Incest Deewanapan... - Page 6 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

अपडेट-42

कोमल के जाने जे बाद मैं बीएड पर लेता चाट की और देख रहा था के तभी मुझे किसी

के कदमो की आहत हुई.

यह कोई और नै राधा थी , जो चाय का कप लिए मेरे कमरे मैं ा रही थी.

राधा मेरे पास आयी और चाय का कप टेबल पर रख कर जाने लगी.

मेरे दिमाग मैं कुछ आया और मने राधा को पकड़ कर गॉड मैं उठा लिया और

बाथरूम मैं की तरफ लिजने लगा.

radha:-(thoda डरते हुए) बाबू जी क्या कर रहे हो अप्प कोई ा जायेगा , छोड़ो मुझे.

मैं कुछ नै बोलै और राधा को अपने बाथरूम मैं लेकर ा गया.

मैं जाट से अपने कपडे उतरने lga.pehle मने अपनी शिल्ट उतर di.meri पहलवानी

बॉडी देख राधा की आँखों मैं चमक ा गई.

फिर मने अपनी पेण्ट भी उतर दी और उसके बाद अपना ुंडेरवेअर भी.

राधा अभी घागरा चोली पहने हुए khadi.mane उसे खींच कर अपने सीने से लगा

लिया , मने राधा के होंठ इक बार चूमे और उसकी चोली उतरने लगा.

राधा ने अपना इक हाथ मेरे कंडे पर रखा और दूसरे हाथ से मेरा मोटा लुंड

हाथ मैं पकड़ सहलाने लगी.

मने राधा की चोली उतरी तोह उसके बड़े और मस्त दूध आज़ाद हो gye.radha के गोर

मस्त चुचु के ऊपर इक टिल tha.us काळा टिल के होने के कारन राधा के चुके और भी

मस्त लग रहे थे.

मने देर न करते हुए राधा का घागरा भी उतर दिया.

अब राधा की गोरी टंगे , उसकी दूध जैसी सफेद जंगे , उसकी पांव रोटी जैसी फूली hi छूट

और उसका मुस्करता चेहरा सब मेरी आँखों के सामने था.

राधा मुझे ऐसी घूरता देख थोड़ा शर्मा गई और बहग कर मेरे सीने से लग

gai.tabi मेने शावर चलो कर दिया.

ठन्डे पानी की बोंडे हम दोनों पर पड़ने lagi.kya बदन था राधा इक डैम

चिकना और पानी की बोन्दो मैं और भी चमक रहा था.

मने राधा का चेहरा पीछे किया तोह उसके गुलाबी होंठो पर पानी बह रहा

tha.uske सूंदर चेहरे से होता हुआ पानी उसके मस्त दूध को भिगो रहा था.

राधा के नंगे दूध पानी पड़ने पर और भी खूबसूरत लग रहे थे.

मने राधा के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उनको चूसने lga.uper से गिरते

पानी के कारन मुझे राधा के होंठो का रास और भी मस्त लग रहा था.

राधा भी पूरी शिदत से मेरे होंठ चूस रही थी.

राधे के गरम होंठ और उसका कप्टा बदन , मेरे लिए यह इक न्य अनुभव

tha.mane राधा के होंठो पर अपनी जीभ घूमने lga.mere जीभ की नोक राधस के

बीघे होंठो के चारो और घूम रही thi.radha का मोह थोड़ा सा खुला हुआ था और

उसकी गरम सांसे मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी.

राधा ने इक डैम से मेरा चेहरा अपने हाथ मैं पकड़ा और मेरी जीभ अपने मोह

मैं भर उसे खींच खींच कर चूसने lagi.main भी राधा के होंठो को कास कास

कर चूसने लगा.

फिर राधा ने मुझे ढाका दे पीछे कर दिया वो हाफति हुई बोली.

radha:-"ahhh हा हआ बाबू जी जल्दी हआ कोई ा न jaye"radha थोड़ा सा झुक अपने

सांसे कण्ट्रोल कर रही थी.

ravi:-"koi न आएगा मेरी jaan"mane राधा को ढाका दे दीवार से लगा दिया.

मने राधा के दूध को हाथ मैं पकड़ मसल दिया.

radha:-"ahhhh बाबू jiii"radha ने इक सिसकारी भरते हुए मेरे कंदो पर अपने हाथ

रख दिए.

मने राधा के मस्त दूध पर अपने होंठ रख diye.radha ने अपनी दूध मेरे

मोह पर रगड़ दिए.

मने राधा के चुचु को चूसने lga.radha के गोल चुके , जो काफी बड़े थे और

नरम भी थे , मैं पूरी जान लगा उनको चूस रहा था.

पर मैं जनता था के कोमल या शूरति कबि भी रूम मैं ा सकती hai.es लिए मने

राधा के चुचु को छोड़ दिया.

radha:-"aahhh बाबू जी जल्दी करो , कोई आवाज़ न लगा de."radha इतना बोल दीवार की तरफ

अपनी गांड उठा घोड़ी बन गई.

राधा की मोती गांड देख मेरा लुंड और भी तन कर खड़ा हो गया.

राधा के गोर चितदो की दरार से होता हुआ पानी निचे फर्श पर गिर रहा tha.gand की

ब्राउन छेद पानी से चमक रहा था.

मने देखा राधा की चीटेड इक डैम नरम और मोठे थे.

मने अपने बिहगे हुए लुंड के सुपडे को मसाला और राधा की गांड की दरार मैं

रगड़ diya.mera मोटा लुंड राधा की गांड जे छेद को रगड़ता हुआ छूट के डेन को

भी रगड़ दे गया.

radha:-"ahhhh बाबू जी जल्दी karo"radha ने अपनी गांड और भी ऊपर करते हुए कहा.

मुज़से भी अब सेहन नै हो रहा था मने राधा की कमर को हाथो मैं पकड़ा

और इक कास कर ढाका राधा की इक बार चूड़ी छूट मैं लगा दिया.

radha:-(chekhte हुए) अह्हह्ह्ह्ह बाबू जी धीरे अह्ह्ह्ह.

राधा बहुत अछि त्र से गांड ऊपर किये घोड़ी बानी हुई thi.main और बर्दाश्त न

कर स्का और इक दूसरा ढाका भी राधा की छूट मैं जड़ diya.mera लुंड जड़ तक राधा

की छूट मैं घुस गया.

राधा की फिर से इक चीख निकल गई.

radha:-"aahhhhh उफ्फफ्फ्फ़ बाबू jii"radha ने अपने होंठ दातो मैं दबा liye.radha की

टंगे थोड़ी कम्प रही थी.

