Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही - Page 15 - SexBaba
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Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही

सुबह उठा ऑर नाश्ता करके कॉलेज की तरफ चल पड़ा तभी रास्ते मे सोनिया का फोन आ गया,,,,,

सोनिया-हेलो सन्नी मुझे भी अपने साथ कॉलेज लेके जाना आज कविता को कॉलेज नही जाना है,,,,,,,,,,,,,,,
मैं भी सीधा कविता के घर के बाहर पहुँचा गया,,,,,,,,,,,,वहाँ सोनिया पहले से बाहर खड़ी हुई थी कविता भी उसके साथ थी बट कविता कुछ उदास लग रही थी ऑर ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत ज़्यादा रोई हुई थी,,,,,,,,

मैं-हाई कविता ,,,,,,उसने भी मुझे उदासी भरी आवाज़ मे हल्के से हाई बोला ऑर अंदर चली गई सोनिया मेरे साथ आके बैठ गई लेकिन सोनिया ने मुझे नही पकड़ा बल्कि बाइक की सीट को पकड़ कर बैठ गई,,,,,,,,,,,मैं सोनिया से कविता के बारे मे बात करना चाहता था जैसे ही मैने कुछ बोलने के लिए मुँह खोला तो मेरे से पहले सोनिया बोल पड़ी,,,,,,,,,,,

सोनिया-सन्नी मुझे आज कॉलेज नही जाना तू प्लज़्ज़्ज़ कहीं ऑर ले चल मुझे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-क्या हुआ सोनिया ,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सोनिया-;कुछ नही सन्नी बस मूड थोड़ा ठीक नही है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं;-कविता के घर मे कोई प्राब्लम है क्या ,,,,,,

सोनिया-; हाँ सन्नी तभी तो मैं कल से वहाँ थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-; क्या प्राब्लम है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सोनिया-;वो तेरा जानना ज़रूरी नही है,,,,,,,सोनिया गुस्से मे बोली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं चुप हो गया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सोनिया-; सॉरी सन्नी मेरा वो मतलब नही था मैं जस्ट कविता की वजह से बहुत परेशान हूँ तभी तो तेरे पर गुस्सा
हो गई तू प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ मुझे कहीं ऐसी जगह ले चल जहाँ मेरा मन थोड़ा बहल जाए,,,लेकिन मुझे माल
या मूवी नही देखने जाना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-; इट्स ओके सोनिया,,,जनता हूँ तुम कविता की वजह से टेन्षन मे हो तुम
आराम से बैठो मैं तुमको माल या मूवी के लिए नही बल्कि पार्क मे लेके चलता हूँ जहाँ तुम्हारा मन
बहल जाएगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,मैं सोनिया को पार्क मे ले गया,,,,,,,,,,वहाँ बहुत सकून था सुबह का टाइम था
तो ज़्यादा रश नही था क्यूकी ज़्यादातर रश शाम के टाइम होता था,,,लेकिन अभी भी कुछ लवर्स थे यहाँ
पर जो हाथों मे हाथ डालके घूम रहे थे,,,,,,,,,,,,,,,मैं ऑर सोनिया पार्क मे 2 टेबल्स पर जाके बैठ गये
जो एक कॉर्नर पे अलग थलग जगह पर पड़े हुए थे,,,,,,,,,,,,,,,,,सोनिया कुछ उदास थी,,,,,,,,मैने उसका मन
बहलाने की कोशिश करते हुए उसको जोक्स सुनाने शुरू किए ,,मैं अक्सर उसको हँसाने के लिए उसको जोक्स सुनाता
था जिस से उसको बहुत खुशी होती थी,,,,,,ऑर अब भी जोक्स का असर होने लगा था ऑर वो हँसने लगी थी,,वो इतना
ज़ोर से हँसने लगी थी मेरे जोक्स पर कि आस पास के लोग जो आस पास नही थे कुछ दूर थे उनको भी सोनिया की
हँसी सुनाई देने लगी थी,,,,,,,,,,,,,,सोनाई ने देखा कि लोग उसके ऐसे पागलों की तरह हँसते देख रहे थे तो वो चुप
हो गई ऑर शरमाने लगी उसका एक दम से शरमाना मुझे बहुत अच्छा लगा ऑर मैं एक टक उसको देखने लगा,,,उसने
मुझे ऐसे उसकी तरफ घूरते देखा तो उसकी नज़रे झुक गई ऑर उसका शरमाना ऑर भी हसीन हो गया,,,इतनी बात
तो थी कि अब वो कविता के घर की टेन्षन को भूल चुकी थी ऑर खुश थी,,,,,,,,,,,,,,


सोनिया-भाई ऐसे मत देखो मुझे अच्छा नही लगता,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं फिर भी उसको देखता जा रहा था,,,,,,,,,,,,,,,

सोनिया-;भाई ऐसे मत देखो ना,,,,,वरना मुझे गुस्सा आ जाएगा,,,,,,,,,,,,,,,,मैं फिर भी उसको देखता जा रहा था,,
तभी वो उठी ओर मेरे पास आ गई ओर मेरे साथ मेरे टेबल पर बैठ गई ओर आते ही उसने मुझे एक थप्पड़
मारा लेकिन ज़्यादा ज़ोर से नही मैं डर गया था कहीं इसको गुस्सा तो नही आ गया था ,,,,मैं हैरान भी हो गया
था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,तभी वो बोलने लगी,,,,,,,,,,

सोनिया-;भाई ऐसा क्यू होता है जब भी मैं उदास होती हूँ तो आपके साथ रहने से मेरी उदासी दूर हो जाती है,,,,कल से
मैं कविता क घर पर हूँ ऑर एक बार भी मेरे फेस पर हल्की सी स्माइल नही आई ऑर आपके साथ होते ही मैं इतना
ज़्यादा खुश होने लगी हूँ इतना ज़्यादा हँसने लगी हूँ कि लोग भी मुझे पागल समझ रहे है,,,,ऐसा क्यू है भाई,,,,,,,,,,,

मैं-क्यूकी मैं तेरा भाई हूँ,,,भाई कम ऑर दोस्त ज़्यादा,,,जो तेरी हर बात को समझता है,,ऑर तेरे इस मासूम
चेहरे पर उदासी नही देख सकता ऑर तुझे खुश करने क लिए कुछ भी कर सकता है,,,,,,,,

