Erotica मोहे रंग दे - Page 39 - SexBaba
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Erotica मोहे रंग दे

कम्मो की प्लानिंग

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ख़ास तौर से दो बातें मेरी समझ में नहीं आ रही थी ,...

और कम्मो भौजी से कोई बात छिपती नहीं थी , जब वो खाने के लिए बुलाने आयीं तो मैं उनके साथ चल दी , ...

आज किचेन उनके हवाले था , खाते समय उन्होंने पूछ लिया ,

" बोल तो दिया उस स्साली की आज फड़वा दूंगी , अब काहें मुंह धूमिल है ,... "

और मैंने बोल दिया ,

" वो अभी एकदम कच्ची कली , कोरी , और इनका ,.... बहुत चिल्लायेगी , जा भी पायेगा की नहीं ,... "

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वो हंसने लगीं और बोलीं ,

" अपनी सास को बोल न , उन्ही को गदहे , घोड़े के साथ सोने का शौक हो गया था , ... "

फिर सीरयस हो के मुझे समझाते बोलीं ,

" अरे उसी चूत से इत्ते मोटे मोटे बच्चे निकल जाते हैं , बात तो तेरी सही है , चिल्लायेगी बहुत वो , फचफचा कर खून फेकेगी जब फटेगी उसकी , लेकिन भौजाई के सामने ननद की फटे , वो भी उसके सीधे साधे भैया से , उससे ज्यादा मजे की बात क्या ,... वो सब तू मेरे ऊपर छोड़ , बस तू वो क्या कहते हैं न उसकी फोटो खींचती रहना , अपने मोबाइल से , ... हाँ एक बात और , ... वो वैसलीन वेसलिन कुछ नहीं सिर्फ देसी कडुआ तेल लगाउंगी , वो भी सिर्फ दो बूँद , सुपाड़े पर , जिससे थोड़ा धंस जाए , उसके बाद तो ,... "

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मैं भी मुस्कराने लगी , उनकी बात सोच के , फिर भी मेरे चेहरे से परेशानी मिटी नहीं।

मैंने कहा था न कम्मो भौजी से कुछ भी छुपाना मुश्किल था , मुझे हड़का लिया उन्होंने

"

" अब क्या , आ तो रही है न वो छिनार ,... "

उन्होंने पूछ लिया

" हाँ एकदम , खुद उसी का फोन आया था , तीन, साढ़े तीन तक आ जायेगी ,... लेकिन मुझे ,... उसको तो हम लोग किसी तरह पकड़ के पटक के , लेकिन इन्हे किस तरह उसके ऊपर ,... खाली गुड्डी रानी के टांग फ़ैलाने से थोड़े ही होगा ,... उसके भइया को ,... "

मेरी बात काटते हुए कम्मो ने घूर के मुझे देखा ,

" देवर किसका है वो ,... "

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मैं भी सहम गयी ,

" आपका " मैंने कबूला।

" तो फिर , ... देखना कैसे हचक के फाड़ेगा , तू सिर्फ खाना खा। "

और हम दोनों खाना खाने लगे , लेकिन अब कम्मो ने एक सवाल दाग दिया ,

" यार , हम दोनों मिल के उस स्साली की आज फड़वा देंगे , झिल्ली फट जायेगी , लेकिन फिर तो उसकी बुरिया में मोटे मोटे चींटे काटने लगेंगे , ... और तुम दोनों तो दो दिन में सरक लोगे , फिर क्या होगी उस छिनार स्साली का , एक बार गेट खुल जाएगा ,.... "

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और अब मेरी बारी थी , हँसने की भी , उनकी बात भी काटने की ,

" अरे आपके देवर जिनका मूसल आप घोंटती रहती हैं ,... हिस्सा बंटवा लीजियेगा अपनी छिनार ननद से , आखिर वो सब भी तो उसके भाई लगेंगे , ... एक बार गेट खुल गया तो बंद नहीं होना चाहिए , ... मैं नहीं रहूंगी आप तो रहेंगी , फोन रहेगा , रोज हाल लुंगी "

अब वो भी मेरे साथ मेरे हंस रही थी और बोलीं ,

"सुन होली के अगले दिन मेरे गाँव के दो तीन लौंडे , पठान के लौंडे , एकदम मेरे देवर जैसा , और नम्बरी चोदू अरे गाँव के रिश्ते से तो मेरे भाई लगेंगे , ... फिर अपने भाई से चुदवायेगी तो मेरे भाई से क्यों नहीं , ... "

" एकदम , तभी तो असली मजा आएगा ,... अरे हम लोग रोज ननद के भाई के सामने टाँगे उठाते हैं , ननद को भी तो हम लोगों के भाई के सामने टाँगे फैलानी चाहिए "

हँसते हुए मैंने उनकी बात की ताकीद की लेकिन अब कम्मो परेशान थी पर उनकी परेशानी समझ कर मैंने उन्हें उसका हल भी बता दिया , मैं समझ रही थी उनकी परेशानी, आज तो हम दोनों मिल के उस किशोरी की किसी तरह, लेकिन एक बार मैं चली जाउंगी तो कम्मो के लिए अकेले उस को सधाना , .. आज ही कितना इमोशनल ब्लैकमेल कर के उसे मैं पटा के ला रही थी , तो कम्मो के लिए , लेकिन ,... सोचते सोचते एक जुगत आ गयी थी मेरी दिमाग में

