Incest Deewanapan... - Page 25 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

फ्रेंड्स मने इस स्टोरी का सबसे इमोशनल अपडेट टाइप किया ही , इतना इमोशनल के में कई घंटे उदास बैठा रहा , मेरा मन शांत न हुआ , इतना बेचैन में कभी न हुआ , इतना सदमा मुझे कभी नै लगा , फ्रेंड्स कल रत को अपडेट पोस्ट करुगा , अज्ज मने लिख जरूर लिया है , पर में उसे और लिखना चाहता हु , कल इस अपडेट से 3 गुना बड़ा अपडेट दूंगा , इंतज़ार करना , अभ में यही हु , में मलिका सोना जैसा नै के काल का साथ छोड़ दे .. शुक्रिया
 
अपडेट-126



[Story - Deewanapan , writen by -Yoginath ]

अभ अग्गे...

रवि बेहद परेशान था , अपनी hi सोचु में घूम , वोह बात करना चाहता था , पर उसे समाज नै ा रहा था , कहा से सुरु करे , उसके गोर सफेद चेहरे पर कई भाव , पर्तक्ष रूप में उमड़ रहे थे , उसका दिल बेचैन था , और यह बात कोई छोटी बात नै थी , कुछ दिन बाद , उसे सोनल के साथ सगाई करनी थी , और उसकी सबसे बड़ी दुविद्या यह थी के सोनल इक इंसान थी , इक आम सी इंसान , और वोह खुद क्या था , इक शापित दरिंदा , रवि मन के भीतर सोच रहा था , कही वोह फिर से कही कैद हो गया , कही वोह फिर से मर गया तोह सोनल , उफ़ उसका क्या होगा , अकेली सोनल hi नै , उसे सबकी चिंता थी , खैर उसकी सोचु का अंत , इक हाथ ने किया जो उसके कंडे के ऊपर आकर रुक गया ,

"सोना , क्या बात है , हमें बताओ न , हमें दर्द हो रहा दिल में..." सीमा ने बेहद उदासी में विचलित सा होते हुए बोलै ,

"हाँ भइआ , आपकी ख़ामोशी हमें सत्ता रही है , हमें बेचैन कर रही है..." कोमल ने अपने भाई की आँखों में अखन दाल बेहद उदासी में बोलै , उसकी आँख के इक कोने से , दो कटरा असनु बह निकले ,

"उफ़ नै जणू , तुम रोना मत , में बताता हु , क्या बात है .." रवि ने कोमल के गीले गालो को , अपने हाथ से साफ करते हुए बोलै ,

फिर रवि ने , वोह सब बता दिया , के कैसे उसने सोनल की जान बचाई , जब वोह दर्द में डूबी खुदखुशी करने वाली थी , फिर उस M.L.A के बेटे राहुल को मरना , फिर सोनल का उसके प्यार में पढ़ना , उसका मन कर देना , फिर 7 मंथ बाद , उसका सोनल को दुबारा बचाना , सुल्ताना को मरना , आखिर में उसका झुक जाना , अपनी इक और बहिन के अग्गे , उसकी हर बहिन जिद्दी थी , उनको उसके बिना दुनिआ में कुछ दीखता hi नै था , उनके लिए उनकी पूरी दुनिआ बस वोह था , फिर रवि ने यह भी बताया , कैसे उसने सोनल को डॉक्टर बनने का बोलै , उसने बस यु hi बोल दिया था , पर उस पगली ने ऐसे hi अपनी जिंदगी का आखरी मकसद मन लिया , फिर उसका डॉक्टर बनना , 3 साल बाद रवि का सोनल के पास जाना , चची जी से हुई बात , सोनल का जहर खाना , रवि ने इक इक पल , इक इक लम्हा , उफ़ उसने सब कुछ विस्तार से बता दिया , वैसे भी वोह कोमल और सीमा से कुछ नै चिपटा था , दोनों हमसफ़र थी उसकी ,

जब रवि ने अपनी कहानी , अपनी जुबानी सुना , दोनों की तरफ देखा , उन दोनों के चेहरे पर , उसे कोई भाव न दिखे , लेकिन रवि , उनकी ीचा जानना चाहता था ,

"हम्म , यह बात थी..." रवि ने फिर से उदास होते हुए , अपनी पीठ बीएड के केबिन से टिका , सामने बालकोनी से बहार , आसमान में चमकते सितारों को देखते हुए बोलै ,

"रावी , में क्या कहु , उफ़ , मेरे मन में इस वख्त हज़ारो बतिअन चल रही हैं..." सीमा ने अपने बहते असनु साफ करते हुए बेहद दर्द में बोलै ,

"भइआ , सोनल देदी इंसान है , अपने पहले hi , रिमी , शूरति और अनु को अपने साथ रखा हुआ है , और , और , अप्प सोनल देदी से शादी करने जा रहे हो , भइआ यह नै हो सकता..." कोमल बेहद रट हुए , अपने भाई के कंडे पर सार रख लेट ते हुए बोली ,

"उफ्फ्फ कोमल , वोह जिद्दी है , वोह मर जाएगी , मने उसे आज़मा लिया है , उस पगली ने जहर खा लिया था , वोह मेरे प्यार में पागल हो चुकी है..." रवि ने बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,

"पर सोना , पिता जी , उनका क्या , वोह आपको यह कभी नै करने देंगे , अप्प छह कर भी , अपनी किसी भी बहिन से शादी नै कर सकते , अप्प जानते हो उनको..."

"हाँ , जनता हु , अपने बेदर्द बाप को , जो जलता है , मेरे प्यार से , किस किस को रोकेगा वोह , किस किस को मरेगा , पिछली बार इक रूही थी , पर इस बार , रमा , रिमी , शूरति , सोनल , यह सब हैं , इस बार , तुम हो , बेबी है , काट है , अनु है , ख़ुशी है , इस बार , इस बार , उनको झुकना होगा , नै तोह , नै तोह , हम सबको मर कर , इक पाप करना होगा , वोह ऐसा नै कर पाएंगे..." रवि ने बेइंतहा दर्द में डूबता हुए चीला कर बोलै , उसकी आँखों में असनु थे ,

"शांत भाई , अपने सही कहा , भाई अप्प सोनल देदी से शादी मत करो , जैसे हम सबको प्यार दे रहे हो , उनको भी दे दो..." कोमल ने इक रास्ता दिखा थोड़ा मुस्करा कर बोलै ,

"पर , पर , चाचा जी , कैसे , वोह नै मानेगे , अपनी बेटी को बिना शादी किये , मेरे साथ कैसे बेहज देंगे , तुम तोह पता है , उनके विचार कितने पुराने हैं..." रवि ने थोड़ा मुस्करा कर बोलै ,

"हूँ , सोना , कोमल सही बोल रही है , तुम सगाई कर लो , शादी 1 साल बाद कर लेना , अभ तुम डेविल हो , अपना दिमाग लगाओ ..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ देदी , दिमाग बहुत है इनका , आपको यद् है , जब पिता जी ने इनको पारी लोग से निकल दिया , यह कोई न कोई रास्ता दंड hi लेते थे , हमसे मिलने के लिए , पिता जी थक गए , उनहोनु अपनी पूरी ताकत लगा दी , पर भइआ तोह भइआ थे , यह आ hi जाते थे , किसी न किसी रस्ते से..." कोमल उन हसीं यादिओं में खोते हुए बेहद हस्ते हुए बोली , सच में , कुदरत का नियाब करिश्मा थी वोह ,

"अभ तुमसे वादा किया था जणू , और तुम्हारे लिए में , कुछ भी कर सकता हु..." रवि ने कोमल की नली नली दिलकश आँखों में डूबता हुए उसके नरम गुलाबी होंठो को चुम कर बोलै ,

"यह सब मेरे कारन हुआ , कितनी बुरी हु में.." सीमा भी उस वख्त को यद् कर बेहद नाम आँखों से बोली ,

"शठ , सीमा , तुम्हारी नै मेरी गलती थी , मने क्यों , क्यों तुम्हारी आँखों में , अपने लिए प्यार न देखा , उफ्फ्फ कितना ख़ुदग़रज़ था में , बस रूही के बिना किसी को देखा तक नै , भूल जाओ सीमा , अभ तुम प्यार देकर , उस गलती को सुधारना चाहता हु..." रवि ने सीमा को बहु में भर उसके गुलाबी होंठो को चूमते हुए बोलै , तोह सीमा मुस्कराने लगी , उसकी लाल लाल आँखों में इक गहरायी थी ,

तीनो अभी बतिअन hi कर रहे थे , तभी कोमल को कुछ यद् आया , पर इस से उसकी चिंता बेहद बढ़ गई ,

"क्या हुआ जणू.." रवि ने कोमल के चेहरे पर चिंता के भाव देखते हुए बोलै ,

"भइआए , हमारा शाप कहा गया , मतलब , अप्प हमें छू नै सकते , आपको बिजली का जटके लगते थे , पर अभ , अभ ऐसा कुछ नै हो रहा , में आपकी बहु में हु , आपको चुम रही हु , पर कुछ नै हो रहा ..." कोमल ने िका इक सब यद् करते हुए बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"अरे हाँ , मुझे नै पता , इस बारे में..." रवि ने थोड़ा ख़ामोशी से बोलै ,

"सोना , रिंग कहा है..." सीमा ने कोमल की तरफ देख , बेहद चिंता में बोलै ,

"रिंग , मुझे यद् नै , मने जब रिंग को उस नीले पत्थर पर रखा , उसके बाद से रिंग का मुझे कुछ नै पता , खुशी..." रवि भी यह बात यद् कर , बेहद चिंता में ख़ुशी को यद् कर बोलै ,

और तभी ख़ुशी वह ा गई , उसके हाथ में इक बड़ा सा मिटी से बना इक सुराहीदार घड़ा था , जिसकी मदिरा , वोह अपने होंठो से लगाए , घुट घुट कर पेट जा रही थी , ख़ुशी ने दोनों हाथो से उसे ऊपर उठा रखा था , रवि , कोमल और सीमा उसे अखन फाडे देख रहे थे , फिर उन तीनो ने अपना माथा पीट लिया ,

"भइआ , खुशु तोह नशे में होगी..." कोमल ने ख़ुशी की तरफ देखते हुए बोलै , जो उनके सामने कड़ी , अपना घड़ा ख़तम कर रही थी ,

"सोना , सुबह बात कर लेते ..." सीमा भी मुस्कराते हुए बोली ,

"हैश्च , मेरी किस्मत hi ख़राब है , क्यों बुला लिया मने , अभ , अभ , यह मेरा जीना हराम कर देगी..." रवि अपना माथा पीट कर बोलै , तोह कोमल और सीमा हसने लगी ,

"उम् , अह्ह्ह्ह , मज़ा ा गया , मज़ेदार , उम् , इक और पी लेती हु..." ख़ुशी उस सुराहीदार घड़े से पूरी मंदिर , अपने पेट में दाल , अपने नशीली अखन मटकते हुए रवि को देख बोली ,

"रुको , रुको , तमस , मेरी बात सुनो , तुम बहुत अछि हो , ेहडेर ायो , बैठो , हाँ , अभ no मदिरा , उफ्फ्फ , मेरी माँ , बेथ जा , बार बार उठ क्यों जाती हो..." रवि ने ख़ुशी का हाथ पकड़ उसे बीएड पर बिठा ते हुए बोलै , पर ख़ुशी नशे में तुन बार बार उठ कर कड़ी हो जाती , आखरी रवि ने उसे पीछे से बहु में भर , उसकी कमर पर अपनी बहु को जकड लिया , अभ ख़ुशी , रवि की गॉड में बैठी हुई , थी , रवि ने उसके पेट के बेचू बीच अपने दोनों हाथो की उंगलियों को फसा , उसे जकड सा रखा था ,

"अह्ह्ह छोड़ मुझे , अहह छोड़ , बेवकूफ छोड़..." ख़ुशी नशे में तुन रवि की गॉड में बैठी थोड़ा कसमसाते हुए बोली ,

"खुशु शांत , हमें बात करनी आपसे.." सीमा ने ख़ुशी के गोर मुलाम गाल को प्यार से सेहला कर बोलै ,

"देदू ठीक है , पर इसको बोलो , पहले मुझे चोदे , छोड़ मुझे..." ख़ुशी फिर से उछाल कूद मचाते हुए बोली , आखिर रवि ने उसे अपनी पकड़ से आज़ाद कर दिया , ख़ुशी तेज़ी से उठ कर , उन तीनो की तरफ चेहरा कर बेथ गई ,

"हैश्च , भइआ , कर लो बात..." कोमल इक लम्बी साँस भर हस्ते हुए बोली ,

"हाँ , सोना करो बात.." सीमा भी कोमल की तरफ देख हस्ते हुए बोली ,

"बात , बात , क्या बात , जल्दी बोलो , अह्ह्ह्हहू , मुझे सोना है फिर..." ख़ुशी इक लम्बी अंगड़ाई लेते हुए , अपने बाल खुजा कर बोली ,

"खुशु , बात यह है , रिंग कहा है..."

"कोनसी रिंग , ाचा , वोह मनहूस रिंग , तुम पता होगा , तुमने hi उठाया था उसको..." ख़ुशी ने उन पलु को यद् करते हुए बोलै ,

"मने , पर कब..." रवि थोड़ा चिंता में बोलै , उसके दोनों हाथो में रिंग नै थी ,

"जूठे , मकर , फरेबी , तुमने वोह रिंग उस नीले पत्थर पर राखी , रिंग ने उस पत्थर की साडी ऊर्जा अपने अंदर सोख ली , फिर तुमने उस रिंग को उठा लिया , और मुझे कहा , में वोह बेजान नीला पत्थर ले जाऊ , अभ यद् आया..." ख़ुशी थोड़ा गुस्से में बोली ,

"नयी..." रवि फिर से सोचते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्हू , देदू , ऐसी ने रिंग उथ्यि थी , और रिंग इतनी गुस्से में थी , वोह इसको बिजली के तेज़ तेज़ जटके मर रही थी , और फिर , फिर , यह बेवकूफ उस पहाड़ से निचे गिर गया , हां हां हां , ठीक है , अभ चलती हु में...." ख़ुशी पूरी बात बता , आखिर में अजीब सा हस्ते हुए , बीएड से उठ ते हुए बोली ,

"नई , रुको , बेथ जाओ , मेरी प्यारी खुशु , अह्ह्ह , मेला बचा , मेला गोलू मोलू..." रवि ने अग्गे बढ़ , ख़ुशी को अपने सीने से लगा , उसके बालो को सहलाते हुए बोलै , कोमल और सीमा यह देख हसने लगी ,

"अह्ह्ह्ह , दूर हॉट , क्या काम है..." ख़ुशी , रवि को ढाका देकर पीछे करते हुए , अपने नरम गुलाबी होंठो पर जीभ फिरा उनको गीला करते हुए बोली ,

"खुशु , तोह रिंग कहा गई..." रवि फिर से ख़ुशी को देखते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह , रिंग , रिंग , इस रिंग ने मेरा जीना हराम कर दिया है , देखो , जितना मुझे पता था , मने बता दिया , अभ तुम जानो या तुम्हारी वोह रिंग , हां हां हां , अभ में चलती हु..." ख़ुशी पहले गुस्से में , फिर अजीब सा हस्ते हुए , फिर से जाने का बोली ,

"खुशु , रिंग को ढूंढ़ना होगा , वार्ना , ओह्ह देखो , पिता जी ने शाप दिया था , डेविल रूप में , में कोमल को छू नै सकता , मुझे बिजली के जटके लगते थे , पर अभ ऐसा कुछ नै होता , यह देखो..." रवि ने यह बोलते हुए कोमल को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"अहह बकवास , इतना तोह तुम पहले भी करते थे ..." ख़ुशी ने अपनी शक्ति से इक बड़ा सा मदिरा का पियाला अपने हाथो में लिया , और मदिरा का छोटे छोटे सिप लेते हुए , दोनों की तरफ देखते हुए बोली ,

"ाचा , यह भी है , पर यह देखो..." रवि ने इतना बोल , अपने होंठ , कोमल के नरम होंठो पर रख दिए , उफ्फ्फ कोमल ने सकूं से अखन बंद कर ली , रवि धीरे धीरे कोमल के नरम होंठो को बेहद शिदत से महसूस करता हुआ चूसने लगा , उफ़ कोमल के नरम लाल होंठ उसके होंठो में पिस्टे चले जा रहे थे , जैसे कोई नरम रोईए हो ,

धीरे धीरे दोनों खो गए , दोनों की अखन बंद हो गई , कोमल अपने भाई के बालो को सहलाती , उसका पूरा साथ देने लगी , रवि अभ थोड़ा कास कास कर कोमल के होंठो को चूसने लगा , वोह कभी ऊपर का होंठ चुस्त तोह कभी निचे का , रवि और कोमल मदहोश हुए , इक दूसरे के होंठो को चूसते गए , फिर रवि ने अपनी जीभ कोमल के नरम होंठो पर फिरा दी , कोमल ने थोड़ा सा अपना होंठो को खोला तोह रवि की जीभ उसके मोह में घुस गई ,

"अह्ह्ह्ह..." कोमल सिसक पढ़ी , उसका भाई अभ उसके होंठो को कास कास कर चुस्त हुआ , उसकी जीभ से अपनी जीभ लड़ा रहा था , आखिर 5 मिंट बाद दोनों अलग हुए , तेज़ तेज़ सांसे भर , इक दूसरे को देखने लगे , कोमल ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,

"देखा खुशी , खुशी..." रवि ने कोमल के होंठो को चूमना छोड़ , जैसे hi घूम कर , ख़ुशी की तरफ देखा , पर , पर ख़ुशी वह नै थी , वोह जा चुकी थी , रवि को बेवकूफ बना और सीमा भी , कोमल यह देख हसने लगी , फिर वोह अपने भाई पर जपत पढ़ी , रवि पीछे बीएड पर गिर गया और कोमल उसके ऊपर लेट , उसकी आँखों में अखन दाल , अपने चूसै से लाल हुए होंठो को जीभ फिरा , गीला करते हुए , मुस्कराने लगी , रवि समाज गया , वोह क्या चाहती है , रवि इक डैम से पलट गया , अभ कोमल निचे थी और वोह कोमल के ऊपर , दोनों इक दूसरे की आँखों में खोये हुए थे , फिर दोनों के होंठ मिल गए ...

नेक्स्ट डे , सुबह के 8 बजे...

