पक्का बहनचोद बनाउंगी उसे , एक बार आज रात अपने भइया से हचक के चुद गयी तो पक्की छिनार बनने से कोई उसे रोक नहीं सकता",

एक चुटकी स्वर्ण भस्म और पांच चुटकी लौह भस्म मिलाते वो बोलीं।

अब बस पन्दरह मिनट तक धीमी आंच पर सूप पकना था, बखीर पहले ही बन चुकी थी।

कम्मो उस लेप को लेने आयी थीं जो उन्होंने गुड्डी रानी के लिए बनाया था , जिसके तीन फायदे थे एक उस की चूत एकदम से कसी कच्ची कुँवारी ऐसी हो जाती , और जो भी कटा फटा था दर्द वो सब दूर , दूसरे गाभिन होने का खतरा ख़तम और असली बात तीसरी थी जो ननद को न कम्मो बताती न मैं , इसके लगाने के बीस पच्चीस मिनट के अंदर इतनी तेज आग उसकी चूत में लगती की खुद वो लंड ढूंढती
 
ननद रानी

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किचेन का काम आलमोस्ट ख़त्म हो गया था मैंने कम्मो के साथ अपनी ननद के पास आ गयी , वो एकदम निसूति कुछ देर तो कम्मो ने वो लेप अपनी ऊँगली से ननद रानी की बिल में , पर फिर वो काम मैंने अपने ऊपर ले लिया ,

" अरे ननद रानी को खुद लगाने दो , अरे अब इनकी भी फट गयी है ये हमी लोगों की बिरादरी में आ गयी हैं " और मैंने उसे समझाया

" देखो मंझली ऊँगली का इस्तेमाल करो गुलाबो को खुश करने के लिए , एक तो ये सबसे लम्बी ऊँगली होती है दुसरे इसकी अगल बगल की उँगलियों से दोनों फांको पर और अंगूठे से क्लिट"

उसकी मंझली ऊँगली पर मैंने वो ढेर सारा लेप लगा दिया और बचा खुचा उसके निप्स पर,

कुछ देर में वो किशोरी कस कस के अपनी बिल में ऊँगली कर रही थी सिसक रही थी चूतड़ उचका रही थी और मैं उसे उकसा रही थी

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" अरे सोचो तेरे भइया तुझे हचक हचक के चोद रहे हैं , ननद रानी अभी तो ट्रेलर था "

और साथ में उसके छोटे छोटे जोबन मसल रही थी , किचेन में कम्मो किसी काम के लिए गयी थी , उसने वहीँ से मुझे सर हिला के मुझे इशारा किया

बस पांच सात मिनट में ननद रानी झड़ने के कगार पर पहुँच गयी , पर कम्मो के इशारे के मुताबिक़ मैंने ननद के निप्स को पिंच किया और झड़ने की लहर की जगह दर्द की लहर ने ले ली



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मैच शुरू, भैया बहिनी का

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और कम्मो के ऊपर पहुँचने के पन्दरह बीस मिनट के अंदर मैं भी पहुँच चुकी थी, मैच शुरू नहीं हुआ था , भैया बहिनी का लेकिन मैच की तैयारी पूरी हो गयी थी , टॉस भी हो गया था , बॉलर और बैट्समेन दोनों तैयार थे और उन सबसे बढ़कर अम्पायर कम्मो भौजी भी , रोल सिर्फ फोटो खींचने का रिकार्ड करने का था।

तीनों टॉपलेस हो गए थे ,

सबसे पहले गुड्डी रानी ने ही अपने भैया की शर्ट उतार फेंकी की सूप गिरा दोगे तुम , दाग पड़ जाएगा, के बहाने से।

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वो बेचारे , लेकिन कुछ देर में उनकी कम्मो भौजी पहुँच गयी , उन्होंने देवर को ललकारा, ननद की नरम नरम कलाई दबोची और ननद भी देवर की तरह टॉपलेस, छोटे छोटे जोबन बाहर,

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लेकिन पॉलिटिक्स की तरह इसमें भी पलटा मारते देर नहीं लगती, और ननद देवर ने मिलकर, कम्मो भौजी की पहले साडी उतरी फिर ब्लाउज भी , ब्रा वो पहनती नहीं थी, तो वो भी अपने देवर की तरह टॉपलेस। देवर सिर्फ शार्ट में ननद स्कर्ट में और भौजी पेटीकोट में।