" अरे अइसन जादू की डिबिया दे के जाउंगी , न नैना जादूगरनी की तरह एकदम कैद कर के ,... बस जहाँ बुलाइयेगा जब बुलाइयेगा , आएगी और जिसके सामने कहियेगा टांग फैलाएगी ,.... "

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एकदम उनका चेहरा १००० वॉट का बल्ब हो गया " अरे फिर तो देखना उस छिनार को पक्की रंडी बना दूँगी कालीन गंज ( मेरी ससुराल की रेड लाइट एरिया ) वालियों के भी कान काटेगी , एक बार वो पठान के लौंडे चढ़ गए न उस के ऊपर , रंडी से भी बदतर उसकी चुदाई करेंगे वो सब , सब सरम लिहाज उसकी गांड में , ... "

मैं कुछ बोलती , तब तक फोन घनघनाया , मैंने उठा कर बात किया

" नहीं नहीं कोई बात नहीं , अरे सब ठीक है , अरे कम्मो तो हैं न यहाँ पर ठीक है कल "

और मैंने बात काट दी , कम्मो बरतन समेट रही थी , लौट के उसने एक बात और उठा दी ,

" एक बात मैं और सोच रही थी , चल आज उसकी फड़वा दूंगी , लेकिन अगर वो कहीं रात भर रुक जाती न , तो ऐसी उसका कचूमर निकलवाती , पर तोहार सास जेठानी लौट आएँगी आज नहीं तो उहो समझती ,... "

मैंने मारे ख़ुशी के कम्मो को भींच लिया और चूमते बोली ,

" अरे तोहरे मुंह में गुड़ घी , ओ लोग नहीं आ रही हैं आज रात , उहाँ रात में गाने का प्रोग्राम है , कल दोपहर तक आएंगीं , तो आज रात रगड़ घिस होगी ननद रानी की , तोहरे हवाले , ननद और देवर दोनों जेठानी जी का ही फोन था , लेकिन एक मिनट। "

और मैंने गुड्डी के घर भी फोन कर के बता दिया की आज रात गुड्डी यहीं रुकेगी , आज मैं अकेली हूँ , फिर पता नहीं कब लौटूंगी ,... "

और वहां से भी हामी मिल गयी ,

बस कम्मो किचेन समेटने मैं लग गयी और मैं बची खुची पैकिंग करने में। एक बार गुड्डी आ गयी तो , बस डेढ़ घंटे बचे थे उसके आने में ,...
 
बहुत बहुत धन्यवाद, वो कहानी जहाँ मैंने पोस्ट की थी, ( और दुबारा कहीं भी नहीं पोस्ट की ) वो फोरम तो बंद हो गया. और उस के कारण मेरी एक दूसरी लम्बी कहानी अधूरी रह गयी, जोरू का गुलाम जिसे मैं यहाँ फिर से पोस्ट कर पूरी करने की कोशिश कर रही हूँ ,

एक अन्य फोरम में एक मित्र ने उसे पी डीएफ फ़ार्म में पोस्ट किया था , लेकिन मेरे ही नाम से,

अगर लोग चाहेंगे , हो सकेगा तो कम से कम पीडीफ फ़ार्म में ही सही , मैं यहाँ शेयर करने की कोशिश करुँगी ,

वह कहानी नहीं बल्कि उपन्यास है , करीब डेढ़ हजार पन्नो का , अगर छपता तो भी ६००- ७०० पेज होते, और कलेवर की दृष्टि से भी भारत के उनके शहरों ( बनारस, मुम्बई , वड़ोदरा) के साथ विदेश की भी पृष्ठभूमि है उसमें
 
दो वर्ष,

यह कहानी अप्रेल २०१९ में शुरू हुयी थी ,

और तीसरी कसम की तरह मैंने कसम खायी थी, ये कहानी फागुन के दिन चार और जोरू के गुलाम की तरह उपन्यास की साइज की नहीं होगी।

एक ऐसे फोरम के बंद होने से जिसके बारे में न लिखने वाले सोचते थे न पढ़ने वाले की वो बंद होगा पर उसके बंद होने से वो कहानी /उपन्यास अधूरा ही रह गया खैर अब इस फोरम में उसे फिर से शरू कर के ,...

दोनों, फागुन के दिन चार और जोरू का गुलाम मेरे लेखे ( एम् एस वर्ड , मंगल फ़ॉन्ट , साइज ११ ) १००० पन्ने से ज्यादा थे, पीडीफ में भी शायद ८०० या उससे ज्यादा और अगर कभी पुस्तकाकार छपें तो भी ४०० -५०० पन्ने से कम नहीं,

इसलिए मैंने पहली सीमा तय की आकर की, १००० पृष्ठों से बड़ी नहीं होगी

और कथावस्तु भी सीधी सादी एक नव युवा दम्पति की कहानी,

न कोई रोमांस ( विवाह पूर्व का ) न कोई चक्कर , न सीरियल सेक्स , न इन्सेस्ट

अधिकतर पति पत्नी के रंग में डूबने उतराने की कहानी ( हाँ क्षेपक के तौर पर, कुछ प्रसंग जरूर आ गए हैं , देवर और ननद की सहेली , कम्मो लेकिन वो कहानी के अभिन्न अंग ही है )

कहानी की शुरुआत ही होली के जिक्र से हुयी थी और मैंने कहा था की ससुराल में ( मेरी ) होली मेरी तीसरी होली है , और यह भाग सिर्फ पूर्वपीठिका भर शायद था ,

पर कहनियां बच्चो की तरह होती हैं या जवान होती लड़कियों की तरह किसी की बात मानी हैं उन्होंने जो मेरे बात मानती ,

और जैसे लड़कियां जब बड़ी होनी शुरू होती हैं तो झट्ट से बड़ी हो जाती हैं , बस यही हाल इस कहानी की है , ...

