Incest Deewanapan... - Page 19 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

फ्रेंड्स सॉरी अज्ज अपडेट नै कर पाउगा , और कल का भी नै पता , बात यह है , के मेरी जॉब पुलिस की है , और अप्प जानते हो कोरोना वायरस के कारन हमारी ड्यूटी और भी सख्त हो गई है... सुबह से घर नै गया हु , और हमारे यहाँ 5-7 केस पॉजिटिव निकले हैं ,

फ्रेंड्स अभी मुझे कुछ दिन घर जाने की इजाजत नै है , तोह सॉरी , में इस हालत में कुछ नै लिख सकता... पहले ड्यूटी फिर स्टोरी... जिस दिन अपडेट देना हुआ , बता दूंगा , अगर न बता पाया , तोह उसके लिए पहले hi माफ़ी मांग लेता हु... अप्प लोग ने बहुत प्यार दिया , उसके लिए बहुत बहुत प्यार मेरी तरफ से... गुड़ bye फ्रेंड्स , अप्प सब घर रहना और अपना ख्याल रखना... bye
 
फ्रेंड्स ड्यूटी पर रहते हुए , अपडेट टाइप किया है , पता नै कैसा लगेगा आपको , तोह कोससिह करुगा , अपडेट पोस्ट करने की , अगर न कर पाया तोह कल रत को पोस्ट कर दूंगा , इक बार रत को 9 बजे चेक कर लेना , शुक्रिया और अपना ख्याल रखना...
 


अपडेट-88

अभ अग्गे...

काट , रवि का सार अपनी गॉड में रखे , झुक कर उसके होंठो को चूस रही थी , उफ्फ्फ यह मोह्हबत का , इश्क़ का , प्यार का , सबसे खूबसूरत दृश्ये था , दोनों बेहद खूबसूरत लग रहे थे ,

कभी हाँ , कभी न , दोनों का रिश्ता , बस han-na की नाज़ुक डोर से बंधा हुआ था , जिसकी रचना हुई थी , डेविल को मरने के लिए , अज्ज वही डेविल के प्यार में , घुटने तक चुकी थी , रो रही थी , दो पल का प्रेम के लिए ,

यही तोह प्यार है , यही तोह इश्क़ है , वोह प्यार नै जब किसी लड़की की चापलूसी करके , उसके जिस्म को भोगने की लालसा मन में हो , प्यार इक तड़फ है , इक उदासी , आँखों से बहते असनु प्यार है , सीने में उठता दर्द प्यार है , रत भर सो न पाना प्यार है , और सोते हुए उसका सपना एते , चीख कर उठना प्यार है , प्यार पर हज़ारो बतिअन लिखी जा सकती हैं , पर निभाने के लिए इक शब्द है "वफ़ा.." , जो वफादार है , उसी का प्यार सच्चा है ,

वफ़ा तुम करो , वोह करे या न करे , कहते है बेवफाई तोह भगवन भी करता है , बिन बताये मौत देकर , इक तरफा प्यार में भी बेहद ताकत होती है , क्यों की इस में आपको बेवफि का दर नै होता , लेकिन दर्द बहुत होता है , जब आपका प्यार किसी से बात करे ,

प्यार ख़ामोशी है , इसकी कोई जुबान नै , लेकिन जब किसी के जिस्म में घुसता है , तब सीधा उसके दिल पर वॉर करता है , दिल को गुलाम बना लेता है , सब rishte-nate , सही गलत , इंसान भूल जाता है , दुनिआ के कुछ hi खुश किस्मत लोग होंगे , जो प्यार से जीत पाए हो , वार्ना , बाकि तोह दुनिआ भूल जाते हैं , यह न तोह मरने देता है , और न जीने देता है ,

इसका न कोई रूप है , न आकर है , जो हमें यह दिखता है , वही इसका रूप बन जाता है , उसी इंसान से हमें प्यार करना पढता है , क्यों आखिर , क्यों , लाखो लोग में , हमें इक से hi प्यार होता है , और होता तोह है , पर कभी मिल नै पता , किसी ने सच hi कहा है...

के , मने देखा है मोह्हबत को , अँधेरे कमरे में ,

पर देख पाया डुंडला डुंडला , क्यों की ,

मेरी आँखों में बेइंतहा असनु थे...

कहानी लिखना आसान नै होता , पर लिखता हु , क्यों की में चाहता हु , अगर मेरी लिखी बातिओं से , किसी को प्यार की कदर हो जाये , तोह में समझुगा , मेरी लेखनी सफल हो गई , खैर अभ अग्गे...

"रविइइइ , माफ़ कर दू..." काट , रवि के होंठो को चूसना छोड़ , बेइंतहा रट हुए , उसके पोरे चेहरे को चूमते हुए बोली ,

"अह्ह्ह , अभ सकूं मिला दिल को , अभ मर भी जाऊ , तोह कोई गम न होगा , बस दिल में बेइंतहा ख़ुशी होगी , के डैम तोडा तोह , में अपनी मोह्हबत की गॉड में था..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"शहहह , तुम मर नै सकते , कभी नई , में , में , तुम मरने नै डूंगीए , जब तक मेरे दिल में , तुम्हारे लिए असीम प्यार है , दुनिआ में कोई तुम , मुज़से चीन नै सकता..." काट , रवि की आँखों में ज़कते हुए बोली ,

उसकी आँख से निकले असनु , रवि के चेहरे पर गिर रहे थे , और जब वही असनु बह कर , रवि की आँखों में जाते , तोह रवि को इक ऐसा सकूं मिलता , के उसे बयान कर पाना नामुमकिन था ,

उसे लगता , उसे सकूं मिल गया , दिल की गहराई तक , जैसे अभ उसे , कोई चिंता नै थी , कोई दर नै था , कोई दर्द नै था , उसके हर दर्द को , काट के असनु मिटा रहे थे ,

"इतना प्यार , में दर गया था , कही तुम..." रवि उठ कर घुटनो के बल बैठते हुए बोलै ,

"मेरे प्यार का कोई अंत नै है , हाँ , में कोमल जितना तुमसे प्यार नै कर सकती , वोह हज़ारो सालो से , बस तुम्हारी रही है , सिर्फ तुम्हारी , उसकी हर धड़कन में , तुम्हारा नाम लिखा है , इतनी शिदत से , कोई कैसे किसी को छह सकता है , यहाँ जिस्म की जरुरत hi ख़तम हो जाये , में तुम दोनों के प्यार के अग्गे , अपना सार ज़ुकती हु..." काट बेहद नाम आँखों से अपना चेहरा ज़ुका कर बोली ,

आखिर झुक hi गई काट , उस पवितर प्यार के अग्गे , अज्ज फिर रवि के पिता हार गए , जिस लड़की की रचना कर , वोह सोचते थे , अभ रवि और कोमल कभी इक नै हो पाएंगे , अज्ज वही लड़की , दोनों भाई बहिन के अग्गे झुक गई थी , उसने मन लिया , के वोह प्यार से जीत नै सकती , क्यों की अभ उसे भी प्यार हो गया था ,

"नयी , यह मत कहो , अपने प्यार की तुलना किसी और से मत करो , अगर तुलना करुँगी , तोह दुःख होगा , तकलीफ होगी , तुम्हारा दिल अभ नाज़ुक है , तुम रोने लागगी , और में तुम रट नै देख सकता , कोमल का प्यार अपनी जगह है , और तुम्हारा अपनी जगह..." रवि , काट का चेहरा दोनों हाथो में पकड़ उसकी आँखों में आँखें दाल बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै , उफ़ सच में काट , उस वख्त , बेहद मासूम लग रही थी ,

"रावी , में रो क्यों रही हु इतना , मैं , मैं रोना नै चाहती , पर असनु रुक नै रहे , प्लस मुझे शांत करो , प्लस रावी , मेरे असनु नै रुक रहे..." काट बेहद रट हुए बोली , सच में उसके असनु झरने की तरह बह रहे थे , लेकिन वोह खूबसूरत झरना था ,

"शठ , आँखें बंद करो , मेरे प्यार को महसूस करो , बेहद शिदत से , खुद को महसूस करो , तुम्हारे असनु रुक जायेगे..." रवि ने काट के गोर भेज गालो से बहते असनु अपनी जीभ से छत्ते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्ह , ी लव यू , अभ में शांत हु , मेरा प्यार मेरे पास है , मुझे सकूं मिल गया है , अभ मुझे कोई दर्द नै , अभ में ठीक हु..." काट , बेहद मुस्कराते हुए आँखें बंद कर बोली , सच में अभ उसके असनु थम गए थे ,

"देखा हो गया न , मेरी काट , ाचा काट , मुझे फर्जी से मिलना है , में चलता हु , तुम आराम कर लो.." रवि , काट का माथा चुम कर बोलै ,

"ठीक है , पर सॉरी , मने तुम पर शक किया..." काट ने फिर से नाम आँखों से बोलै ,

"शठ , भूल जाओ उस बात को , वोह वख्त बीत गया , तुम उस बारे में मत सोचु , हमें प्यार है , इक दूसरे से , बेइंतहा प्यार , अभ कुछ देर सो जाओ , में अत हु तुम्हारे पास..." रवि , काट के होंठो को चूमते हुए बोलै , फिर काट भी मुस्कराने लगी ,

रवि वह से उठ कर सेड्यां चढ़ , अपने रूम में ा गया , उसने देखा , फर्जी और बेबी अभी भी सो रही थी , लेकिन तभी उसकी नज़र बालकोनी में कड़ी कोमल पर गई , जो दूर तक फैले जंगल को निहार रही थी ,

रवि अग्गे बढ़ उसके साथ खड़ा हो गया , कोमल ने इक बार अपने भाई को देखा , पर वोह फिर से जंगल की तरफ देखने लगी , रवि भी खामोश खड़ा रहा ,

"शुक्रिया भइआ..." कोमल ने रवि को बिना देखे बोलै ,

"किस बात के लिए..." रवि , कोमल के बालो को देखता हुआ बोलै , जो हवा चलने से उड़ते हुए बेहद खूबसूरत लग रहे थे ,

"काट मन गई , उफ़ मुझे दर था कही..." कोमल बेहद घबराई हुई , रवि के कंडे पर सार रख बोली ,

"ओह्ह कोमल , वोह मन गई , मेरे प्यार ने उसे विश्वास दिला दिया..." रवि ने कोमल के कंडे पर हाथ रख बोलै ,

"भइआ , मुझे दर लग रहा है , कही काट , उफ्फ्फ , में आपके बिना जी नै सकती..." कोमल बेहद नाम आँखों से बोली ,

"शठ , कुछ नै होगा मुझे , वोह पिछले जनम की बात थी , तब काट मुज़से प्यार नै करती थी , लेकिन अभ वोह मुझे बेइंतहा चाहती है..." रवि ने कोमल को अपनी बहु में भरते हुए उसके बाल सहलाते हुए बोलै ,

"भइआ , क्या वोह डेविल से भी प्यार करती है , काट की फितरत में नै , के वोह डेविल से प्यार कर सके , उफ्फ्फ काट आपको बहुत चाहती है , वोह आपसे दूर रही तोह मर जाएगी , पता नै पिता जी , कोनसा खेल खेल रहे हैं , वोह चाहते क्या है हमसे..." कोमल ने बेहद रट हुए बोलै ,

"में नै जनता के क्या अंजाम होगा हमारी मोह्हबत का , पर कोमल , में पिता जी के अग्गे कभी नै ज़ुकूगा , मेरी क्या गलती है , कोनसा गुनाह किया है , मने अपनी बहिन से प्यार hi तोह किया है , अभ क्या करू , अगर मेरा दिल मेरी बहिन के लिए धड़कता है , में नै जी सकता , अपनी बहिन के बिना , इतना दर्द दे रहे है वोह मुझे , के में अपनी बहिन को प्यार तक नै कर सकता , मेरी जान लेले वोह , मर दे मुझे..." रवि बेइंतहा दर्द में नाम आँखों से बोलै ,

"नै भाई , ऐसा मत बोलो , में , में , आपके बिना क्या करुँगी , अगर आपको कुछ हुआ तोह में भी अपनी जान दे दूंगी , नई जी सकती आपके बिना , पिता जी , सुन रहे हो अप्प , मर दो हम दोनों को , जान लेलो हमारी , पर हमें इक होने दो , प्लस पिता जी..." कोमल बेइंतहा रट हुए चीखते छीलते हुए बोली ,

"ष्ठीय , मेरी कोमल , में हु न , हम कोई रास्ता निकल लेंगे , उस रिंग को ख़तम कर देंगे , फिर पिता जी , हमें इक होने से कभी नै रोक पाएंगे , मेरी बहिन , तू , तू मेरा साथ देना , मेरी पगली बहिन..." रवि , कोमल का रोटू चेहरा अपने दोनों हाथो में पकड़ , उसके होंठो को कास कर चूमता हुआ बोलै ,

"वोह अमर है , वोह , वोह मनहूस रिंग अमर है , वोह बेरहम है , बेदर्द है , नजाने उसने सदियों तक , कितने मासूम लोग को मारा है , में , में उसे नफरत करती हु , हम , भइआ हम , हम कैसे मरेंगे उसे , वोह तोह मर hi नै सकती , भइआ वोह मेरी बलि देकर रहेगी , क्यों , क्यों , आखिर क्यों , मेरी बहिन सुहाना मुज़से इतनी नफरत करती है , इक तरफ पिता जी हमें इक होने नै दे रहे , और इक तरफ यह मनहूस रिंग..." कोमल बेइंतहा रट हुए बोली ,

"इक मिंट , पिता जी और रिंग , कही यह सब पिता जी का तोह खेल नै , हाँ , उफ्फ्फ अहह , हम पहले क्यों नै समाज पाए , कोमल पिता जी hi शेतीअन हैं , उनके दो रूप हैं , इक ाचा और इक बुरा , और रिंग उनका hi इक अंश है , मतलब , जब सुहाना तुमसे नफरत करके , शेतीअन की पूजा कर रही थी , तोह वोह , ओह्ह , तोह वोह पिता जी की पूजा कर रही थी , कोमल , पिता जी इस दुनिआ में अभ भी हैं , और हम पर नज़र रख रहे हैं , किसी भी रूप में , कोण होगा..." रवि बेहद सोचते हुए बोलै ,

"भइआ , पिता जी शेतीअन नै हो सकते , वोह तोह पारी लोग के राजा थे..." कोमल अपने असनु साफ करते हुए बोली ,

"हमारा प्यार , हाँ कोमल , हमारे प्यार ने , उनके दिल में नफरत भरदी , वोह किसी न किसी तरह , हमें इक नै होने देना चाहते थे , इस लिए पहले पिता जी ने , सुहाना के मन में जहर भरा , अपनी आत्मिक विद्या से , वोह , वोह किसी के भी मन को कण्ट्रोल कर सकते हैं , पिता जी ने हमें अलग करने के नजाने कितने यदजानतर रचे , रमा भी उनकी बेटी थी , उनकी अपनी बेटी , और सुहाना भी , लेकिन सुहाना यह बात नै जानती , हमें सुहाना को इस बात का एहसास करवाना होगा , के वोह बेकसूर थी , पूरी गलती पिता जी की थी..." रवि ने बेहद गुस्से में दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"अप्प ठीक कह रहे हो , पिता जी हम पर नज़र रख रहे हैं , उनका पता लगाना होगा , शयद वोह इंसानी रूप में होंगे , हमारी तरह..." कोमल भी शांत होकर बोली ,

"और में जनता हु वोह कोण बता सकता है..." रवि बेहद मुस्करा कर बोलै , उसकी आँखें लाल रौशनी में चमक उठी ,

"कोण..." कोमल भी हड़बड़ा कर बोली ,

"वोह हैं , काल , काल hi हमें पिता जी के बारे में बता सकते हैं , हमारी पिछली जिंदगी , और रिंग के बारे में भी , में जनता हु काल के बिना , हम अधूरे रह जाते , वही हमें पूरी सचाई बतायेगे , में अज्ज रत उनसे मिलने जाउगा..." रवि बेहद सोचते हुए बोलै ,

"क्या , भइआ अभ क्या होगा , मुझे बहुत दर लग रहा है..." कोमल , अपने पिता को यद् करके , बेहद डरते हुए , अपने भाई के गले लगते हुए बोली ,

"कोमल , में इस रिंग की जड़ को ख़तम करुगा , मतलब पिता जी को , और फिर में तुमसे शादी करुगा , अभ वोह मैप hi हमें , पूरी सचाई बताएगा , आखिर यह खेल है क्या , कोमल , यह बहुत बड़ा खेल है , और यह बात किसी को मत बताना , अभी के लिए..." रवि ने कोमल को बहु में भरते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह भइआ मुज़से प्यार करो , मेरी वासना बढ़ती जा रही है , पिता जी , मुझ पर हावी हो रहे हैं , वोह किसी और के साथ , ओह्ह में कैसे बोलू आपको , में अपनी जान दे दूंगी भइआ , मुज़से और सेहन नै होता , प्लस भइआ कुछ करो , कुछ तोह करो ना..." कोमल दर्द में सिसकते हुए बिलख बिलख कर रट हुए बोली ,

"नयी , तुम मेरी हो , कुछ नै होगा तुम , में कुछ करता हु , बस कण्ट्रोल रखो खुद पर , कुछ भी गलत मत करना , हमेशा यद् रखना , अगर तूने अपनी जान दी , तोह में उसी पल अपनी जान दे दूंगा , हमारी जुंग , पिता जी के खिलाफ है , वोह चाहे जो भी कर ले , पर हमसे जीत नै सकते , कभी नै..." रवि , कोमल को अपनी बहु में भर उसे कास कर अपने गले लगता हुआ बोलै ,

"भइआ , माँ कहा है , वोह भी जलती है हमसे , सब जलते हैं , हमारे पवितर प्यार से , में आपके साथ कही भी चलने को त्यार हु , मुझे हेलल ले चलो , काम से काम , माँ और पिता जी का मनहूस साया तोह नै होगा हमारे प्यार पर , भइआ..." कोमल बचो की तरह रट हुए जिद्द करते हुए बोली ,

"कोमल , श शांत हो जाओ , तुम माँ हो , इस कुदरत की , वोह देखो तुमरे बचे मुस्करा रहे हैं , देखो उनकी तरफ , उनके साथ बतिअन करो , खुद को शांत करो..." रवि , कोमल को जंगल की तरफ घूमते हुए बोलै , कोमल जंगल को देखते hi , शांत हो गई , उसने आँखें बंद कर ली , और मुस्कराने लगी ,

रवि ने इक सकूं की साँस ली , और पीछे पलट कर देखा , फर्जी उठ रही थी , रवि उसके पास जाकर बीएड पर बेथ गया , जब फर्जी ने हलके से आँखें खोली , तोह अपने पापा को सामने देख , वोह मुस्कराते हुए , तेज़ी से उठ कर उनके गले लग गई...