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लेकिन मामला इतने पर नहीं निपटा , जैसे बच्चे स्टैचू वाला खेल खेलते हैं न बस ननद ने अपने भैया को २० मिनट के लिए ,... बस वो हिल नहीं सकते थे , और उससे भी बढ़कर उनकी कम्मो भौजी ने अपने ब्लाउज और ननद रानी के टॉप से कस के उनका हाथ बाँध दिया

जब मैं पहुंची तो शार्ट हल्का हल्का तना था , और ननद उन्हें छेड़ रही थी , कम्मो दूसरी साइड में बैठी उसे इशारे कर रही थी, उकसा रही थी।

मेरी टीनेजर ननद की लम्बी लम्बी उँगलियाँ और उसके लाल नेलपॉलिश लगे, लम्बे नाखून,

और उसके भैया का तना तम्बू, शार्ट में उठता बम्बू,

और शार्ट के ऊपर से कभी अपने नाखून से उसे उठे खूंटे को छेड़ देती तो कभी ऊँगली से दबा देती,

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कहते हैं न बगावत, जोबन और लंड जितना दबाओ उतना ही उठता है , तो बस वही हाल हो रही थी, और साथ में मेरी ननद की नयी गुरुआइन कम्मो कभी गुड्डी रानी को इशारा करती तो कभी उकसाती,

और उस की सोहबत में गुड्डी भी उसी तरह ,... हथेली में खूंटे को शार्ट के ऊपर से कस के दबोचते उस चढ़ती जवानी ने इन्हे नाचती गाती आँखों से चिढ़ाते हुए पूछा,

" भैया ये क्या है, "

वो बिचारे क्या बोलते ,डबल अटैक में फंसे , मेरी किशोर ननद, मस्तायी चढ़ते जोबन में बौराई,

हाथ उनके उनकी बहन के टॉप और भौजाई के ब्लाउज से कस के बंधे और ऊपर से भौजाई कम्मो पीछे से पकडे दबोचे, कम्मो के जबरदंग ३८ डी डी उभार अपनी दोनों बरछियों से देवर में छेद करती, कान में कुछ बोलती, लेकिन भौजी ने अपना अटैक अपनी किशोर ननद की ओर किया और उसे चढ़ाया,

" अरे खोल के देख काहें नहीं लेती, तेरे भैया मना थोड़े ही करेंगे , क्यों देवर जी "

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और साथ ही कम्मो ने अपने नाखूनों से इनके मेल टिट्स को कस के खरोंच दिया , बेचारे तड़प उठे और साथ ही उनकी उस कच्ची कली बहन ने शार्ट का घूँघट थोड़ा सा खोल दिया,

फटा पोस्टर निकला हीरो,
 
फटा पोस्टर निकला हीरो,

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जैसे संपेरा अपनी पिटारी खोल दे और नाग राज फन उठा के खड़े हो जाएँ,

लेकिन कम्मो ने अपनी ननद को सांप पकड़ने के सब तरीके सिखा दिया थे,

पहले तो सिर्फ तर्जनी से उस किशोरी ने शार्ट से आधे तीहै निकले चर्म दंड को छेड़ा और फिर डरते हुए मुट्ठी में पकड़ने की कोशिश की,

सच में स्साली पक्की छिनार थी जिस तरह से वो थोड़ा शर्माते लजाते, थोड़ा ललचाते उन्हें देख रहे थे,जिसका पैदायशी न खड़ा होने वाला हो उसका टनटना कर लोहे का खम्भा हो जाए , और ये तो पहले से ही सांड़, फिर वो जड़ी बूटी वाले सूप का असर , और साथ में पीछे से भौजाई के बड़े बड़े जोबन का जादू, ... वो उनके बंधे थे और कम्मो ने उन्हें कस के पकड़ रखा था, वरना, वहीँ ,...

