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अपडेट-129
अभ अग्गे....
अज्ज रवि बेहद खुश था , उसे ख़ुशी इस बात की नै थी , के वोह अपनी बहिन प्रिय से मिला , उसे ख़ुशी इस बात की थी , उसने अपनी बहिन की इज्जत बचा ली , रवि बार बार यही सोच रहा था , अगर वोह इक घंटा लेट हो जाता तोह , उफ़ उसकी बहिन मर जाती ,
इसका इक hi कारन था , प्रिय इक पतिव्रता औरत थी , उसके लिए , उसकी इज्जत , उसकी मान मर्यादा , उसका सब कुछ था , दुनिआ में कुछ औरतीयं ऐसी होती हैं , पर कुछ औरशन के लिए यह बतिअन , बस पुराने विचारो जैसी होती हैं , उनको लगता है , अगर वोह 10-20 लड़को के साथ सो भी जाएगी , तोह क्या hi फरक पढ़ जायेगा , लेकिन किसी के लिए वफादार होने में , इक अलग hi मज़ा होता है ,
कहते हैं न , कुछ वफ़ा तुम करो , कुछ वफ़ा हम करे , तोह क्या बात होगी ,
कुछ तुम तड़फो मेरे लिए , कुछ में तड़फो तुम्हारे लिए , तोह क्या बात होगी ,
कुछ रतियन में न सोयु , कुछ रतियन तुम जागो , तोह क्या बात होगी ,
कुछ तुम रूत जाओ मुज़से , कुछ में रूत जाऊ तुमसे , तोह क्या बात होगी ,
में दोस्त समाजु तुम , तुम धोका दो मुझे , तोह क्या बात होगी ,
मेरे लबु पर सच हो , तुम्हारे लबु पर झूठ हो , तोह क्या बात होगी ,
में मारा हुआ समाजु तुम , तुम जिन्दा रहो दुसरो के लिए , तोह क्या बात होगी ,
खैर अग्गे , कोमल गाड़ी ड्राइव कर रही थी , ख़ुशी उसके साथ अग्गे बैठी थी , रमा , रवि और प्रिय पीछे बैठे हुए थे , उफ़ यह रमा अभ भी फ्रूट्स खा रही थी , प्रिय के घर से सरे फ्रूट्स उठा लायी थी वोह , रवि बेच में बैठा हुआ था , और प्रिय इक तरफ , प्रिय का 3 साल का बीटा , ख़ुशी की गॉड में बैठा हुआ था ,
"उफ़ रमा बस करो , कितना खाऊगी अभ..." रवि ने रमा की तरफ देखते हुए बोलै , जो अभी केला (बनाना) खाने hi जा रही थी ,
"भइआ , भूक लगी मुझे , अप्प खामोश रहो , वार्ना आपको भी खा जोगी..." रमा ने उस केले को नंगा कर , उसकी नोक पर जीभ फिरते हुए बोलै , उफ़ रमा के नरम गुलाबी होंठो में से निकली उसकी रास भरी जीभ देख , रवि के मोह में पानी भर गया , वोह अपने होंठो पर जीभ घूमने लगा ,
"क्या हुआ भइआ , भूक लगी है..." रमा ने अपने भाई को आंख मरते हुए , वोह लम्बा सा केला अपने मोह में आधे से जायदा डालते हुए बोलै , उसने वोह केला खाया नै , उसे वैसे hi बहार निकल लिया , जैसे बस उसे चूस रही हो ,
"n...nn..naiii...tt...tt...ttohh..." रवि ने रमा के गुलाबी लबु को ललचाई नज़रिओं से देखते हुए बोलै , रमा के होंठो पर इक मुस्कान ा गई , उसकी कामुक अदायिओं ने रवि को पूरा घ्याल कर दिया था ,
"उम् , बहुत टेस्टी है भइआ..." रमा अपने भइआ को छेड़ते हुए , बड़ी कामुक अड्डा से , उस केले को मोह में भर , बार बार चूसते हुए , उसके कण में धीरे से बोली ,
"क्या..." रवि ने धीरे से रमा के कण के पास अपने होंठ कर पूछा ,
"यह केला , उम् बहुत मोटा और लम्बा है , अह्ह्ह , प्रिय देदी यह केले अप्प ने कहा से लिए..." रमा ने पहले अपने भाई की तरफ , और फिर प्रिय की तरफ देखते हुए , बेहद मुस्करा कर बोलै , रवि का लुंड पूरा तन कर खड़ा हो गया ,
"हम्म , हाँ , वोह अमित के पापा लाये थे बाजार से..." प्रिय अपने ख्यालो से बहार एते हुए मुस्करा कर बोली , तोह रमा और कोमल हसने लगी , कोमल गाड़ी के मिरर से , अपने भाई और रमा को देख रही थी , उसे पता था , दोनों के बेच क्या चल रहा है ,
"मेरा केला भी चूस लो न , इस बाज़ारू केले से ाचा है..." रवि ने धीरे से रमा के कण में बोलै , तोह रमा शर्माने लगी ,
"नै जी , मुझे नै चूसना ..." रमा ने इक और केला चलते हुए , उसे कहते हुए , अपने भाई की आँखों में अखन दाल बोलै , तभी रवि ने सामने देखा , तोह उसकी अखन , कोमल की आँखों से मिल गई , वोह उस छोटे से मिरर से उनकी तरफ देख रही थी , रवि ने अपने होंठो पर जीभ फिरा दी , कोमल ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,
"उफ्फ्फ भइआ , सैर कितनी खुश होगी आपसे मिल कर..." प्रिय ने अपना सार रवि के कंधे पर रख , मुस्कराते हुए बोलै ,
"क्या , ओह्ह , हाँ देदू , सही कहा अपने , उफ़ देदू , मने अप्प दोनों को कितने दुःख दिए , और अज्ज , अज्ज , मुझे देरी हो जाती तोह , मेरा मन अभी भी कम्प रहा है , में , में , उसे छोड़ूगा नै , जिसने आपके घर ें गुंडों को बेह्जा था..." रवि ने प्रिय का हाथ अपने हाथो में लेकर , उसे बार बार चूमते हुए बोलै ,
"भइआ , प्लस , नई भइआ , में , में , आपको फिर से खोना नै चाहती , में , में ठीक हु भइआ , अप्प कुछ नै करोगे अभ ..." प्रिय ने रवि के कंधे से अपना सार उठा , उसकी आँखों में देखते हुए , बेहद नाम आँखों से बोलै ,
"हाँ , भइआ , देदी , ठीक बोल रही है , लो केला खा लो..." रमा ने आधे से जायदा केला अपने मोह में डेल , उसे कहते हुए , इक केला रवि की तरफ करते हुए बोलै , कोमल और ख़ुशी यह देख हसने लगी , पर प्रिय को कुछ समाज नै आया ,
"नै , मुझे नै खाना..." रवि ने बुरा सा मोह बनाते हुए बोलै ,
"रमा देदी , भइआ दूध पेट हैं , केला नै कहते , हाँ , अगर दूध पिलाना है तोह पीला दो..." कोमल ने बेहद शरारती अंदाज़ में , अपने भाई की आँखों से अखन मिला कर बोलै , तोह रमा और ख़ुशी हसने लगी ,
"दूध नै है मेरे पास..." रमा ने अपने मोठे मोठे बूब्स को घूरते हुए , कोमल और ख़ुशी की तरफ देख कर बोलै , उनको मज़ा ा रहा था , अपने भइआ को तंग करने में , प्रिय के साथ होते , रवि बेबस था , कुछ कर नै सकता था ,
"अरे , यद् आया , दूध तोह घर पर बहुत पढ़ा था , भइआ , में आपको दूध पीला देती , पहले क्यों नै बोलै..." प्रिय ने िका इक यद् करते हुए मुस्कराते हुए बोलै , रवि हड़बड़ा गया , रमा , कोमल और ख़ुशी , तीनो हसने लगी ,
"n...nn...nnaii....d..dd..dedii..." रवि हकलाते हुए बोलै , रवि की नज़रियन अभी भी कोमल की नज़रिओं से मिली हुई थी , और कोमल अपनी कातिल आँखों को नचा नचा कर , रवि को तंग कर रही थी ,
"अरे बेवकूफ पे लेते दूधः ..." ख़ुशी ने दूध शब्द पर जायदा जोर देते हुए बोलै , वोह तीनो फिर से हसने लगी ,
"उफ़ यह तीनो भी न , बेचारी प्रिय देदी , कितनी मासूम और भोली है , हासष्ठ , ें तीनो की बातिओं का दूसरा मतलब समाज hi नै रही , घर जाकर , इनकी अचे से खबर लूंगा..." रवि ने मन hi मन सोचते हुए बोलै ,
"क्या हुआ भइआ , दूध पीने की ीचा हो रही है , ओह्ह हूँ , अभ क्या करे , रमा देदी , घर जाकर भइआ को यद् से दूध पीला देना..." कोमल ने रमा की आँखों से अखन मिला , उसे आंख मरते हुए बोलै ,
"नै , कोमल , मेरे पास इतना दूध नै है , थोड़ा सा तुम भी पीला देना ..." रमा ने हस्ते हुए बोलै ,
"ouu-huu , कुछ अप्प पीला देना , कुछ दूध में पीला दूंगी , और अगर भइआ को और ीचा हुई , तोह बाकि हमारी खुशु पीला देगी..." कोमल ने मुस्कराते हुए रमा और ख़ुशी की तरफ देखते हुए बोलै , वोह दोनों हसने लगी ,
"क्या भइआ , आपको इतना पसंद है दूध पीना , मुझे बोल देते , में घर पर पीला देती आपको..." प्रिय ने बेहद उदास होते हुए बोलै , उसे अभी भी कुछ समाज नै आया था ,
"नै देदी , यह तीनो बस मज़ाक कर रही है , मेरा पेट भरा हुआ है , कितनी दूर जाना है अभी..." रवि ने प्रिय को उदास देख , उसे मानते हुए बोलै , उसका लुंड पूरा अकड़ कर खड़ा हो चूका था , तीनो की कामुक बातिओं ने , उसे परेशान कर रखा था ,
"रमा देदी ध्यान से , कही केला फास न जाये मोह में..." कोमल ने रमा की तरफ देखते हुए बोलै , जिसके हाथ में अभी बहुत मोटा केला था , वोह इक दर्ज़न केले खा चुकी थी , ख़ुशी और कोमल हसने लगी , और रवि और प्रिय भी ,
"कोमल , हमारी रमा इस से भी , मोटा और लम्बा केला खा चुकी है , उसे पूरा एक्सपीरियंस है , बस तुम सीखना है , तुम केला खाना नै अत..." रवि ने कोमल को आंख मरते हुए बोलै , तोह रमा और ख़ुशी हसने लगी ,
"भइआ , क्या अप्प भी..." कोमल बेहद शरमाते हुए बोली ,
"क्या सच में , कोमल , तुम केला खाना नै अत , यह तोह बहुत आसान होता है..." प्रिय ने अपनी नादानी में बोलै , तोह रवि , रमा और ख़ुशी बेइंतहा हसने लगे , और कोमल के गाल शर्म से लाल हो गए ,
"हाँ देदू , कोमल बहुत डर्टी है , जब भी इसको केला दिखता हु , यह भाग जाती है , अभ अप्प hi देखो , रमा ने केला खा लिया , मेरी बीवी सीमा ने भी खा लिया , मेरी बहाने रिमी और शूरति और मेरी बीवी बेबी , उन तीनो ने भी केला खा लिया , बस कोमल hi डर्टी है , अभ अप्प hi समझो इसको..." रवि ने बेहद भोलेपन में कोमल की नली नली आँखों में ज़कते हुए बोलै , तोह रमा और ख़ुशी फिर से हसने लगी ,
"कोमल , तुम क्यों डर्टी हो केले से , केला तोह शरीर के लिए ाचा होता है , केले में कई गन होते हैं , अरे डॉक्टर तोह बोलते हैं , सबको दिन में दो बार केला खाना चाहये , वोह भी दूध के साथ..." प्रिय ने कोमल को समझते हुए बोलै , जब प्रिय कोमल को समझा रही थी , तब रवि , रमा और ख़ुशी पगलू की तरह हस्स रहे थे , उनकी आँखों में असनु ा चुके थे , और कोमल तोह शर्म से पानी पानी हो चुकी थी ,
"देखा कोमल , कितने गन होते हैं केले में , उफ़ अभ तोह खा लो केला , कब तक भगति रहूगी तुम , इक न इक दिन तोह खाना hi पड़ेगा..." रवि ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , तोह कोमल उस से नज़रियन मिला शर्माने लगी ,
"हासष्ठ , मुझे तोह केला बहुत पसंद है , गाओं में भइआ ने जब से केला खिलाया है , मुझे और केला ाचा hi नै लगता..." रमा ने अपना इक हाथ अपने भाई की जंग पर रखते हुए , मुस्करा कर बोलै , रवि का बदन कम्प सा गया , उसने रमा का हाथ अपनी जंग से उठा , अपने लुंड के उभर पर रख दिया ,
"आईएईए माआ..." रमा जोर से सिसक पढ़ी ,
"क्या हुआ देदी..." कोमल ने गाड़ी के मिरर से पीछे देखते हुए बोलै , उसने मिरर थोड़ा सेट करके देखा , तोह रमा का हाथ उसे कही और hi दिखा , उसने ख़ुशी को पास बुला उसके कण में कुछ बोलै तोह दोनों हसने लगी ,
"कुछ नै , मुझे काळा सांप की यद् ा गई , प्रिय देदी अप्प ने कभी सांप देखा है , उफ़ भइआ के पास , इक बड़ा कला सांप है..." रमा ने अपने भाई रवि की आँखों में अखन दाल , उसके लुंड को अपने नरम मुलाम गोर हाथ से कास कर दबाते हुए बोलै , कोमल और ख़ुशी भी यह सब देख रही थी , पर प्रिय को कुछ नै दिख रहा था , क्यों की रवि ने प्रिय का छोटा सा बैग अपनी लेफ्ट जंग पर रखा हुआ था , और प्रिय भी लेफ्ट साइड hi बैठी थी ,
