Incest Deewanapan... - Page 18 - SexBaba
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Incest Deewanapan...



अपडेट-83

अभ अग्गे...

अनु बेहद धीमी रफ़्तार से गाड़ी चला रही थी , क्यों की यह इक कच्चा रास्ता था , और बेहद घुमावदार भी था , लेकिन रस्ते के दोनों तरफ बहुत खूबसूरत नज़ारा था , as-pas बड़े बड़े hare-bhare पेड़ , पेड़ू के निचे बड़ी बड़ी जड़यां , उफ़ बेहद दिलकश नज़ारा था ,

अनु के दिलकश होंठो पर इक मुस्कराहट थी , उसके नरम गुलाबी होंठ बेहद खूबसूरत दिख रहे थे , जब उन होंठो पर हलकी हलकी मुस्कान थी ,

अनु ने जिंदगी में बस इक बार सेक्स किया था , जब उसका पाक़िआ ने रपे किया था , यह उसकी जिंदगी के सबसे मनहूस पल थे , उसके दिल में कई ीच्यां थी , के वोह अपना पहला सेक्स , उससे करेगी , जिसे वोह बेहद चाहती होगी ,

यह कुछ लड़कियाँ hi सोचती है , कुछ को इससे फरक नै पढता , लेकिन कुछ ऐसी लड़कियाँ भी होती हैं , जो अपना कुँवारापन अपने पति के लिए बचा कर रखती हैं , अनु उन्ही लड़कयों में से इक थी ,

लेकिन उसकी ीचा कभी पूरी नै हो सकीय , जो दर्द और मज़ा वोह अपने प्रेमी की बहु में पाना चाहती थी , वोह दर्द उसे जबरदस्ती मिला ,

रपे होने के बाद , अनु मानसिक तोर पर कमज़ोर हो गई थी , उसे अज्ज भी यद् था , रपे होने के बाद जब उसे 3 दिन बाद होश आया , वोह कितनी दरी और सेहमी हुई थी , किसी का भी हाथ लगते , उसकी रूह तक कम्प जाती थी ,

पर जब उसे उसकी माँ ने बताया के इक लड़का हमारी मदद कर रहा है , तब अनु को बहुत हेरियनि हुई , लेकिन जब रवि उसे मिलने आया था , तब उसने कितनी बेरुखी से रवि से बात की थी ,

उसे लगा रवि अभ नै आएगा , क्यों जब उसकी माँ ने बताया था , के रवि ने 20 लाख रुपए दिए हैं , उसके इलाज और उसकी जिंदगी को इक नए सिरे से सुरु करने लिए ,

अनु इस शहर से नै गई , चाहे उसे समाज की बुरी नज़रिओं को सहना पढ़ा , उसे बस रवि से मिलना था , रवि को जानना था , क्यों की रवि ने उसके पत्थर दिल में , प्यार का फूल खिला दिया था , उस फूल ने उसके पत्थर दिल को , अपनी मनमोहक खुशबु से तोड़ कर चकनाचूर कर दिया था , उसके दिल में अभ प्यार था , पर रवि के लिए ,

जब कोई लड़की किसी को शिदत से चाहती है , तब दुनिआ के लाखो मर्द भी उस लड़के की पूर्ति नै कर पते , और यही सच्चा प्यार करने वाले लड़को के साथ होता है ,

अज्ज भी वोह कुवारी थी , जो हुआ वोह जबरदस्ती हुआ , उसने प्यार से साथ नै दिया , लेकिन अभ वोह रवि के साथ अपना सपना जीना चाहती थी , वही दर्द महसूस करना चाहती थी , पर रवि तोह डेविल था , शेतीअन था , और अनु उसे कुछ और समाज रही थी ,

अनु मन के भेटेर यही सोचती अग्गे बढ़ रही थी , के उसे बेच रस्ते में इक लड़का खड़ा दिखाई दिया , उसकी पथ अनु की तरफ थी , लम्बे लम्बे काळा बाल , और ब्लैक कपडे पहने थे उसने , पर शरीर बेहद मस्कुलर था ,

अनु ने इक डैम गाड़ी रोकी और खिड़की खोल आँखों में असनु लिए , भाग कर उस लड़के से लेपित गई , अनु ने कास कर रवि को पीछे से बहु में भर लिया और रट हुए बोली ,

"रावी (रट हुए) कहा थे तुम , कितने साल गुजर गए , रावी में अनु हु , वही अनु..." अनु अभी बोल hi रही थी , के रवि इक डैम से पीछे घूम गया , और मुस्कराते हुए बोलै..

"डिटेक्टिव , तोह आखिर अप्प ा hi गई , मेरे पीछे पीछे , हो न हो , डिटेक्टिव अप्प मुझे चाहने लगी हो , डेविल की लिस्ट लम्बी हो रही है..." रवि बेहद मुस्कराते हुए बोलै ,

"तुम , ओह्ह , रावी में अनु हु , वही अनु जिसे.." अनु अभी बोल hi रही थी के रवि फिर से बेच में बोल पढ़ा ,

"हाँ , हाँ , डिटेक्टिव तुम वही अनु हो , जिसकी जान मने फैक्ट्री में बचाई थी , यद् आया , वोह छोड़ो , अभ में तुम्हारे साथ काम करुगा..."

"नै कर सकते , बिलकुल भी नै..." अनु अभ थोड़ा गुस्से में बोली ,

"डिटेक्टिव , क्यों , मुझे लोग को सजा देनी है..." रवि थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,

"ओह्ह , तुम बदल गए हो , तुम , तुम , अह्ह्ह , तुम रवि हो या नई..." अनु गुस्से में ehder-ohder चलती हुई गुस्स्स में चीला कर बोली ,

"डिटेक्टिव , राहुल का लो..."

"क्या..." अनु रुक कर चौंक कर बोली ,

"साँस , राहुल की साँस लो..." रवि मुस्करा कर बोलै ,

"अह्ह्ह , वोह राहुल नै रहत होता है , बेवकूफ..." अनु गुस्से में मुस्करा कर बोली ,

"डिटेक्टिव बेवकूफ नै , डेविल , डिटेक्टिव में डेविल हु , और तुम शांति से , चाहे राहुल का लो , या रहत का , पर लो , मेरा मतलब साँस..." रवि , अनु को आँख मर मुस्कराते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह (चिढ़ते हुए) , ठीक है , में रहत की साँस लेती हु , और तुम मुझे बार बार डिटेक्टिव कहा बंद करो , में अनु हु , अनु , जिसका पाक़िआ ने रपे किया था (बेहद रट हुए) , तुम सुन्ना क्यों नै चाहते , बोलू..." अनु बेहद रट हुए जमीन पर घुटनो के बल बैठते हुए बोली ,

"डिटेक्टिव , में जनता हु , तुम वही अनु हो , पर डिटेक्टिव , वोह अनु मर गई , जब उसका रपे हुआ था , डिटेक्टिव तुम इक नयी अनु हो , तुम्हारा हॉस्पिटल में नया जनम हुआ था , में उस अनु को नै जनता , और अगर तुम वही अनु हो , तोह यहाँ से दफा हो जाओ , डेविल का वख्त बर्बाद करुँगी , तोह डेविल तुम हेलल बेहज देगा..." रवि पहले घम्बिर होकर और फिर आखिर में मुस्करा कर बोलै ,

"रावी , तुम इतने अचे क्यों हो , तुम सच में..."

"अह्ह्ह , में ाचा नै हु डिटेक्टिव , में डेविल हु , और चलो कोई केस सोल्वे करते हैं , कोई नया केस आया है , जो बेहद खतरनाक हो..." रवि उठ कर मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ , इक केस आया है..." अनु भी जमीन से उठ कर , रवि की आँखों में देखते हुए बोली ,

"किसका..."

"तुम्हारा.." अनु थोड़ा घम्बिर होकर बोली ,

"मेरा (हस्ते हुए) , क्या मज़ाक है डिटेक्टिव..."

"रवि यह मज़ाक नै है..." फिर अनु ने रवि को उस दिन हॉस्पिटल में पुलिस के साथ मुठभेड़ , और ठाकुर का उस पर लगाया इल्ज़ाम सब बता दिया ,

"अरे डिटेक्टिव , ठाकुर जी , मुझ पर ऐसे hi भड़क रहे हैं , ख़ुशी मेरे साथ है , लेकिन वोह अपनी ीचा से आयी थी , अभ वोह तामस डेमों बन चुकी है..."

"अह्ह्ह्ह , मुझे लेकर चलो उसके पास..." अनु वापिस अपनी गाड़ी में बैठते हुए बोली ,

"गाड़ी में , डिटेक्टिव , तुम डेविल का मज़ाक बना उड़ा रही हो , हम उड़द कर जायेगे..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"चुप चाप गाड़ी में बेथ जाओ , वार्ना ..." अनु बेहद गुस्से में बोली , तोह रवि भी चुप चाप अनु के साथ गाड़ी में बेथ गया...

फिर दोनों में कोई कुछ न बोलै , कबीले का नदी के ऊपर बना , लकड़ी का पल पर करते हुए अनु , रवि का उदास चेहरा देख कर बोली ,

"रावी , जानते हो , अज्ज मेरी लाइफ का सबसे खुशनुमा दिन है , मुझे किसी का खौफ नै अपनी लाइफ में , पर तुम मुझे किस नज़र से देखते हो , ऐसी पर मेरी पूरी लाइफ देपेंद करती है , मुझे लगा , मेरा रपे हुआ था , पता नै तुम मुझे अपनी लाइफ का हिस्सा समझोगे या नै , या मुझे नफरत और घृणा की नज़र से देखोगे , पर रावी (रट हुए) तुमने मुझे गलत साबित कर दिया , तुम डेविल नै हो , पता नै तुम बार बार खुद को डेविल क्यों बोल रहे हो , पर अगर तुम जैसे इंसान डेविल हैं , तोह , तोह रावी , मेरी हर जिंदगी तुम जैसे हर डेविल पर कुर्बान , ी लव यू..." अनु बेहद रट हुए ग़मगीन शबदो में बोली ,

"वोह , वोह , डिटेक्टिव घर ा गया , बस रोक दो गाड़ी..." रवि बिना कुछ कहे गाड़ी से उतर अनु का इंतज़ार करने लगा ,

फिर दोनों घर के अंदर ा गए , अनु बेहद उदास नज़रो से रवि को बार बार घर रही थी , शयद वोह रवि से अपने सवाल का जवाब चाहती थी , शयद उसे लगता था , उसकी पूरी जिंदगी रवि के जवाब पर निर्भर करती थी ,

"हळू , कामचोरों , बहार ायो , देखो कोण आया है , डिटेक्टिव आयी है , जल्दी आयु..." रवि बेहद चीला कर बोलै ,

तोह सभी अपने अपने रूम से बहार ा गए , रिमी और शूरति , काट और बेबी , सीमा , ख़ुशी , कोमल , लारा और एलिज़ा भी , और फर्जी भी , बस रमा बहार नै आयी ,

"तोह सुनो , यह हैं डिटेक्टिव अनु , मेरी खास दोस्त , और यह मुज़से मिलने आयी हैं , शहर से..." रवि , अनु की आँखों में आँखें दाल मुस्करा कर बोलै , शयद अनु को उसका जवाब मिल गया था , लेकिन वोह खुश थी के उसे रवि ने दोस्त तोह बोलै ,

"यह यहाँ क्यों आयी है..." ख़ुशी , अनु के करीब जाकर उसके चारो तरफ चाकर लगते हुए बोली ,

"तामस , गेट बैक बेब , डिटेक्टिव यहाँ तुम लेने आयी है , और जानती हो , इक फनी न्यूज़ भी लायी है , यह डेविल (फर्जी की तरफ देख कर) मेरा मतलब , यह मुझे डेविल समज़ती है , ओह्ह्ह बेचारी डिटेक्टिव..." रवि , फर्जी की तरफ देख मुस्कराते हुए बोलै ,

"नई , मेरे पापा डेविल नै हैं , वोह बहुत अचे हैं..." फर्जी बेहद गुस्से में चीला कर बोली ,

"तुम्हारी बेटी (बेहद उदास होकर) , ख़ुशी तुम्हारे पापा बहुत परेशान हैं , उनहोनु रवि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराइ है , प्लस तुम मेरे साथ चलो..." अनु , ख़ुशी के करीब जाकर बोली ,

"सॉरी अनु , में नै जा सकती , हाँ , अगर इस बेवकूफ की बात होती , तोह शयद में जाने का सोच लेती , पर फर्जी को छोड़ कर , में कही नै जोगी..." ख़ुशी , फर्जी के प्यार में बह कर बोली ,

"में बेवकूफ , खुशी..." रवि , ख़ुशी को देख चिढ़ता हुआ बोलै , पर बाकि सब ख़ुशी की बात पर हस्स रहे थे ,

"पर वोह तुम्हारे पिता हैं , तुम्हारी माँ है वह पर , तुम इक बची के लिए , अपने maa-baap को छोड़ डौगी..."

"ाचा , यह बताओ , शादी होने के बाद लड़की कहा रहती है..." ख़ुशी , अनु के सामने आकर उसकी आँखों में आँखें दाल बोली ,

"अपने पति के साथ..."

