Incest Deewanapan... - Page 26 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

अपडेट-129

अभ अग्गे....

अज्ज रवि बेहद खुश था , उसे ख़ुशी इस बात की नै थी , के वोह अपनी बहिन प्रिय से मिला , उसे ख़ुशी इस बात की थी , उसने अपनी बहिन की इज्जत बचा ली , रवि बार बार यही सोच रहा था , अगर वोह इक घंटा लेट हो जाता तोह , उफ़ उसकी बहिन मर जाती ,

इसका इक hi कारन था , प्रिय इक पतिव्रता औरत थी , उसके लिए , उसकी इज्जत , उसकी मान मर्यादा , उसका सब कुछ था , दुनिआ में कुछ औरतीयं ऐसी होती हैं , पर कुछ औरशन के लिए यह बतिअन , बस पुराने विचारो जैसी होती हैं , उनको लगता है , अगर वोह 10-20 लड़को के साथ सो भी जाएगी , तोह क्या hi फरक पढ़ जायेगा , लेकिन किसी के लिए वफादार होने में , इक अलग hi मज़ा होता है ,

कहते हैं न , कुछ वफ़ा तुम करो , कुछ वफ़ा हम करे , तोह क्या बात होगी ,

कुछ तुम तड़फो मेरे लिए , कुछ में तड़फो तुम्हारे लिए , तोह क्या बात होगी ,

कुछ रतियन में न सोयु , कुछ रतियन तुम जागो , तोह क्या बात होगी ,

कुछ तुम रूत जाओ मुज़से , कुछ में रूत जाऊ तुमसे , तोह क्या बात होगी ,

में दोस्त समाजु तुम , तुम धोका दो मुझे , तोह क्या बात होगी ,

मेरे लबु पर सच हो , तुम्हारे लबु पर झूठ हो , तोह क्या बात होगी ,

में मारा हुआ समाजु तुम , तुम जिन्दा रहो दुसरो के लिए , तोह क्या बात होगी ,

खैर अग्गे , कोमल गाड़ी ड्राइव कर रही थी , ख़ुशी उसके साथ अग्गे बैठी थी , रमा , रवि और प्रिय पीछे बैठे हुए थे , उफ़ यह रमा अभ भी फ्रूट्स खा रही थी , प्रिय के घर से सरे फ्रूट्स उठा लायी थी वोह , रवि बेच में बैठा हुआ था , और प्रिय इक तरफ , प्रिय का 3 साल का बीटा , ख़ुशी की गॉड में बैठा हुआ था ,

"उफ़ रमा बस करो , कितना खाऊगी अभ..." रवि ने रमा की तरफ देखते हुए बोलै , जो अभी केला (बनाना) खाने hi जा रही थी ,

"भइआ , भूक लगी मुझे , अप्प खामोश रहो , वार्ना आपको भी खा जोगी..." रमा ने उस केले को नंगा कर , उसकी नोक पर जीभ फिरते हुए बोलै , उफ़ रमा के नरम गुलाबी होंठो में से निकली उसकी रास भरी जीभ देख , रवि के मोह में पानी भर गया , वोह अपने होंठो पर जीभ घूमने लगा ,

"क्या हुआ भइआ , भूक लगी है..." रमा ने अपने भाई को आंख मरते हुए , वोह लम्बा सा केला अपने मोह में आधे से जायदा डालते हुए बोलै , उसने वोह केला खाया नै , उसे वैसे hi बहार निकल लिया , जैसे बस उसे चूस रही हो ,

"n...nn..naiii...tt...tt...ttohh..." रवि ने रमा के गुलाबी लबु को ललचाई नज़रिओं से देखते हुए बोलै , रमा के होंठो पर इक मुस्कान ा गई , उसकी कामुक अदायिओं ने रवि को पूरा घ्याल कर दिया था ,

"उम् , बहुत टेस्टी है भइआ..." रमा अपने भइआ को छेड़ते हुए , बड़ी कामुक अड्डा से , उस केले को मोह में भर , बार बार चूसते हुए , उसके कण में धीरे से बोली ,

"क्या..." रवि ने धीरे से रमा के कण के पास अपने होंठ कर पूछा ,

"यह केला , उम् बहुत मोटा और लम्बा है , अह्ह्ह , प्रिय देदी यह केले अप्प ने कहा से लिए..." रमा ने पहले अपने भाई की तरफ , और फिर प्रिय की तरफ देखते हुए , बेहद मुस्करा कर बोलै , रवि का लुंड पूरा तन कर खड़ा हो गया ,

"हम्म , हाँ , वोह अमित के पापा लाये थे बाजार से..." प्रिय अपने ख्यालो से बहार एते हुए मुस्करा कर बोली , तोह रमा और कोमल हसने लगी , कोमल गाड़ी के मिरर से , अपने भाई और रमा को देख रही थी , उसे पता था , दोनों के बेच क्या चल रहा है ,

"मेरा केला भी चूस लो न , इस बाज़ारू केले से ाचा है..." रवि ने धीरे से रमा के कण में बोलै , तोह रमा शर्माने लगी ,

"नै जी , मुझे नै चूसना ..." रमा ने इक और केला चलते हुए , उसे कहते हुए , अपने भाई की आँखों में अखन दाल बोलै , तभी रवि ने सामने देखा , तोह उसकी अखन , कोमल की आँखों से मिल गई , वोह उस छोटे से मिरर से उनकी तरफ देख रही थी , रवि ने अपने होंठो पर जीभ फिरा दी , कोमल ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,

"उफ्फ्फ भइआ , सैर कितनी खुश होगी आपसे मिल कर..." प्रिय ने अपना सार रवि के कंधे पर रख , मुस्कराते हुए बोलै ,

"क्या , ओह्ह , हाँ देदू , सही कहा अपने , उफ़ देदू , मने अप्प दोनों को कितने दुःख दिए , और अज्ज , अज्ज , मुझे देरी हो जाती तोह , मेरा मन अभी भी कम्प रहा है , में , में , उसे छोड़ूगा नै , जिसने आपके घर ें गुंडों को बेह्जा था..." रवि ने प्रिय का हाथ अपने हाथो में लेकर , उसे बार बार चूमते हुए बोलै ,

"भइआ , प्लस , नई भइआ , में , में , आपको फिर से खोना नै चाहती , में , में ठीक हु भइआ , अप्प कुछ नै करोगे अभ ..." प्रिय ने रवि के कंधे से अपना सार उठा , उसकी आँखों में देखते हुए , बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"हाँ , भइआ , देदी , ठीक बोल रही है , लो केला खा लो..." रमा ने आधे से जायदा केला अपने मोह में डेल , उसे कहते हुए , इक केला रवि की तरफ करते हुए बोलै , कोमल और ख़ुशी यह देख हसने लगी , पर प्रिय को कुछ समाज नै आया ,

"नै , मुझे नै खाना..." रवि ने बुरा सा मोह बनाते हुए बोलै ,

"रमा देदी , भइआ दूध पेट हैं , केला नै कहते , हाँ , अगर दूध पिलाना है तोह पीला दो..." कोमल ने बेहद शरारती अंदाज़ में , अपने भाई की आँखों से अखन मिला कर बोलै , तोह रमा और ख़ुशी हसने लगी ,

"दूध नै है मेरे पास..." रमा ने अपने मोठे मोठे बूब्स को घूरते हुए , कोमल और ख़ुशी की तरफ देख कर बोलै , उनको मज़ा ा रहा था , अपने भइआ को तंग करने में , प्रिय के साथ होते , रवि बेबस था , कुछ कर नै सकता था ,

"अरे , यद् आया , दूध तोह घर पर बहुत पढ़ा था , भइआ , में आपको दूध पीला देती , पहले क्यों नै बोलै..." प्रिय ने िका इक यद् करते हुए मुस्कराते हुए बोलै , रवि हड़बड़ा गया , रमा , कोमल और ख़ुशी , तीनो हसने लगी ,

"n...nn...nnaii....d..dd..dedii..." रवि हकलाते हुए बोलै , रवि की नज़रियन अभी भी कोमल की नज़रिओं से मिली हुई थी , और कोमल अपनी कातिल आँखों को नचा नचा कर , रवि को तंग कर रही थी ,

"अरे बेवकूफ पे लेते दूधः ..." ख़ुशी ने दूध शब्द पर जायदा जोर देते हुए बोलै , वोह तीनो फिर से हसने लगी ,

"उफ़ यह तीनो भी न , बेचारी प्रिय देदी , कितनी मासूम और भोली है , हासष्ठ , ें तीनो की बातिओं का दूसरा मतलब समाज hi नै रही , घर जाकर , इनकी अचे से खबर लूंगा..." रवि ने मन hi मन सोचते हुए बोलै ,

"क्या हुआ भइआ , दूध पीने की ीचा हो रही है , ओह्ह हूँ , अभ क्या करे , रमा देदी , घर जाकर भइआ को यद् से दूध पीला देना..." कोमल ने रमा की आँखों से अखन मिला , उसे आंख मरते हुए बोलै ,

"नै , कोमल , मेरे पास इतना दूध नै है , थोड़ा सा तुम भी पीला देना ..." रमा ने हस्ते हुए बोलै ,

"ouu-huu , कुछ अप्प पीला देना , कुछ दूध में पीला दूंगी , और अगर भइआ को और ीचा हुई , तोह बाकि हमारी खुशु पीला देगी..." कोमल ने मुस्कराते हुए रमा और ख़ुशी की तरफ देखते हुए बोलै , वोह दोनों हसने लगी ,

"क्या भइआ , आपको इतना पसंद है दूध पीना , मुझे बोल देते , में घर पर पीला देती आपको..." प्रिय ने बेहद उदास होते हुए बोलै , उसे अभी भी कुछ समाज नै आया था ,

"नै देदी , यह तीनो बस मज़ाक कर रही है , मेरा पेट भरा हुआ है , कितनी दूर जाना है अभी..." रवि ने प्रिय को उदास देख , उसे मानते हुए बोलै , उसका लुंड पूरा अकड़ कर खड़ा हो चूका था , तीनो की कामुक बातिओं ने , उसे परेशान कर रखा था ,

"रमा देदी ध्यान से , कही केला फास न जाये मोह में..." कोमल ने रमा की तरफ देखते हुए बोलै , जिसके हाथ में अभी बहुत मोटा केला था , वोह इक दर्ज़न केले खा चुकी थी , ख़ुशी और कोमल हसने लगी , और रवि और प्रिय भी ,

"कोमल , हमारी रमा इस से भी , मोटा और लम्बा केला खा चुकी है , उसे पूरा एक्सपीरियंस है , बस तुम सीखना है , तुम केला खाना नै अत..." रवि ने कोमल को आंख मरते हुए बोलै , तोह रमा और ख़ुशी हसने लगी ,

"भइआ , क्या अप्प भी..." कोमल बेहद शरमाते हुए बोली ,

"क्या सच में , कोमल , तुम केला खाना नै अत , यह तोह बहुत आसान होता है..." प्रिय ने अपनी नादानी में बोलै , तोह रवि , रमा और ख़ुशी बेइंतहा हसने लगे , और कोमल के गाल शर्म से लाल हो गए ,

"हाँ देदू , कोमल बहुत डर्टी है , जब भी इसको केला दिखता हु , यह भाग जाती है , अभ अप्प hi देखो , रमा ने केला खा लिया , मेरी बीवी सीमा ने भी खा लिया , मेरी बहाने रिमी और शूरति और मेरी बीवी बेबी , उन तीनो ने भी केला खा लिया , बस कोमल hi डर्टी है , अभ अप्प hi समझो इसको..." रवि ने बेहद भोलेपन में कोमल की नली नली आँखों में ज़कते हुए बोलै , तोह रमा और ख़ुशी फिर से हसने लगी ,

"कोमल , तुम क्यों डर्टी हो केले से , केला तोह शरीर के लिए ाचा होता है , केले में कई गन होते हैं , अरे डॉक्टर तोह बोलते हैं , सबको दिन में दो बार केला खाना चाहये , वोह भी दूध के साथ..." प्रिय ने कोमल को समझते हुए बोलै , जब प्रिय कोमल को समझा रही थी , तब रवि , रमा और ख़ुशी पगलू की तरह हस्स रहे थे , उनकी आँखों में असनु ा चुके थे , और कोमल तोह शर्म से पानी पानी हो चुकी थी ,

"देखा कोमल , कितने गन होते हैं केले में , उफ़ अभ तोह खा लो केला , कब तक भगति रहूगी तुम , इक न इक दिन तोह खाना hi पड़ेगा..." रवि ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , तोह कोमल उस से नज़रियन मिला शर्माने लगी ,

"हासष्ठ , मुझे तोह केला बहुत पसंद है , गाओं में भइआ ने जब से केला खिलाया है , मुझे और केला ाचा hi नै लगता..." रमा ने अपना इक हाथ अपने भाई की जंग पर रखते हुए , मुस्करा कर बोलै , रवि का बदन कम्प सा गया , उसने रमा का हाथ अपनी जंग से उठा , अपने लुंड के उभर पर रख दिया ,

"आईएईए माआ..." रमा जोर से सिसक पढ़ी ,

"क्या हुआ देदी..." कोमल ने गाड़ी के मिरर से पीछे देखते हुए बोलै , उसने मिरर थोड़ा सेट करके देखा , तोह रमा का हाथ उसे कही और hi दिखा , उसने ख़ुशी को पास बुला उसके कण में कुछ बोलै तोह दोनों हसने लगी ,

"कुछ नै , मुझे काळा सांप की यद् ा गई , प्रिय देदी अप्प ने कभी सांप देखा है , उफ़ भइआ के पास , इक बड़ा कला सांप है..." रमा ने अपने भाई रवि की आँखों में अखन दाल , उसके लुंड को अपने नरम मुलाम गोर हाथ से कास कर दबाते हुए बोलै , कोमल और ख़ुशी भी यह सब देख रही थी , पर प्रिय को कुछ नै दिख रहा था , क्यों की रवि ने प्रिय का छोटा सा बैग अपनी लेफ्ट जंग पर रखा हुआ था , और प्रिय भी लेफ्ट साइड hi बैठी थी ,

"उम् , नै , नै , रमा , मुझे सांपो से बहुत दर लगता है , कहते हैं सांप काट ले तोह दर्द बहुत होता है..." प्रिय ने रमा की तरफ देखते हुए , बेहद भोलेपन में बोलै , कोमल , रमा और ख़ुशी हसने लगी , रवि तोह अपनी बहिन के नरम हाथ को अपने लुंड पर महसूस करते हुए , मज़ा में सिसक रहा था ,

"देदी , हमारी रमा बहुत ताकतवर है , यह तोह सांप को हाथ से पकड़ , उसका जहर चूस कर निकल देती है..." कोमल ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , तोह रमा शर्माने लगी ,

"क्या , हे भगवन , रमा , तुम सच में सांप को पकड़ लेती हो..." प्रिय ने चौंकते हुए अपने गुलाबी होंठो पर हाथ रख कर बोलै ,

"हाँ देदी , कोमल सही बोल रही है , हमारी रमा तोह , सांप को हाथ में पकड़ अपनी बिल में घुसा लेती है , मतलब इसके रूम में जो बिल थी सांप की , यह नै डर्टी , देदी , इक बार , मने अपनी आँखों से देखा..." रवि ने बेहद मुस्कराते हुए पहले रमा की आँखों में देखते हुए और फिर आखिर में प्रिय की तरफ देखते हुए बोलै , वोह अभी बोल hi रहा था प्रिय बेच में बोल पढ़ी ,

"हे भगवन , क्या देखा तुमने..." प्रिय बेहद चौंकते हुए बोली , कोमल और ख़ुशी इक दूसरे की तरफ देख , बेहद हसने लगी ,

"देदी , मने देखा , रमा ने इक कला सांप अपने हाथो में पकड़ रखा था , फिर इसने उस सांप को बहुत देर तक चूमा , और , और , फिर मने देखा , इसने उस काळा लम्बे सांप को अपनी बिल के मोह पर रख , जोर से जतका देकर , इक hi बार में , पूरा अंदर घुसा दिया , यह बिलकुल नै डर्टी , यह तोह काळा सांप से बचो की तरह खेलती है ..." रवि ने घम्बिर होकर बोलै , तोह कोमल और ख़ुशी बेइंतहा हसने लगी , रमा ने शरमाते हुए , अपने भाई की कमर में चिमटी काट दी ,

"आईएईए मा..." रवि दर्द से उछाल पढ़ा ,

"क्या हुआ भइआ.." प्रिय बेहद चिंता करते हुए बोली ,

"ोूछह देदू , रमा ने चिमटी कटी मुझे..." रवि ने बेहद भोलेपन में बोलै , तोह कोमल और ख़ुशी फिर से हसने लगी ,

"नई , मने कुछ नई किया , भइआ , अप्प झूठ बोल रहे हो , ोुछःह , भइआ , मेरी आँख में देखना , शयद कुछ चला गया है..." रमा ने मुस्करा कर बोलै , असल बात यह थी , रमा खुद बेहद गरम हो गई थी , इक तोह वोह सब कामुक बतिअन कर रहे थे , और दूसरा , वोह कब से अपने भइआ का लम्बा मोटा लुंड कास कास कर दबाते हुए , सेहला रही थी , उसकी मखमली मुलाम छूट , खूब गीली होकर पानी छोड़ रही थी , उसकी फूली हुई छूट में खूब खुजली हो रही थी ,

"ओह्ह मेरी रेमो..." रवि ने बेहद प्यार से बोलै , और रमा की तरफ पूरा घूम कर बेथ गया , अभ प्रिय की तरफ उसकी पीठ थी , पर कोमल और ख़ुशी को , दोनों पूरा दिख रहे थे , कोमल मिरर से देख रही थी और ख़ुशी तोह पीछे की तरफ चेहरे किये , कब से , सब से बतिअन कर रही थी ,

रवि ने रमा के चेहरे के करीब अपना चेहरा किया , और उसकी वासना में लाल हुई आँखों में देखने लगा , रमा तेज़ तेज़ सांसे भरते हुए अपने भाई की आँखों में अखन डेल उसे देख रही थी ,

"भइआ इस आँख में कुछ है , शयद कोई मचार होगा.." रमा ने अपने लाल रसीले होंठो को जीभ फिरा खूब गीला करते हुए बोलै ,

"में देखता हु.." रवि ने उसके लाल लबु को देखते हुए , अग्गे बढ़ , अपने होंठ उसके रसीले लाल होंठो पर रख दिए , रवि धीरे धीरे उसके होंठो को चूसने लगा , उफ़ रमा के मन को अभ कही जाकर शांति मिली ,

रवि , रमा के माखन जैसे नरम मुलाम होंठो को बेहद शिदत से महसूस करते हुए , उनको पूरा अपने मोह में भर भर कर चूसने लगा , उफ़ रमा की छूट और भी पानी छोड़ने लगी , दोनों के होंठ आपस में उलज़ने लगे , रवि कभी ऊपर का होंठ चुस्त तोह कभी निचे का , रमा के लाल मखमली होंठ उसके होंठो में पिस्टे जा रहे थे , 2 मिंट तक रवि ने पूरा कास कास कर रमा के होंठो को चूसा , रमा के रसीले होंठो का रास , उफ़ इतने मीठे होंठ थे रमा के , रवि मदहोश सा हो गया , रमा ने अखन बंद किये अपने होंठ चुसवाते हुए , अपनी रसीली लपलपाती जीभ अपने भाई के होंठो पर मारनी सुरु कर दी , अभी रवि ने मोह खोल , रमा की जीभ को अपने मोह में भरा hi था , पर तभी ,

"बस कोमल इस तरफ गाड़ी मोड़ लो..." प्रिय ने मुस्कराते हुए बोलै , प्रिय की आवाज़ सुन रवि वापिस सही होकर बेथ गया ,

"रमा , हीयांन ीीीानं , अभ ठीक हो..." रवि ने तेज़ तेज़ हफ्ते हुए , अपने होंठो को हाथ से साफ सा करते हुए बोलै , तोह रमा ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली , कोमल और ख़ुशी उनकी तरफ देखती हुई , बस मुस्करा रही थी ,

"भइआ , सैर को जबरदस्त जतका लगने वाला है .." प्रिय ने अपने भाई रवि के हफ्ते हुए चेहरे को देखते हुए बोलै , वोह कुछ कुछ समाज गई थी , पर उसे अजीब लग रहा था , क्यों की रमा बार बार रवि को भइआ बोल रही थी , उसे पता लग गया था , के रवि और रमा इक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे ,

"हाँ , ओह्ह , हाँ , देदी , अपने सही कहा..." रवि ने प्रिय की काली काली गहरी आँखों में देखते हुए बोलै , प्रिय का मासूम और हद से जायदा भोला चेहरा , उफ़ रवि को बहुत प्यार ा रहा था अपनी प्यारी बहिन पर ,

"भइआ , पहले हम सब अंदर जाएगी , अप्प गाड़ी में बैठे रहना , हम , सरप्राइज देंगी सैर को..." प्रिय ने अग्गे बढ़ , अपने भाई रवि के गोर गाल को चुम कर बोलै ,

"जैसा अप्प चाहो देदू.." रवि ने भी प्रिय के गोर गाल को चुम कर बोलै , तोह प्रिय ने मुस्करा कर , अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,

प्रिय कुछ सोचने लगी , फिर उसे िका इक यद् आया , जब उसके भाई ने उस गुंडे को मारा था , तब उसके बूब्स नंगे थे , उफ़ प्रिय के गाल शर्म से लाल हो गए , जब उसे वोह पल यद् ए ,

"उफ्फ्फ भइआ ने सब देख लिया होगा , में ऊपर से नंगी थी , उफ़ मेरी भी क्या गलती , उस गुंडे ने मेरी कमीज और ब्रा फाड् दी थी , उम् , भइआ ने कितनी बुरी मौत दी उसे , ाचा hi किया भइआ ने , कितना प्यार करते हैं भइआ मुज़से , उम् , पर मेरे बूब्स नंगे , है , मुझे शर्म ा रही है , पर भइआ की क्या गलती इसमें , भइआ बहुत अचे हैं , इक बार भी मुझे गलत नज़र से नै देखा , उफ्फ्फ भइआ उस वख्त बहुत गुस्से में थे , पर , उफ़ ओह्ह प्रिय , कितना सोचती हो तुम , भइआ तुमसे बहुत प्यार करते हैं , में भइआ का हमेशा ख्याल रखूगी , उनका साथ कभी नै छोडूगी , मेरा प्यारा भाई..." प्रिय अपने मन में सोचती गई , और उसके सोचते सोचते सैर और मुन्ना का घर ा गया , जो मुल्ला नगर से थोड़ा बहार था , इस तरफ भी वंश जंगल का एरिया पढता था , आखिर 500 कम बड़ा था वंश जंगल ,

"उम्म्म ओह्ह्ह्ह हुऊ , हासष्ठ , आखिर पहुँच hi गए..." कोमल ने गाड़ी रोक इक लम्बी अंगड़ाई लेते हुए मुस्करा कर बोलै , और फिर सब निचे उतरने लगे , प्रिय ने गाड़ी से बहार निकलने से पहले , अपने भाई रवि के गाल को कास कर चुम लिया , और फिर वोह सब सैर के घर के अंदर चल पढ़ी , रवि अकेला गाड़ी में बैठा रहा ,

फिर कोमल , रमा , ख़ुशी और प्रिय , सैर के घर के मैं गेट के पास पहुँच गई , प्रिय ने दूर बेल्ल बजे तोह , इक लड़की ने दरवाजा खोला , प्रिय तोह उसे देखते hi पहचान गई , क्यों की वोह पहले यहाँ कई बार ा चुकी थी ,

"हलो सना , कैसी हो अप्प , मेरी छोटी बहिन कहा है.." प्रिय ने अग्गे बढ़ , सैर की छोटी बहिन सना के गले लगते हुए बोलै ,

"देदी , सैर देदी अंदर है , ायो अप्प सब .." सना बेहद खुश होते हुए बोली , अज्ज बड़े दिनों बाद प्रिय को आया देख , सना बेहद खुश हो गई थी ,

फिर सब घर के अंदर ा गए , इक सूंदर घर था , शहर की bheed-bhad सा दूर , बहुत शांति और सकूं था इस घर में ,

सबने घर के अंदर आकर देकर , सैर सोफे पर गुमसुम , उदास बैठी हुई थी , उफ़ सैर बिलकुल वैसी थी , जैसे 3 साल पहले थी , बस उसका भोला मासूम गोरा चेहरा थोड़ा मुरझा सा गया था , वोह अकेली नै बैठी थी , उसके साथ इक छोटा सा , प्यारा सा बचा भी बैठा हुआ था , जो खेल रहा था ,

"प्रिय डीडीई..." सैर की नज़र जैसे hi प्रिय पर गई , वोह बेइंतहा खुश हो गई , वोह इक पल में उठी , और भाग कर प्रिय के गले लग , रोने लगी , वोह दिल की बेहद कमज़ोर थी ,

"बस छोटी , उम्मा , बस बचा , बस..." प्रिय , सैर के बालो को प्यार से सहलाते , उसके सार को चूमती , उसे चुप कहते हुए बोली , सबकी अखन नाम हो चुकी थी ,

कुछ देर रोने के बाद सैर शांत हो गई , फिर वोह सब के साथ सोफे पर बेथ गई , सना सबके लिए पानी लेने चली गई , सैर ने रमा को पहचान लिया था , क्यों की , जब रवि को राखी बाँड्ने गई थी , तब रमा से मिल चुकी थी वोह , पर कोमल और ख़ुशी को पहली बार देख रही थी सैर ,

"देदी , भइआ का कुछ पता चला , देदी , कब आएंगे भइआ , बताओ न देदी , बताओ ना , में , में , और इंतज़ार नै कर सकती , देदू बोलो न , भइआ कहा है , आपके साथ ए हैं , देदी बोलो ना..." सैर ने फिर से बेइंतहा रट , तड़फते हुए बोलै , पता नै क्यों , उसका दिल बेचैन सा हो उठा था , कही कोई बुरी खबर न हो ,

"शहहह , बस , अभ इक और शब्द नै , छोटी , तुम भइआ से मिलना है..." प्रिय अभी बोल hi रही थी के सैर बेच में बोल पढ़ी ,

"मिलना है , देदी , अप्प भइआ को लायी हो अपने साथ , बोलो न , भइआ , भइआ ..." सैर बेइंतहा रट हुए प्रिय और बाकि सब के चेहरों को देखते हुए बोली , कोमल , रमा और ख़ुशी , वोह तीनो भी रो रही थी ,

"नई .." प्रिय ने िका इक यह शब्द बोल दिया ,

सैर खामोश हो गई , उसके असनु थम गए , वोह न तोह रो रही थी , ऐसा लग रहा था , जैसे वोह साँस hi नै ले रही थी , वोह पालक जपकाना तक भूल गई थी , वोह , वोह , कुछ नै कर रही थी , कुछ नै ,

"छोटी , छोटी , क्या हुआ , बोल न , अरे कुछ तोह बोल..." प्रिय ने बेइंतहा रट हुए , सैर को कंधु से पकड़ हिलाते हुए , पगलू की तरह बोलै , पर सैर सोफे पर इक तरफ गिर गई , शयद उसे शॉक लगा था , सब घबरा गई ,

"भय्याहा , जल्दी आयु..." कोमल ने जोर से चीखते हुए बोलै ,

"यह , यह , मने क्या कर दिया , छोटी उठू ना , भइआ ए हैं , हे भगवन , छोटी..." प्रिय ने बेइंतहा रट हुए , अपने बाल नोचते हुए बोलै , रमा उसे संभालने लगी ,

कोमल और ख़ुशी ने सैर को निचे लिटा दिया , उसकी सांसे थम गई थी , शयद उसका मासूम दिल , इतना बड़ा जतका सेहन नै कर पाया था , तभी रवि अंदर ा गया , उसे देख कर लग रहा था , वोह भागता हुआ आया था , वोह एते hi , अपनी बहिन सैर के पास गिर गया , उसे बहु में भर , उसके चेहरे को पगलू की तरह चूमने लगा , उसके सीने पर , दोनों हाथो से जोर जोर से दबाते हुए , उसे होश में लेन लगा ,

"सैरा , देदी , उठू , उठू ना , अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह , क्यू , भगवाननं , मेरे साथ hi क्यू , मुझे ही क्यों इतना दर्द देते हो , मेरी बहिन , ूठः ना , देख तेरा भाई आया हैई , उठ ना..." रवि बेइंतहा दर्द में डूबता हुए , चीखते , छीलते रट हुए बोलै , उसके चखने , छिलने से , आसमान में बदल गिर ए थे , बहार साफ सुथरा मौसम , अभ काळा अंधकार में दुब चूका था , तेज़ हवा चलने लगी थी , बहार तूफान ा चूका था , बिन मासूम बरसात हो रही थी , क्यों की डेविल दर्द में दुब चूका था ,

"रावी , रवीए , में , में , कुछ करती हु..." ख़ुशी ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"यह सब , यह सब , मेरे कारण हुआ हैई , में क्यूँउउ , क्यू , भइआ को साथ ना लायी..." प्रिय ने बेइंतहा रट हुए बोलै , रमा बड़ी मुश्किल से उसे सम्बल प् रही थी , सैर की छोटी बहिन सना , वोह भी पगलू की तरह रो रही थी ,

फिर ख़ुशी ने सैर के माथे पर हाथ रख दिया , उसके हाथ से लाल रौशनी निकल , सैर के माथे में सामने लगी , वोह रवि की तरफ देखते हुए बोली ,

"रावी , में इसके दिल को बिजली का जतका देती हु , तुम इसको साँस दो अपने मोह से..." ख़ुशी ने सैर के सीने पर दोनों हाथ रख , अपनी पूरी शक्ति एकजुट करते हुए बोलै , उसकी अखन लाल रौशनी में चमकने लगी ,

"हाँ , ठीक है..." रवि ने इतना बोल , सैर की नक् अपनी उंगलियों से बंद कर , अपने होंठ , उसके होंठो से जोड़ लिए ,

"रवि 1 , 2 ोर्ड्र्र 3..." फिर ख़ुशी ने इक तेज़ बिजली का जतका दिया , लेकिन कुछ न हुआ , उसने इक और जतका दिया , पर कुछ न हुआ , अभ ख़ुशी भी हिमेट हरने लगी थी ,

रवि अपनी पूरी जान लगा , सैर के होंठो से अपने होंठ जोड़े , उसे साँस देने की कोससिह कर रहा था , उसकी आँखों से बहते असनु , सैर का मासूम चेहरे पर गिर रहे थे ,

"रावी कुछ नाई हो रहा..." ख़ुशी बेइंतहा रट हुए बोली ,

"खुशु देदी , में भी आपका साथ देती हु..." कोमल भी , ख़ुशी के हाथो पर अपने हाथ रखते हुए , रट हुए बोली ,

"भइआ तयररर हो जोऊ 1 , 2 ऑर्डर 3..." इस बार दुगनी शक्ति से , कोमल और ख़ुशी ने , इक जोरदार जतका दिया , सैर के मासूम दिल को ,

"अह्ह्हींईईईन्न्नन अह्ह्हैईईईन्न्नन्नन्न..." सैर का पूरा शरीर इक डैम से उछाल पढ़ा , उसकी बंद सांसे चल पढ़ी , रवि अभी भी , उसके होंठो से अपने होंठ जोड़े , बेइंतहा रट हुए , उसे साँस दे रहा था ,

"सैरा डीडीई..." सैर की सांसे चलते hi , उसके होश में एते hi , रवि ने उसे कण्डु से पकड़ , ऊपर उठा , अपने गले लगा , उसके बालो को सहलाते , रट हुए , बेइंतहा दर्द में दुबे हुए चीला कर बोलै ,

कोमल और ख़ुशी , सैर के होश में एते hi , इक दूसरे के गले लग रोने लगी , प्रिय भी अपनी छोटी बहिन सैर को ठीक देख , रमा की बहु में सिमट रोने लगी , पर अभ , ें सबके असनु , ख़ुशी के असनु थे , क्यों की सैर जिन्दा हो चुकी थी ,

"पनीइ लाऊ जल्दीए..." रवि ने निचे बैठे , सोफे से अपनी पीठ टिकाये , चीला कर बोलै , सना भाग कर दुबारा पानी ले आयी , पहले वाला तोह उसके हाथो से गिर गया था , रवि ने सना के हाथो से पानी का गिलास लेकर , सैर को पिलाया , उफ़ तब उसकी जान में जान आयी , रवि का जिस्म थार थार कम्प रहा था , इतना वोह कभी नै डरा था , कभी नै ,

"भय्याहा..." सैर ने कुछ कुछ होश में एते हुए , अपनी अखन थोड़ी सी खोल , अपने भाई रवि को देख , बेहद धीरे से बोलै , उफ़ उसके यह चाँद शब्द , सबके दिल को सकूं दे गए , रवि तोह पागल हो गया , वोह पगलू की तरह , अपनी मासूम सी बहिन सैर के , चेहरे को चूमने लगा , इस प्यार में कोई वासना नै थी , रवि काफी देर बाद जाकर शांत हुआ ,

"मेरी बहिन , उम्मा , मुझे , मुझे माफ करदी , इतना प्यारर , तू , तू , इतना प्यारर करती ही मुज़से , अह्ह्ह्हह , अगर तुझे कुछ हो जाता , ओह्ह्ह , मेरा डिल अभी भी कम्प रहा ही , मेरी बहन ..." रवि बेइंतहा रट हुए , अपनी बहिन सैर के चेहरे को चूमते हुए बोलै ,

"भइआ , अप्प ा गई , मुझे लगा कही अप्प , भइआए मी दररर गयी थिई , भइआ , में , मी , आपके बिना मर्डर जौउगीय ..." सैर ने थोड़ा पीछे हैट , रवि की आँखों में देखते हुए , बेइंतहा रट हुए बोलै , उफ़ सैर से मासूम शयद hi इस दुनिआ में कोई हो ,

"शठ , पगली कही की , तेरा भाई अमर ही , वोह कभी नयी मर्डर..." रवि अभी बोल hi रहा था ,

"भइआए , ऐसी बैठत कभी मैट करना , काबिई नयी..." सैर ने रवि के होंठो पर हाथ रख , बेहद रट हुए , उसके पोरे चेहरे को चूमते हुए बोलै , उफ़ अभ जाकर , रवि के दिल को सकूं मिला था , अज्ज कोमल के बाद , सैर का प्यार hi , उसे इतना सकूं दे पाया था , क्यों की वोह उसके लिए , इक पल में मर गई थी , इक पल में , उसने अपनी चलती संसू को रोक लिया था , ऐसा प्यार , रवि सबसे प्यार करता था , जो जो उसके जीवन में था , पर सैर और कोमल का प्यार अलग hi था , दोनों इक जैसी महसूस हो रही थी रवि को , मर तोह सभी जाती उसके लिए , पर में शबदो में आपको समझा नै सकता , अप्प बस महसूस कर लो , में किसी के प्यार का अपमान नै कर रहा हु , क्यों की सबका प्यार अनमोल था , सबका प्यार अलग अलग था ,

"ओह्ह्ह , मेरी बहन , ऐसा कभी मत करना , में कितना दर गया था , पगली , तू तोह मेरी जान ही , में क्यों , क्यों , तेरे पास न ा पाया , हे भगवन , क्योऊ , मुझे इतना दर्द दे रहा तू , क्योऊ , मेरी बहिन , वादा कररर , कभी ऐसा नै करेगी , वडा कररररर , कभी अपनी संसू को नै रोकेगीइ , वडा कररर..." रवि ने बेइंतहा दर्द में दुबे , बेइंतहा रट हुए बोलै , वोह बार बार सैर के मासूम चेहरे को चुम रहा था ,

इक राखी के लिए , बस इक राखी के लिए , उसकी बहिन सैर ने अपनी सांसे रोक ली , इक छोटे से धागे के लिए , उफ्फ्फ , जरुरी नै इक hi पेट से जनम लेने वाले भाई बहिन हूँ , अगर , दुनिआ में प्यार , रवि और सैर जैसा हो , तोह आधे से जायदा पाप यु hi ख़तम हो जाये , रवि ने जब राखी बंधी थी , उसने सोचा भी नै था , सैर और प्रिय , इस कदर , उसके साथ बांध जाएगी , इस कदर , उसे अपना भाई मान लेगी , के उसके दूर होते hi , वोह हसना , मुस्कराना भूल जाएगी , उनकी खुशियाँ लूट जाएगी , उनका जीवन नाराज से बदतर बन जाएगा , अज्ज रवि के पिता उसे हर दिन , इक नया दर्द दे रहे थे , पर रवि के पास , ऐसे प्यार करने वाले थे , के इस बार , रवि के पिता शयद झुक जाते , शयद हार जाते ,

"भइआए , में , में , वडा नई करुगीय , नई करुगीय , अगर , अगर , अप्प मेरे पास रहूगी , में , में तभी जिन्दा रहूगी , में , में , मर जोगीई , आपके बिना , भइआए , में , में , वादा नईईई करुगीई..." सैर ने बेइंतहा रट हुए , रवि के गले लग , उसके सीने पर , अपने दोनों हाथो से मरते हुए बोलै ,

"शह्ह्ह्ह , बस अभ और नई , मेरी , मेरी , दोनों बहाने पगली हैं , चल , अभ कुछ खिला दी , तेरा भाई भूखा हैई..." रवि ने बेहद प्यार से , सैर के बालो को चूमते हुए बोलै ,

"क्या , मेरा भाई बुखा हैई..." सैर इक डैम से पीछे हट , इक डैम से खड़े होते हुए बोली , उफ़ वोह अपना हर दर्द , हर दुःख , भूल सा गई , वोह भाग गई किचन की तरफ , सना भी उसके पीछे पीछे चली गई , रवि उठ कर सोफे पर बेथ गया ,

"भइआए , मुझे माफ्फ करदु , यह , यह , मेरी कारण हुआ ही..." प्रिय बेइंतहा रट हुए , रवि के गले लगते हुए बोली ,

"शहहह , बस देदू , आपको कहा पता था , आपकी कोई गलती नयी , उफ़ सैर का दिल इतना मासूम होगा , यह कोई नै जनता था , बस ददऊ , अप्प मुझे भी रुला डोगीइ , बस देदू..." रवि ने रट हुए प्रिय का चेहरा चूमते हुए बोलै , रवि की बतिअन सुन , प्रिय शांत हो गई , उसने अपने असनु साफ कर लिए , वोह मुस्कराने लगी ,

कुछ देर बाद , सैर और सना , किचन से बहार ा गई , वोह हल्का फुल्का नाश्ता और छाए ले आयी थी , उसने सबको छाए और नाश्ता दिया , और अपने भाई के साथ बेथ गई , वोह और प्रिय , उसे अपने हाथो से खिलने लगी , रवि की अखन नाम हो गई , अपनी दोनों बहनो का इतना प्यार देख कर , क्या आपकी अखन नाम हुई...