"रवि , रवि , उठो , अह्ह्ह्ह , उठू , हे भगवन , इसकी आदत , अह्ह्ह ..." सीमा जो काफी देर से रवि को जगाने की कोससिह कर रही थी , आखिर गुस्से में अपने पेअर पटक ते हुए बोली ,

"मा अप्प्प..."

अभी सीमा इतना hi बोली थी , रवि और कोमल इक डैम से उठ बैठे , सीमा अपनी कमर पर हाथ रखे , दोनों को गुस्से से देखने लगी ,

"अह्हह्ह्ह्ह ाऊऊऊ , सीमा सुबह हो गई..." रवि ने इक लम्बी अंगड़ाई लेते हुए बोलै ,

"नई , अभी तोह रत के 2 बजे हैं , उठो दोनों , में छाए लती हु , और कोमल तेरे होंठ इतने सूज कैसे गए..." सीमा ने पहले रवि को और फिर कोमल के सुज़े होंठो को देखते हुए बोलै , तोह कोमल शर्माने लगी ,

रवि उठ कर वाशरूम में चला गया , सीमा मुस्कराते हुए कोमल के पास बेथ गई , कोमल अभी भी शर्मा रही थी ,

"हम्म , लगता है रत को सब हो गया..." सीमा ने कोमल के हसीं चेहरे को निहारते हुए बोलै ,

"नै देदू , हम तोह 2 घंटे होंठ hi चूमते रहे इक दूसरे के..." कोमल शरमाते हुए बोली ,

"क्या , पर , अच्छा , लेकिन अभ तोह रवि तुम छू सकता है , अभ तू अपनी अस्स मरवा ले , क्यों तरसा रही है बेचारे को..." सीमा , कोमल का हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोली ,

"क्या देदू , अप्प अभी तक वोह बात नै भूली , उफ़ मुझे लगा , अप्प भूल गई होंगी.." कोमल मुस्कराते हुए सीमा की आँखों में ज़कते हुए बोली ,

"ाचा जी , में नै भूलने वाली , जब तक तेरी इस हसीं अस्स की ऐसी की तैसी न करवा दू , में नै भूलने वाली..." सीमा ने कोमल को आंख मरते हुए बोलै , तोह दोनों हसने लगी ,

"ोूछह..." कोमल हस्ते हस्ते सिसक उठी , यह मीठा मीठा दर्द उसके निचले होंठ में हुआ था ,

"उफ़ , लगता है , तेरे नरम होंठो की अछि खातिर दरी हुई है..." सीमा हस्ते हुए बोली ,

" ददऊ , जाओ छाए लाओ मेरे लिए..." कोमल बेहद शर्मा कर बोली , तोह सीमा उठ कर बहार चली गई , तब तक रवि भी वाशरूम से बहार ा गया ,

"कैसी है मेरी जणू..." रवि ने कोमल के साथ बेथ ते हुए बोलै ,

"ठीक हु जणू , ोुछ.." कोमल मुस्कराते हुए बोली , तोह उसे फिर से अपने होंठ में दर्द सा हुआ ,

"ओह्ह हो , मेरी जणू के नरम होंठ सूज गए हैं , लाओ में ठीक कर देता हु..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै तोह कोमल ने अपनी नली नली अखन ज़ुका ली ,

रवि ने कोमल के पास होकर , उसके होंठो को फिर से चुम लिया , बेहद धीमे से , उफ़ कोमल को इक सकूं सा मिल गया , रवि धीरे धीरे कोमल के होंठो को चूमने लगा , वोह चुम लेता फिर छोड़ देता , फिर चुम लेता , ऐसा 5 मिंट तक चलता रहा ,

फिर दोनों अलग हो गए , उफ़ रवि ने कोमल के होंठ देखे , नरम लाल होंठ , थोड़े थोड़े सुज़े हुए , अह्ह्ह रास से भरे गुलाबी होंठो पर आयी , यह सूजन इतनी दिलकश , कातिलाना लग रही थी , उफ़ कोमल का हसीं चेहरा , इतना खूबसूरत , उसकी ज़ुकी ज़ुकी ब्लू (नली) अखन , उसके भेज भेज होंठ , इतना खूबसूरत कोई कैसे हो सकता था , भगवन ने ऐसी रचना कैसे कर दी , कैसे , कोमल , उफ्फ्फ इतनी खूबसूरत अह्ह्ह्ह , रवि अपनी कोमल को देखता खो सा गया ,

कोमल ने नज़रियन उठा , अपने भाई को देखा , उफ्फ्फ कोमल की नली नली अखन , वोह इस दुनिआ में किसी को भी पागल कर देती , उसकी आँखों में इतनी गहरायी थी , के कोई उनमे देख कर hi डूब जाता , कोमल अपने भाई की आँखों में देखते हुए , हल्का सा मुस्करा दी , उफ्फ्फ रवि के दिल का आखरी कोना तक त्रिपत हो गया , कोमल समाज गई , उसका डेविल उसके प्यार में मदहोश हो चूका है , जब जब डेविल रूही (कोमल) के प्यार में इस कदर मदहोश हुआ , वोह सब भूल गया , उसे बस हर तरफ रूही hi दिखाई दी , वोह रूही को देखता रहता , उसके चेहरे को , उसकी आँखों को , हज़ारो साल गुजर जाते , डेविल के सार से अपनी बहिन रूही के प्यार का नशा उतरने में , तब तक उसे दुनिआ में कोई और न दिखाई देता ,

"भइआए , अभ , अभ खो मत जाना मेरे अंदर , में आपको , में आपको , महसूस कर रही हु , अपने मन में , अप्प , अप्प , मेरे अंदर समां चुके हो , अह्ह्ह , भइआ यह एहसास बहुत सकूं दे रहा , मेरा दिल आपके प्यार से भर चूका है , भइआ , दिल करता है , में आपकी आँखों में देखती राहू , अप्प , अप्प , मेरे अंदर , मेर मन की अंतिम गहरायी तक चले गए हो , भइआ मुझे नशा हो रहा है , आपके प्यार का , अह्ह्ह , भइआ , अप्प मत जाओ इतनी गहरायी में , में अकेली नै हु , आपका जीवन कितनो के साथ जुड़ा है , वोह सब टूट जाएगी आपके बिना , भइआए लोटत आयु , अप्प सबको भूल जाओगे , वोह सब की सब , आपकी यद् में मर जाएगीइ , आपके जीवन में कई लड़कियाँ और हैं , भइआए , मैट देखू , भइया अप्प्प खू रहे हो , मेरे प्यार में दुब जाओगे अप्प , मेरे प्यार का अंत नै मिलेगा आपको , भइआ हाजाओ साल लग जायेगे , भय्याहा मत्तट कारु ऐसा , आपकी बेटीई मर जाएगीइइइइइइ..." कोमल अपनी नली नली आँखों में बेइंतहा असनु भरते हुए अपने मन में बोली , वोह अपने भाई का इतना प्यार सेहन नै कर प् रही थी , वोह रो रही थी , उसका मन त्रिपत हो गया था , अपने भाई का इतना प्यार देख ,

िका इक रवि के सीने में तेज़ जलन हुई , रवि होश में ा गया , जैसे किसी ने उसे रोक दिया था , कोमल के प्यार में दुब जाने से ,

"कोमल , शहहह , रोना बंद कारु , जान , कोमल , प्लसस , तुम , तुम , मेरी कसम , कोमल..." रवि बेइंतहा दर्द में डूबा , अपनी बहिन कोमल के असनु भेज चेहरे को , उसके लाल लाल नरम होंठो को , बेइंतहा चूमता हुआ बोलै , कोमल खामोश हो गई , रवि उसके होंठो को कास कास कर चूसने लगा , अहह कोमल के होंठो पर इक मुस्कान ा गई , उसका भाई सच में पागल था , उसके प्यार में ,

"रुकू दोनों..."

दोनों इक डैम से अलग हो गए , जब सीमा ने दोनों को रोका , उसके हाथ में छाए की ट्रे थी , उसने ट्रे बीएड के केबिन पर रख दी , और रवि का कण खींच कर बोली ,

"हम्म , अभ होंठ मिल hi गए हैं , तोह खा जाओगे , हीईइं , अभ चुप चाप छाए पियो , और कोमल के होंठो को चुना भी मत , बेचारी कोमल , उसके लाल लाल होंठो को पूरा सज़ा दिया है ..." सीमा ने रवि का कण पकड़े कोमल की तरफ देखते हुए मुस्करा कर बोलै तोह कोमल शरमाते हुए मुस्कराने लगी ,

"ोुछःह , नै चुस्त , अह्ह्ह , लेकिन..." रवि ने बेहद भोलेपन से बोलै तोह सीमा ने उसका कण छोड़ दिया , सीमा ने उसे छाए दी ,

"लेकिन क्या..."

"उफ़ कोमल के होंठ बहुत मीठे हैं , इक डैम शहद की तरह , अह्ह्ह्ह , मन hi नै भरता , इक बार मोह में भर लू , बस , अह्ह्ह दिल करता है , बस चुस्त जाऊ , चुस्त जाऊ.." रवि अखन बंद कर कोमल के नरम होंठो को महसूस करते हुए बोलता गया , जब उसने अखन खोली , "सीमाआ..." रवि चीला उठा , क्यों की , न वह कोमल थी और न वह सीमा ,

"तुम..." रवि थोड़ा चौंक कर बोलै ,

"हुऊ , बेवकूफ..." यह ख़ुशी थी जो कब से बालकोनी की इक तरफ शूप कर कड़ी , तीनो की बतिअन सुन रही थी , पर सीमा और कोमल के जाते hi वोह अंदर ा गई थी ,

"तेरी तोह..." रवि ने तेज़ी से बीएड से उठ ख़ुशी को पकड़ना चाहा , पर ख़ुशी वह से गयाब हो गई ,

"तमासस्स..." रवि गुस्से में पेअर पटक वाशरूम में चला गया , रवि ने नाहा कर ब्लैक कपडे पहन लिए , उसने अचे से अपने बालो को सवार , थोड़ा sent-vent लगा , आँखों पर ब्लैक चश्मा लगाए , वोह घर के हॉल में पहुँच गया ,

रवि ने देखा , सीमा , कोमल , रिमी , शूरति , रमा , काट , बेबी , मतलब सब की सब वह बैठी हुई ब्रेक फ़ास्ट करते हुए बतिअन कर रही थी , पहले उन सब ने रवि को देखा , पर फिर बतिअन करने लगी ,

"अहूऊऊ अहूऊऊऊ (खासते हुए) , कैसा लग रहा हु में..." रवि आँखों से चस्मा उतर बेहद स्टाइल में बोलै ,

"बकवासस्स..." ख़ुशी घर के अंदर एते हुए बोली ,

"खुशी , रुक अभ तू..." रवि ने अपना चस्मा फिर से पहनते हुए बोलै , सब हसने लगी रवि को यु करता देख , वोह ख़ुशी को पकड़ने भगा , ख़ुशी सामने बने इक रूम में घुस गई , रवि भी तेज़ी से उस रूम में घुसा और ख़ुशी को बहु में भरे बीएड पर गिर गया , उसका चश्मा उसकी आँखों से उतर , बीएड पर hi कही गिर गया ,

"अह्ह्ह , कमीने छोड़ मुझे , अह्ह्ह..." ख़ुशी बीएड पर , रवि के निचे लेती , कसमसाते हुए बोली ,

"मेरी जंगली बिल्ली (कैट) , अभ कहा जाएगी ..." रवि ने ख़ुशी के दोनों हाथो को कलाई से पकड़े बीएड पर दबाते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह , छोड़ मुझे , अह्ह्ह , दूर हैट , अह्ह्ह..." ख़ुशी ने रवि के निचे लेते , कसमसाते हुए बोलै ,

"शठ , ी लोवीएए ोूउउ , पारी लोग में तुम प्यार न दे पाया , उसके लिए मुझे माफ़ कर देना , पर इस जनम में , जब भी तुम्हारा दिल करे , मेरी जान भी मांग लेना , और खुशु में तुम , दुनिआ की हर ख़ुशी दूंगा , जीवन भर तुम प्यार करुगा , मुज़से कभी दूर मत जाना.." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै , तोह ख़ुशी खामोश हो गई , वोह ख़ामोशी से बिना पालक जपकाये , रवि की आँखों में देखने लगी ,

"खुशु , जब से में डेविल बना हु , तुम तामस बानी हो , तब से तुम हर पल , हर लम्हा , अपने करीब देखना चाहता हु , जानती हो क्यों , क्यों की जान , तुम्हारे साथ हेलल में सदियों तक सड़ता रहा , तुम मेरे पास रही , हर पल , हर लम्हा , तुम , तुम ख़ुशी नै हो , तुम , तुम , मेरी जिद्दी , लड़ाकू तामस हो , जो मदिरा में डूबी , मुझे सताती रहती थी , जिसने मदिरा पी पी कर , मेरा जीना हराम कर दिया था , पर खुशु , सच कहता हु , अगर , अगर , तुम हेलल में , मेरे पास न होती , तोह शयद में मर जाता , खुशु..." रवि ने बेइंतहा दर्द में दुबे रट हुए बोले , उसके बहते असनु ख़ुशी के मासूम , दूध से सफेद चेहरे पर गिर रहे थे , वोह रोने लगी , वोह रट हुए इतनी खूबसूरत लग रही थी , में बयान नै कर सकता ,

"खुशु , मुझे यु hi परेशान करते रहना , मुझे , मुझे , यु hi सताते रहना , में तुम चाहता हु , में बता नै सकता , में तुम कितना चाहता हु , खुशु मेरी जान , मेरी तमासस्स..." रवि ने ख़ुशी के होंठो को चूमते हुए बेइंतहा रट हुए बोलै , उसके शबदो में इक दर्द था , फिर वोह अलग हो गया , वोह ख़ुशी के साथ लेट , ऊपर रूम की चाट को देखने लगा , उसकी आँखों से अभी भी असनु बह रहे थे ,

ख़ुशी उसके साथ लेती , रट जा रही थी , रट जा रही थी , उसने अपनी अखन बंद कर ली , लेकिन असनु कभी रुकते हैं , असनु अपना रास्ता दंड लेते हैं , यही हुआ , ख़ुशी ने अखन बंद कर ली , पर असनु उसकी आँखों को चीयर , बस बहते गए , बहते गए , फिर िका इक उसने अपनी आँखों खोल ली ,

"रवीए , मेरे बेवकूफ डेविल , में , में , तुम्हारी हु , सिर्फ तुम्हारी , में तुम्हारे लिए हेलल तोह क्या , कही भी जा सकती हु , में सदियों तक हेलल की ताप्ती अग्ग में जल सकती हु , में , में , सदियों तक तुम्हारा इंतज़ार कर सकती हु , चाहे तुम , चाहे तुम , पारी लोग में मेरा प्यार न समाज पाए , पर , पर , वोह मेरा प्यार hi था , जो तुम मेरे बिना इक पल नै रह पते थे , वोह मेरा प्यार hi था जो तुम मेरे लिए , उन अँधेरे जंगलो में चले गए , रवीए , मुझे प्यार दो , मुझे प्यार दो , में तड़प रही हु , प्लस रवीए , मुज़से प्यार करो , में , में , बस तुम्हारा दो पल का प्यार चाहती हु , फिर , फिर चाहे में मर hi क्यों न जाऊ , बेवकूफ , मेरा प्यारा बेवकूफ डेविल..." ख़ुशी , रवि की बहु में लिपट , बेइंतहा दर्द में डूबता हुए , दर्द की आखरी सीमायिओं को तोड़ कर , बेइंतहा रट हुए बोली , उसके इक इक शब्द में , लाखो जख्मो का दर्द था , लाखो मौत का दर्द था ,

"शहहह , मेरी तामस , मेरी तमासस्स..." रवि , ने ख़ुशी को अपनी बहु में कास कर भरते हुए रट हुए बोलै ,

रवि ने ख़ुशी की तरफ करवट बदल , अपने होंठ , ख़ुशी के गीले गुलाबी नरम होंठो पर रख दिए , रवि प्यार से रट हुए ख़ुशी के होंठो को चूसने लगा , दोनों रो रहे थे , लेकिन यह प्यार के असनु थे , ख़ुशी रट हुए कुदरत की बनायीं इक अद्भुत रचना परतीत हो रही थी , वोह बेइंतहा मासूम थी ,

रवि पहले धीरे धीरे ख़ुशी के होंठो को चुस्त रहा , पर फिर वोह ख़ुशी को सीधा लेता , उसके चेहरे पर झुक , कास कास कर उसके होंठो को चूसने लगा , ख़ुशी के नरम लाल होंठ पिस्टे चले गए रवि के होंठो में , रवि उसके लाल होंठो से पूरा प्यार निचोड़ रहा था , रवि ने मदहोश होते हुए , ख़ुशी के निचले होंठ को दांतो से हल्का हल्का काट कास कास कर चूसने सुरु कर दिया , ख़ुशी के बदन में इक सिरहान सी दौड गई , उसे मीठा मीठा दर्द होने लगा ,

"उम्म्म उम्म्म श.." रवि सिसकते हुए ख़ुशी के होंठो से अपने होंठ रगड़ते हुए , उनको मोह में भर भर कर चूसने लगा , "सुररपपपप सुरररपपपपप उम्म्म.." रवि ने होंठ चूसते चूसते अपनी जीभ ख़ुशी के होंठो पर घुमानी सुरु कर दी , ख़ुशी ने मदहोशी में होंठो को चुसवाते हुए अपना मोह खोल दिया , बस उसी पल रवि की जीभ ख़ुशी के मोह का कोना कोना तलाशने लगी , ख़ुशी मचल उठी , जब उसकी जीभ रवि की जीभ से लड़ने लगी , तभी रवि ने अपना इक हाथ ख़ुशी के मोठे कैसे हुए मम्मो (बूब्स) पर रख दिया , उफ़ जैसे hi रवि ने अपने हाथ की उंगलियों को ख़ुशी के गोल गुब्बारे जैसे मोठे मम्मो पर दबाया , अह्ह्ह इतना नरम के रवि के हाथ की उंगलियाँ धास्ति चली गई अंदर , ख़ुशी मज़े में पागल हो गई , उसने और भी कास कर रवि के होंठो चूसना सुरु कर दिया , ख़ुशी ने अपनी रास से भरी लपलपाती जीभ रवि के मोह में दाल दी , उफ्फ्फ रवि तोह पागल हो उठा ,

