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अब तक आपने पढ़ा की विक्रम का सामना रूपांतरण यन्त्र से होता है जिसने एक विशाल थ्री हेडेड स्नेक का रूप ले लिया HAI.WAHIN दिग्विजय वारियर्स का सामना नहीं कर पता और बेहोश हो जाता HAI.AB आगे.....
CHAPTER:- 1
(DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट)
अपडेट- 20
दिग्विजय बेहोश पड़ा tha.dhanur उसके सामने खड़े हुए थे. धनुर ने अपना हाथ दिग्विजय के सर पे rakha.unke हाथों से एक सफ़ेद रौशनी निकली और दिग्विजय के अंदर चली gayi.DIGVIJAY के सारे ज़ख्म भर गए और उससे होश आ गया.
दिग्विजय- धन्यवाद गुरुवार.
धनुर- तुमने रानशूरों को क्यों बुलाया जब तुम तैयार नहीं थे.
दिग्विजय- मैंने अपने अंदर धरती और आकाश दोनों की hi शक्ति महसूस की थी गुरुवार. मुझे लगा मई तैयार हूँ इसीलिए मैंने युद्ध करने की सोची....
धनुर- आधा पेट भोजन कभी भी शरीर को पूरी ऊर्जा नहीं देता पुत्र वैसे hi आधी शक्ति तुम्हे विजयी नहीं बना sakti.jab तक तुम्हारा शरीर दोनों की hi ऊर्जा से पूरी तरह नहीं भर जाता तुम तैयार नहीं हो शक्ति आज़माने की लिए....
दिग्विजय- मुझे माफ़ कर दीजिये guruwar.ab ऐसी गलती नहीं होगी.
दिग्विजय वापस ध्यान में बैठ गया और धनुर गायब हो गए.....
वही दूसरी तरफ:-
मेरी हालत ख़राब हो चुकी thi.mai पिछले 6 घंटे से लगा हुआ था पर अभी तक सांप को एक खरोच तक नहीं पहुंचा पाया tha.wo तोह ाचा है की अब मेरे चोट तुरंत भर जाते थे वर्ण अभी तक तोह मेरा काम तमाम हो चूका होता.
ये साला सांप भी एक नंबर का ढीट tha.saale को लगती hi नहीं thi,maine आग से पानी से चट्टान से हर तरीके का वार अब तक इस्पे कर लिया था पर कुछ फायदा नहीं हुआ था.
अब मैंने आग पानी इत्यादि से लड़ने का हुनर कहाँ से सिख लिया इससे जानने के लिए एक छोटे से फ्लैशबैक में जाते है....
एक रात पहले........
गुरूजी ने जो द्रव पिलाया था उसका असर तुरंत hua.meri थकन पूरी मिट गयी और अब मुझे नींद भी नहीं आ रही thi,guruji ने जो किताब दी थी मैंने उससे पढ़ने की सोची...
जैसे hi मैंने किताब खोली एक नया चमत्कार हुआ. बुक की पेजेज बुक्स से निकलकर चिड़ियों की तरह एक एक करके हवा में उड़ने लगी.
देखते hi देखते साड़ी पेजेज मेरे आस पास फ़ैल गयी...
अब saala,mujhe ये समझ नहीं आ रहा था की गुरूजी ने किताब पढ़ने के लिए दिया है की उड़ाने के लिए....
अभी मई कुछ और सोचता की एक पेज उड़ते हुए मेरे सामने आया और और रूक गया.
वितनुते रहसयम......
(ुनफोल्ड थे सीक्रेट)
उस पेज पर बड़े बड़े अक्षरों में ये शब्द लिखे हुए थे....
मेरे ये शब्द दोहराये. पुरे टेंट में एक तेज़ रौशनी फलिए गयी, उस रौशनी के काम होते hi सारे पेजेज एक एक करके मेरे आँखों के सामने आते रहे और मई उनमे लिखा मंत्र याद करता रहा.
हर पेज पर शास्त्रों को अस्त्रों की तरह कैसे इस्तेमाल करना है ये लिखा हुआ tha.usme अग्नि और जल का आवाहन mantra,unko पैदा करने की विधि भी लिखी हुई thi.kisi भी शाश्त्र का रूप बदलकर कुछ नया banana,aur भी बोहोत कुछ लिखा था जो आगे चलकर पता chalega.mai करीब 3 घंटे तक पढता gaya.jab भी मई कुछ पढता मुझे ऐसा लगता जैसे मई सिर्फ उस मंत्र को पढ़ hi नहीं रहा हूँ बल्कि शास्त्रों के साथ उनका प्रयोग भी कर रहा hun.ab मुझे काफी कुछ पता चल चूका tha.par इतनी देर तक पढ़ने के बावजूद मई किताब का बस 2 परसेंट hi पढ़ पाया tha.jaise hi मेरे मन में आया की मई अब बाद में padhunga,saare पेजेज वापस बुक में समां gaye.book बांध होकर मेरे हाथों में आ गयी.
GAZAB....ye तोह मेरे मन को भी पढ़ लेती है...
बैक तो प्रेजेंट:-
पर मई हार तोह मान नहीं सकता tha.maine अपने मन को शांत किया और दौड़ पड़ा सांप की aur.taklif ये थी की उसके 3 सर the....isiliye उससे चकमा देना मुश्किल था...