"मेरी बची , उठ गई अप्प , फर्जी जी अप्प बहुत सोने लगी हो..." रवि , प्यार से फर्जी के गाल चूमता हुआ बोलै ,

"पापा , मुम्मा भी तोह सो रही है , इनको तोह बस बहाना चाहये सोने का..." फर्जी , बेबी की तरफ देख मुस्कराते हुए बोली ,

"सही बोलै मेरी बेटी ने , तुम्हारी मुम्मा कामचोर है..." रवि हस्ते हुए बोलै ,

"क्या बोलै तुमने..." बेबी सोते सोते इक आँख खोल कर बोली ,

"बेटी हमने कुछ बोलै क्या..." रवि , फर्जी की तरफ देख कर बोलै ,

"नै पापा , हम दोनों ने कुछ नै बोलै..." फर्जी बेहद मुस्करा कर बोली ,

"हूँ , तुम दोनों बच कर रहो मुज़से , अगर कुछ बोलै , तोह दोनों को पीट दूंगी..." बेबी फिर से इक आँख खोल कर बोली ,

रवि और फर्जी ने इक दूसरे की तरफ देखा और फिर जोर से bole..."attaackkk..." दोनों कूद पढ़े बेबी पर ,

रवि ने बेबी की हाथो को पकड़ लिया , और फर्जी , बेबी के पेट में गुदगुदी करने लगी , बेबी बेहद हसने लगी ,

"अह्ह्ह मेरी बची सॉरी , गलती हो गई मुम्मा से , माफ़ कर दो मुम्मा को..." बेबी बेहद हस्ते हुए बोली ,

"किस मुम्मा को माफ़ करू , इतने तोह दर्ज़न में केले नै होते , जितनी मेरी मुम्मा है..." फर्जी अपने माथे पर हाथ मरती हुई बोली ,

"बीटा , जूही मुम्मा को माफ़ कर दो..." बेबी पेट में होती गुदगुदी से परेशान होते हुए बोली , फिर फर्जी , बेबी की बात सुन रुक गई , और रवि को देखने लगी ,

"क्या हुआ बेटी..." रवि थोड़ा शर्मा कर बोलै ,

"पापा , यह नयी आइटम कब पाते , नाम तोह ाचा है जूही , क्या वोह भी मेरी मुम्मा है..." फर्जी बेहद मुस्कराते हुए बोली ,

फर्जी की बात सुन रवि ने अपना माथा पीट लिया , और बेबी उसे गुस्से में देखने लगी ,

"बीटा तुम्हारी बेबी मुम्मा का hi नाम जूही है..." रवि चेहरा ज़ुका कर बोलै ,

"ओह्ह , ाचा , उफ़ में आयी सुसु करके..." फर्जी इक डैम से यह बोल बहार भाग गई ,

रवि और बेबी इक दूसरे की तरफ देख हसने लगे ,

"बेबी , देखो न फर्जी को , जब जंगल में मिली थी , तब कितनी खामोश थी , और अज्ज , देखो इसको , किसी को बात नै करने देती... " रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ , पर रवि , वोह बात मेरी बेटी को कभी मत बोलना , के वोह अनाथ है (रट हुए) , वोह हमारी बेटी है , क्या हुआ मने उसे जनम नै दिया , पर में उसकी माँ हु , वोह मेरी बेटी है , और बड़ी होकर मेरे जैसी बनेगी..." बेबी बेहद रट हुए बोली ,

"नै मेरी जान , वोह हम दोनों जैसी बनेगी , आखिर में भी तोह तुम्हारा बचा हु , बेबी मुम्मा दूदू पिलाओ न , भूक लगी है.." रवि , बेबी को बीएड पर गिराकर उसके ऊपर चढ़ते हुए बोलै ,

"ोुछ क्या कर रहे हो , फर्जी ा जाएगी , हमें देख लेगी..." बेबी बेहद शरमाते हुए बोली ,

"में कोनसी चोरी कर रहा हु , उसकी माँ का दूध hi तोह पे रहा हु , अभ पील्यो दूध.." रवि , बेबी के गोल गोल मोठे मम्मो को उसके टॉप के ऊपर से चूमते चूसते हुए बोलै ,

"ोुछःह अह्ह्ह्ह रत को पीला दूंगी अह्ह्ह अभ छोड़ो मुझे..." बेबी थोड़ा शरमाते हुए सिसक कर बोली ,

"ाचा , ठीक है..." रवि ने इतना बोल बेबी के होंठो पर अपने होंठ रख दिए , दोनों इक दूसरे को होंठो को बेहद शिदत से चूसने लगे , पर उनकी बदकिस्मती , फर्जी वापिस ा गई ,

"पापा..." फर्जी ने अपनी आँखों पर हाथ रख बोलै , तोह बेबी और रवि हड़बड़ा कर अलग हो गए ,

"बीटा वोह , वोह..." रवि नज़रियन ज़ुका बोलै , और बेबी ने शर्मा कर अपनी आँखें बंद कर ली ,

"में समाज गई , इक और फर्जी की तयारी हो रही है , पर पापा , अभ मुझे इक भाई चाहये , जिसे में बहुत प्यार करुँगी..." फर्जी , रवि की गॉड में बैठते हुए मुस्कराते हुए बोली , तोह रवि शर्मा कर मुस्कराने लगा , वही बेबी तोह शर्म से पानी पानी हो गई थी....

"बेटी , बचे ऐसे नै बोलते.." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"पापा , में *** साल की हु , बची नै हु में , मुझे भाई चाहये , लेकिन किस मुम्मा का बचा मेरा भाई बनेगा , कोण सी मुम्मा अछि है..." फर्जी अपना इक हाथ , अपने गाल पर रखते सोचने लगी ,

"बेटी , मेरे पास इक आईडिया है..." रवि , बेबी की तरफ देख मुस्करा कर बोलै ,

"हाँ , बताओ पापा..." फर्जी भी मुस्कराते हुए बोली ,

"बेटी , तुम सभी मुम्मा से पूछ लू , जो मुम्मा त्यार होगी , उसका बचा , तुम्हारा भाई बन जायेगा , जाओ सबसे बात करो..." रवि , अपनी बेटी का माथा चुम कर बोलै ,

"अरे हाँ पापा , में अभी पूछती हु सबसे , देखते हैं , कोनसी मुम्मा त्यार होगी , भाई देने के लिए , लेकिन पापा , यह सीक्रेट रहेगा , हम तीनो के बेच , ok.." फर्जी बीएड से निचे उतर कर बोली ,

"जी फर्जी जी.." रवि अपनी हस्सी रोकते हुए बोलै ,

फिर फर्जी रूम से बहार चली गई , रवि और बेबी ने इक दूसरे की तरफ देखा , और हसने लगे...

तो बे कुनिटेड....
 


अपडेट-89

[Pyare dosto , ik virus pahila hai pori dunia me , Corona virus , toh pls sabhi apna khyal rakhna , or sabhi bhagwan se dua karna , ham sab ik pariwar ka hissa hain , yeh thread nai , hamara ghar hai , app mera pariwar ho , ham sab dost hai , toh pls , safe raho , dua karo bhagwan se , muze khud se jayda , app sabki chinta rehti hai , es liye ghar se bahar mat jana...]

अभ अग्गे.......

फर्जी अपने पापा की लाड़ली थी , उनकी कोई बात वोह कैसे ताल देती , इसलिए वोह निकल पढ़ी , इक नए मिशन पर , उसे इक भाई चाहये था , लेकिन उसके पास बहुत मुम्मा थी ,

फर्जी अपनी छोटी छोटी उंगलियाँ पर अपनी सभी मुम्मा का नाम लेकर उनकी गिनती कर रही थी , वोह बार बार भूल जाती , किसका नाम उसे लेना है , या किसका उसने नाम ले लिया ,

वोह बार बार गिनती भूलने से , बेहद गुस्सा हो गई , सेड्यां उतारते hi वोह जमीन पर गुस्से में पेअर पटक कर बोली..

"यह पापा सच में चालू हैं , हे भगवन इतनी घर में है , तोह बहार कितनी होंगी..." फर्जी अपने माथे पर हाथ मरती बोली ,

सबसे पहले वोह अपनी खास दोस्त के पास गई , जो थी ख़ुशी , अभ ख़ुशी तोह डेमों ख़ुशी थी , लेकिन फर्जी भी फर्जी थी ,

फर्जी दरवाजे को ढाका मर रूम के अंदर घुस गई , उसने देखा , उसकी ख़ुशी मुम्मा , इक लकड़ी के पुतले पर चाकू मरने की प्रैक्टिस कर रही थी ,

"ख़ुशी मुम्मा..." फर्जी बीएड पर बैठते हुए बोली , उसने अपनी गालो पर दोनों हाथ रख लिए , और उनके सहारे बेहद उदास मुद्रा में बेथ गई ,

ख़ुशी इक टॉवल से अपना पसीना साफ करते , उसके सामने आकर घुटनो के बल बेथ गई , और बोली ,

"क्या हुआ तेज़ लड़की , तुम्हारे बेवकूफ पापा ने डांटा तुम..." ख़ुशी अपने सेहभाव के मुताबिक बोली ,

"हैश्च , मेरे पापा बेवकूफ नै है , हाँ , हो भी सकते हैं ..." फर्जी मुस्करा कर बोली ,

"तोह , सही बोलै मने , ाचा , अज्ज में तुम तलवार चलना सिखुगी ..." ख़ुशी वह से उठ कर , इक लकड़ी की अलमारी से इक तलवार निकल कर लेट हुए बोली ,

फर्जी बीएड से उतर कर निचे कड़ी हो गई , ख़ुशी उसके हाथो में तलवार देते मुस्करा पढ़ी ,

"इससे बड़ी नै थी ख़ुशी मुम्मा..." फर्जी अपनी हिघ्त की बराबर तलवार देखती हुई बोली , जो उससे उठाई भी नै जा रही थी ,

"फर्जी बीटा , तलवार इतनी बड़ी होती है.."

"ाचा , हम्म , ख़ुशी मुम्मा , में आपकी हर बात मानूगी , पर पहले मुझे इक भाई दो..." फर्जी तलवार को बीएड के सहारे रखते हुए बोली ,

"किसका भाई..." ख़ुशी चौंक कर बोली ,

"मेरे भाई..." फर्जी मुस्करा कर बोली ,

"कहा है वोह..." ख़ुशी वापिस घुटनो के बल बेथ कर बोली ,

"आपके पेट में..." फर्जी बेहद अड्डा से बोली ,

"मेरे पेट में , यहाँ तोह नै है..." ख़ुशी अपना पेट चेक करते हुए बोली ,

"उफ़ , ओह्ह , ख़ुशी मुम्मा अप्प बुद्दू हो , पापा ने बोलै , किसी इक मुम्मा को मनाओ , तेन की मुझे इक भाई मिल सके..." फर्जी अपना माथा पीट कर बोली ,

"पर में उस बेवकूफ के बचे की माँ क्यों बनु..." ख़ुशी अपने बाल खुजाते हुए बोली ,

"क्यों की , अप्प मेरी मुम्मा हो , मुझे इक भाई दो बस..." फर्जी गुस्से में पेअर पटक कर बोली ,

"ok , पर बीटा , मुझे माँ बनने का जरा सा भी तज़ुर्बा नै है , में पहले कभी माँ नै बानी..." ख़ुशी थोड़ा मायूस होकर बोली ,

"ओह्ह हो , अप्प भाई पैदा तोह करो , बाकि में आपको सीखा दूंगी , तोह डील पाकी..." फर्जी अपना हाथ अग्गे कर बोली ,

"देखो फर्जी बीटा , में तुम नाराज़ नै करना चाहती , पर तुम किसी और मुम्मा से पूछ लो , प्लस , हाँ , अगर किसी को मरना है तोह बोलू.." ख़ुशी पहले घम्बिर होकर और आखिर में मुस्करा कर बोली ,

"उफ़ पूरा दिन mar-dhad करवा लो , जब बचा पैदा करने को बोलू , तोह नखरे करती हो , मुझे नै सीखनी तलवार चलनी , में जा रही , हूँ..." फर्जी बेहद गुस्से में पेअर पटक कर बोली , और वह से चली गई ,

फर्जी वह से निकल सीधा काट के पास चली गई , जो अभी सो रही थी , फर्जी ने काट को उठाया न , उसे सोने दिया , और फिर फर्जी नेक्स्ट रूम में गई , फर्जी ने देखा दरवाजा अंदर से लॉक था ,

फर्जी ने दरवाजा खटकता दिया , कुछ hi देर में सीमा ने रूम का दरवाजा खोला , उफ़ अंदर बेहद लाल रौशनी और अँधेरा था , क्यों की यहाँ रमा भी रहती थी ,

सीमा , फर्जी को देख इक डैम से दर गई , उसने जल्दी से बहार निकल दरवाजा बंद कर दिया , लेकिन तब तक फर्जी ने रूम में कुछ लाल लाल उड़ता हुआ देख लिया ,

सीमा , फर्जी को अपने साथ लेकर घर के हॉल में ा गई , दोनों वह लकड़ी की चेयर्स पर बेथ गई ,

"क्या सोच रही मेरी बची..." सीमा , फर्जी को अपनी गॉड में बैठा उसका माथा चुम कर बोली ,

"मुम्मा , वोह अंदर क्या था , मुझे आपका रूम देखना है... " फर्जी फिर से बंद पढ़े रूम के दरवाजे को घोर से देखते हुए बोली ,

"नै बचा , वोह रूम गन्दा है , उसके अंदर नै जा सकते , तुम भी मत जाना..." सीमा , फर्जी को अपनी बहु में भरते हुए बोली ,

"ाचा , वोह सब छोड़ू मुम्मा , अप्प मेरा इक काम करुँगी..." फर्जी , सीमा की गॉड में घूमते हुए बोली ,

"हाँ बोलू मेरी बची..."

"मुम्मा , मुझे इक भाई चाहये , अप्प मुझे इक भाई देदो , प्लस..." फर्जी अभ थोड़ा नाम आँखों से बोली ,

"शठ , बीटा रोना नै , में तुम भाई दूंगी , हैश्च , मुझे भी अभ इक बचे की जरुरत है , में तुम इक भाई दूंगी , लेकिन..." सीमा बोलते बोलते रुक गई ,

"लेकिन क्या मुम्मा..."

"मेरी बची , लड़का या लड़की होना , भगवन के हाथ में है , अगर मुझे लड़की हुई तोह..."

"तोह क्या मुम्मा , हम इक बार और कोससिह करेंगे , फिर भाई मिल जायेगा..." फर्जी मुस्करा कर बोली ,

"ठीक है , में तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हु , अह्ह्ह मेरा सार , बीटा जाओ , ख़ुशी मुम्मा को बुला कर लायो..." सीमा बोलते बोलते अपना सार पकड़ कर खरहने लगी ,

फर्जी रोने लगी और रट हुए ख़ुशी को बुला लायी , ख़ुशी ने सीमा को ठीक तोह कर दिया , पर उसे कुछ महसूस हुआ , वोह सब जान गई , और वोह बेहद चिंता में थी ,

ख़ुशी ने फर्जी को शांत किया , और उसे गॉड में उठा , अपने साथ ले गई ,

वही दूसरी तरफ...

"उफ़ रवि , हमारी बची , सच में भाई चाहती है , मेरा मतलब , अगर में उसे इक भाई देदू तोह , अरे यह कोमल क्या कर रही है..." बेबी पहले शरमारते हुए फिर थोड़ा चौंक कर बोली ,

"शठ , उसकी तरफ मत देखो , बेहद मुश्किल से शांत किया उसे मने , उसे खेलने दो , और में तोह त्यार हु , तुम त्यार हो या नै..." रवि , बेबी को बीएड पर लिटाते हुए बोलै ,

"ोुछ छोड़ो , अभी नै रत को..." बेबी , रवि को ढाका देते हुए शर्मा कर बोली ,

"उफ्फ्फ , बेबी अज्ज मने काट को शांत तोह किया , पर उसके बहते असनु किसी की भी जान ले सकते हैं , वोह पिता जी की असीम शक्ति से उत्पन इक शक्तिशाली रचना है...." रवि , काट को यद् कर मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ , काट ने जिंदगी में बहुत ढक सही , फर्जी जैसा बचपन नै मिला , जवान होने पर प्यार नै मिला , किसी का साथ नै मिला , उसका दिल पत्थर हो गया , लोग से नफरत हो गई , रवि शयद तुम नै जानते होंगे , हमने साथ में कई मिशन किये , इक साथ ट्रेनिंग ली , लेकिन हमें इक दूसरे से बेइंतहा नफरत थी , में और काट हमेशा नंबर 1 पर रहना चाहती थी , फिर जब बिमान शाह ने तुम मरने के लिए मुझे 50 क्रूर्रे रुपए दिए , तब काट के दिल में मेरे लिए हज़ार गुना जायदा नफरत बढ़ गई..." बेबी ने बीते वख्त को यद् कर नाम आँखों से बोलै ,

"लेकिन तुम मुझे देखते hi पहचान गई , के में तुम्हारा बाबू हु , जूही का बीता हुआ अतीत , है न..." रवि मुस्करा कर बेबी का हाथ अपने हाथो में थम ता हुआ बोलै ,

"हाँ , में तुम पहचान गई , हमारी पहली मुलाकात में hi , तुम जैसी गन्दी हरकतीअं कर रहे थे , में समाज गई , तुम मेरे बाबू हो , जिसे मने दूसरा जनम दिया था , खुद अपने हाथो से सम्बल था , उसे नहलाया था , खाना खिलाया था , इस लिए में तुम छह कर भी मर न पायी , रवि मेरा ेमन चाहे 50 क्रूर्रे में बिक गया था , पर मेरा प्यार अनमोल है , उसे कोई नै खरीद सकता , और में बिमान शाह से दुश्मनी करके , तुम बचने में जुट गई , और फिर बिमान शाह को सब पता चल गया..." बेबी ने बेहद रट हुए बोलै ,

"और फिर उसने काट को बुला लिया , तुमसे अधिक पैसे देकर..."