"अम्म्म सुररपपप सुररपपपप अम्म.." रवि उसकी जीभ को अपने होंठो में दबा , कास कास कर चूसने लगा , जैसे उसकी जीभ का सारा रास निचोड़ देगा , दांतो में दबा हल्का हल्का काटने लगा , ख़ुशी वासना में मचलने लगी , रवि ने ख़ुशी की जीभ को पूरा मोह में भर लिया और ऐसे खींच खींच कर चूसने लगा , जैसे कोई बचा अपनी माँ का दूध चूस रहा हो , जैसे को बछड़ा काऊ का दूध चूस रहा हो , उफ़ क्या एहसास था ,

"अहूऊऊ अहूऊऊऊ..." तभी किसी के खस्ने की आवाज़ आयी , तोह दोनों अलग हो गए , रवि ने तेज़ सांसे भरते हुए रूम के दरवाजे की तरफ देखा , उफ़ सब की सब कड़ी रो रही थी , कोमल , सीमा , रमा , रिमी , शूरति , बेबी , काट , लारा , एलिज़ा , सब रोये जा रही थी , पता नै कबसे , वोह सब इतनी ख़ामोशी से रो रही थी के किसी के सिसकने की आवाज़ भी नै ा रही थी , फिर ख़ुशी भी उठ कर बेथ गई , उसके लाल लाल होंठो पर थोड़ी सूजन ा गई थी , उसके नरम रसभरे होंठो में जलन हो रही थी , उसे मीठा मीठा दर्द हो रहा था , क्यों , क्यों की , डेविल ने उसके होंठो को चूसा था , चूसा hi नै था , पूरा रास निचोड़ दिया था ,

रवि उठ कर खड़ा हुआ तोह सब उसके पास ा गई , फिर इक इक करके , रवि के गले लग , अपने और उसके मन को शांत करने लगी , ख़ुशी अभी भी बीएड पर बैठी मुस्करा रही थी , वोह बस महसूस कर रही थी , अपने होंठो के दर्द को , लेकिन उसे इक अलग hi सकूं मिल रहा था , वोह इक डेमों थी , वोह खुद को मर्दो से बेहतर मानती थी , लेकिन अज्ज , अज्ज , रवि ने उसे इक लड़की होने का एहसास करवाया था , रवि ने इतना कास कर उसके होंठो को चूसा था , वोह बार बार उन पालो को यद् कर रही थी , उसे शर्म ा रही थी , उसकी मुलाम कुवारी छूट रास छोड़ती गीली हो गई थी , वोह कुछ देर बाद उठी और शरमाते , मुस्कराते हुए , रूम से बहार चली गई , अपने रूम में जाकर , उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया , ख़ुशी बीएड पर लेट , अपने सुज़े हुए होंठो को अपनी ऊँगली से छू कर देखने लगी ,

"ोुछः उफ्फ्फ.." जैसे hi उसने निचले होंठ को ऊँगली से दबाया , वोह सिसक उठी , वोह बेइंतहा शर्माने लगी , उसे अभ भी , रवि के होंठ अपने होंठो पर महसूस हो रहे थे , अज्ज तामस पहली बार खुद को , इक आम सी लड़की समाज रही थी , वोह मंद मंद मुस्कराते हुए , बेइंतहा मासूम और कातिलाना लग रही थी , वोह रास से भरी लपलप शराब की बोतल लग रही थी , अज्ज डेमों तामस का गरूर टुटा था , अज्ज उसे मदिरा की जरुरत नै थी , अज्ज उसे प्यार का नशा था...

वही दूसरी तरफ..

"भइआ , अप्प कितने अचे हो..." रमा ने रट हुए अपने भाई का चेहरा चूमते हुए बोलै ,

"बस जणू , ाचा , में शहर जा रहा हु , बेबी , काट , तुम दोनों 2 बजे अनु के ऑफिस पहुँच जाना , और कोमल अप्प और रमा मेरे साथ चलो , और रिमी , शूरति , में अज्ज शाम को तुम दोनों को घूमने लेकर जाउगा..." रवि ने अज्ज का पूरा प्लान सबको सुनते हुए बोलै ,

"हैश्च , देखो , में अकेला हु , में धीरे धीरे तुम सबको वख्त दूंगा , मुज़से नाराज़ मत होना कोई भी , लारा , एलिज़ा तुम दोनों भी काट और बेबी के साथ ा जाना , ाचा , में चलता हु..." रवि ने सबकी तरफ देख बेहद शांति से बोलै ,

"उफ्फ्फ , रवि , हम सब जानती हैं , तुम हम सबको कितना चाहते हो , और अप्प इस बात की बिलकुल चिंता मत करना , कोई आपसे नाराज़ नै होगा , सबका हुक है अप्प पर , जिसे जो चाहये होगा , वोह मांग लेगी आपसे , अप्प शांत रहो , दुखी मत हो.." सीमा ने सबकी तरफ देख , बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"लार्ड सीमा , सही बोल रही है ..." सभी इक साथ बोल पढ़ी , पर रमा ने लार्ड मुम्मा बोलै था , और सब हसने लगी , रवि भी ,

" क्या तुम सब भी , और इक बात , अप्प खाना खा कर जाओ , plss.."seema ने रवि के गाल को चुम कर बोलै , तोह रवि ने मुस्करा कर , हाँ में सार हिला दिया ,

फिर सबने खाना खाया , वोह हस्ते , khil-khilate , बतिअन करते , इक दूसरे से हस्सी मज़ाक करते , बेइंतहा ख़ुशी में खाना खा रहे थे , क्यों की यह इक परिवार था , रवि का खुद का परिवार , जिसे इक करने में , सबको पाने में , उसने बेइंतहा दर्द सही , काली दर्द भरी रतियन गुजारी , लेकिन अज्ज 12 साल बाद , इस पल , उसने अपनी अलग दुनिआ बना ली थी , यह दुनिआ , समाज से दूर थी , उसके बनाये निज़मो और कानूनों से दूर थी , यह दुनिआ रवि ने बनाई थी , उसकी अपनी दुनिआ , पर इस दुनिआ में किसी की कमी थी , वोह कमी थी , उसकी बड़ी बहिन रेखा की , उसकी अखन नाम हो गई , तभी उसे फर्जी की यद् ा गई , उसका खून , उसकी अपनी बेटी ,

"अरे मेरी बेटी कहा है..." रवि अपनी बेटी को यद् करते हुए बोलै ,

"बाबू , वोह सो रही है , में लती हु उसे.." बेबी मुस्करा कर उठी और रूम में चली गई , कुछ पलु बाद वोह बहार आयी , उसके साथ फर्जी थी , वोह अभी अभी उठी थी ,

"फरीय बेटा.." रवि ने कुर्सी से उठ , घुटनो के बल जमीन पर बेथ , अपनी बहे फैला , दर्द में दुबे चीला कर बोलै , उसे अपनी बहिन रेखा की बेहद यद् ा रही थी , वोह रोने लगा ,

"पापा..." फर्जी भाग कर अपने पापा के गले लग गई , वोह बेइंतहा रो रही थी , वोह अपने पापा को अपनी बहु में कस्ती जा रही थी ,

"मेरी बची , मेरी बेटी , मेरा अपना खून , मेरा बचा , पापा को माफ़ कर दे बीटा , तुज़से और तेरी मुम्मा से दूर रहा , माफ़ करदे बचा , जब तू छोटी थी , जब तू चलना सिख रही थी , में , में , क्यों नै था वह , क्यू , क्यू , मेरी बेटी , में तुझे जनम लेते , अपने हाथो में क्यों न उठा पाया , क्यू , अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह , रेखा डीडीई , माफ करदु , माफ करदु , अह्ह्ह्हह्हह , मेरी बेटीई , मुझे माफ़ करदे , में ा न सका , माफ़ करदे बीटा...." रवि बेइंतहा दर्द में चीखते हुए , रट , भिलखते हुए , अपनी बेटी को अपनी बहु में जकड़े , अपनी बेटी को बेहद शिदत से महसूस करता हुआ बोलै ,

सब की सब चौंक गई , बेबी और काट , इक दूसरे का चेहरा देखने लगी , सब की सब , खाना कहते कहते खाना भूल गई , उनकी अखन खुली की खुली रह गई , यह बहुत बड़ा जतका था , फर्जी , रवि की अपनी बेटी थी , उसका अपना खून , उसकी बहिन रेखा की बेटी , रेखा की अपने पवितर प्यार की आखरी निशानी , यह ऐसी बात थी , जिसने सबके होश उड़ा दिए थे , वोह ख़ामोशी से इक दूसरे का चेहरा देख , आँखों में असनु लिए , इक बाप को उसकी बेटी से मिलते देख रही थी , चाहे पहले hi , रवि ने फर्जी को अपना लिया था , पर अपना खून तोह अपना hi होता है ,

"पापा , अप्प मेरे पापा हो , गॉड ने मेरी सुन ली , पापा , मुम्मा बहुत रोटी थी , वोह , वोह , कहती थी अप्प मर्डर गए हूँ , पापाआ , मुम्मा को लाऊ ना , पापा..." फर्जी बेइंतहा रट हुए अपने पापा रवि के चेहरे को बेतहाशा चूमते हुए बोली , हर कोई रो रहा था , अरे कोई पत्थर दिल hi होगा , जिसकी आँखों में असनु न ए ,

"बेटा , माफ करदी , तेरी मुम्मा सच कहती थी , में मर्डर गया था , कासशहहह में सच में मर्डरर जाताआ , अह्हह्ह्ह्ह , तू कितना रोटी रहीईई , मेरे लियी , बेटीई , तेरई मुम्मा से क्योऊ दूरर गया , क्यू , क्योऊ , बेटा , तेरी मुम्मा बहुत खूबसूरत थिई , इतनी के में बता नई सकता , बेटा , अभ में तेरी पास रहुगा , तुझे प्यारर दूंगा , और बेटा , गॉड ने तेरी 1 मुम्मा ली , तोह देख कितनी मुम्मा तुझे दे दी..." रवि अपनी बेटी के पोरे चेहरे को पगलू की तरह चूमते हुए , बेइंतहा रट हुए बोलै , रवि के दिल में जो दर्द था , ऐसे में लिख नै सकता , बता नै सकता , बोल नै सकता , बस महसूस कर सकता , में रो रहा हु , यह लिखते लिखते , सच में ,

"मेरी मुम्मा को गॉड क्यू ले गई , मने , मने , बस आपको माँगा था , पापा , मुझे मुम्मा लकररर दू , प्लसस पापा , म्युज़िए मुम्मा के पास जाना हैई , प्लसस पापा , प्लसससस..." फर्जी अपनी माँ रेखा को यद् , बेइंतहा रोने लगी , उसका दर्द में कह नै सकता , अप्प महसूस करो , खुद को फर्जी के स्थान रख कर ,

"नयी बेटा , मुम्मा को दुःख होगा , वोह , वोह , रोयेगी , बहुत रोयेगीइ , तुम मुझे देखो , बेटा , मेरी ाखांण मी देखू , मी होई तेरी माँ हूँ ाभः , में ही तेरा पिता , बेटा , तू म्युज़िए अपनी माँ समज़्ज़ज़ लिए , अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह , रेखा डेडीईईई , क्या करूण मई , क्याआ..." रवि ने बेइंतहा रट हुए , चीखते छीलते हुए बोलै , वोह दर्द में पागल हो चूका था , तभी उसके कंडे पर किसी ने हाथ रखा , उफ्फ्फ यह कोमल थी , वोह बेइंतहा रो रही थी , उसने निचे बेथ , अपने भाई को बहु में भर लिया , रवि उसके कंडे पर सार रख रोने लगा ,

"फररीईई..." बेबी उस सदमे से बहार एते हुए चीख कर बोली , जो उसे अभी अभी लगा था ,

बेबी ने भाग कर फर्जी को अपनी बहु में भर लिया , वोह उसके पूरे चेहरे को पगलू की तरह चूमने लगी , अभ बेबी hi उसकी माँ थी , अभ बेबी hi रेखा थी ,

"मुम्मा , मुम्माआ..." फर्जी माँ का पूरा प्यार बेबी में महसूस करते और भी रोने लगी , उसने बेबी के गले लग महसूस किया जैसे वोह अपनी रेखा के गले लगी है , उफ्फ्फ यह क्या अजीब खेल था भगवन का , क्या अजीब खेल था , भगवन ने यह क्यों किया , क्योऊ , क्यूँउउ ,

"मेरी बेटीई , मी , मी , तेरई माँ हूँ , तुणी , क्यू बोला , क्यू , के पापा मुम्मा को लाऊ , क्योऊ , मी तेरई माँ हूँ , बेटीइ , में तेरई मा हुऊ , में मर्डर जोगीई तेरी बैना , तुणीऐ क्यू कहा , क्यूँउउ , में मर्डर जोगीइइइइ , अह्ह्ह्हहए..." बेबी बेइंतहा चीखते रट हुए बोली , उसकी ममता इस कदर बढ़ गई के वोह फर्जी के बिना इक साँस भी नै ले सकती थी ,

"मा माफ करदु , माआ , माआ..." फर्जी थोड़ा पीछे होकर रट हुए बोली , और फिर बेबी का चेहरा चूमने लगी , फिर बेबी ने उसे बहु में भर लिया , तब तक काट भी उनके पास ा गई थी , फिर बेबी ने फर्जी को गॉड में उठा लिया , काट और बेबी , फर्जी को रूम में ले गई ,

दूसरी तरफ रवि , कोमल के गले लगा हुआ था , कोमल उसे शांत करने की कोससिह कर रही थी , उसे पता था , उसका भाई सदमे में जा रहा था , वोह जानती थी , उसका भाई अगर सदमे में गया , तोह पता नई कितनी दिनन बाहर न आई , और अभ तोह वोह डेविल था , कही वोह गहरी नंद न सो जाई , सदियाँ बीत जाएगीइ उसके उठने तक्क , उसका भाई सदियों तक फिर से उससे दूर होगा , वोह चीख उठी , वोह जोर जोर चखने लगी , पिछली बार जब डेविल गहरी नंद सोया था , सदियाँ बीत गई थी , वोह सदियों तक जगती रही , रोटी रही , पर डेविल तक उसके मासूम दिल की अहहत पहुँच न पायी ,

उफ्फ्फ अभ क्या करेगी कोमल , पिछली बार रूही की बहु में डेविल सो गया था , क्या अज्ज कोमल की बहु में रवि सो जायेगा , यह कैसा इम्तिहान था मोह्हबत का , यह कैसी परीक्षा थी मोह्हबत की , अज्ज कोमल को फिर से अपने पवितर प्यार को साबित करना था , अज्ज उनके प्यार की सबसे बड़ी परीक्षा थी , क्या अज्ज कोमल रोक पायेगी अपने भाई को सोने से , क्या डेविल सो जायेगा , और यह कहानी यही ख़तम हो जाएगी , क्या होगा .... और कोण कर रहा था यह सब , क्या रिंग यह सब कर रही थी , या रवि के पिता ...?

दूसरी तरफ.....

इक बेहद अँधेरे भरा स्थान , यहाँ चारो तरफ अंधकार था , as-pas आसमान को छूटे बड़े बड़े काळा पेड़ थे , वह इतना अँधेरा था के किसी भी पेड़ का आखरी शूर तक नै दिख रहा था , वोह बड़े बड़े पेड़ भी , उस काळा अंधकार में , बस आधे hi दिख रहे थे , वोह गोल आकर में करीब 5 किलोमीटर तक फैले हुए थे , जैसे वोह किसी की रक्षा कर रहे हो , और यह बड़े बड़े काळा पेड़ इक "हवेली" की रक्षा कर रहे थे , इक बेहद सुनसान काली हवेली , जिसकी बहरी दीवारे भी काळा अंधकार में डूबी हुई थी ,

लेकिन यह हवेली थी किसकी , यह हवेली थी काल की , काल जो रवि के पिता थे , इक बेइंतहा शक्तिशाली वैम्पायर , पर क्या वोह बस इक वैम्पायर hi था , या उस से भी बढ़कर था , रवि पहले इस हवेली में ा चूका था , जब वोह पहली बार काल से मिलने आया था ,

ऐसी हवेली से रवि को इक नया जनम मिला था , उसका इक नया जीवन सुरु हुआ था , लेकिन यह हवेली कितनी पुराणी थी , किसने बनाई थी , इतने गहरे जंगल में , किसी को , क्या जरुरत ाँ पढ़ी , के उसे हवेली बनानी पढ़ गई , उफ़ बहुत सवाल थे , बहुत रहस्य थे ,

"आपका बेटे ने वोह रिंग पहन ली , अभ क्या होगा , कोण उतर पायेगा उस मनहूस रिंग को , क्या अप्प यह कर सकते हो , क्या कोमल यह कर सकती है , क्या रवि खुद अपनी ीचा से रिंग उतर देगा , अप्प बताओ न कुछ ..." यह माया थी , इक रहस्मयी लड़की , जो तब से थी , जब से काल था ,

इक बंद कमरे में बैठा काल , माया की बतिअन को सुन रहा था , इक कला लिबास , जिसमे कुछ नै दिख रहा था , उस लिबास के अंदर , बस कला अंधकार दीखता था , और दो चमकती लाल अखन...

तो बे कुनिटेड... [friends jo log abhi hain voh toh replys karo , jo nai hai , voh a jayege , jab unko ehsas hoga ke me unke pas hu or unse door nai jauga ,

muze ik last hope hai app sab mera sath doge , me daily updates dunga , par agar app replys nai doge toh muze kya pata chalega , me sahi likh reha hu ya nai , apne vichar rakho , koi kami hogi toh me door kar dunga.. shukriya...]

 
फ्रेंड्स अज्ज रत को 10 बजे अपडेट आएगा... कल रत को में आया था , पर साइट ऑफ थी , सॉरी , में अभी 10 बजे पोस्ट करता हु अपडेट , थोड़ा सा चेक करलु..
 
अपडेट-127



डे-2

अभ अग्गे...