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अंगूठे और तर्जनी के बीच पकड़ कर तन्नाए खूंटे के सर को पहले तो वो हलके से दबाती रही, फिर कस के एक झटके से ,

आधा सुपाड़ा खुल गया,

वो तो पागल हो रहे थे पर कम्मो संतुष्ट नहीं थी उसने आँख से कुछ इशारा किया और अबकी मेरी उस ननद ने जैसे कम्मो भौजी ने सिखाया था एकदम उसी तरह , दोनों गुलाबी होंठों के बीच अधखुले सुपाड़े को दबाया और होंठों के जोर से बाकी चमड़ा,

सुपाड़ा खुल गया था पर गुड्डी के होंठ दूर हट गए थे

जीभ, सिर्फ जीभ बल्कि जीभ की टिप से खुले सुपाड़े पर

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कभी छू लेती कभी हटा लेती , फिर सीधे पेशाब के छेद ( पी होल ) पर हलके हलके सुरसुरी

उसकी कोमल उँगलियों ने खूंटे को नहीं छोड़ा था, अब वो सीधे बेस पर हलके हलके दबा रही थीं और जीभ पूरे खुले मोटे मांसल सुपाड़े पर डांस कर रही थी

ये एकदम पागल हो गए थे।

पर गुड्डी भी आज एकदम पागल हो गयी थी , अपने भैया से कब का बदला ले रही थी ,

एक झटके में मुंह में पूरा सुपाड़ा गप्प, क्या मस्त चूस रही थी , कोई बैंगकाक की काल गर्ल को भी मात कर दे,

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और मेरी ननद रानी ने अपने दोनों हाथों से मेरे सैंया का शार्ट एक झटके में खींच के दूर फेंक दिया,

अभी तक तो मैं दर्शक थी पर स्साली इत्ती मस्त ननद हो तो कौन भौजाई अपने को रोक पाएगी,

जो ननद ने मेरे साजन के साथ किया वो मैंने साजन की बहना, अपनी ननद के साथ किया, उसकी स्कर्ट खींच के वहीँ फेंक दी जहाँ उसने अपने भैया का शॉर्ट फेंका था ,

भैया बहिनी दोनों एक जैसे हालत में

पर मेरी ननद तो आज एकदम बौरा गयी थी, उसे कुछ फरक नहीं पड़ रहा था, वो कस कस के सुपाड़ा चूस रही थी , उसके भीगे गुलाबी होंठ अपने भैया के सुपाड़े को रगड़ रहे थे, जीभ उसे छेड़ रही थी और साथ में अब उसके लम्बे नाखून,

कभी चर्म दंड को कभी बॉल्स को स्क्रैच कर रहे थे ,

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उनकी एकदम हालत खराब, मेरी आँखों ने कम्मो की आँखों को ग्रीन सिग्नल दिया और कम्मो ने कुछ मन्त्र उनके कान में फूंका, और दोनों हाथ खोल दिए

अगले ही पल मेरी ननद बिस्तर पर और वो उसके ऊपर,

लेकिन अब हम दोनों भौजाइयां अपनी ननद की मदद कर रही थीं , बिस्तर पर जितने तकिये कुशन थे , हम दोनों भौजाइयों ने अपनी ननद के चूतड़ के नीचे लगा के खूब ऊपर उठा दिया।
 
मेरी ननद बिस्तर पर

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अगले ही पल मेरी ननद बिस्तर पर और वो उसके ऊपर,

लेकिन अब हम दोनों भौजाइयां अपनी ननद की मदद कर रही थीं , बिस्तर पर जितने तकिये कुशन थे , हम दोनों भौजाइयों ने अपनी ननद के चूतड़ के नीचे लगा के खूब ऊपर उठा दिया।

( कम्मो ने उनसे कहा था, फाड़ दो स्साली की बहुत गरमाई है , हचक के चोदो पता चले किसी मरद से पाला पड़ा है , हर धक्का छिनरो की बच्चेदानी पर लगना चाहिए )

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भीषण चुदाई,

हम लोगों की शादी के चार पांच महीने हो गए थे , बीच में जब वो ट्रेनिंग पर गए थे उसे छोड़ कर शायद ही कभी नागा हुआ हो ,

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और ट्रेनिंग की भरपाई वो आने पर कर लेते थे, सेंचुरी से ज्यादा हर महीने, ... और इधर तो दिन रात कुछ भी नहीं देखते थे, जगह भी नहीं, कितनी बार किचेन में , आंगन में , बरामदे में , बाथरूम में तो रोज

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लेकिन ऐसा तूफानी जोश उनका आज मैं पहली बार देख रही थी,

जैसे धुनिया रुई धुनता है , एकदम टी २० वाली बैटिंग, पहली बाल पे छक्का, ...