मुझे अपने करीब आता देख उसने अपना ज़हर मेरी तरफ phenka.uska ज़हर ग्रीन कलर का था और काफी ज़्यादा मात्रा में था. मई अपने घुटनो पर स्लाइड करते हुए ज़हर से बचता हुआ आगे निकल गया. अब मैंने दो तरफ़ा हमले की सोची. मैंने तलवार का आवाहन किया. तलवार हाथ में आते hi मैंने उससे सामने की तरफ फेक दिया .
जलम परिग्रहं.........
तलवार उस सांप के एक सर के सामने पहुंचकर रुक गयी और उससे फुल फाॅर्स में पानी निकल कर सांप को लगने lagi.ye फाॅर्स बोहोत ज़्यादा था, सांप को लगते hi वो पीछे जाने laga.ye पहली बार था जब मैंने सांप को बैक फुट में किया tha.mai दौड़ते हुए सांप के पीछे pahuncha.uske फैन में पहुंचकर मैंने एक ज़ोर की छलांग लगाई और DHAADDDDDD....saamp के एक सर को काट दिया....
मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं tha.maine सामने देखा तोह अक्षांत और शैला भी फटी आँखों से मेरी तरफ देख रहे the.abhi मई आगे बढ़ता की शैला के मुँह से एक ज़ोरदार चीख nikli.jab तक मई कुछ समझ पता देर हो चुकी थी
मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे कोई तिघ्टलय बाँध रहा hai.ye उस सांप का फैन था जो मुझे लपेट रहा tha.meri तोह हालत खराब हो gayi.maine ऊपर देखा तोह एक नया झटका मेरा इंतज़ार कर रहा tha...saamp का सर जो मैंने काट दिया था उसकी जगह एक नए सर ने ले ली thi.mera पूरा कॉन्फिडेंस hi ख़त्म हो गया.
इधर सांप अपना फैन लगातार कस्ते hi जा रहा tha...mujhe अपनी हड्डियां टूटती सी लग रही thi.dard की अधिकता से मई बेहोश हो गया.
शैला- NAHIII.......VIKRAM तोह बेहोश हो gaya.hume hi कुछ करना होगा, वर्ण वो बच नहीं पायेगा.....
अक्षांत- हम कुछ नहीं कर सकते शैला. मतिभ्रम का ये नियम है की जो फेज खुद निकले.
शैला- तोह तुमने यही चुनौती क्यों चुनी फिर....
अक्षांत- मुझे क्या पता था की रूपांतरण यन्त्र ऐसा विकराल रूप भी ले सकता hai.MATIBHRAM मैदान की किताब में भी ऐसा कुछ कभी नहीं हुआ है.
शैला- तोह अब हम क्या करें.....!!!!!!
अक्षांत- कुछ नहीं कर सकते hum.jo करेगा विक्रम करेगा.
मेरी आत्मा मेरे शरीर को छोड़ फिर उसी रौशनी के सामने कड़ी थी जहाँ हर दिन ध्यान अवशता में मई पहुँचता हूँ....
रौशनी- क्या हुआ VIKRAM.....itne में hi हार मान gaye.tum इतने कमज़ोर नहीं हो vikram.khud को pehchano.apne अंदर झांको. ये छोटी मोती बाधाएं तुम्हे नहीं रोक sakti.utho, इनका मुकाबला करो.
मई तोह बस उस रौशनी की आवाज़ में hi हो गया था. रौशनी मेरी तरफ बढ़ी और मुझे छू लिया. मुझे एक झटका सा लगा और मेरी आँख खुल गयी....
मई अब भी उस सांप के फैन में फसा हुआ tha.par अब मुझे ज़रा सा भी दर्द नहीं हो रहा tha.mujhe होश में आता देख अक्षांत और शैला में भी जोश आ गया.
अग्नि PRAKATAM.........mere पुरे शरीर से अग्नि निकलने lagi.saamp अग्नि बर्दाश्त नहीं कर पाया और अपना फैन ढीला कर diya.maine एक ऊँची छलांग मारी और सांप के ठीक सामने खड़ा हो गया....
सांप ने अपने तीनो सिरसे एक साथ मेरे ऊपर ज़हर छोड़ा जो की बोहोत ज़्यादा मात्रा में था.
अभूपापपति ( प्रोटेक्शन ) ...मेरे सामने एक शील्ड बन गयी ,जिसमे सारा ज़हर रूक गया.......
अब मुझे ये खेल ख़त्म करना था......
मैंने उसका वार उसपे hi करने की सोची....
विष ब्रमजाते.........
सारा ज़हर जो मेरी बनायीं शील्ड में रूका हुआ tha.wo वापस उसी की तरफ बढ़ गया.
मैंने अपने दोनों हाथ फैलाये, एक हाथ में फायर दिखने लगा और दूसरे में water........maine दोनों हाथों को मिलाया ....संसरवा (फ्लो टुगेदर) और अपने हाथ आगे कर दिए.
फायर और वाटर दोनों एक साथ पर अलग अलग दिशा में फैले गए और जो रूप लिया उससे देख कर अक्षांत और शैला स्तब्ध रह गए...
