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- Dec 5, 2013
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जब खुशिया घर आती है तो माहोल खुद बा खुद आनंदमय हो जाता जिसे सब को अपनाना चाहिए पैर इस घर में अभी भी 2 जान ऐसे थे जिन्हे ये खुशिया रास नहीं आ रही थी जिन में एक था विनोद जिसके छह ने या न छह ने से कोई जायदा फर्क नहीं पद ने वाला था पैर पीहू की कड़वाहट दूर कर न जरुरी था जिसका अंदाज़ा काय को हो चूका था क्युकी किशोर के इतने दिनों बाद घर आने पैर भी पीहू निचे नहीं आयी थी इसलिए काय hi उसके रूम में गयी जहा पीहू अपनी माँ को देख कर बोली
पीहू- हां माँ बोलिये अब किस लिए आयी है आप आपका परिवार तो पूरा हो गया न
काय- अभी नहीं क्युकी मेरे परिवार का एक सद्श्ये अभी खुशियों में शामिल नहीं हुआ है और में उसे hi लेने आयी हु
पीहू- रहने दो माँ ये झूठा प्यार किसी और को दिखाना मुझे नहीं अगर आप मुझसे प्यार करती तो उस मनहूष के लिए मुझे थप्पड़ नहीं मारती आप जाओ यहाँ से मुझे किसी से कोई बात नहीं करनी
काय- तुम अपनी जगह ठीक हु मेरी बच्ची क्युकी ये सब मैंने hi तो सिखाया है तुम्हे में hi अपनी गलती को छुपा कर उसे मनहूष मानती रही हु तो तुम भी वही सब देख कर मेरा साथ देती रही पैर मेरी बच्ची गलती तो बड़ो से भी हो जाती है न और फिर तो ये तो सोच जिसे हम साड़ी ज़िन्दगी बुरा भला कहते रहे उसके दिल में हमारे लिए जरा सा भी शिकवा नहीं तो क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता की हम भी अपनी भूल को सुधार कर आगे बढे
पीहू- कैसे आगे बधु माँ कैसे आप ने जो शिखाया वो शिखति गयी जो कहा वो करती गयी फिर कैसे अब उस से नज़र मिलौ जिसे ज़िन्दगी भर कोष्टी आयी हु क्या मुँह लेकर जाऊ उसके सामने आप hi बताओ ( सुबक ते हुए )
पीहू को यु सुबकते हुए रोटा देख कर काय उसे गले से लगा कर प्यार से बोली
काय - बस मेरी बच्ची चुप हो जा और तुझे किस बात की फ़िक्र है तो जा और हक़ से उसे गले लगा कर जन्मदिन की बधाई दे फिर देख तुझे कुछ कह ने या कर ने की जरुरत नहीं पड़ेगी वो खुद तुझे प्यार देगा और फिर किस भाई बहिन में लड़ाई नहीं होती वैसे भी इस वक़्त तो उसे और भी जायदा जरुरत है हम सब के साथ की है न तो मेरी अछि गुड़िया की तरह मेरी ये बात भी मान कर अपने भाई से मिल चल
पीहू अपनी माँ की बात मान अपना चेहरा साफ़ करती हुई उनके साथ निचे चल दी पैर घबराहट अभी भी थी जो होनी भी चाहिए आखिर बर्ताव जो ऐसा किया था आज तक उस ने राम के साथ इसलिए थोड़ी सी हिम्मत जुटती हुई वो निचे राम के सामने जा कर बैठ गयी और बहुत hi धीमी आवाज़ में बोली
पीहू- मुझे माफ़ कर दे भाई में बहुत शर्मिंदा हु अपने बर्ताव के लिए और जन्मदिन की बधाई हो बहुत बहुत
राम- आप प्यारी दीदी हो मुझे कोई शिकायत नहीं है आप से वैसे भी आप खिली खिली सी अछि लगती हो न की यु रोंदू टाइप ( इतना कहते hi राम ने प्यार से उसकी नाक को खींचा और गले से लगा लिया)
जैसे hi राम ने पीहू को गले से लगाया तो पीहू जो खुद को संभाले हुई थी उसकी आँखों से आंसू चालक उठे और वो अपने भाई के गले से लगी हुई जोर से रोने लगी तो राम ने उसको तिघ्टलय हुग कर लिया और प्यार से उसके माथे को चूमते हुए बोलै
राम- बस दीदी शांत हो जाओ सब ठीक है में बिलकुल नाराज़ नहीं हु और आप न रो कर ये मत समझना की में अपना गिफ्ट भूल जाऊंगा समझी न चलो अब रोना बंद करो यार मेरा जन्मदिन रो कर मानना है क्या
