FunLove
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वे बेटी के कान में फुसफुसाए, “बेटी... तूने ठीक कहा है। जब मैं हर महीने नई-नई चूतों का मजा लेता हूँ... तब प्रभा भी क्यों न मस्ती मारे...उसका क्या कसूर और उसनका भी मन होता है नए-नए लंड से मजा लेना।”
सलोनी चुप रही, लेकिन उसके होंठों पर एक विजयी मुस्कान आ गई। उसने जानबूझकर अपना नितंब पीछे करके पिता के खड़े लंड पर रगड़ा।
यहाँ से आगे........................
पिताजी ने अपना मोटा लंड बेटी के गोल-गोल नितंबों के बीच की तिराद में धकेला और सुपारे को उसकी चूत की फाँक पर रगड़ते हुए कहा, “तेरी माँ को बोल देना कि अगर किसी से चुदना ही है तो ऐसे आदमी से चुदे जो हमारी बदनामी ना करे...मुझे बदनामी बिलकुल पसंद नहीं और नाही मेरी मर्दानगी पर कोई शक करना चाहिए। बाकी वह जिस से चुदवाना चाहती है चुदे, और नए लंड लेने के शोख पूरा करे।”
सलोनी ने बाएँ पैर को ऊपर उठाकर चूल्हे के किनारे पर रख दिया, अपनी चूत को पूरी तरह खोल दिया और कामुक आवाज में बोली, “ओह्ह्ह बाबूजी... इस माल की चूत अब हमेशा के लिए आपकी है। आपकी बेटी आज से आपकी personal चुदास बन गई है... अब आपको बाहर किसी रंडी के पीछे जाने की जरूरत नहीं। घर में ही आपकी जवान, टाइट और गीली रंडी तैयार खड़ी है... जब मन करे चोद लीजिए। और जिस से चुदवाना चाहे चुदवा दे। आपके कहने से मेरे ये तीनो छेद खुल जायेंगे, और वह भी बिना शर्त। लेकिन मैं चाहूंगी की मेरा भाव या फिर मेरी बोली भी लगे। दो पैसे मैं भी कमाना चाहूंगी। मुफ्त में माल बस सिर्फ आप ही चोदेंगे।”
सलोनी अभी भी खाना बना रही थी, लेकिन उसकी चूत अब पूरी तरह पसीने और वीर्य से भीगी हुई थी। फनलव लिखित रचना।
पिताजी ने बेटी की कमर को कसकर पकड़ लिया, अपनी टाँगें फैलाईं और एक जोरदार धक्का मारकर पूरा लंड पीछे से बेटी की चूत में ठेल दिया।
“आआह्ह्ह... ओह्ह रानी... बहुत टाइट चूत है तेरी...!” पिताजी ने कराहते हुए कहा।
“हाँ बाबूजी... फाड़ दो अपनी बेटी की चूत को...!” सलोनी चीखी।
पिताजी तेज-तेज धक्के मारने लगे। हर धक्के के साथ सलोनी के गोल नितंब लहरा रहे थे और उसके भारी स्तन नीचे लटककर हिल रहे थे।
सलोनी ने हाँफते हुए पूछा, “बाबूजी... मेरे जैसी रंडी को कितना देते हैं चुदाई का...? मेरे माल का क्या भाव हो सकता है रंडी बाजार में?”
पिताजी ने बेटी की कमर पकड़कर और जोर से चोदते हुए कहा, “बेटी, तेरी जैसी जवान, टाइट और कमसिन चूत बहुत मुश्किल से मिलती है... कम से कम 5000 तो लोग आसानी से दे देंगे... कुछ तो 8000-10,000 तक भी देने को तैयार हो जाएंगे। माल को बेचने की भी एक टेक्निक होती है बेटी। किसकी कितनी गरज है उस पर रंडी अपा भाव बोलती है। वैसे माल भी तो बढ़िया रखना पड़ता है। कुछ ग्राहक क्लीन माल को पसंद करते है और ज्यादा पैसे भी देते है।” रचयिता फनलव है।
सलोनी ने अपनी चूत को कसकर पिता के लंड पर दबाते हुए बोली, “जितना पैसा आपने बाहर रंडियों पर लुटाया है, उससे कहीं ज्यादा मुझे चुदवाकर वसूल कर लीजिए बाबूजी... अपनी बेटी को जितना मर्जी चुदवाइए और पैसा कमाइए...”
