Incest Deewanapan... - Page 24 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

फ्रेंड्स अपडेट कल रत आएगा.. वोह इस 5तह part का आखरी अपडेट है , उसके बाद देखते हैं अग्गे लिखना है या नै... 6तह part "Haweli-ik अनकही चाहत " , अभी में सोच रहा हु , अभी के लिए स्टोरी कम्पलीट कर रहा हु , इस part के जरिये , मुझे ख़ुशी है के मने इक अछि स्टोरी लिखी , और जिसे लाखो लोग ने बेइंतहा प्यार दिया , 9 साल पहले मने यह सोचा नै था , के जो में सुरु कर रहा हु , ऐसे ख़तम करने में मौसे इतने साल लगेंगे , उफ़ बहुत लम्बा वख्त बीत गया , और में उन लाखो लोग को शुक्रिया कहना चाहता हु , जिन्होनो इतना प्यार दिया , इस स्टोरी को इतनी मोह्हबत दी , में हमेशा मौत से जीत कर वापिस अत था , क्यों इक लम्बी बीमारी मेरे साथ थी , इस बीमारी ने बहुत दर्द दिया , उस दर्द से रहत पाने के लिए , इक दिन यु hi सोस्सिप साइट खुल गई , धीरे धीरे वह मने ऐसी दुनिआ को अनुभव किया जो मुझे इस समाज से बहुत दूर ले जाता था , इक फंतासी वर्ल्ड में , सोस्सिप साइट मेरे जैसे लाखो लोग की कल्पना थी , हमारी इक कल्पनीयों से भरी दुनिआ , यहाँ हम देखते हैं , हमारी दुनिआ कैसी है , अगर समाज के बनाये निज़ाम और कानून न होते , इक बार यु hi , स्टोरीज रीड करते करते , मेरी अखन इक ऐसी स्टोरी पर रुक गई , के पहले दिन से hi , उस स्टोरी से मोह्हबत हो गई , धीरे धीरे उस राइटर ने अपने प्यार में ऐसा जकड़ा के , उसके हर अपडेट की चाहत सी हो गई , उसके लिखने में इक कमल की ऐडा थी , अभ में फास चूका था सोस्सिप के मायाजाल में , क्यों की जिस स्टोरी को में प्यार करता था , उसके लिए बार बार , दिन में कई बार , में सोस्सिप के चाकर काटने लगा , बस फिर मने भी राइटर बनने का सोचा , पहले सोचा छोटी सी कहानी लिख दूंगा , कुछ दिनों बाद उसे ख़तम कर दूंगा , पर धीरे धीरे जब लिखना सुरु किया , तोह इक जल्दबाजी थी , इस स्टोरी को एन्ड करना है , लिखते लिखते मुझे आदत सी हो गई , क्यों की जब लोग रेप्लीस देते थे , तोह ऐसा महसूस होता जैसे में बहुत ाचा लिख रहा हु , में बहुत ाचा राइटर हु , हलाकि मने कभी खुद को ाचा राइटर नै मन , और इस स्टोरी में हज़ारो कांईआं भी निकल आएगी , पर फिर भी , मने पता नै क्यों , यह स्टोरी लिख दी , अभ पीछे पलट कर देखता हु , तोह खुद पर हस्ता हु , यह मने क्या लिख दिया , और क्यों लिख दिया , मेरे ख्याल से , हर राइटर यही सोचता है , जब वोह खुद की लिखी स्टोरी को रीड करता होगा.. शुक्रिया सभी दोस्तों का ...
 
फ्रेंड्स रत को 10 बजे अपडेट आएगा , थोड़ा चेक कर लू..
 
अपडेट-122

लास्ट अपडेट ... अभ अग्गे..

सुहाना या यु कहे सीमा अपनी आँखें बंद किये अपनी बेटी रमा की गॉड में , अपना सार रखे , अभ चैन की , इक सकूं की नंद सो रही थी , ऐसा नै था के वोह मर गई थी , पर उसकी सांसे बेहद धीमी चल रही , दिल धड़क तोह रहा था , पर बस नाम का , जो खंजर जादूगरनी रहनुमा ने उसे मारा था , उसने जखम तोह दिया hi था , उसके साथ साथ सुहाना के जिस्म की साडी शक्ति उस खंजर ने अपने अंदर समां ली थी , उसके शरीर को बेहद कमज़ोर कर दिया था , और इक बात रवि भूल चूका था , के उसे भी उसके मां खुरम ने ऐसी तरह का खंजर मारा था , पर रवि , सुहाना की चिंता में , अपना सारा दर्द भूल सा गया था ,

वोह सब सुहाना के पास बैठे थे , तभी ख़ुशी और काट भी वह ा गई , रवि ने hi ख़ुशी को बेह्जा था , क्यों की दोनों ने काट की पवितर शक्ति को पहचान लिया था , रवि और ख़ुशी ने , सब पहले hi प्लान किया हुआ था , पर बेबी उनके प्लान में शामिल थी या नै , क्या वोह नाटक कर रही थी , या सच में उसको चोट लगी थी , यह तोह ऐनी वाले वख्त में छिपा था ,

ख़ुशी और कैटलीन जैसे hi वह पहुंचे , तोह दोनों चौंक गई , काट इसलिए चौंक गई , क्यों की उसकी बेबी , उससे बस कुछ कदम दूर , बर्फ की उस सफेद जमीन पर , बेसुध लेती हुई थी , और ख़ुशी इसलिए चौंक गई , क्यों की रवि और बाकि सब बेहद दुःख में बैठे हुए थे , और रमा की गॉड में इक लड़की का सार था , और ख़ुशी भी पहचान गई , यह लड़की सीमा (सुहाना) है , उसकी आँखें नाम थी , पर उसे अभ प्लान के हिसाब से hi अग्गे बढ़ना था , इसलिए उसने अपने अंदर , जो दुःख का सागर उमड़ रहा था , उस पर कुछ देर के लिए , इक पूर्ण विराम लगा दिया ,

"बब्यीईईई..." काट बेहद दुःख में , बेहद गम में , बेहद दर्द में , आँखों में बेइंतहा असनु लिए , भाग कर बेबी के पास बेथ गई , उसने बेबी का चेहरा अपनी गॉड में रख लिया , और बेइंतहा रोने लगी , क्या इनका भी कोई रिश्ता था पारी लोग में , शयद हो भी सकता है ,

काट बेहद दर्द में , अपनी बेबी के गोर दूध से सफेद चेहरे को बार बार चूमती हुई रोये जा रही थी , उसे बहुत बड़ा सदमा लगा था , उससे कुछ बोलै भी नै जा रहा था ,

"काट संभालो खुद को..." ख़ुशी ने काट के कंडे पर हाथ रखते हुए बोलै ,

"कैसे सम्बलु , कैसी , में कैसे जिन्दा रहूगी बेबी के बिना , नाईई , नयी , में ऐसा सोच भी नै सकती , प्लस उठो बेबी , प्लस , में तुम दूर ले जोगी , प्लस बेबी उठो , प्लस.." काट बेइंतहा दर्द में रट हुए बोली , वोह पागल सी हो गई थी , पर अभी तक , उसके रोने से किसी और को कष्ट नै पहुंचा था , इसका इक कारन था , अभ काट का खुद की शक्ति पर पूरा कण्ट्रोल था , अभ उसे पोर्न एहसास था के वोह कोण थी ,

इतना सा वख्त बीता था , तब जादूगरनी रहनुमा , रवि और बाकि सभ के करीब आकर , थोड़ा सा दूर रुक गई , वोह लड़ने को बेताब थी , पर कोई भी उसकी तरफ ध्यान hi नै दे रहा था , इस बात का उसे अंदर hi अंदर गुस्सा था , जो हर बीत रहे पल के साथ , अभ बढ़ता जा रहा था ,

"उफ्फ्फ्फ़ शह्ह्ह्ह , देखा प्रिंस , मने कहा था तुमसे , मुझे वोह मैप देदो , पर , पर नै , तुम ाचा बनना था , लोगो का मसीहा बनना था , क्या मिला तुम्ही , तुम्हारी सुहाना मर गई , ओह्ह्ह माफ़ करना , तुम्हारी सीमा मर गयी , ाहेहेहे , अभ इक hi रास्ता है , यह रिंग पहना दो , अभ रिंग hi बचा सकती है , तुम्हारी सीमा की जान , पर..." रहनुमा बेहद ख़ुशी में हस्ते हुए बोली , उसने अभी तक काट को कुछ नै बोलै था , उसका ध्यान अभी तक बस रवि पर hi था ,

रहनुमा अपनी बात पूरी कर रही थी तभी कोमल ने उसे बेच में hi रोक दिया और बोली ,

"पर क्या .." कोमल ने बेहद दर्द में आँखें नाम किये बोलै ,

"पर , पर , इसके लिए , तुम्हारे भाई को , मुझे वोह नक्शा देना होगा , मुझे महा शक्ति के पास लेकर जाना होगा , ाहेहेहे , तभी में यह रिंग उतरूंगी , पर , पर अगर तुम सोचते हो , जबरदस्ती तुम यह रिंग उतर लोगे , तोह यह तुम्हारी गलती होगी , क्यों , क्यों की , जब तक मने यह रिंग पहनी है , मुझे कोई नै हारा सकता , मुझे कोई नै मर सकता , में..." रहनुमा अभी बोल hi रही थी के रमा ने उसे बेच से hi टोक दिया ,

"मा , में आपके वजूद का आखरी कण तक मिटा दूंगी , में मर दूंगी आपको , में सुमों हो , जादूगरो की मलिका .." रमा ने बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए बोलै , उसकी आँखों में इक अग्ग सी जल रही थी , वोह बदला चाहती थी अपनी माँ सीमा का , वोह उठने hi जा रही थी तभी रवि ने उसे रोक लिया ,

रवि ने बेइंतहा गुस्से में ा चुकी रमा के कण में कुछ बोलै , तोह रमा शांत सी हो गई , रवि ने प्यार से उसके चेहरे पर हाथ फिकराय और फिर कोमल भी रमा के कण में कुछ बोलने लगी , आखिर कुछ hi पलु में रमा शांत हो चुकी थी , वोह अभ अपनी माँ सीमा के चेहरे को देख रही थी , उसके बालो को सहलाते हुए ,

"मेरी नादाँ चुराई हुई बेटी , सुमों , तुम यह अमरता किसने दी , तुम यह रूप , यह शक्ति , किसने दी , हाँ , हाँ यद् आया , मने , तुम अमर किया , किसने , हाँ मने , तुम जादूगरो की मलिका किसने बनाया , मने , तुम पारी लोग में किसने मारा था , मने , तुम कैसे मार सकते हैं , यह किसे पता है , मुझे , में तुम्हारी माँ हु , तुम्हारी रचना मने की है , मेरी रचना का नियाब करिश्मा हो तुम , तुम कोई नै मार सकता था , पर तुमने , तुमने धोका दिया मुझे , तुम यद् है , हमने इक सोढा (डील) किया था , में यह रिंग पहल लुंगी , इस रिंग को तुम्हारी माँ सीमा से दूर रखूगी , इस रिंग का साया भी सीमा पर नै पढ़ने दूंगी , और बदले में , और बदले में , तुम मुझे अपने भाई से वोह नक्शा लेकर डौगी , पर , पर तुमने मुझे फिर से धोका दिया , क्यों , क्यों , बार बार हर बार , तुम हार जाती हो , झुक जाती हो , अपने इस बेवकूफ भाई के अग्गे , क्यों , कितने जनम मिले , पर हर जनम में , तुम मर जाती हो , मिट जाती हो , अपने भाई के लिए , इस बेवकूफ लाल शेतीअन के लिए..." रहनुमा ने बेइंतहा दर्द और गुस्से भरे शबदो में बोलै , उसके हर लफ़ज़ में गुस्सा था , यह चाँद शब्द उसके मन की गहरायी से निकले थे , आखिर रमा उसे बार बार धोका देती थी , उसने पला था रमा को , अपना दूध पिलाया था ,

"मा , मेरे भाई बेवकूफ नै हैं , अपने मुझे चुरा कर , इक नया जीवन दिया था , यह जीवन शाप है मेरे लिए , यह शक्ति , यह रूप , यह अमरता , यह सब शाप है , अप्प ने अपने मकसद के लिए , मुझे मेरी माँ से दूर कर दिया , मुझे मेरे भाई से दूर कर दिया , क्यों , क्यों , मेरे जीवन को क्यों बर्बाद किया , हाँ , हाँ में हार जाती हु , झुक जाती हु , अपने भाई के अग्गे , क्यों की में अपने भाई को बहुत प्यार करती हु , पारी लोग में जब तामस मेरे पास रही , उन अँधेरे जंगलो में , तब तामस हर पल , हर लम्हा , बस अपने प्रिंस को यद् करती रही , वोह कई सालो तक लगातार , हर पल , बस प्रिंस का नाम जप्ती रही , उसके यु बार बार प्रिंस का नाम जपते रहने से , मेरे बंजर , वीरान दिल में , प्रेम का फूल खिल उठा , में उस प्रिंस को देखने के लिए पागल हो गई थी जिसे मेरी दोस्त हर पल यद् करती रहती थी , में पुक चुकी थी तामस की बतिअन सुन सुन कर , फिर इक दिन प्रिंस ा गए , वोह तामस को लेने ए थे , मुझे इक पल में hi उनसे प्यार हो गया , मुझे तब यह नै पता था के प्रिंस मेरे भाई हैं , में पारी लोग की आखरी जुंग में लड़ी , मने हर कोससिह की अपने प्यार को बचने की , पर में हार गई , में अपने प्यार का इजहार तक न कर पायी , मेरे प्यार ने मेरी बहु में डैम तोड़ दिया , मौसे यह भी नै पता था के मेरे भइआ मर रहे हैं मेरी बहु में , उफ्फ्फ्फ़ लेकिन माँ , इस धरती पर , मुझे वोह प्यार मिला , वोह सामान मिला , जो मुझे वह नै मिला था , मने सबसे पहले अपने भाई से प्यार किया , में अपने भाई से प्यार कर उनकी हो गई , मेरे भाई बेवकूफ नै हैं , मेरे भइआ सबको प्यार देते हैं , और अज्ज भी वोह , अपने हर चाहने वाले की रक्षा कर रहे हैं , भइआए..." रमा ने बेहद नाम आँखों से अपने दिल के दर्द को शबदो के मदीयं से बयान करते हुए बोलै ,

"ओह्ह रमा मेरी बहिन.." रवि ने नाम आँखों से रमा का हाथ अपने हाथो में लेते हुए चुम कर बोलै , उसे वोह पल यद् ए , जब उसने रमा को प्यार किया था , अपना गाओं यद् आया , अपने खेत यद् ए , अपना वोह टुटा फूटा झोपड़ा यद् आया , रवि ने प्यार से रमा की गाल को चुम लिया , सच में , उसकी हर प्रेमिका का प्यार अलग था , उसकी हर प्रेमिका उसके जीवन में अपना इक अलग स्थान रखती थी ,

"अहूऊऊऊ , प्रिन्सी , में यहाँ तुम्हारा पारिवारिक दारमा देखने नै आयी हु , मुझे वोह नक्शा दो , वार्ना तुम्हारी इक इक प्रेमिका को तुम्हारी आँखों के सामने मर दूंगी..." रहनुमा ने बेहद गुस्से में अग्ग उगलती आँखें लिए बोलै ,

"हाँ , हाँ , मर दू , पहले मेरी बेबी को मर दिया , फिर सीमा को , अभ मुझे भी मर्डर दू..." रवि ने यह बात काट के चेहरे को देखते हुए बोली , वोह काट को उकसाना छह रहा था , पर काट तोह सदमे में जा चुकी थी , वोह बेजान सी , बिना पालक जपकाये , अपनी बेबी के चेहरे को , इक तक देखे जा रही थी , पर रवि की कही बातिओं को उसने सुन लिया था , उसका ध्यान चाहे इस तरफ नै था , पर उसके कण खुले थे , वोह हर किसी की बातिओं को सुन रही थी ,

"हाँ , सही बोलै रवीए ने , पहले सीमा को मर दिया , फिर बेबी को , हमारी काट का प्यार चीन लिया तूने घटिया औरत , मर्डर दू सबको..." ख़ुशी ने बेहद चीखते , रट हुए चीला कर बोलै , तोह रवि और बाकि सब उसकी तरफ अखन फाडे देखने लगे ,

"भइआए , खुशु हमारा प्लान न ख़राब करदे..." कोमल ने बेहद धीरे से अपने भाई के कण में बोलै ,

"ख़ुशू , शन्तत हो जोऊ , प्लसस..." रवि ने ख़ुशी को आँखों से कुछ इशारा करके बोलै , तोह ख़ुशी ने अपने जज्बातो को काबू में कर लिया और शांत हो गई ,

"हूउउ , में तंग ा गई हु तुम सबसे , अह्ह्ह प्रिन्सी , आखिरी बार तुमसे मैप का पूछ रही हु , अभ में तुम्हारी बेटी फर्जी को मर डूंगीए.." रहनुमा ने बेइंतहा गुस्से में बोलै , तोह रवि और बाकि सब अपने होंठो पर हाथ रखे , अपने हस्सी को काबू में करने लगे , वोह काट को गुस्सा दिलाना छह रहे थे , पर यह काम अभ , रहनुमा ने खुद hi कर दिया था ,

"भइआ इसने तोह खुद hi उड़ता तीर पिछवाड़े में ले liya.."komal बेहद मुस्कराते हुए बोली ,

"कोमल , मेरी जान , इसने इक तीर नै , हज़ारो उड़ते तीर इक साथ अपने पिछवाड़े में लिए हैं.." रवि की बात सुन सभी हसने लगी , पर ख़ुशी हैरान सी उनको देखती रही , वोह काट के पास कड़ी थी , उसे रवि और बाकि सब की आवाज़ सुनाई नै दे रही थी ,

"हुऊ , तुम हस्स रहे हो , में सच में तुम्हारी बेटी को मर दूंगी , ाहहए , तुम्हारी बेटी के सीने को चीयर कर , उसके खून का इक इक कटरा पे जोगीइ ..." रहनुमा अभी बोल hi रही थी के उसे किसी ने टोक दिया ,

"हुऊ , मेरी बेटी को मारेगी चू.." काट ने बेइंतहा गुस्से में खड़े होते हुए बोलै ,

"घटिया औरत , मेरी बेटी को मरना तोह दूर तू उसे हाथ भी नै लगा सकती , फर्जी के बारे में इतना बोलै तुमने , उसकी माँ की इजाजत ली.." रवि ने फिर से हस्ते हुए बोलै , लारा , एलिज़ा और कोमल भी हसने लगी , ख़ुशी दूर कड़ी थी , पर इनको हस्ता देख , वोह भी हसने लगी , और हस्ते हस्ते , रवि और बाकि सब के पास आकर , उनके साथ बेथ गई ,

"कोण यह , यह मेरा क्या भिगाड लेगी , इसकी रचना तुम्हारे लिए हुई थी , इसकी शक्ति तुम hi चोट दे सकती है , तुम्हारे पिता ने ऐसे बनाया था , तेन की तुम , पारी लोग न ा सको , यह तुम मार सकती है , पर मुझे नै , में रहनुमा हु , जादूगरो की मलिका , यह छोटी सी पारी , मेरा क्या भिगाड लेगी , में इसका कण कण मिटा दूंगी , पहले में ऐसे hi मृगी और उसके बाद तुम्हारी बेटीइ ाह्यीीीे अह्ह्ह..." रहनुमा ेहनकर और घमंड में चूर होकर बोले hi जा रही थी , और काट का गुस्सा अभ बढ़ता जा रहा था , आखिर जब रहनुमा ने फिर से फर्जी का नाम लिया , काट अपने असली रूप में ा गई , उसका इंसानी शरीर फैट गया , अभ उसका कोई वजूद नै था , वोह इक सफेद रौशनी से बानी पारी थी , और उसकी रौशनी हर बीत रहे पल के साथ , और भी बढ़ते जा रही थी , अभ कैटलीन पारी लोग की जीविका थी , जिसकी रौशनी अगर थोड़ी सी भी किसी इंसान पर पढ़ जाती , तोह वोह इंसान जल कर रख हो जाता ,