पर एक ऐसे कहानी जो न पेज टर्नर है , न जिसमें कोई सस्पेंस हैं न टैबू , सेक्स भी अधिकतर पति पत्नी का ,...

हाँ घर का माहौल है , एक विस्मृत से हो रहे संयुक्त परिवार का जहाँ सास अपने बेटे से ज्यादा नयी बहु का साथ देती है, बेटी से ज्यादा दुलार देती है, जेठानी न सिर्फ छेड़खानी में साथ देती है बल्कि देवरानी उसकी पक्की सहेली है,

पर अब यह कहानी करीब ९०० पन्नो के आस पास पहुँच रही है , ( वर्ड में टाइप करने में )

हाँ एक बात की सफाई , ..

होली का मौसम हो , फागुन लग गया हो और होली के प्रसंग न हों ,...इसलिए पिछले १००- १५० पन्नो से ये कहानी थोड़ी बहुत होली पूर्व होली के माहौल में मुड़ गयी ,

नहीं नहीं , ये कहानी अभी ख़तम नहीं हो रही , कुछ दिन और आप का साथ रहेगा इस कहानी के साथ

पर दो वर्ष लंबा

यह समय है आप सबको धन्यवाद देने का इस यात्रा में सहभागी होने का

और ये थोड़ी अलग ढंग की कहानी होने पर पर , इसे पंसद करने के लिए , कमेंट करने के लिए

कृतग्यता व्यक्त करने का
 
किसी लिखने वाले के लिए उसका सब लिखा अच्छा ही होता है पर इसकी थीम थोड़ी नहीं काफी अलग थी , और पूरा दारोमदार वर्णन और विवरण पर है. लेकिन मैं धन्यवाद देना चाहूंगी अपने मित्र पाठक, पाठिकाओं का,... जहाँ इन्सेस्ट ( कई लोग इंसेक्ट भी लिखना पसंद करते है ) के बिना कहानियां हांफने लगती है आठ दस पन्नो के बाद ही, वहीँ इस गंवई कस्बाई माहौल वाली कहानी का उन्होंने साथ दिया , ... मेरी गणना में यह कहानी करीब ९०० पन्ने पार कर चुकी है , तो शायद कुछ पोस्ट और लगेंगे ,.... मैं कहानी न अभी रोक रही हूँ , न अचानक इसे ख़तम करुँगी , ... लेकिन यह समय था

धन्यवाद ज्ञापन का।

अब थोड़ी देर में अगली पोस्ट , बातचीत की नहीं कहानी की ,
 
आ गयीं,... ननद रानी

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और मैंने गुड्डी के घर भी फोन कर के बता दिया की आज रात गुड्डी यहीं रुकेगी , आज मैं अकेली हूँ , फिर पता नहीं कब लौटूंगी ,... "

और वहां से भी हामी मिल गयी ,

बस कम्मो किचेन समेटने मैं लग गयी और मैं बची खुची पैकिंग करने में। एक बार गुड्डी आ गयी तो , बस डेढ़ घंटे बचे थे उसके आने में ,...

लेकिन वो एक घंटे में ही आ गयी , तीन बज रहा था।

मैं मुस्करायी , इसका मलतब इसको भी जोर के चींटे काट रहे हैं ,

लेकिन क्या मस्त माल लग रही थी , मैंने कहा न कई बार , चेहरा उसका इतना भोला लगता था जैसे दूध के दांत भी न टूटे हों, पर

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जोबन जबरदंग , उसके टॉप को फाड़ती , छलकती मचलती ,

जोबन के मामले में अपने क्लास वालियों से २० नहीं २२ थी वो , मेरी छुटकी ननदिया ,...

और टॉप फाड़ते जोबन को कुछ छिपाने कुछ दिखाने के लिए एक स्टोल , गुलाबी रंग का डाल रखा था दुपट्टे सा , ...

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मैं समझ गयी , फागुन तो लग ही गया था , और खुद उसने कबूला था , आठ दस भंवरों की बात , उसकी सहेलियों ने तो दर्जन भर से ऊपर गिना दिए थे , और दो चार तो उसकी गली के बाहर ही रहते थे ,...

स्साली आज कुछ ज्यादा ही मस्त लग रही थी , लग रहा था जवानी की गर्मी कस के चढ़ी थी , और उस का एक ही इलाज था , चढ़ाई। आज मैंने कुछ प्लानिंग नहीं किया सब कम्मो के हवाले था , और मैं अब तक मान गयी थी , कम्मो का कोई जवाब नहीं , होली में ननदो और देवरों की रगड़ाई करने में ,

लेकिन उधर मेरी नन्द आयीं तब तक एक पड़ोस की , मेरी जिठानी लगतीं आ गयीं ,

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और उन की नजर गुड्डी पर ही फिसल रही थी , गुड्डी थी भी ऐसी , ... मैं उनसे एक मिनट कह कर गुड्डी को ऊपर अपने कमरे में ले आयी , मेरी समझ में नहीं आ रहा था आगे क्या करूँ , ....

पर कम्मो थी न , वो मेरे पीछे पीछे ,

एक प्लेट में गुझिया , और लम्बी सी गिलास में ठंडाई ,...