"उफ़ भइआ और खाओ न.." सैर ने बेहद खुश होते हुए बोलै , अभ सैर इस दुनिआ की सबसे खुशनुमा लड़की थी , जिसे सब कुछ मिल गया था , जैसे किसी बचे को उसकी , मनचाही चीज़ मिल गई हो ,

"बस देदी , और नई , कोमल , तुम hi कुछ कहो ना..." रवि ने बड़ी मुश्किल से कहते हुए , कोमल की नली नली आँखों में ज़कते हुए बोलै , वोह ख़ुशी के साथ बैठी , मुस्करा रही थी ,

"भइआ , यह है आपकी कोमल , उफ़ , उस दिन अप्प इसके लिए इतना उदास थे , पर , पर , भइआ , वोह सब बोल रही थी , कोमल मर चुकी है , और , और , अप्प , कोमल , को बार बार , बेवफा बोल रहे थे , क्यों भइआ , और कोमल वापिस कैसे मिल गई आपको , मने , मने , उस दिन आपकी आँखों में बेइंतहा दर्द देखा था , में बहुत रोई थी घर आकर , आपका दर्द मुज़से सेहन नै हुआ था..." सैर , कोमल के खूबसूरत चेहरे को निहारते हुए , फिर से रट हुए बोली ( अप्प लोग अपडेट-21 रीड कर लेना इंडेक्स में)

"हाँ , भइआ , मुझे भी अभ यद् आया , छोटी सही बोल रही है , आपकी पत्नी ने बोलै था , मेरे पति को बचते हुए , अपने अपनी कोमल को खो दिया उस जंगल में , भइआ , मेरे मन का बोझ अज्ज हल्का हुआ है..." प्रिय भी उस दिन को यद् कर रट हुए बोली ,

रवि बस अपनी कोमल को देखने लगा , कोमल खामोश थी , इक पत्थर की तरह , उस दिन जंगल में जो उसने बोलै था , वोह बस , अपने भाई को बचाना चाहती थी , लेकिन , कई बार , अपने प्यार को मेहफ़ूज़ रखने के लिए , बेवफा भी बनना पढता है , धोकेबाज़ कहलाना पढता है , कोमल वोह कड़वी बतिअन बोल , बेवफा बन गई , पर सच्चा प्यार , अपना रास्ता दंड hi लेता है , बस अप्प कभी निराश मत होना , अप्प जिसको चाहते हो , जिसको प्यार करते हो , वोह आपसे रूत सकता है , पर आपको भूल नै सकता ,

कभी उदास मत होना , के मेरे मेहबूब मुज़से नफरत करते हैं ,

क्या पता , वोह उस रस्ते पर हो , यहाँ प्यार भी डैम तोड़ देता है...

"भइआए , कुछ तोह बोलो..." सैर अपने भाई रवि का हाथ अपने हाथिओं में लेते हुए बेहद नाम आँखों से बोली ,

"उफ़ , सैर , प्रिय , मेरी कोमल बेवफा नै थी , बस पागल है मेरे प्यार में , ऐसे मेरे बिना कुछ दीखता hi नै , उस दिन , हासष्ठ , उस दिन , इसने मेरी जान बचने के लिए , अपने प्यार की परीक्षा दी , मेरे दिल में नफरत भर दी , मुझे कड़वी , जहर भरी , बतिअन बोल , मुज़से दूर चली गई , तुम दोनों कहती हो न , 3 साल में कहा गया , में , में , अपनी कोमल को लेने गया था , में इसके बिना इक पल भी खुश नै रह सकता , में मर सा जाता हु , जब मेरी कोमल मुज़से दो पल भी दूर जाती है , में , में , ऐसे नफरत कर hi न पाया , हर पल , हर लम्हा , ऐसे यद् करता रहा , कोई और लड़की , मुझे वोह सकूं न दे पायी , जो मेरी कोमल की बहु में मुझे अत है , देदी , मेरी कोमल पगली है , हम दोनों दीवाने है इक दूसरे के , यह हमारी कहानी है , यह हमारे प्यार की कहानी है , इसका अंत या तोह हमारे मिलान से होगा , या हमारी मौत से..." रवि ने कोमल की आँखों में अखन दाल , बेइंतहा दर्द भरे शबदो में बोलै , उसकी अखन नाम हो गई , कोमल , उफ़ , वोह पगली सच में रो रही थी , वोह इक पल में उठ कर , अपने भाई के सीने से लग गई , उसकी बहु में , अपना चेहरा छिपाने लगी , सब उनके प्यार को देख , बस रो रहे थे , हम रो कर hi , अपना प्यार जाता सकते हैं...

"शहहह , बस जणू , बस..." रवि ने कोमल का चेहरा अपने दोनों हाथो में पकड़ , उसके गुलाबी होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"सैर , में भइआ के साथ जा रही हु , तुम भी चलो न , कुछ दिन भइआ के पास रह कर , हम वापिस ा जाएगी..." प्रिय ने इस दर्द भरे माहौल को बदलने के लिए , सैर की तरफ देखते हुए बोलै ,

"क्या , सच में देदू , में चलुगी , मुझे भी भइआ के पास रहना है , अरे भइआ , अप्प मेरे बेटे से मिले hi नई , सॉरी , में भूल गई ..." सैर ने मुस्कराते हुए , पहले प्रिय की तरफ और फिर अपने भाई रवि की तरफ देख कर बोलै ,

"ओह्ह , मेरा प्यारा बचा , क्या नाम है देदू इसका..." रवि ने मुस्करा कर , सना के हाथिओं से बचा , अपनी गॉड में लेकर , उसके गालो को चूमते हुए बोलै ,

"रवीए..." सैर ने अपने भाई की आँखों में देखते हुए मुस्करा कर बोलै , रवि खामोश सा हो गया ,

"भइआ , क्या हुआ अप्प खुश नै हो , वोह , वोह , भइआ , मने और प्रिय देदी ने यह नाम रखा , अभ दो बचो का इक hi नाम अजीब सा लगता , इस लिए मने अपने बचे का नाम , अपने प्यारे भाई के नाम पर रख दिया..." सैर ने अपने भाई रवि के कंधे पर सार रख , अपने बचे से खेलते हुए बोलै ,

"उफ्फ्फ , देदू , इतना प्यारर करती हो मुज़से , मुझे बहुत ख़ुशी हुई , ाचा देदू , आपके मुन्ना बाबू कही दिख नै रहे..." रवि ने पहले नाम आँखों से और फिर हस्ते हुए बोलै , तोह सैर शर्माने लगी ,

"भइआ , वोह बाजार गए हैं , लो ा गए वोह..." सैर ने बेहद खुश होते हुए घर के दरवाजे की तरफ देख कर बोलै , क्यों की मुन्ना ा चूका था ,

"अरे वह , कवी भाई , कैसे हो , अपुन को ख़ुशी हुई आपको देख कर.." मुन्ना घर के अंदर ा रवि को देखते हुए बोलै , फिर रवि उठ कर उसके गले लगा ,

"सुनो जी , कवी नै रवि नाम है भइआ का.." सैर ने हस्ते हुए बोलै , तोह सब हसने लगे , मुन्ना इक इक कर सबको मिला और फिर सोफे पर बेथ गया ,

"अरे मेरी बुलबुल ठीक है , अरे , खाना , पानी लाना मेरे लिए..." मुन्ना ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"जेजुउ , खाना नै सना ..." सना अपने पेअर गुस्से में पटकते हुए , किचन की तरफ जाते हुए बोली , सब फिर से हसने लगे ,

"रवि भाई , ाचा हुआ अप्प ा गए , नै तोह , सैर ने अपुन के दिमाग का दही कर दिया , बोले तोह , भइआ को लाओ , भइआ को लाओ , और भाई , जब चिडया जी के पति..." मुन्ना अभी बोल hi रहा था , के प्रिय बेच में बोल पढ़ी ,

"जेजुउ , चिडया नै प्रिया..." प्रिय अपने माथे पर हाथ मरते हुए बोली ,

"अरे प्रिय नाम में क्या रखा है , तोह अपुन बोल रहा था , अपुन ने आपको बहुत डुंडा , शहर के सरे , लुखे लोग को पूछा , पर , अप्प कही नै मिले , आपकी बहिन , अपुन से बात नै करती थी , अरे , अभ , अपुन की क्या गलती , अरे में और रंजना बुरे फास गए..." मुन्ना अभी बोल hi रहा के सैर बेच में बोल पढ़ी ,

"भइआ , देखा , इनका बहार चाकर चल रहा , रंजना के साथ..." सैर अपने भाई रवि को मुन्ना की शिकायत करती हुई बोली ,

"नै मेरी बुलबुल , इनके पति , बोले तोह हस्बैंड , में उनकी बात कर रहा हु..."

"जेजुउ , अह्ह्ह्ह , रंजना नै राजेश , रराजेएष्ठ..." प्रिय ने अपना माथा पीट कर बोलै , तोह सब हसने लगे ,

"हाँ वही तोह , देखा भाई , यह बीवी लोग कितना शक करती हैं , वैसे अप्प गए कहा थे..." मुन्ना ने सना के हाथ से पानी लेकर पेट हुए बोलै , सना अपने जेजु के साथ hi बेथ गई , वोह नजाने कब से रवि को hi घर घर कर देख रही थी ,

"भाई में अपनी कोमल को लेने गया था , वैसे , यह कोमल है , यह रमा , यह ख़ुशी , यह दोनों मेरी बहाने हैं , और यह मेरी बीवी..." रवि ने मुन्ना को सबसे मिलवाते हुए बोलै ,

"ः , नमस्ते बहिन लोग , नमस्ते भाभी जी..." मुन्ना सबको हाथ जोड़ नमस्ते करता हुआ बोलै ,

"ाचा , सुनो जी , में भइआ के साथ जा रही हु , में और प्रिय देदी , हम कुछ दिन बाद आएगी , ठीक ही ..." सैर ने मुस्कराते हुए मुन्ना की तरफ देखते हुए बोलै ,

"अरे मेरी बुलबुल , इस में पूछना क्या , तेरा जो दिल करे तू कर , अपुन को बताने का नई , तू जा , बिंदास जा..." मुन्ना मुस्कराते हुए बोलै , तोह सैर बेइंतहा खुश हो गई ,

"मुन्ना , तुम दिलावर खान को जानते हो..." रवि ने िका इक पता नै क्यों पूछ लिया , उसे अपने चाचा जी की प्रॉब्लम भी सोल्वे करनी थी ,

"जनता , अरे , अपुन ने उसके साथ काम भी किया है , क्यों , क्या बात है..." मुन्ना ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,

"मुन्ना , वोह मेरे चाचा जी को परेशान कर रहा है , मुझे उससे मिलना है , तुम , तुम , ऐसा करना , उसकी पूरी जानकारी निकल कर , मुझे कॉल कर देना , पर ध्यान से , किसी को शक न हो तुम पर , तुम मेरी बहिन के पति हो , इस लिए अपना ख्याल रखना..." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,

"ोकक.." मुन्ना भी रवि की बात समाज कर बोलै ,

फिर सबने कुछ देर और बतिअन की , फिर रवि और बाकि सब , घर की तरफ चल पढ़े , अभी टाइम भी 1:35 मिंट का हो चूका था , अभी रवि गाड़ी में बैठने hi जा रहा था , उसका मोबाइल बहज उठा...

दूसरी तरफ..

"हलो , हलो , हाँ , अनु , मने , इक फाइल बेहजी है तुम , चेक करो , हम्म , बहुत , प्रेशर है ऊपर से ..." यह राजेश था , जो इक चोर से बहुत परेशान हो चूका था ,

"हम्म , जी सर , देख रही हु , असलम नाम है इसका , जी , हम्म , हम्म , रवि 2 बजे आएगा , हम्म , कोई बात नई , अभ जायदा दिन नै बचेगा , ok , ok , जी सर..." अनु ने मुस्करा कर इतना बोलते हुए कॉल कट कर दिया , वोह रवि का इंतज़ार कर रही थी , अनु और रवि की टीम में अभ बेबी और काट के इलावा , लारा और एलिज़ाबेथ भी जुड़ चुकी थी , उफ़ इनकी टीम सच में अनोखी टीम थी , शयद कोमल और ख़ुशी भी इनके साथ जुड़ जाती , खैर यह तोह अग्गे पता चलेगा ,

असलम , बस इक नाम hi पता था उसका , जो वोह खुद बता कर जाता था , राजेश पिछले कुछ सालो से उसे पकड़ने की कोससिह कर रहा था , पर असलम , इतना शातिर और इतना तेज़ चोर था , के हर बार राजेश और उसकी पुलिस हार जाती थी , पिछले कुछ सालो से असलम 11 बड़ी चोरिया कर चूका था , वोह चैलेंज करके चोरी करता था , कोण था यह असलम , और क्या रवि उसे रोक पायेगा , खैर यह तोह ऐनी वाले वख्त में छिपा था...

दूसरी तरफ....

"हलो , हलो , हाँ , हाँ , हम्म , ः , ः , मुझे कोई नै मर सकता , हम्म , वोह सब बेवकूफ हैं , जो मुझे मारा हुआ समाज लिया , कोई नै मर सकता , में जासूस हु , में बिमान शाह हु , थे ग्रेटेस्ट ऑफ आल टाइम , में इस दुनिआ का सबसे बड़ा जासूस हु ..." इक इंसान ब्लैक कपडे में , ारवती नगर के सबसे बड़े कैसिनो होटल में , टॉप फ्लोर में , सोफे पर बैठा , हलकी हलकी लाल वाइन , के छोटे छोटे सिप लेते , अपने मोबाइल पर बात करते हुए बोलै ,

"ः , बिमान शाह , तुम सच में बहुत बड़े जासूस हो , सब को बेवकूफ बना दिया , उस रवि को भी ..." दूसरी तरफ इक आदमी मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ , उन सब को लगा , उन लोग ने बिमान शाह को मर दिया , वोह बस मेरा इक हमशकल (क्लाउन) था , में तोह कभी इंडिया आया hi नै था , अभ मुझे एना पढ़ा , क्यों की अभ उस महाशक्ति के जागने का वख्त नज़दीक है , हर 30 साल बाद महाशक्ति जग उठती है , बस अभ मुझे उस महाशक्ति को पाना है , मेरी पूरी जिंदगी गुजर गई , उस महाशक्ति तक पहुँचने में , अभ वोह दिन पास ऐनी वाला है , 30 साल पोरे होने में 6 महीनो का वख्त बचा है , तुम इक काम करो..."

"हाँ बोलो..."

"बेबी ने मुझे धोका दिया , रवि से प्यार करके , पर वोह जूही थी , में जनता था , जूही hi चेहरा बदल कर बेबी बानी है , मुझे लगा बेबी , रवि को मर देगी , आखिर उसे बदला लेना था रवि से , पर वोह साली रवि के प्यार में फिर से दुब गई , और कैटलीन , उस साली को बेबी से प्यार हो गया , दोनों ने मुझे धोका दिया , तुम ऐसा करो , उस जापानीज लड़की को बेहज दो , क्या नाम था उसका..." बिमान शाह ने बेइंतहा गुस्से में बोलै ,

"हम्म , सिको Twin's ..."

"हाँ , वही , सिको Twin's , वोह कहकर जुड़वाँ बहने , जो दुनिआ की बेरहम कहकर कॉन्ट्रैक्ट किलर्स हैं , उनको बेहज दो , मुझे उस बेबी और काट से बदला लेना है , दोनों को मर कर , रवि के इक इक चाहने वाले को मर दूंगा , अभ बेबी और काट को सजा मिलेगी , हम जासूस हमारे रूल तोड़ने वालो को इक hi सजा देते हैं , वोह है मौत की सजा..." बिमान शाह ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"मेरे पास इक और रास्ता है , और वोह दोनों लड़कियाँ कल ा जाएगी..."

"क्या..."

"अप्प ओपन कॉन्ट्रैक्ट रख दो , फिर देखना पूरी दुनिआ रवि को मरने के लिए , उसके पीछे कुत्तो की तरह पढ़ जाएगी , क्यों , कर दू इनाम घोषित ..."

"हम्म , ः , 200 क्रूर्रे का इनाम रख दो , जो भी रवि को मरेगा , कार्डो एलान जुंग का..."

"ः , अज्ज hi ओपन कॉन्ट्रैक्ट का एलान करता हु , जो भी रवि को मरेगा , उसे 200 क्रूर्रे मिलेगा , अभ रवि नै बचेगा , पूरी दुनिआ के डॉन , गुंडे , उसके पीछे पढ़ जायेगे ..." दूसरी तरफ वोह आदमी बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , तोह बिमान शाह भी हसने लगा....

तो बे कुनिटेड.....
 
अपडेट-130



अभ अग्गे...

रवि गाड़ी में बेथ hi रहा था , तभी उसका फ़ोन बज उठा , रवि ने अपना मोबाइल , पेण्ट की पॉकेट से निकल देखा , तोह उसके होंठो पर इक मुस्कान फैल गई , रवि ने कॉल उठा लिया , और मोबाइल कण पर लगाए गाड़ी से थोड़ा दूर चला गया ,

"हलो..." रवि ने मुस्कराते हुए बड़े प्यार से बोलै ,

"हलो , भइआ..." दूसरी तरफ से बेहद नरम और कोमल आवाज़ रवि को सुनाई दी ,

"हम्म , मेरी मिथु , कैसी है..." रवि ने मुस्करा कर बोलै , उसने आवाज़ पहचान ली थी , और यह आवाज़ थी , मिथु सोनल की ,

"आपकी मिथु नाराज़ है , बहुत जायदा ..." सोनल अपने घर की चाट पर टहलते हुए , बेहद मुस्कराते हुए बोली , वोह घर की चाट पर टहलते हुए , दूर तक फैले हरे भरे खेतो को , अपनी खूबसूरत आँखों से निहार रही थी , खेतो से अति भीनी भीनी खुशबु , उसके मन को इक सकूं दे रही थी , इक ठंडक से मिल रही थी उसे , गाओं की खुली ताज़ा हवा में साँस लेना , उफ़ इस से जायदा सकूं कही और नै ,

"ओह्ह हो , मेरी मिथु अभ क्यों नाराज़ है , 4 दिन बाद हमारी सगाई है..." रवि अभी बोल hi रहा था के सोनल बेच में बोल पढ़ी ,

"ाचा जी , शुक्र है भगवन का , आपको यद् तोह है ..."

"मिथु , यद् है , अछि तरह से यद् है , अभ इतनी खूबसूरत लड़की को कैसे खो दू , उफ़ में तोह दिन काट रहा हु , कब अप्प हमारी बहु में , हमारे निचे होंगी.." रवि मुस्करा कर बोलै ,

"शी शी गन्दी बतिअन नयी , मिथु हम कल शॉपिंग करने जा रहे हैं , और हम चाहते हैं , हमारी सगाई की ड्रेस अप्प पसंद करो ..."

"और , और , मेरी मिथु चाहती है , के में कल उसके पास आयु , यही न..." रवि ने पीछे पलट कोमल को इशारा किया , वोह गाड़ी के हॉर्न मर रही थी , तेन की घर के लिए निकल सके ,

"हांजी , क्या अप्प ा सकते हो कल , और इक बात , कविता और सीतल भी अज्ज शाम को ा जाएगी , वोह भी मेरे साथ जाएगी , उनसे भी मिल लेना अप्प , अभ बताओ मिथु , अप्प ायोगे या नै..." सोनल ने बेहद खुश होते हुए बोलै ,

"मिथु , अप्प बस हुकम किया करो , हम आएंगे , जरूर आएंगे , पर , कुछ देना होगा आपको , कुछ मीठा ..." रवि ने मुस्करा कर बोलै , पर दिल में वोह कवी और सीतल को मिलने के लिए तड़फ सा रहा था ,

"मिथु , आपको मीठा मिल जायेगा , ाचा , यद् से कल 1 बजे घर ा जाना ..." सोनल ने अपने नरम लाल होंठो पर जीभ फिरा उनको गीला करते हुए बोलै ,

"वाओ मिथु , अभ तोह जरूर ायुगा , उम् अहह , आपके होंठो को चूस चूस कर लाल कर दूंगा , ाचा , bye मिथु..." रवि ने बेइंतहा खुश होते हुए बोलै ,

"bye मिथु..." सोनल भी हस्ते हुए बोली , सोनल ने फ़ोन कट कर पीछे देखा , उसके गाल शर्म से लाल हो गए , क्यों की , पीछे उसकी माँ कड़ी थी , यानि के सुमन चची , छोटी चची ,

"ओह्ह हो , रवि को मीठा खिलने की बात हो रही है..." सुमन चची ने सोनल के खूबसूरत चेहरे को इक हाथ से थोड़ा ऊपर उठा , उसकी आँखों में अखन दाल बोलै , सोनल ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,

"माँ , मुझे शर्म ा रही है..." सोनल ने बेइंतहा शरमाते हुए बोलै , और अपनी माँ के गले लग , अपना चेहरा उसके सीने में छिपाने लगी ,

"कोई न मेरा बचा , रवि तुम्हारी साडी शर्म उतर देगा , अभ चलो खाना खा लो..." सुमन ने बेहद हस्ते हुए बोलै ,

"माँ , क्या अप्प भी..." सोनल अपनी माँ की बहु से निकल चाट से निचे भाग गई , उसे बहुत शर्म ा रही थी , "पगली कही की..." सुमन मुस्करा कर खुद से hi बोली और सोनल के पीछे पीछे , चाट से निचे चली गई ,

वही अभ...

रवि , सोनल से बात कर , गाड़ी में बेथ गया , स्कार्पियो गाड़ी थी , तोह बैठने में कोई परेशानी नै थी , अभ कोमल ड्राइव कर रही थी , उसके साथ ख़ुशी बैठी थी , पीछे की सीट पर अभ , सैर , बेच में रवि , फिर रवि के साथ प्रिय बैठी थी , और सबसे पीछे रमा दोनों बचो को लेकर बैठी हुई थी , पर मुसीबत यह थी वोह अभ भी खा रही थी , लगता था , जादूगरनी को बहुत वख्त बाद इतनी भूख लगी थी ,

"भइआ किसका फ़ोन था..." कोमल ने गाड़ी ड्राइव करते हुए पूछा ,

"जणू , सोनल का फ़ोन था , वोह कल शॉपिंग करने जा रही है..."

"और सोनल देदी चाहती है , अप्प वह उसके पास ायो..."

"हम्म.." रवि बेहद खुश होते हुए बोलै , उसे ख़ुशी थी , उसकी कोमल , उसके दिल की हर बात बिना बोले जान लेती थी ,

"तोह भइआ अप्प चले जाना , अरे यद् आया , मुझे और सीमा देदी को भी थोड़ी शॉपिंग करनी है , हम दोनों भी आपके साथ चलेगी..." कोमल ने उस छोटे से मिरर में देखते हुए , अपने भाई से अपनी अखन मिला कर बोलै ,

"वाओ , यह तोह बहुत अछि बात है , खुशु मेरी बात सुनो..." रवि ने पहले कोमल और फिर ख़ुशी की तरफ देख कर बोलै ,

"हम्म , बोलो सुन रही हु..." ख़ुशी ने पीछे की तरफ अपना चेहरा करते हुए बोलै , अज्ज ख़ुशी सच में बहुत खुश थी ,

"वोह खुशु , तुम इक बार हवेली जा एना ..."

"नयी , मुझे कही नै जाना , रवीए , अभ में कही नै जाना चाहती , में तुमसे इक पल भी दूर नै रह सकती , अगर , अगर , उन लोग ने मुझे पकड़ लिया तोह..." ख़ुशी ने बेहद चिंता में बोलै , उसके मन में इक अनचाहा दर था ,

"में हु न , तोह चिंता किस बात की , खुशु , तुम्हारी माँ बहुत बीमार है , राजेश सर ने कल मुझे बोलै भी था , के में तुम बता दू , पर में भूल गया , हॉशह्ह्ह , खुशु अपनी माँ को इक बार मिल ायो , प्लस..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै , उसे अपनी माँ की यद् ा गई थी , रवि ने अपनी माँ से आखरी बार , तब बात की थी , जब वोह सीमा के साथ , अपनी माँ और रमा को गाओं से शहर लाया था , (फर्स्ट part का लास्ट अपडेट)

उफ़ कितने साल गुजर गए , रवि ने अपनी माँ को वचन दिया था , के जब तक वोह कुणाल को मर नै देता और अपने मां से अपनी खोयी हुई जमीन वापिस नै प् लेता , वोह तब तक अपनी माँ से कोई बात नै करेगा , इक और वचन जो उसकी माँ ने लिया था , वोह वचन यह था के कोमल को दंड कर वापिस लाना और रमा को पहले जैसे ठीक कर देना ,

रवि ने ें बीते सालो में हर वचन पूरा कर दिया था , उसने कुणाल को मर दिया था , कोमल को दंड लिया था , रमा भी पहले जैसे ठीक हो चुकी थी , अभ इक hi काम रह गया था , पर वोह काम रवि अभ नै करना चाहता था , वोह आखरी काम यह था के रवि अपने मां से बदला लेता ,

रवि जनता था , उसके मां बहुत लालची इंसान हैं और उसकी ममी भी , रवि चाहता तोह कब का अपने मां को वदेश से बुला , इक ाचा सबक सीखा देता , पर रिमी और शूरति का अपने लिए इतना प्यार देख , उसने अपने मां को माफ़ कर दिया था , रिमी और शूरति ने अपने पूरे जीवन में , बस उसे hi प्यार किया था , उसके लिए सुहाना के हर जुल्म सेहती रही , जब सुहाना से ख़ुशी उनको बचा कर लायी थी , उफ़ उनकी हालत देख , रवि का दिल रो पढ़ा था , रवि उस दिन समाज गया के उसकी बहाने उसे किस हद तक प्यार करती हैं ,

इस लिए अभ रवि ने अपने मां से बदला लेने के ख्याल छोड़ दिया था , वोह नै चाहता था , रिमी और शूरति को बुरा महसूस हो या दोनों को कोई दुःख पहुंचे , अभ बस रवि इक बार अपनी माँ से मिलना चाहता था , उसकी गॉड में सर रख बेइंतहा रोना चाहता था , बचपन से लेकर अभ तक , रवि ने अपनी माँ से जायदा बात नै की थी , क्यों , क्यों की बचपन में hi उसके पिता मर गए , घर की जिम्मेदारी उस पर ा गई , फिर रवि बचा न रहा , उसका बचपन ** साल की उम्र में hi ख़तम हो गया , तब से लेकर अभ तक रवि कभी सकूं से नै बैठा , वोह बस काम करता रहा , इक मज़दूर बन गया , उसकी मुस्कान , उसकी हर ख़ुशी , सब जैसे कही लुपत सी हो गई , जिम्मेदारी के बोझ थाले दबा रवि , बेहद मुश्किल से 2 वख्त की रोटी कमा पता था ,

उसने खुद सुखी रोटी खायी , अपनी माँ और बहनो को ाचा खाना दिया , खुद धुप में सड़ता रहा , अपनी माँ और बहनो को कभी धुप में पेअर न रखने दिया , कोमल को अछि शिक्षा दी , पर कभी माँ का प्यार न प् सका , रवि का दिल जलता था , दिल में दर्द होता था , वोह बस अपनी माँ की आवाज़ सुन्ना चाहता था , बस माँ का प्यार चाहता था , दो पल का प्यार ,

"उफ़ रवि कहा खो गए , ाचा ठीक है , अगर तुम कहते हो तोह जरूर जोगी , अभ मुस्करा भी दो , तुम मेरे बेवकूफ हो , में तुम्हारे लिए अपनी जान दे सकती हु..." ख़ुशी ने रवि का उदास चेहरा देख , बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"ओह्ह जणू , थैंक्स..." रवि ने ख़ुशी का हाथ अपने हाथ में ले , उसे चूमते हुए बोलै ,

"भइआ , अप्प रहते कहा हो..." सैर ने अपने भाई के कंधे पर सर रख , बेहद धीमी आवाज़ में बोलै ,

"ओह्ह देदू , में वंश जंगल में रहता हु , वह इक कबीला है , उन कबीले वालो के साथ hi रहता हु ..." रवि ने सैर का हाथ अपने हाथो में लेते हुए मुस्करा कर बोलै ,

"भइआ , क्या , वह , वह , सच में कोई कबीला है , वाओ , में बहुत खुश हु , थैंक्स भइआ , उमा..." सैर कबीले के बारे में सुन बेइंतहा खुश होते हुए रवि के गाल को चूमते हुए बोली ,

" और में भी बहुत खुश हु..." प्रिय भी अपने भाई रवि का गाल चुम कर बोली ,

"ओह्ह अज्ज में भी खुश हु , अज्ज मेरे पास मेरे इतने चाहने वाले हैं , जब पिता जी गुजर गए थे , तब मुझे लगा मेरा जीवन बस गाओं के खेतो तक hi सिमट जायेगा , हॉशह्ह्ह पर अज्ज मेरे पास सब कुछ है..." रवि ने बेहद नाम आँखों से सैर और प्रिय दोनों को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"भइआ उदास नै होना , हम हमेशा आपके पास hi रहेगी , अभ मुस्कराओ , हम्म , यह हुई न बात..." प्रिय ने मुस्कराते हुए बोलै तोह रवि भी मुस्कराने लगा ,

"कोमल मुझे अग्गे उतर देना , मुझे अनु के पास जाना है , थोड़ा काम है , में बेबी और काट के साथ ा जाउगा , तुम ध्यान से घर पहुँच जाना..." रवि ने ारवती नगर में एंटर होते hi , गाड़ी रुकवाते हुए बोलै ,

"जी भइआ , अप्प जल्दी ा जाना..." कोमल ने गाड़ी रोकते हुए , पीछे पलट कर , अपने भाई की आँखों में अखन दाल बोलै ,

"हम्म , जरूर..." रवि इतना बोल , सबको bye बोल गाड़ी से निचे उतर गया , रवि ने निचे उतर , बेबी को फ़ोन कर दिया , क्यों की 2 बज चुके थे , रवि ने बेबी को सीधा अनु के ऑफिस ऐनी का बोल दिया और खुद इक टैक्सी ले , अनु के ऑफिस की तरफ चल पढ़ा ,

ारवती नगर , इस शहर के बेचू बेच था , यहाँ रवि अभी जा रहा था , वैसे यह शहर था भी बेहद बड़ा ,

करीब आधे घंटे बाद रवि ारवती नगर के बेचू बेच गाँधी चौंक में पहुँच चूका था , गाँधी चौंक से राइट को जाती रोड पर अग्गे की तरफ बढ़ने लगा , यह काफी भीड़ वाला एरिया था , इस लिए रवि गाड़ी धीरे धीरे चला रहा था ,

करीब आधे घंटे बाद , रवि इक क्लब के सामने आकर रुका ,

फिर रवि की नज़र क्लब के साथ वाली बिल्डिंग पर गई , रवि उस बिल्डिंग में घुस गया , और लिफ्ट से ऊपर जाने लगा , 10 मंज़िला इस बिल्डिंग पर रवि को 5 फ्लोर पर जाना था ,

कुछ hi पल बीते होंगे , रवि अनु के फ्लैट की बेल्ल बजा रहा था , कुछ देर बाद इक लड़की ने दरवाजा खोला , अभ 2:40 मिंट हो चुके थे , मतलब रवि पूरे 40 मिंट लेट आया था ,

"त्रीनगगगग तृंणगगगग..." रवि ने कई बार दुर्बल बजे तोह आखिर अनु ने दरवाजा खोल hi दिया , वोह बिना रवि को देखे , वापिस पलट कर फ्लैट के हॉल में चली गई ,

"उफ़ ओह अनु , क्या हुआ जणू , अनु मेरी बात तोह सुनो..." रवि मुस्कराते हुए अनु के पीछे पीछे घर के हॉल में ा गया , और अनु के साथ hi सोफे पर बेथ गया ,

"हूँ , कोई बात नै , में तुम्हारे लिए जूस लती हु..." अनु वैसे hi नाराज़गी में बोली , और उठ कर किचन की तरफ चला पढ़ी ,

"उफ्फ्फ अनु भी न..." रवि अपने माथे पर हाथ मर बोलै , तभी उसका फ़ोन बज उठा ,

"हलो..." रवि ने बिना नंबर देखे फ़ोन उठा लिया ,

"हाँ बाबू , हम कबीले से निकल चुके हैं , में , काट , लारा , एलिज़ाबेथ , हम 1 घंटे तक ा जाएगी , तुम कहा हो..." बेबी ने गाड़ी ड्राइव करते हुए मुस्करा कर बोलै ,

"बाबू में अनु के पास हु , तुम सब ा जाओ..."

"ोकक , bye बाबू..." बेबी ने इतना बोल फ़ोन कट कर दिया , अभ रवि के पास बहुत वख्त था , और सुबह से वोह बहुत गरम भी हो चूका था , रवि ने उठ कर , पहले मैं गेट को अचे से लॉक कर दिया और फिर किचन में पहुँच गया , यहाँ अनु फ्रूट्स कट कर रही थी तेन जूस बना सके ,

"ोुछःह माँ..." अनु के गुलाबी होंठो से इक सिसकी निकल गई , जब रवि ने उसे इक डैम से आकर अपनी बहु में भर लिया ,

"अह्ह्ह अनु..." रवि ने अनु को पीछे से अपनी बहु में भर , उसकी गर्दन को चूमते चाट ते हुए सिसक कर बोलै ,

रवि का कड़क मोटा लम्बा लुंड , अनु के गुदाज़ मोठे चोदे चूतड़ों पर घिस रहा था , अनु ने ब्लू जीन पेण्ट पहनी थी , उसकी गदरायी गांड बहार की तरफ उठी हुई थी , रवि के दोनों हाथ अनु की कमर को सेहला रहे थे , अनु ने इक वाइट टॉप पहना हुआ था , उसके मोठे कैसे हुए चुके बेहद खूबसूरत दिख रहे थे , अनु के मोठे मोठे गोल गोल कैसे हुए चुके , किसी का भी पल भर में पानी निकल दे ,

"अह्ह्ह मेरी जानू , नाराज़ है मुज़से..." रवि ने इतना बोल , अपने हाथ अनु के मोठे मोठे गुब्बारे जैसे पहले चुचु पर रख , उनको कास कर दबा दिया , उफ़ अनु के गदराये दूध रवि के दबाते हुए , अंदर की तरफ डाब गए , चुचु का नरम मास्स रवि की उंगलियों में पिस्ता चला गया , रवि धीरे धीरे अपने दोनों हाथो से अनु के दिलकश गदराये मम्मो को दबाने लगा ,

"अह्ह्ह्ह रवीए..." अनु की मज़े में अखन बंद हो गई , वोह अपनी मोती गांड को रवि के लुंड पर घिसने लगी , उसे इक मीठा मीठा दर्द होता जब रवि उसके 36 साइज के मोठे चुचु को कास कास कर मसलते हुए दबाता ,

रवि ने अनु की गर्दन को चूमते चूमते , उसके मस्त मम्मो को मसलते मसलते , अपना इक हाथ निचे कर , अपनी पेण्ट की जीप खोल , अपना 8इंच लम्बा लुंड बहार निकल , अनु की गदरायी गांड पर दबा दिया , और हलके हलके ढके जड़ने लगा ,

"उम् अह्ह्ह्ह सीई..." अनु नंगे लुंड को अपनी गांड पर महसूस कर , मदहोश सी हो गई , उसने किचन की शेल्फ पर अपने दोनों हाथ रख दिए , और थोड़ा सा निचे झुक गई , उफ़ उसकी गदरायी गांड थोड़ी सी ऊपर को उठ गई , ऐसा लग रहा था , जैसे अनु घोड़ी बन गई हो ,

"अह्ह्ह अनु तुम्हारी गांड..." रवि अनु के मोठे मोठे गुदाज़ चूतड़ों पर लुंड के तेज़ तेज़ ढके जड़ता हुआ सिसक कर बोलै , उफ़ जैसे hi रवि का कला लुंड , अनु के चूतड़ों पर जोर से लगता , तोह चूतड़ों का नरम मास्स अंदर की तरफ डाब जाता , इतने नरम चूतड़ , उफ़ रवि को लगा , अनु की गुदाज़ गदरायी गांड , उसका ऐसे hi पानी निकल देगी ,

रवि ने अनु को काढ़ो से पकड़ , अपनी तरफ घुमा लिया , उफ़ वासना में डूबी अनु का चेहरा देख , रवि मदहोश सा हो गया , अनु की अखन अध् खुली थी , जैसे उसने खूब नशा किया हो , गुलाबी होंठ कंपकपा रहे थे , अनु ने अध् खुली आँखों से रवि को देखा , जब उसने पाया के रवि उसे घोर घोर कर देख रहा है , तब उसके गोर गाल शर्म से लाल हो गए , उसने अपनी अखन ज़ुका ली ,

"अनु ी लव ु..." रवि ने इतना बोल , अपने होंठ अनु के होंठो पर रख दिए , रवि धीरे धीरे अनु के लाल लाल होंठो को चूसने लगा , उफ़ अनु के शरबती होंठो में इक नशा सा था , रवि पोरे शिदत से कास कास कर अनु के होंठो को पूरा मोह में भर भर कर चूस रहा था , रवि का लम्बा लुंड , अनु की पेट पर घिस रहा था , जिसे अनु भी महसूस कर रही थी , उसकी कमसिन छूट खूब गीली हो चुकी थी , अनु अपनी जांगू को आपस में रगड़ते हुए , अपनी छुडासी छूट की खुजली को काम करने की नाकाम कोससिह कर रही थी ,

"उम्म्म सुररपपपप सुररपपपपप..." रवि , अनु के नशीले नरम होंठो को खूब कास कास कर चूसते हुए , उसके कैसे हुए चुचु को इक हाथ से मसल रहा था , अनु के गदराये चुके रवि के हाथ में नै समां प् रहे थे ,

"उम् सीईई..." अनु सिसक उठी , जब रवि ने उसे अपने सीने से लगा , उसके होंठो का रास निचोड़ते हुए , उसके गदराये चूतड़ों को अपने हाथो में भर , खूब कास कास कर मसलना सुरु कर दिया ,

अनु का मोह खुल गया , उसे मीठा मीठा दर्द होने लगा , रवि ने अनु के होंठो को कास कास कर चूसते हुए , अपनी जीभ अनु के मोह में घुसा दी , उफ़ रवि की जीभ अनु के मोह का कोना कोना तलाशने लगी , अनु की जीभ से लड़ने लगी , दोनों की जीभ आपस में उलज़ते हुए , इक दूसरे को कसने लगी , रवि के हाथ अनु के चूतड़ों को ात्ते की तरह घुट रहे थे , रवि जैसे hi अपने हाथो को खोल कर मुठी भरता , उफ़ उसके बंद मुठी में चूतड़ों का नरम मास्स भर जाता ,

करीब 10 मिंट रवि ने अनु के गुदाज़ मस्त गदराये चूतड़ों को खूब मसलते हुए , कास कास कर दबाते हुए , उसके लाल लाल होंठो का पूरा रास निचोड़ डाला ,

"ाहीयानंन्न ाहीयानंन्न..." रवि से अलग होते hi अनु अपने सीने पर हाथ रख , तेज़ तेज़ हाफने लगी , उसके नरम होंठ थोड़े सूज गए थे , उसे अपने होंठो में थोड़ी जलन सी हो रही थी , वोह रवि की मर्दानगी की कायल हो चुकी थी , उसकी छूट खूब छुडासी होकर पानी छोड़ रही थी , छूट से रिस्ता पानी जांगू को गीला कर रहा था ,

"हाय अनु , तेरे होंठ बहुत मीठे हैं , उम् मज़ा ा गया , अनु तुम इतनी हॉट क्यों हो..." रवि ने अनु को गॉड में उठा , किचन से बहार एते हुए , अनु के होंठो को चूमते हुए बोलै , अनु कुछ न बोली बस मुस्कराने लगी वोह ,

"बोलो न जान , तुम्हारी छूट में लुंड घुसा दू..." रवि ने अनु को इक रूम में लेजा , बीएड पर निचे लिटा , उसके ऊपर लेट ते हुए बोलै ,

"अनु.."