पता नहीं कम्मो ने सूप में जो जड़ी बूटी डाली थी उसका असर था , या उनकी चोदवासी छिनार बहना की बदमाशी का या, ...

मेरी ननद की दोनों लम्बी लम्बी गोरी गोरी टाँगे उठा के उन्होंने अपने कंधे पर रखीं, जाँघे खूब फैली,

ननद के चूतड़ के नीचे ननद की हम दोनों भौजाइयों ने ढेर सारे तकिये कुशन पहले से ही लगा दिए थे , चूतड़ खूब उठा हुआ,

हाँ खूंटा सटाने का काम मैंने किया ननद की नयकी भौजाई ने,

मुझे याद आया, मेरी शादी के बाद यही छोरी ज़रा सा ननद भाभी वाले मजाक से बिगड़ जाती थी, कहीं अगर उसके भैया से जोड़ के किसी भाभी चिढ़ा दिया, अभी चार पांच महीने तो हुआ और उसी समय मैंने तय कर लिया था,...

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और बहुत दिनों का मेरा ये खुद से वायदा था , शादी के तीसरे चौथे दिन, जब छत पर खूब खुल के गाना बजाना हुआ , अपनी सास की फरमाइस पर मैंने वो वो गालियां सुनाई की जो सुन के मैं खुद कान में ऊँगली डाल लेती थी, और गाली बिना ननद का नाम लिए और ननद पर ननद के भाई को चढ़ाये पूरी नहीं होती, और जैसे मैंने गारी शुरू की ,

उडी आया दुपट्टा बनारस से , उडी आया ,
 
उडी आया दुपट्टा बनारस से , उडी आया ,

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शादी के तीसरे चौथे दिन, जब छत पर खूब खुल के गाना बजाना हुआ , अपनी सास की फरमाइस पर मैंने वो वो गालियां सुनाई की जो सुन के मैं खुद कान में ऊँगली डाल लेती थी, और गाली बिना ननद का नाम लिए और ननद पर ननद के भाई को चढ़ाये पूरी नहीं होती, और जैसे मैंने गारी शुरू की ,

उडी आया दुपट्टा बनारस से , उडी आया ,



हमारे सैंया गुड्डी रानी को बुलावें , अपनी बहिनी के बुलावें , एलवल वाली को बुलावें,

आँख मार के बुलावें , अरहरिया बुलावें , गन्ने के खेत में बुलावें ,



चुम्मा लेव के बुलावैं , जोबना मीजै के बुलावें,...

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वो एकदम अलफ़, गुस्से में लाल,...

बस उसी समय मैंने तय कर लिया , चाहे जो कुछ भी जो जाय तेरे ऊपर तेरे इसी भैया को चढ़ाउंगी जरूर , वो भी अपने सामने, ...

तो खूंटा लगाने का काम मैंने किया , शाम को फटने के पहले जहाँ हलकी सी सिर्फ दरार दिखती थी , वाहन अब एक बहुत छोटा सा छेद दिख रहा था , छोटा सा , लेकिन मेरे काम के लिए काफी था ,

बस फैलाया, सटायाऔर धँसाने का काम उस के सीधे साधे भैया का था,

और उसके भैया का था भी कितना मोटा, मेरी कलाई से कम मोटा नहीं था , पूरे कोल्ड ड्रिंक के कैन इतना मोटा,

शाम को तो कम्मो भौजी ने शुद्ध उनके गाँव का कोल्हू का पेरा कच्ची घानी वाला असली कडुआ तेल लगाया था , चुपड़ चुपड़ कर अपने देवर के मोटे सुपाड़े पर ,

पर अबकी तो एकदम सूखा, असल में एकदम सूखा भी नहीं उनकी बहिनिया ने चूस चाट के जितना गीला किया था बस उतना,

गप्पाक, गजब का जोर था इनकी कमर में , एक बार में पूरी ताकत से पेल दिया इन्होने,

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उईईई ओह्ह्ह नाहीई , ओह्ह उईईईईई ,

फीट भर तो वो उछली होगी ही, ऐसा दर्द तो जब झिल्ली फटी थी तब भी नहीं हुआ था मेरी ननदिया को,