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"अह्ह्ह्ह शहहहहह प्रिन्सी आईईईई अह्ह्ह्हह बचावूओ , सुमों बचाओ बेटीई , अह्ह्ह्हह बचावू अह्ह्ह्हह..." रहनुमा दर्द से तड़फते हुए जमीन पर गिर गई , उसका कला लिबास अभ जलने लगा था , काट ने अपनी पूरी शक्ति उस पर जोक दी थी , रहनुमा से यह दर्द अभ सेहन नै हो रहा थी ,

"ः , घटिया औरत , यह रिंग मुझे सौंप दो , अपनी ीचा से , और तुम उस नीले पत्थर में , खुद को कैद कर लो , वरना , यह फर्जी की मम्मी , तुम्हारा बंद बजा देगी..." रवि ने बेहद ख़ुशी में काट के पास जाते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्ह यह लू ृंगगग , म्युज़िए बचाओ अह्ह्ह्ह सशह्ह्ह..." रहनुमा ने उस ब्यांक दर्द को सेहन न कर पते हुए वोह रिंग अपनी ीचा से उतर कर रवि के पैरो में फेंक दी , रवि ने उस रिंग को उठा लिया ,

"ख़ुशी , मेरे साथ ायो , और काट , बेबी बिलकुल ठीक है , उसे कुछ नै हुआ , और इसको इतना दर्द दो , के दुबारा यह हमारी बेटी का नाम अपनी जुबान से न ले , इस घटिया औरत को तड़फाओ , वैसे मेरी जान , तुम्हारा शुक्रिया.." रवि ने पहले ख़ुशी को और जाते वख्त काट के देखते हुए बोलै , उसे ख़ुशी थी , उसका प्लान काम कर गया ,

"बेबी अभ उठ जाओ..." रवि ने ख़ुशी के साथ जाते जाते बोलै तोह बेबी उठ कर बेथ गई , उसने जैसे hi काट को देखा , वोह और भी खुश हो गई , लेकिन सीमा को जमीन पर गिरा देख , वोह थोड़ी उदास हो गई , और उठ कर कोमल के पास बेथ गई , और उनसे पूछने लगी सीमा के बारे में ,

रवि ने ख़ुशी को अपने साथ लिया और उस पहाड़ की छोटी पर पहुँच गया , यहाँ रहनुमा और जोकर ने , उस नीले पत्थर को रखा था , और आसमान से धरती का प्रवेश दूवार खोला था ,

"कैसे हो मेरे लकड़बज.." ख़ुशी ने मुस्कराते हुए रवि को पीछे से अपनी बहु में भरते हुए बोलै , लेकिन उसे अपने हाथो पर कुछ गीला गीला सा महसूस हुआ , जैसे hi ख़ुशी ने अपने हाथो को देखा , उसकी चीख निकल गई , उसके हाथ खून से साणे हुए थे , रवि के मां खुरम ने धोके से वोह जादुई खंजर रवि की कमर में घुसा दिया था , पर रवि उस तरफ अभी ध्यान नै दे रहा था ,

"ओह्ह्ह हूँ लकड़बग , पर यह होता क्या है.." रवि ने मुस्कराते हुए पीछे पलट कर बोलै , पर फिर वोह खामोश हो गया , जब उसने ख़ुशी की आँखों में असनु देखे , रवि ने ख़ुशी को अपने सीने से लगा लिया ,

"मिली प्याली ख़ुशू उम्मा..." रवि ने ख़ुशी का माथा चूमते हुए बेहद प्यार से बोलै ,

"रावी तुम चोट..." ख़ुशी आँखों में असनु लिए बेहद दर्द भरे शबदो में बोली , तोह रवि ने उसकी बात को बेच में hi काट दिया , और बोलै ,

"उफ़ मेरी जान , में ठीक हु , अभी हमें यह काम निपटना है , फिर तुम्हारी और मेरी सुहागरात होगी , उम्मन हाय कितना मज़ा आएगा..." रवि ने ख़ुशी के कंपते लाल होंठो को चूमते हुए बोलै , तोह ख़ुशी भी मुस्कराने लगी , वोह भेजी भेजी आँखों में मुस्कराते हुए , बेहद कातिलाना लग रही थी ,

फिर रवि ने उस रिंग को उस नीले पत्थर पर रख दिया , रिंग ने देखते hi देखते , उस नीले पत्थर की साडी ऊर्जा को अपने अंदर समां लिया , पोरे ब्रह्माण्ड का विनाश करने वाली ऊर्जा को , रिंग ने पल भर में hi , पूरा सोख लिया था , अभ वोह नीला पत्थर बेजान सा लग रहा था , अभ आसमान से वोह प्रवेश दूवार बंद हो चूका था , मतलब यह जुंग रवि और उसके चाहने वाले जीत चुके थे ,

जब रिंग ने उस नीले पत्थर की पूरी ऊर्जा सोख ली , तब रवि ने रिंग को जैसे hi हाथ लगाया , इक तेज़ बिजली का जतका रवि को लगा ,

"आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह maaaaa.."ravi उस तेज़ बिजली के जटके को न सहते हुए घुटनो के बल जमीन पर बेथ गया ,

"रवीए , तुम ठीक तोह हूँ.." ख़ुशी ने बेइंतहा दर्द में बोलै , उसकी अखन नाम थी ,

"अह्ह्ह शहहह में , अह्ह्ह्ह , में ठीक हूँ , आह्हः मुझे इस रिंग को उठाना hi होगा अह्ह्ह्हह हम्म्म शहहह तभी सीमा ठीक होगी , ख़ुशू , में रिंग उठता हु , तुम उस पत्थर को ले जाओ , और काट को सौंप दू ..." रवि ने ख़ुशी का सहारा लेते हुए उठते हुए बोलै , वोह बेहद कमज़ोर सा हो गया था , रिंग ने बेइंतहा गुस्से में उसे बिजली का जतका दिया था ,

"नईईई , में तुम अकेला छोड़ कर नै जोगीइ , नयी.." ख़ुशी ने बेइंतहा रट हुए बोलै , उसका मन घबरा रहा था , जैसे कोई अनहोनी घटना घटने वाली हो ,

"शहहह (ख़ुशी के होंठो पर ऊँगली रखते हुए) , खुशु , अह्ह्ह्ह में तुम सबसे बहुत अधिक प्रेम करता हु , इस प्रवेश दूवार को बंद करने का कोई और रास्ता नै था , सुनो मेरी बात , मेरी जान , इस कहानी को ख़तम करना है , में जैसे hi रिंग उठाऊ , तुम उस नीले पत्थर को उठा कर तेज़ी से गयाब हो जाना ..." रवि ने ख़ुशी का चेहरा अपने दोनों हाथो में पकड़े उसकी आँखों में आँखें दाल बोलै , उफ़ ख़ुशी का वोह मासूम चेहरा , उसका बार बार अपनी पलकें जपकाना , उसके कंपते लाल होंठ , रवि से रहा न गया , उसने धीरे से ख़ुशी के नरम कपट लाल होंठो को चुम लिया , उफ़ ख़ुशी ने सकूं से अपनी अखन बंद कर ली , और फिर िका इक वोह त्यार हो गई ,

"जान त्यार हो 1 , 2 एंड 3..." रवि ने ख़ुशी को देखते हुए 3 तक गिना , और िका इक अपने सभी प्यार करने वालो को यद् कर , उसने रिंग को उठा लिया ,

"आह्ह्हह्ह्ह्ह..." रवि की तेज़ तेज़ चखे निकलने लगी , उसे बेइंतहा बिजली के जटके लग रहे थे , वोह जटके इतने तेज़ और जानलेवा थे , जैसे किसी इंसान पर आसमान से बिजली गिरी हो , उफ़ रवि उस रिंग को हाथ में उठाये खड़ा था , तभी ख़ुशी जल्दी से उस नीले पत्थर को उठा गयाब हो गई , रिंग के अंदर अपनी खुद की शक्ति और इसके साथ साथ उस ब्लू स्टोन (नीले पत्थर) की शक्ति , अभ दोनों शक्तियाँ इक हो चुकी थी , अभ रिंग इस ब्रह्माण्ड की सबसे बड़ी ताकत थी ,

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"आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कोमललललल शहहहहह..." रवि दर्द से जोर जोर से चीख रहा था , क्यों की रिंग उसे अपना मालिक सवीकार नै कर रही थी , वोह अपनी शक्ति से रवि को रोकना छह रही थी , पर रवि ने अपने हाथ की मुठी को कास के बंद कर दिया था , तेन की कही रिंग निचे न गिर जाये , लेकिन रिंग की बेइंतहा ऊर्जा से अभ रवि का शरीर पूरा नीला हो चूका था , उसके जिस्म पर इक के बाद इक बिजली के जटके लग रहे थे , तभी रवि पहाड़ की छोटी से निचे गिर गया ,

रवि ने उस बर्फ के विशाल पहाड़ की छोटी से गिरते हुए , रिंग को कास कर अपने हाथ में पकड़ रखा था , रवि ने गिरते गिरते , इक आखरी फैसलया ले लिया , रवि ने सोचा , क्यों न वोह रिंग पहन ले , क्या पता , उसके मरते hi , रिंग के सरे शाप ख़तम हो जाये , फिर उसने सोचा , कोमल , उफ़ वोह पगली तोह उसी वख्त खुद की जान दे देगी , पर क्या पता , में जिन्दा बच जाऊ , और रिंग को में धारण कर लू , तब में अपने पिता को जल्दी मर दूंगा , और फिर कोमल मेरी , अह्ह्ह्ह क्या सकूं भरा एहसास है ,

रवि को लग रहा था , वोह खुद यह सोच रहा है , पर नै , रिंग उसके हाथ में थी , अभ रिंग उसके मन को , अपने काबू में कर रही थी , उसके मन में यह सब विचार , रिंग hi दाल रही थी , रिंग ने रवि के डेविल रूप को अपना लिया था , डेविल बुरा था , और रिंग भी बुराई का प्रतीक थी , रिंग ने रवि को पूरी तरह अपना मालिक मान लिया था , और वैसे भी , रवि पहले भी रिंग पहन चूका था , पर उस रिंग में इतनी शक्ति नै थी , जितनी इस रिंग में थी ,

क्यों की अभी अभी रिंग ने इंफिनिटी स्टोन की साडी ऊर्जा सोख ली थी , और वोह भी अंतरिक्ष मणि की , आपको बता दू , ऐसे 6 इंफिनिटी स्टोन है , जिनमे अलग अलग शक्ति है , रवि के पिटे ने जब इस ब्रह्माण्ड की रचना की , उनहोनु इस ब्रह्माण्ड को शक्ति देने वाले 6 इंफिनिटी स्टोन्स को जनम दिया , इस स्टोन्स में से इक अंतरिक्ष स्टोन (ब्लू स्टोन) को शेतीअन ने चुरा लिया था , शेतीअन ने वोह पत्थर रहनुमा को दिया , और अभ उस अंतरिक्ष स्टोन की साडी शक्ति रिंग के अंदर थी , और रिंग , रवि के पास थी , यानि अभ रवि उस शेतीअन का रूप ले चूका था , जिसकी सुहाना ने पूजा की थी ,

रवि अभ डेविल न होक , खुद डेविल से भी ऊपर , जिसे हमें शेतीअन कहते हैं , जिसके पास पूरे ब्रह्माण्ड की बुराई है , हर छोटे से छोटा गुनाह , जिसे शक्ति देता था , संसार का हर बुरा जीव जिसकी पूजा करता था , अभ रवि वोह खुद था , जिसकी सुहाना ने पूजा की , जिसे 6 लड़कयों की बलि दी , हाँ , यह वही शेतीअन था , अभ यह रवि के पिता ने यह सब किया , या शेतीअन खुद रवि तक पहुंचा , लेकिन जो भी , अभ रवि शेतीआनो का भगवन था , अभ क्या होगा , क्या रवि इस मुसीबत से निकल पायेगा , अभ रवि कैसा विवहार करेंगे अपने सभी चाहने वालो से ,

कही रवि शेतीअन है किसी को पता चल गया तोह , क्या होगा , रवि के हाथ से वोह रिंग कोण उतर पायेगा , और क्या शेतीअन रिंग उतरने देगा , बहुत hi उलझा हुआ , वख्त ऐनी वाला है , रवि और उसके चाहने वालो के ऊपर...

5तह PART थे एन्ड....

यह सब आपको 6तह part में पता चलेगा... यह 5तह part यही एन्ड होता है , नेक्स्ट part के अपडेट इक दिन छोड़ कर आएगा , अप्प बताना के रवि के पिता ने रवि को शेतीअन बनाया उस नीले पत्थर के जरिये , या शेतीअन खुद आया रवि के पास , उसके अंदर ...
 
फ्रेंड्स अज्ज रत को 9 बजे अपडेट आएगा , वोह इस स्टोरी का लास्ट अपडेट होगा , बस टाइप किया है थोड़ा चेक कर लू
 


प्यारे दोस्तों...

दोस्तों में स्टोरी को यही एन्ड कर रहा हु , यह पूरी स्टोरी में अपने इकलौते , में अपने प्यारे राइटर , जिनकी लेखनी को में बहुत मोह्हबत करता हु , उनको डेडिकेट करता हु , मेरे फेवरेट राइटर अवि भाई को , उनकी स्टोरी "मैं , मेरी फॅमिली और मेरा गाओं" माय आल टाइम बेस्ट स्टोरी है , मने जीवन में , बस इक hi स्टोरी रीड की , और वह यही थी , उनकी स्टोरी रीड करते करते मुझे लगा में भी लिखने की कोससिह करू , तोह मने यह स्टोरी स्टार्ट की , उनकी स्टोरी में कोमल नाम का करैक्टर मुझे बेहद पसंद आया , तोह मने भी कोमल को अपनी स्टोरी में मैं करैक्टर रखा , मने दुसरो से कुछ अलग लिखा , तभी यह स्टोरी 9 साल तक सर्वाइव कर पायी ,

अभ एते हैं स्टोरी पर , देखो फ्रेंड्स , में आपके लिए वापिस आया था अपनी बिजी लाइफ से वख्त निकल कर , पर शयद मने बहुत देर करदी , अभ यह स्टोरी उतनी पॉपुलर नै रही , अभ इस स्टोरी के व्यूज और रीडर्स बहुत काम हो गए हैं , अभ इसका में यही एन्ड कर रहा हु ,

अभ में नए साल के पहले दिन ायुगा , 1-1-2024 , इक नयी स्टोरी के साथ , उसका नाम होगा "मिथली" , यह मेरे दूआरा रचा गया इक कालपनिक शहर है , और अभ में इस शहर पर इक रोमांटिक , क्राइम थ्रिलर , सस्पेंस , से भरा नावेल लिख रहा हु , या अप्प स्टोरी कह लो ,

मैं उस स्टोरी को कम्पलीट कर रहा हु , मने आधी स्टोरी लिख ली है , इस बार में नै चाहता के आपको लम्बा इंतज़ार करना पढ़े उपदटेस का , मेरी दिलो ीचा थी , में इक रोमांटिक स्टोरी लिखना चाहता था , उसमे कोई सेक्स न लिखा हो , बस पुरे रोमांटिक नावेल , जिसका प्लाट में पिछले कुछ सालो से सोच रहा था , में स्टोरी कम्पलीट होते hi स्टार्ट कर दूंगा , अभ मुझे जाने की इजाजत दो , और नयी स्टोरी का इंतज़ार करना , गुड़ bye दोस्तों...

अप्प मेरी बात मनो , यही स्टोरी का बेस्ट एन्ड है , पूरा कुछ नै होता , जो अधूरा हो , उसे अपनी कल्पना में पूरा करो , और मने बहुत इंतज़ार लिया , पर 4 दोस्तों के बिना किसी ने रिप्लाई नै किया , तोह मेरी जगह कोई भी राइटर हो , वोह ऐसा hi करता...
 
फ्रेंड्स कल से अपडेट आएगा... मने 6तह part का प्लाट रेडी कर लिया है , कल रत 9 बजे अपडेट आएगा , कल से रेगुलर अपडेट आया करेगा...

इक बात और दोस्तों , मने पीछे जो भी उपदटेस दिए हैं , उनका फॉण्ट साइज बड़ा कर दिया है , अभ आपको वही फील आएगी रीड करते हुए जो पहले अति थी... शुक्रिया
 
लास्ट 5 पार्ट्स स्टोरी रिकैप



जैसा के अप्प सब जानते हो , यह स्टोरी अज्ज से 8 साल पहले स्टार्ट हुई थी , वख्त ने सब बदल दिया , हम पहले कहा थे और अभ कहा ा गए , मेरे 3 साल यहाँ न ऐनी से कुछ दोस्तों को पिछली स्टोरी भूल गई है , तोह इक छोटी सी कोससिह कर रहा , तेन की आपका वख्त और नुनु दोनों बच जाये...

"मिथली" शहर से 15 कम दूर इक छोटे से गाओं में रवि नाम का लड़का अपनी फॅमिली के साथ रहता था , रवि के पिता मर चुके थे , तोह घर की पूरी जिम्मेदारी बचपन से वोह निभा रहा था , उसके पास 3 एकड़ जमीन थी , उसके परिवार में उसकी माँ संगीता , उसकी 3 बहाने , रेखा , रमा और कोमल थी , कोमल मिथली सिटी में रहती थी अपने मां के घर , जब वोह 10 साल की थी तबसे , और उसकी पढाई का , उसकी हर चीज़ का खर्चा , रवि hi उठा रहा था ,

धीरे धीरे सब जवान हुए , तब रवि और उसकी बहिन रमा , उनके बेच कुछ ऐसा हुआ के सबकी जिंदगी बदल गई , रवि और रमा इक अनचाहे बंधन में बांध गए , उन दोनों ने सेक्स कर लिया , वोह अपनी वासना को दबा नै पाए और समाज के बनाये निज़मो को तोड़ डाला , रवि को इक अलग सा एहसास हुआ अपनी बहिन को छोड़ कर , और रमा को भी , दोनों इक दूसरे से और भी गहरायी से प्यार करने लगा , और रवि के मन में इक अनचाही वासना ने जनम ले लिया ,

रवि की बड़ी बहिन रेखा की शादी होने वाली थी , रवि को कोमल के पास जाना पढ़ा सिटी में , लेकिन जो सेक्स उसने किया अपने बहिन रमा के साथ , उसकी वासना अभ बढ़ती जा रही थी , कोई और लड़की या औरत उसे वोह सकूं न दे पायी ,

जब रवि शहर गया , तब कोमल को देख , वोह उस पर मोहित हो गया , कोमल थी hi इतनी खूबसूरत , दिलकश और हसीं , के रवि के अंदर की वासना , अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई , रवि अपनी हर बहिन को अभ वासना की नज़र से देखने लगा , उसके मां की 2 लड़कियाँ थी , इक थी शूरति और इक थी रिमी ,

रवि क्यों शहर आया था , वोह यह बात जनता था , उसे पता था , उसके मां मुसीबत में हैं , R.K नाम का इक आदमी , उसके मां को ब्लैकमेल करके , उनके बिज़नेस की आड़ में अपना ड्रग्स का डंडा कर रहा था , कोमल को अपने भइआ की यद् आयी तेन की वोह उनको बचा सके ,

रवि शहर में रहते हुए अपने प्लान के अनुसार काम करने लगा , जैसा सीमा और उसने मिलकर बनाया था , सीमा की बहिन , सीमा , कोमल की दोस्त थी , सीमा अभ रवि के करीब ऐनी लगी , लेकिन रवि तोह उस वासना में जल रहा था जो उसकी बहिन hi बजा सकती थी , वोह कोमल को चाहने लगा था , उसे बस हर जगह कोमल hi दिखाई देती थी ,

ऐसी के चलते उसने कोमल को भी अपना शिकार बनाना चाहा , पर कोमल उस वख्त इक वैम्पायर थी , वोह अपने भाई से रूत गई , लेकिन बाद में रवि के माफ़ी मांगने पर , वोह मान गई , रवि कुछ नै जनता था , के कोमल बस उसके लिए hi इंसानो के बच रह रही थी , अपनी वैम्पायर वाली पहचान छिपा कर , वोह अपने भइआ को इतना चाहती थी के मर कर भी उसकी बहु में रहना चाहती थी ,

धीरे धीरे कोमल नाटक करने लगी , जैसे उसे कोई दिमागी बीमारी हो , पर ऐसा तब होता था , जब उसका भाई उसके करीब अत था , वोह वासना में जल उठती थी , और उसका दरिदापन बहार ऐनी को दोड़ता था , बस अपने वसंपिरे वाले रूप को छुपाने के लिए , वोह झूठ बोलती गई अपने भाई से , क्यों की वोह भी अपने भाई की बहु में रहना चाहती थी ,

