Incest Deewanapan... - Page 10 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

अपडेट-20

अभ अग्गे...

सीमा जड़ने के बाद शांत पढ़ गई , रवि धीरे धीरे उसके ऊपर से उठ कर , इक तरफ गिर गया , दोनों तेज़ तेज़ सांसे भर रहे थे ,

"उफ्फ्फ जान निकल दे मेरी .." सीमा मुस्कराते हुए बोली , और रवि से लिपट गई , रवि उसकी नंगी पथ को सहलाने लगा ,

धीरे धीरे रवि का हाथ उसके मोठे चूतड़ों पर रुक सा गया , रवि उसके दोनों नरम दूध जैसे सफेद चूतड़ों को मसलता हुआ , उसके होंठो को चूमने लगा ,

सीमा के नरम गदराये चूतड़ों का नरम मास्स रवि अपने हाथ की मुथियों में पकड़ कास कास कर मसल रहा था "ोुछःह रविइइइइइ.." सीमा को इक दर्द सा महसूस हो रहा था , लेकिन मज़ा भी बहुत अधिक ा रहा था ,

"सीमा डौगी बन जाओ..." रवि मुस्कराते हुए बोलै , तोह सीमा भी उसकी बात सुन हस्स दी , रवि ने सीमा की भलखती पतली कमर से उसे पकड़ा और उठा कर घोड़ी बना दिया ,

अभ सीमा दोनों खोयीओं को बीएड से टिका घुटनो के बल ज़ुकी हुई थी ,

रवि जल्दी से सीमा के पीछे ा गया , उफ्फ्फ सीमा की मोती छोड़ी गदराई गांड , जो रवि के कास कर मसलने से लाल हो चुकी थी , िका इक रवि की नज़र सीमा की छूट पर जैम सी गई , ताबड़तोड़ ढको से लाल हुई छूट , जो के पूरी गीली हो चुकी थी ,

"उम्म्म्म ssiiiiiiiiiii .." सीमा सिसक उठी , जब रवि की लपलपाती जीभ उसके छूट पर जा लगी , रवि भूके कुत्ते की तरह सीमा की छूट को चूमने चाटने लगा , सीमा अपनी छूट चूसै का आनंद लेती , मज़े से सिसकार रही थी ,

"उम् सीमा अभ त्यार हो जाओ अह्ह्ह.." रवि ने घुटनो के बल बेथ , अपने लुंड पर ढेर सारा थूक मॉल , उसके छूट के छेद पर टिका , कास कर ढके जड़ते हुए बोलै , "ाआईईईई सशह्ह्ह्ह ढेरी.." सीमा अभी इतना hi बोल पायी थी के रवि ने उसकी कमर को हाथो से पकड़ , कास कास कर ढके लगाने सुरु कर दिए ,

गीली छूट में लुंड तेज़ गोली की रफ़्तार से पाछहहह पछ्ह्ह्ह्ह की आवाज़ें करता अंदर बहार हो रहा था ,

रवि के लम्बे मोठे लुंड की चुंबन सीमा को और भी मदहोश कर रही थी ,

"अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह और तेज़ जणू आह्ह्ह्हह .." सीमा गीली छूट में फिसलते लुंड के तेज़ ढको का स्वाद लेती चीखती हुई बोली ,

रवि की जांगू से सीमा के नरम चूतड़ों का मास्स सागर में उठती लेहरो की तरह उछाल रहा था , रवि तेज़ तेज़ ढके जड़ता , सीमा की नरम गदराये चूतड़ों पर थपड जड़ने लगा ,

"ुछहःछःह अह्हह्ह्ह्ह मत मरु अह्हह्ह्ह्ह..." सीमा दर्द और मज़े से सिसकते हुए बोली ,

करीब 15 मिंटो तक रवि ताबड़तोड़ सीमा की छूट को बजता रहा , सीमा इक बार और जड़ चुकी थी , उसका बदन अभ सुस्त पढ़ चूका था ,

"ाआईईईईई रविइइइइ प्लसस रुक जोऊ अह्हह्ह्ह्ह प्लसस बस्स्स करूओ ना.." सीमा अभ तेज़ ढको को न जलती हुई सिसकते हुए बोली ,

"बस अह्ह्ह सीमा कुछ देर ोर्ड्र्र.." रवि ने सीमा की गांड को मसलते तेज़ ढके जड़ते हुए बोलै , सीमा ताबड़तोड़ ढको को बर्दाश्त न कर पायी और बीएड पर पेट के बल लेट गई ,

अभ रवि उसके ऊपर लेता , उसकी गर्दन को चूमता छत्ता , और भी तेज़ ढके जड़ने लगा ,

"आअह्ह्ह्हह मायआ रवीए बुसस करूओ..." सीमा चीखती हुई बोली ,

रवि ने सीमा की गर्दन के निचे से अपना हाथ निकल , उसे कास कर पकड़ते हुए , उसे छोड़ना जारी रखा ,

"थप्प्प्प थप्प्प्प पछहः पाछह " की अवाजिअं करता रवि , सीमा को छोड़ता रहा ,

"में गया अह्ह्ह्हह मेरी जांणण..." रवि पूरी रफ़्तार से सीमा की छूट को फाड़ता रोंद्ता हुआ

जड़ने लगा ,

रवि जटके खता जड़ता हुआ , सीमा के ऊपर लेता उसके गोर गालो को चूमता रहा , कुछ देर रवि उसके ऊपर लेता रहा ,

"ोुछःह उतर जाओ निचे अह्ह्ह्ह तुम्हारा वजन बहुत है.." सीमा मुस्कराते हुए बोली ,

रवि , सीमा के ऊपर से उतर कर , इक तरफ लेट गया , सीमा वैसे hi सोई रही ,

"सीमू मेरी जान , कैसा लगा.." कुछ देर बाद रवि ने सीमा की तरफ पलट कर बोलै ,

"उम् शहहह रवि , जान निकल दी तुमने.." सीमा हस्ते हुए बोली , और रवि के सीने से लग गई ,

"में तुमसे बहुत प्यार करता हु , प्लस कभी मुझे छोड़ कर मत जाना , ी लव ु सीमा.." रवि ने नाम आँखों से बोलै ,

"नै जोगी , कभी नै , हम जिंदगी भर साथ रहेंगे , ाचा इक बात बताऊ.."

"हाँ बताओ न.."

"वोह , वोह सीमा ा रही है कल.."

"राखी बाँड्ने.." रवि ने हस्ते हुए बोलै ,

"पागल , हमसे मिलने , तुम्हारी साली है , राखी क्यों बंदगी तुम.."

"ओह्ह , ठीक है , मेरी प्यारी बीवी.." रवि ने सीमा को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"ाचा में जाओ , रमा इंतज़ार कर रही होगी.." सीमा मुस्कराते हुए बोली ,

"यही सो जाओ न , मेरी बहु में , प्लस.." रवि ने सीमा को अपनी बहु में कस्ते हुए बोलै ,

"ठीक है.." सीमा भी मुस्करा कर बोली और दोनों इक दूसरे के सीने से लगे सो गए , कल रवि की जिंदगी का बड़ा दिन था , राखी का दिन था , लेकिन रवि की जिंदगी बदलने वाली थी...

सुबह के 7 बजे...

"हे भगवन कैसे सोता है यह , रवि उठो न.." सीमा अपनी पूरी ताकत लगा रवि को जगा रही थी ,

आखिर उसकी म्हणत रंग लायी और रवि उठ कर बेथ गया ,

"क्या हुआ जणू , सुबह हो गयी क्या.." रवि ने आँखें मसलते हुए बोलै ,

"नै जी , रत के 12 बज रहे हैं , चलो जल्दी फ्रेश हो जाओ , 8 बजे सीमा ा रही है , उसे लेने जाना है.."

"ठीक है , में अभी अत हु.." रवि उठ कर खड़ा होता हुआ बोलै , और नंगा hi वाशरूम में घुस गया ,

"यह कभी नै सुधरेगा.." सीमा अपने माथे पर हाथ मरती मुस्कराती हुई रूम से बहार चली गई ,

दूसरी तरफ..

"प्रिय देदी , कितने बजे ा रही हो अप्प.." सैर ने मुस्कराते हुए पूछा ,

"बस छोटी निकल रही हु , अभी 1 घंटे में पहुँच जोगी , तुम रेडी रहना.."

"जी देदी.."

इतना बोल सैर ने फ़ोन कट कर दिया , यहाँ इक तरफ रवि की बहाने उसे राखी नै बंद रही थी , तोह वही दूसरी तरफ उसकी दो बहने उसे राखी बाँड्ने के लिए बेक़रार थी ,

वही दूसरी और...

रवि त्यार होकर घर के हॉल में ा गया , रमा और सीमा किचन में काम कर रही थी ,

रिमी अपने रूम में थी और शूरति सोफे पर बैठी किसी से बात कर रही थी ,

रवि किचन में सीमा के पास गया और उससे पूछा के सीमा कब आएगी , फिर रवि घर से बहार ा गया और गाड़ी स्टार्ट कर सीमा को लेने बस स्टॉप की तरफ निकल गया ,

रवि रस्ते में सीमा के बारे में सोच रहा था , जंगल में रहते वोह सीमा के बेहद करीब ा गया था , अभ पता नै सीमा कैसी होगी , 8 महीने बीत चुके थे , वोह सीमा से मिलने को बेक़रार था ,

रवि बस स्टॉप पहुँच सीमा का इंतज़ार करने लगा , फिर सीमा के गाओं की बस ा गई , रवि गाड़ी से उतर उस बस के पास पहुँच गया ,

कुछ लोग के उतरने के बाद सीमा भी बस से उतर गई , उफ़ ब्लैक पजामी सूट में सीमा का कैसा हुआ बदन , बड़े बड़े मम्मी , पतली कमर , हलके ब्राउन बॉल , छोड़ी गदराई गांड , रवि की नज़र तोह सीमा के लाजवाब हुसैन पर जैम सी गई ,

सीमा ने मुस्करा कर रवि की तरफ देखा और उसके करीब पहुँच गई , सीमा के गालो पर इक शर्म की लाली थी , और उसकी मुस्कान , उसके नरम गुलाबी होंठ , उफ़ रवि तोह बेबस हो गया था उसके हुसैन के अग्गे ,

"हे जाने मन , अपना नंबर तोह देदू ." दो लड़को ने सीमा को पीछे से आवाज़ दी ,

शयद वोह दोनों सीमा के साथ hi बस से उतरे थे , सीमा ने गुस्से से उनको घोर कर देखा और फिर रवि की तरफ देखने लगी ,

जैसे hi इक लड़का सीमा के करीब आया , रवि ने सीमा को इक तरफ कर उसके चेहरे पर कास कर इक थपड जड़ दिया ,

थपड पढ़ते hi उस लड़के का गोरा गाल लाल हो गया , वोह इक तरफ झुक गया ,

"तेरी तोह सेल.." दूसरा लड़का गुस्से से रवि को मरने डोडा , लेकिन रवि ने उसकी तरफ भाग कर अपने कंडे को उसके पेट में जड़ दिया , और उसे उठाये हुए hi पीछे ढकता हुआ बस से जा टकराया ,

वोह लड़का दर्द से कहरहटा हुआ बस से पीठ टिकाये hi बेथ गया , रवि ने पलट कर दूसरे लड़के की तरफ देखा , वोह लड़का डरता हुआ भाग गया ,

सीमा मोह फाडे बस रवि को देखती रही , रवि धीरे धीरे सीमा के करीब पहुँच गया ,

"चले साली साहिबा.." रवि मुस्करा कर सीमा को आँख मर बोलै ,

सीमा शर्मा गई और रवि के पीछे पीछे उसके साथ गाड़ी में बेथ गई , फिर दोनों घर की तरफ निकल गए ,

अभ दोनों मैं रोड पर जा रहे थे , सीमा खामोश सी बैठी हुई थी , वोह कुछ बोल नै रही थी ,

"उम् , मेरी साली इतनी खामोश क्यों है , न कोई हलो , न हाय , क्या बात है.. " रवि ने ड्राइव करते हुए सीमा की तरफ देख कर बोलै ,

"नै कुछ नै जेजु , में नाराज़ हु आपसे.." सीमा ने बुरा सा मोह बना कर बोलै ,

"क्यों.."

"अपने वादा किया था , अप्प गाओं में ायुगे , पर अप्प ए नै.."

"ओह्ह तोह यह बात है.."

"हाँ , अभ मुज़से बात मत करो.."

"ोुछःह , यह मत करो.." रवि ने ड्राइव करते हुए अपना इक हाथ सीमा की कासी मोती जंग पर रख दिया , वोह सीमा की मोती जंग को प्यार से सहलाने लगा ,

"ओह्ह तोह इस बात की नाराज़गी है आपको , में गाओं नै आया और आपको छोड़ने का वादा किया था , वोह पूरा नै किया.."

"धत्त , गंदे कही के , मने कब ऐसा बोलै.." सीमा बेहद शरमाते हुए बोली ,

"साली साहिबा , हम आपकी परेशानी समज़ते हैं , इक तोह आपकी यह कातिल जवानी , और रास टपकता आपका यह लाजवाब हुसैन , फिकर मत करो , आपको बहुत मज़ा दूंगा अभ में.." रवि ने सीमा को अपनी तरफ खींच उसके रसीले गुलाबी होंठो को चूमते हुए बोलै ,

सीमा शर्माती हुई सीधी होकर बेथ गई , सरे रस्ते रवि कभी उसकी जांगू को मसलता रहा , कभी उसके गदराये मोठे चुचु को , सीमा की छूट खूब गीली हो चुकी थी , उसकी आँखें वासना में खूब नशीली हो चुकी थी , ऐसे hi वख्त बीटा और वोह दोनों घर पहुँच गए ,

सीमा को देख सभी खुश हो गए , सभी उसे बहुत प्यार से मिले , रवि अपने रूम की तरफ चला गया ,

रवि जनता था , उसकी बहाने बहुत जिद्दी हैं , वोह उसे राखी नै बंदगी , इस लिए चुप चाप वोह अपने रूम में चला गया ,

सुबह के 10 बज रहे थे , तभी इक गाड़ी घर के सामने आकर रुक गई , गाड़ी से 2 लड़कियाँ उतरी , उनके चेहरों पर इक मुस्कान थी , यह दोनों कोई और नै , प्रिय और सैर थी...

तो बे कुनिटेड....
 
अपडेट -21

अभ अग्गे...

मिथली शहर का सबसे बड़ा बैंक , लेकिन यहाँ पुलिस सिक्योरिटी इतनी टाइट थी , के किसी को भी बिना चेकिंग अंदर नै जाने दिया जा रहा था ,

इसका इक hi कारन था , इक फ़ोन कॉल , कल रत को कमिश्नर राजेश को इक अज्ञात इंसान का फ़ोन आया था ,

कोण था वोह , जिसके कारन राजेश बेहद दर सा गया था , यह बात कोई नै जनता था ,

वही दूसरी और...

इक खली सुनसान बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर , इक आदमी बैठा हुआ था , यह और कोई नै जोकर था , बेहद तेज़ दिमाग का मालिक , लोग की भावनायिओं से खेलने वाला , इसका दिमाग हद से भी जायदा तेज़ था ,

"ः , रवि तोह बात बात पर इमोशनल हो जाता है , इसके लिए ताकत की क्या जरुरत , ऐसे तोह में इंसान बन कर hi मरुँगा ः.. " जोकर ने हस्ते हुए बोलै , उसकी हस्सी में इक डरावना एहसास था ,

"कल से मेरा गेम सुरु होगा रवि , अज्ज की रत चैन से सो जाओ , कल से तुम बहुत भागना है , कभी इस तरफ , कभी उस तरफ , खीयीकहींईईई , कल से इस शहर पर में राज़ करुगा , इस शहर का हर डॉन , मेरा गुलाम बनेगा , लेकिन इक इंसानी रूप भी लेना है मुझे , हेही , कोनसा लू , ः , बिमान शाह का , हाहाहा , वोह तोह में hi हु , रवि म बैक ..." बिमान शाह बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , दयना का पुराण साथी बिमान शाह , वही था जोकर ,

लेकिन क्या बिमान शाह सच में जोकर था , या फिर उसका यह कोई खेल था , कुछ भी हो , लेकिन रवि की जिंदगी में अभ मुसिबतिअन और भी बढ़ने वाली थी , इक के बाद इक..

जोकर ने बिमान शाह का रूप धारण कर लिया और अभ वोह वही छोटे कद का ब्लैक सूट पहने बिमान शाह था , जिसने रवि और बेबी की जिंदगी में पहले खोरम मचाया था ,

"मेरा मैप , में लेकर रहुगा , रवि तुमसे , अभ तोह दयना भी नै है , अभ उस मैप तक तुम मुझे लेकर जाओगे , क्यों की तुम्हारी जान हाहा , इक में नै बस्ती है , तुम्हारी कमज़ोरी तुम्हारी बहाने है , लेकिन इतनी साडी बहनो को इक साथ बचा पाना नामुमकिन होगा खीयकहीईईई खियई , इस बार जीत मेरी होगी , अभ दयना का दर नै , और में सबसे शक्तिशाली हु , हाहाहा..." बिमान शाह जोर जोर से हसने लगा , उसकी आँखें लाल रौशनी में तेज़ तेज़ चमक रही थी ,

"हलो रेहमान उल्ला.."

"कोण.." रेहमान उल्ला ने शराब का सिप लेते हुए बोलै ,

"में हु बिमान शाह , तुम्हारा दोस्त.."

"अभी पगला गए हो क्या , बिमान शाह मर चूका है.."

"अज्ज शाम को उसी बिल्डिंग में ा जाना , में वही मिलुंगा तुम , जल्दी एना , साथ में असलम खान और दिलावर खान को भी लेते एना ." बिमान शाह ने इतना बोल फ़ोन कट कर दिया ,

"हलो , हलो.. " रेहमान उल्ला काफी देर बोलता रहा , फिर उसने अपने चेहरे पर ए पसीने को साफ किया और असलम खान को फ़ोन कर दिया , अभ उसे शाम होने का इंतज़ार था ,

दूसरी तरफ...