मने देर न करते हुए राधा के ऊपर झुक उसकी कमर मैं अपनी बहे दाल li.mane

राधा के दूध को हाथ मैं पकड़ लिया और कास कर मसलने लगा.

अब मैं धीरे धीरे ढके लगाने lga.mera पूरा लुंड जड़ तक छूट मैं जा राधा

को मज़ा दे रहा tha.radha अब सिसकिया लेते हुए बुदबुदा रही थी.

radha:-(siskte हुए) अह्ह्ह्ह बाबू जी अहह उफ्फ्फ और तेज़ अह्ह्ह क्या लुंड है आपका , अह्ह्ह्ह

मैं तोह स्वर्ग की सैर कर रही हु अह्ह्ह और तेज़.

राधा थोड़ा और झुक गई , अब राधा की चिकनी गांड और भी ऊपर उठ gai.main अपना

लुंड को और तेज़ पेलने लगा.

राधा की छूट अब पानी छोड़ रही thi.us मैं गीलापन और भी बाद चूका था.

लुंड जब छूट मैं जड़ तक जाता तोह पांच पांच पांच पांच की आवाज़े आने लगी थी.

मेरी जंगे जब राधा की जांगू से टकराती तोह थप थप थप की आवाज़ का मदुर

संगीत गूंजने लगा था.

मैं राधा की छूट मैं लुंड पेलते हुए बोलै.

ravi:-ahh राधा मज़ा ा रहा है.

मने राधा की गर्दन को चूमते हुए उससे पूछा.

radha:-ahhh ोीीी मा बाबू जी बहुत अहह मज़ा ा रहा है.

राधा अपनी गांड को गोल गोल घूमते हुए बोली.

ravi:-le साली अह्ह्ह और ले मेरा लुंड और ले.

मने तेज़ तेज़ ढके मरते हुए राधा से खा.

radha:-ahhhh ओह्ह्ह और मारो तेज़ ढके अह्ह्ह मैं जड़ने वाली हु अह्ह्ह्ह बाबू जी

मैं गई.

राधा की छूट ने पानी छोड़ दिया .राधा का पूरा जिस्म जटके खता हुआ पानी छोड़

रहा था.

मने भी अपने ढके और बड़ा दिया.

अब मने राधा की गांड मैं ऊँगली दाल उसे अंदर बहार करने लगा.

मेरे लुंड को राधा की छूट का घड़ा पानी महसूस हो रहा tha.ik तोह राधा की

छूट का नरम मास्स और उस के साथ रसीला पानी और ढके की गति के साथ पांच पांच की

मदुर आवाज़ , अब मैं और न रुक स्का , मेरा लुंड हर मन गया.

मैं राधा के ऊपर झुक gya.mera लुंड राधा की छूट की गहरायिओं मैं अपना

माल छोड़ रहा था.

मैं इक अनदमई एहसास को महसूस करता हुआ , आँखें बंद किये हुए राधा के ऊपर

पड़ा हुआ था.

कुछ देर बाद हम अलग हुए और बाथरूम से बहार ा गए.

ाचा हुआ के हमे किसी ने देखा नै था.

राधा के जाते मैं बीएड पर लेट गया.

फिर सीधा रत को खाने के लिए ममी ने बुला liya.khna खाने के बाद मैं अपने

कमरे मैं ा गया.

मैं खिड़की के पास आकर खड़ा हो गया के तभी मेरे कमरे मैं कोई आया जिसे देख

मेरे होंठो पर इक मुस्कान ा गई........

 
अपडेट-43

मने सामने देखा तोह मेरे आँखों के सामने शूरति कड़ी हुई thi.shurti के

होंठो पर इक मुस्कान thi.uske गुलाबी होंठ इस मुस्कान मैं और भी खूबसूरत लग

रहे थे.

शूरति मेरे करीब आने lagi.mane अपना चेहरा फिर खिड़की के बहार कर लिए.

शूरति मेरे साथ बहार सूंदर आसमान की और देखने लगी.

मेरी नज़रे तोह खुले आसमान मैं बिखरे हज़रो तारो पर तिकी हुई थी.

तारो का tim-timana मेरे दिल को इक सकूं दे रहा था और मेरे साथ मेरी बहिन

शूरति भी कड़ी थी.

शूरति ने इक नाईट ड्रेस पहनी thi.shurti थी भी बाला की खूबसूरत , और इस

खूबसूरत लड़की के साथ खड़ा होना , मुझे ाचा एहसास दे रहा था.

न तोह शूरति कोई बात करती और न main.par हम दोनों की आँखें जब आपस मैं

टकराती तोह हम थोड़ा मुस्करा देते.

शूरति शायद अज्ज दुपहर की बात को यद् कर रही thi.uski चेहरे पर महकती लाली

और होंठो की मुस्कान मुझे सब बता रही थी.

मने शूरति का हाथ अपने हाथ मैं पकड़ liya.shurti ने मेरा चेहरा देखा और

मेरे कंडे पर अपना सर रख दिया.

shurti:-bhyia कल पता है आपको की क्या दिन है.

ravi:-(thoda सोचते हुए) नै मुझे तोह नै पता.

shurti:-yeh तोह अछि बात hai.main और कोमल आपको सरप्राइज देंगी कल सुबह.

ravi:-(man मैं) यह कोमल बहुत चालक है , जरूर मुझे फिर से फसा रही होगी.

shurti:-bhyia क्या सोच रहे ho.mane खा कल हमें बहुत मज़ा आने वाला है.

ravi:-vaise तुम दोनों करने क्या वाली हो.

शूरति ने मेरे कंडे से सर हटा लिया और मेरे चेहरे को देख हसने लगी.

मने सोचा अब इस शूरति को क्या हो गया.

ravi:-es मैं इतना हसने की क्या बात है.

shurti:-(haste हुए) भइआ अप्प डरते हो न कोमल se.kal वो आपकी बंद बजा देगी.

ravi:-(man मैं) अरे पगली कोमल तोह मेरी जान है , पर वो करने किया वाली है

यह तोह अब कल hi पता चले गए.

shurti:-(man मैं) सोच लो जितना सोचना hai.apko यह पता नै है के कल होली

hai.apki बंद बजने की पूरी तयारी कर दी हम तीनो ने.

ravi:-(pyar से) शूरति तू मेरी प्यारी बहिन है न , तोह बता न कल क्या करेगी कोमल.

मैं इतना पूछ hi रहा था के पीछे से कोमल की आवाज़ आयी.

komal:-yeh आपको कुछ नै बताने vali.shurti तुम जाओ अपने रूम मैं.