"हूँ..."

"तुम नंगी कर लू..." रवि ने अनु के गुलाबी होंठो को चुम कर बोलै ,

"मुझे नै पता अह्ह्ह सीई..." अनु ने बेहद शरमाते हुए सिसक कर बोलै , क्यों की रवि उसके मोठे चुचु को मसल रहा था ,

"अनु , बोलो न , तुम्हारी छूट छोड़ लू , यह देखो अनु , मेरा लुंड कैसे तड़फ रहा है , देखो न..." रवि ने अनु का नरम हाथ अपने काळा मोठे लुंड पर रखते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्ह रवि , वोह ा जाएगी उम् फिर कर लेना..." अनु ने बेहद शरमाते हुए , रवि के लुंड को अपने नरम हाथ में सहलाते हुए बोलै , उसकी सांसे तेज़ हो चली थी , वोह लुंड की लम्बाई मोटाई मैप रही थी , उफ़ रवि का लुंड उसके नरम हाथ में बेहद विशाल और ब्यांक लग रहा था ,

"अहह बस 10 मिंट , तुम कपडे मत उतरना , जल्दी जल्दी कर लेंगे..." रवि ने अनु के गुलाबी होंठो को बार बार चूमते हुए बोलै ,

"अनु , बोलो न..."

"अह्ह्ह्ह रवीए..." अनु शरमाते हुए बस इतना hi बोल पायी , और रवि के लुंड को कास कास कर मसलने लगी , रवि समाज गया के अनु त्यार है , बस शर्मा रही है ,

रवि जनता था , उसके पास वख्त काम है , बेबी और बाकि सब , बस ऐनी hi वाली है , पर रवि , अनु को बहुत प्यार देना चाहता था , अनु ने उसका बहुत इंतज़ार किया था ,

रवि ने अनु की पेण्ट का बटन खोल , उसकी पेण्ट को निचे खींच दिया , उफ़ अनु की पेण्ट उसकी जांगू पर खूब टाइट थी , रवि ने बड़ी मुश्किल से अनु की पेण्ट उसके घुटनो तक की , और फिर इक पेअर से पेण्ट निकल दी , अनु का इक पेअर अभ पेण्ट से बहार नंगा था और फिर पंतय भी खींच कर पेण्ट के पास hi पहुँच गई ,

रवि ने अनु की दोनों तंग को ऊपर उठा दिया , अनु के घुटने अभ उसके कण्डु को टच हो रहे थे , उफ़ अनु की कमसिन मुलाम छुडासी छूट अभ रवि की आँखों के ठीक सामने थी ,

"अह्ह्ह्ह रवीए शह्ह्ह्ह..." अनु के होंठो से इक सिसकारी निकल गई , जब रवि ने अपना चेहरा निचे कर , अनु की रास से लपलप भरी छूट को कुत्ते की तरह सुंगा ,

"अह्ह्ह्ह अनु..." रवि सिसक उठा , जब अनु की गीली छूट की खुशबु उसके नक् में घुसी , उफ़ रवि ने अनु के चेहरे को देखते हुए , अपनी जीभ को खूब सख्त कर , अनु की नरम मुलाम छूट के , मोठे मोठे होंठो के बेच फिरा दिया ,

"उफ्फ्फ्फ़ आयईईई मा..." अनु सिसकते हुए , अपना चेहरा बीएड पर ेहडेर ोहडेर पटकते हुए बोली ,

"उम् अनु तुम्हारी छुटत अह्ह्ह्ह..." रवि अभ खूब सुररपपपप सुररपपपप की आवाज़ करता अनु की गोरी छूट को ऊपर ऊपर से छत्ते जा रहा था , अनु खूब छुडासी होकर अपनी गांड ऊपर उठा उठा कर अपनी छूट रवि से चटवा रही थी , रवि अनु की जांगू को कास कर दबाये , उसकी छूट के होंठो में जीभ घुसा घुसा कर , उसकी छूट से बेहटा नमकीन मेथा पानी चाट रहा था ,

"अह्ह्ह्ह रविइइइइ अह्हह्ह्ह्ह मेरी अह्ह्ह्ह बस्स्स करूऊ अह्ह्ह प्लसससस और नई सहा जाता अह्ह्ह रविइइइइइ..." अनु मज़े में सिसकते हुए बीएड की चादर के हाथो में कस्ते हुए , अपनी कमसिन गदरायी छूट की चटाई से तंग एते हुए बोली , वोह कहना यह चाहती थी के रवि अपना कला किसानी लुंड दाल दो और फाड् दो इस शहर की कमसिन अकड़ू छूट को , पर शर्म के मरे उससे बोलै नै जा रहा था ,

"उम् अनु अह्ह्ह सूर्पपपपप उम् सुररपपपप..." रवि अनु की बातिओं को अनसुना कर , और भी कास कास , अनु की छूट को चूसने लगा , रवि अपने हाथो से अनु की छूट को पूरा खोल कर , उसके छूट के लाल नरम छेद में , जड़ तक जीभ घुसा , खूब कास कास कर , छूट से बहते पानी को चूसते हुए पे रहा था , उफ़ रवि ने छूट को चूस चूस कर लाल कर दिया था , रवि ऐसे छूट को चूस रहा था , जैसे बरसु बाद उसने कोई छूट देखि हो , रवि ने िका इक छूट के डेन को अपने होंठो में भर लिया , और खूब खींच खींच कर , दांतो में काट काट कर , अनु को जानत का मज़ा देने लगा ,

"अह्ह्ह्हह माआआआ अह्हह्ह्ह्ह मई मर्डर गाइइइइइइइ अह्ह्ह्हह्हह मेराआ पनीईई...." अनु ने अपनी गांड खूब ऊपर उठा , जोर जोर से चीखते हुए बोलै , अनु का शरीर पूरा अकड़ सा गया , वोह जटके कहते हुए जड़ने लगी , उसकी छूट से रास की धरा बहने लगी ,

"अह्ह्ह अनु..." रवि और भी तेज़ तेज़ अनु की छूट को चूसने लगा , अनु के जड़ते hi , रवि उसकी छूट से बहते रास को , सुरररपपपपप सुररपपपप की आवाज़ करते चाटने लगा , इक बूँद पानी की निचे न गिरी , रवि ने इतनी शिदत से अनु की छूट को चूसा , पिछले 10 मिंट ने रवि लगातार अनु की मुलाम नरम छूट को छत्ता जा रहा था , अनु की गदरायी फूली हुई छूट अभ लाल हो चुकी थी , रवि ने अनु की छूट को इतना कास कास कर चूसा था के , इक बार को अनु को लगा , उसका पिशाब न निकल जाये , रवि ने छूट चाट चाट कर , अनु की हालत भिगाड दी थी ,

"कैसा लगा मेरी जान..." रवि ने अनु के ऊपर ा उसके चूसै से लाल होंठो को चूमते हुए बोलै , तोह अनु ने तेज़ तेज़ हफ्ते हुए , शर्मा कर अपनी अखन बंद कर ली ,

"त्रीनगगगग ट्र्रियन्णगगगगग..." अभी रवि कुछ और करता , तभी दरवाजे की दुर्बल बज उठी ,

"उफ्फ्फ बहनचोद छोड़ने भी नै देते..." रवि बेइंतहा गुस्से में चीख कर बोलै , और फिर उठ कर अपने कपडे ठीक कर बहार चला गया , अनु , रवि के जाते hi हसने लगी , और उठ कर अपनी छूट पर अपना नरम हाथ फिरते हुए खुद से hi बोली..." उफ्फ्फ बच गई अनु , अह्ह्ह्हह रवि ने चाट चाट कर मेरी छूट सज़ा दी , उफ्फ्फ रावी सच में तुम बहुत बड़े छूट चटोरे हो..." अनु बेइंतहा हस्ते हुए उठी और अपने कपडे ठीक करने लगी ,

वही रवि ने बहार आकर , मैं गेट खोल दिया , रवि इक पल के लिए खुश हुआ और इक पल के लिए उदास भी , खुश इस लिए हुआ , क्यों की बेबी आयी थी , और उदास इस लिए , के अभ वोह अनु को छोड़ नै पायेगा , पर उसने इक रास्ता सोच लिया था ,

"अरे बाबू , इतनी देर , क्या कर रहे थे..." बेबी फ्लैट के अंदर एते हुए बोली , उसके पीछे पीछे काट , लारा और एलिज़ाबेथ भी अंदर ा गई ,

"हाँ , बताओ न , रावी जी , अप्प क्या कर रहे थे..." लारा ने भी मुस्कराते हुए बोलै , वोह सब सोफे पर बेथ चुकी थी ,

"kk..kk...kk..kuch nn..nn..naii.."ravi हकलाते हुए बोलै तोह सब हसने लगी , काट बस रवि के चेहरे को hi घूरे जा रही थी , उसे रवि की जुदाई बर्दाश्त नै हो रही थी ,

"अनु कहा है , अनु , अनु..." बेबी मुस्कराते हुए बोली और अनु को जोर जोर से आवाज़ देने लगी ,

"voh..v...vv...voh बेबी ा जाएगी वोह..." रवि , बेबी की आँखों में अखन दाल बोलै , उसका लुंड कल रत से खड़ा था , पहले कोमल ने उसे पूरी रत गरम किया , फिर गाड़ी में तीनो ने , और अभ अनु के साथ भी वोह अग्गे ने बढ़ पाया ,

"ोकक..." बेबी भी रवि के मन के हालत समज़ते हुए बोली ,

रवि अभ बेबी को देख रहा था , वोह बेबी के खूबसूरत दूध जैसे सफेद चेहरे को इक तक घूरे जा रहा था , और बेबी भी उसकी नज़रिओं को ताड चुकी थी , वोह भी रवि की आँखों में अखन दाल देख रही थी , उसकी नली नली आँखों में इक नशा था , बेबी और भी रवि को परेशान कर रही थी , वोह अपने लाल नरम होंठो को जीभ फिरा फिरा कर बार बार गीला कर रही थी तोह कभी निचले होंठ को दांतो में कास कास कर दबाते हुए काट रही थी , बेबी ने अपना इक हाथ अपनी जांगू के बेच रखा हुआ था , वैसे बेबी ने अज्ज इक ब्लैक पजामी सूट पहना हुआ था , उफ्फ्फ ब्लैक सूट में बेबी का गोरा बदन , ऐसा लग रहा था जैसे काळा अंधरे में चाँद निकल आया हो ,

"अप्प सब ा गई..." अनु ने मुस्कराते हुए सबकी तरफ देख कर बोलै , अनु की आवाज़ सुन सब उसकी तरफ hi देखने लगे , िका इक काट अपनी जगह से उठी और रवि के साथ आकर बेथ गई , इस सोफे पर 3 लोग बेथ सकते थे , पर अभी दो hi बैठे थे , रवि और उसके साथ काट , और उनके ठीक सामने , बेबी , लारा और एलिज़ाबेथ बैठी हुई थी , अनु वापिस किचन में चली गई , वैसे अभी भी अनु का शरीर कम्प रहा था , उसे ऐसा महसूस हो रहा था , जैसे अभ भी रवि उसकी छूट चाट रहा है ,

रवि थोड़ा हड़बड़ा सा गया , जब काट उसके साथ आकर बैठी , पर उसकी अखन अभ भी बेबी की आँखों से मिली हुई थी , तभी रवि चौंक सा गया , जब उसने काट के हाथ को देखा....



तो बे कुनिटेड.....[Friends sorry apke replys ke jawab na de paya , hamare pados me kisi ki death hui toh mera poora din vahi gujar gya , kal jawab dunga , or abh update daily aya karega , yeh part thoda lamba hai toh 6 months me complete ho jayega , kal rat ko esi wakht par update ayega... shukriya dosto... ]
 
अपडेट-131

अभ अग्गे...

रवि का लुंड कल रत से खड़ा था , पूरी रत कोमल की बहु में लेता , उस से प्यार करता रहा , पूरी रत रवि , बस कोमल के हसीं जिस्म को चूमता रहा , उसके होंठो का रास कास कास कर चुस्त रहा , कोमल दो बार रत को शांत हो गई , दो बार उसकी कमसिन मखमली मुलाम छूट ने अपना रास छोड़ा , पर रवि शांत न हो सका , क्यों , क्यों की , कोमल के साथ उसके जिस्मानी सम्बन्ध नै थे , और अज्ज गाड़ी में और फिर अभ अनु के साथ जो भी हुआ , उफ़ रवि पूरा गरम हो चूका था , वोह प्यासी नज़रो से बेबी को घर घर कर देख रहा था , ,

रवि अभी बेबी को इक तक घूरे जा रहा था , दोनों की अखन इक दूसरे को ताड रही थी , पर तभी काट ने अपना हाथ , रवि के हाथ पर रख दिया , रवि एकदम से हड़बड़ा सा गया , उसने काट को देखा , जो उसके चेहरे को देखते हुए मुस्कराये जा रही थी ,

"काट ..." रवि ने बेहद धीमी आवाज़ में बोलै ,

"रवीए..." काट आँखों में असनु भरते हुए , रवि के गले लग गई , उसके चोदे सीने में अपना चेहरा छिपाने लगी , अभ कही जाकर काट को इक सकूं मिला था , अभ कही जाकर काट का मासूम मन शांत हुआ था , अपने प्यार की बहु में , वोह सिमट सा गई , जैसे रवि उस से दूर जा रहा हो ,

"रावी , मेरी काट को प्यार दो..." बेबी ने वह से उठ कर , रवि और काट के साथ आकर बेथ ते हुए बोलै ,

"हम्म , में तोह प्यार करता हु काट से , पर काट hi मुज़से नफरत करती है..." अभी रवि बोल hi रहा था के बेबी बेच में बोल पढ़ी ,

"क्या , बाबू यह क्या बोल रहे हो अप्प..." बेबी ने आँखों में असनु भरते हुए पूछा ,

रवि की बात सुन काट भी थोड़ा पीछे हो गई , उसकी आँखों में बेइंतहा असनु थे , वोह भीगी भीगी आँखों में बेइंतहा मासूम लग रही थी , काट कभी बेबी को देखती तोह कभी रवि की तरफ ,

"हाँ , में सच बोल रहा हु , बेबी में इक डेविल हु , इक शेतें , इक बदसूरत लाल दरिंदा , उसदिन काट मुझे देख कितना दर गई थी , उफ़ काट की आँखों में अपने लिए मने , इक नफरत , इक घृणा के भाव देखे , बेबी , मेरा दिल किया , में मर hi जाऊ , बेबी , मेरी क्या गलती है , क्या पाप किया मने , बस प्यार hi तोह किया मने , उफ्फ्फ पिता जी ने कितनी बड़ी सजा दी मुझे , सब कुछ चीन लिया मुज़से , सब कुछ , अह्ह्ह्ह , बेबी , में काट से प्यार करता हु , पर , पर , काट डर्टी है मुज़से , मेरे इस बदसूरत रूप से , में काट को दुखी और इतना डरते हुए नै देख सकता , बस ऐसी कारन , में काट से दूर हु..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै , उसे खुद पर घिन सी ा रही थी ,

"ओह्ह नयी..." काट अपने कनु पर दोनों हाथ रख चीख उठी , वोह बेइंतहा रट हुए , सेड्यां चढ़ ऊपर की तरफ भाग गई , काट रट हुए फ्लैट की बालकनी में खड़े होकर , बिल्डिंग से निचे देखती हुई रोने लगी , उसने अपने दोनों हाथ बालकनी की लोहे (आयरन) की ग्रिल पर रख दिए ,

"रावी , बाबू यह क्या किया तुमने..." बेबी अपनी काट की दर्द भरी हालत सेह न पते हुए , बेइंतहा रट हुए बोली ,

"बाबू , वोह मेरे साथ खुश नै रह पायेगी , में डेविल हु , और काट की फितरत में नै के वोह डेविल से प्यार करे..." रवि अभी बोल hi रहा था के बेबी बेच में बोल पढ़ी ,

"ओह्ह शट उप , तुम , तुम , क्यों नै , समाज रहे , काट , वोह बहुत मासूम है , मर जाएगी वोह , मिट जाएगी , उसे प्यार दो बाबू , उसे प्यार दो ..." बेबी ने रट हुए रवि के सीने पर दोनों हाथो से पागलो की तरह मरते हुए बोलै ,

"रवि जी , बेबी सही बोल रही है , काट को अपना लो , प्लस..." एलिज़ाबेथ ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"हाँ , रवि जी , एलिज़ा ठीक बोल रही है..." लारा अपनी एलिज़ा का नरम गोरा हाथ अपने हाथो में लेते हुए बोली ,

"क्या हुआ , क्या बात है..." अनु किचन से बहार एते हुए बोली , उसके हाथ में इक ट्रे थी , वोह सबके लिए जूस बना कर लायी थी ,

"वोह , वोह , अनु , तुम इक मिंट बैठो , में अभी आया..." रवि बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै , और उठ कर सेड्यां चढ़ ऊपर काट के पास चला गया , बेबी , रवि को जाते देख , मुस्कराने लगी , बेबी को खुद पर नाज़ हो रहा था के उसने रवि को अपना हमसफ़र चुना , जो उसकी ख़ुशी के लिए कुछ भी करने को त्यार हो जाता था ,

रवि जब ऊपर रूम में पहुंचा तोह अंदर देखते hi , उसके होंठो पर इक मुस्कान फैल गई , रवि ने रूम के अंदर ज़क कर देखा , तोह उसे काट बालकनी में कड़ी दिखाई दी , उफ़ काट उसकी तरफ पीठ करे कड़ी हुई थी , उसने ब्लैक कपडे पहने हुए थे , उसकी कासी हुई पेण्ट में उसकी गदरायी गुदाज़ गांड , उफ़ रवि का लुंड , काट की मदमस्त मोती छोड़ी गांड को देख , पूरा तन कर खड़ा हो गया , रवि अग्गे बड़ा और काट के साथ खड़ा हो गया ,

काट ने वैसे hi रट हुए , आँखों में असनु भरे , रवि को इक पल के लिए देखा , पर फिर से रोने लगी ,

"बहुत उचाई है , देखो न , निचे लोग कित्नते छोटे छोटे दिख रहे हैं , उफ़ मुझे उचाई से बहुत दर लगता है , तुम नै लगता दर..." रवि ने बालकनी से निचे देखते हुए बोलै , उफ़ सच में उचाई तोह थी , काट ने रवि को देखा , पर फिर से वोह रोने लगी ,

"काट , निचे मत कूद जाना , में इतनी खूबसूरत लड़की को खोना नै चाहता , तुम , तुम , बेइंतहा खूबसूरत हो , ी लव उउउ..." रवि ने बिना काट को देखे इक लम्बी साँस भरते हुए बोलै , तोह काट रट रट मुस्कराने लगी , उफ्फ्फ सच में भेजी भेजी आँखों में , वोह बेहद कातिलाना लग रही थी ,

"कटत , उफ़ तुम सच में बहुत सेक्सी हो..." रवि ने िका इक काट को पीछे से अपनी बहु में भर , उसकी गर्दन को चूमते चाट ते हुए बोलै , रवि अपनी जीभ फिरा फिरा कर , काट की गोरी नरम गर्दन को चाट रहा था ,

"अह्ह्ह ससीईई..." काट का मखमली गोरा जिस्म कम्प सा गया , उसने अपनी अखन बंद कर ली और उस लोहे की ग्रिल को कास कर अपने हाथो में जकड लिया ,

"अह्ह्ह काट , इक बात पुछु..." रवि ने अपना लुंड पेण्ट के ऊपर से काट के मलाई जैसे नरम चूतड़ों पर दबा कर घिसते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्ह हूउउ..." काट ने लुंड की चुंबन को महसूस कर सिसकते हुए बोलै , उसकी सांसे तेज़ तेज़ चल रही थी , उसकी कमसिन छूट रास से भरने लगी थी ,

"तुम्हारी गांड इतनी मोती क्यों है , अह्ह्ह तुम्हारे चूतड़ इतने नरम नरम क्यों हैं , बताओ न काट , तुम्हारी गांड इतनी सेक्सी क्यों है अह्ह्ह..." रवि काट की कमर पर दोनों हाथ रख , उसे अपनी तरफ खींच , अपना सख्त खड़ा लुंड , काट की गदरायी गांड पर घिसते हुए बोलै ,

"उम् शठ मुझे नै पता अहह..." काट बेहद शरमाते हुए अपनी अखन बंद करते हुए मुस्करा कर बोली ,

"काट..."

"हुऊ..."

"तुम नंगी कर लू , इक बार अपनी कमसिन छूट दिखा दो , प्लस..." रवि ने अपना इक हाथ काट की जांगू के बेच रख , उसकी कमसिन फूली हुई छूट को खूब कास कास कर मसलते हुए बोलै ,

"ोुछःह तुम गंदे हो..." काट मज़े में सिसकते हुए बोली , उसकी गदरायी छूट खूब पानी छोड़ रही थी , छूट पानी से लपलप भर गीली हो चुकी थी ,

"ाचा जी , आपको भी गन्दी कर दू , आपकी छूट में अपना मोटा लुंड घुसा दू , बोलो न , आपकी छूट में अपनी जीभ घुसा , आपकी छूट को खूब कास कास कर चाट दू , काट ..." रवि ने काट को कंदो से पकड़ अपनी तरफ घूमते हुए , उसके खूबसूरत चेहरे को देखते हुए , उसकी आँखों में अखन दाल बोलै , तोह काट ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,

"हूँ ..." काट ने अखन झुकाये हुए बोलै ,

"इक बार दिखा दो अपनी छूट..." रवि ने काट के गोर गोर गालो को चूमते हुए , बेहद धीमी आवाज़ में बोलै , तोह काट रवि को ढाका दे , भाग कर बीएड पर गिर गई , वोह उलटी लेती , अपना चेहरा पिलो में छिपाने लगी , रवि ने मुस्कराते हुए रूम का दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया , और पलट कर , काट को देखने लगा ,

उफ़ कामर्स से भरी काट , बीएड पर उलटी लेती हुई , बड़ी कातिलाना लग रही थी , उसके कैसे हुए मोठे मोठे चुके बीएड पर दबे हुए थे , फिर उसकी पतली कमर और , फिर उसकी गदरायी गुदाज़ मोती छोड़ी गांड , उफ़ गोल मटोल गांड ऊपर की तरफ उठी हुई , बेहद सेक्सी लग रही थी , रवि को लगा उसका पानी ऐसे hi निकल जायेगा , रवि का दिल कर रहा था , अभी काट को नंगी कर , उसके नरम गदराये चूतड़ों को चुम ले , अपने हाथो से कास कास कर मसल डेल , अपने दांतो से चूतड़ों को काट काट कर लाल करदे , उसका दिल कर रहा था काट को घोड़ी बना , उसकी छूट में लुंड घुसा , उसे खूब हुमच हुमच कर , कास कास कर चोदे , उसके कमसिन चूतड़ों की खूब पिटाई करे ,

"अह्ह्ह कटत..." रवि ने जल्दी से अपनी पेण्ट और अंडरवियर उतर दिया , और अपने नंगे लुंड को , अपने हाथ में खूब मसलते हुए , काट के साथ लेट गया , रवि ने काट के कंडे पर हाथ रख , उसे सीधा कर , उसके कंपते नरम गुलाबी होंठो पर अपने होंठ रख दिए , उफ़ जैसे hi दोनों के होंठो का नरम मास्स आपस में मिला , दोनों के बदन में इक सुसुराहट से दौड गई ,

"अहह उम्म्म..." रवि धीरे धीरे बड़े प्यार से काट के होंठो को चूसने लगा , काट भी रवि के बालो में हाथ फिरती , उसका साथ देने लगी , "उम्म्म सूर्पपपपप surrrpppp.."ki आवाज़ ऐनी लगी , जब रवि खूब कास कास कर , काट के नरम होंठो को मोह में भर भर कर चूसने लगा , काट ने अपनी अखन बंद कर ली , उसे इक मीठा मीठा दर्द हो रहा था , उसके लाल लाल होंठो की अज्ज अचे से चूसै हो रही थी , दोनों माखन जैसे मुलाम होंठ , रवि के सख्त कैसे हुए होंठो में पिस्टे चले जा रहे थे , काट के होंठो पर इक लालिमा सी चा गई थी , रवि अपनी जीभ से काट के होंठो को चाट चाट कर खूब गीला करते हुए चूस रहा था ,

"अह्ह्ह रवीए शठ..." काट सिसक उठी , जब रवि ने उसके होंठो का रास निचोड़ते हुए , अपना हाथ उसके कैसे हुए मम्मो पर रख दिया , रवि धीरे धीरे गुब्बारे जैसे फूले मम्मो को धीरे धीरे दबाने लगा , सालो के वर्कआउट से काट के दोनों मम्मी , इक डैम कैसे हुए थे , गुब्बारे जैसे फूले हुए , 1% भी ढीलापन नै था , जैसे किसी पोर्न स्टार के मम्मी हो , खूब मोठे , फुटबॉल जैसे गोल गोल , नरम मास्स से लथपथ , इक डैम दूध जैसे सफेद , गोर चित्ते ,

"ओह्ह कटत , तुम नंगी कर लू..." रवि ने खूब कास कास कर काट के होंठो को चूसते हुए , उसकी वासना में लथपथ नशीली आँखों में देखते हुए बोलै , काट शर्मा गई , वोह कुछ न बोल पायी , पर उसकी छूट खूब गीली होकर , उसे परेशान करने लगी ,

"अहह मेरी कटत..." रवि को काट की मसोमीयत पर बहुत प्यार आया , वोह काट के मासूम गोर चेहरे को चूमने लगा , रवि ने फिर से काट के चूसै से लाल हुए होंठो को मोह में भर लिया , रवि का दिल किया , बस माखन जैसे नरम , शहद से मीठे होंठो को , ऐसे hi चुस्त रहे , बस चुस्त रहे ,

"ोुछःह नई..." काट सिसक उठी , जब रवि ने उसकी ब्लैक शिल्ट के बोटों खोल , उसके कमसिन मम्मो को नंगा कर दिया , अभ काट के दिलकश हसीं चुके , बस इक काली ब्रा में कैद दिख रहे थे , दोनों चुचु का आधा हिस्सा नंगा था , उफ़ इतने गोर चुके रवि ने कभी नै देखे थे , उफ़ 36 साइज के मोठे मोठे चुके देख , रवि का मोह पानी से भर गया , रवि ने िका इक काट की ब्रा भी खींच कर फाड् दी ,

"आईईईई माआ..." ब्रा फैट ते hi काट दर्द और मज़े में सिसक उठी , अज्ज वोह पहली बार किसी मर्द के सामने नंगी लेती हुई थी , उसकी छूट और भी गीली हो गई , छूट की खुजलाहट और भी बढ़ गई , काट अपनी मोती मोती जांगू को आपस में रगड़ने लगी , तेन की छूट की खुजली काम हो सके , पर रवि , वोह बस काट के फूले गदराये चुचु को hi घर घर कर देख रहा था ,

उफ़ मोठे मोठे गोल चुके , और चुचु के ऊपर दो गुलाबी खड़े निपल , उफ़ सच में काट किसी अप्सरा से काम नै थी , उसके तेज़ तेज़ साँस भरने से उसके चुके बार बार ऊपर निचे हो रहे थे , जैसे hi वोह साँस लेती , उसके चुके और भी फूल कर मोठे हो जाते , गुलाबी निपल और भी तन कर खड़े हो जाते ,

काट ने थोड़ी सी अखन खोल रवि को देखा , उफ़ उसे बेइंतहा शर्म आने लगी , वोह अपने चूसै से थोड़े सुज़े लाल होंठो को जीभ फिरा गीला करने लगी ,

"ववव कटत..." रवि अखन फाडे बस इतना hi बोल पाया , काट ने शरमाते हुए करवट बदल ली , लेकिन नुकसान तोह फिर भी हुआ काट का , उसके करवट लेते hi , उसके गुदाज़ गदराये चूतड़ रवि की आँखों के सामने ा गया ,

रवि ने इक हाथ काट के मोठे चोदे चूतड़ पर रख दिया , और उसे कास कर दबोचते हुए मसल दिया ,"ोुछहहह अह्ह्ह्ह" काट इक डैम से सिसक उठी , वोह फिर से सीधी हो गई और रवि की आँखों में देखने लगी , उसकी सांसे गन से निकली गोली से तेज़ चल रही थी , ऐसे लग रहा था , उसके गुदाज़ मोठे मम्मी फैट जायेगे , इतने तेज़ साँस लेने से ,

"कटत , दूध पीला दो..." रवि ने अपने होंठो पर जीभ फिरा काट के मलाई जैसे गोर मम्मो को इक तक घूरते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह पी लू..." काट बड़ी मुश्किल से यह दो शब्द बोल पायी , उसके गाल शर्म से लाल हो गए , उसने अपनी अखन बंद कर ली , उफ़ सच में वोह काम की देवी लग रही थी , मिया खलीफा जैसी लग रही थी , उसके मम्मी बिलकुल मिया खिलाफ के मम्मो जैसे थे , पर चेहरा मिया से कही जायदा गोरा था ,

"उम् सच में अह्ह्ह तुम्हारे दूध..." रवि पागल सा हो गया काट के गुलाबी होंठो से यह सुन कर , रवि ने अपना चेहरा निचे ज़ुका , काट के गोल गदराये मम्मो को जीभ फिरा चाट लिया "अह्ह्ह्ह सीईईई उफ्फफ्फ्फ़..." काट सिसक उठी , वोह अपना सर ेहडेर ोहडेर पटकने लगी , इतना मज़ा उसे कभी नै आया था , बेबी के साथ भी नै , उसका पूरा बदन कम्प सा गया ,

"अह्ह्ह काट अज्ज तुम छोड़ कर रहुगा उफ्फ्फ तुम्हारा सारा दूध निचोड़ दूंगा , मेरी देसी काऊ अहह ..." रवि काट के गोल मोठे मम्मो को चारो तरफ से चूमते , काट की आँखों में अखन दाल बोलै तोह काट ने शर्मा कर अपनी अखन बंद कर ली ,

रवि ने काट के खूब फूले हुए मोठे मम्मो के सख्त गुलाबी निपल को अपने होंठो में भर चूस लिया , "अह्ह्ह माँ शहहहहह..." काट का पूरा बदन अकड़ सा गया , उसे लगा उसका पानी निकल जायेगा , उसकी छूट पानी से लपलप भर सा गई , छूट का दाना फड़फड़ाने लगा ,

"थप्प्प्प थप्प्प्प्प रवीए , काट..." इक डैम से दोनों अलग हो गए , जब उनको बेबी की आवाज़ सुनाई दी ,

"शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह कोई मुझे छोड़ने भी देगा अज्ज अह्ह्ह ..." रवि गुस्से में बीएड पर हाथ मरता उठ कर खड़ा हो गया , काट उसकी यह हालत देख बेहद हसने लगी ,

"तुम बहुत हस्सी ा रही है शठ काट , मुझे प्यार करना है तुमसे..." रवि ने बेहद उदास सा होकर बोलै ,

"रवीए , घर पर कर लेना प्लस , यह जगह सेफ नै..." काट ने अपने कपडे ठीक कर , बेहद शरमाते हुए बोलै , छूट तोह उसकी भी गीली थी , छोड़ना तोह वोह भी चाहती थी , पर अभ क्या हो सकता था ,

"हम्म , तुम ठीक बोल रही हो..." रवि ने काट के होंठो को चूमते हुए बोलै और फिर रूम का दरवाजा खोल दिया , दरवाजा खुलते hi बेबी मुस्कराते हुए अंदर ा गई , उसने अंदर आकर देखा , उफ़ काट बीएड पर बैठी शर्मा रही थी , बेबी भी मुस्कराते हुए उसके पास पहुँच गई ,

"जणू , काम हो गया..." बेबी ने काट का हाथ अपने हाथो में लेकर बोलै ,

"ouu-huu.." काट ने बेहद मासूमियत से न में सर हिला जवाब दिया ,

"कटत , इतना टाइम था , तुम चाहे दो बार कर लेती..." बेबी , काट और रवि की तरफ देख कर बोली , रवि भी उनके पास hi बेथ गया था ,

"बेबी मत कहो न , मुझे शर्म अति है..." काट ने बेबी की बात सुन अपना चेहरा दोनों हाथो में छिपाते हुए बोलै ,

"रावी , तुम इक बार तोह कर लेते , क्या कर रहे थे इतने वख्त से..." बेबी ने रवि की आँखों में अखन दाल बोलै ,

"चूमा चट्टी बस यही..." रवि ने मुस्करा कर बोलै तोह बेबी हसने लगी , उसकी नली नली आँखों में इक नशा सा था , शयद वोह भी प्यार चाहती थी , और रवि भी यह बात महसूस कर चूका था ,

"हशह्ह्ह चले बहार , अनु कब से इंतज़ार कर रही है..." बेबी ने काट का हाथ पकड़ बीएड से उठ ते हुए बोलै ,

"बेबी इक मिंट , अज्ज रत को फर्जी को तुम सीमा के पास सुला देना..."

"क्यू..." काट ने नादानी में बोलै , रवि और बेबी हसने लगे , काट सच में नादाँ और मासूम थी ,

"अरे मेरी भोली काट , फर्जी के रहते , तुम काली से फूल कैसे बना पाउगा..." रवि अभी बोल hi रहा था के काट ने उसके कंडे पर प्यार से थपड जड़ दिया और बेइंतहा शर्माने लगी ,

"हहै , रवि पका न , प्रॉमिस करो , अज्ज काट को पूरी तरह अपना बना लोगे , रवि धीरे धीरे करना , कही काट की चखे सुन सब उठ न जाये..." बेबी ने बेहद हस्ते हुए बोलै ,

"बेबी तू कामिनी है इक नंबर की..." काट ने बेबी के गले लग , उसके सीने में अपना चेहरा छिपा कर बोलै ,

"अरे जणू , कल से मेरा दिमाग चाट गई हो , रवि मुज़से प्यार नै करता , रवि मुझे चाहता नै है , अभ रवि ने तुम अपना लिया है , तोह जणू तुम कुछ तोह देना होगा रवि को , डौगी न..." बेबी ने काट की आँखों में अखन दाल बोलै , तोह काट ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,

"बेबी रत को त्यार रहना तुम भी..." रवि बेबी के होंठो को चुम , रूम से बहार चला गया ,

"ओह्ह हूँ , बेबी जी , आपका भी नंबर लगेगा , मुझे लगा में अकेली हु , पर नै , मेरी जणू भी मेरे साथ hi , ओह्ह मुझे शर्म ा रही है , उफ्फ्फ जणू , रवि हम दोनों को इक साथ उफ्फ्फ्फ़ हम दोनों के साथ सेक्स करेगा , बेबी ी लव ू , और थैंक्स जणू..." काट ने पहले मुस्कराते हुए और आखिर में बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"ओह्ह जणू क्या हुआ ..."बेबी , काट को रोटा देख , उसके पूरे चेहरे को चूमते हुए बोली ,

"नै , वोह , वोह , मुझे कभी नै लगा था , मुझे अपने जीवन में इतना प्यार मिलेगा , मुझे लगता था , किसी न किसी गोली पर मेरा नाम लिखा होगा , और में ऐसे hi मर जोगी , पर तुमने , हाँ तुमने , बेबी तुमने , मुझे बदल दिया , ी लव उउउ ..." काट ने बेहद रट हुए , अपने बीते नाराज सामान जीवन को यद् करते हुए , बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"हम्म , जणू मुझे भी यही लगता था , मेरा जीवन बस लोग को मरते हुए , यु hi ख़तम हो जायेगा , पर जणू , भगवन सब देखता है , वोह इक मौका सबको देता है , और मुझे ख़ुशी है , मने भगवन के दिए मोके को खली न जाने दिया , उसदिन तुम हॉस्पिटल में चुम , तुम अपना बना लिया , हॉशह्ह्ह , अगर उस दिन वाशरूम में तुम न चूमती , अह्ह्ह शयद हम कभी इक न हो पति..." बेबी ने बेहद नाम आँखों से रट हुए बोलै , वोह भगवन को शुक्रिया ऐडा कर रही थी ,

"हाँ जणू , सच में , अगर तुम मुझे न चूमती तोह , अह्ह्ह्हह , थैंक ु जणू , मुझे अपना बनाने के लिए , मेरी बंजर वीरान जिंदगी में प्यार के फूल खिलने के लिए , मुझे फर्जी का प्यार देने के लिए , रवि को मेरे जीवन में लेन के लिए , तुम , तुम , इतनी अछि हो , और में , में पागल , तुम मरना चाहती थी , सॉरी जणू..." काट ने बेबी के चेहरे को पगलू की तरह चूमते हुए बोलै ,

"हहै , जणू बस करो , ायो निचे चले , कही वोह कमीना डेविल ा गया , तोह तुम यही लिटा कर पेल देगा..." बेबी , काट का हाथ पकड़ रूम से बहार जाते हुए बोली ,

"उफ्फ्फ बेबी , रवि ने मेरे होंठ निचोड़ डेल , अभी भी दर्द कर रहे ..." काट बेबी के साथ चलते हुए , अपने थोड़े थोड़े सुज़े होंठो को जीभ फिरा गीला करते हुए बोली ,

"हहै , अभी तोह रवि ने तुम्हारी मुलाम कमसिन छूट नै देखि , इक बार देख ली , तोह पूरी रत तुम्हारी छूट को चूस चूस कर लाल कर देगा , रिमी कहती है , रवि बहुत बड़ा छूट चटोरा है..." बेबी ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , तोह काट भी हसने लगी ,

"छूट चटोरा , मने पहली बार सुना है..." काट ने पागलो की तरह हस्ते हुए बोलै ,

"हाँ जणू , रवि छूट को चाट चाट लाल कर देता है , इक कला है उसमे , गाओं में जो मर्द छूट को चेतना पसंद करते हैं , जो छूट का रास चाट चाट कर पेट हैं , छूट के दोनों होंठो को खूब छोड़ा कर , अपनी जीभ घुसा , छूट को जीभ से छोड़ छोड़ , औरत को पागल कर देते हैं , उनको छूट चटोरा कहते हैं ..." बेबी ने काट को इक पल रुक कर समझा दिया , उफ्फ्फ बेबी की बात सुन काट बेइंतहा हसने लगी , उसकी छूट और भी गीली हो गई , वोह मन में सोच रही थी , रत को रवि सच में उसकी छूट को चाट चाट लाल कर देगा , ऐसा सोचते hi , काट मदहोश सी हो गई , उसकी अखन वासना के नशे में खूब नशीली हो गई ,

फिर काट और बेबी फ्लैट के हॉल में ा गई , यहाँ अनु उनका hi इंतज़ार कर रही थी , अनु ने सोफे से उठ हॉल की लाइट ऑफ कर दी , सामने दीवार पर लगे सफेद से परदे पर प्रोजेक्टर के थ्रू कुछ दिखने लगी , बेबी और काट भी रवि के साथ आकर बेथ गई ,

"अनु क्या दिखा रही हो तुम..." रवि ने सबकी तरफ से पूछ लिया , वैसे भी सब यही जानना चाहती थी ,

"ओह्ह हाँ रवि , इक मिंट बताती हु..." अनु इतना बोल , उस प्रोजेक्टर को ठीक करने लगी , अनु ने प्रोजेक्टर ों किया , तोह उसकी लाइट सीधे , उस सफेद परदे पर पढ़ने लगी और कुछ तस्वीरें (पिक्स) सबको दिखने लगी , सबकी अखन अभ उस सफेद परदे पर तिकी हुई थी ,

"हाँ तोह रवि , हमारे मिथली शहर में , पिछले 5 सालो में 11 बड़ी चोरियां हो चुकी है , इक चोर है , बेहद तेज़ , शातिर , कब अत है , कब जाता है , किसी को कनु कण खबर नै होती , यह है वोह चोर..." अनु ने उस परदे की तरफ देखते हुए , इक कक्तव फुटेज की तरफ इशारा करते हुए बोलै ,

"अनु , इसका चेहरा तोह दिख नै रहा..." रवि ने बड़े ध्यान से उस चोर को देखा , रवि को कुछ अजीब सा महसूस हुआ ,

"हमन , रवि , इस चोर को किसी ने नै देखा , बस इसका नाम पता है हम सबको..."