"हाँ , काट तोह भागी आयी , उसे तोह मुझे मरना था , अपना बदला लेना था , हम दोनों में बहुत लड़ाई हुई , लेकिन अंत में उसने मुझे पकड़ लिया , और बंदी बना लिया , उसने यहाँ , मेरी तंग पर बेसबॉल मारा था , अज्ज भी वोह निशान देख , में मुस्कराने लगती हु , लेकिन हॉस्पिटल में जब तुम िक में एडमिट थे , तब मने वाशरूम में काट के होंठो को चुम लिया..." बेबी नाम आँखों से शर्मा कर बोली ,

"क्या सच में , ओह माय गॉड..." रवि थोड़ा चौंक कर बोलै ,

"हाँ रवि , बस उन्ही चाँद लमहु ने काट के दिल में प्यार का फूल खिला दिया , धीरे धीरे उसी फूल ने काट के पत्थर दिल को नरम माँ बना दिया , में उस वख्त काट को शयद प्यार नै करती थी , जब हम दोनों जरने से निचे गिर गए थे , तोह 7 मंथ बाद , तुमसे चुप कर , तुमसे झूठ बोल कर , में काट से मिलने गई , तब..." बेबी उन पलु को यद् कर बहुत रोने लगी ,

"तब क्या..." रवि की आँखें भी नाम हो गई ,

"रवि जब उसने फ्लैट का दरवाजा खोला , उसके हाथ में शराब की बोतल थी , लेकिन जब उसे एहसास हुआ के में जिन्दा हु , तब वोह पागल हो गई , वोह पगलू की तरह रट हुए मुज़से प्यार करने लगी , में नै जानती थी , मेरी काट इतना बदल जाएगी , मुज़से इतना प्यार करेगी , बस उस इक रत ने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी , उस इक रत के बाद , मने काट को अपना बना लिया , और फिर तुम भी उसकी जिंदगी में ऐनी के लिए मज़बूर किया..." बेबी बेइंतहा रट हुए बोली ,

"मुझे क्यों , वोह तुम्हारी थी जूही..." रवि , बेबी के असनु अपने हाथ से साफ करता हुआ बोलै ,

"रावी , वोह मेरी जान है , पर में , पर में चाहती हु , उसे वोह ख़ुशी मिले , जो इक मर्द देता है , मुझे , मुझे बस तुम पर विश्वास है , मैं , मैं बस तुम जानती हु , मुझे किसी और से कोई मतलब नै , और काट , हाँ काट , वोह मेरी जान है , उसका दिल बहुत नरम है , तुम उसका ख्याल रखना हमेशा , प्लस , उसे कभी गुस्सा मत करना , उसे खुश रखना , वादा करो , वादा करो मुज़से..." बेबी बेहद रट हुए बोली ,

"में वादा करता हु जूही , में तुम दोनों को खुश रखुगा , में वादा करता हु..." रवि , बेबी को कास कर बहु में भर कर , उसके बालो को प्यार से सहलाता हुआ बोलै ,

वख्त , इक ऐसा शब्द , जिसके चलते रहने से , हर जिंदगी बदलती रहती है , कोई हमें यह नै दिखा सकता , के हम अचे हैं या बुरे , वख्त दिखता है , काट और बेबी जब मिली थी , तब इक दूसरे के खून की प्यासी थी , लेकिन अभ , वख्त ने बदल दिया दोनों को ,

वख्त के दो हथियार है , वोह प्यार से भी मरता है , और बेवफाई से भी , कुछ लोग प्यार करते करते मर जाते हैं , और कुछ लोग बेवफाई सहते सहते , लेकिन यह तोह प्यार करने वालो के लिए है ,

दुसरो लोग को वख्त , कभी भूके रखकर मरता है , कभी खिला खिला कर मरता है , कभी डोलत देकर मरता है , कभी गरीब रख कर मरता है , खैर , इक सिंपल सी बात है , के वख्त hi भगवन है , जब से ब्रह्माण्ड बना है , इक चीज़ जावत है , वोह है वख्त ,

हज़ारो युग ए , तबाह हुए , मिटटी में मिल गए , पर वख्त अभ भी जिन्दा है , वोह अपनी चल चलता जा रहा है , हम , हम कुछ नै हैं , हम न तोह पृथ्वी को घूमने से रोक सकते हैं , और न सूरज की तेज़ रौशनी को , हम चाहे जितनी भी रौशनी कर ले , पर रत हमेशा रत रहेगी ,

हम चाहे जितने भी व्रत उपवास रखे , आखिर हमें खाना hi पड़ेगा , हमें चाहे जितना भी जग ले , आखिर हमें सोने hi पड़ेगा , हम चाहे जितना खेल ले , आखिर हमें थकना पड़ेगा ,

हम बेबस हैं , लचर हैं , इस वख्त के अग्गे , यह हमसे , हमारे अपने चीन लेता है , हमारी आँखों के सामने , और हम कुछ नै कर सकते ,

हमारे भगवन , जिनकी हम पूजा करते हैं , उनहोनु भी वख्त के अग्गे अपना सार झुकाया , और ें मिटटी के जिस्मो का त्याग किया , चाहे उनकी आत्मा अमर थी , इस लिए वख्त की कदर करो , यह न तोह आपके असनु देख कर रुकेगा , न आपकी मौत देख कर , यह चलता रहेगा , सदियों तक ...

"उफ़ मेरी जूही , ाचा जूही , अज्ज रत खाने पर मेहमान ा रहे हैं , रेहान और सूजी , तोह तुम , सीमा की हेल्प करो , ाचा अचे पकवान बनाने में..." रवि , बेबी के होंठो को चूमते हुए बोलै , यह सब उसने इस लिए बोलै , तेन की बेबी का मूड फ्रेश हो जाये ,

"सच में , रवि में अभी जाती हु..." बेबी मुस्कराते हुए बोली , और उठ कर रूम से बहार चली गई ,

रवि मुस्कराने लगा , उसे हर किसी के साथ वख्त बताना था , लेकिन यह आसान था , क्यों की सब इक hi घर में थे , हाँ , पर कुछ लोग उससे दूर भी थे ,

"ओह माय गॉड , सोनल..." रवि इक डैम से चौंकते हुए उठा , उसे यद् आया , पिछले 3 साल से उसने सोनल को देखा तक नै ,

(यह बात में इस लिए लिख रहा हु , क्यों की कुछ दोस्त कहते हैं , आपकी स्टोरी में बहुत से गैप्स हैं , पर यह स्टोरी इक एकेले इंसान की जिंदगी पर है , और इक इंसान छह कर भी , हर काम परफेक्ट नै कर सकता , उससे जिंदगी में कुछ न कुछ छूट hi जाता है , लेकिन फिर भी , में कुछ गैप्स को भरने की कोससिह करुगा..)

"में पागल हु , में सोनल देदी से मिला तक नै , उफ़ पर में भी क्या करता , में अंधकार लोग में फास गया था , मुझे सोनल देदी से मिलना होगा , कल hi जाउगा..." रवि खुद पर बेहद गुस्सा करते हुए बोलै , और फिर रूम से बहार ा गया , कोमल अभी भी वही कड़ी थी ,

रवि रूम से बहार आया , तोह लारा उसके सामने कड़ी थी , फिर लारा उसे अपने साथ ले गई , अपने रूम में , वह एलिज़ा भी मज़द थी , रवि उनके साथ बीएड पर बेथ गया ,

"हम्म , अभ बोलू लारा , क्या बात है..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"ओह्ह हो , रवि जी , क्या अभ हम किसी बात के लिए hi , आपसे बात कर सकते हैं ..." लारा , एलिज़ा की तरफ देख मुस्कराते हुए बोली ,

"ओह्ह , यह बात भी है , पर फिर भी क्या बात है..." रवि फिर से मुस्कराते हुए बोलै ,

"ओह हो , रवि जी बात तोह है , पर क्या बात है , यह बात हमें पता नै , हमें आपसे कुछ बात करनी थी , और बात यह है , के हम आपकी टीम में जुड़ना चाहती है , वैसे बात यह भी है , के हमने बहुत बुरे काम कर लिए , अभ अचे काम करना चाहती हैं..." इस बार लारा से पहले एलिज़ाबेथ मुस्करा कर बोली ,

"लेकिन तुम मेरी टीम का हिस्सा नै हो सकती..."

"पर क्यों..." दोनों उदास होकर बोली ,

"क्यों की , तुम दोनों मेरे परिवार का हिस्सा हो , मेरी कोई टीम नै , मेरा इक परिवार है , और यह परिवार , मने बहुत मुश्किलों से इक किया है , सबकी जिंदगी अलग अलग है , लेकिन सबका साथ देकर , सबको अपने परिवार का हिस्सा बनाया है , समाज गई दोनों..." रवि , लारा और एलिज़ा का हाथ अपने हाथो में लेकर बोलै ,

"समाज गई रवि जी , अप्प बहुत अचे हो..." लारा और एलिज़ा रवि के गाल दोनों तरफ से चुम कर बोली ,

"पापा..." फर्जी की कड़क आवाज़ सुन रवि हड़बड़ा कर लारा और एलिज़ा से दूर हो गया और बोलै .."हाँ मेरा बचा.."

"पापा , मुझे इक भाई चाहये , लेकिन जिस तरह अप्प यह , उफ़ ओह्ह , कैसे बोलू , इस तरह तोह मेरे पास दर्ज़न भर भाई हो जायेगे..." फर्जी , रवि के पास आकर अपना माथा पीट कर बोली , फर्जी की बात सुन लारा और एलिज़ा शर्माने लगी ,

"नै बचा वोह दोस्त है मेरी..." रवि अपना बचाव करता बोलै ,

"कोनसे दोस्त चूमा छाती करते हैं , कब से देख रही हु में , जो भी लड़की अति है , वोह hello , हाय तोह करती नै , बस सीधा चूमा छाती सुरु कर देती , युकककक ..." फर्जी टेड़ा सा मोह बना कर बोली , तोह लारा और एलिज़ा हसने लगी ,

"बीटा गन्दी बात है , ऐसे नै बोलते..." रवि , फर्जी को समज़ते हुए बोलै ,

"बेटी किसकी हु..."

"मेरी .." रवि , बेबी के गाल चुम कर बोलै ,

"तोह आपके शुद गन मुझ में भी तोह आएंगे , वैसे पापा , मेरे पास 9 मुम्मा हो गई , इक काम है , जल्दी से इक और आइटम पटाओ , फिर 10 पूरी..." फर्जी , अपने पापा का चेहरा चूमते हुए बोली ,

"अले बस मेरी बची , तुम्हारी कोई दोस्त नै है , स्कूल में..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ पापा , इक दोस्त है मेरी , सोना नाम है उसका , लेकिन वोह बहुत भोली है , पर अप्प क्यों पूछ रहे हो पापा..." फर्जी , अपने पापा को चूमते चूमते उनको बीएड पर गिरा , उनके सीने पर दोनों तरफ पेअर करके बैठते हुए बोली ,

"क्यों की , मिली बची , पापा कल आपको , सोना से मिलवाने लेकर जायेगे , और फिर मेरे चाचू के घर , चलोगी मेरे साथ..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"सच में पापा , लव ु पापा , में चलुगी आपके साथ , अप्प बेस्ट पापा हो दुनिआ के..." फर्जी खुश होते हुए , रवि के पोरे चेहरे को फिर से चूमते हुए बोली....

वही दूसरी तरफ...

"पता लगा लिया मने , कमज़ोर करती है रवि को काट , बदला लेना है , तोह मिलाना होगा काट को साथ..." रेखा बेहद खुश होते हुए बोली , वोह ईविल नूं के कपड़ो में बेहद ब्यांक और डरावनी लग रही थी ,

"खीयकहीईई , अभ रवि खुद जायेगा , मैप के रस्ते पर , अभी तोह 3 दिन हुए हैं , देखती जाओ तुम रेखा , तब तक खामोश रहो , उसे खेलने दो , अपने परिवार के साथ , जल्द hi सुहाना फिर से आएगी , वोह भी रिंग के बिना , खीयकहीईई खीयकहीईई ..." वोह नकाबपोश औरत बेइंतहा ब्यांक हस्सी हस्ते हुए बोली ,

"सुहाना बिना रिंग के आएगी कैसे , पास है रिंग आपके..."

"रेखा , उस दिन रमा के रूम में जब में गई , तब रिंग ने सीमा को महसूस कर लिया , तुम भूलो मत , रिंग हमारे देवता शेतीअन का जीता जगता अंश है , रिंग ने शेतीअन की आगया का पालन किया , और अपने जादुई किरणे वह छोड़ दी , जो सीमा के दिमाग में समां गई , अभ सीमा जल्द hi सुहाना की यादिओं में लूट जाएगी , जिसका मकसद बस कोमल की बलि देना है , जैसे hi सीमा को सुहाना का रूप यद् ऐनी लगेगा , में यह रिंग अपनी ीचा से सीमा को पहना दूंगी , फिर सुहाना ें सब को ख़तम कर देगी , यह है मेरा प्लान , इक तीर से 10 निशाने , और रवि का पूरा परिवार जल कर खाक हो जायेगा..." वोह नकाबपोश औरत बेहद घम्बिर होकर बोली ,

"लेकिन मिलेगा क्या हमको..." रेखा मुस्करा कर बोली ,

"सुहाना का सामना न कर पाने से , रवि को उस महाशक्ति के पास जाना होगा , तेन की सुहाना को रोक सके , उसके वापिस लौटने तक , रवि का पूरा परिवार ख़तम हो जायेगा , वोह गुस्से में आकर सुहाना को मर देगा , लेकिन परिवार को खोने का गम उसे पागल कर देगा , तब में धोके से वोह महाशक्ति उससे चीन लुंगी , फिर राज़ करुँगी में , पोरे ब्रह्माण्ड पर..." वोह औरत बेहद खुश होते हुए बोली....

"बहुत ाचा प्लान बनाया अपने , बदला होगा पूरा मेरा , भाई से ..." रेखा बेहद मुस्करा कर बोली...

तो बे कुनिटेड....

(नोट:- फ्रेंड्स इक बात दयँ से सुनो , फ्रेंड्स यह जो 4रथ part चल रहा है , यह सिर्फ 7 दिनों के प्लाट पर है , अभी 3रद डे चल रहा है , मतलब 3 दिनों के प्लाट पर 27 अपडेट ा चुके हैं ,

फ्रेंड्स धीरे धीरे सब करैक्टर आएंगे , पर यह part दिनों के हिसाब से धीरे धीरे अग्गे बढ़ेगा , क्यों की यह रिश्तो के बेच उलझा 7 दिनों के प्लाट पर ादाहृत है , किसी भी राइटर ने सिर्फ 7 दिन के प्लाट में 100 अपडेट नै दिए होंगे , लेकिन में इस 7 दिनों के प्लाट पर आपको 100 से कही अधिक अपडेट देकर एंटरटेन करुगा ,

फ्रेंड्स अभ हर रोज़ डेली अपडेट आया करेगा , और इतना बड़ा अपडेट hi दूंगा , बस मेरा साथ देते reho...shukariya)

 


अपडेट-90

अभ अग्गे....

"फर्जी बीटा , बस करो याल , तुम मेरा चेहरा मत चुमू , मुझे गुदगुदी हो रही है..." रवि , फर्जी को रोकते हुए बोलै , जो उसके चेहरे को चूमते जा रही थी ,

"ाचा जब यह आइटम चूमती हैं , तब नै होती गुदगुदी आपको..." फर्जी फिर से रवि का चेहरा चूमते हुए बोली ,

फर्जी अभी रवि से प्यार कर hi रही थी , के बेबी भी वह ा गई , उसका बाल थोड़े भीकरें हुए थे , हाथो पर और फेस पर अट्टा लगा हुआ था , शयद वोह रोटी बनाते हुए hi यहाँ ा गई थी ,

"पापा , मुम्मा तोह जोकर बन के घूम रही है..." फर्जी बेहद हस्ते हुए बोली ,

"हाँ , मेरी बची , तुम सही बोल रही हो..." रवि भी मुस्करा कर बोलै ,

"क्या बोलै..." बेबी ने अपने पीछे हाथो में इक बालें पकड़ रखा था , उसने वोह बालें रवि को दिखते हुए बोलै..." दू क्या इक..." बेबी बड़ी बड़ी आँखें दिखा कर बोली ,

"नै मुम्मा , पापा को मत मरना , अप्प अछि मुम्मा हो..." फर्जी इक डैम से रवि के अग्गे आकर नाम आँखों से बोली ,

"ओह्ह मेरी बची , में मज़ाक कर रही थी..." बेबी बीएड के पास आकर , उसे बहु में भरते उसका चेहरा चूमते हुए बोली ,

"चलो मेरा बचा , पहले खाना खा लो , फिर खेलना पापा के साथ , मेरा बचा , सॉरी , मुम्मा को माफ़ कर दो ..." बेबी , फर्जी को गॉड में उठा कर , उसके चेहरे को चूमते हुए , उसे अपने साथ ले गई...

रवि अपनी बेटी का प्यार देख कर सुन रह गया , उसने आँखें बंद कर ली , और इस बेशुमार प्यार को महसूस करने लगा , यह प्यार दुनिआ भर की पूरी डोलत से जायदा अनमोल और कीमती था ,

लारा और एलिज़ा दोनों इक दूसरे का चेहरा देखने लगी , उनकी आँखें नाम थी ,

"एलिज़ा मुझे भी ऐसी इक बची दो..." लारा बेहद नाम आँखों से बोली ,

"मैं , में कैसा दू लारा..." एलिज़ा थोड़ा चौंक कर बोली ,

"मुझे नै पता , मुझे इक बची दो बस.." लारा जिद्द करते हुए बोली ,

"ाहू ाहू , में कुछ हेल्प कर सकता हु.." रवि मुस्करा कर बोलै ,

तोह दोनों रवि को झूठा मरने लगी , उन दोनों ने हाथो में तकयी पकड़ रखे थे ,

"कमीना डेविल..." एलिज़ा शर्मा कर बोली ,

"रवि वैसे तुम सही बोल रहे हो , जाओ एलिज़ा के पेट से इक बची पैदा करो..." लारा मुस्करा कर बोली ,

"नै रवि , लारा के पेट से..." एलिज़ा थोड़ा चीड़ कर बोली ,

"तुम्हारे.."