शूरति ने इक बार कोमल की और देखा और मुस्करा कर मेरी गाल को चुम लिया.

फिर वो मुस्कराते हुए रूम से बहार चली गई.

अब मैं सोच रहा था के कोमल क्या सोच रही hai.yeh कोमल कुछ न कुछ तोह

जरूर करेगी मेरे साथ.

कैसे पता करू , हैं मेरी जान सीमा से पूछ लेता हु.

कोमल तब तक मेरे पास ा चुकी thi.komal की हसन मुस्कराहट मैं मुझे कोई

शरारत दिख रही थी.

komal:-(haste हुए) अब तेरा क्या होगा कालिया.

ravi:-komal मैं कलया नै रवि हु.

कोमल अपने सर पर हाथ मरती हुई खिड़की के बहार देख हसने लगी.

komal:-(man मैं) अरे मैं तोह भूल hi gai.hamare गाओं मैं कहा टीवी होते

hai.bhyia ने कोण सी शोले मूवी देखि hogi.bhyia की टोहड़ी खिचाई करती हु.

komal:-(haste हुए) भइआ कलया वो है.

ravi:-kon है , तू क्या छुपा रही है.

komal:-bhyia कलया , गब्बर का आदमी है.

ravi:-oh तोह गब्बर कोई लड़की है.

कोमल और भी हसने lagi.haste हस्ते उसकी आँखों मैं असनु ा gye.komal वह से बीएड

पर जाकर लेट गई.

कोमल चाट की और देख हस्ती जा रही थी.

मैं भी कोमल के साथ लेट कर चाट की और देखने लगा.

कोमल ने मेरी और देखा और फिर से हसने लगी.

komal:-(man मैं) भइआ कितने भोले है , इनको तोह कुछ पता hi नै , या फिर जानते

हुए भी अनजान बन रहे hai.par भइआ यह नै जानते के मैं कोण hu.yeh तोह अभी

भी मुझे अपनी गुड़िया hi समज़ते है.

ravi:-komal तुम मुझे ऐसी क्यों घर कर देख रही हो.

komal:-(muskrate हुए) भइआ अप्प बहुत अचे हो.

कोमल ने मेरी तरफ करवट बदल ली , मैं अभी भी सीधा लेता हुआ tha.komal मेरे

सीने से चिपक गई.

कोमल ने अपनी इक तंग मेरे जंगो के ऊपर रख di.or मुझे कास कर पकड़ लिया.

मैं सीधा लेता हुआ चाट की और देख रहा था पर मैं कोमल की हर हरकत को

महसूस कर रहा tha.muze कोमल का नाज़ुक सा बदन , उसकी बदन की खुशबु , यह

सब मेरे दिल को भ सी गई थी.

कोमल ने अपना सर मेरी इक बाह पर रख दिया और मेरी छोड़ी छाती को सहलाने लगी.

komal:-bhyia अज्ज माँ को बहुत यद् किया mane.kitne साल हो गए है , पर माँ के

बिना तोह जीना भी कितना बुरा शाप है मेरे लिए.

ravi:-komal तुम मेरा दिल दुख रही ho.ham तुम पड़ा लिखा कर गाओं का भला

करना चाहते हैं.

komal:-main कुछ समाजी नै भइआ.

ravi:-komal मेरा इक सपना है के हमारा गाओं भी सूंदर बने , वह किसी को भी

दुःख न हो , सब लोगो को ख़ुशी mile.or सबसे बड़ी बात जो स्कूल वह 8तह क्लास तक

है वो 12तह क्लास तक हो jaye.tain की गाओं के लड़के , लड़कयों को अछि शिक्षा मिल

सके.

komal:-oh भइआ अप्प कितने अचे हो , मैं आपसे वादा करती हु के आपका सपना मैं

जरूर पूरा करुँगी.

ravi:-komal तुम मेरी नाज़ुक सी पारी हो , अपने ऊपर जयादा बोज मत डालना.

komal:-(man मैं) कैसी बात करते हो , अप्प का प्यार मेरे लिए बोज nai.app hi मेरा

सब कुछ ho.apki बहो मैं कितना सकूं मिलता है मुझे यह मैं hi जानती हु.

ravi:-komal तुम जाओ अब तुम सो जाना चाहिए.

komal:-bhyia मैं यही सोना चाहती हु.

ravi:-(man मैं) अगर कोमल यह सो गई तोह मैं सीमा से बात कैसे karuga.nai जो

होगा देखा जायेगा , अभी अपनी कोमल को बहो मैं भर कर सो जाता हु.

रवि ने भी कोमल की और करवट बदल ली और उसे अपनी बहो मैं कास कर सो गया.

दोनों इक दूसरे को ऐसा जता रहे थे के दोनों सो गए हैं पर न तोह कोमल अभी सोइ

थी और न रवि.

दोनों भाई बहिन इक दूसरे की गरम सांसो को अपने चेहरे पर महसूस कर रहे

थे , दोनों अपने गरम बदन की गर्मी को आपस मैं बात रहे थे.

दोनों ने इक दूसरे के लिए आँखें बंद की थी पर मन मैं इक दूसरे के लिए प्यार

भरे सवाल और जवाब भी थे.

komal:-(man मैं) ओह्ह्ह भइआ अप्प का बदन कितना सख्त है , मैं तोह पिगलति जा रही hu.kitna कास कर अपने सीने से लगा लिया है मुझे , मेरी तोह पोरे जिस्म मैं

प्रेम की तरंगे उठ रही hai.dil करता है अज्ज साडी मर्यादा की जंजीरे तोड़ दू.

ravi:-(man मैं) कितना कोमल बदन है , उफ्फ्फ पर यह मेरी बहिन है , काश के

कोमल इक बार मुझे अपने करीब आने दे , कोमल के बदन मैं कितनी गर्मी है ,

कितना तप रहा है कोमल का badan.aise लगता है , जैसे कोमल को भुखार हो ,

कितनी गरम सांसे है कोमल की , मेरा तोह बुरा हल हो रहा hai.abhi तोह सोना hi

ठीक रहेगा.

मैं सोने की कोससिह कर रहा था पर नंद ने तोह जैसे मुज़से दुश्मनी कर राखी

thi.or नंद तोह ए भी कैसे इतनी खुबसुरर मेरी नाज़ुक से बदन वाली कोमल जो

मेरी बहो मैं लेती हुई थी.

ऐसे hi दो घंटे गुजर gye.komal अब सो चुकी thi.par मैं उसके चेहरे को hi

देखे जा रहा tha.kitna खूबसूरत चेहरा था कोमल ka.ikdam पार्यिओं जैसा.