"उम् , नै , नै , रमा , मुझे सांपो से बहुत दर लगता है , कहते हैं सांप काट ले तोह दर्द बहुत होता है..." प्रिय ने रमा की तरफ देखते हुए , बेहद भोलेपन में बोलै , कोमल , रमा और ख़ुशी हसने लगी , रवि तोह अपनी बहिन के नरम हाथ को अपने लुंड पर महसूस करते हुए , मज़ा में सिसक रहा था ,
"देदी , हमारी रमा बहुत ताकतवर है , यह तोह सांप को हाथ से पकड़ , उसका जहर चूस कर निकल देती है..." कोमल ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , तोह रमा शर्माने लगी ,
"क्या , हे भगवन , रमा , तुम सच में सांप को पकड़ लेती हो..." प्रिय ने चौंकते हुए अपने गुलाबी होंठो पर हाथ रख कर बोलै ,
"हाँ देदी , कोमल सही बोल रही है , हमारी रमा तोह , सांप को हाथ में पकड़ अपनी बिल में घुसा लेती है , मतलब इसके रूम में जो बिल थी सांप की , यह नै डर्टी , देदी , इक बार , मने अपनी आँखों से देखा..." रवि ने बेहद मुस्कराते हुए पहले रमा की आँखों में देखते हुए और फिर आखिर में प्रिय की तरफ देखते हुए बोलै , वोह अभी बोल hi रहा था प्रिय बेच में बोल पढ़ी ,
"हे भगवन , क्या देखा तुमने..." प्रिय बेहद चौंकते हुए बोली , कोमल और ख़ुशी इक दूसरे की तरफ देख , बेहद हसने लगी ,
"देदी , मने देखा , रमा ने इक कला सांप अपने हाथो में पकड़ रखा था , फिर इसने उस सांप को बहुत देर तक चूमा , और , और , फिर मने देखा , इसने उस काळा लम्बे सांप को अपनी बिल के मोह पर रख , जोर से जतका देकर , इक hi बार में , पूरा अंदर घुसा दिया , यह बिलकुल नै डर्टी , यह तोह काळा सांप से बचो की तरह खेलती है ..." रवि ने घम्बिर होकर बोलै , तोह कोमल और ख़ुशी बेइंतहा हसने लगी , रमा ने शरमाते हुए , अपने भाई की कमर में चिमटी काट दी ,
"आईएईए मा..." रवि दर्द से उछाल पढ़ा ,
"क्या हुआ भइआ.." प्रिय बेहद चिंता करते हुए बोली ,
"ोूछह देदू , रमा ने चिमटी कटी मुझे..." रवि ने बेहद भोलेपन में बोलै , तोह कोमल और ख़ुशी फिर से हसने लगी ,
"नई , मने कुछ नई किया , भइआ , अप्प झूठ बोल रहे हो , ोुछःह , भइआ , मेरी आँख में देखना , शयद कुछ चला गया है..." रमा ने मुस्करा कर बोलै , असल बात यह थी , रमा खुद बेहद गरम हो गई थी , इक तोह वोह सब कामुक बतिअन कर रहे थे , और दूसरा , वोह कब से अपने भइआ का लम्बा मोटा लुंड कास कास कर दबाते हुए , सेहला रही थी , उसकी मखमली मुलाम छूट , खूब गीली होकर पानी छोड़ रही थी , उसकी फूली हुई छूट में खूब खुजली हो रही थी ,
"ओह्ह मेरी रेमो..." रवि ने बेहद प्यार से बोलै , और रमा की तरफ पूरा घूम कर बेथ गया , अभ प्रिय की तरफ उसकी पीठ थी , पर कोमल और ख़ुशी को , दोनों पूरा दिख रहे थे , कोमल मिरर से देख रही थी और ख़ुशी तोह पीछे की तरफ चेहरे किये , कब से , सब से बतिअन कर रही थी ,
रवि ने रमा के चेहरे के करीब अपना चेहरा किया , और उसकी वासना में लाल हुई आँखों में देखने लगा , रमा तेज़ तेज़ सांसे भरते हुए अपने भाई की आँखों में अखन डेल उसे देख रही थी ,
"भइआ इस आँख में कुछ है , शयद कोई मचार होगा.." रमा ने अपने लाल रसीले होंठो को जीभ फिरा खूब गीला करते हुए बोलै ,
"में देखता हु.." रवि ने उसके लाल लबु को देखते हुए , अग्गे बढ़ , अपने होंठ उसके रसीले लाल होंठो पर रख दिए , रवि धीरे धीरे उसके होंठो को चूसने लगा , उफ़ रमा के मन को अभ कही जाकर शांति मिली ,
रवि , रमा के माखन जैसे नरम मुलाम होंठो को बेहद शिदत से महसूस करते हुए , उनको पूरा अपने मोह में भर भर कर चूसने लगा , उफ़ रमा की छूट और भी पानी छोड़ने लगी , दोनों के होंठ आपस में उलज़ने लगे , रवि कभी ऊपर का होंठ चुस्त तोह कभी निचे का , रमा के लाल मखमली होंठ उसके होंठो में पिस्टे जा रहे थे , 2 मिंट तक रवि ने पूरा कास कास कर रमा के होंठो को चूसा , रमा के रसीले होंठो का रास , उफ़ इतने मीठे होंठ थे रमा के , रवि मदहोश सा हो गया , रमा ने अखन बंद किये अपने होंठ चुसवाते हुए , अपनी रसीली लपलपाती जीभ अपने भाई के होंठो पर मारनी सुरु कर दी , अभी रवि ने मोह खोल , रमा की जीभ को अपने मोह में भरा hi था , पर तभी ,
"बस कोमल इस तरफ गाड़ी मोड़ लो..." प्रिय ने मुस्कराते हुए बोलै , प्रिय की आवाज़ सुन रवि वापिस सही होकर बेथ गया ,
"रमा , हीयांन ीीीानं , अभ ठीक हो..." रवि ने तेज़ तेज़ हफ्ते हुए , अपने होंठो को हाथ से साफ सा करते हुए बोलै , तोह रमा ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली , कोमल और ख़ुशी उनकी तरफ देखती हुई , बस मुस्करा रही थी ,
"भइआ , सैर को जबरदस्त जतका लगने वाला है .." प्रिय ने अपने भाई रवि के हफ्ते हुए चेहरे को देखते हुए बोलै , वोह कुछ कुछ समाज गई थी , पर उसे अजीब लग रहा था , क्यों की रमा बार बार रवि को भइआ बोल रही थी , उसे पता लग गया था , के रवि और रमा इक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे ,
"हाँ , ओह्ह , हाँ , देदी , अपने सही कहा..." रवि ने प्रिय की काली काली गहरी आँखों में देखते हुए बोलै , प्रिय का मासूम और हद से जायदा भोला चेहरा , उफ़ रवि को बहुत प्यार ा रहा था अपनी प्यारी बहिन पर ,
"भइआ , पहले हम सब अंदर जाएगी , अप्प गाड़ी में बैठे रहना , हम , सरप्राइज देंगी सैर को..." प्रिय ने अग्गे बढ़ , अपने भाई रवि के गोर गाल को चुम कर बोलै ,
"जैसा अप्प चाहो देदू.." रवि ने भी प्रिय के गोर गाल को चुम कर बोलै , तोह प्रिय ने मुस्करा कर , अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,
प्रिय कुछ सोचने लगी , फिर उसे िका इक यद् आया , जब उसके भाई ने उस गुंडे को मारा था , तब उसके बूब्स नंगे थे , उफ़ प्रिय के गाल शर्म से लाल हो गए , जब उसे वोह पल यद् ए ,
"उफ्फ्फ भइआ ने सब देख लिया होगा , में ऊपर से नंगी थी , उफ़ मेरी भी क्या गलती , उस गुंडे ने मेरी कमीज और ब्रा फाड् दी थी , उम् , भइआ ने कितनी बुरी मौत दी उसे , ाचा hi किया भइआ ने , कितना प्यार करते हैं भइआ मुज़से , उम् , पर मेरे बूब्स नंगे , है , मुझे शर्म ा रही है , पर भइआ की क्या गलती इसमें , भइआ बहुत अचे हैं , इक बार भी मुझे गलत नज़र से नै देखा , उफ्फ्फ भइआ उस वख्त बहुत गुस्से में थे , पर , उफ़ ओह्ह प्रिय , कितना सोचती हो तुम , भइआ तुमसे बहुत प्यार करते हैं , में भइआ का हमेशा ख्याल रखूगी , उनका साथ कभी नै छोडूगी , मेरा प्यारा भाई..." प्रिय अपने मन में सोचती गई , और उसके सोचते सोचते सैर और मुन्ना का घर ा गया , जो मुल्ला नगर से थोड़ा बहार था , इस तरफ भी वंश जंगल का एरिया पढता था , आखिर 500 कम बड़ा था वंश जंगल ,
"उम्म्म ओह्ह्ह्ह हुऊ , हासष्ठ , आखिर पहुँच hi गए..." कोमल ने गाड़ी रोक इक लम्बी अंगड़ाई लेते हुए मुस्करा कर बोलै , और फिर सब निचे उतरने लगे , प्रिय ने गाड़ी से बहार निकलने से पहले , अपने भाई रवि के गाल को कास कर चुम लिया , और फिर वोह सब सैर के घर के अंदर चल पढ़ी , रवि अकेला गाड़ी में बैठा रहा ,
फिर कोमल , रमा , ख़ुशी और प्रिय , सैर के घर के मैं गेट के पास पहुँच गई , प्रिय ने दूर बेल्ल बजे तोह , इक लड़की ने दरवाजा खोला , प्रिय तोह उसे देखते hi पहचान गई , क्यों की वोह पहले यहाँ कई बार ा चुकी थी ,
"हलो सना , कैसी हो अप्प , मेरी छोटी बहिन कहा है.." प्रिय ने अग्गे बढ़ , सैर की छोटी बहिन सना के गले लगते हुए बोलै ,
"देदी , सैर देदी अंदर है , ायो अप्प सब .." सना बेहद खुश होते हुए बोली , अज्ज बड़े दिनों बाद प्रिय को आया देख , सना बेहद खुश हो गई थी ,
फिर सब घर के अंदर ा गए , इक सूंदर घर था , शहर की bheed-bhad सा दूर , बहुत शांति और सकूं था इस घर में ,
सबने घर के अंदर आकर देकर , सैर सोफे पर गुमसुम , उदास बैठी हुई थी , उफ़ सैर बिलकुल वैसी थी , जैसे 3 साल पहले थी , बस उसका भोला मासूम गोरा चेहरा थोड़ा मुरझा सा गया था , वोह अकेली नै बैठी थी , उसके साथ इक छोटा सा , प्यारा सा बचा भी बैठा हुआ था , जो खेल रहा था ,
"प्रिय डीडीई..." सैर की नज़र जैसे hi प्रिय पर गई , वोह बेइंतहा खुश हो गई , वोह इक पल में उठी , और भाग कर प्रिय के गले लग , रोने लगी , वोह दिल की बेहद कमज़ोर थी ,
"बस छोटी , उम्मा , बस बचा , बस..." प्रिय , सैर के बालो को प्यार से सहलाते , उसके सार को चूमती , उसे चुप कहते हुए बोली , सबकी अखन नाम हो चुकी थी ,
कुछ देर रोने के बाद सैर शांत हो गई , फिर वोह सब के साथ सोफे पर बेथ गई , सना सबके लिए पानी लेने चली गई , सैर ने रमा को पहचान लिया था , क्यों की , जब रवि को राखी बाँड्ने गई थी , तब रमा से मिल चुकी थी वोह , पर कोमल और ख़ुशी को पहली बार देख रही थी सैर ,
"देदी , भइआ का कुछ पता चला , देदी , कब आएंगे भइआ , बताओ न देदी , बताओ ना , में , में , और इंतज़ार नै कर सकती , देदू बोलो न , भइआ कहा है , आपके साथ ए हैं , देदी बोलो ना..." सैर ने फिर से बेइंतहा रट , तड़फते हुए बोलै , पता नै क्यों , उसका दिल बेचैन सा हो उठा था , कही कोई बुरी खबर न हो ,
"शहहह , बस , अभ इक और शब्द नै , छोटी , तुम भइआ से मिलना है..." प्रिय अभी बोल hi रही थी के सैर बेच में बोल पढ़ी ,
"मिलना है , देदी , अप्प भइआ को लायी हो अपने साथ , बोलो न , भइआ , भइआ ..." सैर बेइंतहा रट हुए प्रिय और बाकि सब के चेहरों को देखते हुए बोली , कोमल , रमा और ख़ुशी , वोह तीनो भी रो रही थी ,
"नई .." प्रिय ने िका इक यह शब्द बोल दिया ,
सैर खामोश हो गई , उसके असनु थम गए , वोह न तोह रो रही थी , ऐसा लग रहा था , जैसे वोह साँस hi नै ले रही थी , वोह पालक जपकाना तक भूल गई थी , वोह , वोह , कुछ नै कर रही थी , कुछ नै ,
"छोटी , छोटी , क्या हुआ , बोल न , अरे कुछ तोह बोल..." प्रिय ने बेइंतहा रट हुए , सैर को कंधु से पकड़ हिलाते हुए , पगलू की तरह बोलै , पर सैर सोफे पर इक तरफ गिर गई , शयद उसे शॉक लगा था , सब घबरा गई ,
"भय्याहा , जल्दी आयु..." कोमल ने जोर से चीखते हुए बोलै ,
"यह , यह , मने क्या कर दिया , छोटी उठू ना , भइआ ए हैं , हे भगवन , छोटी..." प्रिय ने बेइंतहा रट हुए , अपने बाल नोचते हुए बोलै , रमा उसे संभालने लगी ,