आँखों में आंसू नाच रहे थे , दोनों हाथों उसने कस के बिस्तर की चादर को दबोच रखा था ,

सिर्फ मेरी ननद के थूक से गीला लंड , उस कसी चूत में दरेरता, रगड़ता, फाड़ता घुस रहा था , पक्का चूत की चमड़ी थोड़ी बहुत तो जरूर छिली होगी,

वो ठेल रहे थे , पेल रहे थे पूरी ताकत से उस फैली हुयी जांघों के बीच पूरी ताकत से धकेल रहे थे,

वो बार बार चीख रही थी , उईईई उईईई , ओह्ह्ह्हह्ह नहीं

तड़प रही थी , और अगर किसी को मेरी ननद के इस होने वाले दर्द का अंदाज था तो वो था , कम्मो भौजी को और उन्होंने सुपाड़ा घुसने के साथ ही मोर्चा संभाल लिया था , ननद रानी के सर की ओर , और सर अब ननद की भौजी के गोद में था , अपने दोनों सँड़सी जैसी मजबूत पकड़ वाली कलाइयों से कम्मो भौजी ने गुड्डी रानी के दोनों कंधो को दबा रखा था पूरी ताकत से और अब ननद रानी चिल्ला सकती थीं , रो सकती थीं , तड़प सकती थीं , लेकिन छिटक नहीं सकती थी ,

दो खारे आंसू टपक कर ननद के नमकीन गालों पर आ गए और कम्मो ने झुक के उन्हें चाट लिया और हलके से गाल भी काट लिया।

लेकिन ये ठेलते जा रहे थे , धकेलते जा रहे थे करीब चार साढ़े चार इंच धंस गया तब वो रुके आधा करीब अभी भी बाहर था।

पर कम्मो ने गारियों की बारिश शुरू कर दी ,

" स्साले ये बाकी किस भोंसड़ी वाले के लिए , स्साले ससुराल में तेरी ये कोरी कुँवारी गाँड़ तेरी सास और सलहज होली में मार मार कर, लेकिन उसके पहले मैं ही कोहनी तक पेलकर, ... "

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ननद,

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ननद के भैया

दो खारे आंसू टपक कर ननद के नमकीन गालों पर आ गए और कम्मो ने झुक के उन्हें चाट लिया और हलके से गाल भी काट लिया।

लेकिन ये ठेलते जा रहे थे , धकेलते जा रहे थे करीब चार साढ़े चार इंच धंस गया तब वो रुके आधा करीब अभी भी बाहर था।

पर कम्मो ने गारियों की बारिश शुरू कर दी ,

" स्साले ये बाकी किस भोंसड़ी वाले के लिए , स्साले ससुराल में तेरी ये कोरी कुँवारी गाँड़ तेरी सास और सलहज होली में मार मार कर, लेकिन उसके पहले मैं ही कोहनी तक पेलकर, ... "

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गुड्डी की सिसकियाँ तो पहले ही रुक गयी थीं , अब वो कम्मो भौजी की रसीली गारियाँ सुन के हलके हलके मुस्कराने लगी थी, ... और इन्होने भी हलके हलके अपना खूंटा थोड़ा सा बाहर बहुत धीरे धीरे खींचने लगे ,

कभी स्टिल कभी वीडियो खींचते मैं समझ रही थी क्या होने वाला है , असली भरतपुर पर तो हमला अब होगा,

और वही हुआ , आलमोस्ट सुपाड़े तक बाहर निकाल के एक बार फिर उन्होंने कस के अपनी छुटकी बहिनिया की कटीली पतली कमरिया कस के पकड़ी और पूरी ताकत से ,

और अबकी धक्के पर धक्के , एक के बाद ,

ननद रानी चीखते चीखते थक गयी थीं बस अब रुक रुक कर सुबक रही थीं ,

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लेकिन अब कम्मो ने अपना रोल बदला और उसके दोनों हाथ दोनों छोटे छोटे जोबन पर , जिस जोबना पर सारे मोहल्ले के लौंडे दीवाने थे

भौजी का एक हाथ जोबन को सहला रहा था , दबा मसल रहा था और दूसरा हल्का हल्का निप्स को कभी पुल करता कभी पिंच, ...

