Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही - Page 18 - SexBaba
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Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही

कुछ देर बाद माँ ने मुझे हटने को बोला ओर मैने भी लंड को माँ की गान्ड से निकाल
लिया ऑर माँ भी उठकर खड़ी हो गई ऑर जल्दी ही पलट कर पीठ को मामा की तरफ कर दिया जबकि
अपनी चूत को मेरे सामने पेश कर दिया ऑर खुद के हाथों को बेड पर लगा कर सहारा लेते
हुए पीठ की तरफ झुक कर मामा के उपर हो गई मामा ने अपने लंड को माँ की गान्ड मे
डाल दिया ऑर उपर से मैं माँ के उपर चढ़ गया ऑर लंड को माँ की चूत मे घुस दिया ऑर
जल्दी से माँ के एक बूब को मुँह मे भर लिया,,,,,माँ ने अपनी टाँगों को पूरी तरह खोल
दिया था ऑर मैं अपनी टाँगों को मोड़ कर माँ के हल्का सा उपर की तरफ झुक गया था ऑर
माँ के बूब को चूस्ते हुए माँ की चूत मारने लगा ,,,,,आअहह ीसस्सीए हहिि ब्बीत्ताअ
त्तीज्जीइ ससीए छ्छूड़दूव आपपनन्ी माआ ककूऊ ऊओरर त्तीज्जी ससी ,,बहाररल्लूऊऊ
म्मेररीए प्पूउर्रीए ब्बूबब क्कू आपपंनी म्मूउउहह म्मीई ऊरर क्खहाआ ज्जाऊओ
ईसस्क्कूऊ आअहह ,,,,,,,,, मैने माँ के एक बूब को तो कभी दूसरे को तेज़ी से चूसने ऑर
काटने लगा माँ भी मुझे ऑर तेज़ी से चूत चोदने को ऑर बूब्स चूसने को बोल रही थी मैने
माँ के चेहरे की तरफ देखा तो वो मुझे देख कर खुश थी उसने चेहरे पर खुशी ऑर एक
पूरी तरह से संतुष्टि की झलक थी वो बहुत ज़्यादा खुश थी आज मेरे से ऑर मामा से एक साथ'
चुदने के बाद,,,,मैं भी बहुत खुश था क्यूकी कुछ देर पहले छत पर सोनिया के गले
लगने के बाद जो आग लगी थी मेरे जिस्म मे वो आग ना तो बाथरूम मे शवर के नीचे ठंडी
हुई थी ना ही बाथरूम मे मूठ मारने के बाद लेकिन अब वो आग माँ की चुदाई करके ठंडी
करने वाला था मैं अपने लंड के सुलगते लावे को माँ की चूत या मुँह मे निकालकर ऑर
माँ भी उस गर्म लावे को किसी शरबत की तरह पीने वाली थी,,,,,,,माँ इतनी ज़्यादा मस्त ऑर
खुश हो गई थी कि तेज़ी से सिसकियाँ लेते हुए माँ की चूत ने पानी छोड़ दिया था लेकिन माँ ने
मुझे या मामा को रुकने को नही बोला था बल्कि आगे भी चुदाई के मज़ा लेना शुरू कर
दिया था

चुदाई करते टाइम मामा तो कुछ नही बोलता था ऑर ना ही सिसकियाँ लेता था वो बस चुप चाप
शांति से चुदाई करता था लेकिन उसकी चुदाई शांत नही होती थी बल्कि जोरदार ऑर धमाकेदार
होती थी,,,,,,माँ तो पक्की खिलाड़ी थी इसलिए टिकी रहती थी मामा के सामने लेकिन अगर कोई नया
खिलाड़ी दे दिया जाए मामा को तो पक्का वो जान ही निकाल देगा उसकी,,,एक तो 9 इंच का काला लंबा
लंड उपर से किसी फ़ौजी की तरह भरा हुआ शरीर,,,,अगर गली से कोई सील बंद लड़की मिल जाती
मामा को तो आज की डेट मे वो चोद चोद कर ही मार डालता उसको,,,,लेकिन मैं भी कम नही '
था जहाँ मामा का लंड काला ऑर लंबा था 9 इंच का वही मेरा लंड सांवला ऑर 9 इंच के
करीब ही लंबा हो गया था अब तक लेकिन मोटा तो मामा के लंड से कहीं ज़्यादा था,,मेरे
को अगर किसी लड़की की सील तोड़नी पड़ती तो मुश्किल होती क्यूकी लड़की इतना दर्द नही बर्दाश्त कर
पाती ऑर इसका एक उदाहरण मनीषा से मिल चुका था मुझे जिसकी गान्ड से बहुत खून निकला था
जब मेरा मूसल गया था उसकी गान्ड मे ,,,,,,,लेकिन माँ को तो मेरे मूसल से प्यार हो गया
था वो खुद कहती थी कि इतना मज़ा विशाल ऑर मामा के लंड से नही आता जितना मेरे लंड से
आता है लेकिन एक साथ 2 लंड लेने मे ऑर भी ज़्यादा मज़ा आता है बल्कि माँ तो एक साथ 3 लंड
लेना चाहती थी एक टाइम पर,,,,,एक गान्ड मे एक चूत मे ऑर एक मुँह मे,,,,,,,,,,,

काफ़ी चुड़क्कड़ हो गई थी मेरी माँ लेकिन एक बात थी कि घर से बाहर किसी मर्द से नही
चुदवाया था आज तक,,क्यूकी घर मे ही उसकी सारी खुजली दूर हो जाती थी बाहर जाने की कभी
ज़रूरत ही महसूस नही हुई थी,,,,,,,,


मैं माँ के उपर झुक कर माँ के बूब्स को चूस्ता हुआ लंड को तेज़ी से माँ की चूत मे पेल
रहा था जबकि मामा नीचे से माँ की गान्ड की धज्जियाँ उड़ा रहा था लेकिन माँ को चूत
ऑर गान्ड की धज्जियाँ उड़वाने मे ही असली मज़ा आता था इसलिए तो लगातार सिसकियाँ निकल रही
थी माँ के मुँह से,,,,,,,,