प्रिय और सैर मुस्कराते हुए रवि के घर के अंदर ा गई , क्यों की मैं गेट खुला हुआ था ,

घर के अंदर उन दोनों ने देखा , दो लड़कियाँ सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी , और दो किचन में खाना बना रही थी ,

फिर प्रिय और सैर दोनों शूरति और रिमी के पास पहुँच गई , रिमी और शूरति ने प्रिय और सैर को पहली बार देखा था ,

"हलो मेरा नाम प्रिय है , स राजेश की वाइफ हु , यह मेरी फ्रेंड सैर है , हम रवि से मिलने आयी हैं.." प्रिय ने मुस्करा कर बोलै ,

"भइआ घर पर hi हैं , अभी बुला कर लती हु ." रिमी इतना बोल सेड्यां चढ़ रवि को बुलाने चली गई ,

तब तक सीमा और रमा भी उन दोनों के पास ा गई , सीमा ने उनसे सब कुछ जान लिया , सीमा उनसे मिल कर बेहद खुश हो गई ,

आखिर कर जब रवि की कोई भी बहिन उसे राखी नै बंद रही थी , क्यों की सभी रवि से प्रेम करती थी , तब भगवन ने प्रिय और सैर को भेजा था , रवि को राखी की ख़ुशी देने के लिए ,

रिमी भगति हुई रवि के रूम में घुस गई , उसने देखा रवि बीएड पर लेता हुआ , चाट की तरफ घूरता कुछ सोच रहा था ,

"भइआ निचे आपसे कोई मिलने आया है ."

"हम्म , इक मिंट बात सुनो मेरी.."

"जी भाई.." रिमी रवि के करीब बीएड पर बेथ गई ,

"तुम सोल्लगे क्यों नै जाती और शूरति ऑफिस भी नै जा रही , अभ में ठीक हु , तुम दोनों को अपना फ्यूचर बनाना चाहिए.." रवि ने रिमी का हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोलै ,

"भइआ कल से जोगी सोल्लगे.." रिमी ने रवि से नज़रियन चुरा कर बोलै ,

"हम्म , ठीक है मेरी जान.." रवि मुस्कराते हुए उठा और फिर दोनों निचे ा गए ,

रवि ने जब सैर को देखा तोह वोह थोड़ा शॉकेड सा हो गया ,

लेकिन जब उसने प्रिय को देखा , तब उसे प्रिय की शकल कुछ पहचानी सी लगी , पर उसे कुछ यद् नै ा रहा था ,

अभ रवि को कैसे यद् रहता , प्रिय वही लड़की थी , जिसने रवि को जूही के कतल में सजा दिलवाई थी , लेकिन रवि को कुछ यद् नै था ,

रवि सेडीईओं से निचे उतर सभी के पास सोफे पर बेथ गया ,

"रवि , यह तुम्हारी बहाने तुम राखी बाँड्ने आयी हैं.. , सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

रवि हरिजन सा हो गया ,

"भइआ बात ऐसी है , आपके कारन hi हम दोनों को हमारा प्यार मिला है , मुझे मुन्ना और देदी को राजेश सर.." सैर ने मुस्करा कर बोलै ,

"थैंक्स रवि , अगर तुम उस दिन जंगल में नै जाते , तोह मेरा प्यार वही डैम तोड़ देता , तुम हम दोनों के रखवाले हो , हमारे भइआ हो तुम , क्या हम दोनों तुम राखी बंद दे.." प्रिय ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"अरे यह भी कोई पूछने की बात है , अगर तुम दोनों ने मुझे भाई मन है तोह तुम दोनों का मुझ पर पूरा हुक है , चलो रोना धोना बंद करो और राखी बन्दों मुझे.." रवि मुस्करा कर बोलै ,

"भइआ अप्प बेहद अचे इंसान हो.." सैर ने नाम आँखों से बोलै ,

फिर सैर और प्रिय ने रवि को राखी बंद दी , रवि बेहद खुश हो गया ,

"अभ मेरी बहनो को मुज़से क्या चाहये.." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"मुझे कुछ नै चाहये , अप्प मिल गए हो यही बहुत है भइआ.." सैर ने रवि के गले लगते हुए बोलै ,

"लेकिन मुझे कुछ चाहये भइआ.."

"क्या.."

"पहले वादा करो , जो में मांगूगी मुझे डोज ." प्रिय ने थोड़ा गंभीर होकर बोलै ,

"ठीक है वादा किया.."

"भइआ में चाहती हु के अप्प पुलिस में जॉब करो , मेरे पति को आपकी जरुरत है , हमारा खूबसूरत शहर , जो पहले सचाई का प्रतीक हुआ करता था , अभ चाँद बुरे लोग के कारन बुराई का दलदल बन गया है , इक बार जो भी इस दलदल में घुसता है , फिर कभी लोट नै पता , प्लस अप्प यह जॉब करलो.." प्रिय ने नाम आँखों से बोलै ,

"नै देदी , मेरे भइआ अभ ऐसा कोई काम नै करेंगे , जिस में इनकी जान को खतरा हो.." रमा ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"बिलकुल ठीक कहा रमा ने.." शूरति भी थोड़ा घम्बिर होकर बोली ,

"हम पहले hi बहुत कुछ खो चुके हैं.." रिमी भी नाम आँखों से बोली ,

"लेकिन यह काम बस रवि hi कर सकता है , उस जंगल से जिस बहुदृ से मेरे पति को बचा कर लाये , और मुन्ना को भी बचाया , रवि hi वोह इंसान है , जो इस शहर की बुराई को जड़ से मिटा सकता है.." प्रिय ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"ओह्ह देदी , में आपकी बात से सहमत हु , पर रवि ने उस जंगल में वोह खो दिया , जिसकी हमने कभी कल्पना भी नै की थी , इसने अपनी पूरी जिंदगी की ख़ुशी , आपके पति को बचने में कुर्बान कर दी , जिसके लिए यह छोटी सी उम्र में hi खेतो में मज़दूरी करता रहा , न गर्मी देखि न सर्दी , जिसके लिए यह 7 सालो तक हम सब को छोड़ कर चला गया , सचाई पर चलना आसान नै होता , कई बार जिंदगी का हमसफ़र भी बेवफा बन जाता है , हमने सब कुछ खो दिया , सब कुछ..." सीमा ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"कोण थी वोह..." प्रिय भी सीमा की बतिअन सुन रट हुए बोली ,

"कोमल , वोह कोमल थी , जिसने अपनी जिंदगी खो दी , उस जंगल में.." सीमा ने रट हुए बोलै ,

"हाँ मेरी प्यारी बहिन कोमल.." रमा भी रट हुए बोली ,

"क्या वोह इतनी अछि थी.." सैर भी नाम आँखों से बोली ,

"हाँ बेहद अछि थी , अपने भाई पर जान देती थी वोह , उस जैसी प्यार करने वाली कभी पैदा नै होगी , इतना अधिक प्रेम , कोई किसी से नै कर सकता , जितना कोमल ने किया , लेकिन प्यार में जान देदी उसने , मेरी कोमल..." सीमा ने रट हुए बोलै ,

रवि िका इक उठा और गुस्से से चीखता हुआ बोलै ,

"कोमल , कोमल , माँ तंग ा गया तुम सबसे , अगर दुबारा किसी ने , किसी ने भी उसका नाम लिया , पूरी दुनिआ जला दूंगा में.." रवि इतने गुस्से में बोलै के सब लड़कियाँ कम्प सी गई ,

"भइआ शांत हो जाओ , प्लस.." रमा ने रट हुए बोलै ,

"क्यों नाम लेती हु उस बेवफा का , उसकी कड़वी बतिअन अज्ज भी मुझे चैन से जीने नै देती , में उसे भूलने की कोससिह कर रहा हु , तुम बार बार उसका नाम लेकर , मेरा मज़ाक उड़ा रही हो , जिंदगी के नजाने कितने साल मने उसके लिए बर्बाद किये , आईन्दा कोई भी उसका नाम नै लेगा , वोह मर चुकी है , बस बात ख़तम..." रवि ने चकते छीलते गुस्से में बोलै ,

"म सॉरी भइआ , प्लस शांत हो जाओ.." प्रिय ने नाम आँखों से बोलै ,

"उफ्फ्फ शठ शांत , शांत , ठीक है , प्रिय डेडì , में आपके साथ हु , में इस शहर से हर बुराई ख़तम कर दूंगा , अपने मुझे राखी बंदी है , अपने राखी बंद कर मुज़से यह हुक माँगा है , में इतना भी खुदगरज नै हु , आपको वचन दिया है , चाहे मेरी जान hi क्यों नै चली जाये , में अपनी बहिन से किया वादा पूरा करुगा , वचन दिया आपको ..." रवि ने प्रिय की आँखों में ज़कते हुए बोलै , रवि की आँखों की तेज़ तपश प्रिय सेह न पायी , उसकी आँखों से असनु बहने लगे ,

रवि की सभी बहने उससे नाराज़ थी , वोह सब की सब , अपने अपने रूम में भाग गई , यह बात अलग थी , उनकी आँखों में असनु इक साथ ए थे...

तो बे कुनिटेड...
 
अपडेट-22

अभ अग्गे...

रवि को भी दुःख हो रहा था , पर रिमी , शूरति और रमा इनका दो पल का दुःख , उसके दुःख दर्द के सामने कुछ नै था ,

जो रवि ने खो दिया था , उसकी कल्पना भी कोई नै कर सकता था ,

सीमा वह बैठी थी , उसे रवि का दर्द महसूस हो रहा था , क्यों की कोमल को खोने का जो दर्द रवि महसूस कर रहा था , वही सीमा भी महसूस कर रही थी ,

कुछ देर वह ख़ामोशी रही , इस ख़ामोशी को प्रिय ने तोडा ,

"रवि भइआ , में नै चाहती के मेरे कारन आपकी बहाने आपसे नज़र हो जाये , मुझे माफ़ कर दो , अप्प जॉब मत करो.." प्रिय ने रट हुए बोलै ,

"नै प्रिय जी , रवि यह जॉब करेगा , रवि कभी किसी को झूठा वादा नै करता , हमारा रवि को रोकने का मकसद बस इतना है के हम उसे खोना नै चाहती , यह बात रवि भी समज़ता है , मेरा और इसकी बहनो का इसके इलावा और कोण है , बस ऐसे वादा करना होगा के यह अपना ख्याल रखेगा.." सीमा ने नाम आँखों से बोलै और उठ कर रमा के पास चली गई ,

प्रिय और सैर उसे जाते हुए देखती रही , वोह सीमा को समाज नै प् रही थी ,

"हाँ तोह प्रिय देदी , कब जॉब ज्वाइन करू में.."

"वोह भइआ अप्प कल मेरे पति को उनके ऑफिस में मिल लेना , हम्म , करीब 10 बजे .." प्रिय मुस्करा कर बोली ,

"वैसे राजेश सर बहुत अचे इंसान हैं , मेरी कई बार मदद की है उनहोनु ने.."

"लेकिन भइआ अपने उनकी जिंदगी बचाई थी , मुझे मेरा प्यार लूटा दिया , वैसे मुझे इस बात का हमेशा दुःख रहेगा , के आपकी बहिन कोमल आपसे दूर हो गई.." परईअ ने नाम आँखों से बोलै ,

"प्रिय देदी छोड़ो उस बात को , ाचा सैर , मुन्ना ठीक है न.."

"भइआ वोह बहुत अचे हैं , और भइआ में माँ बनने वाली हु , यह माँ बनने का सुख अपने hi दिया है मुझे.." सैर मुस्कराते हुए बोली ,

"अज्ज से , मतलब अभी से तुम दोनों मेरी बहाने हो , जिंदगी की हर ख़ुशी तुम दोनों को में दूंगा , तुम दोनों की मुस्कराहट hi मेरी जीत होगी , कभी निराश मत होना , कोई भी दुःख तकलीफ हो , मुझे यद् करना , तुम दोनों मेरी जिंदगी से जुड़ चुकी हो , यह बात कभी मत भूलना.." रवि ने दोनों की तरफ देख कर बोलै ,

"जी भइआ.." दोनों इक साथ बोली ,

"गुड़ , वैसे मेरी बहनो के बारे में कुछ गलत मत सोचना , बस वोह मुझे बेइंतहा चाहती हैं.."

"नै , भइआ वोह तीनो बहुत प्यारी हैं , अभ हम चलती हैं भइआ.." सैर उठते हुए बोली ,

"ऐसे कैसे , खाना खा कर जाने दूंगी.." सीमा रूम से एते हुए मुस्कराते हुए बोली ,

फिर प्रिय , सैर और रवि ने खाना खाया , फिर वोह दोनों रवि से मिल कर ख़ुशी ख़ुशी वह से चली गई ,

रवि सोफे पर आकर बेथ गया और कुछ सोचने लगा , तभी सीमा उसके साथ आकर बेथ गई ,

"रवि.."

"हाँ बोलू.."

"हम डर्टी हैं , अगर तुम कुछ हो गया तोह.."

"तुम सब जानती हो , तुम पता है , में इक वैम्पायर हु , में इक मुर्दा जीव हु , मुझे क्या होगा , में मर तोह पहले hi चूका हु , और वैसे भी मेरे कारन आम लोग का भला हो रहा है , शयद भगवन भी यही चाहता है.." रवि ने सीमा का हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोलै ,

"हाँ में जानती हु , लेकिन अगर कोई तुम जैसा hi तुमसे लड़ने ा गया तोह.."

"ऐसा कभी नै होगा , जब तक यह रिंग मेरे हाथ में है , इस दुनिआ में मुझे कोई नै मर सकता , ाचा मुझे थोड़ा काम है , में जाकर अत हु.." रवि सोफे से उठता हुआ बोलै ,

"ठीक है.." सीमा मुस्कराते हुए बोली ,

रवि घर से निकला और गाड़ी में बेथ शहर की तरफ निकल पढ़ा ,

रवि सोच रहा था , पुलिस की जॉब , पर ऐसा क्या है , जो सिर्फ वही कर सकता है ,

फिर रवि का दयँ अपनी बहनो की तरफ गया , उनका सोचते hi रवि के होंटो पर इक मुस्कान ा गई ,

रवि सोच रहा था , अभ भी बच्यां है सभी , लेकिन उसकी फिकर भी कितनी करती है , अज्ज तोह राखी भी नै बंदी , तीनो पागल हैं , फिर रवि को कवी और सीतल की यद् ा गई ,

उफ़ उनसे भी मिलना था , फिर रवि ने सोचा इक बार ख़ुशी से मिल अत हु , रत को उनसे मिल लूंगा , और कल सुबह वापिस आकर राजेश से भी मिल लेगा ,

काम , काम , बस काम , जिंदगी कभी नै रूकती , और न hi कभी काम ख़तम होते हैं , सुबह उठने से लेकर रत को सोने तक , इंसान बस काम करता रहता है , कभी यह , कभी वोह ,

अपनों के लिए वख्त निकलना कितना मुश्किल हो जाता है , और जब वही अपना , हमसे दूर हो जाता है , तोह वख्त वही रुक जाता है ,

अज्ज फिर सबने कोमल को यद् किया , इक ऐसी पहेली जिसे रवि कभी समाज नै पाया ,

उसकी अपनी बहिन , जिसे वोह कभी समाज नै पाया था , जब रवि अपनी पिछली जिंदगी पर नज़र डालता , तोह उसे कही भी ऐसा नै लगता था , के कोमल ने उसका इस्तेमाल किया हो ,

बचपन से लेकर जवानी तक , कोमल बस उसे hi चाहती रही , अगर वोह उसका इस्तेमाल कर भी रही होती , तब भी उसकी जिंदगी में कोई और होता ,

फिर रवि सोचने लगा , जब कोमल कभी उसके सामने आएगी , तब क्या वोह उसका सामना कर पायेगा , उफ़ पर रवि नै चाहता था के वोह उसके सामने ए ,

हॉस्पिटल नज़दीक ा गया था , ख़ुशी से मिलना था पर कोई प्लान नै सोचा था उसने ,

ख़ुशी , ऐसी हॉस्पिटल में दोनों दोस्त बने थे , ऐसी हॉस्पिटल के , ऐसी रूम में , दोनों की जिंदगी सुरु हुई थी ,

रवि उस वख्त कोमल को दंड रहा था , और वही ख़ुशी , मस्तानी बेगम के मायाजाल में बंदी उसका इस्तेमाल कर रही थी ,

भगवन सब को सजा देता है , रवि इंसान से वैम्पायर बना , इसके पीछे ख़ुशी भी जिम्मेदार थी , अगर वोह उसे धोका न देती , तोह ,

लेकिन ख़ुशी इतनी मासूम और प्यारी थी , हाँ , पर जिद्दी भी बहुत थी , ऐसा सोचते hi रवि के होंठो पर इक मुस्कान ा गई ,

रवि ने ख़ुशी को देखते hi माफ़ कर दिया था , रवि का दिल बहुत बड़ा था , इस दिल पर जितना हुक किसी और का था , उतना हुक ख़ुशी का भी था ,

रवि ने हॉस्पिटल पहुँच गाड़ी रोकी और फिर धीरे धीरे हॉस्पिटल के अंदर पहुँच गया ,

रवि ने देखा अज्ज ख़ुशी के रूम के बहार 2 गार्ड्स ड्यूटी दे रहे थे , शयद उस नर्स ने उसके कल ऐनी के बारे में सबको बता दिया था ,

लेकिन उस नर्स का विश्वास किसी ने किया भी होगा , यह बात सोचते hi रवि मन hi मन हस्स दिया ,

अभ रवि को dr.anju की जरुरत थी , क्यों की वही थी जो रवि को ख़ुशी से मिलवा सकती थी ,

रवि लिफ्ट से फर्स्ट फ्लोर पर पहुंचा और तेज़ी से dr.anju के केबिन के सामने पहुँच गया ,

रवि ने केबिन का दरवाजा खोला और अंदर घुस गया , उसने देखा dr.anju चेयर पर बैठी कुछ फाइल्स चेक कर रही थी ,

"हलो अंजू जी.." रवि मुस्करा कर बोलै और अंजू के सामने बेथ गया ,

"हम्म , रवि , मने सोचा तुम नै ायोगे.." अंजू ने फाइल इक तरफ रख रवि को देख कर बोलै ,

"उफ़ ऐसा कैसे सोच लिया , मने बोलै था , मुझे आपके पास जॉब करनी है.." रवि ने हस्ते हुए बोलै , तोह अंजू शर्मा गई ,

"ठीक है , कर लेना जॉब .." अंजू मुस्कराते हुए बोली ,

"अंजू वोह सब बाद की बतिअन , में कल ख़ुशी से मिला , वोह मर रही है , में उसे बचाना चाहता हु , और तुम मेरी हेल्प करुँगी.."

"में कैसे.."

"तुम इक डॉक्टर हो , तुम उसका केस अपने हाथ में लेलो , और मेरी मदद करो , ाचा मेरी बात दयँ से सुनो.."

फिर रवि ने dr.anju को अपनी सचाई बता दी , ख़ुशी से प्यार , उसका धोका देना ,

"क्या उसने तुम्हारी जान लेने की कोससिह की , में उसकी हेल्प क्यों करू .." अंजू ने नाम आँखों से बोलै ,

"प्लस अंजू , उसे उसके किये की सजा मिल चुकी है , पूरा ठाकुर परिवार मुझे मारा हुआ समज़ता है , मेरी जान को खतरा है , वार्ना में उसकी हेल्प कर देता.."