कोमल और ख़ुशी ने सैर को निचे लिटा दिया , उसकी सांसे थम गई थी , शयद उसका मासूम दिल , इतना बड़ा जतका सेहन नै कर पाया था , तभी रवि अंदर ा गया , उसे देख कर लग रहा था , वोह भागता हुआ आया था , वोह एते hi , अपनी बहिन सैर के पास गिर गया , उसे बहु में भर , उसके चेहरे को पगलू की तरह चूमने लगा , उसके सीने पर , दोनों हाथो से जोर जोर से दबाते हुए , उसे होश में लेन लगा ,
"सैरा , देदी , उठू , उठू ना , अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह , क्यू , भगवाननं , मेरे साथ hi क्यू , मुझे ही क्यों इतना दर्द देते हो , मेरी बहिन , ूठः ना , देख तेरा भाई आया हैई , उठ ना..." रवि बेइंतहा दर्द में डूबता हुए , चीखते , छीलते रट हुए बोलै , उसके चखने , छिलने से , आसमान में बदल गिर ए थे , बहार साफ सुथरा मौसम , अभ काळा अंधकार में दुब चूका था , तेज़ हवा चलने लगी थी , बहार तूफान ा चूका था , बिन मासूम बरसात हो रही थी , क्यों की डेविल दर्द में दुब चूका था ,
"रावी , रवीए , में , में , कुछ करती हु..." ख़ुशी ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,
"यह सब , यह सब , मेरे कारण हुआ हैई , में क्यूँउउ , क्यू , भइआ को साथ ना लायी..." प्रिय ने बेइंतहा रट हुए बोलै , रमा बड़ी मुश्किल से उसे सम्बल प् रही थी , सैर की छोटी बहिन सना , वोह भी पगलू की तरह रो रही थी ,
फिर ख़ुशी ने सैर के माथे पर हाथ रख दिया , उसके हाथ से लाल रौशनी निकल , सैर के माथे में सामने लगी , वोह रवि की तरफ देखते हुए बोली ,
"रावी , में इसके दिल को बिजली का जतका देती हु , तुम इसको साँस दो अपने मोह से..." ख़ुशी ने सैर के सीने पर दोनों हाथ रख , अपनी पूरी शक्ति एकजुट करते हुए बोलै , उसकी अखन लाल रौशनी में चमकने लगी ,
"हाँ , ठीक है..." रवि ने इतना बोल , सैर की नक् अपनी उंगलियों से बंद कर , अपने होंठ , उसके होंठो से जोड़ लिए ,
"रवि 1 , 2 ोर्ड्र्र 3..." फिर ख़ुशी ने इक तेज़ बिजली का जतका दिया , लेकिन कुछ न हुआ , उसने इक और जतका दिया , पर कुछ न हुआ , अभ ख़ुशी भी हिमेट हरने लगी थी ,
रवि अपनी पूरी जान लगा , सैर के होंठो से अपने होंठ जोड़े , उसे साँस देने की कोससिह कर रहा था , उसकी आँखों से बहते असनु , सैर का मासूम चेहरे पर गिर रहे थे ,
"रावी कुछ नाई हो रहा..." ख़ुशी बेइंतहा रट हुए बोली ,
"खुशु देदी , में भी आपका साथ देती हु..." कोमल भी , ख़ुशी के हाथो पर अपने हाथ रखते हुए , रट हुए बोली ,
"भइआ तयररर हो जोऊ 1 , 2 ऑर्डर 3..." इस बार दुगनी शक्ति से , कोमल और ख़ुशी ने , इक जोरदार जतका दिया , सैर के मासूम दिल को ,
"अह्ह्हींईईईन्न्नन अह्ह्हैईईईन्न्नन्नन्न..." सैर का पूरा शरीर इक डैम से उछाल पढ़ा , उसकी बंद सांसे चल पढ़ी , रवि अभी भी , उसके होंठो से अपने होंठ जोड़े , बेइंतहा रट हुए , उसे साँस दे रहा था ,
"सैरा डीडीई..." सैर की सांसे चलते hi , उसके होश में एते hi , रवि ने उसे कण्डु से पकड़ , ऊपर उठा , अपने गले लगा , उसके बालो को सहलाते , रट हुए , बेइंतहा दर्द में दुबे हुए चीला कर बोलै ,
कोमल और ख़ुशी , सैर के होश में एते hi , इक दूसरे के गले लग रोने लगी , प्रिय भी अपनी छोटी बहिन सैर को ठीक देख , रमा की बहु में सिमट रोने लगी , पर अभ , ें सबके असनु , ख़ुशी के असनु थे , क्यों की सैर जिन्दा हो चुकी थी ,
"पनीइ लाऊ जल्दीए..." रवि ने निचे बैठे , सोफे से अपनी पीठ टिकाये , चीला कर बोलै , सना भाग कर दुबारा पानी ले आयी , पहले वाला तोह उसके हाथो से गिर गया था , रवि ने सना के हाथो से पानी का गिलास लेकर , सैर को पिलाया , उफ़ तब उसकी जान में जान आयी , रवि का जिस्म थार थार कम्प रहा था , इतना वोह कभी नै डरा था , कभी नै ,
"भय्याहा..." सैर ने कुछ कुछ होश में एते हुए , अपनी अखन थोड़ी सी खोल , अपने भाई रवि को देख , बेहद धीरे से बोलै , उफ़ उसके यह चाँद शब्द , सबके दिल को सकूं दे गए , रवि तोह पागल हो गया , वोह पगलू की तरह , अपनी मासूम सी बहिन सैर के , चेहरे को चूमने लगा , इस प्यार में कोई वासना नै थी , रवि काफी देर बाद जाकर शांत हुआ ,
"मेरी बहिन , उम्मा , मुझे , मुझे माफ करदी , इतना प्यारर , तू , तू , इतना प्यारर करती ही मुज़से , अह्ह्ह्हह , अगर तुझे कुछ हो जाता , ओह्ह्ह , मेरा डिल अभी भी कम्प रहा ही , मेरी बहन ..." रवि बेइंतहा रट हुए , अपनी बहिन सैर के चेहरे को चूमते हुए बोलै ,
"भइआ , अप्प ा गई , मुझे लगा कही अप्प , भइआए मी दररर गयी थिई , भइआ , में , मी , आपके बिना मर्डर जौउगीय ..." सैर ने थोड़ा पीछे हैट , रवि की आँखों में देखते हुए , बेइंतहा रट हुए बोलै , उफ़ सैर से मासूम शयद hi इस दुनिआ में कोई हो ,
"शठ , पगली कही की , तेरा भाई अमर ही , वोह कभी नयी मर्डर..." रवि अभी बोल hi रहा था ,
"भइआए , ऐसी बैठत कभी मैट करना , काबिई नयी..." सैर ने रवि के होंठो पर हाथ रख , बेहद रट हुए , उसके पोरे चेहरे को चूमते हुए बोलै , उफ़ अभ जाकर , रवि के दिल को सकूं मिला था , अज्ज कोमल के बाद , सैर का प्यार hi , उसे इतना सकूं दे पाया था , क्यों की वोह उसके लिए , इक पल में मर गई थी , इक पल में , उसने अपनी चलती संसू को रोक लिया था , ऐसा प्यार , रवि सबसे प्यार करता था , जो जो उसके जीवन में था , पर सैर और कोमल का प्यार अलग hi था , दोनों इक जैसी महसूस हो रही थी रवि को , मर तोह सभी जाती उसके लिए , पर में शबदो में आपको समझा नै सकता , अप्प बस महसूस कर लो , में किसी के प्यार का अपमान नै कर रहा हु , क्यों की सबका प्यार अनमोल था , सबका प्यार अलग अलग था ,
"ओह्ह्ह , मेरी बहन , ऐसा कभी मत करना , में कितना दर गया था , पगली , तू तोह मेरी जान ही , में क्यों , क्यों , तेरे पास न ा पाया , हे भगवन , क्योऊ , मुझे इतना दर्द दे रहा तू , क्योऊ , मेरी बहिन , वादा कररर , कभी ऐसा नै करेगी , वडा कररररर , कभी अपनी संसू को नै रोकेगीइ , वडा कररर..." रवि ने बेइंतहा दर्द में दुबे , बेइंतहा रट हुए बोलै , वोह बार बार सैर के मासूम चेहरे को चुम रहा था ,
इक राखी के लिए , बस इक राखी के लिए , उसकी बहिन सैर ने अपनी सांसे रोक ली , इक छोटे से धागे के लिए , उफ्फ्फ , जरुरी नै इक hi पेट से जनम लेने वाले भाई बहिन हूँ , अगर , दुनिआ में प्यार , रवि और सैर जैसा हो , तोह आधे से जायदा पाप यु hi ख़तम हो जाये , रवि ने जब राखी बंधी थी , उसने सोचा भी नै था , सैर और प्रिय , इस कदर , उसके साथ बांध जाएगी , इस कदर , उसे अपना भाई मान लेगी , के उसके दूर होते hi , वोह हसना , मुस्कराना भूल जाएगी , उनकी खुशियाँ लूट जाएगी , उनका जीवन नाराज से बदतर बन जाएगा , अज्ज रवि के पिता उसे हर दिन , इक नया दर्द दे रहे थे , पर रवि के पास , ऐसे प्यार करने वाले थे , के इस बार , रवि के पिता शयद झुक जाते , शयद हार जाते ,
"भइआए , में , में , वडा नई करुगीय , नई करुगीय , अगर , अगर , अप्प मेरे पास रहूगी , में , में तभी जिन्दा रहूगी , में , में , मर जोगीई , आपके बिना , भइआए , में , में , वादा नईईई करुगीई..." सैर ने बेइंतहा रट हुए , रवि के गले लग , उसके सीने पर , अपने दोनों हाथो से मरते हुए बोलै ,
"शह्ह्ह्ह , बस अभ और नई , मेरी , मेरी , दोनों बहाने पगली हैं , चल , अभ कुछ खिला दी , तेरा भाई भूखा हैई..." रवि ने बेहद प्यार से , सैर के बालो को चूमते हुए बोलै ,
"क्या , मेरा भाई बुखा हैई..." सैर इक डैम से पीछे हट , इक डैम से खड़े होते हुए बोली , उफ़ वोह अपना हर दर्द , हर दुःख , भूल सा गई , वोह भाग गई किचन की तरफ , सना भी उसके पीछे पीछे चली गई , रवि उठ कर सोफे पर बेथ गया ,
"भइआए , मुझे माफ्फ करदु , यह , यह , मेरी कारण हुआ ही..." प्रिय बेइंतहा रट हुए , रवि के गले लगते हुए बोली ,
"शहहह , बस देदू , आपको कहा पता था , आपकी कोई गलती नयी , उफ़ सैर का दिल इतना मासूम होगा , यह कोई नै जनता था , बस ददऊ , अप्प मुझे भी रुला डोगीइ , बस देदू..." रवि ने रट हुए प्रिय का चेहरा चूमते हुए बोलै , रवि की बतिअन सुन , प्रिय शांत हो गई , उसने अपने असनु साफ कर लिए , वोह मुस्कराने लगी ,
कुछ देर बाद , सैर और सना , किचन से बहार ा गई , वोह हल्का फुल्का नाश्ता और छाए ले आयी थी , उसने सबको छाए और नाश्ता दिया , और अपने भाई के साथ बेथ गई , वोह और प्रिय , उसे अपने हाथो से खिलने लगी , रवि की अखन नाम हो गई , अपनी दोनों बहनो का इतना प्यार देख कर , क्या आपकी अखन नाम हुई...
"उफ़ भइआ और खाओ न.." सैर ने बेहद खुश होते हुए बोलै , अभ सैर इस दुनिआ की सबसे खुशनुमा लड़की थी , जिसे सब कुछ मिल गया था , जैसे किसी बचे को उसकी , मनचाही चीज़ मिल गई हो ,
"बस देदी , और नई , कोमल , तुम hi कुछ कहो ना..." रवि ने बड़ी मुश्किल से कहते हुए , कोमल की नली नली आँखों में ज़कते हुए बोलै , वोह ख़ुशी के साथ बैठी , मुस्करा रही थी ,
"भइआ , यह है आपकी कोमल , उफ़ , उस दिन अप्प इसके लिए इतना उदास थे , पर , पर , भइआ , वोह सब बोल रही थी , कोमल मर चुकी है , और , और , अप्प , कोमल , को बार बार , बेवफा बोल रहे थे , क्यों भइआ , और कोमल वापिस कैसे मिल गई आपको , मने , मने , उस दिन आपकी आँखों में बेइंतहा दर्द देखा था , में बहुत रोई थी घर आकर , आपका दर्द मुज़से सेहन नै हुआ था..." सैर , कोमल के खूबसूरत चेहरे को निहारते हुए , फिर से रट हुए बोली ( अप्प लोग अपडेट-21 रीड कर लेना इंडेक्स में)
"हाँ , भइआ , मुझे भी अभ यद् आया , छोटी सही बोल रही है , आपकी पत्नी ने बोलै था , मेरे पति को बचते हुए , अपने अपनी कोमल को खो दिया उस जंगल में , भइआ , मेरे मन का बोझ अज्ज हल्का हुआ है..." प्रिय भी उस दिन को यद् कर रट हुए बोली ,
रवि बस अपनी कोमल को देखने लगा , कोमल खामोश थी , इक पत्थर की तरह , उस दिन जंगल में जो उसने बोलै था , वोह बस , अपने भाई को बचाना चाहती थी , लेकिन , कई बार , अपने प्यार को मेहफ़ूज़ रखने के लिए , बेवफा भी बनना पढता है , धोकेबाज़ कहलाना पढता है , कोमल वोह कड़वी बतिअन बोल , बेवफा बन गई , पर सच्चा प्यार , अपना रास्ता दंड hi लेता है , बस अप्प कभी निराश मत होना , अप्प जिसको चाहते हो , जिसको प्यार करते हो , वोह आपसे रूत सकता है , पर आपको भूल नै सकता ,
कभी उदास मत होना , के मेरे मेहबूब मुज़से नफरत करते हैं ,
क्या पता , वोह उस रस्ते पर हो , यहाँ प्यार भी डैम तोड़ देता है...
