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काय के हाथ का जोरदार थप्पड़ गाल पैर पड़ते hi मीणा की हिम्मत नहीं हुई की वो कुछ और कह पाती इसलिए चुप चाप वह से उठ कर अपने कमरे में चली गयी जिसके जाते hi काय राम को देखते हुए बोली
काय- माफ़ कर न मेरे लाल ये सब मेरी hi गलती का नतीजा है जो तुझे इतना सुन ने को मिला
राम- ससष्ठ शांत हो जाइये आप सब ठीक हो जायेगा आप बस मुस्कुराती रहा करो दर्द में तो आप बिस्टेर पैर hi अछि लगती हो वो भी बिना कपड़ो के मेरी प्यारी माँ

राम की बात का मतलब समझ आते hi काय के गालो पैर शर्म की लाली चा गयी और मुँह पैर हाथ रखते हुए बोली
काय- कुछ भी बोल देता है बिना सोचे पागल लड़के अगर कोई सुन लेता तो क्या होता पता है न चल अब जा मुझे काम कर ने दे
राम- हां तो कर लो में कोण सा आपको पकड़ कर खड़ा हु वैसे पागल भी आप ने hi बनाया है अपना ये गदराया जिस्म दिखा कर जिसे देखते hi होश खो जाते है
काय- तू न बहुत बिगड़ गया है तेरी पिटायी कर नई पड़ेगी समझा तू
कहने को तो काय राम को डाट रही थी पैर अंदर hi अंदर राम की बाते सुनकर उसकी राम काली भी गीली हो ने लगी थी जिस का एहसास होते hi वो अपने कमरे की तरफ दौड पड़ी जिसे देख कर राम भी अपनी गदरायी माँ के पीछे पीछे हो लिया और रूम के दरवाज़े पैर hi उसे दबोचते हुए बोलै
राम- इतनी भी जल्दी क्या है माँ जो मेरी बात भी पूरी नहीं होने दी हम्म्म
काय- आअह्ह्ह राम छोड़ बीटा दरवाज़ा खुला है कोई भी देख सकता है ऊऊफफफफ हैट जा जो कर न है रात को कर लियो पैर अभी के लिए रुक जा
राम- स्स्स्सस्छ्हःहः एक दम शांत प्ल्ज़ माँ बस मेरी आँखों में देखो जहा प्यार hi प्यार है आप के लिए
काय- में जानती हु मेरे बच्चे पैर अभी सही वक़्त नहीं है दूसरा वो कलमुही भी आयी हुई है
राम- उसकी फ़िक्र मत करो आप उसका इलाज़ है मेरे पास देख न कैसे ठीक करता हु उसे भी फिलहाल तो बस अपने होठो का रसपान कर ने दो
काय कुछ और कहती उस से पहले hi राम ने उसके होठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उन कपट होठो को धीरे -2 चूस ने लगा
अपने होठो पैर राम के गरम होठो का एहसास होते hi काय के जिस्म हज़ारो वाट बिजली के झटके से लगे और वो भी राम के प्यार में बहती सी चली गयी
दोनों माँ बेटे दुनिया से बेखबर एक दूसरे के जिस्म से खेलते हुए न जाने किस और बढ़ जाते की तभी निचे से आवाज़ें आने लगी जिन्हे सुनते hi दोनों झटके से अलग हुए और खुद नियंत्रित कर के निचे की तरफ गए जहा वीरा के साथ किशोर खड़ा हुआ कुछ बातें कर रहा था
किशोर- पैर ऐसा कैसे हो सकता है वीरा वो ज़मीन तो हमारी हद में आती है फिर ये सब कैसे हुआ
वीरा- वो जिस किसान की थी उसे मार कर उसने अपने नाम करवा लिया था मालिक