सलोनी ने अचानक पिता के लंड को चूत में ही रखते हुए अपना पैर नीचे किया, घूमकर पिता को बेडरूम की तरफ धकेलना शुरू कर दिया। बेडरूम पहुँचते ही उसने पिता को जोर से धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया और खुद ऊपर चढ़ गई।
उसने पिता का लंड अपनी चूत में फिर से घुसाया और जोर-जोर से कूल्हे हिलाकर चोदने लगी। लगभग 10 मिनट तक वह पिता को ऊपर बैठकर चुदाती रही। उसके बोबले हर दिशा में उछल-उछलकर पिताजी के चेहरे पर पड़ रहे थे।
फिर अचानक उसने लंड को चूत से बाहर निकाला और पिता के ऊपर 69 पोजीशन में लेट गई - बिल्कुल वैसी ही जैसी सुबह परम ने उसके साथ की थी और दोपहर में माँ प्रभा के साथ की थी।
अब सलोनी की भीगी, चुदाई हुई चूत सीधे पिता के मुँह पर थी। उसकी चूत की तेज़, गाढ़ी और कामुक गंध पिताजी के नथुनों में घुस रही थी।
सलोनी ने पिता के लंड को हाथ में पकड़ा, सहलाया और बोली, “बाबूजी... आप मेरी पहली शर्त भूल गए... हर बार चोदने से पहले और बाद में चूत चाटनी है...”
यह कहते हुए उसने पिता का लंड मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। उसने पहली बार पिता के लंड को गौर से देखा - परम के मुसल जैसे मोटे और लंबे लंड से यह छोटा था, सुपारा भी कम मोटा था। फिर भी वह उसे चूसती रही। वह थोड़ी निराश तो हुई। उसके मस्तिस्क में मुनीमजी का लंड की छाप उभर आई। मन ही मन मुस्कुराती हुई बोली,
“मुनीमजी आप हर जगह और हर वक़्त मेरे मन पर क्यों छाये रहते है?” फनलवर लिखित।
दूसरी तरफ पिताजी की जीभ अभी भी हिचकिचा रही थी। उन्होंने कभी अपनी पत्नी की चूत भी नहीं चाटी थी। लेकिन सलोनी ने अपनी चूत उनके मुँह पर जोर-जोर से रगड़नी शुरू कर दी।
आखिरकार पिताजी ने हार मान ली। उन्होंने बेटी की चूत के गुलाबी त्रिकोण को मुँह में ले लिया और चबाने लगे। गाढ़ा, नमकीन चुतरस उनकी जीभ पर फैल गया। पहले तो उन्हें अजीब लगा, लेकिन कुछ सेकंड बाद स्वाद और गंध उन्हें पसंद आने लगी।
वे जोर-जोर से चूत चाटने लगे - जीभ अंदर डालकर घुमाने लगे, क्लिटोरिस को चूसने लगे।
सलोनी मुंह में लंड लिए कराह रही थी, “हाँ बाबूजी... इसी तरह चाटो... अपनी बेटी की चूत को खाओ... आह्ह्ह...!”
पिताजी बेटी की चूत चाटते-चाटते मन ही मन फैसला कर चुके थे - आज रात वे अपनी पत्नी प्रभा की चूत भी इसी तरह चूसेंगे और खाएंगे। और प्रभा को भी मजबूर करेंगे कि वह सलोनी की तरह उनका लंड चाटे और चूसे।
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आज के लिए बस यही तक दोस्तों।
फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ और देखेंगे आगे आलोक और सलौनी प्रभा से क्या कर सकते है.....................