राम की बात सुनकर सब है पड़े तो पीहू की भी हसी छूट गयी और वो राम से अलग हो कर अपने पापा के पास गयी तो राम प्रिय के पास जा कर बोलै जो सब को खुश देख कर बहुत खुश हो रही थी
राम- आप हस्ती हुई बहुत अछि लगती हो हमेशा हस्ती रहा करो और थैंक यू मेरे लिए मंदिर में दुआ कर ने के लिए
प्रिय ने राम को देखा और फिर मुस्कराते हुए बोली
प्रिय- ये मुस्कान भी तूने hi दी है राम वैसे सच कहु तो ऐसा hi परवार चाहती थी में हमेशा से जिस में प्यार हो अपनापन हो आज ये जो भी हुआ है न सब तेरी वजह से हुआ थैंक्स तो तुम्हे बोल न था मुझे
राम- मुझे भी ऐसा परिवार चाहिए था जो अब मिल गया है जिस में 2 क्यूट सी बहने जिनके प्यार के लिए में आज तक तड़पता रहा पैर अब में खुश की भगवान् ने मेरी सुन ली
प्रिय- हां सुन ली है और अब तुझे बहुत प्यार मिलेगा सब से और मुझसे मेरे स्वीट भाई ( मुस्कुराकर राम को देखते जिसे देख राम भी मुस्कुराने लगा )
विनोद आज भी खेत पैर पी के टुन्न था जिसका खाना शांति ने भिजवा दिया था मजदुर के हाथ बाकि सब ने साथ मिलकर खाना खाया और अपने अपने कमरों में चले गए सो ने के लिए जहा रूम में जाते hi किशोर ने काय को बाहो में भर लिया जिसका एहसास होते hi काय मुस्कुराते हुए बोली
काय- क्या बात है आज बड़ा प्यार आ रहा है आपको वैसे खबर भी न ली मेरी कभी
किशोर- वो मेरी गलती थी काय जो तुम सबसे दूर हो गया पैर अब नहीं अब में तुम्हे बहुत प्यार दूंगा इतना प्यार की तुम सब पुराणी बाते भूल जाओगी
किशोर की बाते सुन कर काय भी गरम हो ने लगी आखिर उसे भी तो चूड़े हुए कितने साल हो गए थे तो उसने भी देर न करते हुए किशोर के होठो को अपने होठो की कैद में ले लिया और बेतहाशा चूम ने लगी जिसकी गरम सांसें महसूस करते hi किशोर भी अपने कपडे खोलते हुए उसका साथ देने लगा
कमरे का तापमान अचानक से बढ़ गया जिस में दोनों पागल हुए जा रहे थे काय के गोर जिस्म से किशोर एक एक करके सरे कपडे उतरता चला और अब बरी थी की उसकी मोती सी गांड पैर चिपकी छोटी सी पेंटी की जिसे किशोर ने दोनों उंगलियों में फसा कर निकाल फेका
काय - ोुह्ह्ह किशोर बस अब दाल दो बहुत तरसाया है तुम ने मुझे आअह्ह्ह माआ किशोर आआह्ह्ह ऐसी हीई छोड़ो अपनी काय को जैसे पहले छोड़ते थे ूऊईममममहहहहहाआआअह्हह्ह्ह्हह कितनी दिनुओ बाददद कितना ाचा लग रहा आआह्ह्हझझहहहहहहसससससहहहहहह
किशोर- हआ काया कितने सालो बाद उउउउउफफ्फ तुझे छोड़ रहा हु पैर तेरी छूट तो पहली से भी जायदा गरम लग रही है आआअह्हह्ह्ह्ह देख कैसे फास्ट हुए जा रहा है aaaahhhhhhhhhh( बाल पकड़ के काय की छूट में धक्के लगते हुए बोलै)
काय- ोुह्ह्ह्ह माआआ मर गयी किशोर आप नहीं जानते कितना तदपि हु में आप की बिना आअह्ह्ह्ह आज साड़ी तड़प मिटा दोऊ ोोोूस्सस्सशःह्ह्हूँउउम्मम्मम्मम आआह्ह्ह्हह्ह और जोररर सीए किशोर ऑर्डर जोर सीई आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुत खुजली हो रही हीी किशोरररर आआआहहहहहहह कुछःह करो नाआआ क्या हुआए किशोरर रुक क्यों गए ोुह्ह्ह्ह
पैर किशोर झाड़ चूका था इतने दिनों बाद छूट गर्मी जायदा देर सेहन नहीं कर पाया और अब उम्र भी हो चुकी थी रखे हुए लोहे को जुंग लग चूका था इसलिए सारा माल काय की छूट में भरने के बाद धीरे से लुंड बहार खेचते हुए बोलै
