रवीना टंडन रिवर्स काउगर्ल पोजीशन 
रवीना पूरी तरह नंगी थी। उसके भरे-भरे गोरे स्तन भारी-भारी ऊपर-नीचे लहरा रहे थे, गुलाबी निप्पल सख्त होकर खड़े थे। उसकी चिकनी, गुलाबी चूत पहले से ही रस से तर थी – दोनों होंठ थोड़े-थोड़े फूले हुए, क्लिटोरिस छोटा-सा मोती की तरह उभरा हुआ चमक रहा था। लंबे बाल खुले हुए पीठ पर लहरा रहे थे।
अनिल बेड पर पीठ के बल लेटा हुआ था। उसका मोटा, ८ इंच का लंड पूरी तरह खड़ा था – नसें फूली हुईं, सिर चमकदार और गर्म, हल्का-हल्का पल्सेट कर रहा था।
रवीना ने सेक्सी मुस्कान के साथ अनिल के ऊपर चढ़ गई। वो पीठ अनिल की तरफ़ करके बैठी – रिवर्स काउगर्ल पोजीशन। उसकी गोल, गोरी, भरी हुई गांड अनिल के चेहरे की तरफ़ थी। रवीना ने एक हाथ पीछे ले जाकर अनिल के मोटे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ा। उसकी उँगलियाँ लंड की गर्मी और कड़क महसूस कर रही थीं। उसने लंड का सिर अपनी चूत के मुहाने पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी।
“आह्ह्ह... अनिल... तुम्हारा मोटा लंड... मेरी चूत के होंठों को अलग कर रहा है...”
लंड का गर्म, मोटा सिर पहले उसके नरम, गीले चूत के ऊपरी होंठ को दबाया, फिर धीरे-धीरे दोनों होंठों को फैलाते हुए अंदर घुसने लगा। रवीना की चूत ने लंड को कसकर निचोड़ लिया। हर इंच अंदर जाते ही रवीना की कमर काँप उठी। “उम्म्म्म... कितना मोटा... कितना गहरा... मेरी चूत पूरी तरह भर गई है... आह्ह्ह... पूरा अंदर चला गया...”
जब पूरा लंड रवीना की चूत में समा गया, उसकी गांड अनिल की जाँघों से सट गई। रवीना ने एक पल रुककर महसूस किया – लंड की गर्मी, उसकी नसें, उसकी कड़क... सब कुछ अंदर तक महसूस हो रहा था। फिर रवीना ने कमर हिलानी शुरू की।
पहले बहुत धीरे-धीरे ऊपर-नीचे... लंड का पूरा सिर बाहर निकलता, फिर पूरी ताकत से अंदर चला जाता। “चट... चट...” की हल्की आवाज़ शुरू हुई। फिर रवीना ने गोल-गोल घुमाते हुए कमर चलानी शुरू की। उसकी गोल गांड अनिल की जाँघों पर घूम रही थी, लंड को अंदर हर कोण से रगड़ रही थी।
अब रवीना तेज़ हो गई। वो पूरी ताकत से उछलने लगी। गांड ऊपर उठती, फिर जोर से नीचे पटकती। “चट... चट... चट... चट...” की तेज़, लगातार थपकी की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। रवीना की चूत लंड को हर बार निचोड़ रही थी, सफेद रस लंड पर चमक रहा था और जाँघों पर बह रहा था।
रवीना ने दोनों हाथों से अपने भरे स्तन पकड़ लिए, उन्हें जोर-जोर से मसलते हुए तेज़ी से उछलने लगी। “अनिल... देखो... मैं तुम्हारे लिए कितना उछल रही हूँ... तुम्हारा मोटा लंड मेरी चूत को फाड़ रहा है... लेकिन मैं तुम्हें खुश करना चाहती हूँ... जितना मज़ा चाहिए उतना दूँगी...”
उसकी गांड ऊपर-नीचे तेज़ गति से हिल रही थी। हर बार लंड गहराई तक जा रहा था, क्लिटोरिस लंड की जड़ से रगड़ खा रहा था। रवीना पीछे मुड़कर अनिल को देखती, मुस्कुराती और फुसफुसाती, “मेरा लंड... तुम्हारा है... मैं तुम्हारी Sunny हूँ... तुम्हें हर तरीके से संभालूँगी...”
अब रवीना और तेज़ हो गई। वो पूरी ताकत से उछल रही थी, गांड अनिल के लंड पर पटक रही थी। उसके स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे, पसीना उसके गोरे शरीर पर चमक रहा था। “आह्ह्ह... हाँ... और जोर से... मेरी चूत तुम्हारे लंड को चूस रही है... मैं लंड की भूखी हूँ... लेकिन तुम्हें प्यार भी करती हूँ...”
अनिल ने नीचे से दोनों हाथों से रवीना की गांड को मजबूती से पकड़ लिया और जोर-जोर से ऊपर धक्के देने शुरू कर दिए। रवीना चीख पड़ी, “हाय... इतना गहरा... फाड़ दो मेरी चूत... मैं तुम्हारी हूँ...”
रिवर्स काउगर्ल में रवीना पूरी तरह कंट्रोल में थी – कभी धीमी गति से लंड को चूसती, कभी तेज़ी से उछलती। उसकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। साँसें बहुत तेज़ थीं, होंठ काँप रहे थे।
आखिर में रवीना ने तेज़ी से उछलना शुरू किया। “अनिल... मैं आ रही हूँ... तुम्हारा लंड मेरी चूत में... आह्ह्ह... हाँ... हाँ...” उसकी चूत जोर से सिकुड़ी, गर्म रस लंड पर बह गया। लेकिन रवीना रुकी नहीं। वो अभी भी उछल रही थी, अनिल को पूरा मज़ा दे रही थी। “अब तुम्हारा वीर्य... मेरी चूत में भर दो... मैं ले लूँगी... सब ले लूँगी...”