"भइआए , कुछ तोह बोलो..." सैर अपने भाई रवि का हाथ अपने हाथिओं में लेते हुए बेहद नाम आँखों से बोली ,
"उफ़ , सैर , प्रिय , मेरी कोमल बेवफा नै थी , बस पागल है मेरे प्यार में , ऐसे मेरे बिना कुछ दीखता hi नै , उस दिन , हासष्ठ , उस दिन , इसने मेरी जान बचने के लिए , अपने प्यार की परीक्षा दी , मेरे दिल में नफरत भर दी , मुझे कड़वी , जहर भरी , बतिअन बोल , मुज़से दूर चली गई , तुम दोनों कहती हो न , 3 साल में कहा गया , में , में , अपनी कोमल को लेने गया था , में इसके बिना इक पल भी खुश नै रह सकता , में मर सा जाता हु , जब मेरी कोमल मुज़से दो पल भी दूर जाती है , में , में , ऐसे नफरत कर hi न पाया , हर पल , हर लम्हा , ऐसे यद् करता रहा , कोई और लड़की , मुझे वोह सकूं न दे पायी , जो मेरी कोमल की बहु में मुझे अत है , देदी , मेरी कोमल पगली है , हम दोनों दीवाने है इक दूसरे के , यह हमारी कहानी है , यह हमारे प्यार की कहानी है , इसका अंत या तोह हमारे मिलान से होगा , या हमारी मौत से..." रवि ने कोमल की आँखों में अखन दाल , बेइंतहा दर्द भरे शबदो में बोलै , उसकी अखन नाम हो गई , कोमल , उफ़ , वोह पगली सच में रो रही थी , वोह इक पल में उठ कर , अपने भाई के सीने से लग गई , उसकी बहु में , अपना चेहरा छिपाने लगी , सब उनके प्यार को देख , बस रो रहे थे , हम रो कर hi , अपना प्यार जाता सकते हैं...
"शहहह , बस जणू , बस..." रवि ने कोमल का चेहरा अपने दोनों हाथो में पकड़ , उसके गुलाबी होंठो को चूमते हुए बोलै ,
"सैर , में भइआ के साथ जा रही हु , तुम भी चलो न , कुछ दिन भइआ के पास रह कर , हम वापिस ा जाएगी..." प्रिय ने इस दर्द भरे माहौल को बदलने के लिए , सैर की तरफ देखते हुए बोलै ,
"क्या , सच में देदू , में चलुगी , मुझे भी भइआ के पास रहना है , अरे भइआ , अप्प मेरे बेटे से मिले hi नई , सॉरी , में भूल गई ..." सैर ने मुस्कराते हुए , पहले प्रिय की तरफ और फिर अपने भाई रवि की तरफ देख कर बोलै ,
"ओह्ह , मेरा प्यारा बचा , क्या नाम है देदू इसका..." रवि ने मुस्करा कर , सना के हाथिओं से बचा , अपनी गॉड में लेकर , उसके गालो को चूमते हुए बोलै ,
"रवीए..." सैर ने अपने भाई की आँखों में देखते हुए मुस्करा कर बोलै , रवि खामोश सा हो गया ,
"भइआ , क्या हुआ अप्प खुश नै हो , वोह , वोह , भइआ , मने और प्रिय देदी ने यह नाम रखा , अभ दो बचो का इक hi नाम अजीब सा लगता , इस लिए मने अपने बचे का नाम , अपने प्यारे भाई के नाम पर रख दिया..." सैर ने अपने भाई रवि के कंधे पर सार रख , अपने बचे से खेलते हुए बोलै ,
"उफ्फ्फ , देदू , इतना प्यारर करती हो मुज़से , मुझे बहुत ख़ुशी हुई , ाचा देदू , आपके मुन्ना बाबू कही दिख नै रहे..." रवि ने पहले नाम आँखों से और फिर हस्ते हुए बोलै , तोह सैर शर्माने लगी ,
"भइआ , वोह बाजार गए हैं , लो ा गए वोह..." सैर ने बेहद खुश होते हुए घर के दरवाजे की तरफ देख कर बोलै , क्यों की मुन्ना ा चूका था ,
"अरे वह , कवी भाई , कैसे हो , अपुन को ख़ुशी हुई आपको देख कर.." मुन्ना घर के अंदर ा रवि को देखते हुए बोलै , फिर रवि उठ कर उसके गले लगा ,
"सुनो जी , कवी नै रवि नाम है भइआ का.." सैर ने हस्ते हुए बोलै , तोह सब हसने लगे , मुन्ना इक इक कर सबको मिला और फिर सोफे पर बेथ गया ,
"अरे मेरी बुलबुल ठीक है , अरे , खाना , पानी लाना मेरे लिए..." मुन्ना ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"जेजुउ , खाना नै सना ..." सना अपने पेअर गुस्से में पटकते हुए , किचन की तरफ जाते हुए बोली , सब फिर से हसने लगे ,
"रवि भाई , ाचा हुआ अप्प ा गए , नै तोह , सैर ने अपुन के दिमाग का दही कर दिया , बोले तोह , भइआ को लाओ , भइआ को लाओ , और भाई , जब चिडया जी के पति..." मुन्ना अभी बोल hi रहा था , के प्रिय बेच में बोल पढ़ी ,
"जेजुउ , चिडया नै प्रिया..." प्रिय अपने माथे पर हाथ मरते हुए बोली ,
"अरे प्रिय नाम में क्या रखा है , तोह अपुन बोल रहा था , अपुन ने आपको बहुत डुंडा , शहर के सरे , लुखे लोग को पूछा , पर , अप्प कही नै मिले , आपकी बहिन , अपुन से बात नै करती थी , अरे , अभ , अपुन की क्या गलती , अरे में और रंजना बुरे फास गए..." मुन्ना अभी बोल hi रहा के सैर बेच में बोल पढ़ी ,
"भइआ , देखा , इनका बहार चाकर चल रहा , रंजना के साथ..." सैर अपने भाई रवि को मुन्ना की शिकायत करती हुई बोली ,
"नै मेरी बुलबुल , इनके पति , बोले तोह हस्बैंड , में उनकी बात कर रहा हु..."
"जेजुउ , अह्ह्ह्ह , रंजना नै राजेश , रराजेएष्ठ..." प्रिय ने अपना माथा पीट कर बोलै , तोह सब हसने लगे ,
"हाँ वही तोह , देखा भाई , यह बीवी लोग कितना शक करती हैं , वैसे अप्प गए कहा थे..." मुन्ना ने सना के हाथ से पानी लेकर पेट हुए बोलै , सना अपने जेजु के साथ hi बेथ गई , वोह नजाने कब से रवि को hi घर घर कर देख रही थी ,
"भाई में अपनी कोमल को लेने गया था , वैसे , यह कोमल है , यह रमा , यह ख़ुशी , यह दोनों मेरी बहाने हैं , और यह मेरी बीवी..." रवि ने मुन्ना को सबसे मिलवाते हुए बोलै ,
"ः , नमस्ते बहिन लोग , नमस्ते भाभी जी..." मुन्ना सबको हाथ जोड़ नमस्ते करता हुआ बोलै ,
"ाचा , सुनो जी , में भइआ के साथ जा रही हु , में और प्रिय देदी , हम कुछ दिन बाद आएगी , ठीक ही ..." सैर ने मुस्कराते हुए मुन्ना की तरफ देखते हुए बोलै ,
"अरे मेरी बुलबुल , इस में पूछना क्या , तेरा जो दिल करे तू कर , अपुन को बताने का नई , तू जा , बिंदास जा..." मुन्ना मुस्कराते हुए बोलै , तोह सैर बेइंतहा खुश हो गई ,
"मुन्ना , तुम दिलावर खान को जानते हो..." रवि ने िका इक पता नै क्यों पूछ लिया , उसे अपने चाचा जी की प्रॉब्लम भी सोल्वे करनी थी ,
"जनता , अरे , अपुन ने उसके साथ काम भी किया है , क्यों , क्या बात है..." मुन्ना ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,
"मुन्ना , वोह मेरे चाचा जी को परेशान कर रहा है , मुझे उससे मिलना है , तुम , तुम , ऐसा करना , उसकी पूरी जानकारी निकल कर , मुझे कॉल कर देना , पर ध्यान से , किसी को शक न हो तुम पर , तुम मेरी बहिन के पति हो , इस लिए अपना ख्याल रखना..." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,
"ोकक.." मुन्ना भी रवि की बात समाज कर बोलै ,
फिर सबने कुछ देर और बतिअन की , फिर रवि और बाकि सब , घर की तरफ चल पढ़े , अभी टाइम भी 1:35 मिंट का हो चूका था , अभी रवि गाड़ी में बैठने hi जा रहा था , उसका मोबाइल बहज उठा...
दूसरी तरफ..
"हलो , हलो , हाँ , अनु , मने , इक फाइल बेहजी है तुम , चेक करो , हम्म , बहुत , प्रेशर है ऊपर से ..." यह राजेश था , जो इक चोर से बहुत परेशान हो चूका था ,
"हम्म , जी सर , देख रही हु , असलम नाम है इसका , जी , हम्म , हम्म , रवि 2 बजे आएगा , हम्म , कोई बात नई , अभ जायदा दिन नै बचेगा , ok , ok , जी सर..." अनु ने मुस्करा कर इतना बोलते हुए कॉल कट कर दिया , वोह रवि का इंतज़ार कर रही थी , अनु और रवि की टीम में अभ बेबी और काट के इलावा , लारा और एलिज़ाबेथ भी जुड़ चुकी थी , उफ़ इनकी टीम सच में अनोखी टीम थी , शयद कोमल और ख़ुशी भी इनके साथ जुड़ जाती , खैर यह तोह अग्गे पता चलेगा ,
असलम , बस इक नाम hi पता था उसका , जो वोह खुद बता कर जाता था , राजेश पिछले कुछ सालो से उसे पकड़ने की कोससिह कर रहा था , पर असलम , इतना शातिर और इतना तेज़ चोर था , के हर बार राजेश और उसकी पुलिस हार जाती थी , पिछले कुछ सालो से असलम 11 बड़ी चोरिया कर चूका था , वोह चैलेंज करके चोरी करता था , कोण था यह असलम , और क्या रवि उसे रोक पायेगा , खैर यह तोह ऐनी वाले वख्त में छिपा था...
दूसरी तरफ....
"हलो , हलो , हाँ , हाँ , हम्म , ः , ः , मुझे कोई नै मर सकता , हम्म , वोह सब बेवकूफ हैं , जो मुझे मारा हुआ समाज लिया , कोई नै मर सकता , में जासूस हु , में बिमान शाह हु , थे ग्रेटेस्ट ऑफ आल टाइम , में इस दुनिआ का सबसे बड़ा जासूस हु ..." इक इंसान ब्लैक कपडे में , ारवती नगर के सबसे बड़े कैसिनो होटल में , टॉप फ्लोर में , सोफे पर बैठा , हलकी हलकी लाल वाइन , के छोटे छोटे सिप लेते , अपने मोबाइल पर बात करते हुए बोलै ,
"ः , बिमान शाह , तुम सच में बहुत बड़े जासूस हो , सब को बेवकूफ बना दिया , उस रवि को भी ..." दूसरी तरफ इक आदमी मुस्कराते हुए बोलै ,
"हाँ , उन सब को लगा , उन लोग ने बिमान शाह को मर दिया , वोह बस मेरा इक हमशकल (क्लाउन) था , में तोह कभी इंडिया आया hi नै था , अभ मुझे एना पढ़ा , क्यों की अभ उस महाशक्ति के जागने का वख्त नज़दीक है , हर 30 साल बाद महाशक्ति जग उठती है , बस अभ मुझे उस महाशक्ति को पाना है , मेरी पूरी जिंदगी गुजर गई , उस महाशक्ति तक पहुँचने में , अभ वोह दिन पास ऐनी वाला है , 30 साल पोरे होने में 6 महीनो का वख्त बचा है , तुम इक काम करो..."
"हाँ बोलो..."
"बेबी ने मुझे धोका दिया , रवि से प्यार करके , पर वोह जूही थी , में जनता था , जूही hi चेहरा बदल कर बेबी बानी है , मुझे लगा बेबी , रवि को मर देगी , आखिर उसे बदला लेना था रवि से , पर वोह साली रवि के प्यार में फिर से दुब गई , और कैटलीन , उस साली को बेबी से प्यार हो गया , दोनों ने मुझे धोका दिया , तुम ऐसा करो , उस जापानीज लड़की को बेहज दो , क्या नाम था उसका..." बिमान शाह ने बेइंतहा गुस्से में बोलै ,
"हम्म , सिको Twin's ..."
"हाँ , वही , सिको Twin's , वोह कहकर जुड़वाँ बहने , जो दुनिआ की बेरहम कहकर कॉन्ट्रैक्ट किलर्स हैं , उनको बेहज दो , मुझे उस बेबी और काट से बदला लेना है , दोनों को मर कर , रवि के इक इक चाहने वाले को मर दूंगा , अभ बेबी और काट को सजा मिलेगी , हम जासूस हमारे रूल तोड़ने वालो को इक hi सजा देते हैं , वोह है मौत की सजा..." बिमान शाह ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"मेरे पास इक और रास्ता है , और वोह दोनों लड़कियाँ कल ा जाएगी..."
"क्या..."
"अप्प ओपन कॉन्ट्रैक्ट रख दो , फिर देखना पूरी दुनिआ रवि को मरने के लिए , उसके पीछे कुत्तो की तरह पढ़ जाएगी , क्यों , कर दू इनाम घोषित ..."
"हम्म , ः , 200 क्रूर्रे का इनाम रख दो , जो भी रवि को मरेगा , कार्डो एलान जुंग का..."
"ः , अज्ज hi ओपन कॉन्ट्रैक्ट का एलान करता हु , जो भी रवि को मरेगा , उसे 200 क्रूर्रे मिलेगा , अभ रवि नै बचेगा , पूरी दुनिआ के डॉन , गुंडे , उसके पीछे पढ़ जायेगे ..." दूसरी तरफ वोह आदमी बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , तोह बिमान शाह भी हसने लगा....
तो बे कुनिटेड.....