किशोर - ोुह्ह्ह्ह काय तुम्हारी छूट बहुत गरम है में सेह नहीं पाया अगली बार अचे से करूँगा आअह्ह्ह अब थक गया हु में
किशोर की बात सुनकर काय को गुस्सा तो बहुत आया पैर कर भी क्या सकती थी पति इतने दिनों बाद घर आया था इसलिए किशोर का दिल रखते हुए बोली
काय- कोई बात नहीं जी आप लौट आये ये hi बहुत है आप आराम करो में बाथरूम हो कर आती हु
कमरे में बने बाथरूम में घुसते hi काय ठन्डे पानी के निचे कड़ी हो कर अपनी मोती मोती चूचिया मसलते हुए बोली
काय- इतने सालो में लुंड मिला और वो भी प्यास न बुझा सका उउउउउफफ्फ्फ अब क्या करू इनका जिन्हे मसल ने वाले हाथ अब कमजोर हो चुके ही सस्शह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ममअअअअ मेरी छूट आज भी सुखी hi रह गयी आअह्हह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह्हुह्ह्ह अब ऊँगली का hi सहारा ही ूउम्मंहहहह( कोने में बैठी अपनी छूट तेज़ तेज़ ऊँगली करते हुए बोली )
तेजी से उंगलिया अंदर बहार करते हुए काय झड़ने के करीब थी की तभी उसके दिमाग में उस दिन वाला सन आज्ञा जो उस ने देखा था उसे याद करती वो जोर जोर से अपनी छूट में ऊँगली करते हुए बड़बड़ा ने लगी
काय - आआह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह मम्माआ क्या लुंड था वोओओओ ऊऊफफफफफ मेरे राम मेरे बच्ची आआह्ह्ह्हह देख तेरी माँ तड़प रही है तेरे लीईई ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह मिटा दिए अपनी मा की तदापपप आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह mmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
झड़ते hi काय निढाल सीईई हो कर वही पसर गयी और तेज़ तेज़ सांसें भर ने लगी और उसकी छूट अपना रास बहती रही
जब खुशिया घर आती है तो माहोल खुद बा खुद आनंदमय हो जाता जिसे सब को अपनाना चाहिए पैर इस घर में अभी भी 2 जान ऐसे थे जिन्हे ये खुशिया रास नहीं आ रही थी जिन में एक था विनोद जिसके छह ने या न छह ने से कोई जायदा फर्क नहीं पद ने वाला था पैर पीहू की कड़वाहट दूर कर न जरुरी था जिसका अंदाज़ा काय को हो चूका था क्युकी किशोर के इतने दिनों बाद घर आने पैर भी पीहू निचे नहीं आयी थी इसलिए काय hi उसके रूम में गयी जहा पीहू अपनी माँ को देख कर बोली
पीहू- हां माँ बोलिये अब किस लिए आयी है आप आपका परिवार तो पूरा हो गया न
काय- अभी नहीं क्युकी मेरे परिवार का एक सद्श्ये अभी खुशियों में शामिल नहीं हुआ है और में उसे hi लेने आयी हु
पीहू- रहने दो माँ ये झूठा प्यार किसी और को दिखाना मुझे नहीं अगर आप मुझसे प्यार करती तो उस मनहूष के लिए मुझे थप्पड़ नहीं मारती आप जाओ यहाँ से मुझे किसी से कोई बात नहीं करनी
काय- तुम अपनी जगह ठीक हु मेरी बच्ची क्युकी ये सब मैंने hi तो सिखाया है तुम्हे में hi अपनी गलती को छुपा कर उसे मनहूष मानती रही हु तो तुम भी वही सब देख कर मेरा साथ देती रही पैर मेरी बच्ची गलती तो बड़ो से भी हो जाती है न और फिर तो ये तो सोच जिसे हम साड़ी ज़िन्दगी बुरा भला कहते रहे उसके दिल में हमारे लिए जरा सा भी शिकवा नहीं तो क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता की हम भी अपनी भूल को सुधार कर आगे बढे
पीहू- कैसे आगे बधु माँ कैसे आप ने जो शिखाया वो शिखति गयी जो कहा वो करती गयी फिर कैसे अब उस से नज़र मिलौ जिसे ज़िन्दगी भर कोष्टी आयी हु क्या मुँह लेकर जाऊ उसके सामने आप hi बताओ ( सुबक ते हुए )
