Erotica मोहे रंग दे - Page 4 - SexBaba
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Erotica मोहे रंग दे

चाट पार्टी

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जैसे मैं फ्रेश होकर निकली , गुड्डो आ गयी ,...

थोड़ा उसने मुझे तैयार होने में मदद की , मैंने एक टाइट कोर्सेट पहन रखी थी , खूब डीप , मेरे उभार कस कस के बाहर छलक रहे थे , पर उसेपीछे से कस के बांधता कौन , ...

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घर पे तो मेरी बहनें थी , मम्मी थी ,... लेकिन यहाँ गुड्डो थी ,।

और मैं भी उसे खूब उकसा रही थी ,

उस का भी मैंने खूब हॉट हॉट मेकअप किया , ... उकसाया , दुपट्टा एकदम गले तक ,...

साढ़े छह बजे तक मेरी दो ननदें भी , बाहर चाट पार्टी शुरू हो गयी थी ,...

……………………….

बाहर निकल के मैंने सबसे पहले अपनी सास का पैर छुआ ...

और डांट भी पड़ी मुस्कान के साथ ,...

अपने हाथ से मेरा घूंघट उन्होंने उठा के , सर के भी थोड़ा सा ,...

अरे बहुत पर्दा हो गया , तुम सबसे मिल तो चुकी हो , तेरी ननदें , देवर , नन्दोई है , ... जेठानी हैं , किससे पर्दा ,... ज़रा मिलो जुलो , ... औरअपनी ननदों की नन्दोई की बात का जवाब खुल के दो , उन्हें लगे तो सही मेरी बहू कितनी ,...

और एक बार मुझे सास से ग्रीन सिंग्नल मिल गया , तो फिर ,..

नन्दोई जी एकदम मेरे पीछे पड़े थे ,... मैंने बताया था न कैसे उन्हें मैंने गुड्डो से सेट कराया ,... उसके बाद मैं उन्हें छोड़कर अपने देवरों की औरबेचारे सुबह से ललचा रहे थे।

ससुराल का मज़ा , देवर ,ननद और नन्दोई का है।

नन्दोई से तो मैं अब एकदम खुल गयी थी , आज दिन में ननदों के साथ भी कमरे में, देवर ज्यादा नहीं चार पांच ही थे , एक दो आलमोस्ट मेरीउम्र के बाकी छोटे ,हाईस्कूल ... कुछ तो बहुत शर्मीले ,

सिर्फ एक अनुज , एकदम खुल के बात कर रहा था ,...

मुझे याद आया इसी के बारे में तो गुड्डो ने बताया था की उससे लसने की बहुत कोशिश कर रहा था , ... और लग भी मुझे थोड़ा चालू लग रहाथा , ...

थोड़ी देर में बाकी देवर किसी किसी काम से , लेकिन वो अनुज लसा रहा , ... मैंने उससे साफ़ साफ़ पूछ लिया

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" कोई गर्ल फ्रेंड वेंड बनायी है या अभी ऐसे ही , ... "

मैंने उसे चिढ़ाया।

" कहाँ भाभी ,... "

बुरा सा मुंह बनाया उसने।

" कोई हो तो बताओ , मैं हेल्प करा दूँ तुम्हारी , ....इस सब काम में भाभी ही हेल्प करती है ,... "

मैंने उसे और उकसाया ,

उसकी निगाहें बार बार गुड्डो की ओर जा रही थी , और आज वो लग भी हॉट रही थी , जिस तरह मैंने उसकी चुन्नी गले से एकदम चिपका करसेट कराई थी ,

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कच्चे टिकोरे साफ़ साफ़ दिख रहे थे , लिपस्टिक भी खूब डार्क रेड , ..

उसके गोरे रंग पर , काजल भी बड़ी बड़ी आँखों में खूब तीखा ,

और गुड्डो नन्दोई जी के साथ ,...

" वो कैसी लग रही है , चलेगी। "

मैंने अनुज से गुड्डो की ओर इशारा कर के पूछा।

" चलेगी , नहीं भाभी दौड़ेगी ,... " हंस के अनुज बोला , लेकिन फिर उसने जोड़ दिया ,

" लेकिन , भाभी वो भाव नहीं देती ,... "

" अरे देवर जी सिर्फ भाव नहीं वो सब कुछ देगी , अब तुम्हारी भाभी तेरे साथ है , ... लेकिन मेरी नाक मत कटाना ऐन मौके पर ,... "

मैंने उसे चिढ़ाया।

तब तक मिली दिख गयी मेरी ननद , नन्दोई जी की फेवरिट साली ,... मैंने उसे अपने पास बुलाया ,

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" यार ये गुड्डो बड़ी देर से तेरे जीजू को बोर कर रही है , ज़रा जा के अपने जीजू के पास ,... और गुड्डो को बोल देना मैंने बुलाया है। "

कुछ देर में एक्सचेंज प्रोग्राम हो गया , गुड्डो इधर और अब नन्दोई जी का एक हाथ अपनी साली , मिली के कंधे पर और दूसरा पिछवाड़े ,...

गुड्डो अनुज के देख कर जोर से मुस्करायी , सुबह दुलारी की हरकतें , फिर मेरी शिक्षा अब वो भी बोल्ड हो गयी थी ,
 
गुड्डो - अनुज

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गुड्डो अनुज के देख कर जोर से मुस्करायी , सुबह दुलारी की हरकतें , फिर मेरी शिक्षा

अब वो भी बोल्ड हो गयी थी ,

" यार सुन , ... एक काम करेगी मेरा , ... जिस कमरे में हम लोग सोए थे न दुपहर में ,... तुम तो मेरे ठीक बगल में ही लेटी थी "

मैंने गुड्डो को समझाया।

" हाँ याद है मुझे ,... "

वो बोल मुझसे रही थी लेकिन निगाहें अनुज के साथ कबड्डी खेल रही थीं ,...

" तो बस वही , शायद मेरे बाल का एक काँटा वहीँ तकिये के नीचे ,

हो सकता है न भी हो , ... पर अच्छी तरह देख लेना ,.. "

फिर मैंने अनुज को बोला

" यार तू भी न ज़रा इसके साथ चले जाओ , नीचे एकदम सन्नाटा होगा ,

सब लोग तो ऊपर हैं , ... मैं जेठानी जी से चाभी उस कमरे की मांग के दे देती हूँ , "

" अब भाभी कोई बात कहें तो देवर की हिम्मत टालने की ,... "

वो मुस्कराया , बात वो अच्छी तरह समझ गया था ,

तभी उन दोनों का और फायदा हो गया , लाइट चली गयी ,

ऊपर तो जेनरेटर था नीचे घुप्प अँधेरा ,...

" अँधेरे में कैसे ,... " मैंने पूछा तो अनुज ने अपने मोबाइल की टार्च दिखा दी।

दोनों नीचे जा रहे थे की मैंने गुड्डो को बुला लिया ,...

और फुसफुसा के बोली

" दुलारी की बात याद रखना , उस कमरे में गद्दे भी है तकिया भी

और अगर तुमने जरा भी ना नुकुर किया न , ... और पौन घंटे से पहले ऊपर आयी तो समझ लेना , वैसलीन तो तेरी चुनमुनिया में मैंने शाम को लगा ही दिया था अच्छी तरह , क्या पता कब गुलाबो की लाटरी खुल जाए ,... "

वो मुस्करा रही थी ,

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लेकिन उसके चलने के पहले मैंने उसे फिर रोक लिया

और अपने बाल में से काँटा निकाल के दे दिया ,

" यही कांटा है , बहुत ढूंढना पड़ा तुझे तब मिला , आधे घंटे के बाद ,...

