अपडेट-126
[Story - Deewanapan , writen by -Yoginath ]
अभ अग्गे...
रवि बेहद परेशान था , अपनी hi सोचु में घूम , वोह बात करना चाहता था , पर उसे समाज नै ा रहा था , कहा से सुरु करे , उसके गोर सफेद चेहरे पर कई भाव , पर्तक्ष रूप में उमड़ रहे थे , उसका दिल बेचैन था , और यह बात कोई छोटी बात नै थी , कुछ दिन बाद , उसे सोनल के साथ सगाई करनी थी , और उसकी सबसे बड़ी दुविद्या यह थी के सोनल इक इंसान थी , इक आम सी इंसान , और वोह खुद क्या था , इक शापित दरिंदा , रवि मन के भीतर सोच रहा था , कही वोह फिर से कही कैद हो गया , कही वोह फिर से मर गया तोह सोनल , उफ़ उसका क्या होगा , अकेली सोनल hi नै , उसे सबकी चिंता थी , खैर उसकी सोचु का अंत , इक हाथ ने किया जो उसके कंडे के ऊपर आकर रुक गया ,
"सोना , क्या बात है , हमें बताओ न , हमें दर्द हो रहा दिल में..." सीमा ने बेहद उदासी में विचलित सा होते हुए बोलै ,
"हाँ भइआ , आपकी ख़ामोशी हमें सत्ता रही है , हमें बेचैन कर रही है..." कोमल ने अपने भाई की आँखों में अखन दाल बेहद उदासी में बोलै , उसकी आँख के इक कोने से , दो कटरा असनु बह निकले ,
"उफ़ नै जणू , तुम रोना मत , में बताता हु , क्या बात है .." रवि ने कोमल के गीले गालो को , अपने हाथ से साफ करते हुए बोलै ,
फिर रवि ने , वोह सब बता दिया , के कैसे उसने सोनल की जान बचाई , जब वोह दर्द में डूबी खुदखुशी करने वाली थी , फिर उस M.L.A के बेटे राहुल को मरना , फिर सोनल का उसके प्यार में पढ़ना , उसका मन कर देना , फिर 7 मंथ बाद , उसका सोनल को दुबारा बचाना , सुल्ताना को मरना , आखिर में उसका झुक जाना , अपनी इक और बहिन के अग्गे , उसकी हर बहिन जिद्दी थी , उनको उसके बिना दुनिआ में कुछ दीखता hi नै था , उनके लिए उनकी पूरी दुनिआ बस वोह था , फिर रवि ने यह भी बताया , कैसे उसने सोनल को डॉक्टर बनने का बोलै , उसने बस यु hi बोल दिया था , पर उस पगली ने ऐसे hi अपनी जिंदगी का आखरी मकसद मन लिया , फिर उसका डॉक्टर बनना , 3 साल बाद रवि का सोनल के पास जाना , चची जी से हुई बात , सोनल का जहर खाना , रवि ने इक इक पल , इक इक लम्हा , उफ़ उसने सब कुछ विस्तार से बता दिया , वैसे भी वोह कोमल और सीमा से कुछ नै चिपटा था , दोनों हमसफ़र थी उसकी ,
जब रवि ने अपनी कहानी , अपनी जुबानी सुना , दोनों की तरफ देखा , उन दोनों के चेहरे पर , उसे कोई भाव न दिखे , लेकिन रवि , उनकी ीचा जानना चाहता था ,
"हम्म , यह बात थी..." रवि ने फिर से उदास होते हुए , अपनी पीठ बीएड के केबिन से टिका , सामने बालकोनी से बहार , आसमान में चमकते सितारों को देखते हुए बोलै ,
"रावी , में क्या कहु , उफ़ , मेरे मन में इस वख्त हज़ारो बतिअन चल रही हैं..." सीमा ने अपने बहते असनु साफ करते हुए बेहद दर्द में बोलै ,
"भइआ , सोनल देदी इंसान है , अपने पहले hi , रिमी , शूरति और अनु को अपने साथ रखा हुआ है , और , और , अप्प सोनल देदी से शादी करने जा रहे हो , भइआ यह नै हो सकता..." कोमल बेहद रट हुए , अपने भाई के कंडे पर सार रख लेट ते हुए बोली ,
"उफ्फ्फ कोमल , वोह जिद्दी है , वोह मर जाएगी , मने उसे आज़मा लिया है , उस पगली ने जहर खा लिया था , वोह मेरे प्यार में पागल हो चुकी है..." रवि ने बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,
"पर सोना , पिता जी , उनका क्या , वोह आपको यह कभी नै करने देंगे , अप्प छह कर भी , अपनी किसी भी बहिन से शादी नै कर सकते , अप्प जानते हो उनको..."
"हाँ , जनता हु , अपने बेदर्द बाप को , जो जलता है , मेरे प्यार से , किस किस को रोकेगा वोह , किस किस को मरेगा , पिछली बार इक रूही थी , पर इस बार , रमा , रिमी , शूरति , सोनल , यह सब हैं , इस बार , तुम हो , बेबी है , काट है , अनु है , ख़ुशी है , इस बार , इस बार , उनको झुकना होगा , नै तोह , नै तोह , हम सबको मर कर , इक पाप करना होगा , वोह ऐसा नै कर पाएंगे..." रवि ने बेइंतहा दर्द में डूबता हुए चीला कर बोलै , उसकी आँखों में असनु थे ,
"शांत भाई , अपने सही कहा , भाई अप्प सोनल देदी से शादी मत करो , जैसे हम सबको प्यार दे रहे हो , उनको भी दे दो..." कोमल ने इक रास्ता दिखा थोड़ा मुस्करा कर बोलै ,
"पर , पर , चाचा जी , कैसे , वोह नै मानेगे , अपनी बेटी को बिना शादी किये , मेरे साथ कैसे बेहज देंगे , तुम तोह पता है , उनके विचार कितने पुराने हैं..." रवि ने थोड़ा मुस्करा कर बोलै ,
