hotaks's latest activity

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    कुछ देर बाद ही जब मैं बाहर पहुंचा तो वहां एक काला घोडा तैयार खडा था। वह काफी मुस्तैदी के साथ खड़ा था। उसकी पीठ पर एक सुनहरी जीन लगी थी।...
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    चन्द्रावती की वह दशा मुझसे असहनीय हो गई। अंत में उस शाही व्यक्ति ने चंद्रावती के बाल पकड़ कर उसके चेहरे पर तमाचे मारे। “बेताल.... अगिया...
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    वह कमरे से बाहर निकल रही थी, इसलिए मैं वहां से खिसक गया। आगे जाकर मैं एक दरवाजे की आड़ में खडा हो गया। जैसे ही वह पास से गुजरी मैं उसका...
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    कालिया मसान मेरे पैरों पर गिर पड़ा। “मुझे माफ़ कर दो... मेरा कोई कसूर नहीं...।” वह गिड़गिड़ाया। “यह ठीक कहता है आका... इस बेचारे का...
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    दसवीं रात ऐसी कोई घटना नहीं घटी। शान्ति छाई रही... फिर मुझे दूर बहुत दूर धुन्ध में एक छाया दिखाई दी। वह काफी देर से मुझे निहार रही थी पर...
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    वह मुझसे काफी दूर थी पर चाँद उदय होने पर उसने सीटी बजाकर मुझे सचेत करना था। लगभग आधा घंटे बाद सीटी की धीमी आवाज मेरे कानों में पड़ी और...
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    गढ़ी में कुल मिला कर चालीस इंसान रहते थे। आठ घोड़े और बंदूकों से लैस पहरेदार भी वहीं रहते थे। मैं चन्द्रावती द्वारा लाई गई जानकारी को...
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    और मेरे लिए यह रात और भी कठिन थी। मैं उसे गन्दी भावना से कैसे देख सकता था। उसके प्रति तो मेरे मन में आदर था। यह मुझसे कैसे हो सकेगा ...
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    आखिर यह दिन भी आ गया जब बैतालिक साधना का प्रथम चरण शुरू हो गया। मैंने सवेरे-सवेरे शमशान के तट पर स्नान किया और साधना के वस्त्र पहन लिए।...
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    उस सारी पुस्तक को सुनने के बाद मेरे मस्तिष्क में विशेष परिवर्तन आता गया। मैं अपने निश्चय से पीछे नहीं हटना चाहता था। मुझे आभास हुआ जैसे...
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    सारी रात अनेक विचारधाराओं में बीती। मैं करवटें बदल-बदल कर यही सोचता रहा कि ठाकुर से कैसे बदला लूँ। सारी घटनाएँ मेरे मष्तिष्क में चलचित्र...
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    भानुप्रताप को संदेह था कि कहीं तुम अपने पिता का बदला न लो और बेताल का प्रयोग उस पर न शुरू कर दो। मैंने गिड़गिड़ा कर उसे बहुतेरा समझाया...
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    “ओह्ह – वह तो मामूली ठोकर थी... और जब कोई अंधा ठोकर खाता है तो... उसके लिए ऐसी ठोकरें और भी मामूली हो जाती है, क्योंकि उसका सारा जीवन...
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    उठते ही जो पाँव फिसला और इस बार जो गिरा तो महसूस किया कि मैं पानी के गार में हूँ। वह काफी गहरा था, पाँव नीचे नहीं टिक रहे थे। मैं हाथ...
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    “बस साहब बहादुर पहुँचने ही वाले हैं... शमशान के पास आ गये है। नदी का शोर नहीं सुनाई देता क्या ?” “सुनाई पड़ा था, इसलिए पूछा है। क्यों...
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