काल खामोश बैठा माया की बात सुन रहा था , पता नै उसके मन में क्या कुछ चल रहा था , पर काल था कोण , क्या सच में वोह रवि का पिता था , क्या पारी लोग से उसका कोई रिश्ता था ,

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काल उस काळा लिबास में लिप्त , बहुत से रहस्य अपने भीतर छुपाये बैठा था , उसकी लाल चमकती अखन ,

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कई बार बहुत जायदा लाल रौशनी में जगमगा उठ टी , और कई बार वोह अखन कही अलोप सा हो जाती , तब वह बस अंधकार hi दीखता , काल की पहचान बस उसकी दो लाल रौशनी में चमकती अखन hi थी ,

"अप्प क्या सोच रहे हैं , मने अप्प से कुछ पूछा था , आपका बीटा वोह रिंग पहन चूका है , अभ क्या होगा ..." माया ने बेहद चिंता में , बेहद उदास आवाज़ में बोलै ,

"हम्म , माया जो लिखा होता है , उसे कोई नै बदल सकता , न तुम और न hi में , रवि ने रिंग अपनी ीचा से पहनी है , रवि को पता था , वोह रिंग शेतीअन का इक जीता जगता अंश है , जब सुहाना ने अपनी बहिन रूही से बेइंतहा नफरत की , वोह रूही को मर कर , उसका स्थान लेना चाहती थी , ऐसी छह में , उसने 6 कुवारी लड़कयों की बलि दी , वोह शेतीअन को अपना पिता मैंने लगी , वोह अपने पिता शेतीअन को बेइंतहा प्यार करने लगी ..."काल अभी बोल hi रहा था , माया बेच में बोल पढ़ी ,

"क्या शेतीअन सच में सुहाना के पिता थे , क्या सुहाना उनकी अपनी बेटी थी..." माया ने बेहद उत्सुक होकर पूछा ,

"इस बात का मुझे नै पता , यह बात कोई नै जनता , पर सुहाना को उस बुध्दि जादूगरनी से पता चला था के शेतीअन उसके पिता हैं , उसकी माँ ने शेतीअन की पूजा की और फिर उसका जनम हुआ..."

"ओह्ह , तोह क्या उस जादूगरनी ने सच बोलै था , हॉष्ह , यह सब बहुत उलझा हुआ है , कुछ समाज नै अत , किसकी बात सच है , किसकी झूठ , सब कुछ ुलाज़ सा गया है..." माया ने अपने माथे पर हाथ रखते हुए बेहद शांति से बोलै ,

"हम्म , तुम सही बोल रही हो , जो हमें आसान दीखता है वोह उतना hi कठिन होता है , पर रवि , मेरा बीटा रवि , वोह सब पता करेगा , वोह सब ठीक कर देगा , अग्गे सुनो , शेतीअन अपनी बेटी का इतना प्यार देख बहुत प्रभावित हुआ , वोह सदियों से सुपत अवस्था में सो रहा था , पर सुहाना ने उसकी नंद तोड़ दी , शेतीअन ने अपनी बेटी से खुश होकर , उसे अपनी बुराई का इक अंश दिया , जो इक लाल ऊर्जा सा बना हुआ था , उसका आकर गोल था , वोह बोल सकता था , उसमे अनंत काली शक्तियाँ थी , जब सुहाना ने 6वि लड़की को मौत के घाट उतरा , वोह शक्ति का अंश सुहाना के जिस्म में समां गया..."

"ओह्ह , फिर क्या हुआ..." माया अपने खूबसूरत सफेद चेहरे पर चिंता के भाव लेट बोली , उसका रंग सफेद रौशनी से भी सफेद था , बेहद सुन्दर थी माया ,

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"सुहाना को उस जीवट शेतीआणि अंश से , बेइंतहा शक्ति मिली , पारी लोग में सुहाना से ताकतवर कोई नै था , पर , मेरा बीटा रवि , बस वही इक था जो सुहाना से लड़ पता , और इक उसकी बहिन रमा , जब आखरी जुंग हुई , तब रूही के मरते hi , डेविल (रवि) पागल हो गया , उसने अपनी बहिन रमा (सुमों) के साथ मिल , सुहाना की साडी सेना को मिटा दिया , पूरा पारी लोग तबाह कर दिया , इस बात से राजा ाबून (रवि के पिता) बेइंतहा गुस्सा हो गए , राजा ाबून ने डेविल को मरने के लिए जीविका (काट) को बेह्जा , डेविल बस अपनी बहिन सुहाना को मरने hi जा रहा था , पर जीविका के एते hi वोह कमज़ोर हो गया , और सुहाना ने मौका मिलते hi डेविल को मर दिया..." अभी काल बोल hi रहा था माया फिर से बेच में बोल पढ़ी ,

"काल , जीविका तोह अभ भी रवि के साथ है , उसने कैटलीन के रूप में जनम लिया है , रवि को सब से पहले काट को मर देना चाहये , काट उसे मरवा सकती है..." माया ने बेहद चिंता में बोलै ,

"हम्म , तुमने सही कहा , डेविल के मरते hi रमा पागल हो गई , रमा को यह नै पता था के डेविल उसका भाई है , पर वोह बेइंतहा प्यार करती थी डेविल से , रमा ने गुस्से में आकर , जीविका (काट) को मर दिया , उसने इतनी बुरी मौत दी जीविका को , के सुहाना भी कम्प गई , फिर रमा और सुहाना , कई सालो तक लड़ती रही , पर आखिर में , रमा ने सुहाना को मर दिया , उसने सुहाना के शरीर को दो हिस्सों में चीयर दिया , तभी शेतीअन का वोह लाल रौशनी में चमकता अंश आज़ाद हो गया , रमा ने पहले उसे अपने लाल बालो में जकड लिया , फिर मलिका सोना की मदद से , उसे इक रिंग में दाल दिया , वोह रिंग शेतीअन का जीवट अंश है , वोह बोल सकती है , वोह , वोह सब कुछ कर सकती है , उसमे अनंत शक्ति है , पर अभ उस रिंग की शक्ति और भी बाद चुकी है..." काल ने पूरी कहानी सुना माया की तरफ देखा , जो मंत्र मुगड हुई काल की मनमोहक आवाज़ को सुनती जा रही थी ,

"हम्म , काल में जानती हु , लेकिन , लेकिन उस नीले पत्थर में ऐसी क्या शक्ति थी , और रवि को कैसे पता था , रिंग को उस नीले पत्थर पर hi रखना है..." माया ने फिर से अपने मन में उठ रहे प्रश्नो से विचलित होते हुए बोलै , माया hi इक मटर वैम्पायर थी , जो काल को उसके नाम से बुला सकती थी ,

"पता नै , रवि ने वोह सब क्यों किया , वोह नीला पत्थर इक मणि है , उन 6 मनइयन में से इक , उस नीले पत्थर में ब्रह्माण्ड की साडी ऊर्जा समय हुई थी , पूरे ब्रह्माण्ड की ऊर्जा , पर अभ शेतीअन और भी शक्तिशाली हो गया है , उसने रिंग के जरिये , पूरे ब्रह्माण्ड की ऊर्जा को प् लिया है , माया ब्रह्माण्ड में कितनी ऊर्जा होगी..." काल ने अपनी बात पूरी करते हुए माया से सवाल किया ,

"उफ़ बहुत ऊर्जा है , अनंत सितारे , अनंत ग्रह (प्लेनेट) , अनंत अंधकार , ब्रह्माण्ड में अनंत ऊर्जा है , जिसका हम सोच भी नै सकते..." माया ने और भी उदास होते हुए बोलै ,

"हम्म , शेतीअन बहुत चालक है , सुहाना ने उसे नंद से उठा , उसे ब्रह्माण्ड पर कब्ज़ा करने का रह दिखाया था , अभ सुहाना चाहे या न , पर शेतीअन कोमल की बलि देकर रहेगा , क्यों की , अभ बस कोमल hi इक मटर रूकावट है , उसके अधूरे मकसद के बेच , शेतीअन ने अपनी चालाकी से , अपना इक अंश सुहाना के जिस्म में दाल दिया , उसने सुहाना को पूरा अपने वश में कर लिया , सुहाना शेतीअन के वश में होकर , वोह सब करती गई , लेकिन रवि के कारन पारी लोग में उसका मकसद अधूरा रह गया , जैसे hi रवि ने उस रिंग को हाथ लगाया , शेतीअन ने रवि को वश में करके , उस अंतरिक्ष मणि (नीला पत्थर) की साडी ऊर्जा सोख ली , शेतीअन खुद को ताकतवर कर रहा है , इस बार वोह हर हाल में कोमल की बलि देना चाहता है..."

"ओह्ह्ह , कोण रोक पायेगा शेतीअन को..."

"रवि , मेरा बीटा रवि hi इक मटर जीव है जो शेतीअन को रोक सकता है , पर पहले उसे रिंग को अपनी ीचा से उतरना होगा , यह बात शेतीअन भी जनता है , के रवि उसे फिर से हरा देगा , ऐसी कारन , शेतीअन अभ रवि से अलग नै होगा , अभ , ऐनी वाला वख्त बताएगा , किसकी जीत होगी..." काल इतना बोल खामोश हो गया , माया भी यह सब सुन खमोश हो गई , उसके पास और कोई सवाल नै था , वोह बस अभ ऐनी वाले वख्त का इंतज़ार कर रही थी ,

दूसरी तरफ....

कोमल अपने भाई को अपनी बहु में भरे चीला चीला कर रो रही थी , कोमल यह बात जान चुकी थी , के उसका प्यारा भाई बेइंतहा दर्द में दुब चूका है , ऐसा पहले भी हुआ था , पारी लोग में इक बार डेविल अपनी प्रेमिका , अपनी बहिन रूही की बहु में सो गया था , कितनी सदियाँ गुजर गई , रूही रोटी रही , तड़पती रही , अभ वही हो रहा था , फिर वही सब , सब कुछ वैसा hi बीत रहा था जैसे पारी लोक में बीता था , कोमल अपने भाई को सदमे में जाने से रोक रही थी , कोमल समाज गई थी के , कोई न कोई तोह है , जो उसे और उसके भाई को अलग करना चाहता है ,

"भइआए उठो भइआए , अभ , अभ , मत सो जाना भाई , में , में मर जोगी आपके बिना , प्लसस भैई , उठू , उठाऊ ना , क्यों , क्यू , मेरे साथ hi क्यू , भाई , अपनी कोमल के लिए उठू , आपकी कोमल , मर जाएगीइ , आपकी कोमल मर जाएगीइ..." कोमल बेइंतहा रट हुए अपने भाई के होंठो को पगलू की तरह चूमते हुए बोली ,

सब की सब उसके पास आकर कड़ी हो गई थी , वोह रो रही थी , पर उनको कुछ समाज नै ा रहा था , आखिर रवि को , ऐसा क्या हो रहा था , जिस कारन कोमल इतना परेशान सी हो गई थी , पर था कोई , जो इस बात को समज़ता था , और यह कोई और नै , हमारी शरारती तामस थी , हमारी शरारतीओं की देवी ख़ुशी ,

ख़ुशी इक पल में वह ा गई , उसके रवि को कोई तकलीफ हो , और ख़ुशी को एहसास न हो , ख़ुशी सदियों तक रवि के पास रही थी , दोनों सदियों तक हेलल में सड़ते रहे , खेलते रहे , आपस में लड़ते रहे , दोनों मदिरा में दिन रत दुबे रहते , दोनों इक जैसे थे , सब से जायदा डेविल को उसकी तामस hi जानती थी , अभ तोह उसका रवि उससे दूर जा रहा था , उसका मासूम दिल तड़प उठा , वोह भगति हुई ा रही थी ,

"कोमल , क्या हुआ रवि को..." ख़ुशी ने कोमल के पास बेथ ते हुए बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै , अभ तक रवि अपनी कोमल की गॉड में सार रखे , अपनी अखन बंद किये , गहरी नंद में खोता जा रहा था ,

"ख़ुशू , भइआए..." कोमल बेइंतहा रट हुए ख़ुशी की तरफ देख बोली , कोमल इतने दर्द में थी , के उस से बोलै भी नै जा रहा था ,

ख़ुशी ने अग्गे बढ़ , रवि के माथे पर अपना हाथ रखा , उसके हाथ से लाल रौशनी निकल कर , रवि के माथे में सामने लगी , पर ख़ुशी को अजीब सा महसूस हुआ ,

"खुशु , भइआ को होश में लाऊ , वरना , ख़ुशू , भइआ सो जाएगी ..." कोमल अपने भाई के खूबसूरत चेहरे को इक तक देखते हुए , रट हुए बोली ,

"कोमल , क्या हुआ यहाँ , मुझे बताओ..." ख़ुशी ने शांत आवाज़ में कोमल से पूछा ,

फिर कोमल ने सब बता दिया , रवि का फर्जी से मिलना , फर्जी का उसकी अपनी बेटी होना , रेखा देदी और रवि का रिश्ता , रेखा का मरना , कोमल ने इक इक बात बता दी , जो रवि और उसके बेटी फर्जी के छोटे से मिलान में घाटी थी ,

"हूँ , कोई बात नई , में होश में लती हु रवि को..." ख़ुशी ने मुस्करा कर बोलै तोह कोमल चौंक सा गई , उसे अभ भी विश्वास नै हो रहा था , ऐसा भी कुछ हो सकता है ,

"क्या , सच मी , तुम , तुम , भइआ को , अह्ह्ह्ह , पर कैसे , उफ्फ्फ जल्दी करो खुशु..." कोमल हैरान सा होती हुई , अपने बहते असनुईओं पर विराम लगते हुए बोली ,

"हम्म , अभी लो , उठो बेवकूफ ..." ख़ुशी ने मुस्कराते हुए इतना बोलै , और रवि को निचे सुला , उसके माथे के पास बेथ गई , और फिर सब की तरफ देख कर बोली , "देखू , इक बात यद् रखना , जब तक , में अपनी अखन न खोलू , कोई भी , कोई भी , मुझे और रवि को हाथ नै लगाएगा , सब दूर बेथ जाओ..." ख़ुशी ने इतना बोल , अपना इक हाथ रवि के माथे पर , और दूसरा हाथ रवि के सीने पर रख , अपनी दोनों अखन बंद कर ली , ख़ुशी अपनी पूरी शक्ति को इक जुट कर , रवि को महसूस करने लगी ,

फ्लैशबैक....

इक ऐसा स्थान , जिसका आकाश , जिसकी जमीन , बेइंतहा अग्ग में जलती रहती थी , यहाँ तेज़ हवा चलती थी , तोह वोह भी अग्ग से गरम होती थी , यहाँ अगर तूफान अत था , तोह वोह भी अग्ग का hi अत था , यह इक ऐसा स्थान था , यहाँ चारो और ऊपर निचे , बस अग्ग hi अग्ग थी , अग्ग की बारिश होती थी , अग्ग के डरिये बहते थे , यहाँ का आसमान भी अग्ग से तप्त रहता था , यहाँ की मिटटी भी जवालामुखी के बहते लावे जैसी गरम थी , यह कोण सी जगह थी , यह जगह थी हेलल (नाराज)

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नाराज , यहाँ कोई नै जाना चाहता , यहाँ कोई नै रहना चाहता , यहाँ चारो और बस चीखने , छिलने की अवाजिअं , यहाँ चारो और रोने , खरहने की अवाजिअं , यहाँ चारो और बस दहकती अग्ग थी , यह हेलल था ,

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हेलल में बुरे जीवो को हर वोह सजा मिलती थी , जिसकी अप्प और में कल्पना भी नै कर सकते , यहाँ जीवो को हर तरह के कष्ट दिए जाते थे , यहाँ जीवो का अंग अंग जलाया जाता था , उनका अंग अंग कटा जाता था , उनको नोच नोच कर खाया जाता था , उनको , उनको , बेइंतहा दर्दनाक सजा दी जाती थी , और यह सब करता था , डेविल

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डेविल हेलल का राजा था , डेविल की अपनी सेना थी , जो बहुत क्रूर और बेरहम थी , इक दरिंदो की सेना , जो अजीब अजीब आवाज़ निकल हमेशा चीखते छीलते रहते , जो जीवो को तड़पा तड़पा कर , बेइंतहा दर्द देते , इस बेरहम सेना के साथ साथ डेविल के पास उसकी अपनी अंगरक्षक थी , जिसका नाम था तामस ,

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तामस इक बेरहम और खुखार डेमों थी , वोह हमेशा मदिरा में डूबी रहती ,

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पूरा हेलल तामस की क्रूरता से कंपता था , वोह जीवो को कच्चा नोच नोच कर खा जाती थी , वोह जीवो को दर्द देकर , खुद चीला चीला कर हस्ती थी , तामस जो डेविल के पास रहती थी , पूरा हेलल संभालती थी , डेविल के हर हुकम का पालन करती थी , पूरे हेलल में तामस hi इक मटर जीव थी , जो डेविल को कभी भी पीट (मर) सकती थी , उसने कई बार डेविल को पीटा था , पर क्यों ,

डेविल अपने सिंघासन पर बैठा हुआ था , वोह बेहद उदास था , वोह बेहद दर्द में था , अभी कुछ सदियों पहले hi उसे हेलल का राजा बनाया गया था , उसे जानबूझ कर हेलल में फेंका गया था , उसे सजा मिली थी , और यह सजा उसके पिता ने उसे दी थी , डेविल ने अपनी बहिन से प्रेम किया , इसकी दर्दनाक सजा वोह हेलल में सड़ते हुए काट रहा था , लेकिन वोह अकेला नै था , उसकी तामस भी उसके साथ थी ,

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"हुऊ , बेवकूफ डेविल , क्या हुआ तुझे..." तामस ने मदिरा में दुबे , नशे में लड़खड़ाते हुए डेविल के पास आकर बोलै ,

"तमस , हमें नंद ा रही है , हम सो रहे हाँ..." डेविल ने फिर से बेइंतहा उदासी में बोलै ,

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"है है है , बहिन के टेक , में अकेली क्या करुँगी , अगर , अगर , तू सोया , में तुझे उठा कर , उस अग्ग के दरिया में फेंक दूंगी..." तामस ने बेहद गुस्से में डेविल के सीने पर इक मुक्का जड़ते हुए बोलै ,

"तमस , तुम्हारी यह गुस्ताखी , तुमने हमें मारा , हम , हम , तुम इसकी सजा देंगे ..." डेविल ने बेहद गुस्से में अपने सिंघासन से उठ ते हुए बोलै ,

"है है है , तोह , इक बार और मृगी , जाओ , मेरे लिए और मदिरा लाओ ..." तामस ने खुद डेविल के सिंघासन पर बेथ ते हुए बोलै ,

"अह्हह्ह्ह्ह , पिता जी , आपको ख़तम कर दूंगा , पूरे पारी लोग को जला दूंगा , हमें यहाँ नै रहना है , हमें , हमें , रूही के पास जाना है..." डेविल ने बेइंतहा दर्द में ऊपर आसमान की तरफ देख चीखते छीलते हुए बोलै , डेविल की गुस्से भरी आवाज़ पूरे हेलल में गूंज उठी , चारो और अग्ग की लपटे उठने लगी , आसमान में बिजली कड़क उठी और अग्ग की बारिश होने लगी , डेविल और तामस , उस अग्ग की बारिश में भेजने लगे ,

"बेवकूफ ..."