कोमल के बाल उसकी गाल के ऊपर ा उसके खूबसूरती को छुपा रहे थे.

मैं पता नै रत को कब soya.par हैं जब भी सोया था , कोमल का खूबसूरत

चेहरा और उसके बारे मैं hi सोचता हुआ hi सोया था....

सुबह मुझे शूरति उठा रही thi.shurti ने अपना पूरा जोर लगा लिया और फिर मैं भी

उठ कर बेथ गया.

shurti:-uff भइआ अप्प उठ गए , मने सोचा अभी जाती हु , शाम को आउंगी उठाने के

लिए.

ravi:-(akhen माल्टा हुआ) ओह हैं रत को देर से सोया था.

shurti:-app यह सफेद कपडे पहन लो जल्दी.

ravi:-(herian होते हुए) किस लिए.

shurti:-app जाते हो जा यही उतर दो आपके सरे कपडे.

ravi:-ajj मौका ाचा है.

shurti:-kya खा अपने , अप्प जाते हो या कोमल को बुला कर लाओ.

ravi:-jata हु मेरी माँ.

मैं उठा और वो कपडे लेकर बाथरूम मैं घुस gya.mane अपने कपडे उतरे और

वो कपडे पहन लिए.

मैं बहार आया तोह शूरति बीएड पर बैठी मुस्करा रही थी.

ravi:-(man मैं) यह लड़की पागल तोह नै हो gai.akeli अकेली है रही है.

मैं शूरति के पास ा गया.

मने सफेद kurta-pazama पहना था.

शूरति मुझे घर के बहार ले gai.bahar गर्दन की इक तरफ इक छोटा सा गरेज बना था

जिसमे गाड़ी पार्क की जाती थी.

शूरति ने मुझे वह खड़ा रहने को खा और मेरी आँखों पर पट्टी बंद दी.

shurti:-bhyia जब हम 1,2 और 3 कहे तोह अप्प अंदर जाना.

ravi:-(man मैं) यह शूरति भी न , अगर मैं कही अंदर जाने की जगा दीवार से

टकरा गया तोह सर फुट जायेगा.

shurti:-acha भइआ जाओ अंदर.

मैं अंदर जाने lga.mane इस कमरे को पहले देखा था यह ममी की गाड़ी पार्क

होती थी.

जैसे hi मैं अंदर घुसा मैं किसी चीज़ से टकरा गया.

मने कपट हाथो से उस चीज़ को देखा वो कोई कार लग रही थी.

हैं यह तोह कार thi.par यह क्यों बेहज दिया मुझे.

अभी मैं खड़ा hi था के ढेर सारा पानी मेरे ऊपर गिर गया.

मने जल्दी से पट्टी निकली तोह मेरे सामने इक नै कार थी और जब मने अपने अप्प को

देखा तोह मैं पूरा बीघा हुआ था.

मेरा पूरा सरीर रंगु से बीघा हुआ tha.mere सफेद कपडे पोरे अलग अलग रंगु से

रंग चुके थे....

 
अपडेट-44

मने पीछे मुड़कर देखा तोह कोमल , सीमा , शूरति और रिमी कड़ी थी.

वो मेरी और देख मुस्करा रही thi.meri नज़रे तोह कोमल पर जैम सी गई thi.rangu

मैं बेगहि कोमल कितनी खूबसूरत लग रही थी.

अभी मैं कुछ बोलने hi लगा था के वो तीनो हाथो मैं रंग लिए मेरी तरफ बढ़ने

लगी और मैं बघणे की त्यार करने लगा.

komal:-(muskrate हुए) भइआ हमने आपको चारो और से घिर लिया है.

shurti:-ab बघणे का कोई रास्ता नै.

saima:-apne आपको हमारे हवाले कार्डो , यही तुम्हारे लिए ाचा होगा.

अब रिमी की बोलने की बरी थी पर वो चुप रही , वो तीनो रिमी की तरफ देख रही थी.

rimi:-(haste हुए) अअअअतततततताएक्सक.

और फिर तीनो ने मुझ निहथे पर रंग डालना सुरु कर diya.main बघणे लगा और

बघता हुआ गर्दन मैं आकर गिर गया.

फिर क्या था चारो ने मिलकर इतना रंग लगाया के मेरी तोह हालत ख़राब kardi.vo

चारो हसने लगी.

जब मने आँखें खोल कोमल की तरफ देखा तोह मेरा हल और भी बुरा हो गया.

कोमल ने वाइट सलवार -कमीज़ पहनी thi.uska बदन अलग अलग रंगु से रंगा हुआ

था.

कोमल के पोरे चेहरे पर हरा, गुलाबी और लाल रंग जायदा लगा था , हरा रंग तोह इतना

लगा था के कोमल किसी पेड़ की त्र hari-bhari दिख रही थी.

कोमल के दूध की दरार मैं रंग जैसे घुसने की कोससिह कर रहा tha.or गोर गोर मस्त दूध कोमल को फरियाद कर रहे थे के हमे भी रंगु से रंग दो.

कोमल की खूबसूरती मैं काफी देर खोया reha.komal है रही थी.

कोमल भी जैसे यह बहप गई थी के मैं उसे hi घर रहा हु.

अब कोमल थोड़ा शर्माने लगी थी.

अब कोमल की गलो पे शर्माने के चीन साफ दिख रहे थे और जब वो मेरी आँखों

मैं इक तक देखती हुई मुसकरारती तोह दिल मैं इक अलग hi प्यार का एहसास जनम ले

लेता.

komal:-bhyia उठु न , क्या अब लेते hi रहोगे अब.

मैं उठा और कोमल की तरफ देख मुस्कराने lga.komal भी हस्ती हुई मुझे hi देख

रही थी.

komal:-(muskrate हुए) भइआ अप्प तोह पूरा भीग गए अब आपको साफ कर देती हु.

मने देखा के सीमा और शूरति काफी मुस्करा रही थी.

कोमल ने मेरा हाथ पकड़ मुझे उठा लिया और गर्दन के बीचु बेच लेजाने लगी.

गर्दन के बीचु बेच इक बड़ा सा रबड़ का टब था पर उसके ऊपर इक पतला सा वाइट

कलर का कपडा था.

मैं सोच रहा था के कोमल अब क्या करने वाली hai.ab इस कोमल का क्या प्लान है.

komal:-bhyia अप्प को अपनी नै कार कैसी लगी.

मैं हरिजन हुआ कोमल की तरफ देख रहा था.

