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- Dec 5, 2013
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#67
मैं- कैसा अतीत
मीता- तू चल तो सही
मैं- रीना से बहुत कुछ कहना चता था खैर फिर कभी, चल चलते है .
बोझिल, भारी कदमो से हम दोनों हमारी बंजर जमीन पर पहुंचे, रुद्रपुर जाने का सबसे छोटा रास्ता यही से तो जाता था . मैंने हौदी से थोडा पानी पिया और दिवार की टेक लगा कर बैठ गया . मीता मेरे पास बैठ गयी.
मीता- क्या सोच रहा है
मैं- बस यही की आज बाबा से मिला और मिलके भी नहीं मिल सका.
मीता- यही तो मुझे भी समझ नही आया तुझसे ज्यादा तवज्जो रीना को ,पर किसलिए
मैं- उस से फर्क नहीं पड़ता बस एक बार सीने से लगा लेते बहुत था मेरे लिए .
मीता- कहीं रीना की माँ से चौधरी साहब का कोई चक्कर तो नहीं था .तेरे चाचा के जैसे.
मीता की बात ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया . ताई ने भी कहा था की इस कुनबे के मर्दों को चूत के आगे कुछ नहीं दीखता . हो भी सकता था . पर अर्जुन सिंह उस दौर में इतना रसूखदार तो था ही की रखैल रख लेता तो कौन रोकता उसे, इसलिए मैंने मीता के तर्क को ख़ारिज कर दिया .
मैं- यहाँ पर मामला हवस का नहीं है . सवाल ये है की एक इन्सान अपना सब कुछ त्याग कर सोलह साल गायब रहता है , परिवार में मौत पर भी नहीं आता,सबसे नाता तोड़ लेता है .किसलिए, ताई और चाची ने भी बाबा को सदैव पूजनीय माना है . ताई ने तो मुझसे कहा था की अर्जुन और मेरा रिश्ता काशी का घाट है उसे समझने के लिए तुम्हे गंगा होना पड़ेगा.
मीता- एक मिनट क्या कहा तूने
मैंने अपनी बात दोहराई
मीता- इस दुनिया में इतना पवित्र क्या है की उसकी तुलना गंगा से की जाए.
मैं- एक रिश्ता , भाई-बहन का रिश्ता ओह तेरी, अब समझ आया .
मीता- क्या
मैं- उस रात ताई शिवाले में राखी लेकर किसका इंतज़ार कर रही थी , वो बाबा की राह देख रही थी .
मीता- शायद यही वजह रही होगी की वो बाबा को इतना मानती थी .
मैं- हमें ताई से मिलना होगा. अब उसे बताना ही होगा , तूने सही कहा था की अतीत के पन्ने पलटने का समय आ गया है और पहला पन्ना होगी ताई. हम रुद्रपुर शाम को चलेंगे अभी हमें वापिस चलना चाहिए गाँव .
मीता- उसकी जरुरत नहीं है . वो देख तेरी ताई इधर ही आ रही है .
मैंने देखा ताई बदहवास सी हमारी तरफ ही दौड़ी आ रही थी . कुछ देर में ही वो हमारे सामने थी .
ताई- मैंने सुना अर्जुन लौट आया .कहाँ है वो
मैं- लौट तो आये है पर अभी कहाँ है मालूम नहीं
ताई के चेहरे से जैसे नूर चला गया .
मीता- आप उनको भाई मानती थी न
ताई कुछ नहीं बोली
मैं- ताई मुझे मालूम हो गया है की आपका और बाबा का क्या रिश्ता है , उस रात आप राखी की थाली लिए शिवाले में बाबा का ही इंतज़ार कर रही थी ना.
ताई- तू क्यों अतीत की दीवारों को कुरेद रहा है , मैंने पहले भी कहा था की गड़े मुर्दे उखाड़ने से कुछ हासिल नहीं होगा.
मैं- तुम लोगो का अतीत मेरे आज को बर्बाद करने पर तुला हुआ है . तुम्हारा ये अतीत मेरे और रीना के बीच अकार खड़ा हो गया है . मैं करू तो क्या करू. तू मेरी मदद कर मुझे ले चल उन दिनों की यादो में
ताई- कुछ नहीं है उन यादो के दरमियान
मीता- ताई, रीना मनीष को अपनी माँ की कातिल समझती है , मनीष को अपनी बेगुनाही साबित करनी है ,वर्ना उसका और रीना का रिश्ता टूट जायेगा, एक बार जो गाँठ पड़ी फिर न जुड़ पायेगी.
ताई- पागल है वो लड़की, किसी ने उसे बताया क्यों नहीं की वो रीना की माँ नहीं थी वो बस उसे पाल रही थी . अर्जुन की सरपरस्ती में थी रीना, और अर्जुन के अहसानों तले दबी उसने बस रीना को अपना नाम दिया . दुनिया के सामने रीना को अपना नाम दिया उसकी परवरिश की ........