"वही तोह कर रही हु , अपने पति के पास hi तोह रहती हु , और अगर , इक बार तुमने और मुझे , वापिस जाने का बोलै , तोह में तुम्हारा मोह तोड़ दूंगी..." ख़ुशी बेहद गुस्से में चीख कर बोली ,

"ओह्ह्ह , यह गलती करके तोह देखो , में भी काम नै हु..." अनु भी ख़ुशी के और करीब होकर बोली ,

"रुको , रुको , शांत , अनु तुम तुम्हारा जवाब मिल गया है , है न.." रवि , अनु की आँखों में ज़क्त हुआ बोलै ,

"हाँ मिल गया , पर दुःख बहुत हुआ , शयद , ओह्ह , में चलती हु..." अनु यह बोल जाने लगी , पर tabhi.."anu रुको , ख़ुशी की बातिओं का बुरा मत मनो , यह अभी भी बची है , तुम ायो , खाना खा कर जाना..." सीमा , अनु के पास आकर बोली ,

"नै देदी , फिर किसी दिन , अभी मुझे काम है.." अनु यह बोल रवि की तरफ देख घर से बहार निकल गई ,

बहार आकर अनु अपनी आँखों से बहते असनु साफ करते हुए गाड़ी की खिड़की खोल रही थी , तभी रवि भी उसके साथ आकर बेथ गया ,

"तुम , बहार निकालो ..." अनु गाड़ी में बेथ कर बोली ,

"शठ , कुछ मत बोलू , गाड़ी चलाओ ..." रवि इस बार घम्बिर होकर बोलै ,

फिर अनु भी कुछ न बोली , वोह गाड़ी ड्राइवर करती रही , दोनों जंगल के बेचू बेच ा गए , तब रवि ने गाड़ी रुकवा दी , रवि गाड़ी से बहार निकल कर खड़ा हो गया , कुछ hi पलु में अनु भी उसके सामने आकर कड़ी हो गई , वोह कुछ पल रवि का चेहरा देखती रही , और फिर रोने लगी ,

"अनु प्लस.." रवि ने अनु को शांत करने के लिए अनु के कंडे पर हाथ रखते हुए बोलै , पर अनु ने जातक दिया ,

"डिटेक्टिव प्लस , शांत हो जाओ , रोना बंद करो.." रवि दिल की गहराई में दर्द महसूस करता हुआ बोलै ,

"मुझे , मुझे हाथ मत लगाओ रवि , में अनु हु , मेरा रपे हुआ था , में तुम्हारे काबिल नै हु , रवि , तुमने मुझे इसलिए ठुकरा दिया , क्यों की मेरा रपे इक गुंडे ने किया था , में वर्जिन नै हु , रवीए , में वही अनु हु , वोह अनु अभी तक जिन्दा है..." अनु ने जोर जोर से रट हुए बोलै ,

"नयी , नई (बेहद गुस्से में गाड़ी की खिड़की के मिरर पर हाथ मरते हुए) , यह वजह नै है , अनु , मुझे इस बात से फरक नै पढता , के तुम्हारा , ओह्ह्ह , क्यों , क्यों , बार बार , वही बात , क्यों कर रही हो , तुम , तुम मेरा दिल दुख रही हो , इक hi बात करके , जानती हो , अगर में दर्द में डूबा , तोह पूरा शहर हेलल में बदल जायेगा..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै , उसके हाथ से खून बह रहा था , गाड़ी का मिरर टूट चूका था ,

"तोह क्या कारन है , क्यों मुझे अपना नै रहे , क्यों , तुम्हारी शादी हो चुकी है इस लिए , या तुम्हारे पास लड़कयों की कमी नै , हाँ यही कारन होगा , वह तोह बहुत साडी लड़कियाँ थी , तुम्हारा दिल बहलाने के लिए , तुम्हारी भूक शांत करने के लिए , तोह तुम , मुझ जैसी आम सी लड़की को , क्यों अपने दिल में जगह डोज..." अनु बेहद रट हुए गुस्से में बोली ,

"अह्ह्ह्हह (गुस्से में चीला कर) , इक और शब्द भी , तुमने उनके बारे में बोलै , तोह में तुम्हारी सांसे यही रोक दूंगा , उनसे अपनी तुलना मत करो , उनका प्यार अलग अलग है , उनके मेरे लिए किये बलिदान अलग अलग हैं , मने कभी प्यार के लिए तुलना नै की , जो मुझे जितना प्यार करता है , में उतनी hi शिदत से उसे प्यार करता हु..." रवि बेहद गुस्से में चीला कर बोलै , उसकी आँखें लाल रौशनी में चमक उठी , वोह तोह ाचा था , उसकी पीठ थी , अनु की तरफ..

"तोह मुज़से भी करो , जितना प्यार में तुमसे करती हु , उतना मुज़से भी करो..."

"यह प्यार नै , जिद्द है तुम्हारी , जल जोगी , तुम्हारा वजूद मिट जायेगा , इस मास्स के जिस्म को मत देखो , इसके अंदर शेतीअन बैठा है , में डेविल हु अनु , तुम इक इंसान हो..." रवि बेहद घम्बिर होकर दर्द भरे शबदो में बोलै ,

"फिर से बहाना , हूँ (हस्ते हुए) , तुम दुनिआ के इकलौते लड़के हो , जो खुद को डेविल बता कर , मेरा पर्पस ठुकरा रहे हो , सीधा सीधा यह क्यों नै बोलते , के तुम बस वही लड़की चाहये , जो पूरी लाइफ बस तुमसे प्यार करती रहे , और तुम दुसरो के अग्गे , उसके बलिदान के किस्से सुनते रहो , तुम डेविल हो या नै , में नै जानती , लेकिन तुमने मेरी सोच गलत करदी , में मानती थी कुछ मर्द अचे होते हैं , पर , छोड़ो ें बातिओं को , अभ मेरा तुमसे कोई रिश्ता नै..." अनु बेहद घम्बिर होकर रट हुए बोली ,

"अनु..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"अनु (हस्ते हुए) , यह नाम नै है रवि , यह इक कलंक है , जो मेरे साथ जुड़ चूका है , किसके साथ रपे हुआ , अनु के साथ , मेरे साथ नै हुआ , अनु के साथ हुआ , हमदर्दी किसे मिली , अनु को , मुझे नै , तुमने 20 लाख रुपए किसे दिए , अनु को , मुझे नै , और अभ , तुम किसे ठुकरा रहे हो अनु को..." अनु फिर से रट हुए बोली ,

"तुम समज़ती क्यों नै अनु , में डेविल हु , मेरे दुश्मन तुम मर देंगे , यह सब लड़कियाँ अमर हैं , इसलिए में बेफिक्र हु , पर तुम , तुम इंसान हो , तुम मर जोगी..." रवि इस बार रट हुए बोलै ,

"तोह मरने दो मुझे , वैसे भी में जिन्दा कहा हु , में उसी दिन मर गई थी , जब पूरी रत मेरा रपे होता रहा , हाँ , जिन्दा रहने की वजह तुम थे , अभ वोह भी नै रही , अगर तुम्हारे साथ दो पल का प्यार पाकर में मर भी जाऊ , तब भी मुझे कोई ढक नै होगा..." अनु यह बोल वह से जाने लगी , तभी गाड़ी में बैठने से पहले वोह अपनी आँखों से बहते असनु साफ कर बोली ,

"रवि 24 घंटे का वख्त देती हु , अछि तरह सोच लेना , घबराओ मत , अनु जान नै देगी , क्यों की इसपर मेरा कोई हुक नै है , यह जिंदगी तुमने खरीद ली है , पोरे 20 लाख रुपए में , रावी , में अपने दिल के दरवाजे हमेशा हमेशा के लिए बंद कर डोंगी , और पूरी जिंदगी तन्हाई में गुजरोगी , यह वादा है तुमसे..." अनु यह बोल मुस्कराते हुए गाड़ी में बेथ वह से चली गई , रवि पत्थर बना वही खड़ा रहा ,

उफ़ , रवि दुविद्या में फास चूका था , अनु इक इंसान थी , वोह डेविल था , अनु के साथ प्रेम करने का परिणाम क्या होगा , वोह अछि तरह से जनता था , और यह परिणाम था अनु की मौत....

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-84

अभ अग्गे...

रवि कुछ देर वही खड़ा , अनु को जाते देखता रहा , अज्ज उसका मन उदास था , दिल में इक दर्द था , उसने बस इक बेसहारा लड़की की मदद की थी , उसे इक नयी जिंदगी देनी चाही थी , पर रवि को कभी यह एहसास भी नै था , के अनु उसे hi प्यार करेगी , यह रवि ने कभी सोचा भी नै था ,

रवि गहरी सोच में खोया वापिस घर ा गया , घर के हॉल में सभी बैठे हुए थे , पर रवि बिना किसी से बात किये , सीधा सेड्यां चढ़ ऊपर अपने रूम में चला गया ,

"कोमल मुम्मा , पापा को क्या हुआ..." फर्जी बेहद उदासी में बोली ,

"बेटी , पता नै , शयद वोह किसी बात को लेकर परेशान हैं..." कोमल ने बेहद उदास होते हुए बोलै ,

"पर किस बात से.." काट भी रवि की चिंता करते हुए बोली ,

"मेरे ख्याल से रवि सुबह हमें अपनी बचपन की बतिअन बता रहा था , शयद ऐसी कारन वोह दुखी होगा.." एलिज़ा ने अपनी सोच का घोडा दौड़ते हुए बोलै ,

"ओह्ह्ह , भइआ ने अनंत दुःख सही , हमारे लिए , उनका यह कर्ज , में पूरी जिंदगी नै चूका सकती..." कोमल ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"हाँ , रवि जैसे कोई नै , वोह किसी को दर्द में नै देख सकता , बहुत जल्द भावनायिओं में बह जाता है , यही उसकी कमज़ोरी रही है , उसे अगर कोई दो पल का प्यार दे , तोह वोह उसे जिंदगी भर प्यार देता है , उसे खुश रखता है..." सीमा भी भेजी आँखों से मुस्करा कर बोली ,

"सीमा मुम्मा , मुझे भी बताओ न , पापा का बचपन कैसा था , में उनके बारे में सब जानना चाहती हु..." फर्जी ने सीमा के करीब जाकर बोलै ,

"ओह्ह , मेरी बेटी अपने पापा का बचपन जानना चाहती है , मेरी बची , तुम्हारे पापा ने कभी बचपन देखा hi नै , जब से उसने होश सम्बल , तब से वोह भाग रहा है , बस काम कर रहा है , अपनों के लिए जी रहा है , वोह कभी खुद के लिए नै जीता..." सीमा ने फर्जी को अपनी गॉड में बैठा कर बोलै ,

"फिर भी मुम्मा , मुझे बताओ न पापा के बारे में.." फर्जी ने सीमा की आँखों में आँखें दाल पूछा ,

"हाँ देदी , हमें भी जानना है , रवि कैसा था बचपन में..." बेबी भी थोड़ा दुखी होती हुई बोली , जब सबने जिद्द की , तोह सीमा ने हार मन ली , क्यों की सब रवि से जुड़ चुकी थी , उनकी ीचा थी , अपने प्यार को जानने की ,

"तोह सुनो..." सीमा मुस्करा कर बोली ,

सब वही हॉल में बेथ गई , बस रमा नै थी उनके साथ , बाकि सब थी ,

"बात तब की है , जब रवि ** साल का था , और मेरा साथ गाओं के स्कूल में पढता था , हम उस वख्त ** क्लास में थे , तब में रवि को इतनी अछि तरह से नै जानती थी , रवि पढ़ने में बहुत होशियार था , पर इक दिन उसने स्कूल एना बंद कर दिया , मुझे अज्ज भी डुंडला डुंडला यद् है , जब किसी ने मुझे बताया था , के रवि अभ कभी स्कूल नै आएगा , क्यों की उसके पिता जी गुजर गए हैं , पता नै क्यों मुझे इस बात से ढक हुआ , दिल में दर्द सा हुआ , में उस दिन घर जाकर बहुत रोई..." सीमा ने नाम आँखों से बोलै , तोह काट बेच में बोल पढ़ी ,

"देदी आपको दुःख हुआ , उतनी से उम्र में , क्या आपको रवि से प्यार था.." काट अपने मन की उत्सुकता न छुपा पते हुए बोली ,

"काट , रवि ने मेरी जान बचाई थी , कुछ बदमाश लड़के मेरी आँख फोड़ रहे थे , तब रवि ने मेरी जान बचाई , बस उसी पल से रवि मुझे ाचा लगने लगा , में बहुत अमीर थी , और जायदा रवि से बात नै करती थी , यही समाज लो , मने कभी रवि से बात नै की , स्कूल लाइफ में..." सीमा उन पलु को यद् कर मुस्कराते हुए बोली ,

"वाओ , उस वख्त भी रवि इतना ाचा था.." लारा मुस्कराते हुए बोली ,

"हाँ लारा , जब रवि के पिता जी गुजर गए , तब पोरे घर की जिम्मेदारी छोटे से रवि के कण्डु पर ाँ पढ़ी , उसकी 3 बहाने थी , रेखा देदी , रमा और कोमल , रेखा देदी , रवि से 4 साल बड़ी थी , रमा 2 साल , और कोमल , रवि से 1 साल छोटी थी , रवि के पास बस 3 एकड़ जमीन थी , जो इतनी उपजाऊ भी नै थी , बस यही समाज लो ठीक थक जमीन थी , लेकिन उस वख्त गाओं में खेती करना बहुत मुश्किल काम था , यही समाज लो , के बड़े बड़े लोग भी बेहद मुश्किल से खेती कर पते थे , रवि तोह उस वख्त बहुत छोटा था..." सीमा अपनी आँख से बहते असनु साफ कर बोली ,

"ओह्ह मेरा रावी..." बेबी भी रोने लगी ,

"में रवि पर नज़र रखती थी , क्यों की मुझे उसकी चिंता थी , धीरे धीरे मुझे पता चला , के कोमल शहर जा रही है पढ़ने के लिए , में यह सुन कर हरिजन रह गई , क्यों की रवि के पास कमाई का कोई जरिया नै था , अपनी खेती के बिना , फिर धीरे धीरे मुझे पता चला , के रवि खेती के साथ साथ गाओं में मज़दूरी भी करता है , तब में बहुत दुखी हुई , में बहुत रोई... " सीमा बेहद रट हुए बोली ,

"अग्गे क्या हुआ देदी..." बेबी और जानने की ीचा से बोली ,

"फिर वख्त गुजरता गया , रवि अभी ** साल का था , इक दिन वोह हमारे घर आया , क्यों की पिता जी , हवेली की इक तरफ इक कमरा बनवा रहे थे , भेंसो के लिए , तब रवि भी आया था , कुछ लोग के साथ , मने रवि को देखा , मने देखा..." सीमा यह बोलते बोलते रोने लगी ,

