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- Dec 5, 2013
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अभ अग्गे...
दूसरी तरफ ....
शाम के 6 बज रहे थे , बेबी अकेली अपने रूम में बैठी रो रही थी , रोटी भी क्यों न , आखिर उसका प्यार , उसकी जान , उसका सब कुछ , अज्ज इक पत्थर की मूरत बना बैठा था ,
जिसे अज्ज उसके हाथ की चुहान भी ठीक नै कर प् रही थी , बेबी इस सब में अपनी hi गलती मानती थी ,
बेबी दिल में इक दर्द लिए तड़फ रही थी , वोह अपने अप्प को रवि का दोषी मानती थी , अगर वोह उस दिन जंगल न जाती तोह अज्ज उसका रवि ठीक होता ,
बेबी अभ रवि की असलियत जानती थी , उसे पता था , के उसका रवि इक वैम्पायर था , वोह वामपिरेस की ऐसी हालत पर रिसर्च कर रही थी , लेकिन उसे अभ तक इस बारे में कुछ पता नै चला था ,
बेबी अभी बीएड पर बैठी रो hi रही थी , के कैटलीन उसके लिए कुछ खाने को लेकर ा गई , उसे भी दुःख था रवि की ऐसी हालत पर ,
कैटलीन , बेबी के पास आकर बेथ गई , उसने बेबी को जब रट देखा तोह वोह इतने दिनों का दर्द जो उसने अपने अंदर दबा रखा था , वोह दर्द उसकी आँखों से बहने लगा ,
कैटलीन रोने लगी , बेबी ने जब कैटलीन को रट देखा , तब उसने अपनी खूबसूरत आँखों से बहते असनुईओं को हाथो से साफ किया और कैटलीन को अपने गले लगा लिया ,
"काट , क्यों रो रही हो तुम.." बेबी ने कैटलीन के असंयुईओं से भेज गलो को साफ करते हुए बोलै ,
"बेबी तुम पिछले 7 दिनों से दुखी हो , न कुछ ठीक तरह से कहती हो न पति हो , क्या करू में , (रट हुए) में तुम दर्द में नै देख सकती , क्यों कर रही हो यह सब.." कैटलीन ने बेबी के गलो को चूमते हुए रट हुए बोलै ,
"तोह क्या करू में , रवि की ऐसी दर्दनाक हालत मुज़से देखि नै जाती , वोह अंदर hi अंदर मर रहा है , और में , और में , कुछ नै कर सकती.." बेबी ने और भी जोर से रट हुए बोलै ,
"ओह्ह मेरी जान , वोह ठीक हो जायेगा , यह लो गन.." कैटलीन ने इक गन बेबी के हाथिओं में देते हुए बोलै ,
बेबी हरिजन सी हुई कैटलीन की तरफ देखती रही , कैटलीन ने बेबी के हाथो में गन पकड़ा , उसे अपने माथे के बेचू बेच रख लिया और बोली ,
"बेबी में तुम दुखी और रट हुए नै देख सकती , प्लस मुझे मर दो , में तुमसे बेइंतहा प्यार करती हु , और मुज़से यह सेहन नै हो रहा के तुम इस तरह हर पल रोटी रहो , मुझे दर्द हो रहा है अंदर hi अंदर , मुझे मर दो बेबी , प्लस .." कैटलीन ने रट हुए बोलै ,
बेबी ने िका इक गन दूर फेंक दी और कैटलीन को अपनी बहु में भर लिया और उसके पोरे चेहरे को चूमने लगी , कुछ देर बेबी कैटलीन के चेहरे को चूमती रही , उसके होंठो को चुस्ती रही ,
"काट , मुझे माफ़ कर दो , में अभ कभी नै रोयुगी , मुझे समाज ा गया के मेरा रवि जल्द hi ठीक हो जायेगा , पर में अपनी जान को ऐसे दर्द में नै देख सकती , अभ में खुश रहूगी , जैसा तुम कहुगी वैसा hi करुँगी.." बेबी ने कैटलीन के होंठो को बार बार चूमते हुए बोलै ,
कुछ देर दोनों ऐसी तरह आपस में प्यार करती रही , और फिर कैटलीन ने बेबी को अपने हाथिओं से खाना कहिल्या और उसे अपने साथ लेकर लेट गई ,
बेबी का दर्द तोह कैटलीन ने ख़तम कर दिया था , पर इक रवि था जिसका दर्द अभ हर गुजर रहे पल के साथ नफरत के उस सैलाब में परवर्तित हो रहा था , जिस में उसका पवित्र प्रेम कुछ लमहु के लिए बहने वाला था ,
रवि अभ धीरे धीरे रिंग का गुलाम बनता जा रहा था , क्या छुपा था ऐनी वाले वख्त में , रिंग का रहस्य अभी भी वैसे hi था , जैसा सदियों पहले था ,
दूसरी तरफ....