"ठीक है , तुम यह वार्ड बॉय के कपडे पहन लो , चेहरे पर यह मास्क लगा लो , हम दोनों चलते हैं , ख़ुशी से मिलने.." अंजू मुस्कराते हुए बोली ,

फिर रवि ने जल्दी जल्दी वार्ड बॉय के कपडे पहन लिए ,

जब अंजू उसके पास आयी तोह रवि ने उसे अपनी बहु में भर लिया , और कास कर उसके होंठो को चुम लिया ,

"वैसे मेरी सैलरी कब मिलेगी.."

"शाम को जाते वख्त ले लेना , अभ ायो जल्दी.." अंजू शर्मा कर बोली और दोनों ख़ुशी के रूम की तरफ चल पढ़े...

फिर दोनों ख़ुशी के रूम के सामने खड़े हो गए ,

"ओह्ह रवि यह तोह ठाकुर के आदमी लगते हैं , चलो अंदर चले .."

"अंजू पर मुझे अकेले ख़ुशी से बात करनी है , कोई रास्ता निकालो तुम.."

"हम्म , पहले हम दोनों अंदर जायेगे , फिर में बहार ा जोगी , तब तुम ख़ुशी से बात कर लेना.." अंजू इतना बोल उन दो बोडीगार्ड्स से बात कर अंदर घुस गई ,

रवि ने वार्ड बॉय के कपडे पहन रखे थे , उसे कोई पहचान नै पाया ,

रवि ने अंदर घुस कर देखा , ख़ुशी बीएड पर बैठी हुई थी , और कुछ सोच रही थी , उसके बाल भीकरें हुए थे , चेहरे पर छोटो के निशान थे , हाथिओं की दोनों नाज़ुक कलायिओं पर पत्तियां बंदी हुई थी , और चेहरा ऐसा था के अभी के अभी रो देगी ,

अंजू जैसे hi ख़ुशी के पास पहुंची , ख़ुशी उस पर बरस पढ़ी ,

"कामिनी मुझे हाथ मतलगाना अह्ह्ह्ह मैं रवि को बोल दूंगी , वोह मेरा बॉडीगार्ड है , पिता जी ने उसे काम पर रखा है , तुम जान से मर देगा वोह अह्ह्ह्ह शहहह मेरा सर दर्द कर रहा है प्लस जाओ यहाँ से.." ख़ुशी ने चीखते छीलते हुए बोलै , उसकी आँखें नाम थी ,

"खुशु , तुम रवि से मिलना है.." अंजू ने बहुत मीठी आवाज़ में बोलै ,

"क्या , तुम रवि को जानती हो , उसे बोलो न मुज़से बात करे प्लस , यह सब कहते हैं , रवि मर गया है , अगर वोह मर गया है तोह में भी मर जोगी...." ख़ुशी ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

अंजू की आँखों से असनु बहने लगे , वोह पीछे पलट कर रवि को देखती रही और फिर ख़ुशी से बात करने लगी ,

"क्या तुम मेरी दोस्त बानगी..."

"हाँ , नै , तुम सब मुझे बचाना चाहते हो , तुम सब के सब मिले हुए हो , अह्ह्ह्हह मुझे मरना है , तोह में मरकर रहूगी..." ख़ुशी ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"और अगर में कहु के तुम जीना है , मेरे साथ , तोह.." रवि ने अपना मास्क उतारते हुए बोलै ,

"रा , राविइइइइइइइ..." ख़ुशी चीखती हुई बोली , और बेहोश हो गई ,

"ख़ुशी , ख़ुशी , क्या हुआ अंजू इसको , ेहः ख़ुशी , बोलो न , प्लस , में तुम्हारा रवि हु , उठ न , ेहठ कितनी जिद्दी है , मेरी कोई बात नै मानती , उठो ख़ुशी , प्लस उठो , मुझे इतना दर्द मत दो ..." रवि ने पागलो की तरह चीखते हुए बोलै ,

"रवि , रवि , होश में ायो , यह तुम देख कर बस बेहोश हुई है , कुछ देर बाद होश में ा जाएगी , अभ चलो यहाँ से.." अंजू ने रवि का हाथ पकड़ उसे खींचते हुए बोलै ,

"नै , नै , अंजू , में नै जा सकता , अगर ऐसे होश ा गया , और में ऐसे न दिखा , तोह यह सच में मुझे मारा हुआ समाज लेगी , में नै जा सकता..." रवि ने नाम आँखों से ख़ुशी के मासूम चेहरे की तरफ देख कर बोलै ,

"ok , ok , में कुछ करती हु , तुम यही रुको ख़ुशी के पास .." अंजू इतना बोल रूम से बहार चली गई ,

रवि अपना मास्क पहन ख़ुशी से कुछ दूर बेथ गया और उसके होश में ऐनी का इंतज़ार करने लगा ,

अंजू अपने कुछ सीनियर डॉक्टर्स से बातचीत करके आधे घंटे बाद वापिस आयी , उसने देखा रवि अभी भी वही बैठा हुआ था ,

अंजू कुछ देर रवि के पास बैठी रही , उसने डॉक्टर्स से ख़ुशी के इलाज की परमिशन लेली थी ,

वैसे भी डॉक्टर्स को ख़ुशी का केस कुछ समाज नै ा रहा था , उनहोनु ने बहुत कोससिह की थी , लेकिन खास रिजल्ट उनको नै मिला था , इसलिए अंजू के कहने मटर से hi उनहोनु केस अंजू को सौंप दिया था , क्यों की अंजू इस हॉस्पिटल की बेस्ट डॉक्टर थी ,

"ाचा अंजू तुमसे इक बात पुछु.."

"हाँ जरूर .."

"dr.nelam अभी भी है या नै.."

"उम् , dr.nelam , वोह तोह चली गई , उसने जॉब छोड़ दी , 4 महीने पहले..." अंजू ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,

"व्हाटट , पर क्यों.."

"हम्म , रवि वोह थोड़ा टेंशन में रहती थी , किसी से जायदा बात भी नै करती थी , इस लिए इक दिन अचानक नीलम जी ने जॉब छोड़ दी , अभ उनका कुछ पता नै मुझे.."

"उनका नंबर है तुम्हारे pas.."ravi के दिल में इक दर्द सा हो रहा था ,

"है तोह सही , बूत स्विच ऑफ़ ा रहा है , मने कई बार तरय किया था.." अंजू ने सीरियस होकर बोलै ,

फिर रवि खामोश सा हो गया , नीलम कैसी है , वोह ठीक है भी या नै , रवि को दर्द सा महसूस हो रहा था , नीलम बहुत अछि औरत थी , काली और पाक़िआ को पकड़वाने में उसका कितना बड़ा योगदान था ,

अंजू , कुछ देर रवि को अकेला छोड़ अपने मरीज़ो को देखने चली गई ,

करीब 2 घंटे रवि वही बैठा रहा , फिर अचानक ख़ुशी के बदन में थोड़ी अहहत हुई ,

"अह्ह्ह्ह मा पानी .." ख़ुशी अपने सार को पकड़े उठते हुए बोली ,

रवि ने ख़ुशी को पानी पीला दिया और फिर उसके पास hi बेथ गया , ख़ुशी मसोमीयत से रवि को घूरती रही ,

फिर रवि ने अपना मास्क उतर दिया , ख़ुशी बस रवि के चेहरे को देख कही खो सी गई , उसकी आँखों के कोणु से असनु बहने लगे ,

बरसो का दर्द आँखों से बह जाये , वोह बात hi अलग है ,

"खुशु , में हु तुम्हारा रावी.." रवि ने नाम आँखों से बोलै ,

ख़ुशी कुछ न बोली , उसके गुलाबी होंठ कंपकपा रहे थे , उसने अपना कंपता हुआ हाथ रवि के चेहरे से छुआ दिया , उफ़ रवि का पूरा बदन कम्प गया ,

फिर ख़ुशी प्यार से , मसोमीयत से , रवि के चेहरे , उसके गालो , पर हाथ फिरने लगी , उसे महसूस करने लगी , क्या वोह जिन्दा है ,

"रववीईई.." फिर िका इक ख़ुशी रट हुए रवि के सीने से लग गई , ख़ुशी ने इतना कास कर रवि को अपने सीने सेलगाया था , के हवा भी रास्ता भूल गई के उसे गुजरना कहा से है ,

"ख़ुशी वोह.."

"शह्ह्ह्ह.." ख़ुशी ने अपने गुलाबी कंपते होंठो पर ऊँगली राखी ,

और फिर अचानक से वोह रवि के चेहरे को चूमने लगी , उसने इतना चूमा , इतना चूमा , के रवि की आँखों से असनु बह निकले ,

यह असनु प्यार के थे , ख़ुशी चाहे उसके करीब इक मकसद से आयी थी , लेकिन रवि ने उसके दिल में जो अपने प्यार का पेड़ लगाया था , वोह अज्ज बड़ा हो चूका था ,

"रावी , माफ़ कार्डो , माफ़ कार्डो मुझे , प्लस..." ख़ुशी बेइंतहा रट हुए बोली , लेकिन अभी भी उसने रवि के चेहरे को चूमना बंद नै किया था ,

इतना पागलपन था , ख़ुशी में , उसके प्यार में इक कससिह थी , मोह्हबत अपने सिखेर पर थी , उसके नरम , दर्द से भरे , होंठो की तपश से रवि की आत्मा तक पिगलति जा रही थी ,

फिर िका इक रवि ने ख़ुशी का चेहरा अपने दोनों हाथिओं में पकड़ लिया , उफ़ ख़ुशी का वोह मासूम चेहरा , उसकी गीली आँखें , कांटे गुलाबी होंठ ,

रवि ने अपने होंत्नो को ख़ुशी के होंठो से मिला दिया , फिर वही हुआ , जो होता है , होंठ होंठो से मिल गए , आपस में उलज़ते चले गए , इक दूसरे से लड़ने लगे ,

रवि बड़े प्यार से ख़ुशी के होंठो को चूस रहा था , वोह इस पल को महसूस करना चाहता था , ख़ुशी प्यार से रवि के बालो को सहलाती , उसके होंठो को चुम रही थी ,

ख़ुशी की आँखों से असनु बह रहे थे , लेकिन होंठ होंठो से मिले हुए थे , वोह इक दूसरे से जुड़ा नै होना चाहते थे ,

रवि को ख़ुशी के गुलाबी नरम होंठो का एहसास पागल सा कर रहा था , रवि ख़ुशी के होंठो को पूरा मोह में भर कर कास कास कर चूस रहा था , ख़ुशी को इक मीठा सा दर्द हो रहा था ,

5 मिंट तक रवि और ख़ुशी होंठो से होंठ मिलाये , इक दूसरे को चूमते , चूसते रहे , जब दोनों इक दूसरे से अलग हुए , तब ख़ुशी ने शर्मा कर अपनी नज़रियन निचे कर ली ,

अभ वख्त था कुछ बात करने का , अग्गे जिंदगी में क्या करना है , कैसे करना है , ख़ुशी से बहुत कुछ जानना था रवि को...

खास कर इक इंसान के बारे में.. जिसका नाम था .. कुणाल

तो बे कुनिटेड....
 
अपडेट-23

अभ अग्गे..

रवि कुछ देर ख़ुशी के खूबसूरत चेहरे को देखता रहा और फिर बोलै ,

"क्या में पूछ सकता हु , यह सब क्या है , में नै जनता था , तुम इतनी कमज़ोर होगी.." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

" रवि में कमज़ोर नै थी , पर पिछले 2 दिनों से मने जो देखा और महसूस किया , में , में कैसे भूल जाती.." ख़ुशी ने रट हुए बोलै ,

"मतलब , ओह्ह मेरी जान , अभ मत डरो , तुम बोलो न.." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर पूछा ,

"रवि , मने अपनी आँखों से इक दरिंदे को देखा है , में बेहद दर गई थी , वोह मर देगा मुझे..." ख़ुशी ने और भी रट हुए बोलै ,

"कोण था वोह.."

"मेरा भाई कुणाल , वोह जानवर है रवि , जानवर , वोह मुझे मर देगा.."

"शठ , में हु न , तुम बेफिकर हो जाओ , अभ बताओ क्या देखा तुमने.." रवि ने ख़ुशी को अपनी बहु में भर कर बोलै ,

"रवि 3 दिन पहले , मने उसे बोलै के हम शादी कर लेते हैं , लेकिन उसने मन कर दिया , वोह बस मेरा जिस्म नोचना चाहता था , मने उसे मन कर दिया , रवि , उस पल मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ , के मने क्या खो दिया , उस रत मने बहुत शराब पि .." ख़ुशी ने असनु बहते हुए बोलै ,

"भूल जाओ सब , मने तुम कब का माफ़ कर दिया , आखिर तुमने अपने प्यार के लिए किया था.."

"नै रवि वोह प्यार नै था , वोह वेह्शी दरिंदा है , वोह इंसान नै है , रवि , वोह मुझे मर देगा , प्लस , मुझे बचा लो , कही दूर ले चलो.." ख़ुशी ने उस खौफनाक वख्त को यद् कर रट हुए बोलै ,

"क्या किया उसने , अगर उसने तुम छुआ भी तोह में उसकी सांसे उसके सीने से निकल दूंगा.." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"रवि में नै बता सकती , में उस खौफनाक वख्त को यद् नै करना चाहती..."

"प्लस बता दो , मुझे दर सा लग रहा है.." रवि ने ख़ुशी का हाथ अपने हाथिओं में लेकर बोलै ,

"रवि 2 दिन पहले रत को 8 बजे मेरा भाई बेहद नशे में मेरे रूम में आया , उसने बेहद शराब पि थी , उसकी आँखें नशे में चुर्र थी , और फिर.."

फ्लैशबैक...

"भइआ अप्प यहाँ , मने बोलै न आपको , मुझे आपसे कोई बात नै करनी.." ख़ुशी ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"मत कर बात मुज़से , बस अपनी यह कातिल जवानी मुझे सौंप दे , तुझे पाने के लिए , मने बहुत साल बर्बाद किये हैं , अभ तू बच नै सकती मुज़से.." कुणाल ने ख़ुशी की तरफ बढ़ते हुए बोलै ,

"भइआ , यह , यह , अप्प क्या बोल रहे हो , में आपकी बहिन हु , भाई ऐसा मत करो..." ख़ुशी ने रट हुए बोलै ,

"ः , साली , जब मुज़से इश्क़ लड़ा रही थी , तब मेरी बहिन नै थी क्या , खुशु , बस इक बार करने दे , फिर तुझे कभी परेशान नै करुगा.." कुणाल ने ख़ुशी के बेहद करीब पहुँच कर बोलै ,

"तोह शादी कर लो मुज़से , वार्ना हाथ मत लगाना मुझे.." ख़ुशी ने अग्ग उगलती आँखों से बोलै ,

"शादी , ः , साली , में क्या हर लड़की से शादी करता फिरू , मुझे हर रोज़ इक नयी लड़की चाहये , ाचा , ेहः मेरी बात सुन , तुझे बिलकुल भी दर्द नै होगा , वैसे भी यह बात किसी को नै पता चलेगी , में तुम बहुत मज़ा दूंगा.." कुणाल ने ख़ुशी के बालो की खुशबु लेते हुए बोलै ,

"दूर हैट कुत्ते , थू , मुझे घिन अति है , मने तुज जैसे इंसान से प्यार किया , रवि को धोका दिया , काश के वोह जिन्दा होता , तोह तेरी इतनी हिमेट न होती , मेरे पास ऐनी की.." ख़ुशी गुस्से से बोल रूम से बहार जाने लगी ,

"अह्हह्ह्ह्ह , उस कमीने का नाम भी कैसे लिया , अभ तुझे कोई नै बचा सकता.." कुणाल ने बेहद गुस्से में बोलै , और ख़ुशी को पीछे से बालो से पकड़ , अपनी तरफ खींच लिया , कुणाल जबरदस्ती उसकी गर्दन को चूमने लगा ,

"अह्ह्ह्हह माँ , पिता जी , बचाओ मुझे , रवीए , बचाओ मुझे , छोड़ दे कुत्ते.." ख़ुशी ने दर्द से चीखते रट हुए बोलै ,

"रवि , वोह हरामजादा मर चूका है , तू चल बीएड पर , तू मेरी रखेल बन कर रहेगी , समाजी कुटिया.." कुणाल ने खींच कर दो थपड ख़ुशी को मर दिए और उसे उठा कर बीएड पर पटक दिया ,

"नै , नै , मुझे छोड़ दो , में हाथ जोड़ती हु , प्लस छोड़ दो मुझे.." ख़ुशी ने रट हुए बोलै ,

"ः , हर लड़की तुम्हारी तरह रोटी है , चिलाती है , मुझे बेहद मज़ा अत है , उनका रपे कर , उनको में अपने फार्महाउस में जिन्दा गड देता हु , तुम भी मर कर वही गड दूंगा..." कुणाल की वेह्शी आँखों में देख ख़ुशी अंदर तक कम्प गई ,

"प्लस , मत करो , छोड़ दो मुझे , प्लस.." ख़ुशी ने दर से कंपते रट हुए बोलै ,

"शठ शांत , मेरी बहिन , शांत हो जाओ , जानती हो , कुणाल ठाकुर से अज्ज तक , बस इक लड़की बची है , वोह है कोमल , उफ़ उसका रसीला बदन , वोह भी बस तेरे कारन , साली , कुटिया , तूने hi आज़ाद किया था उसे , उस जैसे माल को छोड़ने का मौका खो दिया मने , अभ तू उसकी भरपाई करेगी , जब तक वोह साली मुझे मिल नै जाती..." कुणाल ने ख़ुशी को इक और थपड जड़ बीएड पर गिरा उसके ऊपर लेटते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह कुत्ते , तू कोमल को कभी नै प् सकेगा , उसके सार पर मेरे रवि का हाथ है , अह्ह्ह्हह तू मेरा रपे कर सकता है , पर मुझे ज़ुका नै सकता , लूट ले मेरी इजाजत अह्ह्ह्हह , पर तू न कभी कोमल को ज़ुका पाया था और न कभी मुझे ज़ुका पायेगा.." ख़ुशी ने रोटी हुई आँखों से गुस्से में बोलै ,

"साली , मेरी मर्दानगी को ललकारती है , तेरी तोह , तुझे तोह कोमल से जायदा टार्चर करुगा , तू खुद मेरे अग्गे झुक कर , रेहम की भेक मांगेगी.." कुणाल गुस्से से उठा और अपनी पेण्ट की बेल्ट निकल ली ,

"ले मर मुझे , पर कुत्ते में मर जोगी , पर अगर मेरा प्यार रवि के लिए सच्चा है , तोह में मर जोगी पर ज़ुकोगी नै.." ख़ुशी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"ेहह्हह्ह्ह्ह साली रवि का नाम लेती है.." कुणाल गुस्से से ख़ुशी को मरने लगा ,

कुणाल , काफी देर तक ख़ुशी को बेल्ट से मरता रहा , पर ख़ुशी हर दर्द सेहती चुप रही , उसकी आँख से इक कटरा असनु नै निकला था , यह देख कुणाल का गुस्सा और भी बढ़ गया ,

"थक गए भइआ..." ख़ुशी ने थोड़ी दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

" अह्ह्ह्हह " कुणाल गुस्से से चखा और पास hi टेबल पर पढ़े चाकू से ख़ुशी के दोनों हाथिओं की कलायिओं को काट दिया ,

"aeeiiiiiiiiiiiiiiiiii माआआआ .." ख़ुशी दर्द से चीखते हुए बोली , उसका सर चकराने लगा था ,

"ः , अभ में तेरी वही हालत करुगा , जो मने कोमल की की थी , ः , तेरी पीठ पूरी जला दूंगा , फिर खुद तू झुकेगी मेरे अग्गे.." कुणाल गुस्से से चीखता हुआ उठा और ख़ुशी का टॉप खींच कर फाड् दिया ,

ख़ुशी का खून बहुत बह चूका था , उसकी आँखें बंद होती जा रही थी , वोह अभ जायदा विरोध भी नै कर रही थी ,

कुणाल ने ख़ुशी को पेट के बल लिटा दिया , और उठ कर इक तेज़ाब की बोतल उठा लाया ,

"भगवन प्लस बचा लो.." ख़ुशी ने बेसुध हालत में बोलै ,

अभी कुणाल ने बोतल का ढकन खोला hi था , के किसी ने दरवाजा खटकता दिया ,

"ख़ुशी बीटा दरवाजा खोलू न..." यह आवाज़ थी ठाकुरान सुनीता की , जो उसकी बड़ी माँ थी ,

कुणाल ने अपनी माँ की आवाज़ सुनी तोह वोह ख़ुशी के कनु में बोलै ,

"कुट्या अगर मेरा नाम तेरे होंठो पर आया तोह , हवेली में किसी को जिन्दा नै छोड़ूगा , समाजी , तेरी माँ को भी मर दूंगा.." कुणाल इतना बोल रूम की खिड़की से भाग गया ,

ख़ुशी की आँखों से असनु बहने लगे , फिर उसे पता hi न चला कब वोह बेहोश हो गई , जब उसकी आँख खुली , तब वोह हॉस्पिटल में थी ,

बैक तो स्टोरी..