"देदी में और नै सुन सकती..." कोमल यह बोल रट हुए अपने कनु पर हाथ रख बोली ,

"क्या देखा देदी..." काट भी रट हुए बोली ,

"मने देखा , रवि उन सब लोग में सबसे छोटा था , वोह बहुत काम कर रहा था , वोह बचा लग रहा था उन सब के बेच , जब में दुपहर को सबको छाए देनी गई , तब मने रवि के हाथ देखे , उफ्फ्फ दोनों हाथ चिली हुए थे , हाथो की चमड़ी फटी हुई थी , लेकिन उसके चेहरे पर इक मुस्कान थी , पर आँखों में बेइंतहा दर्द था , इक हफ्ता लगातार रवि हमारे घर काम करता रहा , ऐसी बेच वोह न किसी से बात करता , न आराम करता , वोह काम करता रहा , बस काम , और में बस उसे घूरती रहती , मुझे भूक न लगती , मने इक वख्त का खाना छोड़ दिया था , मने कसम खायी , के जब तक रवि को अपना नै बना लेती , तब तक बस इक वख्त hi खाना खायुगी..." सीमा रट हुए बोली ,

"उफ़ इतने दर्द सही रवि ने , में कभी सोच भी नै सकती , और अपने भी देदी..." काट , रवि के चेहरे को यद् कर रट हुए बोली ,

"यह तोह कुछ नै , अपनी माँ और बहनो को कभी उसने खेतो में काम नै करने दिया , वोह अकेला काम करता रहा , कभी अपने लिए अचे कपडे नै खैरड़ पाया , सुखी रोटी खता रहा , उसने अपनी सभी ीच्याइओं को दिल में दफ़न कर दिया , अपने परिवार के लिए , जानती हो इस दुनिआ में वोह , सबसे जायदा प्यार कोमल को करता है , इसकी जिंदगी अछि बनाने के लिए , इसके हर शोक पोरे किये , इसको सबसे महंगे स्कूल में पद्य उसने , खुद धुप में , सर्दी में , बारिश , हर मासूम में तप्त रहा , पर कोमल को फूलु की तरह पल कर बड़ा किया , मेरे रवि ने अपना बचपन नै जिया , उसने इक सजा कटी है , वोह सजा जो शयद hi कोई काटना चाहता हो , तभी तोह में उसे इतनी प्यार करती हु , के उसके लिए अपना घर तक छोड़ दिया , 7 सालो तक अकेले हर दर्द , हर गम सेहती , उसका इंतज़ार करती रही..." सीमा ने बेइंतहा रट हुए बोलै , सबकी आँखें नाम थी , कोमल अपनी आँखें बंद कर , अपने भाई की उस वख्त हुई हालत को महसूस कर रही थी ,

"ओह्ह रावी सच में महँ इंसान है..." बेबी बेइंतहा रट हुए बोली ,

"हमें भी उसने बदल दिया , उसके साथ लड़ते लड़ते हमने कब बुराई का साथ छोड़ा , हमें महसूस भी नै हुआ..." एलिज़ा भी रट हुए बोली ,

"उसके बाद क्या हुआ देदी..." बेबी नाम आँखों से बोली ,

"उफ्फ्फ , उसके बाद में शहर ा गई पढ़ने के लिए , बस वही वख्त था , जब में रवि से दूर हो गई , बहुत दूर , बेच बेच में , मैं गाओं जाती , लेकिन रवि से मेरा कभी सामना नै हुआ , खैर , जो भी हो , रवि ने जो ढक सही , अज्ज उसके बदले में , उसे कितना प्यार मिल रहा है , जिस रवि को लगता था , उसकी जिंदगी अभ गाओं के खेतो तक hi सिमट जाएगी , कोई लड़की शयद hi उसे कभी प्यार कर पाए , वोह मिटटी से जुड़ा इंसान है , उसे उसके maa-baap ने नै पला , उसके खेतो ने , उसकी मज़बूरीयों ने , उसके अकेलेपन ने , उसकी गरीबी ने , उसे पल कर बड़ा किया है , ऐसे इंसान दिल से कमज़ोर भी होते हैं , और बेहद साफ दिल भी..." सीमा ने बेहद दर्द भरे शबदो में दिल की गहराई से बोलै ,

"देदी (रट हुए) , तब हमारा रवि अकेला था , उसके पास कोई ढक बाँटने वाला नै था , इस लिए वोह अकेला रोटा रहा , हर दर्द सेहत रहा , लेकिन अभ हम सब हैं , उसका हर दर्द अभ हमारा दर्द है , हम इक इक करके अपनी जान कुर्बान कर देंगी , अगर रवि पर कोई खतरा आया तोह , देदी , रवि हम सब का अपना है , अभ उसे कभी दुखी नै होने देंगी हम सब..." बेबी बेइंतहा रट हुए सबकी तरफ देख कर बोली ,

"सीमा देदी , अपने बोलै , 7 साल अप्प रवि का इंतज़ार करती रही , हम आपकी और रवि की लव स्टोरी जानना चाहती है , प्लस , हमें वोह भी सुना दो , अज्ज वख्त है..." काट भेजी आँखों से मुस्करा कर बोली ,

"नई काट , वोह कहानी अगर तुम रवि के मोह से सुनोगी , तभी तुम उसके प्यार का एहसास होगा..." सीमा मुस्करा कर बोली ,

"अरे फर्जी बीटा , तुम क्यों रो रही हो , ेहडेर ायो..." बेबी ने फर्जी को रट देख बोलै , सब अपनी बातिओं में लगे थे , किसी को फर्जी का ख्याल तक नै आया था ,

"पापा..." फर्जी बेइंतहा रट हुए सेड्यां चढ़ रवि के पास भाग गई ,

"फर्जी बीटा..." बेबी उठ कर उसके पीछे जाने लगी ,

"रुको बेबी , उसे जाने दो , यह उसके पल हैं , उसे जीने दो , अज्ज वोह अपने पापा के और करीब ा गई है , अभ वोह कभी उनका दिल नै ढुकायेगी..." सीमा ने मुस्कराते हुए नाम आँखों से बोलै ,

वही दूसरी तरफ...

रवि घर की बालकोनी में खड़ा , अनु के बारे में सोच रहा था , काफी वख्त तक , उसके दिमाग और दिल के बेच जुंग चलती रही , और आखिर जीत किसकी हुई , यह तोह रवि hi जनता था ,

रवि दूर तक फैले जंगल को निहार hi रहा था , के तभी फर्जी भगति हुई रूम में आयी , और बेइंतहा रट हुए , रवि की तंग से लिपट गई पीछे से ,

"पापा..." फर्जी बेहद रट हुए बोली , फर्जी का रोना सुन , रवि एकदम से पलट कर निचे घुटनो के बल बेथ गया और उसे बहु में भर लिया ,

"क्या हुआ मेरी बाछीइ , श चुप हो जाओ , किसी ने डांटा तुम , बोलू न..." रवि जो पहले hi उदास था , वोह फर्जी का इतना रोना सेहन न कर पते हुए , उसे कास कर अपने गले लगते हुए बोलै ,

"पापा , में आपसे बहुत प्यार करती हु ..." फर्जी बेइंतहा रट हुए रवि का पूरा चेहरा चूमते हुए बोली ,

"में भी तुमसे बहुत प्यार करता हु , अभ चुप हो जाओ मेरी बेटी..." रवि , फर्जी का माथा चुम उसे अपने गले लगते हुए बोलै ,

"पापा (रट हुए)..." फर्जी बस रट हुए यही बोल पायी , इसके अग्गे उससे कुछ बोलै hi नै गया ,

"क्या बात है बेटी , इतना रो क्यों रही हो , में हु न तुम्हारे पास , शठ मेरा बचा , चुप हो जाओ..." रवि , फर्जी के असनु भेज गाल साफ करते हुए बोलै ,

"पापा , अप्प बहुत अचे हो , में , में , आपको कभी परेशान नै करुँगी , पापा..." फर्जी रट हुए सिसक सिसक कर यह बोली , और फिर से रवि के गले लग गई ,

"नै मेरी बची , तू मुझे परेशान नै करती है , मुझे ाचा लगता है , और यह तुम्हारा बचपन है , तुम्हारा वख्त है , खेलने का , सबको तंग करने का..." रवि , फर्जी को गले लगाए उसका सार सहलाता हुआ बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"मेरे पापा ने अपना बचपन नै जिया , में भी..." फर्जी रट हुए यही बोल रही थी के...

"चुप , कुछ मत बोलना बेटी , में अपना बचपन जी रहा हु , बीटा तुम्हारी आँखों से , जो तुम करती हो , वही में करता हु , तुम , तुम , मेरा बचपन हो , मेरी बची..." रवि , फर्जी के होंठो पर हाथ रख बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"ओह्ह पापा , अप्प इतने अचे क्यों हो , में आपके साथ रहूगी , कभी आपको छोड़ कर नै जोगी..." फर्जी फिर से रट हुए बोली ,

"हाँ मेरी बची , में भी तेरे साथ रहुगा , ाचा , अभ रोना बंद करो , तुमने मुझे भी रुला दिया..." रवि नाम आँखों से मुस्करा कर बोलै ,

"पापा , में आपका बचपन जेयुगी , जो मेरे पापा नै कर पाए , वोह सब में करुगीय , क्यों , क्यों , पापा आपको इतने ढक क्यों मिले , क्यों..." फर्जी बेहद रट हुए बोली ,

"शठ , बेटी वोह दुःख नै , मेरी परीक्षा थी , अगर में वोह परीक्षा न देता , तोह मेरी बेटी मुझे कभी नै मिलती , फर्जी बीटा , अभ वोह दुःख , दर्द , मुझे बहुत अचे लगते हैं , क्यों की उन ढक , दर्द , भरे पलु के बदले , भगवन ने मुझे इतनी प्यारी बेटी दी , मेरी अपनी बेटी..." रवि बेहद रट हुए बोलै ,

"पापा , अप्प रोना बंद करो , मेने आपको रुला दिया , मुज़से कितनी बड़ी गलती हो गई , सॉरी पापा..." फर्जी बेहद रट हुए रवि के असनु भेज गालो को साफ करते हुए बोली ,

"मेरी बेटी पगली है , चलो अभ बहुत हुई इमोशनल बतिअन , ेहडेर ायो , में तुम कुछ दिखता हु..." रवि मुस्करा कर फर्जी को अपनी गॉड में उठा कर , बालकोनी में खड़ा होता हुआ बोलै ,

फर्जी अभ चुप कर गई थी , पर वोह रवि का चेहरा देखे जा रही थी , फिर उसने रवि के कंडे पर सार रख लिया , और अपने पापा के प्यार को महसूस करती हुई आँखें बंद कर सो गई...

रवि काफी देर वैसे hi खड़ा रहा , और फर्जी के बाल सहलाता रहा , करीब आधे घंटे बाद , रवि ने फर्जी को बीएड पर सुला दिया , और उसका माथा चुम कर बोलै..." मेरी बेटी पगली है..."

वही दूसरी तरफ...

अनु कबीले से सीधा अपने घर ा गई , वोह बेइंतहा उदास थी , वैसे तोह वोह पोरे रस्ते रोटी आयी थी , लेकिन फिर भी उसका मन शांत नै हुआ था , उसे किसी के सहारे की जरुरत थी , वोह सहारा उसकी माँ hi उसे दे सकती थी ,

अनु घर पहुँच भाग कर अपनी माँ से लिपट गई , और बहुत जोर जोर से रोने लगी , वेदना समाज गई , उसकी बेटी का दिल टुटा है , लेकिन वोह खामोश रही , इक माँ hi जानती है , उसके बचे कैसे शांत होते हैं , जब वोह हद से जायदा दुखी होकर रट हैं ,

"माँ , माँ , उसने मुझे ठुकरा दिया , उसे मुज़से प्यार नै है माँ , वोह , वोह , माँ मेरी क्या गलती थी , मेरा hi रपे क्यों हुआ , माँ , मुझे तब मर जाना चाहये था , क्यों , क्यों बचाया अपने , मरने देती मुझे , माँ मुज़से कोई प्यार नै करता , कोई नै..." अनु जोर जोर से रट हुए बोली ,

"अरे रवि तुम..." अनु की माँ मुस्कराते हुए बोली ,

"रावी , कहा है..." अनु इक डैम से शांत होकर अपने भेज गाल अपने हाथ से साफ करते हुए पलट कर बोली ,

अनु ने देखा वह कोई नै था , अनु रट हुए अपनी माँ को देखने लगी ,

"बेटी , वोह तुमसे प्यार नै करता , बस इस बात से तुम हार मन लोगी , झुक जोगी , नै , मेरी बेटी बहुत बहादुर है , बेटी वोह आएगा , जरूर आएगा , बेटी बिना किसी रिश्ते से , उसने हमारा इतना साथ दिया , तुम्हारे दोषी पाक़िआ को कुत्ते की मौत मर दिया , उसने ऐसा क्यों किया , बेटी वोह तुम तकलीफ में नै देख सकता , उसकी शादी हो चुकी है , शयद वोह तुम्हारी जिंदगी बर्बाद नै करना चाहता..." वेदना अभी बोल hi रही थी के अनु बेच में बोल पढ़ी ,

"माँ , यह झूठ है , सब झूठ है , में उसके काबिल नै हु , यह जिस्म गन्दा हो चूका है , यह अभ पवितर नै रहा , तुमने देखा था न माँ , लोग कितनी गन्दी नज़रिओं से देखते थे मुझे , जैसे , जैसे में कोई डांढ़ा करने वाली बाज़ारू औरत हु , माँ , में सच में डांढ़ा करने वाली hi लगती हु..." अनु ने बेहद रट हुए बोलै ,

"चत्ताककक.." इक जोरदार थपड अनु के चेहरे पर पढ़ा ,

"तेरी हिमेट कैसे हुई यह बोलने की , देखना चाहती है , के रवि तुमसे कितना प्यार करता है , लायो फ़ोन दो अपना , किसका नंबर चलता है वह इस वख्त..." वेदना ने बेहद गुस्से में अनु से चीख कर पूछा , अनु की आत्मा तक कम्प गई , उसने अपनी माँ को इतना गुस्सा करते कभी नै देखा था ,

"kk..kk...kat kk..ka.." अनु दर से कंपते हकलाते हुए बोली ,

वेदना ने मोबाइल से काट का नंबर डायल किया , कुछ रिंग जाने के बाद काट ने फ़ोन उठा लिया ,

"हलो कोण..." काट ने सबसे थोड़ा दूर जाते हुए बोलै ,

"जी में वेदना बोल रही हु , अनु की माँ , मुझे रवि से बात करनी है , प्लस जल्दी करिये..." वेदना ने थोड़ा रट हुए बोलै ,

"अप्प रोईए मत , में बात करवाती हु..." काट भाग कर सेड्यां चढ़ते हुए बोली , वोह रूम के अंदर भाग कर घुसी तोह रवि ने इक डैम से अपने होंठो पर ऊँगली रख काट की तरफ देखा..