अभ अग्गे....
अज्ज रवि बेहद खुश था , उसे ख़ुशी इस बात की नै थी , के वोह अपनी बहिन प्रिय से मिला , उसे ख़ुशी इस बात की थी , उसने अपनी बहिन की इज्जत बचा ली , रवि बार बार यही सोच रहा था , अगर वोह इक घंटा लेट हो जाता तोह , उफ़ उसकी बहिन मर जाती ,
इसका इक hi कारन था , प्रिय इक पतिव्रता औरत थी , उसके लिए , उसकी इज्जत , उसकी मान मर्यादा , उसका सब कुछ था , दुनिआ में कुछ औरतीयं ऐसी होती हैं , पर कुछ औरशन के लिए यह बतिअन , बस पुराने विचारो जैसी होती हैं , उनको लगता है , अगर वोह 10-20 लड़को के साथ सो भी जाएगी , तोह क्या hi फरक पढ़ जायेगा , लेकिन किसी के लिए वफादार होने में , इक अलग hi मज़ा होता है ,
कहते हैं न , कुछ वफ़ा तुम करो , कुछ वफ़ा हम करे , तोह क्या बात होगी ,
कुछ तुम तड़फो मेरे लिए , कुछ में तड़फो तुम्हारे लिए , तोह क्या बात होगी ,
कुछ रतियन में न सोयु , कुछ रतियन तुम जागो , तोह क्या बात होगी ,
कुछ तुम रूत जाओ मुज़से , कुछ में रूत जाऊ तुमसे , तोह क्या बात होगी ,
में दोस्त समाजु तुम , तुम धोका दो मुझे , तोह क्या बात होगी ,
मेरे लबु पर सच हो , तुम्हारे लबु पर झूठ हो , तोह क्या बात होगी ,
में मारा हुआ समाजु तुम , तुम जिन्दा रहो दुसरो के लिए , तोह क्या बात होगी ,
खैर अग्गे , कोमल गाड़ी ड्राइव कर रही थी , ख़ुशी उसके साथ अग्गे बैठी थी , रमा , रवि और प्रिय पीछे बैठे हुए थे , उफ़ यह रमा अभ भी फ्रूट्स खा रही थी , प्रिय के घर से सरे फ्रूट्स उठा लायी थी वोह , रवि बेच में बैठा हुआ था , और प्रिय इक तरफ , प्रिय का 3 साल का बीटा , ख़ुशी की गॉड में बैठा हुआ था ,
"उफ़ रमा बस करो , कितना खाऊगी अभ..." रवि ने रमा की तरफ देखते हुए बोलै , जो अभी केला (बनाना) खाने hi जा रही थी ,
"भइआ , भूक लगी मुझे , अप्प खामोश रहो , वार्ना आपको भी खा जोगी..." रमा ने उस केले को नंगा कर , उसकी नोक पर जीभ फिरते हुए बोलै , उफ़ रमा के नरम गुलाबी होंठो में से निकली उसकी रास भरी जीभ देख , रवि के मोह में पानी भर गया , वोह अपने होंठो पर जीभ घूमने लगा ,
"क्या हुआ भइआ , भूक लगी है..." रमा ने अपने भाई को आंख मरते हुए , वोह लम्बा सा केला अपने मोह में आधे से जायदा डालते हुए बोलै , उसने वोह केला खाया नै , उसे वैसे hi बहार निकल लिया , जैसे बस उसे चूस रही हो ,
"n...nn..naiii...tt...tt...ttohh..." रवि ने रमा के गुलाबी लबु को ललचाई नज़रिओं से देखते हुए बोलै , रमा के होंठो पर इक मुस्कान ा गई , उसकी कामुक अदायिओं ने रवि को पूरा घ्याल कर दिया था ,
"उम् , बहुत टेस्टी है भइआ..." रमा अपने भइआ को छेड़ते हुए , बड़ी कामुक अड्डा से , उस केले को मोह में भर , बार बार चूसते हुए , उसके कण में धीरे से बोली ,
"क्या..." रवि ने धीरे से रमा के कण के पास अपने होंठ कर पूछा ,
"यह केला , उम् बहुत मोटा और लम्बा है , अह्ह्ह , प्रिय देदी यह केले अप्प ने कहा से लिए..." रमा ने पहले अपने भाई की तरफ , और फिर प्रिय की तरफ देखते हुए , बेहद मुस्करा कर बोलै , रवि का लुंड पूरा तन कर खड़ा हो गया ,
"हम्म , हाँ , वोह अमित के पापा लाये थे बाजार से..." प्रिय अपने ख्यालो से बहार एते हुए मुस्करा कर बोली , तोह रमा और कोमल हसने लगी , कोमल गाड़ी के मिरर से , अपने भाई और रमा को देख रही थी , उसे पता था , दोनों के बेच क्या चल रहा है ,
"मेरा केला भी चूस लो न , इस बाज़ारू केले से ाचा है..." रवि ने धीरे से रमा के कण में बोलै , तोह रमा शर्माने लगी ,
"नै जी , मुझे नै चूसना ..." रमा ने इक और केला चलते हुए , उसे कहते हुए , अपने भाई की आँखों में अखन दाल बोलै , तभी रवि ने सामने देखा , तोह उसकी अखन , कोमल की आँखों से मिल गई , वोह उस छोटे से मिरर से उनकी तरफ देख रही थी , रवि ने अपने होंठो पर जीभ फिरा दी , कोमल ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,
"उफ्फ्फ भइआ , सैर कितनी खुश होगी आपसे मिल कर..." प्रिय ने अपना सार रवि के कंधे पर रख , मुस्कराते हुए बोलै ,
"क्या , ओह्ह , हाँ देदू , सही कहा अपने , उफ़ देदू , मने अप्प दोनों को कितने दुःख दिए , और अज्ज , अज्ज , मुझे देरी हो जाती तोह , मेरा मन अभी भी कम्प रहा है , में , में , उसे छोड़ूगा नै , जिसने आपके घर ें गुंडों को बेह्जा था..." रवि ने प्रिय का हाथ अपने हाथो में लेकर , उसे बार बार चूमते हुए बोलै ,
"भइआ , प्लस , नई भइआ , में , में , आपको फिर से खोना नै चाहती , में , में ठीक हु भइआ , अप्प कुछ नै करोगे अभ ..." प्रिय ने रवि के कंधे से अपना सार उठा , उसकी आँखों में देखते हुए , बेहद नाम आँखों से बोलै ,
"हाँ , भइआ , देदी , ठीक बोल रही है , लो केला खा लो..." रमा ने आधे से जायदा केला अपने मोह में डेल , उसे कहते हुए , इक केला रवि की तरफ करते हुए बोलै , कोमल और ख़ुशी यह देख हसने लगी , पर प्रिय को कुछ समाज नै आया ,
"नै , मुझे नै खाना..." रवि ने बुरा सा मोह बनाते हुए बोलै ,
"रमा देदी , भइआ दूध पेट हैं , केला नै कहते , हाँ , अगर दूध पिलाना है तोह पीला दो..." कोमल ने बेहद शरारती अंदाज़ में , अपने भाई की आँखों से अखन मिला कर बोलै , तोह रमा और ख़ुशी हसने लगी ,
"दूध नै है मेरे पास..." रमा ने अपने मोठे मोठे बूब्स को घूरते हुए , कोमल और ख़ुशी की तरफ देख कर बोलै , उनको मज़ा ा रहा था , अपने भइआ को तंग करने में , प्रिय के साथ होते , रवि बेबस था , कुछ कर नै सकता था ,
"अरे , यद् आया , दूध तोह घर पर बहुत पढ़ा था , भइआ , में आपको दूध पीला देती , पहले क्यों नै बोलै..." प्रिय ने िका इक यद् करते हुए मुस्कराते हुए बोलै , रवि हड़बड़ा गया , रमा , कोमल और ख़ुशी , तीनो हसने लगी ,
"n...nn...nnaii....d..dd..dedii..." रवि हकलाते हुए बोलै , रवि की नज़रियन अभी भी कोमल की नज़रिओं से मिली हुई थी , और कोमल अपनी कातिल आँखों को नचा नचा कर , रवि को तंग कर रही थी ,
"अरे बेवकूफ पे लेते दूधः ..." ख़ुशी ने दूध शब्द पर जायदा जोर देते हुए बोलै , वोह तीनो फिर से हसने लगी ,
"उफ़ यह तीनो भी न , बेचारी प्रिय देदी , कितनी मासूम और भोली है , हासष्ठ , ें तीनो की बातिओं का दूसरा मतलब समाज hi नै रही , घर जाकर , इनकी अचे से खबर लूंगा..." रवि ने मन hi मन सोचते हुए बोलै ,
"क्या हुआ भइआ , दूध पीने की ीचा हो रही है , ओह्ह हूँ , अभ क्या करे , रमा देदी , घर जाकर भइआ को यद् से दूध पीला देना..." कोमल ने रमा की आँखों से अखन मिला , उसे आंख मरते हुए बोलै ,
"नै , कोमल , मेरे पास इतना दूध नै है , थोड़ा सा तुम भी पीला देना ..." रमा ने हस्ते हुए बोलै ,
"ouu-huu , कुछ अप्प पीला देना , कुछ दूध में पीला दूंगी , और अगर भइआ को और ीचा हुई , तोह बाकि हमारी खुशु पीला देगी..." कोमल ने मुस्कराते हुए रमा और ख़ुशी की तरफ देखते हुए बोलै , वोह दोनों हसने लगी ,
"क्या भइआ , आपको इतना पसंद है दूध पीना , मुझे बोल देते , में घर पर पीला देती आपको..." प्रिय ने बेहद उदास होते हुए बोलै , उसे अभी भी कुछ समाज नै आया था ,
"नै देदी , यह तीनो बस मज़ाक कर रही है , मेरा पेट भरा हुआ है , कितनी दूर जाना है अभी..." रवि ने प्रिय को उदास देख , उसे मानते हुए बोलै , उसका लुंड पूरा अकड़ कर खड़ा हो चूका था , तीनो की कामुक बातिओं ने , उसे परेशान कर रखा था ,
"रमा देदी ध्यान से , कही केला फास न जाये मोह में..." कोमल ने रमा की तरफ देखते हुए बोलै , जिसके हाथ में अभी बहुत मोटा केला था , वोह इक दर्ज़न केले खा चुकी थी , ख़ुशी और कोमल हसने लगी , और रवि और प्रिय भी ,
"कोमल , हमारी रमा इस से भी , मोटा और लम्बा केला खा चुकी है , उसे पूरा एक्सपीरियंस है , बस तुम सीखना है , तुम केला खाना नै अत..." रवि ने कोमल को आंख मरते हुए बोलै , तोह रमा और ख़ुशी हसने लगी ,
"भइआ , क्या अप्प भी..." कोमल बेहद शरमाते हुए बोली ,
"क्या सच में , कोमल , तुम केला खाना नै अत , यह तोह बहुत आसान होता है..." प्रिय ने अपनी नादानी में बोलै , तोह रवि , रमा और ख़ुशी बेइंतहा हसने लगे , और कोमल के गाल शर्म से लाल हो गए ,
"हाँ देदू , कोमल बहुत डर्टी है , जब भी इसको केला दिखता हु , यह भाग जाती है , अभ अप्प hi देखो , रमा ने केला खा लिया , मेरी बीवी सीमा ने भी खा लिया , मेरी बहाने रिमी और शूरति और मेरी बीवी बेबी , उन तीनो ने भी केला खा लिया , बस कोमल hi डर्टी है , अभ अप्प hi समझो इसको..." रवि ने बेहद भोलेपन में कोमल की नली नली आँखों में ज़कते हुए बोलै , तोह रमा और ख़ुशी फिर से हसने लगी ,
"कोमल , तुम क्यों डर्टी हो केले से , केला तोह शरीर के लिए ाचा होता है , केले में कई गन होते हैं , अरे डॉक्टर तोह बोलते हैं , सबको दिन में दो बार केला खाना चाहये , वोह भी दूध के साथ..." प्रिय ने कोमल को समझते हुए बोलै , जब प्रिय कोमल को समझा रही थी , तब रवि , रमा और ख़ुशी पगलू की तरह हस्स रहे थे , उनकी आँखों में असनु ा चुके थे , और कोमल तोह शर्म से पानी पानी हो चुकी थी ,
"देखा कोमल , कितने गन होते हैं केले में , उफ़ अभ तोह खा लो केला , कब तक भगति रहूगी तुम , इक न इक दिन तोह खाना hi पड़ेगा..." रवि ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , तोह कोमल उस से नज़रियन मिला शर्माने लगी ,
"हासष्ठ , मुझे तोह केला बहुत पसंद है , गाओं में भइआ ने जब से केला खिलाया है , मुझे और केला ाचा hi नै लगता..." रमा ने अपना इक हाथ अपने भाई की जंग पर रखते हुए , मुस्करा कर बोलै , रवि का बदन कम्प सा गया , उसने रमा का हाथ अपनी जंग से उठा , अपने लुंड के उभर पर रख दिया ,
"आईएईए माआ..." रमा जोर से सिसक पढ़ी ,
"क्या हुआ देदी..." कोमल ने गाड़ी के मिरर से पीछे देखते हुए बोलै , उसने मिरर थोड़ा सेट करके देखा , तोह रमा का हाथ उसे कही और hi दिखा , उसने ख़ुशी को पास बुला उसके कण में कुछ बोलै तोह दोनों हसने लगी ,
"कुछ नै , मुझे काळा सांप की यद् ा गई , प्रिय देदी अप्प ने कभी सांप देखा है , उफ़ भइआ के पास , इक बड़ा कला सांप है..." रमा ने अपने भाई रवि की आँखों में अखन दाल , उसके लुंड को अपने नरम मुलाम गोर हाथ से कास कर दबाते हुए बोलै , कोमल और ख़ुशी भी यह सब देख रही थी , पर प्रिय को कुछ नै दिख रहा था , क्यों की रवि ने प्रिय का छोटा सा बैग अपनी लेफ्ट जंग पर रखा हुआ था , और प्रिय भी लेफ्ट साइड hi बैठी थी ,