ख़ुशी जब अपनी बीती जिंदगी के बारे में बता रही थी , रवि की आँखों में इक गुस्सा सा बढ़ता जा रहा था , फिर िका इक उसकी आँखों से असनु बहने लगे ,

रवि ने ख़ुशी को अपनी बहु में भर लिया , और उसे शांत करने लगा , वोह प्यार से उसके बाल सहलाते जा रहा था ,

"ख़ुशी बस शांत हो जाओ , अभ तुम मेरे पास हो , जब तक में जिन्दा हु , तुम कोई छू भी नै सकता.." रवि ने ख़ुशी के माथे को चुम कर बोलै ,

"रवि , प्लस मुझे , कही दूर ले चलो , वोह , वोह मर देगा मुझे , अह्ह्ह मेरा सार , रवि , तुम मुझे भगा कर ले चलो , मर देगा , वोह , वोह मर देगा मुझे..." ख़ुशी ने फिर से रट हुए बोलै ,

"मेरे पास इक प्लान है .."

"क्या.."

"तुम मेरी बात दयँ से सुनो , तुम मेरी बहिन रमा के सोल्लगे में एडमिशन ले लो , और वही हॉस्टल में रहना , इस से दो फयदे होंगे , तुम कुणाल से मेहफ़ूज़ रहूगी , और में उसका किस्सा ख़तम कर दूंगा , बाद में हम शादी कर लेंगे.."

"ओह्ह बहुत ाचा प्लान है , प्लस अभ मुज़से दूर मत जाना.." ख़ुशी ने रवि को अपने गले लगते हुए बोलै ,

"नै होगा , तुम बस अग्गे की जिंदगी के बारे में सोचो , अभ तुम मेरी हो , बस कभी धोका मत देना , वार्ना इस बार में कभी वापिस नै ायुगा..." रवि ने ख़ुशी की आँखों में देख कर बोलै ,

"नै दूंगी , इक बार यह गलती कर्ली , अभ नै करुँगी , ाचा , मुझे कोमल से मिलना है , में उस प्यार की मूरत से मिलना चाहती हु , जिसने बस तुम्हारे लिए इतना कुछ सहा , जानते हो उस रत क्या हुआ था.." ख़ुशी ने थोड़ा दर्दभरी आवाज़ में बोलै ,

फ्लैशबैक...

ख़ुशी अपने भाई के तहखाने से निकलने के बाद दबे पांव अंदर घुस गई , वोह देखना चाहती थी , उसका भाई बार बार वह क्यों जाता है ,

जब ख़ुशी ने सामने देखा तोह उसकी रूह तक कम्प गई ,

ख़ुशी ने देखा , इक लड़की लोहे की जंजीरो में जकड़ी हुई थी , उसके हाथ बन्दे हुए थे , उसने इक शार्ट जीन पहनी हुई थी और उसके चुचु को मटर इक काली ब्रा ने ढाका हुआ था ,

उसका चेहरा पूरा चिल्ला हुआ था , होंठ फाटे हुए थे , बाल भिकेरे हुए थे , उसकी गर्दन , उसके कण्डु पर छोटो के निशान थे , पूरा सीना लहू से लथपथ था , उसकी सांसे धीरे धीरे चल रही थी , लेकिन उसकी काली आँखों में इक कससिह थी , इक इंतज़ार था ,

ख़ुशी भाग कर उस लड़की के पास पहुँच गई , जब ख़ुशी ने उसके पीछे जाकर उसकी पीठ को देखा , उसकी आँखों से असनु बहने लगे ,

उसके ढाये कंडे से निचे का मास्स जला हुआ था , उसकी पीठ का वोह हिस्सा बिना मास्स का था , उफ़ ऐसा लग रहा था , जैसे उसकी चमड़ी किसी ने खींच कर निकल दी हो , पीठ के उसे जले हुए हिस्से से खून बह रहा था , इतना बेरहम कोई कैसे हो सकता है ,

ख़ुशी ने as-pass नज़र डाली तोह ख़ुशी ने देखा लोहे की गरम सलाखे पढ़ी हुई थी , शयद इन्ही गरम सलाखों से इस लड़की की पीठ को जलाया जा रहा था ,

लेकिन इसको किस लिए इतना टार्चर किया जा रहा था , यह ख़ुशी समाज नै प् रही थी , क्या कारन था , िका इक ख़ुशी जल्दी से उस लड़की के सामने ा गई , और बोली ,

"k..k..kon हो t..tu...tum..." ख़ुशी ने उस लड़की के सामने आकर रट हुए बोलै ,

वोह लड़की कोई और नै कोमल थी , जिसे बांध कर रखा गया था , यह काम कुणाल का था , जो कोमल को झुकना चाहता था ,

"m..ma..main...pp...pa..pani..." कोमल ने बेसुध सी हालत में बोलै , वोह दर्द को बर्दाश्त करते हुए बेहोश सी होती जा रही थी ,

"हाँ , यह लो पानी.." ख़ुशी ने जल्दी जल्दी कोमल को पानी पीला दिया , और बोतल वही रख दी ,

पानी पीने के बाद कोमल ने थोड़ी सी आँखें खोल ख़ुशी को देखा , वोह दर्द में कुछ बोल नै प् रही थी ,

"b...bb...bhyiaaa..." कोमल इतना hi बोल पायी , के ख़ुशी को किसी के ऐनी की अहहत सुनाई दी , ख़ुशी जल्दी से चिप गई ,

तभी कुणाल शराब के नशे में तुन वह ा गया , उसके हाथ में इक बोतल थी , जो लगभग खली होने की कगार पर थी ,

कुणाल , कोमल के पास आकर रुक गया , कोमल ने बेसुध सी आँखों से उसे देखा ,

"साली , कितनी अकड़ है तुज में , देख , इक बार , बस इक बार , हाँ बोल दे , इतनी डोलत दूंगा तुझे , के तू सोच भी नै सकती , तेरे उस फ़कीर भाई के पास क्या है , वोह साला भिकारी कही का , देख , में तुझे और दर्द नै देना चाहता , बस तू झुक कर बोल दे , के कुणाल में हार गई और तुम जीत गए , बोल दे रानी , वार्ना तेरे इस खूबसूरत जिस्म की पूरी चमड़ी उतर दूंगा , बोल..." कुणाल ने कोमल का चेहरा अपने दोनों हाथिओं में पकड़ कर उसकी आँखों में ज़कते हुए बोलै , कुणाल की आँखों में इक वेशीपन था ,

"n...n..naiii.." कोमल ने धीरे से बोलै और मुस्करा दी ,

"साली क्या देख लिया तूने अपने भाई में , उसका लुंड देख लिया क्या , रानी , में तुझे उतना hi मज़ा दूंगा , जितना तेरा भाई तुझे देगा , चल बोल , कुणाल में हार मानती हु , बोलल.." कुणाल ने गुस्से में चीखते हुए बोलै , वही ख़ुशी उसे चुप कर देख रही थी ,

"ेहहीनंण , नई , बी ..bb..bh...yiaaa.." कोमल ने लड़खड़ती आवाज़ में बोलै ,

"भइआ , भइआ , क्या भइआ , भइया लगा रखा है , साली , वोह नै आएगा , भाग गया वोह .." कुणाल ने गुस्से में चीखते हुए बोलै ,

"aaaieeeeeeeeeeeiiiiiiiiii bhyiaaaaaaaaaa..." कोमल दर्द से चीख उठी , क्यों की कुणाल ने उसकी जाली हुई पीठ पर शराब गिरा दी थी , कोमल की आँखों से असनु बह रहे थे , शराब उसके जखम को और जला रही थी ,

" भय्याहा , बचावू , भइआए.." कोमल दर्द से चीखती हुई अपनी भाई को यद् कर रही थी ,

"aaeeeeeeeiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भइआए बचालूओ प्लसससस...." कोमल की चीख और भी दर्दनाक हो गई , क्यों की कुणाल ने नमक के पैकेट से मुठी भर नमक उठा , कोमल की पीठ पर रख दिया , नमक से कोमल के बदन में दर्द की तेज़ लहर उठ पढ़ी ,

"बोलल , कुट्या , कुणाल में तेरी हु , बोलल.." कुणाल ने गुस्से में कोमल की जाली पीठ पर नमक लगे हाथ को रगड़ते हुए बोलै ,

"आयआईईईईईईईईईई , भ्याआआ बचाऊऊऊ , भ्याआआ..." कोमल दर्द से तड़फते रट हुए बोली , यह दर्द असहनयी था , इस दर्द की कोई कल्पना भी नै कर सकता था ,

"आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह bhyiaaaaaaaaaa..." कोमल चीख उठी , जब कुणाल ने इक गरम अग्ग से ताप्ती लोहे की सलाख कोमल की जाली हुई पीठ पर लगा दी .." अभ बोल कोमल , बोल , में हार मानती हु , बोलल साली , हरामजादी , कुटिया , में तेरे पोरे बदन को जला दूंगा , बोलल..." कुणाल ने उस ताप्ती गरम सलाख से कोमल की पीठ और भी जलनि सुरु कर दी ,

"आअह्ह्ह्ह नाईई , नईईई , आइईईईई मा , अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह भइआए , बचालो , भइआए प्लसससस बचालूओ..." कोमल दर्द से तड़फते रट हुए बोली , अभ तोह उसकी आँखों से असनु भी सूखने लगे थे , जैसे जैसे वोह अग्ग से जलती लाल रंग की लोहे की सलाख , कोमल की जाली पीठ पर रगड़ कहती , कोमल तडफने लगती ,

"साली किस मिटटी की बानी है तू , ेहह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तू ज़ुकती क्यों नै , कोमल , में मर दूंगा तुझे , झुक जा हरामजादी , ठीक है , अगर तू अपनी जिद्द नै छोड़ेगी , मैं हार गया , लेकिन तेरा यह जिस्म तोह में पाकर hi रहुगा , अभ चाहे तू झुके या न झुके..." कुणाल ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , उसकी हस्सी में इक डरावना एहसास था ,

फिर कुणाल ने कोमल के हाथ खोल दिए , कोमल बेसुध होकर निचे गिर गई ,

"साली , तू नै झुकेगी , तू बस अपने भाई की दीवानी है , पर तू भी जानती है , में भी नै ज़ुकूगा , तुझे पाना है तोह पाकर hi रहुगा , चाहे प्यार से या बेदर्दी से.." कुणाल ने गुस्से से बोलै और टशीट उतर दी ,

" nn...nai.. p...pll ..प्लस..." कोमल ने असनुईओं से भेजी आँखों से बोलै ,

फिर िका इक कुणाल ने कोमल के दोनों हाथो को पकड़ लिया और इक हाथ से उसकी ब्रा खींच कर फाड् दी ,

कुणाल जबरदस्ती कोमल के होंठो को चूमने की कोससिह करने लगा , कुणाल के अंदर इक दरिंदा सा बस गया था , वोह जबरदस्ती कोमल के होंठो को उसकी गर्दन को काटने चूमने लगा ,

"अह्ह्ह्हह भइआएए बचावू , भइआए ..." कोमल बेइंतहा रोटी , कुणाल से छूटने की कोससिह कर रही थी ,

"चिल्ला साली , यहाँ कोई तुझे बचने नै आएगा , अज्ज तुझे इतना छोड़ूगा , के तू जिंदगी भर अपने भाई का सामना नै कर पायेगी , किस मोह से जाएगी तू अपने भाई के सामने , तेरा सब कुछ लूट लूंगा में , तुम यही रहूगी , मेरी रखेल बनकर..." कुणाल गुस्से में हस्ता हुआ बोलै ,

अभी कुणाल ने कोमल के कुंवारे चुचु को छुआ hi था , इक तेज़ लोहे की रोड उसके सार पर ा लगी ."आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह..." कुणाल दर्द से चीखता हुआ , इक तरफ गिर गया , यह और कोई नै ख़ुशी थी ,

ख़ुशी जल्दी से वापिस हवेली के अंदर भाग गई , और अपना इक टॉप उठा लायी , ख़ुशी ने जल्दी जल्दी , कोमल को टॉप पहना दिया , और उसे सहारा देकर खड़ा कर दिया ,

"तुम जाओ , भाग जाओ , वार्ना मेरा भाई तुम मर देगा..." ख़ुशी ने रट हुए कोमल को होश में लेट हुए बोलै ,

"k...kk...kon...h...ho...t..tt...tum..." कोमल ने दर्द भरी आँखों से पूछा ,

"में ख़ुशी हु , इसकी बहिन , अभ जाओ , भाग जाओ..." ख़ुशी जल्दी से कोमल को तेहकने की इक दिवार के पास ले आयी ,

ख़ुशी ने जल्दी से इक पत्थर हटा दिया , और गुफा का रास्ता खुल गया ,

"कोमल यहाँ से भाग जाओ , यह गुफा जंगल में खुलती है , वह इक कोने में इक पत्थर होगा , उस पत्थर को बहार खींच देना , तब रास्ता खुल जायेगा , और जंगल में कही भाग जाना , जाओ कोमल , भाग जाओ , वोह जल्दी होश में ा जायेगा..." ख़ुशी ने रट हुए कोमल को ढाका देकर उस गुफा में बेहज दिया , और दरवाजा लॉक कर दिया ,

बैक तो स्टोरी...

ख़ुशी ने जब यह बात बताई , रवि की आँखों में असनुईओं का सैलाब ा गया था , वोह कोमल को समाज नै प् रहा था ,

अगर कोमल इतना दर्द बस उसके लिए बर्दाश्त कर रही थी , तोह उस दिन , उसने वोह सब क्यों कहा , यह बात अलग थी , के काल की कही बतिअन रवि भूल चूका था , रिंग ने सब मिटा दिया था , लेकिन बार बार कोई न कोई कोमल का नाम ले hi लेता था , जिससे कोमल का प्यार वापिस जग उठता था ,

"इतना प्यार , इतनी मोह्हबत , वोह तुमसे इतना प्यार करती थी , रवि वोह सच में तुम्हारे लिए इस दुनिआ में आयी थी , कहा है वोह , प्लस मुझे कोमल से मिलना है.." ख़ुशी ने नाम आँखों से बोलै ,

यह बात अलग थी , के ख़ुशी और कोमल , दोनों हॉस्पिटल में मिल चुकी थी , पर तब ख़ुशी , मस्तानी बेगम के मायाजाल में फांसी थी , उसकी सोच , मस्तानी बेगम के कब्जे में थी ,

"voh..voh.. ख़ुशी , कोमल मर चुकी है.." रवि ने इतना बोल नज़रियन ज़ुका ली ,

"नईईई , यह नै हो सकता , नईईई , प्लस बोल दो , रवि , तुम मुझ पर विश्वास नै है , रवि , में इस बार तुम धोका नै दे रही हु , रवि , इक बार , बस इक बार , मिलवा दो कोमल से , प्लस .." ख़ुशी ने बेइंतहा रट हुए हाथ जोड़ते हुए बोलै ,

"मर चुकी है वोह , मुझे छोड़ कर चली गई है , जैसे में उसे 7 सालो के लिए छोड़ कर चला गया था , खुशु , वोह मुज़से बदला ले रही है , कहा से लयू उसे में , कहा दुंदु , इतनी बड़ी दुनिआ में , में मज़बूर हु , प्लस , में मज़बूर हु , तुम नै समाज सकती , मने क्या खो दिया है , मने सब खो दिया है , अभ में इक जिन्दा लाश हु , इसके बिना कुछ नै..." रवि ने कोमल को यद् कर बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"कोमल लोट ायो कोमल , में नै जी सकता तुम्हारे बिना , अह्हह्ह्ह्ह कोमललललल , प्लस लोट ायो , में मर जाउगा कोमल , कहा हो तुम , प्लस ा जाओ , क्या करू , क्या करू , कहा दुंदु उसे , मेरी बची , मेरी कोमल ..." रवि उठ कर दिवार से सार टिकाये रोये जा रहा था ,

"प्लस रवि शांत हो जाओ , प्लस.." ख़ुशी भी बीएड से उठने की कोससिह करती रट हुए बोली ,

"कैसे शांत हो जाऊ , कैसे , इन्ही हाथिओं से पला था उसे , उसी के लिए तोह जी रहा था में , क्यों प्यार किया उसे मने , क्यों , यह भगवन मुझे कोनसी सजा दे रहा है , क्या भिगाड़ा है मने इसका , इससे ाचा तोह मेरी जिंदगी चीन लेता , पर इक बार कोमल से मिलवा दे , भगवन लूटा दे मेरी गुडिअ को , नै जी सकता में , कब तक नफरत करुगा उससे , मेरी जान लेले , मर दे मुझे , मेरी कोमल लूटा दे , प्लस , प्लस , कोमळळ लोट ायो , कोमलललललललल..." रवि वही देवर के सहारे पीठ लगाए बेथ गया , कोमल की यद् ने उसकी नफरत को असनुईओं में बहा दिया था , रवि बस रोटा जा रहा था , क्या यही दीवानापन था , रवि की आँखें इस कदर बह रही थी , के कोई पत्थर दिल भी रोने लग जाता...