,हम लोग करीब 20 मिनट से ऐसे ही चुदाई कर रहे थे इसी
बीच माँ एक बार पानी निकाल चुकी थी लेकिन ना तो मेरा ना ही मामा का पानी निकला था अभी
तक ,,,,तभी मुझे लगा कि माँ फिर से झड़ने वाली है ऑर मामा भी सिसकियाँ लेने लगे है
मामा तभी सिसकियाँ लेता है जबा पानी निकालने वाला होता है इसलिए मैने भी अपनी स्पीड
तेज करदी ताकि सबके साथ झड सकूँ ,,तभी माँ ने फिर से पानी निकाल दिया ऑर मामा ने भी
शायद पानी निकाल दिया था क्यूकी मुझे महसूस हो रहा था कि मामा अब रुक गया है ऑर माँ
की चुदाई नही कर रहा है तभी माँ ने मुझे हटने को बोला लेकिन मैने माँ की इशारा किया
कि मेरा भी बस होने ही वाला है तो माँ ने बोला कि बस कर बेटा बाकी का मेरे मुँह मे करले
मेरी चूत अब ऑर बर्दाश्त नही कर सकती इतना बोलते ही माँ ने मुझे साइड किया ऑर जल्दी से
मामा के उपर से उतर गई मैने देखा कि माँ की गान्ड से मामा का पानी रिस्ता हुआ नीचे
मॅट्रेस पर गिरने लगा था लेकिन मेरा अभी तक नही हुआ था इसलिए माँ के नीचे उतरते ही
मैं वापिस माँ पर चढ़ गया इस से पहले माँ मुझे रोकती मैने लंड को माँ की चूत मे
घुसा दिया ऑर जल्दी से चुदाई करने लगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,ब्ब्ब्बासस्स क्कार्र ब्बीतता आब्ब्ब ऊरर
बबार्रददासशहतत न्नाहहिि हूत्ताआ ,,,हहययययईईई आआहह
आब्ब्बबब क्क्कय्या ज्जानन्न ल्लीगगाआ आआपपनन्िईीईई म्माआ क्क्कीईईई आअहह
म्‍म्माअरर्र्ररर गगग्गययईीीईई ,,,,,,,,,तभी माँ ने मामा की तरफ़ देखते हुए मामा को मुझे
हटाने को बोला लेकिन मामा वही लेटा हुआ हँस कर हमारी तरफ देखता रहा,,,,,,,,,,,क्यू बड़ा
दिल कर रहा था ना बेटे का लंड लेने को अब भुगतो ,,,,,,,,मामा फिर से हँसने लगा,,,,,,,,

बाआसस्स क्कार्र ब्बेटया म्माअरर ज्जाोउन्नगगीइ म्माईिईन्न्णणन् आहह ऊओरर न्नाहहीी
हूत्ताअ आब्ब्ब म्मीररीए ससीई आअहह हहाआत्तज्जा म्मेररीए उऊप्पाररर ससीए
आहह म्मार्र गगयइी,,,,,,,,,माँ ब्बास 2 ममिंनुउठती म्मीर्रा हहूननी हहिि
व्वाल्लाअ हहाइईइ इत्टना बोलके मैने स्पीड तेज करदी ऑर माँ के हाथों को मॅट्रेस पर
दबा कर माँ के लिप्स मे अपने लिप्स जाकड़ दिए ताकि माँ कुछ बोल नही सके लेकिन फिर भी माँ
की दबी दबी दर्द भरी हल्की सिसकियाँ निकल रही थी,,,,मेरा बस होने ही वाला था इसलिए मेरी
स्पीड भी बहुत तेज थी लेकिन माँ से मेरा मूसल ऑर ज़्यादा बर्दाश्त नही हो रहा था अपनी
चूत मे वो तड़प कर इधर उधर हिल रही थी लेकिन मैने भी कस्के पकड़ा हुआ था अपनी
माँ को ऑर तेज़ी से चुदाई कर रहा था तभी मुझे लगा कि मेरा पानी निलकलने वाला है तो मैं
जल्दी से उठा ऑर लंड को हाथ मे लेके माँ के मुँह के पास चला गया ऑर हाथ से लंड को तेज़ी
से सहलाते हुए सारा पानी माँ के मुँह मे निकाल दिया ऑर माँ ने भी सारा पानी पी लिया मैं'
वही साइड पर ज़मीन पर गिर गया ऑर तेज़ी से हाँफने लगा,,,,,,,माँ की हालत बहुत खराब हो गई
थी लेकिन मैं खुश था क्यूकी जितनी गर्मी थी मेरे जिस्म मे अब सब निकल चुकी थी माँ के
मुँह मे


जब हालत ठीक हुई तो माँ उठकर कपड़े पहनने लगी,,,,,,,,,,

सन्नी-अरे रूको ना माँ अभी मुझे ऑर करना है,,,,,,,,,

माँ--नही बेटा ये घर नही है जहाँ पूरा दिन नंगे रहके मस्ती करते रहे यहाँ तो बहुत ही
मुश्किल से टाइम मिलता है मस्ती करने का ,,,वैसे भी आज के लिए इतना काफ़ी है ऑर चूत चुदवा
कर तेरे से चूत का भोसड़ा नही बनवाना मुझे,,,,एक बार मे ही जान निकाल दी मेरी दूसरी
बार मे तो पक्का मार ही डालेगा,,,,,इतना बोलते बोलते माँ ने कपड़े पहन लिए ऑर मामा ने
भी अपने कपड़े पहन लिए माँ अपनी साड़ी बाँध रही थी जबकि मामा तो कपड़े पहन कर
दरवाजे तक चला गया था माँ ने भी साड़ी के पल्लू को सेट किया ऑर मामा की तरफ बढ़ कर बाहर
जाने लगी तभी मैने माँ को हाथ पकड़ कर रोक लिया,,,,,,,जब तक मामा दरवाजा खोलकर
बाहर जा चुका था ,,,,,