पीहू को यु सुबकते हुए रोटा देख कर काय उसे गले से लगा कर प्यार से बोली
काय - बस मेरी बच्ची चुप हो जा और तुझे किस बात की फ़िक्र है तो जा और हक़ से उसे गले लगा कर जन्मदिन की बधाई दे फिर देख तुझे कुछ कह ने या कर ने की जरुरत नहीं पड़ेगी वो खुद तुझे प्यार देगा और फिर किस भाई बहिन में लड़ाई नहीं होती वैसे भी इस वक़्त तो उसे और भी जायदा जरुरत है हम सब के साथ की है न तो मेरी अछि गुड़िया की तरह मेरी ये बात भी मान कर अपने भाई से मिल चल
पीहू अपनी माँ की बात मान अपना चेहरा साफ़ करती हुई उनके साथ निचे चल दी पैर घबराहट अभी भी थी जो होनी भी चाहिए आखिर बर्ताव जो ऐसा किया था आज तक उस ने राम के साथ इसलिए थोड़ी सी हिम्मत जुटती हुई वो निचे राम के सामने जा कर बैठ गयी और बहुत hi धीमी आवाज़ में बोली
पीहू- मुझे माफ़ कर दे भाई में बहुत शर्मिंदा हु अपने बर्ताव के लिए और जन्मदिन की बधाई हो बहुत बहुत
राम- आप प्यारी दीदी हो मुझे कोई शिकायत नहीं है आप से वैसे भी आप खिली खिली सी अछि लगती हो न की यु रोंदू टाइप ( इतना कहते hi राम ने प्यार से उसकी नाक को खींचा और गले से लगा लिया)
जैसे hi राम ने पीहू को गले से लगाया तो पीहू जो खुद को संभाले हुई थी उसकी आँखों से आंसू चालक उठे और वो अपने भाई के गले से लगी हुई जोर से रोने लगी तो राम ने उसको तिघ्टलय हुग कर लिया और प्यार से उसके माथे को चूमते हुए बोलै
राम- बस दीदी शांत हो जाओ सब ठीक है में बिलकुल नाराज़ नहीं हु और आप न रो कर ये मत समझना की में अपना गिफ्ट भूल जाऊंगा समझी न चलो अब रोना बंद करो यार मेरा जन्मदिन रो कर मानना है क्या
राम की बात सुनकर सब है पड़े तो पीहू की भी हसी छूट गयी और वो राम से अलग हो कर अपने पापा के पास गयी तो राम प्रिय के पास जा कर बोलै जो सब को खुश देख कर बहुत खुश हो रही थी
राम- आप हस्ती हुई बहुत अछि लगती हो हमेशा हस्ती रहा करो और थैंक यू मेरे लिए मंदिर में दुआ कर ने के लिए
प्रिय ने राम को देखा और फिर मुस्कराते हुए बोली
प्रिय- ये मुस्कान भी तूने hi दी है राम वैसे सच कहु तो ऐसा hi परवार चाहती थी में हमेशा से जिस में प्यार हो अपनापन हो आज ये जो भी हुआ है न सब तेरी वजह से हुआ थैंक्स तो तुम्हे बोल न था मुझे
राम- मुझे भी ऐसा परिवार चाहिए था जो अब मिल गया है जिस में 2 क्यूट सी बहने जिनके प्यार के लिए में आज तक तड़पता रहा पैर अब में खुश की भगवान् ने मेरी सुन ली
प्रिय- हां सुन ली है और अब तुझे बहुत प्यार मिलेगा सब से और मुझसे मेरे स्वीट भाई ( मुस्कुराकर राम को देखते जिसे देख राम भी मुस्कुराने लगा )
विनोद आज भी खेत पैर पी के टुन्न था जिसका खाना शांति ने भिजवा दिया था मजदुर के हाथ बाकि सब ने साथ मिलकर खाना खाया और अपने अपने कमरों में चले गए सो ने के लिए जहा रूम में जाते hi किशोर ने काय को बाहो में भर लिया जिसका एहसास होते hi काय मुस्कुराते हुए बोली
काय- क्या बात है आज बड़ा प्यार आ रहा है आपको वैसे खबर भी न ली मेरी कभी
किशोर- वो मेरी गलती थी काय जो तुम सबसे दूर हो गया पैर अब नहीं अब में तुम्हे बहुत प्यार दूंगा इतना प्यार की तुम सब पुराणी बाते भूल जाओगी