किस ने क्या नाम करवा लिया वीरा बाबा ( पीछे से आता हुआ राम बोलै जिस की बात का जवाब किशोर ने सब कुछ बता कर दिया)
राम- कोई बात नहीं पापा इस में इतनी टेंशन लेने की क्या बात है
वीरा- बात है राम बीटा दरसल नदी का बहाव उधर से घूमता है और अगर उन्होंने उसे रोक दिया तो हमारे गांव में पानी की किलत हो जाएगी
राम- आप निश्चित रहे ऐसा कुछ नहीं होगा में हु न
किशोर- पैर बेटे कैसे कुछ नहीं होगा ज़मीन उनके अधीन होगी तो हम कुछ कह भी नहीं पाएंगे
राम- ज़मीन अधीन होगी तब न पापा जी और अगर में कहु की उस ज़मीन के कागज़ मेरे पास है तो
किशोर- क्या पैर कैसे वीरा तो कह रहा है उन्होंने उसके मालिक को मार दिया था और कागज़ अपने नाम करवा लिए
राम- जैसे उन्होंने उसे मारा ऐसे hi उन्हें मैंने मारा बात ख़तम अब जाइये और टेंशन फ्री रहिये
राम की बात सुनकर वीरा और किशोर के चेहरे पैर मिले जुले भाव आये और वो दोनों अपनी राह पे निकल गए जिस के बाद राम मीणा के कमरे की तरफ निकल पड़ा जहा एंटर करते hi सोफे पैर बैठी मीणा दिखी जो उसे खा जाने वाली नज़रो से देख रही थी
राम- में अंदर आ सकता हु क्या मौसी जी
मीणा- तुझे कहा था न मौसी में प्रिय और पीहू की हु तेरी नहीं मनहूस कही के
राम- चलो ाचा है आप ने पहले hi क्लियर कर दिया की आप मुझे अपना नहीं मानती अब बात कर ने में जायदा आसानी होगी
मीणा- आसानी गयी भाड़ में पहले तू मेरे कमरे से बहार निकल समझा वर्ण धक्के मार कर निकाल दूंगी
राम- शायद आप प्यार की भाषा समझना नहीं चाहती तो यही सही और अब दूसरी बात ये घर मेरा है न की तेरे बाप तो इसलिए अब चुप चाप मेरी बात सुन वर्ण तेरी छूट का भोसड़ा बना ने में मुझे ज्यादा देर नहीं लगेगी समझी
मीणा- क्या बोलै तू कुत्ते तू मीणा की छूट का भोसड़ा बनाएगा अरे तेरे जैसे न जाने कितने निगल गयी में और डकार तक नहीं ली और तू मीणा को धमकी दे रहा है ( आँखों को नाचते हुए )
राम- निगल गयी होगी क्यों की तेरा पाला अब तक राम से नहीं पड़ा था पैर आज के बाद तू चुदाई के नाम से भी डरेगी और हर वक़्त खुद को कोसेगी की क्यों तू यहाँ आयी
मीणा- बड़ा घमंड है तुझे अपनी मर्दानगी पे तो चल तू भी क्या याद रखेगा की जिस मीणा की पेअर की जुटी के बराबर भी नहीं है तू वो तुझे आज एक मौका देती है अपनी मर्दानगी दिखने का और साथ hi ये वचन भी की अगर तू सच में मीणा को हरा पाया तो ये मीणा तेरी गुलाम बन कर रहेगी उम्र भर (राम को इशारे से आगे बढ़ ने का कहते हुए)
राम- गलती कर दी मीणा रानी बिना सोचे समझे वचन दे कर गलती कर दी जिस का एहसास तुझे बहुत जल्द होगा ( अपने लुंड को देखते हुए जो जीन्स में भी बड़ा खतरनाक लग रहा था जिसे देख कर एक बार को मीणा ने भी थूक जातक लिया)
दोस्तों अपडेट दे दिया है और एक बात अपडेट उतने hi दे पाउँगा जितना समय होगा पैर हां स्टोरी कम्पलीट जरूर होगी धीरे धीरे hi सही