मामा--चलो बहना जल्दी करो कोई आ जाएगा,,,,,,,,,,,

माँ--देखो ना भाई ये सन्नी बच्चो की तरह ज़िद्द कर रहा है,,,,चल जल्दी कपड़े पहन ले सन्नी
बेटा बाकी का हम बाद मे कर लेंगे,,लेकिन अभी नही अभी मुझे जाना है,,,,,लेकिन मैं नही
माना,,,,,मेरे अंदर तो आग लगी हुई थी जो इतनी जल्दी नही भुजनी थी इसलिए माँ ने मेरी हालत
देखी ऑर मुझे लेटा कर जल्दी से मेरे लंड को हाथ मे लेके सहलाने लगी जबकि बाहर खड़े
मामा को इशारा किया कि बाहर ध्यान रखे ऑर मेरे लंड पर झुक कर मेरे लंड को मुँह मे
ले लिया ओर अच्छी तरह से चूस कर पानी निकाल दिया तब जाके मुझे चैन मिला ,,,फिर मैने भी
कपड़े पहने जब तक माँ ऑर मामा जी वहाँ से जा चुके थे,,,,,,

मैं वहाँ से बाहर निकला ऑर चाचा जी के घर चला गया ,,वहाँ मामा बाहर आँगन मे
बैठा हुआ था जबकि माँ रसोई मे चली गई थी,,,दोपेहर का खाना तैयार करने ,,मुझे थोड़ी
थकान तो थी लेकिन माँ की चुदाई से सब थकान दूर हो गई थी लेकिन सोनिया शायद थकान
से चूर होके सो चुकी थी,,,,,,,,तभी चाची भी रूम से निकल कर बाहर मेरे ऑर मामा जी के
पास आ गई,,,,,हम लोग बैठ कर बातें करने लगे,,,,,,,ऑर माँ खाना तैयार करती रही,,,,

खाने बना कर माँ बाहर आई ऑर मुझे सोनिया को जगाने को बोला ऑर खाना खाने को बोला लेकिन
मैने माँ को मना कर दिया ऑर बोल दिया कि आप खुद जाके उसको उठा दो मुझे नही जाना,,,तो
माँ ने दोबारा मुझे नही बोला ऑर खुद जाके सोनिया को लेने चली गई,,,,,,,,कुछ देर बाद सोनिया
माँ के साथ वहाँ आ गई फिर हम लोगो ने खाना खाया ऑर चाचा जी के रूम मे चले गये
ऑर वहीं बैठ कर बातें करते रहे,,,,दोपेहर से शाम कब हो गई पता ही नही चला,मैने
रूम मे सबका मनोरंजन करने के लिए एक से बढ़ कर एक जोक सुनाया सब लोगो का हँस हँस के
बुरा हाल था चाचा जी भी बहुत खुश थे लेकिन एक शक्स था जो झूठी हसी हँस रहा था वो
थी सोनिया,,,दिल से उदास थी लेकिन चेहरे पर झूठी मुस्कान लेके सबको जता रही थी कि वो भी
बहुत खुश है,,,,,,,,,,,शाम को डॉक्टर आ गया चेक-अप करने के लिए उसने हम सब लोगो को रूम से
बाहर निकाल दिया ऑर खुद चाचा जी का चेक-अप करने लगा,,,,,,,,,,,,कुछ देर बाद वो भी
बाहर आ गया,,,,,,,,,
 
डॉक्टर--आज तो कमाल ही हो गया ,,,,किशन लाल जी की तबीयत मे तो बहुत फरक आ गया है,,,,,,

क्या मतलब डॉक्टर साहब,,,,,,,चाची जी ने पूछा,,,,,,,,,

डॉक्टर--मेरा मतलब है कि आज उनकी हालत मे बहुत सुधार है पहले के मुक़ाबले,,,लगता है किसी वजह
से वो बहुत खुश है,,,,,

तभी चाची ने मेरे ऑर सोनिया की तरफ़ उंगली करते हुए बोला,,,,,,,,डॉक्टर साहिब ये दोनो है उनकी
खुशी की वजह ,,,,,,

मैने ऑर सोनिया ने डॉक्टर को नमस्ते बोला ऑर उसने भी हमे रिप्लाइ किया,,,,,,,,

डॉक्टर--अच्छा तो ये शहरी लोगो ने हमारे चाचा जी को इतना खुश किया है कि उनकी हालत सुधरने लगी
है,,,,ये तो बहुत अच्छी बात है क्यूकी खुशी से एक आस जगी है उनके दिल मे फिर से जीने की आस
उनका फिर से दिल कर रहा है अपनी ज़िंदगी जीने को,,,,,

चाची---क्या मतलब डॉक्टर,,,,,,,,,

डॉक्टर--देखिए पुष्पा देवी जी किशन लाल वैसे तो बहुत बीमार है अभी लेकिन जैसे पहले वो जीने की
आस ही खो चुके थे ऑर ज़्यादा बीमार हो गये थे ,,लेकिन अब उनके दिल मे फिर से जीने की
आस पैदा हो गई है,,,जैसे इंसान को जीने के लिए सिर्फ़ साँस लेने की ज़रूरत नही बल्कि जीने का
कोई मकसद भी होना चाहिए जैसे परिवार मे हसना खेलना ,,,,बच्चों से प्यार करना,,मुझे
लगता है इन बच्चो के आने से उनको जीने की नयी उम्मीद मिली है शायद इसलिए उनकी हालत मे आज
बहुत सुधार हुआ है,,,अगर ऐसा ही रहा तो कुछ दिनो मे वेंटिलेटर मशीन की भी ज़रूरत
नही रहने वाली आपको,,बस वो ऐसे ही हँसते रहे ऑर खुश रहे,,हो सके तो अपने मेहमानो को
कुछ दिन तक यहीं रोक लीजिए,,,इतने मे केवल भी वहाँ आ गया ऑर डॉक्टर की बात सुनके बहुत
खुस हो गया,,,,,

लेकिन डॉक्टर साहिब बच्चे तो आज ही आए है कुछ देर पहले ऑर इतनी देर मे भी चाचा जी की तबीयत
मे सुधार आ गया क्या,,,,,चाची ने डॉक्टर से पूछा,,,,,,

डॉक्टर--जी पुष्पा देवी जी,,,मैने चेच अप किया है हालत पहेल से बेहतर है इनकी,,,आप खुद सोचो कि कुछ
ही देर पहले ये लोग आए है ऑर चाचा जी की तबीयत मे इतना सुधार हो गया है तो ज़रा सोचो कि अगर
ये लोग कुछ दिन यहीं रुक जाए तो चाचा जी की तबीयत ऑर भी ज़्यादा ठीक हो जाएगी,,,,इसलिए तो मैं आपको
बोल रहा हूँ इनको यहाँ रोकने के लिए,,,,,,