"क्या नाम है..." बेबी बड़े गौर से देखते हुए बोली ,

"असलम , असलम नाम है ..." अनु अभी बोल hi रही थी के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"और यह भी इस चोर ने खुद hi बताया होगा , है न..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै , उसने काट की तरफ देखा जो उसे hi इक तक घूरे जा रही थी , रवि ने अनु से बात करते वख्त , काट को आंख मर दी , काट ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली , वोह बेइंतहा मासूम और खूबसूरत लग रही थी ,

"हाँ , तुमने ठीक कहा , हासष्ठ रवि हमें इस केस को सोल्वे करना होगा , पर मुसीबत यह है , इसके बारे में हम कुछ नै जानते , पता नै कम्बख्त कहा से अत है , कहा चला जाता है , और पिछले कुछ महीनो से चुप भी है , खैर , वोह हमें पहले hi बता देगा , जब चोरी करेगा , पर उसे पकड़े कैसे..." अनु ने बेहद घम्बिर होकर बोलै ,

"हम्म , कोई प्लान सोचना होगा..." लारा सोफे से उठते हुए बोली ,

"क्या..." अनु , लारा की बात सुन थोड़ा चौंकते हुए बोली ,

"अनु , लारा ठीक बोल रही है , हमें इक प्लान बनाना होगा , और पुलिस को भी पूरा साथ देना होगा ..." रवि अभी बोल hi रहा था के अनु बेच में बोल पढ़ी ,

"रवि , तुम उसकी चिंता मत करो , पूरी शहर की पुलिस हमारे साथ है , बस इस कम्बख्त चोर को पकड़ना है , बहुत प्रेशर है ऊपर से ..." अनु थोड़ा उदास सा होकर बोली ,

"हम्म , तोह अनु , प्लान सुनो फिर..." रवि ने अनु को अपने पास बुला लिया और सबकी तरफ देख , अपना प्लान उनको सुनाने लगा , जैसे जैसे रवि बोलता गया , सबकी आँखों में इक चमक सी ा गई ,

"हस्ससहहहह , कैसा लगा प्लान..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै , तोह अनु ख़ुशी में चीखती हुई उसके गले लग गई , अनु बेतहाशा रवि के चेहरे को चूमने लगी ,

"वह रावी जी , बहुत ाचा प्लान है..." लारा अपनी एलिज़ाबेथ को देखते हुए बोली ,

फिर एलिज़ाबेथ ने अग्गे बढ़ लारा के होंठो को चुम लिया , अनु यह देख , रवि को देखने लगी ,

"यह 2 और प्यार के पंछी कहा से मिले तुम..." अनु ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"मेरी किस्मत hi ऐसी है..." रवि अपने कंडे उचकते हुए बोलै ,

"हम्म , पहले इक जोड़ा था , बेबी और काट , अभ इक और जोड़ा ले ए तुम , अभ दो जोड़े हो गए हमारे ग्रुप में , ऐसे कितने प्यार के पंछी है तुम्हारे पास..." अनु ने बुरा सा मोह बना बोलै ,

"हम्म , अनु , मेरे ख्याल से इंसान को प्यार करना चाहये , चाहे लड़की इक लड़की से करे , हासष्ठ बस लड़का इक लड़के से न करे , ी हेट Gay's , अहूऊऊ युकककक , ाचा , छोड़ो ें बातिओं को , हमारे ग्रुप का नाम क्या रखे ..." रवि ने अनु की आँखों में अखन दाल बोलै , अनु को वोह पल यद् ा गए , जब रवि ने उसकी टंगे उठा , खूब उसकी छूट को छठा था , उफ़ अनु के गाल शर्म से लाल हो गए ,

"अरे मने कुछ पूछा..." रवि अभी बोल hi रहा था के अनु बेच में बोल पढ़ी ,

"हूँ , लेस्बियन ग्रुप या प्यार के पंछी ..."

"शी सीई अनु..." रवि ने अनु के होंठो पर अपना हाथ रखते हुए बोलै तोह सब हसने लगे ,

फिर रवि ने कुछ देर और अनु से बतिअन की , और फिर अनु और बाकि सब के साथ , घर के लिए निकल पढ़ा , अज्ज का दिन ाचा गया था , रवि अपनी बहनो से मिल लिया था , सैर और प्रिय अभ ठीक थी ,

अभी शाम के 5 बज रहे थे , और अज्ज रत को रवि और ख़ुशी का मुकाबला भी होना था , मदिरा पीने का मुकाबला , पर कल रत सीमा ने उसे सजा सुनाई थी के अनु को वह लेकर ए , तेन की दोनों की लव स्टोरी सब जान सके , अनु ने पहले तोह मन किया , पर रवि की बात आखिर में उसे मन नई hi पढ़ी , वोह ख़ुशी ख़ुशी रवि के साथ चल पढ़ी , इक काम अज्ज रवि कर नै पाया था , वोह काम था dr.nelam से प्यार करना , रवि ने सोच लिया था , अभ कबीले में जाते hi , वोह सबसे पहले dr.nelam को मिलेगा , उससे प्यार करेगा , और रत को काट और बेबी को प्यार देगा , उफ़ रवि को इक पल का भी सकूं नै था , खैर देखो अग्गे क्या होता है...

तो बे कुनिटेड......
 
अपडेट-132



अभ अग्गे....

6तह part , फर्स्ट डे , शाम के 5 बजे...

रवि , बेबी , अनु , काट , लारा और एलिज़ाबेथ के साथ , अभ घर की तरफ जा रहा था , रवि का पूरा दिन बस भाग दौड में hi निकल गया था , लेकिन अभ , वोह घर जा रहा था , इंसान चाहे कितना भी थका हुआ क्यों न हो , कितना भी ढुकि हो , दर्द में डूबा हो , इस संसार में इक hi ऐसा स्थान है , जो उसे सकूं देता है , वोह है घर , इस संसार के हर जीव को प्यारा होता है , अपना घर ,

पंछी सुबह उड़द जाते हैं , खाने की तलाश में , पर शाम डालते लोट ात्ते हैं , वोह होता है घर ,

इक बाप सुबह काम पर जाता है , पूरा दिन ढके खा खा कर दो पैसे कमाता है , पर शाम डालते लोट अट्टा है , वोह होता है घर ,

इक बचा सुबह रोटा होता स्कूल जाता है , पर छुट्टी होते ख़ुशी ख़ुशी वापिस लोट अत है , वोह होता है घर ,

इक प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ , इक खुशनुमा जीवन की शुरुआत करता है , दोनों सकदु छोटे छोटे सपने देखते हैं , लेकिन वोह सरे सपने यहाँ सुरु होते हैं और यहाँ आकर ख़तम होते हैं , वोह होता है घर ...

खैर अभ सभी बिल्डिंग से बहार निकल ए थे , उनके पास 2 गाड़यां थी , वोह सब हस्ते मुस्कराते गाड़यों के पास पहुँच गए ,

"रविइइइइइइ..." िका इक चलते चलते रवि के कनु में इक आवाज़ गूंज गई , बेहद धीमी , जैसे कोई संसू में hi बोलै हो , रवि रुक गया और as-pas देखने लगा , रवि ने अपनी अखन बंद कर ली और उस आवाज़ को महसूस करने लगा "ओह्ह्ह्ह नूवो..." िका इक रवि का जिस्म कम्प गया , उसके माथे पर चिंता के भाव उमड़ ए , रवि को एहसास नै था , के इतनी जल्दी मुलाकात हो जाएगी , रवि को लगा था , अभी बहुत वख्त है ,

"अह्ह्ह्हू..." रवि िका इक चौंक सा गया , जब बेबी ने उसके कंधे पर हाथ रखा , उसे महसूस हो गया था , के उसका रवि किसी बात से बहुत अधिक परेशान है ,

"क्या हुआ बाबू..." बेबी ने रवि को उदास देख , खुद भी उदास होते हुए बोलै ,

"k..kk...kuchh..n..nn..naii..." रवि हड़बड़ाते हुए बोलै ,

"हूँ , अनु तुम सबको अपनी गाड़ी में लेकर चलो , में और रवि , मेरी गाड़ी में एते हैं..." अभी बेबी बोल hi रही थी के काट बेच में बोल पढ़ी ,

"जणू , में भी तुम्हारे साथ ा जाऊ , प्लस..." काट ने बेहद मासूमियत में बोलै ,

बेबी , काट के पास गई और उसके गले लग उसके कण में कुछ बोलै , और फिर उसके होंठो को चुम , रवि के पास लोट आयी , फिर अनु सबको गाड़ी में बिठा वंश जंगल की तरफ निकल गई , काट भी अनु के साथ चली गई ,

"हासष्ठ , चले बाबू..." बेबी ने मुस्करा कर बोलै , तोह रवि ने हाँ में सर हिला दिया , पता नै रवि ने क्या देखा था , किसे देखा था , इतनी चिंता रवि को पहले कभी नै हुई थी ,

फिर बेबी और रवि कार में बेथ गए , बेबी ड्राइव करने लगी और रवि उसके साथ बेथ गया , दोनों खामोश थे , जब गाड़ी शहर से बहार निकल आयी , तब बेबी ने बोलना सुरु किया ,

"बाबू , क्या बात है , अभ बताओ मुझे..." बेबी ने रवि के गाल को प्यार से सहलाते हुए बोलै ,

"नै बेबी कुछ नै , बस चाकर सा ा गया , ाचा , अभ तुम खुश हो , मने तुम्हारी काट को अपना लिया..." रवि ने बेबी की तरफ देख मुस्कराते हुए बोलै ,

"हम्म , बहुत खुश हु , इतनी खुश , के तुम बता नै सकती..." बेबी बेइंतहा ख़ुशी में चहकते हुए बोली ,

"हस्सश्ठ , जानती हो , मने काट को क्यों अप्प न लिया..." रवि ने बेबी की नली नली आँखों में ज़कते हुए बोलै,

"हम्म , क्यों की , तुम मुज़से प्यार करते हो , मुझे खुश देखना चाहते हो..."

"ouu-huu..." रवि ने मुस्करा कर न में अपना चेहरा हिला दिया ,

"तोह..."

"जूही जी , क्यों की , क्यों की , मुझे काट में निशा दिखाई देती है ..." रवि यह बोल बेबी की आँखों में देखने लगा , रवि की बात सुन , बेबी की अखन नाम हो गई , उसने गाड़ी इक तरफ रोक दी , उसे अपनी निशा की यद् सताने लगी ,

"हाँ बेबी , में निशा को कभी नै भूल पाया , jane-anjane में , मेरे कारन , निशा तुमसे दूर हो गई , में खुद को दोषी मंटा रहा , जब मुझे रिंग ने बताया के तुम hi जूही हो , तब मेरे दिल में इक अनचाहा दर्द हुआ , उफ्फ्फ पता नै , तुम इतना वख्त मेरे साथ रही , बिन निशा के , अपने हर दर्द को छिपा कर , झूठी मुस्कान लिए , इक इक पल जो हमने साथ में बिताया , मुझे महसूस हुआ , इक कमी है हम दोनों में , हम चाहे कितना भी इक दूसरे के करीब रहे , चाहे पूरी जिंदगी , पर हम दोनों जानते हैं , इक शक़श के बिना हम दोनों अधूरे हैं..." रवि दर्द में डूबा अभी बोल hi रहा था के बेबी बेच में बोल पढ़ी ,

"निशा के बिना..." बेबी ने निशा को यद् कर बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"हूँ , जब तुमने मुझे बताया था , के तुम काट से प्यार करती हो , बस तब से लेकर अभ तक , में काट में अपनी निठु को दंड रहा हु , में तुम दही कहता था और निशा को निठु..." जब रवि ने यह बोलै तोह दोनों रट हुए हसने लगे ,

"उफ्फ्फ , बाबू , निशा मेरे शरीर का आधा हिस्सा थी , तुम नै पता , उसके मरने के बाद , मने कितना दर्द भरा वख्त कटा , ढेड़ साल तक , में गुमसुम उदास , राशन को जगती रही , रोटी रही , चिलाती रही , न तुम मेरे पास थे और न मेरी निशा , में टूट का बिखर गई , उफ़ पर अभ मेरे पास तुम भी हो और मेरी निशा भी , रवि हमें परीक्षा देनी पढ़ती है , भगवन फालतू में कुछ नै देता..." बेबी ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"हूँ , जनता हु , जब मुझे तुम्हारी मौत के इलज़ाम में जेल हुई ..." रवि अभी बोल hi रहा था के बेबी बेच में बोल पढ़ी ,

"बाबू , मने सब पता किया , तुम बस 1 साल hi जेल में रहे , बाकि 4 साल , उफ़ बाबू तुमने वोह सब क्यों किया , जानते हो , अगर उन 4 सालो का , किसी को पता चला , और तुमने सकदु नए दुश्मन भी बना लिए , खैर यह इक राज़ hi रहेगा ..." बेबी मुस्कराते हुए बोली ,

"हम्म , जूही , वोह सब तुमने किया , तुमने मुझे जेल में डाला , और फिर तुमने hi बहार निकल लिया , उफ़ में जनता था , तुम जरूर समाज जोगी के मने निशा को नै मारा था..."

"हाँ रवि , मेरे पापा ने जब केस की अचे से इन्वेस्टीगेशन की , तब सब साफ हो गया , तुम निर्दोष थे , फिर मने पापा के साथ मिल , तुम जेल से बहार निकल लिया , फिर..."

"फिर सुरु हुआ इंतकाम , इक खुनी इंतकाम , फिर अगले 3 सालो में , मने तुम्हारे साथ , और तुम्हारे पापा के साथ मिल , Mr.X को फिर से जिन्दा किया , फिर हम दोनों से हमारी निशा को जुड़ा करने वाले , उस इक इक इंसान को , इतनी बुरी मौत मिली , के तुम्हारे शहर में नेव्स्पपेर्स और टीवी चैनल्स में , बस Mr.X के वहशीपन और दरिंदगी की ख़बरें hi गूंजती रही..." रवि ने उन पलु को यद् करते हुए बोलै ,

"हम्म , जूही और Mr.X , दोनों ने खून की नाड्यां बहा दी , उफ़ रवि , में कभी कभी सोचती हु , में जूही , उफ़ में कितनी नरम दिल थी , और वख्त ने मुझे hi कातिल बना दिया , उस कुत्ते रगाव और उसके भाई सनी को मर कर , हमने निशा की मौत का बदला ले लिया , हम दोनों ने नजाने कितने gangster's को मारा होगा , रवि मेरे शहर में hi नै , पूरे देश को बस तुम्हारी तलाश है , तुम इक मोस्ट वांटेड क्रिमिनल हो , हहै..." बेबी बेइंतहा हस्ते हुए बोली ,

"ः , हाँ जूही , पर , पर , वोह सब , मने तुम्हारे लिए और हमारी निशा के लिए किया , कितने केस चल रहे हैं , मुझ पर ओह्ह Mr.X पर..." रवि , बेबी का हाथ में लेकर उसे चूमते हुए बोलै ,

"हूँ , जब हम आखरी बार मिले थे , तब पापा ने बताया था , तुम पर 490 केस चल रहे हैं , हहै , बाबू , यह बात इक राज़ hi रखना , किसी को शक न हो तुम पर..." बेबी ने मुस्करा कर रवि के होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"हूँ , तुम जानती हो , जब तुम बिमान शाह के कब्जे में थी , और मने पाक़िआ को मर दिया , तब कोमल को मुझ पर शक हो गया , उफ़ बड़ी मुश्किल से मने उसे शांत किया , मने उसे उतना hi बताया जितना जरुरी था , मने उसे बोलै के जूही उर्फ़ निशा की मौत के बाद , मुझे 4 साल की जेल हुई , पर सच तोह हम दोनों hi जानते हैं , ः..." रवि ने बेहद हस्ते हुए बोलै ,

"हम्म , बाबू , बस वोह कुत्ता बच गया , वोह कुत्ता बिमान शाह , पर हासष्ठ , आखिर उसे भी मरना पढ़ा , वैसे बाबू , अगर रिंग न बताती , तोह अप्प कभी न पहचान पते के में hi आपकी जूही हु..." बेबी ने बेहद खुश होते हुए बोलै ,

"जूही , तुमने ाचा नै किया , तुम कहा चली गई थी , क्या तुम मुझ पर विश्वास नै था , फिर क्यों , क्यों , तुमने अपना चेहरा बदल लिया , और , और , तुम जब पहली बार मुझे मिली थी , बिमान शाह की बिल्डिंग के बहार , हैश्च , तब hi बोल देती , के तुम मेरी जूही हो..." रवि ने बेहद दर्द में बोलै ,

"बाबू , वोह बात नै थी , देखो बाबू , में तुम बिना बताये इस लिए गई , तेन की , उस बिमान शाह को दंड सकू , वोह कही चिप गया था , वोह तेज़ दिमाग जासूस था , मने अपना चेहरा बदल कर , उसे चकमा दे दिया , और गोवा की टॉप सुपारी किलर्स में से इक बन गई , हासष्ठ , और दूसरी बात , जब बिमान शाह ने मुझे यहाँ बुलाया , तुम मरने के लिए , उफ्फ्फ , में तुम देखते hi पहचान गई , जब हम दोनों ने रिमी को बचाया था , और रत को जंगल में रुके थे , पहले में तुम बताने वाली थी , के में hi जूही हु , पर फिर मुझे लगा , इस नए चेहरे के साथ , में तुम्हारे साथ इक नयी शुरुआत कर सकती हु , अगर तुम बता देती के में hi जूही हु , तुम फिर से खुद को निशा का कातिल मैंने लगते , बस ऐसी लिए नै बताया , देखो , निशा ने मरते वख्त मुज़से कहा था , के में तुम प्यार दू , तुम माफ़ कर दू , और बाबू , तुम मुझे वोह प्यार न दे पते , जो तुमने मुझे बेबी के रूप में दिया , ी लव ु बाबू ..." बेबी ने बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै , और रवि के गले लग गई , कुछ वख्त बेबी अपने बाबू के गले लगी रही , फिर दोनों घर की तरफ चल पढ़े ,

"शयद तुम ठीक बोल रही हो , पर , पर , तुम इक बार बता तोह देती , हासष्ठ , जानती हो , 1 साल तुम पता नै कहा चली गई थी , में फिर भी तुम्हारा इंतज़ार करता रहा , आखिर में पुजारी बाबा के बार बार जिद्द करने पर , में वापिस ा गया , और यहाँ एते hi मुझे सीमा मिल गई , उसके बाद कोमल और फिर तुम..." रवि ने मुस्कराते हुए उस वख्त को यद् कर बोलै ,

"बाबू , Mr.X इक राज़ hi रहे , बाबू , अभ हमारी इक बेटी है , उसकी नज़रिओं में , तुम इक अचे पापा banna.."baby ने फर्जी को यद् कर मुस्कराते हुए बोलै ,

"हम्म , मने हज़ारो लोग को मारा है , उन 3 सालो में , जूही , उस वख्त में सच मच इक डेविल बन गया था , उफ़ , में डेविल हु , और यह मेरी फितरत में समाया हुआ है , पर अपनी बेटी की नज़रिओं में इक ाचा पापा बनुगा , उफ़ काट सच में निशा जैसी hai..."ravi ने बेबी की आँखों में अखन दाल बोलै ,

"हूँ , तुमने सही कहा , रवि , काट से जब में पहली बार मिली गोवा में , उफ्फ्फ , वोह मुज़से इतनी नफरत करती थी के क्या बताऊ तुम , हहै , हर पल , हर लम्हा , काट बस मुझे मरने के सपने देखती रहती , और अभ , अभ बात बात पर रोने लग जाती है , बाबू , मने इक बार काट को चूमा , और वोह दीवानी हो गई मेरी , हहै , हासष्ठ , अज्ज भी सोचती हु , अगर उसे मने न चूमा होता , तोह शयद..."

"तोह शयद , हम हमारी निशा को दूसरी बार खो देते , बेबी , थैंक्स , तुम काट को निशा के रूप में , मेरे जीवन में लेकर आयी , उफ़ देखो न , बातिओं बातिओं में हम कबीले में पहुँच भी गए , बाबू , रत को त्यार रहना , अज्ज तोह में तुम कास कास कर छोड़ूगा..." रवि ने बेबी के कैसे हुए मम्मी को अपने हाथ से मसल कर बोलै ,

"ोूछहः बाबू तुम भी न..." बेबी बेहद शरमाते हुए बोली , उसके गाल शर्म से लाल हो गए ,

"सच hi तोह बोल रहा हु , जूही जी , जब आपकी कासी हुई मुलाम नरम छूट में , मेरा लम्बा लुंड जड़ तक घुसता है , उफ़ , जूही , क्या बताऊ , क्या एहसास होता है मुझे , आपकी छूट के होंठ बहुत मोठे मोठे हैं , और अंदर से तोह इतनी टाइट है के मुझे दुगना जोर लगाना पढता है , लुंड फास जाता है आपकी कासी हुई मखमली बुर में..." रवि ने बेबी की आँखों में अखन दाल , उसकी जांगू के बेच में हाथ घुसा , उसकी फूली हुई कमसिन बुर को , अपने हाथ से कास कर मसलते हुए बोलै ,

"ोुछ्ह बाबू , ाअसशह्ह मत करो न , अह्ह्ह्हह रत को कर लेना ..." बेबी ने अपनी अध् खुली नशीली आँखों को मटका कर बोलै , उसकी कमसिन बुर गीली होने लगी थी ,

"उम् ठीक है , चलो ायो , फॅमिली में वख्त गुजरते हैं , और फिर रत को तुम्हारी छूट फाड़ते हैं..." रवि हस्ते हुए इतना बोल , गाड़ी से निचे उतर गया , बेबी भी शरमाते हुए गाड़ी से बहार ा गई ,

अभी 7 बजने वाले थे , आसमान में टारे टिमटिमा रहे थे , मतलब रत होने लगी थी , सूरज चाचू दुब चुके थे , कबीले में मशालों की अग्ग की रौशनी जगमगा रही थी , उफ़ रत को बेइंतहा खूबसूरत लगता था , यह छोटा सा कबीला , कबीले में लाइट का कोई प्रबंध नै था , पर रवि ने इक प्लान सोच लिया था , रवि ने सोचा था , आम के बगीचे के पास , इक सोलर प्लांट लगा दे , वह जंगल इतना गहरा नै था , तोह धुप से सोलर प्लेट्स अचे से चार्ज हो सकती थी , और पूरे कबीले को बिजली मिल सकती थी , रवि ने सोच लिया था के वोह जल्द hi रेहान से बात करेगा...

करीब इक घंटे बाद...

सभी डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे , रवि के इक तरफ रमा बैठी थी और इक तरफ कोमल , ख़ुशी बिलकुल रवि के सामने बैठी हुई थी , अज्ज सभी बहुत खुश थे , क्यों अज्ज , घर में मेहमान ए हुए थे , सैर , प्रिय और अनु ,

सीमा ने रिमी , शूरति , रमा और कोमल के साथ मिल , अचे अचे पकवान बनाये थे , और कुछ पकवान ख़ुशी ने अपनी शक्ति से बना दिए थे , या शयद वोह किसी होटल से चुरा लायी थी , अभ ख़ुशी तोह ख़ुशी थी , वोह कुछ भी कर सकती थी , सैर और प्रिय बहुत खुश थी , लेकिन उनको समाज नै ा रहा था , उनके भइआ की वाइफ कोनसी है , पर सीमा ने उनको सब समझा दिया था , सीमा ने उनको बता दिया था के यहाँ सभी रवि की wife's hi हैं ,

"अनु , तुमने माँ को बता दिया के तुम मेरे पास हो..." रवि ने खाना कहते हुए बोलै ,

"हम्म , बता दिया , सुनो जी , मुझे यह घर बहुत पसंद आया , और सीमा देदी भी..." अनु ने शरमाते हुए बोलै ,

"अहूऊऊ अहूऊऊ..." रवि , अनु की बात सुन खस्ने लगा ,

"अरे , क्या हुआ जी , पानी पे लो , उफ़ अप्प भी ना , धीरे धीरे खाओ न..." रमा ने अपने भाई को पानी पिलाते हुए बोलै ,

"हाँ जी , रमा देदी ठीक बोल रही , अप्प न बिलकुल ख्याल नै रखते अपना , लायो में खिला देती हु खाना , अपने हाथो से..." कोमल ने मुस्कराते हुए बोलै तोह रवि और भी चौंक सा गया ,

"भइआ , थैंक्स , हमें साथ लेन के लिए..." सैर ने मुस्कराते हुए खाना कहते हुए बोलै ,

"देदू , थैंक्स किस बात का , अप्प दोनों हमारी बहिन हो , तोह देदू थैंक्स बोल कर हमें पराया मत करो..." रवि ने सैर की आँखों में अखन दाल बोलै ,

"सुनो जी , जल्दी से खाना खायो , फिर आपको हारना भी है ..." ख़ुशी ने रवि को आंख मरते हुए बोलै ,

"खुशु जी , अज्ज तोह हमारे भइआ hi जीतेंगे..." कोमल ने रवि के गाल को चुम कर बोलै ,

"ाचा जी , हम अज्ज तक कभी नै हारे..." ख़ुशी अभी बोल hi रही थी के रिमी बेच में बोल पढ़ी ,

"देदू , कोनसी गेम खेलोगे अप्प..." रिमी ने खाने कहते हुए ख़ुशी की तरफ देख कर बोलै , जो चपड़ चपड़ खाये जा रही थी , उसे खाने में बस रमा hi तकर दे रही थी ,

"वह रिमी , तेरा दिमाग कितना तेज़ है..." शूरति ने रिमी पर गर्व सा करते हुए बोलै , तोह सब हसने लगे ,

"ओह्ह देदू , सच में , भइआ , में आपसे नॉलेज हु..." रिमी ने पहले शूरति की तरफ और फिर रवि की तरफ देखते हुए बोलै ,

"क्यू..." रवि ने रिमी के खूबसूरत मासूम चेहरे को घूरते हुए बोलै ,

"अले अप्प ने कहा था , अप्प मुझे और शूरति देदी को घूमने लेकर जाओगे जंगल में..." रिमी ने बेहद मासूमियत में बोलै ,

"रिमु मुम्मा , जंगल में शेर रहता है , अप्प मत जाना वह..." फर्जी जो बेबी की गॉड में बैठी हुई थी , रिमी की तरफ देखते हुए , अपने होंठो पर दोनों हाथ रख बोली ,

"क्या , देदू , ाचा हुआ हम नै गए..." रिमी ने शूरति के कंडे पर सार रखते हुए बोलै जो उसके साथ hi बैठी हुई थी ,

"अरे , तू दर मत , में हु न , में शेर को ढेर कर दूंगी , अगर उसने तुम देखा भी..." शूरति ने रिमी का माथा चूमते हुए बोलै , तोह सब हसने लगे ,

"रिमी , कल लेकर जाउगा तुम दोनों को..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

रवि ने देखा काट खामोश बैठी हुई थी , लारा और एलिज़ाबेथ भी , उस से रहा न गया , उसने पूछ hi लिया ,

"लारा , एलिज़ा क्या बात है , तुम दोनों परेशान हो..." रवि ने दोनों की तरफ देख कर बोलै ,

"अरे नै रवि जी , अप्प सबकी बतिअन सुन रहे है , क्यों एलिज़ा..." लारा ने मुस्करा कर एलिज़ा की तरफ देखते हुए बोलै ,

"हूँ..." एलिज़ा ने खाना कहते हुए बोलै ,

"तुम दोनों का जगदा हुआ है..." रवि ने दोनों की तरफ देखते हुए बोलै ,

"नौपे , थोड़ा सा..." लारा ने मुस्कराते हुए बोलै , रवि ने सोचा , इक बार खाना खा लू , उसके बाद दोनों से बात करुगा ,

"काट , क्या बात है , अप्प इतनी चुप चुप क्यों हो अज्ज..." रवि ने काट को आंख मरते हुए बोलै , तोह काट ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली , उसकी छूट रह रह कर पानी छोड़ती गीली हो रही थी , वोह बार बार अपनी मोती मोती जांगू आपस में रगड़ते हुए , अपनी छूट में उठ टी खुजली को काम करने की कोससिह कर रही थी ,

"अरे , यद् आया , सीमा देदी , अप्प भइआ को दूध पीला देना , कोमल बोल रही थी , भइआ को दूध पीना बहुत पसंद है , में भूल गई थी..." प्रिय ने सुबह गाड़ी में हुई बात को यद् करते हुए बोलै ,

"अरे देदू , मुझे बोल देती , में पीला देती भइआ को दूध..." सैर ने प्रिय की तरफ देखते हुए बोलै ,

"ाहू अहूऊऊ..." रवि को प्रिय की बात सुन फिर से खांसी ा गई , कोमल , रमा और ख़ुशी पगलू की तरह हस्ते जा रही थी , बाकि सब उनको देख रहे थे , पर असल बात क्या थी , यह बस यह तीनो और रवि hi जनता था ,

"कोई न देदी , में पीला दूंगी..." सीमा ने नादानी में बोलै , तोह कोमल , रमा और ख़ुशी और भी जोर जोर से हसने लगी , उनकी आँखों में असनु ा गए , प्रिय को कुछ समाज नै ा रहा था , पर ख़ुशी जो उसके साथ hi बैठी थी , उसने प्रिय को दूध वाली बात का , पूरा मतलब समझाया उसके कण में ,

उफ़ प्रिय का चेहरा शर्म से लाल हो गया , जब उसे दूध पिलाने का मतलब समाज आया ,"हाय माँ , कितनी मस्तीखोर है यह तीनो , उफ़ यह तोह दूसरे दूध की बात कर रही थी , है मा , मैं भइआ को बार बार बोल रही थी , भइआ में पीला देती दूध..." प्रिय तोह शर्म के मरे पानी पानी हो गई , वोह डाइनिंग टेबल से उठ कर , अपने रूम में भाग गई , उसे बेहद शर्म ा रही थी ,

"अरे देदी को क्या हो गया..." सीमा ने प्रिय के पीछे , उसके रूम में जाते हुए बोलै , पर रवि , रमा , कोमल और ख़ुशी जानते थी , के प्रिय क्यों उठ कर चली गई ,

"रिमी और खाना खायो..." शूरति ने रिमी की प्लेट में इक और रोटी रखते हुए बोलै ,

"देदू , बस याल , 4 रोटी खा ली , अभ मुझे और कुछ खाना है , मुझे मीठा खाना है..." रिमी ने मासूम सी बनते हुए बोलै , रवि उनकी तरफ hi देख रहा था , उनका आपसी प्यार देख , उसकी अखन नाम हो गई ,

"भइआ दूध पीना है..." कोमल ने धीरे से अपने भाई के कण में बोलै ,

"हम्म , वोह तोह रत को पे hi लूंगा , कोमल अज्ज देदो न..." रवि ने कोमल के कण में धीरे से बोलै ,

"क्या.."

"हष्ठ , अपनी कमसिन छूट..." रवि ने सबकी नज़रिओं से बच , अपना इक हाथ , कोमल की मोती मोती जांगू के बेच रख दिया , सैर भी उठ कर चली गई , उसका खाना भी हो चूका था ,

"अह्ह्ह , भइआ कोई देख लेगा..." कोमल ने बेहद शरमाते हुए बोलै ,

"रत को छूट चाटने डौगी , बोलो न..." रवि ने कोमल के कण में धीरे से बोलते हुए , उसकी छूट को कास कर , उसके नाईट पाजामे के ऊपर से hi मसल दिया ,

"ोुछःह चाट लेना..." कोमल ने शर्म से पानी पानी होते हुए बोलै , तोह रवि ने अपना हाथ बहार निकल लिया , पर जैसे hi उसने सामने की तरफ देखा , ख़ुशी उसकी तरफ देख रही थी , ख़ुशी ने उसे आंख मर दी और रवि बस मुस्करा दिया ,

फिर सबका खाना हो गया , अभ बरी थी , महा मुकाबले की , इक तरफ डेविल रवि और इक तरफ डेमों ख़ुशी ,

सभी फ्री होकर , घर के बहार , इक बड़ा सा काम्पफीरे जला कर उसके चारो तरफ बेथ गए , अग्ग की तेज़ तेज़ लपटे उठ रही थी , और थोड़ी थोड़ी ठण्ड भी पढ़ने लगी थी , उफ्फ्फ ठंडी के मासूम में अग्ग के पास बैठना , इक अलग hi सकूं मिलता है ,

रवि ने रेहान और सूजी को भी बुलवा लिया था , dr.nelam भी ा चुकी थी , वोह रवि से थोड़ा नाराज़ थी , पर रवि ने उसे अज्ज क्या क्या हुआ , सब बता दिया , तोह dr.nelam खुश हो गई , उसका बीटा बुनती भी उसके साथ hi आया था , फर्जी अपने दोस्तों के साथ खेल रही थी , उसके दोस्त थे , बुनती , प्रिय का बीटा अमित , और सैर का बीटा रवि , फर्जी उनके साथ खेलने में बिजी थी ,

"अहूऊऊऊ अहूऊऊऊ , मेहरबान , कदरदान , जानो की जान , माय हु रमा जान , भाईओ और बहनो , अज्ज की शाम , मेरे भइआ रवि और मेरी थे ग्रेट भाभी ख़ुशी के नाम..." रमा अभी बोल hi रही थी के ख़ुशी उठ ते हुए बोली ,

"शुक्रिया , शुक्रिया..." ख़ुशी ने सार ज़ुका सबको नमन करते हुए बोलै ,

"खुशु , किसी ने ताली नै बजे , ः..." रवि ने बेहद हस्ते हुए बोलै , तोह ख़ुशी ने सबकी तरफ गुस्से से देखा , सब तळ्यां बजने लगे , ख़ुशी बेहद ख़ुशी में दुबारा अपना सार ज़ुका सबका शुक्रिया ऐडा करने लगी ,

"रिमी , तुमने ताली नै बजे ..." ख़ुशी ने रिमी की तरफ देख कर बोलै , रिमी , ख़ुशी का गुस्सा देख शूरति से चिपक गई ,

"देदू..." रिमी ने शूरति से चिपकते हुए बोलै ,

"तू बजा न ताली , नै तोह , भाभी तुम बजा देगी..." शूरति ने रिमी को दन्त लगते हुए बोलै , सब हसने लगे ,

"हूँ , रिमी ताली बजाओ , तुम सब भी , इक बार और..." सब फिर से तळ्यां बजने लगे , पर रिमी धीरे धीरे ताली बजने लगी , शयद उसकी आवाज़ किसी को भी सुनाई न दी ,

"रिमी..." ख़ुशी ने अपनी कमर पर हाथ रखते हुए गुस्से में बोलै ,

"देदू , ताली बजा दी..." रिमी , शूरति को अपनी बहु में भर , थोड़ा डरते हुए बोली ,

"कब , हमें तोह सुनाई न दी..." शूरति अपने कनु में उंगलियाँ दाल , उनको हिलाते हुए बोली , उसे लगा , कही वोह बोली तोह नै हो गई ,

"देदू , यह साइलेंट ताली थी , इसकी आवाज़ नै अति..." रिमी ने बेहद मासूमियत से बोलै , तोह सब हसने लगे ,

"साइलेंट ताली , कहा से सीखी तुमने..." शूरति ने जैसे रिमी पर गर्व सा करते हुए बोलै ,

"देदू , इसकी खोज मने की है , कल में फ्री बैठी थी , तब मने तरय किया , पहले ताली बजायी तोह आवाज़ आयी , पर धीरे धीरे , में बिना आवाज़ की ताली मरना सिख गई..." रिमी ने सबकी तरफ देखते हुए , अपनी नयी खोज के बारे में सब को बता दिया ,

"वह , वह , रिमी ु र ा जीनियस ..." शूरति ने खड़े होकर रिमी की इस नयी खोज पर ताली बजे , तोह सब तळ्यां मरने लगे , रिमी ने अपने कनु पर हाथ रख लिए ,

"हहै , देदू , आपको नै अति , कोई न , देदू में आपको सीखा दूंगी..." रिमी ने बेइंतहा मासूमियत में बोलै , तोह शूरति ने निचे बेथ उसे अपनी बहु में भर लिया , सब हसने लगे ,

तभी रवि अपनी जगह से उठा और रिमी के पास आकर , उसे अपनी बहु में भरते हुए बोलै .." बस रिमी , ऐसे hi नयी नयी खोज करके , मेरा नाम रोशन करते जाना , मुझे तुम पर गर्व है , तुमने साइलेंट ताली की खोज की..." रवि ने रिमी का माथा चुम बेहद नाम आँखों से बोलै , तोह सब हसने लगे , और सब तालयां मरने लगे ..