धीरे धीरे वख्त और अग्गे बढ़ा , रवि ने शूरति और रिमी से सेक्स कर लिया , तब उसमे इक अनचाही वासना थी , क्यों की कोमल उसे कुछ करने नै दे रही थी , और उसकी वासना कोई ठंडी नै कर प् रहा था , बस कोमल का प्यार hi उसे सकूं और शांति दे पता था , जब कोमल उसे थोड़ा बहुत प्यार करती , तब रवि वासना में जल उठता , वोह अपनी वासना में बह कर किसी और से सेक्स कर लेता , पर फिर जब वोह कोमल के करीब जाता , उसकी वासना फिर बढ़ जाती , ऐसा इस लिए होता , क्यों की , दोनों सदियों से प्यासे थे , दोनों सदियों से तड़फ रहे थे , इक दूसरे को पाने के लिए , रवि चाहे सेक्स कर लेता था , पर उसका मन कभी शांत नै होता था , उसे बस कोमल का प्यार hi शांत कर सकता था , यही हल कोमल का था ,

फिर अग्गे , रवि ने रमा , शूरति और रिमी को अपनी सचाई बता दी , के वोह क्यों शहर आया था , कोमल को लगता था के वोह खेल रही है , पर असली खिलाडी उसका भाई था , रवि ने R.K को मत देकर , उसे पुलिस के हवाले कर दिया और गाओं आकर रहने लगा , उसके मां भी गाओं ा गए ,

फिर रवि अपने चाचा के घर गया , वह उसकी 3 बहने थी , सोनल , सीतल और कविता , वह रहते रहते , रवि ने कविता से भी सेक्स कर लिया , तब कविता hi रवि के करीब आयी , कविता ने hi फाॅर्स किया था रवि को ,

वह रहते रहते इक दिन सीमा ने मज़ाक में रवि को कॉल किया और बताया के वोह विदेश जा रही है वोह उसे नै चाहती , रवि इस बात से टूट गया , पर तभी कोमल वह ा गई , कोमल ने महसूस किया , उसके भाई को उसके प्यार की जरुरत है , कोमल को लगा अभ सही वख्त है , अपने प्यार का इजहार करने का और भइआ से शादी करने का , पहले पहले रवि ने मन कर दिया , पर कोमल के रोने पर , आखिर वोह झुक गया और उसने कोमल से शादी करने का वचन दे दिया , कोमल का सपना सच हो गया , जो वोह चाहती थी वोह उसे मिल गया ,

पर इक दिन गाओं में संगीता ने रवि और कोमल को किश करते देखा , तोह उसने रवि को घर से निकल दिया , रवि 7 सालो के लिए गुमनामी की जिंदगी जीता रहा , लेकिन यह सब पहले से लिखा था , क्यों की , बेबी और काट का रवि की जिंदगी में एना तेह था , ऐसी बेच कुणाल ने कोमल पर दबाव डालना सुरु कर दिया , पर कोमल मन करती रही , इक तोह वोह वैम्पायर थी और दूसरा वोह अपने भाई को hi चाहती थी , कोमल ने अपनी पहचान छिपाये राखी और किसी की बात नै मणि , आखिर इक दिन तंग आकर कोमल घर से भाग गई , कुणाल ने गुस्से में रमा का रपे करना चाहा , पर रमा चाट से कूद गई , उसकी याददाश्त चली गई , रवि के मां उसे धोका देकर वापिस शहर चले गए ,

7 साल बाद रवि वापिस आया इक पुजारी बाबा के समझने पर , तब बस अड्डे पर उसे सीमा मिल गई , दोनों ने इक दूसरे से माफ़ी मांग , इक दूसरे को पति पत्नी मान लिया , फिर रवि गाओं जाकर अपनी माँ और बहिन रमा को अपने साथ शहर ले आया , यही part 1 एन्ड हो गया...

2ंद Part...

रवि , कुणाल से बदला लेने के लिए हवेली में बॉडीगार्ड की नौकरी करने लगा , उसने पहले ठाकुर पर हमला करवाया और फिर उसे बचने का नाटक किया , ठाकुर ने रवि को अपनी बेटी ख़ुशी का बॉडीगार्ड बना दिया ,

लेकिन यह सब खेल मस्तानी बेगम उर्फ़ दयना खेल रही थी , उसने हवेली के सभी लोग को अपने वश में कर रखा था , वोह उस मैप को पाना चाहती थी जो कोमल के पास था , कोमल के पास इक जादुई लॉकेट होने के कारन दयना उसे दंड नै प् रही थी ,

धीरे धीरे रवि और ख़ुशी करीब ऐनी लगे , रवि भी यह बात जनता था , के ख़ुशी नाटक कर रही है , पर उसे कुणाल से बदला लेना था , ऐसी बेच , रवि ने करीम खान को मर दिया , उसके जीवन में Dr.anju वापिस ा चुकी थी , जिसने उसका हर मोड़ पर साथ दिया , रवि पर बिमान शाह को शक हो गया , उसने सीमा से प्यार का नाटक किया रवि के सामने , तेन की रवि के और करीब जा सके ,

ऐसी बेच कोमल वंश जंगल के इक कबीले में रहती थी , वोह अपने दोस्त रेहान और सूजी के साथ मिल , ठाकुर का नुकसान करते जा रही थी , उसे भी बदला लेना था कुणाल से , जब कोमल ने असलम खान का सारा माल जला दिया ट्रक में , तब बिमान शाह को एहसास हुआ के हो न हो यह कोमल का hi काम है , वोह भी मैप पाना चाहता था ,

उसने इक प्लान बनाया और कुणाल का वापिस ऐनी का बोल , उसने अपने आदमी विक्तोर को कुणाल बना बेहज दिया , रवि भी कुणाल को लेने एयरपोर्ट गया , उसे लगा यही कुणाल है , पर बाद में उसे एहसास हुआ यह कुणाल नै है , फिर कोमल ने जंगल के रस्ते में कुणाल पर अटैक कर दिया , उनके बेच घमसान लड़ाई हुई , रवि ने विक्तोर को मर दिया और उसे अपनी कोमल मिल गई ,

कुछ दिन बाद hi रवि अपने परिवार को लेकर जंगल में चला गया कोमल के पास , ऐसी बेच बिमान शाह ने इक जासूस लड़की को बुला लिया , वोह लड़की बेबी थी , लेकिन थी वोह जूही , रवि की फोटो देख वोह भागी चली आयी ,

बेबी , रवि को मरना चाहती थी , पर उसके अंदर की जूही उसे रोकती रही , बेबी धीरे धीरे रवि से प्यार करने लगी , उसने रवि को बिमान शाह की नज़रिओं में मारा हुआ घोषित कर दिया , और उसे कोमल के पास छिपा दिया , अभ तक रिमी भी रवि के जीवन में वापिस ा चुकी थी , सीमा , रमा को अपना प्यार देकर ठीक कर रही थी ,

इक दिन रवि सिटी गया रमा की दवा लेने , तब उसे काली दिख गया , रवि ने dr.nelam को काली से बचा लिया और फिर उसकी हेल्प से काली को जंगल ले आया , दूसरी तरफ बिमान शाह को बेबी पर शक हो गया , बेबी ने इक किताब रवि को सौंप दी , और उसे फाॅर्स करके , उसे सेक्स करने के लिए मज़बूर किया , रवि ने बेबी को छोड़ दिया , बेबी जब cm.yadav को न मर पायी तब बिमान शाह ने इक और जासूस को बुला लिया , जिसका नाम कैटलीन था , वोह बेबी की दुश्मन थी , दोनों के बेच घमसान लड़ाई हुई , आखिर बेबी को पकड़ लिया बिमान शाह ने ,

दूसरी तरफ रवि ने dr.nelam और काली की हेल्प से रेहमान उल्ला के भाई पाक़िआ को पकड़ लिया , और उसे भी जंगल ले आया , तब तक कोमल और सीमा इक दूसरे के बेहद करीब ा चुकी थी , दोनों प्यार करने लगी इक दूसरे से , पर इक किश के अग्गे न बड़ी दोनों , क्यों की कोमल इक वैम्पायर थी , वोह अपने भाई को भी रोक रही थी , कोई न कोई बहाना बना कर ,

रवि ने पाक़िआ को मर दिया और अनु का बदला ले लिया , पाक़िआ ने अनु का रपे किया था , पाक़िआ को मरने के बाद रवि ने कोमल को अपनी बीती जिंदगी का बताया जब वोह घर छोड़ कर चला गया था , फिर कोमल और रवि ने मिलकर बेबी को बचा लिया , पर बेबी भावनायिओं में बह गई , उसने रवि को धोका दिया , वोह निशा के बिना जी नै प् रही थी , सीमा अपने पिता जी को मिलने चली गई , ऐसी बेच रवि ने रेहान को सोम भाभी के पास छोड़ दीया , तेन की रेहान और सोम रत भर सेक्स कर सके , पर कोमल इस बात से बेहद गुस्सा हो गई , उसने रवि को थपड मर दिया , रवि को इस बात का दुःख हुआ और घर छोड़ कर जाते वख्त उसका एक्सीडेंट हो गया ,

हॉस्पिटल में बेबी , ख़ुशी , सीमा , कोमल , कैटलीन , सब ए उसे देखने के लिए , ऐसी बेच बेबी ने कैटलीन को जबरदस्ती किश कर लिया , कैटलीन इस एहसास में पागल हो गई , फिर कैटलीन , बेबी से प्यार करने लगी , पर बेबी उस वख्त उस से अपना पीछा hi छुड़वा रही थी , रवि को होश आया तब उसने मस्तानी बेगम को वोह मैप देने का वादा कर दिया ,

होली के दिन , ख़ुशी ने रवि को धोका दे दिया , रवि , बेबी को अपने साथ लेकर झरने में गिर गया , सीमा पूरे परिवार को लेकर , रिमी के पास पहुँच गई , जैसा उसने और रवि ने पहले प्लान किया था , ऐसी तरह 2ंद part एन्ड हो गया...

3रद part..

करीब 6 मंथ बाद रवि को इक कुटिया में होश आया , तब वोह अजीब विव्हर कर रहा था , बेबी उसके साथ थी , पहले तोह रवि ने बेबी को दन्त दिया पर बाद में उसे अपना लिया , उस कुटिया में रहने वाली इक लड़की रानी ने , रवि को बताया वोह मर चूका है , उसके मालिक काल ने उसे इक नयी जिंदगी दी है , रवि को पहले विश्वास नै हुआ , पर रानी के समज़ने पर वोह समाज गया , वोह घर जाना चाहता था , इस लिए रानी के साथ वोह काल से मिलने गया , वह उसकी मुलाकात काया , शया और माया से हुई ,

काल ने यह बात छिपा ली के कोमल ने उसे वैम्पायर बनाया है , काल ने उसे बोलै के मस्तानी बेगम उसकी बहिन है , उसे मरने के लिए hi उसे चुना गया है , काल ने रवि को इक रिंग दी , जिसे पहन कर वोह इंसानो के बेच रह सकता था ,

रवि और बेबी वापिस शहर लोट ए , रवि अपने परिवार के साथ रहने लगा , उसकी हर बहिन , उसके प्यार में पागल थी , पता नै क्यों , कोई भी शादी करने को त्यार नै थी , रवि ने फिर सबको प्यार बाटना सुरु कर दिया , रिमी , बेबी , शूरति , सीमा , ें सबके साथ उसने सेक्स किया , पर कोमल अभ उसे जायदा करीब नै ऐनी देती थी , क्यों की दोनों अभ वैम्पायर थे , रवि से अभ कोमल की जुदाई बर्दाश्त नै हो रही थी , वैम्पायर बनते hi , उसकी वासना बहुत बाद चुकी थी , वोह कोमल से प्यार करना चाहता था , पर कोमल मज़बूर होकर उसे रोक रही थी ,

ऐसी बेच कोमल ने रवि को चाचा जी के घर बेहज दिया शूरति के साथ , वह पर , रवि ने , कविता और सीतल के साथ सेक्स किया , उसने सोनल की हेल्प की राहुल से उसे बचा कर , ऐसी बेच बेबी ने कैटलीन को दंड लिया , लेकिन कैटलीन की हालत देख , बेबी को बहुत दुःख हुआ , उसे महसूस हुआ , उसकी निशा उसे वापिस मिल गई , फिर बेबी , काट अपनी बेटी फर्जी को साथ लेकर , रवि के घर के पास इक घर लेकर रहने लगी , वही सोनल ने रवि को शादी करने का बोलै , पर रवि ने मन कर दिया , आखिर सोनल की जिद्द के अग्गे वोह झुक गया उसने हाँ करदी , फिर रवि और शूरति वापिस लोट ए ,

दयना ने 3 आदमखोरों को वंश जंगल में बेहज दिया तेन की वोह इंसानो को मरे , और उसका भाई काल उसके सामने ा जाये , उन आदमखोरु को रोकने के लिए इंस्पेक्टर राजेश वह पहुँच गया पुलिस को लेकर , पर वोह अकेला जंगल में फास गया , उसकी गफ प्रिय ने सैर को कॉल करके हेल्प मांगी , सैर जो मुन्ना की वाइफ थी , सैर ने बेबी को कॉल किया , और बेबी अकेली जंगल में चली गई ,

रवि को जब यह पता चला वोह बेबी को बचने निकल गया , रवि ने उन आदमखोरु को मर दिया , राजेश और बेबी को बचा लिया , पर तभी दयना वह ा गई , रवि उससे लड़ न सका , पर कोमल ने आकर उसकी हेल्प की , कोमल ने अपने भाई के मन में , अपने लिए , बेइंतहा नफरत भर दी , रवि टूट गया , कोमल ने रवि को घर बेहज दिया , और खुद दयना को अपने साथ लेकर नाराज में कैद हो गई , यही 3रद part एन्ड हो गया...

4तह part...

रिंग ने रूही बन कर , रवि को ठीक कर दिया , रवि अपनी फॅमिली के पास रहने लगा , लेकिन कोमल को वोह भूल नै प् रहा था , रवि को यह भी पता चला के बेबी hi जूही है , उसने बेबी को अपना लिया , और काट के करीब भी जाने लगा , बेबी के कहने पर ,

धीरे धीरे वख्त अग्गे बढ़ता गया , ऐसी बेच रवि ने सोनल को सुल्ताना नाम के गुंडे से बचा लिया , रमा उसके साथ थी , रवि और रमा , फिर से करीब ऐनी लगे , रिंग यह सेह नै प् रही थी के रवि उससे जायदा कोमल को प्यार करे , इसका इक कारन था , क्यों की रिंग सुहाना की यादिओं और उसकी बुराई से बानी थी , और सुहाना , कोमल उर्फ़ रूही से नफरत करती थी , रवि ने सोनल को डॉक्टर बनने का बोलै और वापिस घर ा गया , रिंग उसके करैक्टर को मर कर , उसका डेविल रूप बहार ला रही थी , उसका इक नया करैक्टर बनाना छह रही थी , पर रिंग हार गई ,

जब रवि की लड़ाई हुई रमा के कॉलेज में , तब उसके सार पर चोट आयी , वोह हॉस्पिटल गए वह रवि को ख़ुशी मिल गई , ख़ुशी ने रवि के दिल में कोमल का बेपनाह प्यार फिर से जिन्दा कर दिया , और रिंग ने अपनी ताकत से रवि को इंसान बना दिया , जब रवि और कुणाल आपस में लाडे , रिंग , रवि को मरना छह रही थी , उसने रवि को वैम्पायर न बनने दिया , रवि ने कुणाल को मर दिया , पर वोह खुद भी मर गया ,

ऐसी बीच काल ने सीमा को रिंग के अंदर जाकर , इक मायावी फूल लेन का बोलै , सीमा हर पड़ाव को पर करते हुए उस मायावी फूल को पाने में सफल हो गई , पर उस तालाब में कूदते hi , उसे अपना पिछले जनम यद् ा गया , वोह सीमा से सुहाना बन गई , और सुहाना की हर बुराई रिंग से निकल , सीमा के बदन में समां गई , सुहाना , फिर से कोमल की बलि देने पर उतारू हो गई ,

ऐसी बेच रवि ने बेबी और काट को लेकर , अनु के साथ इक टीम बना ली , तेन की बुराई को ख़तम कर सके , लेकिन घर पर सुहाना पर रमा को शक हो गया , सुहाना ने रमा को अपने मायाजाल में कैद कर , उसे बेइंतहा डरने लगी ,

रवि के गले में कोमल का लॉकेट था , ऐसी बेच बिमान शाह उर्फ़ जोकर ने लारा और एलिज़ाबेथ नाम की दो लड़कियाँ बुला ली , और "ग्रोथ" नाम का इक फार्मूला चुरा लिया , पर रवि लारा को रोकने वह पहुँच गया ,

वह रवि को सीमा भी जोकर के पास बैठी दिखाई दी , रवि को वह अपनी बहिन रेखा मिली जो मर कर इक डेविल नूं बन चुकी थी , रेखा ने बेबी को मर दिया , लेकिन काल के मन करने के बावजूद भी , रवि ने अपने लॉकेट को मिटा कर बेबी को फिर से जिन्दा कर दिया ,

घर पर आकर , सुहाना ने रवि को मज़बूर करना चाहा , तेन की उसका वैम्पायर वाला रूप बहार ा सके , ऐसी बेच हॉस्पिटल में , सुहाना ने नाटक किया , और रमा को अपनी शक्तियाँ मिल गई , रमा ने रवि और ख़ुशी को अंधकार लोग में कैद कर दिया ,

वह रवि को अपना पिछले जनम यद् ा गया , और वह से नाराज के दरवाजे तक एते एते ख़ुशी भी अपने पिछले जनम को यद् कर , तामस बन गई , ऐसी बेच धरती पर , सुहाना , रिमी और शूरति पर अतयाचार करने लगी , और रमा सुपत अवस्था में चली गई , अनु ने जॉब छोड़ दी और फिर से टूट गई ,

वही बेबी को भी रवि कही न मिला तोह वोह भी टूट कर भीकर गई , वोह सुहाना और जोकर से अकेले लड़ती रही , वही ख़ुशी उर्फ़ तामस की हेल्प से रवि को कोमल का पता चल गया , रवि ने हेलल में जाकर कोमल को आज़ाद करवा दिया , और दयना भी आज़ाद हो गई ,

रवि , ख़ुशी और कोमल वापिस धरती पर लोट ए , पर ें सब में 3 साल गुजर गए थे , रवि ने पहले रिमी और शूरति को सुहाना की कैद से आज़ाद करवा दिया और फिर वोह रमा का इंतज़ार करने लगा ,

उस लड़ाई में , रमा ने रवि को मर दिया , पर कोमल अपने भाई के मरते hi , खुद भी मर गई , सुहाना इस बात से पागल हो गई , उसने अपनी शक्ति से , अपने इक गुलाम को कुणाल के रूप में बुलाया और उसे कोमल का रपे करने को बोलै ,

पर उस गुलाम को रमा ने मर दिया , रमा ने बड़ी चालाकी से सुहाना से वोह रिंग हासिल कर ली , रमा ने वोह रिंग अपनी माँ जादूगरनी रहनुमा को सौंप दी , और सीमा आज़ाद हो गई , सुहाना की बुरी यादिओं से , फिर कोमल ने डायना को मर दिया , जोकर और रेखा वह से गयाब हो गए ,

लारा , रवि के साथ रहने लगी , फिर रवि अपने पूरे परिवार के साथ , वही जंगल में रहने लगा , ऐसी तरह 4तह part का एन्ड हो गया..



फ्रेंड्स लास्ट 5तह part अप्प रीड कर लेना , माफ़ करना में इतना hi लिख पाया ....
 