और अब शलवार का नाड़ा न खुला न तो ,... "

मैंने उसे हड़काया।

जेनरेटर चलने में तो टाइम लगता है ,

जब तक छत पर लाइट आयी गुड्डो और अनुज नीचे ,... अँधेरे कमरे में ,...

मैं अपनी बाकी नंदों के साथ उन्हें छेड़ती , ... नन्दोई जी भी आ गए थे ,... खूब मस्ती ,...

लेकिन पौन घंटे नहीं , पूरे एक घण्टे बाद गुड्डो आयी , एकदम थकी , मेकअप हलका सा उतरा , ... टाँगे फैली ,... और उसने मेरा कांटा दे दिया।

अनुज और बाद में आया , खूब खुश ,

लेकिन तबतक मेरी सासु जी ने एक बार फिर हड़का लिया ,

मुझे नहीं ननदों जेठानियों को।

" अरे बहू को थोड़ा आराम करने दो , नौ कब का बज गया , ...जाओ बहू तुम आराम करो ,... और तुम लोग अपनी भाभी से बाकी गप्प कल मार लेना , कल वैसे भी रसोई छूने की रस्म दिन में ,... और रात में गाना बजाना , यहीं छत पर ,.. "

नौ बजने में पूरे बीस मिनट बाकी थे ,

सास की आँखे बहुत तेज थीं , नौ बजने के पहले ही वो मुझे मेरे कमरे में भेज देती थी , जब तक मैं ससुराल में रही ,...

ये भी नहीं दिख रहे थे।

मैं कमरे में घुसी तो , ...

ये पहले से रजाई में घुसे ,...

शाम की तरह इन्हे दिखा के मैंने दरवाजा अच्छी तरह अंदर से बंद किया , चूनर हटाई , मेरे दोनों जोबन कोर्सेट से बाहर छलक रहे थे।

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दूसरी रात

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नौ बजने में पूरे बीस मिनट बाकी थे , सास की आँखे बहुत तेज थीं , नौ बजने के पहले ही वो मुझे मेरे कमरे में भेज देती थी , जब तक मैं ससुराल में रही ,...

ये भी नहीं दिख रहे थे।

मैं कमरे में घुसी तो , ... ये पहले से रजाई में घुसे ,... शाम की तरह इन्हे दिखा के मैंने दरवाजा अच्छी तरह अंदर से बंद किया , चूनर हटाई , मेरे दोनों जोबन कोर्सेट से बाहर छलक रहे थे।

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और आज मैं आराम से पहले अच्छी तरह फ्रेश हुयी , मान गयी मैं इन्हे , मेरे आने के पहले इन्होने गीजर आन कर दिया था , फ्रेश टॉवल्स ,...

अच्छी तरह मेकअप उतार के , ज्वेलरी , सब कुछ, और मैं जानती थी मैं कुछ भी पहनूंगी ये लड़का पांच मिनट के अंदर उतार कर ,...

एक छोटी सी पिंक कलर की नाइटी , स्ट्रिंग वाली कंधे पर , बस सरका दो ,...

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और ब्रा भी नहीं पहनी ,...

क्यों उस बेचारे से इतनी मेहनत करवाऊं , हाँ एक छोटी सी थांग ,...

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जब मैं कमरे में पहुंची तो छत पर भी हंगामा ख़तम हो गया था ,सब लोग नीचे ,...

मैंने दीवाल की और मुड़ कर सब लाइटें बंद की पर नाइट लैम्प ,...

( फुट लाइट्स थी , सिर्फ फर्श पर पसरी ,... लेकिन बिस्तर पर भी हलकी हलकी ,... )

और जब मैंने मुड़ कर उन्हें देखा तो ,.. वो जल्दी से कोई डायरी सी बिस्तर के अंदर छुपा रहे थे।

" दिखाइए न ' मैं उनकी बगल में बैठ कर उनसे बोल रही थी , मेरे बार बार कहने पर भी जब वो नहीं माने तो मैंने खुद गद्दे के अंदर हाथ डालने की कोशिश की पर उन्होंने मेरी कलाई कस के पकड़ ली , मैं उनसे लाख छुड़ाने की कोशिश करती रही पर उनके आगे मेरी क्या चलती , ...

' क्या है ' मैंने जिद पकड़ ली थी।

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" कुछ नहीं है , ऐसे ही तुम्हारे काम का नहीं है। "

वो भी जिद पकडे थे , और अब मुझे डर लगने लगा था ,

कहीं इनका कोई बचपन का चक्कर , कोई रहा हो , उसकी कोई चिट्ठी विट्ठी , फोटो ,... और आज अचानक उनका मन , उसकी याद ,...

मेरा सीना धक् धक् करने लगा ,

आज मेरी शादी के बाद की दूसरी रात है और आज के ही दिन,

शायद मुझे इतनी ज़िद नहीं करनी चाहिए थी। , पर मन का दूसरा कोना पीछे पड़ा हुआ था।

" मान जाओ न यार , मेरी पर्सनल डायरी है , और कुछ नहीं है उसमें खास ,... "

वो भी मुझे मना रहे थे और एकदम जिद्द पकडे थे।

" नहीं , मुझे देखना है , ...अच्छा बस एक पेज , फर्स्ट पेज ,... आप और मुझमें अब क्या परसनल ,.. प्लीज देखने दो न "

मैंने भी हार नहीं मानी।

" नहीं तुम समझती नहीं हो ,... तुम गुस्सा हो जाओगी , तुम्हे बहुत बुरा लगेगा। "

वो डर कर सहमते बोले।

अब तो मेरा शक्क और पक्का होने लगा , जरूर कोई लड़की है , मैं घबड़ा रही थी , ...

कौन होगी ,...

कोई इनकी रिलेटिव , कजिन ,... साथ पढ़ने वाली।

मेरे मुंह से निकल गया ,

" कोई लड़की है क्या "

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बहुत धीरे से डरते सहमते ,

और मुझसे भी ज्यादा डरते सहमते , उन्होंने हाँ में सर हिलाया और बड़ी मुश्किल से उनके मुंह से आवाज निकली ,

" मैं कह रहा था न तुम गुस्सा हो जाओगी , मेरे ऊपर बहुत नाराज होओगी ,.... लेकिन ,... "

मेरी आवाज नहीं निकल पा रही थी , तब भी मैंने जिद कर के बोला ,

" नहीं गुस्सा नहीं होउंगी , बस एक पेज फर्स्ट पेज ,... "

किसी तरह मेरी आवाज निकल पा रही थी और फिर मैंने लड़कियों का आखिरी हथियार इस्तेमाल किया ,

" प्लीज मेरी क़सम ,... "

और उनकी पकड़ मेरी कलाई पर थोड़ी ढीली हई तो मैंने गद्दे के अंदर हाथ डाला , ... पर उन्होंने खुद निकाल कर ,

मेरा शक ठीक था , एक डायरी थी खूब चौड़ी सी , बड़ी।

आनेवाले तूफ़ान के डर से उन्होंने एकदम सहम कर आँख बंद कर लिया , ...चारों ओर एकदम सन्नाटा था , ... मैं अपने दिल की धड़कन सुन सकती थी ,

मैंने बड़ी हिम्मत कर पहला पन्ना , खोला

और मुझे बहुत जोर का गुस्सा लगा , बस धड़कन नहीं रुकी ,

सच में एक लड़की थी ,... ,...
 
लड़की

मैंने बड़ी हिम्मत कर पहला पन्ना , खोला

और मुझे बहुत जोर का गुस्सा लगा , बस धड़कन नहीं रुकी ,

सच में एक लड़की थी ,...