"हूँ , सोना , कोमल सही बोल रही है , तुम सगाई कर लो , शादी 1 साल बाद कर लेना , अभ तुम डेविल हो , अपना दिमाग लगाओ ..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"हाँ देदी , दिमाग बहुत है इनका , आपको यद् है , जब पिता जी ने इनको पारी लोग से निकल दिया , यह कोई न कोई रास्ता दंड hi लेते थे , हमसे मिलने के लिए , पिता जी थक गए , उनहोनु अपनी पूरी ताकत लगा दी , पर भइआ तोह भइआ थे , यह आ hi जाते थे , किसी न किसी रस्ते से..." कोमल उन हसीं यादिओं में खोते हुए बेहद हस्ते हुए बोली , सच में , कुदरत का नियाब करिश्मा थी वोह ,
"अभ तुमसे वादा किया था जणू , और तुम्हारे लिए में , कुछ भी कर सकता हु..." रवि ने कोमल की नली नली दिलकश आँखों में डूबता हुए उसके नरम गुलाबी होंठो को चुम कर बोलै ,
"यह सब मेरे कारन हुआ , कितनी बुरी हु में.." सीमा भी उस वख्त को यद् कर बेहद नाम आँखों से बोली ,
"शठ , सीमा , तुम्हारी नै मेरी गलती थी , मने क्यों , क्यों तुम्हारी आँखों में , अपने लिए प्यार न देखा , उफ्फ्फ कितना ख़ुदग़रज़ था में , बस रूही के बिना किसी को देखा तक नै , भूल जाओ सीमा , अभ तुम प्यार देकर , उस गलती को सुधारना चाहता हु..." रवि ने सीमा को बहु में भर उसके गुलाबी होंठो को चूमते हुए बोलै , तोह सीमा मुस्कराने लगी , उसकी लाल लाल आँखों में इक गहरायी थी ,
तीनो अभी बतिअन hi कर रहे थे , तभी कोमल को कुछ यद् आया , पर इस से उसकी चिंता बेहद बढ़ गई ,
"क्या हुआ जणू.." रवि ने कोमल के चेहरे पर चिंता के भाव देखते हुए बोलै ,
"भइआए , हमारा शाप कहा गया , मतलब , अप्प हमें छू नै सकते , आपको बिजली का जटके लगते थे , पर अभ , अभ ऐसा कुछ नै हो रहा , में आपकी बहु में हु , आपको चुम रही हु , पर कुछ नै हो रहा ..." कोमल ने िका इक सब यद् करते हुए बेहद नाम आँखों से बोलै ,
"अरे हाँ , मुझे नै पता , इस बारे में..." रवि ने थोड़ा ख़ामोशी से बोलै ,
"सोना , रिंग कहा है..." सीमा ने कोमल की तरफ देख , बेहद चिंता में बोलै ,
"रिंग , मुझे यद् नै , मने जब रिंग को उस नीले पत्थर पर रखा , उसके बाद से रिंग का मुझे कुछ नै पता , खुशी..." रवि भी यह बात यद् कर , बेहद चिंता में ख़ुशी को यद् कर बोलै ,
और तभी ख़ुशी वह ा गई , उसके हाथ में इक बड़ा सा मिटी से बना इक सुराहीदार घड़ा था , जिसकी मदिरा , वोह अपने होंठो से लगाए , घुट घुट कर पेट जा रही थी , ख़ुशी ने दोनों हाथो से उसे ऊपर उठा रखा था , रवि , कोमल और सीमा उसे अखन फाडे देख रहे थे , फिर उन तीनो ने अपना माथा पीट लिया ,
"भइआ , खुशु तोह नशे में होगी..." कोमल ने ख़ुशी की तरफ देखते हुए बोलै , जो उनके सामने कड़ी , अपना घड़ा ख़तम कर रही थी ,
"सोना , सुबह बात कर लेते ..." सीमा भी मुस्कराते हुए बोली ,
"हैश्च , मेरी किस्मत hi ख़राब है , क्यों बुला लिया मने , अभ , अभ , यह मेरा जीना हराम कर देगी..." रवि अपना माथा पीट कर बोलै , तोह कोमल और सीमा हसने लगी ,
"उम् , अह्ह्ह्ह , मज़ा ा गया , मज़ेदार , उम् , इक और पी लेती हु..." ख़ुशी उस सुराहीदार घड़े से पूरी मंदिर , अपने पेट में दाल , अपने नशीली अखन मटकते हुए रवि को देख बोली ,
"रुको , रुको , तमस , मेरी बात सुनो , तुम बहुत अछि हो , ेहडेर ायो , बैठो , हाँ , अभ no मदिरा , उफ्फ्फ , मेरी माँ , बेथ जा , बार बार उठ क्यों जाती हो..." रवि ने ख़ुशी का हाथ पकड़ उसे बीएड पर बिठा ते हुए बोलै , पर ख़ुशी नशे में तुन बार बार उठ कर कड़ी हो जाती , आखरी रवि ने उसे पीछे से बहु में भर , उसकी कमर पर अपनी बहु को जकड लिया , अभ ख़ुशी , रवि की गॉड में बैठी हुई , थी , रवि ने उसके पेट के बेचू बीच अपने दोनों हाथो की उंगलियों को फसा , उसे जकड सा रखा था ,
"अह्ह्ह छोड़ मुझे , अहह छोड़ , बेवकूफ छोड़..." ख़ुशी नशे में तुन रवि की गॉड में बैठी थोड़ा कसमसाते हुए बोली ,
"खुशु शांत , हमें बात करनी आपसे.." सीमा ने ख़ुशी के गोर मुलाम गाल को प्यार से सेहला कर बोलै ,
"देदू ठीक है , पर इसको बोलो , पहले मुझे चोदे , छोड़ मुझे..." ख़ुशी फिर से उछाल कूद मचाते हुए बोली , आखिर रवि ने उसे अपनी पकड़ से आज़ाद कर दिया , ख़ुशी तेज़ी से उठ कर , उन तीनो की तरफ चेहरा कर बेथ गई ,
"हैश्च , भइआ , कर लो बात..." कोमल इक लम्बी साँस भर हस्ते हुए बोली ,
"हाँ , सोना करो बात.." सीमा भी कोमल की तरफ देख हस्ते हुए बोली ,
"बात , बात , क्या बात , जल्दी बोलो , अह्ह्ह्हहू , मुझे सोना है फिर..." ख़ुशी इक लम्बी अंगड़ाई लेते हुए , अपने बाल खुजा कर बोली ,
"खुशु , बात यह है , रिंग कहा है..."