रत के 8 बज रहे थे , डाइनिंग टेबल पर सीमा सबको खाना खिला रही थी , किसी का भी मन नै था , खाना खाने को , लेकिन सीमा जबरदस्ती सबको खिला रही थी ,
सबकी आँखें बस उसी रूम पर अटकी हुई थी , यहाँ से रवि बहार ऐनी वाला था ,
"माँ भइआ ठीक होकर सुबह बहार आएंगे न.." रमा ने थोड़ा नाम आँखें कर बोलै ,
"हाँ मेरा बचा , अपनी माँ की बात पर विश्वास कर , सुबह होते hi तेरा भी तुम सबको प्यार से गले लगाएगा..." सीमा ने रमा के बालो पर प्यार से हाथ फिरते हुए बोलै ,
"भाभी कोमल देदी कहा है , पिछले 7 दिनों से हमने उसे नै देखा.." रिमी ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,
"हाँ भाभी कोमल कहा है , वोह तोह भइआ के बिना इक पल नै रह पति थी , कहा है वोह.." शूरति ने भी रिमी की तरफ देखते हुए बोलै ,
"हशः , देखो मेरी इक बात दयँ से सुन लो , तुम सब की सब , अज्ज के बाद कोमल का नाम इस घर में कोई नै लेगा ..." सीमा ने सबकी तरफ देखते हुए बोलै ,
"माँ यह क्या बोल रही हो अप्प , अगर भये ने हमसे पूछा तोह क्या बोलेगे हम.." रमा ने खाने कहते कहते रुक कर बोलै ,
"भाभी , रवि तोह इक पल भी कोमल से दूर नै रह सकता .." शूरति भी खाना बेच में hi छोड़ते हुए बोली..
"कोमल अभ इस दुनिआ में नै रही , वोह मर चुकी है.." सीमा ने रट हुए बोलै ,
"क्या ..." रमा , रिमी और शूरति इक डैम से चीला कर बोली , उनकी आँखों में असनु उभर ए थे ,
"यह सब कब हुआ माँ.." रमा ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,
"मेरी बची , तुम्हारे भइआ की जान बचने के लिए कोमल ने अपनी जान कुर्बान कर दी , तुम्हारे भइआ उन आदमखोर लोगो को मरने के लिए गए थे , तब कोमल ने अपनी जिंदगी कुर्बान कर , तुम्हारे भइआ को बचा लिया पर.." सीमा रट हुए बोलती बोलती रुक गई ,
"हाँ माँ बोलू अग्गे.." रमा भी रट रट सब सुन रही थी ,
"हाँ भाभी अग्गे बोलू.." शूरति भी रट हुए बोली ,
"पर कोमल ने रवि के दिल में अपने लिए नफरत पैदा कर दी , इस नफरत को रवि सेहन नै कर पाया और कोमा में चला गया , कोमल के पास और कोई रास्ता नै बचा था , इक की जान तोह जनि hi थी , लेकिन कोमल ने अपने पवितर प्रेम को साबित किया और रवि को बचा लिया , इस लिए जब रवि सुबह ठीक होकर बहार आएगा , तब तुम सब ऐसे बेहवे करना जैसे कोमल इस दुनिआ में कभी मज़द hi नै थी , वार्ना तुम्हारा भाई फिर से कोमा में चला जायेगा.." सीमा ने अपनी नाम आँखों को साफ करते हुए बोलै ,
"मेरी कोमल इतना प्यार करती है अपने भाई से , अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी , हम कैसे छुपा पायेगी इस दर्द को ..."शूरति ने रट हुए बोलै ,
"यह सब तुम सब को करना hi होगा , तुम्हारे भइआ को कोमल के बारे में और पिछले 7 दिन क्या क्या हुआ , इसका कुछ भी यद् नै होगा , तुम सब उसकी हर बात में साथ देना , जो भी पूछे.." सीमा ने सबकी तरफ देख कर बोलै ,
"पर माँ अगर भइआ को कोमल देदी यद् हुई तोह..." रमा ने सेह भाविक hi यह सवाल कर दिया ,
"हाँ भाभी फिर क्या होगा.." शूरति भी रमा के समजदारी से भरे सवाल से प्रभावित होते हुए बोली ,
"देखो या तोह रवि कोमल को भूल चूका होगा , या फिर उसके मन में कोमल के लिए बेइंतहा नफरत होगी , क्यों की उसे ऐसा महसूस होगा , जैसे कोमल ने उसे प्यार में धोका दिया है , तब हम सब भी उसे यही एहसास दिलाएगी के वोह सही है , कोमल ने उसे धोका दिया है और वोह घर छोड़ कर चली गई.." सीमा ने फिर से नाम आँखें कर बोलै ,
"ओह्ह इतना बड़ा झूठ .."रिमी ने रट हुए बोलै ,
"रिमी में भी जानती हु के यह बहुत बड़ा झूठ होगा , लेकिन हमें यह झूठ बोलना hi होगा , कोमल मर चुकी है , उसने तुम्हारे भाई के दिल में जो नफरत छोड़ी है , वोह नफरत हमारे प्यार से काम होगी , भूल जाओ कोमल को तुम सब , तुम भी उसे बेवफा समझो , तेन की तुम्हारा भाई अपनी अग्गे की जिंदगी जी सके , तुम सब को मेरी बतिअन समाज ा गई न..."