लेकिन , और कौन?

मैं।

पहले पन्ने पर ही ,..

एक खूब सुन्दर डिजाइन और उसके बीच , हमारे उनके पहले मिलन की निशानी ,... जो बीड़ा मैंने उन्हें मारा था वही , इत्ता सम्हाल के उन्होंने रखा था , एक ट्रांसपरेंट पैकेट में , लैमिन्टेड ,...

धड़कते दिल से मैंने अगला पन्ना खोला ,और धक् से रह गयी ,

एक स्केच , ... मेरा हूबहू , ...लेकिन मैं इस स्केच में इतनी प्यारी लग रही थी , जितना जिंदगी में कभी नहीं लगी रही होउंगी।

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मुझसे मेरी बहनों ने बताया था की उनके जीजू ,... लेकिन मैं सिर्फ चिढ़ाती थी , अरे पेन्सिल से एक दो लाइन खींच लेते होंगे ,

मेरे बीड़ा मारते समय का स्केच , ... मेरे चेहरे का एक एक भाव , झुकी हुई मैं ,..

मेरा गुस्सा रुक नहीं रहा था , अपने पर ,... मैंने सोचा कैसे ,... मेरे अलावा ,

पर गुस्सा इनपर भी आ रहा था , ...

चोर बदमाश डाकू

अगले पन्नों पर ,...स्क्रैप बुक की तरह थी डायरी ,...

मेरी हाईस्कूल की कालेज मैगजीन में मेरी एक ग्रुप फोटो थी , वो ,...

क्लास आठ में मेरा एक लेख स्कूल की मैगजीन में छपा था , वो

पिछले साल रीजनल रैली में बैडमिंटन और स्वीमिंग में मुझे मेडल मिला था , उस की फोटो ,...

मैंने उन की ओर देखा ,

मारे डर के घबड़ाहट के उनकी आँखे अभी भी बंद थी जैसे उनकी कोई बहुत बड़ी चोरी पकड़ी गयी हो।

और साथ साथ हर दो चार पेज के बाद शादी में जहाँ हम पहली बार मिले थे , ...

जब मैं चुन चुन के उनका नाम ले के गारी गा रही थी , ढोलक बजा रही थी ,

पहली बार बड़ी हिम्मत कर के उन्होंने मेरा नाम पूछा था , ...

और शाम को मेरा नाम बताया था और मैंने जोर से उन्हें डांटा था , कोमल जी नहीं कोमल

और फोटुएं भी ,

मैंने उनके हाथ में मोबाइल तो नहीं देखा था पर उनकी कजिन्स , फ्रेंड्स ,... बीसों फोटो ,..

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मेरी बचपन की फोटुएं , ...

गुस्स्से की तो बात ही थी , मेरी दोनों बहने अपने जीजू से मिल गयी थीं , वरना ये सब फोटुएं उन्हें कहाँ मिलती ,

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लेकिन इस लड़के ने कितनी मेहनत की होगी ,...

और उसके बाद कवितायें ,... रोज के हिसाब से ,..

और मेरे बालों से लेकर पैरों तक कोई अंग बचा नहीं था ,... उनका जो सबसे फेवरिट पार्ट , जिसे देख कर वो बेचारा हदम ललचाता रहता था , मेरे किशोर उरोज , ... दर्जन भर , ... देखने में ये एकदम सीधे लगते थे , लेकिन सब की सब ऐसी एरोटिक,

वो बोला-

“रोज तुम मुझे सपने में आकर तंग करती थी। इसलिये जैसा तुम दिखती थी, नख सिख वर्णन, सारे अंगों के…”

मैं प्यार से लताड़ के बोली-

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“क्या सारे अंगों के?”

वो हँसकर बोला-

“हाँ पढ़ो तो… सारे अंगों के। मुझसे क्या छुपाव, दुराव…”
 
कवितायें

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और उसके बाद कवितायें ,... रोज के हिसाब से ,..

और मेरे बालों से लेकर पैरों तक कोई अंग बचा नहीं था ,...

उनका जो सबसे फेवरिट पार्ट , जिसे देख कर वो बेचारा हदम ललचाता रहता था , मेरे किशोर उरोज , ... दर्जन भर , ...

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देखने में ये एकदम सीधे लगते थे , लेकिन सब की सब ऐसी एरोटिक,

वो बोला-

“रोज तुम मुझे सपने में आकर तंग करती थी। इसलिये जैसा तुम दिखती थी, नख सिख वर्णन, सारे अंगों के…”

मैं प्यार से लताड़ के बोली- “क्या सारे अंगों के?”

वो हँसकर बोला- “हाँ पढ़ो तो… सारे अंगों के। मुझसे क्या छुपाव, दुराव…”

मैंने पढ़ना शुरू किया। पहली कविता थी ‘केश’

उन्मुक्त कर दो केश, मत बांधो इन्हें,

ये भ्रमर से डोलते मुख पर तुम्हारे,




चांद की जैसे नजर कोई उतारे।

दे रहे संदेश, मत बांधो इन्हें,




खा रहे हैं खम दमकते भाल पे,

छोड़ दो इनको इन्हीं के हाल पे,




दे रहे आदेश मत बांधो इन्हें।


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और उसके बाद आँखों और फिर होंठों

और उसके साथ-साथ वो और ज्यादा रसिक होते जा रहे थे।

मीन सी, कानों से बातें करती, आँखें, ढीठ दीठ, लजायी सकुचायी,

मेरे सपने जहां जाकर पल भर चुम्बनों के स्वादों से लदी थकी पलकें,

कटार सी तिरछी भौंहें,

और सुधा के सदन, मधुर रस मयी अधर, प्रतीक्षारत मेरे अधर


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जिनके स्वाद के, स्नेह के लेकिन सबसे ज्यादा कवितायें जिन पे थीं वे थे मेरे उरोज।

पूरी 7 और एक से एक और सिर्फ उनपर ही नहीं मेरे निपल्स के बारे में,

उसके आस-पास के रंग के बारे में-

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“ये तेरे यौवन के रस कलश, ये किशोर उभार,

खोल दो घट पी लेने दो मेरे अतृप्त नयन, प्यासे अधर…”

“व्याकुल हैं मेरे कर युगल पाने को, पागल है मेरा मन,

ये आंनद शिखर, उन पे शोभित कलश,

तन भी तेरी देह लता के ये फल चखने को…”


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मेरा तो मन खराब हो गया इन कविताओं को पढ़ के और मैंने कई पन्ने पलट दिये।

अब नितम्बों का वणर्न था-

“कामदेव के उल्टे मृदंग, भारी घने नितंब…”

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कई इंग्लिश में भी थीं।

तब तो वो बोले- “पन्ने पीछे पलटो- ‘वो’ तो तुमने छोड़ ही दिया जिसके बारे में पूछ रही थी…”

और वास्तव में नितंब के पहले, नाभी के बाद थी वो- ‘

रस कूप, मदन स्थान’

करती रहोगी तुम नहीं नहीं,

शर्माती,

इठलाती और बल पूवर्क खोल दूंगा मैं हटाकर लाज के सारे पहरे, पर्दे,




छिपी रहती होगी जो किरणों से भी,




रस कूप,


गुलाबी पंखुड़ियों से बंद आसव का वो प्याला।

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पढ़ते-पढ़ते मेरी आँखें मस्ती से मुंदी जा रहीं थी।

मैं सोच भी नहीं सकती थी कि शब्द भी इतने रसीले हो सकते हैं।

मैं वहां भी गीली हो रही थी, मेरे रस कूप एक बार फिर रस से छलक रहे थे।

और जहां तक उनकी हालत थी, मुझे तो लगने लगा था की जब तक मैं उनके पास रहती थी, उनका तो ‘वो’ खड़ा ही रहता था।

मैंने उनसे कहा-

“आपने ने जो मेरे बारे में… वो मैं आपके मुँह से सुनना चाहती हूँ…”

उन्होंने डायरी के पन्ने खोले तो शरारत से मैंने उसे बंद कर दिया और बोली-

“ऐसे थोड़ी, तुरंत बना के आशु कवि ऐसे जो भी आपके मन में आये…”

तभी मुझे ध्यान आया, पढ़ने के बहाने उन्होंने लाईट जला दी थी,

और निवर्सना मैं, मेरा सब कुछ… शर्माकर मैंने उनकी आँखें अपनी हथेली बंद कर दीं।

वो बोले- “अरे देखूंगा नहीं, तो बोलूंगा कैसे?”