"क्या , तुमने हमें बेवकूफ बोलै , हम तुम इसकी घोर दर्दनाक सजा देंगे , वुफफ्फ्फ़ हम , वुफफ्फ्फ्फ़ हम तुम हेलल से बहार फेंक देंगी , तमासस्स वुफफ्फ्फ्फ़ , तुम हमें परेशान क्यों करती हो..." डेविल ने गुस्से में घूरते हुए , तेज़ तेज़ सांसे भरते हुए चीला कर बोलै , (अप्प यहाँ लूसिफ़ेर की आवाज़ की कल्पना कर सकते हो)

"है है है , बेवकूफ..." तामस वैसे hi बैठी , इक मिटटी से बने पियले से मदिरा पेट हुए बोली ,

"तमासस्स , भूलो मत्तट , तुम हमारी गुलाम हूँ ..." डेविल ने तामस के हाथ से मदिरा का पियाला चीन खुद पेट हुए बोलै ,

"अभी लाल दरिंदे , में तेरी गुलाम नै हूँ , भूल गया , कैसे मेरे पैरो में गिरकर मुझे यहाँ लाया था , गुलाम , है है है..." ख़ुशी ने इक और पियाला हाथ में उठाये मदिरा के छोटे छोटे सिप लेते हुए अजीब सा हस्ते हुए बोलै ,

"झूठ , हमने ऐसा कुछ नै किया , हम प्रिंस हैं , हम , हम , उदास हैं , हमें रूही से मिलना है , तुम हमारी गुलाम हो , हमें रूही के पास लेकर चलो..." डेविल ने तामस के हाथ से दूसरा पियाला भी छींटे हुए , खुद मदिरा पेट हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्हुउउ , इक बार , इक बार और , तुमने मुझे गुलाम बोलै , में तुझे उठा उठा कर मृगी , पिछली बार क्या हुआ था , कुछ यद् है , या में यद् दिला दू..." तामस ने बेइंतहा गुस्से में डेविल के सीने पर दोनों हाथो से ढाका देते हुए बोलै ,

"हूउउ , क्या यद् नै हमें..." डेविल ने अपने सार में लगे इक सींग को हाथ लगते हुए सोच कर बोलै ,

"है है है , हमने तुम 300 साल लगतार पीटा था , यद् आया , हमने तुम , हेलल के हर कोने में , तुम उठा उठा कर पीटा था , यद् आया , हमने तुम्हारे इस बदसूरत चेहरे पर 10000 घुसे मरे थे ..." तामस ने अजीब सा हस्ते हुए , डेविल को बीत चूका वख्त यद् करवाते हुए , बेहद मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ तोह , तुम लड़की थी , हमने तुम इतना मारा नै , लेकिन , इसका मतलब यह नै , हम कमज़ोर हैं , हम तुम इक पल में धूल छठा सकते हैं..." डेविल ने लाल चमकती आँखों से मुस्करा कर बोलै ,

"है है है , उस से पहले हमने तुम 500 साल लगातार पीटा था , यद् आया , हमने तुम उस पहाड़ से निचे फेंका था , और हमने तुम उस अग्ग के बहते दरिया में , डुबो डुबो कर पीटा था , यद् आया kuch...."tamas ने इक बोतल जैसे बर्तन को उठा मदिरा के बड़े बड़े घुट भरते हुए बोलै ,

"हाँ , पर तुम तब भी लड़की थी , तमस , तुम हमसे किस बात का बदला ले रही हो , हमें क्यों परेशान करती हो , तमस हम उदास हैं , हमें , हमें , हमारी रूही से मिलना है ..." डेविल ने तामस के हाथ से मदिरा फिर से छींटे हुए , मदिरा के बड़े बड़े घुट भरते हुए बेहद उदासी में बोलै ,

"बेवकूफ , हम जा रही हैं , हमें नै रहना यहाँ..." तामस ने नशे में तुन वह से चलते हुए बोलै ,

"तमासस्सस , तुम नै जा सकती , हम , हम तुम्हारे प्रिंस हैं , तुम , हमारी बात सुनोगी , तमस रुकू..." डेविल ने भाग कर तामस का हाथ पकड़ उसे रोकते हुए बोलै ,

"हमें नै रहना यहाँ , इस घटिया स्थान पर हम नै रहेंगे , तुम , हिचकककक , हिचाक्क्क्क , भाड़ में जाओ तुम , हिचाक्क्क्क बेवकूफ..." तामस ने डेविल से अपना हाथ छुड़ा , उसे ढाका देते हुए बोलै ,

"तुम्हारी इतनी ग़ुस्ताख़ी , हमें फिर से बेवकूफ बोलै , अह्हह्ह्ह्ह (चीला कर) , तुम इतनी मदिरा क्यों पीती हो , तमासस्स , मत जाओ , हम , हम , अकेले रह जायेगे..." डेविल ने बेहद उदासी में तामस की नशीली आँखों में अखन दाल बोलै ,

"हुऊ हिचक्क्क , हम जा रहे हैं , पर , अगर तुम , हमसे प्यार करो , तोह , हम , रुकने का सोच सकते हैं..." तामस ने कुछ कदम अग्गे बढ़ , बिना पीछे देखे , थोड़ा मुस्करा कर बोलै ,

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"नईईई , हम बस रूही से प्यार करते हैं , हम , हम , रूही के बिना , नई , नई , तामस , तुम हमारी दोस्त हो , हमारी अछि दोस्त , चलो अज्ज मादरीअ में नहाते हैं..." डेविल ने पहले उदासी में फिर जोर जोर से हस्ते हुए बोलै , उसके हसने की आवाज़ पूरे हेलल में गूंजने लगी , पर थी काफी ब्यांक ,

"है है है , ठीक है , चलो..." तामस ने भाग कर डेविल के पास आकर , उसके होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह थूऊ , तुमने हमें ख़राब कर दिया , हम रूही के पास कोनसा चेहरा लेकर जायेगे ..." डेविल ने बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए बोलै ,

"अहूऊऊऊ , इस से बदसूरत चेहरा किसी का नै होगा , यह तोह बिलकुल मत लेकर जाना , तुम चुम लिया , हुऊ , बेवकूफ लाल दरिंदा , ाहूऊऊ , चुप चल चलो , हम , जो चाहे वोह करे , हम तुम चूमेगी , हम जो दिल करेगा वोह करेंगे , तुम , तुम , भाड़ में जाओ..." तामस गुस्से में पेअर पटक अग्गे बढ़ती हुई बोली , वोह गुफा की तरफ जा रही थी , जिसके अंदर वोह और डेविल रहते थे ,

"तमस , किस जनम का बदला ले रही हो तुम , तुमने , तुमने हमारा जीना हराम कर दिया है , हम , हम , तुम अज्ज हरा देंगे , मदिरा पीने में , ाहः .." डेविल अपनी तामस के कंडे पर हाथ रख , उसे अपने पास खींच , बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

"है है है , सदियों से हम जीत रहे हैं , है है है..." तामस बेहद हस्ते हुए बोली , उसे मदिरा पीने में कोई नै हरा सकता था , वोह कभी हरी नै थी , डेविल हमेशा हार जाता था ,

"तामस , हमारी तामस , हाहाहा , इक दिन , इक दिन , हम तुम हरा देंगे , हम , इक दिन जरूर जीत जायेगे तुमसे..." डेविल ने तामस के गाल को चूमते हुए बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

कुछ वख्त बाद ...

"है है है , हम जीत गए , हम फिर से जीत गए , अभ जो हम कहेगे , तुम करना होगा..." तामस ने नशे में तुन उठ कर नाचते हुए बेहद ख़ुशी में बोलै ,

"उउउउउ , तुमने धोका दिया हमें , हम डेविल हैं , हम हार नै सकते..." डेविल ने उठ कर खड़े होते हुए बोलै ,

"अभी जा बी..." तामस ने डेविल को ढाका देकर निचे गिरते हुए बोलै ,

"अहूऊऊऊ , बोलो , क्या करू में..." डेविल ने ऐनी वाले वख्त को यद् कर बोलै ,

"उम्म्म , सोचने दो , तुम कोनसी सजा दू , हमने तुम , लड़की भी बनाया है , कुत्ता भी , बिल्ली भी , चूहा (माउस) भी , कीड़े मकोड़े भी , सांप भी , नंगा भी किया है , अहहहसश्छठ , कोनसी सजा दू..." तामस ने बेहद सोचते हुए बोलै , वोह हज़ारो बार डेविल को शराब पीने में हरा चुकी थी , उसने हज़ारो बार डेविल को सजा दी थी ,

"अहूऊऊ , जल्दी कारु , हमें और भी काम हैं..." डेविल ने तामस से तंग आकर चीखते हुए बोलै ,

"ाचा बेवकूफ डेविल , तुम उस दीवार के पास जाकर , अपने सार के बल खड़े हो जाओ , अपनी टंगे सीधी हवा में करो , और तुम्हारा सार hi जमीन से चुना चाहये , जोऊ...." तामस ने बेहद मुस्कराते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह , यह क्या सजा है , हमें लड़ने की सजा दो , किसी का खून पीने की या , या फिर किसी का मास्स खाने की , या या हमारे पिता को मरने की ..." डेविल , तामस की दी सजा सुन गुस्से में और भी लाल होते हुए बोलै ,

"है है है , जो कहा है वोह करूओ , अगले 100 साल तुम ऐसे hi रहोगे , जोऊ..." तामस ने डेविल को ढके मर मर कर दीवार के पास लिफ्ट हुए बोलै ,

"अहूऊऊऊ , हम , हम , तुम छोड़ेगे नई , तमासस्सस..." डेविल ने तामस से बेइंतहा परेशान होकर अपने सार के बल खड़े होते हुए बोलै , और तामस अजीब सा हस्ते हुए डेविल के पास निचे लेट गई , उसने अपना चेहरा डेविल के चेहरे के पास कर लिया , अगले 100 साल तक , तामस वैसे करवट लेकर लेती , बस डेविल के चेहरे को , उसकी आँखों को घूरती रही , यह 100 साल बहुत लम्बे थे...

कुछ वख्त बाद..

"तमासस्स , तमासस्स , तुम कुछ नै होगा , उठू , हमें परेशान कारु , उठू , तमासस्सस , हम , हम , तुम्हारे बिना नै रह सकते , तमासस्सस..." डेविल बेइंतहा उदासी में अपनी तामस का चेहरा अपनी गॉड में लिए , बेइंतहा दर्द में दुबे हुए बोलै ,

"अह्ह्ह b..b..bb...bevv...kuff... m..mera.. w..wakht ा चूका है , अह्ह्ह्हह , प्रिंस , vv..vv...vvadaa. ..k..kk...kaa..rroo जॉब भी m..mm..mee जनम लू... t...tt...tummm अह्ह्ह्ह mm..mmuzsee प्यार अह्ह्ह मुज़से प्यार करोगे अहहउसछ वादा कारु अह्ह्ह्ह हमसे अह्ह्ह्हींण शादी करोगे..." तामस ने खून से लेथ पथ चेहरा लिए बेइंतहा दर्द में रट हुए बोलै , उसके मोह से खून पानी की तरह बह रहा था ,

"तमस , हम , हम , वादा करते हैं , अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह , तुम , तुम जब भी , जनम लो , हम , हम , तुमसे प्यार करेंगे , हम , अभ भी , अभ भी , तुमसे प्यार करते हैं , तमासस्सस्स हम तुम चाहते हैं , तमासस्स तुम हमें छोड़ कर नै जा सकती..." डेविल ने बेइंतहा दर्द में अपनी तामस के खून से साणे होंठो को चूमते हुए बोलै , अज्ज डेविल ने तामस का पवितर प्यार सवीकार कर लिया था , पर अभ बहुत देर हो चुकी थी , अभ तामस मर चुकी थी , वोह मरते मरते , यह भी नै सुन पायी थी , के डेविल भी उसे प्यार करता था ,

बैक तो स्टोरी...

"तमासस्सस्स्स्स...." रवि इक डैम से छीलते हुए उठ बैठा , रवि के होश में एते hi , ख़ुशी इक तरफ को जमीन पर गिर गई , उसके मोह से खून बह रहा था , उसने डेविल रवि को सोने से रोकने के लिए , अपनी पूरी ताकत लगा दी थी , वोह बेहद कमज़ोर हो चुकी थी ,

"तमस , तमस , उठू , उठू ..." रवि ने बेहद दर्द में दुबे हुए , ख़ुशी को अपनी बहु में भर , उसके होंठो को , उसके पूरे चेहरे को , पगलू की तरह चूमते हुए बोलै ,

ख़ुशी ने िका इक धीरे से अपनी अखन खोली , अपने प्यार को यु रट देख , उसे बहुत दर्द हुआ , पर इक सकूं भी महसूस हुआ के उसका रवि उसे इतना प्यार करता है , ख़ुशी मुस्कराने लगी , वोह उठ कर बेथ गई , वोह इक डैम से रवि के गले लग गई और फिर boli.."ravi शाम को मेरे रूम में एना , इक बात करनी है..." ख़ुशी ने इतना बोल , पीछे को होकर , रवि के होंठो को चुम लिया , फिर ख़ुशी वह से उठी और अपने रूम में चली गई , रवि बस उसे जाते हुए देख रहा था...

रवि और ख़ुशी ने अपने हेलल के दिन यद् किये थे , दोनों ने सदियों तक इक सजा कटी थी , वह कुछ नै था , बस चारो तरफ अग्ग थी , बेइंतहा मदिरा थी , और कच्चा मास्स था , और खून के बहते तलब थे , बस यही था हेलल , ख़ुशी अगर चाहती तोह रवि के साथ न जाती , पर उसने अपने प्यार को चुना , वोह हेलल की ताप्ती अग्ग में जलती रही , बस अपने प्यार के लिए , अज्ज ख़ुशी ने तामस रूप को हेलल में देखा था , उसका मन उदास था , पर उसका दिल खुश था , उसने सदियों तक तप किया , और भगवन ने उसे उसका प्यार सौंप दिया , बस इक आदत तामस की ख़राब थी , वोह थी मदिरा पीने की , जो अभ भी उसके साथ थी , चाहे अभ वोह ख़ुशी थी , पर फिर भी , आखिर उसका पहला प्यार थी , उसकी मदिरा....

वही अभ...

"भइआए , क्यों , क्यों करते हो ऐसा , हमारी जान निकल jati.."komal ने बेहद रट हुए बोलै , उसने कास कर अपने भाई को बहु में भर रखा था ,

"कोमल , शह्ह्ह्ह , बस अभ और नई , और नै रोना , उफ्फ्फ मेरी जणू , मेरी जणू , उम्मा , मेरी जानू..." रवि ने कोमल को अपनी बहु में और भी कस्ते हुए , उसके सार को चूमते हुए बोलै , कोमल शांत हो गई , पर अभ भी वोह , थोड़ा थोड़ा सिसक रही थी ,

"भइआ , में दर गई थी , कही , कही अप्प फिरसे , ओह्ह्ह , भइआ , ी लव ू ..." कोमल ने अपने भाई के चेहरे को पगलू की तरह चूमते हुए उसकी आँखों में अपनी नली नली अखन दाल बोलै , वोह अभ मुस्कराने लगी थी ,

"सॉरी जणू , वोह , वोह , फर्जी मेरी बेटी है , कोमल , फर्जी मेरी बेटी है , वोह मेरी और रेखा देदी की बेटी है , कोमल , क्या एहसास है , क्या सकूं मिल रहा है , फर्जी , मेरी खुद की बेटी , में , में , उसका पिता हु..." रवि ने बेहद नाम आँखों से अपनी बेटी फर्जी को यद् करते हुए बोलै ,

"शठ , फर्जी आपकी नै , हम दोनों की बेटी है , मेरी भी बेटी है फर्जी , भइआए , मुझे बहुत ख़ुशी है , अप्प सच में पापा बन गए , ओह्ह्ह , मेरा प्यारा भाई , मेरे लाखो जीवन तुज पर कुर्बान , मेरा भाई , मेरा जणू भाई..." कोमल बेइंतहा मुस्कराते हुए अपने भाई का माथा चुम कर बोली ,

"अहूऊऊ अहूऊऊ , अरे भाई हम सब भी हैं , और सोना , फर्जी हम सबकी बेटी है , हम बहुत खुश हैं , के फर्जी को उसके पापा मिल गए , हमारे जणू , हमारे प्यारे पति..." सीमा ने बेहद ख़ुशी में मुस्कराते हुए बोलै ,

"ओह्ह हमारी मलिका , ेहडेर ायो , मेरी बहु में , तुम सब भी..." रवि ने बेहद प्यार से बोलै , तोह सब की सब , उसके करीब ा गई , फिर रवि सब के गले लगा , उनका मन शांत किया , फिर रवि , कोमल और रमा को अपने साथ लेकर , शहर की तरफ चल पढ़ा , वोह गाड़ी के पास पहुँच गए ,

"भइआ , में आपके साथ बेठुंगी अग्गे..." रमा बेहद खुश होते हुए बोली ,

"नै में बेठुंगी..." कोमल ने रमा को रोकते हुए बोलै ,

"कोमल ..." रमा ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"रमा देदी..." कोमल भी गुस्से से लाल होते हुए बोली ,

"इक मिंट , इक मिंट , शांति , देखो , मेरे पास इक आईडिया है , जाते वख्त कोमल तुम अग्गे बेथ जाओ , और एते वख्त रमा , तुम अग्गे बेथ जाना , बोलो , मंज़ूर है , नै तोह में , सीमा को आवाज़ देता हु..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै , सीमा के नाम से दोनों दर गई , कोमल भाग कर अग्गे बेथ गई और रमा पीछे की सीट पर , रवि भी हस्ते हुए , गाड़ी में बेथ गया , अभी रवि ने गाड़ी स्टार्ट hi की थी , के उसके सामने ख़ुशी आकर कड़ी हो गई , वोह धीरे धीरे चलते हुए रवि के पास आयी , और बोली ,

"रवि , मुझे तुम्हारे साथ चलना है , में , में , तुमसे इक पल भी दूर नै रह सकती , प्लस..." ख़ुशी ने बेहद नाम आँखों से बोलै , तोह रवि खामोश सा हो गया ,

"मेरी गोलू मोलू , तुम पूछने की कोई जरुरत नै , हेलल में मुझे परेशान करती थी , तब कभी पूछा था , ायो मेरी जणू , तुम भी चलो मेरे साथ ..." रवि ने हेलल की यादिओं में खोते हुए , अपनी तामस , अपनी ख़ुशी , को बेइंतहा प्यार से बोलै , ख़ुशी का उदास चेहरा खिल उठा , वोह मुस्कराने लगी , वोह अज्ज बहुत खुश थी , बहुत , बहुत ,

फिर चारो निकल पढ़े शहर की तरफ , अज्ज बड़े दिनों बाद , रवि और कोमल इक साथ , कही जा रहे थे , आखरी बार , दोनों कही घूमने गए थे , हम्म , अज्ज से ठीक 4 साल पहले , दोनों मूवी देखने गए थे , avangers-infinity वॉर , उसके बाद , कोमल नाराज़ हो गई थी , क्यों की रवि मुन्ना को बचाना चाहता था , फिर वोह हेलल में कैद हो गई , उफ़ कोमल उसके बाद अज्ज गाड़ी में बैठी थी ,

"हम जा कहा रहे हैं..." रमा ने बेहद ख़ुशी में बोलै ,

"इस बेवकूफ से पूछो..." ख़ुशी ने सीट पर पीठ टिका , मुस्करा कर बोलै , कोमल और रमा हसने लगी ,

"खुशु , हम बेवकूफ नै हैं..." रवि ने स्टेयरिंग पर हाथ मरते हुए बोलै ,

"तुम हो..." ख़ुशी ने इक डैम से अग्गे आकर बोलै ,

"नै हु..."