क्यूंकि मेरे तीनो हथियार ( फायर, वाटर, पोइज़न )
ने भी सांप का रूप ले लिया था. वो सांप कुछ समझ पता उससे पहले hi मेरे तीनो सांपो ने उसके अलग अलग हिस्सों को अपने मुँह के अंदर ले लिया और निगलते चले गए..... और देखते hi देखते उस सांप को पूरा निगल gaye.saamp के ख़त्म होते hi वो तीनो भी गायब हो गए......
सब कुछ SHAANT........aur यहाँ मेरा डांस chalu.......wo भी शादी type.....thodi देर बाद जब मेरा एक्ससिटेमेंट कण्ट्रोल में आया तोह मैंने सामने देखा जहाँ अक्षांत और शैला ऐसे खड़े थे जैसे कोई भूत देख लिया ho..abhi मई उनके पास जाता की
कडकडकडडडडकडडडडडड......
एक ज़ोर की बिजली कड़की और उसके बीच में से एक साधु टाइप के आदमी बहार निकले और मेरे पास aaye.abhi मई कुछ बोलने वाला hi था की अक्षांत और शैला दौड़ते हुए आये और उनके आगे झुक गए
उनको ऐसा करते देख मई भी झुक गया.
अननोन- उठो बचो.....
हम तीनो उठ गए.
मई- आप कौन है?
उनके जवाब देने से पहले अक्षांत ने जवाब दे दिया.
अक्षांत- विक्रम ये फ्लोसान्टो हैं.....
मति भ्रम चुनौती के RACHAYITA......yahi नहीं इस ब्रम्हांड में जितनी भी चक्रव्यू hain,uske रचयिता भी यहीं है....
फ्लोसान्टो- विक्रम, मई तुम्हारे पराक्रम से बोहोत प्रसन्न hun.aaj तक किसीने मेरे इस चुनौती को इतनी जल्दी और इतनी सहजता से पार नहीं क्या है.
ले, कहाँ से आसानी से पार kiya.saare नुत बोल्ट ढीले हो गए इस चक्कर me...par बोलता भी क्या.
मई- धन्यवाद फ्लोसान्टो.......
फ्लोसान्टो- मई तुम्हे कुछ देना चाहता हूँ पुत्र.
फिर फ्लोसान्टो ने मेरे सर के ऊपर हाथ रखा और कुछ budbudaye.unke हाथों से रौशनी निकलकर मेरे अंदर सामने lagi........meri आँखें बंद हो gayi.gyaan का सागर मेरे अंदर सामने लगा.
फ्लोसान्टो ने अपना हाथ हटाया और बोले.....
फ्लोसान्टो- putra,maine तुम्हारे अंदर इस ब्रम्हांड के सारे चक्रव्यू के राज़ दाल दिए hain.ab ऐसा कोई चक्रव्यू नहीं होगा ऐसी कोई गुत्थी (पजल) नहीं हग ी जिससे तुम सुलझा नहीं sakte.yahi नहीं अगर तुम चाहो तोह खुद भी बड़ी से बड़ी चक्रव्यू की रचना कर अपने दुश्मन को फसा सकते हो.......
मैंने फ्लोसान्टो के पाँव छुए, VIJAYIBHAV.....kehkar वो गायब हो गए.......
उनके गायब होते hi मतिभ्रम मैदान भी गायब हो गया और हम वापस जंगल में आ gaye.par ये क्या अभी भी दिन निकला हुआ tha.maine अक्षांत की तरफ dekha.wo मेरी कन्फूसिओं समझ गए.
अक्षांत- रूपांतरण यन्त्र के रूप बदलते hi हमारा समय चक्र रूक गया था.
पर आज का प्रशिक्षण यहीं रोकते हैं. विक्रम तुम जाकर विश्राम karo.mai दोनों को bye बोलकर निकल गया.
शैला- विक्रम अग्नि और पानी दोनों का इस्तेमाल इतने अचे से कैसे कर रहा tha.hume उससे पूछना चाहिए.
अक्षांत- सिर्फ अग्नि और पानी का hi नहीं और भी बोहोत कुछ किया है आज usne.par हमे पूछने की ज़रुरत नहीं.
शैला- क्यों???
अक्षांत- जब विक्रम ने शक्ति का इस्तेमाल करना आरम्भ लिया था, तब गुरूजी ने मेरे मस्तिष्क से जुड़कर कहा था की सही वक़्त पर हमे सब पता चल जायेगा.
शैला- ओह्ह्ह!!!! चलो फिर, हम भी ऊपर चलते हैं....
वहीँ दूसरी और:-
दिग्विजय को ध्यान में बैठे 2 दिन हो गए the....usse अपने अंदर असीम शक्ति का आभास हो रहा tha.par पिछली बार की गलती की वजह से वो कोई चांस नहीं ले रहा tha.par अब उसके अंदर ऊर्जा इतनी बढ़ गयी थी की वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था.....
ऑंखें खोलो PUTRA.TUM तैयार हो......
दिग्विजय ने तुरंत अपनी आखें खोल di.ye आवाज़ दिग्विजय में अंतर्मन से आयी थी जो धनुर ने कही thi.par ऊर्जा इतनी अधिक थी की दिग्विजय को ऊर्जा सँभालने में कुछ वक़्त लगा.
दिग्विजय- युद्ध विस्पृधा.............