तब तक के लिए Funlover की ओर से जय भारत।।
358.
सलोनी चुप रही, लेकिन उसके होंठों पर एक विजयी मुस्कान आ गई। उसने जानबूझकर अपना नितंब पीछे करके पिता के खड़े लंड पर रगड़ा।
यहाँ से आगे........................
पिताजी ने अपना मोटा लंड बेटी के गोल-गोल नितंबों के बीच की तिराद में धकेला और सुपारे को उसकी चूत की फाँक पर रगड़ते हुए कहा, “तेरी माँ को बोल देना कि अगर किसी से चुदना ही है तो ऐसे आदमी से चुदे जो हमारी बदनामी ना करे...मुझे बदनामी बिलकुल पसंद नहीं और नाही मेरी मर्दानगी पर कोई शक करना चाहिए। बाकी वह जिस से चुदवाना चाहती है चुदे, और नए लंड लेने के शोख पूरा करे।”
सलोनी ने बाएँ पैर को ऊपर उठाकर चूल्हे के किनारे पर रख दिया, अपनी चूत को पूरी तरह खोल दिया और कामुक आवाज में बोली, “ओह्ह्ह बाबूजी... इस माल की चूत अब हमेशा के लिए आपकी है। आपकी बेटी आज से आपकी personal चुदास बन गई है... अब आपको बाहर किसी रंडी के पीछे जाने की जरूरत नहीं। घर में ही आपकी जवान, टाइट और गीली रंडी तैयार खड़ी है... जब मन करे चोद लीजिए। और जिस से चुदवाना चाहे चुदवा दे। आपके कहने से मेरे ये तीनो छेद खुल जायेंगे, और वह भी बिना शर्त। लेकिन मैं चाहूंगी की मेरा भाव या फिर मेरी बोली भी लगे। दो पैसे मैं भी कमाना चाहूंगी। मुफ्त में माल बस सिर्फ आप ही चोदेंगे।”
सलोनी अभी भी खाना बना रही थी, लेकिन उसकी चूत अब पूरी तरह पसीने और वीर्य से भीगी हुई थी। फनलव लिखित रचना।
पिताजी ने बेटी की कमर को कसकर पकड़ लिया, अपनी टाँगें फैलाईं और एक जोरदार धक्का मारकर पूरा लंड पीछे से बेटी की चूत में ठेल दिया।
“आआह्ह्ह... ओह्ह रानी... बहुत टाइट चूत है तेरी...!” पिताजी ने कराहते हुए कहा।
“हाँ बाबूजी... फाड़ दो अपनी बेटी की चूत को...!” सलोनी चीखी।
पिताजी तेज-तेज धक्के मारने लगे। हर धक्के के साथ सलोनी के गोल नितंब लहरा रहे थे और उसके भारी स्तन नीचे लटककर हिल रहे थे।
सलोनी ने हाँफते हुए पूछा, “बाबूजी... मेरे जैसी रंडी को कितना देते हैं चुदाई का...? मेरे माल का क्या भाव हो सकता है रंडी बाजार में?”
पिताजी ने बेटी की कमर पकड़कर और जोर से चोदते हुए कहा, “बेटी, तेरी जैसी जवान, टाइट और कमसिन चूत बहुत मुश्किल से मिलती है... कम से कम 5000 तो लोग आसानी से दे देंगे... कुछ तो 8000-10,000 तक भी देने को तैयार हो जाएंगे। माल को बेचने की भी एक टेक्निक होती है बेटी। किसकी कितनी गरज है उस पर रंडी अपा भाव बोलती है। वैसे माल भी तो बढ़िया रखना पड़ता है। कुछ ग्राहक क्लीन माल को पसंद करते है और ज्यादा पैसे भी देते है।” रचयिता फनलव है।
सलोनी ने अपनी चूत को कसकर पिता के लंड पर दबाते हुए बोली, “जितना पैसा आपने बाहर रंडियों पर लुटाया है, उससे कहीं ज्यादा मुझे चुदवाकर वसूल कर लीजिए बाबूजी... अपनी बेटी को जितना मर्जी चुदवाइए और पैसा कमाइए...”