सोनिया-इतने ही अच्छे भाई हो ऑर इतनी फिकर करने वाले दोस्त हो तो घटिया हरकते करके ऐसे रिश्ते को खराब क्यूँ करते हो भाई,,,,,,,,,,,,क्यूँ ऐसे अजीब नज़रो से देखते हो मुझे कि मुझे ही अपने आप पर शरम आने लग जाती है,,
क्यू करते ही ऐसा भाई,,,,,क्यू अपनी बेहन को ,,अपनी एक ऐसी दोस्त को जिसकी तुम बहुत ज़्यादा फ़िक्र करते हो कि उसको हर्ट करने वाले इंसान को भी जान से मारने की कोशिश करते हो,,,,,,,,,उस दिन उन लोगो को इतनी बुरी तरह से
मारा तुम ने जिन्होने ने मेरा हाथ पकड़ा था ,,,ऑर एक तरफ रात को खुद ऐसी हरकत,,,,,,,,,,,,,कहते हुए ही सोनिया चुप हो गई,,,,,,,,,,,

मैं-;तेरे को कोई हाथ लगाएगा तो मैं उसकी जान ले लूँगा सोनिया,,,मैं तुझे बहुत लाइक करता हूँ जानता हूँ मैं
तेरा भाई हूँ ऑर जो हरकते मैं करता हूँ वो ग़लत है लेकिन क्या करूँ तुझे देखता हूँ तो मेरे होश गुम
हो जाते है ,,,,तू इतनी अच्छी लगती है कि मैं ये भी भूल जाता हूँ कि तू मेरी बेहन है,,पता नही क्या हो जाता
है मुझे,,,,,,,,,इतना बोल कर मैने हिम्मत की ऑर सोनाई के हाथ पर हाथ रख दिया जो उसकी टाँगो पर पड़ा
हुआ था,,,,,,,,

सोनिया ने जल्दी से अपने हाथ को हटा लिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सोनिया-;भाई ऐसा नही करो प्लज़्ज़्ज़ हम भाई बेहन है,, ऐसा करना ग़लत है,,ऐसा करके तुम क्यूँ भाई बेहन के रिश्ते को खराब कर रहे हो,,,,तुमको शरम क्यू नही आती भाई मेरे साथ ऐसा करते हुए,,,,,,,,कुछ तो सोचो अपने इस रिश्ते के बारे मे,,,,,,,,,,

मैं-;मुझे कुछ नही सोचना ऑर ना कुछ समझना है,,,,,जब भी तेरे करीब आता हूँ खुद बा खुद तेरी तरफ
खिंचा चला आता हूँ,,,,दिल ऑर दिमाग़ काम करना बंद कर देते है,,,जानता हूँ ये ग़लत है लेकिन फिर
भी ना जाने क्यूँ मुझे ये सब ग़लत नही लगता जब भी तुम मेरे करीब होती हो,,ना जाने क्यू,,,,,,,,,,

सोनिया-;भाई ये ग़लत है,,,,तुम खुद पर क़ाबू करो,,,,दुनिया क्या कहेगी अगर किसी को पता चलेगा,,,,,,,,,,

मैं-;किसको पता चलेगा,,,,,,,,,ऑर दुनिया की टेन्षन मत लो तुम,,,दुनिया मे पता नही कितने भाई बेहन ऐसे है
जो ये सब करते है,,,,,,,,,,कयि भाई बेहन तो शादी करके पति पत्नी की तरह रहते है,,,,,,,,,,

सोनिया-;तुमको कैसे पता,,,,,,,

मैने बहुत सारी स्टोरी रीड की है राजशर्मास्टॉरीज पर,,,,,,,,,,,

सोनिया-;ये राजशर्मास्टॉरीज क्या है भाई,,,,,,,,,

मैं-;ये एक सोशियल साइट है,,जहाँ बहुत सारी स्टॉरीज पड़ी हुई है,,,,,,,इन्सेस्ट स्टोरीस,,,जिसमे भाई बेहन को,,,,,बेटा
माँ को,,,,,,,बाप बेटी को ऑर पता नही कॉन कॉन किस किस के साथ ये सब करता है,,,,,,,,,

सोनिया-;भाई वो स्टोरी झूठ होती है,,,भला कॉन भाई अपनी बेहन को ऑर कॉन मा अपने बेटे से ऐसी गंदी हरकत कर
सकती है,,,,,मुझे तो सोच कर भी गुस्सा आ रहा है,,,,,,,,,,

मैं-;तेरे को गुस्सा आने से क्या होगा,,,,,,जो सच है सो है,,,,,,,,,,,,,,,,,वहाँ आने वाले हर राइटर मे से हर कोई
झूँठा नही होता,,,,,,,,,,,,कुछ सच्चे भी होते है जो अपनी रियल लाइफ स्टोरी लोगो के साथ शेयर करते है,,लेकिन वो
लोग अपनी पहचान छुपा लेते है,,,,,,,,,,ऑर तुमको क्या पता हो सकता है अपने पड़ोसी ही ऐसे हो जो घर मे ही
ऐसी हरकते करते हो,,,,,,,,,,,,,

सोनिया-;भाई ये लिखी पढ़ी बातों पर यकीन नही करो तुम,,,,,,,,,

तभी मुझे पता नही क्या हुआ,,,,,मैं एक दम से बोल पड़ा,,शायद मे जोश मे था ऑर सोनिया को किसी भी तरह
से मनाना चाहता था,,,,,,,,,,,,,स्टोरी पर नही लेकिन मेरी आँखों देखी पर तो यकीन कर सकती हो,,,,,,,,,

सोनिया हैरत भरी नज़रो से मुझे देखने लगी,,,,,,क्या बोल रहे हो तुम भाई,,,,,,

मैं कुछ पल खामोश रहा,,,,,,साला ये क्या बोल गया सोनिया को,,,,,अब क्या बोलूं इसको मैने किसको देखा है,,,
इसको फसाने के चक्कर मे किसकी चुदाई का भंडा फोड़ दूँ मैं,,,,,,,,अपना ऑर शोभा का बता दूँ,,
नही नही,,,,,तो फिर माँ ऑर मामा का,,,,,,,,,,,,,,,,नही वो भी नही,,,,,,,,,,तो क्या इसको डॅड ऑर बुआ के बारे मे
बता दूँ,,,,,,,,,,,क्या करूँ यार कुछ समझ नही आ रहा,,,,घर वालो की सारी पूल खोल दी तो पता नही ये
घर जाके क्या करेगी,,,,,,कहीं घर मे झगड़ा शुरू कर दिया तो,,,,,,,,

सोनिया-;बोलो सन्नी चुप क्यूँ हो गये,,,,,,,,,तुमने किस भाई बेहन को ऐसी घटिया हरकत करते देखा है,,,,मुझे भी
पता चले कॉन है ऐसे घटिया भाई बेहन जो ऐसी नीच हरकत कर सकते है,,,,,

