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घर पर सलोनी की चुदाई का आखिरी भाग
पिता का चेहरा पछतावे से भरा हुआ था। उन्होंने गहरी साँस ली और बोले, “बेटी... मैं संभल नहीं सका। मैंने सबसे बड़ा पाप कर दिया। एक बाप होकर अपनी जवान बेटी की चूत में लंड डाल दिया। मुझे माफ कर दो सलोनी।” फनलवर की पेशकश।
वे भावुक हो गए और फिर से बोले, “किसी को भी यह कभी पता नहीं चलना चाहिए कि हमने चुदाई की है।”
यह कहते हुए उन्होंने अपना हाथ सलोनी की चूत से दूर खींच लिया।
सलोनी ने तुरंत पिता का हाथ पकड़कर फिर से अपनी गीली, वीर्य से भरी चूत पर रख दिया। उसकी उँगलियाँ पिता की उँगलियों में फँस गईं।
“बाबूजी... मैंने कहा था ना कि आप मुझसे प्यार नहीं करते...” सलोनी ने उदासी भरी आवाज में कहा, “मेरी कुंवारी चूत भी आपको पसंद नहीं आई... क्योंकि मैं रंडी नहीं हूँ ना... मुझे क्या मालूम कि रंडियाँ कैसे चुदवाती हैं।”
“नहीं बेटी... नहीं...” पिताजी ने तुरंत बेटी को सीने से लगाते हुए उसके गाल, होंठ और गर्दन चूम ली। “तू मुन्ना की कसम ले ले... आज तक ऐसी बढ़िया, कसकती, गीली और कमसिन चूत मैंने नहीं चोदी। मेरा लंड धन्य हो गया तेरी इस प्यारी, टाइट चूत का मजा लेकर... लेकिन...”
“लेकिन क्या...?” सलोनी ने पिता के ढीले पड़ रहे लंड को मुट्ठी में पकड़कर जोर से दबाया और मुठ मारने लगी।
“यही कि... बाप को बेटी की चूत देखना भी नहीं चाहिए... और मैंने तो पूरा लौड़ा पेल दिया। मैं बहुत बड़ा पापी हो गया बेटी। अब तक लोग मुझे ‘बेटी चोद’ कहकर गालियाँ देते थे... लेकिन आज तो मैं सचमुच का बेटी चोद बन गया हूँ।”
सलोनी ने पिता के लंड को और जोर से सहलाते हुए कहा, “बाबूजी, आपने कितना बढ़िया काम किया है, आपको मालूम भी नहीं! आपने मुझे नया जन्म दिया है। मुझे तो ये लौड़ा रोज-रोज चाहिए... इस मेरी चूत में... मुझे एक अच्छा माल बनाना है।”
वह पिता की गोद में बैठकर उनकी छाती से सट गई और लंड पर मुठ मारती रही। रचयिता फनलवर है।
“आप अगर जबरदस्ती से चोदते तो पाप होता... लेकिन आपने तो कितना प्यार से, कितनी देर तक मुझे चोदा... बहुत मजा आया मुझे... मेरी चूत अभी भी काँप रही है।”
पिताजी की आँखों में फिर से चमक आ गई। उन्होंने बेटी के स्तन दबाते हुए पूछा, “फिर... चोदने दोगी...?”
सलोनी ने पिता के लंड को नीचे झुकाकर उसका चुम्बन लिया और बोली, “बाबूजी, ये भी आपका माल है... वो भी बिना पैसे के। आपको जब मन करे चोदिए... लंड चुसवाइए... माँ के सामने भी... मुझे ये लंड बहुत पसंद आया है।”
फिर उसने कुछ शर्तें रखीं, “जब बोलिएगा, चूत खोल दूँगी... लेकिन पहले आपको मेरी कुछ शर्तें माननी पड़ेंगी...”
पापा ने अभी-अभी चुदाई हुई बेटी की चूत में दो उँगलियाँ डाल दीं और अंदर घुमाने लगे।
“बोल बेटी... तेरी इस प्यारी, रसभरी चूत के लिए मैं सब शर्तें मान लूँगा...”