ताई ने आज ऐसा बम फोड़ दिया था जिसने हमें हिला कर रख दिया.
मीता- तो किसकी बेटी है रीना .
ताई- कोई नहीं जानता, एक शाम अर्जुन उसे ले आया .
मीता- क्या रीना बाबा की औलाद है , मतलब क्या बाबा के किसी और औरत से औलाद थी या है .
ताई ने गहरी नजरो से घूर कर मीता को देखा और बोली- मैंने कहा न अर्जुन जैसा कोई नहीं . तुम सौ जनम भी ले लो तो उसे समझ नहीं पाओगे. जानते हो मोहल्ले का हर घर रीना को बेटी क्यों मानता है , क्योंकि उसे सरपरस्ती मिली थी अर्जुन की. उस अर्जुन की जिसके लिए गाँव के हर चूल्हे में रोटी बनती थी की किस घर में वो खाना खाने चला जाए. इस गाँव के हर घर का बेटा है अर्जुन. क्या मालूम गाँव को लगता हो की रीना अर्जुन की बेटी है इसलिए वो विरोध कर रहे हो .
मैं- मेरा दिल कहता है की रीना बाबा की बेटी नहीं है , अगर ऐसा कुछ होता तो वो उसे छोड़ कर एक मिनट भी नहीं जाते.
मीता-पर जिस तरह से भरे गाँव के सामने तुमसे पहले बाबा ने उसे गले लगाया शक तो होता है इस बात पर.
मैं- नहीं , ऐसा नहीं हो सकता .
ताई- अर्जुन कहा है
मैं- बताया न , वो आये और बस चले गए.
ताई- उसे जाना होता तो वो लौटता नहीं.
मैं- बाबा ने रुद्रपुर में कत्लेआम क्यों मचाया
ताई- ये राज बस अर्जुन के मन में दफ़न है .
मीता- मनीष हमें ये मालूम करना होगा की रीना और बाबा का क्या रिश्ता है .
मैं- पर कैसे , कैसे .... कहाँ है वो डोरी जो इस जाल को तितर -बितर कर दे.
हताश होकर ताई वापिस लौट गयी पर अब हम दोनों को चैन नहीं था ,बहुत सोचने के बाद मुझे एक रास्ता सूझा
मैं- मीता, हमें जब्बर से मिलना होगा.
मीता- क्यों
मैं- ये तो वही जाकर ही मालूम होगा...........
मैं- कैसा अतीत
मीता- तू चल तो सही
मैं- रीना से बहुत कुछ कहना चता था खैर फिर कभी, चल चलते है .
बोझिल, भारी कदमो से हम दोनों हमारी बंजर जमीन पर पहुंचे, रुद्रपुर जाने का सबसे छोटा रास्ता यही से तो जाता था . मैंने हौदी से थोडा पानी पिया और दिवार की टेक लगा कर बैठ गया . मीता मेरे पास बैठ गयी.
मीता- क्या सोच रहा है
मैं- बस यही की आज बाबा से मिला और मिलके भी नहीं मिल सका.
मीता- यही तो मुझे भी समझ नही आया तुझसे ज्यादा तवज्जो रीना को ,पर किसलिए
मैं- उस से फर्क नहीं पड़ता बस एक बार सीने से लगा लेते बहुत था मेरे लिए .
मीता- कहीं रीना की माँ से चौधरी साहब का कोई चक्कर तो नहीं था .तेरे चाचा के जैसे.
मीता की बात ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया . ताई ने भी कहा था की इस कुनबे के मर्दों को चूत के आगे कुछ नहीं दीखता . हो भी सकता था . पर अर्जुन सिंह उस दौर में इतना रसूखदार तो था ही की रखैल रख लेता तो कौन रोकता उसे, इसलिए मैंने मीता के तर्क को ख़ारिज कर दिया .
मैं- यहाँ पर मामला हवस का नहीं है . सवाल ये है की एक इन्सान अपना सब कुछ त्याग कर सोलह साल गायब रहता है , परिवार में मौत पर भी नहीं आता,सबसे नाता तोड़ लेता है .किसलिए, ताई और चाची ने भी बाबा को सदैव पूजनीय माना है . ताई ने तो मुझसे कहा था की अर्जुन और मेरा रिश्ता काशी का घाट है उसे समझने के लिए तुम्हे गंगा होना पड़ेगा.
मीता- एक मिनट क्या कहा तूने
मैंने अपनी बात दोहराई
मीता- इस दुनिया में इतना पवित्र क्या है की उसकी तुलना गंगा से की जाए.
मैं- एक रिश्ता , भाई-बहन का रिश्ता ओह तेरी, अब समझ आया .
मीता- क्या
मैं- उस रात ताई शिवाले में राखी लेकर किसका इंतज़ार कर रही थी , वो बाबा की राह देख रही थी .