"नै तुम्हारे..."

"शठ , शांत , शांत , हम्म , अभी चलो खाना कहते हैं , परिवार के साथ कुछ वख्त बिताते हैं , अज्ज में तुम अछि अछि बतिअन बताउगा सबकी , चलो..."

रवि दोनों को शांत कर , उनके हाथ पकड़ , उनको खींच कर रूम से बहार ले आया ,

रवि , जब दोनों के साथ घर के हॉल में आया , तब सभी डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे , रेहान और सूजी भी ा चुके थे , कोमल भी इक तरफ शांत होकर बैठी हुई थी , और फर्जी , बेबी की गॉड में बैठी हुई थी ,

"लारा और एलिज़ा , देखो , यह है हमारी जिंदगी , इसके लिए सब बुरे काम करते हैं , लोग मज़दूरी करते हैं , दूर देषु में काम करते हैं , बस इस दो वख्त के खाने के लिए , ायो तुम भी मेरे परिवार का हिस्सा हो अभ..." रवि दोनों को यह बोल , अपने साथ लेकर , सबके पास ा गया ,

दोनों चेयर पर बेथ गई , रवि पहले रेहान को गले मिला , फिर सूजी से मिला , और फिर रेहान के साथ hi बेथ गया ,

"पापा..." फर्जी , बेबी की गॉड से उतर कर , रवि की गॉड में आकर बेथ गई , और रेहान की तरफ देख मुस्कराने लगी ,

"यह प्यारी बची किसकी है .." रेहान , फर्जी के बाल सेहला कर बोलै ,

"में रवि पापा की बची हु , और यह सब मेरी मुम्मा है , बस इक काम है , फिर 10 पूरी हो जाएगी..." फर्जी मुस्करा कर बोली , तोह सब हसने लगे ,

"रवि , हम खाना खाने के बाद , कुछ देर बहार बैठते हैं , हमें तुम्हारे मोह से , तुम्हारी और सीमा देदी की लव स्टोरी सुन्नी है , प्लस , सुना दो , प्लस..." काट बेहद जिद्द करते हुए बोली ,

रवि , फर्जी को देख खामोश हो गया , वोह नै चाहता था , उसकी बेटी को दुःख हो , पर जब सभी जिद्द करने लगी , तब रवि ने हार मन ली ,

"वाओ , मेरे बेवकूफ प्यारे की लव स्टोरी , अछि होगी.. " ख़ुशी मुस्करा कर बोली , तोह सब हसने लगे ,

फिर सबने साथ में खाना पूरा किया , और कुछ देर बाद सब , घर के बहार आग जला कर बैठे हुए थे , सबकी आँखें रवि पर जमी हुई थी , उसकी गॉड में फर्जी बैठी हुई थी ,

"हाँ , तोह रवि सुरु करो यार..." काट , रवि की आँखों में आँखें दाल बोली , उफ़ रवि तोह घ्याल सा हो गया उसे देख कर , वोह काट की आँखों में खो गया , सब दोनों की तरफ देख रहे थे ,

"उफ़ काट मुम्मा , अप्प अपनी आँखें बंद करो न , पापा कुछ बोल नै प् रहे..." फर्जी खड़े होकर अपनी कमर पर दोनों हाथ रख बोली , फर्जी की बात सुन काट शर्माने लगी , और बाकि सब हसने लगे ,

"तोह सुनो , यह बात तब की है , जब में 8तह क्लास में था , मुझे उस वख्त पता नै था , प्यार क्या होता है , कैसे किया जाता है , तब मेरे पिता जी जिन्दा थे , तोह में स्कूल में जाता था , तभी स्कूल में इक लड़की आयी , उसके साथ दो और लड़कियाँ थी , उफ़ उसने दो छोट्यां की थी बालो की , जो उसने अपने कण्डु से अग्गे की तरफ डाली हुई थी , उसका पतला सा शरीर था , वोह बेहद नाज़ुक थी , रंग दूध से भी जायदा गोरा , में , में बस उसे देखता रह गया , उसने जाते वख्त बस दो पल नज़रियन मुज़से मिलायी , के में उसका दीवाना हो गया , यह लड़की थी , हमारी सीमा..." रवि उन पलु को बेहद शिदत से यद् करते हुए बोलै , तोह सीमा मुस्कराने लगी ,

"वाओ , इंट्रो तोह ाचा था , अग्गे क्या हुआ..." बेबी जिसने यह लव स्टोरी पहले नै सुनी थी , वोह मुस्करा कर बोली ,

"रवि , सीमा देदी सच में बहुत प्यारी होंगी..." काट भी मुस्करा कर बोली ,

"हाँ काट , सीमा सच में प्यारी थी , लेकिन हम दोनों में कभी कोई बात नै होती थी , इक दिन मने देखा , सीमा को दो लड़के परेशान कर रहे थे , मैं उन लड़को से जगद पढ़ा , उनमे से इक की मने आँख फोड़ दी , सीमा दर से सेहमी हुई थी , वोह नज़रियन झुकाये वह से चली गई..." रवि , सीमा के चेहरे को देखता हुआ बोलै ,

"वाओ , तोह हमारे हीरो ने आखिर बचा hi लिया देदी को , अभ प्यार स्टार्ट होगा..." लारा भी अपना योगदान देते हुए बोली ,

"सही कहा लारा तुमने.." एलिज़ा भी लारा की हाँ में हाँ मिलती बोली ,

"अभ अग्गे रवि ने अपने प्यार का इजहार सीमा देदी को कर दिया होगा..." काट मुस्करा कर बोली ,

"उफ़ तुम कुछ सुनने तोह दो मुम्मा लोग , पापा अग्गे क्या हुआ..." फर्जी , रवि के चेहरे को चूमती हुई बोली ,

"होना क्या है , बेवकूफ ने कुछ उल्टा सीधा बोलै होगा..." ख़ुशी जो इक लकड़ी का टुकड़ा चबा रही थी , वोह मुस्कराते हुए बोली ,

"खैर अग्गे सुनो , उन लड़को के चाकर में , पिता जी ने मुझे बहुत मारा , क्यों की में सीमा वाली बात उनसे छुपा गया था , उस दिन के बाद , में सीमा को रोज़ देखने लगा , सीमा बहुत शर्माती थी , वोह बेच बेच में मुझे देख लेती , लेकिन हम दोनों ने कभी इक दूसरे से बात नै की , फिर मेरी जिंदगी इक हादसे ने बदल दी , मेरे पिता जी मर गए , परिवार का बोझ मेरे कण्डु पर ाँ पढ़ा , मने स्कूल जाना छोड़ दिया , में खेतो में काम करने लगा , साथ में मज़दूरी भी कर लेता था , हम गरीब थे , और मेरी 3 बहने थी , और माँ भी , मैं नै चाहता था , कोई मेरी बहनो पर ऊँगली उठाये , या उनको कुछ गलत बोले , इसलिए मने खुद अकेले खेतो में काम किया , अपनी बहनो को घर रहने का हुकम दिया , बस वोह मेरे लिए खाना लती थी , इसके इलावा , वोह काम hi बहार निकलती थी , फिर कुछ महीनो बाद , में सीमा के घर मज़दूरी करने गया , में उसे देखता रहा , मुझे बिलकुल ाचा नै लग रहा था (रट हुए) , के में जिसको प्यार करता हु , उसके घर मज़दूरी करू , लेकिन क्या करता , में मज़बूर था , मुझे अपनी बहिन कोमल को ाचा शिक्षा देनी थी , सीमा भी उदास थी , में जनता था , लेकिन में कुछ कर नै सकता था , क्यों की मने कई बार सीमा को रट देखा था , खैर सीमा के घर काम ख़तम हुआ तोह , कुछ वख्त बाद सीमा शहर चली गई , अग्गे पढ़ने के लिए , और में वही गाओं के खेतो में रह गया..." रवि रट हुए बोल रहा था , यह वोह दिन थे , जब उसने हज़ारो बोझ अपने कण्डु पर उठाये थे ,

वह कोई भी ऐसा नै था , जिसकी आँखों में असनु न थे , आखिर पत्थर दिल तोह कोई था hi नै , सबके दिलो में प्यार था ,

"अग्गे क्या हुआ..." काट बेहद रट हुए बोली , बेबी रट हुए उसे शांत कर रही थी ,

"काट , मेरी जिंदगी अग्गे बढ़ने लगी , घर के बुरे हालातो ने , सीमा का नाम मेरे दिल से मिटा दिया , मेरा काम बस घर से खेत और खेतो से घर तक सिमट कर रह गया , मेरी जुबान खामोश हो गई , दिल पत्थर सा हो गया , हाथ पाक गए काम करके , मने दिन रत काम किया , अपनी माँ और बहनो को अछि जिंदगी देने के लिए , में अपनी हर बहिन को बहुत चाहता था , मेरी जिंदगी में प्यार ने डैम तोड़ दिया , में भूल गया सीमा को..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"फिर क्या हुआ..." ख़ुशी बेहद नाम आँखों से बोली , डेमों कभी रट नै , पर ख़ुशी अभ ख़ुशी थी , वोह भी रो रही थी ,

"बस में और नै सुन सकती..." काट , बेबी के गले लग बेहद रट हुए बोली ,

"श मेरी जान , शांत हो जाओ , वोह देख सीमा देदी , वोह मिल गई थी , तुम्हारे रवि को..." बेबी खुद भी रट हुए काट को सीमा की तरफ इशारा करते हुए बोली , फिर काट , सीमा को देख थोड़ी शांत होने लगी ,

"उसके बाद कई सालो बाद , में खेतो से काम करके दुपहर को घर की तरफ ा रहा था , तब मुझे रस्ते में कोई दिख गया , उफ़ वोह सीमा थी , पहले से भी खूबसूरत हो गई थी , और जवान भी , वोह कुछ गुनगुनाती हुई मेरी तरफ ा रही थी , उसके होंठो पर इक मुस्कान थी , में सीमा को देख , हरिजन रह गया , लेकिन मने अपनी नज़रियन ज़ुका ली (रट हुए) , में उसके सामने क्या था , वोह इक अमीर लड़की थी , और में , में उसके सामने कुछ नै था , मेरे पास उसे देने के लिए कुछ नै था , में दर गया था , कही वोह मेरी गरीबी का मज़ाक न उड़ाए , में , में , अह्ह्ह , वोह चाँद पल , मेरी जिंदगी के सबसे दर्दनाक पल थे , जब हमारा प्यार मेहगे कपड़ो में घूम रहा हो , और हमारी हालत किसी मज़दूर जैसी हो , में भगवन से दुआ कर रहा था , सीमा मुझे न पहचान पाए , पर , में गलत था..." रवि अपनी हालत को यद् कर बेहद रट हुए बोलै ,

"उफ्फ्फ रवि , मेरे रवि , तुम इतना कुछ सहा..." बेबी बेहद रट हुए बोली ,

"बेवकूफ तुमने तोह रुला दिया सबको .." ख़ुशी अपने असनु साफ करते हुए बोली ,

"अग्गे क्या हुआ..." लारा बेहद रट हुए बोली ,

"में , में अपना चेहरा ज़ुका कर , सीमा के पास से गुजरा , पर तभी सीमा ने मुझे आवाज़ दी..."

"अरे रवि , तुम कोमल के भाई हो न..."

"बस यह सीमा के वोह शब्द थे , जब मेरे कदम वही जैम गए , में सीमा की तरफ देख , हाँ , के जवाब में बोलै , सीमा मेरे साथ कुछ वख्त बिताना चाहती थी , वोह मुझे पास hi गन्नू के खेत में ले गई , हम दोनों को कुछ समाज नै ा रहा था , के क्या बोले , पर सीमा ने जल्द hi मुज़से सब कुछ जान लिया , अगले दिन सीमा मुज़से फिर मिलने आयी , और मुझे ढेर साडी किताबें दे गई , जाते जाते सीमा ने कहा , वोह दो हफ्ते बाद मुज़से मिलने आएगी , वोह दिन मेरी जिंदगी का सबसे खुशनुमा दिन था , सीमा का खूबसूरत चेहरा दिन रत मेरी आँखों के सामने घूमता रहता..." रवि अभी बोल hi रहा था के ख़ुशी बेच में बोल पढ़ी ,

"तुमने उससे प्यार का इजहार क्यों नै किया.." ख़ुशी थोड़ा गुस्से में बोली ,

"वोह , वोह , में डरता था सीमा से..."

"अह्ह्ह , फत्तू साला..." ख़ुशी मुस्करा कर बोली , तोह सब हसने लगे ,

"खुशी , अग्गे सुनो , में सीमा का इंतज़ार करता रहा , अभ मुझे काम करने में दिकत न होती थी , मेरी अंदर जीने की ीचा पनप उठी थी , क्यों की गाओं की सबसे खूबसूरत लड़की , मुज़से मिल रही थी , मुज़से बतिअन कर रही थी , में धीरे धीरे सीमा की यद् में पागल होता रहा , दो हफ्ते कब बीत गए मुझे पता hi न चला , में वही गन्ने के खेत के बहार , सीमा का इंतज़ार करता रहा , पूरा दिन गुजर गया , पर सीमा न आयी..." रवि ने नाम आँखों से बोलै ,

"सीमा मुम्मा अप्प क्यों न आयी ..." फर्जी बेहद नाम आँखों से बोली , पर सीमा खामोश थी , उसका चेहरा ज़ुका हुआ था , और उसकी आँखों में असनु थे ,

"भाई आपकी जिंदगी में इतना दर्द क्यों था , क्यों..." रेहान , जो सूजी को बहु में भर कर बैठा था , रट हुए बोलै ,

"यह कोमल क्या कर रही है..." काट , कोमल की तरफ देख कर बोली ,

"श काट , उसे करने दो , वोह शांत रहेगी , उस दिन में उदास सा घर लोटा , मुझे लगा वोह इक दिन सपना था , जो गुजर गया , लेकिन मेरा दिल नै मन रहा था , में हर रोज़ उसी वख्त वह जाता , सीमा का इंतज़ार करता , और रत को घर ा जाता , में पागल सा हो गया था , सुबह 3 बजे खेतो में जाता , काम करता , और फिर वही जाकर सीमा का इंतज़ार करता..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"इतना प्यार , उफ़ रावी..." काट फिर से रट हुए बोली ,

"काट , यह प्यार नै मेरी तपस्या थी , मने 6 महीने सीमा का इंतज़ार किया , वोह इक इक दिन , इक इक लम्हा , जो बेहद मुश्किल से गुजर रहा था , में नै जनता , मने क्यों किया , इक ऐसी लड़की के लिए , जिसका मुझे पता नै था के वोह आएगी , पर इक दिन सीमा लोट आयी , वैसे hi मुस्कराते हुए , में पता नै क्यों , सीमा से नाराज़ नै हो पाया , और उसे बोल भी न पाया के में उसे प्यार करता हु , पर सीमा ने मुज़से कहा , शयद तुम मुज़से प्यार हो गया है , मने हाँ बोल दिया , फिर हम इक हो गए , लेकिन..."

"अभ क्या हुआ पापा , आपका लेकिन , लेकिन , मेरी दिल की धड़कने बढ़ा रहा है..." फर्जी बेहद नाम आँखों से बोली ,

"में 7 सालो तक घर छोड़ कर चला गया , तब मुझे जूही ने सम्बल लिया , जूही ने मुझे इक नयी जिंदगी दी , और जब में वापिस आया , तब मुझे सीमा फिर से मिल गई , धीरे धीरे मने अपना पूरा परिवार इक किया , कई दुश्मनो से लड़ा , दर्द सही , पर मेरा पूरा परिवार अज्ज मेरे पास है..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"लेकिन रवि , तुम 7 साल कहा गए , क्यों गए..." लारा बेहद नाम आँखों से बोली ,

"और जूही कोण थी रवि..." एलिज़ा भी रट हुए बोली ,

"हाँ , बताओ न रवि , कहा गए तुम..." लारा भी नाम आँखों से बोली ,

"वोह इक दिन में चाचा जी के घर था , तब सीमा ने फ़ोन किया था , के वोह मेरे साथ कोई रिश्ता नै रखेगी , में टूट गया , तब कोमल ने मुझे प्यार दिया , मुझे सहारा दिया , फिर से जीना सिखाया , पर इक दिन माँ ने हमें किश करते देख लिया , तब माँ ने मुझे घर से निकल दिया , फिर में जूही के शहर ा गया , में टूट गया था , जिंदगी जीने की कोई तमना न थी , में , में , भिकारी बन गया था , कई महीनो तक सड़को पर बैठा रहता , वही सो जाता , क्यों की मेरे पास प्यार नै था (रट हुए) , मेरे अंदर दिल नै था , में सदमे में जा चूका था , में सब कुछ भूल चूका था , तब मेरी जिंदगी में जूही आयी , जूही को मने कुछ गुंडों से बचाया , तब जूही ने मुझे सहारा दिया , मुझे फिर से इंसान बना दिया , लेकिन जूही की प्यारी दोस्त निशा को , उन्ही गुंडों ने मर दिया , जूही भी अंदर से टूट गई , सरे सबूत मेरे खिलाफ थे , मुझे 4 साल की कैद हुई , क्यों की में तब तक पागल हो चूका था , जब मुझे पता चला था के जूही मर चुकी और उसे मने मारा है , 4 साल इक बंद खोथरी में , अँधेरे भरे कमरे में , मने इक पागल की तरह गुजरे , मुझे बहुत टार्चर किया उन जेल वालो ने , अंत मेरी हालत सुधर गई , में जेल से बहार आया , तब जूही का घर खली था , में वही शहर के पास इक छोटे से कसबे में रहने लगा..." रवि अपने दर्दनाक पलु को यद् कर बेहद रट हुए बोलै ,

कोई कुछ नै बोल रहा था , सब खामोश थे , पर सब सीमा को गलत मन रहे थे , आखिर सीमा ने वोह कॉल क्यों किया , अगर वोह कॉल किया , तोह फिर दोनों इक कैसे हुए , सबकी आँखें नाम थी , लेकिन कुछ बेबी की तरफ देख रहे थे , क्यों की उनको पता था , बेबी hi जूही है , पर कुछ लोग जूही को नै जानते थे...