मेरे को साँप ही सूंघ गया था,,,वो बोल ही इतने गुस्से मे रही थी,,जैसे अभी मैं इसको बता दूँगा तो ये
जाके उनको गोली मार देगी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-है कोई ऐसे भाई बेहन जो एक दूसरे के साथ मस्ती करते है,,,,,,,

सोनिया-;छ्ह्हि सन्नी,,,,ऐसी घटिया हरकत को मस्ती का नाम मत दो,,,मुझे तो सोच कर भी गुस्सा आने लगा है कि
भाई बेहन ऐसा कैसे कर सकते है,,,,,

मैं-सोनिया ये सब ग़लत है मैं जानता हूँ,,,,लेकिन मैने अपनी आँखों से देखा है,,,पहले मेरे लिए भी यकीन
करना मुश्किल था ,,,लेकिन जब उनकी बातें सुनी तो यकीन हुआ ,,,,,,भाई अपनी बेहन को खुश कर रहा था
ताकि उसकी बेहन कहीं बाहर जाके ऐसा वैसा कुछ ना करे,,,

सोनिया-;बाहर जाके मतलब,उसकी बेहन बाहर किसी के साथ ऐसी गंदी हरकत करती थी क्या,,,,,,,,,

मैं-;नही सोनिया की तो नही थी लेकिन उसको डर था ,,क्यूकी सोनिया जब लड़का ऑर लड़की जवान हो जाते है तो उनको अपने पर क़ाबू पाना मुश्किल हो जाता है ऑर अक्सर वो जवानी मे कोई ना कोई भूल कर जाते है जिस से ना सिर्फ़ उनकी बल्कि उनके परिवार की भी बदनामी हो जाती है,,,,,लेकिन अगर वो लोग घर मे ही ऐसी हरकत करते है वो भी बंद
कमरो मे तो बाकी दुनिया तो दूर की बात उनके पड़ोसियों तक को ऑर तो ऑर उनके साथ वाले रूम मे सोने वाले
बाकी लोगो को भी कानों कान खबर नही होती,,,,,,,,,,वो लोग अपनी मस्ती भी कर लेते है ओर अपनी चढ़ती जवानी
के जोश को क़ाबू करने का तरीका भी मिल जाता है ऑर साथ-2 बदनामी का डर भी नही रहता,,,,,,,,

सोनिया चुप चाप मेरी बातों को सुन रही थी,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;क्या हुआ सोनिया किस सोच मे पड़ गई,,,,,,,,,,,

सोनिया-;कुछ नही सोच रही हूँ क्या ये सच है,,,,ऑर क्या कोई बेहन भाई ऐसी हरकत ,,,,,,छि मुझे तो सोचना भी
अजीब लग रहा है,,,,,,

मैं-लेकिन सोनिया ये,,,,,,मैने बोलना शुरू ही किया था कि सोनिया ने मुझे चुप करवा दिया,,,,,,,,अब इस टॉपिक पर कोई
बात नही करना तुम,,,वर्ना मैं थप्पड़ लगा दूँगी तेरे ब्लककी,,,,वो गुस्से मे थी इसलिए मैं चुप हो गया

सोनिया-;तेरे को ऐसे घटिया टॉपिक के लिए चुप रहने को बोला है बाकी बातें तो कर सकता है,,,,,,,,,,,

मैंफिर भी चुप रहा,,,,,,,,,,,,,,,,,

सोनिया-;चल फिर उठ घर चलते है अगर तूने इस घटिया टोपीक के अलावा कोई बात नही करनी तो,,,,,,,,,,,,

मैं चुप चाप उठ गया,,,मुझे इस सोनिया पर गुसा आ रहा था साली ने कलपद कर दिया
मेरे साथ ,,,मैं सोच रहा था ये मेरी बातों मे आके बोतल मे उतर जाएगी लेकिन इसने तो सॉफ सॉफ मना
कर दिया कि इस टॉपिक पर बात ही नही करनी लेकिन एक बात अच्छी हुई थी थोड़ी बहुत ही सही लेकिन सोनिया ने मेरी बात चुप रहके सुनी तो थी,,,अब सब कुछ सुन कर उसकी ज़ुबान पर तो गुस्सा था लेकिन दिल मे क्या था ये नही पता
चल रहा था पता करने का एक ही तरीका था कि इसको फिर से उसी टॉपिक पर बात करने के लिए शुरू किया जाए
पर अब मेरी हिम्मत नही हो रही थीउसी टॉपिक पर बात करने की साली ने थप्पड़ की धमकी जो दी थी ऑर अगर
मैं कुछ बोलता उस बारे मे तो ये इसी पार्क मे सबके सामने मेरे को थप्पड़ रसीद कर देती साली का गुस्सा ही
इतना ज़्यादा था,,,,,,मैं चुप चाप सोचते हुए बाइक की तरफ चलने लगा,,,,,मैने बिके स्टार्ट की ऑर सोनिया मेरे
साथ बैठ गई अबकी बार उसने फिर से मुझे नही पकड़ा था बाइक की सीट को ही पकड़ा था,,,,,मैं भी बाइक
चला कर घर की तरफ बढ़ने लगा,,,,,,,,,,,,,,,,,


अभी मैं घर के गाते पर ही पहुँचा था कि तभी मुझे करण का फोन आ गया,,,,,,उसने मुझे थॅंक्स बोला
कि मैने उसकी शिखा दीदी को समझा दिया है ओर वो अमित से नफ़रत करने लगी है,,,करण बहुत खुश था इस बात
पर ऑर मुझे बार बार थॅंक्स बोल रहा था,,,,,,,,,मैने फोन बंद किया तब तक सोनिया गेट से होते हुए मैन
दरवाजे तक पहुँच गई थी,,,उसने बेल बजाई बट 2 मिनिट तक कोई नही आया,,,,,,,,मुझे पता था माँ ऑर
मामा जी लगे होंगे अंदर अपने खेल मे,,,,,,,,,,सोनिया ने गुस्से मे हाथ को बेल पर रखा ऑर तब तक बजाती रही
जब तक माँ अंदर से दरवाजा खोलने नही आ गई,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सोनिया-;क्या माँ कितनी देर से बेल बजा रही हूँ आप खोलती क्यू नही,,कहाँ बिज़ी रहती हो इतनी देर,,,,,,,,,,,,,,