अपडेट-123

[PART-6TH START]

अभ अग्गे-

"हासष्ठ , इस कालमोहि का काम ख़तम हुआ.." ख़ुशी ने मुस्कराते हुए बोलै , जब उसने काट की मदद लेकर , रहनुमा को उस नीले पत्थर में कैद कर दिया ,

काट भी अभ शांत होने लगी थी , जब रहनुमा उस पत्थर में कैद हुई , तब काट खुद बा खुद शांत होने लगी , उसका इंसानी रूप वापिस ा गया , वोह ेहडेर ोहडेर नज़रियन घुमा किसी की तलाश करने लगी , हो न हो वोह खुश नसीब इंसान बेबी hi थी या रवि ,

"बेबी.." काट रट हुए भाग कर बेबी के गले लग गई , वोह उसके खूबसूरत चेहरे को पगलू की तरह चूमने लगी , और बेबी बस उसकी इस नादानी पर मुस्कराये जा रही थी ,

"अहह जणू , अभ बस करो , में ठीक हु , जणू प्लस , उफ़ काट , में ठीक हु बाबू.." बेबी ने काट के कण्डु पर हाथ रख , उसे पीछे कर , उसकी असनुईओं से भेजी आँखों में , बिना पालक जपकाये देखते हुए बड़े प्यार से बोलै ,

"में , में , अहह बेबी , में दर गई थी , कही तुम कुछ..." काट बेइंतहा रट हुए बोली ,

"अभ बंद भी करो अपना लैला मजनू का प्यार ..." ख़ुशी ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

कोमल , लारा , एलिज़ाबेथ और रमा , यह चारो सीमा के पास बैठी हुई थी , सीमा अभी भी बेहोश पढ़ी हुई थी , जादुई खंजर ने उसकी साडी शक्ति चूस कर , उसे बेहद कमज़ोर कर दिया था , और इक बड़ा सा जखम भी उसके पेट में हो चूका था ,

"तुम क्या मतलब.." बेबी ने काट को अपनी बहु में भरे , उसके मुलाम काळा बालो को सहलाते , ख़ुशी की तरफ थोड़ा प्यार भरे गुस्से से देखते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह..." इक तेज़ आवाज़ ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया , और यह आवाज़ सब जानते थे किसकी है , और सभी उस तरफ देखने लगे यहाँ से यह आवाज़ आयी थी ,

"भय्याहा..." कोमल बेहद दर्दनाक चीख मरती बोली , और उठ कर बेहद तेज़ घाटी से अपने भाई की तरफ भागने लगी , उसकी आँखों में बेइंतहा असनु बह रह रहे थे , जिनको भागते भागते वोह अपने दोनों हाथो से साफ कर रही थी , और कोमल अकेली नै थी , जो रवि की तरफ भाग रही थी , ख़ुशी , बेबी , काट , लारा और एलिज़ाबेथ भी , उसके पीछे पीछे भगति हुई ा रही थी , बस रमा hi अपनी माँ के पास वही बैठी थी ,

हुआ यह था , जब रवि उस पहाड़ से निचे गिरा , तब रिंग को उसने अपने हाथ में कास कर पकड़ रखा था , रिंग ने पहले पहले तोह उसे असीम दर्द दिया , उसे नजाने कितने बिजली के जटके मरे , उसका पूरा जिस्म हर स्थान से जला दिया , पर रवि की जिद्द देख , रिंग ने हार मान ली , जब रिंग ने रवि के मन को टटोल कर देखा , तब रवि का डेविल रूप उसे पसंद ा गया , रिंग खुद बुरी शक्ति थी , और डेविल भी बुराई का प्रतीक था , रिंग ने रवि के गिरते गिरते उसके मन को अपने वश में कर लिया और उसे सुहाने सपने दिखने सुरु कर दिए ,

रवि के मन में अनंत िचाईओं ने जनम लिया , और ें अनंत िचाईओं में इक ीचा थी , उसकी बहिन कोमल , वोह कोमल को पाना चाहता था , उसे बेपनाह मोहब्बत करना चाहता था , बस ऐसी छह में रवि ने रिंग को पहन लिया , और रिंग सफेद रौशनी में चमकने लगी , वोह बेहद खुश थी , रवि को वापिस पाकर , उसका प्यार पाकर ,

"ढहाममममममम..." इक तेज़ धमाका हुआ , बर्फ की जमीन , चिथड़े चिथड़े हो गई , इक बेहद बड़ा घड़ा बन गया , ऐसा लग रहा था , जैसे किसी ने परमाणु बम्ब फोड़ दिया हो इस जगह पर , बस ऐसी आवाज़ को सुन , कोमल और बाकि सब , भगति हुई ा रही थी ,

"भइआएए , भइआएए , उठो ना , प्लसस , भइआएए , में मर जोगीइ , प्लस भइआएए..." कोमल ने बेइंतहा रट हुए , अपने भाई का सार अपनी गॉड में रखते हुए , उसके चेहरे को बेइंतहा चूमते हुए , चीखते छीलते हुए बोलै ,

रवि बेसुध हो गया था , उसकी अखन बंद थी , पता नै रिंग उसके साथ क्या कर रही थी , वोह साँस भी नै ले रहा था , ऐसा लग रहा था , जैसे वोह मर गया हो ,

"रावी , रवीए , उठू रवीए , तुमने वादा किया था , प्लस उठू , तुम मुझे छोड़ कर नै जा सकती , प्लस उठू ना ..." ख़ुशी भी घुटनो के बल बैठी , बेइंतहा रट हुए बोली , उसे बस ऐसी अनहोनी घटना का दर था , पर वोह लिखे को मिटा नै सकती थी , जो लिखा होता है वोह होकर hi रहता है ,

लारा और एलिज़ाबेथ भी रो रही थी , उनको भी प्यार था रवि से , अभी कुछ hi वख्त हुआ था , दोनों को , रवि के जीवन में ए हुए , पर उनको ऐसा महसूस हो रहा था , जैसे वोह रवि से जनमो जनमो से जुडी हो ,

सब की सब दुखी थी , सबका दिल टुटा हुआ था , सबको बस इक hi इंसान से बेपनाह मोहब्बत थी , और वोह इंसान रवि था , किसी के अंदर वासना नै थी , किसी के अंदर चल कपट नै था , बस थी तोह , साफ सुथरी मोहब्बत ,

मोहब्बत , क्या चीज़ है यह , क्या एहसास है यह , वासना भी यही है , प्यार भी यही है , इसका कोई अंत नै , इसकी कोई शुरुआत नै , अगर किसी से मोहब्बत हो जाये तोह , कही दिल नै लगता , सांसे धीमी हो जाती हैं , हर पल , हर लम्हा , बस उसका इंतज़ार रहता है , इक पल उसे देखने के लिए , बस इक पल , उफ़ उसे देखते hi मन अपनी अंतिम सीमा तक तृप्त हो जाता है , कोई वासना नै रहती , कोई जिस्म की भूक नै रहती , लाखो जनम भी , हम प्यासे रह सकते हैं , लाखो जनम हर दर्द सेह सकते हैं , हम भगवन से लड़ सकते हैं , पर क्या इक शरीर , इक जिस्म पाने के लिए , जिस्म की भूक मिटने के लिए ,

नै , नै , जिस्म की वासना , मोहब्बत के अग्गे डैम तोड़ देती है , हम बस वोह सकूं चाहते हैं , वोह एहसास चाहते हैं , बस उनकी बहु में बहे दाल , उनको महसूस करना चाहते हैं , उनकी बहु में सकूं से मरना चाहते हैं , उनकी बहु में जो एहसास होता है , उसे में किसी भी तरह , शबदो में बयान नै कर सकता , क्यों की मोहब्बत मेरी कल्पना शक्ति से बहुत दूर है ,

इक माँ अपने बचे से मोहब्बत करती है , इक लड़का अपनी मेहबूबा से मोहब्बत करता है , इक भाई अपनी बेहेन से मोहब्बत करता है , इक दोस्त अपने दोस्त से मोहब्बत करता है , इक हिन्दू , इक मुस्लिम , अपने अपने भगवन से मोहब्बत करता है , मोहब्बत को न टोल सकते है , न नाप सकते हैं , यह सागर से गहरी और ब्रह्माण्ड से विशाल होती है , मोहब्बत hi आखरी सच है , सबको मोहब्बत बातो , जब जाओगे तब खली हाथ जाओगे , कुछ साथ नै जाता , पर जाने से पहले इतने लोग को मोहब्बत करो के आपके जाने के बाद , हर पल , हर लम्हा , वोह रट रहे , आपको यद् करते रहे , और भगवन भी झुक जाये , आपकी मोहब्बत के अग्गे , आपके चाहने वालो के अग्गे ,

बस यही हाल था ें सबका , रवि की मौत ने इनको तोड़ दिया था , रुला दिया था , अज्ज रवि के पिता चाहे जीत गए हो , पर प्यार और मोहब्बत से , अज्ज वोह फिर हार गए थे , क्यों की वोह अलग नै कर पाए थे , कोमल और रवि को , हज़ारो जनमो में , हज़ारो बार दोनों को मर कर भी , वोह इनको अलग नै कर पाए थे , क्यों की इनकी मोहब्बत सच्ची थी ,

"बाबू , बाबू , में जुहीय हूँ , उठू ना , मी मर जोगी , तुम hi मेरा आखरी सहारा हो , फर्जी , हाँ फर्जी , उसे क्या जवाब दूंगी में , उसके पापा कहा हैं , प्लस रावी , उठू , तुम्हारी बेटी मर जाएगी , तुम्हारे बिना , प्लसस ुथूवो..." बेबी , रवि के ऊपर गिर , उसके सीने पर हाथ मर , जोर जोर से रट हुए , चिकटे छीलते हुए बोली ,

"बेबी संभालो खुद को..." काट , बेबी के साथ बेथ उसे बहु में भरते हुए , बेहद नाम आँखों से बोली , उसे खुद पर गुस्सा ा रहा था , क्यों , आखिर क्यों , उसने रवि को अपनी बेटी फर्जी से दूर किया , आखरी बार भी उसे मिलने न दिया ,

"ारी , कैसे सम्बलु , कैसे , मेरा प्यार , मेरा हमसफ़र , अखन बंद कर , सोया हुआ है , में , में क्या करू , कोमळळ , तुम बोलो न , तुम , हाँ , तुम , तुम्हारी बात कभी नै टालता , तुम्हारी , तुम्हारी हर बात मंटा है , तुम उठाओ न इसको , प्लस , कोमल में हाथ जोड़ती हु , में , में तुम्हारे पेअर पढ़ती हु , कोमळळ उठाओ ना बाबू को , कोमळळ..." बेबी जोर जोर से रट हुए , कोमल के पैरो में गिरकर , अपने प्यार की भेख मांगते हुए बोली , उफ़ यह पल , बेहद दर्दनाक थे , यह पल लिख नै सकते , इनको अप्प बस महसूस कर सकते हैं ,

कोमल खुद खामोश थी , वोह खुद सदमे में जा चुकी थी , उसकी जुबान , उसके होंठ , मनो पत्थर हो गए थे , उसकी आँखों से अभ असनु भी नै बह रहे थे , बेबी की कही बतिअन , जैसे वोह सुन hi नै रही थी , उसे कुछ होश न था , फिर िका इक उसने अपने होंठ अपने भाई के होंठो पर रख दिए , उसने फैसला लिया , इक अंतिम फैसला , वोह भी जा रही थी , अपने भाई के पास , उसकी बहु में , इस दुनिआ को छोड़ कर , वोह इक मछली थी , इक बेइंतहा खूबसूरत मछली , और उसका भाई इक विशाल सागर , वोह जीवित थी अपने भाई के रहते हुए , अभ जब सागर hi सुख गया तोह मछली कैसे जिन्दा रहती , वोह भी तड़फ तड़फ कर अपना डैम तोड़ देती ,

"भइआ , में ा रही हु आपके पास , आपकी बहु में , अगर हम जिन्दा रहकर इक नै हुए , तोह मरकर इक जरूर हो जायेगे..." कोमल ने मन hi मन मुस्कराते हुए इतना बोलै , और अपने होंठ अपने भाई के होंठो से मिला दिए , उसने इक गहरी साँस लेकर , अपनी संसू को थम दिया , अपनी संसू को रोक दिया ,

पर तभी रिंग लाल रौशनी में चमक उठी , कोमल के बिना , उसका हर मकसद अधूरा था , और अभ तोह शेतीअन खुद था उस रिंग में , और शेतीअन कैसे मरने देता कोमल को , क्यों की कोमल hi इक आखरी रास्ता था , उसका सदियों पुराने मकसद को पूरा करने का , शेतीअन भी झुक गया प्यार के अग्गे , या अपने मतलब के अग्गे , और रवि की सांसे उसने लुटा दी ,

"हीएनननन हीईइंआंत्र..." रवि तेज़ तेज़ गहरी सांसे भरता हुआ जग उठा , उसने इक डैम से अपनी अखन खोल ली , उसे अपने होंठो पर कुछ नरम नरम सा महसूस हुआ , उसे समज़ते देर न लगी के , यह तोह उसकी जान है , उसकी चंचल , प्यारी , खूबसूरत बहिन , उसने भी कोमल के होंठो को चूसना सुरु कर दिया , और कोमल ने भी यह महसूस कर लिया , उसकी अखन ज़ार ज़ार बहने लगी , पर यह ख़ुशी के असनु थे , क्यों की मछली (फिश) को उसका सागर मिल गया था , अभ वोह तैर सकती थी , दुब सकती थी , अपने इस विशाल सागर में ,

कुछ देर कोमल अपने भाई के होंठो को , बेहद प्यार से , बेहद शिदत से , चुस्ती रही , चूमती रही , उसका इक हाथ अपने भाई के सीने पर था और दूसरे हाथ से वोह अपने भाई के बालो को सेहला रही थी , जब उसके मन को इक सकूं मिल गया , दिल को इक ठंडक मिल गई , जब उसका मन पूरा तृप्त हो गया , तब उसने मुस्कराते हुए , अपना चेहरा ऊपर उठा लिया , और अपने भाई को देखने लगी ,

"कोमल , हम जीत गई.." रवि बेहद धीमी आवाज़ में बोलै , उसका रोम रोम दर्द कर रहा था ,

"हाँ भइआ , हम जीत गई.." कोमल बेइंतहा मुस्कराते हुए बोली , कोमल ने अपने हाथो का सहारा देकर , रवि को बिठा दिया , पर तभी वोह फिर से निचे गिर गया ,

"अह्ह्ह्ह जूही , मेरी जान , में ठीक हु , बाबू बस कारु.." रवि मुस्कराते हुए बोलै , क्यों की बेबी उसे गिरा कर , उसके ऊपर लेती , उसके चेहरे को , उसके होंठो को , बेइंतहा रट हुए चूमते जा रही थी , और रवि बस उसके बालो को सहलाये जा रहा था ,

"बाबू , मुझे लगा मने तुम्ही.." बेबी इक पल के लिए रवि की आँखों में देखते हुए बोली , और फिरसे रट हुए उसके होंठो को चूसने लगी , बेबी इतना कास कास कर होंठो को चूस रही थी के रवि का रोम रोम , इक मीठे दर्द से भर चूका था ,

फिर बेबी ने अपने मन को सकूं पहुँचने तक रवि के होंठो को चूमा , जब उसका मन शांत हुआ , वोह रवि के ऊपर से उठ गई , कोमल ने फिर से रवि को बिठा दिया , पर तभी रवि फिर से निचे गिर गया ,

"रवीए , मेरे बेवकूफ , रवीए , मेरा क्या होता तुम्हारे बिना.." यह ख़ुशी थी , जो रवि के चेहरे को , उसके होंठो को , पगलू की तरह चूमते छत्ते रट हुए बोली थी , ख़ुशी पगलू की तरह , रवि के होंठो को चूसने लगी , उसके बालो में हाथ फिरते हुए ,

"उम् , ख़ुशू में ठीक हूँ , मिली जान , मिली तमासस्स , तुम रोटी हुई अछि नै लगती जणू.." रवि ने ख़ुशी का चेहरा दोनों हाथो में पकड़े , उसके कंपते गुलाबी नरम होंठो को चूमते हुए बोलै , तोह ख़ुशी भी मुस्कराने लगी ,

ख़ुशी भी रवि के ऊपर से उठ गई , कोमल ने फिर से रवि को बिठा दिया , पर तभी लारा और एलिज़ाबेथ , दोनों ने इक साथ रवि को बहु में भर , उसे फिर से निचे गिरा दिया , कोमल ने अपना माथा पीट लिया और बेबी और ख़ुशी की तरफ देख हसने लगी , वोह भी रवि की हालत देख हस्स रही थी ,

"लारा , एलिज़ा में ठीक हु , अभ रोना बंद करो मेरी जान , उम्मा ..." रवि ने मुस्कराते हुए , लारा और एलिज़ाबेथ के गालो को चूमते हुए बोलै , क्यों की दोनों रट हुए , रवि के चेहरे को चूमती जा रही थी , पता नै इक कशिश थी , रवि की आँखों में , इक बार कोई लड़की उसके करीब अति तोह फिर उसकी hi होकर रह जाती थी , लेकिन इसका भी इक राज़ था ,

कुछ देर बाद , लारा और एलिज़ाबेथ भी उठ कर कड़ी हो गई , इस बार रवि लेता रहा , वोह काट की तरफ देख रहा था , काट उस से कुछ दूर कड़ी , बेइंतहा रट हुए , पलट कर वापिस जाने लगी , रवि को यह देख , बेहद दर्द सा हुआ दिल में , पर अभी उसे अपनी सीमा को ठीक करना था , क्यों की अभ वोह इस संसार का सबसे शक्तिशाली इंसान था , वोह अमर था , क्यों की रिंग उसके हाथ में थी ,

फिर रवि उठ कर खड़ा हो गया , और सबके साथ सीमा की तरफ बढ़ने लगा , रमा अभी भी , अपनी माँ का सार अपनी गॉड में रखे , बेहद दर्द में , बेहद शांत , अखन बंद करके बैठी हुई थी , वोह सुपत अवस्था में जा रही थी , अगर रमा सुपत अवस्था में चलती जाती तोह पता नै कितने साल , कितने महीने , वोह सोती रहती , पर वोह अभी भी सोई नै थी , अपनी माँ को छोड़ कर कैसे सो जाती वोह , लेकिन उसने मन hi मन , यह फैसला किया था , अगर उसकी माँ मर गई , तोह वोह हमेशा हमेशा के लिए सो जाएगी , कभी नै उठेगी ,

"उफ़ खुशु , उस रहनुमा को ठिकाने लगा दिया तुमने..." रवि ने अपने साथ चल रही ख़ुशी की आँखों में ज़कते हुए बोलै ,

"हहै , उसे , उसे मने ऐसी जगह ठिकाने लगाया है , अभ वोह कभी नै आएगी , और वह कोई पहुँच भी नै पायेगा..." ख़ुशी बेहद ख़ुशी में हस्ते हुए बोली , ख़ुशी इसलिए खुश थी , क्यों की उसे पता था , अभ लड़ाई ख़तम हो चुकी है , अभ कुछ साल वोह सकूं से रह सकते हैं ,

"भइआ , हासष्ठ , यह पहला जनम है , जब हमने पिता जी को इतनी बार हराया है..." कोमल बेहद मुस्कराते हुए , अपने भाई का हाथ चुम कर बोली , जो उसने अपने हाथ में थमा हुआ था , दोनों इक साथ hi चल रहे थे ,

"हम्म , तुमने ठीक कहा जान , पिता जी जो चाहे वोह करले , पर हम दोनों कभी अलग नै होंगे , यह वादा है मेरा , मेरी जणू बहाना..." रवि ने चलते चलते कोमल के गाल को चूमते हुए बोलै तोह कोमल शर्माने लगी , उसके गाल शर्म से लाल हो गए ,

"बाबू अभ क्या करना है..." बेबी ने ऐनी वाले वख्त को यद् करते हुए बोलै ,

"हम्म , बाबू अभी तोह हम कुछ दिन आराम करेंगे , फिर देखते हैं , अग्गे क्या करना है , मने कुछ सोचा है ..." रवि , बेबी की आँखों में देखते हुए मुस्करा कर बोल hi रहा था के बेबी उत्सुकता वश बेच में hi बोल पढ़ी ,

"क्या सोचा अप्प ने बाबू..." बेबी अपने गुलाबी नरम होंठो को जीभ फिरा गीला करते हुए बोली , उफ़ रवि उसकी नली नली आँखों में खो सा गया , वोह उसके गीले नरम नरम होंठो को इक तक देखने लगा ,

"बाबू , मने पूछा , क्या सोचा अप्प ने.." बेबी शरारत भरी मुस्कान अपने दूध से सफेद चेहरे पर लिए , अपनी नली नली आँखों को मटकते हुए बोली ,