रिंग रवि को कण्ट्रोल कर रही थी , पर रवि के दिल में इक पवित्र प्यार पनप उठा था , जिसके अग्गे रिंग की साडी ताकत फज़ूल थी , वोह छह कर भी , रवि के दिमाग को कण्ट्रोल नै कर प् रही थी ,

तो बे कुनिटेड....
 
फ्रेंड्स अपडेट पोस्ट कर दिया है.. लेकिन इक बात कहना चाहता हु.. में पुलिस की जॉब करते हुए टाइम निकल कर अपडेट देता हु.. प्लस.. जो बस पोस्ट लिखे कर चले जाते हैं.. वोह रिप्लाई तोह कर सकते हैं.. प्लस रिप्लाई करो..

वैसे भी जिस स्टोरी पर अपडेट नै अत ..वह अप्प वेटिंग वेटिंग लिखते रहते हो.. मुझे 3 घंटे लगे अपडेट टाइप करने में.. प्लस लिखे करो.. और रिप्लाई भी दो.. कही ऐसा न हो.. के यह स्टोरी भी इन्कम्प्लीट रह जाये.. थैंक्स जो दोस्त साथ दे रहे हैं..
 
अपडेट-24

काफी देर तक रवि , कोमल को यद् कर रोटा रहा , तब ख़ुशी उसके करीब आकर बेथ गई ,

"बस करो अभ , प्लस.."

"हाँ , में ठीक हु.." रवि ने अपनी आँखों को साफ कर बोलै ,

"तुम बहुत अचे इंसान हो , तुम कोमल को दंड कर वापिस लाना होगा.."

"नै ला सकता , उसने वचन लिया था , अगर में उसके सामने आया , तोह वोह जान दे देगी.."

"ओह्ह , लेकिन भगवन पर विश्वास रखो , कोमल तक तुम जरूर पहुँच जाओगे.."

"हम्म , शयद तुम सही कहती हो , ाचा में चलता हु , कही तुम्हारे पिता न ा जाये.." रवि ने उठते हुए बोलै ,

"अपना ख्याल रखना , अपने नंबर भी देते जाना , में कॉल करुँगी तुम.."

"हम्म , नोट कर लो , अगर को मुसीबत हो , तोह फ़ोन कर देना.." रवि ने अपना नंबर ख़ुशी को दे दिया और जाने लगा ,

"रवि , वोह , तुम मिलने ायुगे मुज़से.."

"हाँ , जरूर , कल ायुगा , खुशु ें गार्ड्स को घर बेहज दो , अपनी माँ को विश्वास दिलाओ , के अभ तुम उनकी हर बात मानूगी , कुणाल के बारे में कुछ मत बताना .." रवि इतना बोल वह से चला गया ,

ख़ुशी होंठो पर इक मुस्कान लिए , वापिस बीएड पर लेट गई ,

रवि वापिस अंजू के केबिन में पहुँच गया , अंजू अभी वह नै थी ,

रवि चेयर पर बेथ कुछ सोचने लगा , उफ़ जिंदगी कितनी बेरहम होती है , क्या क्या दिन दिखा रही थी उसे ,

रवि को कुणाल पर बेहद गुस्सा ा रहा था , उसने सोच लिया था , कुणाल को ऐसी मौत देगा , साडी दुनिआ यद् रखेगी ,

कोमल , उफ़ , मेरी गुडिअ ने इतना दर्द सहा , कहा होगी वोह , कैसी होगी ,

रवि बस इक बार कोमल से मिलना चाहता था , चाहे वोह किसी से भी प्यार करती हो , बस इक बार , इक बार कोमल को जी भर कर देखना चाहता था ,

रवि का मन बेचैन था , वोह वह से उठा और हॉस्पिटल से बहार ा गया , उसका मन अशांत था ,

रवि ने गाड़ी में बेथ , गाड़ी डोडा कर इक शराब की शॉप पर रोक दी , रवि ने इक बोतल खरीदी और वापिस गाड़ी में बेथ गया ,

जब मन शांत नै होता , तब इक शराब hi आखरी सहारा बचती है ,

रवि ने बोतल का ढकन खोला और इक hi साँस में आधी बोतल ख़तम कर दी , अभ उसकी आँखों में इक नशा था , अभ उसके मन को कुछ शांति महसूस हो रही थी ,

रवि ने गाड़ी घर की तरफ डोडा दी , और सीधा बेबी के घर पहुँच गया ,

रवि ने बाकि बची शराब की बोतल भी खली कर दी , अभ वोह फुल नशे में था , वोह लड़खड़ाता हुआ मैं गेट के पास पहुँच गया , रवि ने बेल्ल बजे तोह कैटलीन ने दरवाजा खोला ,

अभ दुपहर के 2 बज रहे थे ,

कैटलीन इक बार रवि को देख थोड़ा घबरा सा गई , क्यों की उसने कभी रवि को इतने नशे में नै देखा था ,

रवि बिना उससे बात किये घर के अंदर घुस गया , सामने हॉल में बेबी बैठी हुई थी , जो टीवी देख कर टाइम पास कर रही थी ,

रवि बिना उसकी तरफ देखे , उसके बैडरूम में घुस गया और बीएड पर जाकर लेट गया , बार बार कोमल की यद् उसे सत्ता रही थी , उसके बदन पर लगती लोहे की सलाखे , रवि को ऐसा महसूस करवा रही थी , जैसे उसके बदन पर लग रही हो ,

"तेरी फूल जैसी बहिन के साथ इतना कुछ हुआ , क्यों गया तू घर छोड़ कर , क्यों , तुझे तोह जूही ने सम्बल लिया , मगर , कोमल , उफ़ , कोमल ने इतना दर्द सहा , तुझे कोमल को वापिस लाना है , चाहे वोह तुज़से नफरत करे , चाहे तुझे जलील करे , तुझे कोमल को वापिस लाना है , वोह इस दुनिआ में कही भी हो , तुम उसे वापिस लाना है..." रवि का मन उसे कोमल के प्यार की दलदल में खींचता चला जा रहा था ,

"हाँ में लोग अपनी गुडिअ को , जरूर लोग , कोई ताकत मुझे रोक नै सकती , पर पहले , पहले उस हरामजादे कुणाल को , उसके किये की सजा दूंगा , जैसे जखम उसने मेरी कोमल को दिए , वैसे उसे भी दूंगा.." रवि बेहद गुस्से में अपने अप्प से बोलै ,

वही दूसरी और...

कैटलीन दरवाजा बंद कर बेबी के पास बेथ गई , और बोली ,

"रवि कुछ परेशान लगता है मुझे.."

"हाँ , में बात करती हु.." बेबी ने सोफे से उठते हुए बोलै ,

"हाँ , में भी यही कहने वाली थी.." काट ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,

बेबी ने मुस्करा कर कैटलीन की तरफ देखा और फिर रवि के पास चली गई ,

बेबी जब रूम में घुसी तब उसने देखा , रवि सीधा लेता चाट पर घूम रहे पंखे को घर रहा था ,

बेबी अग्गे बढ़ उसके साथ बेथ गई ,

बेबी समाज चुकी थी , रवि इस वख्त दर्द में है , बेबी कुछ देर रवि के पास बैठी उसे देखती रही ,

"बाबू क्या हुआ , क्यों परेशान हो तुम.." बेबी ने अपने हाथ रवि के हाथ पर रखते हुए बोलै ,

"जूही , क्या तुम्हारे पास शराब है , अगर है तोह लेकर दो.." रवि ने वैसे hi पंखे को घूरते हुए बोलै ,

"पर बाबू , तुमने पहले hi बहुत पी राखी है ."

"जूही , जितना बोलै उतना करो , वार्ना में जा रहा हु , किसी बार में.." रवि ने उठते हुए बोलै ,

रवि की आँखें नशे में बेहद लाल हो चुकी थी ,

"लती हु.." बेबी थोड़ा उदास आवाज़ में बोली , और कैटलीन से इक बोतल ले आयी , शयद दोनों कभी कभी ड्रिंक करती होंगी ,

"यह लो , रुको , में पानी और कुछ खाने को लती हु.." बेबी ने थोड़ा चिंता में बोलै ,

"रहने दो.." इतना बोल रवि ने बोतल का ढकन खोल , पूरी बोतल आधे से जायदा खली कर दी ,

"पागल हो गए हो तुम , क्या बात है , क्यों कर रहे हो यह सब.." बेबी ने रवि के हाथिओं से बोतल छींटे हुए बोलै , उसकी आँखें नाम थी ,

"जूही मुझे कुणाल को मरना है , वोह भी जल्द से जल्द ..." रवि ने वैसे hi बीएड पर लेटते हुए बोलै ,

"पर ऐसे नशे में बह कर , तुम कैसे मरोगे उसे , में और काट , हम तीनो मिलकर उसे मरेंगे , लेकिन ऐसी हालत में रहोगे तोह कैसे मर पाओगे उसे..." बेबी ने नाम आँखों से बोलै ,

"जूही , इक लिस्ट त्यार करो , जितने भी डॉन हैं , जितने भी क्रिमिनल्स हैं , ड्रग्स डीलर्स, बलात्कार करने वाले , जो जो भी बुरे लोग हैं , सबकी लिस्ट त्यार करो , उन सब को ख़तम करना है मुझे , मुझे कल तक लिस्ट चाहये.." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"हम्म , कर दूंगी , लेकिन तुम मुझे और कैटलीन को अपने साथ रखोगे , हर मिशन पर , वादा करो पहले..."

"लेकिन अगर तुम दोनों में से किसी इक को भी कुछ हुआ तोह , कैसे जी पाओगे तुम या कैटलीन.. " रवि ने नशे में धुत बेबी की आँखों में घूरते हुए बोलै ,

"में कुछ नै सुन्ना चाहती , रवि हम दोनों ने जिंदगी भर बस , मासूम लोग को मारा है , प्लस , बस यह ाचा काम कर लेने दो , में वादा करती हु , हम दोनों तुम्हारी हर बात मानेगी , प्लस , हाँ बोल दो.." बेबी ने रवि के सीने से लगते हुए बोलै ,

"ठीक है , हम तीनो इक सीक्रेट टीम त्यार करेंगे , और उन बुरे लोगो को चुन चुन कर मरेंगे , इस पोरे शहर को , बुराई से मुकत करना है हमें , फिर जब मेरी कोमल वापिस आएगी , उसे मुझ पर गर्व महसूस होगा.." रवि ने नाम आँखों से बोलै ,

"में आखरी साँस तक तुम्हारा साथ दूंगी , जब तक मेरी सांसे चल रही हैं.." बेबी ने अग्गे बढ़कर रवि के होंठो को थोड़ा सा चुम लिया ,

"मत करो बेबी , में खुद को रोक नै पाउगा.." रवि ने वैसे hi सोचु में दुबे हुए बोलै , अज्ज उसे कोमल की बेइंतहा कमी महसूस हो रही थी ,

"तुम प्यार की जरुरत है इस वख्त , और मुझे भी.." बेबी ने शरमाते हुए बोलै ,

"बेबी में अज्ज शांत नै हु , में बहुत दर्द में हु , कल प्यार करुगा तुमसे , प्लस.." रवि ने बेबी को अपने साथ लिटाते हुए बोलै ,

"ओह्ह , कोई बात नै , तुम सो जाओ , तुम्हारा मन शांत हो जायेगा.." बेबी प्यार से रवि के गले लगते हुए बोली , बेबी प्यार से रवि के सीने पर हाथ फिरने लगी ,

"उफ़ मुझे लगता है , बेबी को प्यार की जरुरत है , यह भी तड़फ रही होगी , में तोह दर्द में हु , लेकिन अपनी जूही की हर ीचा पूरी करुगा , में बेबी को प्यार करुगा , अभी के अभी.." रवि ने अपने मन में बोलै , और अपनी नशे से धुत आँखों को खोल दिया ,

रवि अभी उठा hi था के उसका फ़ोन बज उठा , रवि ने नंबर देखा तोह ख़ुशी का था ,

"हाँ , खुशु बोलो.."

"रवि तुम प्लस जल्दी ा जाओ , पिता जी मिलने ए थे , वोह बोल रहे थे , अज्ज रत को कुणाल मेरे पास रुकेगा , प्लस , तुम ा जाओ , वोह , वोह फिर मुझे मरेगा..." ख़ुशी ने रट हुए बोलै ,

"में अभी अत हु , कोई न कोई रास्ता निकल लूंगा .." रवि ने बीएड से उठते हुए बोलै , रवि फुल नशे में था , उसका सर घूम रहा था ,

"जल्दी एना रवि , bye.." ख़ुशी ने रट हुए फ़ोन कट कर दिया ,

रवि जाने hi लगा था , बेबी ने उसका हाथ पकड़ लिया ,

"वोह , वोह बेबी , ख़ुशी की जान को खतरा है , मुझे जाना होगा.."

"में भी तुम्हारे साथ चलुगी.." बेबी ने उठते हुए बोलै ,

"रहने दो.."

"अपनी हालत देखि है , गाड़ी चला पाओगे , चलो जल्दी.." बेबी ने रूम से बहार जाते हुए बोलै , बेबी ने कैटलीन को सब समझा दिया , कैटलीन ने भी हाँ बोल दी , अभ बेबी निश्चिन्त थी , क्यों की कैटलीन, फर्जी को सम्बल लेती ,

रवि लड़खड़ाता हुआ रूम से बहार आया , उसने देखा कैटलीन उसे अजीब नज़रिओं से घर रही थी ,

बेबी उससे कुछ बात कर रही थी , लेकिन कैटलीन की काली खूबसूरत आँखें बस रवि की आँखों से मिली हुई थी , वोह काफी देर इक तक लगातार रवि की आँखों में घूरती रही ,

फिर बेबी घर से बहार चली गई , रवि धीरे धीरे चलता हुआ कैटलीन के पास पहुँच गया , उसे कुछ होश नै था , दो बोतल शराब की पी थी ,

कैटलीन , रवि को अपने इतना करीब पाकर थोड़ा चौंक सा गई , रवि की गरम सांसे उसके चेहरे पर पढ़ रही थी , और रवि के होंठ उसके होंठो से कुछ hi दूर थे ,

इक अजीब सी बेताबी कैटलीन की राग राग में दौड रही थी , उसके गुलाबी होंठ कम्प रहे थे , और सांसे तेज़ तेज़ चल रही थी , उसे पता hi न लगा , कब उसने अपने होंठ रवि के प्यासे होंठो पर रख दिए ,

रवि के होंठो की गर्मी ने कैटलीन को अंदर तक पिग्ला दिया , और वोह रवि के होंठो को चूमने लगी , रवि ने जैसे hi कैटलीन के गुलाबी होंठ अपने होंठो पर महसूस किये , वोह मदहोश होकर कैटलीन के होंठो को चूसने लगा ,

कैटलीन के कुंवारे होंठ अज्ज पहली बार किसी ने चूमे थे , और वोह भी रवि ने , उसकी जान के ासीहक ने , उसके बदन की हर राग राग में इक अजीब सा नशा च रहा था , जैसे hi दोनों अलग हुए , काट ने रवि को ढाका दिया और भाग कर रूम में घुस गई , रवि वही खड़ा कैटलीन के नरम गुलाबी होंठो की तपश अपने होंठो पर महसूस करता रहा ,

कैटलीन शर्माती हुई बीएड पर लेट गई , अज्ज जिंदगी में पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठो को चूमा था , उसकी उतेज़ना सिखेर पर थी ,

रवि बेसुध सी हालत में घर से बहार ा गया , यहाँ बेबी ड्राइव सीट पर बैठी उसका hi इंतज़ार कर रही थी ,

रवि लड़खड़ाते कदमो से गाड़ी के पास पहुंचा और गाड़ी में बेथ गया , उसने देखा , बेबी के होंठो पर इक मुस्कान थी , पर क्यों थी , यह रवि को नै पता था ,

गाड़ी में न रवि कुछ बोलै और न hi बेबी , आधे घंटे में दोनों हॉस्पिटल पहुँच चुके थे ,

फिर बेबी , रवि को सहारा देकर हॉस्पिटल के अंदर ले आयी ,

"रवि कहा जाना है.."