गुड्डी ने थोड़ा सा नाननुकूर किया , पर उसके मालपुआ ऐसे गाल , कम्मो ऐसे भौजाई छोड़ने वाली थोड़े ही थी , कचाक से उसने दबाया और सटाक से गुड्डी रानी का मुंह खुल गया , फटाक और झटाक से मैंने गुझिया अंदर ठेल दी , गप्प से आधी अंदर थी ,

गुझिया के रंग रूप से मैं समझ गयी थी , स्पेशल नहीं डबल पेसल वाली , कम्मो स्पेशल , हर गुझिया में दो दो गोली शुद्ध बनारसी भांग , बेचारी को घोंटना ही पड़ा

" अभिन तोहार भइया घोटाते तो झट से खोल के गप्प कर लेती ,... छिनार "

कम्मो को कौन चुप करा सकता था ,

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" हे घोंटने में कुछ मुश्किल होना तो गीला कर लेना चाहिए , हाँ "

और अब ठंडाई का नंबर था और मुझे पक्का पता था उसमें भी कम्मो के हाथ का जादू जरूर होगा ,

गुड्डी के रोकते रोकते , कम्मो ने ग्लास उसके होंठ से लगा दिया , कुछ मुंह में गया कुछ गिरा पर ग्लास कम्मो के हाथ से नहीं छूटा।

अभी एक गुझिया बची थी , पर कम्मो ने गुड्डी को वार्निंग दे दी ,

" देखा ये वाली अपने से घोंटा नहीं तो हम तोहरी इस भौजाई अइसन सोझ नहीं हैं , हम ऊपर वाले नहीं नीचे वाले मुंह से खिलाएंगे , पीछे वाले , जाएगा तो पेट में ही , तो बोला मुंहे से घोटबु की गांडी में से , ... "

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बेचारी , उसने गुझिया उठा ली ,... मैंने कम्मो के भरोसे गुड्डी को छोड़ा , और नीचे अपनी पड़ोसन की ओर चल दी ,

लेकिन चलने के पहले गुड्डी को अपना आई पैड पकड़ा दिया , ...

" हे मिलते हैं ब्रेक के बाद ,.... बस अभी , लेकिन तब तू चाहे तो पिक्चर विक्चर देख लेना ,... "

उसे मालूम था की उसमे कैसी नीली पीली फ़िल्मी भरी हैं , और एक फोल्डर तो खाली ' मेरा उनका '

मैं सोच रही थी की नीचे पड़ोसन को जल्दी निपटा के ननदिया का रस लेने ऊपर आ जाउंगी , वो उठ के जा भी रही थीं की कम्मो ने उन्हें रोक लिया , किचेन से ही हाँक लगाई "

" अरे रुका चाय ला ला रही हूँ , तनी पापड़ भी छान दूँ ,... "
 
कम्मो

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मैं सोच रही थी की नीचे पड़ोसन को जल्दी निपटा के ननदिया का रस लेने ऊपर आ जाउंगी , वो उठ के जा भी रही थीं की कम्मो ने उन्हें रोक लिया , किचेन से ही हाँक लगाई "

" अरे रुका चाय ला ला रही हूँ , तनी पापड़ भी छान दूँ ,... "

मेरी कुछ समझ में नहीं आया लेकिन चाय देते समय जब कम्मो ने घडी की ओर इशारा किया तो मैं समझी ,

गुड्डी रानी को जो भांग गुझिया ठंडाई में खिलाई पिलाई गयी थी , कम से कम २०- ३० मिनट तो लगता उसका असर चढ़ने में , इसलिए ,

फिर तो मैं भी , दो बार उन्होंने जाने को कहा लेकिन मैंने रोक दिया और पूरे ४० मिनट बाद ही उन्हें जाने दिया ,

जब मैं पहुंची तो गुड्डी की आँखों में गुलाबी डोरे थे ,

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वो आई पैड पर मेरी उनकी ' लीला ' , में कैसे निहुर कर उसके भइया का लील रही थी ,

इसके पहले भी कई बार मैं उसे इनके मूसल की फोटो दिखा चुकी थी , एक बार तो पूरी सफ़ेद मलाई भी इनकी सीधे इनकी पिचकारी से मेरी ननदिया के मुंह में और उस छिनार ने गटक भी लिया था ,

वो खड़ी हो गयी , लेकिन मैं अपने हाथों में रंग छुपा के लायी थी , समझ दार तो वो थी ही , बस झट से उसने अपने गोरे गोरे गालों को छुपा लिया , लेकिन मैंने सिन्दूर की तरह रंग आराम से उसकी मांग मने भर दिया ,

" चल यार न तेरे भइया हैं न मेरे भइया तो दोनों की ओर से मैं कर देती हूँ सिन्दूर दान "

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" एकदम और उसके बाद सुहाग रात ,... "

पीछे से कमरे में घुसती हुयी कम्मो बोली , उसके हाथ में रंगो से भरी गुलाल की प्लेट थी।

"पहले भौजी लोगन के साथ सुहागरात मना लो , फिर अपने भइया के साथ " मैंने उसे छेड़ा ,

" एकदम पहले अपने भइया के साथ फिर भौजी लोगन के भइया लोगन के साथ "

कम्मो क्यों मौका छोड़ती।

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" अरे समझती क्या हो मेरी ननद को , अपने भइया का भी मन रखेगी , हम लोगन के भइया का भी , क्यों , अच्छा ये बता इत्ते चिक्कन चिक्कन गाल , आखिर कोई न कोई तो चूमेगा , रस लेगा, तो तेरे भइया क्यों नहीं ,... अच्छा ये बता तुझे अपने भैया अच्छे लगते हैं की नहीं। "