माँ ने मेरी तरफ़ देखा ऑर बोली,,बेटा मैं ज़रा सा किचन मे बिज़ी थी,,,,,,,,,,,

सोनिया-;मामा कहाँ है माँ वो नही खोल सकते क्या दरवाजा जब देखो घर पे वहले
इधर उधर घूमते रहते हैं,,उसको बोला करो दरवाजा खोलने को,,इस से पहले माँ कुछ बोलती सोनिया गुस्से से
घर के अंदर चली गई,,,,

माँ अभी भी दरवाजे पर खड़ी हुई थी,,,,,,,,,,,,,मैं दरवाजे के पास गया तभी माँ बोली,,,,,,,,,,,,,,बेटा तू मुझे फोन नही कर सकता था क्या कि सोनिया को घर लेके जल्दी आ रहा है तो मैं ऑर मामा जल्दी से काम ख़तम कर लेते,,,,,,,,,,,,,

मैं-;क्या करता माँ सोनिया के होते फोन कैसे करता,,,सॉरी माँ

माँ-;चल कोई बात नही अब अंदर चलो,,,,,तब तक सोनिया उपर जा चुकी थी सोनिया क जाते ही मैने मामा को
माँ के रूम से बाहर आते देखा,,,,,,,,,,,,,,मामा चुप चाप जाके सोफे पर बैठ गया ऑर माँ अपने रूम मे
चली गई,,मैं भी अपने रूम मे चला गया,,सोनिया बाथरूम मे थी ऑर मैं अपने बॅग से लप्पी निकालकर
अपने बेड पर लेट गया ऑर टाइम पास करने के लिए गेम खेलने लगा,,,कुछ देर बाद सोनिया बाथरूम से निकली
ऑर चुप चाप बेड पर बैठ गई,,,,,हम लोग ऐसे ही काफ़ी देर बैठे रहे ना उसने कोई बात की ऑर ना मैने,,,,


काफ़ी टाइम बाद जब मैं लप्पी से फ्री हुआ तो देखा वो सो चुकी थी मैने भी लप्पी साइड मे रखा ऑर नीचे
चला गया,,,,,,,,,,,,मामा अभी भी सोफे पर बैठा हुआ था जबकि माँ अपने रूम मे थी शायद क्यूकी मैं
किचन मे पानी लेने गया तो माँ वहाँ नही थी ,,,,,,मैं भी मामा के पास जाके बैठ गया,,,,,,मामा मेरा
आलसी बंदा था बात भी कम ही करता था,,जितना मतलब हो या ज़रूरी हो उतना ही बोलता था,,,,,मैं भी चुप
चाप टीवी देखने लगा,,,,,,,,,,,,मैं बोर होने लगा था तो सोचा क्यूँ ना कह बाहर चला जाए,,,मैने
बाइक ली ऑर घर से चला गया,,,क्यूकी घर पर रहके बोर ही होना था,,,सोनिया घर पर थी तो माँ के साथ
चुदाई करना भी मुश्किल था लेकिन दिल तो बहुत था चुदाई करने को तो मैं बुआ के बुटीक पर चला गया,,
बुटीक खुला हुआ था ,,मैं सीधा अंदर चला गया,,,,,,,,बुआ सामने बैठी हुई थी ऑर साथ ही पूजा भी
थी लेकिन मनीषा नज़र नही आ रही थी,,,,शोबा दीदी तो आती ही शाम को थी कॉलेज से,,,,,,,,,

बुआ-;अरे तुम आज कॉलेज नही गये सन्नी,,,बुआ ने बोला,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;नही बुआ आज दिल नही किया सोचा बुआ के पास चलता हूँ थोड़ा टाइम पास हो जाएगा,ऑर मस्ती भी हो जाएगी,,,,,मेरी बात सुनके पूजा हंस कर मेरी तरफ देखने लगी,,,लेकिन बुआ मेरे वहाँ आने से खुश नही लग रही थी,,,,,,,,,,

मैं-,बुआ आज मनीषा कहाँ है नज़र नही आ रही,,,,,,,,,,,,,

बड़ा याद कर रहे हो मनीषा को सन्नी सर,,,,,पूजा ने मज़ाक मे हँसते हुए बोला,,,,,,

तभी बुआ ने उसकी तरफ़ देखा ऑर वो चुप चाप काम करने लगी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बुआ-;बेटा उसकी तबीयत ठीक नही है वो उपर आराम कर रही है ,,,,,,,,,,

मैं-क्या हुआ उसको बुआ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बुआ-;बोला ना बेटा उसकी तबीयत ठीक नही है,,,

मैं-;बुआ क्या मैं एक बार उसको मिल सकता हूँ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बुआ-;नही बेटा वो आराम कर रही है तुम अभी जाओ शाम मे आके मिल लेना ऑर तुमको जिस काम के लिए मिलना है मैं सब जानती हूँ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-जानती हो तो मिलने दो ना एक बार बुआ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बुआ-;नही सन्नी ऐसे ज़िद्द मत करो मैने बोला ना अभी तुम जाओ शाम मे आके मिल लेना तब तक आराम करने से तबीयत शायद ठीक हो जाए,,,,,,,,,,,,,,,,,बुआ हल्की सी डरी हुई थी ऑर उसके बोलने के अंदाज से लग रहा था जैसे वो गुस्से मे मुझे ऑर्डर दे रही थी,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;,ठीक है बुआ तो पूजा से बात करने दो थोड़ी देर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बुआ-;हाँ पूजा से बात कर सकते हो तुम सन्नी,,,,,जाओ बैठो ऑर आराम से बात कर्लो पूजा के साथ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;यहाँ नही बुआ उपर जाके आराम से,,,,,,,,

बुआ-;,नही सन्नी यही बात करो जो करनी है उपर नही जाना अभी पूजा को ,,,बहुत काम है आज पूजा के
पास,अभी भी बुआ मुझे ऑर्डर ही दे रही थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;ठीक है बुआ आप लोग काम करो मैं चलता हूँ शाम को आता हूँ जब आप लोग फ्री हो जाओ,,,,,,,,,मैं वहाँ से जाने लगा,,,,,,,,,
 
बुआ का बात करने का अंदाज़ कुछ ठीक नही लग रहा था वो गुस्से मे मुझे ऑर्डर दे रही थी,,,कुछ घबराई
हुई भी लग रही थी,,,मैने ज़्यादा बात नही की ऑर वहाँ से चलने लगा जैसे ही मैने डोर ओपन की तभी मुझे
सीडियों से किसी के उतरने की आवाज़ आई मैने पीछे मूड कर देखा तो मनीषा नीचे आ रही थी ,,,,,,,इस से पहले
वो कुछ बोलती या कोई भी कुछ कहता मैने जल्दी से पीछे जाके उसको पूछ लिया,,,