उन्होंने उँगलियाँ और गहरी डाल दीं।
सलोनी ने कूल्हे उचकाते हुए पहली शर्त रखी, “हर बार चोदने के पहले और बाद में आप मेरी चूत चाटेंगे... अच्छे से चूसेंगे... कुत्ते की तरह।”
पिताजी ने उँगलियाँ अंदर-बाहर करते हुए और बेटी की चूची दबाते हुए कहा, “बेटी, इससे बढ़िया शर्त हो ही नहीं सकती। आज तक ना तेरी माँ की चूत को कभी चूसा, ना किसी रंडी की... लेकिन आज से तेरी चूत को कुत्ते जैसा चाटूँगा... पूरा मुंह लगा दूँगा।”
सलोनी ने दूसरी शर्त रखी, “मैं दूसरे आदमी से चुदूँगी तो आप मना नहीं करेंगे...”
पिताजी ने बेटी की चूत में तीसरी उँगली डालते हुए कहा, “मेरे सामने भी कोई चोदेगा तो मैं मना नहीं करूँगा। तेरी जवानी को लुटते हुए देखकर मैं मजा लूँगा। और ये जायज भी है बेटी। तू अपनी मन की रानी है। किसी से भी चुदवा... मेरे सामने भी चुदवा सकती है। बस मुझे तेरी चूत चोदने और चाटने को मिलता रहे, इससे ज्यादा और क्या चाहिए!” फनलवर की प्रस्तुति।
सलोनी मुस्कुराई। उसने पिता के लंड को फिर से कसकर पकड़ा और बोली, “तो अब से ये चूत आपकी है बाबूजी... जब मन करे चोदिए, चाटिए, भर दीजिए...”
पिताजी ने बेटी को जोर से चूम लिया। उनकी उँगलियाँ अभी भी सलोनी की चूत में घूम रही थीं।
सलोनी की चूत फिर से गीली होने लगी थी। पिता का लंड भी धीरे-धीरे फिर से खड़ा हो रहा था।
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बाकी बाद में दोस्तों।
जय भारत।।
पिता का चेहरा पछतावे से भरा हुआ था। उन्होंने गहरी साँस ली और बोले, “बेटी... मैं संभल नहीं सका। मैंने सबसे बड़ा पाप कर दिया। एक बाप होकर अपनी जवान बेटी की चूत में लंड डाल दिया। मुझे माफ कर दो सलोनी।” फनलवर की पेशकश।
वे भावुक हो गए और फिर से बोले, “किसी को भी यह कभी पता नहीं चलना चाहिए कि हमने चुदाई की है।”
यह कहते हुए उन्होंने अपना हाथ सलोनी की चूत से दूर खींच लिया।
सलोनी ने तुरंत पिता का हाथ पकड़कर फिर से अपनी गीली, वीर्य से भरी चूत पर रख दिया। उसकी उँगलियाँ पिता की उँगलियों में फँस गईं।
“बाबूजी... मैंने कहा था ना कि आप मुझसे प्यार नहीं करते...” सलोनी ने उदासी भरी आवाज में कहा, “मेरी कुंवारी चूत भी आपको पसंद नहीं आई... क्योंकि मैं रंडी नहीं हूँ ना... मुझे क्या मालूम कि रंडियाँ कैसे चुदवाती हैं।”
“नहीं बेटी... नहीं...” पिताजी ने तुरंत बेटी को सीने से लगाते हुए उसके गाल, होंठ और गर्दन चूम ली। “तू मुन्ना की कसम ले ले... आज तक ऐसी बढ़िया, कसकती, गीली और कमसिन चूत मैंने नहीं चोदी। मेरा लंड धन्य हो गया तेरी इस प्यारी, टाइट चूत का मजा लेकर... लेकिन...”