"कोनसी रिंग , ाचा , वोह मनहूस रिंग , तुम पता होगा , तुमने hi उठाया था उसको..." ख़ुशी ने उन पलु को यद् करते हुए बोलै ,
"मने , पर कब..." रवि थोड़ा चिंता में बोलै , उसके दोनों हाथो में रिंग नै थी ,
"जूठे , मकर , फरेबी , तुमने वोह रिंग उस नीले पत्थर पर राखी , रिंग ने उस पत्थर की साडी ऊर्जा अपने अंदर सोख ली , फिर तुमने उस रिंग को उठा लिया , और मुझे कहा , में वोह बेजान नीला पत्थर ले जाऊ , अभ यद् आया..." ख़ुशी थोड़ा गुस्से में बोली ,
"नयी..." रवि फिर से सोचते हुए बोलै ,
"अह्ह्ह्हू , देदू , ऐसी ने रिंग उथ्यि थी , और रिंग इतनी गुस्से में थी , वोह इसको बिजली के तेज़ तेज़ जटके मर रही थी , और फिर , फिर , यह बेवकूफ उस पहाड़ से निचे गिर गया , हां हां हां , ठीक है , अभ चलती हु में...." ख़ुशी पूरी बात बता , आखिर में अजीब सा हस्ते हुए , बीएड से उठ ते हुए बोली ,
"नई , रुको , बेथ जाओ , मेरी प्यारी खुशु , अह्ह्ह , मेला बचा , मेला गोलू मोलू..." रवि ने अग्गे बढ़ , ख़ुशी को अपने सीने से लगा , उसके बालो को सहलाते हुए बोलै , कोमल और सीमा यह देख हसने लगी ,
"अह्ह्ह्ह , दूर हॉट , क्या काम है..." ख़ुशी , रवि को ढाका देकर पीछे करते हुए , अपने नरम गुलाबी होंठो पर जीभ फिरा उनको गीला करते हुए बोली ,
"खुशु , तोह रिंग कहा गई..." रवि फिर से ख़ुशी को देखते हुए बोलै ,
"अह्ह्ह , रिंग , रिंग , इस रिंग ने मेरा जीना हराम कर दिया है , देखो , जितना मुझे पता था , मने बता दिया , अभ तुम जानो या तुम्हारी वोह रिंग , हां हां हां , अभ में चलती हु..." ख़ुशी पहले गुस्से में , फिर अजीब सा हस्ते हुए , फिर से जाने का बोली ,
"खुशु , रिंग को ढूंढ़ना होगा , वार्ना , ओह्ह देखो , पिता जी ने शाप दिया था , डेविल रूप में , में कोमल को छू नै सकता , मुझे बिजली के जटके लगते थे , पर अभ ऐसा कुछ नै होता , यह देखो..." रवि ने यह बोलते हुए कोमल को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,
"अहह बकवास , इतना तोह तुम पहले भी करते थे ..." ख़ुशी ने अपनी शक्ति से इक बड़ा सा मदिरा का पियाला अपने हाथो में लिया , और मदिरा का छोटे छोटे सिप लेते हुए , दोनों की तरफ देखते हुए बोली ,
"ाचा , यह भी है , पर यह देखो..." रवि ने इतना बोल , अपने होंठ , कोमल के नरम होंठो पर रख दिए , उफ्फ्फ कोमल ने सकूं से अखन बंद कर ली , रवि धीरे धीरे कोमल के नरम होंठो को बेहद शिदत से महसूस करता हुआ चूसने लगा , उफ़ कोमल के नरम लाल होंठ उसके होंठो में पिस्टे चले जा रहे थे , जैसे कोई नरम रोईए हो ,
धीरे धीरे दोनों खो गए , दोनों की अखन बंद हो गई , कोमल अपने भाई के बालो को सहलाती , उसका पूरा साथ देने लगी , रवि अभ थोड़ा कास कास कर कोमल के होंठो को चूसने लगा , वोह कभी ऊपर का होंठ चुस्त तोह कभी निचे का , रवि और कोमल मदहोश हुए , इक दूसरे के होंठो को चूसते गए , फिर रवि ने अपनी जीभ कोमल के नरम होंठो पर फिरा दी , कोमल ने थोड़ा सा अपना होंठो को खोला तोह रवि की जीभ उसके मोह में घुस गई ,
"अह्ह्ह्ह..." कोमल सिसक पढ़ी , उसका भाई अभ उसके होंठो को कास कास कर चुस्त हुआ , उसकी जीभ से अपनी जीभ लड़ा रहा था , आखिर 5 मिंट बाद दोनों अलग हुए , तेज़ तेज़ सांसे भर , इक दूसरे को देखने लगे , कोमल ने शर्मा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,
"देखा खुशी , खुशी..." रवि ने कोमल के होंठो को चूमना छोड़ , जैसे hi घूम कर , ख़ुशी की तरफ देखा , पर , पर ख़ुशी वह नै थी , वोह जा चुकी थी , रवि को बेवकूफ बना और सीमा भी , कोमल यह देख हसने लगी , फिर वोह अपने भाई पर जपत पढ़ी , रवि पीछे बीएड पर गिर गया और कोमल उसके ऊपर लेट , उसकी आँखों में अखन दाल , अपने चूसै से लाल हुए होंठो को जीभ फिरा , गीला करते हुए , मुस्कराने लगी , रवि समाज गया , वोह क्या चाहती है , रवि इक डैम से पलट गया , अभ कोमल निचे थी और वोह कोमल के ऊपर , दोनों इक दूसरे की आँखों में खोये हुए थे , फिर दोनों के होंठ मिल गए ...
नेक्स्ट डे , सुबह के 8 बजे...
"रवि , रवि , उठो , अह्ह्ह्ह , उठू , हे भगवन , इसकी आदत , अह्ह्ह ..." सीमा जो काफी देर से रवि को जगाने की कोससिह कर रही थी , आखिर गुस्से में अपने पेअर पटक ते हुए बोली ,
"मा अप्प्प..."
अभी सीमा इतना hi बोली थी , रवि और कोमल इक डैम से उठ बैठे , सीमा अपनी कमर पर हाथ रखे , दोनों को गुस्से से देखने लगी ,
"अह्हह्ह्ह्ह ाऊऊऊ , सीमा सुबह हो गई..." रवि ने इक लम्बी अंगड़ाई लेते हुए बोलै ,
"नई , अभी तोह रत के 2 बजे हैं , उठो दोनों , में छाए लती हु , और कोमल तेरे होंठ इतने सूज कैसे गए..." सीमा ने पहले रवि को और फिर कोमल के सुज़े होंठो को देखते हुए बोलै , तोह कोमल शर्माने लगी ,
रवि उठ कर वाशरूम में चला गया , सीमा मुस्कराते हुए कोमल के पास बेथ गई , कोमल अभी भी शर्मा रही थी ,
"हम्म , लगता है रत को सब हो गया..." सीमा ने कोमल के हसीं चेहरे को निहारते हुए बोलै ,
"नै देदू , हम तोह 2 घंटे होंठ hi चूमते रहे इक दूसरे के..." कोमल शरमाते हुए बोली ,
"क्या , पर , अच्छा , लेकिन अभ तोह रवि तुम छू सकता है , अभ तू अपनी अस्स मरवा ले , क्यों तरसा रही है बेचारे को..." सीमा , कोमल का हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोली ,