"माँ हम अपने दिल पर पत्थर रख भइआ से झूठ बोल लेंगे , तेन की वोह खुश रह सके , माँ लेकिन कोमल हम सब के दिल में अमर रहेगी , हम सब उसकी पूजा करेगी , उसकी क़ुरबानी जाया नै होगी , वोह भइआ को खुश देखना चाहती थी , हम उसकी यह आखरी ीचा जरूर पूरा करेगी , माँ , हम अपने दिल पर पत्थर रख लेंगी , वैसे भी औरत का दिल बहुत विशाल और गहरा होता है , हम सब कोमल के बेवफा होने का दर्द अपने अंदर समां लेंगी.." रमा ने रट हुए बोलै ,
रमा ने वही बोलै , जो सबकी जुबान कहना चाहती थी , सब की आँखें नाम थी , अभ शयद उनके लिए भी कोमल बेवफा हो चुकी थी , कोमल अभ वोह बेवफा लड़की थी , जिसने अपने भाई को धोका दिया और उसे छोड़ कर चली गई....
तो बे कुनिटेड.....
अभ अग्गे...
दूसरी तरफ ....
शाम के 6 बज रहे थे , बेबी अकेली अपने रूम में बैठी रो रही थी , रोटी भी क्यों न , आखिर उसका प्यार , उसकी जान , उसका सब कुछ , अज्ज इक पत्थर की मूरत बना बैठा था ,
जिसे अज्ज उसके हाथ की चुहान भी ठीक नै कर प् रही थी , बेबी इस सब में अपनी hi गलती मानती थी ,
बेबी दिल में इक दर्द लिए तड़फ रही थी , वोह अपने अप्प को रवि का दोषी मानती थी , अगर वोह उस दिन जंगल न जाती तोह अज्ज उसका रवि ठीक होता ,
बेबी अभ रवि की असलियत जानती थी , उसे पता था , के उसका रवि इक वैम्पायर था , वोह वामपिरेस की ऐसी हालत पर रिसर्च कर रही थी , लेकिन उसे अभ तक इस बारे में कुछ पता नै चला था ,
बेबी अभी बीएड पर बैठी रो hi रही थी , के कैटलीन उसके लिए कुछ खाने को लेकर ा गई , उसे भी दुःख था रवि की ऐसी हालत पर ,
कैटलीन , बेबी के पास आकर बेथ गई , उसने बेबी को जब रट देखा तोह वोह इतने दिनों का दर्द जो उसने अपने अंदर दबा रखा था , वोह दर्द उसकी आँखों से बहने लगा ,
कैटलीन रोने लगी , बेबी ने जब कैटलीन को रट देखा , तब उसने अपनी खूबसूरत आँखों से बहते असनुईओं को हाथो से साफ किया और कैटलीन को अपने गले लगा लिया ,
"काट , क्यों रो रही हो तुम.." बेबी ने कैटलीन के असंयुईओं से भेज गलो को साफ करते हुए बोलै ,
"बेबी तुम पिछले 7 दिनों से दुखी हो , न कुछ ठीक तरह से कहती हो न पति हो , क्या करू में , (रट हुए) में तुम दर्द में नै देख सकती , क्यों कर रही हो यह सब.." कैटलीन ने बेबी के गलो को चूमते हुए रट हुए बोलै ,
"तोह क्या करू में , रवि की ऐसी दर्दनाक हालत मुज़से देखि नै जाती , वोह अंदर hi अंदर मर रहा है , और में , और में , कुछ नै कर सकती.." बेबी ने और भी जोर से रट हुए बोलै ,
"ओह्ह मेरी जान , वोह ठीक हो जायेगा , यह लो गन.." कैटलीन ने इक गन बेबी के हाथिओं में देते हुए बोलै ,