"उम् , जूही जी , रत को बताउगा , जब हम साथ होंगे .." रवि ने बेबी को आँख मरते हुए बोलै तोह बेबी शर्माने लगी ,

फिर सब वह पहुँच गए , यहाँ रमा , सीमा के साथ बैठी हुई थी , काट पहले hi वह पहुँच चुकी थी , वोह नज़रियन झुकाये कड़ी हुई थी ,

"रमा..." रवि ने रमा के पास होते हुए बोलै तोह रमा इक डैम से कड़ी होकर , अपने भाई के गले लग गई , उसने अपना इंसानी जिस्म धारण कर लिया , रमा बेइंतहा रट हुए , अपने भाई के चेहरे को पगलू की तरह चूमने लगी , वोह पागल सी हो गई थी , उसके मन के भीतर पता नै क्या चल रहा था ,

"रमा , मेरी जान , में ठीक हु , रोना बंद करो जणू .." रवि ने रमा का चेहरा अपने दोनों हाथो में पकड़े , उसकी आँखों में अखन दाल बोलै , उफ़ भेजी भेजी आँखों में , भेज भेज गोर सफेद गालो में , भेज भेज कंपते गुलाबी होंठो में , उफ़ क्या लिखू , रमा कितनी मासूम , कितनी खूबसूरत लग रही थी , मेरे पास शब्द नै , में क्या वर्णन करू इस लम्हे का , इस पल का ,

"भइआएए..." रमा और भी रट हुए अपने भाई के गले लग गई , रवि ने जब महसूस किया , उसकी बहिन का मन कितना अशांत है , और उसका रोना बंद hi नै हो रहा , तोह रवि ने रमा के होंठो पर अपने होंठ रख दिए , रवि बड़े प्यार से , रमा के गुलाबी होंठो को चूसने लगा , रमा पहले पगलू की तरह अपने भाई के होंठो को चुस्ती रही , पर धीरे धीरे , जब उसका मन शांत हो गया , तोह बड़े प्यार से , अपने भाई के बालो में हाथ फिरते हुए , उसके होंठो को चूसने लगी , कुछ वख्त तक दोनों के होंठ आपस में उलझे रहे , आखिर जब दोनों को साँस लेना मुश्किल हुआ , तब दोनों अलग हुए , रमा नज़रियन ज़ुका , मुस्कराने लगी , शर्माने लगी , फिर िका इक उसे , अपनी माँ की यद् आयी , उसने अपने भाई की तरफ देखा ,

"रमा , मेरी सेक्सी रमा , में अभी सीमा को ठीक करता हु..." रवि ने रमा के मन की उदासी को महसूस करते हुए , रमा के होंठो को चूमते हुए बोलै , तोह रमा बेइंतहा खुश हो गई ,

फिर रवि , सीमा के पास निचे बेथ गया , उसने सीमा के माथे पर हाथ रखा , उसके हाथ से लाल रौशनी निकल कर , सीमा के सार में समां गई , कुछ hi पलु बाद , सीमा ने अपनी काली काली आँखों को खोला , अपने रवि को अपने पास बैठा देख , सीमा बेहद खुश हो गई , उसने उठ कर रवि को अपनी बहु में भर लिया ,

"अह्ह्ह सोना..." सीमा के मन को इक सकूं सा मिल गया , रवि की बहु में जाते hi , फिर रवि ने कुछ वख्त तक , उसके नरम गुलाबी होंठो को चूमा , उसे प्यार दिया , तोह सीमा और भी मुस्कराने लगी ,

"चले घर्र मेरे सोना..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै , तोह सीमा के होंठो पर इक मुस्कान फैल गई , रवि ने उसे सहारा देकर खड़ा किया , और फिर सब घर की तरफ जाने लगे ,

"ख़ुशू , इस जंगल को पहले जैसा कर दू.." रवि ने मुस्करा कर बोलै , तोह ख़ुशी थोड़ा चिंतित हो गई ,

"रवि , वोह , वोह , जंगल के बहार , वोह पुलिस आयी है , तुम लेने..." ख़ुशी ने बेहद दुखी हालत में बोलै ,

"कोई बात नै , में उनसे निपट लूंगा , तुम सब ठीक कर दो..." रवि ने कुछ सोचते हुए बोलै , ख़ुशी ने अपनी शक्ति से , सब कुछ पहले जैसा कर दिया , अभ वह कोई बर्फ नै थी , और यह चमत्कार "मिथली" शहर के हर इंसान ने देखा था , और क्या पता पूरी दुनिआ ने देखा हो ..

वही दूसरी तरफ....

इक बड़ा सा रूम , जिसका दरवाजा बंद था , इक शांति थी , इक अजीब सी शांति थी रूम में , सामने दीवार पर लगी घडी की "टिक टिक" की आवाज़ भी मनो , बेहद जायदा शोरे करती परतीत हो रही थी , रूम में कुछ खास सामान नै था , रूम के बेचू बेच इक बीएड पढ़ा हुआ था , इक डबल बीएड , चाट पर इक पंखा लगा हुआ था , जो चल तोह रहा था , पर उसकी रफ़्तार बेहद काम थी , इक तरफ दीवार पर इक A.C लगा हुआ था , जो अभी बंद था , A.C के निचे इक बहुत सुन्दर पेंटिंग लगी हुई थी , जिस पर इक लड़की की तस्वीर थी , वोह लड़की उस तस्वीर में मुस्करा रही थी , उस पेंटिंग के साथ hi इक लड़के की बड़ी सी फोटो लगी हुई थी , बिलकुल साथ में ,

बीएड के लेफ्ट साइड की दीवार के कोने में इक अटैच्ड वाशरूम था , और राइट साइड के कोने में , इक बड़ी सी लकड़ी की अलमारी थी , जिसमे शयद कपडे थे , और बीएड के बिलकुल सामने , रूम के दरवाजे के साथ , दीवार पर , इक बहुत बड़ा लेद टीवी लगा हुआ था , जो अभी बंद था ,

उस डबल बीएड पर इक लड़का लेता हुआ था , पर तभी वोह लड़का तेज़ चीख मरता उठ कर बेथ गया "अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह..."

तभी इक इंसान जल्दी से रूम के अंदर आया और उस लड़के के पास जाकर बेथ गया , कोण था यह ,

"अह्हह्ह्ह्ह में कहा हुऊ अस्स्सह्ह्ह मेरा सारर अह्ह्ह्ह..." वोह लड़का अपना सार दोनों हाथो में दबाये बेहद दर्द में बोलै ,

"बेटा , आखिर तुम होश ा hi गया..." वोह इंसान बेहद ख़ुशी में उस लड़के के सार में हाथ फिरते हुए बोलै ,

"होश , अह्ह्ह्ह पिता जी..." वोह लड़का अपने पिता के चेहरे को देखते हुए , अपनी पिछली जिंदगी को यद् करने लगा ,

"हाँ बेटा , तुम 4 साल बाद होश आया हैई , हमने तोह उम्मीद hi छोड़ दी थी , पर भगवन का शुक्र है , तुम होश ा गया..." वोह इंसान अपने बेटे का हाथ अपने हाथो में लेते हुए , थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"क्या , 4 साल , अह्ह्ह्ह , ओह्ह्ह्ह , मुझे यद् हैई , वोह रवीए , वोह कमीना रवीए , कहा है वोह , कोमलललल , पिता जी , मुझे रवि चाहये , में उस सेल को जिन्दा नै छोड़ूगा , अह्ह्ह मेरा साररर..." वोह लड़का अपना सार पर हाथ रखे , बेइंतहा गुस्से में बोलै ,

यह लड़का कोई और नै , कुणाल था , ठाकुर कुणाल परताप सिंह , उसदिन रवि और कुणाल की लड़ाई हुई थी , फिर दोनों की कार्स आपस में टकराई थी , कुणाल की गाड़ी , जंगल में गिर गई थी , लेकिन जब कुणाल की गाड़ी , उस गहरी खायी में गिरी , तब गाड़ी के गिरते गिरते कुणाल बहार कूद गया था , गाड़ी उस गहरी खायी में , पेडू से टकरा कर ब्लास्ट हो गई , और कुणाल भी उस खायी में गिरकर बेहोश हो गया था ,

जब पुलिस वह पहुंची तब ठाकुर जय देव भी उनके साथ था , जयदेव ने जब कुणाल की हालत देखि , तब उसे बेइंतहा गुस्सा आया था , और उसे जल्द hi पता चल गया के उसका दुश्मन रवि जिन्दा है , लेकिन जयदेव ने दिमाग से काम लिया , उसने कुणाल को दुनिआ की नज़रिओं में मारा हुआ घोषित कर दिया , कुणाल को खान नगर में , अपने इस घर में ले आया , तब से कुणाल का इलाज यही चल रहा था , कुणाल के सार पर गहरी चोटियन आयी थी , वोह कोमा में जा चूका था , और अज्ज 4 साल बाद उसे होश आया था ,

"शांत बेटे , उस रावी को , हम मिलकर मरेंगे , वोह , वोह कमीना , तुम्हारी बहिन को भी ले गया , 4 सालो से तुम्हारी बहिन और रवि कहा हैं , इसका कुछ पता नै चला , पुलिस भी उनको दंड दंड कर थक गई है..." ठाकुर जयदेव ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"वोह , अह्ह्ह , वोह कुटिया मेरी बहिन नै है , अह्ह्ह्ह उस कुटिया ने , हमें धोका दिया , उस भिकारी के साथ भाग गई , अह्ह्ह्ह छोड़ूगा नै में दोनों को..." कुणाल अपनी बहिन ख़ुशी को यद् कर , बेइंतहा गुस्से में चीखता हुआ बोलै ,

"हम्म , अभी आराम करो तुम , पूरी तरह ठीक हो जाओ , मने सुना है , पुलिस को पता चल गया है रवि कहा छिपा है , तुम मरे हुए हो , यह बात राज़ hi रखना , अभ देखो , में क्या गेम खेलता हु उस रवि के साथ..." ठाकुर जय देव मुस्कराते हुए अपने बेटे कुणाल की तरफ देख बोलै , फिर उसे बताने लगा , हमें अग्गे क्या क्या करना है , किस तरह करना hai...or फिर ठाकुर जयदेव उठ कर बहार चला गया ,

"रवीए , तुम क्या लगता है , बस तुम hi सब यद् आया है , ाहः , मुझे भी , हाँ कुत्ते , मुझे भी सब यद् ा गया है , में हु जेनिथ , थे किंग जेनिथ , पारी लोग में , माँ ने मुझे कोमल से दूर रखा , इस लिए वोह बच गई मुज़से , पर अभ , हाहाहा , अभ कोण बचाएगा उसे , रविइइइ , में अपनी शक्ति से , तेरे जीवन को तबाह और बर्बाद कर दूंगा , खुशी , खुशी , अभ खुशी hi मुझे तुम्हारे पास लेकर जाएगी , अपनी कुटिया बहिन ख़ुशी को अपने प्यार के जाल में फसा कर , में तुझे फिर से मत दूंगा , और फिर , मेरी सदियों की प्यास शांत होगी , कोमल , अह्ह्ह्ह , तेरा लाजवाब हुसैन , उफ्फ्फ्फ़ तेरे साथ सोने का मेरा सदियों पुराण सपना , अभ पूरा होगा , कोमल , अह्ह्ह क्या मस्त चीज़ है तू , उफ्फ्फ्फ़ बस इक बार , बस इक बार , तू मेरे साथ सो जा , में तुझे छोड़ लू , हॉष्ह , सकदु लड़कयों को छोड़ा है मने , पर कोमल , उम् शठ कोमल तेरे जैसी कोई नई , इस बार तू खुद आएगी मेरे पास , मुज़से छोड़ने के लिए , ाहः , डेविल तेरा भाई ा रहा है , जेनिथ ा रहा है , तेरे जीवन को नाराज से भी बदतर करने ाहः..." कुणाल अपने मन hi मन कोमल के , लाजवाब , खूबसूरत हुसैन के सपने लेते हुए , मुस्कराते हुए बोलै , उसकी अखन लाल रौशनी में चमक रही थी , पर वोह सबसे बच कैसे गया था , इसके पीछे क्या राज़ था , किसी को पता क्यों न चला के कुणाल अभ भी जिन्दा है , शयद कुणाल उर्फ़ जेनिथ में , कुछ अद्भुत शक्तियाँ थी , या रवि के पिता ने कोई मायाजाल रच कर , कुणाल के जिन्दा होने का , किसी को एहसास तक नै होने दिया था ... यह तोह ऐनी वाले वख्त में छिपा था...

यह है Part 6तह.... रवि वस कुणाल... ओने लास्ट टाइम....


तो बे कुनिटेड.....
 
अपडेट-124



अभ अग्गे...

रवि और उसका पूरा परिवार , इक साथ वंश जंगल में , अपने घर की तरफ बढ़ रहा था , रवि बहुत खुश था , उसे इस बात की ख़ुशी नै थी के वोह यह जुंग जीत गया है , उसे ख़ुशी इस बात की थी , उसने अपने पिता को फिर से मत दी थी , अपने पिता के हाथो में इक और हार थमा दी थी , पर क्या उसके शक्तिशाली पिता अभ खामोश रहते , क्या वोह अपने बेटे और अपनी बेटी के प्यार को कबूल कर लेते , उनके अग्गे झुक जाते , शयद ऐसा कभी न होता ,

ख़ुशी ने जंगल को पहले जैसा कर दिया था , जंगल के अंदर क्या हुआ , क्यों हुआ , यह बात कोई नै जनता था , क्यों की , जंगल के चारो और इक सुरक्षा घेरा निर्मित था , कोई आम इंसान कभी न देख पता , रवि और रहनुमा की जुंग को , न hi उस बड़े से छेद को , जो उस नीले पत्थर से बना था , ऊपर आसमान में , खैर अभ सब ठीक हो चूका था ,

रवि अपने परिवार के साथ अग्गे बढ़ hi रहा था , पर तभी , पुलिस कमिश्नर राजेश ने रवि और बाकि सब को घेर लिया , करीब 100 से जायदा पुलिस वाले , हाथो में गन्स तने , रवि और उसके परिवार को घेर कर खड़े थे , और रवि के सामने C.rajesh खड़ा था , रवि उनकी तरफ देख बस मुस्करा दिया ,

"रविइइइ..." इक लड़की रोनी सी आवाज़ में बोली और भाग कर रवि के गले लग गई , यह लड़की कोई और नै , बल्कि अनु थी , वोह रट जा रही थी , उसे बेइंतहा ख़ुशी थी , अपने प्यार को सही सलामत देख कर ,

"ओह्ह डिटेक्टिव , क्या हुआ जणू..." रवि ने अनु का चेहरा अपने दोनों हाथो में पकड़े , उसके कंपते गुलाबी नरम होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"रवीए , कहा थे तुम , हम , हम , जंगल के अंदर ा नै प् रहे थे , और , और , मुझे लगा , कही मने , फिरसे..." अनु बेहद रट रट इतना सा बोल पायी , और रवि को कास कर अपनी बहु में भर , उसके सीने में सर छिपाये रोने लगी ,

"अनु , यह इक मुज़रिम है , दूर हटो इस से.." राजेश ने अपनी गन के ट्रिगर पर ऊँगली दबाते हुए , बेहद गुस्से में बोलै ,

"नईईई सिररर , रवि मुज़रिम नै ही , यह निर्दोष है , प्लस सिर्र , मेरे रवि को छोड़ दो , प्लस..." अनु बेइंतहा रट हुए , घूम कर रवि के अग्गे खड़े होते हुए बोली ,

कोमल , ख़ुशी , सीमा , बेबी , काट , लारा और एलिज़ाबेथ , सब ख़ामोशी से कड़ी , सबकी बतिअन सुन रही थी , सीमा और कोमल इक साथ कड़ी थी ,

"उफ्फ्फ देदी देखा , भइआ अनु से भी प्यार करते हैं.." कोमल बेहद धीमी आवाज़ में मुस्कराते हुए बोली ,

"हम्म , सोना तुमने ठीक कहा , रत को बात करेगी इस बारे में..." सीमा भी कोमल की बात सुन मुस्कराते हुए बोली ,

वही राजेश बेहद गुस्से में रवि पर गन तने खड़ा था , जैसे अभी फायर कर देगा , उसे लग रहा था , उसकी चलाई गोली से , रवि मर जायेगा , पर रवि बस मुस्करा रहा था , पर रिंग लाल रौशनी में चमक रही थी ,

"हासष्ठ अनु , इक मुज़रिम बस मुज़रिम hi होता है , अगर तुम रवि से प्यार है , तोह इसको बोलो , अपने अप्प को मेरे हवाले कर दे..." राजेश ने वैसे hi गुसी भरे शबदो में बोलै ,

"पर किस जुर्म में..." सीमा ने अग्गे बढ़ते हुए बोलै , उसने बाकि सब को खामोश रहने का इशारा किया , वोह खुद hi बात करना चाहती थी ,

"अप्प कोण.." राजेश ने सीमा की तरफ देख कर बोलै ,

"में इनकी वाइफ सीमा , अप्प बताओ मेरे पति ने ऐसा क्या किया है , के अप्प पूरे शहर की पुलिस लेकर यहाँ ए हो..." सीमा ने रवि पास आकर , उसके साथ खड़े होते हुए बोलै ,

"हम्म , तोह मिस सीमा , आपके पति ने ख़ुशी ठाकुर को किडनैप किया , और हमारे दसप शमशेर सिंह को मरने की कोससिह की , जब हम ऐसे पकड़ने गए थे हॉस्पिटल में..." राजेश ने बेहद शांति में बोलै , अभ उसकी आवाज़ में वोह गुस्सा नै था ,

"ाचा मज़ाक है..."

"क्या , क्या बोलै अप्प ने.." राजेश , सीमा की बात सुन चौंक कर बोलै ,

"मने कहा ाचा मज़ाक है , ख़ुशी का किडनैप , हुऊ , ख़ुशी ेहडेर ायो मेरे पास..." सीमा ने पहले राजेश की तरफ , और फिर पलट का ख़ुशी की तरफ देखते हुए बोलै , ख़ुशी सर झुकाये सीमा के साथ आकर कड़ी हो गई ,

राजेश खामोश खड़ा , ख़ुशी की तरफ देख रहा था , उसे लग नै रहा था , ख़ुशी का किडनैप हुआ है , क्यों की , उसके विस्तार (कपडे) किसी योद्धा की तरह थे , जैसे अभी वोह किसी जुंग में जा रही हो ,

"खुशु , अभ बताओ , रवि ने तुम कब किडनैप किया था..." सीमा ने मुस्कराते हुए ख़ुशी की तरफ देख कर बोलै , पर ख़ुशी खामोश रही ,

"खुशु बताओ , वार्ना यह मुझे जेल में दाल देंगे.." रवि ने ख़ुशी के चेहरे को देखते हुए बोलै ,

"मिस ख़ुशी ठाकुर , क्या रवि ने आपको किडनैप किया था , आपके पिता ने कम्प्लेन दराज़ कराइ है , जल्दी बोलो , अप्प पिछले 3 साल 10 दिन से लापता हैं , बोलो जल्दी.." राजेश ने पहले रवि की तरफ और फिर ख़ुशी की तरफ देख कर बोलै ,

"नै..." ख़ुशी ने इक बार चेहरा ऊपर उठा , बेहद धीमी आवाज़ में बोलै ,

"क्या..." राजेश अपने कण पर हाथ रख ख़ुशी की आवाज़ को सुनने की कोशिश करता हुआ बोलै ,

"मने बोलै नईईई , इस बेवकूफ ने मेरा किडनैप नै किया था , में अपनी ीचा से इसके साथ भागी थी , में ऐसे प्यार करती हु..." ख़ुशी ने इस बार थोड़ा गुस्से में चीख कर बोलै ,

"ीीीायणं , ाचा , ठीक है , तुम रवि से प्यार करती हो , अनु भी रवि से प्यार करती है , और मिस सीमा तोह रवि की वाइफ हैं hi , अरे , हाँ , यद् आया , मेरी बीवी प्रिय ने बताया था , बेबी , हाँ , बेबी भी रवि से प्यार करती है , रवीए कितनी लड़कियाँ है कुल , जो तुम प्यार करती हैं .." राजेश ने अपना माथा पीट कर बोलै ,

सब राजेश की बात सुन हसने लगे , शयद उसे समाज ा गया था , रवि निर्दोष है ,

"सर , 3 पीछे कड़ी हैं , इक मेरी कोमल और इक रमा , और इक यह अकड़ू काट..." रवि ने मुस्कराते हुए पीछे प्लाट रमा , कोमल और काट की तरफ देख कर बोलै , काट अपने बारे में यह सुन , रवि को खा जाने वाली नज़रिओं से देखने लगी , और बेबी , रवि की बात सुन बेइंतहा हसने लगी ,

"तुम बहुत हस्सी ा रही hai..."kat ने बेबी की कमर में चिमटी काटते हुए बोलै ,

"आईईईईई , सच hi तोह बोलै रवि ने ..." बेबी और भी मुस्कराते हुए काट की तरफ देख कर बोली ,

"घर चलो , पहले तुम सीधा करुगीय..." काट ने बेबी के कनु में धीरे से बोलै ,

"नै जणू , में मज़ाक कर रही थी..." बेबी थोड़ा उदास होकर बोली तोह काट उसकी तरफ देख मुस्कराने लगी ,

"जणू , में भी मज़ाक कर रही हु..." काट ने बेबी का हाथ अपने हाथ में लेकर उसे चूमते हुए बोलै , तोह बेबी खुश हो गई ,

वापिस वही पर...