"ाचा यह बताओ , घोड़े के दो अग्गे घोड़े , घोड़े के दो पीछे घोड़े , घोड़े के दो दह्ये (राइट) घोड़े , घोड़े के दो बाये घोड़े , घोड़े के तीन ऊपर घोड़े , घोड़े के इक निचे घोडा , अभ बताओ , कुल कितने घोड़े..." ख़ुशी ने इक hi साँस में यह बोल , बेहद हस्ते हुए बोलै , कोमल और रमा भी हसने लगी , रवि सोचने लगा , और वोह तीनो बतिअन करने लगी ,

"हम्म , हाँ , 10 घोड़े , नै , 11 , नै हम , 15 , हाँ 15 घोड़े..." रवि ने बेहद सोचते हुए , पीछे बैठी ख़ुशी को देखते हुए बोलै ,

"गलत , तुम बेवकूफ हो , यद् नै हेलल में , हमने तुमसे शरत जीती थी , तेन की हम तुम कभी भी बेवकूफ बोल सके..." ख़ुशी ने बेहद मुस्कराते हुए , कोमल और रमा की तरफ देखते हुए बोलै ,

"हाँ , हाँ , तुम जीत गई थी , पर , पर , कोमल यह मदिरा पीने में चैंपियन है , हासष्ठ , जानती हो अभी कुछ दिन पहले , हमने खुशु को पहली बार मत दी , उफ़ वार्ना , सदियों से हम हारते ा रहे थे..." रवि ने पुराणी यादिओं में खोते हुए मुस्करा कर बोलै ,

"क्या सच में , भइआ , इक बार और शरत लगाओ..." रमा बेहद खुश होते हुए , ख़ुशी और कोमल को आंख मरते हुए बोली ,

"हाँ जणू भइआ , इक बार और हरा दो , हमारी खुशु को..." कोमल ने बेहद मासूमियत से बोलै ,

"नै , हम , हमें मरना नै है , अरे , इक बार किस्मत से हम जीत गए , हस्सश्ठ , देखो भाई तुम सब सुनो , खुशु ने हमसे क्या क्या करवाया है जीतने के बाद , यह बस हम hi जानते हैं , अह्ह्हुउउ , नै , अभ हम कोई शरत नै लगाने वाले..." रवि ने हेलल में ख़ुशी दुवारा दी गई सज़ायिओं को यद् कर , अंदर तक कंपते हुए बोलै ,

"ख़ुशी देदू , अपने क्या क्या करवाया भइआ से , हमें भी बता दो..." रमा बेइंतहा हस्ते हुए बोली , तोह कोमल भी हसने लगी , उसे भी जानना था , आखिर हेलल में उसका भाई करता क्या रहा ,

"है है है , यह डरता है मुज़से , कोमल , रमा , मने इसको हज़ारो बार हराया था , हज़ारो बार सजा दी , इक बार , इक बार मने रवि को हेलल के बड़े गेट पर , उल्टा लटका दिया , हहै , फिर 100 सालो तक यह उल्टा लटका रहा ..." ख़ुशी बेहद मुस्कराते हुए बोली ,तोह कोमल और रमा हसने लगी ,

"हूँ , वैरी फनी , हम्म , वोह तोह , वोह तोह , में जानबूझ कर हार जाता था , क्यों की , में अपनी तामस को खुश देखना चाहता था..." रवि ने मुस्करा कर बोलै ,

"झूठ , हम अपने डैम पर तुम हारते थे..." ख़ुशी अभ गुस्से में एते हुए बोली ,

"हुऊ , ाचा , इक बार और मदिरा पीने के खेल हो जाये..." रवि ने भी थोड़ा गुस्से में बोलै , पर वोह बस नाटक कर रहा था ,

"ठीक है , अज्ज रत 9 बजे , सबके सामने खेलते हैं , अज्ज सबके सामने तुम नंगा करुँगी , है है है , रवि नंगु त्यार रहना..." ख़ुशी ने शरत लगाने का वख्त तेह करते हुए बोलै , कोमल और रमा फिर हसने लगी ,

"मंज़ूर है..." रवि ने पीछे पलट , ख़ुशी की आँखों में अखन दाल बोलै ,

"जणू भइआ , हमें भी खेल में भाग लेना है ..." कोमल ने मासूम सी बनते हुए रमा की तरफ देख बोलै ,

"ोकक..." रवि बेहद खुश होते हुए बोलै ,

"अरे कोमल , तुम्हारे होंठ इतना सुज़े क्यों हैं , लाओ में , अपनी शक्ति से ठीक कर देती हु..." ख़ुशी सब पता होते हुए भी , कोमल को तंग करते हुए बोली ,

"नै , कोई बात नै..." कोमल अपनी नली नली अखन ज़ुका बेहद शरमाते हुए बोली , वोह बेहद खूबसूरत थी , तभी रमा बोली ,

"हाँ देदू , भइआ पूरी रत बस होंठ hi चूमते रहे , देदू देखो , अभ भी भइआ , कोमल के होंठो को घर कर देख रहे हैं..." रमा भी बेहद हस्ते हुए बोली ,

"यह इक नंबर का बेवकूफ है , बेचारी कोमल , देखो कैसे शर्मा रही है , तुम पता है , मेरे भी होंठ इसने अज्ज चूमे , अहूऊऊ , अभी भी जलन हो रही है , रमा तुम बच कर रहना , अभ तेरा नंबर लगने वाला है ..." ख़ुशी ने मुस्करा कर बोलै , तोह रमा शर्माने लगी , पर वोह अभी से , अपने लाल लाल होंठो को जीभ फिरा गीला कर रही थी ,

कोमल ने धीरे से अपने निचले होंठ को ऊँगली से दबाया , उफ्फ्फ वोह सिसक उठी , उसे अभी भी मेथा मेथा सा दर्द हो रहा था , वोह अपनी रास भरी जीभ होंठो पर फिरते हुए , उनकी सूजन को काम करने लगी ,

"कोमल..." रवि जो कब से कोमल को देख रहा था , उसने मुस्कराते हुए कोमल को आवाज़ दी , कोमल ने अपनी नज़रियन उठा , अपने भाई को देखा , उफ़ कोमल शर्माने लगी , और शरमाते हुए गाड़ी से बहार देखने लगी , ऐसे hi वख्त बीता , तोह चारो शहर पहुँच चुके थे ,

"भइआ गाड़ी रोकना , मुझे भूक लगी है.." रमा ने इक होटल के सामने गाड़ी रुकवाते हुए बोलै ,

"रमा याल.." रवि ने बेहद मासूमियत से बोलै ,

"भइआ बस इक मिंट , खुशु देदू अप्प ायो मेरे साथ , कुछ खाने को लती हैं.." रमा , ख़ुशी का हाथ पकड़ , उसे अपने साथ खींचते हुए बोली , फिर ख़ुशी और रमा चली गई ,

उन दोनों के जाने के बाद रवि ने कोमल को देखा , जो उसकी तरफ देखते हुए मुस्करा रही थी , उफ़ बेइंतहा मासूम और खूबसूरत ,

"कोमल , जणू रत के लिए सॉरी , मने आपके नाज़ुक नरम होंठो को कष्ट दिया , देखो न , आपके होंठो का रास हमने पिया , और सब आपको सत्ता रहे हैं..." रवि ने कोमल का चेहरा अपनी तरफ करते हुए , उसकी नली नली आँखों में ज़कते हुए बोलै , कोमल मुस्कराने लगी , उसने कुछ पल अपने भाई की आँखों में देखा , फिर अपना नज़रियन ज़ुका ली ,

"जणू , कुछ कहो न , उफ़ अप्प कितनी खूबसूरत हो , अभ तोह अप्प हर दिन और भी खूबसूरत होती जा रही हो , जणू क्या राज़ है आपकी इस कातिल जवानी का , उफ़ हमसे रुका नै जा रहा , आपकी अखन हमें अपनी तरफ खींच रही हैं ..." रवि ने कोमल का हाथ अपने हाथ में लिए , उसे बार बार चूमते हुए बोलै ,

"जणू भइआ , अप्प भी काम खूबसूरत नै हो , और जणू , अप्प हमें कहा सताते हो , अप्प तोह हमें प्यार करते हो , पर , जणू थोड़ा सा धीरे , अप्प डेविल हो और हम मासूम सी पारी ..." कोमल ने वैसे hi नज़रियन झुकाये शरमाते हुए बोलै , उसे बेहद शर्म ा रही थी , पर इस शर्माहट में वोह और भी खूबसूरत हो चुकी थी ,

"ओह्ह मेरी जान , आपके लिए इक बार तोह क्या , लाखो बार भी , हेलल में सड़ने को त्यार हु , अप्प हमारी हो , सिर्फ हमारी..." रवि ने अपने अनंत प्यार में बहते हुए , कोमल के नरम होंठो को फिर से चूमते हुए बोलै , फिर िका इक रवि ने कास कर दोनों होंठो को पूरा मोह में भर चूस लिया ,

"ोूछ्हःहः ..." कोमल सिसक उठी , उसे फिर से मीठा मीठा सा दर्द हुआ ,

"सॉरी कोमल..." रवि ने कोमल का माथा चूमते हुए बोलै , उसकी आँखों में बेपनाह प्यार था अपनी कोमल के लिए ,

"जणू कोई बात नै , हमें ाचा लगा..." कोमल ने अपनी नली नली आँखों में शरारत के भाव भरते हुए बोलै , वोह मुस्कराते हुए , अपने होंठो को जीभ घुमा गीला करने लगी , होंठो गीले होते hi चमक सा उठे , उफ़ लाल लाल रास भरे होंठ , ऊपर से थोड़ा थोड़ा गीले , नरम माखन जैसे मुलाम , रवि बहक सा गया , उसने कोमल के सार के पीछे अपना इक हाथ रख , उसका चेहरा अपनी तरफ खींच , उसके गीले गुलाबी होंठो पर , अपने होंठ रख दिए ,

"अह्ह्ह..." दोनों के मोह से इक सिसकारी निकल गई , रवि , कोमल के होंठो को धीरे धीरे चूसने लगा , उसके बालो को सहलाते हुए , कोमल भी अपनी अखन बंद किये , अपने भाई का पूरा साथ दे रही थी ,

धीरे धीरे रवि थोड़ा कास कास कर कोमल के होंठो को चूसने लगा , रवि कभी ऊपर का होंठ तोह कभी निचला होंठ , अपने होंठो में दबा दबा कर चूसने लगा , उफ़ कोमल के नरम होंठ , थोड़ा थोड़ा सुज़े होंठ , रवि के होंठो में पिस्टे चले गए , होंठ का मास्स इतना नरम था के रवि जितना भी उनको अपने मोह में भरने की कोससिह करता , वोह फिसल जाते , उफ़ अभ रवि हल्का हल्का दांतो से काट ते हुए कोमल के रास भरे लाल होंठो को रास निचोड़ रहा था , िका इक रवि रुक गया , उसके होंठो में कोमल का निचला होंठ फसा हुआ था ,

रवि बस कोमल की नली नली आँखों में इक तक देखने लगा , कोमल भी थम सा गई , उसे महसूस हुआ , उसका निचला होंठ , उसके भाई के होंठो में फसा हुआ है , उफ़ क्या दिलकश नज़ारा था यह ,

रवि ने बेहद धीरे से कोमल के होंठ को कास कर चूस लिया , उफ़ कोमल का होंठ जैसे hi रवि के होंठो से आज़ाद हुआ , उस पर इक गहरी लालिमा चा गई , वोह चूसै से लाल हो चूका था ,

"ोुछहहह सीईईई..." कोमल इक मेथे से दर्द में सिसक उठी , उसने अपने भाई की आँखों में देखा जो उसे hi देख रहा था , वोह शर्माने लगी , उसने अपनी नली नली अखन ज़ुका ली , पर तभी रमा और ख़ुशी ा गई , रवि , ख़ुशी की तरफ देखते हुए बोलै ,

"खुशु , राजेश सर का घर कहा है , जरा देखना..." रवि ने बिना ख़ुशी की तरफ देखते हुए बोलै ,

"हम्म , अभी देखती हु..." खुशु मुस्करा कर बोली , उसने अपनी अखन बंद की , अपनी शक्ति से उसने , पल भर में , राजेश का घर कहा है , वोह सब पता लगा लिया , पर अभ उसके चेहरे पर , कोई ख़ुशी नै थी , ऐसा क्यों...



तो बे कुनिटेड....
 
अपडेट-128



अभ अग्गे...

अभ तक अपने पढ़ा , रवि अपनी बहिन कोमल , रमा और अपनी प्रेमिका ख़ुशी के साथ , मिथली शहर पहुँच चूका था , मिथली शहर बहुत पुराण शहर था , इस शहर का नाम मिथली क्यों पढ़ा , यह भी इक राज़ था , बड़े बड़े historian's अभी तक खोजबीन करने में लगे हुए थे , आखिर मिथली कोण थे , क्या वोह इक कबीला था , क्या वोह विदेशी लोग थे या मिथली कोई राजकुमाई थी , या कोई आम सी लड़की , खैर हम उनको खोज करने देते हैं , हम अग्गे बढ़ते हैं , तोह बात करते हैं शहर की ,

यह शहर 7 नगरों में बनता हुआ था , ारवती नगर , कोहेनूर नगर , जमुना नगर , गंगा नगर , हीराकुंड नगर , मुल्ला नगर , खान नगर , इस शहर का नाम मिथली था , और आबादी 3 क्रूर्रे से ऊपर थी ,

मिथली शहर काफी हिस्टोरिक शहर था , बहुत सदियों पहले किसी वदेशी राजा ने इस शहर की नव राखी थी , उसके राजवंश का नाम मिथली था , तब से इस शहर का नाम भी मिथली शहर पढ़ गया , वैसे यह बात सच्ची नै थी , 100 में से 5 लोग hi इस बात को सच मानते थे ,

इस शहर के बहार 4 बड़ी रोड्स निकलती थी , जो इस शहर को दूसरे शहरों से जोड़ती थी , पर वोह शहर छोटे थे , इक बड़ा जंगल भी इस शहर के साथ जुड़ा हुआ था , जिसे अप्प जानते hi हो , वंश जंगल , जो 500 से जायदा किलोमीटर एरिया तक फैला हुआ था ,

[Friends shehar ke bare me es liye likha hai , tain ki app yad rakh sako , yeh story abh shehar ke ander bahar ghumegi , bad me app confuse mat ho jana , abh yad kar lena...]

अभ अग्गे...