"अंजू के पास.." रवि ने बसूरत हालत में बोलै ,

बेबी , पहले dr.anju का केबिन देख चुकी थी , फिर बेबी , रवि को लिफ्ट के जरिये dr.anju के केबिन तक ले गई ,

लेकिन यह बात अलग थी , रवि पर किसी की नज़र पढ़ चुकी थी , और उसकी आँखें अग्ग उगल रही थी , यह और कोई नै कुणाल था ,

कुणाल , ख़ुशी के पास आया था ,

कुणाल भी सेड्यां चढ़ फर्स्ट फ्लोर पर पहुँच गया , कुणाल ने चुप कर , बेबी और रवि को इक रूम में घुसते देखा ,

जब रवि और बेबी उस रूम में घुस गए , तब कुणाल ने उस रूम के पास पहुँच कर देखा , यह रूम dr.anju का था ,

"अभ तू नै बचेगा सेल.." कुणाल बेहद गुस्से में अपने मन में बोलै और वापिस निचे चला गया , वोह निचे जाकर अपने अद्मयों से कुछ बात कर रहा था ,

बेबी ने अंदर घुस रवि को इक चेयर पर बिठा दिया और उसके पास hi बेथ गई , कुछ देर बाद रवि बोलै ,

"बेबी तुम अपना चेहरा धक् कर निचे जाओ , और जिस रूम के सामने दो आदमी पहरा दे रहे होंगे , उनसे दूर बेथ कर , उन पर नज़र रखो , अगर कुणाल ए तोह मुझे बता देना.." रवि ने बेसुध हालत में बोलै ,

"हम्म , तुम यही रहना , में जाती हु.." बेबी इतना बोल वह से बहार चली गई ,

वही दूसरी और कुणाल भी अपने साथ 4 अद्मयों को लेकर लिफ्ट में घुस गया , बेबी लिफ्ट के ऊपर ऐनी का इंतज़ार करने लगी , पर पता नै उसके मन में क्या आया , वोह सेडीईओं से उतर निचे चली गई ,

वही कुणाल अपने अद्मयों के साथ dr.anju के केबिन में घुस गया , और रूम को अंदर से लॉक कर दिया ,

बेबी निचे आकर ख़ुशी के रूम से कुछ दूर बेथ गई , और उस रूम पर नज़र रखने लगी , उसे नै पता था , के रवि की जान को खतरा है , पर बात और थी , कुणाल की जान को खतरा था , क्यों की रवि तोह वैम्पायर था , पर कुणाल इक इंसान था , या फिर कुछ और ,

वही दूसरी और कुणाल अपने अद्मयों के साथ रवि के पीछे खड़ा था , रवि ने कोमल की यद् में अज्ज बेइंतहा शराब पी राखी थी , वोह बेसुध सा हुआ पढ़ा था ,

"रवीए , देखो कोण आया है तुमसे मिलने.." कुणाल ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

रवि ने चेयर पर बैठे hi नज़रियन घुमा कर देखा , उफ़ इस पल का नजाने रवि को कब का इंतज़ार था , जिसने उसकी कोमल को इतना दर्द दिया था , वोह अज्ज उसके सामने खड़ा था ,

रवि उस लकड़ी के बड़े से टेबल का सहारा लेकर खड़ा हो गया ,

"सेल , तुझे सुबह से यद् कर रहा था , कब तू मेरे सामने ए , और में तेरा सीना चीयर कर , तेरे दो टुकड़े कर सकू.." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"ः , यह सपना तोह तू कई सालो से देख रहा है , कभी पूरा हुआ , तुझे मर कर , तेरी बहिन कोमल को , अपनी रखेल बना कर रखुगा..." कुणाल ने अभी इतना hi बोलै था , रवि ने भाग कर उसके पेट में अपना कांडा जड़ दिया , और कुणाल अपने अद्मयों के साथ निचे गिर गया ,

रवि बेसुध सी हालत में घुटनो के बल कुणाल के ऊपर बेथ गया और उसके चेहरे पर मुक्के जड़ने लगा ,

"सेल मेरी बहिन को छुआ भी कैसे तूने , मेरी बहिन की पीठ जलाई तूने , कुत्ते , में जान से मर दूंगा तुझे .." रवि पागल सा हुआ कुणाल के चेहरे पर मुक्के जड़ता गया , रवि के मुक्के कुणाल के नक् , उसकी गालो , उसके होंठो पर पढ़ते गए ,

तभी कुणाल के दो अद्मयों ने रवि को कण्डु से पकड़ पीछे गिरा दिया ,

रवि फर्श पर पीठ के बल गिर गया ,

कुणाल के चारो आदमी रवि को लत्तो से मरने लगे , इक तोह रवि नशे में चुर्र था , वोह जब भी उठने की कोससिह करता , वोह लोग फिर से लत्त जड़ उसे गिरा देते ,

इतनी देर में कुणाल खड़ा हो चूका था , उसने अपने होंठो से बहते खून को अपने हाथ से साफ किया और चीखता हुआ बोलै ,

"खड़ा करो इस हरामजादे को.."

कुणाल के अद्मयों ने रवि को बहु से पकड़ खड़ा कर दिया ,

"अभ बोल बस , हाँ , मने hi तेरी खूबसूरत बहिन की पीठ जलाई थी , लोहे की गरम सलाखों से , मगर वोह कुटिया ज़ुकी नै , पता नै किस मिटटी की बानी थी , अह्ह्ह , जनता है , उसका रसीला बदन , कितना कामुक था , उफ़ जब मने उसके होंठो को चूसा , उम्म्म्म अह्ह्ह्हह , इतना लाजवाब टास्ते, क्या बताऊ , बस इक बार मुज़से चुद जाती तोह क्या हो जाता , मगर वोह कुटिया, बस भइआ, भइआ , चिलाती रही , और मेरी कुटिया बहिन के कारन , तेरी बहिन बच गई , नै तोह माँ कसम , उसे इतना छोड़ता , इतना छोड़ता , के जिंदगी भर वोह चल न पति..." कुणाल ने रवि की आँखों में देखते हुए बोलै ,

"तू बच नै सकता , में तुझे ऐसी मौत दूंगा , जो तूने जिंदगी में कभी न सुनी होगी , न देखि होगी.." रवि ने बेइंतहा गुस्से में बोलै , उसकी ताकत , उसकी बहिन थी , चाहे रिंग उसका साथ नै दे रही थी , उसने रवि को जकड रखा था , वोह उसे वैम्पायर भी नै बनने दे रही थी , लेकिन कोमल से प्यार hi उसे इतना था , के रवि गुस्से से पागल होता जा रहा था ,

"ेहठ तेरी तोह..." कुणाल गुस्से से रवि की तरफ बढ़ा ,

कुणाल ने रवि के चेहरे पर मुक्को की बरसात कर दी , फिर कुणाल उसके पेट में मुक्के जड़ने लगा , कुणाल ने अपने अद्मयों को पीछे हटने का बोल दिया ,

रवि अभी लड़खड़ाते हुए खड़ा था ,

कुणाल ने गुस्से से पीछे हटा और भाग कर इक अपनी दोनों तंग को हवा में उठा कर रवि के सीने में जड़ दिया (ड्राप किक)

रवि डबल किक लगते hi , पीछे टेबल पर जा गिरा , कुणाल ने भाग कर , चेयर पर पेअर रख , रवि को ऊपर छलांग लगा दी , रवि जो टेबल पर लेता हुआ था , कुणाल के उसके ऊपर गिरते hi , "खाड्डाआक्ककककक" की आवाज़ करता टेबल टूट कर चकना चूर हो गया ,

कुणाल को उसके अद्मयों ने खड़ा किया , रवि टूटे टेबल पर बेसुध पढ़ा हुआ था ,

"साला दो मिंट टिक नै पाया , मुझे मरेगा , सेल में ख़ुशी को लेकर जा रहा हु , अगर हिमेट है तोह रोक ले.." कुणाल इतना बोल वह से जाने लगा ,

"ः , बस इतनी ताकत है तुज़मे , मने सोचा और मरेगा .." रवि घुटनो के बल खड़ा होता हुआ बोलै , उसके होंठो से खून पानी की तरह बह रहा था , लम्बे काळा बाल , और चेहरे पर लतपन खून से , रवि इक शतिआं लग रहा था ,

"ेहठ मर दो ऐसे , जिन्दा मत छोड़ना.." कुणाल ने गुस्से में अपने अद्मयों से बोलै ,

"अभ में तुझे दिखाऊगा , शतिआं का रूप कैसा होता है , भाग कुणाल , भाग , अज्ज तेरी जिंदगी का आखरी दिन है ः.." रवि हस्ते हुए बोलै , उसकी हस्सी किसी शतिआं की लग रही थी ,

रवि इंसान था , अगर वोह वैम्पायर बना होता , तोह अभ तक सब की लाशे बिषा देता , पर रिंग उसे कमज़ोर कर रही थी , उसकी ताकत को दबा रही थी , पर कोमल का सच्चा और पवितर प्यार , रवि को बेइंतहा ताकत दे रहा था ,

कैसे जाने देता वोह कुणाल को , जिसने उसकी आत्मा , उसकी जान , उसकी मासूम कोमल , को इतना तडफाया , इतना रुलाया , उसकी नरम चमड़ी तक जला दी , वोह आशिक़ जरूर था , पर उससे पहले वोह कोमल का प्यारा भाई था...

"कुणाल , तूने रावण देखा है , ः , जो अपनी बहिन के लिए भगवन से भी लड़ गया था , तू तोह इक मामूली शतिआं है , तूने मेरी बहिन को नै , मुझे चोट पहुंची थी , तूने मेरी बहिन की नै , मेरी पीठ जलाई थी , जितने असनु मेरी बहिन की आँखों से निकले , उतने बूंदे तेरे खून की इक इक कटरा करके निकलूंगा , वार्ना में अपनी कोमल का भाई नै.." रवि गुस्से से चीखता खड़ा हो गया , उसकी आँखों की तेज़ तपश , कुणाल बर्दाश्त न कर पाया , वोह अंदर तक कम्प गया था.. जब के उसके आदमी रवि को घेर कर खड़े थे , पर रवि की आँखें अपने शिकार पर जमी हुई थी , उसका शिकार बस इक था , जिसका नाम था.. कुणाल...

तो बे कुनिटेड....
 
अपडेट-25

अभ अग्गे...

कुणाल के आदमी रवि को घेर कर खड़े हुए थे , लेकिन रवि की नज़र बस कुणाल पर थी , कोमल का खूबसूरत मासूम चेहरा , रवि की आँखों के सामने घूम रहा था ,

उसकी दिलकश मुस्कान , उसकी नली नली आँखें , उसके गुलाबी नरम होंठ , और िका इक उसका दर्द में डूबा चेहरा दिखाई दिया , वोह बेइंतहा रो रही थी , रवि का गुस्सा और भी बढ़ गया ,

इक आदमी ने रवि के चेहरे पर पंच मरना चाहा , पर रवि ने उसका हाथ रस्ते में hi कलाई से पकड़ लिया ,

"अह्ह्ह्हह्हह..." इक तेज़ चीख के साथ रवि ने अपने दूसरे हाथ का उल्टा थपड उस आदमी के मोह पर जड़ दिया , थपड पड़ते hi वोह आदमी इक तरफ गिर गया , उसका निचला होंठ फैट चूका था ,

रवि ने दूसरे आदमी के पेट में इक लत्त जड़ दी , वोह दर्द से कहरहटा पीछे की तरफ हो गया ,

तब तक रवि ने बाकि बचे दो अद्मयों पर अटैक कर दिया , रवि ने इक आदमी को उसके गले से पकड़ ऊपर उठा दिया , उसके पेअर हवा में जूल रहे थे ,

रवि ने उसे दोनों हाथिओं से उठाये hi पीछे धकेलते हुए दिवार के साथ मर दिया , जैसे hi वोह आदमी निचे गिरा , रवि ने उसके मोह पर मुक्को की बरसात कर दी ,

उस आदमी का चेहरा , उसके गाल , ताबड़तोड़ पढ़ते मुक्को से फैट चुके थे ,

"खाडाकककक..." इक तेज़ आवाज़ आयी , जो इक आदमी बचा था , उसने टूटे हुए टेबल की इक मोती लकड़ी रवि की पीठ पर जोर से मर दी , वोह लकड़ी जो पहले टेबल को सहारा दिए हुए थी , अभी रवि की पीठ से टकरा टूट चुकी थी ,

रवि इस वॉर से इक तरफ गिर गया , जब उस आदमी ने बची हुई लकड़ी का वॉर रवि के चेहरे पर करना चाहा , रवि ने उसका हाथ रस्ते में hi रोक लिया ,

रवि उसका हाथ पकड़े हुए खड़ा हुआ , खून से सना रवि का चेहरा , वोह बेहद डरावना परतीत हो रहा था ,

"आनननननहहह.." रवि ने गुस्से से छीलते हुए इक जोरदार मुक्का उस आदमी के मोह पर जड़ दिया , रवि का पंच उसके दांतो और नक् के बेचू बेच पढ़ा था ,

"अह्हह्ह्ह्ह..." इक दर्द भरी आवाज़ के साथ वोह आदमी निचे गिर गया , उसके दन्त और नक् की हड्डी टूट चुकी थी ,

दो आदमी अभी भी बचे हुए थे ,

रवि भाग कर उनके पास पहुंचा, और उनमे से इक आदमी के पेट में भागते हुए जोरदार घुटना जड़ दिया , जब वोह थोड़ा निचे ज़ुका , रवि ने इक जोरदार घुटने का वॉर उसके मोह पर कर दिया , उसके मोह से खून की पतली धार निकल पढ़ी ,

रवि अभी उस आदमी को मर कर हटा hi था , के किसी ने उसे पीछे से बहु में जकड लिया , उसकी पकड़ बेहद टाइट थी , यह और कोई नै कुणाल था ,

"अह्ह्ह्हह्हह साली अननननहहहह.." कुणाल गुस्से से चीखता रवि की कमर को अपनी बहु ने कसता चला रहा था ,

रवि को बेहद दर्द हो रहा था , जब कुणाल , रवि को अपनी बहु में जकड़ता चला जा रहा था ,

तभी रवि ने अपनी कोहनी का जबरदस्त वॉर कुणाल के चेहरे पर कर दिया , लेकिन कुणाल ने अपनी पकड़ ढेली न की ,

कुणाल ने रवि को कमर से जकड़े ऊपर उठा लिया , और घुमा कर उसे दिवार के साथ मर दिया , रवि के कंडे दिवार के साथ जा टकराये ,

"अह्ह्ह्हह..." रवि को थोड़ा दर्द हुआ , फिर रवि ने अपनी कोहनी के कई वॉर कुणाल के मोह पर किये ,

कुणाल के होंठो से खून बहने लगा , उसकी पकड़ जब ढेली होने लगी ,

"अह्ह्ह्हह्हह ..." कुणाल ने जोर से चीखते हुए रवि को कमर उसे उठाये hi पेट के बल जमीन पर गिरा दिया ,

कुणाल , रवि की पीठ पर दोनों तरफ घुटने कर बेथ , रवि की गर्दन , उसके सार पर मुक्के जड़ने लगा ,

"सेल , मर दूंगा तुझे , तेरी पूरी फॅमिली को , अह्ह्ह्हह किसी को नै छोड़ूगा..." कुणाल गुस्से में चीखता , रवि को मरता गया ,

"आआस्स्स्शह्ह्ह्ह..." रवि ने अपने हाथिओं को जमीन पर टिकाये ऊपर की तरफ उठ गया , और इक डैम से घूम गया , जिस कारन कुणाल फर्श पर गिर गया ,

रवि लड़खड़ाते हुए खड़ा हुआ , कुणाल भी उठ चूका था , दोनों की हालत बुरी थी ,

कुणाल ने अग्गे बढ़ रवि के चेहरे पर इक मुक्का जड़ दिया , रवि ने भी इक जोरदार मुक्का कुणाल के चेहरे पर जड़ दिया ,

"आह्ह्ह्हह..." फिर दोनों गुस्से में इक दूसरे के चेहरे पर मुक्के जड़ने लगे , पता नै कितने पंच दोनों ने इक दूसरे को मरे होंगे ,

दोनों हाफने लगे थे , दोनों के चेहरे खून से लथपथ हो चुके थे और लाल रंग में नहाये हुए थे ,

अभ की बार जब कुणाल ने रवि के चेहरे पर पंच मारा , रवि निचे झुक गया , "आआआआआ..." रवि ने जोर से चीखते हुए दो तीन मुक्के कुणाल के पेट में जड़ दिए , कुणाल पीछे की तरफ गिरता हुआ , घुटनो के बल बेथ गया ,

तभी रवि लड़खड़ाते खड़े हुआ , उसका बदन अभ उसका साथ नै दे रहा था , पर दिल में जो गुस्सा था , वोह उसे हार नै मैंने दे रहा था ,

" तेरा आखरी वख्त ा गया हरामजादे..." रवि ने इतना बोलै और थोड़ा पीछे हैट , तेज़ी से भागते हुए , अपने घुटने का जोरदार वॉर कुणाल के चेहरे पर कर दिया ,

कुणाल दर्द से कहरहटा हुआ पीछे की तरफ गिर गया , रवि भी अपने घुटनो पर दोनों हाथ रखे ज़ुका हुआ हाफने लगा , उसका पूरा बदन दर्द से चूर चूर हो रहा था ,

अभी रवि सीधा खड़ा hi हुआ था , इक "खाडाककककक ..." की आवाज़ गूंज गई , कुणाल के इक आदमी ने इक कांच की बोतल , जिसमे दवाई भरी हुई थी , पीछे से रवि के सर पर फोड़ दी ,

रवि इक तरफ गिर गया , उस आदमी ने कुणाल को सहारा देकर खड़ा किया , और उसे वह से लेजाने लगा ,

रवि ने अध् खुली आँखों से कुणाल को जाते देखा , तोह रवि अपनी बची खुची हिमेट जूता खड़ा हुआ और दर्द से कहरहटा हुए उनके पीछे चलने लगा ,

"आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह.." रवि दर्द से हफ्ता हुआ कहरः रहा था , उसने देखा , वोह आदमी सेडीईओं से कुणाल को निचे ले जा रहा था ,

अभी उन दोनों ने सेडीईओं पर पेअर hi रखा था ,

"अह्ह्ह्हह..." रवि गुस्से से चीखता हुआ भगा , और दोनों को पीछे से ढाका देता , उनके साथ hi गिर गया ,

तीनो सेडीईओं पर गिरते hi , निचे की तरफ ऐनी लगे , यहाँ सेडीईओं का टर्न पढता था , उस दिवार के साथ तीनो टकरा गए ,

तीनो हाफ रहे थे , कुणाल का आदमी जिसका सार दिवार से टकरा गया , वोह वही बेहोश हो गया , अभ रवि और कुणाल hi दर्द भरी सांसे ले रहे थे ,

"ाअम्म्म ाअहंमम.." रवि ने दर्द से हफ्ते हुए , अपने अप्प को घुटनो के बल खड़ा किया , कुणाल भी घुटनो के बल बैठा हुआ था ,

रवि ने वैसे बैठे बैठे hi इक जोरदार मुक्का कुणाल के मोह पर जड़ दिया ,

"अह्हह्हंन्न इतनी जल्दी नै उम्मंहहह जाने दूंगा सेल .." रवि ने इतना बोल हफ्ते हुए इक और मुक्का कुणाल के गालो पर जड़ दिया ,

कुणाल ने बेसुध हालत में रवि को देखा , और उसे दोनों हाथिओं से ढाका देकर पीछे गिरा दिया ,

कुणाल दिवार का सहारा लेकर अपनी तंग पर खड़ा हुआ , और सेड्यां उतर निचे जाने लगा ,

"कुणाललललल.." रवि ने जोर से चीखते हुए अपने कंडे का वॉर कुणाल के पेट में कर दिया (स्पीयर) , कंडे का वॉर और रवि की स्पीड से , कुणाल सेडीईओं से उड़ता हुआ लास्ट सेडीईओं पर जा गिरा ,

"ahhhhhhhhhhhh शहहहहह..." कुणाल की पीठ जोर से लास्ट वाली सेडीईओं पर जा लगी , रवि का हाथ कुणाल की पीठ के निचे था , रवि को भी बेहद दर्द हुआ ,

उन दोनों को लड़ते देख अभ वह कई लोग जमा हो गए थे , तब तक बेबी भी उनके पास पहुँच गई थी ,