कोमल मुझे उस टब के पास ले gai.kapde होने के कारन यह पता नै चल रहा था के

टब पानी से भरा है यह रंग से.

komal:-(muskrate हुए) भइआ इक होर सरप्राइज.

इतना बोलते कोमल ने मुझे ढाका मर diya.par मुझे कोमल की चालाकी पता थी , इस

लिए जिअसे hi कोमल ने मुझे ढाका मारा , मने कोमल का हाथ पकड़ लिया और उसे

भी अपने साथ टब मैं गिरा लिया.

टब के अंदर रंगु से भरा पानी था , हम दोनों पूरा भीग चुके थे.

मैं जब निचे गिरा तोह कोमल भी मेरे ऊपर गिर gai.komal का गिला बदन पूरा

मेरे बदन से चिपक गया.

कोमल के मोठे मस्त दूध मेरे सीने मैं डाब gye.or कोमल के मोह से मस्ती

भरी अह्ह्ह्ह निकल गई.

कोमल की मस्त गोरी जंगे मेरी जांगू से सात सी gai.komal का सूंदर गिला बदन

मुझे उत्तेजित कर रहा था.

मैं च कर भी अपने लुंड को रोक नै स्का साला मेरी hi बहिन पर लाइन मरता हुआ

खड़ा हो गया

हम दोनों के कपडे थोड़े पतले थे तोह मेरे लुंड की चुंबन कोमल को भी हो

रही थी.

मुझे थोड़ी शर्मिंदगी महसूस हो रही थी के कोमल मेरे बारे मैं क्या सोचेगी.

मुझे अपने अप्प पर गुस्सा ा रहा था.

मेरा लुंड कोमल की छूट के ऊपर धसा हुआ tha.komal की सांसे भी अब तेज़ हो रही

थी.

मैं कुछ कहता उससे पहले hi शूरति , सीमा और रिमी वह ा गई.

कोमल थोड़ा शर्माती हुई मुज़से अलग हो गई.

कोमल टब मैं hi इक साइड मैं बेथ gai.tub इतना बड़ा था के हम सभी उसमें

बेथ सकते थे.

पानी कोमल की गर्दन तक ा रहा tha.main भी टब मैं इक साइड मैं बेथ

gya.hamne टब की दीवारों से अपनी पीठ टिका ली , पर हमरे पेअर आपस मैं टच कर

रहे थे.

कोमल और मैं इक दूसरे की तरफ देख मुस्करा रहे थे.

shurti:-bhyia मुझे भी आपके साथ बैठना है.

इतना बोल शूरति भी टब मैं घुस गई और उसके बाद सीमा और रिमी भी टब मैं आकर

बेथ गई.

अब हम बाटे करते हुए इक दूसरे पर रंगु वाला पानी फेक

रहे the.ham सभी काफी

बाटे कर रहे थे.

मेरे सामने कोमल बैठी thi.meri इक साइड सीमा बैठी थी और दूसरी तरफ

shurti.shurti के साथ रिमी बैठी थी.

हम सभी इक दूसरे से बस कुछ hi दूर थे.

shurti:-bhyia कैसा लगा हमारा गिफ्ट.

saima:-app तोह दर गए थे , वाओ कितना मज़ा आया.

मैं तोह बस उसी पल को यद् को यद् कर रहा था जब कोमल मेरे ऊपर गिरी

thi.muze ऐसा लगा जिअसे कोमल ने कोई कपडे पहने hi नै थे.

komal:-bhyia अपने बतया नै , कैसी है नै कार.

ravi:-(heriani से) अछि है , बहुत hi सूंदर , ममी ने मुझे बताया नै के वो नै

कार ले रहे है.

komal:-bhyia वो कार आपकी है.

ravi:-(chokte हुए) ककककययय्यआआ.

shurti:-(haste हुए) भइआ मोह बंद करो नै तोह रंग दाल दूंगी मोह मैं.

ravi:-komal यह सब क्या hai.main यह सिर्फ 20 दिन के लिए आया हु.

komal:-(man मैं) मेरे न समाज ासीहक , अप्प को क्या पता के मैं क्या क्या कर

सकती हु.

ravi:-komal मैं तुमसे कुछ पूछ रहा हु और तुम मुझे घर कर देख रही हो.

komal:-hain भइआ वो कार अब से आपकी है.

ravi:-rehne दो कोमल रत को बात करेंगे इसके बारे मैं.

komal:-(man मैं) वाओ अज्ज रत फिर आपकी बहो मैं सिमट कर सोने को milega.maza

ा जायेगा , पर भइआ को पता नै चलना चइहे के मैं कोण hu.agar पता चला तोह

मैं तोह गई काम से.

ravi:-(man मैं) कोमल क्या करती है मुझे कुछ समाज मैं नै ata.akhir कोमल

की बात ममी कैसे मन लेती hai.ab मुझे जल्दी hi सब पता करना होगा.

हम काफी देर से बैठे थे तोह मुझे तोह काफी भूक लग गई थी.

मने कोमल से बात की और हम सब घर के अंदर ा गए.

कोमल और सीमा खाना बनाने चली गई और मैं अपने कमरे मैं कपडे चेंज

करने चला गया.

अब मेरा और दिल नै कर रहा था होली खेलने के liye.ab मुझे सिर्फ कोमल के बारे

मैं पता करना था के इतनी महंगी कार ममी ने कैसे कोमल को दीदी.

आखिर क्या राज़ है कोमल का.....

कोई इक घटना गुजर गया फिर मैं त्यार होकर बीएड पर लेता चाट की और देख यही सोच

रहा था के कोमल ने इतनी महंगी कार मुझे क्यों di.agar माँ को पता चला तोह.

अरे मैं तोह माँ के बारे मैं भूल hi gya.maa क्या सोच रही होगी , न तोह कोई

खबर दी न मिलने आया , माँ को लगता होगा जैसे मैं उनको भूल hi गया हु.

और रमा मेरी जान वो तोह अज्ज होली भी नै खेल रही hogi.mere बिना उसका क्या हल

होगा.

क्या करू कुछ समाज मैं नै ा रहा.

फिर कोई कमरे मैं aya.yeh तोह सीमा है , सीमा ने भी कपडे बदल लिए थे.

अब सीमा ने गुलाबी सलवार सूट पहना था.

सीमा मेरे पास आकर बेथ gai.saima मेरे सर पर हाथ फेरने लगी.

saima:-(man मैं) रवि तुम बहुत अचे ho.or तुमारु बहिन कोमल तुम से भी

अछि hai.kitna प्यार करती है tumse.vo तोह जान भी दे सकती है तुम्हारे लिए.

ravi:-saima तुमसे कुछ बात करनी थी.