"पर सीमा देदी अपने क्यों बोलै के अप्प रवि से प्यार नै करती..." काट बेइंतहा रट हुए बोली ,

"हाँ देदी क्यों , आखिर क्यों..." बेबी भी चीख कर बोली ,

"देदी आपकी गलती ने रवि की जिंदगी के 7 साल बर्बाद कर दिए..." लारा भी चीख कर रट हुए बोली ,

सीमा उनकी बतिअन सुन रोने लगी , रवि उठ कर सीमा के पास गया , और उसे बहु में भर शांत करने लगा ,

"खामोश (बेहद गुस्से में) , मेरी सीमा को कोई कुछ नै बोलेगा..." रवि की आँखें गुस्से में लाल हो गई , इतना ब्यांक गुस्सा उसे पहले कभी नै आया था , सब खामोश हो गई , कोई साँस तक नै ले रहा था ुचि आवाज़ में , फर्जी भी दर कर रट हुए , बेबी के सीने से चिपक गई , और अपनी आँखें बंद कर ली , लेकिन उसने रवि की लाल आँखें नै देखि थी ,

"मेरी जिंदगी के 7 साल , अरे में बुज़दिल था , जो भाग गया , अपने प्यार को न समाज कर , मेरी सीमा ने इक मज़ाक किया था , में सच मन गया , और 7 दिनों बाद hi घर छोड़ दिया , यह बेचारी 7 साल अकेले दुनिआ से लड़ती रही , maa-baap के तनहे सुनती रही , यहाँ तक की अपनी डोलत , अपना परिवार , अपना सब कुछ छोड़ कर , इक गंदे बेकार से फ्लैट में रहते , मेरा इंतज़ार करती रही , मन की मुझे दर्द मिला , पर जूही ने मुझे सम्बल लिया , लेकिन मेरी सीमा , अकेली लड़ती रही , उसने दुनिआ की वहशी नज़रिओं का अकेले सामने किया , क्यों , आखिर क्यों , मेरी सीमा इतना दर्द सेहती रही , क्यों की मने अपने प्यार पर विश्वास नै किया , मेरी सीमा बहुत भोली है , यह किसी का दिल नै दुख सकती , मेरी बहिन रमा को बच्चू की तरह प्यार किया , उसकी माँ बन कर , तुम , तुम सब ने देखा था , रमा मेरी बहिन , इसको अपनी माँ मानती है , अगर अज्ज तुम सब मेरे पास हो , तोह यह सीमा का नरम दिल है , क्यों की यह कुछ नै मांगती , जो में ऐसे कहता हु , यह वही करती है , में मर्द था , लेकिन मेरी सीमा अकेले दुनिआ का सामना करती रही दिन रत , कोण लड़की करती है , इसने अपनी डोलत ठुकरा दी , मुझ जैसे भिकारी के साथ रहने के लिए , यह प्यार नै बलिदान है , और यह बलिदान , यहाँ बैठे हर इंसान ने दिया है , हम सब इक दूसरे से प्यार करते हैं , क्यों की हमने अपनी जिंदगी में अनंत दुःख सही हैं , मेरी सीमा को कोई कुछ नै बोलेगा , क्यों की यह मेरी है..." रवि , सीमा को अपनी बहु में भरता बेहद रट हुए बोलै , उसके रोने से आसमान गरज उठा , बिजली कड़कने लगी , तेज़ हवाएं चलने लगी ,

सब शांत थे , कोई कुछ नै बोल रहा था , अभ क्या बोले कोई , किसी के पास शब्द नै थे , कुछ बोलने को , क्यों की सच्चा प्यार , बेहद दर्दनाक होता है , यह बेरहम कातिल होता है , नादाँ दिलो का , इस रस्ते पर चलना आसान नै होता , क्यों की आग के डरिये को पर करना पढता है , तब जाकर मोह्हबत मिलती है , प्यार मिलता है ,

"aaahhhhhhhhhhhhhh...." रवि इतनी जोर से आसमान की तरफ देख चखा , के पूरा जंगल कम्प गया , आसमान फटने को हो गया , तेज़ चमकती बिजिलयां जमीन पर गिरने लगी ,

सभी वह से उठ कर , घर के अंदर चले गए , वोह सब सीमा को अपने साथ ले गए , रेहान और सूजी अपने घर चले गए , लेकिन रवि ने इंकार कर दिया , उसे अपना गुस्सा शांत करना था ,

"रविइइइ..." इक सांसे में hi उपजी आवाज़ रवि के कनु में पढ़ी ,

"रेखा डीडीई..." रवि इक डैम से खड़ा होकर , कबीले का पल पर , जंगल के सामने खड़ा हो गया , तभी उसके सामने रेखा ा गई , बेहद ब्यांक , बेहद खौफनाक....



words to one and only by adele

रेखा जमीन से उड़ते हुए रवि के बेहद करीब ा गई , उसने रवि के चेहरे के पास , अपना चेहरा कर , इक जोरदार चीख मरी , लेकिन रवि को इस बात का कोई असर न हुआ ,



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उसने रवि को अपनी बहु में भर लिया , और उसके होंठो को चुम लिया , रेखा बेहद ब्यांक चेहरे के साथ मुस्कराने लगी , और थोड़ा पीछे हो गई...

"देदी..." अभी रवि इतना hi बोलै tha.."chattaakkk..." इक जोरदार थपड उसके चेहरे पर ाँ पढ़ा ,

"देदी , जान से मर दो , पर प्लस , इक बार मुज़से बात तोह करो , प्लस , में तुम्हारे अग्गे ज़ुकता हु देदी..." रवि बेहद नाम आँखों से अपनी बड़ी बहिन के अग्गे झुक गया ,

"जननी है गलती तुम तुम्हारी , चलो साथ मेरे..." रेखा इतना बोल मुस्करायी और रवि को साथ लेकर वह से गयाब हो गई...

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-91

अभ अग्गे...

इक अँधेरी जगह , जंगल के बेचू बेच , इक वेरियन , सुनसान जगह , यहाँ चारो तरफ अँधेरा था , वही उस अँधेरे के बेच रवि खड़ा हुआ था , और उसके सामने बेहद ब्यांक , खौफनाक , उसकी बड़ी बहिन रेखा कड़ी थी ,

रवि की आँखें नाम थी , वोह जवाब चाहता था , अपनी बहिन से , क्यों , आखिर क्यों , वोह ऐसे रूप में कैसे ा गई , जिसे देख , कोई भी दर से अपनी सांसे रोक ले ,

रवि अग्गे बढ़कर अपनी बहिन के पास ा गया , और उसके चेहरे पर हाथ फिरा , उसे महसूस करने लगा , के वोह कही सच में तोह नै मर गई ,

"मर चुकी हु में , क्यों देख रहा तू छू कर मुझे..." रेखा बेहद ब्यांक आवाज़ में बोली ,

"नै देदी , बोल दो यह झूठ है , प्लस , अप्प नै मर सकती , नई , अप्प मेरी हो , सिर्फ मेरी , बोल दो यह झूठ है , देदी..." रवि घुटनो के बल बेथ बेइंतहा रोटा हुआ बोलै ,

"रावी , तू प्यार मेरा , मेरी जिंदगी तू , तुज़से दूर हुई , तोह मर गई में , यह रूप मेरा , ब्यांक है बहुत , दूर रह मुज़से , और छोड़ दे कोमल का साथ , वार्ना सब मर जाओगे तुम..." रेखा पलट कर चलते हुए बोली , उसका सफेद जिस्म बेहद ब्यांक था , बोलने से होंठो और मोह से खून बह रहा था ,

"नई देदी , में , में आपका भाई , आपको फिर से जिन्दा करुगा , देदी में डेविल हु , में आपकी आत्मा को कही नै जाने दूंगा , देदी , में आपको जिन्दा करुगा..." रवि , रेखा के कंडे पर हाथ रख रट हुए बोलै ,

"मर चुकी में , जल गया जिस्म मेरा , कुछ न बचा , भूल जा मुझे , समाज मुझे अपना दुश्मन , मरना पढ़े अगर , तोह मर देना मुझे..." रेखा , रवि के चेहरे के करीब अपना चेहरा करते हुए बोली ,

"नई , नई , कभी नई , आपको मरना , में यह कभी नै करुगा , चाहे मेरी जान लेलो अप्प , अप्प मुज़से बड़ी हो , मेरी बहिन हो अप्प , मेरी बड़ी बहिन , डीडीई , प्लस , पहले जैसी बन जाऊ , मैं , मैं वादा करता हु , कभी , कभी आपसे दूर नै जाउगा , आपका ख्याल रखुगा , बोलू देदी , मन जाओ प्लस..." रवि , अपनी बहिन रेखा के ब्यांक गले सादे चेहरे को बेइंतहा चूमता हुआ बोलै ,

"तू देगा रुला मुझे , प्यार hi था इतना , तोह क्यों गया छोड़ कर मुझे , में तेरी थी , तू क्यों गया दूर मुज़से , छोड़ दिया घर तूने , बिना सोचे मेरे बारे , इक बार तोह सोच लेता , में कैसे जयगी , तेरे बिना , अपने बचे का ख्याल तोह करता तू..." रेखा बेहद नाम आँखों से बोली , उसकी आँखों से असनु की जगह खून बह रहा था ,

"kk...kya ..bb..bacha..." रवि इक डैम से चौंक कर बोलै , रवि खामोश हो गया , उसकी जुबान पर टाला लग गया , होंठ सुख गए , बर्फ जैसे ठन्डे पढ़ गए ,

"हऊणन , मने तुज़से जब प्यार किया , पेट से हो गई थी में , पर बताया न तुझे मने , शहर चला गया तू , तब , माँ ने मारा मुझे बहुत , उनको करनी थी शादी मेरी , बेचा होने से पहले , पर में न मणि , माँ मुझे रोज़ मरती , क्यों की वोह बचा नै पाप था , नज़र उनकी में , पर जानती थी में , यह मेरा प्यार है , भाई का प्यार , फिर जब तुम , छोड़ गए घर हमारा , तब कुछ महीनो बाद , घर छोड़ दिया मने भी , इक चर्च में चली गई में , (रेखा हरिजन थी , अभ वोह उलटी सीधी बतिअन नै कर रही थी , बल्कि साफ बोल रही थी , पता नै क्यों..) वह इक पादरी नेक था , उसने मुझे असर दिया , अपनी बची की तरह , वह की पवितर औरशन ने मुझे सम्बल लिया , घर छोड़ने के कुछ महीनो बाद , इक प्यारी सी बची ने जनम लिया , में खुद को धक् कर रखती थी , परदे में , किसी को न चेहरा दिखती अपना में..." रेखा बेहद रट हुए बोल रही थी , साथ में वोह कमज़ोर भी होती जा रही थी ,

रवि , रेखा की दर्द भरी बतिअन सुन , वोह पल , वोह लम्हे यद् कर रहा था , जब उसे कोई भी रेखा के बारे में , कुछ नै बताता था , यहाँ तक की , उसके हर अपने ने , उसे झूठ बोलै , के रेखा की शादी हो गई है , इतना बड़ा झूठ , उससे सच छुपाया गया , लेकिन अभी वोह रेखा देदी की बतिअन सुन रहा था ,

"देदी , इतना कुछ सहा अपने , क्यों नै बताया , के अप्प , उफ्फ्फ , क्यों , आपको विश्वास नै था मुझ पर , देदी , में आपका हाथ थम लेता , आपको खुश रखता , अपनी बची को खुश रखता , मेरी बची , देदी , मेरी बेटी कहा है , प्लस बता दो , प्लस..." रवि , रेखा के सामने रट हुए गिड़गिड़ा कर बोलै ,

"वोह तोह तुम्हारे पास है ..." रेखा थोड़ा मुस्करा कर बोली ,

"नै है , वोह मेरे पास नै है , इक मिंट , क्या , ओह्ह्ह , फर्जी , वोह , वोह , मेरी बेटी है , मेरी खुद की बेटी..." रवि बेहद नाम आँखों से चौंकते हुए बोलै ,

"हाँ , फर्जी मेरी बेटी है , उसे मने चर्च में जनम दिया था..." रेखा बेहद रट हुए बोली ,

"अह्ह्ह्हह्हह (चीख कर रट हुए) , अपने बताया क्यों नै , के में hi उसका पापा हु , क्यों..." रवि रट हुए गुस्से में चीख कर बोलै ,

"तुम पास थे , तुम , तुम , कहे थे उस वख्त , तुम्हारे जाने के 4 महीनो बाद , मने घर छोड़ दिया , फिर इंतज़ार किया तुम्हारा , घर के as-pas चर्च की औरशन को बेह्जति रही , तुम्हारा पूछने के लिए , 1 साल , 2 साल , 4 साल , तुम वापिस नै ए , मेरे भाई , तुम नै थे , और में , में , अपनी बची को क्या बताती , के वोह , के वोह , इक नाजायज औलाद है , जो बिना शादी के , मेरे , मेरे भाई ने पैदा की , मने उसे झूठ बोलै , के उसके पापा मर गए हैं , तुम , तुम , जानते हो , यह बात बोलने में , मुझे कितना दर्द हुआ , कितना दुःख हुआ , मेरी आत्मा तक मर गई , मेरा प्यार मर गया , मने , मने , सही किया मेरे भाई , और कोई रास्ता नै था , मेरी बची , बार बार पूछती , उसके पापा कोण हैं , कहा है , क्या करते हैं , में , में , उसके सवालों का जवाब न दे पति , आखिर अपने प्यार को मर कर , मने उसे बताया , के उसके पापा मर चुके हैं , जानते हो , यह बात सुन कर , वोह खामोश हो गई , उसके होंठो से ख़ुशी चीन गई , वोह पत्थर सी हो गई , न किसी के साथ खेलती , न बात करती , बस अकेली बैठी रहती , वोह , वोह , पगली चर्च में बेथ कर , जीसस के अग्गे हाथ जोड़ , अपने पापा को वापिस मांगती रहती , में , में , टूट चुकी थी रवि , वोह *** साल की मासूम लड़की थी...." रेखा बिलख बिलख कर रट हुए बोली , उसके शबदो में , वोह दर्द था , जो शयद hi किसी ने सुना , या महसूस किया हो ,

रवि खामोश था , वोह क्या बोले , उसने गलती की थी , पर गलती दोनों की थी , रेखा ने उसे बताया नै , के वोह माँ बनने वाली है , और रवि इस बात से अनजान था ,

दर्द , इक ऐसा शब्द , जिस में बस पीड़ा होती है , लेकिन यह दर्द , वोह दर्द था , जिसमे , अहह , क्या बोलू में , कोई शब्द नै मेरे पास ,

चोट लगने पर , कुछ दिनों की पीड़ा होती है , पर यह चोट सीधी दिल पर लगी थी , न खून निकला था , न घाव बना था , न इसका कोई इलाज था , न कोई बचाव , रेखा की जिंदगी पूरी तरह बदल गई , इक बची को जनम दिया , उसे *** सालो तक पल कर बड़ा किया , उफ़ , कितने दर्द सही होंगे उसने , जब उसकी खुद की बची , उससे पूछती होगी , मुम्मा , पापा कहा हैं , यह पल पल का दर्द था , हर पल का दर्द था , यह रत दिन का दर्द था , और यह दर्द रेखा की मौत तक चला ,

"देदी , माफ़ कर दो , में , में , तुम्हारा दोषी हु , माफ़ कर दो मुझे..." रवि घुटनो के बल बेथ , अपने चेहरे पर हाथ रख फुट फुट कर रट हुए बोलै ,

"हूँ (मुस्करा कर) , माफ़ी तुम मिल चुकी है , मेरे भाई , तूने मेरी बची को , वोह ख़ुशी दी , जो में उसे ** सालो में कभी न दे पायी , में , में , उसे रोज़ देखती हु , जब वोह खेलती है , खुश रहती है , जब वोह बोलती है , इतना खुश , रावी , मने उसे इतना खुश कभी नै देखा , ाचा हुआ , में मर गई , काम से काम , मेरी बची , अज्ज खुशनुमा जिंदगी तोह गुजर रही है..." रेखा बेइंतहा रट हुए बोली ,

"में , में , आपको मरने नै दूंगा , अप्प मेरी हो , समाजी , अप्प मेरी हो , सिर्फ मेरी..." रवि , रेखा को अपनी बहु में भरता हुआ , बेइंतहा चिल्ला कर बोलै ,

"रावी , वख्त बीत गया , मेरे भाई , जो गुजर गया , वोह नै मिल सकता , हाँ , अगर मुझे खुश देखना चाहते हो , तोह , तोह , मेरी बेटी को खुश रखना , उसे दुनिआ की हर ख़ुशी देना , वादा करो..." रेखा बेहद रट हुए बोली ,

"नयी , वादा नै करुगा , देदी , आपको मेरे साथ रहना होगा , हमेशा , हम दोनों , हाँ देदी , हम दोनों , फर्जी को खुश रखेंगे , अप्प , देदी अप्प मेरी साथ रहो न , मुझे अपनी गलती सुधरने का इक मौका तोह दो , प्लस देदी..." रवि , रेखा के चेहरे को बेइंतहा चूमते हुए बोलै , उसका दर्द , कोई नै समाज सकता था ,

"रावी , मेरी आत्मा को शांति नै मिल रही , में भटक रही हु , मुझे तुमसे वादा लेना है , मुझे जाने दो , और रावी , वख्त ऐनी पर , मुझे मर देना , वादा करो रावी..." रेखा बेहद रट हुए अपना हाथ अग्गे बड़ा कर बोली ,

"आपको किसने मारा , बोलू देदी , पहले बताओ मुझे..." रवि गुस्से में चीख कर बोलै ,

"उनको मर दिया मने , पर में , पर में जानती थी , इक न इक दिन हम मिलेंगे , और तुम मुज़से यह पूछोगे , इसलिए मने 4 लोग को जिन्दा छोड़ दिया , तेन की तू भी , अपना गुस्सा उन हरामजादो पर निकल सके..." रेखा , प्यार से रवि का चेहरा सेहला कर बोली ,

"कोण , कोण थे वोह..." रवि बेइंतहा गुस्से में चीख कर बोलै , उसका जिस्म लाल होकर जलने लगा , आँखें लाल होकर , खून बरसाने लगी ,

"रेहमान उल्ला , असलम खान , ठाकुर जी देव परताप , और दसप शमशेर , ें चारो ने , शहर में दंगे करवाए , हज़ारो बेगुनाह लोग को मर दिया , हम जैसी नन्स को भी नै छोड़ा , सबको तड़फा तड़फा कर मरवाया ें लोग ने , मने , मने अपनी बची को चर्च में छुपा दिया , तेन की वोह जिन्दा रह सके , पर , पर , मरने के बाद भी , मुझे शांति नै मिली , क्यों की , मेरी बची भुकी थी , वोह सड़को पर रट हुए चल रही थी , कोई उसे खाना नै दे रहा था , मेरी उस पर हमेशा नज़र रहती , अचानक इक दिन , कुछ लोग उसे उठा कर ले गए , में आत्मा थी , में किसी को छू नै सकती थी , में तब मज़बूर थी , में बहुत दर्द में थी , तभी मने देखा , तुम , तुमने उन सबको मरकर , मेरी बेटी की जान बचा ली , फिर तुम्हारे साथ जो लड़की थी , उसने मेरी बेटी को , अपना लिया , में बहुत खुश हुई..." रेखा बेहद रट हुए दर्द भरे शबदो में बोली ,

"वुफफ्फ्फ्फ़ , मेरे सामने क्यों नै आयी अप्प..." रवि बेहद भरी आवाज़ में , बेहद गुस्से में बोलै ,

"क्यों की , में नै चाहती थी , तुम कभी यह एहसास हो , के फर्जी तुम्हारी अपनी बची है , वोह सही वख्त नै था , तुम उस वख्त फर्जी को संबलना था , उसे प्यार देना था , अज्ज मेरी बची को , तुमने पूरी तरह अप्पन लिया है , इस लिए तुम बता रही हु , में जाती हु अभ , मेरी बेटी का ख्याल रखना , इस पल के बाद , हम दुश्मन हैं , न तुम मेरे भाई हो , न में तुम्हारी बहिन , क्यों की मुझे यह रूप , जोकर ने दिया था , तेन की में चीज़ो को छू सकू , और पहले में आत्मा थी , में किसी को छू नै सकती थी , मुझे जोकर का कारज उतरना है , हम दोनों मिलेंगे , लेकिन तब हम , इक दूसरे को मरने के लिए मिलेंगे..." रेखा रट हुए मुस्करा कर बोली , और फिर वह से गयाब हो गई...