"ok , ok , रिमी जी , कॉंग्रट्स आपकी इस खोज पर , तोह मेहरबान , कदरदान , क्या था दोनों का नाम , हाँ , इक तरफ मेरे मासूम भइआ और इक तरफ मेरी सेक्सी भाभी जान , अज्ज करेंगे मुकाबला , जी हाँ , अप्प अपनी सीट पर जैम जाओ , अपनी संसू को थम लो , अपने दिल को आराम दो , क्यों की मुकाबला है मदिरापान का , 15 बोतल का मटका , भइआ के टच करते hi , कोमल का अंग अंग फड़का , अज्ज खाने में स्वाद नै था , क्यों की रिमी ने लगाया था तड़का , काट है मासूम सी , और बेबी देदी की अखन है नली , वोह जीत जायेगा जिसने मटके की दारू सबसे पहले पीली , और तोह और , जज होगी मेरी सीमा माँ , अगर आपको सेक्सी लड़की चाहये , तोह अभी सर्च करे , www.sexyrema.com , प्रिय , सैर और अनु है स्पेशल गेस्ट , भइआ अभी शर्ट उतर कर दिखा दो अपने 56 इंच की चेस्ट , लारा और एलिज़ा रखेगी नज़र , कोई करे न चीट , गेम को बेच में जो करेगा क्विट , रिमी शूरति देंगी उसे पीट , तोह आइए करते हैं स्टार्ट , थे गेम ऑफ़ मदिरापान.... " रमा के इतना सब बोलते hi सब उसकी तरफ अखन फाड् देखने लगे , फिर सब बेइंतहा हस्ते हुए तालयां बजने लगे , बस रिमी को छोड़ कर , भूल गए , वोह ताली सिलेंटली बजती थी...

"ाहहकुररररर अहहह्कुर्र्र्रर..." सबकी नज़र जैसे hi इस आवाज़ की तरफ गई , सबने इक साथ अपना माथा पीट लिया , क्यों , क्यों की , ख़ुशी खर्राटे भरते हुए सो रही थी....



तो बे कुनिटेड.....[Friends apke replys ke jawab kal dunga... shukriya sabhi ka... abh rebu dena badia se... ]
 
फ्रेंड्स थैंक ु , फ्रेंड्स नेक्स्ट अपडेट कल रत को आएगा.. अज्ज थोड़ा बिजी था , मेरे आश्रम में अज्ज बचो के साथ नया साल मनाया मने , अप्प भी घर से बहार निकल किसी जरूरतमंद की हेल्प करना , विंटर का मासूम है तोह कई लोग के पास गरम कपडे नै होते , उनकी हेल्प करना , इस नए साल में अचे करम करना , सबको प्यार देना , कोई भी बुरा करम मत करना , अपने माँ बाप अपनी प्रेमिका को प्यार देना , मेरी तरफ से आपको हैप्पी नई ईयर..

कल रत को 10 बजे अपडेट आएगा.. शयद 2 अपडेट इक साथ दू.. शुक्रिया सभी का.. सोना हैप्पी नई ईयर आपको , अपना ख्याल रखना सोना , मेरी दोस्त..
 
अपडेट-133

अभ अग्गे...

"हलो..." इक बेइंतहा खूबसूरत आवाज़ में इक शक़श की आवाज़ सुनाई दी ,

"हलो , सिको , इक कॉन्ट्रैक्ट है , बेइंतहा डोलत मिलेगी तुम..." यह वही इंसान था , जिसने अज्ज सुबह बिमान शाह से बात की थी ,

"हम्म , बोलो..." सिको बेहद खूबसूरत आवाज़ में बोली , वोह अपनी जुड़वाँ बहिन के साथ , अपने घर में आराम कर रही थी ,

ें दोनों जुड़वाँ बहनो का नाम दुनिआ की टॉप कॉन्ट्रैक्ट किलर्स में शुमार था , बेहद चालक , फुर्तीली , हर तरह की फाइटिंग में महारत हासिल थी इनको , यह दो जरूर थी , पर थी इक , जिस्म अलग थे पर आत्मा इक थी , दिल इक था , सोच इक थी , और तोह और , रेहान सेहन , खाना पीना , पहनावा भी इक था ,

सिको गर्ल्स ने अपने जीवन की इक खुनी शुरुआत की थी जब वोह बस 14 साल की थी , इनके माता पिता को इक लोकल गैंग ने मार दिया था , यह जापान में रहती थी , पर दुनिआ का हर बड़ा क्रिमिनल , हर बड़ा जासूस इनको जनता था , यह बेरहम कातिल थी , अज्ज तक कोई भी कॉन्ट्रैक्ट जो दोनों ने लिया था , खली न गया था , मतलब जिसे मरना था , उसे मारा था , इनका कोई वजूद न था , पता नै कब अति थी , कब अपने शिकार की गर्दन धड़ से अलग कर , कब चली जाती थी , किसी को कोई खबर न होती , बस इनकी वेबसाइट से इनको कांटेक्ट किया जा सकता था , यह पहले मोह मांगे पैसे लेती थी , जैसा काम , उस से बढ़कर डैम ,

"हम्म , सुनो , तुम बिमान शाह का पता है..."

"हूँ , थे गोआट , उसे कोण नै जनता , पर मने उसे कभी देखा नै..." सिको ने थोड़ा मुस्करा कर बोलै , क्यों की उसकी बहिन कुछ इशारा कर रही थी , जैसे पूछ रही हो के क्या बतिअन हो रही हैं ,

"ः , अभ तुम उसके लिए इक काम करना है , इंडिया ा जाओ , मिथली शहर में , में तुम एड्रेस सेंड करता हु , यद् रहे , जो काम वोह दे , उसे हर हालत में तुम पूरा करना है..." वोह इंसान बेहद घम्बिर होकर बोलै ,

"हम्म , जरूर , हम दोनों कल ा जाएगी , लेकिन काम क्या है , किसे मरना है..."

"Mr.X को..."

"व्हाट , वोह तोह इक दरिंदा है , इक जानवर है , हासष्ठ , इस काम के लिए , मुझे 150 क्रूर्रे चाहये , वोह , वोह , इक डैम पागल और सनकी इंसान है , मने उसके बहुत से किस्से सुने हैं , वोह अपने अप्प में इक जीता जगता डेविल है..." सिको ने थोड़ा परेशानी भरे भाव चेहरे पर लेट हुए बोलै ,

"हम्म , तुम Mr.X hi नै , उसकी 2 girlfriend's को भी मरना है , इक बेबी और इक कैटलीन.."

"व्हाट , बेबी और काट उसके साथ हैं , उफ़ फिर तोह बहुत मुश्किल भरा काम है , शयद यह हमारी जिंदगी का सबसे खतरनाक मिशन होगा , खैर हम कल ा रही है..." सिको ने बेहद चिंता में इतना बोल फ़ोन कट कर दिया , और अपनी जुड़वाँ बहिन को बताने लगी , अपने नेक्स्ट जानलेवा मिशन के बारे में ,

दूसरी तरफ...

"हे भगवन , ख़ुशी भाभी उठो..." रमा ने अपना माथा पीट कर , ख़ुशी को कण्डु से पकड़ हिलाते हुए , उसे जगाने का हर संभव परियस करते हुए बोलै ,

कुछ hi वख्त में , ख़ुशी ने अपनी अखन खोल दी , तोह सब तळ्यां बजने लगे , ख़ुशी ने उठ कर सबकी तरफ गुस्से से देखा , तोह सब खामोश हो गए ,

"तोह भाभी ायो , और मदिरा उठाओ , let's प्ले थे गेम , 1 , 2 अंडडडडड 3..." रमा दोनों को 4 फ़ीट बड़े सुराहीदार मटके के पास लेकर , बेहद हस्ते हुए मदिरा चैलेंज की शुरुआत करते हुए बोली ,

"खुशु , त्यार हो..." रवि उस सुराहीदार मटके को उठा अपने होंठो के पास , उसका तंग मोह करता हुआ बोलै , मटका निचे से छोड़ा था , पर ऊपर से उसका मोह किसी बोतल के मोह जितना तंग सा था ,

"हूँ..." ख़ुशी ने रवि को आँख मरते हुए बोलै ,

फिर दोनों ने मदिरा पेनी स्टार्ट की , सब अखन फाडे , मोह खोले , दोनों की तरफ हैरत भरी निगाहो से देख रहे थे , रवि का तोह ठीक था , वोह इक मर्द था , पर ख़ुशी इतनी मदिरा कैसे पे जाती , लेकिन कुछ लोग यह नै जानते थे , ख़ुशी इक डेमों है , उसका पेट नै इक कुआ है जो कभी नै भरता , जब तक उसकी अपनी ीचा न हो , वोह तामस थी ,

"कॉमन भइआ , यू दो आईटी , भइआ , भइआ.." कोमल खड़े होकर , मुस्कराते हुए अपने भाई का हौसला बढ़ाने लगी ,

रवि और ख़ुशी इक दूसरे की तरफ देखते हुए मदिरा पेट जा रहे थे , दोनों में से कोई भी रुक नै रहा था , दोनों बेइंतहा जल्दबाज़ी में मदिरा के बड़े बड़े घुट अपने गले से निचे उतर रहे थे , मदिरा की कुछ बूंदे , उनके होंठो की इक साइड से , उनके कपड़ो पर गिर रही थी , उनके कपडे अग्गे से पूरे भेज चुके थे ,

सबकी नज़रियन रवि और ख़ुशी पर जमी हुई थी , सबको लग रहा था रवि जीत जायेगा , पर शयद वोह नै जानते थे , तामस सदियों से इस खेल में इक चैंपियन रही है , उसे हरा पाना नामुमकिन था ,

"बस , अभ थोड़ी सी देर , कोई इक होगा ढेर , और डैम लगाओ , मेरे दोनों शेर...' रमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

रवि मदिरा पीते हुए ख़ुशी की आँखों में देख रहा था , पता नै क्यों , उसे ख़ुशी पर बहुत प्यार ा रहा था , दोनों अपनी हेलल की यादिओं में खो रहे थे , उस वख्त दोनों अकेले थे , पर अज्ज उनके पास कितने चाहने वाले थे , दोनों शयद यही सोच रहे थे , दोनों की आँखों में इक hi वख्त में असनु ा गए , आँखों में असनु लिए वोह इक दूसरे की आँखों में खोये , अभ मटका पूरा ऊपर उठा कर मदिरापान कर रहे थे , शयद अभ मटका खली हो रहा था , बस कुछ hi वख्त बचा था , 15 बोतल मदिरा से भरा वोह मटका , रवि और ख़ुशी मटर 3 मिंट में खली करने वाले थे , पर ख़ुशी तोह ख़ुशी थी , उसने वोह किया जो वोह हर बार करती थी ,

"अहूऊऊ ाहूऊऊ..." रवि खस्ने लगा , उसने मटका अपने होंठो से थोड़ा दूर कर लिया , यह कुछ पालो के लिए हुआ , पर ख़ुशी के लिए इतना वख्त काफी था ,

"यूउउहुउउउ , ईहहहहहहह , में जीत गयी , है है है..." ख़ुशी अपना मटका खली कर , अपने जीतने की ख़ुशी में , बेइंतहा ख़ुशी में चीखते , छीलते , नाचते हुए बोली ,

"इसने चीटिंग की है..." रवि ने भी अपना मटका खली कर , ख़ुशी को गुस्से से देखते हुए , छीलते हुए बोलै ,

"लोसर , ोऊ लूल्लू लू लू..." ख़ुशी अपनी जीभ दिखा रवि को और भी चिढ़ाते हुए बोली , .

"क्या भइआ , अप्प हार क्यों गए.." कोमल ने थोड़ा उदास आवाज़ में बोलै ,

"कोमल , इसने चीट किया मुझे..." रवि ने ख़ुशी के पास आकर बोलै ,

"क्या , हुऊ , कोमल यह ऐसे hi करता है , यह अपनी हार कभी नै मंटा .." ख़ुशी ने रवि के पास आकर , अपने दोनों हाथो से उसके सीने पर ढाका जड़ते हुए बोलै , ढाका पढ़ते hi रवि निचे गिर गया , यह देख सब हसने लगे ,

"ौऊ , बोलो क्या करना है मुझे..." रवि उठ कर खड़े होते हुए अपने हाथ जड़ कर बोलै ,

"उम् , सोचने दो..." ख़ुशी अपने माथे पर इक अपनी ऊँगली रख कुछ सोचने लगी ,

"देदू , भइआ को मुर्गा बना दो..." रिमी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"भाभी , अप्प भइआ को पेड़ पर उल्टा लटका दो..." रमा ने बेहद हस्ते हुए बोलै ,

"शठ , अभी सोचने दो मुझे , अह्ह्ह्ह , मने इस बेवकूफ को हज़ारो बार हराया है , अभ क्या सजा दू , सब कुछ तोह करवा लिया इस से..." ख़ुशी बेहद उदास सा होकर बोली , तोह रवि उसके पास आया और उसके कण में धीरे से बोलै.." खुशु , तुम मुझे सजा दो , के में तुम साडी रत नंगा करके , तुम कास कास कर छोड़ू , क्यों , क्या बोलती हो..." रवि ने बेहद धीमे से बोलै , किसी और को कुछ सुनाई न दिया , रवि की बात सुन , ख़ुशी के गोर गाल शर्म से लाल हो गए ,

"चल हैट , कमीना कही का..." ख़ुशी , रवि को ढाका दे , सीमा के पास चली गई , दोनों ने कुछ देर बात की ,

"हम्म , तोह मर. रवि , आपकी सजा है के अप्प हमें , अपनी और अनु की लव स्टोरी सुनाओ , अभी के अभी..." ख़ुशी ने सब की तरफ देख कर बोलै तोह सब खुश हो गए , वैसे ख़ुशी रवि से अजीब अजीब काम करवाती थी , पर अभ वोह रवि की मासूम बहनो को उदास नै करना चाहती थी ,

"ोकक..." रवि भी मुस्करा कर बोलै और अनु के पास जाकर बेथ गया , अनु ने उसकी तरफ देखा और फिर मुस्कराने लगी , उसे इक शर्म सी ा रही थी ,

"भइआ स्टार्ट करो..." कोमल ने अपने भाई की आँखों में अखन दाल बोलै , उफ्फ्फ अग्ग की तेज़ लपटों के पास बैठी कोमल , बेइंतहा खूबसूरत लग रही थी , उसकी नली नली अखन , रवि तोह दुब सा गया उनमे ,

"भइआ , होश में ा जाओ..." रमा ने मुस्करा कर बोलै , तोह रवि हड़बड़ा सा गया , और कोमल शर्माने लगी ,

फिर रमा ने सबको मदिरा दी , छोटे छोटे गिलास में , सब ठंडी के मासूम में मदिरा के छोटे छोटे सिप लेते , रवि और अनु को देखने लगे ,

"तोह हस्बैंड जी , सुनाओ स्टोरी अपनी..." सीमा ने रवि की आँखों में अखन दाल बोलै , उफ़ सीमा सच में बेहद खूबसूरत थी , हमेशा सिंपल से कपड़ो में रहने वाली सीमा , सादगी की खूबसूरत मूरत थी ,

"हम्म , तोह सुनो , यह बात तब की है , जब में 7 सालो बाद इस शहर में वापिस आया था , तब मुझे पहले सीमा मिल गई , सीमा के साथ रहते हुए , पहले में माँ और रमा को शहर ले आया , पर कोमल अभी तक लापता थी , कोमल को ढूंढ़ने के लिए में ठाकुर साहब की हवेली में काम करने लगा , मुझे लगता था , कुणाल hi इक ऐसा शक़श है जो कोमल का पता मुझे बता सकता है , ठाकुर साहब की जान बचा में उनकी हवेली में घुस गया , तब ख़ुशी बहुत बड़ी दारुबाज थी..." रवि अभी बोल hi रहा था के ख़ुशी बेच में बोल पढ़ी ,

"क्या , क्या कहा तुमने..." ख़ुशी ने बेहद गुस्से में मदिरा पेट हुए बोलै ,

"kk..kk..kuch .nn..naii..." रवि ने हकलाते हुए बेहद मसोमीयत में बोलै , तोह सब हसने लगे ,

"हहै , रवि में मज़ाक कर रही हु , तुम बोलो अग्गे..." ख़ुशी मुस्कराते हुए बोली , वैसे वोह भी उन पुराणी दिलकश यादिओं में खो गई , उन प्यार भरे लम्हो को महसूस करने लगी ,

"हम्म , ठाकुर साहब ने मुझे ख़ुशी का बॉडीगार्ड बना दिया , इक दिन रत में ख़ुशी ने ati-adhik शराब पे ली , उफ़ अगले दिन उसे हॉस्पिटल में एडमिट करना पढ़ा , और मुझे खास ख़ुशी के पास रुकना पढ़ा , हम दोनों साथ रहे , पहले तोह ख़ुशी मुज़से बात भी नै करती थी , पर धीरे धीरे मने ख़ुशी का दिल जीत लिया , हम दोनों अचे दोस्त बन गए , खैर ख़ुशी का रूम ग्राउंड फ्लोर पर था , और उसी फ्लोर पर िक रूम था , इक दिन शाम को में होटल से खाना लेकर ा रहा था , में ख़ुशी के लिए होटल से hi खाना लता था , जब में खाना लेकर हॉस्पिटल में घुसा , उफ़ मने देखा , इक मासूम सी लड़की को कुछ वार्ड बॉयज , इक स्ट्रेचर पर दाल िक रूम की तरफ ले जा रहे थे , मुझे बस थोड़ा सा चेहरा दिखा उस लड़की का , उफ़ पूरा खून से सना चेहरा , जिस पर नाखुनु से खुरदने और दांतो से काटने के निशान बने हुए थे , में अंदर तक हिल गया , में ख़ुशी को खाना दे , उस लड़की की माँ के पास पहुँच गया , जो बहार बैठी बेइंतहा रो रही थी..."

"उफ्फ्फ , बहुत दर्दनाक पल होंगे..." बेबी ने रट हुए बोलै ,

"हाँ जूही , तुम नै जानती , में किसी लड़की को दर्द में नै देख सकता , यही मेरी कमज़ोरी रही है , मुझे उस लड़की को देख , अपनी रमा की यद् ा गई , यह लड़की हमारी अनु थी , में अनु की माँ के पास पहुंचा और उनसे बात करने लगा , अनु की माँ ने बताया के , अनु बस 21 साल की है , वोह कॉलेज में स्टूडेंट थी , पढाई का बहुत शोक था अनु को , सोल्लगे से घर एते , कुछ गुंडे रोज़ अनु को छेड़ते थे , अनु की माँ ने बोलै के , पुलिस कम्प्लेन की , मगर कोई करवाई नै हुई , आखिर उन गुंडु ने अनु को उठा लिया , और इसके साथ , उफ़ में बोल भी नै सकता , खैर मुझे पता चला के यह सब रेहमान उल्ला के छोटे भाई पाक़िआ ने किया है , मने अनु की माँ को वादा किया के में पाक़िआ को मर दूंगा..."

"ओह्ह भइआ , अप्प कितने अचे हो..." रमा ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"रमा , बात अचे या बुरे की नै , बात औरत के साथ जबरदस्ती करने की है , क्यों , क्यों , कुछ नासमझ लोग , लड़की को बस इक चीज़ समज़ते हैं , इक वासना की भूक मिटने की चीज़ , अरे लड़कयों में भी दिल होता है , उनके अंदर भी भावनायें होती हैं , अरे हर लड़की का सपना होता है , हर लड़की को हुक होता है , के वोह अपना प्रेमी खुद चुने , लेकिन , लेकिन , कुछ दरिंदे , यह बात नै समज़ते , यह लोग पागल कुत्ते जैसे होते हैं , और पागल कुत्ते का इक hi इलाज होता है , वोह है मौत..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"सही कहा अपने , तोह क्या पाक़िआ को मारा अपने..." सीमा ने अपने असनु साफ करते हुए बोलै ,

"हाँ , मने वेदना जी (अनु की माँ) से 7 दिन का वख्त माँगा , मने उनसे बोलै के अप्प पुलिस केस मत करना , क्यों की में नै चाहता था , अनु को और दर्द सहना पढ़े , इक तोह बेचारी सदमे में थी , ऊपर से पुलिस केस , फिर अदालतों में सालो तक वख्त की बर्बादी , ऊपर से रेहमान उल्ला इक डॉन था , वोह अनु को मर भी सकता था , और मुझे लगा , अनु ठीक होते hi इस शहर को छोड़ , किसी दूसरे शहर में चली जाये और वह इक नयी जिंदगी स्टार्ट करे , ऐसी कारन मने अनु की माँ को 20 लाख रस दिए..." रवि अभी बोल hi रहा था के कोमल उठ कर उसके पास बेथ गई और उसकी बहु में सिमट रोने लगी ,

"अरे कोमल जणू , उमा , चुप हो जाओ..." रवि ने नाम आँखों से कोमल के बाल सहलाते हुए उसके सर को चुम कर बोलै ,

"अग्गे क्या हुआ..." लारा ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"उसके बाद दिन गुजरते गए , अभ अनु ठीक थी , इक दिन में अनु से मिलने गया , पर तब अनु मर्द जाट से नफरत करने लगी थी , इसने मुज़से भी अछि तरह से बात नै की , बहुत बड़ा सदमा लगा था अनु को , बेचारी खुद को फिर से समेटने की कोससिह कर रही थी , खैर मने अनु से भी वादा किया के में उसके दोषी को कुत्ते की मौत मरुँगा , और फिर वोह दिन भी ा गया , इक दिन सीमा ने मुझे रमा की दवाई लेने शहर बेह्जा , तब मुझे पाक़िआ का खास आदमी काली दिखा , मने उसका पीछा किया तोह वोह सूजी की माँ , dr.nelam के केबिन में घुसा , उनको परेशान कर रहा था , मने dr.nelam को काली से बचा लिया , फिर dr.nelam की हेल्प से , में काली को इस जंगल में ले आया , और फिर मने और रेहान ने उसकी अछि खातिरदारी की..." रवि अभी बता hi रहा था के सब रेहान और dr.nelam को देखने लगे ,

"उसके बाद काली को डरा धमका मने पाक़िआ को अकेले हॉस्पिटल बुला लिया , काली ने पाक़िआ को बोलै के ख़ुशी अकेले हॉस्पिटल ा रही है , तुम ा जाओ , पाक़िआ तोह ख़ुशी के लिए पहले hi पागल था , वोह बहुत आसानी से मेरे जाल में फास गया , मने dr.nelam की फिर से हेल्प ली , और उनके रूम में , पाक़िआ से फाइट कर , मने उसे मर मर के बेहोश कर दिया , पाक़िआ ने मुझे चाकू मर दिया था कमर पर , और नीलम जी ने मेरे उस जखम पर टांके लगा , पट्टी बंधी थी , तभी नीलम जी से बतिअन कर मुझे पता चला के , नीलम जी , सूजी की माँ है , मने फिर नीलम जी को सूजी के पास जाने का बोल दिया , रेहान ,सूजी तुम यद् है , मने तुम सरप्राइज दिया था , dr.nelam को अपने साथ लेकर..." रवि ने मुस्कराते हुए सूजी और रेहान की तरफ देखते हुए बोलै ,

"हाँ जेजु यद् है , उस दिन को में कभी नै भूल सकती..." सूजी ने इक बार रवि की आँखों में ज़क , फिर अखन निचे कर , मुस्कराते हुए बोलै ,

"बस फिर में पाक़िआ को जंगल में ले आया , फिर मने उसे बहुत मारा , उसे कई दिनों तक भूका पियासा रखा , मर मर कर , उसकी चमड़ी उदेढ़ दी , वही दर्द दिया उसे जो अनु को दिया था उसने , में चाहता तोह पाक़िआ को उसी दिन मर देता , पर मुझे बेबी को आज़ाद करवाना था , बेबी उस वख्त बिमान शाह के कब्जे में थी , पर इक दिन पाक़िआ ने भागने की कोससिह की , वोह मुज़से फिर से लड़ पढ़ा , इस बार , मुझे बहुत अधिक गुस्सा ा गया , मने पहले उसे मर मर कर अधमरा किया , फिर उसके सार एम्बुलेंस के निचे कुचल दिया , ः , अनु जिन होंठो ने तुम चूमने की जुआरत की , उन होंठो का नामु निशान तक मिटा दिया मने ..."

"ओह्ह रवीए , तुमने मेरे लिए यह सब किया..." अनु ने रट हुए रवि के चेहरे को बार बार चूमते हुए बोलै ,

"पर तुम दोनों वापिस कब मिले..." सीमा ने बेहद नाम आँखों से बोलै , उसे नाज़ था अपने पति पर के उसने इक दरिंदे को कुत्ते की मौत मर दिया ,

"वोह हुआ यु , के प्रिय और सैर देदू , जब मुझे राखी बाँड्ने आयी थी , तब तुम यद् है , दोनों ने मुज़से बोलै था के में पुलिस की जॉब करू..."

"हाँ , हाँ , यद् है..." इस बार शूरति मुस्कराते हुए बोली ,

"बस जणू , में राजेश जी से मिला , तब उनहोनु मुझे एजेंट अनु से मिलने को बोलै , में जब अनु से मिला , उफ़ मेरे दिल ने मुझे बता दिया के हो न हो यह वही अनु है , पर अनु ने मुझे मन कर दिया , यह बोली में वोह अनु नै हु..." रवि ने बुरा सा मोह बना बोलै तोह सब हसने लगे ,

"अरे , में इनको सतना चाहती थी , मने इनको बहुत डुंडा था , और , और , मुझे ें पर गुस्सा भी बहुत था , पर वही मने गलती की , और यह फिर से मुज़से दूर हो गए..." अनु इतना बोल फिर से रोने लगी ,

"क्या..." काट चौंकते हुए बोली ,

"वोह , वोह , काट , हम चारो ने उस रत इक मिशन पूरा किया था , उसके बाद , में 3 सालो के लिए कही चला गया था , कोमल को वापिस लेन..." रवि ने मुस्करा कर बोलै ,

"ओह हाँ , यद् आया..." काट ने बेहद मासूमियत में बोलै ,

"बस उसके बाद , अनु जंगल में मुज़से मिलने आयी , पहले मने इसको मन कर दिया के में ऐसे प्यार नै करता , पर हासष्ठ , यह बहुत जिद्दी है , आखिर इसकी जिद्द के अग्गे मुझे झुकना पढ़ा , और अज्ज यह हमारे साथ बैठी है...." रवि ने अनु का माथा चुम कर बोलै , तोह अनु भेजी आँखों में मुस्कराने लगी ,

"बहुत दर्द भरी कहानी है , पर खैर एन्ड बहुत ाचा हुआ , हमें ख़ुशी है के अनु को उसका प्यार मिल गया , और पति जी , हमें नाज़ है अप्प पर , अगर अप्प न होते तोह शयद अनु मर जाती , थैंक यू जो अपने अनु की हेल्प की ..." सीमा ने सबकी तरफ से उठ कर बोलै , तोह सब रवि के लिए तळ्यां बजने लगे , रवि ने अनु को अपनी बहु में भर लिया ,

फिर कुछ देर सब यु hi बतिअन करते रहे , कभी कोई बात छेद लेता तोह कभी कोई , 2 घंटे और सब बैठे रहे , हस्ते मुस्कराते बतिअन करते रहे , खैर जब आधी रत हो गई , तब सभी उठे और सोने के लिए चल पढ़े , रवि को अभ बेबी और काट से प्यार करना था , पर उसे काट कही दिखाई नै दे रही थी , फिर काट उसे जंगल से अति दिखी , उसके चेहरे पर परेशानी के भाव थे , पर रवि को देख , उसने अपनी नज़रियन ज़ुका ली और शरमाते हुए सबके साथ घर के अंदर चली गई ,

रवि ने कोमल को बोलै के वोह कुछ देर में अत है , कोमल भी मन गई और अपने रूम में चली गई , रवि भी बिना अहहत किये बेबी और काट के रूम में घुस गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया ,

रवि ने रूम के अंदर देखा , तोह उसकी आँखों में इक चमक सी ा गई , बेबी बीएड पर बैठी उसका इंतज़ार कर रही थी , उसके लाल लाल होंठो पर इक मुस्कान थी , पर काट कहा था ,

"बेबी , वोह..." रवि अभी काट के बारे में पूछने hi जा रहा था , बेबी इक डैम से उठी और भाग कर रवि के गले लग गई , उसके मोठे मोठे चुके रवि के सीने में डाब सा गए , और चुचु के खड़े गुलाबी निप्पल अंदर की तरफ धस गए , "अह्हह्ह्ह्ह..." बेबी सिसक उठी ,

"जुहीय ..." रवि अभी बोलने hi जा रहा था के जूही (बेबी) ने उसके सूखे होंठो पर अपने नरम होंठो को मिला दिया , उफ़ जैसे hi रवि को अपने होंठो पर बेबी के नरम होंठो का स्पर्श महसूस हुआ , रवि ने बेबी की कमर पर हाथ रख , उसे कास कर अपने गले लगा लिया ,

"अह्ह्ह उम्म्म..." दोनों मज़े में सिसक उठे , रवि धीरे धीरे बेबी के नरम गुलाबी होंठो को चूसने लगे , उफ़ बेबी के नरम होंठ उसके होंठो में पीसने लगे , बेबी के माखन जैसे नरम होंठो को रवि अभ अखन बंद कर , पूरी तरह महसूस करते हुए चूसने लगा ,

"अह्ह्ह रावी उम्..." बेबी भी वासना में जलती , पूरी शिदत से , पोरे लगाव से , रवि के होंठो को चूसने लगी , दोनों के होंठ आपस में रगड़ खाने लगे , रवि अभ दांतो से हलके हलके काटते हुए बेबी के जूसी नरम होंठो को खींच खींच कर चूसने लगा ,

"उम्म्म अह्ह्ह्ह..." बेबी तड़फ उठी , जब रवि ने उसके होंठो को कास कास कर चूसना सुरु किया , वोह रवि के बालो में हाथ फिरती , उसका पूरा साथ देने लगी , रवि ने होंठो का रास निचोड़ते हुए , अपने खली पढ़े हाथो को काम पर लगा दिया , वोह काम था , बेबी के नरम मखमली चूतड़ों को अचे से मसलना ,

"उम्म्म आह्हः..." बेबी मज़े में मदहोश सी हो गई , जब रवि ने अपने दोनों हाथो से बेबी के मलाई जैसे नरम मोठे चूतड़ों को अपने हाथो के पंजू में कास कर भर लिया , उफ्फ्फ बेहद वासनामयी लम्हा था , रवि पागलो की तरह बेबी के होंठो को चूस रहा था , उसके दोनों हाथ , बेबी के मोठे मोठे गदराये चूतड़ों को , कास कास कर मसल रहे थे , बेबी ने इक शार्ट लोर तशीलत पहनी थी , उसकी कासी हुई गोरी दूध जैसी सफेद जंगे नंगी थी , उसकी पहनी लोर का कपडा इतना पतला था के रवि को महसूस हुआ जैसे वोह नंगे चूतड़ों को मसल रहा हो ,

रवि ने बेबी के होंठो को चूसते चूसते , उसकी इलास्टिक वाली लोर में अपने हाथ दाल दिए "आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ससीईई..." बेबी ने इक पल के लिए चुमन तोड़ते हुए सिसकारी भरी , क्यों की उसके नंगे गदराये गुदाज़ मोठे चूतड़ अभ रवि के हाथो में थे , बेबी ने अपनी ब्लू नशीली अध् खुली आँखों से रवि को देखा , रवि ने उसकी आँखों में देखते हुए , अपने इक ऊँगली उसके मोठे मोठे चूतड़ों की गहरी दरार में दाल दी "उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ मायआ..." बेबी सिसक उठी , वोह मदहोश हुई , फिर से रवि के होंठो को चूसने लगी , रवि भी उसके चूतड़ों की दरार में अपनी ऊँगली ऊपर निचे करने लगा ,

दूसरी तरफ रवि ने अपनी जीभ से बेबी के जूसी लिप्स को चाट , उसके थोड़े से खुले होंठो में अपनी जीभ घुसा दी , जब रवि की कड़क जीभ बेबी की नरम जीभ से टकराई , बेबी और भी पागल सी हो गई , उसने ऊपर की तरफ छलांग लगा , अपनी टंगे रवि की कमर में लपेट ली , रवि बेबी के मोह में जीभ गोल गोल घूमने लगा , दोनों की जीभ आपस में लड़ने लगी , और दूसरी तरफ रवि के इक हाथ ने बेबी को ऊपर उठा रखा था और इक हाथ उसके दूध जैसी सफेद गांड के छेद पर घूम रहा था , रवि अपनी ऊँगली पेंटी के ऊपर से hi बेबी की गांड के छेद में घुसाने लगता तोह कभी गांड के कुंवारे छेद पर ऊँगली गोल गोल घूमने लगता , बेबी की छूट पानी से लपलप भर गई थी , उसकी पेंटी पूरी भीग चुकी थी ,

"अह्हह्ह्ह्ह रविइइइ सीईई प्लसस..." बेबी ने इक बार फिर चुमन तोड़ते हुए , रवि की आँखों में अखन दाल , मदहोशी में सिसकते हुए बोलै तोह रवि भी समाज गया के बेबी क्या कहना चाहती है ,

रवि , बेबी को अपनी कमर पर चढ़ाये बीएड के पास आया और उसने बेबी को बीएड पर गिरा दिया , रवि ने टीशर्ट ऊपर की तरफ खींच कर उतर दी , रवि की मस्कुलर बॉडी देख , बेबी अपने चूसै से लाल हुए होंठो को बार बार जीभ फिरा गीला करने लगी , दोनों इक दूसरे की आँखों में देख रहे थे , बेबी ने भी अपनी टीशर्ट उतर कर फेंक दी , उफ़ बेबी के कैसे हुए मोठे मोठे चुके , इक काली ब्रा में चमकने लगे , इक डैम गोल गोल , 36 साइज के , नरम नरम मास्स से भरे , मोठे मोठे चुके देख , रवि अपने होंठो पर जीभ फिरने लगा , तोह बेबी ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,

फिर रवि ने अपनी पेण्ट का बोटों खोल , अपनी पेण्ट निचे खींच दी , रवि का मोटा लम्बा लुंड अभ इक अंडरवियर में बेबी की आँखों के सामने था , रवि ने पेण्ट अपने पैरो से निकल दूर फेंक दी , और बेबी कुछ समाज पति , रवि ने अपना अंडरवियर भी उतर कर इक तरफ फेंक दिया ,

"ओह्ह्ह शठ..." बेबी सिसक उठी , उसकी आँखों के सामने काळा सांप जैसा , कला लुंड , हवा में जूल रहा था , इक डैम लोहे जैसा सख्त , लुंड की लम्बाई मोटाई देख , बेबी की छूट में इक सिरहन सी दौड गई , छूट का कोमल दाना फड़क उठा ,

"आईईईई अह्ह्ह्हह्हह बाबू धीरे..." बेबी ने थोड़ा दर्द थोड़ा मज़े में सिसकते हुए बोलै , जब रवि ने उसे बीएड पर गिरा , उसकी इलास्टिक वाली लोर को , पेंटी समेत निचे खींच कर उसके पैरो से निकल दिया , उफ़ बेबी शर्माने लगी , उसकी नरम मखमली छूट अभ इक डैम आज़ाद थी , खुली हवा में साँस ले रही थी , बेबी ने शर्मा कर अपनी मोती मोती जांगू को कास लिया , जो तेज़ रौशनी में चमक सी रही थी ,

"ओह्ह्ह जुहीय..." रवि ने बेबी की जांगू को अलग किया और उसके ऊपर लेट गया , बेबी ने कास कर , रवि को अपनी बहु में भर लिया और उसकी नंगी पथ , अपने नरम हाथो से सहलाने लगी ,

"अह्हह्ह्ह्ह बाबू सीई उम्म्म अह्ह्ह..." बेबी मज़े में सिसकने लगी , जब रवि उसकी नरम दूध जैसी सफेद गोरी गर्दन को पगलू की तरह चूमने लगा , रवि अपने होंठो से गर्दन को चूमते चूमते , अपने दांतो से काटने लगा , बेबी मचल उठी रवि की इस हरकत पर , वोह अपने गदराये चूतड़ बीएड पर घिसने लगी और अपनी छूट रवि के लुंड पर घिसने लगी , मखमली मुलाम छूट का एहसास प् रवि और भी वासना में दुब सा गया , रवि इक डैम से पीछे को उठ कर बेथ गया ,

"अह्ह्ह्हह बाबूउ उम्..." बेबी रवि के बालो में हाथ घूमने लगी , जब रवि ने उसके मोठे मोठे तनु (चुचु) में अपना चेहरा घुसा दिया , उफ़ बेबी के चुके सच में बेहद बड़े बड़े थे , बेबी की काली ब्रा बड़ी मुश्किल से उनको सम्बल प् रही थी , रवि ने बेबी की गोरी पथ को सहलाते सहलाते उसकी ब्रा का हुक खोल दिया , बेबी के कैसे हुए चुके किसी बॉल की तरह जम्प करते रवि के सीने में जा लगे , दोनों के मोह से सिसकारी निकल गई , बेबी के नंगे कड़क गुलाबी निपल रवि के चोदे सीने पर चुबने लगे , रवि तोह पागल सा हो उठा , उसने बेबी को पीछे बीएड पर गिरा दिया ,