बेबी हरिजन सी हुई कैटलीन की तरफ देखती रही , कैटलीन ने बेबी के हाथो में गन पकड़ा , उसे अपने माथे के बेचू बेच रख लिया और बोली ,
"बेबी में तुम दुखी और रट हुए नै देख सकती , प्लस मुझे मर दो , में तुमसे बेइंतहा प्यार करती हु , और मुज़से यह सेहन नै हो रहा के तुम इस तरह हर पल रोटी रहो , मुझे दर्द हो रहा है अंदर hi अंदर , मुझे मर दो बेबी , प्लस .." कैटलीन ने रट हुए बोलै ,
बेबी ने िका इक गन दूर फेंक दी और कैटलीन को अपनी बहु में भर लिया और उसके पोरे चेहरे को चूमने लगी , कुछ देर बेबी कैटलीन के चेहरे को चूमती रही , उसके होंठो को चुस्ती रही ,
"काट , मुझे माफ़ कर दो , में अभ कभी नै रोयुगी , मुझे समाज ा गया के मेरा रवि जल्द hi ठीक हो जायेगा , पर में अपनी जान को ऐसे दर्द में नै देख सकती , अभ में खुश रहूगी , जैसा तुम कहुगी वैसा hi करुँगी.." बेबी ने कैटलीन के होंठो को बार बार चूमते हुए बोलै ,
कुछ देर दोनों ऐसी तरह आपस में प्यार करती रही , और फिर कैटलीन ने बेबी को अपने हाथिओं से खाना कहिल्या और उसे अपने साथ लेकर लेट गई ,
बेबी का दर्द तोह कैटलीन ने ख़तम कर दिया था , पर इक रवि था जिसका दर्द अभ हर गुजर रहे पल के साथ नफरत के उस सैलाब में परवर्तित हो रहा था , जिस में उसका पवित्र प्रेम कुछ लमहु के लिए बहने वाला था ,
रवि अभ धीरे धीरे रिंग का गुलाम बनता जा रहा था , क्या छुपा था ऐनी वाले वख्त में , रिंग का रहस्य अभी भी वैसे hi था , जैसा सदियों पहले था ,
दूसरी तरफ....
रत के 8 बज रहे थे , डाइनिंग टेबल पर सीमा सबको खाना खिला रही थी , किसी का भी मन नै था , खाना खाने को , लेकिन सीमा जबरदस्ती सबको खिला रही थी ,
सबकी आँखें बस उसी रूम पर अटकी हुई थी , यहाँ से रवि बहार ऐनी वाला था ,
"माँ भइआ ठीक होकर सुबह बहार आएंगे न.." रमा ने थोड़ा नाम आँखें कर बोलै ,
"हाँ मेरा बचा , अपनी माँ की बात पर विश्वास कर , सुबह होते hi तेरा भी तुम सबको प्यार से गले लगाएगा..." सीमा ने रमा के बालो पर प्यार से हाथ फिरते हुए बोलै ,
"भाभी कोमल देदी कहा है , पिछले 7 दिनों से हमने उसे नै देखा.." रिमी ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,
"हाँ भाभी कोमल कहा है , वोह तोह भइआ के बिना इक पल नै रह पति थी , कहा है वोह.." शूरति ने भी रिमी की तरफ देखते हुए बोलै ,
"हशः , देखो मेरी इक बात दयँ से सुन लो , तुम सब की सब , अज्ज के बाद कोमल का नाम इस घर में कोई नै लेगा ..." सीमा ने सबकी तरफ देखते हुए बोलै ,
"माँ यह क्या बोल रही हो अप्प , अगर भये ने हमसे पूछा तोह क्या बोलेगे हम.." रमा ने खाने कहते कहते रुक कर बोलै ,
"भाभी , रवि तोह इक पल भी कोमल से दूर नै रह सकता .." शूरति भी खाना बेच में hi छोड़ते हुए बोली..