"रवीए , रावी.." बेबी जोर से चीखती हुई रवि के पास पहुँच गई , और उसे सहारा देकर खड़ा करने लगी , रवि के हाथ की कलाई पर बेहद चोट आयी थी ,

कुणाल तोह दर्द से बेसुध हो चूका था , तभी जो दो गार्ड्स ख़ुशी के रूम के अग्गे पहरा दे रहे , वोह भी ा गए ,

उन दोनों ने कुणाल को अपने कण्डु का सहरा देकर खड़ा किया , और उसे वह से लेजाने लगे ,

" अह्ह्ह्हह.." रवि ने बेबी को इक तरफ ढाका दिया और भाग कर पीछे से उन तीनो पर छलांग लगा दी , कुणाल फिर से निचे गिर गया ,

रवि उसके पेट पर बेथ उसके मोह पर ताबड़तोड़ घुसे जड़ने लगा , उन दोनों गार्ड्स ने रवि को कण्डु से पकड़ पीछे गिरा दिया ,

इक डॉक्टर ने पुलिस को फ़ोन कर दिया , बेबी ने उसे पुलिस को फ़ोन लगते सुन लिया था ,

रवि लड़खड़ाता खड़ा हुआ , और उन दोनों गार्ड्स को मरने लगा ,

इक गार्ड ने रवि को मरना चाहा , पर रवि ने उसका हाथ पकड़ , अपने कंडे से निचे जातक दिया , हाथ की हड्डी कलाई से टूट गई , वोह दर्द से तडफता हुआ इक तरफ गिर गया ,

अभी रवि उस गार्ड को मर पलटा hi था , इक जोरदार पंच रवि के चेहरे पर ा लगा ,

तभी बेबी ने भागते हुए इक फ्लाइंग किक उसके चेहरे पर जड़ दी , और इक करते का जोरदार वॉर उस गार्ड की गर्दन पर कर दिया ,

"अह्ह्ह्हह.." तेज़ दर्द से चीखता वोह गार्ड फर्श पर गिर गया , कुणाल बेसुध हालत में खड़ा हुआ और अपने पैरो को घसीटा हुआ हॉस्पिटल के बहार जाने लगा ,

तब तक बेबी ने रवि को फिर से सहारा देकर खड़ा कर लिया था ,

"रवि , रुको , तुम बहुत जख्मी हो , रुक जाओ.." बेबी , रवि को रोकने की कोससिह करती बोली , क्यों की रवि बेहद जख्मी था , उसका चेहरा दोनों तरफ से पूरा चिल्ला हुआ था , सार पर भी छोटे लगी थी , और खून बह रहे थे , ढाया हाथ भी कलाई से चीला हुआ था ,

लेकिन रवि अभ भी कुणाल के पीछे जा रहा था , वोह इक तोह शराब के नशे में था , ऊपर से हफ्ता हुआ , धीरे धीरे कुणाल के पीछे जा रहा था ,

बेबी हर नाकाम कोससिह कर रही थी , पर रवि बार बार उसे ढाका देकर दूर कर रहा था ,

हॉस्पिटल से बहार आकर रवि ने देखा , कुणाल गाड़ी में बेथ चूका था , और उसने गाड़ी स्टार्ट भी कर ली थी ,

"नयी , नयी.." रवि गुस्से में चीखता हुआ अपने अप्प से बोलै , और तेज़ी से लंगड़ाते हुए , हफ्ते हुए अपनी गाड़ी की खिड़की खोल अंदर बेथ गया ,

कुणाल ने गाड़ी हॉस्पिटल से बहार निकल ली थी , रवि ने भी तेज़ी से गाड़ी हॉस्पिटल से बहार निकली और कुणाल की गाड़ी के पीछे लगा दी ,

बेबी ने भाग कर देखा , रवि गाड़ी लेकर कुणाल के पीछे जा चूका था ,

बेबी ने हॉस्पिटल से बहार आकर इक टैक्सी ली , और रवि और कुणाल का पीछा करने लगी ,

कुणाल ने शहर से बहार निकलते hi गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी , वोह मिरर से रवि को देख रहा था , जो उसके पीछे hi ा रहा था ,

दोनों की गाड़यां पूरी स्पीड से अग्गे बढ़ रही थी , दोनों की हालत बेहद बुरी थी , खून से लथपथ दोनों की आँखें हलकी हलकी बंद हो रही थी ,

"अज्ज्ज नै बचेगा तू , मेरी कोमल को रुलाया तूने..." रवि मन hi मन गुस्से में बोलै , और गाड़ी की स्पीड और बढ़ा दी ,

रवि के पीछे hi बेबी ा रही थी , वोह भगवन से दुआ कर रही थी , रवि बच जाये , उसकी आँखें नाम थी ,

" ाहहननहहहह साला , अपना बहिन की तरह जिद्दी है..." कुणाल गुस्से में अपने अप्प से hi बोलै , उसने भी गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी ,

अभ दोनों शहर से कोसु दूर थे , पूरा रोड खली था , वंश जंगल सुरु हो चूका था , कई घुमावदार मोड थे , लेकिन दोनों गाड़ी की स्पीड काम नै कर रहे थे , इक बचना चाहता था , और इक मरना चाहता था ,

िका इक रवि ने गाड़ी की स्पीड फुल कर दी , और कुणाल के बेहद करीब पहुँच गया , कुणाल ने अपनी गाड़ी को थोड़ा धीमा किया , जैसे hi रवि की गाड़ी उसकी गाड़ी के बराबर आयी ,

"ः , यह ले.." कुणाल मुस्कराते हुए बोलै और अपनी गाड़ी इक डैम से रवि की गाड़ी से भिड़ा दी , रवि की स्पीड काफी थी , उसकी गाड़ी रोड से निचे उतर कच्चे रस्ते में चलने लगी ,

रवि , कुणाल की इस चल पर मुस्करा दिया , रवि ने गाड़ी फिर से रोड पर चढ़ा , कुणाल की गाड़ी को पीछे से थोक दिया , कुणाल अपना बैलेंस खोने लगा ,

तभी कुणाल को सामने से ट्रक अत दिखाई दिया , "अजा कुत्ते , तेरी मौत ा रही है.." कुणाल ने मन hi मन मुस्कराते हुए बोलै ,

कुणाल ने गाड़ी को धीमा कर दिया , तेन की रवि उसके बराबर ा सके , िका इक जब रवि , कुणाल के सामने आया , तब रवि ने ट्रक अत देखा , अभी 100 मेटर का फैसला था ,

रवि ने अपनी गाड़ी की स्पीड फुल कर दी , और कुणाल को ओवरटेक कर दिया , तभी शणणणह्ह्ह की आवाज़ करता ट्रक उनके पास से गुजर गया , रवि के ओवरटेक करते hi कुणाल ने गुस्से में गाड़ी के स्टेरिंग पर हाथ मारा ,

रवि ने कुणाल की गाड़ी से काफी अग्गे जाकर हैंडब्रेके लगा गाड़ी रोड पर घुमा दी , गाड़ी के त्येर रोड पर घिसते चले गए , अभ रवि की गाड़ी का मोह कुणाल की गाड़ी की तरफ था , कुणाल ने भी इक डैम से ब्रेक लगा दी ,

दोनों के बेच बस 100 मेटर का फैसला था , दोनों बार बार रेस पर पेअर दबा रहे थे , गाड़ी के सीलेंसर से निकलता धुँआ , वह के माहौल को कला कर रहा था ,

"अभ या तू नै या में नै , यह मेरी जिंदगी कोमल के नाम .." रवि ने िका इक रेस कर गाड़ी कुणाल की तरफ डोडा दी ,

"यह सब तेरी कुटिया बहिन के लिए.." कुणाल ने गुस्से में बोलै , और उसने भी गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी , दोनों तरफ से तेज़ रफ़्तार थी , शहाईआंत्र की आवाज़ के साथ तेज़ रफ़्तार गाड़यां रोड पर भीकरें पत्तो को ुद्दति हुई इक दूसरे की तरफ बढ़ रही थी ,

जब दोनों आपस में टकराने वाले थे , तभी कुणाल ने दर कर , गाड़ी का स्टेरिंग पूरा इक तरफ मोड़ दिया , रवि ने ऐसा कुछ नै किया , रवि की गाड़ी कुणाल की गाड़ी के पिछले हिस्से पर जा लगी , बहुत काम तकर हुई थी ,

रवि की गाड़ी इक तरफ कुणाल की गाड़ी से लगते hi , रोड पर पलट गई , और गोल गोल घूमती हुई , काफी दूर जाकर गिर गई , गाड़ी की हालत , कबाड़ख़ाने में पढ़ी गाड़ी जैसी हो गई थी , गाड़ी टूट कर चकना चुर्र हो चुकी थी ,

वही जब कुणाल की गाड़ी से रवि की गाड़ी थोड़ी सी टकराई तोह कुणाल अपना बैलेंस खो बैठा , उसकी गाड़ी रोड से निचे उतरती हुई , जंगल में पेड़ू से टकराती हुई , निचे जंगल में गिर गई , क्यों की रोड के इक तरफ ढलान थी , जंगल गहरा था , और फिर कुछ hi पलु बाद इक तेज़ धमाके के साथ कुणाल की गाड़ी जल कर रख हो गई ,

रवि भी बुरी तरह जख्मी हो चूका था , उसकी आँखें भी बंद होती जा रही थी , रवि की गाड़ी से पैट्रॉल बह रहा था , लेकिन रवि से हिला भी नै जा रहा था , गाड़ी के अगले हिस्से में अग्ग लग चुकी थी ,

तभी उसकी किस्मत अछि थी , बेबी वह पहुँच गई ,

"रविइइइइइ..." बेबी जोर से चखी और भाग कर रवि के पास पहुँच गई , रवि का पूरा शरीर जगह जगह से चिल चूका था , उसकी टंगे , हाथ सब चिल चुके थे ,

बेबी ने रवि की सीट बेल्ट निकल उसे बहार की तरफ खींच लिया , और गाड़ी से काफी दूर खींच कर ले गई , तभी जोरदार धमाके के साथ रवि की गाड़ी ब्लास्ट हो गई ,

बेबी जो रवि को खींच रही थी , गाड़ी में धमाका होते hi , रोड पर पीछे की तरफ गिर गई , रवि बेहोश हो चूका था ,

बेबी ने उस टैक्सी ड्राइवर की मदद से रवि को टैक्सी में डाला और टैक्सी वापिस हॉस्पिटल की तरफ डोडा दी , बेबी की आँखों से असनु बह रहे थे ,

रिंग ने अभ तक रवि को वैम्पायर नै बनने दिया था , रवि अभी भी इंसान था , और रिंग शयद रवि को मौत की नंद सुलाना चाहती थी ,

कुछ भी हो , रवि ने कोमल का बदला ले लिया था , उसने अपने सबसे बड़े दुश्मन को अज्ज मौत की नंद सुला दिया था , लेकिन उसकी जिंदगी अभ खतरे में थी ,

हॉस्पिटल काफी दूर था , और उसकी सांसे अभ धीमी धीमी चल रही थी , क्या यह रवि का अंत था , यह रिंग उस पर मेहरबान हो जाती ,

"बाबू होश में ायो , हम हॉस्पिटल पहुँचने वाले है , प्लस , होश में रहना , बाबू..." बेबी रट हुए रवि के चेहरे को हिलती जा रही थी , पर रवि की आँखें बंद हो चुकी थी , खून बहुत बह चूका था , उसकी सांसो की दूर अभ टूट रही थी , अगर रवि रिंग को पहने मर गया तोह शयद सच में उसकी मौत हो जाती , क्या लिखा था वख्त में , कोमल का प्यार या रवि की मौत...

बेबी ने अपना मोबाइल निकला और सीमा को फ़ोन कर दिया , कुछ रिंग्स गई होंगी के सीमा ने फ़ोन पिचकूप कर लिया ,

"हलो , हाँ बेबी बोलो.."

"सीमा देदी , वोह .." फिर बेबी ने रवि और कुणाल की लड़ाई के बारे में सब कुछ बता दिया , सीमा की आँखों से असनु बहने लगे , लेकिन उसने हिमेट नै हरी , वोह बेबी से बोली ,

"बेबी यह बात हम दोनों के बेच रहे , में उसकी बहनो को और दर्द में नै देख सकती , बड़ी मुश्किल से उनके चेहरे पर इक मुस्कान लोटी है , में नै चाहती के वोह फिर से टूट कर भीकर जाये , यह बात किसी और को मत बताना , में अति हु हॉस्पिटल में.." सीमा ने अपनी आँखों से बहते असनु साफ किये , और चेहरे पर इक झूठी मुस्कान लिए , रमा को मार्किट जाने का बोल , हॉस्पिटल की तरफ बढ़ गई ,

बेबी अभ किसी दूसरे हॉस्पिटल में पहुँच चुकी थी , क्यों की अगर वोह उसी हॉस्पिटल में जाती तोह पुलिस रवि को पकड़ लेती , जब वोह ठीक हो जाता तोह , पर बेबी यह नै चाहती थी ,

जैसे hi हॉस्पिटल में रवि का इलाज सुरु हुआ , जो डॉक्टर रवि का इलाज करने आयी , वोह रवि को देख अंदर तक कम्प गई , उसकी आँखों में असनु बह निकले , कोण थी वोह , जो रवि को पहले से जानती थी , क्या रिश्ता था , उसका रवि के साथ ,

बेबी ने सीमा को हॉस्पिटल का एड्रेस बता दिया , वोह िक रूम के बहार बैठी रो रही थी , और अंदर रवि अपनी मौत से जुंग लड़ रहा था ,

अभी 15 मिंट hi हुए थे , रवि को िक में डेल हुए , तभी इक औरत बेबी के पास आयी और बोली ,

"म सॉरी , हम उसे नै बचा सके..." यह बोल वोह डॉक्टर रोने लगी , बेबी तोह शॉकेड हो गई , न तोह वोह रो प् रही थी , और न कुछ सोच प् रही थी ,

तभी सीमा भी वह पहुँच गई , वोह बेबी के पास आकर उसे कण्डु से पकड़ जिज्डोटे हुए उसे रवि के बारे में पूछने लगी , पर बेबी पत्थर सी हो गई थी ,

"बेबी बोलो क्या हुआ रवि को , बोलो न.." सीमा ने रट हुए पूछा , जब बेबी कुछ न बोली तोह सीमा ने दो तीन थपड बेबी को जड़ दिए ,

बेबी जोर जोर से रट हुए सीमा के गले लग गई , " देदी रवि हमें छोड़ कर चला गया..." बेबी की आँखों से बेइंतहा असनु बह रहे थे , सीमा वही बेबी के साथ बेथ गई , उसकी आँखों से असनु बह रहे थे ,

रवि का मर जाना , जैसे उसकी जिंदगी का अंत हो चूका था , रिंग जीत चुकी थी , और कोमल का प्यार हार चूका था ....

तो बे कुनिटेड....
 


अपडेट-26

अभ अग्गे...

[FRIENDS mane update me pics add ki hain.. agar uc browser par na dikhe toh chrome browser se read kar lena...pics ke bina apko update read karne ka maza nai ayega...

Abh Agge...

Seema ne jaise hi baby ke moh se yeh suna , ke ravi mar chuka hai , uski akhon se asnu beh nikale ,

seema vaha se uthi , or icu room me ghus gai , kuch nurses abhi bhi vaha par thi , voh ravi ki dead body ke pas khadi hui thi ,

"hlo mam , app bahar jao.." ik nurse seema ko vaha dekh kar boli ,

"yeh mere pati hain , kya hun enko , yeh aise kyu lete hain.." seema ne rote hue pagalu jaise bolte hue kaha ,

"mam , yeh mar chuke hain , hame enki body ka postmortem karna hai , uske bad hi apko dead body milegi.." voh nurse seema ke karib akar boli ,

"chattaakkk .." seema ne ik kas kar thapad us nurse ko jad diya or gusse me boli ,

"jab tak me na kahu , tab tak mere pati ki body ko chua bhi , toh tum sabki body cheer dungi , samaz gai , nikalo yaha se.." seema ne behad gusse me bola ,

voh nurses gusse me vaha se chali gai , seema agge badkar ravi ke pas hi beth gai , voh ravi ke chehre ko dekh rehi thi , phir ika ik uski nazar ring par padhi , jo tez roshni me chamak rehi thi , jaise voh seema par hass kar uska mazak udda rehi thi ,

seema ne jaise hi ring ko chua , ik tez bijli ka jatka seema ko laga .."aieeeeee maa..." seema dard bhari chekh marti ravi se kafi door jaker gir gai , ring abh lal roshni me chamak rehi thi , jaise use behad gussa tha , seema par ,

"ahhhhh kya karu me , han , pita ji se puchti hu..." seema ne dard bardasht karte man hi man bola , uske dhaye hath ki unglyian jal chuki thi ,

seema ne man hi man kaal ko yad kiya , abh vahi ik matar rasta bacha tha , kaal hi seema ko ik nayi disha dikha sakta tha ,

ravi ke hath se ring utar pana namumkin tha , ya toh ring apni icha se utar jati , ya phir usse ladna padhta ,

seema ke bar bar yad karne se room me ik andhera chaa gya , wakht ruk gya tha , lekin baki insano ke liye ,

ika ik kaal us andhere me apna vajood liye khada ho gya , kala libas , na koi chehra , na koi sharir , bus tha toh ik kala libas , jo usne pehan rakha tha ,

seema , kaal ko apne samne dekh or rone lag gai , lekin kaal ke liye asnu , khushi , dukh , dard , koi bhavna abh mayine nai rakhti thi ,

"pita ji , mere pati , voh , voh mar gye..." seema ne beintha rote hue bola ,

"seema , mane pehle hi kaha tha , komal ka nam ravi ke samne na aye , pehle tum sab ne komal ki yad ravi ko dilvayi , or bad me khushi ne bhi , khushi ne ravi ko voh bataya jo use nai batana tha ..." kaal ne bhari garajti awaz me bola ,

"kya bataya pita ji.." seema ne apne asnu saf kar pucha ,

"komal ki pith kunal ne jalai thi , use behad dard diya tha , use mara tha , yeh bat khushi ko nai batani chahyie thi , lekin khushi ke batane se ravi ke dil me komal ka pyar jinda ho gya , us wakht ravi ko bus komal hi dikhai de rehi thi , lekin ring ravi ko kisi se bant nai sakti , ring ne ravi ko vampire nai banne diya , kunal se ladte hue ravi ki mout ho gai , abh bus ik hi rasta bacha hai.." kaal ne vaise hi shant awaz me bola ,

"pita ji , koi bhi rasta ho , muze bus mere ravi ko bachana hai..." seema ne nam akhon se bola ,

"hmm , janta hu , yad hai , mane tumse bola tha , tume kurbani deni hogi , magar etni jaldi , yeh muze nai pata tha .."