"सर , यह बेवकूफ ऐसा hi है , आपको नै पता सर , इसकी 20 और गफ हैं , हाँ सर , अप्प इसको जेल में दाल दो ..." ख़ुशी ने राजेश की तरफ बढ़ते हुए बोलै , और सब की सब मोह फाडे ख़ुशी को देखने लगे , रवि ने अपना माथा पीट लिया ,

"क्या , ाचा , पर यह तोह बताओ , तुम दोनों थे कहा , पूरे 3 साल , हम तुम दंड दंड कर थक गए , कहा थे तुम..." राजेश ने पहले चौंक कर और फिर उन 3 सालो में दोनों कहा थे , यह जानने की ीचा से बोलै ,

"अरे सर यही थे हम दोनों..." रवि ने इस बात को टालने की कोससिह करते हुए बोलै ,

"नई सिर्र , यह झूठ बोल रहा है , में आपको बताती हु..." ख़ुशी ने पिछले पलट , रवि को देखते हुए , अपनी जीभ निकल उसे चिढ़ाते हुए बोलै ,

"अरे सिर्र , अप्प इसकी बात मत सुनो..." रवि ने सीमा और बाकि सबकी तरफ देख , अपना माथा पीट बेहद बेबसी में बोलै , सब की सब हस्स रही थी , रवि की इस हालत पर ,

"रवीए , तुम चुप राहू , बोलने दो बेचारी को , ख़ुशी तुम बताओ.." राजेश ने रवि को दन्त लगते हुए बोलै ,

"बेचरीय.." रवि ने थोड़ा धीमी सी आवाज़ में बोलै , बाकि सब , राजेश की बात सुन हसने लगी थी ,

"सर , में आपको बताती हु , उस दिन , रवि ने मुझे फ़ोन किया , और बोलै , इक बैग में कपडे पैक करो , और जल्दी ा जाओ , हमें कही जाना है , में जल्दी से कपडे पैक करके , इसके साथ गाड़ी में शहर की तरफ जाने लगी , यह हवेली के बहार hi खड़ा था गाड़ी लेकर..." ख़ुशी अभी बोल hi रही थी , राजेश बेच में बोल पढ़ा ,

"लेकिन तुम जा कहा रहे थे..."

"सर , यह मुझे नै पता , लेकिन सर , हम जैसे hi शहर पहुंचे , तभी इसकी किसी बहिन ने फ़ोन किया , और बोलै के सीमा हॉस्पिटल में है , तुम जल्दी ायो , हम दोनों पहले हॉस्पिटल पहुँच गए , वह रवि अकेला अंदर चला गया , में बहार गाड़ी में बैठी रही..."

"सीमा को क्या हुआ था..." राजेश ने फिर से बेच में hi बोलते हुए कहा ,

"वोह सर , माँ का पेअर स्लिप हो गया था किचन में , उनके सार पर चोट आयी थी..." रमा जो कब से खामोश थी , सीमा के पास आकर , उसके साथ खड़े होते हुए बोली , पर राजेश तोह चौंक गया , रमा के सीमा को माँ कहने पर ,

"ओह्ह , ाचा , ख़ुशी अग्गे क्या हुआ..." राजेश ने अपने टोपी उतर , अपने बाल कूजते हुए बोलै ,

"हाँ सर , बताती हु ..." ख़ुशी अभी बोलने hi जा रही थी , रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"सर , में क्या कहता हु , यह कहानी थोड़ी लम्बी है , अप्प हमारे साथ घर चलो , यही पास में है , वही बेथ कर बात करते हैं , अप्प ें पुलिस वालो को वापिस बेहज दो..." रवि ने राजेश के पास आकर , उसके सामने खड़े होते हुए बोलै ,

"पारर..."

"सर , आपकी वाइफ मेरी बहिन है , उसने राखी बंदी थी मुझे , अगर आपको , मुझ पर विश्वास नै है , तोह ठीक है , कोई बात नै , पर सर , अगर में थोड़ा सा भी गलत हुआ , तोह में खुद आपके साथ चलुगा , प्लस सर.." रवि ने बेहद उदास आवाज़ में बोलै , वोह अनु और राजेश को hi अपने साथ लेजाना चाहता था , क्यों की , वोह नै चाहता था , बहार के जायदा लोग , कबीले के बारे जाने ,

"ठीक है , में तुम पर विश्वास करता हु , ायो चले , अनु तुम भी ायो , और चौबे जी , अप्प वापिस जाओ , और मीडिया वालो को सम्बल लेना.." राजेश ने कुछ देर सोच कर बोलै ,

"सर में कैसे..." चौबे जो पहले हवलदार हुआ करते थे , अभ सुब इंस्पेक्टर बन चुके थे , इनका जीकर किया था मने , चौबे जी , हिघ्त 5'7" , थोड़े मोठे हैं , गोल मटोल , पेट भी थोड़ा बड़ा है ,

"अरे कमल करते हैं चौबे जी , अप्प से बड़ा एक्टर कोई नै , और इक बात , अपना पेट अंदर करके बात करना , पुलिस पहले hi बदनाम है..." राजेश ने मुस्करा कर बोलै , तोह सब चौबे जी को देख हसने लगे , ख़ुशी सब से जायदा हस्स रही थी ,

"अरे सर अप्प भी , हम जाते हैं.." चौबे जी अपनी साँस को ऊपर खींच , अपने पेट को अंदर कर , वह से जाते हुए बोले , सब उनके इस तरह करने से हसने लगे ,

कुछ देर बाद , रवि और बाकि सब , कबीले में , अपने बड़े से , लकड़ी के बने घर में बैठे बतिअन कर रहे थे , सीमा ने एते hi , सबके लिए हल्का फुल्का छाए नाश्ता त्यार कर लिया था , राजेश तोह कबीला देख चौंक सा गया था , पर अनु नै , क्यों अनु पहले ा चुकी थी इक बार ,

शूरति और रिमी , अपने भाई से मिल कर बहुत खुश थी , वोह अपने भाई के साथ hi बैठी हुई थी , रेहान और सूजी , भी वह ा चुके थे , सब छाए पेट हुए , बतिअन कर रहे थे , ऐसी बेच , ख़ुशी वाशरूम का बहाना बना कर , फर्जी को भी ले आयी थी , उसने फर्जी की आँखों पर पट्टी बंद , समाये चाकर का निर्माण कर , उसे यहाँ ले आयी थी , फर्जी अभ बची तोह थी नै , 13 साल की हो चुकी थी वोह , पर वोह अभी के लिए चुप थी , अभ अग्गे..

"पापा , पापा..." फर्जी अपने पापा को देखते hi , भाग कर उसके गले लग गई , रवि भी नाम आँखों से , अपनी बेटी के चेहरे को चूमने लगा , पर काट और बेबी , इक दूसरे की तरफ देख चौंक सा गई थी , फिर वोह ख़ुशी को देख मुस्कराने लगी ,

"उफ़ मेरा बचा , कैसी हो बीटा.." रवि ने फर्जी का माथा चुम , उसे गॉड में बिठाते हुए बोलै ,

"पापा में ठीक हु.." फर्जी ने अपने पापा के चेहरे पर अपना नाज़ुक हाथ फिरते हुए बोलै ,

"अले , अले , कितनी प्यारी बची है .." राजेश ने फर्जी के सार पर हाथ फिरते हुए बोलै , तोह फर्जी भी मुस्कराने लगी ,

फिर ख़ुशी भी वही इक सोफे पर बेथ गई , सब के सब बैठे हुए थे , पर ख़ुशी तोह ख़ुशी थी , उसे अपनी कहानी पूरी करनी थी ,

"सर , अभ सुनो अग्गे क्या हुआ.." ख़ुशी ने सबकी तरफ देखते हुए बोलै , तोह सबने अपना माथा पीट लिया ,

"अरे रहने दो खुशु..." रवि फिर से इस बात को टालने के लिए बोलै ,

"अरे रावी , बोलने दो बेचारी को , बोलो ख़ुशी..." राजेश ने अपनी छाए ख़तम कर , खली कप , सामने पड़े टेबल पर रखते हुए बोलै ,

रवि ने चौंकते हुए ख़ुशी को देखा , राजेश , ख़ुशी को मासूम और बेचारी समाज रहा था , उसे पता नै था , ख़ुशी , अपने डेमों रूप तामस में है , और तामस तोह तामस थी , वोह रवि को बस परेशान करती रहथि थी , पारी लोग में भी , उसने प्रिंस रवि का जीना हराम कर रखा था , पर इसमें भी उसका प्यार था , और रवि को भी , ख़ुशी की प्यारी नोकझोक अछि लगती थी ,

ख़ुशी की अप्प बीती अग्गे...

"सर , जब हम हॉस्पिटल पहुंचे , तब रवि मुझे बहार गाड़ी में बैठा अंदर चला गया , जब रवि काफी देर बहार न आया , सिररर , तब में भी अंदर चली गई , सिररर , जो मने वह पहुँच कर देखा , ओह्ह्ह माँ , सिर्र क्या बोलू उस बारे में..." ख़ुशी बेहद मासूमियत से सब बता रही थी , जब सीमा को रिंग ने सुहाना बना दिया था , और वोह नयी नयी हथकंडे अपना रही थी , रवि और उसकी बहनो के बेच नफरत पैदा करने के ,

"क्या देखा tumnee..."es बार राजेश से पहले अनु बोल पढ़ी , उसे बेहद उत्सुकता थी , क्यों की , उन 3 सालो में उसने बहुत दर्द सहा था , वोह रवि को हर जगह तलाश कर , उसके न मिलने से टूट सा गई थी ,

"अरे नुनु , मने देखा..." अभी ख़ुशी बोलने hi जा रही थी , पर तभी रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"नुनु नै अनु बोलो..." रवि ने अपना माथा पीट कर बोलै , तोह सब हसने लगे ,

"इक बार , इक बार और , तुमने , बेवकूफ तुमने , मुझे बेच में रोका , तोह में तुम यही लिटा कर पीट दूंगी , समाज गए..." ख़ुशी ने रवि को गुस्से से देखते हुए , अपना हाथ को बॉक्सिंग पंच की तरह बनाते हुए बोलै , तोह सब फिर से हसने लगे ,

"खुशु , तुम बताओ , भइआ , अभ बेच में मत टोकना..." कोमल ने अपने भाई को आंख मरते हुए , मुस्करा कर बोलै , रवि भी कोमल का इशारा समाज गया ,

"हाँ तोह सिर्र , मने देखा , रमा के बड़े बड़े लाल बाल थे , और उसका शरीर पूरा कला था , उसके सीने में इक बड़ा सा ब्लैकहोल बना हुआ था , और रवि उसके अंदर जा रहा था , मने भाग कर , रवि को बचाना चाहा , पर में भी उसके साथ , उस ब्लैकहोल में समां गई , और फिर..." ख़ुशी अभी बोल hi रही थी के राजेश बेच में बोल पढ़ा ,

"क्या , पर कैसे , रमा कोण है यहाँ..." राजेश ने अपने बाल खुजाते हुए आसपास नज़र मर बोलै ,

"सर में हु रमा..." रमा ने बेहद मासूम सी बनते हुए बोलै , अभी वोह इंसानी रूप में थी , राजेश ने पहले रमा की तरफ और फिर ख़ुशी की तरफ देखा ,

"सिररर , अप्प इसके भोले चेहरे पर मत जाओ , यह जादूगरनी है , ें सबको पूछ लो..." ख़ुशी ने सबकी तरफ देखते हुए बोलै , सभी इक साथ बोल पढ़े ,

"सर , हमारी खुशु ठीक बोल रही हैई..." सभी इक साथ बोल मुस्कराने लगे ,

"पर , हष्ठ , ाचा अग्गे बताओ..." राजेश ने अनु की तरफ देखते हुए बोलै , वोह खुद हरिजन थी , यह सब सुन कर ,

"हाँ सिर्र सुनो , फिर में और रवि , इक अँधेरे भरे स्थान पर जा गिरे , सिररर वह as-pas कला अँधेरा था , उसे अंधकार लोग कहते थे , और सर वह हमारा 1 दिन पृथ्वी के 1 साल के बराबर था , और सिर्र , रवि प्रिंस बन चूका था , इसको अपना पिछले जनम यद् ा गया था , यह पारी लोग का प्रिंस था..." ख़ुशी ने अपने चेहरे पर अजीब अजीब से hav-bhav लेट हुए बोलै ,

"क्या प्रिंस , एरर , ाचा अग्गे बताओ.." राजेश बेहद कंफ्यूज हो गया था , उसे कुछ समाज नै ा रहा था , वोह क्या बोले ,

"सिररर , रवि के कण्डु के पीछे 2 बड़े बड़े पंख भी थे , इसने मुझे गॉड में उठा लिया , फिर हम दोनों ने उड़ते हुए अंधकार लोग पर कर लिया , फिर हम दोनों जादुई जंगल में पहुँच गए , वह रवि ने बड़े से लायन को लड़ाई में हारा दिया , फिर हम दोनों , दानवी लोग पहुँच गए , वह रवि ने अपने सुटले भाई जेनिथ की भुकी दानवी सेना को मर दिया , फिर हम दोनों नाराज के दरवाजे पर पहुँच गए , क्यों की कोमल वह कैद थी , तब तक मुझे भी अपना पिछले जनम यद् ा चूका था ..." ख़ुशी ने बिना साँस लिए , अपने साथ बीते उन वचितार घटनायिओं का साफ सुथरा वर्णन कर दिया ,

"हम्म , मुझे विश्वास नै हो रहा , खैर अग्गे बताओ..." राजेश ने फिर से अपने बाल खुजाते हुए बोलै , अनु भी सर खुजाती सब सुन रही थी ,

"इक मिंट सर , काट मेरा गाला सुख रहा , जाओ पानी लाओ..." ख़ुशी ने बेबी के साथ बैठी काट को मुस्करा कर देखते हुए बोलै ,

फिर काट किचन में गई , ख़ुशी के लिए पानी लायी , पानी पीते hi , ख़ुशी ने मुस्कराते हुए अग्गे बताना सुरु किया ,

"सिर्र , फिर रवि नाराज के अंदर चला गया , और में बहार उसका इंतज़ार करती रही , जब रवि वापिस आया , तब उसे चोट आयी थी , उसने कोमल को गॉड में उठा रखा था , रवि , कोमल को निचे उतारते hi जमीन पर गिर कर बेहोश हो गया , मने , हाँ , मने , अपनी शक्ति से रवि को ठीक किया , और फिर 3 दिन बाद हम धरती पर वापिस ा गया , पर यहाँ तब तक 3 साल गुजर चुके थे , अभ आपको समाज आया , हम दोनों कहा थे , अगर समाज नै आया , में दुबारा बताती हु..." ख़ुशी ने अपनी कहानी का अंत करते हुए बोलै ,

"नई , नई , में समाज गया , सब समाज गया , ाचा , रवि में चलता हु , मेरे साथ बहार एना ..." राजेश ने जल्दी से अपनी टोपी , अपने सार पर रखते हुए , वह से उठते हुए बोलै , जितनी तेज़ राजेश उठा , उससे कही तेज़ अनु भी उठ चुकी थी ,

"ारी सिर्रर्र , जब हम वापिस ए , तब हमारी लड़ाई हुई , उसका भी सुन लो , कैसे रवि और कोमल मर कर जिन्दा हुए... " ख़ुशी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"ाईंननं , मर कर जिन्दा हुए , खुशु , अगली बार सुनोगे , अभी काम है मुझे..." राजेश तेज़ी से घर से बहार निकलता हुआ बोलै , अनु भी राजेश के पीछे पीछे भाग गई ,

दोनों को ख़ुशी की कोई बात समाज नै आयी थी , ख़ुशी की साडी बतिअन उनके ऊपर से गुजर गई थी , वोह बस , अभ भागना चाहते थे , नै तोह खुशु उनको पागल कर देती , वैसे उनके जाते hi , सब बेइंतहा हसने लगे , और रवि उठ कर बहार चला गया ,

"खुशु , क्यों परेशान कर रही थी उनको.." सीमा ने ख़ुशी के करीब आकर , उसके गाल खींचते हुए बोलै ,

"ोुछः देदू , मेरे रवि को पकड़ने ए थे , ऐसी लिए परेशान किया , देखा कैसे दोनों के दिमाग के enjar-pinjar हिले डेल ..." ख़ुशी बेइंतहा हस्ते हुए बोली , फिर उसने फर्जी को देखा और उसके पास जाकर बोली ,

"ेहठ तेज़ लड़की , चल तुझे उड़ना सिखाती हु.." ख़ुशी मुस्कराते हुए फर्जी को गॉड में उठा अपने साथ लिफ्ट हुए बोली , फर्जी , ख़ुशी की गॉड में छड़ी , अपना माथा पीट , अपनी माँ बेबी को bye bye करने लगी , उसे देख सब हसने लगे ....

वही रवि घर से बहार राजेश और अनु के पास पहुँच गया , दोनों गाड़ी के पास खड़े उसका hi इंतज़ार कर रहे थे ,

"हाँ सर बोलिये..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"रवि , यह ख़ुशी क्या बोल रही थी , हमें तोह कुछ समाज नै आया , ाचा रवि , मन लेता हु , ख़ुशी अपनी ीचा से तुम्हारे पास आयी , पर तुमने , दसप शमशेर पर जो हमला किया , उसका क्या..." राजेश ने थोड़ा चिंता में बोलै , वैसे वोह तब की बात कर रहा था , जब रेहान और रवि , हॉस्पिटल गए थे और पुलिस ने उन पर अटैक कर दिया था , तब रवि , शमशेर का सहारा लेकर भाग निकला था ,

"सॉरी सर , तब मेरे पास कोई और रास्ता नै था , पर सर , आपको यद् है , कम यादव के मरते hi शहर में दंगे हुए थे..." रवि ने भी थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,

"हाँ , यद् है , तोह.."

"सर , उन डेंगू में दसप शमशेर सिंह भी शामिल था , उसने रेहमान उल्ला और असलम खान के साथ मिलकर यह सब किया था..."

"क्या , पर रवि , इसका क्या सबूत है तुम्हारे पास..." राजेश ने थोड़ा चौंकते हुए बोलै ,

"अभी तोह नै है , सर , अप्प मुझे 2 दिन का वख्त दो , में सरे सबूत आपको लेकर दूंगा , और सर , में अनु के साथ फिर से काम करना चाहता हु..." रवि ने अनु की तरफ मुस्करा कर देखते हुए बोलै , अनु बेइंतहा खुश हो गई ,

"ाचा , ठीक है , तुम कल अनु से मिल लेना , और रवि , तुम्हारी बहिन ने मेरा दिमाग ख़राब कर दिया है , तुम उसे भी मिल लो आकर..." राजेश ने अपनी बीवी प्रिय की बात करते हुए बोलै ,

"ओह्ह , जरूर सर , 3 साल पहले राखी बंधी थी , पर में उनको कोई ख़ुशी न दे पाया , अप्प उनको मत बताना , में सरप्राइज दूंगा कल आकर ..." रवि ने प्रिय को यद् करते हुए नाम आँखों से बोलै ,

"हम्म , तुम पता है , हर साल , राखी के दिन , तुम यद् करती है , कितना रोटी है , मुज़से भी रूत जाती है , मुज़से कहती है , अप्प मेरे भाई को दंड कर लाओ , कई कई दिन मुज़से बात भी नै करती..." राजेश ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"ओह्ह मेरी बहिन , सर , में कल ायुगा , हर हल में ायुगा ..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"ठीक है , ाचा रवि , तुम ख़ुशी को बोलो , इक बार अपनी माँ से मिल ए , उनकी हालत बेहद ख़राब है , तुम्हारी बात मन जाएगी , अनु ने इक बार बोलै था , तोह ख़ुशी गुस्सा हो गई थी..." राजेश ने रवि के कंधे पर हाथ रखते हुए बोलै ,

"जरूर सर , में बात करता हु ख़ुशी से..." रवि ने थोड़ा उदासी में बोलै , फिर राजेश और रवि गले मिले , अनु भी जाते जाते , रवि के गले मिल , उसके होंठो को चुम , गाड़ी में बेथ गई , फिर दोनों वह से चले गए , रवि अपनी बहिन प्रिय और सैर को यद् करते , नाम आँखों से घर के अंदर चला गया....