कुछ देर में ही ननद का कहरना मस्ती भरी सिसकियों में बदल गया ,

कम्मो अब झुक के कभी ननद के होंठों को चूम लेती तो कभी उसकी चूँची चूस लेती , ननद भी भौजाई के चुम्मे का जवाब दे रही थी

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उसकी पूरी देह से लग रहा था उसे मजा आ रहा है , पर कुछ देर के बाद उन्होंने एक बार अपने खूंटे को हल्का सा पीछे कर के , इतनी कस के

मैं होती तो मेरी भी चीख निकल जाती , इतना जोरदार धक्का था

गुड्डी जोर से चीख पड़ी ,

पर ये रुके नहीं ,

वो चीखती रही ये चोदते रहे , और मुझे आँख पर विश्वास नहीं हुआ कैसे उसकी चीख सिसकियों में बदली, उसकी देह हलके हलके काँप रही थी , वो कगार पर थी ,

और इन्होने एक जोरदार धक्का , पक्का अबकी सीधे बच्चेदानी पर लगा होगा ,

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और गुड्डी एक बार फिर बिस्तर से उछल रही थी , मचल रही थी , दर्द से नहीं मजे से , वो तो कम्मो ने उसे कस के पकड़ रखा था

एक बार झड़ना बंद होता तो बस पल भर रुक के दूसरी बार, तीसरी बार, चौथी बार,

उन्होंने पूरी ताकत से ८ इंच का खूंटा अपनी छोटी बहिनिया के अंदर जड़ तक ठेल रखा था, मोटा सुपाड़ा उस किशोरी के बच्चेदानी से चिपका

झड़ झड़ के मेरी ननद थेथर हो गयी, और थक कर एकदम रुक गयी , कुछ देर भाई बहिन दोनों ऐसे पड़े रहे , लेकिन कम्मो कहाँ मानने वाली,

भौजी ने अपने देवर को इशारा किया,

खूंटा अभी भी भौजी की ननद की चूत में जड़ तक धंसा था , जिस चूत में एक दिन पहले तक तर्जनी ऊँगली घुसाना मुश्किल लग रहा था वो अब आठ इंच लम्बा ढाई इंच मोटा मूसल जड़ तक घोंटे पड़ी थी,

बिना एक सूत भी बाहर निकाले ही उन्होने लंड के बेस से अपनी छोटी बहिनिया की क्लिट पर रगड़ना शुरू किया, पहले थोड़ी देर बहुत धीमे धीमे, फिर तेजी से ,

लगता था कोई बड़ा बाँध टूट पड़ा , मेरी ननद एक बार फिर से कांपने लगी , सिसकने लगी , उसकी पूरी देह मुड़ तुड़ रही थी ,

जैसे तेज तूफ़ान, तेज बारिश रुकने के बाद बहुत देर तक पत्तों से , घरों की छत से पानी की बूँदें धीरे टपकती रहती हैं , हवा हलकी हलकी चलती है बस उसी तरह

अबकी जब ननद रुकी तो ये भी , फिर इनके खूंटे के अलावा हर इनके अंग,

उँगलियाँ होंठ जीभ

गाल हलके हलके सहलाते हुए चूम कर पहले उन्होंने दर्द से डूबी आँखों को बंद किया अपने होंठों से , और होंठ कभी मेरी ननद के रसीले होंठों पर

कभी नए नए आ रहे थे जोबन पर , थोड़ी देर में एक उभार इनके हाथों के बीच और दूसरा इनके होंठों के बीच

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मुझसे कोई पूछे इनकी उँगलियों और होंठों का जादू ,

थोड़ी देर में मेरी ननद पिघल रही थी मचल रही थी चुम्मे का जवाब चुम्मे से दे रही थी खुद अपने छोटे छोटे उभार इनकी छाती से रगड़ रही थी

और जब वो अपने छोटे छोटे चूतड़ खुद उछालने लगी तो ये समझ गए , धक्के फिर शुरू हो गए लेकिन हलके हलके

दो चार धक्के ये मारते तो एक दो बार वो नीचे से अपने चूतड़ उछालती और ये मस्ती में उसके मटर के नए आये दाने के बराबर निप्स चूसने लगते और वो खुद इन्हे खींच कर इशारे करती और धक्कों का जोर बढ़ जाता,