"शह्ह्ह्ह..." रवि , फर्जी के पास बैठा हुआ था , वोह उसे सोते हुए देख रहा था , वोह नै चाहता था , के जब उसकी बेटी सो कर उठे , तोह वोह उसके पास न हो ,

"सॉरी , वोह अनु की माँ का फ़ोन है , वोह रो रही थी..." काट ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

रवि इक डैम से उठा और वेदना से बात करने लगा , और इक डैम से चीला कर बोलै..." क्याआ.."

रवि ने फ़ोन काट को पकड़ा दिया , और तेज़ी से भागते हुए घर से बहार निकल गया , काट भाग कर बालकोनी में कड़ी होकर रवि को तेज़ी से जाते हुए देखने लगी ,

रवि भागता हुआ नदी का पल पर कर , जंगल में कही खो गया , पर तभी काट ने जो देखा , उसकी रूह तक कम्प गई , चेहरे पर पसीना उमड़ कर बहने लगा ,

काट ने देखा , पल से थोड़ा दूर जंगल के अंदर से , उड़ता हुआ इक लाल रंग का इंसान बहार निकला , जिसके दो ब्यांक लाल पंख थे , और जिस्म आग जैसे जलता हुआ चमक रहा था ,

फिर वोह इंसान उड़ता हुआ शहर की तरफ जाने लगा , काट पत्थर सी हो गई थी , पर तभी उसे यद् आया , के रवि भी उसी तरफ गया था , यहाँ से वोह ब्यांक सा जीव उड़द कर बहार निकला था , काट जोर से चीख padhi...."raviiii..." और फिर उसे कुछ यद् आया..

"काट में डेविल हु , में हेलल का प्रिंस हु , काट में तुम सच बोल रहा हु , में डेविल हु , में डेविल हु..." बार बार काट के कनु में रवि के कहे शब्द गूंज रहे थे ,

"नईईईई..." काट अपने कनु पर हाथ रख चीख उठी , और फिर वही गिर कर बेहोश हो गई...

वही दूसरी तरफ...

"माया कहा थी तुम..." यह महँ वैम्पायर काल था , जो अँधेरे भरे हवेली के हॉल में , अपने सिंघासन पर बैठा हुआ था ,

"जी , बस अपने रूम में थी , क्या बात है..." माया , काल के करीब आकर बोली ,

"वोह रिंग धारक औरत कोण है , उसका जल्द से जल्द पता लगाओ , वार्ना , हम सबके वजूद पर खतरा बढ़ जायेगा , वोह औरत हमारा वजूद मिटा देगी..." काल ने बेहद शांत आवाज़ में बोलै ,

"जानती हु , पर , क्यों न हम , रवि से मदद ले , आपका बीटा है वोह..." माया ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"नई , अभ वोह वैम्पायर नै है , अभ वोह इंसान है , और डेविल भी , उसका हमारे साथ , जो रिश्ता था , वोह ख़तम हो चूका है , वोह औरत , रवि से जीत नै सकती , पर वोह मर भी नै सकती , जब तक रिंग की ीचा न हो..." काल ने बेहद भरी आवाज़ में बोलै ,

"हम्म , तोह इक रास्ता है , अप्प सुनिए..." माया मुस्कराते हुए बोली , और काल के साथ धीरे धीरे बतिअन करने लगी....

तो बे कुनिटेड....
 
किस किस ने अभी तक रेबु नै दिया :बात1: जल्दी करो , वार्ना रत को अपडेट नै आएगा :डील:
 
कोण कोण चाहता है.. अज्ज इक सेक्स अपडेट aye...jo में लिख रहा हु...
 


अपडेट-85

अभ अग्गे...

रवि बेइंतहा गुस्से में शहर की तरफ जा रहा था , उसने जो सुना था , उसने जो महसूस किया था , इस बात ने उसके पोरे दिल में इक दर्द सा भर दिया था , इक आग सी लगा दी थी ,

रवि जैसे जैसे शहर की तरफ बढ़ रहा था , आसमान में घोर काळा बदल उमड़ ए थे , इक अँधेरा सा पसर गया था पोरे शहर में , हर तरफ तेज़ andhyian(hawa) चलने लगी थी , धूल के कण , हवा में इतने फैल चुके थे , के लोग को as-pas कुछ दिख भी नै रहा था ,

आसमान में बिजली चमकने लगी थी , उसकी आवाज़ से पूरा शहर जैसे कम्प सा जाता था , यह डेविल की ताकत थी , डेविल को उसकी ीचा के बिना देख पाना असंभव था , नामुमकिन था ,

"उफ्फ्फ इतनी तेज़ हवा , यह अचानक मौसम को क्या हुआ , पहले तोह साफ था , यह तेज़ हवा तोह पूरा घर मिटटी से भर देगी , अनु तुम जाओ अपने रूम में , बीएड पर लेट जाओ , जैसा मने बोलै , वैसे hi करना..." वेदना , घर की खिड़कियाँ अछि तरह से लॉक करती हुई बोली ,

"माँ , माँ , वोह नै आएगा , बहार तूफान आया है , इतने तूफान में , वोह मेरे लिए क्यों आएगा , नै आएगा माँ , वोह नै आएगा..." अनु बेहद रट हुए बोलै ,

"इक और थपड मृगी , मने कहा वोह नै आएगा , चुप चाप वही करो , जो मने कहा है , चलो रूम में..." वेदना बेहद गुस्से में अनु का हाथ पकड़ उसे खींचते हुए उसके रूम में ले गई ,

वही दूसरी तरफ...

"काट , काट , आँखें खोलो , क्या हुआ..." यह बेबी थी , जो काट का सार अपनी जांगू पर रखे सेहला रही थी ,

"लेकिन काट को हुआ क्या..." कोमल थोड़ा परेशानी में boli..."or भइआ कहा हैं.."

"हाँ , रवि कहा है , ओह्ह मुझे लगता है , काट ने रवि का डेविल फेस देख लिया , लेकिन फर्जी के यहाँ रहते , रवि कभी डेविल रूप नै ले सकता..." बेबी भी बेहद परेशानी में रट हुए बोली ,

"क्या बकबक किये जा रही हो , दूर हटो , में अपनी जान को अभी होश में लती हु..." ख़ुशी , बेबी के रोटू चेहरे को देख मुस्कराते हुए बोली , और फिर ख़ुशी ने काट के माथे पर हाथ रखा , ख़ुशी के हाथ से कुछ किरणे निकली , और काट के सार में समां गई ,

पर तभी ख़ुशी को कुछ एहसास हुआ , उसने अपनी बंद आँखों से कुछ देखा , ख़ुशी इक डैम से काट से दूर हो गई , वोह बेहद घबराई हुई थी , उसने कभी सोचा भी नै था , काट वही है ,

ख़ुशी इक डैम से उठ कर रूम से बहार चली गई , बेबी भी हरिजन सी हो गई , लेकिन उसे काट की चिंता था ,

"रावी , तुम यहाँ क्या कर रहे हो , इस पहाड़ पर क्यों एते हो बार बार , यह पहाड़ तोह आसमान को चीरता हुआ ऊपर hi उठता जा रहा है..." काट , रवि के कंडे पर हाथ रख बोली ,

"यही तोह डेविल का घर है , यह मेरा सिंघासन है , यहाँ से में पोरे हेलल पर नज़र रखता हु..." रवि वैसे hi काट की तरफ पीठ किये हुए बोलै ,

"उफ्फ्फ , तुम फिर से सुरु हो गए , हेलल , डेविल , में तंग ा चुकी हु तुमसे , तुम , तुम , डेविल नै हो..." काट ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"ाहः , में hi हु डेविल..." रवि बेइंतहा हस्ता हुआ , इक डैम से काट की तरफ पलट गया , रवि का चेहरा अभ बदल चूका था , बेहद बदसूरत , बेहद ब्यांक , अखन लाल रंग में चमकने लगी ,



"नईईई..." काट जोर से चीखती हुई , पहाड़ से गिरने लगी , निचे दहकती हुई आग थी , जब काट उस आग से लथपथ जमीन से टकराई , तभी वोह चीखती हुई उठ बैठी ,

"नईईई रविइइइ..." काट इक दर्दनाक चीख मरते उठ कर बेथ गई , उसकी सांसे तेज़ चल रही थी , पूरा बदन पसीने से भरा हुआ था , होंठ कम्प रहे थे , वोह बेहद दरी और सेहमी हुई थी ,

"काट , काट , में बेबी , मेरी बहु में ायो काट..." बेबी बेबाद नाम आँखों से बोली ,

"बेबी , वोह , वोह , में , वोह , बबयय , rr..ravii..." काट बेहद दर से कंपते हुए बेबी के गले लग गई ,

"शहहह , शांत हो जाओ , में हु न , सब भूल जाओ , मेरी बहु में सिमट जाओ मेरी जान..." बेबी , काट का माथा चूमते हुए बोली ,

फिर काट ने कास कर बेबी को बहु में भर लिया , उसका जिस्म अभी भी कम्प रहा था , क्यों की उसने जो देखा था , वोह सच में बेहद ब्यांक था ,

वही दूसरी तरफ...

रवि आखिर अनु के घर पहुँच hi गया , शहर में इतना तेज़ तूफान था , के कुछ दिखाई भी नै पढ़ रहा था , हवा में समाये मिटटी और धूल के कनु ने , पोरे शहर के लोग को अँधा कर दिया था ,

रवि निचे जमीन पर उतारते hi नार्मल हो गया , उसने अनु के घर का दरवाजा खटकता दिया , कुछ hi पलु में वेदना ने दरवाजा खोला , उसकी आँखों में असनु थे , बहार अभ मासूम शांत हो गया था , अभ ऐसा लग hi नै रहा था , के कुछ देर पहले शहर में तूफान आया था ,

"रावी..." वेदना रट हुए बोली ,

"जी , अनु कहा है , कैसी है अभ..." रवि ने बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै और घर के अंदर घुस गया ,

"रवि , उसने नंद की गोलियां खा ली , पता नै क्यों , जब गई थी , तब खुश थी , और घर आकर अपने रूम में घुस गई और रोने लगी , वोह तुम्हारा नाम ले रही थी बार बार , तोह मने तुम बुला लिया ..." वेदना ने झूठ बोलते हुए कहा ,

"ओह्ह पागल लड़की , क्यों किया उसने , ाचा वेदना जी , डॉक्टर को बुलाया अपने .." रवि , अनु की बेहद चिंता करते हुए बोलै ,

"हाँ , डॉक्टर ने कहा , वोह ठीक हो जाएगी , अभी सो रही है , तुम देख ायो उसे , में तुम्हारे लिए कुछ लती हु..." वेदना बेहद नाम आँखों से यह बोल किचन की और चली गई ,

रवि जल्दी से अनु के रूम की तरफ चला गया , रवि ने रूम के अंदर जाकर देखा , अनु बीएड पर सीधी सोई थी , उसकी आँखें बंद थी ,

रवि अग्गे बढ़ता हुआ , अनु के पास hi बेथ गया , और उसके मासूम चेहरे को देखने लगा , उसने झुक कर अनु का माथा चुम लिया ,

"अभ सकूं मिल गया , क्यों , आखिर क्यों , यह सब क्यों किया , में करता हु तुमसे प्यार , बहुत प्यार करता हु , जब तुमने कहा के तुम मुज़से प्यार करती हो , बस तभी से में भी करने लगा , हैश्च , अनु , में डरता हु , अगर तुम कुछ हो गया , तोह में यह बोझ नै उठा पाउगा , अनु , में तुमसे बहुत प्यार करता हु , ी लव यू..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै , और झुक कर अनु के होंठो को चुम लिया ,

अनु सोई नै थी , वोह बस नाटक कर रही थी , लेकिन अभी भी उसने आँखें नै खोली थी , वोह और सुन्ना चाहती थी , उसका दिल कह रहा था , रवि अज्ज सब बतिअन बोल दे , कोई बात दिल में छुपा कर न रखे ,

"अनु , इक बात कहुगा , तुम बहुत जिद्दी हो , इतनी जिद्द अछि नै होती , तुमने मुज़से कहा था , के तुम्हारा , उफ़ , तुम्हारा रपे हुआ है , इस लिए में तुम पसंद नै करता , नै अनु , वोह सब झूठ है , तुम्हारे मन का वहां है , में तुम्हारे साथ हु अनु , जिंदगी भर तुम्हारा साथ दूंगा , बस फिर कभी वोह रपे वाली बात मत बोलना , उसे भूल जाओ , और वैसे भी , उस पाक़िआ को मने मर दिया है , उसके हेलल में पकोड़े टेल जा रहे हैं , हाँ अगर तुम खाना चाहती हो , तोह मेरे साथ हेलल चलो..." रवि नाम आँखों से मुस्करा कर बोलै , तोह अनु के होंठो पर इक मुस्कान फैल गई , वोह मुस्कराने लगी , और रवि समाज गया के अनु सोई हुई नै है ,

"उम् , मेरी अनु , अनु इक बात कहु , ओह्ह वैसे भी तुम सो रही हो , फिर भी कह देता हु , तुम्हारा फिगर बहुत मस्त है , अभ जल्द से जल्द त्यार हो जाओ , बहुत जल्द तुम्हारे कपडे उतर कर , में तुम..." रवि अभी बोल hi रहा था के अनु ने इक डैम से आँखें खोल ली , उसे बेहद शर्म ा रही थी , उसने करवट बदल अपना चेहरा तकयी में छुपा लिया ,

तभी रवि को किसी के ऐनी की अहहत हुई , रवि ने देखा वेदना आयी थी , वोह रवि के लिए जूस बना कर लायी थी ,

"थैंक्स वेदना जी..." रवि मुस्करा कर बोलै ,

"अरे , थैंक्स किस बात के लिए , अपने हमारी कितनी मदद की , अगर अप्प न होते , पता नै हम दोनों का क्या होता..." वेदना अपने असनु साफ करते हुए बोली ,