"क्या देदू , अप्प अभी तक वोह बात नै भूली , उफ़ मुझे लगा , अप्प भूल गई होंगी.." कोमल मुस्कराते हुए सीमा की आँखों में ज़कते हुए बोली ,
"ाचा जी , में नै भूलने वाली , जब तक तेरी इस हसीं अस्स की ऐसी की तैसी न करवा दू , में नै भूलने वाली..." सीमा ने कोमल को आंख मरते हुए बोलै , तोह दोनों हसने लगी ,
"ोूछह..." कोमल हस्ते हस्ते सिसक उठी , यह मीठा मीठा दर्द उसके निचले होंठ में हुआ था ,
"उफ़ , लगता है , तेरे नरम होंठो की अछि खातिर दरी हुई है..." सीमा हस्ते हुए बोली ,
" ददऊ , जाओ छाए लाओ मेरे लिए..." कोमल बेहद शर्मा कर बोली , तोह सीमा उठ कर बहार चली गई , तब तक रवि भी वाशरूम से बहार ा गया ,
"कैसी है मेरी जणू..." रवि ने कोमल के साथ बेथ ते हुए बोलै ,
"ठीक हु जणू , ोुछ.." कोमल मुस्कराते हुए बोली , तोह उसे फिर से अपने होंठ में दर्द सा हुआ ,
"ओह्ह हो , मेरी जणू के नरम होंठ सूज गए हैं , लाओ में ठीक कर देता हु..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै तोह कोमल ने अपनी नली नली अखन ज़ुका ली ,
रवि ने कोमल के पास होकर , उसके होंठो को फिर से चुम लिया , बेहद धीमे से , उफ़ कोमल को इक सकूं सा मिल गया , रवि धीरे धीरे कोमल के होंठो को चूमने लगा , वोह चुम लेता फिर छोड़ देता , फिर चुम लेता , ऐसा 5 मिंट तक चलता रहा ,
फिर दोनों अलग हो गए , उफ़ रवि ने कोमल के होंठ देखे , नरम लाल होंठ , थोड़े थोड़े सुज़े हुए , अह्ह्ह रास से भरे गुलाबी होंठो पर आयी , यह सूजन इतनी दिलकश , कातिलाना लग रही थी , उफ़ कोमल का हसीं चेहरा , इतना खूबसूरत , उसकी ज़ुकी ज़ुकी ब्लू (नली) अखन , उसके भेज भेज होंठ , इतना खूबसूरत कोई कैसे हो सकता था , भगवन ने ऐसी रचना कैसे कर दी , कैसे , कोमल , उफ्फ्फ इतनी खूबसूरत अह्ह्ह्ह , रवि अपनी कोमल को देखता खो सा गया ,
कोमल ने नज़रियन उठा , अपने भाई को देखा , उफ्फ्फ कोमल की नली नली अखन , वोह इस दुनिआ में किसी को भी पागल कर देती , उसकी आँखों में इतनी गहरायी थी , के कोई उनमे देख कर hi डूब जाता , कोमल अपने भाई की आँखों में देखते हुए , हल्का सा मुस्करा दी , उफ्फ्फ रवि के दिल का आखरी कोना तक त्रिपत हो गया , कोमल समाज गई , उसका डेविल उसके प्यार में मदहोश हो चूका है , जब जब डेविल रूही (कोमल) के प्यार में इस कदर मदहोश हुआ , वोह सब भूल गया , उसे बस हर तरफ रूही hi दिखाई दी , वोह रूही को देखता रहता , उसके चेहरे को , उसकी आँखों को , हज़ारो साल गुजर जाते , डेविल के सार से अपनी बहिन रूही के प्यार का नशा उतरने में , तब तक उसे दुनिआ में कोई और न दिखाई देता ,
"भइआए , अभ , अभ खो मत जाना मेरे अंदर , में आपको , में आपको , महसूस कर रही हु , अपने मन में , अप्प , अप्प , मेरे अंदर समां चुके हो , अह्ह्ह , भइआ यह एहसास बहुत सकूं दे रहा , मेरा दिल आपके प्यार से भर चूका है , भइआ , दिल करता है , में आपकी आँखों में देखती राहू , अप्प , अप्प , मेरे अंदर , मेर मन की अंतिम गहरायी तक चले गए हो , भइआ मुझे नशा हो रहा है , आपके प्यार का , अह्ह्ह , भइआ , अप्प मत जाओ इतनी गहरायी में , में अकेली नै हु , आपका जीवन कितनो के साथ जुड़ा है , वोह सब टूट जाएगी आपके बिना , भइआए लोटत आयु , अप्प सबको भूल जाओगे , वोह सब की सब , आपकी यद् में मर जाएगीइ , आपके जीवन में कई लड़कियाँ और हैं , भइआए , मैट देखू , भइया अप्प्प खू रहे हो , मेरे प्यार में दुब जाओगे अप्प , मेरे प्यार का अंत नै मिलेगा आपको , भइआ हाजाओ साल लग जायेगे , भय्याहा मत्तट कारु ऐसा , आपकी बेटीई मर जाएगीइइइइइइ..." कोमल अपनी नली नली आँखों में बेइंतहा असनु भरते हुए अपने मन में बोली , वोह अपने भाई का इतना प्यार सेहन नै कर प् रही थी , वोह रो रही थी , उसका मन त्रिपत हो गया था , अपने भाई का इतना प्यार देख ,
िका इक रवि के सीने में तेज़ जलन हुई , रवि होश में ा गया , जैसे किसी ने उसे रोक दिया था , कोमल के प्यार में दुब जाने से ,
"कोमल , शहहह , रोना बंद कारु , जान , कोमल , प्लसस , तुम , तुम , मेरी कसम , कोमल..." रवि बेइंतहा दर्द में डूबा , अपनी बहिन कोमल के असनु भेज चेहरे को , उसके लाल लाल नरम होंठो को , बेइंतहा चूमता हुआ बोलै , कोमल खामोश हो गई , रवि उसके होंठो को कास कास कर चूसने लगा , अहह कोमल के होंठो पर इक मुस्कान ा गई , उसका भाई सच में पागल था , उसके प्यार में ,
"रुकू दोनों..."
दोनों इक डैम से अलग हो गए , जब सीमा ने दोनों को रोका , उसके हाथ में छाए की ट्रे थी , उसने ट्रे बीएड के केबिन पर रख दी , और रवि का कण खींच कर बोली ,
"हम्म , अभ होंठ मिल hi गए हैं , तोह खा जाओगे , हीईइं , अभ चुप चाप छाए पियो , और कोमल के होंठो को चुना भी मत , बेचारी कोमल , उसके लाल लाल होंठो को पूरा सज़ा दिया है ..." सीमा ने रवि का कण पकड़े कोमल की तरफ देखते हुए मुस्करा कर बोलै तोह कोमल शरमाते हुए मुस्कराने लगी ,
"ोुछःह , नै चुस्त , अह्ह्ह , लेकिन..." रवि ने बेहद भोलेपन से बोलै तोह सीमा ने उसका कण छोड़ दिया , सीमा ने उसे छाए दी ,
"लेकिन क्या..."