और 10 वारियर्स प्रकट hue......aur दिग्विजय की तरफ दोनों तरफ से बढ़ने लगे. इस बार दिग्विजय ने कुछ नहीं kiya.bas चुप चाप खड़ा raha.jaise hi वारियर्स ने वार करने के लिए अपने तलवार उठाये, दिग्विजय ने अपना एक हाथ आगे किया, और धरती का आवाहन किया......
PRATIGHAATH.....ek मिटटी के कलर की रौशनी निकली और वारियर्स पे पड़ी और एक तरफ के वारियर्स खुद मिटटी हो गए.
दिग्विजय ने अपना दूसरा हाथ आगे किया और आकाश का आवाहन किया, PRATIGHAATH......DIGVIJAY के हाथों से तेज़ बिजली निकली और वारियर्स राख हो गए.
एक तेज़ गड़गड़ाहट के साथ धनुर प्रकट गए पर इस बार वो अकेले नहीं थे उनके साथ थे अग्रसेन...........
अग्रसेन- बोहोत अचे baalak.bohot काम वक़्त में तुम काफी कुछ सिख गए ho.yahan से धनुर का काम समाप्त हुआ. आगे का प्रशिक्षण मई तुम्हे दूंगा.
दिग्विजय ने धनुर का आशीर्वाद लिया. धनुर गायब हो गए....
अग्रसेन- अभी तक तुमने अस्त्र और शास्त्र को सीधे तरीके से चलना सीखा है और धरती एवम आकाश की शक्ति को वश में करना जाना hai.ab मई तुम्हे "समायोजन विबजूति" (कंबाइन पावर) सिखाऊंगा.....
जितने भी युद्ध कला अभी तक तुमने सीखे हैं उससे तुम सामने वाले को तभी हरा सकते हो जब तक वो तुमसे काम या फिर तुम्हारे जितना hi शक्तिशाली ho.par इस युद्ध कला से तुम अपनी शक्ति जितनी चाहे उतनी बढ़ा सकते हो.
DIGVIJAY-(man में) wow.....ab आएगा मज़ा .अगर मैंने ये सिख लिया तोह वो विक्रम क्या मई तोह ब्रम्हांड में सबसे शक्तिशाली बन जाऊंगा....
अग्रसेन- तोह शुरू करें!!!!!
दिग्विजय- जैसा आप उचित समझे गुरुवार.......
वहीँ धवलगढ़ में:-
mummyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy..........
क्या हुआ अवनि (पेट नाम ऑफ़ AVANTIKA)kyun चिल्ला रही हो?
अवंतिका- माँ, मेरा नाश्ता कहाँ है?
मई आलरेडी लेट हो गयी हूँ.......
माँ- सुबह सुबह कहाँ जाने की तयारी है.....!!!!
अवंतिका- ओफ्फो mom.kal रात hi तोह बताया था, आज मेरा आउटिंग का प्लान hai.now प्लीज, no मोरे questions.i'm आलरेडी लेट. शनाया के 10 कॉल आ चुके हैं अब तक.
माँ नाश्ता लाती hui......koi काम आराम से किया hai.agar जाना hi था तोह पहले रेडी होना था ना....
अवंतिका- ओह के ों mom...its नॉट ा बिग deal...waise माँ डैड कहाँ है???
MOM-Wo तोह सुबह hi निकल गए ऑस्ट्रेलिया....
अवंतिका- ओह सहित!!!! अब क्या करूँ!!!! इडा..... दादाजी को पटती hun.......mom, दादाजी कहाँ है?
माँ- वो बहार गार्डन में बैठे हैं. क्यों क्या हुआ???
अवंतिका- कुछ नहीं mom.aise hi. (मन में, आपको बताया तोह सीधे मन कर डौगी, पर दादाजी की बात नहीं तालोगी)
फिर अवंतिका ने चुपचाप नाश्ता किया ,माँ को bye बोलकर बहार आ गयी.....
अवंतिका- hi dadu...how अरे ु थिस मॉर्निंग...!!!!!!
दादाजी- I'M फाइन beta.aapki सवारी कहाँ चली सुबह सुबह...!!!!
अवंतिका- वो दादू, फ्रेंड्स के साथ ज़रा ghumne.acha दादू आपने मेरे बर्थडे पर प्रॉमिस किया था की मेरी एक विश आप पूरी करेंगे.
दादाजी- अरे बीटा सब तोह तेरा hi hai.jo चाहिए बता मिल जायेगा.
अवंतिका- पक्का naa.baad में मन मत कीजियेगा.
दादाजी (थोड़े रुबाब में) हम आहूजा hain.apni बात से पीछे नहीं हतेथे.......
अवंतिका- दादू मई ************* ....................
जिससे सुनके पहले तोह दादू शॉक हो गए फिर उदास.......
क्या माँगा होगा अवंतिका NE.......YE तोह खैर अगले अपडेट में पता चलेगा.
चलिए एक छोटा सा इंट्रो इनकी फॅमिली का भी हो जाए.........
दादाजी- गुलशन आहूजा...
दादीजी- शर्मीला आहूजा...
डैड- नविन आहूजा...
मदर- दीप्ती आहूजा....
एल्डर बरोथेर- रियांश आहूजा.....
चाचाजी- निखलेश आहूजा......
चाचीजी- अमृता आहूजा.....
निखलेश सोन- देवांश आहूजा.....
निखलेश डॉटर- शनाया आहूजा....
डेविड- बॉडी गार्ड ऑफ़ नवीन आहूजा.....