"उफ़ वेदना जी , मने उस दिन भी आपसे कहा था , में यह अपने लिए कर रहा हु , न के अनु के लिए , लेकिन अभ मुझे लगता है , यह सब मने अनु के लिए किया , आपकी बेटी बहुत जिद्दी है..." रवि जूस पता हुआ अनु की तरफ देख मुस्कराते हुए बोलै ,

"जिद्दी , अरे यह तोह जिद्दी लोग की मलिका है , ाचा अप्प अनु का ख्याल रखना , में बाजार से कुछ सामान ले आयु..." वेदना मुस्करा कर यह बोली और वह से चली गई , वैसे वोह रवि और अनु को अकेले वख्त देना चाहती थी , उसने जाते जाते रूम का दरवाजा बंद कर दिया ,

रवि भी अपने जुटे उतर अनु के साथ लेट गया , अनु अभी भी तकयी में चेहरा छुपाये , दोनों की बतिअन सुन रही थी ,

रवि ने अनु की तरफ करवट लेकर उसकी कमर पर अपना हाथ रख दिया , और उससे चिपक कर लेट गया , अनु सेहर सा गई , उसका जिस्म कम्प सा उठा , उसकी सांसे तेज़ तेज़ चलने लगी ,

"अनु , में जनता हु , तुम सोई नै हु , उफ़ तुम्हारी गांड कितनी मोती है , लेकिन तुम्हारी कमर बहुत पतली , ऐसा क्यों अनु , यार में गाओं का किसान आदमी हु , में ऐसे hi बात करता हु , ाचा अपनी छूट तोह दिखाओ मुझे..." रवि ने अनु के गदराये चूतड़ों के बेच अपना खड़ा लुंड सत्ता कर , धीरे धीरे ढके जड़ते हुए पूछा ,

"अह्ह्ह्ह सीईई..." अनु सिसक पढ़ी , लुंड की चुंबन को अपने मोठे गराये चूतड़ों के बेच पाकर ,

फिर रवि ने अनु की गांड पर हाथ रखा , और उसकी टाइट लोर के ऊपर से hi , उसके चूतड़ों को दबाने लगा , अनु के नरम चूतड़ों का मास्स रवि के हाथ में भरता चला गया , अनु के जिस्म में इक मेथा सा दर्द दौड गया ,

"ोूछह अहह रावी..." अनु सिसकते हुए इतना बोली और पलट कर रवि के गले लग गई , उसकी सांसे बुलिट ट्रैन की रफ़्तार जैसे तेज़ तेज़ चल रही थी ,

"अनु तुम्हारे चूतड़ इतने मोठे कैसे हुए , बताओ न उम् , कितनी खूबसूरत हो तुम , आँखें खोलू न मेरी जान..." रवि ने अनु के दोनों गदराये चूतड़ों को कास कर मसलते हुए बोलै ,

फिर रवि ने अनु के गुलाबी रसीले होंठो पर अपनी ऊँगली फिरै , उफ़ बेहद नरम होंठ , रवि के ऊँगली से पिस्टे चले गए ,

रवि ने तेज़ी से अपने होंठ अनु के होंठो पर रख दिए , रवि धीरे धीरे अनु के निचले होंठ को दांतो में दबा दबा कर चूसने लगा , अनु के बदन में इक मीठे से दर्द की लहर दौड गई , उसने बंद आँखों से , रवि के बाल सहलाते हुए , उसका साथ देना सुरु कर दिया ,

दोनों के होंठ आपस में उलज़ते चले गए , लड़ते चले गए , रवि बेच बेच में अनु के शरबती होंठो को चूसते हुए , अपनी जीभ उसके मोह में घुसाने लगता , पर अनु अपना मोह नै खोल रही थी , रवि ने अनु के इक गुब्बारे जैसे पहले हुए दूध को कास कर मसल दिया ,

"ोुछहहह.." अनु दर्द से सिसक पढ़ी , पर जैसे hi उसने अपना मोह खोला , रवि की जीभ उसके मोह में अंदर तक घुस गई , अनु मन hi मन रवि की इस चल पर मुस्करा पढ़ी ,

फिर रवि अपनी जीभ को अनु के मोह में ेहडेर ोहडेर घूमते हुए उसके होंठो को बेहद कास कर चूसने लगा , इतनी तेज़ चूसै से अनु के गुलाबी होंठो में जलन सी होने लगी , लेकिन उसे मज़ा भी बेइंतहा ा रहा था ,

करीब 10 मिंट तक दोनों इक दूसरे के होंठो को पगलू की तरह चूसते रहे , फिर दोनों तेज़ तेज़ हाफने लगे , अनु की आँखें अभी भी बंद थी , उसके मोठे मोठे चुके , तेज़ी से ऊपर निचे होते हुए , रवि के लुंड को बेकाबू कर रहे थे ,

रवि ने सेहन न कर पते हुए , अनु को इक डैम से उठा कर बैठा दिया , अनु ने मदहोशी में अपनी आँखें जरा सी खोली , और फिर शर्मा कर अपनी आँखें बंद कर ली ,

रवि ने अनु की टीशर्ट को कमर से ऊपर उठा , उसके गले में से बहार निकल दिया , उफ़ अनु के दूध जैसे सफेद गोर चुके , अभ इक काली ब्रा में आधे ढके हुए नज़र ऐनी लगे ,

रवि ने देरी न करते हुए अनु की ब्रा भी खींच कर फाड् दी ..."ोुछहहह माँ..." अनु थोड़ा दर्द में सिसक उठी , पर उसने रवि को रोका नै ,

"अनु.."

"हूँ..." अनु शर्मा कर बोली ,

"हाय अनु , इतने मोठे मोठे आम कहा से लायी तुम , उफ़ अगर मुझे पहले hi दिखा देती , कब का तुम्हारे ामो का रास निचोड़ लेता..." रवि अनु के दो बड़े बड़े चुचु को घूरता हुआ बोलै , जिनके गुलाबी निपल दोनों चुचु की गोलाई पर केहर ध रहे थे ,

"मुझे नै पता..."

"ाचा , अनु तुम छोड़ दू , तुम्हारी छूट में अपना लुंड घुसा कर , बहुत मज़ा आएगा , बोलू न..." रवि , अनु की आँखों में ज़क्त हुआ बोलै ,

अनु एकदमसे sharmagaiorboli."dhatttt,muzenaipata" अनुने अपनी ाखोंपरहतृखलिया.

रवि ने अनु को कास कर अपने बदन से चिपका लिया , और उसके होंठो को चूमने लगा.

अनु भी खूब छुडासी हो गई थी , उसकी टाइट छूट की फांके खूब गीली हो चुकी थी , वोह भी मदहोश होकर रवि के होंठो को कास कास कर चूसने लगी ,

अनु के होंठो को बेदर्दी से चूसते चूसते रवि ने अपने हाथो को उसके पके हुए ामो पर रख दिया , उफ़ अनु के दोनों दूध इतने ठोस थे , जैसे किसी औरत की जांगू का मास्स हो , रवि दोनों कैसे हुए चुचु को दबाने लगा ,

जब रवि को धीरे धीरे से मज़ा न आया , तोह रवि दोनों दूध कास कर , पकड़ कर , खींच खींच कर , दबाने लगा , जब जब रवि अनु के चुचु को कास कर दबाता , तब तब उसके गुलाबी निपल और भी तन जाते , उफ्फ्फ रवि मज़े की दुनिआ में उड़द रहा था , दोनों निपल भी ऐसे थे , जैसे किसी सफेद पहाड़ का शिकार हो ,

"ओह्ह्ह्हह्ह शहहहहहहहहह..." अनु ने आँखें बंद कर सिसकते हुए कहा.

रवि ने अनु को बीएड पर लिटा दिया , और उसके पहाड़ जैसे सफेद दूध के तने हुए निप्पल को मोह में भर लिया , और उसे कास कर चूसते हुए , दूसरे दूध को गोल गोल हाथ घुमा कर मसलने लगा ,

दूसरी तरफ अनु अपनी पानी छोड़ती छूट को रवि के लुंड पर निचे से कमर हिला हिला कर खूब घिसने लगी , इससे उसकी छूट और भी गीली होकर उसे तंग करने लगी ,

"अह्ह्ह अह्ह्ह sssssiiiiiiiiiii अह्ह्ह्ह रवीए श..." अनु लगातार सिस्कियाँ भर रही थी , पर शर्म के मरे यह बोल नै रही थी , के मुझे छोड़ो , मेरी छूट फाड् दो ,

दूसरी तरफ रवि भी अनु के पके हुए मोठे आम के गुलाबी निपल को दांतो से हलके हलके काटने लगा ,

"आहहहससीईईईएहहससीईईईरवीईई" अनु के मोह से घुटी घुटी सिस्कियाँ निकल रही थी , रवि ने अनु के मोठे मोठे दूध को चूस चूस कर , मसल मसल कर लाल कर दिया था.

अनु अभ खूब छुडासी हो चुकी थी , उसकी छूट में अजीब सी खुजलाहट पैदा हो रही thi.ravi ने कुछ देर अनु के मोठे मोठे मम्मो का रसपान करने के बाद , उसने अनु का चेहरा दोनों हाथो में पकड़ कर उसके होंठो का रास चूसना सुरु कर दिया , रवि अभ बहुत कास कास कर अनु के नरम होंठो को चूस रहा था , जिस कारन अनु के होंठो में मीठा मीठा दर्द हो रहा था. कुछ देर अनु के होंठो को कास कर चूसने के बाद रवि उसके मासूम चेहरे को देख बोलै ,

"अनु..."

"हूँ.."

"में तुम बहुत चाहता हु , और तुम कभी अकेला नै छोड़ूगा , क्या में तुम्हारे साथ सेक्स कर सकता हु..." रवि ने अनु के गुलाबी होंठो को चुम कर पूछा ,

"मुझे नै पता..." अनु बेहद शर्मा कर बोली ,

"तोह रहने देता हु..." रवि उदास होकर बोलै ,

"रवि , मेरा सपना था , में सेक्स का पहला दर्द अपने प्रेमी से पानी चाहती थी..." अनु बेहद नाम आँखों से बोली ,

"जनता हु , में यह जनता था..."

"पर कैसे..." अनु बेहद हरिजन होकर बोली ,

"क्यों की , में डेविल हु , अज्ज तुम डेविल से प्यार करुँगी , और डेविल तुम सेक्स के अलग अलग सुख देगा , डेविल को बस सेक्स hi तोह करना अत है , तोह अनु , अभ डेविल के साथ मज़े की दुनिआ की सैर करो.." रवि मुस्कराते हुए अनु के चूसै से थोड़ा सुज़े होंठो को चूस कर बोलै....

वही दूसरी तरफ....

"उफ्फ्फ , मेरी काट , मेरी जान , क्या हुआ मेरा बचा हूँ , बोलो..." बेबी , काट के शांत होते hi , उसके पोरे चेहरे को चूमते हुए बोली ,

"बेबी , वोह , वोह , रावी , हाँ , रावी , बेबी , वोह डेविल ही , mm...mane ..dd...dekha , वोह , वोह , डेविल ही , मुझे , मुझे , शेतीअन से प्यार हुआ , नयी , नयी , यह क्यों हुआ मेरे साथ..." काट बेइंतहा रट हुए बोली...

बेबी और सब हरिजन थे , वोह समाज नै प् रही थी , वोह क्या बोले , जिस बात का उसे दर था , वही हुआ , लेकिन अभ उसे , काट के मन में , फिर से रवि के प्यार का फूल खिलाना था , वोह कुछ सोच रही थी , इस मुसीबत का कोई दूसरा हल...

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-86

अभ अग्गे...

रवि ने अनु के होंठो को चूमने के बाद , उसने अनु की गर्दन को चेतना चूमना सुरु कर दिया ,

"आआह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह सीईई ओह्ह्ह्ह रावी अह्ह्ह उम्..." अनु मदहोशी में आँखें बंद कर सिस्कियाँ भरने लगी ,

रवि के होंठ धीरे धीरे निचे की तरफ बढ़ने लगे , उफ़ रवि , अनु के पोरे बदन का रास पता हुआ उसके मखमली पेट तक पहुँच गया , रवि ने अपनी जीभ को खूब कड़ा कर अनु की कोमल मुलाम नाभि को चेतना सुरु कर कर दिया ,

"आऐहहहहहह ह्ह्हहष्ठ्हहह अह्ह्ह्हह रवि नै प्लस अह्ह्ह्ह pls"anu को मज़े के साथ साथ बेहद गुदगुदी भी हो रही थी , वोह अपने मखमली चूतड़ बीएड पर घिसते हुए मचलते हुए रवि को रोक रही थी ,

रवि कुछ देर नाभि को चाटने के बाद , उठ कर अनु की जांगू को पूरा खोल वही झुक कर बेथ गया , अनु की छूट पूरी गीली हो चुकी थी , उसकी लोर भी , खूब भेज गई थी , छूट से बहते नमकीन रास से ,

"उम्माह्ह्ह्ह..." रवि ने लोर के ऊपर से hi छूट पर अपने होंठ रख इक लम्बी साँस खींची , उफ्फ्फ अनु की कमसिन छूट की लाजवाब खुशबु प् रवि मदहोश सा हो गया ,

रवि ने बेहद तेज़ी से अनु की लोर खींच कर उतर दी , अनु ने अपने गदराये चूतड़ों को ऊपर उठा रवि की पूरी मदद की , अनु की टाइट लोर उसकी तंग से निकल चुकी थी , फिर रवि ने उसी तेज़ी से अनु की कामर्स से भेजी पेंटी भी खींच कर उतर दी , और उसकी गीली पेंटी को अपने होंठो से सत्ता सूंघने लगा , उफ़ अनु तोह शर्म के मरे टमाटर जैसी लाल हो गई ,

िका इक रवि की नज़र अनु की छूट पर गई , और वही जैम सा गई , उफ़ हलके हलके बालो से भरी छूट , जिसके दो छोटे छोटे होंठ आपस में जुड़े हुए थे , जैसे पेन से कागज पर इक लेकर खींच दी गई हो , रवि ने अपनी इक ऊँगली को छूट की फेंकू में ऊपर से निचे तक फिरा दिया ,

"ोोोोूछ्हःह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह" अनु का पूरा बदन कम्प गया , जब रवि की ऊँगली उसकी कमसिन टाइट छूट के अंदर घुसी तोह.