चाची---जी डॉक्टर हम इन बच्चो को जल्दी नही जाने देंगे यहाँ से,,इनकी ही मेहरबानी से ये
आज इतने खुश है,,,,,,,,,,तभी चाची ने उठकर मुझे ऑर सोनिया को फॉरहेड पर चूम लिया
क्यू बच्चो क्या बोलते हो अब जल्दी शहर जाने की बात तो नही करोगे ना,,,,,,,

मामा--चाची जी सन्नी को तो कोई प्राब्लम नही है जितनी मर्ज़ी छुट्टियाँ करवा लो कॉलेज से लेकिन इस
सोनिया का कुछ नही कह सकते इसको तो खुद बुखार हो तो भी कॉलेज चली जाती है,,,,

क्यूकी बेटी तू कुछ दिन रुकेगी ना अपने बूढ़े चाचा चाची के पास,,,,इतना बोलते ही चाची
ने सोनिया को बाहों मे भर लिया,,,,,,,,

सोनिया--क्यू नही चाची जी मैं ज़रूर रुकूंगी अगर मेरे रुकने से चाचा जी ठीक होते है तो जब तक
आपका दिल करे मैं रुकने को तैयार हूँ,,,,,,,,,,

तभी डॉक्टर ने सबसे अलविदा ली ऑर हम दोनो को कुछ दिन यहीं रहने की बात बोलके वहाँ से
चले गये,,,,,,,,,,,,,,


मैं तो बहुत खुश था गाँव आने से ,,,अब ज़्यादा नही तो कम से कम 10 दिन तो पक्का छुट्टी
होने वाली थी कॉलेज से,,,,,वैसे अगर चाहते तो मुझे तो एक महीना भी रोक लेते तो कोई टेन्षन
नही थी मुझे,,,,


रात को हम लोगो ने खाना खाया ऑर कुछ देर वही चाचा जी के पास बैठ कर बातें करने
लगे,,,,मैने भी एक बात नोट की थी कि सुबह चाचा जी को बार बार वेंट्लेटर से साँस लेनी
पड़ रही थी लेकिन अभी वो आराम से साँस ले रहे थे ऑर अभी आवाज़ भी थोड़ी उँची हो गई थी
डॉक्टर सच कह रहा था उनकी हालत मे सुधार हो रहा था,,,,,,फिर रात ज़्यादा हो गई ,,केवल
तो कबका जाके सो चुका था चाची ने हम सब लोगो को भी आराम करने को बोला ताकि अब चाचा
जी भी आराम कर सके,,,,,

मामा तो बाहर आँगन मे सो गया था जबकि माँ एक साइड वाले रूम मे चली गई ऑर चाची
चाचा के रूम मे ही रहने वाली थी,,,,मैं ऑर सोनिया भी अपने रूम की तरफ चल पड़े,,,,रूम
मे जाते ही मैने बाथरूम मे जाके शवर लिया ओर चेंज कारके एक पिल्लो ऑर एक चद्दर
उठाई ऑर रूम से बाहर आने लगा,,,,,,


सोनिया--कहाँ जा रहे हो भाई,,,,,,,

,मैं जाते जाते दरवाजे पर रुक गया सोनिया की आवाज़ सुनके,,,,,,लेकिन
मैं वापिस नही पलटा ऑर वैसे ही उसकी बात का जवाब देने लगा,,,,,

सन्नी--मैं बाहर सोने जा रहा हूँ,,,,,,,,मुझे नही लगता कि अब हम दोनो को एक रूम मे सोना
चाहिए,,,,,,,,इतना बोलकर मैं वहाँ सेचला गया,,,,,,,,,,,मैं रूम से निकल तो गया था लेकिन
अब सोना कहाँ था ये नही पता था मैं उपर वाले फ्लोर की तरफ चला गया जहाँ एक बड़ा
हॉल था जिसमे सोफा पड़ा हुआ था मैं उसी सोफे पर लेट गया,,,वहाँ कोई एसी नही था लेकिन गाँव
मे गर्मी शहर के मुक़ाबले बहुत कम थी फिर भी छत वाले फॅन के नीचे सोने मे मुझे
दिक्कत हो रही थी क्यूकी हॉल मे विंडो क्लोज़ थी मैने विंडो इसलिए ओपन नही की थी क्यूकी
गाँव मे मच्छर बहुत थे,,,गर्मी मे तो सो सकता था लेकिन मच्छरों मे तो बिल्कुल भी नही,,,
काफ़ी देर तक लेटा रहा लेकिन नींद नही आई,,,मोबाइल निकाला ऑर मोबाइल पर गेम खेलने लगा
टाइम देखा तो रात के 1 बजे थे,,,,

मैं गेम खेल रहा था तभी मुझे सीडियों की तरफ से एक साया मेरी तरफ आता नज़र आया ऑर
वो साया मेरे पास आ गया,,वो सोनिया थी,,,,,,,

सोनिया--भाई तुम उपर क्यूँ आ गये,,,,,,,उसने बड़ी उदासी से पूछा,,,,

सन्नी-कुछ नही बस ऐसे ही ,,,मेरा दिल नही किया नीचे सोने को,,,,,मैने बड़े रूखे ओर रूड अंदाज़
मे उसको जवाब दिया,,,,,,,,,,

सोनिया--भाई मुझे अकेले नींद नही आ रही,,,जैसे आपको भी नही आ रही ,,तभी तो मोबाइल पर गेम
खेल रहे हो,,,,,,,उसने फिर से उदासी से बोला,,,,,,,,

सन्नी--नींद बस आने ही वाली थी कि तुम आ गई,,,,अब जाओ नीचे मुझे सोने दो ,,मैने फिर से रूड
तरीके से बोला उसको,,,,,

सोनिया--भाई मुझे नींद नही आ रही बोला ना,,,अब उसका लहज़ा थोड़ा गर्म था,,,आपको पता है ना
मैं बचपन से आपके साथ सोती हूँ ,,,,,,,,,,अकेले सोना मुश्किल है मेरे लिए,,,