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" एकदम बहुत अच्छे हैं , " तुनक के वो बोली , ... लेकिन उसी समय हलके से एक गाल चूम के मैंने चिढ़ाया ,

" तो फिर उनको दे दो न एक चुम्मी बेचारे बहुत तरसते हैं , इस गाल पर " और ये कहते हुए मैंने एक गाल चूम लिया।

और दूसरे गाल पर कम्मो ने अपनी मोहर लगा दी।

…."और ओकरे बाद यह मालपुवा का मजा हमर भैया लेंगे ". कम्मो ने बात आगे बढ़ाई।

"गालो के बाद तुम्हारे भैया इस रसीले होंठ पर नंबर लगायेंगे , " और अबकी मेरे होंठों ने उसके होंठों को दबोच लिया और साथ में मेरी जीभ उस कच्ची कली के होंठों के अंदर ,... "

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और ऊपर से कम्मो और उसे उकसा रही थी , ... " अरे ननद रानी कउनो तो आखिर रस लेगा ही , तो आखिर हमरे देवर में कौन कमी है , उन्ही को दे दो न जोबन का दान , "

भांग का सुरूर उस टीनेजर पर चढ़ रहा था , और भांग में सबसे मजेदार बात ये होती थी की मस्ती चढ़ने के साथ साथ , मन जिधर मुड़ जाता है बस वही मन करने लगता है , मैं मान गयी कम्मो को ,

और अब नंबर था रंग गुलाल का , इस होली में सब की रगड़ाई हुयी थी सिवाय गुड्डी रानी के , मोहल्ले की ननदें , गुड्डी की सहेलिया, मेरे देवर कम्मो ने सबके कपडे उतारे थे तो अब ये क्यों बचती , ...

लेकिन जैसे मैं प्लेट में से गुलाल उठाने के लिए झुकी वो जोर से चीखी , ...

नहीं भाभी कपड़ा खराब हो जाएगा नयी ड्रेस है एक,दम

" तो कपड़ा उतार दो न , सही तो है "

कम्मो को तो और मौका मिल गया चिढ़ाने का , गुड्डी मुझे रोक रही थी , पर कम्मो ने एक झटके में उसके दुप्पट्टे की तरह स्टोल को खींच लिया ,

और जब तक वो समझे , उसके दोनों हाथ कम्मो के हाथ में , पीठ के पीछे और कम्मो ने जबरदस्त गाँठ बाँध दी थी , किसी हालत में छुड़ाने से छूटती नहीं।गुड्डी के जोबन , जबरदस्त , टॉप फाड़ते ,... अब मैं समझी बेचारी ने स्टोल दुपट्टे की तरह क्यों ओढ़ रखा था , होने भंवरों से नए आते उरोजों को छुपाने के लिए ,
 
होलिया में उड़े रंग गुलाल

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" तो कपड़ा उतार दो न , सही तो है "

कम्मो को तो और मौका मिल गया चिढ़ाने का ,

गुड्डी मुझे रोक रही थी ,

पर कम्मो ने एक झटके में उसके दुप्पट्टे की तरह स्टोल को खींच लिया , और जब तक वो समझे , उसके दोनों हाथ कम्मो के हाथ में , पीठ के पीछे

और कम्मो ने जबरदस्त गाँठ बाँध दी थी , किसी हालत में छुड़ाने से छूटती नहीं।

गुड्डी के जोबन , जबरदस्त , टॉप फाड़ते ,... अब मैं समझी बेचारी ने स्टोल दुपट्टे की तरह क्यों ओढ़ रखा था , भंवरों से नए आते उरोजों को छुपाने के लिए , ...

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" अरे देखी जरा कौन चीज़ है जो इतना तोप ढांक के राखी हो , अच्छा , माल तो जबरदस्त है , ... "

टॉप के ऊपर से उसके उभारों को हलके हलके छूते सहलाते मैंने छेड़ा ,

कम्मो पीछे से उसके दोनों हाथ कस के पकडे हुए थी और गाँठ बाँध रही थी , इसलिए मेरी ननद हाथ मेरे हटा भी नहीं सकती थी , खाली कसर मसर कर रही थी , पर कम्मो की बाँधी गाँठ , अब उसके हाथ छूटने से रहे।

" अरे यार तेरे भइया इसी के लिए तो इत्ता ललचाते रहते हैं , दे दे ना , आखिर कोई न कोई तो इनका रस लूटेगा ही। "

हलके हलके उसके उभार सहलाते मैं उसे समझा भी रही थी , उकसा भी रही थी।

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कम्मो भी आ गयी मेरे साथ और वो सहलाने छूने वाली नहीं थी , दूसरा उभार उसके हाथ में था , और वो टॉप के ऊपर से ही उसे रगड़ मसल रही थी कस कस के ,

असर वही हुआ जो होना था , पहले तो वो चीखी चिल्लाई पर कम्मो के हाथ का असर , जोबन रगड़ने मसलने में लड़कों से भी दस हाथ आगे थी ,

गुड्डी सिसकने लगी।

उसके निप्स एकदम खड़े टॉप के ऊपर से झलकने लगे , और अब कम्मो ऊँगली से फ्लिक करने लगी पर बोल वो मुझसे रही थी ,

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" अरे ये कोई पूछने की बात है , काहें नहीं देगी , आज अपने भइया को देगी , बाद में हमारे भैया को देगी , ये तो देने को तैयार है बस लेने वाला ,.... "