मैं-तुम्हारी तबीयत कैसी है अब मनीषा,,,,,,,,

मनीषा ने कोई जवाब नही दिया बस मुझे देखने लगी ऑर तभी उसका ध्यान बुआ की तरफ गया,,वो बुआ की तरफ़
देख कर घबरा सी गई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मनीषा-;मैं ठीक हूँ अब सन्नी,,,,

लेकिन उसकी आवाज़ से ऐसा लग रहा था कि वो ये सब खुद नही बोल रही थी,,,क्यूकी बोलते टाइम वो कुछ ऐसे बोल रही थी जैसे कोई ज़बरदस्ती उस से बुलवा रहा था,

मैने भी जल्दी से पीछे मूड कर देखा तो बुआ उसको इशारा कर रही थी,,,मेरे देखते ही बुआ ने अपना फेस दूसरी
तरफ टर्न कर लिया ,,मैं समझ गया कि बुआ ने ही मनीषा को इशारा किया था,,,,,,तभी मुझे उपर वाले डोर
के खुलने ऑर बंद होने की आवाज़ आई,,,,,,,,,,,,,,,,,मैं समझ गया कि उपर कोई था मनीषा के साथ लेकिन मेरे
कुछ बोलने से पहले ही बुआ बोल पड़ी थी क्यूकी उस आवाज़ को बुआ ने भी सुना था ऑर बुआ को ये भी पता चल गया
था कि मैने भी वो आवाज़ सुनी है क्यूकी आवाज़ सुनते ही मैने बुआ की तरफ सवालिया नज़रो से जो देखा था,,,,,,,,

बुआ-;लगता है उपर कोई बिल्ली है,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;हाँ बुआ जी मुझे भी ऐसा ही लगता है,,,,,,,,,,
मैने फिर सबको बाइ बोला ऑर वहाँ से डोर खोलके बाहर चला गया,,,,,,,,,मैने जल्दी से बाइक स्टार्ट किया ऑर बुआ के सामने वहाँ से चल पड़ा लेकिन मैने बुआ के बुटीक से थोड़ा आगे जाके बाइक को साथ वाली गली मे टर्न कर लिया जो बुआ के बुटीक के पिछले गेट की तरफ जाती थी,,,,,,वो गली बिल्कुल सुनसान थी बस 2-3 ही घर थे वहाँ बाकी कुछ नही
था,,,सामने की तरफ मार्केट थी तो सभी लोग पीछे की गली मे ही अपने बाइक ऑर कार पार्क करते थे,,तभी मैने
देखा कि एक खाली प्लॉट मे से एक कार निकली ऑर तेज़ी से वहाँ से जाने लगी,,,,,,,,,,,ये कार डॅड की थी,,,,,मैं समझ
गया कि मनीषा के साथ उपर डॅड ही थे तभी बुआ डरी हुई थी ऑर मुझे उपर नही जाने दे रही थी,,,साला मेरा
बाप मेरे माल पर नज़र रखता था,,,या कहीं ऐसा तो नही मैं ही अपने बाप के माल को चोदने की फिराक
मे था,,,,,,,,,,जो भी था एक बात तो परेशान करने वाली थी,,,,,,,,,,,डॅड बुआ मनीषा ऑर पूजा को चोद रहे है
कहीं वो शोबा दीदी को भी ,,,,,,,,,,,,,नही नही ऐसा नही हो सकता,,,,,लेकिन शोबा दीदी भी तो ज़्यादा टाइम बुआ के
साथ ही होती थी तो ऐसा होना मुनासिब था,,,,वैसे भी घर मे माँ मामा ऑर भाई से चुद रही थी तो यहाँ
डॅड भी बुआ ऑर शोबा को चोदते होंगे,,,,,क्यूकी अक्सर देखा था कि जब भी माँ मामा के साथ भाई के पास
जाती थी गाओं जाने का बहाना करके तो बुआ ऑर दीदी भी बुटीक नही जाती थी ऑर उनके साथ-साथ डॅड भी कई बार
बॅंक से छुट्टी लेके घर पर रहते थे,,,,,लेकिन मैने आज तक डॅड ऑर शोबा दीदी को एक साथ नही देखा था,,,,
तो क्या अभी तक डॅड ने शोबा दीदी की चुदाई की थी या नही,,,,,,,ये बात मुझे परेशान कर रही थी ऑर थोड़ा बहुत
रोमांचित भी,,क्यूकी अगर डॅड दीदी की चुदाई करते थे तो मुझे उनको देखना था चुदाई करते,,,एक बाप
को बेटी से चुद्ते देखने की तमन्ना से ही मैं खुश होने लगा था,,,अगर डॅड सच मे दीदी की चुदाई करते
है तो काश एक बार मुझे उनकी चुदाई देखने का मोका मिल जाए,,,,वैसे भी मैने डॅड को किसी की भी चुदाई
करते नही देखा था,,क्यूकी वो अक्सर सभी खिड़की दरवाजे बंद कर लेते थे,,,,,,,,,,मुझे अब किसी भी तरह
ये पता लगाना था कि डॅड दीदी की चुदाई करते है या नही,,,,,मुझे शक तो था उनपे लेकिन पक्का यकीन नही
था,,ऑर मैं उनको एक साथ देखकर शक को यकीन मे तब्दील करना चाहता था,,,,,,,,,खैर मैं वहाँ से
निकल कर वापिस घर की तरफ आने लगा,,,,,,अभी मैने घर से कुछ ही दूर था कि मुझे सामने से आता हुआ बाइक
नज़र आया जो मेरे पास आके रुक गया,,

अबे कहाँ गुम रहता है तू सन्नी भाई,,,,,,,,वो करण था,,,,,

मैं-कुछ नही यार बोर हो रहा था तो थोड़ा घूमने चला गया था,,,,,,,,मैने जवाब दिया,,,

करण-अकेले अकेले गया था या किसी के साथ,,,,,,अहाहाहहहाः

मैं-;क्या यार तू भी हर टाइम एक ही बात सोचता रहता है,,,,,,,,अरे मेरे बाप अकेला ही गया था बोर हो रहा था
घर पे तो सोचा कहीं घूम फिर के आता हूँ ,,,,,

करण-;सनी भाई तू हमेशा मेरे घर का बहाना करके कहीं ओर रात रंगीन करता है तो मैने सोचा कि कहीं अभी
भी तुम कहीं घूम फिर कर किसी के साथ शाम रंगीन तो नही कर रहे ,,,,,,,,