"उम् , नै , नै , रमा , मुझे सांपो से बहुत दर लगता है , कहते हैं सांप काट ले तोह दर्द बहुत होता है..." प्रिय ने रमा की तरफ देखते हुए , बेहद भोलेपन में बोलै , कोमल , रमा और ख़ुशी हसने लगी , रवि तोह अपनी बहिन के नरम हाथ को अपने लुंड पर महसूस करते हुए , मज़ा में सिसक रहा था ,
"देदी , हमारी रमा बहुत ताकतवर है , यह तोह सांप को हाथ से पकड़ , उसका जहर चूस कर निकल देती है..." कोमल ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , तोह रमा शर्माने लगी ,
"क्या , हे भगवन , रमा , तुम सच में सांप को पकड़ लेती हो..." प्रिय ने चौंकते हुए अपने गुलाबी होंठो पर हाथ रख कर बोलै ,
"हाँ देदी , कोमल सही बोल रही है , हमारी रमा तोह , सांप को हाथ में पकड़ अपनी बिल में घुसा लेती है , मतलब इसके रूम में जो बिल थी सांप की , यह नै डर्टी , देदी , इक बार , मने अपनी आँखों से देखा..." रवि ने बेहद मुस्कराते हुए पहले रमा की आँखों में देखते हुए और फिर आखिर में प्रिय की तरफ देखते हुए बोलै , वोह अभी बोल hi रहा था प्रिय बेच में बोल पढ़ी ,
"हे भगवन , क्या देखा तुमने..." प्रिय बेहद चौंकते हुए बोली , कोमल और ख़ुशी इक दूसरे की तरफ देख , बेहद हसने लगी ,
"देदी , मने देखा , रमा ने इक कला सांप अपने हाथो में पकड़ रखा था , फिर इसने उस सांप को बहुत देर तक चूमा , और , और , फिर मने देखा , इसने उस काळा लम्बे सांप को अपनी बिल के मोह पर रख , जोर से जतका देकर , इक hi बार में , पूरा अंदर घुसा दिया , यह बिलकुल नै डर्टी , यह तोह काळा सांप से बचो की तरह खेलती है ..." रवि ने घम्बिर होकर बोलै , तोह कोमल और ख़ुशी बेइंतहा हसने लगी , रमा ने शरमाते हुए , अपने भाई की कमर में चिमटी काट दी ,
"आईएईए मा..." रवि दर्द से उछाल पढ़ा ,
"क्या हुआ भइआ.." प्रिय बेहद चिंता करते हुए बोली ,
"ोूछह देदू , रमा ने चिमटी कटी मुझे..." रवि ने बेहद भोलेपन में बोलै , तोह कोमल और ख़ुशी फिर से हसने लगी ,
"नई , मने कुछ नई किया , भइआ , अप्प झूठ बोल रहे हो , ोुछःह , भइआ , मेरी आँख में देखना , शयद कुछ चला गया है..." रमा ने मुस्करा कर बोलै , असल बात यह थी , रमा खुद बेहद गरम हो गई थी , इक तोह वोह सब कामुक बतिअन कर रहे थे , और दूसरा , वोह कब से अपने भइआ का लम्बा मोटा लुंड कास कास कर दबाते हुए , सेहला रही थी , उसकी मखमली मुलाम छूट , खूब गीली होकर पानी छोड़ रही थी , उसकी फूली हुई छूट में खूब खुजली हो रही थी ,
"ओह्ह मेरी रेमो..." रवि ने बेहद प्यार से बोलै , और रमा की तरफ पूरा घूम कर बेथ गया , अभ प्रिय की तरफ उसकी पीठ थी , पर कोमल और ख़ुशी को , दोनों पूरा दिख रहे थे , कोमल मिरर से देख रही थी और ख़ुशी तोह पीछे की तरफ चेहरे किये , कब से , सब से बतिअन कर रही थी ,
रवि ने रमा के चेहरे के करीब अपना चेहरा किया , और उसकी वासना में लाल हुई आँखों में देखने लगा , रमा तेज़ तेज़ सांसे भरते हुए अपने भाई की आँखों में अखन डेल उसे देख रही थी ,
"भइआ इस आँख में कुछ है , शयद कोई मचार होगा.." रमा ने अपने लाल रसीले होंठो को जीभ फिरा खूब गीला करते हुए बोलै ,
"में देखता हु.." रवि ने उसके लाल लबु को देखते हुए , अग्गे बढ़ , अपने होंठ उसके रसीले लाल होंठो पर रख दिए , रवि धीरे धीरे उसके होंठो को चूसने लगा , उफ़ रमा के मन को अभ कही जाकर शांति मिली ,
रवि , रमा के माखन जैसे नरम मुलाम होंठो को बेहद शिदत से महसूस करते हुए , उनको पूरा अपने मोह में भर भर कर चूसने लगा , उफ़ रमा की छूट और भी पानी छोड़ने लगी , दोनों के होंठ आपस में उलज़ने लगे , रवि कभी ऊपर का होंठ चुस्त तोह कभी निचे का , रमा के लाल मखमली होंठ उसके होंठो में पिस्टे जा रहे थे , 2 मिंट तक रवि ने पूरा कास कास कर रमा के होंठो को चूसा , रमा के रसीले होंठो का रास , उफ़ इतने मीठे होंठ थे रमा के , रवि मदहोश सा हो गया , रमा ने अखन बंद किये अपने होंठ चुसवाते हुए , अपनी रसीली लपलपाती जीभ अपने भाई के होंठो पर मारनी सुरु कर दी , अभी रवि ने मोह खोल , रमा की जीभ को अपने मोह में भरा hi था , पर तभी ,
"बस कोमल इस तरफ गाड़ी मोड़ लो..." प्रिय ने मुस्कराते हुए बोलै , प्रिय की आवाज़ सुन रवि वापिस सही होकर बेथ गया ,
"रमा , हीयांन ीीीानं , अभ ठीक हो..." रवि ने तेज़ तेज़ हफ्ते हुए , अपने होंठो को हाथ से साफ सा करते हुए बोलै , तोह रमा ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली , कोमल और ख़ुशी उनकी तरफ देखती हुई , बस मुस्करा रही थी ,
"भइआ , सैर को जबरदस्त जतका लगने वाला है .." प्रिय ने अपने भाई रवि के हफ्ते हुए चेहरे को देखते हुए बोलै , वोह कुछ कुछ समाज गई थी , पर उसे अजीब लग रहा था , क्यों की रमा बार बार रवि को भइआ बोल रही थी , उसे पता लग गया था , के रवि और रमा इक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे ,
"हाँ , ओह्ह , हाँ , देदी , अपने सही कहा..." रवि ने प्रिय की काली काली गहरी आँखों में देखते हुए बोलै , प्रिय का मासूम और हद से जायदा भोला चेहरा , उफ़ रवि को बहुत प्यार ा रहा था अपनी प्यारी बहिन पर ,
"भइआ , पहले हम सब अंदर जाएगी , अप्प गाड़ी में बैठे रहना , हम , सरप्राइज देंगी सैर को..." प्रिय ने अग्गे बढ़ , अपने भाई रवि के गोर गाल को चुम कर बोलै ,
"जैसा अप्प चाहो देदू.." रवि ने भी प्रिय के गोर गाल को चुम कर बोलै , तोह प्रिय ने मुस्करा कर , अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,
प्रिय कुछ सोचने लगी , फिर उसे िका इक यद् आया , जब उसके भाई ने उस गुंडे को मारा था , तब उसके बूब्स नंगे थे , उफ़ प्रिय के गाल शर्म से लाल हो गए , जब उसे वोह पल यद् ए ,
"उफ्फ्फ भइआ ने सब देख लिया होगा , में ऊपर से नंगी थी , उफ़ मेरी भी क्या गलती , उस गुंडे ने मेरी कमीज और ब्रा फाड् दी थी , उम् , भइआ ने कितनी बुरी मौत दी उसे , ाचा hi किया भइआ ने , कितना प्यार करते हैं भइआ मुज़से , उम् , पर मेरे बूब्स नंगे , है , मुझे शर्म ा रही है , पर भइआ की क्या गलती इसमें , भइआ बहुत अचे हैं , इक बार भी मुझे गलत नज़र से नै देखा , उफ्फ्फ भइआ उस वख्त बहुत गुस्से में थे , पर , उफ़ ओह्ह प्रिय , कितना सोचती हो तुम , भइआ तुमसे बहुत प्यार करते हैं , में भइआ का हमेशा ख्याल रखूगी , उनका साथ कभी नै छोडूगी , मेरा प्यारा भाई..." प्रिय अपने मन में सोचती गई , और उसके सोचते सोचते सैर और मुन्ना का घर ा गया , जो मुल्ला नगर से थोड़ा बहार था , इस तरफ भी वंश जंगल का एरिया पढता था , आखिर 500 कम बड़ा था वंश जंगल ,
"उम्म्म ओह्ह्ह्ह हुऊ , हासष्ठ , आखिर पहुँच hi गए..." कोमल ने गाड़ी रोक इक लम्बी अंगड़ाई लेते हुए मुस्करा कर बोलै , और फिर सब निचे उतरने लगे , प्रिय ने गाड़ी से बहार निकलने से पहले , अपने भाई रवि के गाल को कास कर चुम लिया , और फिर वोह सब सैर के घर के अंदर चल पढ़ी , रवि अकेला गाड़ी में बैठा रहा ,
फिर कोमल , रमा , ख़ुशी और प्रिय , सैर के घर के मैं गेट के पास पहुँच गई , प्रिय ने दूर बेल्ल बजे तोह , इक लड़की ने दरवाजा खोला , प्रिय तोह उसे देखते hi पहचान गई , क्यों की वोह पहले यहाँ कई बार ा चुकी थी ,
"हलो सना , कैसी हो अप्प , मेरी छोटी बहिन कहा है.." प्रिय ने अग्गे बढ़ , सैर की छोटी बहिन सना के गले लगते हुए बोलै ,
"देदी , सैर देदी अंदर है , ायो अप्प सब .." सना बेहद खुश होते हुए बोली , अज्ज बड़े दिनों बाद प्रिय को आया देख , सना बेहद खुश हो गई थी ,
फिर सब घर के अंदर ा गए , इक सूंदर घर था , शहर की bheed-bhad सा दूर , बहुत शांति और सकूं था इस घर में ,
सबने घर के अंदर आकर देकर , सैर सोफे पर गुमसुम , उदास बैठी हुई थी , उफ़ सैर बिलकुल वैसी थी , जैसे 3 साल पहले थी , बस उसका भोला मासूम गोरा चेहरा थोड़ा मुरझा सा गया था , वोह अकेली नै बैठी थी , उसके साथ इक छोटा सा , प्यारा सा बचा भी बैठा हुआ था , जो खेल रहा था ,
"प्रिय डीडीई..." सैर की नज़र जैसे hi प्रिय पर गई , वोह बेइंतहा खुश हो गई , वोह इक पल में उठी , और भाग कर प्रिय के गले लग , रोने लगी , वोह दिल की बेहद कमज़ोर थी ,
"बस छोटी , उम्मा , बस बचा , बस..." प्रिय , सैर के बालो को प्यार से सहलाते , उसके सार को चूमती , उसे चुप कहते हुए बोली , सबकी अखन नाम हो चुकी थी ,
कुछ देर रोने के बाद सैर शांत हो गई , फिर वोह सब के साथ सोफे पर बेथ गई , सना सबके लिए पानी लेने चली गई , सैर ने रमा को पहचान लिया था , क्यों की , जब रवि को राखी बाँड्ने गई थी , तब रमा से मिल चुकी थी वोह , पर कोमल और ख़ुशी को पहली बार देख रही थी सैर ,
"देदी , भइआ का कुछ पता चला , देदी , कब आएंगे भइआ , बताओ न देदी , बताओ ना , में , में , और इंतज़ार नै कर सकती , देदू बोलो न , भइआ कहा है , आपके साथ ए हैं , देदी बोलो ना..." सैर ने फिर से बेइंतहा रट , तड़फते हुए बोलै , पता नै क्यों , उसका दिल बेचैन सा हो उठा था , कही कोई बुरी खबर न हो ,
"शहहह , बस , अभ इक और शब्द नै , छोटी , तुम भइआ से मिलना है..." प्रिय अभी बोल hi रही थी के सैर बेच में बोल पढ़ी ,
"मिलना है , देदी , अप्प भइआ को लायी हो अपने साथ , बोलो न , भइआ , भइआ ..." सैर बेइंतहा रट हुए प्रिय और बाकि सब के चेहरों को देखते हुए बोली , कोमल , रमा और ख़ुशी , वोह तीनो भी रो रही थी ,
"नई .." प्रिय ने िका इक यह शब्द बोल दिया ,
सैर खामोश हो गई , उसके असनु थम गए , वोह न तोह रो रही थी , ऐसा लग रहा था , जैसे वोह साँस hi नै ले रही थी , वोह पालक जपकाना तक भूल गई थी , वोह , वोह , कुछ नै कर रही थी , कुछ नै ,
"छोटी , छोटी , क्या हुआ , बोल न , अरे कुछ तोह बोल..." प्रिय ने बेइंतहा रट हुए , सैर को कंधु से पकड़ हिलाते हुए , पगलू की तरह बोलै , पर सैर सोफे पर इक तरफ गिर गई , शयद उसे शॉक लगा था , सब घबरा गई ,
"भय्याहा , जल्दी आयु..." कोमल ने जोर से चीखते हुए बोलै ,
"यह , यह , मने क्या कर दिया , छोटी उठू ना , भइआ ए हैं , हे भगवन , छोटी..." प्रिय ने बेइंतहा रट हुए , अपने बाल नोचते हुए बोलै , रमा उसे संभालने लगी ,