सीमा थोड़ा हरिजन होकर मेरी तरफ देख रही थी......

 
अपडेट-45

मैं कुछ पूछने hi वाला था के सीमा ने मेरे होंठो पर अपनी ऊँगली रख दी.

सीमा अपने गुलाबी होंठो को मेरे होंठो की तरफ लिजने lgi.saima के रसीले गुलाबी

होंठ , जिनका रास मैं हर रोज़ पीना चाहता था , सीमा के होंठ जिनकी गुलाबी

रंगत मेरे होंठो को भ गई thi.mere होंठो मैं इक कम्पन सी होने लगी थी

सीमा मेरे ऊपर ज़ुकती जा रही थी , अब सीमा की गरम सांसे मुझे अपने चेहरे पर

महसूस हो रही थी.

आखिर सीमा ने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख diye.yeh वो चुमन था जो मेरी

आत्मा को भी शांति दे रहा tha.saima मेरे होंठो को चूस रही थी , सीमा जब

मेरे होंठो को अपने होंठो मैं भर कर खींचती तोह मैं मज़े की ऐंठा तक

चला जाता.

सीमा ने मेरे होंठ छोड़ अपनी जीभ की नोकीली धार मेरे होंठो पर चलनी सुरु

कर di.saima के जीभ से बेहटा अमृत जैसा पानी मेरे मोह मैं जा मुझे अमर का

रहा tha.mane एकदम से सीमा की जीभ को अपने मोह मैं भर चूसने lga.saima

भी अपनी जीभ मेरे मोह मचलने lagi.esa लग रहा था जैसे सीमा की जीभ मेरे

जीभ से लड़ रही ho.main भी अपनी जीभ से सीमा की जीभ को निचे दबाने की कोससिह

कर रहा था.

मेरा गला सुख रहा था , पर सीमा पर अज्ज कोनसा प्यार था के वो मेरे होंठो को

छोड़ hi नै रही थी.

मने जब आँखें खोल गेट की तरफ देखा तोह कोमल हमे देख रही थी , पर कोमल

की आँखों मैं असनु थे.

मने सीमा को अपने अप्प से डोर किया पर तब तक कोमल जा चुकी thi.ab मुझे

कोमल की समाज नै ा रही थी के कोमल को क्या हुआ.

मने सीमा से अलग हो उसे निचे जाने के लिए keha.saima जाना तोह नै चाहती थी

पर मुझे थोड़ा सीरियस देख वो निचे चली गई.

मैं भी जल्दी से कोमल के रूम की तरफ चल pda.jab कोमल के रूम मैं आया तोह

देखा कोमल बीएड पर बेथ रो रही thi.ab यह कोमल रो क्यों रही है.

मने कोमल के रूम का गेट बंद कर लॉक किया और बीएड पर आकर कोमल के साथ

बेथ गया.

मैं कोमल से बात करने के बोलने lga.abhi मने दो शब्द hi बोले थे के कोमल

ने वो कर दिया जिसकी उम्मीद नै थी.

ravi:-komal वो मैं तुमसे...

अभी मैं इतना hi बोलै था के कोमल ने मेरा चेहरा पकड़ liya.main हरिजन था

पर कोमल की आँखों मैं इक चमक थी पर उदासी भी थी.

कोमल की आँखों मैं जैसे किसी बात का बदला ले रही थी.

कोमल मेरी आँखों मैं देख रही थी और फिर कोमल ने अपने होंठ मेरे होंठो

पर रख दिए.

मेरा तोह जैसे पूरा जिस्म hi कम्प gya.main अपने अप्प को देख रहा था के कही यह

सपना तोह nai.nai यह हकीकत थी और कोमल सच मैं मेरे होंठ चूस रही थी.

कोमल ने मेरे चेहरा अपने नाज़ुक हाथो से कास कर पकड़ रखा था और मेरे

होंठो को चूस रही thi.mera पूरा सैर पिगलता जा रहा tha.ab मेरे होंठ भी

चलने लगे थे.

मैं भी कोमल के होंठो को चूसने lga.komal के होंठ मेरे लिए जानत की त्र

थे , ऐसा एहसास के जैसे मेरी जिंदगी कोमल के लिए थी और मैं कोमल के होंठ नै बल्कि उसकी आत्मा से बाटे कर रहा हु.

हम दोनों पागल हो गए the.komal तोह मेरे बल सहलाती हुई मेरे होंठो को इतना

कास कर चूस रही थी के अब मुझे दर्द करने लगा tha.do तीन बार तोह कोमल ने मेरे

होंठ काट hi दिए.

मने भी कोमल के ऊपर वाले होंठ को चूस रहा tha.main कोमल के होंठ के

अपने मोह मैं भर कास कास कर चूस रहा tha.main तोह भूल hi गया था , मेरे

लिए टाइम रुक गया था.

कोमल के गुलाबी रास से भरे नरम होंठो ने मुझे बंद दिया tha.komal मुझे

छोड़ने का नाम नै ले रही थी , कोमल के भरे हुए शैतान तेज़ साँस लेने से ऊपर

निचे हो रहे थे

करीब 7 मिंट तक कोमल मेरे होंठो को चूमती रही , इतने शिदत और कास कर तोह

अज्ज तक मेरे होंठ किसी ने नहीं चूसे थे.

कोमल ने जब मुझे छोड़ा तोह वो तेज़ तेज़ सांसे लेती हुई बीएड पर गिर gai.komal मोह

खोले लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी.

कोमल की आँखों मैं असनु थे.

मेरे दिल मैं इक दर्द उठा और मैं भी कोमल के साथ लेट gya.mere बीएड पर गिरते

hi कोमल मेरे सीने लिपट कर रोने lgi.komal ने मुझे इतना कास कर पकड़ रखा

था जैसे मैं कही बाघा जा रहा हु.

komal:-(man मैं) अप्प मेरे हो , कैसे आपको किसी और के साथ देख lo.kitna इंतज़ार

किया है मने आपको देखने के liye.app पर सिर्फ मेरा अधिकार है , मैं आपकी हु

और अप्प mere.main मर जाओगी आपके bina.bhyia मुझे अपने बहो मैं lelo.kitna

सकूं मिला आपके होंठो को चुम kar.mere प्यारे भइआ ी लव ु.