"अनु तुम अभ भी कुवारी हो , मेरी जान , बहुत टाइट छूट है उफ्फ्फ..." रवि अपनी ऊँगली को धीरे से छूट के अंदर घुसते हुए बोलै , छूट से निकलते पानी से रवि की ऊँगली पूरी भेज कर चमकने लगी , अनु खामोश होकर मुस्कराने लगी ,

"उफ़ अनु तुम्हारी छूट इक डैम छोटी सी है , अभी तक बड़ा लुंड नै लिया तुमने , बोल न मेरी जान , घुसा दू अपना लुंड..." रवि ने छूट के दोनों मुलाम होंठो को अपने हाथ से मसलते हुए बोलै ,

"आआआसईईईई आआह्ह्ह्हह..." अनु ने बस सिसकी ली पर वोह कुछ बोल न पायी , रवि समाज गया के अनु शर्मा रही है ,

रवि ने अनु की तंग को मोड़ कर उसके घुटनो को उसके मम्मो से लगा दिया , जिस कारन अनु की छूट थोड़ी ऊपर उठ गई , और अनु ने अपनी आँखें मदहोशी में थोड़ी सी खोल ली ,

रवि ने अनु की आँखों में देखते हुए , अपनी जीभ बहार निकल , गीली छूट के नरम होंठो को .."सुररपपपपपप..." की आवाज़ करते कास कर चाट लिया ,

"आअह्ह्ह्हह सीईईई आअह्ह्ह रविइइइ..." अनु बेहद सिसकते हुए बोली , इतना मज़ा , इतनी वासना , उसकी छोटी सी छूट सेहन न कर पायी , वोह जटके कहती जड़ने लगी ,

"उफ्फ्फ तुम्हारा रसीला पानी..." रवि मुस्करा कर सिसकते हुए बोलै , और फिर छूट से निकलते रास को चाटने लगा , अनु की तोह जैसे मज़े में जान hi निकलने को हो गई , उसने बीएड की चादर को मुथियों में भर कर कास लिया , और अपनी जड़ चुकी छूट पर रवि की नरम जीभ का स्पर्श पाकर हवा में उड़ने लगी ,

"उम्म्म सुरररपपपप सुररपपपप..." रवि बेहद मदहोशी में अनु की छूट की फेंकू को जीभ घुसा घुसा कर चाटने लगा , अनु को ऐसा मज़ा पहले कभी नै मिला था , वोह

"aaaasaahhhhhhhhhh माआआआ सशह्ह्ह्हह्ह्ह्ह रुक्खकुओ ाशहठ" छिलने लगी , पर रवि की जीभ अपना काम करती गई ,

अनु की छूट से अभ बेइंतहा रास बहने लगा था , उसकी छोटी सी छूट में नमकीन रास का जर्ना बह रहा था , और रवि उसकी छूट को किसी भूके कुत्ते की तरह लापप्पाररर लापप्पारररर करते चाट रहा था , और अनु मज़े में लम्बी लम्बी सिस्कियाँ लेती अपना सार बीएड पर ेहडेर ोहडेर पटक रही थी ,

अनु को बेहद मज़ा ा रहा था , यह उसकी जिंदगी का पहला छूट छुटाव था , रवि ने इतनी शिदत से अनु की कमसिन छूट को छठा के कुछ hi पलु में उसकी छूट लाल लाल नज़र ऐनी लगी थी ,

फिर रवि ने अनु की जांगू पर थोड़ा और दबाव दाल , उसकी छूट के थोड़े से खुले लाल छेद में अपनी जीभ को अंदर घुसा चूसना सुरु कर दिया ,

अनु "ासाआआअह्ह्ह्हह माहास माररररर गायआउईईईई अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह मेरा पेशाब निकलललललल रेहाआआ है आईईईई अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह रुक्खकूऊऊ" अनु और कुछ बोल पति इस से पहले उसकी छूट से दूसरी बार रास की तेज़ धार बह निकली , जिसे रवि चाट ने लगा , इससे अनु और मचल ने लगी , उसकी गांड रवि के होंठो पर अपनी छूट को उछाल उछाल कर ढके मरने लगी.

जब अनु की छूट का रास बहना रुका , तब रवि उठ कर बेथ गया , अनु आँखें बंद कर तेज़ तेज़ सांसे भर रही थी , रवि ने अनु के मदहोश चेहरे को देखा और मुस्करा दिया ,

अनु ने आँखें खोल रवि को देखा और फिर शर्मा गई , रवि ने उठ कर अपने सरे कपडे निकल दिए , उसका कला लुंड हवा में आज़ाद होकर उछाल कूद मचने लगा , अनु बस रवि का लुंड देखती रह गई , उसका दिल धक् धक् करने लगा , उसकी आँखों में इक दर था ,

"पसंद आया..." रवि , अनु को आँख मर बोलै , तोह अनु ने शर्मा कर अपने चेहरे पर हाथ रख लिए ,

"अनु तुम चुदाई का पहला दर्द महसूस करना चाहती थी न , अज्ज में तुम वोह दर्द बहुत प्यार से दूंगा , मेरी जान..." रवि ने अनु के ऊपर लेट उसके चेहरे से हाथ हटा उसके होंठो को चूसते हुए बोलै ,

"पर , अहह , बहुत बड़ा है.." अनु शरमाते हुए बेहद धीमी आवाज़ में बोली ,

"कुछ नै होगा , में प्यार से करुगा , अभ में रुक नै सकता..." रवि ने बेहद उदासी में बोलै , तोह अनु भी समाज गई ,

"प्लस दर्द मत होने देना..." अनु ने मुस्करा कर बोलै ,

"बस थोड़ा सा होगा , उसके बाद तुम जानत देखोगी..." रवि मुस्कराते हुए बोलै , और उठ कर अनु की जांगू को छोड़ा कर बेथ गया ,

"अह्ह्ह रवि ढेरी..." अनु सिसक कर बोली , जब रवि अपना लुंड उसकी कमसिन छूट पर घिसने लगा , लुंड का मोटा टोपा छूट के डेन पर रगड़ कहते hi अनु ने जोरदार सिसकी भरते हुए अपने निचले होंठ को दांतो में दबा लिया ..."आअह्हह्ह्ह्ह शहहहहह..." अनु ने जोर से सिसकते हुए आँखें बंद कर ली , जब रवि बोलै..

"अनु यह लो मेरा लुंड..." इतना बोल रवि ने लुंड का सूपड़ा छूट के दोनों नरम होंठो के बेच रख , कास कर इक ढाका जड़ दिया , रवि का मोटा लम्बा लुंड छूट की नरम दीवारों को चीरता , चिलता हुआ , थोड़ा सा अंदर घुस गया ,

"ाआसाविइइइइइइइइ माहास उउउउनंनंन्न ु नननननननन प्लस निकालो bahar"anu ने दर्द से छटपटाते हुए कहा , पर अनु नै जानती थी , के लुंड और सांप , इक बार बिल में घुसने के बाद , अपनी ीचा से hi बहार एते हैं ,

"अह्ह्ह्ह रवीए दर्द हो रहा है सीईईई मा..." अनु बेहद दर्द में अपना चेहरा बीएड पर ेहडेर ोहडेर पटकते हुए बोली ,

"बस अनु कुछ देर और..." रवि ने अनु की मुलाम जांगू को चूमते हुए बोलै , फिर रवि , अनु के ऊपर लेट गया , और उसके नरम गुलाबी होंठो को चूसने लगा , तेन की अनु का दर्द काम हो जाये , रवि साथ में अनु के गोल गोल मम्मो को भी दबाता रहा , कुछ वख्त ऐसे hi गुजर गया ,

दूसरी तरफ अनु अपनी छोटी सी छूट में मोठे लम्बे लुंड को घुसा महसूस कर रही थी , वोह अपने सपने को जी रही थी , जो दर्द वोह महसूस करना चाहती थी , वोह महसूस कर रही थी , उसकी आँखों से असनु बहने लगे थे ,

"क्या हुआ , दर्द हो रहा है..." रवि ने अनु की गलो को जीभ से छत्ते हुए बोलै ,

अनु कुछ न बोली , बस मुस्कराने लगी , फिर रवि भी मुस्करा पढ़ा , उसने कास कर इक और ढाका जड़ दिया , रवि का लुंड अनु की कासी हुई छूट को फाड़ता आधे से जायदा अंदर घुस गया , उफ़ रवि को इतना मज़ा कभी नै आया था , अनु की कासी हुई छूट ने लुंड को पूरी तरह कास रखा था , इतना कास रखा था , के रवि का लुंड छूट में हिल भी नै रहा था , इस तेज़ ढके से अनु चीख पढ़ी...

"आआआआआउईईई oooouuuuoiiiiiiiiiiiiiiiii माआआआ shhhhhhhhhhhh मरररररर दिय्यःया साहाहहहहहहह रवि इक बार निकल लो अह्ह्ह्हह" अनु ने तरस भरी नज़रो से रवि को देखते हुए कहा.

"बस कुछ देर दर्द hoga"ravi ने अनु के ऊपर झुक कर उसके होंठो को चूसते हुए बोलै ,

"उफ्फ्फ मा बहुत बड़ा ही , aeeiiiiiiiiii मेरे पेट में ाअस्सष्ठ घुस गया ही.." अनु बीएड पर सार ेहडेर ोहडेर पटकते हुए असनु भेजी आँखों से बोली ,

"बस जान , कुछ देर दर्द होगा..." रवि ने इतना बोल धीरे से लुंड को पीछे खींच कास कर इक और ढाका जड़ते हुए बोलै ,

"एआईईईईईईई मा मर्डर गईइइइइइ शहहह aaaieeeeeeeeeeeiiiiiiiiiiii..." अनु दर्द से चीखती हुई बोली , और रवि का पूरा घोड़े जैसा लुंड अनु की छोटी सी छूट में जड़ तक घुस गया ,

रवि लुंड छूट में पूरा घुसा अनु के ऊपर लेट गया और उसके नरम होंठो को कास कर चूसने लगा , अनु आँखों से असनु बहती हुई , अपने होंठ चुसवाने लगी , कुछ देर मचलने के बाद अनु थोड़ी शांत हो गई , पर उसे अभ भी दर्द महसूस हो रहा था ,

"अह्ह्ह अनु और दालु क्या..." रवि ने मज़ाक में बोलै ,

"क्या , नयी और मत डालना प्लस , में मर जोगी , आईईईई इक बार निकल लो ..." अनु ने बेहद घबरा कर मिनट भरी नज़रिओं से रवि को देखते हुए बोलै ,

"अहह क्या छूट है जान , इक डैम नरम और कोमल..." रवि ने लुंड छूट से पीछे खींच फिर से अंदर डालते हुए बोलै

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह..." अनु ने दर्द के साथ इक सिसकारी भरी , छूट अभ थोड़ी थोड़ी गीली होने लगी थी ,

रवि ने अनु की तंग को उठा , अपने कण्डु पर रख , फातच फायततछःह तेज़ तेज़ ढके मरने सुरु कर दिए ,

"आह्ह्ह्हह धीरे अस्सह्ह्हह्ह अग्घहहह प्लस धीरे रवीए अह्ह्ह..." अनु ऐसे चिलाती रही , पर रवि अनु की छूट को तेज़ रफ़्तार से छोड़ता रहा ,

"आह्हः अनु तुम्हारी छूट बहुत रसीली ही.." रवि को अपना लुंड अनु की कासी हुई छूट के अंदर घिसता , रगड़ खता , अंदर बहार होता महसूस हो रहा था , लुंड जब छूट से बहार अत , अनु की छूट थोड़ी सिकुड़ जाती , उसका लाल लाल मास्स आपस में मिल जाता , पर जब लुंड तेज़ घाटी से फिर अंदर घुसता , तब वही लाल मास्स लुंड को जकड कर चारो तरफ फैल जाता ,

"अह्ह्ह्ह रविइइइ ी लव यू , उम् मेरी जान अह्ह्ह्ह थोड़ा धीरे कारु अह्ह्ह शठ..." अनु अभ चुदाई का मज़ा लेते अपनी गदराये चूतड़ों को ऊपर उठा उठा कर , छूट में घुसते , बहार निकलते लुंड की रगड़ का मज़ा ले रही थी ,

अनु को इतना मज़ा कभी नै आया था , उसकी छूट पानी से लपलप भर चुकी थी , पाछहहहह पछ्ह्ह्ह फैट फट की अवाज़िओं का शोर तेज़ी से हो रहा था , जो गीली छूट में लुंड घुसने से हो रहा था ,

रवि बिना कुछ सोचे समझे बस छूट में ढके मरे जा रहा था , दूसरी तरफ अनु को दर्द के साथ साथ अभ मज़ा भी मिल रहा था , बार बार लुंड उसकी छूट के डेन को घिस रहा था , जिस कारन उसके बदन में इक बिजली सी दौड रही थी , धीरे धीरे वही बिजली उसकी छूट के करीब इकठा हो रही थी , उसका दिल जोर जोर से चखने को कर रहा था ,

"आह्हः शहहह रवीए तेज़्ज़ करूओ मी अह्ह्ह में अह्ह्ह्ह जड़ने वाली हूँ अह्ह्ह माआ..." अनु अपने निचे होंठ को दांतो में कास कर दबाते हुए बोली ,

"आह्ह्ह्हह याहहहह..." रवि और भी अनु के ऊपर झुक गया , अनु के घुटने उसके पहले हुए चुचु पर लग गए , चुचु के गुलाबी निपल घुटनो के दबाव से अंदर को धस गए , फट्ट्ट्ट फातटटटट की तेज़ आवाज़ और तेज़ ऐनी लगीई ,

20 मिंट बीत चुके थे , रवि ने उसकी छूट को थोक थोक कर सज़ा दिया था , पर वोह था के जड़ने का नाम नै ले रहा था , अनु पहले hi दो बार पानी छोड़ चुकी थी , अभ वोह तीसरी बार त्यार थी ,

"आह्ह्ह्हह शहहह मई गइईईई अहहू शठ अह्ह्ह..." अनु इक तेज़ सिसकी भरते हुए जटके खा खा कर जड़ने लगी ,

रवि ने इक डैम से छूट से लुंड निकला और पीछे को झुक , अनु की गीली पानी छोड़ती छूट चाटने लगा , उफ्फ्फ्फ़ अनु तोह मदहोशी में आँखें बंद कर सुस्त पढ़ गई , पर रवि उसी जोश में अनु की छूट को अपनी जुबान से लप्पारररर लप्पारररर छत्ता जा रहा था .

"aaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiii रवि अभ बस कारु , अह्ह्ह दर्द हो रहा ही अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह प्लस स्टॉप आईटी अहह.." अनु जड़ने के बाद रवि की जीभ को अपनी छूट पर सेहन न कर पते हुए सिसकती हुई बोली ,

"अह्ह्ह अनु मेरा नै हुआ अभी..." रवि ने अनु के ऊपर लेट , उसके होंठो को चूसते हुए बोलै ,

फिर रवि ने अनु को बीएड से निचे उतर दिवार के सहारे खड़ा कर दिया , रवि ने अनु को थोड़ा ज़ुका कर , पीछे से उसकी छूट की फेंकू में लुंड फसा कास कर इक ढाका जड़ते हुए , इक hi बार में पूरा लुंड जड़ तक छूट में पेल दिया ,

"aaaaaaeeeiiiiiiiiiii मर्डर गाइइइइ मा आह्ह्ह्ह नू नू प्लस..." अनु छूट में लुंड जाते hi दर्द से चीखती हुई बोली ,

"अह्ह्ह्हह ी लव यू अनुऊ अह्हह्ह्ह्ह शठ.." रवि , अनु की कमर हाथो में पकड़ कास कास कर ढके जड़ता हुआ बोलै ,

"चटककक चटककक..." रवि , अनु के मोठे गदराये चूतड़ों के अपने हाथो से मरता , तेज़ तेज़ ढके जड़ने लगा , "फाटत फट्ट्ट्ट पटछहः पटछहः की अवाजिअं गूंजने लगी , रवि की मज़बूत जंगे , अनु के मोठे चोदे चूतड़ों पर जब लगती जाती ,

"आह्ह्ह्ह मा सशः अह्ह्ह्हह रवीए ..." अनु इक बार फिर से गरम होती हुई , अपने चूतड़ों को रवि की जांगू पर पीछे को बार बार मरती सिसक कर बोली ,

अनु के चूतड़ पोरे लाल हो चुके थे , उसकी छूट से बेहटा पानी , उसकी तंग को खूब गीला कर रहा था , उसकी टंगे अभ कम्प रही थी ,

रवि के किसानी देसी लुंड के हर ढके से , शहरी लुण्डियां अनु , अपनी एडीईएन उठा चखने लगती , चूतड़ों का नरम मास्स , सागर में उठती लेहरो की तरह कम्पनी लगता ,

"अह्ह्ह्हह अनुउउउ मेरिइइइइ जांणण..." रवि अनु की कमर को पकड़ ताबड़तोड़ छूट में ढके जड़ता हुआ चीला कर बोलै ,

"अह्ह्ह मा प्लस धीरे अह्ह्ह धीरे रवीए..." अनु इतने तेज़ पढ़ते ढको से दर्द से कहरहते हुए चीख कर बोली , छूट में जड़ तक घुसते लुंड ने अनु की आँखें नाम कर दी थी ,

रवि और अनु चुदाई में लगे हुए थे , लेकिन उनके रूम के बहार कोई उनकी चुदाई की सिस्कियाँ सुन रहा था , यह वेदना थी , अनु की माँ , जो बाजार से लोट आयी थी , और पिछले 15 मिंट से दोनों की सिस्कियाँ सुन , खुद भी खूब गरम हो रही थी , और बार बार सदी के ऊपर से hi , अपनी जवान छूट को सेहला सेहला कर , खूब गीली कर रही थी ,

"अनु मज़ा ा रहा ही , रोज़ ऐसे hi छोड़ूगा , अह्ह्ह तुम घोड़ी बना कर , मेरी अपनी घोडीई अह्ह्ह्ह मेरी जान ..." रवि , अनु के ऊपर झुक उसकी गर्दन को चूमते , उसके कनु को होंठो में भर हलके हलके काटते हुए बोलै ,

"aaaieeeeeeeeeeeiiiiiiiiiiii बस कारु प्लस , रावी ी लव यू अह्ह्ह्ह शठ रुक जाओ थोड़ी देर अह्ह्ह शठ..." अनु पीछे हाथ लिजकर रवि को पीछे धकेलते सिसकते हुए बोली ,

"अह्हह्ह्ह्ह तुम मेरी हो अनु , सिर्फ मेरीए..." रवि ने अनु की तंग को थोड़ा छोड़ा कर , बेहद तेज़ ढके जड़ते हुए बोलै , उसके ढके इतने तेज़ थे , के अनु की सांसे hi रुक गई , उसका मोह खुला का खुला रह गया , फिर वोह चीख पढ़ी ,

"aaaaaaaaaaaaaaieeeeeee आआआह्ह्ह्ह रविइइइइ प्लस रुकोऊ प्लससससस माआ मा रुकूउ एसीई अह्ह्ह..." अनु बेहद दर्द से इक डैम से सीधी कड़ी होती हुई , लुंड को छूट से बहार निकलती हुई बोली ,

तभी इक डैम से रवि का लुंड अनु की छूट से बहार निकल , हवा में उछलने लगा , उसके लुंड से छूट के पानी की बूंदे जमीन पर गिरने लगीई ,

अनु वही दिवार के साथ पीठ टिकाये बेथ गई , और आँखें बंद कर तेज़ तेज़ सांसे भरने लगी ,

बहार कड़ी वेदना भी , इक तेज़ सिसकी भरते हुए जड़ने लगी , पर उसे नै पता था , रवि ने उसकी सिसकी सुन ली थी , क्यों की वोह डेविल था , और उसके कण बेहद तेज़ थे ,

रवि ने अनु को गॉड में उठा बीएड पर लिटा दिया , और उसके ऊपर लेट , फिर से अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया ,

"रवीए प्लस में और नई सेह सकती प्लसस रुक जाओ..." अनु ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"ठीक है जान , में और नै करुगा..." रवि , अनु के होंठो को कास कर चूमता हुआ बोलै ,

फिर रवि , अनु को बहु में भर लेट गया , कुछ देर बाद , दोनों ने कपडे पहन लिए , आखिर रवि , अनु का माथा चुम , बहार ा गया ,

वेदना भाग कर किचन में चुप गई , रवि ने इक बार मुस्कराते हुए किचन की तरफ देखा , और फिर घर से बहार निकल गया ,

वेदना ने इक रहत की साँस ली , पर तभी उसे एहसास हुआ , बहार फिर से तूफान ा गया था , तेज़ हवा चल रही थी , आसमान में बिजली चमकने लगी थी , पर वोह नै जानती थी , डेविल अपने घर जा रहा ही......

रवि जब घर पहुंचा , तब वोह नै जनता था , कोई उसे बालकोनी से देख रहा है , रवि डेविल रूप में जंगल में उतरा और फिर इंसानी रूप में जंगल से कबीले में ा गया ,

यह सब काट ने देखा था , जिसे सबने कुछ देर अकेले छोड़ दिया था , बस बेबी , फर्जी के पास बैठी , उसे सोते हुए देख रही थी ,

रवि जब नदी पर कर , घर के बेहद नज़दीक आया , तब उसकी नज़र ऊपर बालकोनी में कड़ी काट पर गई ,

काट उसकी तरफ देखती हुई थार थार कम्प रही थी , उसका चेहरा दर के पसीने से भरे हुआ था ,

रवि ने इक hi शब्द bola..."ohhh नू..." वोह काट की तरफ देखने लगा , दोनों इक दूसरे को देख रहे थे , यहाँ काट दर के कम्प रही थी , वही रवि खामोश खड़ा उसे देख रहा था ,

दोनों का नामुमकिन सा प्यार , शयद अभ डैम तोड़ता नज़र ा रहा था , क्या काट , रवि को अपना पायेगी , या रवि उसे झूठ बोलेगा , क्या काट यकीन कर पायेगी , रवि की बातिओं का , यह सब नेक्स्ट अपडेट में....

नोट: फ्रेंड्स सॉरी , आपके रेप्लीस के जवाब नै दे पाया , फ्रेंड्स कोरोना वायरस करके , ड्यूटी बहुत सख्त लगी है , तोह अज्ज वख्त नै मिला , म सॉरी...

तो बे कुनिटेड.....

 
सिराज भाई , चेहरे पर मास्क लगा कर इंडेक्स अपडेट कर देना :डी
 
फ्रेंड्स अभी अभी ड्यूटी से घर आया हु... रत को 9 बजे अपडेट पोस्ट कर दूंगा... शुक्रिया , और अपना ख्याल रखइए...
 


अपडेट-87

अभ अग्गे...

रवि निचे उदास खड़ा काट को प्यार भरी निगाहो से देखता रहा , पर काट उसकी तरफ कंपते हुए देख रही थी , उसके गुलाबी होंठ थार थार कम्प रहे थे ,

काट डर्टी भी क्यों न , उसने डेविल को देखा था , नाराज के राजा को , वोह बेइंतहा दर्द में थी , और उसे दुःख इस बात का था , उसने इक डेविल से प्यार किया ,

हलाकि काट पहले खुद भी बहुत बुरी थी , नजाने कितने लोग को मारा था उसने , पर तब वोह भटक रही थी , लेकिन जब बेबी ने उसके दिल में अपने प्यार की बारिश की , तब काट बदल गई , उसके बंजर दिल में , हज़ारो फूल खिल उठे , हज़ारो िचाईओं ने जनम ले लिया ,

बस उसके बाद काट पूरी तरह बदल गई , उसके अंदर की बुराई जड़ से ख़तम हो गई ,

लेकिन काट की पूरी जिंदगी का मकसद बस इतना था , उसे रवि की जिंदगी में एना था , बिमान शाह ने काट को विदेश से बुलाया , उसे मन चाहे पैसे दिए , तेन की रवि को मारा जा सके ,

काट आयी तोह यहाँ पैसो के लिए थी , उसका काम बस रवि को मरना था , पर उसे यह एहसास नै था , वोह यहाँ खुद नै आयी , उसे लाया गया था ,

कोई था जो चाहता था , काट , रवि के प्यार में दुब जाये , डेविल को इंसानो के बेच मेहफ़ूज़ रखे , उसे कमज़ोर करे , काट अभी अपने रूप से अनजान थी , अपनी शक्ति से अनजान थी , आखिर क्या वजह थी , के वोह दुनिआ के सबसे खतरनाक इंसान को बेहद कमज़ोर कर देती थी , शक्तिहीन कर देती थी ,

खैर , यह तोह ऐनी वाले वख्त की बात थी , काट कुछ पल रवि को देखती रही , और फिर दर कर पीछे हैट गई , रवि की नज़रिओं से दूर ,

"यह क्या कर दिया मने..." रवि मन hi मन दर्द भरी आवाज़ में बोलै , और तेज़ी से घर के अंदर जाने लगा , पर तभी वोह किसी की आवाज़ सुन रुक गया ,

"रावी भाई कैसे हूँ..." यह रेहान था , उसका दोस्त , कबीले का सरदार ,

"रेहान , मेरे दोस्त..." रवि , रेहान के पास जाकर उसे गले लगते हुए बोलै ,

"भाई , परसु होली है , आपको अपने पोरे परिवार के साथ होली खेलने एना हैई..." रेहान बेहद मुस्कराते हुए बोलै ,

"जरूर रेहान , बहुत मज़ा आएगा इस बार , ाचा इक बात बताओ..." रवि as-pas नज़र दौडते हुए बोलै ,

"हाँ बोलू भाई..."

"रेहान , रेणुका कहा है , जिसने कोमल से फाइट की थी कबीले में , यद् आया..." रवि बेहद घम्बिर होकर बोलै ,

"ाचा रेनू , हाँ , वोह यही है , अभ तोह वोह और भी अछि फाइटर बन गई है..." रेहान मुस्कराते हुए बोलै ,

"ठीक है , रेहान में मिलता हु तुमसे , वैसे अज्ज रत तुम और सूजी , हमारे साथ खाना खायुगे , जरूर एना..." रवि फिर से रेहान को गले लगा कर बोलै ,

"जरूर भाई , ाचा bye.." रेहान इतना बोल वापिस चला गया , रवि उसे जाते हुए देखता रहा , और फिर तेज़ी से घर में घुस गया ,

रवि घर में घुसा तोह कोमल और सीमा घर के हॉल में बैठी बतिअन कर रही थी , रवि भी उनके पास आकर बेथ गया ,

"भइआ कहा थे अप्प , वोह , वोह..." कोमल अभी बोल hi रही थी के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"काट बेहोश हो गई थी , कोमल उसे मेरे डेविल रूप का पता चल गया है..." रवि बेहद परेशान होकर बोलै ,

"उफ्फ्फ भाई अभ क्या होगा..." कोमल भी बेहद उदासी में बोली ,

"रवि , तुमने खाना खाया या नै..." सीमा थोड़ा गुस्से में बोली , और उठ कर किचन में चली गई ,

"सीमा , कोमल क्या बात है..." रवि , सीमा के ऐसे विव्हर को देखते हुए बोलै ,

"भाई , देदी ने खाना नै खाया , आपका वेट कर रही थी , सुबह से..." कोमल उठ कर रवि के साथ बैठते हुए बोली ,

"ओह्ह्ह मेरी सीमा , ाचा मेरी मोटू , तुमने खाना खाया या नै..." रवि , कोमल के गालो को चूमता हुआ बोलै ,

"नै..." कोमल नज़रियन ज़ुका थोड़ा शर्मा कर बोली ,

"उफ़ मेरी मोटू..." रवि , कोमल के गुलाबी दिलकश होंठो को चूसते हुए बोलै ,

"भइआ , सीमा देदी से बात करो..." कोमल , अपने भाई की आँखों में देखते हुए बोली ,

"जाता हु मोटू..." रवि इक बार कास कर कोमल के होंठो को चूस , उठ कर किचन में चला गया ,