"याःहीआननननन (तेज़ घूरते हुए) , वुफफ्फफ्फ्फ़ , मी आपको जिन्दा करुगा , आपका बदला लूंगा , में महाशक्ति को पाकर , आपको जिन्दा करुगा..." रवि बेहद गुस्से में चिल्ला कर बोलै , उसके बोलने से ऐसा लग रहा था , जैसे 4 लोग इक साथ भरी आवाज़ में बोल रहे हो ,

आसमान चीख रहा था , तूफान फिर से उमड़ आया था , क्यों की डेविल शिकार पर निकल चूका था , उसका गुस्सा , इतना अधिक था , के वोह उड़ते हुए , इक आग से जलता हुआ , दानव परतीत हो रहा था ,

रवि पल भर में hi रेहमान उल्ला की बिल्डिंग में पहुँच गया , उसने देखा बहार दो गार्ड्स खड़े थे , हाथो में गन लिए , रवि अगर इतने लोग को मर देता , तोह पूरा शहर दर जाता , रवि ने अपना लाल जिस्म छिपा लिया , पर गुस्सा और नफरत वही था , जो उसकी लाल आँखों से जलक रहा था ,

रवि ने अपना पसंद का हथयार लिया अपनी शक्ति से , जो थी इक लाल चमकती , बेहद तेज़धार खुल्हाडी , रवि उन दोनों की तरफ बढ़ने लगा ,

"ेहः कोण है तू , रुक वही... " इक गार्ड अपनी गन रवि के सीने पर ताँता हुआ बोलै ,

"उसके हाथ में क्या है..." दूसरा गार्ड इक बड़ी सी खुल्हाडी देख दर कर बोलै ,

"ेहः रुक..." वोह अभी इतना hi बोलै था , रवि ने जोरदार वॉर कर , उसकी गर्दन धड़ से अलग कर , उसका खून से लथपथ कटा सार , फुटबॉल की तरह घूमता हुआ , दूर रोड पर जा गिरा ,

"ेहठ नयी..." दूसरा गार्ड अभी इतना hi बोलै था , रवि ने उसके सार के बेचू बेच खुल्हाडी का जोरदार वॉर किया , खुल्हाडी ने उसके शरीर के , सार से लेकर निचे तक , दो टुकड़े कर दिए ,

"वुफफ्फ्फ़ (तेज़ सांसे भरते हुए) ..." रवि अग्गे बड़ा और तेज़ सांसे भरते घूरते हुए , इक बड़े से दरवाजे को खुल्हाडी के तेज़ वॉर से फाड् दिया , वोह लकड़ी का दरवाजा दो वॉर भी न सेह पाया , अभ रवि बिल्डिंग के अंदर घुस चूका था ,

"तमासस्स वोफ्फफ्फ्फ़.." रवि ने तेज़ आवाज़ में चीखते हुए ख़ुशी को पुकारा , ख़ुशी उसी पल उसके सामने ा गई ,

"वूफफ आठ वुफफ्फ कितने लोग है यहाँ..." रवि बेहद तेज़ लाल चमकती आँखों से बोलै ,

"21 लोग..." तामस अपने दोनों हाथो में खंजर पकड़ते हुए बोली ,

"लास्ट फ्लैट छोड़ कर , बाकि सब को मर दू , जावूओ..." रवि डेविल रूम में चिल्ला कर बोलै ,

"अभ आएगा मज़ा बेवकूफ प्यारे..." ख़ुशी अपने हाथ में पकड़े कंजर पर अपनी जीभ फिरा कर बोली ,

उन दोनों की आवाज़ सुन , पोरे के पोरे 21 लोग वह ा चुके थे , उनके हाथो में हथयार थे ,

"अरे देख क्या रहे , गोली मारो..." रेहमान उल्ला का खास आदमी रक्का चीला कर बोलै ,

लेकिन वोह सब थार थार कम्पनी लगे , जब उनके हाथो में पकड़ी गन्स , पिगल कर , उनके हाथो से पानी की तरह बह गई ,

रवि और ख़ुशी उनकी तरफ बढ़ने लगे , दो लोग रवि की तरफ ए , रवि ने खुल्हाडी के जोरदार वॉर इक आदमी के पेट पर किया , सब वही रुक गए , क्यों की उस आदमी के जिस्म के दो टुकड़े हो गए , और रवि का पूरा चेहरा उसके खून से भर गया ,

"अहःअहः , भागूओ , अपनी मौत से..." रवि अपने होंठो पर टपकते उस आदमी के खून की बूंदु को जीभ से छत्ते हुए डेविल रूप में हस्ता हुआ बोलै ,

"सुमंन्त्र...." रवि डेविल रूप में हस्ता हुआ चिल्ला कर बोलै , तोह रमा सेडीईओं पर कड़ी हो गई , उसके बालो ने इक देवर बना दी , तेन के यह सब सेडीईओं से ऊपर न जा पाए ,

"कविया...." रवि इक बार बेइंतहा हस्ते हुए चिलाय , तोह बेबी भी तलवार हाथ में लिए वह पहुँच गई , उसके साथ लारा भी थी ,

"ाहः , यह ही डेविल की आर्मी ाहः , मर दो सबको , इनके जिस्मो की बोटी बोटी कर दो , इतने टुकड़े करो के सुबह पहचान भी न हो पाए , ाहः...." रवि अपने ब्यांक शेतीआणि रूप में एते हुए , बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , उसका रूप सच में दिल दहला देने वाला था ,

फिर धीरे धीरे वोह 20 लोग फ्लैट के निचले हॉल में ा गए , सभी बेहद डरे हुए थे ,

"सुमंत्र..." रवि , रमा की आँखों में आँखें दाल बोलै , तोह रमा के बालो ने पोरे हॉल को चारो तरफ से बंद कर दिया ,

फिर क्या था , सब सुरु हो गए , ख़ुशी अपने चाकू से सबके जिस्मो को फाड़ती जा रही थी , बेबी और लारा , पगलू की तरह अपनी तलवार चलाये जा रही थी , किसी का हाथ काट देती , किसी की तंग , और रवि निचे घ्याल तड़फ रहे लोग को , अपनी खुल्हाडी से , छोटे छोटे टुकड़ू में कट्टा जा रहा था ,

कोई 5 मिंट बाद , बिल्डिंग के हॉल में सबकी लशु के टुकड़े टुकड़े पढ़े हुए थे , खून पानी की तरह बेहटा हुआ , फ्लैट से बहार जा रहा था , ख़ुशी , बेबी , लारा , उन सबके खून से नहायी हुई थी , वोह तीनो बेहद ब्यांक लग रही थी ,

"तमासस्स , लाऊ उसे मेरी नज़रिओं के सामने..." रवि अपने असली रूप में अत हुआ गुस्से में चीला कर बोलै ,

ख़ुशी वह से गयाब होकर , जब वापिस लोट कर आयी , तब उसके साथ रेहमान उल्ला था , जिसकी टंगे कम्प रही थी , वोह अपने दोनों हाथ जोड़ रहा था , डेविल की तरफ देख कर....

"हैं , यह परिदा तोह थार थार कम्प रहे , साला फत्तू..." ख़ुशी अपने होंठो पर लगा खून जीभ से फिरा कर छत्ते हुए बोली ,

"वुफफ्फ , ऐसे दर है अपनी मौत का , जो ऐसे अभी मिलेगी..." रवि डेविल रूप में घूरते हुए बोलै ,

"हम्म्म , बेवकूफ डेविल , इतना क्यों बोल रहे हो , में अभी इसका सीने चीयर कर , इसका फड़फड़ाता हुआ दिल बहार निकलोगी , उम्म्म , अज्ज तोह मज़े ा गया , मुझे इसका दिल निकलना है , इसका दिल , अह्ह्ह , लाजवाब होगा , तुम अपनी जुबान बंद करो , और मुझे ऐसे मरने दो..." ख़ुशी , रवि के सामने आकर , बेहद गुस्से में बोली ,

"खुशी..." डेविल बेहद गुस्से में बोलै ,

"अह्ह्ह , बढ़ में जाओ कमीने..." ख़ुशी अपने हाथ फैला गुस्से में बोली ,

वही दूसरी तरफ....

"उफ्फ्फ मेरे रवि ने कितना दर्द झेला है , में उसे अभ कभी दर्द में नै रहने दूंगी , में , में हमेशा उसका साथ दूंगी , वोह नेक इंसान है ..." यह काट थी , जो अपने रूम में बीएड पर लेती , अपने मन के भेटेर यह सब सोच रही थी ,

"पगला , खुद को डेविल बोलता है , इतना नेक इंसान है वोह , पर क्यों , तू भी न काट , पागल हो गई है , रवि के प्यार में , कुछ और सोच , बेबी कहा है , लेकिन रवि है कहा , उफ़ , हमने सीमा देदी पर कितना शक किया , बहुत मासूम है वोह , में उनसे माफ़ी मांग लुंगी सुबह , मुझे रवि की यद् ा रही है , इस वख्त उसे मिलने जाऊ , और घर में इतनी शांति क्यों है , सब कहा गए , में देखती हु बहार जाकर..." काट मन hi मन यह बतिअन सोच रही थी , फिर वोह उठी और रूम से बहार निकल गई , लेकिन बहार कोई नै था , बस घर के हॉल में , सीमा , और फर्जी थी , फर्जी , सीमा की गॉड में सो रही थी , और सीमा उसका सार थपथपा रही थी ,

फिर काट सेड्यां चढ़ रवि के रूम में ा गई , पर वोह कोमल को देख हरिजन सा रह गई....

तो बे कुनिटेड....
 


अपडेट-92

अभ अग्गे...

काट , कोमल को देख हरिजन रह गई , वोह किसी से बतिअन कर रही थी , और सामने जंगल की तरफ देख रही थी , काट को थोड़ा अजीब लगा , वोह कोमल के पास पहुँच गई , और उसके कंडे पर हाथ रख बोली ,

"कोमल..." काट ने बेहद मसोमीयत से बोलै ,

"ओह्ह काट , तुम यहाँ कब आयी याल..." कोमल मुस्करा कर बच्चू की तरह बोली ,

"तुम्हारी आवाज़ को क्या हुआ , ओह्ह्ह , ाचा यह बताओ , तुम किस से बतिअन कर रही हो..." काट थोड़ा चौंकते हुए बोली ,

"में न , में न , में अपने बच्चू से बतिअन कर रही थी , यह देखो मेले बचे..." कोमल बेहद नादानी और मसोमीयत से जंगल की तरफ अपनी ऊँगली करते हुए बोली ,

"यह , यह तोह जंगल है यार..." काट अभ थोड़ा परेशान होकर बोली ,

"नै याल , यह मेले बचे हैं , में न , में इनकी माँ हु , यह सब मेले बचे , यह सो लहे , तुम भी थो (सो) जाओ..." कोमल मुस्कराते हुए बेहद ख़ुशी में बोली ,

"ओह्ह , रवि कहा है कोमल..." काट अभ हद से जायदा डरते हुए और परेशान होते हुए बोली , उसको कोमल का सेहभाव बहुत अजीब लग रहा था ,

"पता नै , कीधेल गए भइआ , मुझे तोह बता कल (कर) नै डाई (गए) , तुम भी थो जाओ तात..." कोमल , काट के चेहरे पर हाथ फिरा कर बोली ,

काट वह से पलट कर रूम से बहार निकल गई , और कोमल फिर से जंगल की तरफ देखते हुए , अपने बच्चू के साथ खेलने लग गई..

वही दूसरी तरफ...

"वूफफ , रेहमान उल्ला , तुम्हारा अंत ा गया , डेविल के हाथो..." रवि बेहद भरी आवाज़ में गरज कर बोलै ,

"नै , माफ़ कर दो अपुन को , अपुन से गलती हो गया , अपुन सब बुरे काम छोड़ देगा..." रेहमान उल्ला , रवि के पैरो में गिरकर माफ़ी मांगता हुआ बोलै ,

"ाहः (डेविल लौघ्स) , तामस , कविया , देखो ऐसे , पूरी जिंदगी बेगुनाह लोग को मरता रहा , और जब अपनी मौत आयी , तोह भेख मांग रहा..." रवि डेविल रूप में बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

"फत्तू साला , डेविल इसका लुंड काट दू , या में इसका दिल निकल लू , या फिर इसकी दोनों आँखें..." ख़ुशी अपने खंजर पर लगे खून को जीभ फिरा चाट कर बोली ,

"सुमों , इसके हाथ , पेअर जकड लो , यह हिल भी न पाए , तामस , इसकी बोटी बोटी , इसके जिस्म से निकल दो..." रवि वही इक सोफे पर बैठता हुआ बोलै ,

रमा के बालो ने रेहमान उल्ला के हाथो और परिओ को जकड कर बंद लिया , (जैसे गबर ने ठाकुर को बाँदा था :डी )

बेबी और लारा भी रवि की इक इक साइड बेथ गई , और रमा भी सोफे पर जाकर बेथ गई ,

"हम्म , सेक्सी बदन है तुम्हारा , उफ्फ्फ कितना कैसा हुआ , अह्ह्ह , डेविल कहा से सुरु करू , मुझे तोह समाज नै ा रहा , पहले इसकी आँखें निकालो या , इसका दिल , न न , दिल निकला , तोह यह मर जायेगा..." ख़ुशी , रेहमान उल्ला के जिस्म को सूंघते हुए , रवि की तरफ देख मुस्करा कर बोली ,

"जो तुम्हारा दिल करे , हमें बस इसकी चखे सुन्नी है..." रवि अभ डेविल रूप से बहार आकर नार्मल होता हुआ बोलै ,

"अह्ह्ह बेवकूफ , तुमने सही बोलै , में सुरु करती हु , लाइव डेथ मैच..." ख़ुशी मुस्कराते हुए रवि को आँख मर कर बोली ,

फिर ख़ुशी ने अपने कंजर से रेहमान उल्ला का इक कण काट दिया , और उसके कण को अपने हाथ में लेकर , उस पर लगा खून चाटने लगी ,

"तमस , हमें भी पिलाओ इसका खून , हम भी भूके है मेरी जान..." रवि अपने होंठो पर जीभ फिरा बोलै ,

"अह्हह्ह्ह्ह छोड़ दो मुझे , जाने दो प्लस..." रेहमान उल्ला दर्द से चीखता हुआ रट हुए बोलै ,

"शहहह , आवाज़ मत करो , मेरी जान..." ख़ुशी अपने होंठो पर ऊँगली रखते हुए बोली ,

फिर ख़ुशी ने रेहमान उल्ला का दूसरा कण भी काट दिया , और उसके कण को रवि की तरफ फेंक दिया , रवि उस कण को हाथो में कैच कर , उस पर लगा खून चाटने लगा ,

"वह , लाजवाब , इक डैम मीठा नमकीन..." रवि कटे हुए कण को बेहद शिदत से छत्ता हुआ बोलै ,

"अह्हह्ह्ह्ह माआ , अह्हह्ह्ह्ह , सस्शह्ह्ह ..." रेहमान उल्ला गाला फाड् कर चीख पढ़ा , जब ख़ुशी ने उसका लुंड काट दिया ,

"ाहः , तामस , तुम नै सुधरने वाली .." रवि बेहद हस्ता हुआ बोलै , उसके साथ hi बेबी और लारा भी हसने लगी ,

"रावी , यह साला बहुत चीला रहा , इसका मोह बंद करती हु पहले..." ख़ुशी ने इतना बोलै , रेहमान उल्ला के मोह में , उसका hi कटा लुंड जड़ तक घुसा दिया , अभ रेहमान उल्ला से चखा भी नै जा रहा था ,