सारे चरक्टेर्स का डिस्क्रिप्शन और नेचर उनके रोले आने के टाइम होगा.
आज के लिए इतना HI
आपका अपना V.J........
CHAPTER:- 1
(DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट)
अपडेट- 20
दिग्विजय बेहोश पड़ा tha.dhanur उसके सामने खड़े हुए थे. धनुर ने अपना हाथ दिग्विजय के सर पे rakha.unke हाथों से एक सफ़ेद रौशनी निकली और दिग्विजय के अंदर चली gayi.DIGVIJAY के सारे ज़ख्म भर गए और उससे होश आ गया.
दिग्विजय- धन्यवाद गुरुवार.
धनुर- तुमने रानशूरों को क्यों बुलाया जब तुम तैयार नहीं थे.
दिग्विजय- मैंने अपने अंदर धरती और आकाश दोनों की hi शक्ति महसूस की थी गुरुवार. मुझे लगा मई तैयार हूँ इसीलिए मैंने युद्ध करने की सोची....
धनुर- आधा पेट भोजन कभी भी शरीर को पूरी ऊर्जा नहीं देता पुत्र वैसे hi आधी शक्ति तुम्हे विजयी नहीं बना sakti.jab तक तुम्हारा शरीर दोनों की hi ऊर्जा से पूरी तरह नहीं भर जाता तुम तैयार नहीं हो शक्ति आज़माने की लिए....
दिग्विजय- मुझे माफ़ कर दीजिये guruwar.ab ऐसी गलती नहीं होगी.
दिग्विजय वापस ध्यान में बैठ गया और धनुर गायब हो गए.....
वही दूसरी तरफ:-
मेरी हालत ख़राब हो चुकी thi.mai पिछले 6 घंटे से लगा हुआ था पर अभी तक सांप को एक खरोच तक नहीं पहुंचा पाया tha.wo तोह ाचा है की अब मेरे चोट तुरंत भर जाते थे वर्ण अभी तक तोह मेरा काम तमाम हो चूका होता.
ये साला सांप भी एक नंबर का ढीट tha.saale को लगती hi नहीं thi,maine आग से पानी से चट्टान से हर तरीके का वार अब तक इस्पे कर लिया था पर कुछ फायदा नहीं हुआ था.
अब मैंने आग पानी इत्यादि से लड़ने का हुनर कहाँ से सिख लिया इससे जानने के लिए एक छोटे से फ्लैशबैक में जाते है....
एक रात पहले........
गुरूजी ने जो द्रव पिलाया था उसका असर तुरंत hua.meri थकन पूरी मिट गयी और अब मुझे नींद भी नहीं आ रही thi,guruji ने जो किताब दी थी मैंने उससे पढ़ने की सोची...
जैसे hi मैंने किताब खोली एक नया चमत्कार हुआ. बुक की पेजेज बुक्स से निकलकर चिड़ियों की तरह एक एक करके हवा में उड़ने लगी.
देखते hi देखते साड़ी पेजेज मेरे आस पास फ़ैल गयी...
अब saala,mujhe ये समझ नहीं आ रहा था की गुरूजी ने किताब पढ़ने के लिए दिया है की उड़ाने के लिए....
अभी मई कुछ और सोचता की एक पेज उड़ते हुए मेरे सामने आया और और रूक गया.
वितनुते रहसयम......
(ुनफोल्ड थे सीक्रेट)
उस पेज पर बड़े बड़े अक्षरों में ये शब्द लिखे हुए थे....
मेरे ये शब्द दोहराये. पुरे टेंट में एक तेज़ रौशनी फलिए गयी, उस रौशनी के काम होते hi सारे पेजेज एक एक करके मेरे आँखों के सामने आते रहे और मई उनमे लिखा मंत्र याद करता रहा.
हर पेज पर शास्त्रों को अस्त्रों की तरह कैसे इस्तेमाल करना है ये लिखा हुआ tha.usme अग्नि और जल का आवाहन mantra,unko पैदा करने की विधि भी लिखी हुई thi.kisi भी शाश्त्र का रूप बदलकर कुछ नया banana,aur भी बोहोत कुछ लिखा था जो आगे चलकर पता chalega.mai करीब 3 घंटे तक पढता gaya.jab भी मई कुछ पढता मुझे ऐसा लगता जैसे मई सिर्फ उस मंत्र को पढ़ hi नहीं रहा हूँ बल्कि शास्त्रों के साथ उनका प्रयोग भी कर रहा hun.ab मुझे काफी कुछ पता चल चूका tha.par इतनी देर तक पढ़ने के बावजूद मई किताब का बस 2 परसेंट hi पढ़ पाया tha.jaise hi मेरे मन में आया की मई अब बाद में padhunga,saare पेजेज वापस बुक में समां gaye.book बांध होकर मेरे हाथों में आ गयी.
GAZAB....ye तोह मेरे मन को भी पढ़ लेती है...
बैक तो प्रेजेंट:-
पर मई हार तोह मान नहीं सकता tha.maine अपने मन को शांत किया और दौड़ पड़ा सांप की aur.taklif ये थी की उसके 3 सर the....isiliye उससे चकमा देना मुश्किल था...