मीता- शायद यही वजह रही होगी की वो बाबा को इतना मानती थी .
मैं- हमें ताई से मिलना होगा. अब उसे बताना ही होगा , तूने सही कहा था की अतीत के पन्ने पलटने का समय आ गया है और पहला पन्ना होगी ताई. हम रुद्रपुर शाम को चलेंगे अभी हमें वापिस चलना चाहिए गाँव .
मीता- उसकी जरुरत नहीं है . वो देख तेरी ताई इधर ही आ रही है .
मैंने देखा ताई बदहवास सी हमारी तरफ ही दौड़ी आ रही थी . कुछ देर में ही वो हमारे सामने थी .
ताई- मैंने सुना अर्जुन लौट आया .कहाँ है वो
मैं- लौट तो आये है पर अभी कहाँ है मालूम नहीं
ताई के चेहरे से जैसे नूर चला गया .
मीता- आप उनको भाई मानती थी न
ताई कुछ नहीं बोली
मैं- ताई मुझे मालूम हो गया है की आपका और बाबा का क्या रिश्ता है , उस रात आप राखी की थाली लिए शिवाले में बाबा का ही इंतज़ार कर रही थी ना.
ताई- तू क्यों अतीत की दीवारों को कुरेद रहा है , मैंने पहले भी कहा था की गड़े मुर्दे उखाड़ने से कुछ हासिल नहीं होगा.
मैं- तुम लोगो का अतीत मेरे आज को बर्बाद करने पर तुला हुआ है . तुम्हारा ये अतीत मेरे और रीना के बीच अकार खड़ा हो गया है . मैं करू तो क्या करू. तू मेरी मदद कर मुझे ले चल उन दिनों की यादो में
ताई- कुछ नहीं है उन यादो के दरमियान
मीता- ताई, रीना मनीष को अपनी माँ की कातिल समझती है , मनीष को अपनी बेगुनाही साबित करनी है ,वर्ना उसका और रीना का रिश्ता टूट जायेगा, एक बार जो गाँठ पड़ी फिर न जुड़ पायेगी.
ताई- पागल है वो लड़की, किसी ने उसे बताया क्यों नहीं की वो रीना की माँ नहीं थी वो बस उसे पाल रही थी . अर्जुन की सरपरस्ती में थी रीना, और अर्जुन के अहसानों तले दबी उसने बस रीना को अपना नाम दिया . दुनिया के सामने रीना को अपना नाम दिया उसकी परवरिश की ........
ताई ने आज ऐसा बम फोड़ दिया था जिसने हमें हिला कर रख दिया.
मीता- तो किसकी बेटी है रीना .
ताई- कोई नहीं जानता, एक शाम अर्जुन उसे ले आया .
मीता- क्या रीना बाबा की औलाद है , मतलब क्या बाबा के किसी और औरत से औलाद थी या है .
ताई ने गहरी नजरो से घूर कर मीता को देखा और बोली- मैंने कहा न अर्जुन जैसा कोई नहीं . तुम सौ जनम भी ले लो तो उसे समझ नहीं पाओगे. जानते हो मोहल्ले का हर घर रीना को बेटी क्यों मानता है , क्योंकि उसे सरपरस्ती मिली थी अर्जुन की. उस अर्जुन की जिसके लिए गाँव के हर चूल्हे में रोटी बनती थी की किस घर में वो खाना खाने चला जाए. इस गाँव के हर घर का बेटा है अर्जुन. क्या मालूम गाँव को लगता हो की रीना अर्जुन की बेटी है इसलिए वो विरोध कर रहे हो .
मैं- मेरा दिल कहता है की रीना बाबा की बेटी नहीं है , अगर ऐसा कुछ होता तो वो उसे छोड़ कर एक मिनट भी नहीं जाते.
मीता-पर जिस तरह से भरे गाँव के सामने तुमसे पहले बाबा ने उसे गले लगाया शक तो होता है इस बात पर.
मैं- नहीं , ऐसा नहीं हो सकता .
ताई- अर्जुन कहा है
मैं- बताया न , वो आये और बस चले गए.
ताई- उसे जाना होता तो वो लौटता नहीं.
मैं- बाबा ने रुद्रपुर में कत्लेआम क्यों मचाया
ताई- ये राज बस अर्जुन के मन में दफ़न है .
मीता- मनीष हमें ये मालूम करना होगा की रीना और बाबा का क्या रिश्ता है .
मैं- पर कैसे , कैसे .... कहाँ है वो डोरी जो इस जाल को तितर -बितर कर दे.
हताश होकर ताई वापिस लौट गयी पर अब हम दोनों को चैन नहीं था ,बहुत सोचने के बाद मुझे एक रास्ता सूझा
मैं- मीता, हमें जब्बर से मिलना होगा.
मीता- क्यों
मैं- ये तो वही जाकर ही मालूम होगा...........