"कोमल अभ इस दुनिआ में नै रही , वोह मर चुकी है.." सीमा ने रट हुए बोलै ,
"क्या ..." रमा , रिमी और शूरति इक डैम से चीला कर बोली , उनकी आँखों में असनु उभर ए थे ,
"यह सब कब हुआ माँ.." रमा ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,
"मेरी बची , तुम्हारे भइआ की जान बचने के लिए कोमल ने अपनी जान कुर्बान कर दी , तुम्हारे भइआ उन आदमखोर लोगो को मरने के लिए गए थे , तब कोमल ने अपनी जिंदगी कुर्बान कर , तुम्हारे भइआ को बचा लिया पर.." सीमा रट हुए बोलती बोलती रुक गई ,
"हाँ माँ बोलू अग्गे.." रमा भी रट रट सब सुन रही थी ,
"हाँ भाभी अग्गे बोलू.." शूरति भी रट हुए बोली ,
"पर कोमल ने रवि के दिल में अपने लिए नफरत पैदा कर दी , इस नफरत को रवि सेहन नै कर पाया और कोमा में चला गया , कोमल के पास और कोई रास्ता नै बचा था , इक की जान तोह जनि hi थी , लेकिन कोमल ने अपने पवितर प्रेम को साबित किया और रवि को बचा लिया , इस लिए जब रवि सुबह ठीक होकर बहार आएगा , तब तुम सब ऐसे बेहवे करना जैसे कोमल इस दुनिआ में कभी मज़द hi नै थी , वार्ना तुम्हारा भाई फिर से कोमा में चला जायेगा.." सीमा ने अपनी नाम आँखों को साफ करते हुए बोलै ,
"मेरी कोमल इतना प्यार करती है अपने भाई से , अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी , हम कैसे छुपा पायेगी इस दर्द को ..."शूरति ने रट हुए बोलै ,
"यह सब तुम सब को करना hi होगा , तुम्हारे भइआ को कोमल के बारे में और पिछले 7 दिन क्या क्या हुआ , इसका कुछ भी यद् नै होगा , तुम सब उसकी हर बात में साथ देना , जो भी पूछे.." सीमा ने सबकी तरफ देख कर बोलै ,
"पर माँ अगर भइआ को कोमल देदी यद् हुई तोह..." रमा ने सेह भाविक hi यह सवाल कर दिया ,
"हाँ भाभी फिर क्या होगा.." शूरति भी रमा के समजदारी से भरे सवाल से प्रभावित होते हुए बोली ,
"देखो या तोह रवि कोमल को भूल चूका होगा , या फिर उसके मन में कोमल के लिए बेइंतहा नफरत होगी , क्यों की उसे ऐसा महसूस होगा , जैसे कोमल ने उसे प्यार में धोका दिया है , तब हम सब भी उसे यही एहसास दिलाएगी के वोह सही है , कोमल ने उसे धोका दिया है और वोह घर छोड़ कर चली गई.." सीमा ने फिर से नाम आँखें कर बोलै ,
"ओह्ह इतना बड़ा झूठ .."रिमी ने रट हुए बोलै ,
"रिमी में भी जानती हु के यह बहुत बड़ा झूठ होगा , लेकिन हमें यह झूठ बोलना hi होगा , कोमल मर चुकी है , उसने तुम्हारे भाई के दिल में जो नफरत छोड़ी है , वोह नफरत हमारे प्यार से काम होगी , भूल जाओ कोमल को तुम सब , तुम भी उसे बेवफा समझो , तेन की तुम्हारा भाई अपनी अग्गे की जिंदगी जी सके , तुम सब को मेरी बतिअन समाज ा गई न..."
"माँ हम अपने दिल पर पत्थर रख भइआ से झूठ बोल लेंगे , तेन की वोह खुश रह सके , माँ लेकिन कोमल हम सब के दिल में अमर रहेगी , हम सब उसकी पूजा करेगी , उसकी क़ुरबानी जाया नै होगी , वोह भइआ को खुश देखना चाहती थी , हम उसकी यह आखरी ीचा जरूर पूरा करेगी , माँ , हम अपने दिल पर पत्थर रख लेंगी , वैसे भी औरत का दिल बहुत विशाल और गहरा होता है , हम सब कोमल के बेवफा होने का दर्द अपने अंदर समां लेंगी.." रमा ने रट हुए बोलै ,
रमा ने वही बोलै , जो सबकी जुबान कहना चाहती थी , सब की आँखें नाम थी , अभ शयद उनके लिए भी कोमल बेवफा हो चुकी थी , कोमल अभ वोह बेवफा लड़की थी , जिसने अपने भाई को धोका दिया और उसे छोड़ कर चली गई....
तो बे कुनिटेड.....