मैंने उनका हाथ अपने सीने पे रखकर कहा- “उंगलियों से देख के…”

फिर मैंने कहा- “मुझे अपनी प्रशंसा सुनना अच्छा लगता है और वो भी आपके मुँह से…”

वो बोलने लगे-

तेरे ये मदभरे, मतवाले, रस कलश,

किशोर यौवन के उभार, रूप के शिखर,

डोम्स आफ ज्वाय, जवानी की जुन्हाई से नहाये जोबन,

प्यासे हैं मेरे अधर, इनका रस पाने को,

छू लेने को चख लेने को, छक लेने को सुधा रस।


और मेरी आँखें भी मस्ती में बंद हो गईं।

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मैंने खुद उनके प्यासे अधरों को खींचकर अपने जोबन के उभारों पे लगा दिया।

और अब उनकी उंगलियां भी सरक के और नीचे सीधे मेरे रस कूप पे

और वो बोले जा रहे थे-

तेरे ये भीगे गुलाबी प्रेम के स्वाद को चखने को बैचेन होंठ,

थरथराते, लजाते, ये गुलाबी पंखुड़ियां किशोर खिलने को बेताब ये कली

(उनकी उंगलियां अब मेरे भगोष्ठों का फैलाकर अंदर घुस चुकी थीं),

ये संकरी प्रेम-गली, मेरे चुम्बनों के स्वाद से सजी रस से पगी,

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स्वागत करने को बेताब, भींच लेने को, कस लेने को, सिकोड़ लेने को,

अपनी बांहो में मेरा मिलन को उत्सुक बेचैन उत्थीत काम-दंड।

हम दोनों रस से पगे बेताब हो रहे थे।

हमारी शादी के फोटो और स्केच ,.. और सबसे आखिरी पन्ने पर ,

जो मेरी चूड़ियां टूटी थीं , पहले मिलन में , जो गुलाब की , चमेली की पंखुड़ियां ,

इन्ही सब को जोड़ के क्या जबरदस्त कोलाज़ इन्होने बनाया था

और वो बात लिख दी ,

जिसे कहने की आज तक ये लड़का हिम्मत नहीं जुटा पाया ,

आई लव यू।

अभी भी मारे डर के उनकी आँखे बंद थी ,

' सजा तो तुम्हे मिलेगी , चोर डाकू , बदमाश। "

मैं बोली और अब वो थोड़ा सा मुस्कराये।

और उन मुस्कराते होंठों पर होंठ रख के कस के मैंने चुम्मी ले ली।
 
सजा

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" अभी सजा की शुरुआत भी नहीं हुयी है , ... "

वो रजाई में सिर्फ एक बनयाइंन और शॉर्ट्स में थे ,...

( मैं भी तो सिर्फ एक छोटी सी नाइटी और थांग में थी , )

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मैंने दोनों हाथ से पकड़ के उनकी बनयान उतार के नीचे फर्श पर फेंक दी ,

ये कमरा मेरा ,

ये लड़का मेरा

मेरी चाहे जो मर्जी हो करूँ ,...

और मेरा सारा गुस्सा , फ्रस्ट्रेशन , चुम्मी बन के मेरे होंठ से सीधे उनके गालों पर ,

एक दो नहीं बीसों , और फिर मेरे बोल फूटे ,

चोर बदमाश डाकू ,...

चोर तो ये थे ही , चितचोर , मुझसे ही मुझे चुरा लिया और इससे भी संतोष नहीं हुआ , ... मेरी सारी फोटुएं ,

मैंने स्क्रैप बुक खोल के , लास्ट पेज खोल दिया ,

जिसपर कल रात की टूटी चूड़ियां, गुलाब की कलियाँ ,

हम लोगों की रति क्रीड़ा से दबी कुचली मसली चमेली के फूल से मिला के उन्होंने लिखा था

आई लव यू ,...

मैं सीधे उनके खुले चौड़े सीने पर लेट गयी और और उसे दिखाते हुए उन्हें, मैं बोली ,

" चलो तेरी पहली सजा , ... मुझे लगा था की मेरी शादी एक पढ़े लिखे लड़के से हुयी है , ... तो चलो इसे पढ़ कर दिखाओ "

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कुछ लजाते शर्माते झिझकते वो बोले , .. " आई लव .... यू। "

" उन्हह ऐसे नहीं , खूब जोर से ,... "

मैं इतने आसानी से नहीं छोड़ने वाली थी , और अब उनकी थोड़ी हिम्मत खुली , ..

बोले वो और साथ में मैं भी ,

" दुष्ट चोर , डाकू , तेरी पहली सजा यही ,... इनके सीने पर ऊँगली से सहलाते बोली मैं ,

" रोज रोज कम से कम १०० बार गुड मॉर्निंग के साथ शुरू कर , ... ( और मैं जानती थी गुड नाइट तो होनी नहीं है ) ..समझ लो , अगर किसी दिन चूके ,...

उनकी हिम्मत थी ,... कम से कम बीस पच्चीस बार ,... उन्होंने बोला आई लव यू , तब मैंने रोका , ...

चलो आज के लिए बहुत है लेकिन कल सुबह से ,.. अगर एक भी कम हुआ न तो दस बार फिर से,...

और मैंने उनकी अगली सजा सुनाई ,...

जो मेरा नखशिख वर्णन लिखा था ,

मैंने पहले आखों वाली पोएम खोली , और उसके ख़त्म होते ही , मैंने हलके से बोला किस ,... उनकी पोएम को किस करते हुए इशारा किया और अगर वो न समझते तो भी ,

... हाथ थे न ,.. मैं समझ गयी थी , ऐसे दीवाने बुद्धू के लिए ,... बिना जबरदस्ती किये ,... उनके सर को दोनों हाथों से पकड़ के सीधे मेरी पलकों पर ,...

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अगली कविता मेरे गालों पर थी ,

और अबकी हल्का सा जोर मुझे देना पड़ा , लेकिन मेरे होंठो पर जो कविता उन्होंने लिखी थी ( साथ में हॉट हॉट मेरे होंठों का खूब मीठा सा स्केच भी ),..

इस बार खुद उनके नदीदे होंठ , मेरे होंठ ,...

और मेरे होंठ अबकी होंठों की कुश्ती में भारी पड़ रहे थे

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पर मेरे किशोर जोबन पर लिखी उनकी कविता को पढ़ने में वो बहुत झेंप रहे थे , पर मैं उन्हें उकसा रही थी , मेरे जोबन भी , ..

और उनके होंठ जब नीचे उतर रहे थे , मेरी नाइटी की गांठे खुल गयी , मेरे कोमल कमल युग्म छलक कर बाहर आगये थे और उन्हें पढ़ना था तो मैंने स्क्रैप बुक देते हुए बेड के ऊपर कीलाइट भी जला दी थी ,

देख ले ये लड़का इत्ती देर से ललचा रहा था ,

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और कविता तो उन्होंने धीमे से बहुत झिझकते पढ़ी लेकिन उनके होंठ ,

उँगलियाँ एकदम डाकू ,...