फिर ख़ुशी बेहद शिदत से , उसकी उंगलिया काटने लगी , उँगलियाँ काटने के बाद , उसने रेहमान उल्ला की दोनों आँखें खंजर खोप कर बहार निकल दी , रेहमान उल्ला दर्द से छटपटाते हुए बेहोश हो गया ,

फिर ख़ुशी , रेहमान उल्ला की इक आँख को मोह में दाल चूसने लगी ,

"तामस अकेले अकेले..." रवि बुरा सा मोह बना कर बोलै ,

"कमीना , यह लो..." ख़ुशी ने दूसरी आँख रवि की तरफ फेंक दी , रवि भी उसकी आँख को मोह में दाल चूसने लगा , जैसे कोई मीठा लोल्लिपोप हो ,

फिर ख़ुशी ने रेहमान उल्ला की शर्ट फाड् कर , उसके सीने को चीरना सुरु कर दिया , उफ़ रेहमान उल्ला का सीने चीरते hi , उसका खून पानी की तरह बहने लगा ,

ख़ुशी ने गले से लेकर पेट तक , उसका मास्स दो हिस्सों में काट दिया , और फिर अंदर हाथ दाल , उसके सरे कीमती अंग बहार निकलने लगी , आखिर वोह उसे मिल hi गया , जो ख़ुशी चाहती थी , वोह था रेहमान उल्ला का फड़फड़ाता हुआ दिल ,

"अह्ह्ह्ह , मिल गया , मेरा खाना , हहै , उम् टेस्टी , उम् , सुररपपप सुररपपप..." ख़ुशी उसके दिल से बहते खून को पगलू की तरह जीभ से चाट चाट कर पीने लगी ,

"तमासस्स , मुझे भी दो..." रवि , रेहमान उल्ला की आँख , अपने मोह से निकल दूर फेंकता हुआ बोलै ,

फिर ख़ुशी , रवि के साथ आकर बेथ गई , दोनों रेहमान उल्ला के ताज़ा ताज़ा दिल , को बेहद शिदत से चाटने लगे ,

"अह्ह्ह इसका मास्स कितना लाजवाब है , उम् मज़ा ा गया..." रवि मास्स की बोटियाँ अपने दांतो से खींच खींच कर खता हुआ बोलै ,

"तुम तोह बोलती थी बेवकूफ , के शिकार करे , तुम मानते कहा हो मेरी..." ख़ुशी भी अपने डेमों रूप में दिल के मास्स को चबा चबा कर कहते हुए बोली ,

"अभ तुम भूका नै मरने दूंगा , मेरी जान , अभ से बुरे लोग को काट काट कर खायेगे , ाहः..." रवि लाल चमकती आँखों से बेइंतहा हस्ता हुआ बोलै , और ख़ुशी भी उसके साथ हसने लगी , दोनों के दांतो में मास्स फसा हुआ था , होंठ और चेहरे खून से रेंज हुए थे , वोह इतने ब्यांक थे , के शबदो में बयान नै हो सकता ,

कुछ वख्त बाद सब बिल्डिंग से बहार ा गए , रवि ने बेबी को कुछ इशारा किया , बेबी ने पालक झपकते hi , पूरी बिल्डिंग बम्ब धमाके की तरह उड़ा दी , सब जलती और गिरती हुई बिल्डिंग के सामने खड़े होकर हसने लगे ,

ऊपर आसमान में बीजी चमक रही थी , तेज़ बारिश हो रही थी , तूफान जैसा माहौल था , हवा और बारिश के संगम ने , सबके जिस्मो पर लगा हुआ खून बिलकुल साफ कर दिया था ,

करीब रत के 12 बजे सब घर वापिस ा गए , रवि ने तीनो को किसी को कुछ भी बताने से मन कर दिया , खास कर , काट , फर्जी और कोमल को ,

सबने अपनी शक्ति से कपडे सूखा लिए , अभ वोह पहले की तरह नार्मल थे , घर के अंदर एते hi , सब अपने अपने रूम में चले गए ,

वही रवि सेड्यां चढ़ जब रूम में पहुंचा , तब कोमल बालकोनी में कड़ी हुई थी ,

"कोमल..." रवि ने बहुत प्यार से कोमल को पुकारा ,

"भइआ ा डाई अप्प , में अप्प ता इन्तजाल कल लहि थी..." कोमल तोतली आवाज़ में मुस्कराते हुए बोली , और भाग कर रवि की बहु में सिमट गई ,

"मेरी कोमल , माफ़ करना , मुझे देरी हो गई , चलो अभ सो जाते हैं..." रवि , कोमल के होंठो को चुम कर बोलै , तोह कोमल का चेहरा शर्म से लाल हो गया , उसने मुस्करा कर अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,

फिर दोनों बीएड पर आकर लेट गए , रवि सीधा लेता हुआ था , जब की कोमल उसकी जांगू पर अपनी तंग चढ़ाये , उसकी तरफ करवट लेकर , उसके कंडे पर सार रख कर , अपने भाई से कास कर चिपकी हुई सोने की कोससिह कर रही थी ,

"सो जाओ मेरी जान..." रवि ने कोमल का माथा चुम कर बोलै ,

"में आपकी दान हु , अपने मुड़े तिस्स तिया भइआ..." कोमल अपनी तोतली आवाज़ में शर्मा कर बोली ,

"तुम ाचा नै लगा..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"नै , मुड़े अतः लड़ा , बहुत अतः लड़ा , में आपसे प्याल कल्टी हु..." कोमल अपने भाई के गालो पर हाथ फिरा कर बोली ,

"में भी तुमसे बहुत प्यार करता हु , अभ सो जाओ मेरी जान , रत बहुत हो चुकी है..." रवि , कोमल का माथा चूमते हुए बोलै , फिर कोमल ने आँखें बंद कर ली , और बच्चू की तरह मोह में अंगूठा दाल कर , उसको चूसते हुए सो गई ,

"पगली..." रवि मन hi मन यह बोलै और मुस्करा दिया , उसे कोमल पर बेइंतहा प्यार ा रहा था...

4रथ डे ... सुबह के 6 बजे...

सीमा ने सुबह जल्दी उठ कर , सबके लिए छाए बनाई , और सबको उनके रूम में उठा कर , छाए दे आयी , फिर सीमा सेड्यां चढ़ , रवि और कोमल के रूम में गई , सीमा ने देखा , दोनों इक दूसरे को बहु में भरे , कास कर चिपके हुए सो रहे थे ,

"रावी , कोमल , उठो प्यारो , सुबह हो गई..." सीमा ने दोनों को हिलाते हुए बोलै , तोह रवि कसमसाते हुए उठने लगा , कोमल भी आँखें मसलती हुई उठ कर बेथ गई , और मोह खोल कर उबासियां लेने लगी ,

"कोमल , चलो मोह धो कर कुरली कर लो , फिर छाए पियो..." सीमा मुस्कराते हुए , पानी से भरा जग कोमल की तरफ बड़ा कर बोली , तब तक रवि भी उठ कर बेथ गया था ,

"मुझे नै टालनी तुरली , मुझे तये दो , थीम देदी.." कोमल अध् खुली आँखों में झूमते हुए बोली ,

सीमा मोह फाडे कोमल को देखती रही , और फिर रवि को देखने लगी , रवि ने उसे इशारो में hi बता दिया , के बाद में बताउगा , अभी जो कोमल कहती है , वही करो ,

फिर सीमा ने कोमल को छाए दी , और रवि उठ कर मोह धोने के लिए चला गया , तब तक सीमा , कोमल के पास बेथ गई ,

"देदी तये गलम है..." कोमल मुस्करा कर बोली , तोह सीमा भी जबरन मुस्कराने लगी , उसे कुछ समाज नै ा रहा था ,

फिर रवि भी ा गया , और छाए पीने लगा , कोमल उसकी तरफ देख मुस्कराने लगती , सीमा दोनों के hav-bhav देखती , कभी हरिजन होती तोह कभी मुस्करा देती ,

"थीम देदी , तये बहुत थी है , गलम , गलम.." कोमल मुस्कराते हुए बोली ,

"और पेनी है कोमल , में लौ और छाए..." सीमा , कोमल के गाल हाथ से सेहला कर बोली ,

"हाँ , ऑल (और) लाओ , तये , गलम , गलम.." कोमल बेहद खुश होकर बोली , तोह सीमा भी खुश होते हुए रूम से बहार चली गई , सीमा के जाते hi फर्जी रूम में ा गई ,

"पापा..." फर्जी भाग कर एते हुए , बीएड पर चढ़ , रवि की गॉड में बेथ उसका चेहरा चूमने लगी ,

"बस मेला बचा , बस कालो यार..." रवि भी फर्जी के गाल चूमता हुआ बोलै ,

"कोमल मुम्मा अप्प उठ गई..." फर्जी , मुस्कराते हुए बोली ,

"हाँ , फली , में टूथ (उठ) गई.." कोमल यह बोल छाए ख़तम कर वाशरूम में चली गई , फर्जी मोह खोले हरिजन हुई , रवि को देखने लगी ,

"बेटी , वोह , वोह..."

"कोमल मुम्मा तुतला कर क्यों बोल रही हैं.." फर्जी बेहद घम्बिर होकर बोली ,

"बीटा , उनको बीमारी हुई है..." रवि झूठ बोलता हुआ बोलै ,

"कोनसी..." फर्जी उत्सुकता वश बोली ,

"तुतलेरिया..." रवि मुस्करा कर बोली ,

"हेय्यनं , यह कब आयी मार्किट में..." फर्जी अपने बाल खुजा कर बोली ,

"बीटा , कल रत आयी , मेरा मतलब , कोमल को यह बीमारी अक्सर हो जाती है , तब वोह बच्चू की तरह बोलती है .." रवि मुस्करा कर बोलै , पर यह बोलते वख्त उसे अपने दिल में बेहद दर्द हो रहा था ,

"पापा , मुम्मा ठीक कब होगी..." फर्जी बेहद नाम आँखों से बोली ,

"अरे , मेरा बचा , रोना नै , मुम्मा बिलकुल ठीक है , हम्म , उनसे प्यार करने से वोह जल्दी पहले जैसी हो जाएगी , उनको परेशान नै करना , ok , अप्प उनका ख्याल रखना..." रवि , फर्जी का माथा चुम कर बोलै ,

"जी पापा , में कोमल मुम्मा को ख्याल रखूगी , उनको बहुत प्यार करुँगी , फिर वोह ठीक हो जाएगी..." फर्जी , ख़ुशी में चहकते हुए बोली , और अपने पापा का चेहरा चूमने लगी ,

कुछ देर बाद कोमल वाशरूम से बहार ा गई , और दोनों के साथ बेथ गई , कुछ देर बाद फर्जी , कोमल मुम्मा को बोली ,

"कोमल मुम्मा , चलो ख़ुशी मुम्मा के पास चलते हैं.." फर्जी , कोमल का हाथ पकड़ उसको खींचते हुए बोली ,

"हाँ फली टालो , हम ठूठी (ख़ुशी) के पथ दांते (जाते) हैं..." कोमल भी हस्ते हुए यह बोली , और फर्जी के साथ रूम से बहार भाग गई , उनके जाते hi रवि उठ कर बालकोनी में खड़ा हो गया , उसकी आँखों में असनु थे , पर उसे अपने पिता से जीतना था , किसी भी हालत में...

अभी रवि खड़ा hi हुआ था , के उसके कंडे पर किसी ने हाथ रखा , रवि जल्दी से अपने असनु साफ कर , पीछे पलट गया , यह और कोई नै , बल्कि काट थी ,

"रवीए , कहा थे तुम..." काट यह बोलते हुए कास कर रवि के सीने से लग गई ,

"अरे काट , मेरी गुगली मुगलई , में थोड़ा काम से बहार गया था , बेबी और ख़ुशी को साथ लेकर , तुमने मुझे मिस किया मेरी जान..." रवि , काट को कास कर बहु में भरता , उसके बाल सेहला कर बोलै ,

"हाँ , बहुत यद् आयी तुम्हारी , में रत को आयी थी यहाँ , पर तुम नै थे , में परेशान हो गई थी , तुम मुझे बताकर क्यों नै गए , तुम जानते हो न , मेरा दिल बहुत कमज़ोर है..." काट बेहद नाम आँखों से बोली ,

"शठ , सॉरी , गलती हो गई , प्लस रोना मत , प्लस , अभ मुस्करा दो , हम्म , और थोड़ा सा , और थोड़ा , एस , यह हुई न बात , तुम मुस्कराते हुए इस दुनिआ में सबसे मासूम और प्यारी लगती हो , मेरी मोटू काट..." रवि , काट के मुस्कराते hi , उसके होंठो को चुम कर बोलै , तोह काट शर्माने लगी ,

"रवि , में रो नै रही हु , पर जब , पर जब , तुम मुज़से दूर होते हो , में , में , रोने लग जाती हु , में तुम्हारी जुदाई नै सेह सकती , में , में , तुमसे बहुत प्यार करती हु..." काट , बेहद रट हुए रवि के चेहरे को बार बार पगलू की तरह चूमते हुए बोली ,

"शठ , असनु नै , तुम्हारी आँखों में यह असनु नै , मेरा खून है , हाँ , मेरा खून , तुम जब यु रोटी हो , मेरा दिल जल उठता हु , में दर्द से तड़फ उठता हु , मैं पूरी दुनिआ को जला देना चाहता हु , बस रोना मत काट , और मत रोना , प्लस..." रवि , काट के असनु उसकी गालो से जीभ निकल छत्ते हुए बोलै ,

फिर काट खामोश हो गई , उसने रवि को अपने सीने से लगा लिया , उसे महसूस करने लगी , बेहद शिदत से , बेहद सकूं से , उसका मन शांत हो गया , दिल की धड़कने धक् धक् करने लगी , सांसो की आवाज़ उसके कनु में भी सुनाई देने लगी...

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-93

अभ अग्गे....

काट , रवि के सीने से लगी , उसे महसूस करती रही , रवि भी काट के बाल सहलाता , उसे विश्वास दिलाता रहा , के वोह उसके पास है , उससे दूर नै जायेगा , काट भी धीरे धीरे सिसक रही थी ,

"काट , तुम उदास क्यों हो , में हु न तुम्हारे पास , और हमेशा रहुगा , ठीक है , अभ तुम आराम करो..." रवि , काट का मासूम चेहरा दोनों हाथो में पकड़ , उसकी आँखों में आँखें दाल , बेहद प्यार से बोलै ,

"अहह , अभ में शांत हु , में जाती हु , रवि , वोह , वोह , कोमल , कुछ अजीब सी लग रही , वोह इक डैम से बदल गई , मुझे दर लग रहा उससे..." काट , रत को हुई कोमल से मुलाकात को यद् कर थोड़ा घम्बिर होकर बोली ,

"उफ़ , वोह ऐसी hi है , उसे कभी कभी यह होता है , डरो मत , वोह जल्द hi ठीक हो जाएगी , अभ जाओ तुम..." रवि , काट के नरम होंठो को चुम कर बोलै , तोह काट मुस्कराने लगी , और फिर मुस्कराते हुए रूम से बहार चली गई ,

काट के जाने के बाद , रवि ने इक रहत की साँस ली , उसे सोनल से मिलने जाना था , पर कोमल की हालत उसे रोक रही थी , वोह अभी सोच hi रहा था , के किसी और ने उसके कंडे पर हाथ रख दिया , रवि इक डैम से पलट कर बोलै ..." ा गई मेरी जान..."

"हाँ.." यह सीमा थी , जो बेहद उदास लग रही थी ,

रवि , सीमा का हाथ पकड़ , उसे अपने साथ लेकर बीएड पर बेथ गया , उसने महसूस किया सीमा , कोमल की हालत देख , अंदर से , मन से , बेहद दर्द महसूस कर रही थी ,

"रवीए , मेरी कोमल को क्या हुआ..." सीमा बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"ओह्ह , सीमा , उसने अपने रूप को बदल लिया , अपने मन को , अपने दिल को , अपनी आत्मा को , वोह कुछ वख्त तक , ऐसी hi रहेगी..." रवि भी नाम आँखों से बोलै ,

"पर क्यों , और कब तक... " सीमा रट हुए बोली ,

"में तुम सुरु से बताता हु , यह बात हमारे पिछले जनम की है , जब पारी लोग में , पिता जी ने मुझे हेलल में कैद कर दिया , मेरा सब कुछ चीन लिया , मेरा खूबसूरत जिस्म , सब कुछ , पिता जी ने मुझे , इक लाल बदसूरत दरिंदा बना दिया , तेन की मेरी बहिन कोमल (रूही) , मेरे रूप से नफरत करने लगे ..." रवि अभी दर्द भरे शबदो में बोल hi रहा था , के सीमा बेच में बोल पढ़ी ,

"ओह्ह , इतना दर्द सहा , तुमने और कोमल ने .." सीमा बेहद रट हुए बोली ,

"हाँ , पिता जी को लगा , कोमल बस मेरे खूबसूरत जिस्म को प्यार करती है , में टूट गया था अंदर से , में कोमल के सामने ऐनी से डरता था , इक दिन कोमल खुद मुज़से मिलने आयी ,वोह हेलल के बहार कड़ी होकर , नजाने कितने सालो तक , मेरा इंतज़ार करती रही , में जनता था , वोह जिद्दी है , आखिर बहिन तोह मेरी hi थी , आखिर कई साल बीतने के बाद , जब कोमल , वह से न गई , तोह मुझे झुकना पढ़ा , और मुझे हेलल से बहार आकर उसे मिलना पढ़ा..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"फिर क्या हुआ..."