"pita ji koi bat nai , me tyar hu , boliye kya karna hai muze.." seema ne dard bhari awaz me bola ,

"tum janti ho , ring ko koi bhi insan , ya koi bhi vampire, ravi ke hath se nai utar sakta , ring ne ravi ke sharir par kabja jama liya hai , es liye tume es ring se ladna hoga , tume es ring ke ander ghus kar , use harana hoga , magar.." kaal bolte bolte ruk gya ,

"magar kya pita ji , or me ik insan hu , me etni shaktishali ring se kaise lad sakti hu .." seema ne ik bar ravi ki traf dekh , palat kar kaal ki traf dekhte hue bola ,

"ik rasta hai , komal ki voh kitab , main tume deta hu , usse tum ik sapatrishi chakara yantar tyar karo , voh mantra hi tume ring se ladne ki takat dega , kuch shaktyian me tume dunga , ik bat or meri bachi , ring ke ander jane ke bad , tumare pas matar 24 ghante honge , tume ring se ik khas cheez vapis lani hogi..." kaal ne apni bhari awaz me bolte hue kaha ,

"pita ji , es choti si ring me kya kya hoga , matlab , muze kya lana hai..." seema ne ik umeed se pucha ,

"seema yeh ring jitni choti hai , ander se kahi jayda vishal hai , eski ik alag hi dunia hai , eski dunia , behad daravni or byank hai , yeh logu ko alag alag kahanyian sunati hai , unse hamdardi jatati hai , tum janti ho tum hi vaha kyu ja sakti ho .." kaal ne andhere me chalte hue bola ,

"nai pita ji.."

"meri bachi tum bahut paviter ho , lekin agar tumse voh sapatrishi chakar na bana , toh tum kabhi es ring me nai ja paugi , or 24 ghante bad ravi ka poora sharir jal jayega , or uski atma es ring me sama jayegi , phir tum kabhi ravi ko dekh nai paugi..."

"nai , nai , pita ji , me jaugi ring ke ander , me jaugi..." seema ne ravi ke marne ka sun rote hue bola ,

"hmm , janta hu , tum jaugi , meri bachi , ring ke ander jaker tume amrit kund se ik mayavi phool dund kar lana hoga , uska rang nela hoga ..." kaal abhi bol hi reha tha ke seema bech me bol padhi ,

"pita ji , agar vaha aise kai phool hue toh .."

"meri bachi , voh phool nele rang ka toh hoga hi , magar voh bolta bhi hoga , kyu ki voh ik amritmayi phool hai , use laker tume , us phool ko ravi ke mathe ke bechu bech rakhna hoga , uski shakti se ravi thik ho jayega , lekin tumare pas wakht bus 24 ghante ka hoga .." kaal ne seema ko samazate hue bola ,

"pita ji etna wakht bahut hai mere liye , me ravi ko bacha kar hi dam lungi.." seema ne thoda atamvishwas me bola ,

"seema , komal ka voh locket tum pehan lo , ring ke ander voh tume takat dega , vaha tumari raksha karega , ring ke ander vishal danav , murda log , ajeeb ajeeb cheezo se tumara samna hoga , unko hara kar hi , tum amritmayi kund ke pas pahunch paugi .."

"pita ji ring ke ander muze amritmayi kund ka rasta kaise pata chalega..."

"meri bachi , jab sapatrishi chakar tume shakti dega , tab tumari akhon ke samne khud ba khud us kund ka rasta ban jayega , abh der mat karo , yeh lo voh rahasmayi kitab , jo sadyion se ham darindo ki hifazat kar rehi hai.." kaal ne ik kitab seema ko dete hue bola , yeh vahi kitab thi , jo komal aksar padhti rehti thi ,

"shukriya pita ji , apne muz par bahut bada ehsan kiya hai , yeh karaz me kabhi nai chuka paugi , me apne pati or apke bete ko jarur vapis leker ayugi.." seema ne ik vishwas ke sath bola ,

"tume ravi ko vapis lana hoga , nai toh kai jindgyian khatam ho jayegi , agar tum ring ke ander jane ke bad us amritmayi phool ko na la saki , toh tum hamesha hamesha ke liye vahi kaid ho jaugi , ravi mar jayega or uske sath uski behane bhi..." kaal ne thoda dard bhari awaz me bola ,

"nai pita ji , muze apne pyar par vishwas hai , me jarur ayugi vapis.." seema ne us kitab ko apne seene se lagate hue bola ,

"ik bat or agar tum lot ayi or tumne voh phool ravi ke mathe par rakh diya , tab ring kuch wakht ke liye shaktiheen ho jayegi , tab tum yeh locket ravi ko pehna dena , kyu ki komal ki jaan ko abh khatra badh chuka hai..." kaal ne behad dard me bola , abh uski awaz me voh bharipan nai tha ,

"kya , par kaise..." seema , komal ka sunte hi ro padhi ,

"komal danavo ki dharti par kaid hai , us din tume jo sapna aya tha , voh sach tha , komal vaha kaid , apne bhai ko har pal dekhti rehti hai , uski khushi me khush hoti hai , uske dhuki hone se dukhi hoti hai , lekin abh tak komal ko apne bhai ki es halat ka pata chal chuka hoga , voh kamzor ho gai hogi , seema , jitna voh kamzor hogi , uska badan utna hi jalta jayega , ik wakht ayega , jab komal jal kar rakh ho jayegi or dyana azad ho jayegi..."

"ohhh meri komal , pita ji , me use marne nai dungi , ravi ke thik hote hi , me komal ko vapis paker hi rahugi..." seema ne akhon se behte asnu saf karte hue bola ,

"tum es ring me ja rehi ho , me ravi ki behano ko supat awstha me sula dunga , agle 24 ghante bus tumare hain , ravi ko tumare ghar pahuncha deta hu , or baby ki yaddasht mita deta hu , abh tum ghar jao jaldi..." kaal etna bol vaha se gyab ho gya ,

abh room se andhera khatam ho chuka tha , seema ne bed par dekha , abh ravi vaha nai tha ,

seema icu room se bahar ayi tab ik nurse use boli ,

"mam , app icu me kya kar rehi ho , yaha jana mana hai..."

seema us nurse ki bat sun chonk gai , seema ne dekha , baby bhi vaha nai thi , seema samaz gai ke yeh sab kaal ka mayajaal hai ,

seema us kitab ko leker ghar ki traf nikal gai , ajj uske paviter prem ki preksha thi , ajj use jeetna tha , ring se or ravi ki mout se bhi , ajj use yeh sabit karna tha , ik pavitar aurat ke pyar me kitni shakti hoti hai ,

seema ke man me ik vishwas tha , ravi ko vapis pane ka , komal ko vapis pane ka , ravi ki nadan behno ko unka bhai lutane ka , uski bachi rema ko uska pyar lutane ka , seema atam vishwas se bhari hui ghar pahunch gai ,

ghar pahunch kar seema pehle apne room me gai , seema ne dekha , rema bed par leti so rehi thi ,

phir seema shurti or rimi ke room me gai , voh dono bhi bed par chain ki nend so rehi thi , kaal ke mayajaal ne sabko sula diya tha ,

matlab abh seema pori trah se tyar thi , abh wakht a chuka tha , ring ki us kalpanik dunia me jane ka ,

seema jaldi se sedyian chad ravi ke room me pahunch gai , seema ne vaha pahunch pehle komal ka locket le liya ,

"hey bhagwan meri madad karna , yeh sab me apne pyar ke liye kar rehi hu , muze takat dena , kahi me nakam na ho jau..." seema ne dono hath jod shiv bhagwan ko yad kiya , or komal ka voh locket apne gale pehan liya ,

locket pehante hi seema ke badan me tez dard ki lehar uth padhi , kyu ki seema ik aam insan thi ,

locket ki takat seema ka nazuk sharir bardasht nai kar pa reha tha ,

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सीमा के होंठो से खून बहने लगा , उसके दन्त नोकीले हो गए , जैसे वोह भी इक वैम्पायर थी , सीमा की आँखों का रंग गहरा लाल हो चूका था ,

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सीमा का बदन जलने लगा , लॉकेट की ताकत उससे सेहन नै हो रही थी ,

इक पल आया जब सीमा के बदन की पूरी चमड़ी उतर गई , सीमा चीखती हुई , हर दर्द बर्दाश्त करती रही , उसकी आँखें पूरी लाल हो गई ,

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फिर िका इक सीमा जमीन पर गिर गई ,

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उसका चेहरा उसके हाथ के ऊपर था , पूरा बदन जगह जगह से चीला हुआ था , जखम hi जखम हो गए थे सीमा के बदन में ,

"r..rr...raviiii..." सीमा ने दर्द से कहरहते हुए बोलै , और उसकी आँखें बंद हो गई , सीमा ने लॉकेट पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था ,

उसके पवितर प्रेम ने उसे इतनी ताकत दी थी , के कोमल का सदियों पुराण जदए लॉकेट अभ सीमा का गुलाम बन चूका था , अभ सीमा में बेइंतहा शक्ति थी , वोह कुछ भी कर सकती थी ,

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कुछ देर बाद सीमा अपने हाथिओं को जमीन पर टिकाये अपने इक घुटने पर बेथ गई , इस हालत में सीमा का बदन बेहद डरावना परतीत हो रहा था , वोह किसी शतिआं से काम नै लग रही थी ,

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फिर िका इक सीमा उठ कड़ी हुई , सीमा जोर से छिलाई , और काफी देर तक चिलाती गई , उसका चेहरा बेहद खौफनाक था , कोई आम इंसान उसे देखते hi दर कर मर जाता , उसकी आँखें किसी सहेतैनी आत्मा जैसी थी ,

फिर सीमा शांत हो गई , उसकी आँखों का रंग नीला हो गया , उसके चेहरे पर , उसके माथे का मास्स फटा हुआ था , पूरा चेहरा खून से लथपथ हो चूका था ,

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धीरे धीरे सीमा के सरे जखम अपने अप्प भर गए , अभ वोह बेहद खूबसूरत लड़की थी , जो किसी को भी मोहित कर सकती थी ,

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उसका रूप बेहद खूबसूरत था , आँखों में कससिह थी , अभ सीमा शांत हो चुकी थी ,

सीमा ने अपनी मंज़िल का पहला पड़ाव पर कर लिया था , उसने इक इंसान होते हुए भी इस शक्तिशाली जादुई लॉकेट को धारण कर लिया था , जिसे बस अज्ज तक कोमल hi पहन पायी थी ,

सीमा , रवि को यद् कर इक बार मुस्कराई और फिर उसने वोह किताब उठा ली , सीमा उस किताब को पढ़ने लगी , अगर सीमा लॉकेट पहने बिना hi किताब खोलती तोह उसे कुछ भी समाज न अत , क्यों की इस किताब को पढ़ने के लिए यह लॉकेट पहनना जरुरी था ,

भले hi काल ने सीमा को यह बात नै बताई थी , और अचानक से hi सीमा ने पहले लॉकेट धारण कर लिया था ,

वख्त अपनी चल चलता गया , सीमा अभ तक आधी किताब पढ़ चुकी थी , पर उसे सपटरिषि चाकर बनाने का वोह मंत्र नै मिला था , लेकिन वोह सीमा थी , जो जिंदगी में कभी हार नै मानती थी , धीरे धीरे सीमा एकागर्ता के साथ मन लगा पढ़ती गई , और आखिर कर सीमा को सपटरिषि चाकर का मंत्र मिल hi गया ,

सीमा के होंठो पर इक मुस्कान दौड गई , सीमा ने निचे बेथ किताब अपने सामने राखी और उस मंत्र का जप करने लगी , लॉकेट उसे असीम शक्ति दे रहा था ,

सीमा आधे घंटे से जायदा उस सपटरिषि चाकर मंत्र को पढ़ती रही , और आखिर उस किताब से वोह मंत्र इक लाल रौशनी की शकल में उठने लगा , उस चाकर की छवि अभ किताब पर बनने लगी , सीमा यह देख बेहद खुश हो गई ,

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आखिर कर सीमा की म्हणत , उसका विश्वास रंग लाया , और किताब के पनु से इक तेज़ चमकती रौशनी निकलने लगी ,

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जो धीरे धीरे बड़ी होती गई , सीमा उठ कर कड़ी हो गई ,

अभ उसकी नज़रिओं के सामने सपटरिषि चाकर तेज़ रौशनी में चमक रहा था ,

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"ेहठ सपटरिषि चाकर , मैं सीमा तुम हुकम देती हु , मुझे उस वहशी रिंग की काल्पनिक दुनिआ में ले चलो , मुझे रास्ता दिखाओ , तेन की में अपने पति की जान बचा सकू..." सीमा इतना बोल खामोश हो गई , उसने अपनी आँखें बंद कर ली ,

सपटरिषि चाकर जो तेज़ रौशनी में चमक रहा था , वोह तेज़ी से चमकता हुआ , सीमा की तरफ बढ़ने लगा , सीमा के करीब पहुँच उस चाकर का आकर बेहद छोटा हो गया , वोह चाकर सीमा के माथे के बेचू बेच कही अलोप हो गया ,

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कुछ hi देर बाद सीमा का पूरा बदन इक रौशनी में भीकर गया , वोह रौशनी इक छोटी सी लकीर के रूप में रवि के हाथ में पहनी उस रिंग में घुस गई ,

सीमा अपने रवि को बचने के लिए , रिंग की खौफनाक दुनिआ में जा चुकी थी , क्या था उस दुनिआ में , कई रहस्मयी चीज़ो का सामना सीमा करने वाली थी ,

वही दूसरी और काल अपनी उस खौफनाक हवेली में बैठा , कुछ सोच रहा था ,

वोह सीमा को मटर इक इंसान समाज रहा था , लेकिन सीमा ने पहले उस लॉकेट को धारण कर यह दिखा दिया था , जब किसी से प्रेम सच्चा हो , तोह इक आम इंसान कुछ भी कर सकता है ,

सीमा और कोमल , इनकी दीवानगी रवि से इस कदर थी , के दोनों उसके लिए हर पल मर मिटने को त्यार रहती थी , सीमा उस काल्पनिक दुनिआ में पहुँच चुकी थी , यह बात अलग थी , के इक उसकी प्रेमिका थी तोह इक उसकी बहिन...

दूसरी तरफ...

"अपने यह क्या कर दिया , अपने सीमा को उस दुनिआ में बेहज दिया , जानते भी हो , वोह दुनिआ कितनी खौफनाक है , और सीमा वापिस लोट आयी , तोह कई दरिंदे उसके साथ hi बहार ा जायेगे..." इक औरत ने काल से गुस्से में बात करते हुए कहा ,

यह औरत और कोई नै माया थी , काल की मलिका ,

"जनता हु , पर मलिका माया , रवि को बचने का कोई और रास्ता नै बचा था , यही इक मटर आखरी रास्ता था , सीमा इक पवितर प्रेमिका है , उस जैसी लड़की का जनम बहुत काम , सदियों में इक बार होता है , जो अपने प्रेमी के लिए , बिना किसी भावना के मरने को त्यार हो जाये , सीमा इक ानोःकी लड़की है.." काल ने शांत आवाज़ में बोलै , दरअसल उसे सीमा की चिंता हो रही थी ,

"लेकिन अप्प जानते हो , वोह इक आम इंसान है , उस दुनिआ में हम जैसे दरिंदे भी नै बच सकते , वोह , मेरा मतलब , सीमा वह से लोट नै पायेगी , रिंग कितनी कहकर और ताकतवर है , हम जानते हैं , सदियों से उससे लड़ते ा रहे हैं , में कितनी ताकतवर हु , अप्प कितने ताकतवर हो , अगर हम नै जीत पाए , तोह सीमा कैसे जीत पायेगी , मुझे लगता है , हम सब ने मिलकर , रवि के साथ गलत किया है..." माया ने थोड़ा दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"मलिका , कोमल अपनी जिंदगी वापिस चाहती थी , तुम जानती हो , वोह अपने भाई से प्यार करना चाहती थी , उसने कई सालो तक जिद्द की , वोह मेरी बेटी है , उसका बार बार रोना मुज़से बर्दाश्त नै होता था , क्या करता में , जब उसका भाई मर गया , तब भी उसने जिद्द की , उसे वैम्पायर बनाने की , में अपनी बेटी के प्यार में मज़बूर हो गया था , यह कोमल की जिद्द थी , वोह इंसान बनना चाहती थी , इंसान बन कर , अपने भाई से प्रेम करना चाहती थी , ऐसी लिए उसने रिंग को अपने भाई के लिए चुना , उसने भी क़ुरबानी दी है , मने उसे पहले hi कहा था , रिंग hi अंतिम फैसला करेगी , रवि और कोमल मिल पाएंगे या नै..." काल ने दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"ओह्ह , रिंग कभी नै झुकेगी , वोह अमर है , न जाने कितनी सदियों से कितने लोग की आत्मा अपने अंदर समां चुकी है , जब उसे ख़तम hi नै किया जा सकता , तोह इक रवि के लिए अपने उस बेचारी सीमा को उस नाराज में बेहज दिया..." मलिका ने बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"में समज़ता हु तुम्हारे दर्द को , लेकिन अगर रवि मर जाता , तब उसके साथ कई और जिन्दगियां ख़तम हो जाती , उसकी सभी बहने , जिनमे रमा , शूरति , रिमी , उसकी प्रेमिका बेबी , ख़ुशी , उसकी बहिन सोनल , कविता , सब की सब , ें सब का इक मकसद है , देखना , इक दिन इनका पवितर प्रेम hi रवि को इस दुनिआ का राजा बना देगा..." काल ने थोड़ा खुश होते हुए बोलै ,

मलिका माया कुछ सोच कर फिर से बोली ...

निचे का नोट जरूर रीड करना...

तो बे कुनिटेड....

फ्रेंड्स बहुत मुश्किल से अपडेट टाइप किया है... यह रिंग के अंदर जाने का प्लाट पहले नै सोचा था.. अभ आपकी बरी है.. अचे अचे रिप्लाई देना.. तेन की में अग्गे अपडेट दे पाव... शुक्रिया सभी का.. डेली अपडेट देना मुश्किल होता है.. पर मेरी कोससिह रहती है.. अप्प लोगो को अभ ऐसा कोई दिन न हो जब अपडेट न मिले... अप्प सब मेरे साथ बने रहे.. आपके इक रिप्लाई से मुझे लिखने की ताकत मिलती है.. दोस्ती आखिर तक निभाना फ्रेंड्स.. अगर अप्प साथ देते रहे तोह में.. अगले 5 सालो तक लिखता रहुगा..

 
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