सन्नी--जानता हूँ लेकिन नीचे रूम मे एक ही बेड है जबकि अपने रूम मे 2 बेड है तुम्हारा ऑर मेरा
बेड अलग अलग था,,,मुझे एक बेड पर नही सोना तेरे साथ,,,,,,,,

तभी उसने नज़रे झुका ली,,,ऑर बड़े शांत अंदाज़ मे बोली,,,,,,,,हम लोग बेड अलग कर लेते है
भाई लेकिन प्ल्ज़्ज़ तुम नीचे चलो मुझे अच्छा नही लग रहा अकेले सोना ऑर तुम्हारा ऐसे यहाँ
बिना एसी के सोना,,,देखो कितनी गर्मी है यहाँ,,,उसने अपने माथे से पसीना पोछते हुए बोला,,
भाई चलो ना नीचे,,,,मुझे नींद नही आएगी अकेले,,,,,,,,,

सन्नी--जब कविता के घर जाती है तब भी तो नींद आती है ना तुझे तो अब भी जाके चुपचाप सो जाओ
मुझे तंग मत करो,,,,,,,,,,,

सोनिया--तब कविता होती है ना साथ मे भाई,,,,इसलिए नींद आ जाती है,,,,,,,

सन्नी--ठीक है तो मेरे को तंग ना कर जाके माँ को बुला ले नही तो चाची को मुझे नही जाना
नीचे ,,,मुझे यहीं सोना है,,,,तू समझती क्यूँ नही मेरी बात को,,,,,जा यहाँ से अब गुस्सा मत
दिला मुझे,,,,,,,,

तभी उसने मेरे हाथ से मेरा मोबाइल छीन लिया ऑर मेरी चद्दर भी खींच ली,,,,,,अब सही
तरीके से नीचे चलता है ब्लककी या 2 कान पे मार कर लेके चलूं,,,,,,उसने अपने हिट्लर वाले
अंदाज़ मे बोला तो मैं थोड़ा डर गया लेकिन मैने भी हिम्मत नही हारी ऑर उसको ये भी शो
नही किया कि मैं डर गया हूँ,,,,,,,,,,

सन्नी--मुझे नही जाना कहीं तुम जाओ यहाँ से,,,,,,,,,,,,,वो मेरी चद्दर खींच रही थी ऑर मैं
भी अपनी चद्दर को अपने हाथों से उसको खींचने से रोक रहा था तभी मेरा ज़ोर कुछ
ज़्यादा लग गया चद्दर पर ऑर वो मेरे उपर गिर गई,,,,उसका आधा जिस्म मेरे जिस्म के उपर था
जबकि जिस चद्दर की वजह से ये सब हुआ वो ज़मीन पर पड़ी थी,,,उसके गिरने से उसके छोटे-2
बूब्स मेरी छाती से दब गये ऑर एक ही पल मे मेरी हालत खराब होने लगी,,उसका फेस मेरे
शोल्डर के पास था जबकि मेरा फेस उसके शोल्डर के पास था,,,मेरी साँसे उसके कान के
पास गले के करीब टकरा रही थी ऑर उसकी साँसे भी मेरी गर्दन पर टकरा रही थी मैने कुछ
अजीब महसूस किया,,,उसकी हार्टबीट तेज हो गई थी जिसकी हलचल मुझे मेरी छाती पर महसूस
हो रही थी ऑर साथ मे उसकी साँसे भी कुछ गरम हो गई थी,,,,उसकी गर्म साँसे मेरे कान मे
उतर कर मेरे पूरे जिस्म मे दौड़ रही थी ऑर मुझे पागल कर रही थी,,,ये सब कुछ ही पल
मे हो गया था लेकिन कुछ पल मे ही मेरे दिल मे एक तूफान उठने लगा था,,तभी उसने अपने
हाथ मेरी चेस्ट पर रखे ऑर खुद को उपर उठाने की कोशिश की लेकिन वो उपर नही उठ पा रही
थी तभी मेरी गान्ड फॅट गई मैने महसूस किया कि मेरे हाथ उसकी पीठ पर थे,,,ये कैसे
हुआ ,,,मेरे हाथ इसकी पीठ पर कैसे गये ,,अब तो मैं गया काम से ,,,ये नही छोड़ने वाली अब
मुझे मैं अपने हाथ उसकी पीठ से हटाना चाह रहा था लेकिन मेरे हाथों को कुछ ऑर ही
मंजूर था,,,वो उसकी पीठ से हटने की जगह उसकी पीठ के मखमली एहसास का लुफ्त लेना
चाहते थे ऑर एक ही पल मे मेरे हाथ उसकी पीठ पर प्यार से सहलाने लगे ऑर उसको मेरे उपर
से उठने के लिए रोकने लगे,,,इतनी देर मे मैने महसूस किया कि उसकी हार्ट बीट पहले से भी
ज़्यादा तेज हो गई थी ऑर उसकी साँसे भी पहले से ज्याद गर्म होने लगी थी लेकिन साथ ही उसकी
साँसे उखाड़ने भी लगी थी उसने फिर से अपने हाथों के हल्के ज़ोर को मेरी छाती पर लगा कर
उपर उठने की कोशिश की ऑर अब वो कामयाब भी हो गई थी,,,,अब उसका फेस मेरे फेस से करीब
6 इंच दूर था ,,,,वो मेरी आँखों मे देख रही थी ऑर मैं उसकी आँखों मे मेरी आँखों मे
तो वासना थी जबकि उसकी आँखों मे भी हल्की मदहोशी छाने लगी थी तभी मेरे दोनो
हाथों मे से एक हाथ जो उसकी पीठ को सहला रहे थे उनमे से एक हाथ उसके सर की तरफ़ जाने
लगा ऑर देखते ही देखते मेरे हाथ ने उसके बालों को सहलाना शुरू कर दिया ऑर इस से पहले
वो ऑर उपर उठती मेरे हाथ ने उसके सर को सहलाते हुए नीचे मेरे सर के करीब लाना शुरू
कर दिया वो हल्का ज़ोर तो लगा रही थी लेकिन मेरे ज़ोर के आगे उसका ज़ोर बेकार था तभी मैने
देखा कि उसकी आँखें बंद हो गई ऑर उसने ज़ोर लगाना भी बंद कर दिया था तब तक मेरे हाथ
ने उसके सर को सहलाते हुए मेरे करीब कर दिया था ऑर एक ही पल बाद मेरे जिस्म मे एक तेज
तूफान उठा जिस से मेरे पूरे बदन मे आग लग गई उसके सॉफ्ट लिप्स मेरे लिप्स के उपर थे ,,,