मैं-;छोड़ ना करण भाई,,,जब देखो एक ही बात,,,,,,,,कोई ऑर बात भी कर लिया करो,,,,,,,,,

करण-;सॉरी सन्नी भाई,,,अब क्या करू यार तेरा नसीब ही इतना अच्छा है कि रात भर किसी ना किसी के बेड पे लेटा
रहता है लेकिन एक हम है जिसको अकेले ही बेड पर इधर उधर अपना सर पटकना पड़ता है ,,,,कभी हमारे बारे
मे भी सोच लिया करो,,,कभी तो हमारी रात भी रंगीन करदो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ऑर हां मैं तो तेरे को मिलकर
थॅंक्स बोलने आया था कि तूने दीदी को अमित से दूर कर दिया ,दीदी बोल रही थी कि तूने बड़े प्यार से उनको सब कुछ
समझा दिया अब वो कभी अमित की शकल भी नही देखना चाहती,,मुझे बड़ी खुशी है कि तूने मेरी दीदी को उस
हरामी अमित से बचा लिया,,,,तेरा जितना थॅंक्स करू कम है मेरे भाई.........

मैं-;अबे साले भाई भी बोलता है ऑर थॅंक्स भी,,,तेरी दीदी मेरी दीदी,,ऑर वैसे भी अमित जैसे घटिया बंदे से हर एक
लड़की को बचना चाहिए,,,वो साला ज़िंदगी खराब कर देता है लड़की की,,,,,,,,,,ऑर रही बात दीदी को समझाने
की वो तो मेरी आदत है मैं कभी गुस्सा ऑर ज़बरदस्ती नही करता,,,जो बात प्यार से समझाने मे मज़ा आता है
वो गुस्से ऑर ज़बरदस्ती से नही आता,,,,ऑर तेरी दीदी को प्यार से समझा कर मुझे भी बड़ा अच्छा लगा,,,,,,मैने
सोचा अब इसको क्या बताऊ कि मैने कितने प्यार से समझाया है इसकी दीदी को,,,,,,,,,,,,,,,,

अच्छा भाई अब इतनी हेल्प की तूने मेरी अब एक ऑर हेल्प कर्दे ना,,,,,,,,

कैसी हेल्प,,,,,???

करण-;यार तेरे पास तो कोई ना कोई लड़की है,,ऑर तू रात भर मस्ती करता है,,अपने इस दोस्त के बारे मे कुछ सोच ना
मेरी भी सेट्टिंग करवा ना किसी से,,,,,,,,,,,

मैं-;अबे मैं कोई दलाल हूँ क्या जो सेटिंग करवाता हूँ,,,,,,,,

करण-;अरे भाई तू तो गुस्सा ही कर गया,,,,,मेरा वो मतलब नही था सन्नी भाई,,,मैं तो बोल रहा था कि तू रात भर
अपनी किसी गर्लफ्रेंड के घर रहता है,,ऑर खूब मस्ती करता है,,,एक आधी गर्लफ्रेंड मेरी भी बनवा दे यार कब्से तरस
रहा हूँ,तू तो मस्ती करता रहता है मैने तो आज तक हाथ से ही काम चलाया है,,,कुछ कर ना यार कब
तक अपना हाथ जगन्नाथ करता रहूँगा,,,,,,,,,,प्ल्ज़्ज़ सन्नी भाई कुछ सेट्टिंग करवा दे प्लज़्ज़्ज़,,,,,,

मैं-;ठीक है सेट्टिंग तो करवा देता हूँ लेकिन,,,,,,,,लड़की,,,,,

करण-;मैं बोलने ही लगा था कि करण बीच मे बोल पड़ा,,,,,,,,,,लड़की कैसी भी हो भाई चलेगी,,,,अंधी हो कानी हो
लुली हो या लंगड़ी हो,,,,,,,,या फिर चाहे कोई बूढ़ी हो अपुन को बस चूत चाहिए एक बार बस,,,,,,कुछ भी
करके एक बार चूत दिलवा दो भाई,,,,,,,,

मैं-;देख ले फिर बाद मे मत बोलना ,,,,,,,अगर लड़की की जगह किसी औरत की चूत दिलवा दूं तो कैसा रहेगा,,

करण-;औरत की,,,,इसका मतलब आप किसी लड़की के साथ नही किसी औरत के साथ रात रंगीन करते हो,,,,,,वैसे मुझे
कोई मसला नही है भाई,चूत 20 साल की हो या 50 की,,,,चूत तो चूत है,,,,,,,

मैं-;फिर भी सोच ले एक बार,बाद मे मत बोलना मेरे को,,,,,,

करण-;कुछ नही बोलता भाई एक बार बस कुछ भी करके सेटिंग करवा दो,,,,,,,,

मैं-;ठीक है,,,,,कुछ टाइम दे मेरे को मैं कुछ करता हूँ,,,,,,,,,

करण-;थॅंक्स भाई,,,,,,प्ल्ज़्ज़ जल्दी करना ,,,,,,,,,,ओके अब मैं चलता हूँ भाई,,,,,,,बयी

करण वहाँ से चला गया,,,,मैने सोचने लगा इसको किसकी चूत दिलवा सकता हूँ मैं,,,,,,साल वादा तो कर
दिया है लेकिन किसके साथ सेट्टिंग करू इसकी,,,,पहला ख्याल मेरे दिल मे बुआ का आया,,अगर वो मनीषा ऑर पूजा
को डॅड से चुदवा सकती है तो मैं भी बुआ को करण से चुदवा सकता हूँ,,,,,,लेकिन घर की किसी औरत को
अपने दोस्त से चुदवाना ठीक है क्या,,,,,,जानता हूँ करण मेरा सबसे ख़ास दोस्त है लेकिन फिर भी मुझे एक
'अजीब सा डर लग रहा था,,,,,,,,फिर मेरे दिमाग़ मे एक प्लान आया,,,,,,हां यही ठीक रहेगा,,,,मैने दिल ही
दिल मे अपने प्लान को सोच कर खुश होने लगा,,,,,,,,,,

रात को डिन्नर करके रूम मे लेटा हुआ था सोनिया भी अपने बेड पर लेटी हुई थी,,,,लेकिन मेरी तरफ पीठ करके
,,,मेरा दिल तो किया उसके पास जाने को लेकिन डर लगा,,फिर सोचा जब तक इसको किसी भाई बेहन का सेक्स नही दिखा
देता तब तक इसके पास जाने मे ख़तरा है,,,,,,,,,यही सोच कर मैं सो गया,,,,,,,,,,,,