रवि जब घर आया , तब शाम होने वाली थी , रवि उदास सा मन लिए , घर के हॉल में , लकदकी की कुर्सी पर बेथ गया , उसका मन बेहद उदास था , 3 साल से ऊपर हो चुके थे , उसे दिल में दर्द सा था , उसे वोह पल यद् ए , जब सैर और प्रिय , उसे राखी बांधने आयी थी , कितना सकूं मिला था उसे , हम्म , जब उसकी कोई भी बहिन उसे राखी बाँड्ने को त्यार नै थी , उफ़ उस वख्त को यद् कर उसके होंठो पर इक मुस्कान ा गई , उसका मन बस इतना hi बोलै ..."पगली है सब की सब.."

सीमा , बेबी और शूरति किचन में खाना बना रही थी , काट अपने रूम में चली गई थी , ख़ुशी तोह फर्जी के साथ थी , लारा और एलिज़ा भी कुछ देर आराम करने चली गई थी , रिमी भी शयद किचन में hi थी , रमा भी अपने रूम में थी , पर कोई था , जो उसके मन के हर उदासी को महसूस कर लेता था , वोह थी कोमल ,

"भइआ क्या कर रहे हो..." कोमल मुस्कराते हुए अपने भाई के पास एते हुए बोली ,

"कुछ नै जणू , बस ऐसे hi..." रवि ने अपने मन की उदासी को छिपाते हुए झूठा सा मुस्करा कर बोलै ,

"हम्म , ाचा , मेरे साथ एना , रेहान और सूजी से मिलकर एते हैं , वोह जाते जाते बोल कर गए थे..." कोमल ने अपने भाई का हाथ पकड़ , उसे खींच कर उठाते हुए बोलै ,

"चलो जणू..." रवि ने अपना हर दर्द अपने अंदर दबाते हुए बोलै , वोह कोमल को उदास नै करना चाहता था , दोनों घर से बहार ए , और रेहान और सूजी के घर की तरफ चलने लगे ,

"भइआ कुछ उदास हो , क्या हुआ..." कोमल ने अपने भाई के चेहरे को देखते हुए बोलै ,

"नै तोह..."

"ाचा जी , हमसे आपकी कोई बात चिपटी है , अरे हम तोह आपकी हर साँस को पहचानते हैं , अभ बता भी दो.." कोमल ने इक पल रुकते हुए , अपने भाई की आँखों में अखन दाल बोलै , उफ़ बेहद खूबसूरत थी कोमल , उसकी नली नली आँखों में इक कससिह थी ,

"तोह मेरे दिल की मलिका , बात यह है , जब अप्प यहाँ नै थी , तब राजेश सर की वाइफ प्रिय और मुन्ना की वाइफ सैर , दोनों हमें राखी बाँड्ने आयी थी , और फिर 3 साल हम , अंधकार लोग में फास गए , और अभ..." रवि वही रुका कोमल की नली नली आँखों में खोया बोल hi रहा था के कोमल बेच में hi बोल पढ़ी ,

"और अभ , आपकी बहाने उदास है , आपको यद् करती हैं , आपकी यद् में रोटी हैं , उनका कही मन नै लगता , और अभ अप्प उनसे मिलना चाहते हो , उनसे माफ़ी मांगना चाहते हो , तोह प्रॉब्लम क्या है , भाई जो होना था हो गया , अभ उदास होने से क्या होगा , हम आपके साथ चलेंगे , अप्प कल अपनी दोनों बहनो से मिल लेना , राखी बंधवा लेना , अभ खुश हो जाओ , प्लस जणू भइआ..." कोमल ने मुस्कराते हुए बोलै और अग्गे बढ़ , अपने भाई के होंठो को चुम लिया ,

"हम्म , बात तोह आपकी सही है , ाचा मेरी मलिका कोमल , अभ अप्प , हमसे इक पल के लिए भी दूर मत होना , हम आपकी हर रह पर , जान देकर भी हिफाज़त करेंगे..." रवि ने मुस्करा कर कोमल को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"जेजूउउ , अभ बस करो , सब देख रहे हैं..." यह सूजी थी , जो दोनों को देख , उनकी तरफ hi ा रही थी ,

कोमल इक डैम से अपने भाई से अलग हो गई , वोह शर्मा रही थी ,

"सुजीई की बची , तू हमेशा , मेरे रोमांटिक पलु के बेच , क्यों अति है..." कोमल मुस्कराते हुए इतना बोल , सूजी की तरफ भागने लगी , और सूजी वही से पलट कर , अपने घर की तरफ , और रवि मुस्कराता हुआ अग्गे बढ़ने लगा , पर तभी , उसे कोई आवाज़ सुनाई दी...

"रविइइइइ...." इतनी धीमी आवाज़ , रवि को ऐसा महसूस हुआ , जैसे कोई संसू में hi बोलै हो , रवि इक पल रुका , as-pas देखने लगा , पर फिर , वोह भी कोमल के पीछे पीछे अग्गे बढ़ गया , उसे लगा शयद उसका वहां होगा...

दूसरी तरफ...

"काट , अभ रोना बंद करो , हे भगवन , कितना रोटी हो तुम..." यह बेबी थी , जो काट को नाश्ता देने आयी थी , पर काट , बीएड पर बैठी रो रही थी , और अभ बेबी उसे बहु में भरे शांत कर रही थी ,

"बेबी , मने उसका दिल तोड़ दिया , अभ , अभ , वोह , वोह , मुज़से प्यार नै करेगा..." काट और भी रट हुए बेबी को बहु में कस्ते हुए बोली ,

"उफ्फ्फ जणू , रवि तुम प्यार करता है , बहुत , मुज़से भी कही जायदा , तुम , तुम , रोना बंद करो , ाचा , में तुम इक आईडिया देती हु , फिर देखना क्या होगा..." बेबी ने काट का चेहरा अपने दोनों हाथो में लेकर , उसके असनु साफ करते हुए बोलै , रट रट , उसके गोर दूध से सफेद गालो पर , इक लालिमा सी चा गई थी , उसके नरम लाल होंठ , कम्प रहे थे , वोह बेइंतहा मासूम और खूबसूरत लग रही थी ,

"क्या होगा , कुछ नै होगा..." काट फिर से रट हुए बोली ,

"अरे , मेरी माँ , मेरी बात तोह सुन ले , वार्ना में ख़ुशी को बुलाती हु..." बेबी ने अपना माथा पीट , बीएड से उठने का नाटक करते हुए बोलै ,

"नयी , में सुनती हु , तुम बोलो..." काट अपने असनु साफ करते हुए , झूठा सा मुस्कराते हुए बोली ,

उसे वोह चाकू वाली बात यद् ा गई थी , जब ख़ुशी ने फर्जी से चाकू फिकवाया था , काट उन पलु को यद् कर , अंदर तक कम्प सा गई , वोह ख़ुशी से अभ दर रही थी , उसने सोचा , बेबी की बात सुनने में hi भलाई है , वार्ना ख़ुशी तोह इक नंबर की कॅशे है , वोह ध्यान से बेबी की बात सुनने लगी , धीरे धीरे , उसके होंठो पर इक मुस्कान फैल गई , बेबी ने बात ख़तम कर , उसकी तरफ देखा ,

"यू अरे थे क्वीन माय हार्ट.." काट बेइंतहा खुश हो गई हो , और ऐसी ख़ुशी में , बेबी को बहु में भर , उसके होंठो को चूमने लगी , पर वोह बात क्या थी...



तो बे कुनिटेड....
 
अपडेट-125

अभ अग्गे...

रवि भी कोमल और सूजी के पीछे पीछे उनके घर पहुँच गया , रवि ने घर के अंदर जाकर देखा , सूजी सेड्यां चढ़ ऊपर की तरफ भाग रही थी , और कोमल भी उसके पीछे , ें दोनों की दोस्ती बेइंतहा गहरी थी , सूजी बेहद प्यार करती थी , अपनी इकलौती दोस्त कोमल को , सूजी ने कभी भी , कोमल को यह एहसास नै होने दिया था , के उसके बाबा ने , ें कबीले वालो ने , उस पर कोई एहसान किया है , वोह कोमल को अपने परिवार का इक अटूट हिस्सा मानती थी ,

वोह दोनों तोह ऊपर भाग गई , पर रवि ने देखा , dr.nelam घर के हॉल में बैठी हुई थी , रेहान और dr.nelam का बीटा बुनती शहर गए थे , रवि मुस्कराते हुए dr.nelam के साथ बेथ गया , वोह लकड़ी के सोफे पर बैठी हुई मुस्करा रही थी , शयद वोह बेहद खुश थी , के रवि उसे मिलने आया है ,

हसश अज्ज से कुछ दिन पहले dr.nelam बेहद परेशान थी , वोह टूट गई थी , भीकर गई थी , उसका पति मर चूका था , dr.nelam अपने पति को बेइंतहा प्यार करती थी ,



पर रवि ने जब उसके जीवन में पहली बार दस्तक दी , वोह कोई फैसला नै ले प् रही थी , वोह रवि के प्रेम को समाज नै प् रही थी , तब उसके पति जिन्दा थे , पर कुछ सालो से विदेश गए थे ,

सुरु सुरु में dr.nelam को रवि का प्यार , थोड़ा अजीब लगता था , क्यों की , जब उस गुंडे काली ने उसके साथ वोह सब किया , और रवि ने जिस तरह उसकी मदद की , वोह आकर्षित हो गई रवि की तरफ , पर अभ भी उसे रवि से प्यार नै था , जो वासना काली ने उसके मन में जगाई , नीलम को लगा , रवि से वोह अपनी जरुरत पूरी कर सकती है , पर रवि , कुछ और hi सोचता था , वोह दिल के किसी वीरान कोने में , dr.nelam को चाहता था , अगर सेक्स hi करना होता , तोह रवि कब का कर लेता , पर वोह वख्त दे रहा था , खुद को भी और dr.nelam को भी ,

इसका इक hi कारन था , जब कोमल ने उसकी जान बचने के लिए , उसे हवसी कहा , उसके मन में अपने लिए नफरत भर दी , चाहे कोमल ने , अपने भाई को बचने के लिए वोह सब किया था , वोह बेदर्द शब्द बोले थे , पर रवि पर उन चाँद शबदो का बहुत गहरा असर हुआ , रवि ने इक फैसला किया , के अज्ज के बाद , वोह कभी पहल नै करेगा , हाँ , अगर , कोई उससे जिद्द करेगा सेक्स के लिए , प्यार के लिए , वोह सोच कर hi अग्गे बढ़ेगा ,

रवि ने खुद से कहा था , अभ से वोह अपनी हर बहिन को प्यार देगा , हर लड़की को रेस्पेक्ट देगा , किसी के साथ भी , किसी भी तरह की जबरदस्ती नै करेगा , वोह सबका ख्याल रखेगा , हर इक को बेइंतहा खुशियाँ देगा , रवि मंटा था , सुरु सुरु में , उसने जो जो किया , वोह उसकी जवानी का जोश था , तब उसके मन में वासना थी , वोह हवस में बह जाता था ,

पर अभ वोह खुद को बदल रहा था , उसकी उम्र 32 साल हो चुकी थी , अभ वोह जिम्मेदार बन रहा था , और अभ उसकी इक बेटी भी थी , अभ उसके मन में वोह वासना नै थी , हाँ , वोह हर किसी के साथ वख्त बीतता था , उनको बहु में भर चूमता था , लेकिन यह उसकी फितरत थी , वोह डेविल था , पर जैसे जैसे उसकी उम्र बढ़ रही थी , वैसे वैसे वोह जिम्मेदार होता जा रहा था , बस ऐसी कारन उसने अपनी बहिन सोनल को पहले ठुकरा दिया , लेकिन आखिर जब सोनल ने अपने प्यार को साबित किया , तभी रवि ने उसे कबूल किया , रवि को पहले लगा जैसे सोनल को बस आकर्षण है , लेकिन सोनल बस आकर्षित नै थी उसकी तरफ , सोनल उसे बेइंतहा प्यार करती थी ,

ऐसे hi रवि ने अनु को भी सोचने का वख्त दिया , उसे लगा , उसने अनु की हेल्प की , इस लिए अनु उसे प्यार करती है , पर अनु ने भी साबित किया अपने प्यार को , उसका इंतज़ार करती रही , चाहे अनु ने जिद्द करके , चेहे जो भी करके , उसने अपने प्यार को प् लिया और रवि को झुकना पढ़ा , खैर अभ अग्गे...

"नीलम जी कैसी हो अप्प.." रवि ने dr.nelam के मासूम , खूबसूरत चेहरे को निहारते हुए बोलै ,

"हम्म , ठीक हु , वख्त काट रही hu.."dr.nelam ने रवि की आँखों में अखन दाल बोलै , रवि ने उसकी आँखों में इक इंतज़ार देखा , उसकी आँखों में इक अधूरा सा एहसास देखा , उसकी आँखों में अधूरे प्यार को पूरा करने की भूक देखि ,

"आपका बीटा कहा है..."

"वोह , हम्म , वोह तोह रेहान के साथ शहर गया है ..."dr.nelam ने अपने नरम गुलाबी होंठो पर जीभ फिरा उनको गीला करते हुए बोलै ,

"ओह्ह , ाचा , रूम में एना , मुझे आपसे बात करनी है..." रवि इतना बोल , उसी रूम में चला गया , यहाँ पहले वोह dr.nelam से मिला था ,

dr.nelam की सांसे तेज़ हो गई , उसके होंठ कम्पनी लगे , दिल तेज़ी से धक् धक् करने लगा , उसने सेड्यां की तरफ नज़र डाली , सूजी और कोमल कही न थी , dr.nelam अपने मन में उठते प्यार भरे एहसास को , अपने साथ लिए रवि के पास चली गई , उसने दरवाजा बंद कर दिया , और रवि की तरफ देखा जो बीएड पर बैठा हुआ था , नीलम भी मुस्कराते हुए उसके साथ जाकर बेथ गई , कुछ देर दोनों खामोश रहे ,

"नीलम , में सोच रहा हु.." रवि ने बेहद शांत मन से बोलै ,

"क्या..." नीलम बिना रवि को देखे मुस्करा कर बोली ,

"तुम्हारे और मेरे बारे में..."

"ओह्ह , पर क्या.." dr.nelam का दिल धक् धक् कर रहा था , अभ उसके दूध से सफेद चेहरे पर हज़ारो भाव थे , उसे दर था , कही रवि उसे ठुकरा न दे , यहाँ बात सेक्स की नै थी , वोह रवि का बस साथ चाहती थी ,

"क्या , हशह्ह्ह , क्या , वोह , ाचा , कैसे बोलू , उफ़ क्या अप्प मुज़से प्यार करती हैं..." रवि ने पता नै क्यों यह सवाल किया ,

"अगर , अगर में बोलू , नै करती , तोह..." नीलम ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,

"हम्म , नीलम , सुरु सुरु में , जब में तुम्हारे करीब आया , तब में बहक गया था.." रवि अभी बोल hi रहा था , नीलम बेच में बोल पढ़ी ,

"क्या , तोह , तोह , तुम , मुज़से प्यार नै करते , वोह , वोह सब मेरे जिस्म के लिए , पर क्यों , क्यों..." dr.nelam यह सुनते hi रट हुए बेइंतहा दर्द में बोली ,

"हष्ठ , नीलम , में बस तुमसे सच बोल रहा हु , में , में अपनी गलती मन रहा हु , मेरी पूरी बात सुनो , फिर कुछ बोलना , अधूरी बात दर्द देती है..." रवि ने dr.nelam के असनु साफ करते हुए , बेहद शांति से बोलै ,

"पर , पर , में , तुम चाहती हु , में मर जाती जब मेरे पति , मुझे अकेला छोड़ कर चले गए , लेकिन , लेकिन , तुम्हारे इंतज़ार में जिन्दा रही , पता नै क्यों , मुझे लगा , तुम मेरा साथ डोज , इस बेरहम , बेदर्द दुनिआ में , मेरा भी कोई अपना है , में अपने बेटे को और दर्द नै देना चाहती थी , इक तोह उसके पिता नै थे , और अगर में भी मर जाती , उसका क्या होता , पर , पर (रट हुए) , तुम भी मुज़से दूर चले गए जब मेरे पति मुज़से दूर हुए , में टूट गई , में खुद को सम्बल न पायी , में अकेली पढ़ गई , रावी , मुझे तुम्हारे साथ सोना नै है , में बस , यही चाहती हु , तुम मेरा और मेरे बेटे का ख्याल रखो , तुम मेरे जीवन में रहोगे , तोह , तोह , में अपना जीवन गुजर लुंगी , प्लस , प्लस रवीए , अभ मुज़से दूर मत जाना..." dr.nelam ने बेइंतहा रट हुए रवि का हाथ अपने हाथो में लेकर उसे चूमते हुए , बेहद दर्द में बोलै ,

"नीलम , में तुमसे प्यार करता हु , बहुत प्यार करता हु , नीलम , में , में , बस डरता हु , इक बार तुमसे दूर गया , उफ़ , तुम्हारी क्या हालत हो गई , अगर , अगर , मुझे कुछ हो गया , में मर्डर..." अभी रवि इतना hi बोलै था के ,

"चाट्ताक्कक्क..." इक जोरदार थपड उसके चेहरे पर ा लगा ,

"क्यों , क्यों बोलते हो ऐसा , तुम , तुम कुछ नै होगा , तुम बहुत अचे हो , मेरा दिल मत दुखाओ , आईन्दा ऐसी बात बोली भी , तोह में तुमसे कभी बात नै करुँगी..." dr.nelam ने रवि के चेहरे को बेतहाशा चूमते हुए बोलै ,

"सॉरी , पर , पर , नीलम , में यह भी नै चाहता , के तुम कभी यह महसूस हो , के में तुम्हारी मज़बूरी का , तुम्हारे अकेलेपन का , नाजायज फयदा उठा रहा हु , तुम्हारे साथ सो कर , अगर , अगर , कभी अप्प ने , हमसे यह बोलै , तोह इस पाप को कैसे धो पाउगा ..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"जोऊ , निकल जोऊ ..." नीलम ने अपने कनु पर हाथ रख चीखते हुए बोलै ,

"क्या..."

"हाँ , सही सुना तुमने , तुम , तुम , इक नंबर के बेवकूफ हो , मेरी भावनायिओं को , क्यों नै समाज रहे , तुम इस लिए , मेरे करीब नै ए , के तुमने मेरी जान बचाई उस काली से , मने , मने , तुम अपने करीब ऐनी दिया , कोई मर्द यह सोचता है के उसने अपने पैसो से , अपनी खूबसूरती से , अपने डैम पर किसी औरत को प् लिया है , तोह वोह इस पृथ्वी का सबसे मुर्ख इंसान है , औरत किसी मर्द को खुद चुनती है , औरत इक पल में पहचान लेती है के यह मर्द कैसा है ..." dr.nelam बेहद गुस्से में बोली ,

"हाँ , तुम्हारी बात सही है.."

"हाँ मर. रवि , मर्द यही सोचता है , के वोह औरत को जायदा प्यार देता है , नै रवि , औरत hi मर्द को जायदा प्यार देती है , अपना घर छोड़ देती है , अपने माँ बाप , बहिन भाई , अपने सपने , अपना सब कुछ , तुम , तुम , यह लगता है , के तुम मेरे करीब ए , मुझे चूमा , मेरे शरीर को अपनी बहु में भरा , यह सब , यह सब , मने तुम करने दिया , मने चुना तुम , जानते हो क्यों..." dr.nelam ने रट हुए बोलै ,

"क्यू..."