"उफ़ कोमल के होंठ बहुत मीठे हैं , इक डैम शहद की तरह , अह्ह्ह्ह , मन hi नै भरता , इक बार मोह में भर लू , बस , अह्ह्ह दिल करता है , बस चुस्त जाऊ , चुस्त जाऊ.." रवि अखन बंद कर कोमल के नरम होंठो को महसूस करते हुए बोलता गया , जब उसने अखन खोली , "सीमाआ..." रवि चीला उठा , क्यों की , न वह कोमल थी और न वह सीमा ,
"तुम..." रवि थोड़ा चौंक कर बोलै ,
"हुऊ , बेवकूफ..." यह ख़ुशी थी जो कब से बालकोनी की इक तरफ शूप कर कड़ी , तीनो की बतिअन सुन रही थी , पर सीमा और कोमल के जाते hi वोह अंदर ा गई थी ,
"तेरी तोह..." रवि ने तेज़ी से बीएड से उठ ख़ुशी को पकड़ना चाहा , पर ख़ुशी वह से गयाब हो गई ,
"तमासस्स..." रवि गुस्से में पेअर पटक वाशरूम में चला गया , रवि ने नाहा कर ब्लैक कपडे पहन लिए , उसने अचे से अपने बालो को सवार , थोड़ा sent-vent लगा , आँखों पर ब्लैक चश्मा लगाए , वोह घर के हॉल में पहुँच गया ,
रवि ने देखा , सीमा , कोमल , रिमी , शूरति , रमा , काट , बेबी , मतलब सब की सब वह बैठी हुई ब्रेक फ़ास्ट करते हुए बतिअन कर रही थी , पहले उन सब ने रवि को देखा , पर फिर बतिअन करने लगी ,
"अहूऊऊ अहूऊऊऊ (खासते हुए) , कैसा लग रहा हु में..." रवि आँखों से चस्मा उतर बेहद स्टाइल में बोलै ,
"बकवासस्स..." ख़ुशी घर के अंदर एते हुए बोली ,
"खुशी , रुक अभ तू..." रवि ने अपना चस्मा फिर से पहनते हुए बोलै , सब हसने लगी रवि को यु करता देख , वोह ख़ुशी को पकड़ने भगा , ख़ुशी सामने बने इक रूम में घुस गई , रवि भी तेज़ी से उस रूम में घुसा और ख़ुशी को बहु में भरे बीएड पर गिर गया , उसका चश्मा उसकी आँखों से उतर , बीएड पर hi कही गिर गया ,
"अह्ह्ह , कमीने छोड़ मुझे , अह्ह्ह..." ख़ुशी बीएड पर , रवि के निचे लेती , कसमसाते हुए बोली ,
"मेरी जंगली बिल्ली (कैट) , अभ कहा जाएगी ..." रवि ने ख़ुशी के दोनों हाथो को कलाई से पकड़े बीएड पर दबाते हुए बोलै ,
"अह्ह्ह , छोड़ मुझे , अह्ह्ह , दूर हैट , अह्ह्ह..." ख़ुशी ने रवि के निचे लेते , कसमसाते हुए बोलै ,
"शठ , ी लोवीएए ोूउउ , पारी लोग में तुम प्यार न दे पाया , उसके लिए मुझे माफ़ कर देना , पर इस जनम में , जब भी तुम्हारा दिल करे , मेरी जान भी मांग लेना , और खुशु में तुम , दुनिआ की हर ख़ुशी दूंगा , जीवन भर तुम प्यार करुगा , मुज़से कभी दूर मत जाना.." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै , तोह ख़ुशी खामोश हो गई , वोह ख़ामोशी से बिना पालक जपकाये , रवि की आँखों में देखने लगी ,
"खुशु , जब से में डेविल बना हु , तुम तामस बानी हो , तब से तुम हर पल , हर लम्हा , अपने करीब देखना चाहता हु , जानती हो क्यों , क्यों की जान , तुम्हारे साथ हेलल में सदियों तक सड़ता रहा , तुम मेरे पास रही , हर पल , हर लम्हा , तुम , तुम ख़ुशी नै हो , तुम , तुम , मेरी जिद्दी , लड़ाकू तामस हो , जो मदिरा में डूबी , मुझे सताती रहती थी , जिसने मदिरा पी पी कर , मेरा जीना हराम कर दिया था , पर खुशु , सच कहता हु , अगर , अगर , तुम हेलल में , मेरे पास न होती , तोह शयद में मर जाता , खुशु..." रवि ने बेइंतहा दर्द में दुबे रट हुए बोले , उसके बहते असनु ख़ुशी के मासूम , दूध से सफेद चेहरे पर गिर रहे थे , वोह रोने लगी , वोह रट हुए इतनी खूबसूरत लग रही थी , में बयान नै कर सकता ,
"खुशु , मुझे यु hi परेशान करते रहना , मुझे , मुझे , यु hi सताते रहना , में तुम चाहता हु , में बता नै सकता , में तुम कितना चाहता हु , खुशु मेरी जान , मेरी तमासस्स..." रवि ने ख़ुशी के होंठो को चूमते हुए बेइंतहा रट हुए बोलै , उसके शबदो में इक दर्द था , फिर वोह अलग हो गया , वोह ख़ुशी के साथ लेट , ऊपर रूम की चाट को देखने लगा , उसकी आँखों से अभी भी असनु बह रहे थे ,
ख़ुशी उसके साथ लेती , रट जा रही थी , रट जा रही थी , उसने अपनी अखन बंद कर ली , लेकिन असनु कभी रुकते हैं , असनु अपना रास्ता दंड लेते हैं , यही हुआ , ख़ुशी ने अखन बंद कर ली , पर असनु उसकी आँखों को चीयर , बस बहते गए , बहते गए , फिर िका इक उसने अपनी आँखों खोल ली ,
"रवीए , मेरे बेवकूफ डेविल , में , में , तुम्हारी हु , सिर्फ तुम्हारी , में तुम्हारे लिए हेलल तोह क्या , कही भी जा सकती हु , में सदियों तक हेलल की ताप्ती अग्ग में जल सकती हु , में , में , सदियों तक तुम्हारा इंतज़ार कर सकती हु , चाहे तुम , चाहे तुम , पारी लोग में मेरा प्यार न समाज पाए , पर , पर , वोह मेरा प्यार hi था , जो तुम मेरे बिना इक पल नै रह पते थे , वोह मेरा प्यार hi था जो तुम मेरे लिए , उन अँधेरे जंगलो में चले गए , रवीए , मुझे प्यार दो , मुझे प्यार दो , में तड़प रही हु , प्लस रवीए , मुज़से प्यार करो , में , में , बस तुम्हारा दो पल का प्यार चाहती हु , फिर , फिर चाहे में मर hi क्यों न जाऊ , बेवकूफ , मेरा प्यारा बेवकूफ डेविल..." ख़ुशी , रवि की बहु में लिपट , बेइंतहा दर्द में डूबता हुए , दर्द की आखरी सीमायिओं को तोड़ कर , बेइंतहा रट हुए बोली , उसके इक इक शब्द में , लाखो जख्मो का दर्द था , लाखो मौत का दर्द था ,