और अब कम्मो की बात काटते हुए , मैं ने दूसरे निप को पकड़ा और अपने अंगूठे और तर्जनी के बीच दबा के फ्लिक करने लगी ,

" देख तेरे भइया ऐसे ही करते हैं , सच में बहुत मजा आता है , पहले ऊँगली से फिर होंठों से ,... बेचारे इत्ता तरसते हैं तेरे इन कच्ची अमियों के लिए , ... सच बहुत मजा आएगा तुझे "

मजा तो उसे भी बहुत आ रहा था पर वो बोल रही थी , भाभी छोड़िये न , उसकी आँखों में भांग का नशा हलका सा छा रहा था ,

" चलो न ननद की बात मान लेते हैं , हम तोहार एक बात मान लेते हैं तू हमार बात मान लो , अपने भइया से , .... "

कम्मो ने टॉप तो छोड़ दिया , और मैंने भी लेकिन हम दोनों ने मिल के टॉप उठा दिया ,

किसी भी लौंडे की हालत खराब हो जाती , और इनका मूसल तो पक्का पत्थर का ,... दो छोटे छोटे लड्डू ब्रा में मुश्किल ढंके , ... और ये ब्रा जो उसके भइया लाये थे , हाफ कप वाली , जो छिपाती कम थी , दिखाती ज्यादा थी।

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और अब ब्रा के ऊपर से रगड़ना मसलना चालू हो गया , लड़कियों के मामले में मैं कम्मो को मान गयी थी , उन्हें पिघलाना , गीली करना , मोहल्ले की जो ननदें उसकी पकड़ में आयी थी सब की , ... और आज तो कम्मो टॉप फ़ार्म में थी

बिना कुछ बोले , वो हलके उसकी ब्रा के ऊपर से वो सहला रही थी मसल रही थी , लेकिन मुझसे नहीं रहा गया मैंने पीछे से ब्रा की स्ट्रैप खोल दी , और अब ब्रा मेरी मुट्ठी में ,

ब्रा पहनी ननदें मुझे एकदम नहीं अच्छी लगती थीं , इत्ती मुश्किल से इत्ता इन्तजार करने पर तो ये जोबन आते हैं , और ऊपर से ,... इतना तोपना छुपाना ,

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ब्रा मेरी मुट्ठी में और दोनों जोबन कम्मो की ,

लेकिन अब उसके होंठ और जीभ मैदान में आ गए थे , पहले जीभ से वो निप्स फ्लिक कर रही थी , फिर हलके हलके सक करने लगी ,

उह्ह्ह , नहीं नहीं , भौजी नहीं , ओह्ह्ह , ... प्लीज , भौजी छोडो न

मिनट भर में ही गुड्डी रानी पिघलने लगी ,

लेकिन कम्मो इत्ती आसानी से नहीं छोड़ने वाली , उसने चूसने की रफ़्तार बढ़ा दी , कम्मो के होंठो का असर किसी उभरते निपल पर इतना होता था जितना कोई और क्लिट को छूए

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गुड्डी की आँखे पूरी तरह बंद हो गयी थी वो सिसक रही थी पिघल रही थी ,

कम्मो ने अब गियर बदला और मैं भी उसके साथ , कस कस के हम दोनों अपनी नन्द के उभारों को रगड़ मसल रहे थे ,

और वो चीख रही थी , कभी दर्द से कभी मस्ती से ,

" हे भाभी छोड़ दीजिये न , भौजी प्लीज ,... "

" अच्छा एक बार बोल दे क्या छोडूं तो छोड़ दूंगी , क्यों कम्मो "

जोर से उसके निप्स को पिंच करती मैं बोली।

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भैया को दूंगी , दूँगी दूँगी

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" हे भाभी छोड़ दीजिये न , भौजी प्लीज ,... "

" अच्छा एक बार बोल दे क्या छोडूं तो छोड़ दूंगी , क्यों कम्मो "

जोर से उसके निप्स को पिंच करती कम्मो बोली।

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" ओह्ह मेरे वो मेरा सीना , मेरे जोबन ,... "

मैंने कम्मो से भी जोर पिंच किया , वो जोर से चीखी लेकिन उसे मेरी बात याद आ गयी , मेरे सामने चूँची , चूत , चुदाई के अलावा कुछ भी बोला तो ,

बड़ी मुश्किल से उसके मुंह से चूं निकला तो कम्मो ने कस के उभार दबा दिए और चिढ़ाया ,

" हे चिड़िया हो का जो चूं चूं बोल रही हो पूरा बोल , .... नहीं तो ,... "

" चूँची , ... धीमे से वो बोली

मैंने नहीं सुना " मैं और कम्मो एक साथ बोलीं ,

अबकी थोड़ा जोर से बोली वो ,

' चूँची भौजी छोड़ दो न हमार चूँची "

और हम दोनों ने छोड़ दिया लेकिन टुकुर टुकुर देखने से हमे कौन रोक सकता था ,

रुई के गोल गोल फाहों ऐसे मुलायम , खूब गोरे गोरे माखन के गोलों ऐसे , छोटे भी नहीं , उसकी उम्र के हिसाब से तो , ... अच्छे खासे मुट्ठी में जाएँ और जान मारू थे निप्स , ललछौंहे , बस सुबह की सूरज की लालिमा ऐसे , आ ही रहे थे , कच्ची मटर की फली के दाने ऐसे ,

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लेकिन कम्मो फागुन हो , ननद हो , उसके उघारे नए आ रहे जोबन हो और रंग न लगाया जाय , बस प्लेट भर गुलाल जो लायी थी वो सीधे दुनो जोबना के ऊपर ,