लूट लिया इस टीनेजर के जोबन को।

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पर मैं भी , ...

क्या सिर्फ वो ही चुम्मा चाटी कर सकते थे , आज मैं भी इस खेल में बराबर की खिलाड़िन बनने की कोशिश कर रही थी ,

और जैसे ही उनके होंठो ने मेरी देह को छोड़ा , मेरे होंठ उस चोर डाकू बदमाश लड़के के ऊपर ,....

ये तीसरी सजा है , तुम्हारी ,...

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अब तो पूरी जिंदगी मैं ही फैसला सुनाने वाली थी , इस लड़के को ,...

और उसे चुपचाप बस सजा सुननी थी , भुगतनी थी ,...

आखिर उसने मुझसे मुझी को चुरा लिया था , उसपर उलटा इल्जाम मेरे माथे पर ,

एक सीधी साधी गाँव की किशोरी पर , की मैंने उसका दिल चुरा लिया है ,...

और आज मेरे होंठ न शर्मा रहे थे न झिझक रहे थे ,

न मैंने उनकी ओर देखा लाइट बंद करने को ,

सबसे पहली सजा मैंने दी उनकी बदमाश आँखों को , उसी ने तो डाका डाला था मेरे ऊपर ,... और अभी भी बस उनके दीठ की एक छुअन ,..

और मैं सिहर उठती थी , उनचासों पवन मदन के एक साथ चलने लगते थे ,

और मैं मन तो कब का हार गयी थी , तन भी हार जाती थी ,

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बस मेरे होंठों ने पलकों के दरवाजे को बंद कर दिया , और चुंबन की सांकल भी लगा दी , खटकाते रहो अब , ...

और मेरी हिम्मत भी बढ़ गयी ,

मेरे होंठ भी अब बिना बोले बतियाने की कला उन्ही से सीख गए थे , बस उन्होंने बरज दिया था उन्हें ,...

अब सजनी का नंबर

आँखों से उतर कर , और कहाँ ,... उनके होंठों पर , ...

बहुत रस लूटा था उन्होने मेरा ,... और जितना रस वो लूटते थे मेरी देह का उसका दूना रस छलकने लगता था मेरी देह में ,...

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मैं भोरी थी उमर की बारी थी ,

लेकिन उस नवल रसिया ने एक रात में ही बहुत कुछ सिखा दिया था , पहले तो मेरे होंठ झिझक रहे थे , बस हलके से छू लेते थे , ...

लेकिन उनके होंठ भी तो अब मेरे थे ,...

मैं क्यों डरती ,...

कल से जैसे होंठ उनके मेरे होंठों को कचकचा के काट रहे थे , चूस रहे थे ,...

आज मैंने भी वैसे ही ,...

वो तड़प रहे थे सिसक रहे थे ,....

लेकिन यही हालत तो मेरी भी होती थी ,

जवानी की गरम आग में जलते धधकते तवे पर जैसे कोई दो बूँद पानी की छिड़क दे , ... उनका हर स्पर्श ,जो मेरी हालत कर देता था बस वही हाल उनकी हो रही थी ,... आज ,

और उनके होंठों का साथ देने के लिए उनकी उँगलियाँ , .

..और सबसे दुष्ट बदमाश वो मोटा मूसलचंद ,... तो आज मेरे होंठों का साथ मेरे बालापन के जोबन दे रहे थे , हलके हलके उनकी छाती पर रगड़ कर , ललचा कर ,...

और मेरे होंठों का भी तो असली टारगेट वही था ,

उनकी चौड़ी छाती जिसके अंदर अब उनके दिल के साथ मेरा भी दिल था , ....

उस चोर ने चुरा के बहुत सम्हाल कर रखा था ,

बीसों चुम्बन ,... और चुम्बन यात्रा वहां रुकी पर ठहरी नहीं ,...

सरक कर उनकी नाभि के चारों ओर चक्कर काट कर , ...
 
चुम्बन यात्रा

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और चुम्बन यात्रा वहां रुकी पर ठहरी नहीं ,...

सरक कर उनकी नाभि के चारों ओर चक्कर काट कर , ...

मैं नयी थी , उमर की बारी थी , नवल किशोरी ,... लेकिन अपनी भाभी की पाठशाला की पक्की शिष्या , ...

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और शादी तय होने के बाद के बाद तो इनकी सलहज ने एक्स्ट्रा क्लास ले ले कर ,..

काम क्रीड़ा का कोई पाठ नहीं होगा जो आठ दस बार न पढ़ाया होगा , ....

और मेरी मम्मी भी , इनकी सास भी ,

मेरी माँ के साथ मेरी सबसे अच्छी सहेली भी थी , उन्होंने भी ,...

' वो ' क़ुतुबमीनार की तरह सर उठाये खड़ा था ,

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एकदम इन्ही की तरह बेसबरा , लालची , भूखा , नदीदा ,...

मैंने हिम्मत कर के उसे देखा , भर आंख ,...

मेरी गुरुआनी , मेरी रीतू भाभी , इनकी सलहज ने सुबह दर्जन भर सवाल किया था ,

कितना लंबा है , कितना मोटा है , पूरा घोंटा की नहीं , नापा क्यों नहीं , मुट्ठी में पकड़ा की नहीं , चूमा की नहीं ,...

और उनसे भी बढ़कर मेरी मंझली ननद ने क्या खुल के नन्दोई के ,

उसका क्या गुण गान किया , लम्बाई , मोटाई , सुपाड़ा कितना मोटा है ,..

कितना कड़ा है , कितनी देर तक ,...

मेरा अंदाज उस समय एकदम सही था जब मैं अब खुल के देख रहे थे ,

ननद जी वाले से मेरा वाला २० नहीं पूरा २५ है , ...

और मैंने पकड़ लिया , पहले हलके से फिर कस के , ...

कल रात अभी मुश्किल से चौबीस घंटे हुए थे जब मेरी फाड़ के रख दी थी इसने ,

खून खच्चर ,... सब कुछ ,

और कुछ लजाते शर्माते ,... मैंने ऊँगली से ही नाप लिया ,

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ये ट्रिक भी भौजी ने सिखाई थी , ऊँगली से लम्बाई , मोटाई नापने की ,

फिर मैथ मेरी अच्छी थी , हाईस्कूल में १०० में १०० ,

मैंने गुणा भाग किया ,... और भाभी के लिए जवाब तैयार हो गया। .. पौने आठ से आठ के बीच ,... ( हालाँकि इनकी सलहज को इससे संतोष नहीं हुआ , ... जब होली में ये गए तोइनकी सलहज ने इनकी सबसे छोटी साली से स्केल से नपवाया , ... पूरे आठ इंच का निकला ),

मोटाई एकदम मेरी कलाई के बराबर ,..

मैंने अपनी चूड़ी के नंबर से अंदाज लगा लिया ,.. ढाई इंच से थोड़ा ज्यादा ,...

लेकिन मेरे होंठ भी ललचा रहे थे।

और ऊपर से जो आज मंझली ननद ने कहा था ,

किस तरह सुहागरात की अगली रात नन्दोई जी , उनके लाख मना करने पर चमचम चूसा कर के ही माने ,... और वो और दुलारी दोनों मेरे पीछे ,...

भाभी आज की रात भइया बिना चुसाये छोड़ेंगे नहीं ,...

सच में बहुत मस्त लग रहा था , खूब कड़ा , खड़ा प्यारा मीठा मीठा ,...