कोमल और ख़ुशी ने सैर को निचे लिटा दिया , उसकी सांसे थम गई थी , शयद उसका मासूम दिल , इतना बड़ा जतका सेहन नै कर पाया था , तभी रवि अंदर ा गया , उसे देख कर लग रहा था , वोह भागता हुआ आया था , वोह एते hi , अपनी बहिन सैर के पास गिर गया , उसे बहु में भर , उसके चेहरे को पगलू की तरह चूमने लगा , उसके सीने पर , दोनों हाथो से जोर जोर से दबाते हुए , उसे होश में लेन लगा ,
"सैरा , देदी , उठू , उठू ना , अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह , क्यू , भगवाननं , मेरे साथ hi क्यू , मुझे ही क्यों इतना दर्द देते हो , मेरी बहिन , ूठः ना , देख तेरा भाई आया हैई , उठ ना..." रवि बेइंतहा दर्द में डूबता हुए , चीखते , छीलते रट हुए बोलै , उसके चखने , छिलने से , आसमान में बदल गिर ए थे , बहार साफ सुथरा मौसम , अभ काळा अंधकार में दुब चूका था , तेज़ हवा चलने लगी थी , बहार तूफान ा चूका था , बिन मासूम बरसात हो रही थी , क्यों की डेविल दर्द में दुब चूका था ,
"रावी , रवीए , में , में , कुछ करती हु..." ख़ुशी ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,
"यह सब , यह सब , मेरे कारण हुआ हैई , में क्यूँउउ , क्यू , भइआ को साथ ना लायी..." प्रिय ने बेइंतहा रट हुए बोलै , रमा बड़ी मुश्किल से उसे सम्बल प् रही थी , सैर की छोटी बहिन सना , वोह भी पगलू की तरह रो रही थी ,
फिर ख़ुशी ने सैर के माथे पर हाथ रख दिया , उसके हाथ से लाल रौशनी निकल , सैर के माथे में सामने लगी , वोह रवि की तरफ देखते हुए बोली ,
"रावी , में इसके दिल को बिजली का जतका देती हु , तुम इसको साँस दो अपने मोह से..." ख़ुशी ने सैर के सीने पर दोनों हाथ रख , अपनी पूरी शक्ति एकजुट करते हुए बोलै , उसकी अखन लाल रौशनी में चमकने लगी ,
"हाँ , ठीक है..." रवि ने इतना बोल , सैर की नक् अपनी उंगलियों से बंद कर , अपने होंठ , उसके होंठो से जोड़ लिए ,
"रवि 1 , 2 ोर्ड्र्र 3..." फिर ख़ुशी ने इक तेज़ बिजली का जतका दिया , लेकिन कुछ न हुआ , उसने इक और जतका दिया , पर कुछ न हुआ , अभ ख़ुशी भी हिमेट हरने लगी थी ,
रवि अपनी पूरी जान लगा , सैर के होंठो से अपने होंठ जोड़े , उसे साँस देने की कोससिह कर रहा था , उसकी आँखों से बहते असनु , सैर का मासूम चेहरे पर गिर रहे थे ,
"रावी कुछ नाई हो रहा..." ख़ुशी बेइंतहा रट हुए बोली ,
"खुशु देदी , में भी आपका साथ देती हु..." कोमल भी , ख़ुशी के हाथो पर अपने हाथ रखते हुए , रट हुए बोली ,
"भइआ तयररर हो जोऊ 1 , 2 ऑर्डर 3..." इस बार दुगनी शक्ति से , कोमल और ख़ुशी ने , इक जोरदार जतका दिया , सैर के मासूम दिल को ,
"अह्ह्हींईईईन्न्नन अह्ह्हैईईईन्न्नन्नन्न..." सैर का पूरा शरीर इक डैम से उछाल पढ़ा , उसकी बंद सांसे चल पढ़ी , रवि अभी भी , उसके होंठो से अपने होंठ जोड़े , बेइंतहा रट हुए , उसे साँस दे रहा था ,
"सैरा डीडीई..." सैर की सांसे चलते hi , उसके होश में एते hi , रवि ने उसे कण्डु से पकड़ , ऊपर उठा , अपने गले लगा , उसके बालो को सहलाते , रट हुए , बेइंतहा दर्द में दुबे हुए चीला कर बोलै ,
कोमल और ख़ुशी , सैर के होश में एते hi , इक दूसरे के गले लग रोने लगी , प्रिय भी अपनी छोटी बहिन सैर को ठीक देख , रमा की बहु में सिमट रोने लगी , पर अभ , ें सबके असनु , ख़ुशी के असनु थे , क्यों की सैर जिन्दा हो चुकी थी ,
"पनीइ लाऊ जल्दीए..." रवि ने निचे बैठे , सोफे से अपनी पीठ टिकाये , चीला कर बोलै , सना भाग कर दुबारा पानी ले आयी , पहले वाला तोह उसके हाथो से गिर गया था , रवि ने सना के हाथो से पानी का गिलास लेकर , सैर को पिलाया , उफ़ तब उसकी जान में जान आयी , रवि का जिस्म थार थार कम्प रहा था , इतना वोह कभी नै डरा था , कभी नै ,
"भय्याहा..." सैर ने कुछ कुछ होश में एते हुए , अपनी अखन थोड़ी सी खोल , अपने भाई रवि को देख , बेहद धीरे से बोलै , उफ़ उसके यह चाँद शब्द , सबके दिल को सकूं दे गए , रवि तोह पागल हो गया , वोह पगलू की तरह , अपनी मासूम सी बहिन सैर के , चेहरे को चूमने लगा , इस प्यार में कोई वासना नै थी , रवि काफी देर बाद जाकर शांत हुआ ,
"मेरी बहिन , उम्मा , मुझे , मुझे माफ करदी , इतना प्यारर , तू , तू , इतना प्यारर करती ही मुज़से , अह्ह्ह्हह , अगर तुझे कुछ हो जाता , ओह्ह्ह , मेरा डिल अभी भी कम्प रहा ही , मेरी बहन ..." रवि बेइंतहा रट हुए , अपनी बहिन सैर के चेहरे को चूमते हुए बोलै ,
"भइआ , अप्प ा गई , मुझे लगा कही अप्प , भइआए मी दररर गयी थिई , भइआ , में , मी , आपके बिना मर्डर जौउगीय ..." सैर ने थोड़ा पीछे हैट , रवि की आँखों में देखते हुए , बेइंतहा रट हुए बोलै , उफ़ सैर से मासूम शयद hi इस दुनिआ में कोई हो ,
"शठ , पगली कही की , तेरा भाई अमर ही , वोह कभी नयी मर्डर..." रवि अभी बोल hi रहा था ,
"भइआए , ऐसी बैठत कभी मैट करना , काबिई नयी..." सैर ने रवि के होंठो पर हाथ रख , बेहद रट हुए , उसके पोरे चेहरे को चूमते हुए बोलै , उफ़ अभ जाकर , रवि के दिल को सकूं मिला था , अज्ज कोमल के बाद , सैर का प्यार hi , उसे इतना सकूं दे पाया था , क्यों की वोह उसके लिए , इक पल में मर गई थी , इक पल में , उसने अपनी चलती संसू को रोक लिया था , ऐसा प्यार , रवि सबसे प्यार करता था , जो जो उसके जीवन में था , पर सैर और कोमल का प्यार अलग hi था , दोनों इक जैसी महसूस हो रही थी रवि को , मर तोह सभी जाती उसके लिए , पर में शबदो में आपको समझा नै सकता , अप्प बस महसूस कर लो , में किसी के प्यार का अपमान नै कर रहा हु , क्यों की सबका प्यार अनमोल था , सबका प्यार अलग अलग था ,
"ओह्ह्ह , मेरी बहन , ऐसा कभी मत करना , में कितना दर गया था , पगली , तू तोह मेरी जान ही , में क्यों , क्यों , तेरे पास न ा पाया , हे भगवन , क्योऊ , मुझे इतना दर्द दे रहा तू , क्योऊ , मेरी बहिन , वादा कररर , कभी ऐसा नै करेगी , वडा कररररर , कभी अपनी संसू को नै रोकेगीइ , वडा कररर..." रवि ने बेइंतहा दर्द में दुबे , बेइंतहा रट हुए बोलै , वोह बार बार सैर के मासूम चेहरे को चुम रहा था ,
इक राखी के लिए , बस इक राखी के लिए , उसकी बहिन सैर ने अपनी सांसे रोक ली , इक छोटे से धागे के लिए , उफ्फ्फ , जरुरी नै इक hi पेट से जनम लेने वाले भाई बहिन हूँ , अगर , दुनिआ में प्यार , रवि और सैर जैसा हो , तोह आधे से जायदा पाप यु hi ख़तम हो जाये , रवि ने जब राखी बंधी थी , उसने सोचा भी नै था , सैर और प्रिय , इस कदर , उसके साथ बांध जाएगी , इस कदर , उसे अपना भाई मान लेगी , के उसके दूर होते hi , वोह हसना , मुस्कराना भूल जाएगी , उनकी खुशियाँ लूट जाएगी , उनका जीवन नाराज से बदतर बन जाएगा , अज्ज रवि के पिता उसे हर दिन , इक नया दर्द दे रहे थे , पर रवि के पास , ऐसे प्यार करने वाले थे , के इस बार , रवि के पिता शयद झुक जाते , शयद हार जाते ,
"भइआए , में , में , वडा नई करुगीय , नई करुगीय , अगर , अगर , अप्प मेरे पास रहूगी , में , में तभी जिन्दा रहूगी , में , में , मर जोगीई , आपके बिना , भइआए , में , में , वादा नईईई करुगीई..." सैर ने बेइंतहा रट हुए , रवि के गले लग , उसके सीने पर , अपने दोनों हाथो से मरते हुए बोलै ,
"शह्ह्ह्ह , बस अभ और नई , मेरी , मेरी , दोनों बहाने पगली हैं , चल , अभ कुछ खिला दी , तेरा भाई भूखा हैई..." रवि ने बेहद प्यार से , सैर के बालो को चूमते हुए बोलै ,
"क्या , मेरा भाई बुखा हैई..." सैर इक डैम से पीछे हट , इक डैम से खड़े होते हुए बोली , उफ़ वोह अपना हर दर्द , हर दुःख , भूल सा गई , वोह भाग गई किचन की तरफ , सना भी उसके पीछे पीछे चली गई , रवि उठ कर सोफे पर बेथ गया ,
"भइआए , मुझे माफ्फ करदु , यह , यह , मेरी कारण हुआ ही..." प्रिय बेइंतहा रट हुए , रवि के गले लगते हुए बोली ,
"शहहह , बस देदू , आपको कहा पता था , आपकी कोई गलती नयी , उफ़ सैर का दिल इतना मासूम होगा , यह कोई नै जनता था , बस ददऊ , अप्प मुझे भी रुला डोगीइ , बस देदू..." रवि ने रट हुए प्रिय का चेहरा चूमते हुए बोलै , रवि की बतिअन सुन , प्रिय शांत हो गई , उसने अपने असनु साफ कर लिए , वोह मुस्कराने लगी ,
कुछ देर बाद , सैर और सना , किचन से बहार ा गई , वोह हल्का फुल्का नाश्ता और छाए ले आयी थी , उसने सबको छाए और नाश्ता दिया , और अपने भाई के साथ बेथ गई , वोह और प्रिय , उसे अपने हाथो से खिलने लगी , रवि की अखन नाम हो गई , अपनी दोनों बहनो का इतना प्यार देख कर , क्या आपकी अखन नाम हुई...
"उफ़ भइआ और खाओ न.." सैर ने बेहद खुश होते हुए बोलै , अभ सैर इस दुनिआ की सबसे खुशनुमा लड़की थी , जिसे सब कुछ मिल गया था , जैसे किसी बचे को उसकी , मनचाही चीज़ मिल गई हो ,
"बस देदी , और नई , कोमल , तुम hi कुछ कहो ना..." रवि ने बड़ी मुश्किल से कहते हुए , कोमल की नली नली आँखों में ज़कते हुए बोलै , वोह ख़ुशी के साथ बैठी , मुस्करा रही थी ,
"भइआ , यह है आपकी कोमल , उफ़ , उस दिन अप्प इसके लिए इतना उदास थे , पर , पर , भइआ , वोह सब बोल रही थी , कोमल मर चुकी है , और , और , अप्प , कोमल , को बार बार , बेवफा बोल रहे थे , क्यों भइआ , और कोमल वापिस कैसे मिल गई आपको , मने , मने , उस दिन आपकी आँखों में बेइंतहा दर्द देखा था , में बहुत रोई थी घर आकर , आपका दर्द मुज़से सेहन नै हुआ था..." सैर , कोमल के खूबसूरत चेहरे को निहारते हुए , फिर से रट हुए बोली ( अप्प लोग अपडेट-21 रीड कर लेना इंडेक्स में)
"हाँ , भइआ , मुझे भी अभ यद् आया , छोटी सही बोल रही है , आपकी पत्नी ने बोलै था , मेरे पति को बचते हुए , अपने अपनी कोमल को खो दिया उस जंगल में , भइआ , मेरे मन का बोझ अज्ज हल्का हुआ है..." प्रिय भी उस दिन को यद् कर रट हुए बोली ,
रवि बस अपनी कोमल को देखने लगा , कोमल खामोश थी , इक पत्थर की तरह , उस दिन जंगल में जो उसने बोलै था , वोह बस , अपने भाई को बचाना चाहती थी , लेकिन , कई बार , अपने प्यार को मेहफ़ूज़ रखने के लिए , बेवफा भी बनना पढता है , धोकेबाज़ कहलाना पढता है , कोमल वोह कड़वी बतिअन बोल , बेवफा बन गई , पर सच्चा प्यार , अपना रास्ता दंड hi लेता है , बस अप्प कभी निराश मत होना , अप्प जिसको चाहते हो , जिसको प्यार करते हो , वोह आपसे रूत सकता है , पर आपको भूल नै सकता ,
कभी उदास मत होना , के मेरे मेहबूब मुज़से नफरत करते हैं ,
क्या पता , वोह उस रस्ते पर हो , यहाँ प्यार भी डैम तोड़ देता है...