गुड्डी ना ना करती रही , लेकिन फागुन में किसी ननद की किसी भौजाई ने सुनी है जो वो सुनती ऊपर से कम्मो ऐसी भौजाई ,

फिर मैं क्यों पीछे रहती और मैं ने नन्द की बात का जवाब भी दिया ,

" यार तू ही कह रही थी न की ड्रेस में रंग न लगे तो अब कतई ड्रेस में रंग नहीं लगेगा , अब काहें चिल्ला रही है , '

कबूतर के ललछौंहे पंख बहुत अच्छे लग रहे थे , बस ननद रानी की जोबना की रगड़ाई करने का काम मैंने कम्मो के ऊपर छोड़ा और खुद गुड्डी के ही फोन से उसकी फोटो खींचने में लग गयी , कुछ क्लोज अप तो कुछ में गुड्डी रानी का चेहरा भी एकदम साफ़ आ रहा था ,

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जब तक वो समझती सम्हलती उस कच्ची कली के किशोर उभारों के दर्जनो फ़ोटो

लेकिन तब तक मैं दूर खड़ी थी , और उसकी फोन बुक में से नंबर सेलेक्ट कर रही थी ,

" हे बोलो न किस किस को भेज दूँ , तेरी सारी सहेलियों को , और रेनू को बोल दूंगी कुछ तेरे भंवरों को , बेचारे उन का भी कल्याण हो जाएगा , अरे वाह तेरे व्हाट्सऐप में तो तेरे कुछ भंवरों का भी नंबर है , बस सबसे पहले उन्ही को ,... "

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बेचारी उस की हालत खराब

पर हालत उसकी खराब , हाथ दोनों बंधे और वो कम्मो की पकड़ में , ...

" भाभी प्लीज ,... "

" अच्छा चल यार लेकिन एक मेरी छोटी सी बात , एक है कोई जो तेरे इस जुबना का प्यासा है , बेचारा दो तीन दिन में चला जाएगा , फिर पांच छह महीने कब लौटे पता नहीं , एक बार ये दोनों कबूतर उसको ,... "

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" धत्त भाभी ," वो शर्माती थी तो और सेक्सी लगती थी।

" लास्ट चांस ,... यार तेरे फोन से भेज रही हूँ , सब तुरंत खोलेंगे , और तू ये भी नहीं कह सकती पता नहीं किसने भेजा ,... बस एक बार बोल दे न देगी , ये दोनों , ... "

" अच्छा बोल दूंगी , भाभी डिलीट कर दीजिये न "

डिलीट तो मैंने नहीं किया लेकिन फोन रख दिया और फिर उस के पास आके बोली ,

" क्या बोलेगी ,... एकदम साफ़ साफ़ बोल ,... तो मालूम है न कौन है तेरा दीवाना , ... बस बोल दे दूंगी "

मुझ से ज्यादा , कम्मो और जब तक तीन बार उसने नहीं बोला ,

" चूँची भैया को दूंगी , दूँगी दूँगी "

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तब तक हम दोनों ने नहीं छोड़ा , हाँ उसकी इस बात की भी पूरी वीडियो रिकार्डिंग हुयी।

लेकिन अभी तो चार आने का भी खेल नहीं हुआ था , कम्मो की उँगलियों का जादू तो बचा था और मुझे भी ननद से होली खेलना था।
 
भाभी हो जाने दो ,

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मुझ से ज्यादा , कम्मो और जब तक तीन बार उसने नहीं बोला ,

" चूँची भैया को दूंगी , दूँगी दूँगी "

तब तक हम दोनों ने नहीं छोड़ा , हाँ उसकी इस बात की भी पूरी वीडियो रिकार्डिंग हुयी।

लेकिन अभी तो चार आने का भी खेल नहीं हुआ था , कम्मो की उँगलियों का जादू तो बचा था और मुझे भी ननद से होली खेलना था।

कम्मो ने नीचे का मोर्चा सम्हाला ,

पैंटी खुल के फर्श पर जहाँ ब्रा गिरी पड़ी थी

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उसकी हथेली , गुड्डी की चुनमुनिया पर और जोबन दोनों मेरे हवाले।

कन्या रस लेने की ट्रेनिंग मेरी भाभियों ने अच्छी तरह दे दी थी मुझे , होली में , गाँव में कोई भी सादी बियाह हो तो रतजगे में ,

कच्ची कली के कच्चे अनार का रस लेने के साथ , मैं उसे समझा भी रही थी तैयार भी कर रही थी ,

" देख तेरे भइया ऐसे रस लेते हैं , पक्के रसिया हैं , अब तो तूने हाँ कर ही दी है उन्हें अपने जोबना का दान देने का , ... देखना , खुद टाँगे फैला देगी सच। "

कभी हलके हलके मैं उसके बस आ रहे उरोज सहलाती तो कभी कस के दबा देती , मसल देती , आखिर मेरे कितने देवरों का , अपने मोहल्ले के कितने लौंडों का ये जोबन दिल जला रहे होंगे ,... बीच बीच में निप्स फ्लिक कर देती ,

पिंच कर देती ,

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और फिर मेरे होंठों और हाथों ने हिस्सा बाँट लिया ,

एक होंठों के हवाले दूसरा हाथ के ,

हलके हलके चुम्बन लेती , उरोजों के एकदम बेस से मेरे होंठ सहलाते चूमते ,चूसते धीरे धीरे ऊपर की ओर बढे और गच्चाक से उस कच्ची कली के निप्स मेरे होंठों के बीच में