मुझे ऐसा लगा कि जैसे किसी ने मेरे लिप्स पर जलता हुआ कोयला रख दिया था लेकिन फ़र्क सिर्फ़
इतना था कि ये कोयला गुलाब की पंखुड़ी की तरफ पिंक ओर सॉफ्ट था मैने हाथ से उसके सर को
बड़े प्यार से सहलाते हुए उसके लोवर लिप्स को बड़े आराम से बिना कोई जल्दी किए अपने लिप्स मे भर
लिया तभी उसने मेरी चेस्ट को अपने हाथों की फिंगर्स से कस्के जकड लिया उसके बड़े बड़े
नाख़ून मेरी चेस्ट के मास मे धँसने लगे थे,,जैसे ही मैने उसके लोवर लिप्स को पूरा अपने
लिप्स मे भरके चूसना शुरू किया उसके हाथों की पकड़ भी मेरी चेस्ट पर कसने लगी ऑर उसकी
उंगलिया पूरे ज़ोर से अपने नाखूनो से नोच कर मेरी चेस्ट पर से माँस को अलग करने लगी
थी,,,मुझे बहुत दर्द ऑर जलन महसूस हो रही थी लेकिन ये जलन ऑर दर्द उस मस्ती के आगे
कुछ नही था जो मुझे उसके लिप्स को किस करने से मिल रही थी,,मैने उसके लोवर लिप्स को पूरा
मुँह मे भर लिया ऑर चूसने लगा ऑर तभी मेरे हाथ भी उसके सर ऑर पीठ पर सहलाने मे
लगे हुए थे,,,मस्ती मे आके उसने भी अपने मुँह को थोड़ा सा खोल दिया लेकिन ऑर कोई हरकत नही
की लेकिन मेरे लिए उसका इतनी हरकत करना ही काफ़ी था,,उसके लिप्स हल्के से खुले ही थे कि मैने
अपनी ज़ुबान को उसके मुँह मे घुसा दिया ऑर उसकी ज़ुबान को उसके मुँह के अंदर अपनी ज़ुबान से
टच करने लगा ओर फिर अपने दोनो लिप्स उसके लिप्स से जाकड़ दिए ऑर किस करके लगा लेकिन बड़े
प्यार ऑर सॉफ्ट्ली तरीके से उसके हाथ अब मेरी चेस्ट पर चलने लगे थे वो भी ज़ोर से नही बल्कि
बड़े प्यार भरे अंदाज़ से लेकिन ये प्यार भरा अंदाज़ एक ही पल मे ख़तम हो गया ,,,उसने
जल्दी से ज़ोर लगा कर खुद के लिप्स को मेरे लिप्स से आज़ाद कर लिया ऑर जल्दी से उठकर बैठ गई ऑर
मेरी तरफ देखने लगी,,,,मैं भी उसकी तरफ देख रहा था तभी उसने मेरी छाती पर कस कस
के थप्पड़ मारने शुरू कर दिए मुझे दर्द होने लगा था लेकिन दर्द का एहसास नही हो
रहा था ,,,जबकि वो थप्पड़ मार रही थी ऑर खुद दर्द से तड़प रही थी मुझे थप्पड़
मारते हुए उसकी आँखें नम होने लगी थी ,,,,थप्पड़ मारने से मुझे कोई दर्द नही हुआ लेकिन
उसकी आँखों मे आँसू देख मुझे बहुत हर्ट हुआ,,,,उसने करीब 15-20 थप्पड़ मारे मेरे
फिर उठकर अपनी आँखों से आँसू पोछते हुए तेज़ी से वहाँ से नीचे भाग गई ऑर मैं सोफे
पर लेटा-लेटा अब जो कुछ भी हुआ उसके बारे मे सोचने लगा,,,,,,,,ये क्या हो गया था एक ही पल
मे ,,,,मेरी इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि मैं हिट्लर सोनिया के साथ ऐसा कर गया ,,ऑर उसको क्या हो
गया था जो इतने गर्म ऑर तेज मिज़ाज की लड़की एक ही पल मे मेरी बाहों मे पिघल गई थी,,,,क्या
उसको अच्छा लगा ये सब,,,या उसको अच्छा नही लगा इसलिए वो भाग गई,,,मुझे डर लगने लगा था
लेकिन अच्छा भी लग रहा था ,,,अजीब सी बेचैनी होने लगी थी,,,कुछ समझ मे नही आ रहा था
क्या ये ठीक हुआ जो मैने भी किया,,,,या ग़लत हुआ,,,लेकिन एक बात ने मुझे हर्ट कर दिया था
उसकी नम आँखों ने,,,उसके मासूम चेहरे पर आँसू अच्छे नही लगते थे,,,मुझे खुद
पर गुस्सा आने लगा ,,,,इसी गुस्से ऑर बेचैनी मे मैं पूरी रात जागता रहा,,,,,,,,,
 
सुबह के करीब 4:30 बजे थे ,,,पूरी रात मुझे नींद नही आई थी डर ऑर बेचैनी से पूरी ही
रात तड़प्ता ऑर करवट लेता रहा था मैं ,,अभी सूरज तो नही निकला था लेकिन रोशनी होने लगी
थी हल्की हल्की ,,,मैं सोफे से उठा ऑर डरते डरते नीचे गया ,,दिल किया कि एक बार सोनिया से मिलू ऑर
माफी मांगू उस से लेकिन जैसे ही मैं नीचे गया तो देखा कि उसका दरवाजा अंदर से बंद था