"रावी , मने डॉक्टर बनने के लिए , अपना पूरा जीवन दे दिया , 30 साल की हुई , जब मुझे कड़ी म्हणत करने के बाद , यह जॉब मिली , पर , पर , तब तक , मेरी जवानी गुजर चुकी थी , डॉक्टर बनने की छह में , में खुद को भुला गई , कभी किसी से प्यार नै किया , हमेशा स्टडी स्टडी , स्टडी , उफ्फ्फ डॉक्टर बनते hi , जिम्मेदारी बढ़ गई , मुझे कभी वख्त hi न मिला , के में प्यार कर सकू , प्रेमी क्या करते हैं , यह महसूस कर सकू..." dr.nelam अभी बोल hi रही थी के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"तोह आपकी शादी..."

"हष्ठ , मेरी अर्रंगे मैरिज हुई , मेरे पति भी डॉक्टर थे , हम दोनों को कभी वख्त hi नै मिला , के हम खुल कर , इक दूसरे को जान सके , मेरे सरे अरमान , मेरे सरे जज्बात , मने अंदर दबा लिए , में भी , किसी लड़के से प्यार करना चाहती थी , प्यार का दर्द महसूस करना था मुझे , पर , पर , जब शादी हुई , इक साल बाद सूजी का जनम हुआ , तब सब कुछ ख़तम हो गया , में इक माँ बन गई , ऐसा नै के में अपने पति को चाहती नै थी , में अपने पति को , इस दुनिआ में सबसे जायदा प्यार करती हु , और आखरी साँस तक करुँगी , लेकिन में अपने जज्बात कभी अपने पति को बता न पायी , में जो चाहती थी वोह कर न पायी..." नीलम अपनी कहानी बताते हुए रवि की आँखों में अखन दाल बोली ,

"फिर..."

"फिर , फिर क्या , जिंदगी अग्गे बढ़ती गई , मेरी उम्र अभ ढलने लगी थी , पर , पर , तभी तुम ए , तुम , तुम , मेरे जीवन में इक तूफान की तरह ए , तुम्हारा यु मेरे साथ ched-chad करना , मेरे करीब एना , मुझे रेस्पेक्ट देना , में , में , बहुत पीछे चली गई , मुझे महसूस हुआ , में 18 साल की हु , में खुद को , इक जवान लड़की समज़ने लगी , में उस सपने को जीने लगी , जो में तब न जी पायी , उसदिन जब तुम मेरे घर ए , में खुद को रोक न पायी , तुम्हारा यु बेक़रार होना , मेरे लिए , तुम्हारी आँखों में इक तड़फ देखि , पर दर था , कही तुम , कही तुम..." नीलम अभी बोल hi रही थी के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"कही में , बस तुम्हारे साथ सोना तोह नै चाहता , तुम लगा , कही में , अपनी हवस मिटा , भाग न जाऊ ..." रवि ने मुस्करा कर बोलै , तोह नीलम भी मुस्कराने लगी ,

"हाँ , मने यही सोचा था , रवि , अगर तुम चाहते , तोह उसदिन , मेरे साथ सब कुछ कर सकते थे , पर मेरे इक बार कहने मटर से hi , तुम मुज़से दूर हो गए , बस उसी पल , मने महसूस किया , अगर में जवानी में प्यार करती , तोह शयद वोह लड़का तुम्हारे जैसा hi होता , अभ बोलो , अभ भी कहोगे कुछ , रावी , प्लस , मुझे मेरा सपना जीने दो , में तुम कभी दोष न दूंगी , प्लस , में तुमसे दूर नै रह सकती , प्लस ..." नीलम ने पहले मुस्कराते हुए और आखिर में बेहद रट हुए बोलै ,

"शह्ह्ह्ह , बस अभ , मेरे दिल को सकूं मिल गया , के में गलत नै था , मने तुम्हारे करीब आकर कोई गलती नै की , जणू , अभ से में तुम हर वोह ख़ुशी दूंगा , जो तुम चाहती हो , तुम मेरी गफ बानगी , नीलम जी.." रवि ने मुस्कराते हुए नीलम के होंठो को चूसते हुए बोलै ,

"सोचूंगी..." नीलम हसीं चेहरा लिए हस्ते हुए बोली ,

"जणू , दुबारा ड्यूटी ज्वाइन करलो , मेरी खातिर , प्लस..." रवि ने नीलम को पीछे बीएड पर लिटाते हुए बोलै ,

"उम् , ठीक है , तुम्हारे लिए , बस तुम्हारे लिए..." dr.nelam अपने नरम लाल होंठो को जीभ फिरा गीला करते हुए बोली ,

"ओह्ह जानू थैंक्स..." रवि ने इतना बोलै अपने होंठ नीलम के होंठो से मिला दिए , दोनों प्यार में खो गए , दोनों प्यार से , इक दूसरे के होंठो को चूसने लगे , कुछ देर बाद रवि ने होंठो को चूमना छोड़ , नीलम के खूबसूरत चेहरे को देखते हुए बोलै ,

"जणू , कल हम शहर चलेंगे , पहले हॉस्पिटल और फिर होटल , में तुम प्यार दूंगा , जो तुम चाहती हो , तुम्हारा मन चाहता है , है न..." रवि ने मुस्कराते हुए बार बार dr.nelam के नरम गुलाबी होंठो को चूमते हुए बोलै , तोह नीलम शर्माने लगी , किसी ने सच hi कहा है , प्यार की कोई उम्र नै होती , यह हो जाता है ,

"भइआ , भइआए..."

दोनों इस आवाज़ को सुन उठ कर बेथ गए , फिर रवि ने नीलम को कास कर अपनी बहु में भर , उसे कल त्यार रहने को बोलै , और फिर उसके होंठो को चुम , दरवाजा खोल दिया , बहार कोमल और सूजी कड़ी थी ,

"क्या हुआ.." रवि ने थोड़ा चौंक कर बोलै ,

"अप्प क्या कर रहे थे..." कोमल और सूजी रूम के अंदर एते हुए बोली ,

"वोह , वोह , कोमल , में नीलम जी को समझा रहा था .."

"तोह नीलम जी समाज गई..." कोमल मासूम सी बनती हुई बोली ,

"हाँ , वोह , वोह , मने , समझा दिया .." रवि थोड़ा हड़बड़ा कर बोलै तोह कोमल और सूजी हसने लगी ,

"जेजू , क्या समझा दिया माँ को ..."सूजी आँखों में शरारत लिए बोली , उसने देखा उसकी माँ शर्मा रही है , वोह अपनी माँ को इतना खुश देख , खुद भी बेहद खुश हो गई ,

"उफ़ तुम दोनों , अरे नीलम जी दुबारा ड्यूटी ज्वाइन करले , यह समझा दिया..." रवि ने नीलम की तरफ देख कर बोलै , जो अभ भी बीएड पर बैठी , मुस्करा रही थी , वैसे ब्लैक सूट में , बहुत कातिलाना लग रही थी वोह ,

"ओह्ह , ाचा , चले घर भइआए..." कोमल , सूजी की तरफ देख मुस्कराते हुए बोली ,

"हाँ , हाँ , चलो.." रवि तोह यही सुन्ना चाहता था , वोह तेज़ी से बहार निकल गया , कोमल और सूजी बेइंतहा हसने लगी , फिर कोमल , सूजी के गले मिल , अपने भाई के पीछे पीछे चल पढ़ी ,

दूसरी तरफ....

राजेश और अनु शहर पहुँच चुके थे , दोनों ने पहले यह तेह किया था , अभी किसी को रवि का कुछ नै बतायेगे , अगर कोई पूछेगा , तोह बस इतना कहेगे , रवि फिर से भाग गया है , दसप शमशेर सिंह के बारे में , जो राजेश ने , रवि के मोह से सुना था , उस बात को लेकर राजेश थोड़ा चिंता में था , वोह नै चाहता था के रवि की जान पर कोई खतरा बने , और अनु तोह इतना खुश थी के क्या लिखू , उसे बस इंतज़ार था , कब वोह और रवि , साथ में काम करे , और वोह रवि से प्यार कर सके ,

राजेश जब घर पहुंचा तब शाम के 7 बहज रहे थे , अज्ज वोह बेहद खुश था , अरे उसकी पत्नी का भाई मिल गया था , जिसके लिए उसकी पत्नी प्रिय इतनी उदास रहती थी , राखी के दिन रोटी थी , कई कई दिन उस से बात भी नै करती थी , खैर इस सब का कल अंत होने वाला था , राजेश ने घर पहुँच दूर बेल्ल बजे , तोह कुछ देर बाद , प्रिय ने दरवाजा खोला ,

"अरे ा गए अप्प , यह टीवी पर क्या दिखा रहे थे सुबह से..." प्रिय ने थोड़ा परेशान होते हुए बोलै ,

"कुछ नै , उफ़ में तोह थक गया , ाचा , खाना लगाओ , बहुत भूक लगी है..." राजेश ने सोफे पर बेथ ते हुए , अपनी टोपी उतर , इक तरफ रखते हुए बोलै ,

"हम्म , लगाती हु , रवि भइआ का कुछ पता चला , मने सुना था , वोह यही है , ऐसी शहर में..." प्रिय फिर से उदास सा होते हुए बोली , वोह राजेश के साथ आकर बेथ चुकी थी ,

"बीवी साहिबा , आपका भाई ा जायेगा , ाचा , इक बात बताओ , तुमने इक बार उसे राखी बंधी है , और वोह 3 साल से फिर कभी आया नै , तोह क्यों , परेशान रहती हो , उसे तुम्हारी कोई चिंता नै..." राजेश ने इक नाटक सा करते हुए बोलै ,

"आपको डिनर करना है.." प्रिय ने चेहरे के भाव बदलते हुए कहा ,

"क्यों..."

"नै , मुझे लगा , आपको डिनर से पहले , मुज़से मार कहानी है , ऐसी लिए पूछा..." प्रिय ने बेहद गुस्से में अपने गोर गाल पहला कर बोलै ,

"हैश्च , में तोह..."

"ससष्ठ , भइआ के बारे में , में कुछ नै सुनोगी , वोह आएंगे , जरूर आएंगे , मेरा दिल कहता है , और अप्प , आपको कितनी बार बोलै है , रवि भइआ की बुराई मत किया करो , अप्प , अप्प क्यों सताते हो मुझे..." प्रिय ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"प्रिय , में बस , यही चाहता हु , तुम खुश रहो , उफ़ रावी , ा जा भाई..." राजेश अपना माथा पीट कर बोलै ,

"हम्म , अप्प नाहा लो , में खाना लगाती हु..." प्रिय ने उठते हुए बोलै ,

"कल में तुम इक सरप्राइज दूंगा..." राजेश ने भी उठते हुए बोलै ,

"सच में , क्या भइआ ा रहे हैं..." प्रिय बेहद मुस्कराते हुए बोली ,

"नई ..."

"आह्हः हुऊ , तोह भाड़ में जाये आपका सरप्राइज , मुझे कुछ नै चाहये , अगर सरप्राइज देना है , तोह मेरे भइआ रवि को लाओ ..." प्रिय ने पहले गुस्से में और आखिर में बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"ाचा , सैर कैसी है..."

"सैर , वोह भी दिन काट रही है , हासष्ठ , कितना दर्द दे रहा भगवन मुझे , भइआ ा जाओ , प्लस..." प्रिय बेइंतहा रट हुए बोली ,

"प्रिया , विश्वास करो , रवि जल्द hi ा जायेगा , चलो अभ मुस्करायो , हाँ , यह हुई न बात , ाचा , मेरा बीटा कहा है , अमित , अमित..." राजेश , प्रिय के चेहरे पर मुस्कान ला , बैडरूम की तरफ चला गया , अपने बेटे के पास , पर प्रिय फिर से उदास हो गई , उसे अपने भाई से मिलना था , वोह तड़फ रही थी , पता नै क्यों , जब से उसने , रवि को राखी बंधी थी , तब से , उसका दिल गहरायी से , अपने भइआ से जुड़ चूका था , पता नै कैसे , वोह खुद को सम्बल रही थी , और दूसरी तरफ सैर , वोह तोह पहले hi दिल की कमज़ोर थी , उस मासूम का पता नै क्या हाल हुआ होगा , खैर प्रिय को , कल अपने जीवन की सबसे बड़ी ख़ुशी मिलने वाली थी , पर क्या यह इतना आसान होता ,

दूसरी तरफ...

रत के 8:30 बज रहे थे , रवि और उसका पूरा परिवार डाइनिंग टेबल पर बैठा खाना खा रहा था , अज्ज सब खुश थे , क्यों की , जुंग ख़तम हो गई थी , और उनको कोई नुकसान भी नै हुआ था , क्या रवि , सबको जिन्दा रख पता , किसी न किसी को , शयद ऐनी वाले वख्त में वोह खो hi देता ,

"देदी , भइआ अनु से भी प्यार करते हैं..." कोमल ने सीमा को वोह बात यद् दिलाते हुए बोलै , तोह रवि चौंक सा गया , वोह खस्ने लगा , उसने जल्दी से पानी पिया , पर बोलै कुछ नै ,

"हाँ भाई पति देव , बताओ , यह ितम कब पता ली..." सीमा ने गुस्से का नाटक करते हुए बोलै तोह सब हसने लगी ,

"क्या सीमा , वोह दोस्त है बस..." रवि मासूम सा बनते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह बकवास , यह झूठ बोल रहा , अनु और इसका चाकर बहुत वख्त से चल रहा..." ख़ुशी अपने सेहभाव के अनुसार , अनु से चिढ़ते हुए बोली ,

"खुशु , में सच बोल रहा हु..." रवि ने ख़ुशी की आँखों में अखन दाल बोलै ,

"हम्म , तोह करवाई सुरु करो , अनु से भइआ को प्यार है , इसका पहला कारन है , जैसे अनु भाग कर भइआ से लिपट गई , और बेइंतहा रोने लगी , तोह माय लार्ड सीमा , और इक कारन अनु गोली खाने को भी त्यार थी , और उसने बोलै भी , में रवि को प्यार करती हु..." कोमल बेहद मुस्कराते हुए रवि पर किसी वकील की तरह इल्ज़ाम लगते हुए बोली ,

"माय लार्ड सीमा जी , कोमल के लगाए इल्ज़ाम जूठे हैं , उनको बोलो सबूत पेश करे , क्यों की अदालत सबूत मांगती है..." रवि भी कोमल को आँख मरते हुए बोलै ,

"मेरे पास सबूत है..." कोमल भी अपने भाई को आँख मरते हुए बोली ,

"ाचा , कोनसा..." रवि थोड़ा चौंक कर बोलै ,

"माय लार्ड , मेरा सबूत है , मिस ख़ुशी , जो भइआ पर , हमेशा अपनी नज़र रखती है..." कोमल ने ख़ुशी की तरफ देखते हुए बोलै ,

"तोह मर. रवि , अभ बताओ , अभ क्या कहना है आपको..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै , तोह सब हसने लगे ,

"पापा , मन जाओ , वैसे कोमल मुम्मा ठीक बोल रही है.." फर्जी , जो रवि की गॉड में बैठी थी , उसका गाल चूमते हुए बोली ,

"बाबू बता भी दो , सच सच..." बेबी ने पहले प्यार से , फिर इक डैम से गुस्से में टेबल पर हाथ मरते हुए बोलै ,

"बेबी , शांत , शांत..." काट हस्ते हुए , बेबी के बालो को प्यार से सेहला कर बोली ,

"आर्डर , आर्डर , हाँ तोह , ख़ुशी जी बताओ , अप्प क्या जानती हो..." सीमा ने ख़ुशी की तरफ देखा , जिसका मोह , खाने से भरा हुआ था , वोह हाथ हिलती हुई , कुछ वख्त मांगने लगी , तेन जो उसका मोह खली हो सके , सब यह देख हसने लगे ,

"हॉष्ह , तोह जानवर , इस बेवकूफ का चाकर चल रहा है , मने देखा , अपनी ें दो आँखों से , यह अनु के घर गया , उसे प्यार भी किया , मने सब देखा , में आपको लाइव दिखती हु..." ख़ुशी चेयर से उठती हुई बोली , रवि चौंक गया , कही ख़ुशी उसका और अनु का पूरा सेक्स वीडियो न दिखा दे ,

"रुको , पहली बात माय लार्ड कह लो , जानवर क्या हुआ भाई , और में मंटा हु , अनु से में प्यार करता हु , पर लार्ड सीमा , मने बहुत कोशिश की , उसे दूर करने की , वोह बहुत जिद्दी है , मुझे झुकना पढ़ा , हसश , यही बात है..." रवि ने अपनी गलती मानते हुए बोलै ,

"याहहहा हुऊ , में केस जीत गयी..." कोमल बेइंतहा ख़ुशी में खाने की प्लेट ऊपर की तरफ उछलते हुए बोली ,

"हे भगवन , कोमल रुकू.." सीमा मुस्कराते हुए बोली , पर तब तक खाने की प्लेट रवि के सार पर ा गिरी , उसके लम्बे बाल और कपडे , खाने से लथपथ हो गए , वोह अपने माथे पर हाथ मरते हुए , सबकी तरफ देखने लगा , सब हस्स रही थी ,

"माँ , अभ भइआ को सजा दो.." रमा मुस्करा कर बोली ,

"हाँ भाभी , सजा दो , सजा दो..." रिमी छीलते हुए बोली , जो कब से खमोश थी ,

"शांत बीटा , शांत..." शूरति , रिमी को अपनी बहु में भरते हुए बोली ,

"अहह देदू..." रिमी ने शूरति के गाल को चुम कर , बेहद प्यार से बोलै ,

"ाचा तोह रावी , सरे गवाहों , और सबोटो को देखते हुए , हम तुम यह सजा सुनते हैं , तुम कल रत 9 बजे , अपनी और अनु की लव स्टोरी हमें सुनाओगे , बोलो मंज़ूर है , और वोह भी अनु को यहाँ लेकर..." सीमा ने खड़े होते हुए अपना फैसला सुना दिया ,

"लार्ड सीमा की जय हो , जय हो.." सभी इक साथ , अपना सार ज़ुका बोलने लगे , और फिर इक दूसरे की तरफ देख हसने लगे ,

रत के 10 बज रहे थे , रवि ने सीमा और कोमल को अपने पास बुला लिया था , उसे सीमा और कोमल से बात करनी थी , पर उसे दर था , पता नै , उसकी बात सुन , दोनों क्या बोलेगी ,

रवि बीएड पर बेच में लेता हुआ था , उसकी इक तरफ कोमल (रूही) और इक तरफ सीमा (सुहाना) लेती हुई थी , दोनों ने रवि के कंडे पर सार रखा हुआ था , और रवि दोनों को बहु में भरे , कुछ सोच रहा था ,

"जणू भइआ , क्या सोच रहे हो..." कोमल ने सीमा की तरफ देखते हुए मुस्करा कर बोलै ,

"हाँ जणू , क्या बात करनी थी आपको , जल्दी बताओ , मुझे जाना है फिर , मेरी बेटी रमा , मेरा इंतज़ार कर रही होगी .." सीमा ने थोड़ा सा चेहरा ऊपर उठा , रवि के गाल को चूमते हुए बोलै ,

"हैश्च , ाचा , पहले में इक बात , तुम दोनों से कह दू , में तुम दोनों को बहुत चाहता हु , और..."

"भइआ , क्या बात है , अप्प बेचैन हो..." कोमल ने उठ कर बेथ ते हुए बोलै ,

"हाँ सोना , तुम इतना क्यों परेशान हो..." सीमा भी उदास सा चेहरा लिए उठ ते हुए बोली ,

रवि अभी भी लेता हुआ था , वोह जो बात कहना चाहता था , उसे पता नै था , दोनों क्या कहेगी , पर उसे बात करनी थी , वोह सीमा और कोमल से अपनी बहिन सोनल के बारे में बात करना चाहता था , पर वोह थोड़ा दर रहा था , खैर वोह भगवन का नाम लेकर उठा , और दोनों की तरफ देख , अपना दुःख दर्द बोलने लगा....

तो बे कुनिटेड... [Friends app ne jo replys diye hain , unka jawab me kal dunga , ajj me bahut busy tha , sorry dosto..]
 
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