hotaks's latest activity

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    #29 “सब कुछ छोड़ कर बस मटरगश्ती करनी है तुमको “ चाची ने ताना दिया. मैं- तुम को क्या काम है मुझसे . चाची- अब कहाँ ध्यान है तुम्हारा...
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    #28 “क्योंकि ये दुनिया वैसी नहीं है जैसी तू सोचता है, ये नफरत ये दुश्मनी कहाँ से शुरू हुई , किसने शुरू की इसको कोई नहीं जानता है...
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    #२7 जिस चीज को पाने की हसरत थी मुझे उसे मुट्ठी में दबा कर मसला ही था की तभी बाहर से कोई दरवाजा जोर जोर से पीटने लगा था. मेरा माथा घूम...
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    चारो तरफ भगदड़ मची हुई थी. मालूम हुआ की किसी ने सुनार पर हमला कर दिया था . कुछ लोग उसे गाड़ी में पटक रहे थे , उसका एक हाथ झूल रहा था...
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    #25 “मेरे होश तो उसी दिन से उड़े हुए है जब से माँ का संदेसा आया है , मैं तुझे बता नहीं सकती क्या हाल है तब से मेरा ”उसने कहा मैं- तू...
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    #24 “मनीष, उधर क्या कर रहा है , इधर आ मेरे पास ” पिछे से ताई ने मुझे आवाज लगाईं इसे भी अभी ही आना था . “आ रहा हूँ दो मिनट में ”...
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    सही कहा आपने भाई, मेरे कहने का मतलब था कि यहां 90% लेखक एक ही थीम पर कहानी लिख रहे है जिसमें सबकी परिस्थितियों का एक जैसा ही वर्णन है एक...
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    #23 “तुम जानती हो ये किसका है ” मैंने फिर पूछा “मुझे नहीं मालूम , ” ताई ने कहा मैं- तुम जानती हो ताई- तू जा यहाँ से , मैं- बताओ...
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    #22 मैं मीता को जाते हुए देखता रहा, मैं चाहता तो उसे रोक सकता था . मेरा यहाँ आने का मकसद ही था उसके साथ वक्त बिताना . उसकी सांवली...
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    मीता और पिस्ता, इनके बिना मेरा अस्तित्व ही नहीं, मेरे अक्स मे इनकी छाया आप बार बार देखेंगे, ये जिन्दगी जो मैंने उनके साथ जी बस मैंने ही...
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    # जितना मैं ताई के करीब जाने की कोशिश करता तभी कोई न कोई आकर बीच में पंगा कर देता . झल्लाते हुए मैं बाहर गया तो देखा की बैंक का...
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    #20 उस पायल की झंकार को मैं हजारो में भी पहचान सकता था , मेरे सामने मेरे बचपन की दोस्त खड़ी थी, अगर चाचा वहां पर नहीं होता तो कब का...
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    #19 “क्या किया मैंने , कुछ भी तो नहीं अभी तो बस सो कर उठा हूँ ” मैंने कहा ताई- झूठ बोलता है, मैंने तुझसे कितनी दफा कहा इस आग से मत...
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    सच कहूँ तो हर अपडेट को लिखते समय सोचता हूं कि अब ये कहानी शुरू होगी, अब शुरू होगी पर हर अपडेट उलझ जाता है मेरे मन के जैसे, ये कहानिया...
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    #18 वो मुझसे बस थोड़ी ही दूर थी, इतना की मैं बस हाथ आगे बढ़ा कर उन मादकता से भरे नितम्बो को सह्ला सकता था . मेरे होंठो पर थूक सूख गया...
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