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फ़ट गयी ननदिया की
ननद दर्द के मारे चूतड़ उछाल रही थी ऐंठ रही थी , जैसे पानी बिच मीन
पर नन्दोई रुके नहीं , और थोड़ा सा बाहर निकाल के ऐसे ठोंका ,
फफचफचा के खून बाहर निकल आया , दो बूँद चार बूँद , फिर ढेर सारा , आंगन में ,... जाँघे
दर्द की लहर पर लहर उठ रह थी , ननदिया की हालत खराब थी और बेचारे नन्दोई भी एक मिनट के लिए रुक गए , कम्मो कस कस के ननद के होंठों को चूस रही थी , जीभ मुंह के अंदर , ... कम्मो ने नन्दोई को आँख से इशारा किया , बिना खून खच्चर के कच्ची उम्र वाली साली मिलती है क्या , मारो धक्का फिर से
नन्दोई ने ठेलना शुरू किया और थोड़ी देर में वो एकदम जोश में थे और चुदाई जोर पर , ननद का दर्द भी कम होने लगा था ,
लेकिन इस बीच उन की मिस्ड काल आ गयी , मतलब उन की कांफ्रेस काल ख़तम हो रही थी दस मिनट में , मैंने मामले को आगे बढ़ाया और कम्मो से पूछा
" आपके नन्दोई जी ने सिर्फ एक बार ही ,... "
और कम्मो ने पूरा ज्ञान दे दिया ,
" एक बात ध्यान रखो कच्ची उमर वाली ननद हो कभी एक बार चोदवा के नहीं छोड़ना चहिये , वो घायल शेरनी हो जाती है अगर एक बार मन में उस दर्द का डर बैठ गया न तो दुबारा कभी टांग नहीं फैलाएगी , इसलिए दूसरी बार तो तुरंत ही , और फिर चार घंटे का टाइम था , घंटे भर रुक के नन्दोई ने दुबारा नंबर लगा दिया , ...
मैं कुछ बोल रही थी की कम्मो ने फिर टोक दिया, और एक बात और , ... सिर्फ एक मरद के नीचे नहीं , कम से कम चार पांच मर्दों के नीचे वरना फिर उसकी वही हालत हो जायेगी ,...
मैं वही बात पूछना चाहती थी तो पूछ लिया।
लेकिन इनाम तो आपने देवर को दिलवाया था ,...
कम्मो भौजी जोर से हंसी , बोली ,
एकदम मिला , अरे जो मजा देवर को नन्द के ऊपर चढाने में , देवर को नन्दोई बनाने में है वो किसी चीज में नहीं है। पहले उसका भाई चढ़ा , बाद में मेरे भाई फिर तो महीने दो महीने के अंदर वो खुद गन्ना अरहर का खेत ढूंढती है , पूरे गाँव जवार की नंबरी छिनार.
तबतक ऊपर से कम्मो भौजी के देवर की आवाज आयी ,
" जाओ जाओ , मेरा असली देवर बुला रहा है। " कम्मो भौजी इन्हे इस अपना असली देवर मानती थीं , लेकिन जाने के पहले मैंने कम्मो भौजी को उकसाया , भौजी , अपने असली देवर को भी तो नन्दोई बनाइये ,
लेकिन तबतक दुबारा बुलावा आ गया , और मैं दौड़ते हुए सीढ़ी चढ़कर ऊपर
रास्ते में सीढ़ी चढ़ते हुए मैं यही सोच रही थी की अगर मेरी ननद पर उसके सीधे साधे भैया को कोई चढ़ा सकता है तो वो हैं कम्मो भौजी,
और सिर्फ उसके भैया को नहीं , वो तो उसे पक्की छिनार भी बना देगी और मैं भी तो यही चाहती थी , पूरे शहर की नम्बरी छिनार
ननद दर्द के मारे चूतड़ उछाल रही थी ऐंठ रही थी , जैसे पानी बिच मीन
पर नन्दोई रुके नहीं , और थोड़ा सा बाहर निकाल के ऐसे ठोंका ,
फफचफचा के खून बाहर निकल आया , दो बूँद चार बूँद , फिर ढेर सारा , आंगन में ,... जाँघे
दर्द की लहर पर लहर उठ रह थी , ननदिया की हालत खराब थी और बेचारे नन्दोई भी एक मिनट के लिए रुक गए , कम्मो कस कस के ननद के होंठों को चूस रही थी , जीभ मुंह के अंदर , ... कम्मो ने नन्दोई को आँख से इशारा किया , बिना खून खच्चर के कच्ची उम्र वाली साली मिलती है क्या , मारो धक्का फिर से
नन्दोई ने ठेलना शुरू किया और थोड़ी देर में वो एकदम जोश में थे और चुदाई जोर पर , ननद का दर्द भी कम होने लगा था ,
लेकिन इस बीच उन की मिस्ड काल आ गयी , मतलब उन की कांफ्रेस काल ख़तम हो रही थी दस मिनट में , मैंने मामले को आगे बढ़ाया और कम्मो से पूछा
" आपके नन्दोई जी ने सिर्फ एक बार ही ,... "
और कम्मो ने पूरा ज्ञान दे दिया ,
" एक बात ध्यान रखो कच्ची उमर वाली ननद हो कभी एक बार चोदवा के नहीं छोड़ना चहिये , वो घायल शेरनी हो जाती है अगर एक बार मन में उस दर्द का डर बैठ गया न तो दुबारा कभी टांग नहीं फैलाएगी , इसलिए दूसरी बार तो तुरंत ही , और फिर चार घंटे का टाइम था , घंटे भर रुक के नन्दोई ने दुबारा नंबर लगा दिया , ...
मैं कुछ बोल रही थी की कम्मो ने फिर टोक दिया, और एक बात और , ... सिर्फ एक मरद के नीचे नहीं , कम से कम चार पांच मर्दों के नीचे वरना फिर उसकी वही हालत हो जायेगी ,...
मैं वही बात पूछना चाहती थी तो पूछ लिया।
लेकिन इनाम तो आपने देवर को दिलवाया था ,...
कम्मो भौजी जोर से हंसी , बोली ,
एकदम मिला , अरे जो मजा देवर को नन्द के ऊपर चढाने में , देवर को नन्दोई बनाने में है वो किसी चीज में नहीं है। पहले उसका भाई चढ़ा , बाद में मेरे भाई फिर तो महीने दो महीने के अंदर वो खुद गन्ना अरहर का खेत ढूंढती है , पूरे गाँव जवार की नंबरी छिनार.
तबतक ऊपर से कम्मो भौजी के देवर की आवाज आयी ,
" जाओ जाओ , मेरा असली देवर बुला रहा है। " कम्मो भौजी इन्हे इस अपना असली देवर मानती थीं , लेकिन जाने के पहले मैंने कम्मो भौजी को उकसाया , भौजी , अपने असली देवर को भी तो नन्दोई बनाइये ,
लेकिन तबतक दुबारा बुलावा आ गया , और मैं दौड़ते हुए सीढ़ी चढ़कर ऊपर
रास्ते में सीढ़ी चढ़ते हुए मैं यही सोच रही थी की अगर मेरी ननद पर उसके सीधे साधे भैया को कोई चढ़ा सकता है तो वो हैं कम्मो भौजी,
और सिर्फ उसके भैया को नहीं , वो तो उसे पक्की छिनार भी बना देगी और मैं भी तो यही चाहती थी , पूरे शहर की नम्बरी छिनार