चूंसने की हिम्मत तो नहीं पड़ी मेरी , पर मेरी लालची जीभ उसके बेस पर बस जैसे गलती से एक दो बार टच कर गयी , उतना काफी था।

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बस मस्ती से काँप गए ,... मैं जान रही थी मन उनका खूब कर रहा है ,

लेकिन वो शर्मीले , लजीले ,... मुझसे न बोल पाएंगे , न अपने दिल की कह पाएंगे

पर मैं थी न उनके दिल की हर धड़कन समझने सुनने वाली ,...

बिना कहे उनके , उनके मन की हर बात मेरे मन में सीधे उतर जाती थी ,...

और जो मैं उसे मुठिया रही थी , एक झटके में उनका मोटा सुपाड़ा , खूब लाल बड़ा मोटा , एकदम खुल गया था , ...

पता नहीं क्या हो गया मुझे , मैं खुद ,... मेरी जीभ की टिप बस निकल कर उसे जस्ट टच कर गयी ,

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शायद इतना विस्तार से मंझली ननद ने जो अपनी पहली चुस्सी का जिक्र किया था की

मैं अपने को रोक नहीं पायी ,..

लेकिन एक बार फिर , लीची ऐसे मोटे मस्त सुपाड़े को देखकर मेरा मन ,

अबकी मेरी जीभ ने दो चार बार सपड़ सपड़ , बस हलके से चाटा ,

लेकिन जबतक मैं अपने होंठो को हटा पाती ,

वो अपने को रोक नहीं पाए ,...

और यही तो मैं चाहती थी , वो अपने को रोक न पाएं ,...

कस के अपने दोनों हाथों को मेरे सर पे जोर से ,...

लेकिन उनकी सलहज की सीख , मेरी रीतू भाभी ने कम से कम दस बार इस बारे में सिखाया पढ़ाया था ,...

मैंने खूब बड़ा सा मुंह खोल लिया , जैसे कोई बड़ा सा लड्डू घोंट रही होंऊ ,

पर सबसे बड़ी बात जो इनकी सलहज ने सिखाया था , और मुझसे पूछ पूछ कर चेक किया था की मुझे याद है की नहीं , ... होंठ सीधे दांत के ऊपर , एकदम दांतों को ढंके ,... सिर्फहोंठ ही मेरे उनके 'उससे ' लगें ,... और कैसे हलके हलके होंठों से दबाना है ,

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लेकिन जब उन्होंने कस के दबाया , धीरे धीरे कर के मेरे होंठों के बीच सुपाड़ा ,...

और मैं उनकी सलहज की बाकी सब पढ़ाई भूल गयी ,

कित्ता बड़ा मोटा ,... और स्वाद भी ,...

वो अभी भी पुश कर रहे थे , धीरे धीरे पूरा मोटा सुपाड़ा मेरे मुंह में ,...

और तब मुझे याद आया

भाभी की सीख , होंठों से हलके हलके दबाने की बात ,

जीभ से सहलाते हुए चाटने की बात ,...

और उस सीख ने और मुसीबत में डाल दिया मुझे ,... मेरे होंठों और जीभ का असर

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उन्होंने और जोर से दबाया ,... धीरे धीरे आधा से ज्यादा ,...

और मेरे हलक तक ,... सिर्फ मोटा ही नहीं , वो लम्बा भी खूब था।

मैं चूसने की कोशिश कर रही थी , ननद जी ने खूब बोला था बड़ा मजा आया था उन्हें चूसने में , नन्दोई जी ऑलमोस्ट रोज ही उन्हें चुसाते हैं

लेकिन मैं ,...चोक करने लगी ,

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मेरे मुंह से गों गों की आवाज निकल रही थी पर वो आज पहली बार इत्ती जोश में थे की उन्हें मेरी परवाह नहीं थी ,

और यही चाहती थी मैं,...

पर थोड़ी देर में उन्होंने मुंह से तो बाहर निकाल लिया लेकिन उनकी जो हालत थी ,

मैंने खुद अपनी टाँगे उठाकर उनके कंधे पर रख दी ,

वो मेरे अंदर

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साजन सजनी

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उन्होंने और जोर से दबाया ,... धीरे धीरे आधा से ज्यादा ,... और मेरे हलक तक ,...

सिर्फ मोटा ही नहीं , वो लम्बा भी खूब था।

मैं चूसने की कोशिश कर रही थी ,

ननद जी ने खूब बोला था बड़ा मजा आया था उन्हें चूसने में , नन्दोई जी ऑलमोस्ट रोज ही उन्हें चुसाते हैं

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लेकिन मैं ,...चोक करने लगी ,

मेरे मुंह से गों गों की आवाज निकल रही थी पर वो आज पहली बार इत्ती जोश में थे की उन्हें मेरी परवाह नहीं थी ,

और यही चाहती थी मैं,...

पर थोड़ी देर में उन्होंने मुंह से तो बाहर निकाल लिया लेकिन उनकी जो हालत थी ,

मैंने खुद अपनी टाँगे उठाकर उनके कंधे पर रख दी , वो मेरे अंदर

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और बस मेरी पायल की रुन झुन ,

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बिछुओं की झंकार ,... चूड़ियों की चुरमुरुर और

मेरे पायल बिछुए की तान पर जुगलबंदी करते मेरे साजन के धक्के ,...

कुछ देर में मैं चीख भी रही थी , सिसक भी रही थी ,

और उनकी ताल में ताल मिलाकर ,...

इतना कस के मैंने उन्हें भींच रखा था की ,...

उनकी हिम्मत जो धक्कों की रफ़्तार कम करें चाहे मैं चीखूँ , चिल्लाऊं। ..

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पर आज मैं सिसक ज्यादा रही थी , चीख कम रही थी और अब मेरी सारी कमजोरियां भी उन्हें पता चल गयी थीं

उनकी उँगलियाँ उनके होंठ कभी मेरे निपल्स पर , तो कभी उरोजों पर

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मैं पागल हो रही थी , मस्ती में चूर ,.. कुछ ही देर में आज मैं शिथिल पड़ गयी ,

पर उनके धक्के मैंने रुकने नहीं दिए ,

ताबड़तोड़ ,,, जब दूर कहीं बारह का घंटा बज रहा था , हम दोनों साथ साथ ,...

वो देर तक मेरे अंदर ,... वो बरसते रहे मैं भीगती रही , सारा रस सोखती रही उनका ,...

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और देर तक हम ऐसे

और तब मेरी निगाह पड़ी , आज भी

दूध का ग्लास , पान की ट्रे

दूध का ग्लास उनके हाथों में , और मेरे होंठ , जहाँ मैंने दूध के ग्लास पर अपने होंठ लगाए थे , ...

लेकिन अब मैं उनकी गोद में बैठी चिपकी , उनके हाथों से दूध पीती ,...

और उनका वो मोटा दुष्ट मूसल , ...

जिसकी लम्बाई चौडाई अब मैंने अच्छी तरह नाप ली ( पौने आठ से आठ इंच और मोटाई ढाई से पौने तीन इंच , आखिर सुबह सुबह , इनकी सलहज जरूर पूछतीं ) ,

और थोड़ा सा स्वाद भी चख लिया था ( यमम यमम ),....

अच्छी तरह से मेरे पिछवाड़े की दरार के बीच धंसा , आराम कर रहा था , थोड़ा जागा , ज्यादा सोया ,...

रजाई एक बार फिर मैंने अपने ऊपर खींच ली थी , आखिर दिसंबर की रात थी , और बाहर खूब कोहरा भी था ,...