मैं कोमल के बालो को सहलाते हुए उसे शांत कर रहा था पर कोमल पता नै क्या

क्या सोच रही thi.par अज्ज जो कोमल ने किया वो होश मैं थी या फिर मुझे और सीमा को

देख अपने होश खो चुकी thi.akhir क्या बात थी के कोमल ने मुज़से बिना बात किये

मेरे होंठो को चूमना सूर्य कर दिया.......

 
फ्रेंड्स कैसे हो .. में कोससिह करुगा के बहुत जल्द स्टोरी को रीस्टार्ट कर सकू.. में जनता हु के अप्प सब मुज़से बहुत नाराज़ होंगे... लेकिन जल्द hi अप्प सबकी नाराज़गी दूर कर दूंगा... bye तक ...
 
और स्टोरी वही से कंटिन्यू होगी... यहाँ लास्ट में क्लोज हुई थी.. सोस्सिप पर.. अभ पिछले उपदटेस अप्प pdf फाइल पर रीड कर लेना...
 
Trailer...Part 3

"अहह कामिनी तू मेरी बहिन नै हो सकती , में तुझे कभी वोह हासिल नै करने डोंगी , जो तू चाहती है..." रूही ने दर्द और गुस्से से चीखते हुए बोलै ,

"भइआ देदी दिलावर खान के कब्जे में है , प्लस कुछ करो.." कवी ने रट हुए बोलै ,

"ओह्ह रवि , तोह तुमसे मुलाकात हो hi गई , तुम मुझे मर नै सकते , सीमा अगले 5 मिंट में मरने वाली है , हाहाहा..." जोकर ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

"कोमल , कोमल , माँ तंग ा गया तुम सबसे , अगर दुबारा किसी ने , किसी ने भी उसका नाम लिया , पूरी दुनिआ जला दूंगा में.."

"जूही , जूही , तुम मेरी आत्मा का वोह हिस्सा हो जिसे कोई मुज़से अलग नै कर सकता .."

"अगर ये दुनिआ सिर्फ उस कोमल के कारन बच सकती है , तोह में उसे लेने जाउगा , मगर मालिक काल , इक बात यद् रखना , कोमल के एते hi , में इस दुनिआ के लोगो से बहुत दूर चला जाउगा..."

"तुम भी मुज़से प्यार नै करते , रूही को कोई प्यार नै करता."

"तुम मेरी रीमेक करीब ए , अभ तुम जिंदगी में मेरा चेहरा कभी नै देख पाओगे.."

"अह्ह्ह रवि , तुम्हारी जूही का अंतिम वख्त ा गया बाबू.."

"मरना तोह सबको है , में मरू या न मरू , लेकिन कोमल तुमने hi मारा था "

अहह मेरा अंतिम वख्त ा गया है , तुम मुझे माफ़ कर देना कोमळळ , फिर मिलेंगे किसी और जनम में , लेकिन वादा करो , अगले अह्ह्ह जनम में भी अहह शठ तुम मेरी बहिन hi बानगी , ी अह्ह्ह लव उउउउउउउ...."

[Ajj se thik 5 din bad story restart hogi.. rat ko thik 8 baje se...]
 
फ्रेंड्स उपदटेस टाइप कर रहा हु... और इस साइट पर पिक्स ऐड करना सिख रहा था , कल रत 8 बजे से उपदटेस पोस्ट करने सुरु करुगा.. अप्प टेंशन मत लो.. अभ कल से डेली उपदटेस आया करेंगे... फ्रेंड्स ..ऐसी थ्रेड पर स्टोरी पोस्ट करुगा.. तोह मिलते है कल रत 8 बजे.. bye तक...
 
अभ अग्गे...

PART - 3

अपडेट-1

मलिका सुहाना उस जादूगरनी से मिल कर वापिस पारी लोग लोट आयी , अभ उसे बस 7 कुवारी लड़कयों की बलि देनी थी , तेन की वोह अमर हो सके...

दिन बेट रहे थे , अज्ज पहली अमावस की रत थी , मलिका सुहाना ने अपनी दासी को अपने साथ मिला लिया , वोह जानती थी के सभी दसियां लालची होती हैं ,

रत के 12 बजने में अभी बस 5 मिंट रह गए रहे , मलिका सुहाना , महल के निचले तहखाने में पूजा कर रही थी ,

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उसे इंतज़ार था अपनी दासी का , अज्ज वोह पहली बलि देने जा रही थी , उसके मन में इक कम्पन थी , उसके दिल में इक दर था , उसने अज्ज से पहले कभी किसी जीव को नै मारा था ,

लेकिन बदले की अग्ग ने उसे अँधा कर दिया था , वोह बदला लेना चाहती थी , राजा ाबून और अपनी माँ मलिका सोना से , और उससे भी जिसे वोह सबसे जायदा नफरत करती थी , मलिका रहना से ,

अभी मलिका अपनी hi सोचु में घूम थी , के किसी ने उसे आवाज़ दी ,

मलिका सुहाना ने पलट कर देखा तोह , उसकी दासी , उसकी गुलाम , इक 18 साल की कुवारी पारी के साथ कड़ी थी ,

"मलिका यह कुटुम पारी है , ऐसे मने खास पूजा में मदद करने के लिए बुलाया है.." दासी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"कुटुम ायो , अपनी मलिका की मदद करो.." मलिका सुहाना ने उसकी आँखों में आँखें दाल बोलै ,

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मलिका सुहाना में इक खास अद्भुत शक्ति थी , वोह किसी को भी अपने वश में कर सकती थी , चाहे वोह जानवर हो या कोई इंसान ,

मलिका के कुछ देर आँखों में आँखें दाल देखने से कुटुम उसके वश में हो गई ,

मलिका ने कुटुम को अपने पास बुला लिया और अपने पिता शेतीअन की बड़ी सी मूरत के पास बैठा दिया ,

मलिका सुहाना कुछ मंत्रो का जप करने लगी , और धीरे धीरे वोह मदहोश सी होने लगी ,

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उसने इक लाल गुलाल कुटुम के पोरे चेहरे पर लगा दिया और उसका सर जुका दिया ,

मलिका सुहाना कड़ी हुई और इक बड़ी सी तलवार उठा , अपने पिता को यद् करते हुए बोली .." पिता जी , अपनी बेटी की तरफ से इक छोटी सी भेट सवीकार केज्यै ..."