किशोर की बाते सुन कर काय भी गरम हो ने लगी आखिर उसे भी तो चूड़े हुए कितने साल हो गए थे तो उसने भी देर न करते हुए किशोर के होठो को अपने होठो की कैद में ले लिया और बेतहाशा चूम ने लगी जिसकी गरम सांसें महसूस करते hi किशोर भी अपने कपडे खोलते हुए उसका साथ देने लगा
कमरे का तापमान अचानक से बढ़ गया जिस में दोनों पागल हुए जा रहे थे काय के गोर जिस्म से किशोर एक एक करके सरे कपडे उतरता चला और अब बरी थी की उसकी मोती सी गांड पैर चिपकी छोटी सी पेंटी की जिसे किशोर ने दोनों उंगलियों में फसा कर निकाल फेका
काय - ोुह्ह्ह किशोर बस अब दाल दो बहुत तरसाया है तुम ने मुझे आअह्ह्ह माआ किशोर आआह्ह्ह ऐसी हीई छोड़ो अपनी काय को जैसे पहले छोड़ते थे ूऊईममममहहहहहाआआअह्हह्ह्ह्हह कितनी दिनुओ बाददद कितना ाचा लग रहा आआह्ह्हझझहहहहहहसससससहहहहहह
किशोर- हआ काया कितने सालो बाद उउउउउफफ्फ तुझे छोड़ रहा हु पैर तेरी छूट तो पहली से भी जायदा गरम लग रही है आआअह्हह्ह्ह्ह देख कैसे फास्ट हुए जा रहा है aaaahhhhhhhhhh( बाल पकड़ के काय की छूट में धक्के लगते हुए बोलै)
काय- ोुह्ह्ह्ह माआआ मर गयी किशोर आप नहीं जानते कितना तदपि हु में आप की बिना आअह्ह्ह्ह आज साड़ी तड़प मिटा दोऊ ोोोूस्सस्सशःह्ह्हूँउउम्मम्मम्मम आआह्ह्ह्हह्ह और जोररर सीए किशोर ऑर्डर जोर सीई आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुत खुजली हो रही हीी किशोरररर आआआहहहहहहह कुछःह करो नाआआ क्या हुआए किशोरर रुक क्यों गए ोुह्ह्ह्ह
पैर किशोर झाड़ चूका था इतने दिनों बाद छूट गर्मी जायदा देर सेहन नहीं कर पाया और अब उम्र भी हो चुकी थी रखे हुए लोहे को जुंग लग चूका था इसलिए सारा माल काय की छूट में भरने के बाद धीरे से लुंड बहार खेचते हुए बोलै
किशोर - ोुह्ह्ह्ह काय तुम्हारी छूट बहुत गरम है में सेह नहीं पाया अगली बार अचे से करूँगा आअह्ह्ह अब थक गया हु में
किशोर की बात सुनकर काय को गुस्सा तो बहुत आया पैर कर भी क्या सकती थी पति इतने दिनों बाद घर आया था इसलिए किशोर का दिल रखते हुए बोली
काय- कोई बात नहीं जी आप लौट आये ये hi बहुत है आप आराम करो में बाथरूम हो कर आती हु
कमरे में बने बाथरूम में घुसते hi काय ठन्डे पानी के निचे कड़ी हो कर अपनी मोती मोती चूचिया मसलते हुए बोली
काय- इतने सालो में लुंड मिला और वो भी प्यास न बुझा सका उउउउउफफ्फ्फ अब क्या करू इनका जिन्हे मसल ने वाले हाथ अब कमजोर हो चुके ही सस्शह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ममअअअअ मेरी छूट आज भी सुखी hi रह गयी आअह्हह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह्हुह्ह्ह अब ऊँगली का hi सहारा ही ूउम्मंहहहह( कोने में बैठी अपनी छूट तेज़ तेज़ ऊँगली करते हुए बोली )
तेजी से उंगलिया अंदर बहार करते हुए काय झड़ने के करीब थी की तभी उसके दिमाग में उस दिन वाला सन आज्ञा जो उस ने देखा था उसे याद करती वो जोर जोर से अपनी छूट में ऊँगली करते हुए बड़बड़ा ने लगी
काय - आआह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह मम्माआ क्या लुंड था वोओओओ ऊऊफफफफफ मेरे राम मेरे बच्ची आआह्ह्ह्हह देख तेरी माँ तड़प रही है तेरे लीईई ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह मिटा दिए अपनी मा की तदापपप आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह mmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
झड़ते hi काय निढाल सीईई हो कर वही पसर गयी और तेज़ तेज़ सांसें भर ने लगी और उसकी छूट अपना रास बहती रही