सुबह इतनी जल्दी दरवाजे पर नॉक करना अच्छा नही लगा मुझे ,,लेकिन दिल बहुत बेचैन था तो
सोचा क्यू ना बेचैनी को दूर करने के लिए गाँव की सुबह मे ताजी हवा का लुफ्त उठाया जाए हो
सकता है बेचैनी कुछ कम हो जाए,,,,इसलिए गेट खोलकर घर से बाहर चला गया ,,गाँव की
सुबह सच मे बड़ी मस्त थी इतनी गर्मी का मोसम था लेकिन गाँव मे तो सुबह के टाइम ठंड
लगने लगी थी मुझे,,इतनी ज़्यादा सन्नाटा था लेकिन परिंदो की मीठी आवाज़ ने सब ठंड को दूर
कर दिया सहर मे सुबह का नजारा इतना अच्छा नही होता वहाँ घर से निकलो तो सुबह हो या रात
कार के हॉर्न के अलावा कुछ सुनाई नही देता था लेकिन यहाँ कार तो दूर मुझे तो कोई इंसान भी
नज़र नही आ रहा था सुबह के आलम ने कुछ बेचैनी दूर कर दी थी सोचा क्यू ना गाँव मे
थोड़ा घूम लिया जाए मन भी बहल जाएगा ऑर मॉर्निंग वॉक भी हो जाएगी यही सोच कर
गाँव मे घूमने ऑर ताजी हवा मे मन को बहलाने के लिए जिस से दिल की बेचैनी ऑर ज़्यादा कम
हो जाए इसलिए मैं घर से आगे की तरफ निकल चला लेकिन अभी थोड़ा ही दूर गया था कि दिल की
बेचैनी वापिस बढ़ने लगी थी,,,सुबह की हल्की रोशनी मे एक साया देखा जो छुपता हुआ चाचा
जी के घर के पीछे की तरफ जा रहा था मन मे उत्सुकता होने लगी देखु तो सही ये कॉन है इसलिए
दबे कदमो से मैं भी छुपता हुआ उस साए का पीछा करता हुआ उसी जगह पहुँच गया
जहाँ गाएँ भैंसे बँधी हुई थी,,,,वहाँ अंदर गया तो देखा वहाँ पर कोई नही था वो
साया भी कहीं गुम हो गया था फिर सोचा कहीं वो साया उसी रूम मे तो नही गया जहाँ
कल मैने ऑर मामा ने माँ की चुदाई की थी लेकिन वहाँ भी कोई नही था तभी मैने देखा कि
कमरे के पीछे एक छोटा रास्ता था वो रास्ता पता नही कहाँ जाता था लेकिन उत्सुकता बढ़ने लगी
थी तो मैं उसी रास्ते चल पड़ा क्यूंकी जिस किसी का भी मैं पीछा कर रहा था वो उसी रास्ते गया
गया था मैं भी निकल पड़ा उसी रास्ते ऑर रास्ता ज़्यादा लंबा भी नही था बस 25-30 कदम ही
चलना पड़ा था मुझे ऑर रास्ते पर चलके मैं मंज़िल पर भी पहुँच गया ऑर मंज़िल बड़ी
ही मस्त थी ऑर सुबह सुबह ही मेरा दिल जो अब तक बेचैनी से भरा हुआ था अब वो मस्ती मे
भर गया था मैने देखा कि वो रास्ता चारे की मशीन की तरफ जाता था जहाँ गाय ऑर
भैंसो के लिए चारा काटा जाता था ऑर वहाँ चारा काटने की मशीन के पीछे मामा खड़ा
हुआ था ऑर उसका पयज़ामा ज़मीन पर था ऑर एक औरत उसके पास ही ज़मीन पर बैठी हुई थी ऑर
मामा के लंड को चूस रही थी,,,,,,मामा चुप चाप खड़ा मस्ती मे लंड चुस्वा रहा था ऑर
वो औरत भी बड़ी मस्ती मे लंड चूसने लगी हुई थी मैं दीवार के पीछे छुप गया देखु तो
सही वो औरत थी कॉन,,,,,कुछ ही देर बाद वो औरत उठी ऑर अपनी सलवार खोलकर मामा के आगे
झुक गई ऑर मामा ने अपने लंड को पीछे से उसकी गान्ड मे घुसा दिया ,,तभी मुझे उस औरत
का चेहरा देखने को मिला इसका चेहरा तो जाना पहचाना था ये तो चाचा जी के घर की नौकरानी
थी रेखा जो चाचा जी के घर काम करती थी ,,,,उसकी शकल भी जानी पहचानी लग रही थी शायद
इसलिए कि मैने पहले भी उसको चाचा जी के घर मे देखा था लेकिन तब मैं बच्चा था जबकि
आज उसकी शकल मुझे कुछ ज़्यादा जानी पहचानी लग रही थी ,,,,वो दिखने मे ज़्यादा अच्छी नही
थी मोटी थी ऑर थोड़ी काली भी थी रंग की लेकिन जिस्म बहुत अच्छा लग रहा था उसका हाइट ऑर जिस्म
से मेरी माँ जैसा था लेकिन जहाँ मेरी माँ दूध जैसी गोरी वहीं ये थोड़े हल्के काले रंग की
मानो की साँवले रंग की थी ,,,