थोड़ी देर बाद वो फिर झड़ने लगी ,
 
मेरा सांड़

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और जब वो अपने छोटे छोटे चूतड़ खुद उछालने लगी तो ये समझ गए , धक्के फिर शुरू हो गए लेकिन हलके हलके

दो चार धक्के ये मारते तो एक दो बार वो नीचे से अपने चूतड़ उछालती और ये मस्ती में उसके मटर के नए आये दाने के बराबर निप्स चूसने लगते

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और वो खुद इन्हे खींच कर इशारे करती और धक्कों का जोर बढ़ जाता,

थोड़ी देर बाद वो फिर झड़ने लगी ,

लेकिन मेरा सांड़ इतनी जल्दी पानी छोड़ने वाला नहीं था ,

तीसरी बार जब मेरी ननदिया झड़ी दस पंद्रह मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद तो ये भी साथ साथ , लेकिन लंड पूरी तरह अंदर धंसा , ये पूरी तरह उसके ऊपर लेटे

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और चार पांच मिनट तक भैया और छुटकी बहिनिया , एक दूसरे से चिपके,

और जब ये अलग हुए तो मैंने घडी की ओर देखा आधे घंटे से भी ज्यादा,

ननद रानी की जांघों के बीच गाढ़ी थक्केदार मलाई भरी पड़ी थी, बहकर, रिसकर जाँघों पर भी आ रही थी।

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और रात की अभी ये शुरुआत थी।

…..

आधे घण्टे की तूफानी चुदाई के बाद वो थोड़े थके पड़े थे, पर चुपके चुपके अपने माल को, छुटकी बहिनिया को टुकुर टुकुर देख रहे थे. ननद रानी ने अपने भैया को चोरी चोरी ललचाते देखा तो एक पल के लिए वो भी लाल गुलाल हो गयी,पर अगले ही पल बढ़ के उसने अपने भैया को चूम लिया और उनके सीने में अपना सर छुपा लिया।

वो भले आराम करें, पर हम दोनों भौजाइयां अपनी ननद को आराम नहीं करने देने वाले थे.

पहला हाथ कम्मो ने मारा ननद रानी की बिल से अभी भी बूँद बूँद रिसती गाढ़ी मलाई पर और अपनी हथेली से दरेररते चिढ़ाया,

" हे ननद रानी, इतना बढ़िया गाढ़ी मलाई कहाँ से मिलल?"

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ननद रानी एक मिनट के लिए हिचकीं, अपने भैया को देख के शरमाई पर कम्मो ऐसी भौजाई के रहते कौन ननद शरमा के बच सकती थी।

कम्मो ने तुरंत वार्निंग दे दी ,

" अरे अब तो मलाई घोंट के बिलिया गील हो गईल है, बोला नहीं तो आपन मुट्ठी डार देब पूरी "

शरमाते लजाते गुड्डी रानी ने कबूला, " मेरे भैया की है। "

पर कम्मो ने कस के उस शोख कमसिन कच्ची कली के निपल उमेठने शुरू किये,

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और उस एलवल वाली ने जब तक जोर जोर से अपने भैया को सुनाते हुए बोल न दिया, मेरे भैया के लंड की मलाई है , तब तक नहीं छोड़ा।

मैं भी अपनी ननद के बगल में बैठी थी. मैंने दो उँगलियों से उसकी गोरी गोरी मांसल जांघों पर जम रही थक्केदार रबड़ी मलाई को समेटा, फिर उसके प्रेमद्वार पर लगी मलाई को भी दोनों उँगलियों में लपेटा, दूसरे हाथ से ननद रानी के गाल दबाकर मुंह खुलवाया और सीधे वो नीचे वाले मुंह की रबड़ी मलाई, ऊपर वाले मुंह में,

" अरे नीचे वाले मुंह ने स्वाद ले लिया तो ज़रा ऊपर वाले मुंह से भी स्वाद ले के बता न कैसी है तेरी भैया की रबड़ी मलाई। "

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वो नदीदी, शैतान, मेरी उँगलियों को चूस चूस के खूब रस ले ले के, और एक बूँद जो उसके होंठों पर लिथड़ गयी थी, जीभ निकाल के उसे भी चाट लिया, जैसे कह रही हो , भाभी मेरे प्यारे प्यारे भैया की है, मैं क्यों एक भी बूँद बर्बाद होने दूँ,