लेकिन अपने उभारों के ठीक नीचे तक , न उन्होंने मेरे जोबन को ढकने दिया , न मैंने जिद्द की ,...

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मुझे मालूम था पहले दिन से ही ये लड़का कितना ललचाता है मेरे किशोर उभारों के लिए ,...

और हाँ , दूध का ग्लास भी मैंने उनके हाथ से ले लिया ,

मुझे मालूम था इस लालची लड़के के लालची हाथ किस चीज के लिए ललचा रहे हैं ,

और सच में अगले ही पल उनके दोनों हाथ मेरे दोनों उभारों पर , ... ऐसा नदीदा बेसबरा ,

और दूध का ग्लास मेरे हाथों में था , मैंने जबरन बचा हुआ सारा दूध , उन्हें पिला दिया ,....

दूध की जो मूंछ उनकी पतली पतली मूंछ पर बनी थी उसे कस के चूम लिया ,

और जब उनके होंठों को आजाद किया तो हम लोगों के पहले मिलन की ,

जब मैंने उन्हें बीड़ा मारा था , इस चितचोर ने मुझे मुझसे चुरा लिया था , उस दिन की कहानी ,...

जब बिचारे सिर्फ मेरे नाम चक्कर में पूरी रात ,..

और मैं न सिर्फ इनका नाम पता किया इनकी चचेरी ममेरी बहनों का भी ,...

और इनका नाम ले ले के गारियाँ सुनाई ,

" असल में जानती हो ,.... " बोले वो और चुप हो गए।

इनकी शर्म झिझक न ,... मैंने इनकी चुप्पी का फायदा उठा कर अपनी जीभ से इनके होंठों पर लगी मलाई चाट ली ,..

और उन्होंने पूरी बात बताई , ...

कोशिश उन्होंने की थी। मेरा नाम पता करने की।

लेकिन उन्हें बार बार ये डर लगता था की अगर मुझे पता लग जाएगा तो मैं बुरा मान जाउंगी ,...

मैं इत्ती इन्नोसेंट भोली सी ,... फिर मैं न जाने क्या सोचूंगी उनके बारे में , ...

उन्होंने एक दो मेरी सहेलियों से हिम्मत कर पूछा भी था , जिनकी बरात के लड़कों से दोस्ती हो गयी थी ( ये मेरी वो सहेलियां थीं , जिन्होंने जितनी देर मेरा नाम पता करने में लगाया था , उससे आधे समय में बारात के लड़कों से शलवार का नाडा खुलवा लिया था , ... )

पर वो चिढ़ाने का मौका क्यों छोड़तीं ... बोलीं उनसे , ... वो देखो सामने तो है ,, जाके पूछ लो , सच्च में काटेगी नहीं , मेरी सहेली बहुत सीधी है।

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तो , ... पता कैसे किया ,...

बड़ी मुश्किल से अपनी मुस्कान रोकते मैं बोली।

" तुम , ... तुमने बताया रास्ता ,... "

मुस्कराते वो बोले और साथ में कस के उनके हाथों ने मेरे जोबन मसल दिया।

मेरी समझ में नहीं आया लेकिन उन्होंने ही बताया ,...

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आधी रात

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" और मैं मिल गयी तुम्हे ,... "

हंस के मैं बोली और अब हम दोनों लेटे , हँसते खिलखिलाते ,... सामने घडी रानी डेढ़ बजा रही थीं ,

लेकिन मैं समझ गयी थी ये रातें सोने के लिए नहीं होतीं।

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और मुझसे ज्यादा ये बात इनके मूसलचंद को मालूम थी ,

एक बार फिर वो तनतना गया था , मोटा कड़ा अच्छी तरह जागा और मेरी गुलाबी सहेली को छेड़ता तंग करता ,

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मैं समझ गयी थी दो दिन में ही ,

ये जितने ज्यादा शर्मीले , सीधे हैं वो , इनका मोटा मूसल , उतना ही दुष्ट ,...

उनके हाथ भी उसी तरह

अब कस के कुचल मसल रहे थे ,मैं सिसक रही थी ,

खुद अपनी दोनों जाँघे मैंने खोल दी और पीठ के बल पर इनका शर्माना ,...

वो बार बार मुझे चुम रहे थे मैं समझ रही थी वो क्या कहना चाहते हैं , पर कहना जरूरी था क्या ,...

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मैं कौन मना करने वाली थी ,...

और मैं मना करती भी तो मानना जरुरी था क्या ,

तब भी जैसे फर्स्ट डेट पर कोई बड़ी हिम्मत कर के किस के लिए पूछे , बस उसी तरह हलके से उन्होंने पूछा ,

" हे बहुत मन कर रहा है , मेरा बस एक बार ,... "

मैं क्या बोलती ,....

लेकिन बिना बोले मैं जानती थी ये लड़का जो कुछ जरुरत से ज्यादा ही केयरिंग है ,...

कुछ नहीं करने वाला ,...

मैंने बिना बोले उन्हें अपने ऊपर खींच लिया , .. मेरी जाँघे पहले से ही फैली , खुली ,...

और वैसलीन की शीशी इनकी ओर खुद मैंने बढ़ा दी ,..

अबकी मेरे पैर इनके कंधे पर नहीं चढ़े , लेकिन बिस्तर पर जितने तकिये कुशन थे सब मेरे नितम्बो के नीचे ,...

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और पहला धक्का ही इन्होने इतनी जोर से मारा , मेरी जोर की चीख निकल गयी , एक चौथाई मूसल अंदर था , ...

पर मैंने अपनी आँखे अबकी नहीं बंद की , प्यार से इन्हे देखती रही , मुस्कराती रही , इन्हे उकसाती रही ,

दूसरा धक्का ,

तीसरा धक्का

चौथा धक्का ,

और जब घड़ी रानी दो बजा रही थी ,

हम दो से एक हो गए थे , एकदम गुत्थमगुत्था , ...

कभी खूब तेजी से तो कभी आराम आराम से ,

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न जल्दी इन्हे थी न मुझे ,.. और अबकी मैं उनका पूरा साथ दे रही थी , ...

चूमने में ,कस के भींचने में और कभी कभी साथ साथ धक्के लगाने में ,...

इनकी सलहज ने मुझे बताया था और इनकी सास ने भी ताकीद की थी ,

पहली चुदाई मर्द की और दूसरी दोनों की , तीसरी औरत की।

हम दोनों साथ साथ ,... और ये देर तक ,

और उसके बाद भी न ये मेरे अंदर से निकलना चाहते थे , न मैं इन्हे निकलने दे रही थी ,

हाँ बगल प्लेट में जोड़ा पान ,... अबकी मैने उन्हें ललचाया दिखाया लेकिन दोनों जोड़ा मैं खुद गप्प कर गयी , ...

और इनकी बातें सुनती रही ,...

बातें क्या ,...

इनके पास तो बस एक ही टॉपिक था, मैं,... मेरे बारे में बस ,...

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और बहुत हुआ तो मेरी भाभी और बहने , इनकी सालियाँ , इनकी सलहज , ...

एकदम म्युचुअल फैन क्लब था ,... मेरी दोनों बहने भी बहाना बना के मुझे इन्ही के बारे में ,

पक्की चमची थीं दोनों अपने जीजू की ,...

आधे घंटे बाद इनका मुंह बंद करने का बस एक ही तरीका था कस के चूमना , ...

और मैंने भी , कस के न सिर्फ चूमा ,..

बल्कि मेरे होंठों से न सिर्फ इनके होंठ बंद थे बल्कि मेरी जीभ भी इनके मुंह में ,...

और कुचा कुचलाया , आधे घंटे से मेरे मुंह में रचा बसा , सुहागरात वाला स्पेशल पान , ...