"भइआए , कुछ तोह बोलो..." सैर अपने भाई रवि का हाथ अपने हाथिओं में लेते हुए बेहद नाम आँखों से बोली ,
"उफ़ , सैर , प्रिय , मेरी कोमल बेवफा नै थी , बस पागल है मेरे प्यार में , ऐसे मेरे बिना कुछ दीखता hi नै , उस दिन , हासष्ठ , उस दिन , इसने मेरी जान बचने के लिए , अपने प्यार की परीक्षा दी , मेरे दिल में नफरत भर दी , मुझे कड़वी , जहर भरी , बतिअन बोल , मुज़से दूर चली गई , तुम दोनों कहती हो न , 3 साल में कहा गया , में , में , अपनी कोमल को लेने गया था , में इसके बिना इक पल भी खुश नै रह सकता , में मर सा जाता हु , जब मेरी कोमल मुज़से दो पल भी दूर जाती है , में , में , ऐसे नफरत कर hi न पाया , हर पल , हर लम्हा , ऐसे यद् करता रहा , कोई और लड़की , मुझे वोह सकूं न दे पायी , जो मेरी कोमल की बहु में मुझे अत है , देदी , मेरी कोमल पगली है , हम दोनों दीवाने है इक दूसरे के , यह हमारी कहानी है , यह हमारे प्यार की कहानी है , इसका अंत या तोह हमारे मिलान से होगा , या हमारी मौत से..." रवि ने कोमल की आँखों में अखन दाल , बेइंतहा दर्द भरे शबदो में बोलै , उसकी अखन नाम हो गई , कोमल , उफ़ , वोह पगली सच में रो रही थी , वोह इक पल में उठ कर , अपने भाई के सीने से लग गई , उसकी बहु में , अपना चेहरा छिपाने लगी , सब उनके प्यार को देख , बस रो रहे थे , हम रो कर hi , अपना प्यार जाता सकते हैं...
"शहहह , बस जणू , बस..." रवि ने कोमल का चेहरा अपने दोनों हाथो में पकड़ , उसके गुलाबी होंठो को चूमते हुए बोलै ,
"सैर , में भइआ के साथ जा रही हु , तुम भी चलो न , कुछ दिन भइआ के पास रह कर , हम वापिस ा जाएगी..." प्रिय ने इस दर्द भरे माहौल को बदलने के लिए , सैर की तरफ देखते हुए बोलै ,
"क्या , सच में देदू , में चलुगी , मुझे भी भइआ के पास रहना है , अरे भइआ , अप्प मेरे बेटे से मिले hi नई , सॉरी , में भूल गई ..." सैर ने मुस्कराते हुए , पहले प्रिय की तरफ और फिर अपने भाई रवि की तरफ देख कर बोलै ,
"ओह्ह , मेरा प्यारा बचा , क्या नाम है देदू इसका..." रवि ने मुस्करा कर , सना के हाथिओं से बचा , अपनी गॉड में लेकर , उसके गालो को चूमते हुए बोलै ,
"रवीए..." सैर ने अपने भाई की आँखों में देखते हुए मुस्करा कर बोलै , रवि खामोश सा हो गया ,
"भइआ , क्या हुआ अप्प खुश नै हो , वोह , वोह , भइआ , मने और प्रिय देदी ने यह नाम रखा , अभ दो बचो का इक hi नाम अजीब सा लगता , इस लिए मने अपने बचे का नाम , अपने प्यारे भाई के नाम पर रख दिया..." सैर ने अपने भाई रवि के कंधे पर सार रख , अपने बचे से खेलते हुए बोलै ,
"उफ्फ्फ , देदू , इतना प्यारर करती हो मुज़से , मुझे बहुत ख़ुशी हुई , ाचा देदू , आपके मुन्ना बाबू कही दिख नै रहे..." रवि ने पहले नाम आँखों से और फिर हस्ते हुए बोलै , तोह सैर शर्माने लगी ,
"भइआ , वोह बाजार गए हैं , लो ा गए वोह..." सैर ने बेहद खुश होते हुए घर के दरवाजे की तरफ देख कर बोलै , क्यों की मुन्ना ा चूका था ,
"अरे वह , कवी भाई , कैसे हो , अपुन को ख़ुशी हुई आपको देख कर.." मुन्ना घर के अंदर ा रवि को देखते हुए बोलै , फिर रवि उठ कर उसके गले लगा ,
"सुनो जी , कवी नै रवि नाम है भइआ का.." सैर ने हस्ते हुए बोलै , तोह सब हसने लगे , मुन्ना इक इक कर सबको मिला और फिर सोफे पर बेथ गया ,
"अरे मेरी बुलबुल ठीक है , अरे , खाना , पानी लाना मेरे लिए..." मुन्ना ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"जेजुउ , खाना नै सना ..." सना अपने पेअर गुस्से में पटकते हुए , किचन की तरफ जाते हुए बोली , सब फिर से हसने लगे ,
"रवि भाई , ाचा हुआ अप्प ा गए , नै तोह , सैर ने अपुन के दिमाग का दही कर दिया , बोले तोह , भइआ को लाओ , भइआ को लाओ , और भाई , जब चिडया जी के पति..." मुन्ना अभी बोल hi रहा था , के प्रिय बेच में बोल पढ़ी ,
"जेजुउ , चिडया नै प्रिया..." प्रिय अपने माथे पर हाथ मरते हुए बोली ,
"अरे प्रिय नाम में क्या रखा है , तोह अपुन बोल रहा था , अपुन ने आपको बहुत डुंडा , शहर के सरे , लुखे लोग को पूछा , पर , अप्प कही नै मिले , आपकी बहिन , अपुन से बात नै करती थी , अरे , अभ , अपुन की क्या गलती , अरे में और रंजना बुरे फास गए..." मुन्ना अभी बोल hi रहा के सैर बेच में बोल पढ़ी ,
"भइआ , देखा , इनका बहार चाकर चल रहा , रंजना के साथ..." सैर अपने भाई रवि को मुन्ना की शिकायत करती हुई बोली ,
"नै मेरी बुलबुल , इनके पति , बोले तोह हस्बैंड , में उनकी बात कर रहा हु..."
"जेजुउ , अह्ह्ह्ह , रंजना नै राजेश , रराजेएष्ठ..." प्रिय ने अपना माथा पीट कर बोलै , तोह सब हसने लगे ,
"हाँ वही तोह , देखा भाई , यह बीवी लोग कितना शक करती हैं , वैसे अप्प गए कहा थे..." मुन्ना ने सना के हाथ से पानी लेकर पेट हुए बोलै , सना अपने जेजु के साथ hi बेथ गई , वोह नजाने कब से रवि को hi घर घर कर देख रही थी ,
"भाई में अपनी कोमल को लेने गया था , वैसे , यह कोमल है , यह रमा , यह ख़ुशी , यह दोनों मेरी बहाने हैं , और यह मेरी बीवी..." रवि ने मुन्ना को सबसे मिलवाते हुए बोलै ,
"ः , नमस्ते बहिन लोग , नमस्ते भाभी जी..." मुन्ना सबको हाथ जोड़ नमस्ते करता हुआ बोलै ,
"ाचा , सुनो जी , में भइआ के साथ जा रही हु , में और प्रिय देदी , हम कुछ दिन बाद आएगी , ठीक ही ..." सैर ने मुस्कराते हुए मुन्ना की तरफ देखते हुए बोलै ,
"अरे मेरी बुलबुल , इस में पूछना क्या , तेरा जो दिल करे तू कर , अपुन को बताने का नई , तू जा , बिंदास जा..." मुन्ना मुस्कराते हुए बोलै , तोह सैर बेइंतहा खुश हो गई ,
"मुन्ना , तुम दिलावर खान को जानते हो..." रवि ने िका इक पता नै क्यों पूछ लिया , उसे अपने चाचा जी की प्रॉब्लम भी सोल्वे करनी थी ,
"जनता , अरे , अपुन ने उसके साथ काम भी किया है , क्यों , क्या बात है..." मुन्ना ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,
"मुन्ना , वोह मेरे चाचा जी को परेशान कर रहा है , मुझे उससे मिलना है , तुम , तुम , ऐसा करना , उसकी पूरी जानकारी निकल कर , मुझे कॉल कर देना , पर ध्यान से , किसी को शक न हो तुम पर , तुम मेरी बहिन के पति हो , इस लिए अपना ख्याल रखना..." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,
"ोकक.." मुन्ना भी रवि की बात समाज कर बोलै ,
फिर सबने कुछ देर और बतिअन की , फिर रवि और बाकि सब , घर की तरफ चल पढ़े , अभी टाइम भी 1:35 मिंट का हो चूका था , अभी रवि गाड़ी में बैठने hi जा रहा था , उसका मोबाइल बहज उठा...
दूसरी तरफ..
"हलो , हलो , हाँ , अनु , मने , इक फाइल बेहजी है तुम , चेक करो , हम्म , बहुत , प्रेशर है ऊपर से ..." यह राजेश था , जो इक चोर से बहुत परेशान हो चूका था ,
"हम्म , जी सर , देख रही हु , असलम नाम है इसका , जी , हम्म , हम्म , रवि 2 बजे आएगा , हम्म , कोई बात नई , अभ जायदा दिन नै बचेगा , ok , ok , जी सर..." अनु ने मुस्करा कर इतना बोलते हुए कॉल कट कर दिया , वोह रवि का इंतज़ार कर रही थी , अनु और रवि की टीम में अभ बेबी और काट के इलावा , लारा और एलिज़ाबेथ भी जुड़ चुकी थी , उफ़ इनकी टीम सच में अनोखी टीम थी , शयद कोमल और ख़ुशी भी इनके साथ जुड़ जाती , खैर यह तोह अग्गे पता चलेगा ,
असलम , बस इक नाम hi पता था उसका , जो वोह खुद बता कर जाता था , राजेश पिछले कुछ सालो से उसे पकड़ने की कोससिह कर रहा था , पर असलम , इतना शातिर और इतना तेज़ चोर था , के हर बार राजेश और उसकी पुलिस हार जाती थी , पिछले कुछ सालो से असलम 11 बड़ी चोरिया कर चूका था , वोह चैलेंज करके चोरी करता था , कोण था यह असलम , और क्या रवि उसे रोक पायेगा , खैर यह तोह ऐनी वाले वख्त में छिपा था...
दूसरी तरफ....
"हलो , हलो , हाँ , हाँ , हम्म , ः , ः , मुझे कोई नै मर सकता , हम्म , वोह सब बेवकूफ हैं , जो मुझे मारा हुआ समाज लिया , कोई नै मर सकता , में जासूस हु , में बिमान शाह हु , थे ग्रेटेस्ट ऑफ आल टाइम , में इस दुनिआ का सबसे बड़ा जासूस हु ..." इक इंसान ब्लैक कपडे में , ारवती नगर के सबसे बड़े कैसिनो होटल में , टॉप फ्लोर में , सोफे पर बैठा , हलकी हलकी लाल वाइन , के छोटे छोटे सिप लेते , अपने मोबाइल पर बात करते हुए बोलै ,
"ः , बिमान शाह , तुम सच में बहुत बड़े जासूस हो , सब को बेवकूफ बना दिया , उस रवि को भी ..." दूसरी तरफ इक आदमी मुस्कराते हुए बोलै ,
"हाँ , उन सब को लगा , उन लोग ने बिमान शाह को मर दिया , वोह बस मेरा इक हमशकल (क्लाउन) था , में तोह कभी इंडिया आया hi नै था , अभ मुझे एना पढ़ा , क्यों की अभ उस महाशक्ति के जागने का वख्त नज़दीक है , हर 30 साल बाद महाशक्ति जग उठती है , बस अभ मुझे उस महाशक्ति को पाना है , मेरी पूरी जिंदगी गुजर गई , उस महाशक्ति तक पहुँचने में , अभ वोह दिन पास ऐनी वाला है , 30 साल पोरे होने में 6 महीनो का वख्त बचा है , तुम इक काम करो..."
"हाँ बोलो..."
"बेबी ने मुझे धोका दिया , रवि से प्यार करके , पर वोह जूही थी , में जनता था , जूही hi चेहरा बदल कर बेबी बानी है , मुझे लगा बेबी , रवि को मर देगी , आखिर उसे बदला लेना था रवि से , पर वोह साली रवि के प्यार में फिर से दुब गई , और कैटलीन , उस साली को बेबी से प्यार हो गया , दोनों ने मुझे धोका दिया , तुम ऐसा करो , उस जापानीज लड़की को बेहज दो , क्या नाम था उसका..." बिमान शाह ने बेइंतहा गुस्से में बोलै ,
"हम्म , सिको Twin's ..."
"हाँ , वही , सिको Twin's , वोह कहकर जुड़वाँ बहने , जो दुनिआ की बेरहम कहकर कॉन्ट्रैक्ट किलर्स हैं , उनको बेहज दो , मुझे उस बेबी और काट से बदला लेना है , दोनों को मर कर , रवि के इक इक चाहने वाले को मर दूंगा , अभ बेबी और काट को सजा मिलेगी , हम जासूस हमारे रूल तोड़ने वालो को इक hi सजा देते हैं , वोह है मौत की सजा..." बिमान शाह ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"मेरे पास इक और रास्ता है , और वोह दोनों लड़कियाँ कल ा जाएगी..."
"क्या..."
"अप्प ओपन कॉन्ट्रैक्ट रख दो , फिर देखना पूरी दुनिआ रवि को मरने के लिए , उसके पीछे कुत्तो की तरह पढ़ जाएगी , क्यों , कर दू इनाम घोषित ..."
"हम्म , ः , 200 क्रूर्रे का इनाम रख दो , जो भी रवि को मरेगा , कार्डो एलान जुंग का..."
"ः , अज्ज hi ओपन कॉन्ट्रैक्ट का एलान करता हु , जो भी रवि को मरेगा , उसे 200 क्रूर्रे मिलेगा , अभ रवि नै बचेगा , पूरी दुनिआ के डॉन , गुंडे , उसके पीछे पढ़ जायेगे ..." दूसरी तरफ वोह आदमी बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , तोह बिमान शाह भी हसने लगा....
तो बे कुनिटेड.....