"जब में कोमल के सामने अपना बदसूरत चेहरा और जिस्म लेकर गया , मुझे लगा , कोमल मुज़से घृणा करेगी , मुज़से नफरत करेगी , पर उसने मुझे गलत साबित कर दिया , वोह रट हुए मेरे गले लग गई , और मेरे चेहरे को पगलू की तरह चूमने लगी , उस वख्त में कोमल के प्यार को समाज गया , में झुक गया , अपनी बहिन के प्यार के अग्गे , वोह पता नै क्यों , क्यों , मुज़से इतना प्यार करती थी..." रवि रट हुए दर्द भरे शबदो में बोलै ,

"अग्गे क्या हुआ..." सीमा रट हुए बेहद मुश्किल से बोली ,

"मने कोमल को जैसे तैसे शांत किया , और उससे वादा किया , के में उसे मिलने ायुगा , जब वोह कहेगी , इस बात को जानकर पिता जी और गुस्सा हो गए , उनहोनु गुस्से में इक बेहद शक्तिशाली लड़की की रचना की , (मतलब काट की) , वोह लड़की बहुत मासूम थी , वोह बेहद डर्टी भी थी , और यही दर उसकी ताकत था , उस लड़की ने जब मुझे देखा , तोह वोह दर कर चीख चीख कर रोने लगी , उसके असंयिओं ने मुझे कमज़ोर कर दिया , में वही गिर गया , तब मेरी अंगरक्षक ख़ुशी ने मुझे बचा लिया , और में फिर कभी पारी लोग न जा सका..." रवि उस वख्त को यद् कर बेहद रट हुए बोलै ,

"वोह लड़की कोण थी..." सीमा थोड़ा दर्द में बोली ,

"नै पता , सीमा उस लड़की के वह रहते में पारी लोग नै जा सकता था , यह बात कोमल भी जानती थी , कोमल मेरी जुदाई बर्दाश्त नै कर प् रही थी , तोह पिता जी ने इक नयी चाल चल दी , पिता जी ने अपनी शक्ति से , कोमल के मन में वासना भर दी , तेन की वोह अपने भाई को छोड़ , किसी भी और लड़के से प्यार करे , अपना जिस्म किसी और को सौंप दे , मेरी बहिन वासना सेहन नै कर प् रही थी , उसे मर्द की जरुरत थी , लेकिन वोह मुज़से hi प्यार करती थी , कोमल कई सालो तक , अपने अंदर सेक्स की वासना को शांत रखने की कोससिह करती रही , पर पिता जी उस पर हावी होते गए , वोह हर हल में , कोमल से उसका कुँवारापन चीन लेना चाहते थे , तेन की उसका पवितर प्यार झूठा पढ़ जाये , वोह अपने भाई को कभी मोह न दिख पाए , पर कोमल बहुत जिद्दी थी , तोह उसने कुछ ऐसा किया , के पिता जी कुछ और कर hi न पाए..." रवि अपनी बहिन के बलिदानो को यद् कर बेहद ग़म में रट हुए बोलै ,

"उफ़ , मेरी कोमल ने इतने दर्द सही , अग्गे क्या हुआ..." सीमा भी बेइंतहा रट हुए बोली ,

"हाँ सीमा , मेरी कोमल ने बहुत दर्द सही , कोमल ने अपनी वासना से हार नै मणि , वोह लड़ती रही , हज़ारो सालो तक , आखिर उसने अपना रूप बदल लिया , उसने अपनी जवान सोच को मर डाला , अपने दिल को बदल लिया , वोह इक बची बन गई , और तुम तोह जानती हो , बच्चू पर वासना कभी हावी नै होती , कोमल ने अपना सेहभाव , अपना मन , अपना दिमाग , सब कुछ इक बचे की तरह बना लिया , तेन की उसे जिस्मानी भूक न लगे , वोह पारी लोग में बच्चू की तरह घूमने लगी , सबसे बच्चू की तरह बतिअन करने लगी , और सीमा अभ भी कोमल ने वही रूप धारण कर लिया है , क्यों की पिछले कुछ दिनों से , उस पर वासना हावी हो रही थी , पता नै , पिता जी कहा से उस पर हावी हो रहे हैं , तोह कोमल ने अपने रूप बदल लिया , अपनी जवान सोच को ख़तम कर दिया , इस लिए अभ वोह इक बची की तरह सब से पेश ा रही है..." रवि , कोमल के बलिदान को यद् कर फुट फुट कर रट हुए बोलै ,

"वोह , वोह , मेरी कोमल कब तक ऐसे रहेगी..." सीमा चीख चीख कर रट हुए बोली ,

"शहहह , शांत मेरी जान , में नै जनता , पिछली बार , वोह कैसे और कब ठीक हुई , तुम , तुम उसे , इक माँ की तरह प्यार करना , शयद माँ के प्यार से वोह ठीक होने लगे , सीमा , जब तक उसे यह एहसास नै हो जाता , के उसकी वासना मर गई है , उसकी वासना उसके जिस्म पर हावी नै होगी , मेरे ख्याल से तब तक , कोमल ऐसे hi रहेगीइ..." रवि , सीमा को बहु में भरता उसे शांत करने की कोससिह करता हुआ बोलै ,

"लेकिन , लेकिन वोह तोह जवान है , और वासना तोह जवानी में चरम सीमा पर होती है , इसका मतलब वोह हमेशा बची hi रहेगी..." सीमा यह बोल कर फिर से रट हुए बोली ,

"अभ तुम hi इक उम्मीद की किरण हो , तुम hi कोमल को अपने प्यार से ठीक कर सकती हो , अभ कुछ मत बोलना , मेरे प्यार को महसूस करो , खुद को शांत करो..." रवि इतना बोल खामोश होकर सीमा को अपनी बहु में भरे , उसके बालो को सहलाता , उसे शांत करता गया , कुछ देर सीमा सिसकती रही , रोटी रही , लेकिन फिर उसका सिसकना बंद हो गया...

वही दूसरी तरफ...

कोमल और फर्जी भगति हुई , ख़ुशी के रूम के बहार पहुँच गई , जो अंदर से बंद था , कोमल और फर्जी , ख़ुशी के रूम का दरवाजा पीटने लगी ,

"ख़ुशी मुम्मा , दरवाजा खोलो , खोलो..." फर्जी , कोमल की तरफ देख हस्ते हुए दरवाजे पर हाथ मरती बोली ,

"ठूठी , दलवाजा थोलो , थोलो..." कोमल भी बेहद खुश होते हुए दरवाजे को पीटते हुए बोली ,

कुछ देर बाद ख़ुशी ने दरवाजा खोला , तोह कोमल और फर्जी को देख हरिजन हो गई , वैसे वोह कोमल को देख जायदा हरिजन हुई , क्यों की कोमल उसके रूम में काम hi अति थी ,

"ख़ुशी मुम्मा क्या कर रही हो..." फर्जी रूम के अंदर एते हुए बोली ,

"अले फली लुको , मुड़े भी एना है ठाठ में.." कोमल भी यह बोलते हुए फर्जी के पीछे पीछे अंदर ा गई ,

ख़ुशी तोह कोमल की तोतली आवाज़ सुन चौंक गई , उसका मोह खुला का खुला रह गया , वोह भी दरवाजा बंद कर , उन दोनों के पास ा गई ,

"फर्जी मुम्मा क्या कर रही अप्प..." फर्जी , कोमल को अपने साथ लेकर उसके बीएड पर बैठते हुए बोली ,

"तेज़ लड़की , में अपने दन्त साफ कर रही थी , हेबेई , देखो कैसे चमक रहे..." ख़ुशी अपना मोह उन दोनों के सामने खोल अपने दन्त दिखते हुए बोली ,

"हआ , फली , ठूठी के दन्त टिटने तमात लहे याल..." कोमल अपने होंठो पर हाथ रख कर बोली ,

"हाँ , कोमल मुम्मा , अप्प सही बोली..." फर्जी , कोमल की कमर में अपनी बहे कस्ते हुए बोली ,

"वाओ , ठूठी , यह कोण है..." ख़ुशी चौंक कर अपने हाथ फैला बोली ,

"अप्प हो ठूठी , में टॉमल , यह फली..." कोमल मुस्कराते हुए बोली ,

"ख़ुशी मुम्मा , कोमल मुम्मा आपका नाम ले रही है..." फर्जी भी मुस्करा कर बोली ,

"हम्म , तेज़ लड़की , मेरा नाम , शयद ख़ुशी है , न के थू थी , युककक..." ख़ुशी बुरा सा मोह बना बोली ,

"हाँ याल , मने ताहि (वही) तोला (बोलै) , ठूठी..." कोमल थोड़ा घम्बिर होकर बोली ,

"वाओ , ाचा में तुम सिखाती हुई , पहले बोलू खू , फिर बोलू शी , अभ पूरा बोलै , ख़ूऊशी , आसान है इक डैम..." ख़ुशी अपना नाम कोमल को सिखाते हुए बोली ,

"आते , पेले थोलो थूऊऊऊ , फील ठोलू थीई , अभ पोला ठोलू , थूऊउठीईई , ाटन है आईटी ताम..." कोमल भी ख़ुशी की नक़ल करते हुए उसके पीछे पीछे बोली ,

"अह्ह्ह्ह , यह पृथ्वी तोह नाराज से भी बदतर है , कहा फास गई , उस बेवकूफ के चाकर में..." ख़ुशी अपने माथे पर हाथ मरते मन में सोचती हुई बोली ,

"तय (हे) फली , ठूठी टिल (सार) पल ट्यू मॉल लहि , टुनको (उनको) टॉट लड़ डैडी (जाएगी) ..." कोमल , फर्जी की तरफ देख बोली ,

"उफ़ छोड़ू ख़ुशी मुम्मा , अप्प लोग रत को कहा गए थे..." फर्जी , ख़ुशी की तरफ मुस्करा कर देखते हुए बोली ,

"हम लोग , खाना खाने गए थे..." ख़ुशी मुस्करा कर बोली ,

"क्या खाया अपने..."

"दिल , हमने दिल खाया , उम् , लाजवाब था , अह्ह्ह , बहुत मीठा..." ख़ुशी रत वाली बात को यद् कर अपने होंठो पर जीभ फिरा बोली ,

"धैई मुम्मा , मुड़े दाल लड़ लेह फली..." कोमल डरते हुए फर्जी को बहु में भरते हुए बोली ,

"don't वोर्री , कोमल मुम्मा , में हु न..." फर्जी मुस्करा कर बोली ,

"कहा , क्या दिन देख रही में , कोमल जो कुछ दिन पहले डेविल और दयना से लड़ चुकी , वोह अज्ज , इक बची से चिपक रही दर से..." ख़ुशी फिर से सोचते हुए बोली ,

"ख़ुशी मुम्मा , अप्प मोटो हो जायगी , नॉनवेज खाना छोड़ दो यार..." फर्जी अपने माथे पर हाथ मरती बोली ,

"हाँ , ठूठी , तुम तोतो हो दयुगी , हहै..." कोमल भी फर्जी की नक़ल करते हस्ते हुए बोली ,

"वह , सीधा मोटो से तोतो , तुमने तोह मुझे इक पल में मर्द का हथियार बना दिया , ी इम्प्रेस्सेड , हुऊ , बात है तुम में..." ख़ुशी ताली बजाते हुए बोली ,

"फली , तेह मालद ता हथियल तय तोता है..." कोमल , फर्जी से पूछते हुए बोली ,

"उफ़ , ओह्ह , कोमल मुम्मा , मुझे नै पता , ख़ुशी मुम्मा की कई बतिअन , मेरे सार के ऊपर से गुजर जाती..." फर्जी , फिर से अपना माथा पीट कर बोली ,

"टालो फली , हम तेलते (खेलते) हैं बहाल , टालो न..." कोमल बीएड से उतर कर , फर्जी का हाथ पकड़ उसे खींचते हुए बोली ,

"bye ख़ुशी मुम्मा..." फर्जी रूम से बहार जाते बोली ,

"डाई ठूठी..." कोमल भी हाथ हिलाते हुए बोली ,

"bye तेल लतड़ी , bye टॉमल , अह्ह्ह , यह मेरी आवाज़ को क्या हो गया , अह्ह्ह्हू , हम्म , जीभ तोह ठीक है मेरी , इक बार और बोलती हु , में ख़ुशी हूउउ , अहह , अभ ठीक है , कोमल के चाकर में , इक बोतल और चांदनी पडेगीइ , उफ्फ्फ जल्दी से दरवाजा बंद कर ख़ुशी , कही फील टॉमल न ा जाये , ाहूऊ , फिर से नईईई..." ख़ुशी दोनों को तुतला कर बोली , तोह अपनी जीभ बहार निकल उसे उंगलियों से चेक करने लगी , लेकिन आखिर में जब वोह दरवाजा बंद करने लगी , तब फिर से तुतला गई , और फिर वोह चीखते हुए दारू पीने लगी...

वही कोमल और फर्जी , ख़ुशी के रूम से बहार आकर , घर के हॉल में ा गई , वह उनको सीमा मिल गई ,

"कोमल बीटा , मने छाए बनाई है तुम्हारे और फर्जी बेटी के लिए , ायो पे लो..." सीमा , मुस्करा कर किचन के दरवाजे पर कड़ी बोली ,

"फली तये तेते (पेट) गलम गलम , मादा ाएदा .." कोमल मुस्कराते हुए बोली ,

"हाँ , कोमल मुम्मा , चलो.." फर्जी भी मुस्करा कर बोली ,

फिर सीमा ने दोनों को छाए दी , वोह दोनों घर के हॉल में छाए पीने लगी , और सीमा , कोमल को बेहद प्यार से देखने लगी , तभी लारा भी उनके पास आकर बेथ गई ,

"अह्ह्ह्हह (अंगड़ाई लेते हुए) , कैसी हो कोमल.."

"तिथ हु लाला.." कोमल छाए पेट हुई तुतला कर बोली , तोह लारा , इक डैम से चेयर से निचे गिर गई ,

"हहै , कोमल मुम्मा , लारा मुम्मा गिर गई.." फर्जी हस्ते हुए बोली ,

"हहै , लाला गिल दई फली.." कोमल भी हस्ते हुए बोली ,

तभी रवि भी त्यार होकर वह ा गया , और फर्जी को देख कर बोलै ,

"फर्जी बीटा , जल्दी से त्यार हो जाओ , हमें चाचू के घर जाना है , जाओ.." रवि , फर्जी को त्यार न देख कर , थोड़ा प्यार से बोलै ,

"में भी दौड़ी टाटू ते घाल , मुड़े भी दाना ..." कोमल भी जिद्द करते हुए बोली ,

"नै कोमल , तुम यही रहो..."

"रवि , ले जाओ कोमल को , में त्यार करती हु कोमल को..." सीमा जब यह बोली तोह कोमल ख़ुशी से उछलने लगी , वोह फर्जी की तरफ देख कर बोली ,

"ेहः फली , दो टोटियां कल्कि आना , डालो टी , आते , में भी तालुदी..." कोमल , सीमा के साथ ऊपर जाते हुए बोली ,

"ok , कोमल मुम्मा..." फर्जी यह बोल मुस्कराते हुए जूही के पास चली गई ,

रवि भी इक चेयर पर बेथ गया , अपने माथे पर हाथ रख कर , और लारा आँखें फाडे , मोह खोले सब देखती रही , उसने सोचा , सीमा देदी को पूछ लुंगी बाद में ,

फिर सीमा ने कोमल को नेहला कर , जीन , टॉप पहना दिया , और उसके कहे मुताबिक बालो की दो लम्बी छोट्यां कर दी , सीमा को जैसे रवि ने बोलै था , सीमा वैसे hi कोमल को इक माँ जैसा प्यार कर रही थी , उसे कोमल को हर हालत में पहले जैसा करना था ,

अजीब खेल था भगवन का , जिसको बलि देनी थी कोमल की , अज्ज वही उसे माँ का प्यार दे रही थी , शयद इस बार ें दोनों की कहानी , कुछ और होने वाली थी ,

"थीम देदी में त्याल हु , में डॉ..." कोमल मुस्कराते हुए बोली ,

"देदी नै बीटा , मुम्मा बोलै करो , ठीक है , मेला बचा..." सीमा , कोमल का माथा चुम कर बोली ,

"हहै , अप्प मिली मुम्मा हो , थीम मुम्मा , में डॉ , ढय्या (भइआ) ते ठाठ (साथ) ..." कोमल हस्ते हुए सीमा को बहु में भर बोली , और फिर सीमा उसे निचे ले आयी , यहाँ जूही के साथ फर्जी त्यार कड़ी थी ,

फिर रवि दोनों को लेकर रेहान की गाड़ी में बेथ गया , और तीनो शहर की तरफ चल पढ़े , रवि गाड़ी चला रहा था , उसके साथ कोमल बैठी थी , और कोमल की गॉड में फर्जी ,

"तोह फर्जी बीटा , पहले तुम्हारी फ्रेंड सोना के पास चलते हैं , फिर हम चाचू के घर जायेगे ..." रवि , कोमल की तरफ देख मुस्करा कर बोलै ,

"फली , तेह थोङा टन ी .." कोमल थोड़ा घम्बिर होकर बोली ,

"मेरी स्कूल फ्रेंड है मुम्मा..."

"आते , टालो दिया (भइआ) थोङा ते ढल..." कोमल भी हस्ते हुए बोली , तोह रवि , कोमल का चेहरा देख मुस्करा दिया , लेकिन उसका दिल , वोह खून के असनु रो रहा था ,

अजीब इत्तफाक है जिंदगी का और इस कहानी का , कुछ लोग वासना में बह कर , हर किसी के अग्गे अपना जिस्म बिषा देते हैं , कुछ लोग अपने रिश्ते भूल जाते हैं , कुछ लोग प्यार शब्द को अपमानित कर , अपनी वासना शांत करते हैं , कुछ लोग दोस्ती का नाजायज फिदा उठाते हैं , क्यों की वासना उनकी कमज़ोरी है...

पर इक करैक्टर है कोमल , जिसने अपने पिता और अपनी वासना के अग्गे , झुकने से इंकार कर दिया , खुद का असली रूप मर दिया , अपनी खूवसीहयन मर दी , अपने सपने मर दिए , इक बची बन गई , क्यों , क्यों की उसे , अपना प्यार पवितर रखना है , उसे अपना प्यार जीतना है , इक वासना कोमल को ज़ुका नै सकती , क्यों की उसका पवितर प्यार , उसकी जिस्मानी भूक पर , हज़ार गुना जायदा हावी है , अज्ज कोमल चाहे सब भूल कर , इक बची बन गई , पर वोह दिन दूर नै , जब उसे अपनी सदियों पुराणी तपस्या का फाल मिलेगा , क्यों की पवितर प्यार की जीत होती है , चाहे बुराई लाख गुना जायदा ताकतवर हो....

तो बे कुनिटेड...

 
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