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मेरे मुंह से इनके मुंह में , मेरे मुख रस के साथ ,...

सुबह जब मुर्गा बांग दे रहा था तो इनका मुर्गा भी कुकुडू कूं ,

और एक बार फिर ये मेरे अंदर थे , मेरी टाँगे इनके कंधे पर ,

और अबकी जान बूझ कर महावर लगे पैर इनके माथे पर मैं रगड़ रही थी ,

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इनकी भौजाइयां जब इन्हे चिढ़ाती थीं तो मुझे बहुत मजा आता था।

और जब ये चाय बनाने गए मैं नहाने तो सात बज रहे थे ,

पर आज कल की तरह गारंटी नहीं थी की मेरी ननदें नौ बजे के बाद आएँगी। इसलिए सुबह सुबह ,...

तीन बार ,...

और आज मैंने मेक अप करते समय रात के निशानों पर ज्यादा नो मार्क नहीं लगाएं,

यही तो मेरी यही तो मेरी ननदें चाहती थी ,

देखना

मुझे छेड़ने , चिढ़ाने के लिए तो उन बेचारियों को भी थोड़ा मौका मिल जाएगा ,...

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चाय सच में अच्छी बनाते थे , एकदम मेरी टेस्ट की , परफेक्ट ,... कड़क , जो आँख खोल दे , ...

और चाय के बाद जब वो तैयार होने गए

तो बस थोड़ी देर में जैसे घडी देख कर ठीक पौने आठ बजे उनकी सलहज का फोन आ गया ,..

गनीमत थी की वो नहीं थे ,

कल उन्ही के चक्कर में चौथी बार सुबह सुबह कुटाई हो गयी थी , ... दिन दहाड़े अपने नन्दोई को चढ़ा कर ,

मेरे ऊपर चढ़ा दिया था ,

रीतू भाभी , वो अपना कल का सवाल दुहराती , मुझे डांट पड़ती उसके पहले ही मैंने जवाब दे दिया ,

" तीन बार आपके ननदोई ने ,... "

और मुझे कस के डाँट पड़ गयी , ...
 
मेरी भौजी उनकी सलहज

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ठीक पौने आठ बजे उनकी सलहज का फोन आ गया ,..

गनीमत थी की वो नहीं थे , कल उन्ही के चक्कर में चौथी बार सुबह सुबह कुटाई हो गयी थी , ...

दिन दहाड़े अपने नन्दोई को चढ़ा कर ,

मेरे ऊपर चढ़ा दिया था ,

रीतू भाभी , वो अपना कल का सवाल दुहराती , मुझे डांट पड़ती उसके पहले ही मैंने जवाब दे दिया ,

" तीन बार आपके ननदोई ने ,... "

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और मुझे कस के डाँट पड़ गयी , ...

'तीन बार क्या ,... ससुराल में जाके ज्यादा शरीफ हो गयी ही , भूल गयी ,... जो सिखाया पढ़ाया था "

सच में मैं कैसे भूल सकती थी , रीतू भाभी की पहली होली , ...

दो तीन महीने पहले ही उनकी शादी हुयी थी , उमर में मुझसे चार साल से ज्यादा बड़ी नहीं थी ,

मैं उनकी छोटी ननद , ...

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पहले तो हम ननदें भारी पड़ीं , लेकिन फिर भौजी ने मुझे दबोच लिया ,

पहले तो फ्राक फटी मेरी ,... मेरे कच्चे टिकोरे निकले बाहर ,...

और फिर जाँघे फैली , उनकी उंगलिया चड्ढी खोल के मेरी चुनमुनिया पर ,...

मेरे छोटे छोटे बाल वहां आ गए थे , ... साल दो साल पहले ही ,... उसे रगड़ते वो बोलीं ,

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" अरे ननद रानी झांटे भी मस्त आ गयी हैं , , अभी तक चोदवाना नहीं शुरू किया क्या ,

बड़ी टाइट है तेरी चुनमुनिया ,... "

मैं बस कसमसा रही थी ,

भौजी ने अपने किसी ननद के दुप्पट्टे से मेरी दोनों बाँहें मेरे पीछे कर के पहले ही बाँध दी थी ,

मैं कुछ कर भी नहीं सकती थी ,...

बस भौजी ने अपनी हथेली से मेरे ' वहां ' रगड़ना शुरू कर दिया , थोड़ी देर में मैं पनियाने लगी ,..

" बोलो कुछ गया नहीं है इसके अंदर , किसी लौंडे का ,... "

वो एकदम पीछे पड़ गयीं ,

" नहीं "

मुश्किल से मैं बोली।

" अरे ननद रानी जो नहीं गया है , ...उसका नाम तो बताओ। "

भौजी एकदम ,...

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पर साथ ही वार्निंग भी , दस तक गिनूँगी मैं अरे तब तक नहीं बताओगी न तो दो ऊँगली सीधे पेल दूंगी तेरी बुर में ,....

जड़ तक , इस बात का ख्याल नहीं करुँगी की नन्दोई जी को झिल्ली फटी मिली।

और नहीं तो इतने मेरे देवर है , बस किसी को भांग पिला चढ़ा दूंगी तेरे ऊपर , देवर से नन्दोई बना दूंगी उसे ,... "

और रीतू भाभी की गिनती चालू हो गयी ,.. १ , २ ,.. मैंने मम्मी से गुहार लगाई , कातर आँखों से देखा उनकी ओर ,

और उन्होंने मेरी भौजी को कस के हड़काया , लेकिन मेरी ओर से नहीं, उलटे ,

" कइसन भौजाई हो , .. आजकल पढ़ी लिखी भौजाई क इहै परेशानी है , ... अरे दस तक ,....

हम लोगों को पांच से ज्यादा गिनती आती नहीं थी , और ननद के आगे तो तीन से ज्यादा नहीं ,...

गलती तो तोहार है , ..अइसना सीध भौजाई हो ,...

वरना अब तक तो ननद निसूती होकर आँगन में ,...

जब तक होली में ननद को नंगे न ,.... और सब सीखाना पढ़ाना तो तुमको है , नयी कच्ची ननद तो चीखे चिल्लायेगी ,... और कौन भौजी ननद के चीखने चिल्लाने को ,... "

मैं निसूती , बिना कपडे की तो नहीं हुयी , लेकिन चड्ढी मेरी फट कर आँगन में ,..

फ्राक उठा कर भौजी ने बड़े आराम से न सिर्फ मेरी नीचे वाली मुंह दिखाई की ,

वहां जम कर रंग लगाया ,...

और बाकी कपडे सिर्फ इस लिए बचे की मैंने भाभी की बात मान कर लंड , बुर चूत , चुदाई सब बोला ,

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एक बार नहीं दस बार ,

कसम भी खायी की अगर इसके अलावा मैंने कभी कुछ और बोला ,

तो वो अपने किसी भी देवर को मेरे ऊपर चढ़ा देंगी , भले ही उन्हें रेप करना पड़े।

फिर तो मेरी और रीतू भाभी की जोड़ी ,..

गाँव में कोई रतजगा हो , .. अक्सर दूल्हा मैं बनती , दुल्हन वो बनतीं ,...

शादी ब्याह में ननद भाभी में गारी हो तो ,... पक्की दोस्ती थी हमारी ,

तो जब भौजी ने बोला , …मैं समझ गयी कोई बचत नहीं है

मैंने साफ़ साफ़ बोल ही दिया ,

... चुदाई ,... आपके नन्दोई ने रात में तीन बार चोदा।

आखिर कल ननदों ने मुझसे बुलवा ही लिया था , ... ' बड़ा मजा आये चुदवैया में "
 
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