इतना बोलै मलिका सुहाना ने इक तेज़ वॉर कर उस मासूम सी पारी की गर्दन धड़ से अलग कर दी ,

वोह पारी इक डैम से चखी और फिर सब खामोश हो गया ,

मलिका सुहाना कुछ देर आँखें बंद कड़ी रही , तभी उसे अपने अंदर इक तेज़ ऊर्जा का संचार महसूस हुआ ,

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उसका पूरा जिस्म तेज़ रौशनी में चमकने लगा , वोह हस्ती रही , अपने पिता की आँखों में देख कर , जो अभ लाल लाल रौशनी में चमक रही थी ,

उस लड़की की बलि देने के बाद सब पहले जैसा होने लगा , किसी को शक नै हुआ , लेकिन अगले दिन राज महल में उस पारी के माता पिता ए , वह सुहाना भी मज़द थी ,

बैक तो स्टोरी ....

"ओह तोह यह हुआ था , किसी को शक भी नै हुआ के तुम्हारी बहिन सुहाना ने इक लड़की की बलि दे दी , उफ़ उस बेचारी का क्या कसर था

.." रवि ने आँखें नाम करते हुए बोलै ,

"उम् रवि जब कोई ताकत पाने के लिए अँधा हो जाता है , तब वोह सही गलत नै देखता , अग्गे सुनो.."

फ्लैशबैक...

उस दिन राज महल की सभा में राजा ाबून ने कुछ ऐलान किया , यह सब पहले पारी लोग में नै हुआ था ,

उनहोनु सभी पहरेदारो को चुकाना कर दिया , कोई भी पारी लोग की सीमा में दाखिल नै हो सकता था , और न hi बहार जा सकता था , कोई कुवारी कन्या कही अकेली नै रहेगी , अगर रहेगी तोह हमेशा इक साथ रहेगी ,

राजा ाबून ने नए कानून लागु कर दिए , वोह समाज नै प् रहे थे , आखिर इस पवितर पारी लोग में शतिआं का साया कहा से घुस आया था ,

लेकिन यह सब यही नै रुका , मलिका सुहाना ने इक इक करके 4 और लड़कयों की बलि देदी , अभ उसमे बेइंतहा ताकत ा चुकी थी , लेकिन यह ताकत बुराई की ताकत थी ,

5 अमावस की राशन को 5 लड़कियाँ गयाब हो गई थी , राजा ाबून और मलिका सोना इस बात से बेहद ढुकि थे , उनको कोई रास्ता नज़र नै ा रहा था ,

अभ छथि अमावस की रत ा चुकी थी , लेकिन मलिका सुहाना को छह कर भी कोई कुवारी लड़की नै मिली थी , उसकी वफादार दासी भी किसी लड़की को दंड नै पायी थी ,

धीरे धीरे बलि की वख्त करीब अत जा रहा था , मलिका सुहाना का गुस्सा अभ हर बेट रहे वख्त के साथ बढ़ता जा रहा था ,

आखिर उसके होंठो पर इक मुस्कान ा गई जब उसने अपनी प्यारी दासी की तरफ देखा , सुहाना ने मन में सोचा के यह दासी भी कुवारी है ,

"मेरी प्यारी दासी मेरे करीब ायो न.." मलिका सुहाना ने थोड़ा मुस्कराते हुए बोलै ,

"मलिका मने बहुत कोससिह की , लेकिन कोई भी लड़की मेरे साथ नै आयी , सभी लड़कियाँ बेहद दरी हुई हैं , कोई लड़की घर से बहार नै निकल रही , मेरे हज़ूर मुझे शमा कर दो.." उस दासी ने ाखुन में असनु लिए बोलै ,

"नै दासी तुम घबराने की जरुरत नै है , तुमने कोससिह की , में तुमसे बेहद खुश हु , में तुम कुछ इनाम देना चाहती हु.." मलिका सुहाना ने अपनी शैतानी हस्सी हस्ते हुए बोलै ,

वोह दासी भोली भली लड़की थी , वोह समाज न पायी के मलिका सुहाना उसे क्यों लालच दे रही है , उसका लालच अभ उसे अपनी मौत के करीब ले आया था ,

"हाँ मलिका बोलू क्या कहना था , में जानती थी के अप्प मुज़से नाराज़ नै होंगी , लेकिन अप्प मुझे क्या इनाम में डौगी.." उस दासी ने लालच में मुस्कराते हुए बोलै ,

"दासी में तुम कुछ शक्तिअन डोंगी , तेन की तुम अग्गे चल कर मेरी मदद कर सकू.." सुहाना ने अपने असली रूप में एते हुए बोलै ,

सुहाना का चेहरा बेहद खौफनाक था , वोह अपने पिता से मिलना चाहती थी , लेकिन वोह यह नै जानती थी , के धीरे धीरे शतिआं उस पर हावी होता जा रहा है , उसके पोरे बदन पर कब्ज़ा कर रहा है ,

जैसे hi दासी ने सुहाना का असली रूप देखा , वोह बेहद दर गई , उसका पूरा बदन कम्प गया ,

"डरो मत दासी , में तुम कुछ नै कहुगी , तुमने मेरी बहुत मदद की है , अज्ज मेरे पास असीम शक्तिअन हैं , जो तुम्हारे कारन मुझे मिली है , ायो और मेरी आँखों में आँखें दाल देखो.." सुहाना ने अपनी ब्यांक आँखों को और भी खोलते हुए बोलै ,

दासी ने जैसे hi कुछ पल सुहाना की आँखों में ज़का , वोह उसके वश में हो गई , वोह पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी ,

सुहाना के होंठो पर इक मुस्कराहट फैल गई , उसने दासी को अपने पास बुलाया और बलि वाली जगह पर बैठा दिया ,

धीरे धीरे सुहाना अपने पिता शतिआं को यद् करती हुई मंतर जप करने लगी , धीरे धीरे उसका बदन अग्ग की तेज़ लपटों में जलने लगा ,

सुहाना ने ठीक बलि के वख्त अपनी प्रिये दासी का गाला काट दिया , सुहाना बलि देते hi तड़पने लगी , उसके अंदर असीम शक्तिअन सामने लगी , सुहाना कुछ मिंटो तक तदपि रही , और अचानक उठ कर हसने लगी ,

"हम्म , पिता जी अभ इक और बलि , और इस पूरी दुनिआ पर बस मेरा hi राज़ होगा , कोई मेरा मुकाबला नै कर पायेगा , में इस दुनिआ के भगवन बानगी , हहै .." सुहाना ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

इक तरफ दासी का कटा हुआ शरीर पढ़ा था , उसे अपने लालच की सजा अज्ज मिल चुकी थी , शतिआं की पूजा करने वाले , कभी विश्वास के पातर नै होते , वोह किसी भी पल हमें धोके दे सकते हैं , और यही हुआ उस दासी के साथ.....

तो बे कुनिटेड.....
 
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