"खुशु , बोलो कहा जाना है..." रवि ने मुस्कराते हुए पूछा ,

"रवि , वोह , वोह , जमुना नगर ..." ख़ुशी ने बेहद चिंता में बोलै ,

"हम्म , वैसे क्या बात है , हमारी तामस इतनी उदास क्यों है , हमसे कोई गलती हो गई क्या..." रवि ने गाड़ी वैसे hi रोके हुए , ख़ुशी की तरफ देख कर बोलै , रमा तोह पिज़्ज़ा खा रही थी , और कोमल भी , रमा से भूख बर्दाश्त नै होती थी , जादूगरनी जो थी ,

"नै , तुमसे नाराज़ नै हु , रवि , वोह , वोह , प्रिय देदी..." ख़ुशी अभी बोल hi रही थी के रवि इक डैम से चिल्ला उठा , रवि इतनी जोर से चिल्ला कर बोलै के रमा के हाथ से पिज़्ज़ा की स्लाइस निचे गिर गई ,

"क्या हुआ प्रिया को..." रवि बेइंतहा गुस्से में चिल्ला कर बोलै ,

"भाई धीरे..." रमा अपनी गॉड में गिरे पिज़्ज़ा के टुकड़े को उठा कर दुबारा कहते हुए बोली ,

"वोह , रवि बात यह है..." फिर ख़ुशी ने सब बता दिया , जैसे जैसे रवि सुनता गया , उसकी अखन गुस्से से लाल होती गई ,

"तुम , तुम , सब गाड़ी लेकर ायो , में जाता हु अभी..." रवि ने बेइंतहा गुस्से में बोलै और िका इक वह से गयाब हो गया , उसके शरीर का रंग सफेद से लाल हो चूका था , शयद बेहद गुस्से के कारन ,

कुछ देर बाद ,

"खुशु , अभ क्या होगा.." कोमल गाड़ी ड्राइव करती हुई बोली ,

"भइआ देख लेंगे , don't वोर्री..." रमा इक पिज़्ज़ा अपने पेट में दाल , दूसरा खाना सुरु करती हुई बोली , उसका मोह भरा हुआ था , बड़ी मुश्किल से उसने यह बोलै था ,

"हम्म , वोह तोह है , रमा देदी , इतनी भूक लगी थी आपको..." कोमल ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"कोमल , यह अछि बात नै है , अभ रमा की भूक कैसे शांत होगी , में इसके साथ रही हु , उन अँधेरे जंगलो में , अहूऊऊ , इसकी भूक अभ हमारी नंद उदा देगी..." ख़ुशी ने उन पलु को यद् करते हुए अपने माथे पर हाथ मार कर बोलै , जब वोह कई सालो तक रमा के साथ रही थी ,

"उम् , जादूगरनी की भूख , हम पता लगा लेंगे..." कोमल ने ख़ुशी की तरफ देख मुस्कराते हुए बोलै , ख़ुशी अभ कोमल के साथ अग्गे बैठी हुई थी ,

दूसरी तरफ रवि , C.rajesh के घर के बहार पहुँच चूका था , जो जमुना नगर के बेचू बेच था , घर बहुत बड़ा और सुन्दर था , घर के as-pas जो घर थे , वोह भी किसी महल जैसे थे , शयद यह अमीर लोग की कॉलोनी थी ,

रवि ने देखा , घर के चारो और बड़ी सी दीवार थी , और इक बड़ा सा लोहे का मैं गेट , जो अभी बंद था , रवि ने अपनी आँखों से इक लाल रौशनी उस गेट पर मारी तोह उसे अंदर , इक वाइट स्कार्पियो गाड़ी कड़ी दिखाई दी , रवि ने उस लोहे के गेट को जोर से लत्त जड़ दी , गेट "शायीआंन" की आवाज़ करता खुल गया ,

रवि ने अंदर दाखिल होकर देखा तोह उसे दो गार्ड्स बेहोश गिरे हुए मिले , उन दोनों के सार पर चोट लगी थी , और खून भी बहुत बह रहा था , रवि अग्गे बढ़ने लगा , रवि ने चारो और नज़र घुमा कर देखा , घर के अग्गे इक बहुत खूबसूरत गार्डन था , और घर के मैं गेट तक जाने के लिए इक बेहद छोड़ी सड़क बानी थी , जिसके किनारो पर बहुत सूंदर सूंदर फूलु के छोटे छोटे ट्री लगे हुए थे , उस सड़क के दोनों तरफ गार्डन का एरिया था ,

रवि धीरे धीरे अग्गे बढ़ता गया , अभ रवि उस वाइट स्कार्पियो गाड़ी के पास पहुँच चूका था , जिसकी ड्राइवर सीट पर इक आदमी बैठा हुआ सीग्रिट पी रहा था , उसका ध्यान नै था बहार की तरफ , वैसे भी उसे लगा होगा , बहार का मैं गेट अंदर से बंद है , तोह कोण आएगा ,

"चुक्क तुककक..." रवि ने उस आदमी के पास पहुँच , आधे खुले गाड़ी के मिरर पर , अपनी उंगलियों से आवाज़ की , जैसे hi उस आदमी ने रवि को देखा , उसके हाथ से सीग्रिट निचे गिर गई ,

"कैसे हूँ..." रवि ने इतना बोल , गाड़ी के अंदर हाथ दाल , उसे गर्दन से पकड़ , बेहद जोर से अपनी तरफ खींचा , और गाड़ी से बहार फेंक दिया ,

"कडाकककक..." की आवाज़ करता , गाड़ी का दरवाजा टूट कर निचे गिर गया , रवि ने उसे फिर से गर्दन से पकड़ , ऊपर उठा दिया , उस आदमी के पेअर हवा में झूल रहे थे , वोह चटपटा रहा था ,

"अह्ह्ह्हह cc...cc...cho..doo...mm..mu..ze..." उस आदमी ने दर्द से कहरहते हुए , रवि के हाथ पर अपने हाथ मरते हुए बोलै , उसकी सांसे अभ थम रही थी , रवि बेइंतहा गुस्से में , अपने इक हाथ से उसकी गर्दन को कास कर दबाये जा रहा था , उसकी अखन लाल रौशनी में चमक रही थी ,

"अह्ह्ह्हह्हह..." रवि ने गुस्से में लाल होते चीखते हुए , अपनी पूरी ताकत से , उसकी गर्दन को दबा दिया , उस आदमी की गर्दन की हदयान टूट गई , और खून पानी की तरह बहने लगा ,

ऐसा लगा जैसे किसी ने लाल टमाटर को अपनी मुठी में कास कर , उसका रास निचोड़ दिया हो , वोह आदमी इक "अह्ह्ह्हह..." की आवाज़ करता मर गया , उसकी गर्दन , रवि के हाथ में ऐसे फुट गई , जैसे पानी का गुब्बारा फुट जाता है , रवि का हाथ , उसका चेहरा खून से भेज गया , रवि ने उसके बेजान शरीर को इक तरफ फेंक दिया , और घर के अंदर जाने लगा ,

"अह्हह्ह्ह्ह..." रवि ने जोर से चीखते हुए , अपनी लत्त , घर के मैं गेट पर मर दी , "कदायकककक..." की आवाज़ करता , वोह लकड़ी का बड़ा सा गेट उड़ता हुआ , घर के हॉल में जा गिरा , यहाँ इक बचा सोफे पर बैठा रो रहा था , क्यों की उसके सार पर , इक आदमी गन लगाए खड़ा हुआ था , उस आदमी ने ब्लैक कपडे पहने हुए थे , उसका चेहरा भी ब्लैक नकाब से ढाका हुआ था , शयद वोह कोई गुंडा था ,

"हुऊ..." उस गुंडे ने , मैं गेट की तरफ देखा , तभी वह से रवि अंदर ा गया , रवि इक पल के लिए वह रुक कर , उस गुंडे को देखने लगा , उसके चेहरा , उसके कपडे , उसके हाथ , लाल लाल ताज़ा खून से भेज हुए थे , वोह लम्बे लम्बे बालो में , खून से सना , इक एनिमल लग रहा था ,

"हे , k..kk..kon है bb..be ..t..tt...tuuu.." वोह गुंडा दर से कंपता हुआ बोलै , उसके हाथ में पकड़ी गन भी थार थार कम्प रही थी ,

रवि अग्गे बढ़ने लगा , उसका पूरा जिस्म लाल था , अखन लाल रौशनी में चमक रही थी , वोह पूरा शेतीअन लग रहा था , खून का पियासा शेतीअन ,

"हे रुक जा , में g..gg...goli मर दूंगा..." उस गुंडे ने गन का मोह , रवि की तरफ करते हुए , थोड़ा सा हकलाते हुए बोलै ,

पर रवि रुका नै , वोह उसकी तरफ बढ़ता गया , जब रवि उसके करीब पहुँचने hi वाला था ,

"ठाहहहहह..." उस गुंडे ने गोली चला दी , गन से निकली गोली , बेइंतहा तेज़ रफ़्तार में रवि के सीने से जा टकराई ,

"हींन हिएण..." रवि शेतीअन की तरह हिस्सा , और उस गुंडे के बिलकुल सामने पहुँच गया , फिर रवि ने उस बचे को देखा ,

"बेटा , ऊपर जाओ अपने रूम में..." रवि ने बेहद शांत आवाज़ में , उस बचे की तरफ देखते हुए बोलै , वोह बचा दर से थार थार कंपता हुआ , सेड्यां चढ़ , ऊपर अपने रूम में भाग गया ,

"अभ तेरी बारी..." रवि बेइंतहा हस्ता हुआ बोलै , खून से लथपथ चेहरा लिए , वोह सच मच का शेतीअन लग रहा था ,

"भाई , नयी भैई..." वोह गुंडा दर से कंपता रोटा हुआ बोलै , उसके हाथ से गन निचे गिर गई थी , क्यों की उसे पता चल गया था , के रवि इक शेतीअन है , उसकी चलाई गोली का रवि पर कोई असर नै हुआ था ,

"यह मेरी बहिन का घर हैई..." रवि ने उस गुंडे को गर्दन से पकड़ते हुए चीला कर बोलै , रवि ने उस गुंडे को पीछे सोफे पर बैठा दिया , और उसके सार को प्यार से सहलाने लगा ,

"भैई छोड़ दू , भैई..." वोह गुंडा रवि के चेहरे को देख , बेइंतहा घबराता हुआ बोलै ,

"शह्ह्ह्हह्ह..." रवि ने अपने होंठो पर ऊँगली रख , उस गुंडे की तरफ देखा , और फिर उसकी जांगू पर अपना इक पेअर रख , उसके सार को दोनों हाथो में पकड़ "याहहहहहह..." इक जोरदार चीख मरते हुए , उसका सार , उसके धड़ से अलग कर दिया ,

उफ्फ्फ्फ़ बेइंतहा खौफनाक पल था , रवि के दोनों हाथो में उस गुंडे का सार था , उस गुंडे का बाकि शरीर सोफे पर पढ़ा हुआ था , और खून तोह पानी की तरह बह रहा था ,

रवि ने उस गुंडे के सार को अपने चेहरे के पास कर , इक हाथ से ऊपर उठा दिया , उफ़ उस कटे सार से खून की बूंदे गिरते हुए , रवि के मोह में सामने लगी , रवि अपने होंठो पर जीभ फिरते , उस खून को चाट ते हुए पीने लगा , बेहद ब्यांक लम्हा था यह ,

अप्प कल्पना कर सकते हो , इक इंसान जिसका पूरा जिस्म खून से भेजा हो , और वोह इक आदमी का सार उखड कर , उसे हवा में उठाये , उस में से गिरते खून को , मोह खोले पे रहा हो , कितना डरावना पल होगा यह ,

जब खून गिरना बंद हो गया , तब रवि ने उस सार को दूर फेंक दिया , और उस रूम की तरफ बढ़ने लगा , यहाँ उसकी बहिन कैद थी , उफ़ प्रिय पता नै उसका यह रूप देख , क्या करती ,

"देदी , प्रिया देदी..." रवि अपने हाथ पर लगे खून को जीभ से चाट ते हुए , बेहद प्यार से , अपनी बहिन प्रिय को आवाज़ देते , उस रूम के पास पहुँच गया , जिसके अंदर उसकी बहिन थी ,

"याहहह..." रवि ने गुस्से में रूम के दरवाजे पर लत्त जड़ दी , जब उसकी बहिन प्रिय ने कोई जवाब न दिया ,

"कदायकककक..." इक तेज़ आवाज़ करता , रूम का दरवाजा टूट कर निचे गिर गया , रवि ने जैसे hi अंदर का नज़ारा देखा , उसका गुस्सा इस कदर बढ़ गया , के हम कल्पना भी नै कर सकते ,

रूम के अंदर इक आदमी प्रिय को थपड मार रहा था , प्रिय का ऊपर का शरीर नंगा था , वोह बस इक पजामी पहने , उस गुंडे का विरोध कर रही थी , उसकी फटी कमीज और ब्रा जमीन पर निचे पढ़ी हुई थी , शयद वोह गुंडा , कमिशनर राजेश से बदला लेने के लिए , उसकी पत्नी का रपे करने की कोससिह कर रहा था ,

रूम का दरवाजा टूट ते hi वोह गुंडा और प्रिय उस तरफ देखने लगे , पर जैसे hi रवि रूम के अंदर घुसा , वोह गुंडा दर से कम्प गया , पर प्रिय और भी रोने लगी ,

"भ्याआआ बचावू..." प्रिय उस गुंडे को ढाका देकर , भागते हुए , अपने भाई रवि के गले लग गई , उसे यह भी एहसास नै था , उसने ऊपर कुछ नै पहना है , वोह बेहद दरी और सेहमी हुई थी ,

"डीडीई , माफ्फ करदु..." रवि बेहद दर्द में , बेहद नाम आँखों से , अपनी बहिन प्रिय का माथा चूमते हुए बोलै ,

"हेय , कोण है बे तू..." वोह गुंडा अपनी गन रवि की तरफ ताँता हुआ बोलै ,

"शह्ह्ह्हह्ह..." रवि ने बेहद गुस्से में उस गुंडे की आँखों में अखन दाल बोलै , वोह गुंडा और भी दर गया ,

"भइआ , भइआ , यह , यह , m..mm..merii..." प्रिय अपने भाई के सीने में अपना चेहरा छिपाये , बेइंतहा दर से कंपते , रट हुए बोली , वोह इतना दरी हुई थी , के उस से बोलै भी नै जा रहा था ,

"शठ , बस डीडीई , अभ और नयी , में , में , ा गया हूँ , अभ और नईईई , शहहह , शांत हो जाओ , डीडीई , जो में करता हु , तू देखह..." रवि ने प्रिय का चेहरा अपने दोनों हाथो में थामे , उसकी आँखों में अखन दाल , बेहद दर्द और गुस्से में बोलै , फिर रवि उस गुंडे की तरफ बढ़ने लगा ,

"ेहठ साली ृक्क..." वोह गुंडा दर से कंपता हुआ बोलै , वोह गोली चला hi रहा था , के रवि ने पालक झपकते hi , उसका हाथ कलाई से पकड़ , ऊपर की तरफ उठा दिया ,

"ठाहहहहहहहाँनं..." तभी गोली चल गई , गन से निकली गोली , रूम की चाट पर जा लगी , रवि ने उस गुंडे को हाथ से पकड़े अपनी तरफ जोर से खींचा , और उसके चेहरे पर , अपना सार जड़ दिया ,

"अह्ह्ह्हह..." इक दर्दनाक चीख वह गूंज गई , उस गुंडे के नक् की हड्डी टूट गई , उसके हाथ से गन निचे गिर गई , उसके नक् से बेइंतहा खून बहने लगा , प्रिय दर से सेहमी हुई , अपने भाई रवि को देख रही थी , पर िका इक उसने अपनी अखन ज़ुका ली ,

"डेडीईईई..." प्रिय दर से अंदर तक कम्प गई , जब रवि ने उसे गुस्से में चीख कर बोलै , वोह अपने भाई को देखने लगी ,

"डीडीई , मने कहा ना देखू ..." रवि ने बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए बोलै , और उस गुंडे का हाथ , अपने कंधे पर जातक कर तोड़ दिया ,

"अह्ह्ह्ह आईइइइइइइइइ ..." वोह गुंडा हाथ की हड्डी टूट ते hi दर्द से चीख कर बोलै ,

"साली , मेरी बहिन को छुएगा चू..." रवि ने इतना बोल , उस गुंडे का दूसरा हाथ भी , अपने कंधे पर रख , इक तेज़ जतका देते हुए तोड़ दिया , हाथ की हदी कलाई से टूट कर चकना चुर्र हो गई ,

"आह्ह्ह्ह माआ , c..cc..chodd d..dd..dee...bb...bbb...bhaiii..." वोह गुंडा दर्द से तडफता हुआ रट हुए चीला कर बोलै , प्रिय ने गुंडे की चीख सुन , अपनी आँखों पर हाथ रख लिया ,

"डेडीईई ...." रवि ने उस गुंडे को दोनों हाथो से ऊपर उठाते हुए बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए बोलै ,

प्रिय ने दर से सहमे हुए अपने भाई रवि को देखा , जिसने दोनों हाथो से उस गुंडे को ऊपर उठा रखा था , अपने सार से भी ऊपर , फिर अगले hi पल प्रिय अंदर तक कम्प गई , क्यों , क्यों की इक दर्द भरी चीख वह गूंज गई ,

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ाईयईईईई..." यह चीख उस गुंडे की थी , क्यों की रवि ने उसे दोनों हाथो से ऊपर उठाये , उसे तेज़ी से निचे लेट हुए , अपने इक घुटने पर निचे बेथ , उस गुंडे की पीठ , अपने घुटने पर जोर से मारी थी , रवि ने उसकी पीठ को इतनी तेज़ी से अपने घुटने पर मारा था , के पीठ की हड्डी अंदर से "कडाककक" की आवाज़ करती टूट चुकी थी ,

"देदी , देखू , मेरी तरफ देखू..." रवि ने उस गुंडे को जमीन पर फेंक , अपनी बहिन प्रिय की आँखों में अखन दाल बोलै , प्रिय अभ न तोह रो रही थी , न दर रही थी , वोह , वोह बस शॉकेड हो गई थी , वोह कुछ नै कर रही थी , उसे यह भी यद् नै था के उसका जिस्म ऊपर से नंगा है , प्रिय अपने भाई का अपने लिए प्यार , अपने लिए बेइंतहा पागलपन देख रही थी ,

"अह्ह्ह्ह , अह्ह्ह्ह , छोड़ड़ड़ दू ..." वोह गुंडा जमीन पर गिरा , दर्द से तड़फ रहा था , उसके मोह से खून बह रहा था , दोनों हाथ टूटे हुए थे , पीठ की हड्डी भी टूट चुकी थी ,

"उठ साली , तूने मेरी बहिन को मारा , तूने मेरी बेहान्न के कपडे फडी , याहहहहहह..." रवि बेइंतहा दर्द में , बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए , बेहद नाम आँखों से बोलै , उसकी अखन लाल रौशनी में चमक रही थी , पर प्रिय की तरफ उसकी पीठ थी ,

फिर रवि ने उसकी इक तंग को अपने हाथो में पकड़ ऊपर उठा लिया , और दूसरी तंग पर अपना पेअर रख लिया ,

"अह्ह्ह नैई , नयी..." वोह गुंडा ऐनी वाले वख्त को यद् कर , अपने हाथ जोड़ता हुआ , गिड़गिड़ाता हुआ , रट हुए बोलै ,

"भइआ , भइआ , रुक जाओ , भइआ..." प्रिय िका इक होश में एते हुए , बेइंतहा रट हुए , अपने भाई रवि के पास एते हुए बोली ,

"शह्ह्ह्हह्ह..." रवि ने अपने होंठो पर ऊँगली रख , अपनी बहिन प्रिय की तरफ देखा , उफ्फ्फ प्रिय दर गई , सेहम गई , अंदर तक कम्प गई , जब उसने अपने भाई रवि का , खून से लथपथ , बेइंतहा खौफनाक , ब्यांक चेहरा देखा तोह ,