काय के हाथ का जोरदार थप्पड़ गाल पैर पड़ते hi मीणा की हिम्मत नहीं हुई की वो कुछ और कह पाती इसलिए चुप चाप वह से उठ कर अपने कमरे में चली गयी जिसके जाते hi काय राम को देखते हुए बोली
काय- माफ़ कर न मेरे लाल ये सब मेरी hi गलती का नतीजा है जो तुझे इतना सुन ने को मिला
राम- ससष्ठ शांत हो जाइये आप सब ठीक हो जायेगा आप बस मुस्कुराती रहा करो दर्द में तो आप बिस्टेर पैर hi अछि लगती हो वो भी बिना कपड़ो के मेरी प्यारी माँ
राम की बात का मतलब समझ आते hi काय के गालो पैर शर्म की लाली चा गयी और मुँह पैर हाथ रखते हुए बोली
काय- कुछ भी बोल देता है बिना सोचे पागल लड़के अगर कोई सुन लेता तो क्या होता पता है न चल अब जा मुझे काम कर ने दे
राम- हां तो कर लो में कोण सा आपको पकड़ कर खड़ा हु वैसे पागल भी आप ने hi बनाया है अपना ये गदराया जिस्म दिखा कर जिसे देखते hi होश खो जाते है
काय- तू न बहुत बिगड़ गया है तेरी पिटायी कर नई पड़ेगी समझा तू
कहने को तो काय राम को डाट रही थी पैर अंदर hi अंदर राम की बाते सुनकर उसकी राम काली भी गीली हो ने लगी थी जिस का एहसास होते hi वो अपने कमरे की तरफ दौड पड़ी जिसे देख कर राम भी अपनी गदरायी माँ के पीछे पीछे हो लिया और रूम के दरवाज़े पैर hi उसे दबोचते हुए बोलै
राम- इतनी भी जल्दी क्या है माँ जो मेरी बात भी पूरी नहीं होने दी हम्म्म
काय- आअह्ह्ह राम छोड़ बीटा दरवाज़ा खुला है कोई भी देख सकता है ऊऊफफफफ हैट जा जो कर न है रात को कर लियो पैर अभी के लिए रुक जा
राम- स्स्स्सस्छ्हःहः एक दम शांत प्ल्ज़ माँ बस मेरी आँखों में देखो जहा प्यार hi प्यार है आप के लिए
काय- में जानती हु मेरे बच्चे पैर अभी सही वक़्त नहीं है दूसरा वो कलमुही भी आयी हुई है
राम- उसकी फ़िक्र मत करो आप उसका इलाज़ है मेरे पास देख न कैसे ठीक करता हु उसे भी फिलहाल तो बस अपने होठो का रसपान कर ने दो
काय कुछ और कहती उस से पहले hi राम ने उसके होठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उन कपट होठो को धीरे -2 चूस ने लगा
अपने होठो पैर राम के गरम होठो का एहसास होते hi काय के जिस्म हज़ारो वाट बिजली के झटके से लगे और वो भी राम के प्यार में बहती सी चली गयी
दोनों माँ बेटे दुनिया से बेखबर एक दूसरे के जिस्म से खेलते हुए न जाने किस और बढ़ जाते की तभी निचे से आवाज़ें आने लगी जिन्हे सुनते hi दोनों झटके से अलग हुए और खुद नियंत्रित कर के निचे की तरफ गए जहा वीरा के साथ किशोर खड़ा हुआ कुछ बातें कर रहा था
किशोर- पैर ऐसा कैसे हो सकता है वीरा वो ज़मीन तो हमारी हद में आती है फिर ये सब कैसे हुआ
वीरा- वो जिस किसान की थी उसे मार कर उसने अपने नाम करवा लिया था मालिक
किस ने क्या नाम करवा लिया वीरा बाबा ( पीछे से आता हुआ राम बोलै जिस की बात का जवाब किशोर ने सब कुछ बता कर दिया)