नेक्स्ट डे कॉलेज जाते टाइम सोनिया मेरे साथ नही गई,,,उसने कविता को फोन करके बुला लिया था,,,,वो मेरे से
नाराज़ थी,,,,मैं भी कॉलेज चला गया,,,,लेकिन मेरा दिल नही लग रहा था क्लास मे ,,करण भी बोल रहा था
कि उसका दिल नही लग रहा,,,वो मुझे कुछ दोस्तो के साथ कहीं बाहर लेके जाने की बात करने लगा लेकिन मैने
मना कर दिया,,पर करण कुछ टाइम बाद अपने दोस्तो के साथ वहाँ से चला गया,,ऑर मैं अकेला बैठा बोर
होता रहा,,,,,,,,,,,,,


तभी कुछ देर बाद मुझे करण के मोबाइल से मेसेज आया,,,,,,,,,,,,सन्नी मुझे तेरे से कुछ काम है तुम मेरे
घर पर आ जाओ अभी,,,,,,,,,साला अभी तो कुछ देर पहले गया है यहाँ से अब मुझे घर क्यूँ बुला रहा है,,,,,
खैर मैं करण के घर की तरफ चल पड़ा,,,,,,,,,,,,,,करण के घर पर करण की कार थी लेकिन उसका बाइक नही
था ऑर आज वो कॉलेज बाइक पर गया था,,,इसका मतलब करण घर पर नही था लेकिन मुझे मेसेज तो उसी के सेल से
आया था,,,मैं अभी गेट पर खड़ा हुआ ये सोच ही रहा था कि तभी गेट खुला ऑर एक सेक्सी टाइट फिटिंग पंजाबी
सूट मे शिखा दीदी मेरे सामने खड़ी हुई थी,,,,,,,,मैं तो उनको देख कर दंग रह गया था,,,क्या लग रही
थी वो,,,गेट खोलते ही मैने उनको हेलो बोला लेकिन उन्होने मेरे हेलो के जवाब मे मेरा हाथ पकड़ा ऑर गेट
बंद करके मुझे अंदर ले गई ओर अंदर जाते ही मुझे गले से लगा लिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शिखा-ऊह सन्नी कहाँ थे तुम,,,,,तुमको नही पता मैं कितना मिस कर रही थी तुमको,,,,,कितना तड़प रही थी
तुमको मिलने के लिए,,,,,,,,,,,,,,,

,मैं डर गया कहीं कोई देख ने ले,,,,,,,,,,,,,,,,
मैं-;दीदी हटो ना कोई देख लेगा,,,,,,,,

शिखा-;कॉन देख लेगा सन्नी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;आंटी ऑर कारण,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,दीदी हँसने लगी,,हाहहहहहा बुद्धू
घर पर कोई नही है मेरे अलावा माँ बाहर गई है 4 बजे वापिस आएगी ऑर करण तो कॉलेज मे है,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं--;लेकिन दीदी मेरे को मेसेज तो करण के फोन से आया था,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
शिखा-;वो तो अच्छा हुआ सन्नी कि करण आज अपना सेल घर पर ही भूल गया,,मैं वहीं बैठी हुई थी तभी मेरी नज़र करण के सेल पर पड़ी ऑर सेल से तेरा नंबर देख कर मैने तेरे को मेसेज कर दिया मेसेज तो मैं तेरे को अपने फोन से भी कर देती लेकिन मेरे पास तेरा नंबर नही था ऑर करण से तेरा नंबर लेना नही चाहती थी मैं पता नही वो क्या सोचता,,,,,,,तभी दीदी ने मेरे लिप्स को अपने लिप्स मे जाकड़ लिया ऑर पागलो की तरह किस करने लगी दीदी ने एक दम से ऐसा किया तो मैं थोड़ा घबरा सा गया था लेकिन एक ही पल मे दीदी के सॉफ्ट लिप्स का एहसास अपने लिप्स पर पाके मुझे भी खुमारी चढ़ने लगी ऑर मैने भी दीदी की किस को उन्ही के अंदाज़ मे रेस्पॉन्स देना शुरू कर दिया,,,,ऊऊहह ससुउन्नयी तेरे को नही पता मैं तुझे कितना मिस कर रही थी पता नही तूने उस दिन क्या कर दिया मुझे,,एक तो अमित से मेरे को बचा लिया ऑर उपर से अपने इस मूसल से मुझे खुश कर दिया इतना बोलते ही दीदी ने मेरे लंड को पॅंट के उपर
से पकड़ा ऑर हल्के से दबा दिया,,,,,,,कितना तड़प रही थी मैं तेरे को मिलने को तू नही जानता सन्नी,,,उस दिन
तूने मुझे खुश किया था आज मेरी बारी है,,,,,,,,,,तभी एक दम से दीदी ज़मीन पर नीचे की तरफ चली गई ऑर
मेरी पॅंट नीचे करके मेरे लंड को हाथ मे ले लिया जो अभी आधा खड़ा हो चुका था दीदी ने उसको हाथ से हल्के
से हिलाते हुए उसकी टोपी पर किस कर दिया ऑर मैं दीदी के सॉफ्ट लिप्स से अपने लंड की टोपी पर टच करने के एहसास से थोड़ा उछल सा गया ऑर दीदी मुझे देख कर हँसने लगी,,,,,,,,,,,,उस दिन तूने अपनी मनमानी की थी आज मेरी बारी है सन्नी,,,,,,,,,,,,, ,इतना बोलते ही दीदी ने लंड को मुँह
मे भर लिया ओर चूसने लगी,,,,,,आज दीदी कुछ ज़्यादा ही मूड मे थी ऑर उस दिन से कहीं बेहतर अंदाज़ से लंड
चूस रही थी,,,,,,मेरा लंड जिसको अभी कुछ ही सेकेंड हुए थे दीदी के लिप्स से थोड़ा अंदर उसके मुँह मे गये हुए
वो अब पूरी तरह ओकात मे आ गया था दीदी ने बैठे हुए मेरी पॅंट को बिल्कुल नीचे कर दिया ओर फिर मेरे जूते
खोल दिए ऑर पॅंट को निकाल कर साइड मे रख दिया,,,,मैं डर रहा था कहीं करण को माँ या फिर करण घर
पर ना आ जाए क्यूकी करण कॉलेज से कुछ देर पहले ही निकला था,,,,,,,तभी दीदी उठी ऑर मेरा हाथ पकड़ कर
मुझे अपने रूम मे ले गई,,ऑर अंदर जाते ही मेरी टी-शर्ट निकाल दी ऑर मुझे नंगा कर दिया ऑर अपने कपड़े भी
उतारने लगी,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;दीदी कपड़े मत उतारो प्ल्ज़्ज़ अगर कोई आ गया तो,,मैं सच मे थोड़ा डरा हुआ था,,,,,,,,