"यहहहहहह...." रवि ने बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए , उसकी तंग को , उसकी गर्दन तक चीर दिया , फाड् दिया , उस गुंडे का शरीर , दो हिस्सों में चीयर कर रख दिया , इक तेज़ दर्दनाक चीख मरता वोह गुंडा मर गया , रवि ने उसके शरीर को गर्दन तक , दो हिस्सों में फाड् दिया था , उसका शरीर के अंदर का मास्स , अंदर के सरे अंग , उसके किडनी , लिवर , लंग्स , सब उछाल कर बहार निकल ए , पेट की एंटीजन , सब कुछ , उफ्फ्फ बेइंतहा ब्यांक पल था यह , रवि का पूरा जिस्म अभ खून से सना हुआ था ,

"आईईईई माआ..." प्रिय ने जोर से चीख मरते हुए , अपनी आँखों पर हाथ रख लिए , वोह घूम गई , उस से देखा भी नै जा रहा था ,

"डीडीई ..." रवि ने इक चादर उठा , अपनी बहिन प्रिय का बदन उससे ढकते हुए , उसे अपनी तरफ घुमा , अपने गले लगते हुए , बेहद प्यार से बोलै ,

प्रिय दर से सेहम सा गई थी , वोह कुछ नै बोल रही थी , वोह रवि के सीने में अपना चेहरा छिपाये , उसके दिल की हर धड़कन को सुन रही थी , जो तेज़ तेज़ धड़कता हुआ , अपने अनमोल प्यार का एहसास उसे करवा रहा था ,

तभी कोमल , रमा और ख़ुशी भी वह ा गई , वोह तीनो खुद हरिजन थी , क्यों की घर के अंदर एते hi , सोफे पर बिना सार का आदमी उनका सवागत कर रहा था ,

"भइआ , अप्प ठीक तोह हो..." कोमल अपने भाई के करीब एते हुए बोली , पर जैसे hi उसकी नज़र रूम की फर्श पर पढ़ी , वोह अंदर तक कम्प सा गई , क्यों की , फर्श पर इक आदमी पढ़ा हुआ था , जिसका शरीर दो हिस्सों में फटा हुआ था , और उस आदमी का चेहरा नकाब से ढाका हुआ था , उफ़ कोमल अपने भाई का इतना गुस्सा देख , थोड़ा दर गई थी ,

"खुशु , सब सही कर दो , घर पूरा साफ कर दो , इक बूँद खून भी यहाँ न रहे , और ें कुत्तो की लाशो को , उसके पास डिलीवर कर दो , जिसने इनको बेह्जा था , जल्दी करो..." रवि ने ख़ुशी के दर से सहमे चेहरे को घूरते हुए बोलै , फिर ख़ुशी ने अपनी शक्ति से सब पहले जैसा कर दिया , उन गुंडों की डेड बॉडीज गयाब कर दी , उनकी गाड़ी भी , अभ सब कुछ सही था ,

"प्रिया डीडीई , आयु बाहर ..." रवि अपनी बहिन प्रिय को अपने सीने से लगाए , धीरे धीरे चलते हुए , घर के हॉल में ले आया , फिर सब सोफे पर बेथ गए , प्रिय ने अभी तक अपनी कमीज नै पहनी थी , वोह चादर से अपने अप्प को धक् कर बैठी हुई थी ,

"ओह्ह हो , तोह यह है आपकी बहिन , ववव भइआ , देदी कितनी खूबसूरत है.." कोमल ने प्रिय का हाथ अपने हाथ में लेते हुए , मुस्कराते हुए बोलै , प्रिय भी मुस्कराने लगी ,

"हम्म , मेरी बहिन लाखो में इक है..." रवि ने हस्ते हुए बोलै , पर खून से सना , उसका चेहरा , उफ़ वोह बहुत ब्यांक लग रहा था , कोमल ने उसे कुछ इशारा किया ,

"ोुछः सोररीयय..." रवि ने इतना बोल , अपनी अखन बंद कर ली , अभ रवि का जिस्म पूरा साफ हो चूका था , इक भी खून का डेग नै था , उसके चेहरे पर या उसके कपड़ो पर ,

"देदू , कुछ तोह बोलो , वार्ना में जाता हु..." रवि ने सोफे से उठ ते हुए बोलै , तोह प्रिय इक डैम से होश में ा गई , 3 साल बाद , वोह अपने भाई से मिल रही थी , लेकिन अभी अभी उसने जो कुछ देखा था , वोह थोड़ा दर सा गई थी ,

"भइआए , नई भइआए..." प्रिय इक डैम से उठ ते हुए , रवि के गले लग , बेइंतहा रट हुए , उसके सीने पर , दोनों हाथो से मरते हुए बोली ,

"उम् , यह हुई न बात..." रवि प्यार से हस्ता हुआ बोलै ,

"भइआ , कहा थे अप्प , क्यों नै ए अप्प , क्यू , क्योऊ , मने , मने कितना डुंडा आपको , कहा कहा नै तलाश किया , भइआए , अप्प , अप्प , मुझे लगा , कही अप्प..." प्रिय उस सदमे से बहार आकर , अपने भाई रवि के पोरे चेहरे को चूमते हुए बोली , वोह बेइंतहा मासूम लग रही थी , रट हुए ,

"उफ्फ्फ बस डीडीई , में बता नै सकता , अभ , अभ , में कही नै जाउगा , आपके पास रहुगा , देदी , माफ़ करदू , मने आपके सामने उस गुंडे को मर दिया , पर , पर , क्या करता में , उसने , उसने , मेरी बहिन को हाथ लगाया , देदी सॉरी , माफ़ करदू..." रवि ने बेहद नाम आँखों से , अपनी बहिन प्रिय की रोटू आँखों में देखते हुए बोलै , प्रिय खो सा गई , अपने भाई की नली नली आँखों में ,

"ओह्ह मेरा भैई , अप्प मुज़से इतना प्यार करते हो मेरे भाई , अपने अपनी जान दावों पर लगा दी..." प्रिय ने रट हुए , रवि के पूरे चेहरे को चूमते हुए बोलै ,

"देदू , अपने राखी बंदी थी मुझे , बस उसदिन से अप्प मेरी हो गई हो , आपकी रक्षा करने के लिए , में किसी भी हद तक जा सकता हु..." रवि ने प्रिय का हाथ पकड़ उसे अपने साथ सोफे पर बिठा ते हुए बोलै ,

"बस इक राखी के लिए..."

"ouu-huu , उस विश्वास के लिए जो अपने राखी बंडे हुए , मुझ पर किया था..." रवि ने प्रिय की आँखों में अखन डा बोलै ,

"ओह्ह्ह मेरा भाई , भइआ , मुझे आपके पास रहना है , मुझे अपने साथ ले चलो , प्लस , प्लस , भइआ में आपसे दूर नै रह सकती , भइआ प्लस , कुछ दिनों के लिए आपके पास रहना चाहती हु , प्लस भइआ..." प्रिय ने बेहद रट हुए , अपने भाई रवि के गले लगते हुए बोलै , रवि ने कोमल और ख़ुशी की तरफ देखा , तोह दोनों ने हाँ में सार हिला दिया , पर रमा कहा थी ,

ओह्ह तेरी की , रमा डाइनिंग टेबल पर बैठी , फ्रूट्स खा रही थी , उफ़ सच में वोह भुकड़ हो गई थी ,

फिर प्रिय ने अपने हस्बैंड राजेश को फ़ोन करके सब बता दिया , बस गुंडों की बात छुपा दी , रवि ने उसे रोका था , फिर प्रिय , अपने बेटे अमित को साथ लेकर , अपने भाई के साथ चल पढ़ी , पर पहले उनको सैर से मिलना था , वोह भी तोह इंतज़ार में थी , के कब उसका भाई आएगा , अभी तोह 11:25 मिंट हुए थे , अभी 2 बजने में बहुत टाइम पढ़ा था ,

ख़ुशी ने अपनी शक्ति से उन गार्ड्स को ठीक कर दिया था , प्रिय ने उनको सब समझा दिया था , पर वोह पगला गए थे , कह रहे थे , कुछ गुंडों ने हमला किया था , सच में , दोनों पागल थे , क्या किसी गुंडे ने हमला किया था , पर प्रिय हैरान थी , इतनी जल्दी उन गुंडों की बॉडीज गई कहा , खैर अभ तोह वोह अपने भइआ को मिलकर खुश थी , उसने सोचा बाद में पूछ लुंगी ,

दूसरी तरफ....

"बीटा , अभ तुम ठीक हो , अभ घर चलो , तुम्हारी माँ , उसकी हालत बेहद ख़राब है..."

"नई , पिता जी , अभी नई , ाचा , मेरी बहिन का कुछ पता चला..." इक लड़का बेहद गुस्से में बोलै ,

यह लड़का कोई और नै , बल्कि कुणाल था , और जो उसे घर जाने का पूछ रहे थे , वोह थे , ठाकुर जी देव पर्पट ,

"कुणाल बीटा , उस कालमोहि का नाम भी मत लो , उसने ठाकुर खंडन की बरसो की इज्जत , हमारा बरसो का सम्मान , सब कुछ मिटी में मिला दिया , इक बार , बस इक बार , वोह मेरे सामने ा जाये , उसे में गोली मर दूंगा..." ठाकुर जी देव ने बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए बोलै ,

"नै पिता जी , उस कुटिया को मरना नै है , पिता जी , उसका सहारा लेकर , हम उस हरामजादे रवि को कुत्ते की मौत मरेंगे , अप्प चिंता न करे , उसकी हर कमज़ोरी मुझे पता है , पिता जी , मेरी बहिन hi अभ उस कुत्ते को मेरे सामने ज़ुकायेगी , हाहाहा , लेकिन वोह है कहा..." कुणाल ने बीएड से उठ ते हुए बोलै , वोह कल hi 3 साल बाद कोमा से उठा था , और अज्ज वोह चल फिर सकता था , जो चाहे वोह कर सकता था , और ठाकुर इस बात से हैरान था ,

"हम्म , बीटा , अभ तुम hi मेरा सब कुछ हो , हम ठाकुर हैं , बस तुम्हारे कारन , बीटा लोग में हमारा खौफ काम हो रहा है , तुम सारा काम सम्बल लो , और बीटा तुम्हारी बहिन ख़ुशी कहा है , यह बस राजेश जनता है , वोह जल्द hi आएगी , जब उसे पता चलेगा , उसकी माँ बीमार है , लेकिन हमें अग्गे करना क्या है..." ठाकुर जय देव अपने बेटे कुणाल को बड़े प्यार से देखता हुआ बोलै ,

"जी पिता जी , हमारा खौफ पहले भी था और अग्गे भी रहेगा , मने सब कुछ आपसे सीखा है , और पिता जी , अभ पूरे शहर को में आपके कदमो में ज़ुका दूंगा , आपको इस शहर पर राज़ करवाऊंगा , ः , और दूसरी बात , अप्प राजेश से इक बार और बात करो , जो में कहता हु , वही कहना , फिर देखना , वोह कुटिया कैसे भागी अति है ..." कुणाल ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , उसकी अखन लाल रौशनी में चमक उठी ,

दूसरी तरफ....

शूरति और रिमी अपने रूम में बैठी हुई थी , दोनों बहनो ने अपने भइआ के इंतज़ार में नजाने कितने दर्द सही , सुहाना ने पता नै कितने जुल्म किया दोनों पर , लेकिन , सुहाना के हर जुल्म ने , दोनों बहनो को बेहद करीब कर दिया ,

शूरति और रिमी पहले इतना करीब कभी नै हुई थी , चाहे उनका भाई उनके पास था या नै था , पर उस बुरे वख्त ने दोनों को पास पास कर दिया , अभ दोनों इक दूसरे का जायदा ख्याल रखने लगी थी , इक दूसरे से जायदा प्यार करने लगी थी , अभ दोनों को इक दूसरे की बेहद चिंता रहती थी , अभ दोनों बहाने इक दूसरे की जान बन चुकी थी , दोनों इक दूसरे के बिना शयद इक पल भी जिन्दा न रह पति ,

पर इसका मतलब यह नै था के दोनों लेस्बियन हैं , दोनों लेसबु नै था , बस पता नै क्यों , अभ दोनों प्यार करती थी , इक दूसरे से , बेइंतहा प्यार , शूरति और रिमी अपने रूम में बीएड पर बैठी हुई थी ,

"देदू याल , क्या कर रही हो अप्प..." रिमी ने मुस्कराते हुए पूछा , वोह कब से अपना मोबाइल चलने में बिजी थी ,

"स्वीटू , में ऑफिस का काम देख रही हु , उफ़ ाचा हुआ , मेरी सेक्रेटरी ने सब सम्बल लिया , बहुत अछि लड़की है , स्वीटू , में सोच रही हु , अभ ऑफिस जाना सुरु कर दू..." शूरति ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"देदू , अप्प मुज़से दूर जोगी , नै देदू , मुझे आपके पास रहना है..." रिमी ने बेहद नाम आँखों शूरति की गॉड में सार रख सोते हुए बोलै , शूरति अपनी पीठ बीएड के केबिन से लगाए अधलेटी हालत में बैठी हुई थी ,

"स्वीटू , तुम मेरे साथ चला करो , हम दोनों ऑफिस जाएगी , हम दोनों काम करेगी , हम दोनों पूरा बिज़नेस अग्गे बढ़ाएगी..." शूरति चेहरा निचे ज़ुका रिमी का माथा चुम कर बोली ,

"क्या , सच में देदू , ओह्ह देदू ल लव ु..." रिमी बेइंतहा मुस्कराते हुए बोली , वोह बेहद मासूम थी , बेहद ,

"हाँ मेरी जणू , सच में..." शूरति ने हस्ते हुए बोलै , और फिर रिमी की आँखों में देखने लगी , उफ़ दोनों बहाने , सच में अभ इक दूसरे को प्यार करती थी , पर यार दोनों लेसबु नै थी , बिलकुल भी नै ,

दूसरी तरफ....

बेबी और काट , फर्जी को लेकर बीएड पर बैठी हुई थी , फर्जी अभ सो चुकी थी , पर बेबी और काट , दोनों की नंद ुड्डी हुई थी , यह बात कोई छोटी बात नै थी , फर्जी , रवि की बेटी थी , यह न तोह बेबी जानती थी और न hi काट , लेकिन अभ , अभ दोनों को पता चल गया था , दोनों गुमसुम थी , उदास थी , क्या बोले , क्या करे , कुछ भी समाज नै ा रहा था , आखिर काट ने इस छुपी को तोडा ,

"बेबी ..." काट ने बेबी के कंडे पर हाथ रखते हुए बोलै ,

"हूँ..." बेबी ने वैसे hi उदास आवाज़ में बोलै ,

"तुम , तुम , खुश तोह हो , आखिर फर्जी को उसके पापा मिल गया हैं , मेरा मतलब..." काट अभी बोल hi रही थी , बेबी बेच में बोल पढ़ी ,

"काट , में तुम्हारे दिल की हालत समज़ती हु , तुम क्या कहना चाहती हो , काट , फर्जी मेरी बेटी है , और मुज़से खुश कोई नै होगा , के फर्जी , मेरे पति रवि की बेटी है , शयद तुम नै जानती हो , इक बेटी के जीवन में उसके पिता का , क्या महत्व होता है , फर्जी को हम चाहे कितना भी प्यार करे , पर फिर भी फर्जी अपने पिता की कमी महसूस करेगी ..." बेबी ने अपनी बेटी फर्जी को देखते हुए बोलै , फर्जी सोते हुए बेहद प्यारी और मासूम लग रही थी ,

"हम्म , तुमने ठीक कहा , हैश्च , सच कहु , मने कभी सपने में भी , यह नै सोचा था के फर्जी के असली पिता रवि होगा , पर जो हुआ ाचा हुआ , लेकिन , लेकिन , में फर्जी से अभ दूर नै रह सकती , जब तुम और रवि 3 साल फर्जी से दूर गए , तब में बहुत करीब ा गई अपनी बेटी के , में मर जोगी अगर फर्जी मुज़से दूर हुई तोह..." काट ने रट हुए बोलै ,

"ओह्ह जणू , तुम ऐसा क्यों सोचती हो , रवि ऐसा नै है , उसे सब पता है , उस दिन जंगल में , मने फर्जी को अपनी बेटी मान लिया था , और रवि ने मेरा साथ दिया , में कभी रेखा से नै मिली , पर अभ में hi रेखा हु , तुम हो रेखा , यहाँ जयंती भी लड़कियाँ हैं , सब की सब रेखा hi हैं , और रही बात , फर्जी को तुमसे दूर करने की , जब फर्जी मुज़से दूर नै होगी तोह तुमसे दूर होने का सवाल hi नै उठ ता , कभी ऐसी बात , अपने दिल में मत लाना , तुम जैसे फर्जी को पलना चाहती हो , जो संस्कार देना चाहती हो , तुम दो , पर इक बात तुम माननी होगी..." बेबी ने काट का हाथ अपने हाथो में लेते हुए बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"क्या.."

"वोह बात यह के , अगर फर्जी तुम्हारी बेटी है , तोह रवि तुम्हारा हस्बैंड होगा , तुम अपना सब कुछ उसे देना होगा..." बेबी ने काट को आंख मरते हुए बोलै ,

"चल हैट , तू न , बड़ी कामिनी है..." काट ने बेहद शरमाते हुए बोलै ,

"उम् , जो भी हु , बस तुम्हारी हु , जणू..." बेबी ने अग्गे बढ़ काट के होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"बेबी , वोह मुज़से नाराज़ है , अभ भी , उसने मुज़से इक बार भी बात नै की , बेबी , वोह , वोह , मुज़से प्यार नै करता..." काट ने रवि को यद् कर बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"ओह्ह हो , काट , उफ़ , ाचा , हमें 2 बजे चलना है , त्यार हो जाओ..." बेबी ने फर्जी के साथ लेट ते हुए बोलै ,

"नै , मुझे नै जाना..." काट भी सोते हुए बोली ,

"ठीक है , तुम्हारी ीचा , अगर तुम मेरे साथ चलती , तोह इक आईडिया देती तुम ..." बेबी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"सच में , बताओ न , क्या आईडिया है , में चलुगी ..." काट , बेबी के पास होते हुए बोली..

फिर बेबी उसे आईडिया बताने लगी , दोनों बीएड पर लेती हुई थी , दोनों के बेच में फर्जी सो रही थी , अचानक फर्जी ने अपनी अखन खोली , उसकी अखन सफेद रौशनी में चमक रही थी..



तो बे कुनिटेड....
 
सिराज पटेल भइआ टाइम निकल कर इंडेक्स अपडेट कर देना :हुग:
 
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