राम- कोई बात नहीं पापा इस में इतनी टेंशन लेने की क्या बात है
वीरा- बात है राम बीटा दरसल नदी का बहाव उधर से घूमता है और अगर उन्होंने उसे रोक दिया तो हमारे गांव में पानी की किलत हो जाएगी
राम- आप निश्चित रहे ऐसा कुछ नहीं होगा में हु न
किशोर- पैर बेटे कैसे कुछ नहीं होगा ज़मीन उनके अधीन होगी तो हम कुछ कह भी नहीं पाएंगे
राम- ज़मीन अधीन होगी तब न पापा जी और अगर में कहु की उस ज़मीन के कागज़ मेरे पास है तो
किशोर- क्या पैर कैसे वीरा तो कह रहा है उन्होंने उसके मालिक को मार दिया था और कागज़ अपने नाम करवा लिए
राम- जैसे उन्होंने उसे मारा ऐसे hi उन्हें मैंने मारा बात ख़तम अब जाइये और टेंशन फ्री रहिये
राम की बात सुनकर वीरा और किशोर के चेहरे पैर मिले जुले भाव आये और वो दोनों अपनी राह पे निकल गए जिस के बाद राम मीणा के कमरे की तरफ निकल पड़ा जहा एंटर करते hi सोफे पैर बैठी मीणा दिखी जो उसे खा जाने वाली नज़रो से देख रही थी
राम- में अंदर आ सकता हु क्या मौसी जी
मीणा- तुझे कहा था न मौसी में प्रिय और पीहू की हु तेरी नहीं मनहूस कही के
राम- चलो ाचा है आप ने पहले hi क्लियर कर दिया की आप मुझे अपना नहीं मानती अब बात कर ने में जायदा आसानी होगी
मीणा- आसानी गयी भाड़ में पहले तू मेरे कमरे से बहार निकल समझा वर्ण धक्के मार कर निकाल दूंगी
राम- शायद आप प्यार की भाषा समझना नहीं चाहती तो यही सही और अब दूसरी बात ये घर मेरा है न की तेरे बाप तो इसलिए अब चुप चाप मेरी बात सुन वर्ण तेरी छूट का भोसड़ा बना ने में मुझे ज्यादा देर नहीं लगेगी समझी
मीणा- क्या बोलै तू कुत्ते तू मीणा की छूट का भोसड़ा बनाएगा अरे तेरे जैसे न जाने कितने निगल गयी में और डकार तक नहीं ली और तू मीणा को धमकी दे रहा है ( आँखों को नाचते हुए )
राम- निगल गयी होगी क्यों की तेरा पाला अब तक राम से नहीं पड़ा था पैर आज के बाद तू चुदाई के नाम से भी डरेगी और हर वक़्त खुद को कोसेगी की क्यों तू यहाँ आयी
मीणा- बड़ा घमंड है तुझे अपनी मर्दानगी पे तो चल तू भी क्या याद रखेगा की जिस मीणा की पेअर की जुटी के बराबर भी नहीं है तू वो तुझे आज एक मौका देती है अपनी मर्दानगी दिखने का और साथ hi ये वचन भी की अगर तू सच में मीणा को हरा पाया तो ये मीणा तेरी गुलाम बन कर रहेगी उम्र भर (राम को इशारे से आगे बढ़ ने का कहते हुए)
राम- गलती कर दी मीणा रानी बिना सोचे समझे वचन दे कर गलती कर दी जिस का एहसास तुझे बहुत जल्द होगा ( अपने लुंड को देखते हुए जो जीन्स में भी बड़ा खतरनाक लग रहा था जिसे देख कर एक बार को मीणा ने भी थूक जातक लिया)
दोस्तों अपडेट दे दिया है और एक बात अपडेट उतने hi दे पाउँगा जितना समय होगा पैर हां स्टोरी कम्पलीट जरूर होगी धीरे धीरे hi सही