"अह्ह्ह जुहीय तुम्हारे मम्मी उफ्फ्फ्फ़..." रवि ने बेबी की आँखों में अखन दाल बोलै तोह बेबी शर्माने लगी , उसने अपनी नली नली अखन बंद कर ली ,

"आईईएई सीईई..." बेबी का मुलाम जिस्म पूरा कम्प गया , जब रवि ने उसके कैसे हुए मोठे मोठे मम्मो को अपने हाथो में भर , कास कर दबा दिया "उम्म्म ष्ठीय अह्ह्ह्ह.." बेबी अध् खुली आँखों से रवि को देखने लगी , रवि ने निचे झुक बेबी के इक चुके को अपने मोह में भर लिया , उफ्फ्फ क्या एहसास था , नरम नरम मम्मो का कड़क निपल , रवि बेबी के कैसे हुए चुचु के गुलाबी कड़क निप्लो को अपने होंठो में भर चूसने लगा , जैसे कोई बचा दूध पे रहा हो ,

"आह्ह्ह्ह माआआआ सशह्ह्ह्ह उम्म्म बाबू प्लसस..." बेबी बीएड पर लेती मचलने लगी , उस से छूट की खुजलाहट अभ सेहन नै हो रही थी , छूट में गहरायी तक उसे खुजली हो रही थी , और इसका इक hi इलाज था , जब रवि का कला लुंड जड़ तक उसकी छूट में घुसता और रगड़ रगड़ कर उसे छोड़ता ,

"उम्म्म बबयय तुम्हारे चुकी उम्..." रवि अभ कड़क निप्लो को कास कास कर चूसने लगा , रवि अभ दोनों मम्मो को कास कास कर मसलते हुए , मम्मो के कड़क गुलाबी निप्पलों को हलके हलके दांतो से काटते हुए पूरा मोह में भर भर कर चूसने लगा , करीब 15 मिंट रवि बेबी के गोर मम्मो को चुस्त रहा , मसलता रहा , रवि ने मसल मसल कर दोनों दूध से भरे मम्मो को सफेद से लाल कर दिया , बेबी के मम्मो की इतनी चूसै पहले कभी नै हुई थी , उसकी छूट इक बार रास छोड़ चुकी थी , रवि ने उसके चुके चूस चूस कर उसे पागल कर दिया था , अभ वोह जोर जोर से चीखते हुए "अह्ह्हाईणन" भर रही थी , आखिर उससे रहा न गया , उसने रवि का चेहरा अपने दोनों हाथो में पकड़ लिया , उसकी आँखों में देखने लगी , रवि भी समाज गया , वोह उठा और बेबी की जांगू को छोड़ा कर , उसकी छूट को अपनी नक् लगा सूंघने लगा ,

"है मायआ आह्हः..." बेबी , रवि को अपनी छूट की खुशबु लेते देख , बेइंतहा शर्मा गई , उसने अपनी अखन जोर से बंद कर ली , पर रवि कहा रुकने वाला था , "उम्म्म सुरररपपपपपप सुररपपपपप..." रवि मखमली मुलाम रास से भीगी छूट को पूरा मोह में भर भर कर चूसने लगा , छूट से बेहटा नमकीन मीठा रास , रवि को और भी उत्तेजित कर रहा था ,

"अह्ह्ह्हह बाबूउ बुसस करूऊ आईईईई माआआ अह्ह्ह्ह..." बेबी अपना खूबसूरत चेहरा बीएड पर ेहडेर ोहडेर पटकते पागल सी होती हुई बोली , िका इक बेबी ने अपने चुके अपने हाथो में थम लिए और उनको कास कास कर मसलने लगी और साथ hi साथ अपने मुलाम दोड्या चूतड़ों को ऊपर उठा उठा , अपनी फूली हुई रसभरी छूट रवि के होंठो पर घिसने लगी ,

"उम् सूर्पपपप सुर्र्ररपपपपप उम्..." रवि सिस्कियाँ भरता , बेबी की छूट के होंठो को ऊपर से निचे तक चाट ते हुए , उसका रास पीटा जा रहा था , "अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कट्ट्ट्ट अह्ह्ह्ह..." बेबी चीख उठी , जब रवि ने अपनी जीभ सख्त कर , बेबी की छूट के अंदर घुसा दी , उफ्फ्फ रवि की लाल जीभ , बेबी की गोरी छूट के मुलाम होंठो को अलग करती , उसके नरम रास भीगे मास्स से रगड़ कहते जड़ तक अंदर घुस गई , उफ्फ्फ रवि छूट में अपनी जीभ अंदर बहार करते , अपनी जीभ से बेबी की मुलाम छूट को छोड़ने लगा , और बेबी अपनी कमर उचका उचका कर अपनी छूट छुड़वाने लगी ,

"आह्ह्ह्हह माआ मर्डर गईई मीटी अह्ह्ह्ह बाबूउ ऑर्डर चाटूवू अह्हह्ह्ह्ह अपनीइ दुहियी की छुट्ट्ट्ट हआ अह्ह्ह्ह को..." बेबी मज़े में पागल होते , चीखते छीलते , रवि का सार अपनी छूट पर दबाने लगी , उफ़ ऐसा लग रहा था , जैसे बेबी रवि का चेहरा अपनी छूट में घुसा देगी ,

"उम् सुरररपपपपप जुहीई अह्ह्ह्ह कटत कहा ही उम् सुरररपपपपपप ..." रवि और भी कास कास कर छूट में जीभ अंदर बहार करते हुए , दांतो से बेबी की छूट के मखमली होंठो को काट काट कर , बेबी की छूट से निकलते रास को निचोड़ते हुए बोलै ,

"हैए हैइए रवीए मज़ाआ अह्ह्ह्ह मूज़ी अह्ह्ह नयी पताआ..." बेबी अपनी कमर अकड़ते हुए , अपनी जांगू को और भी छोड़ा कर , अपनी छूट को पूरा खोलते हुए सिसकते हुए चीला कर बोली ,

"उम्म्म सुररपपपपप सुररपपपपप उम्म्म शठ..." रवि ने बेबी की छूट को चूसते चूसते , छूट के मोठे डेन को अपने दांतो में भर लिया और हलके हलके काट काट कर , अपनी जीभ छूट में घुसा घुसा कर , छूट को पूरा कास कास कर चूसने लगा , बेबी अपनी छूट के डेन पर होते हमले को सेह न पायी और "हैएएइ मायआ मर्डर गाइइइइइइ बाबूउ अह्हह्ह्ह्ह मई गाइइइइ..." बेबी ने जोर से चीखते हुए अपनी कमर को पूरा ऊपर उठा लिया , और जटके कहते हुए जड़ने लगी , उसकी छूट से रास का सैलाब सा ा गया , "उम्म्म सुररपपपप सुररपपपप..." रवि कुत्ते की तरह जीभ फिरा फिरा पूरा रास चाटने लगा , आखिर 20 मिंटो से चल रही छूट की चटाई अभ जाकर थम सा गई ,

बेबी तोह जैसे बेहोश सी हो गई , वोह तेज़ तेज़ हफ्ते अपनी संसू को काबू करने लगी , उसकी गोरी छूट रवि ने चाट चाट पूरी लाल कर दी थी , उसकी जंगे कम्प रही थी , उफ़ रवि ने बेबी के बदन का अंग अंग चूस डाला था ,

"अह्ह्ह्ह बबयय..." रवि , बेबी के साथ लेट ते उसे बहु में भर , उसके होंठो को चुम कर बोलै , पर बेबी तोह अभी अपनी संसू को काबू कर रही थी ,

"जुहू , काट कहा है..."

"हूँ , वोह ा जाएगीइ , पहले मुझे प्यार दू.." बेबी ने रवि की तरफ करवट ले , उसके होंठो को चुम कर बोलै ,

"हम्म , बाबू जैसा तुम कहो..." रवि ने बेबी के मसल मसल कर लाल किये चुके को इक बार और मसल कर , उठ कर बेबी की जांगू को छोड़ा कर , घुटनो के बल बेथ ते हुए बोलै ,

"ओह्ह्ह बाबू ढेरी करना..." बेबी ने रवि की मोठे लम्बे लुंड को देखते हुए थोड़ा घबराते हुए बोलै ,

"हूँ..." रवि ने अपने लुंड के मोठे टोपे को थूक लगा गीला करते हुए बोलै और अपने लुंड का टोपा बेबी की मुलाम चूसै से लाल छूट के होंठो में ऊपर से निचे तक घिसा दिया ,

"ोूईयीीी मम्मीयीय..." बेबी मज़े में मचल उठी , और रवि की तरफ देख हसने लगी ,

"जूही दाल दू..." रवि ने लुंड को तेज़ी से छूट के होंठो में ऊपर निचे कास कास कर रगड़ते हुए बोलै , "अह्हह्ह्ह्ह बाबू दाल दू ुम्मश्ह्ह..." बेबी अपने मोठे मोठे चुचु को अपने हाथो में पकड़ उनके निप्लो पर अपनी जीभ फिरते हुए बोली , उफ़ रवि और भी मदहोश सा हो गया ,

"अह्ह्ह्ह जुहीय तुम्हारी छूट अह्ह्ह कितनी गरम हैई..." रवि ने लुंड का टोपा छूट के नरम होंठो में फसा , बेबी की मोती जांगू को हाथो में थम , कास कर इक ढाका जड़ते हुए बोलै ,

"ौउइएएएएएएएए माआआ मरररीई मई आह्हः..." बेबी चीख उठी , पता नै दर्द से या मज़े में , पर जो भी हो उसकी छूट में आधा लुंड घुस चूका था , गोरी छूट में कला लुंड , क्या संगम था , गोर काळा का भेद भाव , जैसे ख़तम हो गया था ,

"अह्ह्ह जणू दर्द हुआए क्या..." रवि ने बेबी की तंग को अपने कंदो पर रख , उसके ऊपर झुक , लुंड को टोपे तक बहार खींच , पूरी जान लगा , कास कर इक ढाका और जड़ते हुए बोलै ,

"हैइए कट्ट्ट्ट मर्डरर दियाए कामिनी नीई आईईईईई मायआ बचा लूओ ..." बेबी अपनी मुलाम छूट में जड़ तक लुंड घुसते hi चीख कर बोली , उसकी आँखों से असनु ा गए ,

"सोररीयय जुहीय में निकल लेता हूँ...." रवि ने बेबी को दर्द में देख लुंड पीछे करते हुए बोलै ,

"आईईईई पहले अह्ह्ह अग्ग लगी थी टूजी..." बेबी ने रवि को अपने ऊपर खींच उसके पीठ पर हलके हलके थपड मरते हुए दर्द और मज़े में सिसकते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्ह जूही तुम्हारी छूट सच में उफ्फ्फ सच में अह्ह्ह बहुत नरम और गरम ही उफ्फ्फ और टाइट तोह पूछो मत्तट..." रवि ने बेबी की नली नली आँखों में ज़कते हुए , उसके चूसै से लाल हुए होंठो को बार बार चूमते हुए बोलै ,

"उफ्फ्फ्फ़ तू बड़ा कमीना ही अह्ह्ह पर मेरा हीी ी लव ू बाबू उमा..." बेबी हस्ते हुए रवि के पोरे चेहरे को चूमते हुए बोली ,

"बाबू बताओ न अह्ह्ह काट कहा हैई..." रवि ने धीरे धीरे लुंड छूट में अंदर बहार करते हुए बोलै ,

"आईईईई माआ अह्ह्ह्ह कटत बहार ा जोऊ..." बेबी ने अपनी कासी हुई छूट में लुंड अंदर बहार होते महसूस कर , मज़े में सिसकते हुए बोलै ,

तभी इक लकड़ी की अलमारी के पीछे से काट बहार ा गई , उफ्फ्फ उसकी सांसे बेहद तेज़ चल रही थी , उसने इक ब्लैक निघ्त्य पहन राखी थी , जो उसके घुटनो तक ा रही थी , उफ़ उसकी कासी हुई दूधया जंगे देख , रवि का लुंड और भी सख्त हो गया , काट धीरे धीरे अग्गे बढ़ बेबी के चेहरे के पास बेथ गई , वोह अचंबित सी हुई कभी रवि को देख रही थी कभी बेबी को तोह कभी बेबी की छूट में घुसे काळा लम्बे लुंड को , उफ़ उसकी मुनिया भी रास से भर गई थी ,

"अह्ह्ह तुम इक मिंट रुकू..." रवि पहले बोलने लगा था , पर उसका लुंड पूरा कड़क हो चूका था , कल रत से उसका कलपद हो रहा था , अभ वोह बस जड़ना चाहता था ,

"अह्ह्ह कट्ट्ट्ट उम् शह्ह्ह्ह..." बेबी ने काट का हाथ पकड़ उसे अपने ऊपर खींच लिया , काट भी किसी कठपुतली की तरह बेबी के ऊपर झुक गई , बेबी ने काट के होंठो पर अपने होंठ रख दिए , उफ़ रवि और भी मदहोश हो गया , उसने पहले कभी यह नै देखा था , रवि अभ तेज़ तेज़ पूरी जान लगा बेबी को छोड़ने लगा ,

"ठप्प्प थप्प्प्प अह्ह्ह्ह अह्ह्ह..." की अवाजिअं अभ रूम में गूंजने लगी , रवि बेबी के ऊपर पूरा झुक गया , बेबी के घुटने उसके कण्डु को टच करने लगे , अभ उसकी छूट में लुंड पूरा गहरायी तक अंदर बहार हो रहा था , रवि बेबी को ताबड़तोड़ छोड़ते हुए अपनी जीभ उन दोनों के होंठो के बेच घुसाने लगे , बेबी और काट इक दूसरे के होंठो को चूसते हुए रवि की जीभ को चूमने लगी ,

"आईएईए मा बाबू धीरी अह्ह्ह्ह..." बेबी जोर जोर से चीखते अपनी कमर उचकते पूरा लुंड जड़ तक अपनी छूट में लेते सिसकते चीखते हुए बोली , उसकी छूट अभ रास से भर गई थी , पिछले 15 मिंट से रवि उसकी छूट में लम्बे लम्बे ढके जड़ रहा था , िका इक रवि ने अपना लुंड बहार निकल लिया ,

"बेबी घोड़ी बनू जाननं..." रवि बेबी को आंख मरते हुए बोलै "कमीना कही का..." बेबी काट की तरफ देख हस्ते हुए बोली तोह काट भी हसने लगी ,

बेबी इक डैम से उठी और अपनी गांड ऊपर उठा अपनी सार काट की जांगू में दबा , पूरी घोड़ी बन गई ,

रवि काट को ऊपर से निचे तक घूरता बेबी के पीछे ा गया , रवि ने छूट रास से भीगे लुंड को छूट के होंठो में फसा दिया , और फिर बेबी की कमर को दोनों हाथो में थम , कास कर इक ढाका जड़ दिया "थप्प्प्पप्प.." की आवाज़ करता लुंड जड़ तक बेबी की छूट में घुस गया , रवि की जंगे बेबी के चूतड़ों से टकरा गई , जंगे चूतड़ों से टकराते hi चूतड़ों का मॉस सागर में उठती लेहरो की भाटी thar-thara गया ,

"ओईईईईईई मारर्र दियाआ माआ अह्ह्ह्ह कामिनी गगगग लगीई तुजीई अह्ह्ह..." बेबी काट की जांगू में अपने चेहरे घुसते चीख कर बोली ,

"अह्ह्ह्हह जानऊ तू ढेरी छोड़ने की चीज़ज़ थोड़ी ही उफ्फ्फ तुझे तोह कास कर छोड़ना पडेगा अह्ह्ह्ह तभी तुम शांत हो पाउगीय अह्ह्ह्हह..." रवि ने तेज़ तेज़ लुंड छूट में अंदर बहार करते हुए , बेबी के थोड़ा थोड़ा कुटाई से लाल हुए चूतड़ों पर हलके हलके थपड जड़ते हुए सिसक कर बोलै ,

"अह्ह्ह्हह बाबू उफ्फ्फफ्फ्फ़ ऑर्डर तेज़ज़्ज़ज़ अह्ह्ह ढेरी अह्ह्ह्ह तेज़ज़्ज़ज़..." बेबी पागल सी हुई अपनी गांड को अग्गे पीछे कर , तेज़ तेज़ छूट में लुंड लेते हुए चीखते छीलते हुए बोली ,

"जूही बाबू यह ली अह्ह्ह्हह्हह कटत कपडे उतारू ना अह्ह्ह..." रवि ने बेबी के चूतड़ों को अपने हाथो में थम कास कास बिजली से भी तेज़ ढके जड़ते हुए , काट की खूबसूरत आँखों में अखन दाल बोलै , तोह काट शर्माने लगी , उसने अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,

"एआईईईई बाबू छोड़ दोऊ अह्ह्ह अपनीइ जुहीय कोऊ आईईईई मा निशांआ बहुत्त खुशः होगीई..." बेबी चुदाई के नशे में मस्त हुई तेज़ तेज़ अपनी कमर अग्गे पीछे करते हुए बोली , पर काट ने जैसे hi बेबी के मोह से निशा का नाम सुना वोह थोड़ी चौंक सा गई , उसकी आँखों से असनु बह निकले ,

"अह्ह्ह्ह जुहीई उम्म्म तुम और निशा को साथ में छोड़ता अह्हह्ह्ह्ह उसे बहुत प्यार देता मी अह्ह्ह्हह...." रवि बेबी से बतिअन करते हुए , लुंड टोपे तक बहार निकल कास कास कर जड़ तक छूट में पेलते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह आईईईईई मायआ निशांआ अह्ह्ह्ह तुम्हारी जुहीईई अह्ह्ह्हह में गाइइइइ बाबू अह्ह्ह्ह और टीज़ज़्ज़ज़..." बेबी पागल सी होती हुई चीखते छीलते हुए बोली , बेबी अभ जड़ने के करीब थी , पिछले 30 मिंट से उसकी मखमली छूट में लुंड अंदर बहार हो रहा था , अज्ज बहुत कुटाई हुई थी उसकी नरम छूट की ,

"अह्ह्ह्हह ईठ लूओ दुहिइइइइइइ एहहह लूओ..." रवि भी बेबी की बतिअन सुन जैसे पागल सा हो गया , और कास कास कर ताबड़तोड़ जटके देने लगा , रवि ने आखरी के ढके इतने कास कर मरे , के बेबी का पूरा जिस्म कम्प सा गया , उसकी छूट की धजियां सी उड़द गयी ,

"आह्ह्ह्ह मी गइईईई अह्ह्ह..." बेबी काट की जांगू पर अपने हाथो को कास कर दबाते जटके खा खा कर जड़ने लगी , बेबी की छूट से बहते रास ने उसकी छूट को और भी कास लिया , "आह्ह्ह्हह में भी गयाए जुहीय..." रवि भी छूट का कसपन सेह न पाया और तेज़ तेज़ ढके जड़ता , बेबी की छूट में जड़ तक लुंड घुसाए जड़ने लगा , रवि जड़ते हुए बेबी के ऊपर झुक गया , बेबी भी बीएड पर पूरी लेट गई , रवि उसके ऊपर लेता , उसकी छूट में जड़ तक लुंड घुसाए इक असीम आनंद में डूबा जड़ता रहा और फिर बेबी की पथ को चूमने लगा ,

"अह्ह्ह्ह थैंक्सस जानू..." रवि वैसे hi बेबी के ऊपर लेते लेते उसके गालो को चुम कर बोलै ,

"अभ उठू ना अह्ह्ह्ह तुम बहुत भरी हूँ..." बेबी बेहद हस्ते हुए बोली ,

"ओह्ह सोल्ली..." रवि तुतला कर बोलै और बेबी के ऊपर से उठ , बीएड के केबिन से पीठ टिका बेथ गया , बेबी कुछ वख्त बाद काट की जांगू पर चेहरा घुमाये सीधी हो गई , लेकिन जो उसने देखा , उफ्फ्फ वोह अंदर तक हिल सा गई..

तो बे कुनिटेड.....
 
अपडेट-134

अभ अग्गे...

बेबी ने जैसे hi काट की तरफ देखा , वोह कम्प सा गई , बेबी का दूडिया बदन पूरा नंगा था , अभी अभी हुई जबरदस्त चुदाई ने बेबी का रोम रोम हिला कर रख दिया था , वोह बेइंतहा खुश थी , पर अपनी काट , अपनी निशा को रट देख , उसकी अखन नाम सी हो गई , और यह बात रवि ने भी महसूस की ,

"कट्ट्ट्ट , तुम रो क्यों रही हो , बोलो न , मुज़से कोई गलती हो गई , बताओ न , प्लस कटत , कुछ तोह बात कारु..." बेबी इक जटके में उठ , काट के असनु भीगे चेहरे को देखते हुए बोली , उफ़ काट रट हुए बेहद मासूम और प्यारी लग रही थी ,

"हम्म , काट क्या बात है , देखो , अगर तुम प्यार नै करना है , तोह बोल दो , में , में , तुम चाहता हु न के तुम्हारे जिस्म को , में अभी चला जाता हु..." रवि भी बेबी की बात का समर्थन करते हुए नाम आँखों से बोलै ,

पर काट बस रो रही थी , उसकी आँखों से असनु जार जार बह रहे थे , फिर काट इक पल में गुस्से से चीला उठी .."बेबी , y...yy..yeh...n..nn...nisha ...k..kon...hai.." काट ने बेबी की आँखों में देख रट हुए बोलै ,

रवि और बेबी इक दूसरे का चेहरा देखने लगे , उनको समाज नै ा रहा था , वोह क्या जवाब दे , तभी काट बीएड से उठी और रूम से बहार भाग गई ,

"काट , काट , मेरी बात तोह सुन लो , प्लस , इक बार ..." बेबी बेइंतहा रट हुए उठ कर काट के पीछे जाने लगी , पर रवि ने उसका हाथ पकड़ लिया ,

"बेबी कपडे तोह पहन लो , उफ्फ्फ , सॉरी , यह सब मेरे कारन हुआ है , मुझे माफ़ कर दो बाबू..." रवि ने अपनी आँखों में असनु भरते हुए बोलै ,

"नई , नई , बाबू , y..yy..yeh..m..mm..meriiii.. गलती ही..." बेबी ने अपने कपडे पहनते हुए , रट हुए बोलै , सेक्स करते वख्त दोनों को कोई होश न रहा था और निशा का नाम बेबी के मोह से निकल गया था ,

"बेबी , t..tt..tum रुको , में लता हु काट को..." रवि अपने कपडे पहन रूम से बहार जाते हुए बोलै ,

"में भी अति हु..."

"नयी , मने इक बार बोलै न..." रवि ने पीछे पलट बेबी को घूर कर देखा , तोह बेबी ने अपनी नज़रियन ज़ुका ली , वोह बीएड पर बेथ और भी रोने लगी ,

रवि तेज़ी से रूम से बहार निकला और काट को तलाशने लगा , पर काट तोह कही न थी , अभ रवि भी परेशान सा हो चूका था ,

"काट , काट , कहा हो जणू..." रवि चेहरे में दुःख और दर्द के भाव लिए , घर से बहार निकल गया , उसे महसूस हुआ काट घर से बहार चली गई होगी , रवि घर से बहार आया , तोह उसने देखा , दूर घाना जंगल , जो अँधेरे में डूबा , बेहद ब्यांक और डरावना लग रहा था , इक शांति थी , इक ख़ामोशी थी , चारो तरफ घोर san-nata था ,

जो जंगल दिन में हरा भरा दीखता था , रत को वही जंगल मौत का दूसरा रूप परतीत हो रहा था , अज्ज अमावस की रत थी , आसमान में बस छोटे छोटे टारे टिमटिमा रहे थे , पर उनकी रौशनी इस धरती पर कहा पहुँच पति , वोह बस देखने लियाक थे , अज्ज चाँद का साइज बेइंतहा छोटा सा लग रहा था , अज्ज वोह भी रौशनी नै दे रहा था ,

"उफ्फ्फ , कहा गई , मेरी नटखट काट..." रवि बेहद चिंता में अपने सार के बाल खुजाता हुआ बोलै , "उफ़ में भी बेवकूफ हु..." रवि ने अपने बाल खुजाते , अपने माथे पर हाथ मरते हुए बोलै , रवि ने अपनी अखन बंद की और काट को महसूस करने लगा ,

रवि महसूस करने लगा , काट का असली शरीर , जो सेकड़ो सूरजु (sun's) जैसा चमकदार था , काट बस रौशनी से बानी थी , पारी लोग में उसका न कोई जिस्म था , न कोई आकर , अपना जिस्म उसने खुद निर्मित किया था ,

"वोह रही मेरी जान.." रवि खुद से hi मुस्कराते हुए बोलै , क्यों की कबीले के लकड़ी से बने पल के दूसरी तरफ जंगल में , इक बड़े से पेड़ के पीछे , इक सफेद रौशनी , अपनी बेइंतहा चमक भिखेर रही थी , रवि से काट कही नै चिप सकती थी , उसका असल रूप hi ऐसा था , रवि के होंठो पर इक मुस्कान फैल गई , ऐसे लग रहा था , जैसे पेड़ के पीछे किसी ने सूरज आकाश से उतर निचे रख दिया हो ,

रवि तेज़ी से वह पहुँच गया , काट पेड़ से अपनी पीठ टिकाये निचे बैठी , अपने घुटनो में अपना चेहरा छिपाये , बेइंतहा रो रही थी , रवि भी उसके साथ hi बेथ गया , काट ने असनु भीगी आँखों से रवि को थोड़ा सा देखा , पर फिर रोने लगी ,

"हम्म , तोह अप्प यहाँ हो , जानती हो , में तुम कही न देख , बहुत उदास और परेशान हो गया था , खैर , अभ अप्प मिल गई हो , चलो घर चले..." रवि ने बिना काट की तरफ देखे , सामने जंगल के अँधेरे में दुबे पढ़ो को निहारते हुए बेहद उदास आवाज़ में बोलै , पर काट ने कोई हलचल न की , वोह वैसे hi रोटी रही ,

"उम् , हासष्ठ , काट , तुम लगता है , तुम बेबी को जानती हो , पर , पर , तुम उसका दर्दनाक अतीत नै जानती हो , जानती हो निशा कोण थी..." रवि अभी बोल hi रहा था के काट रट हुए गुस्से में चीला उठी ,

"मुझे नै सुन्ना , मुझे नै जानना , के , के , निशा कोण थी , क्या थी , क्यों थी , बेबी ने , बेबी ने मुझे धोका दिया है , वोह , वोह , मुज़से जायदा उस निशा को प्यार करती है , अह्ह्ह्हह में मर क्यों नै गई , और , और , उसने यह बात मुज़से छुपा कर राखी , में , में , कल जा रही हु , में , चातताककककक..." काट अभी बोल hi रही थी के रवि ने कास कर इक थपड उसके चेहरे जड़ दिया ,

"तुम , तुम , खुद को समज़ती क्या हो , तुम पागल हो , बेवकूफ , मने कहा न , मेरी बात सुनो , हस्सश्ठ , तुम , तुम जाना है , तोह चली जाओ , पर , पर , इक बार सुन तोह लो..." रवि ने बेइंतहा गुस्से में अपनी अखन लाल करते हुए बोलै , काट रवि को इतना गुस्से में देख , अंदर तक कम्प सा गई ,

"तोह सुनो , निशा कोण थी , क्या थी , और क्यों थी..." फिर रवि अपनी आँखों में असनु भरते हुए , काट को बेबी और निशा के रिश्ते के बारे में बताने लगा , रवि ने काट को बताया , के कैसे वोह कोमल से दूर हो , सब कुछ भूल , अपनी याददाश्त खो , इक भिखारी बन गया , फिर जूही की इज्जत बचाना सनी से , फिर जूही और निशा का उसके जीवन में एना , धीरे धीरे उसका ठीक होना , जूही का उसके प्यार में पढ़ जाना , फिर निशा की मौत , और उसका जेल में जाना , फिर बेबी का वापिस उसके जीवन में एना , बेबी के साथ रिमी को बचाना , बेबी का दुबारा उसके प्यार में पढ़ जाना , बिमान शाह का बेबी को कैद कर लेना तुम्हारी मदद से , रवि ने सुरु से लेकर आखिर तक सब बता दिया , जैसे जैसे काट सुनती गई , वोह पगलू की तरह रोने लगी , रवि पूरी कहानी सुना , काट की तरफ देख कर बोलै...

"हासष्ठ , यह थी बेबी की कहानी , कैसे इक मासूम सी लड़की जूही , इक बहुत बड़ी कातिल बन गई , निशा , निशा , इक नाम नै है , अभ , अभ , तुम हो निशा , हाँ काट , अभ तुम hi जूही की निशा हो , मेरे दिल पर हमेशा इक बोझ रहा , मेरे कारन , बेबी ने निशा को खो दिया , निशा उसके बचपन की दोस्त , उसकी बहिन , उसका प्यार , निशा ने मरते मरते , अपनी साडी डोलत जूही के नाम कर दी , इतना बड़ा दिल था उसका , जानती हो , उस दिन वाशरूम में तुम जब बेबी ने चूमा , और तुम उससे प्यार करने लगी , बेबी बस तुमसे अपना पीछा छुड़वाना चाहती थी , पर झरने में गिरने के बाद , जब वोह तुमसे मिलने गई , जब , जब , उसने तुम्हारी दर्दनाक हालत देखि , बेबी ने उसी वख्त तुम अपना लिया , बेबी को लगा , उसकी निशा उसे वापिस मिल गई है , जानती हो , बेबी मुज़से भी हज़ार गुना जायदा तुमसे प्यार करती है , अगर , अगर , तुम इक पल भी उस से दूर हो गई , मर जाएगी वोह , में , में , तुमसे बस इक hi बात कहना चाहता हु , कल जाते वख्त बेबी को मर देना , वैसे भी वोह , तुम्हारे जाने के बाद घुट घुट कर मर जाएगी , इस से ाचा , इक hi पल में , उसे इस दर्द से मुक्ति दिला देना...." रवि बेइंतहा आँखों में असनु भर , रट हुए , अपनी बात ख़तम कर , उठ कर घर की तरफ जाने लगा , पर कुछ कदम चल वोह रुक गया ,

"काट , में , में , तुमसे यह नै कहुगा , के तुम रुक जाओ , या तुम निशा बन जाओ , पर , पर , मेरी बेबी ने अपनी जिंदगी में बहुत दर्द सहा है , अरे , बड़े से बड़ा मज़बूत दिल वाला भी , इतने दर्द में खुदखुशी कर लेता है , पर वोह लड़ती रही , अपने अप्प से , तुम , तुम , उसके जीवन में आयी तोह , उसका जीवन खुशियों से भर गया , मने , मने , उसे इतना खुश कभी नै देखा , प्लस काट , में हाथ जोड़ता हु , मत जाओ , प्लस , में कभी तुम्हारे करीब नै ायुगा , बस तुम मेरी बेबी के लिए रुक जाओ , प्लस , में अपनी बेबी को फिर से दर्द में रट , पागल होते नै देख सकता , प्लस काट , प्लस..." रवि वही घुटनो के बल बेथ रोने लगा , उसने जूही की दर्दनाक हालत महसूस की थी , जब निशा मर गई थी , उफ़ उस वख्त को बयान करना बेवकूफी होगी ,

"नयी , नयी , बुसस कारु , बस करूओ..." काट अपने कनु पर दोनों हाथ रख , बेइंतहा चीखते , छीलते , पगलू की तरह रट हुए बोली , फिर वोह इक डैम से उठी और घर की तरफ भागने लगी , उसके होंठो से बस बेबी बेबी निकल रहा था , वोह अपने असनु साफ करते , पागल सी हुई घर की तरफ भाग रही थी ,

रवि आँखों में असनु लिए मुस्कराने लगा , वोह इस बात को भली भांति जनता था , अज्ज काट और भी बेबी के करीब ा गई थी , उसके पिता फिर से हार गए थे , पारी लोग में उसके घमंड और ेहनकर ने उसे हवा दिया था , पर इस जनम में वोह , सबको प्यार से जीत रहा था , और जब बात प्यार की अति है , तब इंसान पूरे ब्रह्माण्ड को अपने घुटनो पर ला सकता है , रवि भी उठ कर घर की तरफ चलने लगा ,

काट रट हुए घर के अंदर आयी और भाग कर अपने रूम में घुस गई , उसने देखा , उसकी बेबी , उसकी जान , बीएड पर बैठी , अपने घुटनो में सार दिए रो रही थी , काट का दिल और भी दर्द से भर गया , उसे खुद पर गुस्सा ऐनी लगा , क्यों उसने अपनी जान का दिल दुख दिया ,

"बब्यीयीय..." काट इक दर्दनाक चीख मरते चीला कर बोली और भाग कर बेबी को अपनी बहु में भर लिया , वोह पागलो की तरह , बेबी के पूरे चेहरे को चूमने लगी , बेबी बस रट हुए उसे देख रही थी ,

"बब्यीय , मुझे माफ करदू , प्लसस , माफ करदु , मेरी जान , में , में , तुम्हारी निशा हु , हाँ जान , में hi निशा हूँ , बेबी प्लसस , प्लस , बबयय , में तुम्हारे बिना मर जोगीई , प्लस बेबी..." काट पागल सी होती हुई , बेबी के पूरे चेहरे को चूमती , बेइंतहा दर्द में दुबे , रट चीखते हुए बोली , तोह बेबी और भी रोने लगी , उसने काट को अपनी बहु में भर लिया , और , और , उसको अपने साथ लेकर , बीएड पर लेट गई ,

"बेबी , मुझे माफ..." काट ने अभी इतना hi बोलै था के बेबी ने उसके असनु भीगे हसीं गुलाबी नरम होंठो पर अपने चूसै से थोड़ा थोड़ा सुज़े होंठो को मिला दिया , बेबी बेइंतहा प्यार से काट के होंठो को चूमने लगी , धीरे धीरे काट शांत होने लगी , इक दूसरे का प्यार पाकर , दोनों अपने हर गम को , हर दर्द को भूल सा गई , कुछ hi वख्त बीता था , दोनों असनु भीगे चेहरे लिए , इक दूसरे को देख , मुस्करा रही थी ,

"निशा..."

"हाँ , हाँ , में तुम्हारी निशा हु , में निशा हु ..." काट ने पागलो की तरह बेबी के पूरे चेहरे को चूमते हुए बोलै तोह बेबी हसने लगी ,

"उफ़ काट , रवि से प्यार करना है तुम..." बेबी ने आँखों में शरारत लिए , काट को आंख मरते हुए बोलै ,

"बढ़ में जाये रवि , में बस तुमसे प्यार करती हु , इक किश दो न जान..." काट ने आँखों में असनु भर , अपने नरम लाल होंठो को जीभ फिरा गीला करते हुए बोलै , तोह बेबी चौंक सा गई , ऐसा तोह बस निशा hi बोलती थी ,

"बढ़ में जाये राहुल , में तोह तुज़से प्यार करती हु..." बेबी के कनु में निशा के शब्द सुनाई देने लगे , जब वोह उसे dr.rahul का नाम लेकर चिडया करती थी , बेबी की अखन भर आयी , वोह सोचने लगी , काट सच में उसकी निशा है ,

"क्या हुआ जान , मने कोई गलती की , अरे , मने बस मज़ाक में बोलै था , में रवि से बहुत प्यार करती हु , अगर वोह न होता , तोह तुम जूही , कभी बेबी न बनती और फिर मुझे मेरी जान कैसे मिलती..." काट ने आँखों में असनु भरते हुए बोलै , तोह बेबी मुस्कराने लगी , बेबी ने अपने नरम लाल होंठ काट के होंठो से मिला दिए , दोनों प्यार करने लगी , और वख्त गुजरने लगा , रत बीतने लगी ,

रवि रूम के दरवाजे पर खड़ा दोनों को प्यार में डूबा देख रहा था , इक बार बेबी ने उसे देखा , तोह रवि ने अपने होंठो पर ऊँगली रख , उसे चुप रहने का इशारा किया , रवि ने धीरे से रूम का दरवाजा बंद कर दिया और सेड्यां चढ़ , अपनी कोमल के पास चल पढ़ा , जो शयद अभ भी उसका इंतज़ार कर रही थी ,

रवि रूम के अंदर घुसा और रूम में देखते hi उसके होंठो पर इक मुस्कान दौड गई , क्यों की कोमल बीएड की केबिन से पीठ टिकाये , उसका hi इंतज़ार कर रही थी , उसके हाथ में कोई किताब थी , जिसे वोह अपना वख्त बिताने के लिए रीड कर रही थी ,

"उफ़ कैसी हो जणू..." रवि अग्गे बढ़ बीएड पर बेथ , कोमल की आँखों में अखन दाल बोलै , कोमल अपने भाई को देख मुस्कराने लगी ,

"कुछ खास नै भइआ , बस बुक रीड कर रही हु..." कोमल ने मुस्करा कर बोलै , और अपने हाथ में पकड़ी बुक इक तरफ रख दी ,

"हूँ , ाचा , मेरी बात सुनो , आपसे मने कुछ बोलै था , खाना कहते वख्त , यद् है..." रवि ने कोमल को अपनी बहु में भरते हुए , उसके गोर गालो को चूमते हुए बोलै ,

"हाँ यद् है , पर उस से पहले , हमें कही जाना है , चलो उठो , और ायो मेरे साथ..." कोमल ने अपने भाई के होंठो को चुम कर बोलै ,

"उफ़ कोमल , इतनी रत को कहा जाना है..." रवि ने कोमल के साथ बीएड से उठ ते हुए बोलै ,

"शह्ह्ह्ह , बस मेरे साथ ायो अप्प , अपनी अखन बंद करो..." कोमल ने अपने भाई की तरफ देखते हुए बोलै , फिर रवि ने अपनी अखन बंद की , दोनों इक डैम से गयाब हो गए , जब कुछ पलु बाद रवि ने अपनी अखन खोली तोह दोनों इक अँधेरे भरे कमरे में खड़े थे ,

"यह हम कहा ा गए कोमल..." रवि ने उस बेइंतहा पुराने रूम में as-pas नज़र दौडते हुए बोलै , उसे लग रहा था , जैसे वोह पहले भी इस रूम में ा चूका है , पर उसे ठीक तरह से यद् नै था ,

"भइआ , यही से आपका दूसरा जीवन सुरु हुआ था , कुछ यद् आया , हम्म , दिमाग पर जोर डालो..." कोमल ने मुस्कराते हुए इक खली पढ़ी कुर्सी पर बैठते हुए बोलै ,

"हम्म , यह रूम , कब आया था में , कुछ कुछ यद् है , थोड़ा थोड़ा , डुंडला सा , अरे , हाँ , अभ यद् आया , यह तोह पिता जी की हवेली है , उफ़ , ऐसी रूम में , उनसे मेरी पहली मुलाकात हुई थी , जब में नया नया वैम्पायर बना था , और ऐसी रूम में मुझे वोह मनहूस रिंग मिली थी , जिसने तब से लेकर अभ तक , मेरा जीना हराम कर रखा है , ओह्ह , पर कोमल अभ हम यहाँ क्यों ए हैं..." रवि ने सब कुछ यद् कर थोड़ा घम्बिर भाव अपने चेहरे पर लेट हुए बोलै ,

"भइआ , पिता जी आपसे मिलने चाहते थे , कल हमने जुंग जो जीती थी , शयद उसी बारे में बात करनी हो पिता जी को..." कोमल ने मुस्करा कर बोलै , तभी रूम में घोर अंधकार फैल गया , चारो तरफ सफेद धुआँ सा उठने लगा , रवि भी अग्गे बढ़ कोमल के साथ वाली कुर्सी पर बेथ गया , रूम में वोह सफेद धुआँ अभ बहुत बढ़ चूका था , रवि और कोमल को अपने पेअर घुटनो तक दिखाई नै दे रहे थे , िका इक कमरे में लाल रौशनी फैल गई , लाल रौशनी और अँधेरा ें दोनों का संगम कुछ अलग सा hi दिख रहा था , रवि तोह चौंक सा गया था , तभी उनके सामने खली पढ़े बड़े से सिंघासन पर , काल अपना कला लिबास धारण किये वजूद में ा गया , उसका न तोह कोई रूप था न कोई आकर ,

"परनाम पिता जी..." कोमल ने अपने दोनों हाथ जोड़ काल को परनाम किया , कोमल की देखा देखि रवि ने भी हाथ जोड़ परनाम कर दिया ,

"रवि , कोमल , मेरे बचो , में तुमसे बहुत अधिक खुश हु , तुमने अपनी समजदारी , अपनी suz-buz से , उस बेइंतहा ताकतवर जादूगरनी को अंधकार लोग में कैद कर दिया , और उस बुराई के प्रतीक जोकर को ख़तम कर दिया..." काल अभी बोल hi रहा था के कोमल बेच में बोल पढ़ी ,

"जी पिता जी , हम जीत तोह गए , पर रिंग कहा गई , यह हम नै जानते , पिता जी रिंग को ढूंढ़ना होगा , कही वोह गलत हाथिओं में न पढ़ जाये..." कोमल ने बेहद चिंता भरे भाव अपने खूबसूरत चेहरे पर लेट हुए बोलै ,

"हाँ , पिता जी , कोमल ठीक बोल रही है , रिंग कहा है..." रवि भी बेहद चिंता में बोलै ,

"हम्म , आखरी बार रिंग किसके पास थी .." काल ने बेहद भरी आवाज़ में बोलै ,

"मेरे पास , मने उस रिंग को उस नीले पत्थर पर रखा था , उसके बाद का मुझे कुछ यद् नै..." रवि ने अपने दिमाग पर जोर डालते हुए बोलै ,

"रवि , मेरे बेटे , में तुम बताता हु , तुमने उस रिंग को , उस नीले पत्थर पर रखा , रिंग ने उस नीले पत्थर की साडी ऊर्जा सोख ली , वोह नीला पत्थर उन 6 अमर मनइयन में से इक था जो तुम्हारे पिता राजा ाबून ने इस ब्रह्माण्ड का निर्माण करते वख्त बनाई थी , उन में से इक मणि शेतीअन ने चोरी कर ली , यह वही मणि थी , रिंग तोह पहले hi शेतीअन का जीता जगता अंश थी , अभ उस अंश को उसकी खोयी हुई साडी शक्ति मिल गई है ..."