मुझे अपने करीब आता देख उसने अपना ज़हर मेरी तरफ phenka.uska ज़हर ग्रीन कलर का था और काफी ज़्यादा मात्रा में था. मई अपने घुटनो पर स्लाइड करते हुए ज़हर से बचता हुआ आगे निकल गया. अब मैंने दो तरफ़ा हमले की सोची. मैंने तलवार का आवाहन किया. तलवार हाथ में आते hi मैंने उससे सामने की तरफ फेक दिया .
जलम परिग्रहं.........
तलवार उस सांप के एक सर के सामने पहुंचकर रुक गयी और उससे फुल फाॅर्स में पानी निकल कर सांप को लगने lagi.ye फाॅर्स बोहोत ज़्यादा था, सांप को लगते hi वो पीछे जाने laga.ye पहली बार था जब मैंने सांप को बैक फुट में किया tha.mai दौड़ते हुए सांप के पीछे pahuncha.uske फैन में पहुंचकर मैंने एक ज़ोर की छलांग लगाई और DHAADDDDDD....saamp के एक सर को काट दिया....
मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं tha.maine सामने देखा तोह अक्षांत और शैला भी फटी आँखों से मेरी तरफ देख रहे the.abhi मई आगे बढ़ता की शैला के मुँह से एक ज़ोरदार चीख nikli.jab तक मई कुछ समझ पता देर हो चुकी थी
मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे कोई तिघ्टलय बाँध रहा hai.ye उस सांप का फैन था जो मुझे लपेट रहा tha.meri तोह हालत खराब हो gayi.maine ऊपर देखा तोह एक नया झटका मेरा इंतज़ार कर रहा tha...saamp का सर जो मैंने काट दिया था उसकी जगह एक नए सर ने ले ली thi.mera पूरा कॉन्फिडेंस hi ख़त्म हो गया.
इधर सांप अपना फैन लगातार कस्ते hi जा रहा tha...mujhe अपनी हड्डियां टूटती सी लग रही thi.dard की अधिकता से मई बेहोश हो गया.
शैला- NAHIII.......VIKRAM तोह बेहोश हो gaya.hume hi कुछ करना होगा, वर्ण वो बच नहीं पायेगा.....
अक्षांत- हम कुछ नहीं कर सकते शैला. मतिभ्रम का ये नियम है की जो फेज खुद निकले.
शैला- तोह तुमने यही चुनौती क्यों चुनी फिर....
अक्षांत- मुझे क्या पता था की रूपांतरण यन्त्र ऐसा विकराल रूप भी ले सकता hai.MATIBHRAM मैदान की किताब में भी ऐसा कुछ कभी नहीं हुआ है.
शैला- तोह अब हम क्या करें.....!!!!!!
अक्षांत- कुछ नहीं कर सकते hum.jo करेगा विक्रम करेगा.
मेरी आत्मा मेरे शरीर को छोड़ फिर उसी रौशनी के सामने कड़ी थी जहाँ हर दिन ध्यान अवशता में मई पहुँचता हूँ....
रौशनी- क्या हुआ VIKRAM.....itne में hi हार मान gaye.tum इतने कमज़ोर नहीं हो vikram.khud को pehchano.apne अंदर झांको. ये छोटी मोती बाधाएं तुम्हे नहीं रोक sakti.utho, इनका मुकाबला करो.
मई तोह बस उस रौशनी की आवाज़ में hi हो गया था. रौशनी मेरी तरफ बढ़ी और मुझे छू लिया. मुझे एक झटका सा लगा और मेरी आँख खुल गयी....
मई अब भी उस सांप के फैन में फसा हुआ tha.par अब मुझे ज़रा सा भी दर्द नहीं हो रहा tha.mujhe होश में आता देख अक्षांत और शैला में भी जोश आ गया.
अग्नि PRAKATAM.........mere पुरे शरीर से अग्नि निकलने lagi.saamp अग्नि बर्दाश्त नहीं कर पाया और अपना फैन ढीला कर diya.maine एक ऊँची छलांग मारी और सांप के ठीक सामने खड़ा हो गया....
सांप ने अपने तीनो सिरसे एक साथ मेरे ऊपर ज़हर छोड़ा जो की बोहोत ज़्यादा मात्रा में था.
अभूपापपति ( प्रोटेक्शन ) ...मेरे सामने एक शील्ड बन गयी ,जिसमे सारा ज़हर रूक गया.......
अब मुझे ये खेल ख़त्म करना था......
मैंने उसका वार उसपे hi करने की सोची....
विष ब्रमजाते.........
सारा ज़हर जो मेरी बनायीं शील्ड में रूका हुआ tha.wo वापस उसी की तरफ बढ़ गया.
मैंने अपने दोनों हाथ फैलाये, एक हाथ में फायर दिखने लगा और दूसरे में water........maine दोनों हाथों को मिलाया ....संसरवा (फ्लो टुगेदर) और अपने हाथ आगे कर दिए.
फायर और वाटर दोनों एक साथ पर अलग अलग दिशा में फैले गए और जो रूप लिया उससे देख कर अक्षांत और शैला स्तब्ध रह गए...
क्यूंकि मेरे तीनो हथियार ( फायर, वाटर, पोइज़न )
ने भी सांप का रूप ले लिया था. वो सांप कुछ समझ पता उससे पहले hi मेरे तीनो सांपो ने उसके अलग अलग हिस्सों को अपने मुँह के अंदर ले लिया और निगलते चले गए..... और देखते hi देखते उस सांप को पूरा निगल gaye.saamp के ख़त्म होते hi वो तीनो भी गायब हो गए......