"शहहह , मेरी तामस , मेरी तमासस्स..." रवि , ने ख़ुशी को अपनी बहु में कास कर भरते हुए रट हुए बोलै ,
रवि ने ख़ुशी की तरफ करवट बदल , अपने होंठ , ख़ुशी के गीले गुलाबी नरम होंठो पर रख दिए , रवि प्यार से रट हुए ख़ुशी के होंठो को चूसने लगा , दोनों रो रहे थे , लेकिन यह प्यार के असनु थे , ख़ुशी रट हुए कुदरत की बनायीं इक अद्भुत रचना परतीत हो रही थी , वोह बेइंतहा मासूम थी ,
रवि पहले धीरे धीरे ख़ुशी के होंठो को चुस्त रहा , पर फिर वोह ख़ुशी को सीधा लेता , उसके चेहरे पर झुक , कास कास कर उसके होंठो को चूसने लगा , ख़ुशी के नरम लाल होंठ पिस्टे चले गए रवि के होंठो में , रवि उसके लाल होंठो से पूरा प्यार निचोड़ रहा था , रवि ने मदहोश होते हुए , ख़ुशी के निचले होंठ को दांतो से हल्का हल्का काट कास कास कर चूसने सुरु कर दिया , ख़ुशी के बदन में इक सिरहान सी दौड गई , उसे मीठा मीठा दर्द होने लगा ,
"उम्म्म उम्म्म श.." रवि सिसकते हुए ख़ुशी के होंठो से अपने होंठ रगड़ते हुए , उनको मोह में भर भर कर चूसने लगा , "सुररपपपप सुरररपपपपप उम्म्म.." रवि ने होंठ चूसते चूसते अपनी जीभ ख़ुशी के होंठो पर घुमानी सुरु कर दी , ख़ुशी ने मदहोशी में होंठो को चुसवाते हुए अपना मोह खोल दिया , बस उसी पल रवि की जीभ ख़ुशी के मोह का कोना कोना तलाशने लगी , ख़ुशी मचल उठी , जब उसकी जीभ रवि की जीभ से लड़ने लगी , तभी रवि ने अपना इक हाथ ख़ुशी के मोठे कैसे हुए मम्मो (बूब्स) पर रख दिया , उफ़ जैसे hi रवि ने अपने हाथ की उंगलियों को ख़ुशी के गोल गुब्बारे जैसे मोठे मम्मो पर दबाया , अह्ह्ह इतना नरम के रवि के हाथ की उंगलियाँ धास्ति चली गई अंदर , ख़ुशी मज़े में पागल हो गई , उसने और भी कास कर रवि के होंठो चूसना सुरु कर दिया , ख़ुशी ने अपनी रास से भरी लपलपाती जीभ रवि के मोह में दाल दी , उफ्फ्फ रवि तोह पागल हो उठा ,
"अम्म्म सुररपपप सुररपपपप अम्म.." रवि उसकी जीभ को अपने होंठो में दबा , कास कास कर चूसने लगा , जैसे उसकी जीभ का सारा रास निचोड़ देगा , दांतो में दबा हल्का हल्का काटने लगा , ख़ुशी वासना में मचलने लगी , रवि ने ख़ुशी की जीभ को पूरा मोह में भर लिया और ऐसे खींच खींच कर चूसने लगा , जैसे कोई बचा अपनी माँ का दूध चूस रहा हो , जैसे को बछड़ा काऊ का दूध चूस रहा हो , उफ़ क्या एहसास था ,
"अहूऊऊ अहूऊऊऊ..." तभी किसी के खस्ने की आवाज़ आयी , तोह दोनों अलग हो गए , रवि ने तेज़ सांसे भरते हुए रूम के दरवाजे की तरफ देखा , उफ़ सब की सब कड़ी रो रही थी , कोमल , सीमा , रमा , रिमी , शूरति , बेबी , काट , लारा , एलिज़ा , सब रोये जा रही थी , पता नै कबसे , वोह सब इतनी ख़ामोशी से रो रही थी के किसी के सिसकने की आवाज़ भी नै ा रही थी , फिर ख़ुशी भी उठ कर बेथ गई , उसके लाल लाल होंठो पर थोड़ी सूजन ा गई थी , उसके नरम रसभरे होंठो में जलन हो रही थी , उसे मीठा मीठा दर्द हो रहा था , क्यों , क्यों की , डेविल ने उसके होंठो को चूसा था , चूसा hi नै था , पूरा रास निचोड़ दिया था ,
रवि उठ कर खड़ा हुआ तोह सब उसके पास ा गई , फिर इक इक करके , रवि के गले लग , अपने और उसके मन को शांत करने लगी , ख़ुशी अभी भी बीएड पर बैठी मुस्करा रही थी , वोह बस महसूस कर रही थी , अपने होंठो के दर्द को , लेकिन उसे इक अलग hi सकूं मिल रहा था , वोह इक डेमों थी , वोह खुद को मर्दो से बेहतर मानती थी , लेकिन अज्ज , अज्ज , रवि ने उसे इक लड़की होने का एहसास करवाया था , रवि ने इतना कास कर उसके होंठो को चूसा था , वोह बार बार उन पालो को यद् कर रही थी , उसे शर्म ा रही थी , उसकी मुलाम कुवारी छूट रास छोड़ती गीली हो गई थी , वोह कुछ देर बाद उठी और शरमाते , मुस्कराते हुए , रूम से बहार चली गई , अपने रूम में जाकर , उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया , ख़ुशी बीएड पर लेट , अपने सुज़े हुए होंठो को अपनी ऊँगली से छू कर देखने लगी ,
"ोुछः उफ्फ्फ.." जैसे hi उसने निचले होंठ को ऊँगली से दबाया , वोह सिसक उठी , वोह बेइंतहा शर्माने लगी , उसे अभ भी , रवि के होंठ अपने होंठो पर महसूस हो रहे थे , अज्ज तामस पहली बार खुद को , इक आम सी लड़की समाज रही थी , वोह मंद मंद मुस्कराते हुए , बेइंतहा मासूम और कातिलाना लग रही थी , वोह रास से भरी लपलप शराब की बोतल लग रही थी , अज्ज डेमों तामस का गरूर टुटा था , अज्ज उसे मदिरा की जरुरत नै थी , अज्ज उसे प्यार का नशा था...
वही दूसरी तरफ..