शिखा-;कोई नही आता सन्नी माँ 4 बजे से पहले नही आने वाली ऑर करण तो कॉलेज से 3 बजे आता है ऑर अभी जस्ट 11 ही बजे है तुम टेन्षन मत लो ,,ऑर वैसे भी जब तक 2 जिस्म पूरे नंगे नही होते उनके मिलने का पूरा मज़ा नही आता अब
तक दीदी भी नंगी हो गई,,,,साली कुछ दिन पहले जो इतना शरमा रही थी घबरा रही थी अब कैसे बेशरम होके'
जल्दी से नंगी हो गई थी,,ऐसे कपड़े उतार रही थी जैसे कोई पत्नी अपने पति के सामने उतारती है,,,,,,ओह सॉरी कोई
पत्नी भी इतनी जल्दी नही करती ये तो किसी रंडी की तरह जल्दबाजी कर रही थी,,,,या उस पत्नी की तरह जो अपने पति
के ऑफीस चले जाने के बाद किसी पड़ोसी से या कॉलेज फ्रेंड से जल्दबाजी मे चुदाई करती थी,,,,,,,,,,लेकिन मुझे तो
अब तक फुल मस्ती चढ़ चुकी थी क्यूकी एक नंगा ऑर संगमरमर जैसा चिकना ऑर गोरा बदन वो भी एक जवान
ऑर खूबसूरत लड़की का जो मस्ती मे बिल्कुल पागल हो चुकी थी,,,,दीदी ने मुझे बेड पर लेटा दिया ऑर खुद भी बेड
पर आके बैठ गई ऑर मेरे लिप्स को अपने लिप्स मे जाकड़ कर किस करने लगी साथ ही मेरे लंड को हाथ मे लेके हल्के
से सहलाने लगी ,,,,,

दीदी बेड पर बैठ कर मेरे सर के उपर झुकी हुई थी ऑर मेरे लिप्स को किस कर रही थी तभी
मैने दीदी को अपने उपर खींच लिया दीदी ने भी अपनी टाँगे सीधी करली ऑर मेरे उपर आ गई जिस से दीदी का हाथ
मेरे लंड से हाथ गया,,,,,,,,,,,,,,

शिखा-;लगता है तुझे भी मस्ती चढ़ने लगी है सन्नी,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;हाँ दीदी आप जैसा मस्त माल वो भी पूरा नंगा ,,किसी को भी मस्ती चढ़ सकती है दीदी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शिखा-;सच मे सन्नी मैं तेरे को मस्त लगती हूँ क्या,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;हाँ दीदी आप बहुत मस्त हो ,,,,आपके ये बड़े बड़े बूब्स ऑर बड़ी मटकती मस्त
गान्ड का दीवाना तो सारा कॉलेज है,,अभी तक लोग आपकी बातें करते है,,हर कोई आपको अपने बिस्तेर पर नंगा
करके अच्छी तरह चोदना चाहता है,,तभी तो अमित भी पीछे पड़ा था आपके,,,,,,,,,,,,,,

शिखा-;अमित की बात मत किया करो अब तुम सन्नी मुझे उसका नाम भी नही सुन-ना आज के बाद ,,मुझे तो अब बस तेरा नाम ही अच्छा लगता है ऑर तेरा ये लंड भी,,,,,,,,,,,,

मैं-;मुझे भी आप बहुत अच्छी लगती हो दीदी दिल करता है ऐसे ही नंगा करके आपके साथ
बेड पर लेटा रहूं,,,,,,,,,,,,

शिखा-;सच मे सन्नी मैं तेरे को इतनी अच्छी लगती हूँ या,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;हाँ दीदी मैं तो पता नही कब्से आपकी चूत का दीवाना हूँ जब भी करण को मिलने आता था नज़रे बस आप पर टिकी होती थी मेरी सपने भी आपके देखा करता था ऑर पता नही कितनी बार सपने मे आपको चोदा था मैने ऑर पता नही कितनी बार मूठ मारी थी आपके नाम की,,,,,,,,,,,,,,,

शिखा-;तो पहले कभी बोला क्यूँ नही,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;डरता था दीदी ऑर वैसे भी ये बात इतनी जल्दी नही बोली जाती अगर आप गुस्सा हो जाती तो,,,,ये तो अच्छा हुआ आप अमित की चुंगल मे फसि ऑर करण ने मुझे सब बता दिया ऑर मैने आपको अमित से बचा लिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शिखा-;हाँ अमित से बचा लिया ऑर खुद अपने जाल मे फसा लिया,,,,दीदी हँसने लगी,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;दीदी आप हो ही इतनी मस्त कि कोई भी जाल मे फसाने को तैयार हो जाता आपको,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शिखा-;अगर मैं इतनी मस्त हूँ सन्नी तो मेरा पति मेरे को क्यूँ नही चोदता था ,,,,,,,,,,,,,,

मैं-;क्या दीदी?? आपका पति आपको चोदता नही था,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शिखा-;नही सन्नी मैं अपने पति के साथ 6 महीने रही थी ऑर वो 5-7 दिन मे एक या दो बार ही मुझे चोदता था ऑर वो भी इतनी छोटे लंड से जो 2 मिनिट मे ही पानी छोड़ देता था,,,मुझे गर्म करके खुद पानी निकाल कर सो जाता था ऑर मैं बस उंगली से काम चलाती रहती थी,,,इसलिए तो मैने उसको तलाक़ दे दिया,,साला नामर्द था पूरा,,हर बार प्यासी छोड़ देता था मेरे को,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैने दीदी के फॉरहेड पे किस किया ओर बोला,,दीदी छोड़ो बीती बातों को,,,,,अब मैं हूँ ना आपके पास जितनी भी प्यास
है आपकी मैं सब भुजा दूँगा बस टाइम मिलता रहे ऑर मोका मिलता रहे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शिखा-;टाइम ऑर मोका मैं खुद निकाल लूँगी तेरे लिए सन्नी बस तू तैयार रहना जब भी मैं तेरे को फोन करूँ,,,,,,,,,,,,

मैं-;दीदी अबकी बार करण के सेल से मेसेज या कॉल मत करना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शिखा-;नही करती बाबा अब तेरा नंबर मेरे सेल पर भी है तू भी मेरा नंबर सेव कर लेना,,,,,,चल अब बाकी बातें छोड़ ऑर जल्दी कुछ कर मैं बहुत तड़प रही हूँ,,,,,,,