सलोनी ने अचानक पिता के लंड को चूत में ही रखते हुए अपना पैर नीचे किया, घूमकर पिता को बेडरूम की तरफ धकेलना शुरू कर दिया। बेडरूम पहुँचते ही उसने पिता को जोर से धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया और खुद ऊपर चढ़ गई।
उसने पिता का लंड अपनी चूत में फिर से घुसाया और जोर-जोर से कूल्हे हिलाकर चोदने लगी। लगभग 10 मिनट तक वह पिता को ऊपर बैठकर चुदाती रही। उसके बोबले हर दिशा में उछल-उछलकर पिताजी के चेहरे पर पड़ रहे थे।
फिर अचानक उसने लंड को चूत से बाहर निकाला और पिता के ऊपर 69 पोजीशन में लेट गई - बिल्कुल वैसी ही जैसी सुबह परम ने उसके साथ की थी और दोपहर में माँ प्रभा के साथ की थी।
अब सलोनी की भीगी, चुदाई हुई चूत सीधे पिता के मुँह पर थी। उसकी चूत की तेज़, गाढ़ी और कामुक गंध पिताजी के नथुनों में घुस रही थी।
सलोनी ने पिता के लंड को हाथ में पकड़ा, सहलाया और बोली, “बाबूजी... आप मेरी पहली शर्त भूल गए... हर बार चोदने से पहले और बाद में चूत चाटनी है...”
यह कहते हुए उसने पिता का लंड मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। उसने पहली बार पिता के लंड को गौर से देखा - परम के मुसल जैसे मोटे और लंबे लंड से यह छोटा था, सुपारा भी कम मोटा था। फिर भी वह उसे चूसती रही। वह थोड़ी निराश तो हुई। उसके मस्तिस्क में मुनीमजी का लंड की छाप उभर आई। मन ही मन मुस्कुराती हुई बोली,
“मुनीमजी आप हर जगह और हर वक़्त मेरे मन पर क्यों छाये रहते है?” फनलवर लिखित।
दूसरी तरफ पिताजी की जीभ अभी भी हिचकिचा रही थी। उन्होंने कभी अपनी पत्नी की चूत भी नहीं चाटी थी। लेकिन सलोनी ने अपनी चूत उनके मुँह पर जोर-जोर से रगड़नी शुरू कर दी।
आखिरकार पिताजी ने हार मान ली। उन्होंने बेटी की चूत के गुलाबी त्रिकोण को मुँह में ले लिया और चबाने लगे। गाढ़ा, नमकीन चुतरस उनकी जीभ पर फैल गया। पहले तो उन्हें अजीब लगा, लेकिन कुछ सेकंड बाद स्वाद और गंध उन्हें पसंद आने लगी।
वे जोर-जोर से चूत चाटने लगे - जीभ अंदर डालकर घुमाने लगे, क्लिटोरिस को चूसने लगे।
सलोनी मुंह में लंड लिए कराह रही थी, “हाँ बाबूजी... इसी तरह चाटो... अपनी बेटी की चूत को खाओ... आह्ह्ह...!”
पिताजी बेटी की चूत चाटते-चाटते मन ही मन फैसला कर चुके थे - आज रात वे अपनी पत्नी प्रभा की चूत भी इसी तरह चूसेंगे और खाएंगे। और प्रभा को भी मजबूर करेंगे कि वह सलोनी की तरह उनका लंड चाटे और चूसे।
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आज के लिए बस यही तक दोस्तों।
फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ और देखेंगे आगे आलोक और सलौनी प्रभा से क्या कर सकते है.....................
तब तक के लिए Funlover की ओर से जय भारत।।
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