कोमल अपने भाई को जाते हुए देखती रही , उसके होंठो पर इक मुस्कान थी ,

रवि किचन में घुसा , तब सीमा बेहद उदासी में काम कर रही थी , शयद उसके मन में बेहद गुस्सा था , रवि के लिए , पर यह गुस्सा काम , प्यार जायदा था ,

रवि ने सीमा को पीछे से बहु में भर लिया , और उसकी गर्दन को चूमते हुए बोलै.." सॉरी सीमू , माफ़ कार्डो..." रवि ने बेहद उदासी में बोलै ,

"किस बात के लिए..." सीमा वैसे hi रवि की तरफ बिना देखे काम करती हुई बोली ,

"ओह्ह्ह , ाचा , सीमा अज्ज तुम रमा के पास मत सोना , में तुमसे प्यार करना चाहता हु , करुँगी मुज़से प्यार..." रवि ने सीमा के पेट को अपने हाथो में कास , उसके नरम चूतड़ों को , अपने खड़े लुंड पर दबाते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्ह नई..." सीमा , रवि के सख्त लुंड की चुंबन अपने गदराये चूतड़ों पर महसूस करते सिसक कर बोली ,

"उफ्फ्फ तुम्हारी गांड बेहद नरम है , दिल करता है , अभी तुम नंगी करके , तुम्हारे नरम कमसिन चूतड़ों में , अपना लुंड घुसा दू..." रवि ने अपनी पेण्ट की जीप खोल , अपने नंगे लुंड को , सीमा के मस्त मोठे चूतड़ों के बेच कास कर दबाते हुए बोलै ,

"ोुछःह अह्ह्ह्ह कोई ा जायेगा..." सीमा अपनी गदरायी छोड़ी गांड को , लुंड पर दबाते हुए सिसक कर बोली ,

"फिर बोलू , रत को छूट में लुंड घुसाने डौगी या नै..." रवि ने सीमा की नरम गर्दन को चूमते छत्ते हुए बोलै ,

"ओह्ह्ह शठ हाँ , अहह अभ मत करो..." सीमा इक डैम से रवि की तरफ पलट उसके होंठो को चूमते हुए बोली ,

फिर रवि ने कुछ देर सीमा के नरम गुलाबी होंठो का रास निचोड़ा , और फिर वोह किचन से बहार ा गया , रवि सीधा सेड्यां चढ़ , काट से मिलने निकल गया , उसे अभ सामना करना था , मासूम काट का...

वही दूसरी तरफ...

रवि के जाने के बाद वेदना किचन से बहार आयी , उसके हाथ में इक बड़े से प्लास्टिक कप में गरम पानी था , और दूसरे हाथ में इक छोटा सा टॉवल था ,

वेदना मुस्कराते हुए अनु के रूम में घुस गई , उसने देखा , बीएड पर अनु खूब टंगे छोड़ी कर , गहरी गहरी सांसे भर रही थी , उसने अपने कपडे उतर रखे थे , वोह पूरी नंगी थी , और उसकी आँखें बंद थी ,

वेदना बीएड के करीब आकर रुक गई , अनु को एहसास नै था , के उसकी माँ रूम में ा चुकी है ,

वेदना ने देखा , अनु के मोठे मोठे मम्मी बेहद लाल हो चुके थे , उसके गुलाबी होंठ थोड़ा सुज़े हुए थे , और छूट , उफ़ अनु की नरम छूट , जिसकी अज्ज खूब कुटाई हुई थी , वोह भी सूज कर पहली हुई थी ,

छूट के होंठो के as-pas गहरी लाली छायी हुई थी , और जांगू का मास्स भी लाल हुआ पढ़ा था ,

"उफ्फ्फ रवि आदमी है या जानवर , इतनी जोरदार चुदाई , उफ्फ्फ काश के में अनु की जगह होती..." वेदना ने मन hi मन यह बोलै , उसकी छूट फिर से गीली होने लगी , पर उसने अपने मन पर काबू प् लिया , और बीएड पर चढ़ कर अनु के करीब बेथ गई ,

"माँ अप्प एआईईईई माँ..." अनु शर्मा कर आँखें खोल बोली , और अपनी छूट पर दोनों हाथ रख उसे छुपाने लगी ,

"अभ तोह नाराज़ नै हो रवि से..." वेदना बेहद मुस्करा कर बोली ,

"क्या माँ अप्प भी..." अनु शर्म के मरे लाल होती हुई बोली ,

फिर वेदना ने गरम पानी में टॉवल दाल , उससे अनु की नरम मखमली छूट की सके करने लगी ,

"उफ्फ्फ्फ़ मा aaaieeeeeeeeeeeiiiiiiiiiii..." अनु गरम भेजा टॉवल अपनी छूट पर लगते hi दर्द में कहरहते हुए बोली ,

"ओह्ह हो , रवि ने तोह तुम्हारी छूट की हालत भिगाड दी , इतनी कुटाई हुई है के पूछो मत , तुम्हारी चखे तोह पोरे घर में गूंज रही थी..." वेदना मुस्करा कर , अनु की छूट की सके करते हुए बोली ,

"अह्ह्ह माँ , माँ मुझे शर्म ा रही है , प्लस मत बोलू न..." अनु अपने चेहरे पर दोनों हाथ रख शरमाते हुए बोली ,

"हम्म , बस इस छूट कुटाई के लिए इतना रो रही थी , अभ चैन मिल गया तुम , देखो इसकी हालत , वैसे अनु , इस बेचारी छूट का क्या दोष था , जो ऐसे इतनी बड़ी सजा मिली , उफ़ सूज गई है पूरी..." वेदना ने अनु के चेहरे को देख मुस्कराते हुए बोलै ,

"माँ बस कारु , मुझे बहुत शर्म ा रही है..." अनु इक डैम से शरमाते हुए पलट गई , उसने अपना चेहरा तकयी में छुपा लिया ,

"अरे अनु बीटा , तुम्हारे तोह चूतड़ भी लाल हुए पढ़े हैं , इनकी भी कुटाई हुई लगती है..." वेदना बेहद हस्ते हुए बोली ,

"माँ जाओ न..." अनु मुस्कराते हुए बोली ,

"बेटी में बहुत खुश हु , लखु लोग का प्यार अधूरा रह जाता है , पर तुम मिल गया , इस प्यार की हमेशा कदर करना , उसे कभी अपने से दूर मत होने देना , चाहे गलती उसकी hi क्यों न हो..." वेदना , अनु के मोठे मोठे चूतड़ों की सके करते मुस्कराते हुए बोली , फिर वेदना उठ कर रूम से बहार ा गई , अनु बेहद थकन से नंगी hi सो गई...

वही दूसरी तरफ....

रवि अपने रूम में पहुंचा वह काट नै थी , उसने देखा बेबी और फर्जी सो रही थी , बेबी ने फर्जी को बहु में भर रखा था , रवि को बेबी पर बेइंतहा प्यार आया , लेकिन अभी उसे काट से मिलना था ,

रवि जल्दी से बेबी और काट के रूम में पहुँच गया , पर रूम का दरवाजा बंद था ,

"काट , दरवाजा खोलू , प्लस , मेरी बात तोह सुन लो..." रवि दरवाजे पर हाथ मरता बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

काट बीएड के केबिन से पीठ टिकाये सिकुड़ कर बैठी कम्प रही थी , उसने इक तकिये अपने सीने से लगा रखा था , और कंपते हुए उस तकिये को अपने सीने से दबा रही थी , उसके होंठ कंपकपा रहे थे , जैसे उसे बर्फ में दफ़न कर निकला गया हो ,

"काट , मुझे सफाई देने का इक मौका तोह दो , प्लस , काट , में डेविल नै हु , में तुम्हारा रवि हु , में इंसान हु , प्लस काट , में तुम यु दर्द में नै देख सकता , तुम मेरी हो , तुम मेरी मासूम काट हो , प्लस काट , इक बार दरवाजा खोल दो , तुम मेरी कसम , हमारे प्यार की कसम..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै , उसने जैसे hi कसम दी , काट ने एकदम से दरवाजा खोल दिया , लेकिन उसकी आँखों में अभी भी बेहद खौफ था ,

"में अंदर ा जाऊ..." रवि ने दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

काट , रवि की बात सुन , इक तरफ हो गई , और रवि रूम के अंदर ा गया , वोह बीएड के पास आकर , पलट कर काट को देखने लगा ,

"काट में..." रवि अभी इतना hi बोलै था , काट रोने लगी ,

"mm..mane dd..dekha h..hai.. , तुम , तुम , dd...devil...hh..ho..." काट दर से कंपते रट हुए हकला कर बोली ,

"उफ्फ्फ ओह्ह , काट रोना मत प्लस , पता नै क्यों , तुम्हारे असनु मेरी जान ले रहे हैं , में , में , मर जाउगा काट , चुप हो जाओ , में कमज़ोर हो रहा हु , चुप हो जावूओ..." रवि घुटनो के बल बेथ रट हुए बोलै , उसके जिस्म में कमज़ोरी बढ़ती जा रही थी , उसका जिस्म बेइंतहा दर्द कर रहा था , दिल में बेइंतहा दर्द हो रहा था ,

"नईईई (रट हुए) , तुम , तुमने झूठ बोलै , तुम शेतीअन हो , मने , मने इक डेविल से प्यार किया , में , में , अह्ह्ह , में मर जोगी , तुम , तुम्हारा रूप , आह्ह्ह्ह , तुम डेविल हो , तुम , तुम , शेतीअन हूँ..." काट जोर जोर से चीखते रट हुए बोली ,

"अह्ह्ह्ह (रट हुए) , रोना बंद कारु , प्लस , में मर जाउगा , आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह शहहहहह , में मर रहा हु , k...kk...kattt..." रवि के दिल में बेइंतहा असहन दर्द होने लगा , वोह जमीन पर गिर गया , उसकी सांसे बेहद धीमी होने लगी थी ,

इसका मतलब , इसका मतलब , काट की शक्ति जागृत हो गई थी , काट जिसे रवि के पिता ने बनाया था , उनकी सबसे लाड़ली बेटी , पूरी दुनिआ में सबसे जायदा मासूम , इस दुनिआ की सबसे खूबसूरत मासूम लड़की ,

जिसे वरदान मिला था , इस दुनिआ के किसी भी जीव के अग्गे , वोह अपनी ीचा से रोयेगी , तोह वोह शक्तिहीन होकर , उसके कदमो में गिरकर तड़फ तड़फ कर डैम तोड़ देगा ,

जब डेविल अपनी ताकत के नशे में चुर्र , अपने पिता के रोकने के बावजूद भी , मलिका रूही , अपनी बहिन से मिलने अत रहा , तोह उसके पिता ने , काट की रचना की , तेन की डेविल बस हेलल में रह जाये , कभी पारी लोग में पेअर न रख सके ,

अज्ज उसकी काट को अपनी शक्ति का एहसास हो गया था , क्यों की उसने डेविल को देखा था , जिसके लिए खास उसे बनाया गया था , लेकिन काट अभी भी नै जानती थी , के वोह कोण है , उसमे कोनसी शक्ति है , वोह , वोह बस दर के मरे रो रही थी ,

"तुम डेविल क्यों हो , मुझे , मुझे घिन अति है डेविल से , मुझे दर लगता है डेविल से , में कभी प्यार नै कर सकती डेविल से , मुझे रवि से प्यार है , मुझे रवि चाहये , मुझे , मुझे डेविल नै चाहये , रवीए , कहा हो तुम , अपनी काट को बहु में भर लो..." काट बेइंतहा रट हुए बोली , वोह भी घुटनो के बल बेथ गई , और चेहरा जुकये फुट फुट कर रोने लगी ,

"k...kk .काट..." रवि बेहद धीमी आवाज़ में बोलते हुए बेहोश होने लगा , उसके होंठो से खून बहने लगा था , आँखें खून से भर चुकी थी , डेविल कमज़ोर हो रहा था ,

तभी काट की नज़र रवि की हालत पर गई , उसने देखा , रवि खून से लथपथ हो चूका था , उसे विश्वास होने लगा , रवि , डेविल नै है , डेविल के जिस्म से खून नै बह सकता , वोह भी उसके मटर रोने से ,

"रवीए , प्लस उठो , ी लव यू , मेरी जान उठो , देखो , अगर तुम उठे नै , तोह , तोह , तुम्हारी काट मर जाएगीइ , तुम मेरे हो , मेरे , तुम्हारी जान पर मेरा हुक है , उठो रावी , में , में , तुम्हारी काट , तुम बहुत प्यार करुँगी , मने क्यों शक किया तुम पर , माफ़ कर दो , प्लस उठो..." काट , रवि का चेहरा अपनी जांगू पर रख , उसका माथा चूमते हुए बोली , उसका रोना अभ और भी बढ़ गया था , लेकिन अभ उसके दिल में , डेविल के लिए प्यार था , रवि को धीरे धीरे होश ऐनी लगा ,

"मेरा रावी , में बहुत प्यार करुँगी , अपनी जान को , किसी को नै डोंगीइ , तुम भी , हाँ जान , तुम भी , किसी के करीब मत जाना , हम दोनों साथ में रहेंगे , ी लव यू उम्मा , मेरा प्यारा रवीए , रावी , रावी , उठो न , माफ़ कर दो , तुम्हारी काट से गलती हो गई , वोह , वोह , पागल है , बहुत पागल है , बिलकुल पागल है , जान , में अज्ज के बाद कभी भी , तुमसे नै रूठुंगी , मेरा रावी , मेरा बचा , मेरा भैई..." काट अपनी मसोमीयत में बहती हुई , पगलू जैसे , बच्चू जैसे , बेइंतहा रट हुए बोली , पर काट ने भावनायिओं में बह कर , रवि को भाई क्यों बोलै था ,

"काट ( बेहद धीरे से).." रवि ने अपनी आँखों खोल बोलै ,

"रवीए..." काट बेइंतहा रट हुए , निचे झुक कर , रवि के होंठो को पगलू की तरह चूसने लगी , जब के रवि का जिस्म ताकत से भरता जा रहा था , अभ डेविल की ताकत , उसकी शक्ति , अपनी चरम सीमा पर थी ,

काट आँखें बंद कर , पगलू की तरह , दीवानो की तरह , रवि के होंठ चूस रही थी , वही रवि की आँखें बेइंतहा लाल हो होकर चमक रही थी....

तो बे कुनिटेड

 
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