"मतलब , अभ वोह रिंग , इक अंश न होकर , पूरा शेतीअन बन गई है , ओह्ह नू , पिता जी अभ क्या होगा..." कोमल ने बेहद घबराते हुए बोलै ,

"पर पिता जी , शेतीअन ने ऐसा क्यों किया , उसे क्या जरुरत थी , इक छोटी सी रिंग में कैद होने की..." रवि भी बेहद चिंता में बोलै ,

"हम्म , तुम दोनों के कारन , पारी लोग में सुहाना अपना काम पूरा न कर पायी , उसे कोमल की बलि देनी थी , इक पवितर लड़की की बलि , कोमल की बलि मिलते hi शेतीअन पोरे ब्रह्माण्ड पर कब्ज़ा कर लेता , जब सुहाना ने 6 लड़कयों की बलि दी तब शेतीअन ने अपना जिस्म का इक अंश सुहाना को झूठ बोल कर , इक शक्ति देने के बहाने , उसके शरीर में दाल दिया , सुहाना पर शेतीअन ने पूरा कब्ज़ा कर लिया , पर सुहाना , कोमल की बलि न दे पायी , और तुम्हारी बहिन रमा ने , तुम्हारी माँ मलिका सोना की मदद से उस शेतीअन के अंश को इक रिंग में दाल दिया , सदियों तक रिंग हज़ारो लोग ने धारण की , पर रिंग बस इंतज़ार कर रही थी , कोमल के जनम लेने का , फिर जब तुम वैम्पायर बने तब मुझे मज़बूरन तुम वोह रिंग देनी पढ़ी..."

"पिता जी , अप्प मुझे वोह रिंग न देते..."

"बीटा , तब और कोई रास्ता नै था , तुम दियना को मरना था और फिर तुम जिद्द करके बैठे थे के तुम अपने परिवार के पास जाना है , बीटा जो लिखा होता है उसे कोई नै ताल सकता , तुम वोह रिंग धारण करनी hi थी , फिर तुम्हारे जरिये , वोह रिंग तुम्हारी पत्नी सीमा के पास पहुँच गई , सीमा तब नै जानती थी के वोह पिछले जनम में सुहाना थी , पर शेतीअन का वोह अंश , वोह रिंग सीमा को पहचान गई थी , अभ रिंग सीमा के हाथिओं कोमल की बलि दिलवाना चाहती थी , सीमा के रिंग धारण करते hi , उस रिंग ने सीमा को अपना गुलाम बना लिया , जैसे सुहाना को बनाया था , पर तुम्हारी मौत रमा के हाथिओं हो गई और कोमल ने खुदखुशी कर ली (part 4 एन्ड में) , रिंग फिर से हार गई , तुम्हारी बहिन रमा ने बड़ी चालाकी से सीमा से वोह रिंग वापिस ले ली और जादूगरनी रहनुमा को पहना दी , रमा अपनी माँ सीमा को बचाना चाहती थी , रमा ने तुम दोनों को फिर से जिन्दा कर दिया , पर रिंग की शक्ति ने तुम दोनों को वैसा बना दिया जैसे तुम पारी लोग में थे , जानते हो , रिंग ने ऐसा क्यों किया..."

"जनता हु पिता जी , उफ़ , तेन की में कोमल से दूर राहु , उसे छू न पाव , क्यों की डेविल को शाप मिला था वोह रूही को हाथ तक नै लगा सकता था , और रिंग चाहती थी के कोमल पवितर रहे , जब तक कोमल पवितर है तब तक hi वोह कोमल की बलि दे सकती है..." रवि ने बेहद उदासी में बोलै , अपने भाई को यु उदास देख कोमल भी उदास हो गई ,

"हम्म , हाँ यही कारन था , अभ रिंग उस जादूगरनी के हाथ में थी , तब उस रिंग ने रहनुमा को अपना गुलाम बना लिया , फिर उसके हाथो वोह नीला पत्थर इस धरती पर लेकर आयी , उस नीले पत्थर में शेतें खुद था , फिर तुम दोनों जानते हो , रहनुमा ने जुंग छेद दी , उस महा शक्ति के बहाने , क्यों की रिंग जानती थी , तुम वोह महा शक्ति किसी को नै डोज , जब तुमने उस रिंग को उस नीले पत्थर पर रखा , तब शेतीअन उस पत्थर से निकल अपने अंश से मिल गया , उसका अंश उस रिंग में था , अभ वोह रिंग नै , वोह खुद शेतीअन है , जानते हो वोह खुद इस धरती पर क्यों आया है..."

"नै पिता जी..." कोमल ने उदास आवाज़ में बोलै ,

"कोमल , मेरी बची , वोह पूर्णिमा की रत अभ करीब है ..."

"कोनसी पूर्णिमा की रत ..." रवि बेहद चिंता में बोलै ,

"वही रत , जिस रत सुहाना को कोमल की बलि देनी थी , अज्ज से ठीक 6 महीने बाद वोह पूर्णिमा की रत होगी , उस दिन इक बहुत बड़ी घटना घटेगी , उस दिन महा शक्ति जग उठेगी , और शेतीअन उसी दिन कोमल की बलि देना चाहता है , रवि तुम नै जानते , अगर शेतीअन ने उस रात कोमल की बलि दी , तोह शेतीअन उस महा शक्ति का मालिक बन जायेगा , फिर पूरा ब्रह्माण्ड उसका गुलाम हो जायेगा , सचाई और धरम नष्ट हो जायेगे..." काल ने बेहद चिंता में बोलै ,

"उफ़ , में ऐसा नै होने दूंगा , पिता जी वोह रिंग कहा है , अभ तोह और भी जरुरी है उस रिंग को ढूंढ़ना..." रवि ने कोमल की तरफ देख , बेहद गुस्से और चिंता में बोलै ,

"बीटा , तुम जानना चाहते हो , वोह रिंग कहा है ..." काल ने बेहद ब्यांक गरजती आवाज़ में बोलै ,

"जी पिता जी..." रवि ने बेहद उत्सुकता वश पूछा ,

"वोह रिंग , तुम्हारे पास है , तुम्हारे अंदर..." काल ने रवि की तरफ अपना हाथ करते हुए बोलै , हाथ तोह जैसे था hi नै , बस उसका पहना लिबास hi रवि की तरफ हुआ था ,

"क्याआ..." कोमल और रवि दोनों इक साथ चीख कर बोले , दोनों डरे सहमे , इक दूसरे की तरफ देखने लगे ...

तो बे कुनिटेड.....
 
अपडेट-135



अभ अग्गे...

रवि और कोमल अपने पिता काल की बात सुन , बेहद सहमे , बेहद घबराये से , इक दूसरे को देख रहे थे , पर , काल के चेहरे पर कोई भाव नै था , उसका तोह कोई चेहरा hi नै था , सदियाँ बीत गई थी , पर काल को किसी ने नै देखा था , इक माया hi थी जो काल का हर रहस्य जानती थी , काल और उसकी यह हवेली , अपने अंदर हज़ारो रहस्य छिपाये बैठी थी ,

"y...yy...yeh...k..kk...kk..kya...h..ho..g..gya.." रवि ने बेइंतहा चिंता भरे भाव , अपने चेहरे पर लिए , हकलाते हुए बोलै ,

"भइआ , अप्प , अप्प , चिंता मत करो , प्लस.." कोमल ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"कैसे चिंता न करू , कैसे , पिता जी अभ क्या होगा..." रवि ने बेहद नाम आँखों से काल की तरफ देखते हुए बोलै ,

"हम्म , रवि , कोमल , यह बहुत बड़ी चिंता की बात है , और मेरे बेटे , क्या तुम जानते हो , उसने तुम hi क्यों चुना..."

"पिता जी , में कोमल का भाई हु इस लिए , या में पारी लोग का प्रिंस हु , या में हेलल का प्रिंस हु , इस लिए , ओह माय गॉड , में समाज गया पिता जी , में सब समाज गया..." रवि ने रूम में ेहडेर ोहडेर चलते हुए , बेहद चिंता में अपने माथे पर हाथ मरते हुए बोलै , कोमल खामोश कड़ी , अपने भाई को देख रही थी ,

"भइआ , अप्प क्या समाज गए..."

"कोमल , शेतीअन का अपना कोई शरीर नै होता है , जैसे भगवन का , न तोह कोई रूप है न आकर , हम जैसे चाहे , जिस रूप में चाहे , उनको मान सकते हैं , ऐसी लिए तोह कहते हैं , इस दुनिआ के कण कण में भगवन का वस् होता है , भगवन का अपना कोई रूप नै , भगवन कैसे दीखते हैं , यह किसी ने नै देखा है , हम बस उनके अवतारों को पूजते हैं , जो इंसान जैसे दीखते हैं , जैसे शिव , कृष्णा , विष्णु , ब्रह्मा , ऐसी तरह शेतीअन का भी कोई रूप नै होता , वोह बस किसी भी इंसान पर हावी हो जाता है , तभी तोह कहते हैं , वोह बहुत ाचा इंसान था , इक डैम से शेतीअन बन गया , क्यों पिता जी मने ठीक बोलै न..." रवि , कोमल की आँखों में अखन दाल उसे समझते हुए बोलै ,

"वह , वह , मेरे बेटे , तुम बेइंतहा बुद्धिमान हो , तुमने बिलकुल ठीक बोलै , न तोह भगवन का कोई रूप होता है , और न शेतीअन का , वोह जरुरत पढ़ने पर , किसी भी रूप में ा सकते हैं , पर , भगवन ने इंसान बनाया , वोह खुद भी इंसान जैसे अवतार ले सकते हैं , पर शेतीअन यह नै कर सकता , शेतीअन को भगवन के बनाये इंसानो पर hi हावी होना पढता है , भगवन रौशनी का प्रतीक होता है और शेतीअन अंधकार का..."

"हाँ पिता जी , शेतीअन चाहता तोह सुहाना पर पूरा हावी हो सकता था , वोह सुहाना के अंदर समां सकता था , पर वोह ऐसा कर न पाया , पता नै क्यों , क्या कारन होगा , ऐसी लिए उसे अपना छोटा सा अंश सुहाना के शरीर में डालना पढ़ा , पर , पर , में तोह डेविल हु , मने पाप किया था , इस ब्रह्माण्ड का सबसे बड़ा पाप , अपनी hi बहिन से प्रेम करने का पाप , पारी लोग में पिता जी ने मुझे , हेलल में कैद कर दिया , इक दरिंदा बना दिया , जब , जब , अपने पहली बार मुझे रिंग दी थी , मने बहुत आसानी से उस रिंग को धारण कर लिया था , शेतीअन मुझे पहचान गया था , में कोमल का भाई हु , जिसने उसका मकसद पूरा न होने दिया पारी लोग में , और , और , अभ , ओह्ह्ह , पिता जी में कैसे बोलू यह..." रवि ने पूरी बात घंभीरता से कर , आखिर में अखन नाम करते हुए बोलै ,

"अभ क्या भइआ , भइआ बोलो न , मुझे बेहद दर लग रहा है..." कोमल ने आँखों में असनु भर रट हुए बोलै ,

"बेटी कोमल , अभ शेतीअन रवि के हाथिओं तुम्हारी बलि दिलवाना चाहता है , इक कारन यह है के रवि हेलल का प्रिंस है , और दूसरा कारन , वोह रवि से बदला लेना चाहता है , जब रवि ने पहली बार रिंग को धारण किया , तब से hi शेतीअन खुद इस धरती पर ऐनी का रास्ता खोजने लगा , फिर सीमा ने रिंग को धारण किया , फिर जादूगरनी रहनुमा ने , और रहनुमा उस नीले पत्थर को इस धरती पर ले आयी , और , और , शेतीअन बड़ी चालाकी से खुद उस रिंग में घुस गया , अपने अंश से मिल गया , और सबसे बड़ी बात , उसने रवि का शरीर प् लिया..." काल अभी बोल hi रहा था के कोमल बेच में बोल पढ़ी ,

"पिता जी , क्या , क्या , भइआ उस रिंग को उतर नै सकते , रिंग तोह कोई भी अपनी ीचा से उतर सकता है..." कोमल ने इक रौशनी की किरण देखते हुए बोलै बेहद अंधकार में ,

"नयी , पहले बात अलग थी , पहले रिंग में इतनी शक्ति नै थी , पर अभ , खुद शेतीअन उस रिंग में दाखिल हो चूका है , अभ रिंग अपनी ीचा से रवि का शरीर छोड़ दे तोह ठीक है , वार्ना और कोई रास्ता नै , मुझे तोह ऐसा hi दिख रहा है..." काल ने बेहद उदास आवाज़ में बोलै ,

"अह्ह्ह्हह , यह मेरे साथ hi क्यों होता है , क्यों , क्यों , मने बस प्यार किया है , पिता जी , में , में , कोमल से दूर हो जाउगा , वार्ना , क्या पता , वोह रिंग , वोह शेतीअन , मेरे हाथिओं क्या करवा दे , पर , पर , हॉष्ह , वोह मुज़से बात भी नै कर रहा , पहले रिंग मुज़से बात करती थी , ऐसा क्यों पिता जी..." रवि ने घुटनो के बाल बेथ बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"रवि , मेरे बेटे , अभी 6 महीनो में बहुत वख्त पढ़ा है , और , में तुम भविष्ये नै बता सकता , जो लिखा होगा , वोह होकर hi रहेगा..."

"तोह , तोह , क्या में अपनी कोमल को मर दूंगा , पिता जी , अप्प मुज़से वादा करो , में अपनी कोमल को मरू , उस से पहले अप्प मुझे मर देना , पिता जी , मेरी कोमल बच तोह जाएगी न , बताओ न पिता जी , बताओ..." रवि ने बेइंतहा दर्द में दुबे रट हुए बोलै ,

"भइआ , प्लस रोना बंद करो , प्लस , आपके प्यार को पाने के लिए मुझे मरना भी पढ़ा , तोह हस्ते हस्ते जान दे दूंगी , प्लस भइआ रोना बंद करो..." कोमल अपने भाई को अपनी बहु में भर , उसके चेहरे को बेइंतहा चूमते हुए बोली ,

"रावी , अभ तुम जाओ , जो होना है , वोह होकर hi रहेगा , पर उस से पहले , तुम अपनी कोमल को बचाना है..." काल अभी बोल hi रहा था के रवि और कोमल चौंकते हुए उसकी तरफ देखने लगे ,

"मतलब , किस से..."

"रवि , वोह लोग , वोह लोग , कभी यह नै चाहेंगे , के शेतीअन अपने मकसद में कामयाब हो , वोह ें 6 महीनो से पहले hi कोमल को मरने की , हर नाकाम कोससिह करेंगे , तुम कोमल की रक्षा करनी है , उस दिन तक , जिस दिन महा शक्ति जग उठेगी , उस पूर्णिमा की रात तक , तुम्हारी कोमल की जान को अभ हर दिन , हर पल , खतरा बना रहेगा , वोह बेइंतहा शक्तिशाली लोग हैं , इस धरती की रक्षा वोह सदियों से करते ा रहे हैं , वोह रक्षक हैं इस धरती के , तुम उनसे लड़ना होगा , और कोमल को उस दिन तक जिन्दा रखना होगा , अभ तुम अपने प्यार की परीक्षा देनी है , अगर तुम्हारा प्रेम सच्चा हुआ , तोह मेरे बेटे , शेतीअन तोह क्या , भगवन भी , तुम दोनों को अलग नै कर पायेगा , मने तुम ऐसी लिए बुलाया था , अभ वोह लोग एना सुरु करेंगे , तुम कोमल को जिन्दा रखना है..." काल अभी बोल hi रहा था के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"पिता जी कोण है वोह लोग , वोह अचे हैं या बुरे..." रवि ने कोमल की तरफ देख कर बोलै , कोमल उसकी तरफ hi देख रही थी , उफ़ असनु भीगी आँखों में , वोह बेइंतहा मासूम और खूबसूरत लग रही थी ,

"हम्म , बीटा , वोह लोग सचाई और धरम के रक्षक हैं , जब जब भी उनको लगता है , इस धरती को , इस धरती के लोग को , किसी इंसान से खतरा है , तब वोह अपनी जान की परवाह किये बिना , उस इंसान को मरने के लिए किसी भी हुड तक चले जाते हैं , वोह रक्षक चिप कर रहते हैं , उनको अज्ज तक किसी ने नै देखा , अभ तक उनको पता चल गया होगा , के शेतीअन धरती में प्रवेश कर चूका है , और कोमल की बलि देना चाहता है , अभ वोह रक्षक बस कोमल को मरने का सोच रहे होंगे , बीटा , तुम उनसे लड़ना होगा , कोमल को बचाना होगा..." काल ने बेहद भरी और उदास आवाज़ में बोलै , उसकी आवाज़ में अपने बेटे और बेटी के लिए बेइंतहा चिंता थी ,

"भइआ , वोह , वोह , मुझे मर देंगे , में आपके पास रहना चाहती हु , आपके साथ जीना चाहती हु , मेरा क्या कसूर है , मेरी क्या गलती है , भइआए , अभ क्या होगा..." कोमल अपने पिता काल की बतिअन सुन और भी डरते हुए , बेहद रट हुए बोली ,

"शह्ह्ह्ह , तेरा भाई अभी जिन्दा है , तू क्यों चिंता करती है , पूरी दुनिआ जला दूंगा , अगर तुझे खरोच भी आयी तोह , ेहठ , मेरी आँखों में देख , मुझ पर विश्वास है तुम..." रवि ने कोमल का असनुईओं से भीगा मासूम चेहरा अपने हाथिओं में थम , उसकी आँखों में अखन दाल बोलै ,

"huu..."komal ने रट हुए हाँ में सार हिला दिया ,

"बस , अज्ज के बाद , ऐसी पल , ऐसी लम्हे के बाद , हमेशा तेरे साथ रहुगा , जब तक मेरे जिस्म में खून का इक इक कटरा बह रहा है , में तेरी हिफाज़त करुगा , अभ रोना नै , में हु न , पिता जी , अभ अग्गे क्या करना है , क्या में यह बात , अपनी प्रेमिकायिओं को बता दू..." रवि ने पहले कोमल की तरफ और आखिर में काल की तरफ देखते हुए बोलै , रवि का सीधा सीधा इशारा , अपनी हर चाहने वाली की तरफ था , उसके पास , उसकी अपनी आर्मी थी , जो इक पल में बिना सोचे समझे उसके लिए जान दे सकती थी ,

"नै , अभी रहने दो , में जो कहुगा वही तुम करना , अभी उनकी जान को खतरे में मत डालना , अभी अपना जीवन वैसे hi गुजरो , जैसे पहले गुजर रहे थे , कोमल मेरी बची , हम सब तुम्हारे साथ हैं , तुम डरने की जरुरत नै , रावी , अभ यह शेतीअन तुम ताकत देगा , कोमल की रक्षा करने के लिए , अभ तुम जाओ , पर इक बात का ख्याल रखना , वोह तुम चोट पहुंचा सकते हैं..."

"क्या , पर कैसे , में इक दानव हु , इक डेविल , में अमर हु , मुझे कोई नै मर सकता..."

"यह तुम्हारी सोच है , उन रक्षको के पास , ऐसे हथयार होंगे , जो तुम जखम देंगे , तुम इंसानो जैसा दर्द होगा , चाहे तुम अमर हो , तुम मर नै सकते , पर , पर , उनके astar-shastar उन लोग ने सालो की कड़ी साधना और योग से निर्मित किये हैं , वोह तुम इंसानो जैसा दर्द दे सकते हैं , तुम्हारी चोट भरने में कुछ दिनों का वख्त लग जायेगा , तुम्हारा हर जखम खुद बा खुद भर जायेगा , पर तुम कमज़ोर हो सकते हो , तुम कोमल की रक्षा बेहद चतुराई और suz-buz से करनी होगी , अपने अमर होने के घमंड में मत बह जाना , और उन रक्षको को कभी भी अपने से कमज़ोर मत समज़ना , वोह बेहद चालक हैं , अभ जाओ तुम दोनों..." काल इतना बोल गयाब हो गया , रवि भी अपनी कोमल को साथ लेकर वापिस कबीले में पहुँच गया , उफ़ उसके पिता ने उसका जीवन नाराज सामान कर दिया था , क्या वोह झुक जाते और क्या रवि अपनी बहिन कोमल को प् , उनको अपने प्रेम के अग्गे ज़ुका देता , खैर यह तोह ऐनी वाले वख्त में छिपा था ,

कुछ hi पल बीते थे , रवि अपनी कोमल को अपनी बहु में भरे बीएड पर लेता हुआ था , रवि सीधा लेता था , और कोमल उसकी तरफ करवट ले , उससे चिपक कर सोई हुई थी , कोमल ने कास कर अपने भाई को अपनी बहु में जकड रखा था , जैसे वोह अपने भाई से इक पल भी दूर न होना चाहती हो , उफ़ क्या प्रेम था दोनों का , हज़ारू दर्द थे , हज़ारो गम थे , पर थे तोह दोनों इक साथ hi ,

"भइआ.."

"हूँ..."

"भइआए , मुझे मौत से कोई दर नै , में , में , बस आपसे इक बार प्यार करना चाहती हु , बस इक बार , फिर चाहे कुछ भी हो जाये , पर..." कोमल अभी बोल hi रही थी , रवि ने उसकी तरफ करवट बदल , उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए , उफ्फ्फ दोनों के होंठ क्या मिले , दोनों हर दर्द , हर गम , हर दर , सब भूल सा गए , रवि ने बहुत प्यार से कुछ पल , कोमल के गुलाबी नरम होंठो को चूसा , और फिर उसकी आँखों में देखने लगा ,

"कोमल , में हु न , हम कभी न कभी तोह , हॉशह्ह्ह , कोमल , में तुम वचन देता हु , उसी पूर्णिमा की रत को , में तुमसे शादी करुगा , चाहे मुझे भगवन से लड़ना पढ़े , चाहे शेतीअन से..." रवि ने कोमल के सार पर हाथ रख बेहद घम्बिर होते हुए बोलै ,

"सच..." कोमल मुस्कराते हुए बोली ,

"मच..." रवि ने मुस्कराते हुए कोमल के होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"भइआ , यह कैसे होगा , मेरा मतलब..." कोमल अभी बोल hi रही थी के रवि ने उसके लाल नरम होंठो पर अपनी ऊँगली रख दी , कोमल अपनी नली नली आँखों की पलके जपका , अपने भाई को देखने लगी ,

"शहहहहह , मने कहा न , में तुमसे शादी करुगा , तोह बात यही ख़तम , तुम उस पूर्णिमा की रत का इंतज़ार करो , तुम उस रत का इंतज़ार इस लिए करना के तुम्हारा भाई तुम्हारे साथ शादी करेगा , समाजी मेरी पगली जणू ..." रवि ने कोमल के होंठो को बार बार चूमते हुए बोलै , तोह कोमल बेहद खुश हो गई , पर रवि को पता था , यह इतना आसान न होगा , " जणू अभ सो जाओ , ायो , मेरी बहु में..." रवि ने इतना बोल , कोमल को अपनी बहु में भर लिया , वोह उसके बाल सहलाने लगा , तोह कुछ hi वख्त बाद कोमल गहरी नंद में सो गई , पर रवि नै सोया था , उसे इक दर था , उसे अपनी कोमल की रक्षा जो करनी थी , वोह बाकि बची रत जगता रहा , अपनी बेइंतहा खूबसूरत बहिन को सोते देखता रहा , सच में , कोमल जैसा हसीं , शयद भगवन से और कोई न बना था , रवि मन hi मन सोच रहा था , इतनी खूबसूरत लड़की की रचना भगवन ने कैसे कर दी , उसने अग्गे बढ़ कोमल के होंठो को इक बार चुम लिया , कोमल नंद में कसमसाते हुए अपने भाई से और भी चिपक गई , बेइंतहा खूबसूरत कोमल.....

डे-2 [Subah ke 8 baje...]

"उठो तुम दोनों , अरे रवि , तुम तोह जग रहे हो , उफ्फ्फ अज्ज जीवन में पहली बार तुम , सुबह सुबह उठे देखा है , वार्ना तुम सोते हुए उठाना , इक जुंग जीतने जैसा काम होता है..." सीमा ने मुस्कराते हुए रवि की तरफ देख कर बोलै , रवि बीएड पर सीधा लेता हुआ था , और कोमल उससे चिपक कर सो रही थी , कोमल ने अपनी खूबसूरत जंग अपने भाई की जांगू पर चढ़ा राखी थी , वोह बेइंतहा मासूम और प्यारी लग रही थी ,

"शहहह , कोमल सो रही है..." रवि ने सीमा की तरफ देख अपने होंठो पर इक ऊँगली रखते हुए बोलै ,

"उम् , ठीक है , में आधे घंटे बाद अति हु..." सीमा ने अग्गे बढ़ रवि के होंठो को चुम कर बोलै ,

सीमा रूम से बहार चली गई , पर रवि अपनी कोमल को अपनी बहु में भर , उसके खूबसूरत चेहरे को देखने लगा , रवि को सोई हुई कोमल बेहद हसीं लग रही थी ,

रवि सोच रहा था , क्या वोह कोमल की बलि देगा , क्या रिंग मुज़से यह करवा पायेगी , उफ़ में कोमल को कही दूर भी नै बेहज सकता , कोमल मर जाएगी पर मुज़से इक पल भी दूर नै होगी , उफ़ में अपनी बहिन को कोई आंच न आने दूंगा , क्या हो , अगर में खुद को मर लू , पर शयद रिंग मुझे यह भी न करने दे , िका इक रवि को यद् आया , अज्ज उसे मिथु सोनल से मिलने जाना है , रवि ने सोचा वोह अपनी कोमल को अपने साथ लेकर जायेगा , ें 6 महीनो में , कोई भी मेरी कोमल को छू भी न पायेगा , कितनी प्यारी है मेरी जणू ,

उफ़ यह क्यों मेरे लिए इतने दुःख , दर्द सेहन कर रही है , कितनी खूबसूरत है , हज़ारू लड़के इसके कदमो में बिष जाये , पर यह पगली बस मेरे लिए पागल है , कितनी नादाँ है , पारी लोग में सदियों तक तड़पती रही , अकेलेपन में सड़ती रही , पता नै , हम दोनों का क्या होगा , पता नै , हम दोनों इक हो पाएंगे या नै , पता नै , में अपनी कोमल से शादी कर पाउगा या नै , उफ़ में कोमल से शादी करुगा , यह मेरा अंतिम फ़ासिला है ,

रवि अभी सोच hi रहा था के कोमल के बेमिसाल , हसीं जिस्म में थोड़ी हलचल हुई , उसने कसमसाते हुए अपनी अखन खोल ली , अपने भाई से खुद को लिप्त प् , वोह शर्माने लगी , उसके लाजवाब रसभरे होंठो पर इक मुस्कान थी ,

"मोती उठ गई अप्प , उम्मा..." रवि ने बेहद प्यार से कोमल का माथा चूमते हुए बोलै , तोह कोमल अपने भाई के चेहरे पर अपनी नरम उंगलियों फिरने लगी ,

"उफ़ कोमल हमें सोनल देदी के पास जाना है , तुम यद् है न..." रवि ने कोमल की तरफ करवट बदल , उसके नरम होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"भइआ..."

"हम्म.."

"में आपसे बहुत प्यार करती हु , में हर जनम में , बस आपसे hi प्यार करुँगी , अगर , मुझे कुछ हो जाये , तोह..."

"इक थपड मरुँगा , अगर दुबारा ऐसा बोलै भी या ऐसा सोचा भी , मने कहा था तुमसे , में हु न , तोह किस बात का दर , कोमल अगर तुम नै तोह में भी नै , हम दोनों के शरीर अलग हैं , पर हमारी संसू की दूर इक है , मुझ पर विश्वास करो , में , में , किसी से भी लड़ सकता हु , अगर तुम मेरे साथ हो , तुम बस हमारी सुहागरात का सोचो..." रवि ने पहले बेहद गुस्से में पर आखिर में मुस्कराते हुए बोलै ,

"ोुछः , अप्प बहुत गंदे हो..." कोमल ने अपनी नज़रियन ज़ुका शरमाते हुए बोलै ,

"क्यों , आपको सुहागरात नै माननी , बोलो न..." रवि ने कोमल के हसीं लबु को चुम कर बोलै ,

"मुझे नै पता..." कोमल ने अपना हसीं चेहरा अपने भाई के चोदे मज़बूत सीने में छिपाते हुए बोलै ,

"रवि , कोमल , यह लो , छाए पियो..." सीमा ने रूम में एते हुए , दो cup's में डाली छाए रवि और कोमल को देते हुए बोलै ,

"देदू , अप्प बैठो , में फ्रेश होकर अति हु..." कोमल यह बोल वाशरूम में चली गई ,

"बीवी साहिबा , ओह्ह , मलिका सुहाना जी , हमें भी अपने हुसैन का जैम पीला दो , अप्प तोह अपनी बेटी में hi खोयी रहती हो ..." रवि ने सीमा के करीब हो , उसके होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"हम्म , क्या बात है , जो सुबह सुबह इतना प्यार ा रहा है मुझ पर..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"उफ़ , आपको सब पता चल जाता है , ाचा सीमू , हमें अज्ज जाना है , सोनल बुला रही है , तोह तुम भी मेरे और कोमल के साथ चलो..." रवि ने सीमा को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"उम् , में क्या करुँगी वह , रवि मुझे घर पर बहुत काम होता है , तुम जा ायो , में फिर किसी दिन जा ौगी..."

"नौपे , देदू , आपको हमारे साथ चलना है , तोह चलना है , आपको हमारी कसम..." कोमल ने वाशरूम से बहार एते हुए , बीएड पर बेथ , सीमा को अपनी बहु में भर , उसके गोर गोर गालो को चुम कर बोलै ,

"प्लस सीमू.."

"प्लस देदू.."

"ाचा , ाचा , ठीक है , कब जाना है..." सीमा ने जैसे hi यह बोलै , रवि और कोमल ने , उसे और भी कास कर अपनी बहु में भर लिया और उसके गालो को बार बार चूमने लगे ,

"सीमू , बस 9 बजे निकलते हैं , तुम त्यार हो जाना , में तब तक , अपनी मस्तीखोर बहनो से मिल अत हु..." रवि अपनी छाए ख़तम कर रूम से बहार जाते हुए बोलै , अभ रूम में कोमल और सीमा अकेली थी ,

"देदू थैंक्स..." कोमल ने अपने भाई के जाते hi सीमा को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"उम् , मेरी जान , तुम कुछ कहो और में न करू , ऐसा कभी हो सकता है..." सीमा ने अपना चेहरा कोमल की तरफ कर उसकी आँखों में अखन दाल बोलै ,

"ोुछः , देदू , गन्दा काम नै..." कोमल ने बेहद मज़े में सिसकते हुए बोलै , जब सीमा ने उसके मोठे मोठे बूब्स को धीरे से अपने हाथो में पकड़ दबा दिया ,

"ाचा जी , हम मलिका सुहाना हैं , हम जो चाहे वोह कर सकती हैं , हमें आपसे बेइंतहा प्रेम है , आपका यह नियाब रास से भरा हुसैन , हमें हर पल बेचैन करता रहता है ..." सीमा ने कोमल की नली नली आँखों में डूबता हुए बोलै , सच में जो भी कोमल को देख लेता था , वोह उसके हुसैन में मदहोश सा हो जाता था ,

"हहै , अप्प न , अप्प न , बिलकुल भइआ जैसी हो.."

"वोह कैसे..."

"अरे वोह भी , हमें ऐसी तरह मीठा मीठा परेशान करते हैं , और अप्प भी , वैसे आपका हुसैन भी काम नै..."

"हाय , कोमल जी , हम और आपके भइआ , कब से इस इंतज़ार में है , के कब आपके हुसैन का मीठा रास हमें चखने को मिले , कोमल , तुम्हारे बूब्स सच में बहुत बड़े और मोठे हैं.." सीमा ने वासना में अखन लाल करते हुए , बेहद मदहोश आवाज़ में बोलै , दोनों की सांसे बेहद तेज़ चल रही थी ,

"आपके भी..." कोमल ने बेहद शरमाते हुए बोलै ,

"माँ , माँ , कहा हो अप्प..." तभी दोनों इस आवाज़ को सुन , इक दूसरे से दूर हो गई , तभी रूम में रमा ा गई , उसकी सांसे बेहद तेज़ चल रही थी , उसके बाल बिखरे हुए थे , जैसे किसी ने उसे कास कास कर चूसा हो , शयद वोह रस्ते में अपने भइआ को मिल गई थी , तभी उसके लाल लाल होंठ चूसै से और भी लाल हुए पढ़े थे ...

वही अभ...

"भइआ , अप्प यहाँ पर..." यह आवाज़ थी मासूम रिमी की , जो बीएड पर लेती अपना मोबाइल चला रही थी और शूरति पास में बेथ लैपटॉप पर कुछ काम कर रही थी ,

"मेरा दिल किया , तोह में ा गया , कल तुमसे वादा किया था , पर पूरा न कर पाया , सोचा तुम दोनों से प्यार भरी बतिअन कर लू.." रवि ने रिमी के साथ बेथ , बीएड के केबिन से अपनी पीठ टिकते हुए बोलै ,

"बस बतिअन..." शूरति ने अपने लाल नरम होंठो को जीभ फिरा गीला करते हुए बोलै ,

"ouu-huu , बस बतिअन नै , और भी बहुत कुछ..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै और रिमी को अपनी बहु में भर , उसके होंठो को कास कर चुम लिया ,

"अह्ह्ह भइआ , इक मिंट , पहले मेरी बात सुन लो , वोह ख़ुशी देदू अपनी माँ से मिलने गई है , उसने बोलै था आपको बता दू , वोह शाम को ा जाएगी..." रिमी ने बेहद मासूमियत से बोलै और अपने भाई के होंठो पर अपने पियासे होंठ रख दिए...



तो बे कुनिटेड......[friends apke replys ke jawab kal dunga , jo apne pichle update par kiye the , sorry thoda busy tha me]
 
अपडेट-136



अभ अग्गे...

सुबह के 8:30 बज रहे थे , रवि अपनी बहनो से प्रेम कर रहा था , जब से रिमी और शूरति को रवि ने सुहाना से बचाया था , तब से रवि ने दोनों से प्यार नै किया था , करीब 4 साल पहले दोनों बहनो को , रवि ने जिस्मानी सुख दिया था , पता नै कैसा प्यार था रिमी और शूरति का , के उन पर जिस्मानी वासना हावी hi नै होती थी , ऐसी को सच्चा प्यार कहते हैं , जिस में जिस्मानी प्रेम की कोई जरुरत hi नै रहती ,

रवि ने अज्ज सोचा , क्यों न , अपनी रिमी और शूरति को भरपूर प्यार दे , और उसे दोनों से कुछ बात भी करनी थी , खैर अभी तोह रवि उनके साथ प्यार भरे पल बिता रहा था , रूम से सिसकने की अवाजिअं ा रही थी ,

वही दूसरी तरफ...