मामा उसकी गान्ड को बड़ी तेज़ी से चोद रहा था मैने सोचा कि मामा अभी सो कर उठा है ऑर
अभी इतनी तेज़ी से मस्त चुदाई करने लगा है साला कुछ ज़्यादा की चुड़दक़्कड़ है मेरा मामा .उन
लोगो को देख मुझे भी मस्ती चढ़ने लगी ऑर बिना किसी डर के मैं उसने सामने चला गया वो
औरत मुझे देख कर डर गयी ऑर सीधी होने लगी लेकिन मामा ने उसको वापिस झुका दिया ऑर मेरी
तरफ हसके देखा मैने मामा के हँसते ही लंड को पयज़ामे से बाहर निकाल लिया जो अभी तक
ओकात मे आ चुका था मैने लंड को हाथ मे लिया ओर मसल्ने लगा उसी औरत के सामने उस
औरत का ध्यान भी जब मेरे बड़े ऑर मोटे मूसल की तरफ गया तो उसकी आँखें फॅटी की फॅटी
रह गई मैं उसके बहुद करीब था तभी उस औरत ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे लंड को
अपने हाथ मे पकड़ लिया ऑर अपने करीब खींच लिया मैं भी मस्ती मे उसके करीब हो गया
ऑर देखते ही देखते मेरा लंड उसके मुँह मे चला गया ,,,उस औरत का अंदाज़ भी बहुत निराला
था लंड चूसने का वो भी किसी रंडी की तरह पूरा लंड मुँह मे लेने लगी थी एक ही बार मे ऑर
वो भी गले से अंदर तक पहली बार मे ही मेरा लंड उसके गले से नीचे चला गया था कुछ
ज़्यादा ही माहिर औरत थी वो उमर मे कोई 33-35 के आस पास थी ,,,,,मामा पीछे से उसकी गान्ड को
तेज़ी से चोद रहा था जबकि आगे से वो मेरे लंड को एक हाथ से पकड़ कर बाकी के लंड को
मुँह मे लेके चूसने लगी हुई थी लेकिन मैने उसके हाथ को लंड से हटा दिया ऑर उसको ऐसे ही
लंड चूसने को बोला उसने अपने दोनो हाथों को अपने घुटनो पर रख लिया ऑर खुद को झुकी
हुई हालत मे रखने के लिए सहारा लिया ऑर अपने सर को तेज़ी से मेरे लंड पर आगे पीछे करने लगी
लेकिन तभी मैने उसके सर को पकड़ा ऑर तेज़ी से अपनी कमर को हिलाते हुए लंड को उसके गले से
नीचे तक घुसा कर उसकी मुँह चुदाई करने लगा उसको मेरे ऐसा करने से कोई दिक्कत नही हो
रही थी वो तो उल्टा अपनी जीब को बाहर निकाल कर ऑर भी ज़्यादा लंड को मुँह मे लेने लगी थी
मैं भी तेज़ी से सुके मुँह को चोदने मे लगा हुआ था ऑर मामा भी तेज़ी से उसकी गान्ड चोदने
मे लगा हुआ था हल्की हल्की रोशनी होने लगी थी क्यूकी हमको करीब 20 मिनट हो गये थे



ऐसे ही यहाँ पर खड़े हुए उसने अपने हाथ को मामा की तरफ करके मामा को स्पीड तेज
करने को बोला ऑर मामा ने स्पीड तेज करदी ऑर इधर उसने अपने हाथों को मेरी कमर पर
रखा ऑर मुझे कमर से पकड़ कर तेज़ी से हिलाने लगी ऑर मेरे लंड को तेज़ी से अपने मुँह मे
लेने लगी मानो वो मुझे भी स्पीड तेज करने को बोल रही थी मैने भी उसके सर को कस्के अपने
हाथों मे पकड़ा ऑर स्पीड तेज करदी वैसे भी मैं झड़ने ही वाला था इसलिए खुद-ब-खुद ही
मेरी स्पीड तेज हो गई थी तभी मामा ने हल्की हल्की सिसकियाँ लेना शुरू कर दिया मैं समझ
गया कि मामा का होने वाला है इतने मे मैने भी तेज़ी से लंड को उसके मुँह मे पेलना शुरू
कर दिया ऑर कुछ ही पल मे मामा का तो काम हो गया ऑर मामा ने अपने पानी से उसकी गान्ड को
भर दिया शायद वो भी पानी छोड़ चुकी थी क्यूकी ज़मीन पर पानी गिरने लगा था जो स्पर्म
नही लग रहा था उसने मेरी कमर पर कस्के हाथ मारा ऑर मुझे ज़्यादा तेज करने को बोला
ऑर मैने भी लंड को तेज़ी से झटके के साथ उसके गले से टकराना शुरू कर दिया जिस से 2 मिनट
मे ही मेरा भी पानी निकल गया ऑर मैने उसके मुँह मे लंड को गले के अंदर तक घुसा कर
सारा पानी उसकी हलक से नीचे उतार दिया था तब तक मामा अपना पयज़ामा ठीक से बाँध
चुका था ऑर उसकी सलवार को भी उपर उठा चुका था उसने मेरी कमर से अपने हाथ उठा लिए
लेकिन अभी तक वो ऐसे ही मेरे लंड को मुँह मे लेके झुकी रही ऑर अपने हाथो से अपनी सलवार के
नाडे को बाँधने लगी वो मेरे लंड के पानी की एक एक बूँद के निकलने का ऑर मेरे खुद के
पीछे हटने का इंतजार कर रही थी जब लंड ने सारा पानी उसके गले से नीचे उतार दिया तो मैने
लंड को थोड़ा पीछे किया तब तक वो सलवार बाँध चुकी थी ऑर उसने मेरे लंड को हाथ मे
पकड़ा ऑर जितना भी पानी लंड पर लगा था उसको अच्छी तरह चाट कर सॉफ कर दिया ऑर फिर खड़ी
होके मुझे एक किस करी माथे पर ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,आज तो रोशनी हो गई ऑर टाइम कम है किसी ऑर टाइम
तेरे को अच्छी तरह निचोड़ूँगी मैं याद रखना ,,,,उसने हसके मुझे इतना बोला ऑर वहाँ से
चली गई मामा भी उसके पीछे चला गया,,,,


मैं तो हैरान हो गया कि मेरा मामा कहीं भी चक्कर चला लेता है साला ,,,,चाचा के घर
काम करने वाली को भी नही छोड़ा,,,,,तो मैं भी कॉनसा कम हूँ मैने भी तो मस्ती करी
है अभी उसके साथ लेकिन सिर्फ़ मुँह चुदाई की है चूत ऑर गान्ड चुदाई नही की,,,,कोई बात नही
अभी कुछ दिन तो हूँ यहाँ पर इसको भी पूरी तरह चखके जाउन्गा यहाँ से वैसे भी साली
खुद बोलके गई है कि मुझे टाइम मिलने पर निचोड़ेगी अब देखते है टाइम मिलने पर कॉन
किसको निचोड़ता है,,,,,,,,,,,,,,,

मैं भी वहाँ से घर जाने की बजाए वही से खेतो के बीच मे होता हुआ आगे चला गया अब
तक बेचैनी तो कबकि दूर हो गई थी ऑर सुबह सुबह हल्का होके बड़ा अच्छा लग रहा था बड़ा
मज़ा आया इतनी सुबह सुबह उसको लंड चुस्वा कर,,,मैं खुशी खुशी गाँव मे इधर उधर
घूमने लगा ऑर मस्ती करने लगा जब वापिस घर पहुँचा तो सब लोग आँगन मे बैठे
हुए थे टाइम कोई 9 के आस पास हो चुका था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,