"भइआ , अप्प कितने अचे हो..." रमा ने रट हुए अपने भाई का चेहरा चूमते हुए बोलै ,
"बस जणू , ाचा , में शहर जा रहा हु , बेबी , काट , तुम दोनों 2 बजे अनु के ऑफिस पहुँच जाना , और कोमल अप्प और रमा मेरे साथ चलो , और रिमी , शूरति , में अज्ज शाम को तुम दोनों को घूमने लेकर जाउगा..." रवि ने अज्ज का पूरा प्लान सबको सुनते हुए बोलै ,
"हैश्च , देखो , में अकेला हु , में धीरे धीरे तुम सबको वख्त दूंगा , मुज़से नाराज़ मत होना कोई भी , लारा , एलिज़ा तुम दोनों भी काट और बेबी के साथ ा जाना , ाचा , में चलता हु..." रवि ने सबकी तरफ देख बेहद शांति से बोलै ,
"उफ्फ्फ , रवि , हम सब जानती हैं , तुम हम सबको कितना चाहते हो , और अप्प इस बात की बिलकुल चिंता मत करना , कोई आपसे नाराज़ नै होगा , सबका हुक है अप्प पर , जिसे जो चाहये होगा , वोह मांग लेगी आपसे , अप्प शांत रहो , दुखी मत हो.." सीमा ने सबकी तरफ देख , बेहद नाम आँखों से बोलै ,
"लार्ड सीमा , सही बोल रही है ..." सभी इक साथ बोल पढ़ी , पर रमा ने लार्ड मुम्मा बोलै था , और सब हसने लगी , रवि भी ,
" क्या तुम सब भी , और इक बात , अप्प खाना खा कर जाओ , plss.."seema ने रवि के गाल को चुम कर बोलै , तोह रवि ने मुस्करा कर , हाँ में सार हिला दिया ,
फिर सबने खाना खाया , वोह हस्ते , khil-khilate , बतिअन करते , इक दूसरे से हस्सी मज़ाक करते , बेइंतहा ख़ुशी में खाना खा रहे थे , क्यों की यह इक परिवार था , रवि का खुद का परिवार , जिसे इक करने में , सबको पाने में , उसने बेइंतहा दर्द सही , काली दर्द भरी रतियन गुजारी , लेकिन अज्ज 12 साल बाद , इस पल , उसने अपनी अलग दुनिआ बना ली थी , यह दुनिआ , समाज से दूर थी , उसके बनाये निज़मो और कानूनों से दूर थी , यह दुनिआ रवि ने बनाई थी , उसकी अपनी दुनिआ , पर इस दुनिआ में किसी की कमी थी , वोह कमी थी , उसकी बड़ी बहिन रेखा की , उसकी अखन नाम हो गई , तभी उसे फर्जी की यद् ा गई , उसका खून , उसकी अपनी बेटी ,
"अरे मेरी बेटी कहा है..." रवि अपनी बेटी को यद् करते हुए बोलै ,
"बाबू , वोह सो रही है , में लती हु उसे.." बेबी मुस्करा कर उठी और रूम में चली गई , कुछ पलु बाद वोह बहार आयी , उसके साथ फर्जी थी , वोह अभी अभी उठी थी ,
"फरीय बेटा.." रवि ने कुर्सी से उठ , घुटनो के बल जमीन पर बेथ , अपनी बहे फैला , दर्द में दुबे चीला कर बोलै , उसे अपनी बहिन रेखा की बेहद यद् ा रही थी , वोह रोने लगा ,
"पापा..." फर्जी भाग कर अपने पापा के गले लग गई , वोह बेइंतहा रो रही थी , वोह अपने पापा को अपनी बहु में कस्ती जा रही थी ,
"मेरी बची , मेरी बेटी , मेरा अपना खून , मेरा बचा , पापा को माफ़ कर दे बीटा , तुज़से और तेरी मुम्मा से दूर रहा , माफ़ करदे बचा , जब तू छोटी थी , जब तू चलना सिख रही थी , में , में , क्यों नै था वह , क्यू , क्यू , मेरी बेटी , में तुझे जनम लेते , अपने हाथो में क्यों न उठा पाया , क्यू , अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह , रेखा डीडीई , माफ करदु , माफ करदु , अह्ह्ह्हह्हह , मेरी बेटीई , मुझे माफ़ करदे , में ा न सका , माफ़ करदे बीटा...." रवि बेइंतहा दर्द में चीखते हुए , रट , भिलखते हुए , अपनी बेटी को अपनी बहु में जकड़े , अपनी बेटी को बेहद शिदत से महसूस करता हुआ बोलै ,
सब की सब चौंक गई , बेबी और काट , इक दूसरे का चेहरा देखने लगी , सब की सब , खाना कहते कहते खाना भूल गई , उनकी अखन खुली की खुली रह गई , यह बहुत बड़ा जतका था , फर्जी , रवि की अपनी बेटी थी , उसका अपना खून , उसकी बहिन रेखा की बेटी , रेखा की अपने पवितर प्यार की आखरी निशानी , यह ऐसी बात थी , जिसने सबके होश उड़ा दिए थे , वोह ख़ामोशी से इक दूसरे का चेहरा देख , आँखों में असनु लिए , इक बाप को उसकी बेटी से मिलते देख रही थी , चाहे पहले hi , रवि ने फर्जी को अपना लिया था , पर अपना खून तोह अपना hi होता है ,
"पापा , अप्प मेरे पापा हो , गॉड ने मेरी सुन ली , पापा , मुम्मा बहुत रोटी थी , वोह , वोह , कहती थी अप्प मर्डर गए हूँ , पापाआ , मुम्मा को लाऊ ना , पापा..." फर्जी बेइंतहा रट हुए अपने पापा रवि के चेहरे को बेतहाशा चूमते हुए बोली , हर कोई रो रहा था , अरे कोई पत्थर दिल hi होगा , जिसकी आँखों में असनु न ए ,
"बेटा , माफ करदी , तेरी मुम्मा सच कहती थी , में मर्डर गया था , कासशहहह में सच में मर्डरर जाताआ , अह्हह्ह्ह्ह , तू कितना रोटी रहीईई , मेरे लियी , बेटीई , तेरई मुम्मा से क्योऊ दूरर गया , क्यू , क्योऊ , बेटा , तेरी मुम्मा बहुत खूबसूरत थिई , इतनी के में बता नई सकता , बेटा , अभ में तेरी पास रहुगा , तुझे प्यारर दूंगा , और बेटा , गॉड ने तेरी 1 मुम्मा ली , तोह देख कितनी मुम्मा तुझे दे दी..." रवि अपनी बेटी के पोरे चेहरे को पगलू की तरह चूमते हुए , बेइंतहा रट हुए बोलै , रवि के दिल में जो दर्द था , ऐसे में लिख नै सकता , बता नै सकता , बोल नै सकता , बस महसूस कर सकता , में रो रहा हु , यह लिखते लिखते , सच में ,
"मेरी मुम्मा को गॉड क्यू ले गई , मने , मने , बस आपको माँगा था , पापा , मुझे मुम्मा लकररर दू , प्लसस पापा , म्युज़िए मुम्मा के पास जाना हैई , प्लसस पापा , प्लसससस..." फर्जी अपनी माँ रेखा को यद् , बेइंतहा रोने लगी , उसका दर्द में कह नै सकता , अप्प महसूस करो , खुद को फर्जी के स्थान रख कर ,