मेरी उँगलियाँ ऊपर वाले मुंह में तो तो दूसरी भौजी, कम्मो भौजी की दो उँगलियाँ नीचे वाले मुंह में और करोच करोच के वो सारी मलाई निकाल रही थीं ,

और वो सब ननद रानी के छोटे छोटे जोबन पर और साथ में भौजी का आशीर्वाद,

" अरे भैया क मलाई लगने से दिन दूना रात चौगुना ये जोबन बढ़ेंगे। "

मेरी ननद के जोबना सच में एकदम मस्त थे , टेनिस बॉल की साइज के, गोल गोल और खूब कड़े, अकड़े,... पहली बार तो कोई दबाने वाला मिला था,

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जो कहते हैं न चूँचिया उठान, एकदम वही, उभरते हुए जोबन,

और उस पर जिस तरह से दूध फेन की तरह कम्मो भौजी ने मेरे मरद की मलाई मेरी टीनेजर ननदी के आ रहे जोबन पर लपेटी थी,... एकदम मस्त लग रही थी,

निपल पर लगी मलाई को मैंने एक ऊँगली में लपेटा और सीधे एक बार फिर से ननद के मुंह में और छेड़ा,

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" हे अभी टेस्ट कर ले, बाद में जब मेरे भाइयों की चखोगी तो पूछूँगी, किसका ज्यादा स्वादिष्ट था "

बड़े मजे से मेरी ऊँगली से अपने भइया की मलाई चाटती चूसती वो शोख बोली,

" अरे भाभी, मेरे भैया से ज्यादा स्वादिष्ट किसी का हो सकता है क्या?"

तब तक कम्मो ने एक बार फिर से गुड्डी रानी की गुलाबो की ओर, एक साथ दो उँगलियाँ, वैसे तो जा नहीं सकती थीं, पर एक के ऊपर एक रखकर उन्होंने साथ साथ कस के कलाई की पूरी ताकत लगा के ठेल दी, और अंदर जाकर कैंची की फाल तरह दोनों उंगलिया फैला दी, गुड्डी जोर से चीख पड़ी.

मैं भी कम्मो का साथ देने पहुँच गयी, मैं पहले अपनी ननद की गोरी चिकनी खुली मांसल जाँघों को सहलाती रही, फिर कम्मो ने जोर से आँख मार के इशारा किया,

" भौजाई दो -दो और मजा सिर्फ एक ही ले, बड़ी नाइंसाफी है "

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एकदम सही कहा अपने लड़को को उनकी बहनों का नाम लगा लगा के, और ननदों को उनके भाइयों का नाम लगा के गारी देने में जो मजा आता है, और सुनने वालों/वालियों को भी खूब रस आता है,... गारियाँ पहले तो थोड़ी 'शराफत वाली' लेकिन जहाँ कुछ काम वालियां या कभी कभी जब सिर्फ औरतें लड़कियां होती हैं तो , 'मिर्च' बढ़ जाती है,... और उसके लिए कोई शादी बियाह के मौके की भी जरूरत नहीं , बस रिश्ता , देवर नन्दोई हों , जीजा हों , ननद हो,

इसी बात पर मेरी एक फेवरिट याद आ गयी देवरों को चिढ़ाने के लिए मैं,...

देवर हमारे आंगन में आये,



आने को आदर, बैठन को कुर्सी ,

खाने को खाना , पीने को पानी,

अरे संग सोवन को ( अब देवर को भी अंदाज लग जाता था की असली हमला होने वाला है )

अरे संग सोवन को , मजा लेवन को ननदी हमारी ( नाम लेकर, अक्सर जो उनसे थोड़ी छोटी या समौरिया होती थीं उन्ही का नाम ले ले के चिढ़ाया जाता था )



अरे संग सोवन को ननदी हमारी राजी रे

( और अगर कहीं मूड ज्यादा 'गरम' हुआ , सिर्फ औरतें लड़कियां हुयी ,... ये आखिरी लाइन और 'विस्तार ' से गए दी जाती थी, अरे संग सोवन को , अरे टांग उठावन को , .... और 'सब कुछ ' )

सच में रिश्तों की मिठास और मजा बहुत कुछ गानों में था और है।
 
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