"माँ , अप्प यहाँ हो , में आपको सभी के रूम में देख आयी..." रमा मुस्कराते हुए कोमल और सीमा के पास एते हुए बोली ,

सीमा और कोमल दोनों बीएड पर बैठी हुई थी , कोमल , रमा और सीमा का प्यार देख , कभी कभी हरिजन हो जाती थी , दोनों में बेइंतहा प्रेम था , सीमा और रमा को देख , कोमल को अपनी माँ की यद् ा गई ,

कोमल अपने मन में अपनी माँ का सोचने लगी , कोमल ने कल जो सुना था , उसके बाद उसे दर सा था , कही उसे कुछ हो न जाये , कोमल इक बार अपनी माँ से मिलना चाहती थी , पर उसकी माँ कहा थी , यह उसे नै पता था ,

"देदी कहा खो गई अप्प , हम कब से आपको आवाज़ दे रहे हैं..." रमा ने कोमल के हाथ पर हाथ रख उसे आवाज़ देते हुए बोलै ,

"ओह्ह , कही नै..." कोमल ने जबरन मुस्कराते हुए बोलै ,

"ाचा , देदू , अप्प सब सोनल देदी के पास जा रहे हो , में भी आपको साथ चालू..."

"जरूर , तुम पूछने की जरुरत नै..."

"ok , पर जाना कब है..."

"बीटा , तुम त्यार हो जाओ , बस फिर निकलते हैं.." सीमा ने प्यार से रमा के सर के बाल सहलाते हुए बोलै ,

"जी , माँ , में त्यार होती हु..." रमा इतना बोल उठ कर चली गई ,

रमा के जाने के बाद सीमा और कोमल फिर से बतिअन करने लगी ,

"कोमल तुम कुछ उदास हो , क्या बात है..."

"नै देदू , ऐसा कुछ नै , बस यु hi , ाचा , इक बात पुछु आपसे.." कोमल ने बात बदलते हुए बोलै ,

"हम्म.."

"आपको पारी लोग का कुछ यद् है.."

"सब कुछ , मुझे मेरा पूरा जीवन यद् है , बहुत बुरी थी में , सब कुछ तबाह कर दिया मने..." सीमा ने अपनी अखन नाम करते हुए बोलै ,

"ऐसा नै है देदी , अपने प्यार पाने की कोससिह की , और प्यार पाना गुनाह नै , बस अप्प इक बार भइआ से बात कर लेती.." कोमल ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"बात , हूँ , यह तोह मेरी तरफ देखता तक नै था , बस रूही , रूही , जाप्ता फिरता था , खैर , कोमल पिछले जनम में जो भी हुआ , वोह बीत गया , इक तरह से वोह मेरी गलती थी , कोमल इस जनम में हम साथ हैं , और सबसे बड़ी बात , तुम मेरी हो , में तुम्हारी हु , में तुमसे पापनः मोह्हबत करती हु , इक बहिन की तरह , इक प्रेमिका की तरह..." सीमा ने बेहद घंभीरता से बोलै , कोमल बस उसे देखती रही और सुनती रही ,

"हम्म , देदू , अपने ठीक कहा , जो हो गया सो गया , देदू , अगर कभी , मुझे कुछ हो जाये , तोह भइआ को सम्बल लेना..."

"न भाई यह नै होगा मुज़से..." सीमा ने जब यह बोलै तोह कोमल चौंक सा गई ,

"क्यों..." कोमल ने बेहद चौंकते हुए बोलै ,

"कोमल , हस्सश्ठ , तुम नै जानती , जब जब भी तुम , अपने भइआ से दूर हुई हो , उफ्फ्फ तुम नै जानती उनकी क्या हालत हो जाती है , जब तुम जंगल में उनसे दूर हुई , तब 7 दिन वोह कोमा में रहे , जब वोह 7 सालो के लिए घर छोड़ कर गए , तब इक भिखारी से भी बदतर जिंदगी गुजारी उनहोनु , कोमल , तुम तुम्हारे भइआ के लिए क्या हो , उफ़ तुम खुद नै जानती..." सीमा ने बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,

"पर देदू , में बस..." कोमल ने बेहद नाम आँखों से बोलै , पर वोह अपनी बात पूरी भी नै कर पायी थी के सीमा बेच में hi बोल पढ़ी ,

"par-var कुछ नै कोमल , प्लस , तुम इस बार उनसे दूर मत जाना , कोमल , वोह तुम्हारी जुदाई इक पल भी बर्दाश्त नै कर सकते , वोह टूट जाते हैं , तिनका तिनका भिखर जाते हैं , उफ़ मने उनकी हालत महसूस की थी , वोह किस कदर तुम चाहता है , तुम सोच भी नै सकती , अगर तुम कुछ भी हुआ , या तोह वोह मर जायेगा , या पूरी दुनिआ को तबाह कर देगा..." सीमा ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"देदू , में भइआ से कभी दूर नै जोगी , में बस इतना बोल रही हु , अगर किस्मत ने हमें जुड़ा कर दिया , या किसी ने मुझे माँ..." कोमल अभी इतना hi बोली थी , सीमा ने उसके कंधु पर हाथ रख , उसे जिंजोड़ते हुए बेहद गुस्से में बोलै ,

"नई , कोमल , इस बार नै , इस बार बिलकुल नै , में तुम वचन देती हु , जब तक में सांसे ले रही हु , अपनी अंतिम साँस तक , में तुम्हारी रक्षा करुँगी , किसी में इतनी हिमेट नै , के मेरे होते हुए , कोई तुम कुछ कर पाए , अभी तुमने मेरा असली रूप देखा कहा है , तुम भी जानती हो में क्या हु..." सीमा ने बेइंतहा गुस्से में अखन लाल करते हुए बोलै ,

"हम्म , जानती हु , पर वादा करो , उस रूप में अप्प कभी नै ायुगी , प्लस देदू , में नै चाहती , अप्प उस रूप में ायो..." कोमल ने रट हुए बोलै , उसे पता था , सुहाना का वोह रूप कितना ब्यांक था ,

"नई , अगर बात , तुम्हारी जान पर बन आयी , तब मुझे उस रूप को धारण करना hi होगा , में तुम्हारे और रवि के लिए , किसी भी हुड तक जा सकती हु , ाचा , अभ तुम कुछ मत सोचु , भगवन करे , ऐसा कभी न हो , में सबके लिए खाना बना देती हु , तुम त्यार हो जाओ..." सीमा , कोमल का माथा चुम , इतना बोल रूम से बहार चली गई , और कोमल कुछ सोचने लगी , कोई बेच का रास्ता ,

दूसरी तरफ....

"हास्सःहः , भइआ थैंक्स , अपने हमें प्यार दिया..." रिमी ने तेज़ तेज़ सांसे भरते हुए , अपने भाई के कंधे पर सार रखते हुए बोलै ,

रिमी और शूरति , अपने भाई के साथ लेती हुई थी , रवि बेच में लेता हुआ था , बिलकुल नंगा , उसके इक तरफ रिमी लेती हुई थी , और इक तरफ शूरति , रवि ने दोनों को भरपूर प्यार दिया था , दोनों अंतर्मन से त्रिपत हो चुकी थी ,

"रिमु , थैंक्स किस बात का , उफ़ अभ क्या करू , तुम दोनों मुज़से hi प्यार करती हो , खैर , अभ सोच रहा हु , तुम दोनों की शादी कर दू..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"रिमी , यह शादी क्या होती है..." शूरति ने रिमी की तरफ देखते हुए बोलै ,

"पता नै देदू , मने तोह पहली बार सुना है..."

"अरे शादी मतलब , जब इक लड़का लड़की , किसी मंदिर में अग्नि के 7 फेरे लेते हैं , और लड़का उस लड़की को अपने घर ले अत है , फिर वोह लड़की हमेशा उस लड़के के पास रहती है..." रवि ने दोनों को समझते हुए बोलै ,

"भइआ , लड़का और लड़की सेक्स भी तोह करते हैं..." रिमी ने थोड़ा शरमाते हुए बोलै ,

"हाँ करते हैं , और वोह लड़की अपने पति के लिए वफादार रहती है ..."

"तोह भइआ , हम भी तोह वफादार है , हमने बस आपसे hi प्यार किया , अप्प 7 साल हमसे दूर गए , तब भी हमने बस इंतज़ार किया , हम बस आपसे hi प्यार करती हैं , भइआ इक लड़की अपने पति के लिए अपना कुँवारापन बचा कर रखती है , हमने वोह भी आपको दे दिया , अभ बस जान बच है , अगर अभ भी आपको हमारे प्यार पर शक है , तोह हमारी जान ले लू..." शूरति ने बेहद अखन नाम करते हुए बोलै , उसकी आँखों में असनु ा गए थे ,

"नै शूरति , मेरा वोह मतलब नै था , हासष्ठ , सच कहु तोह , मां और ममी से दर लगता है , वोह क्या सोचेंगे , अगर तुम दोनों ने मुज़से शादी की..." रवि अभी बोल hi रहा था , के शूरति बेच में बोल पढ़ी ,

"भइआ , उनका नाम भी मत लो..." रिमी ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"क्यों..."

"वोह , वोह , भइआ..."

"क्या , वोह , वोह , सीधा तरह बताओ , क्या बात है..."

"भइआ , हमने मम्मी , पापा को बता दिया के हम दोनों बस आपसे hi प्यार करती हैं..." शूरति ने वैसे hi गुस्से में बोलै ,

"क्या..."

"हाँ , देदू , ठीक बोल रही है..." रिमी ने बेहद मासूमियत से बोलै ,

"पर , हासष्ठ , पर क्यों..."

"भइआ , पापा , मेरी शादी करना चाहते थे..."

"कब.."

"जब , अप्प घर छोड़ कर चले गए थे , और जब हम शहर वापिस ा गए थे , उसके कुछ महीनो बाद पापा मेरे लिए इक रिश्ता लाये थे , पर मने मन कर दिया , उनहोनु हर तरह से मुझे मानाने की कोससिह की , पर मेरा दिल नै मन , में बस आपको चाहती हु , उनहोनु मुज़से पूछा , तब मने बता दिया , के में रवि भइआ से प्यार करती हु , पापा ने मुझे बहुत मारा , फिर वोह घर छोड़ कर चले गए , माँ भी उनके साथ चली गई , रिमी ने जाने से मन कर diya..."shurti ने उस दर्दनाक वख्त को यद् कर बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"शहहह , अभ रोना नै , पर , पर , शूरति अगर में न अत तोह , मतलब , उफ़ तुम समाज रही हो न..."

"भइआ , मुझे अपने प्यार पर विश्वास था , मुझे यकीन था , अप्प जरूर ायुगे , लेकिन बहुत लम्बा वख्त लगा दिया अपने , इतने साल , आपको नै पता , मने और रिमी ने इक इक दिन कैसे कटा , हम दोनों अकेली हो गई थी..." शूरति ने और भी रट हुए बोलै ,

"सॉरी , मने तुमसे वोह बात की , मुझे सामान करना चाहये तुम्हारे प्यार का , रिमी के प्यार का , तुम दोनों जो कहुगी में वही करुगा , इस साल में तुम दोनों से शादी करुगा..." रवि ने शूरति और रिमी को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"सच भइआ..."

"हूँ..."

"भइआ , काश मम्मी पापा हमारे प्यार को समाज पते , मुझे उनकी बहुत यद् अति है..." रिमी ने बेहद रट हुए बोलै ,

"रिमु , कोई बात नै , वोह समाज के बनाये कानून को मानते हैं , और में बस प्यार के कानून को , अगर मने तुम्हारे साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाये हैं , तोह में तुम दोनों से शादी भी करुगा , इक न इक दिन , उनको अपनी गलती का एहसास हो hi जायेगा..."

"सच में भइआ..."

"हाँ , ाचा , में चाचा जी के घर जा रहा हु , शाम तक ा जाउगा , तुम दोनों अपना ख्याल रखना , अगर , तुम दोनों को मुज़से कुछ भी चाहये हो , बस बोल दिया करो , अपने आपको मेरी वाइफ समज़ना , समाज गई तुम दोनों..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै , तोह दोनों बेहद शर्मा गई ,

फिर रवि ने कुछ देर और रिमी और शूरति से बतिअन की , अज्ज 2 घंटे रवि ने दोनों को वख्त दिया , दोनों बहुत खुश थी , अभ सोनल को खुश करना था , तोह रवि निकल पढ़ा , अपनी सोनल को खुश करने...

दूसरी तरफ...

ख़ुशी अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर , अपने घर , अपनी हवेली पहुँच चुकी थी , वोह बेहद खुश थी , चाहे वोह पहले नै एना चाहती थी , पर कही न कही , अपने दिल में , उसका भी मन था , अपना माँ से मिलने का , वोह बेहद ख़ुशी में सीधा अपने रूम में पहुँच गई ,

ख़ुशी समाये चाकर का निर्माण कर , सीधा अपने रूम में जैसे hi प्रकट हुई , उसकी अखन खुली की खुली रह गई ,

क्यों की उसकी आँखों के सामने उसकी माँ थी , जो उसके बीएड पर लेती हुई थी , बिलकुल खामोश , इक पत्थर सी बानी , ख़ुशी की आँखों में असनु ा गए , वोह भाग कर अपनी माँ से लिपट गई और बेइंतहा रोने लगी ,

"माँ , माँ , उठो न , माँ , आपकी बेटी आयी है , आपकी ख़ुशी , माँ उठो न..." ख़ुशी ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

ख़ुशी के रोने से उसकी माँ के शरीर में कोई हलचल न हुई , वोह बस बिना पालक जपकाये , वैसे hi लेती रही , शयद वोह कोमा में जा चुकी थी ,

िका इक तभी रूम का दरवाजा खुल गया , सामने खड़े शक़श को देख , ख़ुशी चौंक सा गई , उसकी अखन खुली की खुली रह गई , और आँखों से बहते असनु और भी तेज़ बहने लगे...

दूसरी तरफ....

बेबी अज्ज बहुत खुश थी , उसे काट के रूप में उसकी निशा मिल गई थी , और अभ काट ने खुद को निशा मान भी लिया था , बेबी को बस यही दर था , कही उसका अतीत जान काट उस से दूर न चली जाये , पर अभ उसका यह दर भी ख़तम हो गया था ,

सीमा ने दोनों को उठा दिया , अभ दोनों बतिअन कर रही थी , फर्जी , प्रिय और सैर के पास गई थी उनके बचाओ के साथ खेलने , अभ दोनों अकेली थी , दोनों बीएड के केबिन से पीठ टिकाये इक दूसरे से बतिअन कर रही थी ,

"बेबी , हम कही घूमने चले , यार में बोर हो गई हु , चलो न शहर चलती हैं , कोई मूवी देख अति हैं..." काट ने बेहद मुस्कराते हुए बोलै ,

"ओह्ह , तोह मेरी जान बोर हो गई है , काट हम कल जाएगी , कल का पूरा दिन , मेरी जान के नाम..." बेबी ने काट का हाथ अपने हाथो में लेकर बोलै ,

"बेबी , निशा कैसी थी..." काट ने पता नै क्यों यह सवाल पूछ लिया ,

"काट , कही तुम , काट अभ निशा मर चुकी है..."

"नै , वोह जिन्दा है..."

"क्या.." बेबी ने चौंकते हुए बोलै ,

"मेरा मतलब , अभ से में तुम्हारी निशा हु..."

"ओह्ह ऐसा क्या , काट , निशा मेरी बचपन की दोस्त थी , हम दोनों इक साथ बड़ी हुई , मेरे पापा इक पुलिस इंस्पेक्टर थे , और निशा बहुत hi जायदा अमीर थी , पर जैसे hi रवि हमारे जीवन में आया , सब कुछ बदल गया..." बेबी ने बेहद रट हुए बोलै , फिर उसने काट को पूरी कहानी सुना दी , जैसे जैसे काट सुनती गई , उसकी आँखों से असनु बहते गए , आखिर में एते तक , वोह बेबी को बहु में भर बेइंतहा रोने लगी...



तो बे कुनिटेड... फ्रेंड्स थोड़ी सा बीमार हु , शयद सर्दी लग गई मुझे , अपडेट करता रहुगा , बस इक दो दिन का वख्त लग सकता है , शुक्रिया अप्प सब का...
 
अपडेट-137

अभ अग्गे....

बेबी ने काट को अपनी बहु में भर रखा था , बेबी ने जो दर्द सहा था , उसकी कल्पना करना बेवकूफी होगी , क्यों , की बेबी ने अपना दोस्त खो दिया था , इक दोस्त खोने का दर्द , वही महसूस कर सकता है , जिसने कोई दोस्त खोया हो , प्यार से भी जायदा दर्द होता है दोस्त खोने में ,

जिसे हम प्रेम करते हैं , उससे बस जिस्मानी सम्बन्ध की जरुरत होती है , पर दोस्त के साथ हमारा रिश्ता रूहानी होता है , दोस्त की कमी कोई पूरी नै कर सकता , दोस्त बस दोस्त होता है , प्यार में लोग हमें धोका भी दे देते हैं , पर दोस्त बिना किसी मतलब के अपना सब कुछ कुर्बान कर देता है ,

बेबी उर्फ़ जूही अपनी दोस्त निशा को , अपने रहते जीवन में कभी भूल नै पायेगी , निशा ने जूही को अपनी दोस्त चुना , हर रह पर , हर दुःख सुख में , हर दर्द भरे वख्त में जूही का साथ दिया , उसने अपनी जान कुर्बान कर दी , जूही की मौत अपने नाम कर ली , अपनी साडी डोलत जूही के नाम कर दी , और निशा ने जूही से प्यार भी किया , जूही 1 साल निशा की यद् में तड़पती रही , उसे यद् कर कर रोटी , बिलखती रही , चीखती चिलाती रही , इक मासूम सी लड़की कब इक खतरनाक किलर बन गई , किसी को एहसास तक न हुआ , बेबी के माता पिता कहा थे , उनका क्या हुआ , किसी को कुछ पता नै था , यह बस बेबी hi जानती थी ,

लेकिन भगवन सब देखता है , बेबी चाहे रवि को बिन बोले कही गयाब हो गई थी , पर किस्मत उसे वापिस रवि के जीवन में खिंच लायी , बिमान शाह ने बेबी को कॉन्ट्रैक्ट दिया और बेबी उसका दिया काम करने ा गई , बेबी को पता नै था उसे किसे मरना है , पर जब बेबी ने पहली बार रवि को देखा , उफ़ उसे विश्वास न हुआ के रवि उसकी जिंदगी में वापिस ा जायेगा ,

रिमी को बचते हुए , बेबी ने अपने मन में सोच लिया था , वोह अपनी सचाई रवि को कभी नै बताएगी , उसने रवि से फिर से प्यार कर लिया , बेबी नै चाहती थी वोह जूही बन कर रवि के जीवन में ए , बेबी नै चाहती थी , रवि को यह एहसास हो के उसके कारन निशा की मौत हुई , पर अज्ज वख्त ने बेबी को सब वापिस सौंप दिया था , वख्त बस अपनी परीक्षा लेता है , वोह उसने ले ली , बेबी को उसका प्यार भी मिल गया और उसकी दोस्त निशा भी जो अभ काट थी ,

"बेबी , तुमने इतना दर्द सहा , बेबी , अभ में हु न , बस अभ कभी रोना मत..." काट ने बेबी के असनु भीगे चेहरे को चूमते हुए बोलै ,

"काट , तुमने रत बोलै के तुम जा रही हो , प्लस मुज़से दूर मत जाना , में फिर से उन अंधेरो में नै जाना चाहती..." बेबी ने और भी रट हुए बोलै ,

"नै जोगी जान , मुझे माफ़ कार्डो..." काट ने बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,

"ouu-huu , में तुम माफ़ नै करुँगी , तुमने ऐसा सोचा भी कैसे , तुम , तुमने इक बार भी मेरा नै सोचा , क्यों , क्यों , तुमने यह बोलै भी कैसे ..."

"जूही यार , अभ माफ़ भी कार्डो , देखो में कण पकड़ रही हु , सोल्ली याल..." काट ने बेहद मासूमियत से बोलै , पर बेबी उसके यह शब्द सुन चौंक सा गई , ऐसा तोह बस निशा hi बोलती थी , जब कभी बेबी और निशा इक दूसरे से रूत जाती थी ,

"काट उफ़ तुम निशा हो..." बेबी ने रट हुए मुस्करा कर बोलै तोह काट खामोश सा हो गई ,

"ाचा छोड़ो ें बातिओं को , यह बताओ रत को मज़ा आया..." काट ने बेइंतहा मुस्कराते हुए बोलै ,

"तू न बड़ी बेशरम है..." बेबी ने शरमाते हुए बोलै ,

"ाचा जी , रत को डोगग्य स्टाइल में तुमने सेक्स किया और बेशरम में , हासष्ठ , पता नै में कब रवि से प्यार कर पाउगी..." काट ने पहले मुस्कराते हुए और आखिर में थोड़ा उदास होकर बोलै ,

"उम् , कर लेना जब तुम ठीक लगे , ायो , अभ अपनी बेटी से मिल ले , रत से उसे देखा तक नै..." बेबी ने फर्जी को यद् करते हुए थोड़ा उदास होकर बोलै ,

"हम्म , मुझे भी अपनी बेटी की बहुत यद् ा रही है , चलो जल्दी ..." काट ने बेबी का हाथ पकड़ उसे बीएड से उठाते हुए बोलै , फिर दोनों बतिअन करती हुई रूम से बहार निकल गई , इस बात से बेखबर , के उनकी मौत जापान से अज्ज इंडिया ा रही hai...jo थी सिको ट्विन्स....

दूसरी तरफ...

रवि जब रिमी और शूरति से मिल बहार आया , तब 9 बज चुके थे , रवि सबको प्यार तोह बाँट रहा था , सबको खुश तोह कर रहा था , पर उसे अपनी कोमल की बेइंतहा चिंता थी , रवि बार बार खुद के बारे में सोच रहा था , उसे दर था , कही वोह शेतीअन के वश में होकर , अपनी कोमल की बलि न दे दे , रवि मज़बूर था , वोह कोमल से दूर भी नै जा सकता था , अगर वोह दूर चला भी जाता , तब भी शेतीअन उसे कोमल के पास खिंच लता , रवि को कुछ समाज नै ा रहा था , वोह क्या करे और क्या न करे ,

रवि सेड्यां चढ़ अपने रूम में ा गया , उफ़ जैसे hi उसकी नज़र रूम की बालकोनी पर कड़ी , अपनी कोमल पर गई , वोह बस उसे देखता hi रह गया , इतनी खूबसूरत थी कोमल , पारी लोग की सबसे सुन्दर लड़की , जिसके जैसा सुन्दर , इस संसार में कोई और न था ,

कोमल बस इक लड़की नै था , कोमल प्यार की मूरत थी , कोमल इक लम्बा इंतज़ार थी , कोमल इक बेहद वफादार प्रेमिका थी , कोमल कोई भी बलिदान दे सकती थी , कोमल बस कोमल थी , जो कोई और न थी ,

रवि धीरे धीरे अग्गे बड़ा और उसने पीछे से कोमल की कमर में अपनी बहे दाल , उसे अपनी तरफ खींच लिया ,

"ा गए अप्प..." कोमल ने बिना पीछे देखे , दूर खूबसूरत hare-bhare जंगल को निहारते हुए बोलै ,

"हम्म..." रवि ने कोमल के लम्बे काले घने बालो की खुशबु लेते हुए बोलै ,

"भइआ , जंगल कितना खूबसूरत है , कुदरत कितनी अछि होती है , कुदरत सबका कितना सोचती है , उफ़ में hi तोह हु कुदरत..." कोमल ने हरे भरे पेड़ू को देखते हुए बेहद घम्बिर होकर बोलै ,

"उम् , तुम hi तोह हो कुदरत , पर तुम मेरी जान हो , मेरी आत्मा हो , मेरा आधा हिस्सा हो , तुम हो तोह में हु , तुम नै तोह में नै , कोमल में तुमसे बेपनाह मोह्हबत करता हु..." रवि ने कोमल के गालो को चूमते हुए बोलै , तोह कोमल के लाल होंठो पर इक मुस्कान फैल गई , वोह अपने भाई की तरफ घूम गई और अपने भाई की आँखों में अखन दाल देखने लगी ,

"सच में..." कोमल ने तेज़ तेज़ सांसे भरते हुए बोलै ,

"हम्म , तुमसे कभी झूठ बोलै है मने , ष्ष्ठ , जणू अगर मेरे कारन तुम कुछ हुआ , में अपनी जान दे दूंगा ..." रवि अभी बोल hi रहा था के कोमल बेच में बोल पढ़ी ,

"शठ , ऐसा कुछ मत सोचना , अगर मेरा प्यार सच्चा हुआ , तोह हम इस परीक्षा को भी पास कर लेंगे , ाचा , कब जाना है , चाचा जी के घर..." कोमल ने अपनी भाई के होंठो को धीरे से चूमते हुए बोलै ,

"हम्म , बस अभी आधे घंटे बाद निकलते हैं , तुम निचे ा जाना , में अपनी बेटी से मिल लू..." रवि ने कोमल की नली नली आँखों में ज़कते हुए बोलै ,

"हम्म , अति हु ..." कोमल मुस्करा कर बोली , और फिर बालकोनी की तरफ घूम , जंगल को देख , अपना मन शांत करने लगी , वोह सोच रही थी , क्या भइआ के साथ वोह करना ठीक होगा , खैर यह तोह ऐनी वाले वख्त की बात थी ,

रवि भी सब समाज गया , उसने कोमल को अपना मन शांत करने दिया , रवि मुस्कराते हुए रूम से बहार निकल , सदियां उतर निचे ा गया , वोह फर्जी से मिलने hi जा रहा था , पर उसे कुछ यद् ा गया , वोह लारा और एलिज़ा के रूम में चला गया ,

रवि ने रूम के पास जाकर लकड़ी के बने दरवाजे को नॉक किया ,

"लारा , में अंदर ा जाऊ..." रवि ने दरवाजे पर अपने हाथ की उंगलियाँ मरते हुए बोलै ,

"हम्म , ा जाओ..." अंदर से एलिज़ा की आवाज़ आयी , रवि मुस्कराते हुए रूम में घुस गया , उसने रूम के अंदर देखा , लारा बीएड पर बैठी कोई किताब पढ़ रही थी , और एलिज़ाबेथ अपने सुपर कंप्यूटर पर कोई काम कर रही थी ,

"हाय रवि..." लारा ने अपनी बुक साइड की तरफ रख , रवि को हाथ हिला hello करते हुए बोलै ,

"है लारा , कैसी हो..." रवि मुस्कराते हुए इतना बोल लारा के पास बीएड पर बेथ गया , बीएड के केबिन से पीठ लगा कर , एलिज़ाबेथ ने रवि की आवाज़ सुनी पर वोह कुछ बोली नै , रवि समाज गया , दोनों में कुछ जगदा हुआ है ,

"और बताओ लारा , कैसी हो.." रवि ने लारा की खूबसूरत काली आँखों में ज़कते हुए बोलै ,

"हम्म , अछि हु..." लारा ने थोड़ा मुस्कराते हुए बोलै , वोह थोड़ा थोड़ा रवि को देख रही थी , और थोड़ा थोड़ा एलिज़ाबेथ को ,

"ok , ाचा , मेरा पास ायो..."

"क्यों..."

"अरे ायो तोह सही ..." रवि ने अपने होंठो पर जीभ फिरा , उनको गीला करते हुए बोलै , लारा बस ख़ामोशी से रवि को देखने लगी , वोह बेइंतहा खूबसूरत लग रही थी , उसके मन में कई सवाल चल रहे थे ,

"तुम ा रही हो , या में तुम्हारे करीब आयु..." रवि ने इस बार थोड़ा गुस्से में बोलै , रवि ने जब ऐसा बोलै , तब एलिज़ाबेथ ने भी कुर्सी पर बैठे बैठे थोड़ा सा चेहरा पीछे घुमा , दोनों की तरफ देख लिया ,

"ठीक है..." लारा ने पता नै क्यों ऐसा बोल दिया , और धीरे धीरे खिसकते हुए , रवि के बेहद करीब हो गई , उसकी सांसे भाड़ तेज़ हो गई , उसके रसीले लाल होंठ सूखने लगे , जिनको बार बार वोह अपनी रसभरी जीभ फिरा गीला करने लगी , उसके गोर गालो पर शर्म की लालिमा बढ़ने लगी , जीवन में पहली बार वोह किसी मर्द के इतना करीब हुई थी , उसके मन में हज़ारो विचार इक साथ उत्पन हो रहे थे ,

"तुम बेहद खूबसूरत हो , बेहद , क्या में तुम चुम सकता हु..." रवि ने लारा की आँखों में अखन दाल बोलै , लारा के चेहरे पर कोई भाव न थे , वोह चौंक सा गई थी , उसके बिग बूब्स तेज़ सांसे भरने से ऊपर निचे हो रहे थे , जैसे अभी उसका टॉप फैट जायेगा और दोनों कबूतर आज़ाद हो जायेगे , गोल गोल बूब्स , एकदम कैसे हुए , जिन पर रवि की नज़र जैसे जैम सा गई थी और लारा ने भी यह बात अचे से महसूस कर ली थी ,

"बोलो न , क्या में तुम चुम सकता हु , तुम्हारे नरम होंठ , मुझे अपनी और आकर्षित कर रहे हैं..." रवि ने लारा के कम्प कपट गुलाबी होंठो को निहारते हुए बोलै ,

"r..rr...ravii..." लारा ने कम्पटी जुबान से बस इतना बोलै , और इक बार एलिज़ाबेथ की तरफ देख , अपनी अखन बंद कर ली , एलिज़ाबेथ अभ पूरा घूम कर दोनों की तरफ hi देख रही थी , पता नै उसके मन में क्या चल रहा था ,

"ओह्ह लारा , तुम्हारे होंठ , तुम्हारा बदन , तुम लाजवाब हो , बेइंतहा हसीं , तुम , तुम सच में काम सरूप देवी हो..." रवि ने इतना बोल अपने होंठ , लारा के होंठो पर रख दिए , उफ़ होंठ जब होंठो से मिले , दोनों के होंठो का नरम मॉस आपस में मिलते hi , दोनों के मन में इक सिरहन सी दौड गई , लारा तोह इस एहसास में मदहोश सा हो गई , उसके नरम लाल होंठ अपने रवि के होंठो से मिले हुए थे , रवि ने धीरे से लारा के होंठो को चुम लिया , बस इक पल के लिए , और फिर बीएड से उठ , चुप चाप रूम से बहार निकल गया , लारा कुछ देर वैसे hi तेज़ तेज़ सांसे भरते , इस हसीं पल को अपने अंतर्मन तक महसूस करती रही , कुछ वख्त बाद उसने अपनी अखन खोली , रवि को वह न देख , वोह हैरान न हुई , बल्कि और भी शर्माने लगी , वोह मुस्कराने लगी , एलिज़ाबेथ बड़ी बड़ी अखन किये , मोह खोले लारा को देखती रही ,

"हूँ..." एलिज़ाबेथ ने इतना hi बोलै और फिर से अपने कंप्यूटर पर कुछ काम करने लगी , उसके मन में लारा और रवि का इक दूसरे को चूमना , यही पल चल रहा था ,

दूसरी तरफ...

"मम , थैंक यू , अप्प जा सकती हैं..." इक औरत ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"हासष्ठ , इंडिया..." इक लड़की बेहद तेज़ साँस भरते हुए , बेहद धीमे शबदो में बोली ,

"चले सिस्टर..."

"हम्म.."

यह दोनों थी सिको ट्विन्स , जो अभी अभी अपनी और अपने सामान की चेकिंग करवा के , एयरपोर्ट से बहार निकली थी , दोनों बिलकुल इक जैसी थी , बेहद खूबसूरत , दूध जैसा सफेद जिस्म , छोटे छोटे नरम लाल होंठ , बड़ी बड़ी अखन , जैसे आम जापानीज लड़कयों की होती हैं , पर , जो खूबसूरत और हसीं होता है , वोह उतना hi खतरनाक भी होता है , सिको ट्विन्स इक बेरहम क़ातिल थी , जो अपने शिकार पर जरा सा भी रेहम नै करती थी ,

"तस्य..." सिको ने मुस्कराते हुए इक टैक्सी ड्राइवर की तरफ देखते हुए बोलै ,

"जी मम..."

"हमें मिथली शहर ले चलो , वह ारवती नगर में..." दोनों सिको ट्विन्स ने टैक्सी में बेथ ते हुए बोलै , दोनों आपस में बतिअन करने लगी , और टैक्सी चल पढ़ी मिथली शहर की तरफ , यहाँ बिमान शाह उनका hi इंतज़ार कर रहा था ,

दूसरी तरफ....

"फर्जी , फर्जी , कहा हो अप्प..." रवि , लारा के रूम से निकल , जोर जोर से आवाज़ देते हुए बोलै ,

"क्या हुआ भइआ..." सैर ने किचन से बहार एते हुए बोलै ,

"देदू , में अपनी बेटी को दंड रहा हु , आपको पता है , वोह कहा है..." रवि ने सैर के करीब जाकर , उसकी आँखों में ज़कते हुए बोलै ,

"उम् , भइआ फर्जी शयद बेबी देदी के पास है , भइआ , हमें आपसे बतिअन करनी है , अज्ज शाम को हमसे मिलने एना..." सैर ने बेहद मुस्कराते हुए बोलै ,

"अरे देदू , अप्प बस हुकम किया करो , में जरूर ायुगा , शाम को मिलता हु देदू , bye..." रवि ने सैर का माथा चूमते हुए बोलै ,

"bye भइआ.." सैर ने रवि का हाथ अपने हाथो में लेकर , उसके हाथ को चूमते हुए बोलै , वोह बेहद खुश थी ,

रवि , सैर से इतनी बात कर , बेबी के रूम में घुस गया , यहाँ उसकी बेटी , फर्जी अपनी दोनों मुम्मा के साथ बैठी हुई थी ,

"पापा..." फर्जी ने रवि को इक डैम से देख , बेहद खुश होते हुए चीला कर बोलै , फर्जी बीएड से उठ , रवि के गले लग गई , उसके चेहरे को बेइंतहा चूमने लगी , काट और बेबी बस मुस्कराती रही , रवि की अखन नाम हो गई , अपनी बेटी का इतना प्रेम देख कर ,

"बीटा , ी लव ु , उम्मा..." रवि ने अपनी बेटी का माथा चूमते हुए बोलै ,

"पापा , अप्प कल से मुझे मिलने नै ए , पापा , अभ मुज़से दूर मत जाना , में अछि बची हु पापा..." फर्जी ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"ओह्ह नै मेरी बची , नईईई , ऐसा मत बोलो , मेरा दिल जलता है..." रवि ने फर्जी की बतिअन सुन उसे कास कर अपने गले लगा लिया , अभ जाकर उसका मन शांत हुआ था , रवि को इक सकूं सा मिल गया , उसका हर दर्द जैसे कही लुपत सा हो गया ,

"पापा , अप्प अचे पापा हो.." फर्जी ने रवि के चेहरे को चूमते हुए बोलै , रवि की आँखों से असनु बह निकले , जीवन में उसके साथ कुछ ऐसा भी होगा , उसने कभी न सोचा था , जब जीवन सुरु हुआ था , तब से लेकर अभ तक , उसकी जिंदगी इतना बदल जाएगी , अज्ज से 16 साल पहले जब रवि पहली बार शहर आया था कोमल से मिलने , तब उस से कोई कहता के 16 साल बाद तुम्हारे जीवन में यह यह होगा , तोह शयद रवि उसे पागल hi कहता , पर वख्त ने उसे कहा से कहा ला दिया था , इक छोटे से किसान से लेकर इक दरिंदा बना दिया था , यही तोह भगवन का खेल है , यही तोह वख्त की चाल है , वख्त चलता रहता है , जिंदगी हर पल बदलती रहती है ,

"ओह्ह मेरा बचा , मेरी बेटी..." रवि पागल सा हुआ अपनी बेटी के पोरे चेहरे को बार बार चूमते हुए बोलै , वोह अपनी बेटी के असीम निशाल प्यार में पिगलता सा जा रहा था , यह इस दुनिआ का सबसे पवितर प्रेम था , इक बाप बेटी का प्रेम...

"ाहू अहूऊऊ , बेटी , अपनी मुम्मा को भी प्यार कर लो..." बेबी ने मुस्कराते हुए बोलै तोह फर्जी उसके गले लग , उसके चेहरे को चूमने लगी ,

"बीटा , काट मुम्मा को भी प्यार कर लो.." काट ने मुस्कराते हुए बोलै तोह फर्जी उसके गले लग , उसे भी प्यार करने लगी ,

"बाबू कैसी हो अप्प..." रवि ने बेबी की नली नली आँखों में ज़कते हुए बोलै तोह बेबी ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली , बेबी को रत के वोह हसीं पल यद् ा गए थे , उसे बेहद शर्म ा रही थी ,

"में , में , अछि हु..." बेबी ने इक बार नज़रियन उठा रवि की आँखों में देखते हुए बोलै , और फिर शरमाते हुए मुस्कराने लगी , इस वख्त बेबी इस दुनिआ की सबसे खूबसूरत और मासूम लड़की परतीत हो रही थी ,

"बेबी , तुम जरा फर्जी को बहार ले जाना..." रवि ने बेबी को आँखों hi आँखों में कुछ इशारा सा किया , बेबी भी सब समाज गई ,

"फर्जी बीटा ायो , हम किचन में जाकर एते हैं..."

"ओह्ह हो , पापा सीधा सीधा बोलो के आपको काट मुम्मा से प्यार करना है..." फर्जी अपना माथा पीट कर बोली , तोह काट शर्माने लगी , और रवि ने अपनी नज़रियन ज़ुका ली , फिर फर्जी , बेबी का हाथ पकड़ , उसे रूम से बहार ले गई , रवि अभी कुछ बोल hi रहा था तभी उसे इक आवाज़ सुनाई दी ,

"पापा , बस 5 मिंट..." फर्जी ने इतना बोल रूम का दरवाजा बहार से बंद कर दिया , रवि और काट ने इक दूसरे की तरफ देखा और फिर हसने लगे , सच में फर्जी , रवि का अपना खून था , उसकी अपनी बेटी...

तो बे कुनिटेड...
 
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