"नयी बेटा , मुम्मा को दुःख होगा , वोह , वोह , रोयेगी , बहुत रोयेगीइ , तुम मुझे देखो , बेटा , मेरी ाखांण मी देखू , मी होई तेरी माँ हूँ ाभः , में ही तेरा पिता , बेटा , तू म्युज़िए अपनी माँ समज़्ज़ज़ लिए , अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह , रेखा डेडीईईई , क्या करूण मई , क्याआ..." रवि ने बेइंतहा रट हुए , चीखते छीलते हुए बोलै , वोह दर्द में पागल हो चूका था , तभी उसके कंडे पर किसी ने हाथ रखा , उफ्फ्फ यह कोमल थी , वोह बेइंतहा रो रही थी , उसने निचे बेथ , अपने भाई को बहु में भर लिया , रवि उसके कंडे पर सार रख रोने लगा ,
"फररीईई..." बेबी उस सदमे से बहार एते हुए चीख कर बोली , जो उसे अभी अभी लगा था ,
बेबी ने भाग कर फर्जी को अपनी बहु में भर लिया , वोह उसके पूरे चेहरे को पगलू की तरह चूमने लगी , अभ बेबी hi उसकी माँ थी , अभ बेबी hi रेखा थी ,
"मुम्मा , मुम्माआ..." फर्जी माँ का पूरा प्यार बेबी में महसूस करते और भी रोने लगी , उसने बेबी के गले लग महसूस किया जैसे वोह अपनी रेखा के गले लगी है , उफ्फ्फ यह क्या अजीब खेल था भगवन का , क्या अजीब खेल था , भगवन ने यह क्यों किया , क्योऊ , क्यूँउउ ,
"मेरी बेटीई , मी , मी , तेरई माँ हूँ , तुणी , क्यू बोला , क्यू , के पापा मुम्मा को लाऊ , क्योऊ , मी तेरई माँ हूँ , बेटीइ , में तेरई मा हुऊ , में मर्डर जोगीई तेरी बैना , तुणीऐ क्यू कहा , क्यूँउउ , में मर्डर जोगीइइइइ , अह्ह्ह्हहए..." बेबी बेइंतहा चीखते रट हुए बोली , उसकी ममता इस कदर बढ़ गई के वोह फर्जी के बिना इक साँस भी नै ले सकती थी ,
"मा माफ करदु , माआ , माआ..." फर्जी थोड़ा पीछे होकर रट हुए बोली , और फिर बेबी का चेहरा चूमने लगी , फिर बेबी ने उसे बहु में भर लिया , तब तक काट भी उनके पास ा गई थी , फिर बेबी ने फर्जी को गॉड में उठा लिया , काट और बेबी , फर्जी को रूम में ले गई ,
दूसरी तरफ रवि , कोमल के गले लगा हुआ था , कोमल उसे शांत करने की कोससिह कर रही थी , उसे पता था , उसका भाई सदमे में जा रहा था , वोह जानती थी , उसका भाई अगर सदमे में गया , तोह पता नई कितनी दिनन बाहर न आई , और अभ तोह वोह डेविल था , कही वोह गहरी नंद न सो जाई , सदियाँ बीत जाएगीइ उसके उठने तक्क , उसका भाई सदियों तक फिर से उससे दूर होगा , वोह चीख उठी , वोह जोर जोर चखने लगी , पिछली बार जब डेविल गहरी नंद सोया था , सदियाँ बीत गई थी , वोह सदियों तक जगती रही , रोटी रही , पर डेविल तक उसके मासूम दिल की अहहत पहुँच न पायी ,
उफ्फ्फ अभ क्या करेगी कोमल , पिछली बार रूही की बहु में डेविल सो गया था , क्या अज्ज कोमल की बहु में रवि सो जायेगा , यह कैसा इम्तिहान था मोह्हबत का , यह कैसी परीक्षा थी मोह्हबत की , अज्ज कोमल को फिर से अपने पवितर प्यार को साबित करना था , अज्ज उनके प्यार की सबसे बड़ी परीक्षा थी , क्या अज्ज कोमल रोक पायेगी अपने भाई को सोने से , क्या डेविल सो जायेगा , और यह कहानी यही ख़तम हो जाएगी , क्या होगा .... और कोण कर रहा था यह सब , क्या रिंग यह सब कर रही थी , या रवि के पिता ...?
दूसरी तरफ.....
इक बेहद अँधेरे भरा स्थान , यहाँ चारो तरफ अंधकार था , as-pas आसमान को छूटे बड़े बड़े काळा पेड़ थे , वह इतना अँधेरा था के किसी भी पेड़ का आखरी शूर तक नै दिख रहा था , वोह बड़े बड़े पेड़ भी , उस काळा अंधकार में , बस आधे hi दिख रहे थे , वोह गोल आकर में करीब 5 किलोमीटर तक फैले हुए थे , जैसे वोह किसी की रक्षा कर रहे हो , और यह बड़े बड़े काळा पेड़ इक "हवेली" की रक्षा कर रहे थे , इक बेहद सुनसान काली हवेली , जिसकी बहरी दीवारे भी काळा अंधकार में डूबी हुई थी ,
लेकिन यह हवेली थी किसकी , यह हवेली थी काल की , काल जो रवि के पिता थे , इक बेइंतहा शक्तिशाली वैम्पायर , पर क्या वोह बस इक वैम्पायर hi था , या उस से भी बढ़कर था , रवि पहले इस हवेली में ा चूका था , जब वोह पहली बार काल से मिलने आया था ,
ऐसी हवेली से रवि को इक नया जनम मिला था , उसका इक नया जीवन सुरु हुआ था , लेकिन यह हवेली कितनी पुराणी थी , किसने बनाई थी , इतने गहरे जंगल में , किसी को , क्या जरुरत ाँ पढ़ी , के उसे हवेली बनानी पढ़ गई , उफ़ बहुत सवाल थे , बहुत रहस्य थे ,
"आपका बेटे ने वोह रिंग पहन ली , अभ क्या होगा , कोण उतर पायेगा उस मनहूस रिंग को , क्या अप्प यह कर सकते हो , क्या कोमल यह कर सकती है , क्या रवि खुद अपनी ीचा से रिंग उतर देगा , अप्प बताओ न कुछ ..." यह माया थी , इक रहस्मयी लड़की , जो तब से थी , जब से काल था ,
इक बंद कमरे में बैठा काल , माया की बतिअन को सुन रहा था , इक कला लिबास , जिसमे कुछ नै दिख रहा था , उस लिबास के अंदर , बस कला अंधकार दीखता था , और दो चमकती लाल अखन...
तो बे कुनिटेड... [friends jo log abhi hain voh toh replys karo , jo nai hai , voh a jayege , jab unko ehsas hoga ke me unke pas hu or unse door nai jauga ,
muze ik last hope hai app sab mera sath doge , me daily updates dunga , par agar app replys nai doge toh muze kya pata chalega , me sahi likh reha hu ya nai , apne vichar rakho , koi kami hogi toh me door kar dunga.. shukriya...]