सब कुछ SHAANT........aur यहाँ मेरा डांस chalu.......wo भी शादी type.....thodi देर बाद जब मेरा एक्ससिटेमेंट कण्ट्रोल में आया तोह मैंने सामने देखा जहाँ अक्षांत और शैला ऐसे खड़े थे जैसे कोई भूत देख लिया ho..abhi मई उनके पास जाता की
कडकडकडडडडकडडडडडड......
एक ज़ोर की बिजली कड़की और उसके बीच में से एक साधु टाइप के आदमी बहार निकले और मेरे पास aaye.abhi मई कुछ बोलने वाला hi था की अक्षांत और शैला दौड़ते हुए आये और उनके आगे झुक गए
उनको ऐसा करते देख मई भी झुक गया.
अननोन- उठो बचो.....
हम तीनो उठ गए.
मई- आप कौन है?
उनके जवाब देने से पहले अक्षांत ने जवाब दे दिया.
अक्षांत- विक्रम ये फ्लोसान्टो हैं.....
मति भ्रम चुनौती के RACHAYITA......yahi नहीं इस ब्रम्हांड में जितनी भी चक्रव्यू hain,uske रचयिता भी यहीं है....
फ्लोसान्टो- विक्रम, मई तुम्हारे पराक्रम से बोहोत प्रसन्न hun.aaj तक किसीने मेरे इस चुनौती को इतनी जल्दी और इतनी सहजता से पार नहीं क्या है.
ले, कहाँ से आसानी से पार kiya.saare नुत बोल्ट ढीले हो गए इस चक्कर me...par बोलता भी क्या.
मई- धन्यवाद फ्लोसान्टो.......
फ्लोसान्टो- मई तुम्हे कुछ देना चाहता हूँ पुत्र.
फिर फ्लोसान्टो ने मेरे सर के ऊपर हाथ रखा और कुछ budbudaye.unke हाथों से रौशनी निकलकर मेरे अंदर सामने lagi........meri आँखें बंद हो gayi.gyaan का सागर मेरे अंदर सामने लगा.
फ्लोसान्टो ने अपना हाथ हटाया और बोले.....
फ्लोसान्टो- putra,maine तुम्हारे अंदर इस ब्रम्हांड के सारे चक्रव्यू के राज़ दाल दिए hain.ab ऐसा कोई चक्रव्यू नहीं होगा ऐसी कोई गुत्थी (पजल) नहीं हग ी जिससे तुम सुलझा नहीं sakte.yahi नहीं अगर तुम चाहो तोह खुद भी बड़ी से बड़ी चक्रव्यू की रचना कर अपने दुश्मन को फसा सकते हो.......
मैंने फ्लोसान्टो के पाँव छुए, VIJAYIBHAV.....kehkar वो गायब हो गए.......
उनके गायब होते hi मतिभ्रम मैदान भी गायब हो गया और हम वापस जंगल में आ gaye.par ये क्या अभी भी दिन निकला हुआ tha.maine अक्षांत की तरफ dekha.wo मेरी कन्फूसिओं समझ गए.
अक्षांत- रूपांतरण यन्त्र के रूप बदलते hi हमारा समय चक्र रूक गया था.
पर आज का प्रशिक्षण यहीं रोकते हैं. विक्रम तुम जाकर विश्राम karo.mai दोनों को bye बोलकर निकल गया.
शैला- विक्रम अग्नि और पानी दोनों का इस्तेमाल इतने अचे से कैसे कर रहा tha.hume उससे पूछना चाहिए.
अक्षांत- सिर्फ अग्नि और पानी का hi नहीं और भी बोहोत कुछ किया है आज usne.par हमे पूछने की ज़रुरत नहीं.
शैला- क्यों???
अक्षांत- जब विक्रम ने शक्ति का इस्तेमाल करना आरम्भ लिया था, तब गुरूजी ने मेरे मस्तिष्क से जुड़कर कहा था की सही वक़्त पर हमे सब पता चल जायेगा.
शैला- ओह्ह्ह!!!! चलो फिर, हम भी ऊपर चलते हैं....
वहीँ दूसरी और:-
दिग्विजय को ध्यान में बैठे 2 दिन हो गए the....usse अपने अंदर असीम शक्ति का आभास हो रहा tha.par पिछली बार की गलती की वजह से वो कोई चांस नहीं ले रहा tha.par अब उसके अंदर ऊर्जा इतनी बढ़ गयी थी की वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था.....
ऑंखें खोलो PUTRA.TUM तैयार हो......
दिग्विजय ने तुरंत अपनी आखें खोल di.ye आवाज़ दिग्विजय में अंतर्मन से आयी थी जो धनुर ने कही thi.par ऊर्जा इतनी अधिक थी की दिग्विजय को ऊर्जा सँभालने में कुछ वक़्त लगा.
दिग्विजय- युद्ध विस्पृधा.............
और 10 वारियर्स प्रकट hue......aur दिग्विजय की तरफ दोनों तरफ से बढ़ने लगे. इस बार दिग्विजय ने कुछ नहीं kiya.bas चुप चाप खड़ा raha.jaise hi वारियर्स ने वार करने के लिए अपने तलवार उठाये, दिग्विजय ने अपना एक हाथ आगे किया, और धरती का आवाहन किया......