“लेकिन क्या...?” सलोनी ने पिता के ढीले पड़ रहे लंड को मुट्ठी में पकड़कर जोर से दबाया और मुठ मारने लगी।
“यही कि... बाप को बेटी की चूत देखना भी नहीं चाहिए... और मैंने तो पूरा लौड़ा पेल दिया। मैं बहुत बड़ा पापी हो गया बेटी। अब तक लोग मुझे ‘बेटी चोद’ कहकर गालियाँ देते थे... लेकिन आज तो मैं सचमुच का बेटी चोद बन गया हूँ।”
सलोनी ने पिता के लंड को और जोर से सहलाते हुए कहा, “बाबूजी, आपने कितना बढ़िया काम किया है, आपको मालूम भी नहीं! आपने मुझे नया जन्म दिया है। मुझे तो ये लौड़ा रोज-रोज चाहिए... इस मेरी चूत में... मुझे एक अच्छा माल बनाना है।”
वह पिता की गोद में बैठकर उनकी छाती से सट गई और लंड पर मुठ मारती रही। रचयिता फनलवर है।
“आप अगर जबरदस्ती से चोदते तो पाप होता... लेकिन आपने तो कितना प्यार से, कितनी देर तक मुझे चोदा... बहुत मजा आया मुझे... मेरी चूत अभी भी काँप रही है।”
पिताजी की आँखों में फिर से चमक आ गई। उन्होंने बेटी के स्तन दबाते हुए पूछा, “फिर... चोदने दोगी...?”
सलोनी ने पिता के लंड को नीचे झुकाकर उसका चुम्बन लिया और बोली, “बाबूजी, ये भी आपका माल है... वो भी बिना पैसे के। आपको जब मन करे चोदिए... लंड चुसवाइए... माँ के सामने भी... मुझे ये लंड बहुत पसंद आया है।”
फिर उसने कुछ शर्तें रखीं, “जब बोलिएगा, चूत खोल दूँगी... लेकिन पहले आपको मेरी कुछ शर्तें माननी पड़ेंगी...”
पापा ने अभी-अभी चुदाई हुई बेटी की चूत में दो उँगलियाँ डाल दीं और अंदर घुमाने लगे।
“बोल बेटी... तेरी इस प्यारी, रसभरी चूत के लिए मैं सब शर्तें मान लूँगा...”
उन्होंने उँगलियाँ और गहरी डाल दीं।
सलोनी ने कूल्हे उचकाते हुए पहली शर्त रखी, “हर बार चोदने के पहले और बाद में आप मेरी चूत चाटेंगे... अच्छे से चूसेंगे... कुत्ते की तरह।”
पिताजी ने उँगलियाँ अंदर-बाहर करते हुए और बेटी की चूची दबाते हुए कहा, “बेटी, इससे बढ़िया शर्त हो ही नहीं सकती। आज तक ना तेरी माँ की चूत को कभी चूसा, ना किसी रंडी की... लेकिन आज से तेरी चूत को कुत्ते जैसा चाटूँगा... पूरा मुंह लगा दूँगा।”
सलोनी ने दूसरी शर्त रखी, “मैं दूसरे आदमी से चुदूँगी तो आप मना नहीं करेंगे...”
पिताजी ने बेटी की चूत में तीसरी उँगली डालते हुए कहा, “मेरे सामने भी कोई चोदेगा तो मैं मना नहीं करूँगा। तेरी जवानी को लुटते हुए देखकर मैं मजा लूँगा। और ये जायज भी है बेटी। तू अपनी मन की रानी है। किसी से भी चुदवा... मेरे सामने भी चुदवा सकती है। बस मुझे तेरी चूत चोदने और चाटने को मिलता रहे, इससे ज्यादा और क्या चाहिए!” फनलवर की प्रस्तुति।
सलोनी मुस्कुराई। उसने पिता के लंड को फिर से कसकर पकड़ा और बोली, “तो अब से ये चूत आपकी है बाबूजी... जब मन करे चोदिए, चाटिए, भर दीजिए...”
पिताजी ने बेटी को जोर से चूम लिया। उनकी उँगलियाँ अभी भी सलोनी की चूत में घूम रही थीं।
सलोनी की चूत फिर से गीली होने लगी थी। पिता का लंड भी धीरे-धीरे फिर से खड़ा हो रहा था।
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बाकी बाद में दोस्तों।
जय भारत।।