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होंठों ने बस बहुत हलके से दबा रखा था और जीभ से बस बीच बीच में फ्लिक कर देती , और कुछ देर बाद गियर बदला

कस कस के मैंने चूसना शुरू किया और साथ में जीभ भी अब कस कस के नाच रही थी निप्स के टिप पर ,

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गुड्डी रानी की आँखे बंद हो गयीं , जोबन पथरा गए थे ,

वो सिसक रही थी , मस्ता रही थी ,

दूसरे उभार को मैं बांयें हाथ से हलके हलके सहला रही , थी दबा रही थी ,

" हे तेरे भइया तो इससे भी बहुत ज्यादा , सच , एकदम मैं तो कुछ भी नहीं ,.. अब तो तूने हाँ कर दी है , और वो बिचारे तो इत्ता ललचाते हैं सिर्फ सोच सोच के आज जब ये दोनों कच्ची अमिया उन्हें मिलेगी देखना कितने खुश होंगे , सच ,... और जब एक बार उनका हाथ , उनके होंठ लगेगा , तू एकदम पागल हो जाएगी , इत्ता मस्त आकर देंगे , सच्ची , ... जो चाहे वो बाजी लगा ले। "

मेरे दाएं हाथ ने नीचे का रुख किया जहाँ अब तक कम्मो आग लगा रही थी

धीमी आंच पर कड़ाही गरम करने में वो माहिर थी ,हलके हलके बस गदोरी से ननद रानी की गुलाबो को सहला रही थी , उसे ऊँगली करने की जल्दी नहीं

लेकिन इस सहलाने , रगड़ने से ही गुड्डी की चुनमिनिया गीली हो गयी थी , और उसके बाद बस दोनों पुत्तियों को पकड़ के आपस में हलके हलके रगड़ना शुरू किया तो ननद रानी ने पानी फेंकना शुरू कर दिया ,

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बस तर्जनी का पहला पोर उसने अंदर किया और उसमें ही गुड्डी रानी की चीख निकल गयी , लेकिन जल्दी ही वो चीख सिसकियों में बदल गयी ,

और अब मेरा हाथ भी मैदान में था , उसकी क्लिट , मैं बस अंगूठे से उसे छू रही थी ,

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गुड्डी एकदम झड़ने के करीब पहुंच जाती तो कम्मो रुक जाती और कुछ देर बाद फिर चालू हो जाती , कभी अब वो हलके हलके ऊँगली करती तो कभी फुद्दी को रगड़ती , और उसकी ऊँगली हटती तो मेरी ऊँगली काम पर लग जाती ,...

एक बार जब वो एकदम झड़ने के कगार पर हो गयी तो मैंने सोचा झाड़ दूँ बहुत तड़प रही है , तो कम्मो ने इशारे से मना कर दिया ,

मेरी और कम्मो की उँगलियाँ गुड्डी के पानी से एकदम गीली हो गयी थीं , ...

दो चार बार के बाद गुड्डी खुद बोलने लगी ,

भाभी हो जाने दो ,
 
अपने भइया से

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मेरी और कम्मो की उँगलियाँ गुड्डी के पानी से एकदम गीली हो गयी थीं , ...

दो चार बार के बाद गुड्डी खुद बोलने लगी , भाभी हो जाने दो ,

" अरे तेरे भैया आएंगे न उनसे झड़वा लेना , बोल झड़वाएगी अपने भइया से , ... "

मैंने अपनी गर्मायी, बौराई ननदिया को उकसाया

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बेचारी झेंप गयी लेकिन जब हम दोनों ने मिल के उसे बहुत तंग किया तो बोली मुझसे

" भाभी , आपके सैंया ही पीछे हट जाएंगे ,... "

" चल इतना छिनरपना न कर , है हिम्मत तो एक बार बोल दे , जोर से ,... "

कम्मो ने उसे और चढ़ाया

और गुड्डी ने बोल ही दिया , आखिर ,... की वो अपने भइया से चुदवायेगी ,.... बस अबकी तो हम दोनों ने ,..

लेकिन कम्मो ने उसे साथ में हड़काया ,

" मेरे देवर की जिम्मेदारी मेरी , लेकिन स्साली भाइचॉद अगर जरा भी छिनरपना किया न तो तेरी स्साली गाँड़ भी मरवाउंगी , और उसके बाद खुद अपनी मुट्ठी से भी तेरी गाँड़ मारूंगी कोहनी तक पेलुँगी , हचक के चोदवाना होगा , ... खुद बोली हो तुम ,... "

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एक बार गुड्डी रानी फिर झड़ने के कगार पर थी , लेकिन मेरा फोन बज उठा ,

उन्ही का था ,.... मिस्ड काल , मैंने उन्हें बोल रखा था घर में आने के पांच मिनट पहले मिस्ड काल

" देख तेरे यार का है , अब तो तूने बोल भी दिया है , बस तीन चार दिन बाद होली हैं फड़वा ले ,... "

कह के अबकी एक पोर मैंने जोर से पेल दी ,

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वो जोर से चीखी ,

लेकिन तब तक सीढ़ी पर पैरों की आवाज आ रही थी , गुड्डी को बगल के छोटे कमरे में मैंने और कम्मो ने छिपा दिया

तभी उनकी दरवाजा खटखटाने की आवाज हुयी ,

कम्मो ने ही दरवाजा खोला।

और उन के घुसते ही कम्मो ने उन्हें दबोच लिया , साथ में गालियों की बौछार
 
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