PRATIGHAATH.....ek मिटटी के कलर की रौशनी निकली और वारियर्स पे पड़ी और एक तरफ के वारियर्स खुद मिटटी हो गए.
दिग्विजय ने अपना दूसरा हाथ आगे किया और आकाश का आवाहन किया, PRATIGHAATH......DIGVIJAY के हाथों से तेज़ बिजली निकली और वारियर्स राख हो गए.
एक तेज़ गड़गड़ाहट के साथ धनुर प्रकट गए पर इस बार वो अकेले नहीं थे उनके साथ थे अग्रसेन...........
अग्रसेन- बोहोत अचे baalak.bohot काम वक़्त में तुम काफी कुछ सिख गए ho.yahan से धनुर का काम समाप्त हुआ. आगे का प्रशिक्षण मई तुम्हे दूंगा.
दिग्विजय ने धनुर का आशीर्वाद लिया. धनुर गायब हो गए....
अग्रसेन- अभी तक तुमने अस्त्र और शास्त्र को सीधे तरीके से चलना सीखा है और धरती एवम आकाश की शक्ति को वश में करना जाना hai.ab मई तुम्हे "समायोजन विबजूति" (कंबाइन पावर) सिखाऊंगा.....
जितने भी युद्ध कला अभी तक तुमने सीखे हैं उससे तुम सामने वाले को तभी हरा सकते हो जब तक वो तुमसे काम या फिर तुम्हारे जितना hi शक्तिशाली ho.par इस युद्ध कला से तुम अपनी शक्ति जितनी चाहे उतनी बढ़ा सकते हो.
DIGVIJAY-(man में) wow.....ab आएगा मज़ा .अगर मैंने ये सिख लिया तोह वो विक्रम क्या मई तोह ब्रम्हांड में सबसे शक्तिशाली बन जाऊंगा....
अग्रसेन- तोह शुरू करें!!!!!
दिग्विजय- जैसा आप उचित समझे गुरुवार.......
वहीँ धवलगढ़ में:-
mummyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy..........
क्या हुआ अवनि (पेट नाम ऑफ़ AVANTIKA)kyun चिल्ला रही हो?
अवंतिका- माँ, मेरा नाश्ता कहाँ है?
मई आलरेडी लेट हो गयी हूँ.......
माँ- सुबह सुबह कहाँ जाने की तयारी है.....!!!!
अवंतिका- ओफ्फो mom.kal रात hi तोह बताया था, आज मेरा आउटिंग का प्लान hai.now प्लीज, no मोरे questions.i'm आलरेडी लेट. शनाया के 10 कॉल आ चुके हैं अब तक.
माँ नाश्ता लाती hui......koi काम आराम से किया hai.agar जाना hi था तोह पहले रेडी होना था ना....
अवंतिका- ओह के ों mom...its नॉट ा बिग deal...waise माँ डैड कहाँ है???
MOM-Wo तोह सुबह hi निकल गए ऑस्ट्रेलिया....
अवंतिका- ओह सहित!!!! अब क्या करूँ!!!! इडा..... दादाजी को पटती hun.......mom, दादाजी कहाँ है?
माँ- वो बहार गार्डन में बैठे हैं. क्यों क्या हुआ???
अवंतिका- कुछ नहीं mom.aise hi. (मन में, आपको बताया तोह सीधे मन कर डौगी, पर दादाजी की बात नहीं तालोगी)
फिर अवंतिका ने चुपचाप नाश्ता किया ,माँ को bye बोलकर बहार आ गयी.....
अवंतिका- hi dadu...how अरे ु थिस मॉर्निंग...!!!!!!
दादाजी- I'M फाइन beta.aapki सवारी कहाँ चली सुबह सुबह...!!!!
अवंतिका- वो दादू, फ्रेंड्स के साथ ज़रा ghumne.acha दादू आपने मेरे बर्थडे पर प्रॉमिस किया था की मेरी एक विश आप पूरी करेंगे.
दादाजी- अरे बीटा सब तोह तेरा hi hai.jo चाहिए बता मिल जायेगा.
अवंतिका- पक्का naa.baad में मन मत कीजियेगा.
दादाजी (थोड़े रुबाब में) हम आहूजा hain.apni बात से पीछे नहीं हतेथे.......
अवंतिका- दादू मई ************* ....................
जिससे सुनके पहले तोह दादू शॉक हो गए फिर उदास.......
क्या माँगा होगा अवंतिका NE.......YE तोह खैर अगले अपडेट में पता चलेगा.
चलिए एक छोटा सा इंट्रो इनकी फॅमिली का भी हो जाए.........
दादाजी- गुलशन आहूजा...
दादीजी- शर्मीला आहूजा...
डैड- नविन आहूजा...
मदर- दीप्ती आहूजा....
एल्डर बरोथेर- रियांश आहूजा.....
चाचाजी- निखलेश आहूजा......
चाचीजी- अमृता आहूजा.....
निखलेश सोन- देवांश आहूजा.....
निखलेश डॉटर- शनाया आहूजा....
डेविड- बॉडी गार्ड ऑफ़ नवीन आहूजा.....
सारे चरक्टेर्स का डिस्क्रिप्शन और नेचर उनके रोले आने के टाइम होगा.
आज के लिए इतना HI
आपका अपना V.J........